कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट में धमाका:13 की मौत, इनमें कई भारतीय भी शामिल; 60 से ज्यादा घायल

कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट रास लाफान के LNG कॉम्प्लेक्स में रविवार शाम विस्फोट हुआ। इसमें 13 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 66 लोग घायल हुए हैं। कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने सोमवार को इसकी पुष्टि की। मरने वालों में भारत और पाकिस्तान के नागरिक शामिल हैं। भारतीय नागरिकों की सही संख्या अभी सामने नहीं आई है। अल-काबी ने बताया, विस्फोट रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी स्थित बरजान लोकल गैस सप्लाई फैसिलिटी में हुआ। हादसे में घायल हुए लोगों में भारत, कतर, तंजानिया, पाकिस्तान, गिनी, नेपाल, बांग्लादेश, केन्या और नाइजीरिया के नागरिक शामिल हैं। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि यह एक हादसा था। इसमें किसी साजिश या जानबूझकर की गई हरकत के संकेत नहीं मिले हैं। उनके मुताबिक, जरूरी मरम्मत के कारण दिसंबर 2025 से प्लांट का उत्पादन पूरी तरह बंद था और इसे सिर्फ दो दिन पहले ही दोबारा शुरू किया गया था। हादसे के कारणों की शुरू कर दी गई है। हादसे से जुड़ी दो तस्वीरें… राजधानी दोहा तक धमाके की आवाज सुनाई दी ऊर्जा मंत्री के मुताबिक, रविवार शाम ऑपरेशन शुरू करने की प्रक्रिया के दौरान बरजान लोकल गैस सप्लाई फैसिलिटी में विस्फोट और आग लगी थी। आपातकालीन टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और अब आग पर काबू पा लिया गया है। रॉयटर्स के मुताबिक, धमाका इतना तेज था कि इसकी आवाज राजधानी दोहा तक सुनाई दी। 70 किलोमीटर दूर रहने वाले लोग भी घबरा गए। हालांकि, ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने कहा कि हादसे से पर्यावरण को कोई खतरा नहीं है और कतर से गैस की सप्लाई भी जारी रहेगी। जहां हादसा हुआ, वह बरजान गैस प्लांट कतर के सबसे बड़े गैस हब रास लाफान का हिस्सा है। इसी इलाके से दुनिया के कई देशों को गैस भेजी जाती है। यहां से घरेलू बिजली संयंत्रों और उद्योगों को भी गैस सप्लाई होती है। भारतीय दूतावस बोला- कतर के अधिकारियों से संपर्क में दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने कहा है कि वह कतर के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है और मृतकों तथा घायलों के परिवारों को हरसंभव मदद दी जाएगी। दूतावास ने +974-55647502 और +975-55384683 हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। इसके अलावा cons.doha@mea.gov.in ईमेल के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है। इससे पहले दूतावास ने कहा था कि कई लोग घायल हुए हैं और कुछ लोग लापता हैं। ईरान जंग में रास लाफान की 2 यूनिट को नुकसान पहुंचा रॉयटर्स के मुताबिक, मार्च में ईरान के मिसाइल हमले में रास लाफान की दो गैस यूनिट क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इससे कतर की गैस निर्यात क्षमता का करीब 17% हिस्सा प्रभावित हुआ था। कतरएनर्जी के CEO के मुताबिक, इन यूनिटों की पूरी मरम्मत में तीन से पांच साल लग सकते हैं। ईरान युद्ध के दौरान कंपनी को करीब 10 हजार कर्मचारियों को गैस संयंत्रों से हटाना पड़ा था। हालांकि मार्च में हुए मिसाइल हमले में किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, LNG प्लांट को दोबारा शुरू करना बेहद जटिल प्रक्रिया होती है और इसे चरणबद्ध तरीके से किया जाता है, ताकि तापमान में अचानक बदलाव से उपकरणों को नुकसान न पहुंचे। ———————– ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका ने ईरान के तेल बेचने पर प्रतिबंध हटाया:अगले 60 दिन भारत भी खरीद सकता है, ईरान में फिर तैनात होंगे UN के न्यूक्लियर इंस्पेक्टर अमेरिका ने ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की बिक्री पर लगी पाबंदियों में 60 दिन की ढील दे दी है। यह फैसला स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच हुई बातचीत के बाद लिया गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

निपुण भारत मिशन को रफ्तार देने में जुटी योगी सरकार, मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण का दूसरा चरण शुरू

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार निपुण भारत मिशन को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए शिक्षकों के क्षमता संवर्धन की मजबूत शृंखला तैयार कर रही है। इसी क्रम में कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से जनपद स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स के लिए पांच दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का दूसरा चरण सोमवार से प्रारंभ हो गया। 

 

राज्य स्तर पर आयोजित इस प्रशिक्षण में सहभागी जनपदों से चयनित राज्य संसाधन समूह (एसआरजी) सदस्यों और डायट मेंटर्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जो आगे जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण का नेतृत्व करते हुए लाखों शिक्षकों तक निपुण भारत मिशन की अवधारणाओं, नवीन शिक्षण पद्धतियों और अधिगम सुधार की रणनीतियों को पहुंचाएंगे।

 

यह प्रशिक्षण निपुण भारत मिशन के अंतर्गत संचालित राज्यव्यापी शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम की दूसरी कड़ी है। प्रशिक्षण का पहला चरण 16 से 20 मई के बीच सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है। इसके बाद जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण के लिए दो और चरण आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रदेश भर में एक सुदृढ़ शैक्षणिक प्रशिक्षण तंत्र विकसित किया जा सके।

 

