नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में आयोजित 7वें अंतर्राष्ट्रीय नवकरणीय ऊर्जा सम्मेलन में भाग लेते हुए कहा कि मध्यप्रदेश वर्ष 2030 तक देश के 500 गीगा वॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य नवकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण तथा हरित औद्योगिक विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। म.प्र. आज देश के अग्रणी राज्यों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मेलन में शामिल होने के लिए एयरपोर्ट से दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के माध्यम से शिवाजी स्टेडियम तक यात्रा कर स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने का संदेश दिया। दिल्ली मेट्रो अपने संचालन में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा का उपयोग करती है, इसलिए मुख्यमंत्री ने हरित ऊर्जा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में मेट्रो से यात्रा की।

 

मध्यप्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों का दिया प्रेजेंटेशन-नई दिल्ली में आयोजित 7वें अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन एवं प्रदर्शनी-2026 में मध्यप्रदेश ने स्वच्छ एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों और भविष्य की कार्य योजना का प्रभावी प्रेजेंटेशन दिया। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमार स्वामी तथा भूटान के ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री एच.ई. ल्योनपो जेम त्शेरिंग तथा श्रीलंका के ऊर्जा मंत्री अनुरा करुणाथिलका, अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा म.प्र.  मनु श्रीवास्तव सहित देश-विदेश के ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूर्ण प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में निवेश-अनुकूल नीतियों, सुदृढ़ आधारभूत संरचना और पर्याप्त प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता से मध्यप्रदेश देश के अग्रणी ग्रीन एनर्जी हब के रूप में तेजी से उभर रहा है। सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा, हरित प्रौद्योगिकी, नवाचार, निवेश और अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। यह आयोजन स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने तथा सतत विकास के लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में मध्यप्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता 438 मेगावॉट से बढ़कर 11,000 मेगावाट हो गई है, जो लगभग 25 गुना वृद्धि है। पिछले 2 वर्षों में राज्य सरकार ने नवकरणीय ऊर्जा, पंप्ड हाइड्रो ऊर्जा भंडारण तथा बायोमास नीतियां लागू कर निवेश और नवाचार को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि 750 मेगावाट रीवा अल्ट्रा मेगा सौर परियोजना ने देश में पहली बार सौर ऊर्जा का टैरिफ कोयला आधारित विद्युत से भी कम स्थापित किया। इस परियोजना को वर्ल्ड बैंक ग्रुप प्रेसिडेन्ट्स अवार्ड फॉर एक्सीलेंस प्राप्त हुआ तथा इसकी केस स्टडी हावर्ड युनिवर्सिटी में पढ़ाई जाती है। वहीं 1,500 मेगावाट आगर-शाजापुर-नीमच सौर परियोजना में 2.14 रूपये प्रति यूनिट का रिकॉर्ड न्यूनतम सौर टैरिफ प्राप्त हुआ है और इससे भारतीय रेलवे को 8 राज्यों में हरित ऊर्जा उपलब्ध कराई जा रही है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 278 मेगावॉट क्षमता की देश की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर परियोजना का लोकार्पण 25 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया। इसके साथ ही 'सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना' के अंतर्गत लगभग 14,900 मेगावॉट क्षमता के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें किसानों और एमएसएमई क्षेत्र की उल्लेखनीय भागीदारी रही है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और ग्रिड स्थिरता को मजबूत करने के लिए राज्य में बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है। मुरैना की 440 मेगावाट सौर ऊर्जा एवं 880 मेगावाट-घंटा बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजना प्रदेश की पहली ऐसी परियोजना है, जिसमें प्रतिस्पर्धी दर पर विद्युत क्रय अनुबंध किए गए हैं। साथ ही 4 घंटे, 6 घंटे और 24 घंटे की सौर-सह-ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं पर भी कार्य प्रगति पर है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रूफटॉप सोलर योजना अंतर्गत 1,300 शासकीय भवनों पर 48 मेगावाट क्षमता विकसित की जा रही है, जबकि प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत प्रदेश के लगभग 1.5 लाख घरों में 566 मेगावॉट क्षमता के रूफटॉप सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम दावोस सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मध्यप्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियों, हरित ऊर्जा की अपार संभावनाओं और औद्योगिक क्षमताओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनेगा।

 

केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा तथा शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि देश जल्द ही 300 GW स्थापित गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता का आंकड़ा पार करेगा तथा प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना से 50 लाख से अधिक परिवार रूफटॉप सोलर का लाभ ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों ने नवकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और सभी राज्यों से सस्टेनेबल डेवलपमेंट, ऊर्जा दक्षता, पर्यावरण संरक्षण तथा स्वच्छ ऊर्जा के व्यापक उपयोग पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

 

प्रेजेंटेशन के मुख्य बिन्दु

4 घंटे बैटरी ऊर्जा भंडारण : ऐसी परियोजनाएँ जो सौर ऊर्जा को संग्रहित कर सायंकालीन पीक मांग के समय विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करती हैं तथा ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ाती हैं।

