Stocks to Watch: 23 जून को इन 10 स्टॉक्स पर रखें नजर, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Stocks to Watch: 23 जून के कारोबार में कई शेयर खबरों के दम पर चर्चा में रह सकते हैं। कुछ कंपनियों ने बड़े ऑर्डर हासिल किए हैं, जबकि कुछ ने फंड जुटाने, हिस्सेदारी बिक्री और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े अहम ऐलान किए हैं। ऐसे में इन 10 शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है।

TCS

देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी TCS ने बताया है कि उसके बोर्ड की बैठक 9 जुलाई 2026 को होगी। इस बैठक में 30 जून 2026 को खत्म तिमाही के नतीजों पर चर्चा होगी और उन्हें मंजूरी दी जाएगी। टाटा ग्रुप की यह कंपनी निवेशकों के लिए डिविडेंड का ऐलान भी कर सकती है।

Hindustan Zinc

वेदांता ग्रुप की कंपनी Hindustan Zinc ने Advantek Associates LLP और Aero Eagle Automobiles Pvt Ltd के साथ एक समझौता किया है। इस साझेदारी का मकसद कंपनी के अलग-अलग ऑपरेशंस में ग्रीन हाइड्रोजन और दूसरी स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशना है।

JSW Infrastructure

सज्जन जिंदल की JSW Infrastructure ने 22 जून से अपना QIP खोलने को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने ₹290.35 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। इश्यू में अधिकतम 230 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। वहीं, Sajjan Jindal Family Trust अधिकतम 33.25 करोड़ शेयरों की OFS लाएगी।

Craftsman Automation

Craftsman Automation के प्रमोटर शेयरहोल्डर श्रीनिवासन रवि ने ब्लॉक डील के जरिए कंपनी में 2.01% तक हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू की है। टर्म शीट के मुताबिक इस सौदे का आकार करीब ₹484 करोड़ है। शेयरों के लिए ₹925 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया है।

Info Edge

Naukri.com की पैरेंट कंपनी Info Edge ने कहा है कि उसके AI स्टार्टअप पोर्टफोलियो की वैल्यू बढ़कर ₹1,268 करोड़ पहुंच गई है। कंपनी ने अब तक 28 AI स्टार्टअप्स में कुल ₹614 करोड़ का निवेश किया है। इस निवेश पर उसे 2.1 गुना रिटर्न मिला है, जबकि अनुमानित ग्रॉस IRR करीब 31% रही है।

Bharat Electronics

सरकारी डिफेंस कंपनी Bharat Electronics (BEL) को 25 मई 2026 के बाद ₹1,081 करोड़ के नए ऑर्डर मिले हैं। कंपनी के मुताबिक इन ऑर्डर्स में कम्युनिकेशन इक्विपमेंट, रडार, CBRN सुरक्षा सिस्टम, सीकर्स, एवियोनिक्स, अपग्रेडेशन, स्पेयर्स और सर्विसेज शामिल हैं। नए ऑर्डर्स से कंपनी की ऑर्डर बुक और मजबूत होगी और आने वाले समय में रेवेन्यू को सहारा मिल सकता है।

GHV Infra Projects

GHV Infra Projects को GHV (India) Private Ltd से करीब ₹213 करोड़ का वर्क ऑर्डर मिला है। इस ऑर्डर में GST भी शामिल है। कंपनी को सिविल, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और सिग्नल एवं टेलीकॉम से जुड़े कई काम करने होंगे। यह ऑर्डर कंपनी की ऑर्डर बुक को और मजबूत करेगा।

APAR Industries

APAR Industries ने बताया कि उसकी सहायक कंपनी APAR Industries Middle East Ltd, KSA ने Saudi Aramco Base Oil Company के साथ एक समझौता किया है। यह करार कंपनी के अंतरराष्ट्रीय कारोबार को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि दोनों कंपनियों ने समझौते की वित्तीय शर्तों का खुलासा नहीं किया है।

