क्या लंकाई खिलाड़ी से आगे निकल पाएंगे नीरज? कल फिर फेंकेंग भाला

Neeraj Chopra

भाला फेंक के दिग्गज खिलाड़ी नीरज चोपड़ा और श्रीलंका के उभरते सितारे रमेश पथिरागे शुक्रवार को लुसाने डायमंड लीग में फिर से आमने सामने होंगे, जिसमें भारतीय खिलाड़ी डायमंड लीग फाइनल में जगह बनाने की कोशिश करेगा।ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में पथिरागे ने स्वर्ण और चोपड़ा ने रजत पदक जीता था। इसके तीन सप्ताह बाद ये दोनों खिलाड़ी फिर से एक-दूसरे के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करेंगे।

23 वर्षीय पथिरागे इस सत्र में अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में हैं। उन्होंने दोहा और रोम डायमंड लीग में जीत हासिल करने के अलावा ग्लास्गो में 89.75 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक भी जीता है। जून में रोम में 92.62 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ उन्होंने 90 मीटर का प्रतिष्ठित आंकड़ा भी पार किया।

श्रीलंकाई खिलाड़ी ने इस सत्र में अब तक जिन नौ प्रतियोगिताओं में भाग लिया है, उनमें से आठ में जीत हासिल की है। वह पहले ही डायमंड लीग फाइनल में अपनी जगह पक्की कर चुके हैं। दूसरी तरफ चोपड़ा पिछले साल सितंबर से पीठ के निचले हिस्से की चोट से परेशान रहे हैं।

इसके कारण उनकी वापसी दोहा में आयोजित डायमंड लीग तक टल गई थी। ग्लास्गो में वह पूरी तरह से फिट नहीं थे, लेकिन फिर भी 85.83 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ रजत पदक जीतने में सफल रहे।राष्ट्रमंडल खेलों के बाद चोपड़ा स्विट्जरलैंड के बील चले गए थे, जहां वह अपने बचपन के कोच जयवीर चौधरी और फिजियो ईशान मारवाह के साथ अभ्यास कर रहे थे।

मौजूदा विश्व चैंपियन अरशद नदीम और जर्मनी के यूरोपीय चैंपियन जूलियन वेबर के हटने से लुसाने डायमंड लीग की चमक कुछ फीकी पड़ गई है।त्रिनिदाद और टोबैगो के मौजूदा विश्व चैंपियन केशोर्न वालकॉट और ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स की मौजूदगी के कारण अब भी मुकाबला कड़ा है।

अमेरिका के विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता कर्टिस थॉम्पसन और चेक गणराज्य के ओलंपिक रजत पदक विजेता जैकब वाडलेज भी इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले नौ खिलाड़ियों में शामिल हैं।

चोपड़ा के लिए सत्र के आखिर में होने वाले डायमंड लीग फाइनल की रैंकिंग में ऊपर पहुंचने के लिए लुसाने में होने वाली प्रतियोगिता महत्वपूर्ण है। वह फिलहाल छह अंकों के साथ सातवें स्थान पर हैं।रैंकिंग में शीर्ष छह खिलाड़ी चार और पांच सितंबर को ब्रुसेल्स में होने वाले डायमंड लीग फाइनल में भाग लेंगे।

BWF World Championship में भारत की बेटियों ने किया बड़ा उलटफेर, 7वीं रैंक की जोड़ी को हराया

Treesa Jolly Gayatri Gopichand

त्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद की भारतीय महिला युगल जोड़ी ने बृहस्पतिवार को जापान की सातवीं वरीयता प्राप्त रिन इवानागा और की नाकानिशी को सीधे गेम में हराकर विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।भारत की गैर वरीयता प्राप्त जोड़ी ने एकतरफा मुकाबले में रिन और नाकानिशी की विश्व में सातवें नंबर की जोड़ी को 21-16 21-12 से हराया।