6 घंटे बैटरी ऊर्जा भंडारण : ये परियोजनाएँ अधिक अवधि तक ऊर्जा आपूर्ति प्रदान कर नवकरणीय ऊर्जा के बेहतर एकीकरण, मांग प्रबंधन एवं ग्रिड स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा एवं भंडारण परियोजनाएँ : सौर ऊर्जा एवं दीर्घावधि ऊर्जा भंडारण के संयोजन से विकसित ये परियोजनाएँ चौबीसों घंटे स्वच्छ एवं विश्वसनीय विद्युत उपलब्ध कराने में सक्षम हैं, जिससे उद्योगों, वितरण कंपनियों तथा डेटा सेंटर जैसे उच्च मांग वाले उपभोक्ताओं को ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त होगी।

एनआरईडी  की भूमिका : नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग, मध्य प्रदेश शासन राज्य में नवकरणीय ऊर्जा नीति निर्माण, निवेश प्रोत्साहन, परियोजना विकास तथा ऊर्जा संक्रमण से संबंधित कार्यक्रमों के समन्वय हेतु प्रमुख विभाग है। विभाग प्रदेश को स्वच्छ, सुरक्षित एवं सतत ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए कार्यरत है।

रूम्सल की भूमिका : रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड, मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड एवं सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) का संयुक्त उपक्रम है। रूम्सल राज्य में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा, फ्लोटिंग सोलर, हाइब्रिड नवकरणीय ऊर्जा तथा बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के विकास एवं क्रियान्वयन हेतु नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर रहा है। रूम्सल द्वारा विकसित नवाचार आधारित परियोजनाएँ मध्य प्रदेश को देश में ऊर्जा भंडारण एवं चौबीसों घंटे नवकरणीय ऊर्जा आपूर्ति के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित कर रही हैं।

Deepfake पर सरकार का बड़ा एक्शन, AI कंटेंट पर लेबल जरूरी, गैरकानूनी सामग्री अब 3 घंटे में हटानी होगी, नए नियम जान लें वरना पछताएंगे

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कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार होने वाले डीपफेक और अन्य हानिकारक कंटेंट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने नियामक व्यवस्था को और सख्त किया है। सरकार ने AI से तैयार कंटेंट पर स्पष्ट लेबल और पहचान योग्य मेटाडेटा उपलब्ध कराना अनिवार्य किया है। साथ ही, सरकारी या न्यायालय के आदेश के आधार पर गैरकानूनी जानकारी हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 5 अगस्त 2026 को लोकसभा में दी।

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AI से बने कंटेंट की पहचान होगी आसान

 

सरकार के अनुसार, 10 फरवरी 2026 को आईटी नियम, 2021 में संशोधन कर कृत्रिम रूप से उत्पन्न सूचना (SGI), जिसमें डीपफेक और AI-जनित कंटेंट शामिल हैं, से होने वाले नुकसान से निपटने के लिए नियामक ढांचे को मजबूत किया गया। नए प्रावधानों के तहत मध्यस्थों को AI-जनित सामग्री के लिए स्पष्ट लेबलिंग और ट्रेस किए जा सकने वाले मेटाडेटा की व्यवस्था करनी होगी। इसका उद्देश्य यूजर्स को यह समझने में मदद करना है कि कोई सामग्री वास्तविक है या कृत्रिम रूप से तैयार की गई है और इसके जरिए धोखाधड़ी तथा दुरुपयोग को रोकना है।

 

36 घंटे की जगह अब 3 घंटे में हटानी होगी गैरकानूनी सामग्री

 

नए नियमों में कंटेंट हटाने की समयसीमा को भी कम किया गया है। सरकार के अनुसार, गैरकानूनी जानकारी हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है। वहीं कुछ संवेदनशील शिकायतों के निपटारे की समयसीमा भी कम की गई है।

 

डीपफेक बनाने और फैलाने पर भी नियम सख्त

 

आईटी नियमों के तहत मध्यस्थों को ऐसी जानकारी को होस्ट, प्रदर्शित, अपलोड, प्रकाशित या साझा करने से रोकने के लिए उचित सावधानी बरतनी होगी, जिसमें AI के जरिए किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण करना, जानबूझकर गलत या भ्रामक जानकारी देना, निजता का उल्लंघन करना या राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करना शामिल है।

 

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि AI से तैयार बाल यौन शोषण सामग्री, बिना सहमति की अंतरंग तस्वीरें, प्रतिरूपण और अन्य हानिकारक सामग्री के खिलाफ प्लेटफॉर्म को रोकथाम और तत्काल कार्रवाई करनी होगी।

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किन कानूनों के तहत हो सकती है कार्रवाई?

