Lucknow Coaching Center Fire : लखनऊ में लपटों का तांडव, 15 छात्रों की मौत, CM योगी ने फायर विभाग के अफसरों को फटकारा, कैसी लगी आग, सामने आया कारण

CM Yogi Adityanath

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ में उस जगह पहुंचे जहां आग लगने की घटना हुई थी, घटना में 14 लोगों की मौत हो गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ से कार्यक्रम रद्द कर लखनऊ पहुंच गए हैं। मुख्यमंत्री घटनास्थल पर जाकर हालत का जायजा लेंगे और KGMU भी जाएंगे। 

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सीएम ने फोन पर फायर विभाग के अफसरों को फटकार लगाई है। हादसे के जिम्मेदारों को किसी भी हाल में न बख्शने के सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए। KGMU MS प्रेम राज सिंह ने बताया कि हमारे पास करीब 22-23 लोग आए थे जिसमें से 15 मृत लाए गए थे। 8 घायल थे जिसमें से 6 की हालत स्थिर है 2 लोगों को ज्यादा चोट आई है। 15 लोगों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। Edited by : Sudhir Sharma

 

 

Railway Stocks: बंगाल में ₹1 लाख करोड़ से बनेगा रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, इन 4 स्टॉक्स पर रखें नजर

Railway Stocks: पश्चिम बंगाल में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को नया रूप देने के लिए करीब 1 लाख करोड़ रुपये की बड़ी योजना सामने आई है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा कि अगले 4-5 साल में कोलकाता मेट्रो के लिए 60 नई पीढ़ी की ट्रेनें लाई जाएंगी। इसके साथ ही दिल्ली से सिलीगुड़ी के बीच हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है। इन घोषणाओं के बाद रेलवे सेक्टर से जुड़ी कई कंपनियां निवेशकों के रडार पर आ गई हैं।

Titagarh Rail

अगर कोलकाता मेट्रो के विस्तार की बात करें तो टीटागढ़ रेल का नाम सबसे आगे नजर आता है। कंपनी मेट्रो कोच और रेलवे रोलिंग स्टॉक बनाने में माहिर है। इसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी पश्चिम बंगाल में हैं। अभी तक नए ऑर्डर का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन मेट्रो के लिए बड़ी संख्या में नई ट्रेनें खरीदी जानी हैं। इसलिए टीटागढ़ को मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

कंपनी पहले अहमदाबाद मेट्रो के लिए स्टेनलेस स्टील मेट्रो कोच बना चुकी है। इस प्रोजेक्ट की वैल्यू करीब 350 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा पुणे मेट्रो के लिए 34 ट्रेनसेट की डिलीवरी पूरी करने के बाद उसे 12 और एल्युमीनियम ट्रेनसेट का 430 करोड़ रुपये का ऑर्डर भी मिला था। FY26 में कंपनी की कुल ऑर्डर बुक 27,540 करोड़ रुपये रही, जिसमें 10,600 करोड़ रुपये का हिस्सा पैसेंजर रेल बिजनेस से जुड़ा है।

RVNL

रेलवे की बड़ी-बड़ी घोषणाएं तभी हकीकत बनती हैं जब जमीन पर काम शुरू होता है। यही काम सरकारी रेल कंपनी RVNL करती है। कंपनी ट्रैक बिछाने, सिग्नलिंग, स्टेशन री-डेवलपमेंट और दूसरी रेलवे परियोजनाओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती है।

पश्चिम बंगाल में मेट्रो विस्तार और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे, RVNL को नए काम मिलने की संभावना बढ़ सकती है। कंपनी की ऑर्डर बुक फिलहाल करीब 1 लाख करोड़ रुपये की है। FY26 में उसका रेवेन्यू 20,412 करोड़ रुपये रहा। हालांकि बढ़ती लागत की वजह से मुनाफा 32.6% घटकर 871 करोड़ रुपये रह गया। इसके बावजूद कंपनी ने FY27 में 15-20% रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान दिया है और हाल में कई नए कॉन्ट्रैक्ट भी हासिल किए हैं।

IRFC

सरकारी कंपनी IRFC रेलवे सेक्टर की फाइनेंसिंग करने वाली सबसे अहम सरकारी कंपनी है। रेलवे जितना ज्यादा खर्च करेगा, उतनी ही ज्यादा फंडिंग की जरूरत होगी और इसका फायदा IRFC को मिल सकता है।