हाल में अर्जुन पुरस्कार पाने वाली त्रीसा और गायत्री ने शुरू से अच्छा प्रदर्शन किया और अपनी प्रतिद्वंद्वी टीम को कोई मौका नहीं दिया। यह भारतीय जोड़ी 2022 और 2023 में लगातार दो वर्ष ऑल इंग्लैंड ओपन के सेमीफाइनल में पहुंची थीं।इस साल की शुरुआत में त्रीसा के टखने में चोट लगने के कारण यह जोड़ी कुछ टूर्नामेंट में नहीं खेल पाई थी। उन्होंने इंडोनेशिया ओपन में वापसी की और इस महीने की शुरुआत में फिलीपीन इंटरनेशनल चैलेंज जीता।

श्रीलंका के प्रदर्शन से खुश नहीं कोच, दूसरे टेस्ट से पहले दिया यह बयान

श्रीलंका क्रिकेट टीम के नए कोच गैरी कर्स्टन ने पहले टेस्ट की हार के बाद टीम को समझाइश दी है और दूसरे टेस्ट से पहले बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद लगाई है। कोच ने कहा है कि टीम के साथ चोटिल खिलाड़ियों के अलावा कई समस्याएं है लेकिन उनको दरकिनार कर दूसरे टेस्ट में बेहतर प्रदर्शन करने पर टीम का ध्यान होना चाहिए खासतौर पर बल्लेबाजी में।

कर्स्टन ने मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘‘मैं श्रीलंकाई क्रिकेट से जुड़कर विशेष रूप से उत्साहित हूं। यहां कुछ शानदार खिलाड़ी हैं, लेकिन टीम को अभी विकसित होने की जरूरत है। जब आप ज्यादा टेस्ट क्रिकेट नहीं खेलते हैं तो यह समझना कभी-कभी मुश्किल होता है कि टेस्ट मैच किस तरह खेलना है।’’उन्होंने कहा, ‘‘कुछ महीनों में यह हमारा तीसरा टेस्ट मैच है और मैं पहले से ही टीम को विकसित होते देख रहा हूं तथा हम टीम को एक स्वरूप देने की शुरुआत कर रहे हैं।’’

कोच ने कहा, ‘‘लेकिन किसी समय हमें इसे प्रदर्शन में बदलने में सक्षम होना होगा।’’कर्स्टन इस बात से भी खुश थे कि पहली पारी में 99 रन पर पांच विकेट गंवाने के बावजूद श्रीलंका ने संघर्ष किया और मैच को पांचवें और अंतिम दिन तक खींचा।उन्होंने कहा, ‘‘तीसरे दिन की शुरुआत में 99 रन पर पांच विकेट गंवाने के बाद टेस्ट मैच को पांचवें दिन दोपहर तक ले जाना विशेष रूप से सुखद था। टीम ने संघर्ष किया और टेस्ट मैच में बने रहने की पूरी कोशिश की।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ सुबह तक भी हमें विश्वास था कि हम या तो टेस्ट मैच जीत सकते हैं या कम से कम उसे ड्रॉ करा सकते हैं। इसलिए टीम की ऊर्जा और रवैये से मैं वास्तव में खुश था।’’

हालांकि कर्स्टन ने माना कि बल्लेबाजी, विशेषकर शीर्ष क्रम की विफलता ने श्रीलंका को नुकसान पहुंचाया।उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन अगर आप पूरे टेस्ट मैच को देखें तो हमने बल्ले से संघर्ष किया, खासकर दोनों पारियों में हमारे शीर्ष क्रम ने। शायद यही हमारी हार का कारण बना।’’

कर्स्टन ने युवा बल्लेबाज सोनल दिनुषा की भी तारीफ की गॉल टेस्ट में 100 और 84 रन की पारियां खेलीं।हालांकि चोटिल खिलाड़ियों को लेकर कर्स्टन का अपडेट मेजबान टीम के लिए दूसरे टेस्ट से पहले उत्साहजनक नहीं रहा।

उन्होंने कहा, ‘‘कुसाल मेंडिस को पैर की मांसपेशियों में खिंचाव की गंभीर चोट है। वह कुछ समय तक उपलब्ध नहीं रहेंगे। पाथुम निसांका भी और दिनेश (चांदीमल) भी अगले टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘इस लिहाज से हम कुछ खिलाड़ियों को नहीं खिला पाएंगे, लेकिन इससे युवा खिलाड़ियों के लिए टीम में आने और अपनी दावेदारी पेश करने का शानदार मौका भी बनता है। वास्तव में इनमें ऐसे खिलाड़ी हैं जिनका इस देश में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में बहुत अच्छा रिकॉर्ड है। इसलिए यह उनके लिए अच्छा अवसर है।’’

