महाराजा रणजीत सिंह की बरसी के अवसर पर पाकिस्तान गया सिख श्रद्धालुओं का जत्था मंगलवार को अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत लौट आया। इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने ननकाना साहिब, पंजा साहिब, करतारपुर साहिब सहित कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन किए। भारत लौटने पर श्रद्धालुओं के चेहरों पर खुशी झलक रही थी। श्रद्धालुओं ने बताया कि यह यात्रा उनके लिए काफी इमोशनल रही। इसे वह भुला नहीं सकते। अमृतसर के श्रद्धालु बलवीर सिंह ने कहा कि सबसे पहले उन्होंने ननकाना साहिब में गुरु नानक देव जी के जन्मस्थान के दर्शन किए। इसके बाद पंजा साहिब, लाहौर स्थित अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारे और करतारपुर साहिब के दर्शन का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि इन पवित्र स्थलों पर पहुंचकर मन को गहरी शांति और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हुआ। पाकिस्तान में व्यवस्थाओं और सुरक्षा की सराहना श्रद्धालुओं ने पाकिस्तान में की गई व्यवस्थाओं की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे और हर समय सुरक्षा कर्मी उनके साथ मौजूद रहे। किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्हें वहां लोगों से बहुत प्रेम, सम्मान और सहयोग मिला, जिससे उनका अनुभव और भी बेहतर हो गया। एक अन्य श्रद्धालु हरजीत कौर ने बताया कि यह जत्था 21 जून को पाकिस्तान गया था और आज 30 जून को वापस लौटा। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान उनकी वर्षों पुरानी मनोकामना पूरी हुई। पवित्र गुरुद्वारों के दर्शन कर उन्होंने अत्यंत आनंद और संतोष महसूस किया। वीजा प्रक्रिया आसान करने की श्रद्धालुओं की अपील श्रद्धालुओं ने भारत और पाकिस्तान दोनों सरकारों से अपील की कि धार्मिक यात्राओं को और सरल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि वीजा प्रक्रिया को आसान किया जाना चाहिए और श्रद्धालुओं को अधिक से अधिक अवसर दिए जाने चाहिए ताकि वे अपने पवित्र स्थलों के दर्शन कर सकें। इससे दोनों देशों के बीच आपसी प्रेम, भाईचारा और सांस्कृतिक संबंध मजबूत होंगे। साझा विरासत को संरक्षित करने बेहतर प्रयास उन्होंने यह भी कहा कि साझा विरासत को संरक्षित करने और लोगों के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए सीमा पार धार्मिक यात्राओं को बढ़ावा देना बहुत आवश्यक है। श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे आयोजनों से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि दोनों देशों के बीच शांति और सद्भाव का संदेश भी जाता है।
Tax Refund: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते वक्त कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। गलत जानकारी देने या किसी जरूरी प्रक्रिया को छोड़ने पर आपका रिटर्न प्रोसेस होने में देरी हो सकती है। इसके चलते टैक्स रिफंड आने में भी देरी हो सकती है।
आइए जानते हैं कि ITR भरते वक्त किन 5 बातें का ध्यान रखना चाहिए, ताकि आपका टैक्स रिफंड जल्दी आ सके। साथ ही, रिफंड स्टेटस चेक करने का तरीका भी जानेंगे।
1. PAN-Aadhaar लिंक और प्रोफाइल अपडेट
अगर आप पहली दफा ITR फाइल कर रहे हैं, तो सबसे पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के ई-फाइलिंग पोर्टल पर Taxpayer के तौर पर रजिस्ट्रेशन करें। इसके बाद सुनिश्चित करें कि आपका PAN और Aadhaar लिंक हो।
साथ ही नाम, जन्मतिथि, जेंडर जैसी जानकारी PAN रिकॉर्ड से मेल खानी चाहिए। मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पता भी अपडेट रखें, ताकि टैक्स विभाग जरूरत पड़ने पर आपसे संपर्क कर सके।
2. बैंक अकाउंट वैलिडेट करें और सही ITR फॉर्म चुनें