वर्तमान बैच में प्रदेश के 20 जनपदों के प्रतिनिधि शामिल हैं। प्रत्येक सहभागी जनपद से दो राज्य संसाधन समूह (एसआरजी) सदस्य और दो डायट मेंटर्स को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स की जिम्मेदारी आगे जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करना होगी, ताकि निपुण भारत मिशन की रणनीतियां और शिक्षण पद्धतियां प्रभावी ढंग से विद्यालय स्तर तक पहुंच सकें।

 

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आधारभूत भाषा एवं गणितीय दक्षताओं के विकास के लिए प्रभावी कक्षा-कक्ष क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत दक्षता आधारित शिक्षण पद्धति, गतिविधि आधारित शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाएं, प्रिंट-समृद्ध शैक्षणिक सामग्री और टीएलएम के उपयोग, कक्षा मूल्यांकन की प्रभावी रणनीतियों तथा दीक्षा, कैच-अप शिक्षण एवं रीडिंग कैंपेन जैसे कार्यक्रम पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। डिजिटल संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष बल है।

 

प्रशिक्षण कार्यक्रम को पूरी तरह सहभागितापूर्ण और व्यावहारिक स्वरूप में तैयार किया गया है। इसमें प्रदर्शन, चिंतन, सहकर्मी अधिगम, समूह चर्चा और कक्षा में प्रत्यक्ष उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि प्रशिक्षण के दौरान विकसित शैक्षणिक समझ और कौशल सीधे शिक्षण व्यवहार में परिलक्षित हों तथा विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित किया जा सके।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। विद्यालय कायाकल्प, बाल वाटिका, डिजिटल शिक्षण संसाधनों के विस्तार, शिक्षक क्षमता संवर्धन और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे प्रयासों के साथ सरकार बुनियादी शिक्षा की मजबूत नींव तैयार करने में जुटी है। Edited by : Sudhir Sharma

पर्यटकों की बढ़ती संख्या के बीच योगी सरकार का बड़ा फैसला, बदली होम स्टे नीति

उत्तरप्रदेश में लगातार बढ़ रही पर्यटन गतिविधियों और पर्यटकों की संख्या को देखते हुए योगी सरकार ने बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) एवं होम स्टे नीति-2025 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नई व्यवस्था के तहत होम स्टे और बीएंडबी इकाइयों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को पहले से और आसान बनाया गया है। साथ ही पंजीकृत इकाइयों को ऑनलाइन स्वतः नवीनीकरण (ऑटो रिन्यूअल) की सुविधा भी प्रदान की गई है।

 

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि योगी सरकार का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र में किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण आवास सुविधाओं का विस्तार करना है, ताकि प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें और स्थानीय लोगों को भी पर्यटन से जुड़ने के अधिक अवसर मिल सकें।

 

6 की जगह अब 8 कमरों के लिए मिली मंजूरी

उन्होंने बताया कि संशोधित नीति के अनुसार शहरी क्षेत्रों में संचालित होम स्टे इकाइयों में अब न्यूनतम एक और अधिकतम आठ कमरे (16 बेड) पंजीकृत कराए जा सकेंगे। पूर्व में अधिकतम 6 कमरों को ही किराये पर दिए जाने की व्यवस्था थी। यह भी साफ किया गया है कि शहरी इलाकों में होम स्टे ऐसी रिहायशी प्रॉपर्टी में चलने चाहिए जो या तो आवेदक की अपनी हो या फिर विकास प्राधिकरण से लीज पर ली गई जमीन पर बनी हो। प्रॉपर्टी के मालिक या उनके परिवार के सदस्यों का वहीं रहना जरूरी है।

 

पर्यटकों को आवास के साथ भोजन की सुविधा

बीएंडबी श्रेणी के अंतर्गत आवासीय अथवा लीज पर लिए गए भवनों में अधिकतम 8 कमरे पंजीकृत किए जा सकेंगे। ऐसी इकाइयों में घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों को आवास के साथ नाश्ता और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इकाई में केयरटेकर का निवास अनिवार्य होगा और लीज पर लिए गए भवन की लीज अवधि न्यूनतम तीन वर्ष होनी चाहिए। 16 बेड वाली डॉरमेट्री भी इस श्रेणी में पात्र मानी जाएगी।

उन्होंने बताया कि आठ कमरों से अधिक क्षमता वाले आवासीय भवनों, होटल, मोटल और गेस्ट हाउस जैसी इकाइयों को इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत नहीं किया जाएगा।

 

तीन महीने पहले होगा स्वतः नवीनीकरण

संशोधन के तहत पंजीकृत इकाइयों को बड़ी राहत देते हुए पोर्टल आधारित स्वतः नवीनीकरण (ऑटो रिन्यूअल) की व्यवस्था भी लागू की गई है। अब इकाई संचालक अपने पंजीकरण की अवधि समाप्त होने से पूर्व विभागीय पोर्टल पर स्वयं नवीनीकरण करा सकेंगे। यह सुविधा पंजीकरण समाप्ति की तिथि से तीन माह पूर्व उपलब्ध रहेगी।

 

पर्यटन आधारित रोजगार बढ़ेंगे

अपर मुख्य सचिव पर्यटन विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि यह संशोधन प्रदेश में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने, स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहन देने और पर्यटन आधारित रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे। उन्होंने कहा कि सामुदायिक भागीदारी आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने और प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण आवास क्षमता बढ़ाने के लिए यह कदम विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगा। Edited by : Sudhir Sharma

TCS Results Update: 9 जुलाई को जून तिमाही के नतीजे जारी करेगी TCS, डिविडेंड देने पर होगा भी विचार

TCS Results Update: देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी TCS (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) ने बताया है कि उसके बोर्ड की बैठक 9 जुलाई 2026 को होगी। इस बैठक में जून 2026 तिमाही (Q1FY27) के नतीजों को मंजूरी दी जाएगी। इसके साथ ही कंपनी अंतरिम डिविडेंड पर भी फैसला कर सकती है।

