Batwara 1947 Review: विभाजन के दर्द के बीच इंसानियत ने कायम कि मिसाल, सनी देओल की फिल्म ने जीता लोगों का दिल

Batwara 1947 Review: 1947 का विभाजन भारतीय इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में से एक रहा है। इस विषय पर बनी फिल्मों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि कहानी कहीं धर्म, राजनीति और हिंसा के दायरे तक सीमित न रह जाए। Batwara 1947 की खासियत यह है कि राजकुमार संतोषी विभाजन की त्रासदी के बीच भी अपना ध्यान इंसान और उसके रिश्तों पर बनाए रखते हैं।

यह फिल्म सिर्फ भारत-पाकिस्तान की सीमा बनने की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जिनकी जिंदगी उस सीमा के साथ ही बदल गई। जो घर अपना था, वह अचानक पराया हो गया। जो पड़ोसी वर्षों से परिवार का हिस्सा था, वह धर्म के नाम पर अजनबी बना दिया गया। इसी माहौल में फिल्म इंसानियत का सबसे जरूरी सवाल सामने रखती है-क्या नफरत के दौर में भी इंसान दूसरे इंसान के लिए खड़ा हो सकता है?

सनी देओल के करियर का नया चैप्टर

सनी देओल के लिए ‘कमबैक’ शब्द पिछले कुछ समय से लगातार इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन Batwara 1947 देखने के बाद लगता है कि यह सिर्फ वापसी नहीं, बल्कि उनके अभिनय के एक नए दौर की शुरुआत है। सिकंदर मिर्जा के किरदार में सनी देओल अपनी आवाज, व्यक्तित्व और गुस्से का प्रभावी इस्तेमाल करते हैं। हालांकि उनका सबसे असरदार अभिनय उन सीन्स में दिखाई देता है, जहां वह ऊंची आवाज में नहीं, बल्कि अपनी आंखों और भावनाओं से बात करते हैं।

सिकंदर का गुस्सा सिर्फ हिंसा के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस इंसानियत के लिए है जो उसके आसपास खत्म होती जा रही है। एक बुजुर्ग हिंदू महिला को बचाने के लिए भीड़ के सामने खड़े होने वाला उसका किरदार फिल्म के मूल संदेश को मजबूती देता है।

शबाना आजमी का काम

शबाना आजमी की ‘माई’ इस कहानी का भावनात्मक केंद्र हैं। वह सिर्फ एक पीड़ित महिला नहीं हैं। उनके किरदार में आत्मसम्मान, जिद, हंसी, समझदारी और अपने घर से गहरा लगाव है। शबाना इस भूमिका को इतनी सहजता से निभाती हैं कि धीरे-धीरे माई किसी फिल्मी किरदार की बजाय अपने परिवार की किसी बुजुर्ग महिला जैसी महसूस होने लगती हैं। सनी देओल और शबाना आजमी के बीच का रिश्ता फिल्म का सबसे खूबसूरत हिस्सा है। धर्म की दीवारों के बीच पनपता मां-बेटे जैसा यह रिश्ता दिखाता है कि इंसानी रिश्ते किसी धर्म या सीमा के मोहताज नहीं होते।

करण देओल की एक्टिंग

सनी देओल के सामने स्क्रीन शेयर करना करण देओल के लिए आसान चुनौती नहीं थी। इसके बावजूद वह कई दृश्यों में आत्मविश्वास के साथ अपनी जगह बनाते हैं। उनकी संवाद अदायगी में विश्वास है और भावनात्मक तथा टकराव वाले दृश्यों में उनकी ऊर्जा दिखाई देती है। सबसे अच्छी बात यह है कि वह अपने पिता की शैली को दोहराने के बजाय अपने किरदार के लिए अलग अंदाज तलाशते हैं।

प्रीति जिंटा और अली फजल का प्रभाव

प्रीति जिंटा की वापसी फिल्म में सिर्फ नॉस्टैल्जिया नहीं जोड़ती, बल्कि कहानी के भावनात्मक पक्ष को मजबूती देती है। अली फजल अपने शांत और संवेदनशील अभिनय से फिल्म की तीव्रता के बीच कुछ सुकून भरे पल लेकर आते हैं। वहीं अभिमन्यु सिंह का याकूब पहलवान कट्टर सोच का प्रतिनिधित्व करता है, जहां इंसान की पहचान से पहले उसका धर्म देखा जाता है। पूरी सपोर्टिंग कास्ट मिलकर उस दौर के टूटते समाज की तस्वीर को विश्वसनीय बनाती है।

1947 का लाहौर दिखा पर्दे पर

फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन, सिनेमैटोग्राफी, कॉस्ट्यूम, लोकेशन और बैकग्राउंड स्कोर मिलकर 1947 के लाहौर का माहौल तैयार करते हैं। राजकुमार संतोषी मूल कहानी को सिर्फ मंचीय प्रस्तुति की तरह शूट नहीं करते, बल्कि उसे बड़े पर्दे के लिए विस्तार देते हैं। गलियां, घर, भीड़ और बदलता सामाजिक माहौल फिल्म को एक मजबूत सिनेमाई पहचान देते हैं। दूसरे हिस्से में कहानी का भावनात्मक असर और गहरा होता जाता है। क्लाइमैक्स के बारे में ज्यादा बताना उचित नहीं होगा, क्योंकि उसका प्रभाव तभी महसूस होगा जब दर्शक उसे खुद देखें।

Batwara 1947 की सबसे बड़ी सफलता यह है कि यह विभाजन की हिंसा दिखाते हुए भी नफरत को बढ़ावा नहीं देती। इसके बजाय यह इंसानियत को केंद्र में रखती है। फिल्म एक बेहद जरूरी सवाल छोड़ जाती है-जब पूरी दुनिया आपको किसी से नफरत करने की वजह दे रही हो, तब क्या आप फिर भी इंसानियत और प्रेम को चुन सकते हैं? सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी इस बार अपने गुस्से को ज्यादा संवेदनशील और परिपक्व रूप देती है। फिल्म का जवाब तलवार या हिंसा में नहीं, बल्कि रिश्तों और इंसानियत में मिलता है। हम फिल्म को 5 में से 4 स्टार रेटिंग देते हैं।

Falguni Pathak: मुंबई में फाल्गुनी पाठक के नवरात्रि शो का टिकट प्राइस 2.04 लाख, फैंस बोले-‘ये तो खुल्लम-खुल्ला लूट’

Falguni Pathak: मुंबई में नवरात्रि का माहौल अभी से बनने लगा है, लेकिन इस बार सिर्फ़ फाल्गुनी पाठक का गरबा म्यूज़िक ही चर्चा में नहीं है। सिंगर के ‘नवरात्रि उत्सव 2026’ के टिकट की कीमतों ने ऑनलाइन बहस छेड़ दी है। टिकट की कीमत 2,200 से शुरू होकर 2.04 लाख तक है। नौ रातों तक चलने वाला यह इवेंट मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक होगा।

कई फ़ैन्स के लिए, फाल्गुनी पाठक के मशहूर गरबा गानों पर डांस करने का उत्साह इवेंट में शामिल होने की लागत की वजह से थोड़ा कम हो गया है। हालांकि टिकट की कई कैटेगरी मौजूद हैं, लेकिन प्रीमियम कीमतों ने सोशल मीडिया यूजर्स को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वे नवरात्रि सेलिब्रेशन पर कितना खर्च करना चाहते हैं।