Birla Corporation

Birla Corporation ने कहा है कि मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में स्थित उसकी बिक्रम कोयला खदान में 22 जून 2026 से व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो गया है। कंपनी के लिए यह महत्वपूर्ण उपलब्धि है क्योंकि अब उसे अपने सीमेंट कारोबार के लिए कोयले की उपलब्धता बढ़ाने और लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

MSP Steel & Power

MSP Steel & Power के प्रमोटर ग्रुप ने 16 से 18 जून 2026 के बीच खुले बाजार से कुल 64.50 लाख शेयर खरीदे हैं। कंपनी के मुताबिक, प्रमोटर ग्रुप की पांच संस्थाओं ने यह खरीदारी की है। आमतौर पर प्रमोटरों की बड़ी खरीदारी को कंपनी के भविष्य और कारोबार को लेकर उनके भरोसे के संकेत के रूप में देखा जाता है।

Railway Stocks: बंगाल में ₹1 लाख करोड़ से बनेगा रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, इन 4 स्टॉक्स पर रखें नजर

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

TCS Results Update: 9 जुलाई को जून तिमाही के नतीजे जारी करेगी TCS, डिविडेंड देने पर होगा भी विचार

TCS Results Update: देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी TCS (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) ने बताया है कि उसके बोर्ड की बैठक 9 जुलाई 2026 को होगी। इस बैठक में जून 2026 तिमाही (Q1FY27) के नतीजों को मंजूरी दी जाएगी। इसके साथ ही कंपनी अंतरिम डिविडेंड पर भी फैसला कर सकती है।

टाटा ग्रुप की इस कंपनी ने कहा है कि बोर्ड 30 जून 2026 को खत्म तिमाही के ऑडिटेड स्टैंडअलोन वित्तीय नतीजों पर विचार करेगा और उन्हें मंजूरी देगा।

डिविडेंड का भी हो सकता है ऐलान

तिमाही नतीजों के साथ निवेशकों की नजर डिविडेंड पर भी रहेगी। TCS का बोर्ड अंतरिम डिविडेंड पर विचार करेगा। अगर डिविडेंड का ऐलान होता है तो उसका फायदा उन शेयरधारकों को मिलेगा जिनका नाम 15 जुलाई 2026 तक कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज होगा। कंपनी ने इसके लिए 15 जुलाई को रिकॉर्ड डेट तय किया है।

पिछली तिमाही में कैसा था प्रदर्शन?

मार्च 2026 तिमाही में TCS ने बाजार की उम्मीदों से बेहतर नतीजे दिए थे। कॉन्स्टेंट करेंसी के आधार पर कंपनी का रेवेन्यू पिछली तिमाही के मुकाबले 1.2% बढ़ा था। खास बात यह रही कि पिछले सात क्वार्टर में यह कंपनी की सबसे तेज ग्रोथ थी।

एनालिस्टों को औसतन 1% ग्रोथ की उम्मीद थी। कुछ ब्रोकरेज हाउस ने 0.6% से 1.4% तक का अनुमान लगाया था, लेकिन कंपनी इन अनुमानों के ऊपरी स्तर के करीब पहुंचने में सफल रही।

29% उछला था TCS का मुनाफा

मार्च तिमाही में TCS का शुद्ध लाभ बढ़कर ₹13,718 करोड़ पहुंच गया था। दिसंबर तिमाही में यह ₹10,657 करोड़ था। यानी कंपनी के मुनाफे में करीब 29% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वहीं कंपनी का रेवेन्यू भी बढ़कर ₹70,698 करोड़ हो गया, जो पिछली तिमाही में ₹67,087 करोड़ था। यह आंकड़ा भी बाजार के अनुमान से बेहतर रहा।