FY26 में कंपनी का शुद्ध लाभ 7.8% बढ़कर 7,009 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। कंपनी ने 35,000 करोड़ रुपये के लोन वितरित किए, जो उसके लक्ष्य से ज्यादा थे। इसका AUM बढ़कर 4.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है। फरवरी 2026 में सरकार ने OFS के जरिए अपनी 1.7% हिस्सेदारी बेची थी। वहीं कंपनी के बोर्ड ने FY27 में 60,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की मंजूरी भी दी है, जिससे रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंडिंग जारी रखी जा सके।

IRCON

दिल्ली-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा के बाद IRCON भी चर्चा में है। कंपनी रेलवे, हाईवे और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के निर्माण का लंबा अनुभव रखती है। अगर यह हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट आगे बढ़ता है तो बड़े पैमाने पर पुल, वायाडक्ट और स्टेशन बनाने का काम होगा। इसमें IRCON जैसी कंपनियों को अवसर मिल सकते हैं।

कंपनी की ऑर्डर बुक 24,984 करोड़ रुपये की है, जिसमें रेलवे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा सबसे बड़ा है। FY26 में उसका रेवेन्यू 9,071 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध लाभ 592 करोड़ रुपये था। खास बात यह है कि कंपनी लगभग कर्ज-मुक्त है। इससे उसे भविष्य की बड़ी परियोजनाओं में भाग लेने की वित्तीय ताकत मिलती है।

आपको इन शेयरों पर क्यों रखनी चाहिए नजर

अगर आप रेलवे सेक्टर पर नजर रखते हैं, तो इन शेयरों को अपनी वॉचलिस्ट में रख सकते हैं। पश्चिम बंगाल में मेट्रो विस्तार, स्टेशन पुनर्विकास और हाई-स्पीड रेल जैसे बड़े प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। इन योजनाओं से रेलवे वैल्यू चेन से जुड़ी कंपनियों को फायदा मिल सकता है।

हालांकि अभी ज्यादातर परियोजनाएं शुरुआती चरण में हैं। इसलिए ऑर्डर और कमाई पर असर दिखने में समय लग सकता है। ऐसे में Titagarh Rail, RVNL, IRFC और IRCON जैसे शेयरों पर आगे होने वाले घटनाक्रमों के साथ नजर रखना बेहतर हो सकता है।

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EPFO: लगातार 10 साल तक सर्विस की है तो आपको मिलेंगी पेंशन, ऐसे कर सकते हैं मंथली पेंशन का कैलकुलेशन

ईपीएफओ अपने सब्सक्राइबर्स के लिए ईपीएफ के साथ ही एक रेगुलर पेंशन स्कीम भी चलाता है। इसका नाम एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम (ईपीएस) है। इस स्कीम के तहत सब्सक्राइबर्स को रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन मिलती है। इसकी शुरुआत 16 नवंबर, 1995 को हुई थी। इस स्कीम ने फैमिली पेंशन स्कीम, 1971 की जगह ली थी। इसका मकसद सब्सक्राइबर्स को सोशल सिक्योरिटी देना है।

हर महीने ईपीएस में भी होता है कंट्रिब्यूशन

ईपीएफ के सब्सक्राइबर्स अपनी बेसिक मंथली सैलरी का 12 फीसदी ईपीएफ में कंट्रिब्यूट करते हैं। इतना ही कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयर भी एंप्लॉयी के ईपीएफ अकाउंट में कंट्रिब्यूट करता है। लेकिन उसका कंट्रिब्यूशन दो हिस्सों में बंटा होता है। 8.33 फीसदी कंट्रिब्यूशन ईपीएफ में जाता है और बाकी 3.67 फीसदी ईपीएस अकाउंट में जाता है।

ईपीएस में हर महीने पेशन का प्रावधान

फैमिली पेंशन स्कीम, 1971 के तहत सब्सक्राइबर की मौत के बाद परिवार को बेनेफिट्स मिलते थे। लेकिन, ईपीएस में सब्सक्राइबर्स को पेंशन की सुविधा भी देने की शुरुआत हुई। इतना ही नहीं, सब्सक्राइबर के परिवार को भी पेंशन का प्रावधान इस स्कीम में है। इससे रिटायरमेंट के बाद सब्सक्राइबर और उसके परिवार को आर्थिक सुरक्षा हासिल होती है।