 

डीपफेक और AI से जुड़े अपराधों पर आईटी एक्ट, 2000 के अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत भी कार्रवाई का प्रावधान है। BNS की धारा 319 प्रतिरूपण के जरिए धोखाधड़ी से संबंधित है, जबकि धारा 336 में धोखाधड़ी के लिए झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाने जैसे कृत्य शामिल हैं। धारा 353 गलत या भ्रामक बयान, अफवाह या रिपोर्ट के जरिए गलत सूचना और दुष्प्रचार फैलाने से जुड़े मामलों पर लागू हो सकती है। संगठित साइबर अपराधों पर धारा 111 के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।

 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भी बढ़ी जिम्मेदारी

 

भारत में 50 लाख या उससे अधिक पंजीकृत यूजर्स वाले महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थों (SSMI) पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां हैं। इनमें गैरकानूनी कंटेंट का पता लगाने और उसके प्रसार को सीमित करने के लिए स्वचालित तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल, अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित करना और भारत में संबंधित अधिकारियों की नियुक्ति जैसी जिम्मेदारियां शामिल हैं।

 

डीपफेक की शिकायत कहां करें?

 

सरकार के अनुसार, नागरिक National Cyber Crime Reporting Portal के जरिए डीपफेक, वित्तीय धोखाधड़ी और कंटेंट के दुरुपयोग की शिकायत कर सकते हैं। इसके लिए cybercrime.gov.in पोर्टल उपलब्ध है और 1930 हेल्पलाइन भी संचालित है। अगर किसी मध्यस्थ के शिकायत अधिकारी से समस्या का समाधान नहीं होता है, तो उपयोगकर्ता Grievance Appellate Committee (GAC) के माध्यम से ऑनलाइन अपील कर सकते हैं।

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सरकार ने डीपफेक डिटेक्शन पर भी बढ़ाया फोकस

 

IndiaAI Mission के तहत सुरक्षित और भरोसेमंद AI को बढ़ावा देने के लिए 13 जिम्मेदार AI परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें डीपफेक का पता लगाने से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं। IIT जोधपुर और IIT मद्रास द्वारा विकसित मल्टी-एजेंट फ्रेमवर्क तथा IIT खड़गपुर की रियल-टाइम वॉयस डीपफेक डिटेक्शन सिस्टम जैसी पहलें इसमें शामिल हैं।

देश में अव्वलः 38.8 मिलियन मीट्रिक टन दुग्ध उत्पादन के साथ उत्तर प्रदेश शीर्ष पर

CM Yogi Adityanath

 दुग्धशाला विकास विभाग की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बुधवार को सभी 75 जनपदों में डेयरी कॉन्क्लेव-2026 आयोजित किया गया। दुग्धशाला विकास विभाग एवं पशुपालन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में यह कार्यक्रम हुआ। दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने बताया कि वर्ष 2024-25 में भारत लगभग 248 मिलियन मीट्रिक टन दुग्ध उत्पादन के साथ विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है, जिसमें उत्तर प्रदेश लगभग 38.8 मिलियन मीट्रिक टन दुग्ध उत्पादन एवं लगभग 16 प्रतिशत योगदान के साथ देश में प्रथम स्थान पर है। डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण, रोजगार सृजन एवं किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम है।

 

उन्होंने बताया कि नंद बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं से कुल 17,994 लाभार्थियों को लाभान्वित किया जा रहा है तथा 4,951 प्रारम्भिक दुग्ध सहकारी समितियों के गठन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 2.25 लाख रोजगार सृजित हुए हैं। इस कार्यक्रम में पूरे प्रदेश में 2100 नव चयनित मुख्यमंत्री स्वदेशी गो-सवंर्धन योजना, 1500 से अधिक मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना तथा 450 से अधिक नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना के लाभार्थियों को चयन पत्र वितरित किए गये हैं। साथ ही डेयरी क्षेत्र में 28,000 करोड़ रुपये से अधिक के 829 एमओयू  किए गए हैं। उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 के अंतर्गत 39 लाख लीटर प्रतिदिन दुग्ध प्रसंस्करण एवं अवशीतन क्षमता में वृद्धि हुई है तथा लगभग 10,000 रोजगार सृजित हुए हैं। निवेशकों को डीबीटी के माध्यम से लगभग 42 करोड़ रुपये का अनुदान भी उपलब्ध कराया गया है।

 

कॉन्क्लेव में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पशुपालन एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों, दुग्ध संघों के प्रतिनिधियों, प्रगतिशील दुग्ध उत्पादक किसानों, पशुपालकों, स्वयं सहायता समूहों तथा दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विभागीय अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने आधुनिक डेयरी तकनीकों वैज्ञानिक पशुपालन, पशु स्वास्थ्य, संतुलित पशु आहार तथा विभागीय योजनाओं की जानकारी दी।

यूपी में परिवहन प्रवर्तन को मिलेगी नई ताकत, डंपिंग यार्ड निर्माण को जल्द मिलेगी रफ्तार