भारत के पूर्व मुख्य कोच कर्स्टन ने भारतीय बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल की भी तारीफ की और कहा कि उनकी पारी ने भारत को बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई।उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि भारत ने पहली पारी में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। देवदत्त पडिक्कल ने मेरी देखी हुई बेहतर टेस्ट पारियों में से एक खेली। उन्होंने जरूरत से ज्यादा आक्रामकता नहीं दिखाई, बल्कि अपनी क्षमता के अनुसार बल्लेबाजी की और लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहे। यह किसी भी टेस्ट बल्लेबाज के लिए एक अच्छी सीख थी।’’

पीवी सिंधु और आयुष शेट्टी जीते लेकिन यह स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी हुआ बाहर

इंदिरा गांधी स्टेडियम में बुधवार को बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 के तीसरे दिन, मेज़बान खिलाड़ियों के लिए मिले-जुले नतीजे रहे। पूर्व चैंपियन पीवी सिंधु और बड़े खिलाड़ियों को हराने वाले आयुष शेट्टी ने अपने दूसरे राउंड के प्रतिद्वंद्वियों को आसानी से हरा दिया।

नौवीं वरीयता प्राप्त सिंधु ने महिला सिंगल्स के दूसरे राउंड में कनाडा की झांग वेन यू को 21-16, 21-17 से हराया, जबकि आयुष ने श्रीलंका के डुमिंडु अबेविक्रमा को 21-8, 21-10 से हराने में सिर्फ़ 26 मिनट लिए और पुरुष सिंगल्स के प्री-क्वार्टर फ़ाइनल में जगह बनाई।

राउंड ऑफ़ 16 में, सिंधु का मुक़ाबला चीन की तीसरी वरीयता प्राप्त वांग ज़ी यी से होगा, जिन्होंने दिन की शुरुआत में मलेशिया की कारुओथेवन लेतशाना को 21-16, 21-9 से हराया था। आयुष का प्री-क्वार्टर फ़ाइनल मुक़ाबला इंडोनेशिया के 11वीं वरीयता प्राप्त अल्वी फरहान से होगा। 2023 के वर्ल्ड जूनियर चैंपियन ने फ़िनलैंड के जोआकिम ओल्डोर्फ़ के ख़िलाफ़ अपना दूसरे राउंड का मैच 21-12, 21-9 से आसानी से जीत लिया।

PV Sindhu

वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो बार ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने वाले सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी भी बिना कोर्ट पर उतरे ही राउंड ऑफ़ 16 में पहुँच गए, क्योंकि अलेक्जेंडर डन की चोट के कारण उनके स्कॉटिश प्रतिद्वंद्वियों ने उन्हें वॉकओवर दे दिया।

जहाँ सिंधु और आयुष को अपने दूसरे राउंड के मुक़ाबलों में कोई परेशानी नहीं हुई, वहीं लक्ष्य और उन्नति को निराशा हाथ लगी। 14वीं सीड वाले लक्ष्य को अमेरिका के 18 साल के गैरेट टैन ने एक घंटे 13 मिनट तक चले कड़े मुकाबले में 19-21, 21-19, 21-17 से हराया। वहीं, उन्नति कनाडा की 13वीं सीड मिशेल ली के खिलाफ दो मैच पॉइंट का फायदा नहीं उठा सकीं और अपने वर्ल्ड चैंपियनशिप डेब्यू में 11-21, 21-9, 23-21 से हार गईं।

लक्ष्य ने टैन के खिलाफ पहला गेम तो जीत लिया, लेकिन अमेरिकी खिलाड़ी ने अपने ज़बरदस्त स्मैश से घरेलू खिलाड़ी को कड़ी टक्कर दी। लक्ष्य ने दूसरे गेम में वापसी करते हुए चार गेम पॉइंट बचाए, लेकिन मैच को निर्णायक गेम (डिसाइडर) में जाने से नहीं रोक सके। तीसरे और आखिरी गेम में भी लक्ष्य 4-11 से पीछे थे, लेकिन उन्होंने वापसी करते हुए स्कोर 16-17 तक पहुँचाया; हालाँकि, कुछ गलतियों और आक्रामक खेल दिखा रहे टैन ने उनकी वापसी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