ईपीएस के बेनेफिट्स के लिए ये हैं शर्तें

ईपीएस का हिस्सा बनने के लिए सब्सक्राइबर्स के लिए कुछ शर्तें तय हैं। पहला, सब्सक्राइबर की नौकरी कम से कम 10 साल पूरी होनी चाहिए। इस दौरान पेंशन स्कीम में उसकी तरफ से रेगुलर कंट्रिब्यूशन किया गया होना चाहिए। सब्सक्राइबर 58 साल की उम्र में रिटायर करने के बाद ईपीएफए की तरफ से मंथली पेंशन का हकदार होगा।

न्यूनतम पेंशन हर महीने 1000 रुपये

केंद्र सरकार के 2014 के नियम के मुताबिक, ईपीएस के तहत न्यूनतम पेंशन 1000 रुपये है। हालांकि, इसे बढ़ाकर हर महीने 7,500 रुपये करने की मांग लंबे समय से की जा रही है। किसी सब्सक्राइबर को रिटायरमेंट पर हर महीने कितनी पेंशन मिलेगी, इसका कैलकुलेशन उसकी पेंशनएबल सर्विस और रिटायरमेंट से पहले के 60 महीनों की एवरेज सैलरी के आधार पर होता है।

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ऐसे कर सकते हैं पेंशन का कैलकुलेशन 

इसके लिए पहले से एक फॉर्मूला है। इसमें पेंशनएबल सैलरी को पेंशनएबल सर्विस से गुणा किया जाता है। फिर जो संख्या आती है, उसमें 70 से भाग दिया जाता है। पेंशनएबल सैलरी का मतलब अंतिम 60 महीनों की एवरेज सैलरी से है। अगर किसी एंप्लॉयी की पेंशनएबल सैलरी 15,000 रुपये है और उसने 10 साल की सर्विस पूरी की है तो उसकी हर महीने की पेंशन करीब 2,143 रुपये बनेगी।

रिकॉर्ड तेजी से 100वां गोल, अब तक 2.5 लाख लोग स्टेडियम पहुंचे FIFA WC देखने

FIFA World Cup

FIFA World Cup जब कोडी गैकपो ने नीदरलैंड्स की स्वीडन पर 5-1 की जीत के दौरान टूर्नामेंट का 100वां गोल किया।गैकपो का गोल – जो मैच में नीदरलैंड्स का तीसरा गोल था – टूर्नामेंट के 33वें मैच में 100 गोल का आंकड़ा पूरा करने वाला बना; इस तरह प्रति मैच औसतन 3.03 गोल हुए।

1954 में स्विट्जरलैंड में हुए टूर्नामेंट के बाद से यह सबसे तेज़ गति थी जब वर्ल्ड कप ने 100 गोल का आंकड़ा छुआ; उस समय सिर्फ़ 20 मैचों में ही यह मुकाम हासिल कर लिया गया था। इसकी तुलना में, ब्राज़ील 2014 और स्पेन 1982 में 100 गोल तक पहुँचने में 36 मैच लगे थे, जबकि अर्जेंटीना 1978 और संयुक्त राज्य अमेरिका 1994 में 38 मैचों की ज़रूरत पड़ी थी।

ज़्यादा गोल होने की दर के कई कारण बताए गए हैं। एक कारण आधिकारिक मैच बॉल ‘ट्रायोंडा’ है; कुछ जानकारों का मानना है कि इसने गोलकीपरों के लिए दूर से किए गए शॉट्स का अंदाज़ा लगाना मुश्किल बना दिया है, जिससे पेनल्टी एरिया के बाहर से 10 गोल हुए हैं।

दूसरों ने गर्मी के असर की ओर इशारा किया है – थकान की वजह से डिफेंस में चूक हो सकती है – जबकि अनिवार्य तीन मिनट के ‘कूलिंग ब्रेक’ ने कोचों को मैच के दौरान रणनीतिक बदलाव करने के अतिरिक्त मौके दिए हैं।

टूर्नामेंट में टीमों की संख्या बढ़ाकर 48 किए जाने को भी एक कारण बताया गया है। जर्मनी ने कुराकाओ पर 7-1 की जीत के साथ अपने अभियान की शुरुआत की, कनाडा ने कतर को 6-0 से हराया, और ट्यूनीशिया को स्वीडन (5-1) और जापान (4-0) से करारी हार का सामना करना पड़ा।हालांकि, अन्य नतीजे बताते हैं कि बढ़े हुए फ़ॉर्मेट के कारण सिर्फ़ एकतरफ़ा मुक़ाबले ही नहीं हुए हैं।