फाल्गुनी पाठक नवरात्रि उत्सव 2026 के टिकट की कीमतें

BookMyShow के अनुसार, सभी नौ रातों के लिए ‘फेज 1 अर्ली-बर्ड सीजन पास’ की कीमत 16,000 प्रति व्यक्ति थी, जबकि ‘फेज 2 सीजन पास’ की कीमत ₹18,000 थी। मौजूदा सीजन पास की कीमत ₹20,000 प्रति व्यक्ति है। जो लोग सिर्फ एक रात के लिए शामिल होना चाहते हैं, उनके लिए ‘फेज 1 सिंगल-डे टिकट’ की कीमत ₹2,200 (टैक्स के बिना) से शुरू हुई थी।

कीमतों के मामले में दूसरी तरफ ‘POD पैकेज’ है, जिसकी कीमत एक रात के लिए 2.04 लाख है। इसमें 12 लोग शामिल हो सकते हैं और यह सिर्फ उसी खास दिन के लिए मान्य है। इसमें ₹10,000 का फ़ूड और बेवरेज कूपन भी शामिल है, जिससे यह इवेंट का सबसे महंगा ऑप्शन बन जाता है।

महंगी टिकटों पर लोगों की प्रतिक्रिया

बुकिंग शुरू होते ही टिकट की कीमतें ऑनलाइन चर्चा का विषय बन गईं। कई यूजर्स ने इतनी ज़्यादा कीमत देखकर हैरानी जताई। बहुत से लोगों ने ऑर्गनाइज़र के इंस्टाग्राम कमेंट सेक्शन में अपनी निराशा ज़ाहिर करते हुए कहा, “मुझे फाल्गुनी पाठक बहुत पसंद हैं और मैं नवरात्रि का इंतज़ार सिर्फ़ उनके गरबा शो में शामिल होने के लिए करती हूँ। लेकिन जियो कन्वेंशन सेंटर जैसी जगह चुनने से कई मिडिल-क्लास परिवारों के लिए इस अनुभव का खर्च उठाना बहुत मुश्किल हो जाता है। नवरात्रि और गरबा लोगों को एक साथ लाने के लिए होने चाहिए, न कि ज़्यादा खर्च की वजह से उन्हें अलग-थलग महसूस कराने के लिए। मुझे उम्मीद है कि भविष्य के इवेंट्स में लोगों की जेब का भी ध्यान रखा जाएगा।”

एक और इंस्टाग्राम यूज़र ने कमेंट किया, “हमेशा की तरह ‘बुक माय शो’ पर कैसा मजाक है… इवेंट कंपनियां बड़ी संख्या में पास बुक कर लेती हैं और फिर हमें ब्लैक में बेचती हैं, जबकि पास की शुरुआती कीमत ही 16,000 रुपये है।”

एक यूज़र ने कहा, “मैडम, जब आप बोरीवली आती थीं, तो 30,000 लोग आपके गानों पर नाचते थे। नवरात्रि में आपके संगीत का मजा लेने के लिए हमें जियो या किसी महंगे एसी वाले वेन्यू की ज़रूरत नहीं है। हमें बस आपकी परफॉर्मेंस, आपका संगीत और सस्ते पास चाहिए ताकि हर कोई उन्हें खरीद सके और आपको लाइव परफॉर्म करते हुए देख सके! अगर 9 दिनों के लिए 23,000 रुपये देने हों, तो हम पार्किंग, पास की कीमत और खाने-पीने का खर्च कैसे उठाएंगे? किसी भी ऑर्गनाइजर के साथ जुड़ने से पहले कृपया अपने फ़ैसले पर विचार करें – आपके एक बहुत बड़े फ़ैन की ईमानदार गुज़ारिश।”

एक इंस्टाग्राम यूज़र ने फाल्गुनी पाठक की पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा, “फालू, आप बहुत महंगी हो गई हैं!” एक और यूज़र ने कहा, “अब, 365 दिनों के लिए 23,000 रुपये चार्ज कर रहे हैं… वे सच में पास से जितना हो सके उतना पैसा वसूल रहे हैं… जल्द ही, वे 9 दिनों का ऑप्शन भी नहीं देंगे… आने वाले सालों में… अगर वे इसी तरह खुली लूट जारी रखते हैं।”

नवरात्रि उत्सव 2026 से क्या उम्मीद करें

फाल्गुनी पाठक फ़ेस्टिवल के सभी नौ दिनों में लाइव परफॉर्म करेंगी। नौ दिनों का यह इवेंट ‘ट्राइबवाइब एंटरटेनमेंट’ (TribeVibe Entertainment) और ‘अल्फ़ोंसो स्टूडियोज़’ (Alphonso Studios) द्वारा आयोजित किया जाएगा, और ‘वेस्ट एवेन्यू रियल्टी’ (West Avenue Realty) इसका टाइटल स्पॉन्सर होगा। टिकट बुकिंग की शुरुआत 12 अगस्त को उन मेहमानों के लिए एक खास प्री-सेल के साथ हुई जो पिछले साल के इवेंट में शामिल हुए थे, और आम लोगों के लिए बिक्री 13 अगस्त को शुरू हुई।

फाल्गुनी पाठक के बारे में

फाल्गुनी पाठक भारत की सबसे मशहूर पॉप आर्टिस्ट में से एक हैं, जो अपने इंडिपेंडेंट और पारंपरिक संगीत के काम के लिए जानी जाती हैं। वह कई दशकों से नवरात्रि उत्सवों से जुड़ी रही हैं। ‘गरबा क्वीन’ के नाम से मशहूर फाल्गुनी 90 के दशक में तब लोकप्रिय हुईं, जब उन्होंने ‘चूड़ी जो खनकी हाथों में’, ‘मैंने पायल है छनकाई’ और ‘याद पिया की आने लगी’ जैसे हिट गाने रिलीज़ किए।

फाल्गुनी पाठक अपनी खास आवाज़, स्टेज पर अपनी मौजूदगी और गुजरात के संगीत से जुड़ाव के लिए मशहूर हैं। उन्होंने नवरात्रि उत्सव को अपनी सालाना परंपरा बना लिया है, जिसे वे खास तौर पर मुंबई में बहुत धूमधाम से मनाती हैं।

Awarapan 2 Review: इमरान हाशमी का दमदार कमबैक, दर्द…प्यार…धोखे की इमोशनल कहानी ने ताजा किए जख्म

फिल्म- आवारापन 2

कलाकार- इमरान हाशमी, दिशा पाटनी, शबाना आज़मी, पूरन गब्बी, सुविंदर विक्की और विजयंत कोहली

निर्देशक- नितिन कक्कड़

रेटिंग- 4 स्टार्स

Awarapan 2 Review: अगर आप Awarapan 2 देखने का प्लान बना रहे हैं, तो सबसे पहले एक काम कर लीजिए—Awarapan देख लीजिए। क्योंकि यह कोई ऐसी फिल्म नहीं है जो पूरी तरह से नए दर्शक को ध्यान में रखकर बनाई गई हो। कहानी पहले पार्ट के बाद से आगे बढ़ती है और पुराने घटनाक्रम की झलकियों के जरिए शिवम पंडित की पिछली कहानी को फिर से सामने लाती है।

अब सवाल है कि 19 साल बाद शिवम की कहानी में नया क्या है?