टाटा ग्रुप की इस कंपनी ने कहा है कि बोर्ड 30 जून 2026 को खत्म तिमाही के ऑडिटेड स्टैंडअलोन वित्तीय नतीजों पर विचार करेगा और उन्हें मंजूरी देगा।

डिविडेंड का भी हो सकता है ऐलान

तिमाही नतीजों के साथ निवेशकों की नजर डिविडेंड पर भी रहेगी। TCS का बोर्ड अंतरिम डिविडेंड पर विचार करेगा। अगर डिविडेंड का ऐलान होता है तो उसका फायदा उन शेयरधारकों को मिलेगा जिनका नाम 15 जुलाई 2026 तक कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज होगा। कंपनी ने इसके लिए 15 जुलाई को रिकॉर्ड डेट तय किया है।

पिछली तिमाही में कैसा था प्रदर्शन?

मार्च 2026 तिमाही में TCS ने बाजार की उम्मीदों से बेहतर नतीजे दिए थे। कॉन्स्टेंट करेंसी के आधार पर कंपनी का रेवेन्यू पिछली तिमाही के मुकाबले 1.2% बढ़ा था। खास बात यह रही कि पिछले सात क्वार्टर में यह कंपनी की सबसे तेज ग्रोथ थी।

एनालिस्टों को औसतन 1% ग्रोथ की उम्मीद थी। कुछ ब्रोकरेज हाउस ने 0.6% से 1.4% तक का अनुमान लगाया था, लेकिन कंपनी इन अनुमानों के ऊपरी स्तर के करीब पहुंचने में सफल रही।

29% उछला था TCS का मुनाफा

मार्च तिमाही में TCS का शुद्ध लाभ बढ़कर ₹13,718 करोड़ पहुंच गया था। दिसंबर तिमाही में यह ₹10,657 करोड़ था। यानी कंपनी के मुनाफे में करीब 29% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वहीं कंपनी का रेवेन्यू भी बढ़कर ₹70,698 करोड़ हो गया, जो पिछली तिमाही में ₹67,087 करोड़ था। यह आंकड़ा भी बाजार के अनुमान से बेहतर रहा।

मार्जिन में सुधार, बड़े ऑर्डर भी मिले

TCS की कमाई की ताकत दिखाने वाला EBIT बढ़कर ₹17,870 करोड़ रहा, जो पिछली तिमाही से 6% ज्यादा है। वहीं EBIT मार्जिन 25.3% रहा, जो दिसंबर तिमाही के 25.2% से थोड़ा बेहतर है।

मार्च तिमाही में TCS ने 12 अरब डॉलर के नए कॉन्ट्रैक्ट हासिल किए थे। यह कंपनी के इतिहास के सबसे बड़े ऑर्डर बुकिंग स्तरों में से एक है। इसमें तीन बड़े मेगा डील भी शामिल थीं।

पहले भी दे चुकी है ₹31 का डिविडेंड

TCS ने हाल ही में अपने शेयरधारकों के लिए ₹31 प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड को मंजूरी दी थी। हालांकि उसकी रिकॉर्ड डेट का ऐलान अभी बाकी है।

अब निवेशकों की नजर 9 जुलाई पर रहेगी। बाजार यह देखना चाहेगा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच TCS की ग्रोथ कितनी मजबूत बनी हुई है और कंपनी डिविडेंड को लेकर क्या फैसला करती है।

TCS का शेयर सोमवार को 0.21% की बढ़त के साथ 2,129.50 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, बीते 6 महीने में शेयर 35% से ज्यादा टूट चुका है।

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Lucknow: कोचिंग सेंटर या मौत का जाल? लखनऊ अग्निकांड का दर्दनाक वीडियो आया सामने…उठे ये सवाल

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सोमवार को एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ है, जिसे पूरे शहर की आंखे नम हो गई हैं। लखनऊ के अलीगंज इलाके में मौजूद एक कोचिंग इंस्टिट्यूट में भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 14 छात्रों की मौत हो गई।  मृतकों की उम्र 20 से 24 साल के बीच बताई जा रही है। लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने एक बार फिर कोचिंग और शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है और लोगों में गहरा दुख और नाराजगी है।

पल भर में पूरी इमारत में फैली आग

जानकारी के अनुसार, सोमवार को लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित एक व्यावसायिक भवन में आग लग गई। इस इमारत में छात्रों के लिए प्रशिक्षण और कोचिंग केंद्र संचालित किया जा रहा था। आग इतनी तेजी से फैली कि कई छात्र अंदर ही फंस गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत में कुछ ही देर में घना धुआं भर गया, जिससे सांस लेना मुश्किल हो गया। बाहर निकलने के रास्ते भी बाधित हो गए थे। जान बचाने के लिए कई छात्रों को खिड़कियों के शीशे तोड़ने पड़े, जबकि कुछ छात्रों ने पहली मंजिल से छलांग लगाकर बाहर निकलने की कोशिश की।

सामने आए हादसे के दर्दनाक वीडियो

घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें हादसे की भयावह तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। एक वीडियो में एक व्यक्ति टूटे हुए शीशे के पास बने छज्जे से लटका हुआ दिखाई देता है। कुछ देर तक वह खुद को संभालने की कोशिश करता है, लेकिन पकड़ छूटने के बाद नीचे गिर जाता है। हादसे के बाद राहत और बचाव दल, दमकल विभाग और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि छात्रों की सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों का पालन कितना प्रभावी ढंग से किया जा रहा है।