लखनऊ, 5 अगस्त। योगी सरकार प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को और बेहतर व व्यवस्थित बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। इसी दिशा में मंडलीय मुख्यालयों पर डिटेंशन/डंपिंग यार्ड विकसित किए जा रहे हैं। प्रदेश के पांच जिलों में इन यार्ड के निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था सीएनडीएस को कुल 6.03 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई है।

 

परिवहन विभाग के मुताबिक बुलंदशहर, शामली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और बाराबंकी में डिटेंशन/डंपिंग यार्ड के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। बाराबंकी, पीलीभीत और शाहजहांपुर के लिए दूसरी और शेष किश्त के रूप में क्रमश: 1.62 करोड़, 1.44 करोड़ और 1.34 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसमें मिट्टी भराई के लिए 16.04 लाख रुपये भी शामिल हैं। स्वीकृत राशि को कार्यदायी संस्था के खाते में भेजने की कार्रवाई की जा रही है।

 

इसके साथ ही लखनऊ और औरैया में भी डिटेंशन यार्ड बनाने की दिशा में काम आगे बढ़ा है। इन दोनों जिलों में नि:शुल्क भूमि उपलब्ध होने की सूचना मिली है। लखनऊ के लिए 2.55 करोड़ रुपये और औरैया के लिए 4.07 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन दोनों मामलों में प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति जारी होने के साथ धनराशि कार्यदायी संस्था के खाते में भेजी जा चुकी है।

 

वहीं, उन्नाव और अलीगढ़ में भी डिटेंशन यार्ड के लिए नि:शुल्क भूमि उपलब्ध होने के बाद आगणन (आकलन) तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। आगणन का परीक्षण समिति द्वारा किया जा चुका है और इसे शासन को भेजने की तैयारी है।

 

अपर परिवहन आयुक्त प्रवर्तन केडी सिंह गौर ने बताया कि प्रदेश के कई जनपदों में पकड़े गए वाहनों को थानों में निरुद्ध करने की समस्या है। थानों में जगह न होने के कारण वाहनों को चालान करके छोड़ना पड़ता है। वाहनों को निरुद्ध करने के लिए सुरक्षित अभिरक्षा के लिए स्थान की अनुपलब्धता, प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई के लिए बड़ी बाधा है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित सड़क सुरक्षा कोष प्रबंधन समिति ने भी प्रथम चरण में प्रदेश के सभी मंडल मुख्यालय वाले जनपदों में डिटेंशन यार्ड बनाने पर बल दिया है और यह कार्य प्रगति पर है।

 

प्रवर्तन व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

योगी सरकार की इस पहल से परिवहन विभाग की प्रवर्तन कार्रवाई के दौरान रोके जाने वाले वाहनों को रखने के लिए बेहतर और व्यवस्थित जगह उपलब्ध होगी। डंपिंग यार्ड विकसित होने से वाहनों के रख-रखाव और प्रवर्तन व्यवस्था को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

 

वाहनों की निगरानी व रिकॉर्ड प्रबंधन होगा बेहतर

डिटेंशन/डंपिंग यार्ड बनने से परिवहन विभाग को प्रवर्तन कार्रवाई में सुविधा मिलेगी। जांच के दौरान रोके या जब्त किए गए वाहनों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रखने के लिए निर्धारित स्थान उपलब्ध होगा। इससे सड़कों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर जब्त वाहनों को खड़ा करने की समस्या कम होगी। वाहनों की निगरानी और रिकॉर्ड प्रबंधन भी बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। मंडलीय मुख्यालयों पर डंपिंग यार्ड विकसित होने से परिवहन विभाग की प्रवर्तन व्यवस्था मजबूत होगी और कार्रवाई को अधिक व्यवस्थित ढंग से संचालित करने में मदद मिलेगी।

Ather का सबसे सस्ता Electric Scooter, कीमत सुनकर रह जाएंगे हैरान, 120Km Range के साथ आएगा Konarc

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Ather Energy भारतीय इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी में है। कंपनी ने अपने नए EL Platform आधारित फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर का पहला वीडियो टीजर जारी कर दिया है। इस नए इलेक्ट्रिक स्कूटर का नाम Ather Konarc बताया गया है। कंपनी इसे 29 अगस्त 2026 को होने वाले Ather Annual Community Day के दौरान भारतीय बाजार में पेश करेगी।

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सबसे खास बात यह है कि कंपनी के CEO और को-फाउंडर तरुण मेहता ने नए इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमत को लेकर भी बड़ा संकेत दिया है। उनके मुताबिक, Ather EL Platform वाले इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमत 1 लाख रुपये से 1.25 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच हो सकती है।

TVS iQube और Bajaj Chetak से होगा मुकाबला

अगर Ather Konarc की कीमत 1 लाख से 1.25 लाख रुपये के बीच रहती है, तो इसका मुकाबला भारतीय बाजार में पहले से मौजूद कई लोकप्रिय इलेक्ट्रिक स्कूटरों से होगा। इसमें TVS iQube, Bajaj Chetak और Hero Vida VX2 जैसे मॉडल प्रमुख प्रतिद्वंद्वी हो सकते हैं।

 