शुरुआती 36 मैचों में कुल 2,307,947 दर्शक शामिल हुए

फीफा के जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2026 वर्ल्ड कप में दर्शकों की संख्या के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। फुटबॉल की वैश्विक गवर्निंग बॉडी ने बताया कि अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा में खेले गए टूर्नामेंट के शुरुआती 36 मैचों में कुल 2,307,947 दर्शक शामिल हुए।

इसका मतलब है कि हर मैच में औसतन 64,100 दर्शक आए। टीवी प्रसारण के दौरान कुछ सीटें खाली दिख रही थीं, इसके बावजूद स्टेडियम में कुल क्षमता का 99.54 प्रतिशत हिस्सा भरा हुआ था। टिकट की महंगी कीमतों और कुछ भाग लेने वाले देशों के समर्थकों को यात्रा में आ रही दिक्कतों की चिंताओं के बावजूद दर्शकों की इतनी बड़ी संख्या देखने को मिली। फुटबॉल के प्रति दीवानगी वाले देश मैक्सिको में तो बड़ी संख्या में दर्शकों के आने की उम्मीद थी ही, लेकिन अमेरिका और कनाडा में भी ये आंकड़े उल्लेखनीय हैं, जहां फुटबॉल को कई अन्य स्थापित टीम खेलों से लोकप्रियता के लिए मुकाबला करना पड़ता है।

Viral Post: 35 KM के लिए मांगे 3000 रुपए…बेंगलुरु में 2 युवकों से ऑटो चालक ने की बदसलूकी! वायरल हुआ पोस्ट

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक बेंगलुरु शहर की एक कहानी तेजी से वायरल हो रही है। बेंगलुरु में एक ऑटो चालक पर 2 युवकों के साथ मारपीट करने और उनसे जबरन पैसे लेने के आरोप लगे हैं। इस घटना की जानकारी सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि दोनों युवक हाल ही में शहर आए थे और इसी दौरान उनके साथ ये घटना हुई। मामला सामने आने के बाद बेंगलुरु में नए आने वाले लोगों की सेफ्टी को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

ये मामला तब चर्चा में आया जब सानू नाम के एक इंजीनियर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट शेयर किया। उन्होंने दावा किया कि “बेंगलुरु के सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल (SMVT) रेलवे स्टेशन पर पहुंचने के कुछ ही समय बाद गांव से आए 2 युवा लड़कों को निशाना बनाया गया। सोशल मीडिया पर साझा की गई एक पोस्ट में दावा किया गया कि गांव से आए 2 युवा रोजगार की तलाश में शहर पहुंचे थे। वे SMVT रेलवे स्टेशन से होसुर जाने के लिए अट्टीबेले तक ऑटो में बैठे थे। करीब 35 किलोमीटर की यात्रा के बाद ऑटो चालक ने उनसे 3,000 रुपये की मांग की।”

 

पोस्ट के अनुसार, “युवक घबराकर मदद के लिए फोन करने लगे, लेकिन चालक ने कथित तौर पर उनका मोबाइल फोन छीन लिया। मामले को लेकर सोशल मीडिया पर बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस और शहर पुलिस से मदद की अपील भी की गई।

पहली बार आए थे बेंगलुरु

सानू द्वारा शेयर की गई जानकारी के अनुसार, “2 युवा पहली बार बेंगलुरु पहुंचे थे और उन्हें होसुर जाने के लिए सही रास्ते की जानकारी नहीं थी। इसी दौरान रेलवे स्टेशन के बाहर एक ऑटो चालक ने उनसे संपर्क किया और कहा कि वह उन्हें बस स्टैंड तक पहुंचा देगा। आरोप है कि ऑटो चालक ने दोनों युवकों को बताया कि इस सफर के लिए 50 रुपये प्रति व्यक्ति किराया देना होगा, जिसके बाद वे उसके साथ चले गए।” पोस्ट में आगे कहा गया कि, जब ऑटो चालक को पता चला कि दोनों युवक शहर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखते हैं, तो उसने रास्ते में एक अन्य व्यक्ति को भी अपने साथ शामिल कर लिया।

छिन लिए युवक के फोन

इसके बाद 2 युवकों को लेकर ऑटो शहर से बाहर अट्टीबेले की दिशा में बढ़ा। कुछ समय बाद ऑटो एक सुनसान इलाके में जाकर रुका, जिससे दोनों युवक घबरा गए। आरोपों के अनुसार, ऑटो चालक और उसके साथी ने दोनों किशोरों से सफर के बदले 3,000 रुपये की मांग की। जब युवकों ने बताया कि उनके पास इतनी रकम नहीं है, तो दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर उनके मोबाइल फोन छीन लिए। इतना ही नहीं, आरोप है कि उन्होंने दोनों युवकों के साथ मारपीट भी की और उन पर पैसे देने का दबाव बनाया। घटना के दौरान 2 पीड़ित किशोर किसी तरह उनसे संपर्क करने में सफल हो गए थे।