पिछले हादसों से कोई सबक नहीं

लखनऊ में हुआ यह दर्दनाक हादसा कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में देश के कई शहरों में आग और अन्य सुरक्षा संबंधी हादसे सामने आए हैं, जिनमें कई लोगों की जान गई है। दिल्ली, मुखर्जी नगर और सूरत जैसे शहरों में भी शॉर्ट सर्किट और आग लगने की घटनाओं ने लोगों को झकझोर कर रख दिया था। हर बड़े हादसे के बाद लोगों में दुख और गुस्सा देखने को मिलता है। इस बार भी जैसे ही लखनऊ की घटना की खबर सोशल मीडिया पर फैली, लोगों ने सुरक्षा नियमों की अनदेखी और व्यवस्था की कमियों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। कई लोगों का कहना है कि ऐसे हादसे अक्सर लापरवाही और सुरक्षा मानकों का ठीक से पालन न होने की वजह से होते हैं।

सोशल मीडिया पर लोग जता रहे हैं नाराजगी

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आम लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता की कमी दिखाई देती है। एक वायरल टिप्पणी में एक व्यक्ति ने आम नागरिकों की परेशानियों और बेबसी का जिक्र करते हुए कहा कि कई बार ऐसा महसूस होता है कि आम लोगों की जान और सुरक्षा को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। इस हादसे ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि सार्वजनिक इमारतों, कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक परिसरों में सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।

फिलहाल आग लगने की असली वजह का पता नहीं चल पाया है। हालांकि शुरुआती जानकारी के अनुसार आग पर काबू पाने में दमकल विभाग को एक घंटे से अधिक समय लगा। इस दौरान आग लगातार फैलती रही और इमारत के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए। कुछ लोगों का कहना है कि कई व्यावसायिक इमारतों और कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है।

उठ रहे हैं ये सवाल

वहीं सोशल मीडिया यूज़र्स ने इमारतों के बाहरी हिस्सों में इस्तेमाल होने वाली कुछ निर्माण सामग्री पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि कुछ प्रकार के प्लास्टिक आधारित पैनल और सजावटी सामग्री आग लगने पर बहुत तेजी से जलती हैं, जिससे आग तेजी से फैल सकती है। लोगों ने मांग की है कि ऐसी सामग्री के इस्तेमाल की समीक्षा की जाए और जरूरत पड़ने पर उन पर सख्त नियम लागू किए जाएं। लोगों का यह भी कहना है कि देश के कई बड़े व्यावसायिक क्षेत्रों में एक जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। कई इमारतों में संकरी सीढ़ियां, उलझी हुई बिजली की तारें, अव्यवस्थित निर्माण और सुरक्षा उपकरणों की कमी जैसी खामियां मौजूद हैं। ऐसे हालात किसी भी हादसे को और गंभीर बना सकते हैं।

शिक्षा में नवाचार करने वाले अधिकारियों को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान, योगी सरकार ने शुरू की चयन प्रक्रिया

Jevar Airport Farmers meet cm yogi

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश शिक्षा सुधारों को केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में भी सक्रिय कदम उठा रहा है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से संबद्ध प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार ‘अवार्ड फॉर इनोवेशन एंड गुड प्रैक्टिसेज इन एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन’ के लिए प्रदेश में चयन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 

 

शिक्षा प्रशासन में नवाचार, सुशासन, अधिगम सुधार, प्रभावी प्रबंधन और जनभागीदारी आधारित उल्लेखनीय कार्य करने वाले अधिकारियों का चयन कर उनके नाम राष्ट्रीय स्तर पर भेजे जाएंगे। यह पहल उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहे शिक्षा सुधारों और नवाचारी प्रशासनिक मॉडलों को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

 

चयनित होंगे चार बीएसए और छ: बीईओ

अपर राज्य परियोजना निदेशक प्रेम रंजन सिंह द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार पुरस्कार के लिए उत्तर प्रदेश से 4 जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) तथा 6 खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) का चयन किया जाएगा। इसके लिए सभी जनपदों को निर्देशित किया गया है कि वे शिक्षा प्रशासन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों का विवरण निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराएं। चयन के दौरान नवाचार, बेहतर प्रबंधन, सामुदायिक सहभागिता, अधिगम स्तर में सुधार, विद्यालयी व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण तथा विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश से चयनित अधिकारी राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे और अपने कार्यों के माध्यम से प्रदेश में लागू शिक्षा सुधारों की प्रभावशीलता को प्रदर्शित करेंगे।

 

क्या है ‘अवार्ड फॉर इनोवेशन एंड गुड प्रैक्टिसेज इन एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन’

उल्लेखनीय है कि ‘अवार्ड फॉर इनोवेशन एंड गुड प्रैक्टिसेज इन एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन’ भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से संबद्ध राष्ट्रीय स्तर की पहल है। इसका उद्देश्य शिक्षा प्रशासन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित करना तथा देशभर में सफल प्रशासनिक नवाचारों और प्रभावी कार्यप्रणालियों को पहचान दिलाना है। 

 

यह हैं निर्देश

निर्देशों में कहा गया है कि जनपद ऐसे अधिकारियों के नाम प्रस्तावित करें, जिन्होंने शिक्षा प्रशासन में नवाचार आधारित कार्यप्रणाली अपनाकर उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किए हों। विशेष रूप से वे अधिकारी प्राथमिकता में रहेंगे जिनके प्रयासों से विद्यार्थियों के अधिगम स्तर, विद्यालय प्रबंधन, सामुदायिक सहभागिता या शैक्षणिक वातावरण में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला हो।
 