अगर आपका टैक्स रिफंड बनता है, तो वह सीधे बैंक खाते में आएगा। इसके लिए बैंक अकाउंट का इनकम टैक्स पोर्टल पर वैलिडेशन जरूरी है।
बैंक अकाउंट PAN से लिंक होना चाहिए, IFSC और बैंक की जानकारी सही होनी चाहिए। PAN और बैंक खाते में दर्ज नाम एक जैसा होना चाहिए। इसके साथ ही अपनी इनकम के सोर्स के हिसाब से सही ITR फॉर्म चुनें। गलत फॉर्म चुनने पर रिटर्न और रिफंड में देरी हो सकती है।
3. टैक्स छूट और TDS की जानकारी का मिलान करें
अगर आप किसी टैक्स छूट या डिडक्शन का दावा कर रहे हैं, तो उससे जुड़े दस्तावेज जरूर जांच लें। साथ ही Form 26AS, एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टोटल इनकम स्टेटमेंट (TIS) में दर्ज TDS, TCS और अन्य टैक्स क्रेडिट का मिलान जरूर करें।
किसी तरह की गड़बड़ी मिलने पर रिटर्न प्रोसेस होने में देरी हो सकती है। अगर आप उसे समय रहते सुधार लेंगे, तो परेशानी से बच जाएंगे।
4. ITR समय से पहले फाइल करें
आखिरी तारीख का इंतजार करने से बचें। समय रहते ITR फाइल करने पर आपको सभी जानकारियां दोबारा जांचने और गलती सुधारने का मौका मिल जाता है। इससे रिटर्न रिजेक्ट होने या प्रोसेसिंग में देरी की आशंका भी कम रहती है।
5. फाइलिंग के बाद ई-वेरिफिकेशन न भूलें
ITR फाइल करना आखिरी कदम नहीं है। रिटर्न अपलोड करने के बाद 30 दिनों के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन भी करना जरूरी है।
यह काम Aadhaar OTP, डिजिटल सिग्नेचर या अन्य उपलब्ध माध्यमों से किया जा सकता है। अगर तय समय में ई-वेरिफिकेशन नहीं किया गया, तो ITR अमान्य माना जाएगा। ऐसे में टैक्स रिफंड भी जारी नहीं होगा।
ऐसे चेक करें ITR रिफंड का स्टेटस
- इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के e-Filing Portal पर लॉग इन करें।
- e-File मेन्यू में जाकर Income Tax Returns पर क्लिक करें।
- View Filed Returns विकल्प चुनें।
- जिस असेसमेंट ईयर का रिफंड देखना है, उसे चुनें।
- वहां आपको ITR का स्टेटस, प्रोसेसिंग की स्थिति और रिफंड से जुड़ी जानकारी दिखाई दे जाएगी।
या फिर आप NSDL/TIN के रिफंड ट्रैकिंग पोर्टल पर PAN और असेसमेंट ईयर दर्ज करके भी रिफंड का स्टेटस देख सकते हैं।
Trading Strategy : जून सीरीज की मंथली एक्सपायरी के दिन निफ्टी और बैंक निफ्टी ने ऑप्शन राइटर्स की रेंज का सम्मान किया है। निफ्टी निचले स्तरों से 80 अंक सुधरकर 23900 के ऊपर दिख रहा है। मिडकैप अच्छी तेजी के साथ आउटपरफॉर्म कर रहे हैं। वोलैटिलिटी इंडेक्स INDIA VIX से भी पॉजिटिव संकेत हैं। IT शेयरों ने आज पूरे बाजार पर दबाव बनाया है। आईटी इंडेक्स तीन साल के निचले स्तरों पर पहुंचा गया है। TCS, WIPRO और टेक महिंद्रा, निफ्टी के टॉप लूजर बने हैं। FMCG और सरकारी बैंकों में भी दबाव है।
केमिकल,रियल्टी और डिफेंस शेयरों में आज जोरदार तेजी है। तीनों सेक्टर इंडेक्स 1 फीसदी से ज्यादा चढ़े हैं। सोलार इंडस्ट्रीज डिफेंस में 5% उछाल के साथ वायदा का टॉप गेनर बना है। साथ ही कोचिन शिपयार्ड भी 4% उछला है।
बाजार: रेंज का सम्मान
बाजार की आगे की चाल पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि निफ्टी और बैंक निफ्टी ने ऑप्शन राइटर्स की रेंज का सम्मान किया है। निफ्टी ने Buy या Sell जोन,दोनों में अच्छी ट्रेड दी है। आज का हाईलाइट है,मिडकैप का आउटपरफॉर्मेंस। 3-4 दिनों के बाद मिडकैप में रौनक लौटी है। इंडिया VIX अभी भी कंफर्ट जोन में कायम है। आज के इक्के मारुति ने कमाल किया है। आयशर मोटर्स में भी आज उम्मीद के मुताबिक ही कामकाज हुआ। पहले यह 6% तक गिरा और फिर बॉरगेन खरीदारी आई। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या एक्सपायरी ऑप्शन राइटर के रेंज के बाहर होगी? दूसरा बड़ा सवाल है कि जुलाई सीरीज के लिए क्या टेक्स्चर है?
बाजार: अब क्या?