इससे पहले, उन्नति उलटफेर करने के करीब पहुँच गई थीं क्योंकि उन्होंने ली के खिलाफ दो मैच पॉइंट हासिल कर लिए थे। लेकिन दोनों ही मौकों पर उनके शॉट साइड में बाहर चले गए और ली ने मौके का फायदा उठाते हुए ‘डाउन-द-लाइन’ स्मैश के साथ मैच जीत लिया।

हार के बाद श्रीलंका के लिए एक और बुरी खबर, 3 सीनियर खिलाड़ी अभी भी चोटिल

भारत के खिलाफ कोलंबो होने वाले दूसरे टेस्ट मैच से कुसल मेंडिस और दिनेश चांदीमल बाहर हो गए हैं। रविवार से शुरू होने वाले इस मैच के लिए पथुम निसंका के भी समय पर फिट होने की उम्मीद कम है। लंका प्रीमियर लीग (एलपीएल) के शुरुआती दौर में हैमस्ट्रिंग की चोट लगने के बाद से मेंडिस ने कोई भी प्रतिस्पर्धी क्रिकेट नहीं खेला है। टेस्ट टीम में उनकी जगह निरोशन डिकवेला को शामिल किया गया था, और पहली पारी में 80 रन बनाने के बाद, डिकवेला के अपनी जगह बनाए रखने की संभावना है।

वहीं, चांदीमल दूसरे टेस्ट से अपने आप बाहर हो गए हैं क्योंकि आईसीसी के नियमों के अनुसार, सिर में चोट के कारण सब्स्टीट्यूट किए गए खिलाड़ी सात दिनों तक नहीं खेल सकते। गॉल में चौथे दिन उनके बाहर होने से पसिनदु सूरियाबंदारा के डेब्यू का रास्ता साफ हुआ। सूरियाबंदारा अपनी पहली टेस्ट पारी में बिना खाता खोले आउट हो गए थे, लेकिन फिर भी प्लेइंग इलेवन में अपनी जगह बनाए रख सकते हैं। वहीं, निसांका जून में हुई अपनी कलाई की सर्जरी से उबरने के लिए अभी भी संघर्ष कर रहे हैं। माना जा रहा है कि वह मेंडिस की तुलना में मैच के लिए फिट होने के ज़्यादा करीब हैं, लेकिन बल्लेबाजी करते समय उन्हें अभी भी परेशानी हो रही है।

श्रीलंका के कोच गैरी कर्स्टन ने कहा, “कुसल मेंडिस को हैमस्ट्रिंग की गंभीर चोट लगी है और वह कुछ समय तक उपलब्ध नहीं रहेंगे। दिनेश भी अगले टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इस नज़रिए से हमारे कुछ खिलाड़ी टीम में नहीं हैं, लेकिन इससे युवा खिलाड़ियों के लिए आगे आने और अपनी जगह पक्की करने का अच्छा मौका बनता है। ऐसे खिलाड़ी हैं जिनका इस देश में फर्स्ट-क्लास रिकॉर्ड बहुत अच्छा रहा है। यह उनके लिए एक अच्छा मौका है।” श्रीलंका ने अभी तक दूसरे टेस्ट के लिए टीम की घोषणा नहीं की है। एसएलसी ने इस सीरीज़ से पहले जो टीम घोषित की थी, वह केवल पहले टेस्ट के लिए थी।

पहले शतक से मिला पहला मैन ऑफ द मैच, क्या बोले देवदत्त पड्डीकल

Devdutt Padikkal

भारत की पहली पारी में 167 रन बनाने वाले और दूसरी पारी में 44 रनों की पारी खेलने वाले देवदत्त पड्डीकल को गॉल टेस्ट में मैन ऑफ द मैच का पुरुस्कार मिला। बॉर्डर गावस्कर टेस्ट सीरीज 2024 में टेस्ट डेब्यू करने वाले देवदत्त लंबे समय से टीम से बाहर थे और उनको सांई सुदर्शन की चोट के कारण मौका मिला था जो उन्होंने भुना लिया। देवदत्त का यह पहला टेस्ट शतक था जो उन्हें  मैन ऑफ द मैच का पुरुस्कार दे गया।