मार्जिन में सुधार, बड़े ऑर्डर भी मिले

TCS की कमाई की ताकत दिखाने वाला EBIT बढ़कर ₹17,870 करोड़ रहा, जो पिछली तिमाही से 6% ज्यादा है। वहीं EBIT मार्जिन 25.3% रहा, जो दिसंबर तिमाही के 25.2% से थोड़ा बेहतर है।

मार्च तिमाही में TCS ने 12 अरब डॉलर के नए कॉन्ट्रैक्ट हासिल किए थे। यह कंपनी के इतिहास के सबसे बड़े ऑर्डर बुकिंग स्तरों में से एक है। इसमें तीन बड़े मेगा डील भी शामिल थीं।

पहले भी दे चुकी है ₹31 का डिविडेंड

TCS ने हाल ही में अपने शेयरधारकों के लिए ₹31 प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड को मंजूरी दी थी। हालांकि उसकी रिकॉर्ड डेट का ऐलान अभी बाकी है।

अब निवेशकों की नजर 9 जुलाई पर रहेगी। बाजार यह देखना चाहेगा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच TCS की ग्रोथ कितनी मजबूत बनी हुई है और कंपनी डिविडेंड को लेकर क्या फैसला करती है।

TCS का शेयर सोमवार को 0.21% की बढ़त के साथ 2,129.50 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, बीते 6 महीने में शेयर 35% से ज्यादा टूट चुका है।

Railway Stocks: बंगाल में ₹1 लाख करोड़ से बनेगा रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, इन 4 स्टॉक्स पर रखें नजर

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Railway Stocks: बंगाल में ₹1 लाख करोड़ से बनेगा रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, इन 4 स्टॉक्स पर रखें नजर

Railway Stocks: पश्चिम बंगाल में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को नया रूप देने के लिए करीब 1 लाख करोड़ रुपये की बड़ी योजना सामने आई है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा कि अगले 4-5 साल में कोलकाता मेट्रो के लिए 60 नई पीढ़ी की ट्रेनें लाई जाएंगी। इसके साथ ही दिल्ली से सिलीगुड़ी के बीच हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है। इन घोषणाओं के बाद रेलवे सेक्टर से जुड़ी कई कंपनियां निवेशकों के रडार पर आ गई हैं।

Titagarh Rail

अगर कोलकाता मेट्रो के विस्तार की बात करें तो टीटागढ़ रेल का नाम सबसे आगे नजर आता है। कंपनी मेट्रो कोच और रेलवे रोलिंग स्टॉक बनाने में माहिर है। इसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी पश्चिम बंगाल में हैं। अभी तक नए ऑर्डर का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन मेट्रो के लिए बड़ी संख्या में नई ट्रेनें खरीदी जानी हैं। इसलिए टीटागढ़ को मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

कंपनी पहले अहमदाबाद मेट्रो के लिए स्टेनलेस स्टील मेट्रो कोच बना चुकी है। इस प्रोजेक्ट की वैल्यू करीब 350 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा पुणे मेट्रो के लिए 34 ट्रेनसेट की डिलीवरी पूरी करने के बाद उसे 12 और एल्युमीनियम ट्रेनसेट का 430 करोड़ रुपये का ऑर्डर भी मिला था। FY26 में कंपनी की कुल ऑर्डर बुक 27,540 करोड़ रुपये रही, जिसमें 10,600 करोड़ रुपये का हिस्सा पैसेंजर रेल बिजनेस से जुड़ा है।

RVNL

रेलवे की बड़ी-बड़ी घोषणाएं तभी हकीकत बनती हैं जब जमीन पर काम शुरू होता है। यही काम सरकारी रेल कंपनी RVNL करती है। कंपनी ट्रैक बिछाने, सिग्नलिंग, स्टेशन री-डेवलपमेंट और दूसरी रेलवे परियोजनाओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती है।