प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और परिणाम आधारित प्रशासनिक संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए होने वाला यह चयन न केवल उत्कृष्ट अधिकारियों को पहचान दिलाएगा, बल्कि शिक्षा प्रशासन में नवाचार, प्रतिस्पर्धा और बेहतर प्रदर्शन की संस्कृति को भी प्रोत्साहित करेगा।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते वर्षों में बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में अनेक व्यापक परिवर्तन देखने को मिले हैं। निपुण भारत मिशन, बाल वाटिका, विद्यालय कायाकल्प, स्मार्ट कक्षाएं, डिजिटल शिक्षण संसाधन, मिशन प्रेरणा, शिक्षक प्रशिक्षण और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे कार्यक्रमों ने विद्यालयी शिक्षा को नई दिशा प्रदान की है। इन पहलों को सफलतापूर्वक धरातल तक पहुंचाने में जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही कारण है कि अब ऐसे अधिकारियों की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अवसर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को गति दी जा रही है। Edited by : Sudhir Sharma

Shubman Gill: टी20 टीम में हो सकती है शुभमन गिल की वापसी! रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

भारतीय टीम अपने टी20 इंटरनेशनल अभियान की शुरुआत 26 जून से आयरलैंड के खिलाफ होने वाली 2 मैचों की सीरीज से करेगी। इस सीरीज के साथ टीम एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। टी20 टीम की कमान श्रेयस अय्यर के हाथों में है, इससे पहले टी20 की कमान सूर्यकुमार यादव के हाथों में थी। कप्तानी में बदलाव के बाद सभी की नजरें अय्यर के प्रदर्शन और नेतृत्व पर रहेंगी। वहीं टीम में शामिल 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी भी चर्चा में बने हुए हैं।

भारतीय टी20 टीम में ओपनिंग स्थान के लिए मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन और 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी दावेदारों में शामिल हैं। ऐसे में आने वाले मैचों में टीम का बल्लेबाजी कॉबिनेशन चर्चा का विषय रहेगा। इसी बीच खबर है कि शुभमन गिल की टी20 टीमें वापसी हो सकती है।

टी20 में हो सकती है वापसी

RevSportz की एक रिपोर्ट के अनुसार, “टी20 विश्व कप के बाद चयनकर्ताओं ने शुभमन गिल को दोबारा भारतीय टी20 टीम की योजनाओं में शामिल करने पर विचार किया था। रिपोर्ट में दावा किया कि, कप्तानी को लेकर भी गिल का नाम चर्चा में था, खासकर उस समय जब टीम नए नेतृत्व की तलाश कर रही थी। लेकिन अंत में कप्तानी की दौड़ मुख्य रूप से 2 खिलाड़ियों श्रेयस अय्यर और शुभमन गिल के बीच सिमट गई थी। वहीं टीम प्रबंधन का मानना था कि संजू सैमसन में भी कप्तानी संभालने की क्षमता और लीडरशीप के गुण मौजूद हैं।” सेलेक्टर्स ने श्रेयस अय्यर पर भरोसा जताया और उन्हें भारतीय टी20 टीम की कप्तानी सौंपने का फैसला किया।

ओलंपिक-टी20 विश्व कप है लक्ष्य

इससे पहले चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर ने टीम चयन के दौरान बताया था कि आईपीएल में श्रेयस का कप्तानी रिकॉर्ड और उनकी नेतृत्व क्षमता इस फैसले की बड़ी वजह रही। चयन समिति का मानना है कि बड़े टूर्नामेंटों में टीम को आगे ले जाने के लिए श्रेयस एक मजबूत विकल्प साबित हो सकते हैं। भारतीय टी20 टीम के सामने आने वाले वर्षों में कई बड़े लक्ष्य हैं। भारतीय टीम का नया टी20 सफर 2028 ओलंपिक और अगले टी20 विश्व कप को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रहा है। इसी वजह से टीम प्रबंधन अभी से युवा खिलाड़ियों को तैयार करने और मजबूत टीम बनाने पर फोकस कर रहा है।

चयनकर्ताओं ने श्रेयस अय्यर पर भरोसा जताया और उन्हें कम से कम सितंबर-अक्टूबर में होने वाले एशियन गेम्स तक भारतीय टी20 टीम की कप्तानी सौंपने का फैसला किया।

ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड परिस्थितियों में मिलेगी मदद

RevSportz की रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसी परिस्थितियों में जहां तेज गेंदबाजों को अधिक मदद मिलती है। ऐसी पिच पर भारतीय टीम को एक ऐसे बल्लेबाज की जरूरत पड़ सकती है जो पारी को संभालकर आगे बढ़ा सके। रिपोर्ट के मुताबिक, शुभमन गिल इस भूमिका के लिए उपयुक्त माने जा रहे हैं। फिलहाल टीम का पूरा फोकस नए कप्तान श्रेयस अय्यर पर है, जबकि सेलेक्टर्स को भविष्य के लिए मजबूत नेतृत्व योजना भी तैयार करनी होगी।

ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बन सकते हैं एंडी बर्नहैम:किंग ऑफ द नॉर्थ के नाम से मशहूर, दो बार पीएम पद की रेस हारे

ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने इस्तीफा दे दिया है। उनकी जगह एंडी बर्नहैम नए प्रधानमंत्री बन सकते हैं। बर्नहैम ने पीएम पद के लिए दावेदारी भी पेश कर दी है। बर्नहैम 19 जून को मेकरफील्ड से उपचुनाव जीतकर सांसद बने थे। पार्टी में उनकी लोकप्रियता के चलते तभी से ही स्टार्मर की मुश्किलें बढ़ गईं थी। इस स्टोरी में जानिए पत्रकारिता से करियर की शुरुआत करने वाले बर्नहैम कैसे इंग्लैंड के ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ बने… टीवी सीरियल देखने के बाद राजनीति में आए बर्नहैम बर्नहैम का जन्म 1970 में लिवरपूल में हुआ था, लेकिन उनका बचपन चेशायर के कुलचेथ गांव में बीता। उनके पिता टेलीकॉम कंपनी BT में इंजीनियर थे, जबकि मां एक क्लिनिक में रिसेप्शनिस्ट थीं। दोनों लेबर पार्टी के समर्थक थे। एंडी बर्नहैम का राजनीति में आने का फैसला किसी नेता के भाषण से नहीं, बल्कि एक टीवी ड्रामा देखकर हुआ था। उन्होंने बताया है कि 14 साल की उम्र में BBC का फेमस सीरियल बॉयज फ्रॉम द ब्लैकस्टफ देखने के बाद उन्होंने लेबर पार्टी से जुड़ने का मन बनाया। यह ड्रामा लिवरपूल में बेरोजगारी और आर्थिक संकट की कहानी पर आधारित था। आयरिश मूल के बर्नहैम की पहचान सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। वह लिवरपूल के एवर्टन फुटबॉल क्लब के बड़े फैन हैं। कैम्ब्रिज में पढ़ाई के दौरान नीदरलैंड की मैरी से प्यार हुआ एंडी बर्नहैम ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई की, लेकिन वहां का माहौल उनके लिए आसान नहीं था। अपनी किताब ‘हेड नॉर्थ’ में उन्होंने लिखा है कि कई बार उन्हें लगता था कि वे वहां के नहीं हैं और खुद को एक ‘बाहरी’ की तरह महसूस करते थे। पढ़ाई के दौरान उनकी रुचि म्यूजिक में बढ़ी। मैनचेस्टर के इंडी बैंड्स- द स्मिथ्स और द स्टोन रोजेज के गानों ने उनकी सोच और व्यक्तित्व को काफी प्रभावित किया। बर्नहैम के मुताबिक, इसी म्यूजिक कल्चर ने उन्हें अपनी अलग पहचान दी। एंडी बर्नहैम की लव स्टोरी की शुरुआत कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से हुई थी। यहीं उनकी मुलाकात नीदरलैंड में जन्मीं मैरी-फ्रांस वैन हील से हुई। दोनों इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई के दौरान करीब आए और कई साल बाद 2000 में शादी कर ली। आज उनके तीन बच्चे हैं। बर्नहैम ने 2009 में द गार्जियन को दिए इंटरव्यू में बताया था कि शुरुआती दौर में वे परिवार बढ़ाने की योजना नहीं बना रहे थे। उनका मानना था कि जिंदगी में पहले स्थिरता हासिल करना जरूरी है। 31 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने एंडी बर्नहैम ने करियर की शुरुआत राजनीति से नहीं, बल्कि पत्रकारिता से की थी। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने टैंक वर्ल्ड और पैसेंजर वर्ल्ड मैनेजमेंट जैसी पत्रिकाओं में काम किया। 20 साल की उम्र में उन्हें राजनीति में पहला मौका मिला, जब वह लेबर सांसद टेसा जोवेल के रिसर्चर बने। इसके बाद बर्नहैम ने तेजी से राजनीति में पहचान बनाई। वह संस्कृति मंत्री क्रिस स्मिथ के सलाहकार रहे और 2001 में ग्रेटर मैनचेस्टर के लीघ सीट से पहली बार सांसद चुने गए। संसद पहुंचने के बाद बर्नहैम ने टोनी ब्लेयर सरकार में जूनियर मंत्री के तौर पर काम किया। गॉर्डन ब्राउन के कार्यकाल में उनका कद और बढ़ा और उन्हें कैबिनेट में जगह मिली। इस दौरान उन्होंने वित्त, संस्कृति और स्वास्थ्य जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। दो बार लेबर पार्टी का चुनाव हारे, फिर भी नहीं छोड़ी दावेदारी 2010 में लेबर पार्टी की चुनावी हार के बाद एंडी बर्नहैम ने पहली बार पार्टी नेता बनने की कोशिश की, लेकिन पांच उम्मीदवारों में चौथे स्थान पर रहे। पार्टी की कमान एड मिलिबैंड के हाथ में चली गई। पांच साल बाद 2015 में बर्नहैम ने दूसरी बार किस्मत आजमाई। इस बार उन्हें जेरेमी कॉर्बिन ने हरा दिया। लगातार दो हार के बावजूद उन्होंने पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर काम जारी रखा। आलोचक अक्सर बर्नहैम पर राजनीतिक रुख बदलने के आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि, ब्रेक्जिट के मुद्दे पर वह लगातार यूरोपीय यूनियन के पक्ष में रहे। 2016 के जनमत संग्रह में उन्होंने ब्रिटेन के EU में बने रहने का समर्थन किया था। बाद में उन्होंने कहा कि वह अपने जीवनकाल में ब्रिटेन को दोबारा यूरोपीय संघ का हिस्सा बनते देखना चाहते हैं। सरकार से भिड़े तो ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ का नाम मिला दो बार लेबर पार्टी का नेता बनने से चूकने के बाद एंडी बर्नहैम ने 2017 में नई पारी शुरू की। उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति छोड़ ग्रेटर मैनचेस्टर के पहले सीधे चुने गए मेयर का चुनाव लड़ा और 60% से ज्यादा वोटों के साथ जीत दर्ज की। 2021 में उन्होंने और बड़े अंतर से दोबारा जीत हासिल की। कोविड महामारी के दौरान बर्नहैम ने नॉर्थ इंग्लैंड के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला। उस समय लंदन की सत्ता से उनकी टक्कर ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई और मीडिया ने उन्हें ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ कहना शुरू कर दिया। अपनी ही पार्टी की सरकार पर सवाल उठाए स्टार्मर की सरकार बनने के बाद भी बर्नहैम ने चुप्पी नहीं साधी। उन्होंने सरकार की खर्च और कर्ज से जुड़ी आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए, जिसके चलते पार्टी के भीतर ही उनके खिलाफ आवाजें उठने लगीं। हालांकि, 2025 तक उन्हें लेबर पार्टी के अगले बड़े चेहरे और संभावित नेता के तौर पर देखा जाने लगा था। जनवरी 2026 में जब ग्रेटर मैनचेस्टर के सांसद एंड्रयू ग्विन ने सीट छोड़ने का ऐलान किया, तो बर्नहैम की वेस्टमिंस्टर वापसी की चर्चा तेज हो गई। लेकिन उपचुनाव में पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया। माना गया कि यह फैसला प्रधानमंत्री और लेबर नेता कीर स्टार्मर की सहमति से लिया गया था। पार्टी की हार से स्टार्मर पर सवाल उठे मई 2026 में इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स के चुनावों में लेबर पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद से खराब रहा। वहीं नाइजल फराज की रिफॉर्म UK तेजी से मजबूत हुई। उसने उन इलाकों में भी बढ़त बनाई, जिन्हें एंडी बर्नहैम का गढ़ माना जाता था। खराब नतीजों के बाद कीर स्टार्मर के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे। कुछ सांसदों ने नेतृत्व बदलने की मांग की, जबकि सरकार और पार्टी में इस्तीफों का दौर भी शुरू हो गया। इसी बीच लेबर सांसद जोश साइमंस ने मेकरफील्ड सीट छोड़ने का ऐलान किया, ताकि बर्नहैम संसद में वापसी कर सकें। पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया और अगले महीने हुए उपचुनाव में उन्होंने जीत हासिल कर वेस्टमिंस्टर में वापसी कर ली। इस जीत को सिर्फ उनकी संसदीय वापसी नहीं, बल्कि लेबर पार्टी के अगले नेता की दौड़ में उनकी एंट्री के तौर पर देखा गया। दरअसल, पार्टी का नेता बनने के लिए सांसद होना जरूरी है और बर्नहैम ने यह शर्त पूरी कर ली थी। आम लोगों की भाषा बोलना बर्नहैम की सबसे बड़ी ताकत मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी में राजनीति के प्रोफेसर रॉबर्ट फोर्ड के मुताबिक, एंडी बर्नहैम की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह मुश्किल और तकनीकी मुद्दों को भी आम लोगों की भाषा में समझा देते हैं। फोर्ड का कहना है कि बर्नहैम सिर्फ अच्छे वक्ता ही नहीं, बल्कि बेहतरीन कहानीकार भी हैं। वह लोगों को आसानी से समझा देते हैं कि वह किसके लिए राजनीति कर रहे हैं और क्या हासिल करना चाहते हैं। प्रोफेसर के मुताबिक, यही बात उन्हें कई दूसरे लेबर नेताओं और मौजूदा प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से अलग बनाती है। जहां स्टार्मर की राजनीति को अक्सर तकनीकी और प्रशासनिक माना जाता है, वहीं बर्नहैम आम मतदाताओं से भावनात्मक जुड़ाव बनाने में ज्यादा सफल दिखते हैं। इसी वजह से लेबर पार्टी के भीतर कई लोग उन्हें ऐसा नेता मानते हैं, जो पार्टी की घटती लोकप्रियता को रोककर समर्थकों में नया उत्साह पैदा कर सकता है। —————————– ये खबर भी पढ़ें ब्रिटिश PM स्टार्मर का इस्तीफा:100 से ज्यादा सांसद विरोध में थे; 10 साल में ब्रिटेन के पांचवें प्रधानमंत्री ने पद छोड़ा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लेबर पार्टी को नहीं लगता कि मैं अगले चुनाव में नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति हूं। पूरी खबर पढ़ें