देवदत्त पडिक्कल ने कहा कि उन्होंने इस ख़ास पल का सपना देखा था।पडिक्कल ने कहा, ” मैंने इस पल का सपना देखा है। पिछले दो सालों से, मैं सच में बहुत मेहनत कर रहा हूँ ताकि जब मुझे वह मौका मिले, तो मैं ऐसा कुछ खास कर सकूँ, और मुझे ऐसा करके बहुत खुशी होती है।”

शुरुआत में स्पिन के खिलाफ उनके आक्रामक इरादे और निर्णायक फुटवर्क के बारे में पूछे जाने पर पडिक्कल ने कहा,”हाँ, मुझे लगता है कि हमने इस पर लंबी चर्चा की है, खासकर जब आप स्पिन खेल रहे हों, तो यह ज़रूरी है कि आपके दिमाग में कुछ प्लान हों। आप वहाँ जाकर हर समय रिएक्ट करने की उम्मीद नहीं कर सकते। यह ज़रूरी है कि आपके दिमाग में कुछ शॉट हों जिन्हें आप मैदान में उतरते ही खेलना चाहते हैं, ताकि आप बॉलर पर भी कुछ प्रेशर डाल सकें। तो, मुझे लगता है कि पिछले एक साल में, हमने अपनी ताकत में ऐसे तरीके खोजने की कोशिश की है जिन्हें आप सच में लागू कर सकें ताकि आप प्रेशर वापस डाल सकें।”

पडिक्कल ने साथ ही कहा, ”हाँ, बिल्कुल। मुझे लगता है कि जब आपको यह क्लैरिटी होती है कि आप क्या करना चाहते हैं, तो मुझे लगता है कि इससे आपके फुटवर्क में भी कॉन्फिडेंस आता है। मुझे लगता है कि मैं बस यह पक्का करना चाहता था कि मैं जो भी करूँ, उसमें 100% कमिटेड रहूँ। भले ही वह डिफेंसिव शॉट हो, मैं यह पक्का करना चाहता हूँ कि मैं उसे खेलने के लिए सच में कमिटेड रहूँ, इसलिए इससे मेरा फुटवर्क बहुत बेहतर हो गया।”

शतक को बड़े में बदलने की काबिलियत पर उन्होंने कहा, ”मुझे सच में लगता है, यह बस और रन बनाने की भूख है। मुझे बस वहाँ बैटिंग करने में मज़ा आता है, और जैसे ही आप 100 रन बनाते हैं, रिलैक्स करना और वह राहत महसूस करना आसान होता है। लेकिन मेरे लिए यह ज़रूरी है कि अगली 20-30 गेंदें सच में बहुत ज़रूरी फेज़ हों, जिसमें मैं यह पक्का करने की कोशिश करता हूँ कि मैं पूरी तरह से फोकस्ड रहूँ, पूरी तरह से वहाँ रहूँ। मुझे लगता है कि जब मैं 100 के बाद पहली 10 गेंदें पार कर लेता हूँ, तो मेरा काम बहुत आसान हो जाता है। और इतने सालों में, मैंने बहुत से क्रिकेटरों को बड़े रन बनाते, बड़े शतक बनाते देखा है, खासकर कर्नाटक में। इसलिए उन्हें बैटिंग करते देखकर मेरा भी मन करता है कि मैं भी वैसा ही करूँ।

बिना मैच जीते विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के प्री क्वार्टफाइनल में पहुंचे सात्विक और चिराग

Satvik Chirag

सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की भारतीय पुरुष युगल जोड़ी ने दूसरे दौर में वॉकओवर मिलने के बाद बुधवार को बीडब्ल्यूएफ विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के प्री-क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।

विश्व चैंपियनशिप में पहले दो कांस्य पदक जीत चुकी पांचवीं वरीयता प्राप्त भारतीय जोड़ी को पहले दौर में बाई मिली थी तथा दूसरे दौर में उनका मुकाबला स्कॉटलैंड के एलेक्जेंडर डन और एडम प्रिंगल से होना था।स्कॉटलैंड की जोड़ी ने हालांकि आखिरी क्षण में नाम वापस ले लिया, जिससे सात्विक और चिराग को कोर्ट में उतरे बिना ही ‘राउंड ऑफ 16’ में जगह मिल गई।