पश्चिम बंगाल में मेट्रो विस्तार और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे, RVNL को नए काम मिलने की संभावना बढ़ सकती है। कंपनी की ऑर्डर बुक फिलहाल करीब 1 लाख करोड़ रुपये की है। FY26 में उसका रेवेन्यू 20,412 करोड़ रुपये रहा। हालांकि बढ़ती लागत की वजह से मुनाफा 32.6% घटकर 871 करोड़ रुपये रह गया। इसके बावजूद कंपनी ने FY27 में 15-20% रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान दिया है और हाल में कई नए कॉन्ट्रैक्ट भी हासिल किए हैं।

IRFC

सरकारी कंपनी IRFC रेलवे सेक्टर की फाइनेंसिंग करने वाली सबसे अहम सरकारी कंपनी है। रेलवे जितना ज्यादा खर्च करेगा, उतनी ही ज्यादा फंडिंग की जरूरत होगी और इसका फायदा IRFC को मिल सकता है।

FY26 में कंपनी का शुद्ध लाभ 7.8% बढ़कर 7,009 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। कंपनी ने 35,000 करोड़ रुपये के लोन वितरित किए, जो उसके लक्ष्य से ज्यादा थे। इसका AUM बढ़कर 4.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है। फरवरी 2026 में सरकार ने OFS के जरिए अपनी 1.7% हिस्सेदारी बेची थी। वहीं कंपनी के बोर्ड ने FY27 में 60,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की मंजूरी भी दी है, जिससे रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंडिंग जारी रखी जा सके।

IRCON

दिल्ली-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा के बाद IRCON भी चर्चा में है। कंपनी रेलवे, हाईवे और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के निर्माण का लंबा अनुभव रखती है। अगर यह हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट आगे बढ़ता है तो बड़े पैमाने पर पुल, वायाडक्ट और स्टेशन बनाने का काम होगा। इसमें IRCON जैसी कंपनियों को अवसर मिल सकते हैं।

कंपनी की ऑर्डर बुक 24,984 करोड़ रुपये की है, जिसमें रेलवे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा सबसे बड़ा है। FY26 में उसका रेवेन्यू 9,071 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध लाभ 592 करोड़ रुपये था। खास बात यह है कि कंपनी लगभग कर्ज-मुक्त है। इससे उसे भविष्य की बड़ी परियोजनाओं में भाग लेने की वित्तीय ताकत मिलती है।

आपको इन शेयरों पर क्यों रखनी चाहिए नजर

अगर आप रेलवे सेक्टर पर नजर रखते हैं, तो इन शेयरों को अपनी वॉचलिस्ट में रख सकते हैं। पश्चिम बंगाल में मेट्रो विस्तार, स्टेशन पुनर्विकास और हाई-स्पीड रेल जैसे बड़े प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। इन योजनाओं से रेलवे वैल्यू चेन से जुड़ी कंपनियों को फायदा मिल सकता है।

हालांकि अभी ज्यादातर परियोजनाएं शुरुआती चरण में हैं। इसलिए ऑर्डर और कमाई पर असर दिखने में समय लग सकता है। ऐसे में Titagarh Rail, RVNL, IRFC और IRCON जैसे शेयरों पर आगे होने वाले घटनाक्रमों के साथ नजर रखना बेहतर हो सकता है।

Stock in Focus: सरकारी डिफेंस कंपनी को मिले ₹1081 करोड़ के ऑर्डर, स्टॉक पर रहेगी नजर

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

ITR Filing 2026: क्या इस साल भी बढ़ेगी ITR फाइल करने की डेडलाइन? ये 5 फैक्टर करेंगे तय

ITR Filing 2026: ITR फाइलिंग की आखिरी तारीख पिछले साल दो बार बढ़ाई गई थी। इसकी वजह टैक्स नियमों में बदलाव और ई-फाइलिंग पोर्टल से जुड़ी कुछ तकनीकी चुनौतियां थीं। इसके चलते कई टैक्सपेयर उम्मीद कर रहे हैं कि इस साल भी डेडलाइन बढ़ सकती है। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए इसकी संभावना काफी कम नजर आती है।

सबसे बड़ी वजह यह है कि इस बार फाइलिंग से जुड़ी ज्यादातर सुविधाएं और यूटिलिटीज समय पर उपलब्ध हैं। ई-फाइलिंग सिस्टम भी फिलहाल ठीक तरीके से काम कर रहा है। रिटर्न फाइल करने की रफ्तार भी अच्छी बनी हुई है।

किन 5 फैक्टर से डेडलाइन बढ़ने की उम्मीद कम?