इस बार शिवम की लड़ाई उसके अपने अतीत से ज्यादा किसी और की जिंदगी के लिए है। आलिया के गुजर जाने के बाद भी शिवम का प्यार उसके लिए कम नहीं हुआ है। एक दिन आलिया की कब्र पर उसे एक नवजात बच्ची के रोने की आवाज सुनाई देती है। वह बच्ची को अनाथालय पहुंचाता है और उसका नाम आलिया रखता है। इसके बाद वह लगातार उस बच्ची और अनाथालय की मदद करता रहता है।

लेकिन कहानी यहां से अचानक एक डार्क मोड़ लेती है।

आलिया को एक कपल गोद लेता है और कुछ समय बाद शिवम को पता चलता है कि वह बच्ची ह्यूमन ट्रैफिकिंग का शिकार हो चुकी है। बस, यहीं से शिवम की जिंदगी का अगला मिशन शुरू होता है। इस बार उसके पास खोने के लिए बहुत कुछ है और बचाने के लिए एक मासूम जिंदगी।

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत क्या है?

इसका इमोशन। फिल्म सिर्फ यह नहीं दिखाती कि शिवम क्या कर रहा है, बल्कि यह भी समझाती है कि वह ऐसा क्यों कर रहा है। प्यार, दर्द, लगाव और इंसानियत कहानी के चारों तरफ मौजूद हैं। स्क्रीनप्ले काफी खूबसूरती से तैयार किया गया है। खासकर डायलॉग्स में पहले पार्ट की तुलना में ज्यादा गहराई दिखाई देती है। कई संवाद सीधे आपके दिल तक पहुंचते हैं और कुछ आपको सोचने पर मजबूर करते हैं।

नितिन कक्कड़ का डायरेक्शन भी अच्छा है। फिल्म को जरूरत से ज्यादा VFX से भरने की कोशिश नहीं की गई है। जहां जरूरत है, वहां इफेक्ट्स ठीक काम करते हैं। हालांकि एडिटिंग थोड़ी और टाइट होती तो फिल्म का फर्स्ट हाफ और ज्यादा असरदार बन सकता था।

म्यूजिक?

यहां फिल्म बाजी मारती है। Awarapan का म्यूजिक आज भी लोगों को याद है और सीक्वल इस बात को अच्छी तरह समझता है। नए गाने फिल्म के मूड के साथ घुलते-मिलते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि म्यूजिक सिर्फ अलग से अच्छा नहीं लगता, बल्कि कहानी के साथ उसका कनेक्शन भी महसूस होता है।

अब बात इमरान हाशमी की

शिवम पंडित के रोल में इमरान हाशमी को देखना किसी नॉस्टेल्जिक ट्रीट से कम नहीं है। उनकी लंबी जुल्फें, इंटेंस आंखें और दमदार फिजीक किरदार को एक अलग स्क्रीन प्रेजेंस देते हैं। लेकिन लुक से ज्यादा उनकी एक्टिंग प्रभावित करती है। गुस्से में भी, खामोशी में भी और दर्द वाले सीन्स में भी इमरान पूरी तरह शिवम नजर आते हैं।

शबाना आजमी का स्क्रीन टाइम सीमित है, लेकिन वह अपनी छाप छोड़ती हैं। पूरन गब्बी का स्क्रीन प्रेजेंस मजबूत है और उनकी बॉडी लैंग्वेज खास तौर पर ध्यान खींचती है। दिशा पाटनी भी सिर्फ ग्लैमर का हिस्सा नहीं हैं और अपने किरदार को अच्छी तरह निभाती हैं। सुविंदर विक्की और विजयंत कोहली समेत बाकी कलाकार भी कहानी का साथ देते हैं।

Awarapan 2 में कुछ कमियां जरूर हैं। खासकर एडिटिंग थोड़ी और शार्प हो सकती थी। लेकिन इसके बावजूद फिल्म में वह चीज मौजूद है जो सबसे ज्यादा जरूरी है—दिल। नॉस्टेल्जिया आपको पहली फिल्म की याद दिलाएगा, इमरान हाशमी आपको स्क्रीन पर रोके रखेंगे और कहानी प्यार से लेकर इंसानियत तक एक खूबसूरत संदेश देती है।

देखें या नहीं?

फिल्म 19 साल बाद वापसी कर रही है। कल्ट क्लासिक आपकी यादें ताजा कर देगी। अपने पार्टनर, दोस्तों के साथ इस वीकेंड सिनेमाघरों आप भी कर आइए थोड़ा आवारापन….

Kangana Ranaut: कंगना रनौत बोलीं जंतर-मंतर पर जमा भीड़ में ‘शबाना आजमी जैसे’ लोग थे, ‘ये Gen Z कैसे हो सकते हैं?’

Kangana Ranaut: जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों के बारे में की गई अपनी टिप्पणी के लिए आलोचना झेलने के बाद, कंगना रनौत ने अपने विवादित “जेनरेशन गटर” वाले बयान पर एक और स्पष्टीकरण दिया है। एक्टर और बीजेपी सांसद ने जोर देकर कहा कि उन्होंने किसी पूरी पीढ़ी को निशाना नहीं बनाया था और कहा कि उनकी टिप्पणी केवल प्रदर्शनकारियों के एक खास वर्ग के लिए थी, जिन्हें उन्होंने प्रदर्शन के वीडियो में देखा था।

गुरुवार को इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक वीडियो शेयर करते हुए कंगना ने सवाल किया कि इस भीड़ को आम तौर पर ‘जेन जेड’ (Gen Z) का विरोध प्रदर्शन क्यों कहा जा रहा है और तर्क दिया कि असल में देश की युवा आबादी का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही इसमें शामिल हुआ था।

कंगना ने ‘जेन ज़ेड प्रोटेस्ट’ लेबल पर सवाल उठाए

अपने वीडियो में कंगना ने इस बात को चुनौती दी कि यह प्रदर्शन पूरे भारत के युवाओं का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने जेन ज़ेड आबादी का अनुमान लगभग 30 से 35 करोड़ लगाया और इस संख्या की तुलना जंतर-मंतर पर जमा हुए लोगों की संख्या से की। उन्होंने कहा, “पूरे देश के युवा? अगर आप सिर्फ जेन जेड की बात करते हैं, तो लगभग 30-35 करोड़ के पास इनकी आबादी होने वाली है।”

कंगना ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन में लगभग 10,000 लोग मौजूद थे और इस सभा में विभिन्न आयु वर्ग के लोग शामिल थे। दिग्गज अभिनेत्री शबाना आज़मी का जिक्र करते हुए, जो मार्च में शामिल हुई थीं, उन्होंने कहा, “जो जंतर-मंतर है वहाँ पर 10,000 लोग एक साथ आए थे जिनमें से आधे से ज्यादा लोग शबाना आज़मी जैसे थे, आपने देखा कि हर तरह के आयु वर्ग के लोग घूम रहे थे।”

इसके बाद उन्होंने दावा किया कि सभा में केवल लगभग 2,000 लोग ही जेनरेशन Z से थे और सवाल किया कि इस विरोध प्रदर्शन को पूरी पीढ़ी का प्रतिनिधि क्यों बताया जा रहा है। कंगना ने कहा कि “अगर हम युवाओं की बात करते हैं, जेन ज़ेड की हम विशेष रूप से बात करते हैं तो लग भाग वाह 2000 जेन ज़ेड पर, तो कैसे ये लोग इसको जेन ज़ेड विरोध कह रहे हैं? क्या पूरे देश की जेन ज़ेड विरोध कर रहे हैं?”