तनीशा क्रास्टो और ध्रुव कपिला की मिश्रित युगल जोड़ी ने भी मकाऊ के लियोन इओक चोंग और एनजी वेंग ची को 21-11 21-11 से हराकर प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली।भारतीय खिलाड़ियों में दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू, आयुष शेट्टी और लक्ष्य सेन को भी बुधवार को अपने मैच खेलने हैं।

कंधे की बार-बार उभरने वाली चोट ने सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी के लिए मुश्किलें बढ़ाई हैं और कई बार उनके जोड़ीदार चिराग शेट्टी के लिए भी यह स्थिति “परेशान करने वाली” रही है, लेकिन भारतीय पुरुष युगल जोड़ी घरेलू सरजमीं पर विश्व चैंपियनशिप में अपने पदक के रंग को बेहतर करने के लक्ष्य के साथ अपने आक्रामक और तेजतर्रार खेल पर कायम रहेगी।

सात्विक पिछले कुछ वर्षों से कंधे की इस समस्या से जूझ रहे हैं, जिसके कारण शानदार टूर्नामेंट के बाद भी उनके लिए लय बरकरार रखना मुश्किल रहा है। इस जोड़ी ने दो साल के अंतराल के बाद अपना पहला खिताब जीतते हुए सिंगापुर ओपन सुपर 750 अपने नाम किया था, लेकिन इसके बाद चोट फिर उभर आई और उन्हें इंडोनेशिया ओपन में मुकाबले के बीच से हटना पड़ा तथा जापान ओपन से नाम वापस लेना पड़ा।

सात्विक और चिराग पुरुष युगल वर्ग की उन शीर्ष पांच जोड़ियों में शामिल हैं, जिन पर विश्व चैंपियनशिप में खास नजर रहेगी। पुरुष युगल का मुकाबला परंपरागत रूप से बेहद खुला रहा है और पिछले छह संस्करणों में पांच देशों की छह अलग-अलग जोड़ियां खिताब जीत चुकी हैं।

विश्व नंबर एक किम वोन हो और सियो सेउंग जे ने 2025 की अपनी शानदार फॉर्म को इस सत्र की शुरुआत में भी जारी रखा था, लेकिन मई में थॉमस कप फाइनल के बाद उनकी कमजोरियां नजर आई हैं। इससे फजार अल्फियां-मुहम्मद शोहिबुल फिकरी, गोह से फी-नूर इज्जुद्दीन और भारतीय जोड़ी जैसी चुनौती पेश करने वाली जोड़ियों के लिए उम्मीदें बढ़ी हैं।


कप्तान बाबर आजम चोटिल होकर इंग्लैंड के खिलाफ हैडिंग्ले टेस्ट से हुए बाहर

Babar Azam_Pakistan

बेकेनहम में टीम के वॉर्म-अप मैच के दौरान हाथ में लगी चोट से उबर न पाने के कारण बाबर आज़म लीड्स में इंग्लैंड के खिलाफ़ पाकिस्तान के पहले टेस्ट से बाहर हो गए हैं। यह मैच बुधवार से शुरू हो रहा है।

वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ़ हालिया सीरीज़ से पहले पाकिस्तान के टेस्ट कप्तान के तौर पर दोबारा चुने गए बाबर की जगह सलमान आगा तीन टेस्ट मैचों की सीरीज़ के पहले मैच में कार्यवाहक कप्तान होंगे। 32 साल के आगा 2024 से टी 20 क्रिकेट में पाकिस्तान की कप्तानी कर चुके हैं और 27 टेस्ट मैच खेल चुके हैं। हेड कोच सरफ़राज़ अहमद ने पुष्टि की है कि वह सीरीज़ के पहले मैच में टीम की कमान संभालेंगे।

पाकिस्तान अभी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की रैंकिंग में आठवें स्थान पर है, जो इंग्लैंड से एक पायदान नीचे है। दोनों टीमें तीन टेस्ट मैचों की सीरीज़ के दौरान अपनी स्थिति बेहतर करने की कोशिश करेंगी।