जुकरबर्क की Meta का CRED में ₹8550 करोड़ निवेश, फाउंडर कुणाल शाह को बनाएगी WhatsApp का नया ग्लोबल CEO

Meta Investment In CRED: फेसबुक की पैरेंट कंपनी Meta ने भारतीय फिनटेक स्टार्टअप CRED में करीब 90 करोड़ डॉलर (लगभग ₹8,550 करोड़) निवेश करने का ऐलान किया है। दोनों कंपनियों ने 22 जून को इस डील की घोषणा की। इससे पहले Moneycontrol ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि Meta, CRED में 4 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर निवेश को लेकर बातचीत कर रही है।

WhatsApp की कमान संभालेंगे कुणाल शाह

इस निवेश के साथ CRED के फाउंडर कुणाल शाह Meta में शामिल होंगे और वह WhatsApp के नए ग्लोबल CEO बनेंगे। कुणाल मौजूदा विल कैथकार्ट की जगह लेंगे, जिन्होंने सात साल तक WhatsApp को लीड करने के बाद पद छोड़ने का फैसला किया है।

Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि कुणाल शाह ने CRED को भारत की सबसे महत्वपूर्ण टेक कंपनियों में से एक बनाया है। उनके पास बिजनेस बनाने का अनुभव और वैश्विक नजरिया है। यह दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

जुकरबर्ग ने विल कैथकार्ट की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कैथकार्ट के नेतृत्व में WhatsApp 3 अरब से ज्यादा यूजर्स तक पहुंचा और उन्होंने यूजर्स की प्राइवेसी को प्राथमिकता दी। अब वह Meta में नई भूमिका संभालेंगे और नए प्रोडक्ट्स पर काम करेंगे।

CRED की कमान किसके हाथ में होगी?

कुणाल शाह के Meta में जाने के बाद CRED के ऑपरेशनल कामकाज की जिम्मेदारी मितेन संपत संभालेंगे। वह फिलहाल कंपनी में दूसरे सबसे सीनियर एग्जीक्यूटिव हैं।

मितेन संपत ने कहा कि 1.7 करोड़ से ज्यादा भरोसेमंद भारतीय CRED का इस्तेमाल करते हैं। उनके मुताबिक कंपनी के पास मजबूत टीम, स्पष्ट विजन और लंबी अवधि की रणनीति है। उन्होंने कहा कि CRED के अगले चरण का लक्ष्य कंपनी को पब्लिक मार्केट तक ले जाना है।

कुणाल शाह ने क्या कहा?