‘मैं युवा-विरोधी नहीं हो सकती’

कंगना ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि उनकी पिछली टिप्पणियां खास तौर पर उन लोगों के बारे में थीं, जिन्हें उन्होंने विरोध प्रदर्शन में देखा था, न कि सभी युवा भारतीयों के बारे में। उन्होंने कहा, “यहां जो भीड़ जमा हुई थी, मैंने खास तौर पर उन्हीं के बारे में कहा था।” इसके बाद एक्ट्रेस ने उन लोगों को “खुली चुनौती” दी जो उन पर पूरी पीढ़ी का अपमान करने का आरोप लगा रहे थे।

उन्होंने कहा, “मैं आपको खुली चुनौती देती हूं, मेरा कोई ऐसा खास बयान बताइए जिसमें मैंने पूरी पीढ़ी को शामिल किया हो? मेरे साथ इस तरह का फालतू एजेंडा मत चलाइए!” कंगना ने इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि वह युवाओं के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, “मैं युवा-विरोधी नहीं हो सकती क्योंकि मैं खुद युवा हूं।”

कंगना ने पहले क्या कहा था

यह विवाद तब शुरू हुआ जब कंगना ने विरोध प्रदर्शन के वीडियो पर तीखी प्रतिक्रिया दी और प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों की भाषा और व्यवहार की आलोचना की। उन्होंने कहा था, “मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी एक जगह इतनी बदसूरती नहीं देखी। Gen Z के विरोध प्रदर्शनों की ये रील्स देखकर उल्टी आती है।”

उन्होंने आगे कहा, “जिस तरह से वे बात करते हैं और जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं… मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी भी हर फ्रेम में सब कुछ इतना अजीब और भद्दा एक साथ नहीं देखा… मैं उन्हें ‘जेनरेशन गटर’ कहती हूँ। उनमें से कुछ के पास सिस्टम को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई में अच्छे नहीं हैं…”

उनकी इन बातों पर लोगों ने नाराज़गी जताई और आलोचकों ने उन पर युवा प्रदर्शनकारियों के बारे में सामान्य और तीखी टिप्पणी करने का आरोप लगाया। कंगना पहले ही अपनी ‘कॉकरोच’ वाली टिप्पणी पर सफाई दे चुकी थीं। आलोचना के बाद, कंगना ने ANI को बताया था कि उनका मकसद विरोध प्रदर्शन में शामिल सभी लोगों के बारे में कोई सामान्य टिप्पणी करना नहीं था। उन्होंने कहा कि वह “कुछ लोगों या कुछ महिलाओं” के बारे में बात कर रही थीं।

अपनी टिप्पणी के एक और विवादित हिस्से पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा, “जो लोग खुद को कॉकरोच कहते हैं, और हम कहते हैं कि कॉकरोच गटर से निकलते हैं, तो इसमें क्या गलत है?” कंगना ने आगे कहा कि अगर कोई खुद को कॉकरोच बताता है, तो उन्हें उन्हें गटर से जोड़ने में कोई विरोधाभास नहीं दिखता।

उन्होंने कहा, “मैं खुद को कॉकरोच बिल्कुल नहीं मानती। अगर कोई कहे कि मैं गटर में रहती हूँ, तो मैं इससे इनकार करूँगी। लेकिन अगर कोई खुद को कॉकरोच कहता है, तो ज़ाहिर है कि वह गटर में ही रहेगा और कहां रहेगा?” उन्होंने फिर कहा, “लेकिन यह कहना कि मैं सभी युवाओं की बात कर रही थी, बिल्कुल गलत है।”

शबाना आज़मी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई थीं

शबाना आज़मी उन लोगों में शामिल थीं, जो 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। 75 वर्षीय अभिनेत्री ने मार्च की तस्वीरें और वीडियो शेयर किए, जिनमें उन्हें ट्रक में यात्रा करते और प्रदर्शनकारियों के साथ बैरिकेड पार करते हुए देखा जा सकता है।

प्रदर्शन के दौरान अभिनेता प्रकाश राज भी उनके साथ दिखे

कंगना का ताज़ा बयान उनकी पहले दी गई सफाई को ही और मज़बूत करता है। उनका कहना है कि उनकी बातों की आलोचना करते हुए, एक खास ग्रुप पर की गई टिप्पणी को गलत तरीके से देश की पूरी ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) आबादी पर हमले के तौर पर पेश किया गया है।

Awarapan 2 Advance Bookings: एडवांस बुकिंग में फिल्म ने पार्ट 1 के लाइफटाइम कलेक्शन का रिकॉर्ड तोड़ा, धमाकेदार होगी शुरुआत

Awarapan 2 Advance Bookings: हो सकता है कि कई युवा दर्शकों को यह सुनकर हैरानी हो-क्योंकि उन्होंने इमरान हाशमी की फ़िल्म ‘आवारापन’ के बारे में बड़े दर्शकों से हमेशा अच्छी बातें ही सुनी हैं—कि 2007 में रिलीज होने पर यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही थी। विशेष फ़िल्म्स की इस फ़िल्म ने अपनी पूरी अवधि में सिर्फ़ ₹7.7 करोड़ की नेट कमाई की थी।

लेकिन समय के साथ, जैसे-जैसे दर्शकों ने इसे होम मीडिया, केबल और बाद में स्ट्रीमिंग पर देखा, ‘आवारापन’ को एक ‘कल्ट फ़ॉलोइंग’ (खास चाहने वालों का वर्ग) मिली। इसी देर से मिली पहचान और प्यार का फ़ायदा अब इसके सीक्वल को मिल रहा है, जो इस हफ़्ते के आखिर में रिलीज़ होने वाला है। ‘आवारापन 2’ के 2026 में बॉलीवुड की सबसे बड़ी ओपनिंग वाली फ़िल्मों में से एक बनने की उम्मीद है। असल में, फ़िल्म को लेकर इतनी ज़बरदस्त चर्चा है कि यह रिलीज़ से पहले ही पहले पार्ट की कुल कमाई का आंकड़ा पार करने की राह पर है।

आवारापन 2 की एडवांस बुकिंग

आवारापन 2 की एडवांस बुकिंग रिलीज़ से सिर्फ 48 घंटे पहले शुरू हुई, लेकिन बुधवार को ही इसे जबरदस्त शुरुआत मिली। गुरुवार को दोपहर 3 बजे तक, यानी फ़िल्म के रिलीज होने से सिर्फ़ 18 घंटे पहले, आवारापन 2 के रिलीज़ वाले दिन के लिए 1.3 लाख से ज़्यादा टिकट बिक चुके थे। Sacnilk के अनुसार, फिल्म ने अपने ओपनिंग डे के लिए ₹4 करोड़ के टिकट बेचे हैं।

ट्रेड जानकारों का अनुमान है कि फिल्म के ओपनिंग वीकेंड और उसके बाद की कुल एडवांस बुकिंग ₹9 करोड़ ग्रॉस (₹7-8 करोड़ नेट) से ज़्यादा होगी। इसका मतलब है कि रिलीज़ से पहले ही, आवारापन 2 ने अपनी पिछली फ़िल्म की कुल कमाई का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

आवारापन ने ओपनिंग डे पर ₹79 लाख कमाए थे और अपने पहले वीकेंड में ₹2.88 करोड़ की नेट कमाई की थी। महंगाई को ध्यान में रखने के बाद भी, यह आंकड़ा कम था। इसके उलट, उम्मीद है कि आवारापन 2 इमरान हाशमी की सबसे बड़ी ओपनर फ़िल्म होगी और पहले दिन ही ₹20 करोड़ का आंकड़ा छू सकती है।