उनके अनुसार, बातचीत के दौरान फोन पर घबराहट और शोर-शराबे की आवाजें सुनाई दे रही थीं। हालांकि कुछ ही देर बाद कॉल अचानक कट गई। इसके बाद जब उन्होंने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, तो कोई जवाब नहीं मिला। आरोप है कि उस समय तक दोनों युवकों के मोबाइल फोन उनसे छीन लिए गए थे, जिससे उनसे संपर्क पूरी तरह टूट गया।

शेयर किया स्क्रीनशॉट

सानू ने बाद में सोशल मीडिया पर एक नई जानकारी साझा करते हुए बताया कि 2 किशोरों को उनके मोबाइल फोन वापस मिल गए, लेकिन इसके लिए उन्हें पैसे देने पड़े। उनके अनुसार, पहले 2,000 रुपये देने की बात सामने आई थी, जबकि बाद में उन्होंने दावा किया कि कुल 2,400 रुपये का भुगतान किया गया था। आरोप है कि युवकों के पास पर्याप्त नकदी नहीं थी, इसलिए यह रकम UPI के जरिए भेजी गई। सानू ने कथित लेनदेन का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया और बेंगलुरु पुलिस को टैग करते हुए मामले की जांच की मांग की। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान के रिकॉर्ड से आरोपियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

X पर साझा की गई ये पोस्ट कुछ ही समय में तेजी से वायरल हो गईं। इस कथित घटना को लेकर कई यूजर्स ने हैरानी जताई और नाराजगी व्यक्त की। बड़ी संख्या में लोगों ने संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

इंदौर में किसान का अपहरण, वाट्सऐप पर मांगी फिरोती, 20 लाख लेकर छुडाने पहुंचा आधा गांव

Farmer kidnapped

इंदौर जिले के ग्रामीण इलाके में एक किसान के अपहरण का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। अपहरणकर्ताओं ने पहले शराब पिलाकर किसान का अपहरण किया। इसके बाद वाट्सऐप कॉल कर फिरौती मांगी। फिरौती की राशी देने के लिए आधे गांव के लोग उनकी बताए लोकेशन पर जा पहुंचे।

अपहर्ताओं ने उनके हाथ में हथियार देखे तो वे फिरौती की रकम नहीं लेने आए और उस वक्त तो किसान को लेकर भाग गए, लेकिन सुबह हाथ पैर बांधकर उसे एक गांव के पास पटक गए। बताया जाता है कि किसान की जमीन हाईवे में गई थी, जिसके चलते उसके शासन ने मुआवजा दिया था। इस कारण किसान का अपहरण किया गया।

बता दें कि पंथ बड़ोदिया गांव का रहने वाला 38 साल का हुकुमसिंह पिता पोपसिंह सोलंकी कल रात करीब 9 बजे खेत पर जाने का बोलकर घर से निकला। कुछ देर बात वाट्सऐप कॉल पर उसके परिजन और अन्य ग्रामीणों के पास कुछ लोगों ने उसे अगवा कर फिरौती की रकम 20 लाख रुपए मांगी। आनन-फानन में हुकुम के परिजन ने पुलिस को सूचना दी। बाद में परिजन और गांव वालों ने फिरौती की रकम की व्यवस्था की।

शराब पिलाई और होश में ही नहीं आने दिया : इस बीच अपहरणकर्ता पल-पल पर हुकुम के गांव वालों सहित परिजन के वाट्सऐप कॉल से संपर्क में थे। वे हुकुम की तस्वीरे भी भेज रहे थे। अपहरणकर्ता के बताए स्थान नौगांवा गांव के पास सभी फिरौती की रकम देने पहुंचे। कुछ पुलिसवाले भी उनके साथ थे। कुछ ग्रामीणों के हाथ में हथियार थे। यह देख अपहरणकर्ताओं ने फिर कॉल किया और धमकाया कि यह तुमने गलत किया, हथियारों और पुलिस को लेकर क्यों आए हो। अपहरणकर्ता हुकुम को कार में लेकर भाग गए। रातभर अपहरणकर्ताओं के फोन का हुकम के परिजन इंतजार करते रहे, लेकिन फोन नहीं आया और आज सुबह पलासिया गांव के पास हुकुम को हाथ-पैर बांधकर पटक गए। बाद में उसे गांव वाले घर लेकर पहुंचे। हुकुम काफी नशे में था। अपहरणकर्ताओं ने उसे खूब शराब पिलाई और होश में ही नहीं आने दिया। अब वह थोड़ा होश में आया है, उसका कहना है कि अपहरणकर्ताओं की संख्या 8 से अधिक थी।