कुणाल शाह ने कहा कि उन्होंने 2018 में CRED की शुरुआत इस भरोसे के साथ की थी कि अच्छी क्रेडिट स्कोर को सम्मान मिलना चाहिए। आठ साल से भी कम समय में कंपनी लाखों सदस्यों, लगभग ₹3,200 करोड़ रेवेन्यू, मुनाफे में कारोबार, कई लाइसेंस और मजबूत ब्रांड के साथ एक नई कैटेगरी बनाने में सफल रही है।

उन्होंने कहा कि अतिरिक्त पूंजी और प्रतिभाशाली टीम के साथ CRED आने वाले दशकों तक एक मजबूत संस्था बन सकती है। उन्होंने भरोसा जताया कि टीम भविष्य में भी नए मानक स्थापित करेगी।

भारतीय स्टार्टअप जगत का बड़ा नाम हैं कुणाल शाह

यह दूसरा स्टार्टअप है जिससे कुणाल शाह बाहर निकल रहे हैं। इससे पहले उन्होंने डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म Freecharge की स्थापना की थी, जिसे बाद में बेच दिया गया था।

वर्षों के दौरान वह भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हो गए। CRED बनाने के अलावा उन्होंने सैकड़ों शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स में निवेश किया है और देश के सबसे सक्रिय एंजेल इनवेस्टर्स में उनकी गिनती होती है।

1 अरब डॉलर जुटा चुकी है CRED

2018 में शुरू हुई CRED अब तक करीब 1 अरब डॉलर की फंडिंग जुटा चुकी है। कंपनी में Tiger Global, Ribbit Capital, Peak XV Partners, Greenoaks Capital और DST Global जैसे बड़े निवेशकों ने निवेश किया है।

Peak XV Partners के मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेंद्र सिंह ने कहा कि CRED का सफर काफी शानदार रहा है। उनके मुताबिक कंपनी ने एक नई कैटेगरी बनाई, लाखों सक्रिय यूजर्स जोड़े और मजबूत आर्थिक मॉडल तैयार किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में CRED और मजबूत होकर उभरेगी।

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Monsoon Rain crisis: 18 जून तक इस इलाके में हुई सिर्फ 2% बुवाई, बारिश का ये आंकड़ा तो डरा रहा है!

Monsoon Rain Update: दक्षिण-पश्चिम मानसून की सुस्ती और बारिश में हो रही देरी ने महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में खेती का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। पानी की कमी और रूठे मानसून की वजह से इस क्षेत्र के आठ जिलों में खरीफ की बुवाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक 18 जून तक मराठवाड़ा में बुवाई का आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले महज 2 प्रतिशत रह गया है। सूखे की मार झेलने वाले इस इलाके के किसानों और प्रशासन के लिए बारिश और बुवाई का यह आंकड़ा बेहद डराने वाला है।

बुवाई के आंकड़े: 10 लाख हेक्टेयर के मुकाबले सिर्फ 1 लाख हेक्टेयर

मराठवाड़ा मध्य महाराष्ट्र का एक अर्ध-शुष्क क्षेत्र है। यहां की खेती पूरी तरह से मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। पीटीआई ने एक रिपोर्ट को कोट करते हुए बताया है कि यहां बारिश में देरी से बुवाई के आंकड़ों में ऐतिहासिक गिरावट आई है। इस साल 18 जून तक पूरे क्षेत्र में अब तक केवल 1.07 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर ही बुवाई हो पाई है। पिछले साल इसी दिन तक यह आंकड़ा 10.77 लाख हेक्टेयर था। पिछले पांच वर्षों में इस पूरे क्षेत्र में औसतन लगभग 49.72 लाख हेक्टेयर भूमि पर फसलें बोई जाती रही हैं। आंकड़ों से साफ है कि पिछले साल 18 जून तक जितनी बुवाई हुई थी, उसकी तुलना में इस साल अब तक केवल 2 प्रतिशत ही बुवाई हो सकी है।

जिलावार बुवाई का हाल (बीड सबसे आगे, लातूर सबसे पीछे)

मराठवाड़ा के कुल आठ जिले (छत्रपति संभाजीनगर, जालना, बीड, लातूर, धाराशिव, परभणी, हिंगोली और नांदेड़) बारिश की इस देरी का सीधा खामियाजा भुगत रहे हैं। इन 1.07 लाख हेक्टेयर में से आधी से ज्यादा बुवाई (68,572 हेक्टेयर) अकेले बीड जिले में हुई है। दूसरे जिले अपने ऐतिहासिक स्तर से मीलों पीछे हैं। उदाहरण के तौर पर छत्रपति संभाजीनगर में पिछले साल इसी अवधि में 1.64 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी जबकि इस साल यहां सिर्फ 3072 हेक्टेयर में ही फसल बोई जा सकी है।

बारिश और जलाशयों का गहराता संकट

बुवाई में इस भयंकर गिरावट का सीधा कारण बारिश का न होना और जलाशयों में पानी की कमी है। एक अधिकारी के मुताबिक, जून महीने में मराठवाड़ा में औसतन 98.3 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए, लेकिन 18 जून तक इस क्षेत्र में अपने सामान्य कोटे की मात्र 42.7% बारिश (यानी सिर्फ 42.7 मिमी) ही दर्ज की गई है। मराठवाड़ा में मौजूद 11 प्रमुख मेगा प्रोजेक्ट्स (बांधों) में जल स्तर लगातार गिर रहा है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक 18 जून तक इन बांधों में सिर्फ 60.84 टीएमसी (Thousand Million Cubic Feet – tmc) पानी बचा था, जबकि पिछले साल इसी दिन यह 67.35 टीएमसी था।