बॉक्स ऑफ़िस पर ‘आवारापन 2’ का मुक़ाबला सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ से हो रहा है। लेकिन ट्रेड एनालिस्ट का मानना ​​है कि इस मुक़ाबले में ‘आवारापन 2’ ही जीतेगी। ज़्यादातर अनुमानों के मुताबिक़, फ़िल्म की ओपनिंग ज़बरदस्त ₹20 करोड़ नेट की हो सकती है। यहाँ तक कि कम से कम अनुमान भी ₹15-18 करोड़ के आसपास हैं, जो एक मज़बूत आंकड़ा है। मौजूदा हालात को देखते हुए, ‘आवारापन 2’ को अपने ओपनिंग वीकेंड में ही दुनिया भर में ₹100 करोड़ का आँकड़ा पार कर लेना चाहिए, जो कि पहले पार्ट की लाइफ़टाइम कमाई का आठ गुना है। यह एक असाधारण बदलाव है।

Bollywood Actors Hosts shows: अमिताभ बच्चन से लेकर माधुरी दीक्षित तक, ये 9 बॉलीवुड सेलेब्स बनें टीवी होस्ट

Bollywood Actors Hosts shows: बॉलीवुड स्टार्स अक्सर बड़े पर्दे से जुड़े रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में कई बड़े स्टार्स ने टेलीविजन की दुनिया में भी कदम रखा है। इस लिस्ट में शामिल होने वाले नए नाम अजय देवगन और माधुरी दीक्षित हैं, जो टेलीविजन पर नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने वाले हैं। उनके आने से उन फ़िल्मी स्टार्स की लंबी लिस्ट पर फिर से ध्यान गया है जिन्होंने अपने करियर के अलग-अलग पड़ावों पर इस मीडियम में काम किया है। गेम शो और रियलिटी सीरीज को होस्ट करने से लेकर टॉक शो में खुलकर बातचीत करने तक, इन स्टार्स ने टेलीविजन पर कई तरह के रोल निभाए हैं। आइए, बॉलीवुड के कुछ ऐसे बड़े नामों पर नजर डालते हैं जिन्होंने फिल्मों से टीवी का रुख किया।

अमिताभ बच्चन

अमिताभ बच्चन का टेलीविन का सफर साल 2000 में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के साथ शुरू हुआ। उस समय, किसी बड़े बॉलीवुड स्टार का टेलीविज़न पर आना एक असामान्य करियर कदम माना जाता था। यह क्विज़ शो बच्चन की पहचान का अहम हिस्सा बन गया और उनकी होस्टिंग शो के सबसे बड़े आकर्षणों में से एक रही। तब से वे कई सीज़न्स में इस शो में लौटे हैं और अभी भी इसे होस्ट कर रहे हैं, जिसमें इसका मौजूदा 18वां सीजन भी शामिल है।

सलमान खान

सलमान खान बॉलीवुड के उन बड़े नामों में से एक हैं, जिन्होंने टेलीविजन पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने सबसे पहले 2008 में सेलिब्रिटी गेम शो ‘दस का दम’ होस्ट किया था और बाद में ‘बिग बॉस’ के साथ उनकी पहचान जुड़ गई। 2010 में सीजन 4 से उन्होंने इसे होस्ट करना शुरू किया। उनकी बेबाक बातचीत, खास अंदाज़ वाला मजाक और सीधे-सपाट तरीके से बात करने का अंदाज़ जल्द ही शो की लोकप्रियता का अहम हिस्सा बन गया। सलमान का ‘बिग बॉस’ के साथ लंबे समय से जुड़ाव रहा है और वह इसके 20वें सीजन में भी होस्ट के तौर पर वापसी करने वाले हैं।

माधुरी दीक्षित

माधुरी दीक्षित का टेलीविजन के साथ, खासकर डांस रियलिटी शो के जरिए, लंबे समय से जुड़ाव रहा है। उन्होंने ‘झलक दिखला जा’ में जज के तौर पर टीवी पर डेब्यू किया और बाद में ‘डांस दीवाने’ जैसे शो में एक जाना-माना चेहरा बन गईं। अब वह मराठी क्विज़ शो ‘कोण होणार करोडपती’ की होस्ट के तौर पर टेलीविज़न पर वापसी करके एक अलग भूमिका निभा रही हैं। यह नया काम 24 साल बाद होस्टिंग में उनकी वापसी है; उनका पिछला होस्टिंग असाइनमेंट 2002 में ‘कहीं न कहीं कोई है’ था।

शाहरुख खान

शाहरुख खान भी टीवी शो होस्ट करते नजर आए हैं, हालांकि छोटे पर्दे पर कम समय के लिए काम किया है। 2007 में, उन्होंने अमिताभ बच्चन की जगह ‘कौन बनेगा करोड़पति’ सीजन 3 के होस्ट के तौर पर काम संभाला। हालांकि SRK ने क्विज़ शो में अपना खास आकर्षण और मजाक का अंदाज दिखाया, लेकिन बच्चन के साथ तुलना करना मुश्किल साबित हुआ, और बच्चन चौथे सीजन को होस्ट करने के लिए वापस आ गए। बाद में SRK ने 2008 में ‘क्या आप पांचवीं पास से तेज़ हैं?’ और 2011 में ‘ज़ोर का झटका टोटल वाइपआउट’ जैसे शो होस्ट किए।

अजय देवगन

अजय देवगन टेलीविज़न पर होस्टिंग करने वाले नए बॉलीवुड स्टार बन गए हैं। वे लंबे समय से ‘क्राइम पेट्रोल’ होस्ट कर रहे अनूप सोनी की जगह लेंगे। ‘क्राइम पेट्रोल 2026’ नाम का यह नया सीज़न 31 अगस्त को सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न पर शुरू होगा और इसके साथ ही देवगन टेलीविज़न होस्टिंग की दुनिया में कदम रखेंगे। खबरों के मुताबिक, वे इस शो के लिए पहले ही 15 एपिसोड की शूटिंग कर चुके हैं।

रितेश देशमुख

रितेश देशमुख ने अपने फ़िल्मी करियर के साथ-साथ टेलीविज़न पर भी अपनी मज़बूत पहचान बनाई है। उन्होंने 2013 में ‘इंडियाज़ डांसिंग सुपरस्टार’ में जज के तौर पर टेलीविज़न पर डेब्यू किया और बाद में ‘यारों की बारात’ और ‘विक्टा का उत्तर’ जैसे शो होस्ट किए। 2024 में उन्होंने महेश मांजरेकर की जगह ‘बिग बॉस मराठी’ को होस्ट करना शुरू किया और 2026 में इसके छठे सीज़न के लिए भी लौटे। मराठी रियलिटी शो में उनके काम ने उन्हें एक लोकप्रिय टेलीविज़न होस्ट के तौर पर और भी स्थापित किया है। वहीं हाल में वह लॉक अप के सीजन 2 को होस्ट करते नजर आए थे।

रणवीर सिंह

रणवीर सिंह ने 2021 में कलर्स टीवी के विज़ुअल-बेस्ड क्विज़ शो ‘द बिग पिक्चर’ के होस्ट के तौर पर टेलीविज़न पर डेब्यू किया। इस गेम शो में कंटेस्टेंट्स की जानकारी और विज़ुअल मेमोरी को परखा जाता था, और रणवीर ने होस्टिंग के दौरान अपनी ज़बरदस्त एनर्जी वाली पर्सनैलिटी का जलवा दिखाया। यह शो अक्टूबर 2021 में शुरू हुआ और एक सीज़न तक चला। यह टेलीविज़न पर एक्टर का पहला बड़ा काम था।