निफ्टी में 23,800-23,850 लक्ष्मण रेखा है। इसके ऊपर जब तक हैं,ट्रेंड ऊपर है। 24,050 के ऊपर निकले तो निफ्टी बुलेट ट्रेन बन सकता है। निफ्टी के चलने के लिए 2-3 बड़े शेयरों को चलना होगा। RIL,HDFC Bank, Infosys, L&T पर नजर रखें। जुलाई सीरीज का आउटलुक अभी भी पॉजिटिव ही है।
निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति
निफ्टी के लिए 23,850-23,950 पर सपोर्ट और 24,050-24,150 पर रेजिस्टेंस है। बैंक निफ्टी के लिए 57,200-57,400 पर सपोर्ट और 57,800-58,000 पर रेजिस्टेंस है।
कल के लिए रणनीति
निफ्टी में आज सिर्फ और सिर्फ एक्सपायरी वाला मूव है। अभी के लिए न्यूट्रल रहें,चाहें तो जुलाई मंथ एंड कॉल्स लें।
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डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

मध्यप्रदेश के इंदौर से सटे ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में पुण्य के साथ 'VIP' दर्शन की सुविधा शुरू की गई है। इस अनोखी पहल के तहत अगर श्रद्धालु अपना रक्त दान करता है तो उसे वीआईपी दर्शन की सुविधा दी जाएगी। जी हां, आपने सही सुना। ओंकारेश्वर में भगवान शिव के ज्योर्तिलिंग दर्शन के लिए रक्तदान कीजिए और सीधे पाइए बाबा के दर्शन। यानी प्रसिद्ध ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए उन लोगों को कतार में नहीं लगना पडेगा जो वहां रक्त दान करेंगे।
मंदिर प्रशासन और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने यह नई मुहिम शुरू की है, जिसके तहत रक्तदान करने वाले श्रद्धालुओं को बिना किसी रुकावट के सीधे 'VIP दर्शन' कराए जा रहे हैं। जहां एक ओर इस पहल को लेकर युवाओं और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है, वहीं प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि जो लोग रक्तदान नहीं करना चाहते या अक्षम हैं, वे हमेशा की तरह सामान्य प्रक्रिया और कतारों के माध्यम से बाबा के दर्शन कर सकेंगे।
रक्त दो और दर्शन करो : इस योजना के तहत एक रक्त दान करने वाले के साथ उसके परिवार के दो अन्य सदस्य भी दर्शन कर सकते हैं। योजना का लाभ लेने के लिए श्रद्धालुओं को ओंकारेश्वर स्थित शांति निकेतन वृद्ध आश्रम में स्थापित रक्तदान केंद्र पर पहुंचना होता है। यहां काउंटर से आवेदन फॉर्म प्राप्त कर भरकर जमा करने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा आवश्यक स्वास्थ्य जांच की जाती है। पात्र पाए जाने पर श्रद्धालु रक्तदान कर सकते हैं। रक्तदान के बाद उन्हें जूस, बिस्कुट एवं कुछ समय विश्राम की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।
ब्लड डोनेट के बाद जारी होता है रिस्ट बैंड : रक्तदान के बाद प्रशासन की ओर से रक्त दान करने वाले को बकायदा प्रमाण-पत्र दिया जाता है। शीघ्र दर्शन के लिए उसकी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जाती है। इसके बाद रक्तदाता के मोबाइल पर एक संदेश भेजा जाता है। इस संदेश को टिकट काउंटर पर दिखाने पर रिस्ट बैंड जारी किया जाता है, जिसके माध्यम से रक्तदाता अपने साथ दो अन्य परिजनों सहित नि:शुल्क शीघ्र दर्शन कर सकता है।
रोजाना 40 हजार श्रद्धालु पहुंच रहे ओंकारेश्वर : बता दें कि रोजाना करीब 40 हजार श्रद्धालु ओंकारेश्वर दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से करीब 50 श्रद्धालु प्रतिदिन रक्तदान कर रहे हैं। उनके साथ दो-दो अन्य परिजन भी शीघ्र दर्शन की सुविधा प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रकार रोज करीब 150 श्रद्धालु इस विशेष योजना के माध्यम से नि:शुल्क और शीघ्र दर्शन का लाभ ले रहे हैं। जिला प्रशासन का मानना है कि इससे रक्तदान के प्रति जागरूकता के साथ ही लोगों में आस्था भी बढेगी। वहीं, जरूरतमंदों को रक्त भी मिल सकेगा।
राहुल शर्मा (24 वर्ष, इंदौर से आए श्रद्धालु)