1. कई टैक्सपेयर को पहले ही राहत मिल चुकी है

कई नॉन-ऑडिट टैक्सपेयर, फर्म पार्टनर्स और कुछ प्रोफेशनल्स के लिए ITR फाइलिंग की आखिरी तारीख पहले ही बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 कर दी गई है। ऐसे में सभी के लिए एक और व्यापक राहत की जरूरत कम हो जाती है।

2. ITR फॉर्म समय पर जारी हुए

ITR-1, ITR-2, ITR-3 और ITR-4 की यूटिलिटीज पहले से उपलब्ध हैं। ये फॉर्म ज्यादातर टैक्सपेयर इस्तेमाल करते हैं। इसलिए सिर्फ कुछ फॉर्म्स में देरी की वजह से डेडलाइन बढ़ने की संभावना कम है।

3. तकनीकी दिक्कतें कम रहीं

पिछले साल पोर्टल से जुड़ी समस्याएं डेडलाइन बढ़ाने की एक बड़ी वजह थीं। इस बार फाइलिंग सीजन काफी अच्छा रहा है। अब तक कोई बड़ी तकनीकी समस्या सामने नहीं आई है।

4. टैक्स नियमों में ज्यादा बदलाव नहीं

पिछले कुछ वर्षों में इंडेक्सेशन नियमों, STCG और LTCG टैक्स जैसे कई बड़े बदलाव हुए थे। इस बार टैक्स सिस्टम भी काफी स्थिर है। इसलिए टैक्सपेयर और विभाग दोनों बेहतर तरीके से तैयार हैं।

5. फाइलिंग की रफ्तार मजबूत

21 जून 2026 तक 56 लाख से ज्यादा ITR दाखिल हो चुकी थीं। इनमें से 53 लाख से ज्यादा रिटर्न वेरिफाई भी हो चुकी हैं। यह दिखाता है कि फाइलिंग प्रक्रिया सामान्य तरीके से आगे बढ़ रही है।

अगर अब तक ITR नहीं भरा, तो क्या करें?

  • Form 16, ब्याज प्रमाणपत्र, कैपिटल गेन स्टेटमेंट और आय से जुड़े अन्य दस्तावेज पहले से जुटा लें।
  • रिटर्न में दी गई जानकारी AIS और Form 26AS से मेल खानी चाहिए। इससे गलती और नोटिस का जोखिम कम होता है।
  • रिटर्न भरने से पहले दोनों टैक्स रिजीम में अपनी टैक्स देनदारी की तुलना जरूर कर लें।
  • आखिरी समय का इंतजार करने पर पोर्टल पर दबाव बढ़ सकता है और गलतियों की संभावना भी रहती है।
  • सिर्फ ITR भरना काफी नहीं है। रिटर्न को ई-वेरिफाई करना भी जरूरी है। इसके बिना रिटर्न वैध नहीं मानी जाती।

कुल मिलाकर डेडलाइन बढ़ने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए टैक्सपेयर को मौजूदा समयसीमा को ही ध्यान में रखकर अपनी ITR फाइल करनी चाहिए।

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EPFO Pension Rules: मृत्यु, दिव्यांगता या अर्ली रिटायरमेंट पर EPS पेंशन का क्या होता है? समझिए सभी नियम

EPFO Pension Rules: कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) 1995 को सिर्फ रिटायरमेंट पेंशन योजना समझना बड़ी भूल हो सकती है। यह सोशल सिक्योरिटी स्कीम भी है, जो कर्मचारी के साथ-साथ उसके परिवार को भी सुरक्षा देने का काम करती है। कर्मचारी की रिटायरमेंट, दिव्यांगता या मृत्यु जैसे हालात में EPS के नियम भी अलग-अलग लागू होते हैं।

रिटायरमेंट पर कब मिलती है पेंशन?