फराह खान

फ़राह खान दो दशकों से ज़्यादा समय से टेलीविज़न पर एक जाना-माना चेहरा रही हैं। उन्होंने 2004 में ‘इंडियन आइडल’ के पहले सीज़न में सोनू निगम के साथ जज के तौर पर अपने टीवी सफ़र की शुरुआत की थी। इसके बाद वह इंडियन रियलिटी टेलीविज़न पर सबसे मशहूर सेलिब्रिटी जजों में से एक बन गईं और ‘झलक दिखला जा’, ‘नच बलिए’, ‘जस्ट डांस’ और ‘इंडियाज़ गॉट टैलेंट’ जैसे शो में नज़र आईं। उन्होंने ‘बिग बॉस हल्ला बोल’ और ‘फ़राह की दावत’ जैसे शो को होस्ट भी किया है। हाल ही में, उन्होंने ‘सेलिब्रिटी मास्टरशेफ़’ को होस्ट और जज किया, जिससे टेलीविज़न पर उनकी मौजूदगी और मज़बूत हुई। वहीं हाल में वह लॉक अप के सीजन 2 को होस्ट करती नजर आईं थीं।

करण जौहर

करण जौहर का बॉलीवुड से टेलीविज़न तक का सफ़र बहुत कामयाब रहा है। उन्होंने 2004 में ‘कॉफ़ी विद करण’ के साथ टीवी की दुनिया में कदम रखा और इस सेलिब्रिटी चैट शो को एक लंबे समय तक चलने वाली फ़्रैंचाइज़ी बना दिया, जो उनके बेबाक इंटरव्यू और खास मज़ाकिया अंदाज़ के लिए जानी जाती है। बाद में उन्होंने ‘झलक दिखला जा’ और ‘इंडियाज़ गॉट टैलेंट’ जैसे रियलिटी शो में जज के तौर पर टेलीविज़न पर अपनी मौजूदगी बढ़ाई। ‘झलक दिखला जा’ में उनका सफ़र 2012 में इसके पाँचवें सीज़न से शुरू हुआ, जहाँ वह माधुरी दीक्षित और रेमो डिसूज़ा के साथ जजिंग पैनल में शामिल हुए। अब करण द ट्रेटर्स के पहले सीजन के बाद सीजन 2 को भी होस्ट कर रहे हैं।

Kangana Ranaut: ‘पाकिस्तान के प्यार में मारे रहते हैं’, कंगना रनौत ने नसीरुद्दीन शाह को सुनाई खरी-खोटी

Kangana Ranaut: एक्टर और BJP सांसद कंगना रनौत ने हाल ही में स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर सीनियर एक्टर नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणियों पर तीखा तंज कसते हुए उन्हें “लोमड़ी” कहा। अब कंगना ने अपनी बात का बचाव किया है और एक्टर पर “पाकिस्तान के प्रति उनके प्यार” को लेकर निशाना साधा है, साथ ही फिल्म इंडस्ट्री पर “दोहरेपन” का आरोप भी लगाया है।

कंगना रनौत ने नसीरुद्दीन शाह को ‘लोमड़ी’ कहने का बचाव किया

ANI के साथ बातचीत में, कंगना ने फ़िल्म इंडस्ट्री के “लगातार बने हुए रवैये” की आलोचना की और जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान मची अफरातफरी को याद किया। उन्होंने दावा किया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान, उनके कई सांसद दोस्तों की गाड़ियों पर लोग चढ़ गए थे और उनकी खिड़कियां तोड़ दी थीं, जबकि उनके घर के बाहर करीब 2,500 लोग जमा हो गए थे, जिसके कारण भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा और उनके परिवार को रात भर जागना पड़ा।

उन्होंने आगे कहा, “तो जब जंतर-मंतर पर ऐसी स्थिति बन रही थी, तो वे सभी मगरमच्छ के आंसू बहा रहे थे। लेकिन अब जब झारखंड में बच्चे इस तरह के उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं, तो क्या वे भी ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) नहीं हैं? क्या कोई व्यक्ति तभी ‘जेन ज़ी’ माना जाता है जब वह देश के खिलाफ काम करता है या प्रधानमंत्री को अपशब्द कहता है? उन्हें खुद ही युवाओं के खिलाफ दिखाया गया है। फिल्म इंडस्ट्री का यह पाखंड नहीं चलेगा। फ़िल्म इंडस्ट्री के लोग जंतर-मंतर के लिए जो मगरमच्छ के आंसू बहा रहे थे, उन्हें झारखंड के बच्चों के लिए भी वैसे ही आंसू बहाने चाहिए।”

इसके बाद उन्होंने नसीरुद्दीन शाह के बारे में अपनी “लोमड़ी” टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा, “मैंने नसीरुद्दीन शाह के बारे में ऐसा इसलिए कहा क्योंकि उन्होंने एक बेहद आपत्तिजनक वीडियो बनाया था जिसमें वे इस तरह की धमकियां दे रहे थे। और जब भी आप उनकी फिल्में, साक्षात्कार या बयान देखें, बात हमेशा पाकिस्तान की ही होती है। ये पाकिस्तान की प्रेम कथा कब खत्म होगी? जब देखो पाकिस्तान के प्रेम में ये मरे रहते हैं। अब बंटवारे को भी इतने साल हो गए हैं तो ये प्रेम कहानी खत्म क्यों नहीं हो रही है?”

कंगना रनौत ने नसीरुद्दीन शाह को ‘लोमड़ी’ क्यों कहा?

पिछले हफ्ते, अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर, कंगना ने नसीरुद्दीन की टिप्पणी पर अभिनेता पीयूष मिश्रा की एक टिप्पणी को दोबारा पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने झारखंड में छात्र विरोध प्रदर्शन पर अनुभवी अभिनेता की चुप्पी पर सवाल उठाया था। उन्होंने एक अलग नोट जोड़ा जिसमें लिखा था, “सच तो ये है कि हर कोई न किसी का कुत्ता है लेकिन मुझे इस बात का गर्व है कि मैं जिस घर (देश) की रोटी खाती हूं उसकी रखवाली करती हूं, उसके लिए लड़की हूं। नसीर साहब खाते तो इस देश के हैं लेकिन लड़ते पड़ोसी देश के लिए हैं।” (सच्चाई यह है कि हममें से हर कोई किसी न किसी का पालतू है। मुझे गर्व है कि मैं उसी घर की रक्षा और बचाव करता हूं जहां से मुझे खाना मिलता है। लेकिन नसीर साहब इस जमीन से खाते हैं और पड़ोसी देश की रक्षा करते हैं)।”

उन्होंने आगे कहा, “PS: आज के समय में कुत्ता कहलाना एक तारीफ़ है क्योंकि वफ़ादारी और क्यूटनेस बहुत कम देखने को मिलती है। मैं नसीरुद्दीन की तरह लोमड़ी बनने के बजाय कुत्ता बनना ज़्यादा पसंद करूंगी।” इससे पहले नसीरुद्दीन शाह ने NEET पेपर लीक को लेकर CJP के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ कथित पुलिस बर्बरता के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी।

गौरव खन्ना से जुड़े सवाल का जवाब नहीं देना चाहती आकांक्षा चमोला? ‘लॉक अप’ को लेकर भी कही ये बात

एक्ट्रेस आकांक्षा चमोला इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी चर्चा में है। हाल ही में एक्ट्रेस ने ‘लॉक अप: सच या सजा’ में खुलासा किया कि वह और उनके पति और टीवी एक्टर गौरव खन्ना ने एक-दूसरे से अगल होने का फैसला किया है। आकांक्षा की ये बात सुनकर फैंस हैरान रह गए थे। वहीं हाल में एक्ट्रेस आकांक्षा चमोला ने एक्टर गौरव खन्ना और ‘लॉक अप’ से जुड़े सवालों पर बात करने से इनकार कर दिया है। एक्ट्रेस ने इस मामले में अपनी निजी जिंदगी को चर्चा से दूर रखने का फैसला किया है।