“मैं पहली बार ओंकारेश्वर आया हूं। यहां आकर जब पता चला कि रक्तदान करने पर सीधे दर्शन मिल रहे हैं, तो मैंने तुरंत हाँ कर दी। वैसे भी कतारों में 2-3 घंटे खड़े रहना पड़ता है, यहाँ आधे घंटे में रक्तदान भी हो गया और बाबा के दर्शन भी बहुत अच्छे से हो गए। सबसे बड़ी खुशी इस बात की है कि मेरा खून किसी जरूरतमंद की जान बचाने के काम आएगा। यह आस्था और सामाजिक सरोकार का बहुत ही शानदार संगम है।”
मंजू शुक्ला (45 वर्ष, भोपाल से आईं श्रद्धालु)
“गर्मी और भीड़ के कारण लाइन में लगना थोड़ा मुश्किल हो रहा था। जब प्रशासन की इस अनोखी पहल के बारे में सुना, तो मन खुश हो गया। भगवान शिव तो खुद दानी हैं, उनके दरबार में आकर अगर हम किसी बीमार के लिए थोड़ा सा खून दान कर सकें, तो इससे बड़ा पुण्य और क्या होगा? बिना किसी परेशानी के VIP दर्शन भी हो गए और दिल को एक अनोखा सुकून भी मिला। इस व्यवस्था के लिए मंदिर प्रशासन की जितनी तारीफ की जाए, कम है।”
Edited By: Naveen R Rangiyal

नाबालिग के साथ बलात्कार करने के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राहत देने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस समय उनको जमानत नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी उनसे 2 हफ्ते में इस संबंध में जवाब मांगा है। ALSO READ: राम मंदिर चढ़ावा चोरी, पूछताछ में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने मानी गलती
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की बेंच आसाराम की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आसाराम का प्रभाव काफी बड़ा माना जाता है, इसलिए जमानत पर फैसला लेने से पहले सभी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है।
क्या था आसाराम के वकील का तर्क
सुनवाई के दौरान आसाराम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने कहा कि आसाराम की उम्र 80 वर्ष से अधिक है और वह कई बीमारियों से पीड़ित हैं। इस पर अदालत ने कहा कि केवल उम्र या बीमारी के आधार पर फिलहाल जमानत नहीं दी जा सकती।
कब मिलेगी जमानत?
अदालत ने कहा कि हम सजा निलंबित करने पर विचार नहीं कर रहे हैं। निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को जेल में दी जा रहीं मेडिकल सेवाएं जारी रखी जाएं। जमानत देने पर तभी विचार किया जाएगा, जब कोई गंभीर स्वास्थ्य स्थिति हो। अदालत के इस रुख को आसाराम के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ALSO READ: राम मंदिर चढ़ावा विवाद में योगी का बड़ा दांव! क्या संघ और भाजपा के भीतर बदल रहे हैं शक्ति समीकरण?
गौरतलब है कि आसाराम ने 2013 में एक नाबालिग के साथ रेप के मामले में दोषी ठहराए जाने और उम्रकैद की सजा मुकर्रर करने वाले राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। उन्होंने खराब सेहत का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत की भी मांग की है।
edited by : Nrapendra Gupta
Sanket Kumar ISRO success: मेरठ में संकेत कुमार को तब बहुत निराशा हुई जब वह महज 2 अंकों से आईआईटी और एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान में दाखिले के लिए होने वाली जेईई एडवांस्ड परीक्षा के लिए क्वालिफाई करने से चूक गए थे। 2021 में हुए जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (JEE) परीक्षा में उन्हें शायद पहली बार एक-एक नंबर की अहमियत का अंदाजा हुआ। कभी सोचा नहीं था कि वह जेईई एडवांस्ड परीक्षा का हिस्सा बनने से महज 2 अंकों से चूक जाएंगे। यानी अपने सपनों के करीब पहुंचने में ये दो नंबर रोड़ा बन जाएंगे।
लेकिन जैसा कि इस देश के पूर्ण राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था, ‘सपने वो होते हैं, जो आपको सोने ही नहीं देते हैं।’ संकेत के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। हार मानने के बजाय, उन्होंने एक साल ड्रॉप करने का फैसला किया और बिना किसी कोचिंग के खुद से तैयारी शुरू की। मेरठ के दीवान पब्लिक स्कूल के छात्र रह चुके संकेत को कई लोगों ने साल ड्रॉप न करने की सलाह दी थी। इसके बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखने का फैसला किया। उन्होंने सेल्फ-स्टडी, यूट्यूब लेक्चर और पिछले सालों के क्वेश्चन पेपर पर भरोसा किया।