1 से 1.25 लाख रुपये के बीच होगी कीमत

 

Ather लंबे समय से एक किफायती फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर पर काम कर रही है। पहले माना जा रहा था कि कंपनी इसे 1 लाख रुपये से कम कीमत में लॉन्च कर सकती है, लेकिन अब कंपनी के CEO के संकेतों के बाद यह संभावना कम नजर आ रही है। अगर कीमत इसी रेंज में रहती है, तो Ather Konarc कंपनी का सबसे किफायती इलेक्ट्रिक स्कूटर बन सकता है। इसकी कीमत Ather Rizta से थोड़ी कम रखे जाने की उम्मीद है।

 

वीडियो टीजर में दिखा स्कूटर का डिजाइन

नए टीजर वीडियो में स्कूटर का पूरा डिजाइन सामने नहीं आया है, लेकिन इसके कई प्रमुख हिस्सों की झलक मिली है। वीडियो में फ्रंट व्हील, डिस्क ब्रेक, फ्रंट एप्रन, रियर सेक्शन और लाइटिंग सेटअप दिखाई देता है। स्कूटर के फ्रंट में पूरी चौड़ाई में फैला LED DRL दिया जा सकता है। वहीं हेडलैंप को हैंडलबार पर रखा गया है, जैसा कि पारंपरिक स्कूटरों में देखने को मिलता है। स्कूटर के डिजाइन में ज्यादा आक्रामक स्टाइलिंग के बजाय फैमिली-केंद्रित और प्रैक्टिकल डिजाइन देखने को मिल सकता है।

 

Konarc नाम के पीछे क्या है कनेक्शन?

Ather ने अपने नए इलेक्ट्रिक स्कूटर को Konarc नाम दिया है। टीजर वीडियो में सूर्य को उगते हुए दिखाया गया है, जिससे माना जा रहा है कि कंपनी ने ओडिशा के प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर से प्रेरणा ली है। स्कूटर के फ्रंट और रियर हिस्से में LED लाइटिंग सेटअप दिया जा सकता है। पीछे की तरफ बड़ा और थोड़ा भारी डिजाइन, ऑल-LED टेल लैंप और टर्न इंडिकेटर्स देखने को मिल सकते हैं।

 

100-120 km तक की रेंज मिलने की उम्मीद

Ather Konarc के आधिकारिक स्पेसिफिकेशन अभी सामने नहीं आए हैं। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें 100 से 120 किलोमीटर तक की राइडिंग रेंज मिलने की उम्मीद है। स्कूटर को फैमिली यूज को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसमें लंबी और चौड़ी सीट के साथ पर्याप्त अंडर-सीट स्टोरेज मिलने की उम्मीद है।

 

2 kWh से 5 kWh तक की बैटरी सपोर्ट करेगा EL Platform

 

Ather का नया EL Platform कंपनी के आगामी किफायती इलेक्ट्रिक स्कूटरों के लिए महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है। कंपनी के मुताबिक इसे 26 लाख किलोमीटर से अधिक के फील्ड डेटा के आधार पर विकसित किया गया है। यह एक फ्लेक्सिबल प्लेटफॉर्म है, जिसे अलग-अलग आकार और सेगमेंट के इलेक्ट्रिक स्कूटरों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी ने पुष्टि की है कि EL Platform 2 kWh से 5 kWh तक के बैटरी पैक को सपोर्ट कर सकता है। Konarc को पहले कंपनी के अंदर EL01 कोडनेम से जाना जाता था।

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Ather Konarc कब लॉन्च होगा?

Ather Konarc को 29 अगस्त 2026 को कंपनी के Annual Community Day के दौरान आधिकारिक तौर पर पेश किए जाने की उम्मीद है। लॉन्च के समय इसकी कीमत, बैटरी क्षमता, रेंज और अन्य फीचर्स की पूरी जानकारी सामने आएगी।

 

Ather Konarc की संभावित खासियतें

  • संभावित कीमत : 1 लाख-1.25 लाख रुपए (एक्स-शोरूम)
  • लॉन्च/डेब्यू : 29 अगस्त 2026
  • प्लेटफॉर्म : Ather EL Platform
  • संभावित रेंज : 100-120 km
  • बैटरी सपोर्ट : 2 kWh-5 kWh
  • LED DRL और LED लाइटिंग
  • फैमिली-फोकस्ड डिजाइन
  • लंबी और चौड़ी सीट
  • पर्याप्त अंडर-सीट स्टोरेज 

मध्य प्रदेश में बस सफर हुआ महंगा, 2 रुपए प्रति किलोमीटर से देना होगा किराया

भोपाल। मध्य प्रदेश में अब बस का सफर महंगा हो गया है। राज्य सरकार ने राज्य में चलने वाली सभी प्रकार की यात्री बसों के किराए में बदलाव करते हुए नई दरें लागू कर दी हैं। सरकारी राजपत्र में जारी अधिसूचना के अनुसार, सामान्य बसों के मूल किराए के साथ-साथ रात्रि सेवा, डीलक्स, स्लीपर और एसी बसों के किराए में बढ़ोत्तरी कर दी गई  है। । नए आदेश के तहत अब साधार बस का किराया 2 रुपये किलोमीटर होगा, इसके साथ ही यात्रा के किसी भी हिस्से के लिए न्यूनतम किराया 10 रुपये देना अनिवार्य होगा। अब तक बस का किराय 1.25 रुपए प्रति किलोमीटर था। 
 

कैटेगरी के हिसाब से कितनी हुई बढ़ोतरी?