हाल ही में आकांक्षा चमोला ‘लॉक अप: सच या सजा’ के दूसरे सीजन में बतौर कंटेस्टेंट नजर आईं। शो के दौरान उन्होंने अपनी शादी और निजी जिंदगी से जुड़े कुछ खुलासे किए है।

गौरव और ‘लॉक अप’ पर नहीं करना बात

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में आकांक्षा चमोला रिपोर्टर्स से बातचीत करती नजर आईं। बातचीत शुरू होने से पहले ही उन्होंने मुस्कुराते हुए साफ कर दिया कि, वह गौरव खन्ना या ‘लॉक अप’ से जुड़े किसी भी सवाल का जवाब नहीं देंगी। अभिनेत्री ने कहा कि अपनी शादी को लेकर कई महीनों तक सार्वजनिक चर्चा होने के बाद अब वह इस मामले को निजी रखना चाहती हैं और इन विषयों पर बात नहीं करना चाहतीं।

 

‘लॉक अप 2’ में किया था खुलासा

आकांक्षा चमोला ने ‘लॉक अप 2’ के प्रीमियर एपिसोड में गौरव खन्ना से अलग होने की जानकारी देकर फैंस को हैरान कर दिया था। उन्होंने बताया था कि, दोनों एक साल से ज्यादा समय से अलग रह रहे थे और अब तलाक की प्रक्रिया की ओर बढ़ रहे हैं। आकांक्षा ने ये भी स्पष्ट किया था कि उनका अलग होना शो की पब्लिसिटी या TRP के लिए नहीं था। शो खत्म होने के बाद उन्होंने कहा था कि इमोशनल रूप से दोनों अपनी शादी से आगे बढ़ चुके हैं और अब सिर्फ तलाक से जुड़े दस्तावेजों पर औपचारिक साइन होना बाकी है।

‘बिग बॉस 19’ गौरव ने की थी रिश्ते पर बात

इस खबर के फैंस हैरान रह गए थे, क्योंकि ‘बिग बॉस 19’ के दौरान गौरव खन्ना ने आकांक्षा चमोला के साथ अपने रिश्ते को लेकर काफी कुछ बताया था। शो में वह अक्सर आकांक्षा और उनके प्रति अपने प्यार का जिक्र करते थे। गौरव ने ये भी बताया था कि वह बच्चे चाहते थे, लेकिन आकांक्षा की इच्छा का सम्मान करते हुए उन्होंने इस फैसले को स्वीकार किया। उन्होंने कहा था कि दोनों की लव मैरिज थी और ऐसे में वह अपनी पत्नी की पसंद और फैसले का सम्मान करना चाहते हैं।

अगर ‘मुसाफिर कैफे’ ने जीता दिल, तो ये 7 वेब सीरीज भी जरूर आएंगी पसंद!

हर किसी को ऐसी कहानियां पसंद आती हैं, जिनमें प्यार के साथ जिंदगी और रिश्तों की सच्चाई भी दिखाई दे। कुछ सीरीज अपनी सरल कहानी और प्यारे किरदारों की वजह से खास बन जाती हैं। आप हल्की-फुल्की, दिल को छूने वाली और जिंदगी से जुड़ी कहानियां देखना पसंद करते हैं, तो ये सीरीज अपनी वॉचलिस्ट में जरूर शामिल करें।

मॉडर्न लव मुंबई – Amazon Prime Video

मुंबई की अलग-अलग जगहों और लोगों की जिंदगी पर बनी यह सीरीज प्यार के अलग-अलग रंग दिखाती है। इसमें छह अलग-अलग कहानियां हैं, जिनमें रोमांस के साथ परिवार, दोस्ती, रिश्ते और अपनी खुशी को समझने की कोशिश दिखाई गई है। सीरीज में अरशद वारसी, चित्रांगदा सिंह, फातिमा सना शेख, भूपेंद्र जदावत, ऋत्विक भौमिक और मसाबा गुप्ता जैसे कलाकार नजर आते हैं। हर कहानी में प्यार को देखने का अलग नजरिया मिलता है। कहीं कोई अपने प्यार की तलाश कर रहा है, तो कहीं परिवार अपने रिश्तों को समझने की कोशिश कर रहा है।

नॉर्मल पीपल – Amazon Prime Video

कहानी कोनेल और मैरिएन की है, जो आयरलैंड के एक छोटे शहर में साथ पढ़ते हैं। दोनों का परिवार और रहन-सहन एक-दूसरे से काफी अलग है, लेकिन स्कूल के दिनों में दोनों के बीच प्यार हो जाता है। उनका रिश्ता आसान नहीं रहता और समय के साथ कई गलतफहमियां और परेशानियां उनके बीच आती हैं। कॉलेज जाने के बाद दोनों की जिंदगी अलग रास्ते पर चलने लगती है, लेकिन वे बार-बार एक-दूसरे के करीब आते हैं। सीरीज़ दिखाती है कि उम्र बढ़ने के साथ रिश्ते और प्यार किस तरह बदलते हैं। ‘मुसाफिर कैफे’ में प्यार और जिंदगी से जुड़े फैसलों की कहानी पसंद आई थी, तो ‘नॉर्मल पीपल’ जरूर पसंद आ सकती है।

स्वीट कारम कॉफी – Amazon Prime Video

यह सीरीज एक साउथ इंडियन परिवार की तीन पीढ़ियों की महिलाओं की कहानी है। इसमें सुंदरी, उनकी बहू कावेरी और कावेरी की बेटी निवेदिता की जिंदगी दिखाई गई है। तीनों की सोच और जिंदगी एक-दूसरे से काफी अलग है। एक दिन वे अपनी रोज की जिंदगी से थोड़ा ब्रेक लेने के लिए रोड ट्रिप पर निकलती हैं। इस सफर में उन्हें नई जगहें देखने और एक-दूसरे को समझने का मौका मिलता है। धीरे-धीरे वे अपने पुराने फैसलों और जिंदगी को लेकर भी सोचने लगती हैं। सीरीज में पहाड़ों और शांत जगहों के खूबसूरत नजारे भी देखने को मिलते हैं।

लिटिल थिंग्स – Netflix

यह कहानी मुंबई में साथ रहने वाले काव्या और ध्रुव की है। दोनों एक युवा कपल हैं और अपनी नौकरी, रिश्ते और रोज की जिंदगी के बीच तालमेल बनाने की कोशिश करते हैं। उनकी कहानी में बड़े ड्रामे के बजाय छोटी-छोटी बातें ज्यादा खास हैं। कभी दोनों छोटी बातों पर बहस करते हैं, तो कभी साथ में शांत शाम बिताते हैं या वीकेंड का प्लान बनाते हैं। फ्यूचर को लेकर उनकी बातचीत भी कहानी का हिस्सा है। धीरे-धीरे दोनों समझते हैं कि रिश्ते में सिर्फ प्यार ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समझना भी जरूरी है।

व्हेन द वेदर इज फाइन – Netflix

मोक हे-वोन काम और प्राइवेट लाइफ की परेशानियों से थककर सियोल छोड़ देती हैं और अपने पुराने शहर लौट आती हैं। वहां उनकी मुलाकात अपने पुराने क्लासमेट इम यून-सेओब से होती है, जो एक छोटी सी किताबों की दुकान चलाता है। यून-सेओब लंबे समय से हे-वोन को पसंद करता है, लेकिन उसने कभी अपने दिल की बात नहीं कही। गांव की शांत जिंदगी में रहने के दौरान दोनों धीरे-धीरे एक-दूसरे के करीब आते हैं। साथ में समय बिताते हुए वे अपने पुराने दुखों और परेशानियों से बाहर निकलने की कोशिश करते हैं। कॉफी, किताबें और सर्दियों की शांत शामें इस कहानी को और खूबसूरत बनाती हैं।