हाईवे में गई 9 एकड़ जमीन : हुकुम पंथ बड़ोदिया का बड़ा कास्तकार है। उसके पास 40 एकड़ जमीन है। बीते दिनों हाईवे निकलने से 9 एकड़ जमीन रोड में गई है। जिसकी मुआवजा राशि उसे मिली है। किसी ने अपहरणकर्ताओं को रकम को लेकर मुखबिरी की होगी। यह भी शंका है कि अपहरणकर्ताओं में कुछ परिचित हो सकते है।
Edited By: Naveen R Rangiyal

CCSU के वैज्ञानिकों की बड़ी खोज, प्याज-लहसुन परिवार की इन 2 प्रजातियों में मिले कैंसर और डायबिटीज से बचाव के गुण

CCSU Meerut Research

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू), मेरठ के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे शोध का खुलासा किया है, जो आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है। विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में किए गए अध्ययन में एलियम (Allium) परिवार की दो विशेष प्रजातियों—एलियम हूकेरी (Allium hookeri) और एलियम एम्पेलोप्रासम (Allium ampeloprasum)—में कई औषधीय गुण पाए गए हैं। एलियम वही पौधों का परिवार है, जिसमें लहसुन और प्याज जैसी फसलें शामिल हैं, जिनका हर घर में इस्तेमाल होता है।

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शोध में सामने आया है कि इन दोनों नई प्रजातियों में ऐसे प्राकृतिक तत्व मौजूद हैं, जो शरीर को बीमारियों से बचाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कई स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं और आने वाले समय में स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र में नई पहचान बना सकती हैं।

वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर विजय मलिक के निर्देशन में शोधार्थी दीप्ति तेवतिया द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि इन पौधों में ऐसे प्राकृतिक तत्व मौजूद हैं, जो शरीर को बीमारियों से बचाने में मदद कर सकते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट, जीवाणुरोधी, मधुमेह नियंत्रण और कैंसर से बचाव के गुण पाए गए हैं।

यही कारण है कि भविष्य में इनका उपयोग हर्बल दवाओं और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों के निर्माण में किया जा सकता है। किसानों के लिए खुल सकते हैं नए अवसर शोध का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन दोनों प्रजातियों की खेती पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जलवायु और मिट्टी में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है। वर्तमान में इनकी खेती मुख्य रूप से उत्तराखंड, मणिपुर और कश्मीर के कुछ क्षेत्रों में की जाती है।

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यदि किसानों को इनके उत्पादन और बाजार की उचित जानकारी उपलब्ध कराई जाए, तो ये फसलें पारंपरिक खेती का लाभदायक विकल्प बन सकती हैं। इससे कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय बढ़ाने के नए रास्ते खुलेंगे। स्वास्थ्य के लिए भी हैं लाभकारी एलियम हूकेरी (Allium hookeri) का उपयोग पूर्वोत्तर भारत में लंबे समय से सर्दी-जुकाम, खांसी, पाचन संबंधी समस्याओं और सूजन के उपचार में किया जाता रहा है। वहीं एलियम एम्पेलोप्रासम (Allium ampeloprasum) जिसे जायंट लीक या वाइल्ड लीक भी कहा जाता है, हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, रक्तचाप नियंत्रित रखने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उपयोगी माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन पौधों में मौजूद प्राकृतिक यौगिक भविष्य में कई स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों और प्राकृतिक औषधियों का आधार बन सकते हैं।

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कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए नई दिशा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में जहां लहसुन और प्याज का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है, वहीं एलियम परिवार की इन नई प्रजातियों का विस्तार किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकता है। साथ ही औषधीय पौधों के उत्पादन को नई दिशा और प्राकृतिक उपचार पद्धतियों को भी मजबूती मिलेगी। सीसीएसयू में किया गया यह शोध न केवल वैज्ञानिक उपलब्धि है, बल्कि यह संकेत भी है कि खेती और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभी अनेक नई संभावनाएं मौजूद हैं। आने वाले समय में एलियम हूकेरी और एलियम एम्पेलोप्रासम किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकती हैं। Edited by : Sudhir Sharma