पाकिस्तान अपनी बैटिंग लाइन-अप में भी बदलाव कर सकता है। वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ़ दोनों टेस्ट मैच न खेलने के बाद सऊद शकील की वापसी की संभावना है। त्रिनिदाद में वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ़ दूसरे मैच में टेस्ट डेब्यू करने वाले अवैस ज़फ़र अपनी जगह बनाए रख सकते हैं, जबकि पूर्व कप्तान शान मसूद भी चोट से उबरने के बाद वापसी की कोशिश कर रहे हैं।

बाबर का न होना पाकिस्तान के लिए एक और झटका है, क्योंकि वे इंग्लैंड की उस टीम का सामना करने की तैयारी कर रहे हैं जो टेस्ट क्रिकेट में एक नए दौर से गुज़र रही है। इंग्लैंड की कप्तानी जो रूट करेंगे, जबकि मार्कस ट्रेस्कोथिक सीरीज़ के लिए अंतरिम हेड कोच की ज़िम्मेदारी संभालेंगे, जिसके बाद स्टीफन फ्लेमिंग पूर्णकालिक भूमिका संभालेंगे।

डब्ल्यूटीसी टेबल में दोनों टीमों के निचले पायदान पर होने के कारण यह सीरीज़ और भी अहम हो जाती है। पाकिस्तान अभी दूसरे-आखिरी स्थान पर है, जबकि इंग्लैंड उनसे ठीक ऊपर सातवें स्थान पर है।

सबसे अनुभवी बल्लेबाज के बिना श्रीलंका को पीछा करना होगा 372 रनों का लक्ष्य

INDvsSL श्रीलंका के सबसे अनुभवी बल्लेबाज जिन्होंने टीम को गॉल में साल 2015 में भारत के खिलाफ जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी वह मौजूदा गॉल टेस्ट से बाहर हो चुके हैं। दिनेश चंदीमल ने आज चौथे दिन के चौथे ओवर में राहुल के एक शॉट को रोकने के चक्कर में अपनी गर्दन और कंधे चोटिल कर लिये।

हालांकि श्रीलंका के लिए खबर बहुत बुरी से सिर्फ बुरी है और उनको 10 नहीं बल्कि 11 बल्लेबाजों के साथ खेलना होगा। गर्दन और कंधे की चोट के कारण श्रीलंका टीम को कनकशन सबस्टीट्यूट मिल गया है। उनकी जगह टीम के लिए पसींदू सूर्यबंदारा खेलेंगे जो अभ्यास मैच में भारत के खिलाफ खेले थे।

हालांकि सबसे अनुभवी बल्लेबाज  दिनेश चंदीमल के ना होने से श्रीलंका खुश नहीं होगी भले ही उन्होंने पहली पारी में सिर्फ 15 गेंदों में 4 रन ही क्यों ना बनाए हों। पसींदू सूर्यबंदारा ने अभ्यास मैच में भारत के खिलाफ मिली अच्छी शुरुआत को भुना नहीं पाए थे और दूसरी पारी में फ्लॉप रहे थे। पहली पारी में उन्होंने 35 रन बनाे थे और दूसरी पारी में सिर्फ 4 रन बना पाए थे।उनके आने से श्रीलंका को कोई फायदा भी नहीं हुआ क्योंकि दूसरी पारी में वह बिना खाता खोले मानव सुथार की गेंद पर पगबाधा आउट हो गए।

गौरतलब है कि 36 वर्षीय दिनेश चंदीमल अपने सौंवे टेस्ट खेलने के करीब हैं। अब तक उन्होंने अपने करियर में 92 टेस्ट मैच खेलकर 6500 रन बनाए हैं। उनका औसत 43 का है जिसमने 16 शतक और 36 अर्धशतक शामिल हैं।

भारत के इन 5 राज्यों में बढ़ रहा इंसान और हाथी टकराव! WII ने मैप किए 5 राज्यों के बड़े हॉटस्पॉट्स