सामान्य बसों के किराए में 2 रुपए किलोमीटर 

रात्रि बस सेवा: सामान्य किराए से 10% अधिक

डीलक्स बस (नॉन ए.सी.): सामान्य किराए से 25% अधिक

स्लीपर बस: सामान्य किराए से 40% अधिक

डीलक्स बस (ए.सी.): सामान्य किराए से 50% अधिक

सुपर लग्जरी कोच (ए.सी.): सामान्य किराए से 75% अधिक

 

दरअसल प्रदेश  निजी बस ऑपरेटर लंबे समय से डीजल, स्पेयर पार्ट्स, बीमा, टैक्स और कर्मचारियों के वेतन में लगातार बढ़ रही लागत का हवाला देकर किराया बढ़ाने की मांग कर रहे थे। बस संचालकों ने मांग पूरी नहीं होने पर 7 अगस्त से आंदोलन और अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी भी दी थी। सरकार और बस ऑपरेटरों के बीच हुई चर्चा के बाद किराया संशोधन पर सहमति बनी थी। किराया बढ़ने का सीधा असर रोजाना बस से सफर करने वाले यात्रियों पर पड़ेगा। विशेष रूप से नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों तक आने-जाने वाले यात्रियों पर पड़ेगा। वहीं, बस संचालकों का कहना है कि बढ़ी हुई परिचालन लागत के कारण किराया संशोधन आवश्यक हो गया था और इससे परिवहन सेवाओं का संचालन सुचारु रखने में मदद मिलेगी।

 

 

 

यूपी में आबकारी विभाग का नया कीर्तिमान, 4 माह में 20,862 करोड़ से अधिक का राजस्व

Excise Revenue UP: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का आबकारी विभाग राजस्व संग्रह और अवैध शराब के विरुद्ध कार्रवाई, दोनों मोर्चों पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में विभाग ने 20,862.42 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

यह पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि की तुलना में 2,279.23 करोड़ रुपए यानी 12.27 प्रतिशत अधिक है। अकेले जुलाई महीने में विभाग ने 5,052.86 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त किया, जो पिछले वर्ष के जुलाई की तुलना में 16.04 प्रतिशत अधिक रहा।

71,278 करोड़ का राजस्व लक्ष्य निर्धारित

आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार की पारदर्शी नीतियों, प्रभावी निगरानी और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था के कारण विभाग लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में आबकारी विभाग के लिए 71,278 करोड़ रुपए का राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे हासिल करने के लिए विभाग पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि समाज को नशे के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखना भी है। 

819 आरोपियों को भेजा गया जेल

आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि राजस्व वृद्धि के साथ-साथ अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और तस्करी पर भी सख्त कार्रवाई जारी है। अप्रैल से जून 2026 के दौरान 29,294 अभियोग दर्ज कर अवैध मदिरा एवं मादक पदार्थ बरामद किए गए। इस दौरान 4,673 लोगों को गिरफ्तार किया गया, 819 आरोपियों को जेल भेजा गया तथा तस्करी में प्रयुक्त 30 वाहन जब्त किए गए। जुलाई में भी 9,769 अभियोग दर्ज कर 1,704 लोगों की गिरफ्तारी कर 271 को जेल भेजा गया।

गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर : 184 संदिग्ध मामले, 22 बच्चों की मौत से उत्तर गुजरात और सौराष्ट्र में दहशत

Chandipura virus in Gujarat

Chandipura Virus Outbreak: मानसूनी मौसम के बीच गुजरात में चांदीपुरा वायरस (CHPV) का आतंक चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। राज्यभर से अब तक 184 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें से 35 से अधिक मरीजों में इस वायरस की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। इस जानलेवा संक्रमण के कारण 15 वर्ष से कम उम्र के लगभग 22 मासूम बच्चों की मौत होने की खबर है। इससे विशेष रूप से उत्तर गुजरात और सौराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों के अभिभावकों में भारी डर और दहशत का माहौल है।

अस्पतालों की स्थिति और वायरस के मुख्य लक्षण

वेबदुनिया संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, हिम्मतनगर, गांधीनगर, राजकोट, पाटन और भावनगर के सिविल अस्पतालों के बाल रोग विभाग (Pediatric Wards) चिंतित माता-पिता से भरे नजर आ रहे हैं। बच्चों में अचानक तेज बुखार, उल्टी, चक्कर आना, ऐंठन (दौरे पड़ना) और अत्यधिक सुस्ती जैसे लक्षण दिखने पर परिजन तुरंत अस्पताल की ओर भाग रहे हैं। सैंडफ्लाई (रेत मक्खी) के काटने से फैलने वाले इस वायरस के लक्षण दिखने के बाद बच्चे की हालत बहुत तेजी से गंभीर हो जाती है, जिससे पूरे राज्य में चिंता का माहौल बना हुआ है।

15 साल से कम उम्र के बच्चों में ही क्यों फैलता है यह वायरस?