अगर कोई कर्मचारी कम से कम 10 साल तक EPS में योगदान करता है, तो वह 58 साल की उम्र के बाद मंथली पेंशन पाने का हकदार बन जाता है। हालांकि कर्मचारी चाहे तो 50 साल की उम्र के बाद अर्ली पेंशन भी ले सकता है। लेकिन ऐसी स्थिति में पेंशन की रकम कम हो जाती है, क्योंकि उसे तय उम्र से पहले निकाला जा रहा होता है।

दिव्यांगता की स्थिति में क्या होता है?

अगर कर्मचारी नौकरी के दौरान स्थायी और पूर्ण रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो उसे डिसेबिलिटी पेंशन मिल सकती है। इस मामले में सामान्य रिटायरमेंट पेंशन की तरह 10 साल की सेवा शर्त उसी तरह लागू नहीं होती। इसका मकसद ऐसे कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा देना है, जिनकी कमाने की क्षमता खत्म हो गई हो।

कर्मचारी की मौत होने पर किसे मिलते हैं पैसे?

EPS की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह कर्मचारी की मृत्यु के बाद भी परिवार को सुरक्षा देता है। कर्मचारी की मौत होने पर पात्र परिवार के सदस्यों को फैमिली पेंशन मिल सकती है। इसमें विधवा या विधुर पेंशन, बच्चों की पेंशन और कुछ मामलों में अनाथ पेंशन भी शामिल है।

यही वजह है कि EPS को सिर्फ रिटायरमेंट पेंशन नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी योजना माना जाता है।

क्या नॉमिनी को हमेशा पेंशन मिलती है?

कई लोग मानते हैं कि EPF की तरह EPS में भी नॉमिनी को सीधे फायदा मिल जाएगा। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। EPS में पेंशन का अधिकार मुख्य रूप से योजना में तय पात्र परिवार के सदस्यों को मिलता है।

उदाहरण के लिए, अगर कोई अविवाहित कर्मचारी किसी बाहरी व्यक्ति को नॉमिनी बना देता है, तो सिर्फ नॉमिनी होने से उस व्यक्ति को पेंशन का अधिकार नहीं मिल जाता। पेंशन का फैसला EPS के नियमों के मुताबिक होता है।

किन गलतियों से हो सकती है परेशानी?

कई परिवारों को कर्मचारी की मौत के बाद पता चलता है कि रिकॉर्ड में गड़बड़ी है। नाम, जन्मतिथि, आधार, बैंक खाते या सर्विस रिकॉर्ड में अंतर होने से पेंशन क्लेम अटक सकता है। कई बार नौकरी बदलने के दौरान पुराने रिकॉर्ड सही तरीके से ट्रांसफर नहीं होते, जिससे सेवा अवधि का पूरा रिकॉर्ड नहीं दिखता।

इसी तरह Form 11 में गलतियां भी बाद में बड़ी समस्या बन सकती हैं। इसलिए कर्मचारियों को अपने EPF पासबुक, ट्रांसफर रिकॉर्ड, सर्विस हिस्ट्री और KYC जानकारी समय-समय पर जांचते रहना चाहिए।

EPS को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियां

कई कर्मचारी मानते हैं कि हर EPF सदस्य अपने आप EPS सदस्य भी बन जाता है। वहीं, 1 सितंबर 2014 के बाद नियम बदल चुके हैं और सभी कर्मचारी EPS के लिए पात्र नहीं होते।

दूसरी बड़ी गलतफहमी यह है कि EPS को लोग बचत खाते की तरह समझते हैं। जबकि यह पेंशन योजना है। इसमें मिलने वाला फायदा सेवा अवधि और पात्रता पर निर्भर करता है, न कि खाते में दिख रही रकम पर।

रिटायरमेंट प्लानिंग में EPS की क्या भूमिका है?