भारत में इंसानों और हाथियों के बीच बढ़ता टकराव एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और प्रोजेक्ट एलिफेंट डिवीजन ने देश के 5 प्रमुख राज्यों कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में मानव-हाथी संघर्ष के प्रमुख हॉटस्पॉट्स को मैप किया है। WII की इस रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य उन इलाकों की पहचान करना है जहां जोखिम सबसे अधिक है, ताकि संरक्षण और सुरक्षा प्रयासों को सही दिशा में फोकस किया जा सके।

रिसर्चर्स ने इन राज्यों के लंबे समय के डेटा की स्टडी की है। इनमें से कुछ आंकड़े साल 2000 तक पुराने हैं। इस पूरी सीरीज में ओडिशा की रिपोर्ट सबसे डिटेल है। 128 पन्नों की इस रिपोर्ट में कई सालों के डेटा का इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्ट का लक्ष्य उन स्थानों और दोहराए जाने वाले पैटर्न की पहचान करना है जहां हाथियों और इंसानों का आमना-सामना सबसे ज्यादा होता है।

इंसानी बस्तियों में क्यों आ रहे हैं हाथी?

रिपोर्ट के मुताबिक इंसानों और हाथियों के बीच संघर्ष की मुख्य वजह उनके प्राकृतिक आवासों (हाथी पर्यावास) और इंसानी गतिविधियों के बीच बढ़ता ओवरलैप है। जंगल लगातार छोटे-छोटे हिस्सों में बंटते जा रहे हैं। जंगलों के बीच से गुजरने वाली सड़कें और रेलवे लाइनें हाथियों के पारंपरिक रास्तों को काटती हैं। इसके अलावा बिजली की बाड़ और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर भी हाथियों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं। जंगलों के करीब गांवों और इंसानी बस्तियों के विस्तार ने लोगों और हाथियों को एक-दूसरे के बेहद करीब ला दिया है।

एलिफेंट कॉरिडोर के आसपास भी मुश्किलें

हाथियों को भोजन और पानी की तलाश के साथ-साथ एक जंगल से दूसरे जंगल तक सुरक्षित आवाजाही के लिए बड़े क्षेत्र की जरूरत होती है। जब हाथियों के ये पारंपरिक कॉरिडोर या रास्ते ब्लॉक हो जाते हैं, तो वे वैकल्पिक रास्तों की तलाश करते हैं। ये वैकल्पिक रास्ते अक्सर खेतों, गांवों या बस्तियों से होकर गुजरते हैं। हाथियों के इस मूवमेंट से फसलों को भारी नुकसान पहुंचता है। इंसानों से मुठभेड़ का खतरा बढ़ जाता है और कई बार इंसानों व हाथियों दोनों को अपनी जान गंवानी पड़ती है या गंभीर चोटों का सामना करना पड़ता है।

वैज्ञानिकों ने हॉटस्पॉट आधारित समाधान की उठाई मांग

WII की यह रिपोर्ट अधिकारियों को उन संवेदनशील क्षेत्रों की तुरंत पहचान करने में मदद करेगी जहां तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि इन हॉटस्पॉट्स में बेहतर अर्ली-वार्निंग सिस्टम (पूर्व चेतावनी प्रणाली) लागू की जानी चाहिए। सुरक्षित रेलवे और सड़क योजनाएं बनाना, वन विभागों द्वारा हॉटस्पॉट क्षेत्रों में रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत करना और हाथियों के गलियारों को सुरक्षा प्रदान करना अत्यंत महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।

संकट से निपटने के लिए बचाव रणनीति की जरूरत

यह रिपोर्ट सिर्फ अतीत में हुए संघर्षों का रिकॉर्ड भर नहीं है बल्कि यह दिखाती है कि संघर्ष कहां, कब और किन कारणों से हो रहे हैं। यह डेटा अधिकारियों को घटनाओं के होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय, उन्हें पहले से रोकने में मदद कर सकता है। भारत के लिए यह चुनौती बिल्कुल स्पष्ट है कि हाथियों की रक्षा करने का सीधा मतलब उन प्राकृतिक भू-भागों और रास्तों की सुरक्षा करना है, जिनका उपयोग हाथी अपनी आवाजाही के लिए करते हैं।

यह भी पढ़ें: भारतीय चुनावी सिस्टम के कायल हुए डोनाल्ड ट्रंप! BJP हुई गदगद, तो कांग्रेस को लगी मिर्ची, किसने क्या कहा?