अगले साल उनकी मेहनत रंग लाई जब उन्होंने जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड दोनों पास कर लिया। इसके बाद उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए तिरुवनंतपुरम के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IIST) में प्रवेश लिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संकेत ने वाइब्रेशन और अकूस्टिक्स में स्पेशलाइजेशन करने का फैसला किया।
अपने बैच में यह विषय चुनने वाले वह अकेले छात्र थे। अपने कोर्स के दौरान, उन्हें जापान की शिनरा इंक. ने तीन महीने के एडवांस्ड इंजीनियरिंग रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए चुना। 8.2 सीजीपीए के साथ ग्रेजुएशन करने के बाद, उन्हें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) में इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया और आखिरकार चुन लिया गया।
अपने सफर के बारे में संकेत कहते हैं, जेईई एडवांस्ड मिस करने के बाद उन्होंने पूरा एक साल सेल्फ-स्टडी करने का फैसला किया। उन्होंने शुरू से तैयारी की और बाद में आईआईएसटी में पढ़ाई के दौरान स्पेस टेक्नोलॉजी में दिलचस्पी जगी, जिसने उन्हें एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में करियर बनाने के लिए मोटिवेट किया। संकेत अब महेंद्रगिरी में इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में नियुक्त हैं, जहां श्रीहरिकोटा से उड़ान भरने वाले हर रॉकेट सिस्टम की फाइनल टेस्टिंग होती है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 690 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर जमकर हमला किया। उन्होंने कहा कि जो 2017 से पहले जय श्री राम बोलने पर लाठी मारते थे। जो लोग राम भक्तों पर गोली चलाते थे, आज वे आस्था की वकालत कर रहे हैं। ALSO READ: राम मंदिर चढ़ावा विवाद में योगी का बड़ा दांव! क्या संघ और भाजपा के भीतर बदल रहे हैं शक्ति समीकरण?
राम जानते हैं कौन सही कौन गलत?
सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी, जिसने 2017 से पहले भगवान राम और भगवान कृष्ण में विश्वास करने से इनकार कर दिया था, आज अयोध्या जाने के लिए उत्सुक है। सीएम योगी ने आगे कहा कि भगवान राम जानते हैं कि कौन सही है और कौन गलत।
कुछ नहीं कर पा रहे हैं, तो वे झूठ का सहारा ले रहे हैं
उन्होंने कहा कि वे इस बात से परेशान हैं कि अयोध्या और काशी विश्वनाथ इतने सुंदर कैसे हो गए? मां विंध्यवासिनी धाम का कायाकल्प कैसे हो गया और प्रयागराज महाकुंभ ने देश-दुनिया को अपनी ओर कैसे आकर्षित कर लिया। सीएम योगी ने कहा कि अब जब वे कुछ नहीं कर पा रहे हैं, तो वे झूठ का सहारा ले रहे हैं।
'उनकी' चिढ़ है कि अयोध्या नगरी इतनी सुंदर कैसे हो गई, काशी विश्वनाथ धाम इतना सुंदर कैसे हो गया…
प्रभु श्री राम की भक्ति ऐसे कालनेमियों से निपटने में पूरी तरह सहायक है… pic.twitter.com/6F8lc65Zcl
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) June 30, 2026
रामभक्ति कालनेमियों को निपटाने में सहायक
मुख्यमंत्री ने हनुमान का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि रामभक्ति हर प्रकार की बाधा को दूर करने का सामर्थ्य देती है। रामभक्ति ऐसे कालनेमियों को निपटाने में पूरी सहायक है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पहले भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के अस्तित्व पर सवाल उठाती थीं, लेकिन आज अयोध्या जाने की होड़ लगी हुई है।
उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम सबके हैं और जनता सब कुछ देख रही है। भगवान श्रीराम की भक्ति व्यक्ति को अन्याय और षड्यंत्र से लड़ने की शक्ति देती है।
edited by : Nrapendra Gupta

गुजरात के नर्मदा जिले में प्रशासन ने अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity) के पास गरुड़ेश्वर में सरकारी अफसरों द्वारा रियायती (सब्सिडी वाले) आवासीय प्लॉट का कमर्शियल इस्तेमाल करने के आरोप में प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। नर्मदा जिला प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बने ऐसे 5 अवैध आलीशान बंगलों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया है।