EPS को रिटायरमेंट की पूरी व्यवस्था नहीं माना जाना चाहिए। यह केवल एक बुनियादी सामाजिक सुरक्षा देता है। कर्मचारियों को EPF, NPS, निजी निवेश और पर्याप्त जीवन बीमा के साथ अपनी रिटायरमेंट योजना बनानी चाहिए।

साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि नौकरी के दौरान उनके सभी पेंशन रिकॉर्ड सही और अपडेट रहें। इससे भविष्य में परिवार को पेंशन पाने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

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Delhivery Share Price: मोतीलाल ओसवाल बुलिश रिपोर्ट, शेयर ने लगाई 5% की छलांग, 26% अपसाइड की और बढ़त संभव

Delhivery Share Price: लॉजिस्टिक्स सेक्टर की दिग्गज कंपनी डेल्हीवरी ( DELHIVERY) के शेयर में आज शानदार तेजी देखने को मिली। शेयर करीब 5 फीसदी की उछाल के साथ वायदा का टॉप गेनर बना हुआ है। शेयर में आई तेजी की मुख्य वजह ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल की बुलिश रिपोर्ट के बाद देखी गई है। दरअसल, ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOSL) ने मजबूत वॉल्यूम ग्रोथ और कॉस्ट कंट्रोल का हवाला देते हुए स्टॉक में 26 फीसदी तक की बढ़त का अनुमान लगाया।

NSE पर स्टॉक दोपहर 2.33 बजे 5 फीसदी बढ़कर 484.30 रुपये प्रति शेयर के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया। कंपनी के शेयर लगातार चार सेशन से बढ़ रहे हैं और इस दौरान 4 फीसदी से ज़्यादा ऊपर हैं।

MOSL ने स्टॉक पर ‘Buy’ रेटिंग बनाए रखी है और इसका टारगेट प्राइस 580 रुपये प्रति शेयर रखा है, जिसका मतलब है कि शुक्रवार के 461.10 रुपये के क्लोजिंग प्राइस से लगभग 26 प्रतिशत की बढ़त।

ब्रोकरेज फर्म के अनुसार, डेल्हीवरी के एक्सप्रेस सेगमेंट ने FY26 की चौथी तिमाही में 73 प्रतिशत साल-दर-साल वॉल्यूम ग्रोथ दर्ज की, जिसमें ECOM एक्सप्रेस एक्विजिशन का योगदान भी शामिल है, जबकि वेस्ट एशिया संकट के कारण चुनौतीपूर्ण ऑपरेटिंग माहौल और त्योहारों वाली तीसरी तिमाही के बाद देखी जाने वाली सामान्य नरमी के बावजूद दिखी। ब्रोकरेज ने कहा कि ग्रोथ को अच्छी कंजम्प्शन-ड्रिवन डिमांड, कस्टमर्स द्वारा ज़्यादा आउटसोर्सिंग और बड़े ई-कॉमर्स प्लेयर्स से लगातार मोमेंटम का सपोर्ट मिला।

ब्रोकरेज ने आगे कहा कि मार्जिन मजबूत बने रहे, जिसमें मजबूत वॉल्यूम और कड़े कॉस्ट कंट्रोल उपायों से मदद मिली।

MOSL ने यह भी बताया कि कंपनी के PTL बिजनेस में स्ट्रक्चरल टर्नअराउंड हो रहा है, जिसमें सर्विस EBITDA मार्जिन FY24 की पहली तिमाही में नेगेटिव 8.5 प्रतिशत से बढ़कर FY26 की चौथी तिमाही में 13.4 प्रतिशत हो गया।