मीट योरसेल्फ – Netflix

शू होंगडोउ अपनी सबसे अच्छी दोस्त को खोने के बाद शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से ब्रेक लेने का फैसला करती हैं। वह बीजिंग छोड़कर युन्नान के एक छोटे से गांव में चली जाती हैं। वहां उनकी मुलाकात झी झियाओ से होती है, जो पहले शहर में काम करता था, लेकिन अब अपने गांव लौटकर नई जिंदगी शुरू कर रहा है। गांव में रहने के दौरान होंगडोउ नए लोगों से मिलती हैं और धीरे-धीरे शांत जिंदगी का आनंद लेना सीखती हैं। इस सफर में उन्हें खुद को समझने और अपने जीवन के बारे में नए सिरे से सोचने का मौका मिलता है। धीरे-धीरे वह फिर से खुश रहना और प्यार के बारे में सोचना शुरू करती हैं।

समबडी समवेयर – JioHotstar

सैम मिलर अपनी बहन की मौत के बाद अपने पुराने शहर लौटती हैं। यहां वापस आने के बाद उन्हें अपनी जिंदगी पहले जैसी नहीं लगती। तभी उनकी मुलाकात अपने पुराने क्लासमेट जोएल से होती है, जो उन्हें एक खास लोकल ग्रुप से मिलाता है। इस ग्रुप में ऐसे लोग हैं जो खुद को दूसरों से अलग महसूस करते हैं, लेकिन एक-दूसरे के साथ उन्हें अपनापन मिलता है। धीरे-धीरे सैम नए लोगों से जुड़ती हैं और अपने बारे में फिर से जानने लगती हैं। उन्हें समझ आता है कि जिंदगी अपने तरीके से जीना और अपनी पसंद को स्वीकार करना भी जरूरी है। यह सीरीज खुद को समझने, नए लोगों से जुड़ने और जिंदगी में दोबारा शुरुआत करने की खूबसूरत कहानी है।

Mirzapur Movie Trailer: कालीन भैया, मुन्ना भैया, गुड्डू पंडित नहीं, चौंका तो रहा बबलू का रोल, किस यादव जी के रोल में हैं रवि किशन?

Mirzapur Movie Trailer: मेकर्स ने ‘मिर्जापुर: द मूवी’ फिल्म का ट्रेलर मंगलवार 11 अगस्त को रिलीज कर दिया गया है। फिल्म के ट्रेलर का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। ट्रेलर में कालीन भैया, मुन्ना भैया, गुड्डू पंडित और बबलू पंडित जैसे पुराने किरदार फिर दिखाई दे रहे हैं। वहीं कुछ नए कलाकार भी कहानी में शामिल किया गया हैं। फिल्म में ट्रेलर में रवि किशन का किरदार बेहद एग्रेसिव नजर आ रहा है। वहीं गुरमीत सिंह के निर्देशन में बनी यह फिल्म 4 सितंबर 2026 को हिंदी और तेलुगु भाषा में सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इससे पहले ओटीटी पर ‘मिर्जापुर’ वेब सीरीज के तीनों सीजन को फैंस से काफी प्यार मिला था।

फिल्म की कहानी ‘मिर्जापुर’ सीरीज की दुनिया से जुड़ी हुई है। फिल्म की कहानी पुनीत कृष्णा ने लिखी है। वहीं, इसके प्रोडक्शन की जिम्मेदारी रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर के एक्सेल एंटरटेनमेंट ने संभाली है।।

‘मिर्जापुर: द मूवी’ का रिलीज हुआ ट्रेलर

‘मिर्जापुर: द मूवी’ के करीब 3 मिनट के इस ट्रेलर में फिल्म की कहानी मिर्जापुर की सत्ता और उसे हासिल करने की लड़ाई के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है। ट्रेलर की शुरुआत ही एक खाली गद्दी और दमदार वॉयसओवर से होती है। इसमें कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी) की आवाज सुनाई देती है। वह कहते हैं, “गद्दी न तो विरासत से मिलती है, न सियासत से। मिलती है तो सिर्फ और सिर्फ बाहुबल से। और टिकती है डर से।” इसके बाद मुन्ना भैया (दिव्येंदु) की एंट्री होती है, जो खुद को मिर्जापुर का “प्रिंस” बताते हैं। लेकिन कालीन भैया और मुन्ना के बीच रिश्ते पहले जैसे नहीं दिखते। कालीन भैया को लगता है कि मुन्ना उनके हर काम और मिशन में परेशानी खड़ी कर देते हैं।

 

रवि किशन की धमाकेदार एंट्री

वहीं, मुन्ना और गुड्डू पंडित (अली फजल) के बीच भी पुरानी दुश्मनी फिर सामने आती है, जब दोनों एक-दूसरे पर बंदूक ताने नजर आते हैं। इस बार कहानी में रवि किशन असली ट्विस्ट लेकर आते हैं। मिर्जापुर की गद्दी पर अपना दावा पेश करते हुए रवि किशन भी मैदान में उतरते नजर आते हैं। कालीन भैया उन्हें चेतावनी देते हैं कि मिर्जापुर में दाखिल होने का रास्ता सिर्फ उनके नियंत्रण में है। इस पर रवि किशन अपने खास अंदाज में कहते हैं कि अगर वह रास्ते की रखवाली कर रहे हैं, तो वह मिर्जापुर के अंदर आकर ही रहेंगे।

ट्रेलर के एक सीन में वह एक शख्स पर चाकू से हमला करते दिखाई देते हैं और मजाकिया अंदाज में कहते हैं, “क्या तुम्हारा हीमोग्लोबिन कम है? खून बहुत कम निकल रहा है।”। वहीं ट्रेलर के आखिर में बीना भाभी (रसिका दुगल) भी इस पावर गेम में अपनी राजनीतिक चालें चलती नजर आ रही हैं।

कब आई थी पहली सीरीज

‘मिर्जापुर’ वेब सीरीज की शुरुआत साल 2018 में प्राइम वीडियो पर हुई थी। इसके बाद सीरीज का दूसरा सीजन 2020 में और तीसरा सीजन 2024 में रिलीज हुआ। सीरीज की लोकप्रियता को देखते हुए इसके चौथे सीजन का भी ऐलान किया जा चुका है। हालांकि, मेकर्स पहले ‘मिर्जापुर: द मूवी’ के जरिए कहानी को आगे बढ़ाएंगे और इसके बाद सीजन 4 दर्शकों के सामने आएगा।

कौन-कौन है फिल्म में

‘मिर्जापुर: द मूवी’ में मुख्य किरदारों के अलावा भी एक बड़ी स्टारकास्ट शामिल है। इसमें रवि किशन, पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु, श्वेता त्रिपाठी, अभिषेक बनर्जी, रसिका दुगल, श्रेया पिलगांवकर, मोहित मलिक, शीबा चड्ढा, राजेश तैलंग, प्रमोद पाठक, श्रिया पिलगांवकर, हर्षिता शेखर गौड़, श्वेता त्रिपाठी, सोनल एस. चौहान, अनंग्शा बिस्वास, शाजी चौधरी, सत्येंद्र सोनी, कुलभूषण खरबंदा और सुशांत सिंह जैसे कई कलाकार नजर आ रहे हैं।