आरटीआई (RTI) से हुआ बड़ा खुलासा
इस अभूतपूर्व कार्रवाई के तहत स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से महज 1 किलोमीटर दूर गरुड़ेश्वर में इन निर्माणों को ढहाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, आवासीय उपयोग की शर्तों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन करके ये संपत्तियां बनाई गई थीं। इस पूरे वीआईपी घोटाले का खुलासा इस साल की शुरुआत में एक अन्य सरकारी अधिकारी द्वारा दायर की गई आरटीआई (RTI) जांच के बाद हुआ, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया। ALSO READ: गुजरात शिक्षा बोर्ड का बड़ा फैसला: 10वीं में अब तीन भाषाएं पढ़ना होगा अनिवार्य
छुट्टी के दिन त्वरित कार्रवाई
नर्मदा जिला प्रशासन ने रविवार जैसे छुट्टी के दिन भारी पुलिस बंदोबस्त के साथ इस तव त्वरित एक्शन को अंजाम दिया। यह कार्रवाई मुख्य रूप से वर्ष 2019 में जिले के 13 वरिष्ठ अधिकारियों को आवंटित किए गए प्लॉट और निर्माणों को निशाना बनाकर की गई थी। इस जमीन आवंटन के आधिकारिक दस्तावेजों पर नर्मदा के तत्कालीन जिला कलेक्टर आरएस निनामा ने हस्ताक्षर किए थे।
कौड़ियों के भाव बांटी गई जमीन
ये सभी सरकारी प्लॉट वरिष्ठ अधिकारियों को उनके निजी निवास के उद्देश्य से बेहद कम और सस्ते दामों पर आवंटित किए गए थे। प्रत्येक अधिकारी को 135 वर्ग मीटर का प्लॉट दिया गया था, जिसके लिए उनसे सिर्फ 37 हजार 210 रुपए से लेकर 50,000 रुपए तक की मामूली रकम वसूली गई थी। अधिकारियों ने एक तरह से माटी (मिट्टी) के भाव यह बेशकीमती सरकारी जमीन हासिल कर ली थी। ALSO READ: मानसून से पहले गुजरात सरकार की नई गाइडलाइन: जर्जर कमरों में नहीं लगेगी क्लास, स्कूलों में फर्स्ट एड किट अनिवार्य
बाजार कीमत में भारी कटौती
इन प्लॉट्स की कीमत तय करने के लिए राजस्व विभाग के एक पुराने सर्कुलर का सहारा लिया गया था। इस सर्कुलर के तहत, जमीन की वास्तविक मूल्यांकन बाजार कीमत (Market Value) जो कि 99,255 रुपए थी, उसमें सीधे 50 से 75 प्रतिशत तक की भारी कटौती कर दी गई। इस तरह सरकारी अधिकारियों को भारी छूट देकर प्राइम लोकेशन पर जमीन सौंप दी गई।
समय सीमा का उल्लंघन और प्लॉट रद्दीकरण
गरुड़ेश्वर में बन रहे आदिवासी संग्रहालय (Tribal Museum) के ठीक बगल में स्थित इन प्रीमियम प्लॉट्स से दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा (स्टैच्यू ऑफ यूनिटी) का सीधा और खूबसूरत नजारा दिखता है। नियमों के मुताबिक, आवंटित 13 अधिकारियों में से 5 अधिकारी तय समय सीमा के भीतर अपना आवासीय मकान पूरा करने की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं कर पाए थे। इस नियम उल्लंघन के कारण वे प्लॉट डिफॉल्ट रूप से पहले ही सरकार को वापस मिल गए थे।
छोटे मकान की जगह 12 बेडरूम के आलीशान बंगले
बाकी बचे प्लॉट धारकों ने भी आवंटन पत्र की शर्तों का पालन नहीं किया और 2 साल के भीतर सामान्य आवासीय निर्माण नहीं कराया। जांच के दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को पता चला कि वहां किसी सामान्य सरकारी कर्मचारी के रहने लायक घर के बजाय 6 से 12 बेडरूम वाले बड़े, बहुमंजिला और बेहद आलीशान बंगले खड़े कर दिए गए थे। इनमें से 6 बंगलों का काम पूरी तरह से तैयार हो चुका था, जबकि 7वें बंगले का निर्माण चल रहा था।
होमस्टे के जरिए कमर्शियल कमाई का खेल
सरकारी जांच में यह बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि ये सभी आलीशान संपत्तियां सरकारी कर्मचारियों के रहने के लिए नहीं, बल्कि व्यावसायिक रूप से 'होमस्टे' (Homestay) चलाने के इरादे से बनाई जा रही थीं। चूंकि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर्यटकों के लिए एक वैश्विक केंद्र है, इसलिए यहां होमस्टे का बिजनेस बेहद मुनाफे वाला है। प्रशासन की प्रारंभिक जांच के अनुसार, इन बंगलों का नक्शा और डिजाइन ही विशेष रूप से पर्यटकों को कमरे किराए पर देने के व्यावसायिक उद्देश्य से तैयार किया गया था।