‘तीन संजय की ताकत और ऑपरेशन टाइगर…’, 4 साल में दूसरी बार टूटी शिवसेना UBT, अब 6 सांसदों ने छोड़ा साथ

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से बड़ी हलचल देखने को मिली है। सोमवार 22 जून को उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं। एकनाथ शिंदे ने इन नेताओं के पार्टी में शामिल होने की पुष्टि करते हुए इसे वर्ष 2022 में हुए राजनीतिक बदलाव का दूसरा चरण बताया। शिंदे की शिवसेना में शामिल होने वाले सांसदों में संजय जाधव, संजय पाटिल, संजय देशमुख, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल अष्टिकर और ओमप्रकाश निंबालकर शामिल हैं। इन सांसदों के जाने से उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा झटका माना जा रहा है। लोकसभा में पार्टी के कुल नौ सांसद थे, जिनमें से अब छह सांसद शिंदे गुट के साथ चले गए हैं।

अब 6 सांसदों ने छोड़ा साथ

शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने के लिए पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जरूरी था। 17 जून को दिल्ली में उद्धव ठाकरे गुट की संसदीय दल की बैठक हुई थी, लेकिन इसमें ये छह सांसद शामिल नहीं हुए थे। तभी से उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं। उस बैठक में लोकसभा सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे के साथ राज्यसभा सांसद संजय राउत मौजूद थे। रविवार को नागेश पाटिल अष्टिकर और ओमप्रकाश निंबालकर ने भी सार्वजनिक रूप से यह साफ कर दिया था कि वे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में शामिल होने जा रहे हैं। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) ने इन छह सांसदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की बात कही थी और उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल बताया था।

‘यही असली शिवसेना…’

अपने साथ आए छह सांसदों के साथ एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि आज उनके साथ छह मजबूत नेता खड़े हैं। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि इन छह सांसदों में से तीन का नाम संजय है, इसलिए इसे “तीन संजय की ताकत” कहा जा सकता है। उन्होंने बिना नाम लिए शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत पर भी निशाना साधा और कहा कि जब उनके साथ इतने संजय मौजूद हैं, तो किसी दूसरे संजय की चर्चा करने की जरूरत नहीं है। शिंदे ने इस राजनीतिक घटनाक्रम की तुलना क्रिकेट से करते हुए कहा कि उनकी टीम ने अब “छक्का” लगा दिया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में उद्धव ठाकरे गुट से अलग होने का फैसला बालासाहेब ठाकरे की हिंदुत्व विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए लिया गया था। उन्होंने कहा, “जहां शिवसेना की मूल विचारधारा है, वहीं असली शिवसेना है।”

चला ऑपरेशन टाइगर

शिंदे गुट ने छह सांसदों को अपने साथ जोड़ने के अभियान को “ऑपरेशन टाइगर” नाम दिया था। यह नाम शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की पार्टी के पुराने चुनाव चिह्न ‘बाघ’ से प्रेरित था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस अभियान की सफलता पर कहा कि इससे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना पर नेताओं का बढ़ता विश्वास दिखाई देता है। उन्होंने इस राजनीतिक स्थिति के लिए उद्धव ठाकरे को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, रविवार को भांडुप में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनका हौसला बिल्कुल नहीं टूटा है। उन्होंने भरोसा जताया कि वह आगे भी अपनी पार्टी का नेतृत्व करते रहेंगे। ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी ही असली शिवसेना है और वह उसे मजबूत बनाने के लिए लगातार काम करते रहेंगे।

साल 2022 में हुई शिवसेना की टूट का बचाव करते हुए शिंदे ने कहा कि उस समय कई लोगों ने दावा किया था कि उनके साथ आने वाले 40 विधायक दोबारा चुनाव नहीं जीत पाएंगे। उन्होंने बताया कि तब उन्होंने कहा था कि अगर ये विधायक चुनाव नहीं जीतते हैं, तो वह मुख्यमंत्री पद छोड़कर अपने गांव लौट जाएंगे और खेती करेंगे। शिंदे ने कहा कि बाद में हुए चुनाव में उनके साथ जुड़े 60 नेता दोबारा जीतकर आए, जिससे यह साबित हुआ कि जनता ने उनके फैसले और नेतृत्व पर भरोसा जताया।