GCS मेडिकल कॉलेज के चाइल्ड स्पेशलिस्ट के अनुसार, चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से 15 साल से कम उम्र के बच्चों को ही निशाना बनाता है, क्योंकि इस उम्र में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) पूरी तरह विकसित नहीं होती है और मस्तिष्क को सुरक्षा देने वाला 'ब्लड-ब्रेन बैरियर' कवच कमजोर होने के कारण यह न्यूरोट्रॉपिक वायरस खून से सीधे दिमाग तक पहुंचकर सूजन (Encephalitis) पैदा कर देता है। इसके अलावा, जमीन से कम ऊंचाई पर उड़ने वाली सैंडफ्लाई (रेत मक्खी) जमीन पर खेलते या नीचे सोए मासूम बच्चों को आसानी से काट लेती है और बच्चों का छोटा शरीर वायरस के हमले के बाद तेज बुखार तथा ऐंठन (दौरे) जैसे गंभीर लक्षणों को तेजी से सहन नहीं कर पाता है।

स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह मुस्तैद

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के सीधे मार्गदर्शन में राज्य सरकार का स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह से मुस्तैद होकर काम कर रहा है। सिविल अस्पतालों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध लक्षणों वाले मरीजों को बिना किसी देरी के ऑक्सीजन और वेंटिलेटर सुविधा वाले आईसीयू (ICU) में भर्ती किया जाए। इसके साथ ही पशुपालन वाले ग्रामीण क्षेत्रों में सैंडफ्लाई के नियंत्रण के लिए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है।

क्या कहते हैं स्वास्थ्य मंत्री?

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि फिलहाल चांदीपुरा वायरस के खिलाफ कोई विशेष वैक्सीन (टीका) या निश्चित दवा उपलब्ध नहीं है। इस स्थिति से निपटने के लिए डॉक्टरों और शोधकर्ताओं की एक विशेष टीम द्वारा वैज्ञानिक तरीके से इस वायरस के खिलाफ प्रभावी दवा की खोज और नई वैक्सीन विकसित करने के लिए गहन शोध (Research) शुरू कर दिया गया है, ताकि भविष्य में बच्चों को इस खतरे से बचाया जा सके।

नागरिकों के लिए सावधानी के उपाय और अपील

स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और प्रशासन का सहयोग करने की विनम्र अपील की है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि कच्चे मकानों या मिट्टी की दीवारों की दरारों को तुरंत भरवाएं और बच्चों को पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनाएं। यदि बच्चे में बुखार या ऐंठन जैसे कोई भी प्रारंभिक लक्षण दिखाई दें, तो बिना समय गंवाए तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल से संपर्क करने का अनुरोध किया गया है।

CJP प्रोस्टेट पर बोले CJI- युवाओं की बात सुननी चाहिए, हिंसा का जवाब हिंसा नहीं हो सकता

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को छात्र प्रदर्शनकारियों से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान अधिकारियों और सुरक्षा बलों से संयम बरतने की सलाह दी। कोर्ट ने कहा कि युवा छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा रोकने के लिए अगर हिंसक तरीके अपनाए गए, तो इससे स्थिति और बिगड़ सकती है।

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भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की कथित भूमिका को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की। CJI सूर्यकांत ने कहा कि हिंसा का जवाब हिंसा नहीं है, युवाओं की बात सुनना जरूरी है। याचिका में दिल्ली समेत देश के अन्य हिस्सों में छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और कथित पत्थरबाजी को लेकर कार्रवाई की मांग की गई है।

 

 सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा से संबंधित अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है। कोर्ट ने कहा कि सभी मामलों की सुनवाई एक साथ की जाएगी।

 

'अधिकारियों को बहुत सावधानी से कदम उठाना होगा'

CJI सूर्यकांत ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण मार्च के दौरान सुरक्षा बलों और अधिकारियों को भी संयम बरतना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए बेहद सावधानी से काम करना होगा कि युवा हिंसा की ओर न बढ़ें।

कोर्ट ने कहा कि हिंसा का जवाब हिंसा से देने से स्थिति और गंभीर हो सकती है। पीठ ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों की बात सुनना और यह समझना कि वे किस मुद्दे को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, स्थिति को संभालने का सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कानून-व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों के विवेक पर भरोसा जताते हुए कहा कि आगे की कार्रवाई से पहले केंद्र सरकार का पक्ष भी देखा जाएगा।

 

20 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई थी हिंसा

 