दो अधिकारियों ने ली कोर्ट की शरण
इस बड़े डिमोलिशन ड्राइव (तोड़फोड़ अभियान) के बीच दो अधिकारियों — डीआरडीए (DRDA) निदेशक एलएस डिंडोर और जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी बी.डी. बारिया ने प्रशासन के इस आदेश के खिलाफ कोर्ट में कानूनी अपील दायर कर दी है। कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण रविवार को उनके बंगलों पर बुलडोजर नहीं चलाया गया, जबकि अन्य 6 अधिकारियों के प्लॉट पहले ही वापस लिए जा चुके हैं।
सांसद मनसुख वसावा का कड़ा रुख
इस पूरे मामले पर भरूच लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद मनसुख वसावा ने प्रशासन की इस बुलडोजर कार्रवाई का पुरजोर समर्थन किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए और यह कार्रवाई चयनात्मक (Selective) या पक्षपातपूर्ण नहीं होनी चाहिए। वसावा ने इस क्षेत्र में बन रहे एक 5-star होटल प्रोजेक्ट के लिए बड़े पैमाने पर की जा रही लैंडफिलिंग (जमीन भराई) और संदिग्ध मंजूरियों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
Ram Mandir Donation Row: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान के कथित गबन को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार (30 जून) को अयोध्या में राम मंदिर में पूजा-अर्चना करेगा। लेकिन, इस बीच, कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय को अयोध्या के एक होटल में नजरबंद कर दिया गया है।
पार्टी की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय करेंगे। इसमें पार्टी के सांसद किशोरी लाल शर्मा (अमेठी), राकेश राठौर (सीतापुर), उज्ज्वल रमण सिंह (प्रयागराज) और तनुज पुनिया (बाराबंकी) शामिल होंगे।
प्रतिनिधिमंडल के साथ बाराबंकी के पूर्व सांसद एस.पी. गौतम, विधान परिषद के पूर्व सदस्य दीपक सिंह, महाराजगंज के पूर्व विधायक वीरेंद्र चौधरी और बाराबंकी की पूर्व विधायक मीता गौतम भी मौजूद रहेंगी। पार्टी ने प्रस्तावित यात्रा कार्यक्रम की जानकारी स्थानीय प्रशासन को दे दी है। इस बीच, कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय को अयोध्या के एक होटल में नजरबंद कर दिया गया। पार्टी ने देर रात एक बयान में इसकी पुष्टि की है।
‘अयोध्या नहीं छोड़ेंगे’
अजय राय ने मंगलवार को दावा किया कि जब तक उन्हें राम मंदिर जाने की इजाजत नहीं मिलती तब तक अयोध्या नहीं छोड़ेंगे। अयोध्या से अजय राय ने मंगलवार को फोन पर पीटीआई से बातचीत में कहा, “मंगलवार के कार्यक्रम के लिए अयोध्या पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें तुरंत ‘हाउस अरेस्ट’ (नजरबंद) कर लिया।” हालांकि, उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें राम मंदिर जाने की इजाजत नहीं मिलती, वे अयोध्या नहीं छोड़ेंगे।
राय ने एक अतिथि गृह से पीटीआई फोन पर बातचीत में पूछा, “यह कैसी सरकार है जो हमारे राम मंदिर जाने से डरती है।” राय ने कहा कि उन्हें मंगलवार के कार्यक्रम के लिए मंदिर शहर पहुंचने के तुरंत बाद सोमवार आधी रात को एक अतिथि गृह में ले जाया गया था। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “आधी रात को मुझे मेरे होटल से आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के अतिथि गृह में ले जाया गया और अभी मुझे वहीं रखा गया है।”
उनकी पत्नी ने उनके ठिकाने को लेकर चिंता जताई थी। राय यह पक्का नहीं बता पाए कि उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया है या नजरबंद किया गया है। उन्होंने अंदेशा जताते हुए कहा, “मुझे लगता है कि उन्होंने मुझे गिरफ़्तार कर लिया है, वरना वे मुझे आधी रात को इस अतिथि गृह में क्यों लाते और यहां क्यों रोककर रखते?” राय ने कहा, ‘‘मेरे दल के कई सदस्य जो आज के कार्यक्रम के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से आ रहे थे, उन्हें रोका गया, गिरफ्तार किया गया या उनके घरों में ही रोक दिया गया।’’
कौन-कौन नेता शामिल?