ब्रोकरेज के अनुसार सुधार ज़्यादा यील्ड वाले SME और रिटेल कस्टमर्स की ओर कस्टमर मिक्स में एक अच्छा बदलाव, कम प्रॉफिट वाले कॉन्ट्रैक्ट्स को रैशनलाइज़ करने और कस्टमर एक्विजिशन और प्राइसिंग डिसिप्लिन को मज़बूत करने के लिए सेल्स टीम के विस्तार से हुआ, जिससे यील्ड में बढ़ोतरी हुई।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Today: ₹1.46 लाख के भाव बिक रहा दिल्ली में 10 ग्राम गोल्ड, चेक करें अपने शहर का लेटेस्ट रेट

Gold Rate Today In India: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की इस साल कम से कम ब्याज दरें बढ़ाने के संकेत और डॉलर की मजबूती ने गोल्ड जैसी ब्याज नहीं देने वाले एसेट की चमक फीकी पड़ी है। एक दिन की स्थिरता के बाद राजधानी दिल्ली में 24 और 22 कैरट वाले 10 ग्राम गोल्ड के भाव आज ₹10 गिरे हैं। इस स्थिरता से पहले 20 जून को 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹220 और 22 कैरट वाला ₹200 महंगा हुआ था लेकिन उससे पहले लगातार चार दिनों में 24 कैरट वाला गोल्ड ₹5670 और 22 कैरट वाला ₹5200 सस्ता हुआ था। चांदी की बात करें तो दो दिनों की स्थिरता के बाद आज इसके भाव नीचे आए हैं। आज एक किलो चांदी ₹100 सस्ती हुई है।

सिटीवाइज गोल्ड के भाव

देश के 10 बड़े शहरों में 18 कैरट, 22 कैरट और 24 कैरट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमत क्या है, आइए जानते हैं…

शहर 24 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 22 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 18 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव
दिल्ली₹1,46,220₹1,34,040₹1,09,700
मुंबई₹1,46,070₹1,33,890₹1,09,550
कोलकाता₹1,46,070₹1,33,890₹1,09,550
चेन्नई₹1,48,360₹1,35,990₹1,13,690
बेंगलुरु₹1,46,070₹1,33,890₹1,09,550
हैदराबाद₹1,46,070₹1,33,890₹1,09,550
लखनऊ₹1,46,220₹1,34,040₹1,09,700
पटना₹1,46,120₹1,33,940₹1,09,600
जयपुर₹1,46,220₹1,34,040₹1,09,700
अहमदाबाद₹1,46,120₹1,33,940₹1,09,600

दो दिनों की स्थिरता के बाद फिसली चांदी

चांदी की बात करें तो दो दिनों की स्थिरता के बाद आज इसके भाव नीचे आए हैं। इससे पहले लगातार दो दिनों की स्थिरता से पहले लगातार दो दिनों में एक किलो चांदी ₹10,500 सस्ती हुई थी। अब आज की बात करें तो दिल्ली में यह प्रति किग्रा ₹100 ऊपर सस्ती होकर ₹2,49,900 के भाव में बिक रही है। बाकी अहम महानगरों की बात करें तो मुंबई और कोलकाता में भी यह इसी भाव पर बिक रही है। हालांकि चेन्नई में एक किलो चांदी का भाव ₹2,54,900 है यानी चारों महानगरों में सबसे महंगी चांदी चेन्नई में ही है।

इस कारण है दबाव

एलकेपी सिक्योरिटीज में वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी & करेंसी रिसर्च एनालिस्ट) जतिन त्रिवेदी का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से 2026 में एक बार ब्याज दर बढ़ाने के संकेत मिलने के बाद सोने पर दबाव बढ़ गया है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और सोने जैसी ऐसी एसेट्स की चमक कुछ कम हुई है, जो कोई ब्याज नहीं देतीं। फेड के सख्त रुख के बाद बुलियन बाजार में बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली भी देखने को मिली है।

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