योगी सरकार की पहल बनी बच्चों के जीवन का आधार

Yogi adityanath

Mukhyamantri Bal Seva Yojana 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के उत्थान के लिए लगातार संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) उन बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है, जिन्होंने अपने माता-पिता अथवा उनमें से किसी एक को खो दिया है। इसके साथ ही बालश्रम, भिक्षावृत्ति एवं वैश्यावृत्ति जैसी परिस्थितियों से मुक्त कराकर पुनर्वासित बच्चों को भी इस योजना के माध्यम से पारिवारिक वातावरण में बेहतर जीवन उपलब्ध कराया जा रहा है।

आर्थिक सहायता से बच्चों को मिल रहा बेहतर भविष्य

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत पात्र बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह 2,500 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। वहीं, ऐसे युवक-युवतियां जिन्होंने माता-पिता दोनों अथवा उनमें से किसी एक को खो दिया है, उन्हें 18 से 23 वर्ष की आयु तक स्नातक डिग्री या डिप्लोमा पूरा करने के लिए प्रतिमाह 2,500 रुपए की सहायता दी जा रही है। योगी सरकार की इस पहल से बच्चों की शिक्षा और भविष्य सुरक्षित हो रहा है। वर्तमान समय में प्रदेशभर में कुल 1,03,611 बच्चे इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सहायता किसी संबल से कम नहीं है। योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर करना भी है।

बाल संरक्षण को मिल रही नई मजबूती, शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर

योगी सरकार बाल संरक्षण और पुनर्वास को लेकर विशेष रूप से गंभीर नजर आ रही है। बालश्रम और भिक्षावृत्ति जैसी समस्याओं से मुक्त कराए गए बच्चों को परिवार आधारित वातावरण में पुनर्वासित कर मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनका सामाजिक विकास भी सुनिश्चित हो रहा है। योजना के तहत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो रही है। कई छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सरकार की मंशा है कि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए सुरक्षा कवच साबित हो रही है। वहीं बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

 

महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति के अनुसार प्रदेश के सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत आने वाले समस्त पात्र बच्चों की प्राथमिकता के आधार पर पहचान कर उन्हें योजना का लाभ दिया जाए। इसके लिए जिले स्तर पर व्यापक सर्वेक्षण, सत्यापन एवं जन-जागरूकता गतिविधियां संचालित की जाएं। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि पात्रता रखने वाला कोई भी बच्चा योजना के लाभ से वंचित न रहे।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

DA Hike: महंगाई भत्ते में 20% का तगड़ा इजाफा, बंगाल सरकार का अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ा तोहफा

DA Hike: पश्चिम बंगाल की नव-निर्वाचित बीजेपी सरकार ने सोमवार को अपना पहला बजट पेश किया। इसमें राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत दी। सरकार ने महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में 20% की बढ़ोतरी का ऐलान किया है।

इस बढ़ोतरी के बाद राज्य कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने वाला DA/DR उनकी बेसिक सैलरी का 38% हो जाएगा। नई दरें 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगी।

यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से पश्चिम बंगाल के कर्मचारी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर DA की मांग कर रहे थे। नए ऐलान के बाद राज्य और केंद्र के कर्मचारियों के DA के बीच का अंतर 42 प्रतिशत अंक से घटकर 22 प्रतिशत अंक रह गया है।

क्या होता है DA?

महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) कर्मचारियों और पेंशनर्स को बढ़ती महंगाई के असर से राहत देने के लिए दिया जाता है। यह बेसिक सैलरी का एक हिस्सा होता है और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर समय-समय पर संशोधित किया जाता है। DA पूरी तरह टैक्सेबल होता है।

क्यों उठ रही थी DA बढ़ाने की मांग?

केंद्र सरकार के कर्मचारी फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत वेतन और भत्ते पा रहे हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल के कई कर्मचारी अभी भी 5वें और 6वें वेतन आयोग की व्यवस्था के दायरे में हैं। इससे दोनों के वेतन और भत्तों में बड़ा अंतर बना हुआ है। 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया शुरू होने के बाद यह अंतर और बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी।

7वें वेतन आयोग का भी वादा

कर्मचारी संगठनों के मुताबिक मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जनवरी 2027 से 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने का भी आश्वासन दिया है। इसके अलावा सरकार ने बजट में 1 लाख सरकारी नौकरियां भरने, महिलाओं के लिए अन्नपूर्णा योजना पर ₹36,000 करोड़ खर्च करने और फ्री बस सेवा के लिए ₹550 करोड़ आवंटित करने की घोषणा की है।

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