यह मामला 20 जुलाई को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। यह मार्च NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में चल रहे छात्र प्रदर्शनों के बीच आयोजित किया गया था। दिल्ली के जंतर-मंतर और आसपास के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प की खबरें सामने आई थीं। दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस दौरान 65 से अधिक प्रदर्शनकारी और 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

 

पैलेट गन के इस्तेमाल पर भी उठा था विवाद

प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर प्लास्टिक पैलेट के इस्तेमाल को लेकर बाद में राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया। रिपोर्टों में दावा किया गया कि कई प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आईं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार CRPF की एक आंतरिक जांच में पाया गया कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान Rapid Action Force (RAF) के एक जवान ने पैलेट गन से सात राउंड फायर किए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से पांच पैलेट प्रदर्शनकारियों को लगे थे।

 

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

 

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान प्रशासन और सुरक्षा बलों को संयम से काम लेना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि युवाओं के विरोध को समझना और उनकी बात सुनना जरूरी है, क्योंकि बल प्रयोग से तनाव कम होने के बजाय स्थिति और बिगड़ सकती है। अब इस मामले के साथ छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी अन्य लंबित याचिकाओं पर भी संयुक्त रूप से सुनवाई की जाएगी।

15 अगस्त 2026: स्कूल या कॉलेज में भाषण देना है? चुनें ये 5 दमदार टॉपिक्स

The image shows a school student delivering a speech from a podium, with the Tricolour in the background and the Red Fort, India Gate, and Qutub Minar visible on the other side.

15 अगस्त आने वाला है। इस बार भारत अपना 80वां स्वतं‍त्रता दिवस मनाने जा रहा है। स्कूल और कॉलेजों में सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर तैयारियां प्रारंभ हो गई है। यदि आप भी अपने स्कूल या कॉलेज में भाषण प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं तो यहाँ 15 अगस्त को स्कूल या कॉलेज में भाषण देने के लिए 5 प्रासंगिक और प्रभावशाली टॉपिक्स दिए गए हैं।

 

1. “विकसित भारत @2047: हमारी सोच, हमारी ज़िम्मेदारी”

विषय: 2047 में भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा।

प्रमुख बातें: स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों के भारत को साकार करने में आज की युवा पीढ़ी का योगदान, शिक्षा, तकनीक और स्वच्छता में हमारी व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी।

किसके लिए उपयुक्त: कॉलेज छात्र या सीनियर स्कूल छात्र।

 

2.”आज़ादी का वास्तविक अर्थ: अधिकार या कर्तव्य?”

विषय: सिर्फ़ मौलिक अधिकार माँगना ही आज़ादी नहीं है, बल्कि नागरिक कर्तव्यों का पालन करना भी स्वतंत्रता को बनाए रखने का आधार है।

प्रमुख बातें: यातायात नियमों का पालन, पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनना।

किसके लिए उपयुक्त: स्कूल और कॉलेज दोनों के विद्यार्थियों के लिए।

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3.”डिजिटल क्रांति से आत्मनिर्भर भारत: युवाओं की भूमिका”

विषय: आधुनिक दौर में भारत का तकनीकी और आर्थिक रूप से सशक्त होना।

प्रमुख बातें: यूपीआई (UPI), लोकल फ़ॉर वोकल, स्टार्ट-अप कल्चर और साइंस/तकनीक के क्षेत्र में भारत की वैश्विक पहचान।

किसके लिए उपयुक्त: कॉलेज या टेक-ओरिएंटेड छात्रों के लिए।

 

4.”गुमनाम नायकों को नमन: स्वतंत्रता संग्राम के अनदेखे पन्ने”

विषय: भगत सिंह, गांधीजी या नेहरू जी के अलावा उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों की गाथा जिन्होंने देश के लिए बलिदान दिया।

प्रमुख बातें: जनजातीय नायक (जैसे बिरसा मुंडा), महिला क्रांतिकारी और स्थानीय वीरों के योगदान को याद करना।

किसके लिए उपयुक्त: स्कूल के छात्रों (मिडिल और हाई स्कूल) के लिए।

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5.”विविधता में एकता: भारत की सबसे बड़ी ताक़त”

विषय: विभिन्न भाषाओं, धर्मों और संस्कृतियों के बावजूद देश का एक सूत्र में बँधे रहना।

प्रमुख बातें: समाज में भाईचारा, सहिष्णुता और राष्ट्रीय एकता का संदेश देने वाला पारंपरिक और सदाबहार विषय।

किसके लिए उपयुक्त: किसी भी वर्ग/कक्षा के छात्रों के लिए।

 

भाषण की शुरुआत और अंत के लिए सुझाव:

शुरुआत: किसी देशभक्ति शायरी या जोशीले नारे से करें (जैसे: “कुछ नशा तिरंगे की आन का है, कुछ नशा मातृभूमि की शान का है…”)।

अंत: हमेशा भविष्य के सकारात्मक दृष्टिकोण और “जय हिंद, जय भारत!” के नारे के साथ करें।