इस दल में शामिल अन्य कांग्रेस नेताओं में सांसद किशोरी लाल शर्मा (अमेठी), राकेश राठौर (सीतापुर), उज्ज्वल रमन सिंह (प्रयागराज) और तनुज पुनिया (बाराबंकी) के अलावा अन्य लोग भी शामिल थे। अजय राय ने इस बीच मंगलवार को भारतीय युवक कांग्रेस के X पर एक पोस्ट को साझा किया जिसमें कहा गया कि आज कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल प्रभु श्री राम के दर्शन के लिए अयोध्या जा रहा था, लेकिन भाजपा सरकार ने उप्र कांग्रेस अध्यक्ष अजय रा जी समेत प्रतिनिधिमंडल को हाउस अरेस्ट कर लिया।
पोस्ट में सवाल उठाया गया है कि आखिर प्रभु श्री राम के भक्तों से इतना डर क्यों? जय श्री राम। अयोध्या में राम मंदिर दान में कथित गबन का मामला आने के बाद इसके पहले भी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 18 जून को अयोध्या की यात्रा करके दर्शन पूजन किया था। अयोध्या में दान में गबन का मामला सात जून को समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उठाया और न्यायिक हस्तक्षेप पर जोर दिया था।
हालांकि, इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आठ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
‘भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन…’
अजय राय ने कहा, “आज हम सभी भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन बीजेपी सरकार ने हमें गिरफ़्तार कर लिया है और आचार्य नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में बंद कर दिया है। उन्होंने हमारे सभी साथियों को भी नजरबंद कर दिया है। हम प्रार्थना करते हैं कि भगवान राम बीजेपी और आरएसएस के लोगों को सद्बुद्धि दें, जो उनके नाम का इस्तेमाल करके सत्ता में आए हैं, ताकि वे इस पवित्र शहर में हो रहे घोटालों को रोकें। हमारी सामूहिक मांग है कि पुलिस रिमांड लेकर उन निचले स्तर के कर्मचारियों से पूछताछ करे जिन्हें जेल भेजा गया है।”
यूपी कांग्रेस प्रमुख ने आगे कहा, “इसके अलावा, इसमें शामिल हाई-प्रोफ़ाइल लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज होनी चाहिए, जिनमें निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र (जो पांच साल तक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव रहे), अनिल मिश्र (जो इस भ्रष्टाचार और चोरी में सीधे तौर पर शामिल हैं), गोपाल राय, चंपत राय, बंसल और गोविंद देव गिरी शामिल हैं। उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए और उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
VIDEO | Ayodhya: On being placed under house arrest ahead of Congress delegation’s visit to Ram Temple, UP Congress chief Ajay Rai says, “Today, we all wanted to seek the darshan of Lord Shri Ram, but the BJP government has arrested us and locked us inside the guest house of the… pic.twitter.com/rxa2qnbLPj
— Press Trust of India (@PTI_News) June 30, 2026
आज हम प्रभु श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन BJP सरकार ने हमें गिरफ्तार कर गेस्ट हाउस में बंद किया हुआ है।
आज अयोध्या नगरी में चंदा चोरी और जमीन घोटाले हो रहे हैं। हम भगवान राम से प्रार्थना करना चाहते थे कि BJP-RSS के लोगों को सद्बुद्धि दें।
हमारी मांग है-
• जिन छोटे… pic.twitter.com/ylzXsQVroc
— Congress (@INCIndia) June 30, 2026

Chief Minister Yogi Adityanath : विकास और विरासत के संगम के बीच मुरादाबाद में एक भावुक नजारा देखने को मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब करोड़ों रुपए की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का लोकार्पण किया, तो सबसे खास और भावुक पल 'श्री राम वाटिका' के उद्घाटन का रहा। इस भव्य वाटिका का लोकार्पण किसी राजनेता या अधिकारी ने नहीं, बल्कि वहां मौजूद दो नन्ही बच्चियों वांची और आची ने मुख्यमंत्री के सानिध्य में किया।
मुख्यमंत्री और नन्ही बच्चियों का पुराना है स्नेह का नाता
मुख्यमंत्री के साथ फीता काटने वाली छह वर्षीय वांची और उसकी छोटी बहन आची का मुख्यमंत्री योगी से यह स्नेहिल जुड़ाव नया नहीं है। दरअसल, इसके पीछे एक बेहद भावुक कहानी है। मुरादाबाद के रहने वाले इन बच्चियों के पिता अमित कुमार अपनी बेटी वांची के स्कूल एडमिशन को लेकर तीन महीने से परेशान चल रहे थे। इसके बाद, जून 2025 में उन्होंने ‘जनता दर्शन’ में बेटी के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर अपनी गुहार लगाई थी।
महज तीन घंटे में दूर की थी पिता की परेशानी
बच्चों के प्रति विशेष स्नेह रखने वाले मुख्यमंत्री ने न केवल उनकी फरियाद सुनी थी, बल्कि महज तीन घंटे के भीतर उनकी समस्या का समाधान भी कर दिया था। मुख्यमंत्री के त्वरित निर्देश पर आरटीई के तहत उसी दिन सोमवार दोपहर को वांची का एडमिशन मुरादाबाद के प्रतिष्ठित 'सीएल गुप्ता वर्ल्ड स्कूल' में हो गया था।
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सुरक्षा घेरे के बीच बेटियों को दिया सम्मान
श्री राम वाटिका के लोकार्पण के दौरान जब मुख्यमंत्री का काफिला पहुंचा, तो उनसे मिलने यह दोनों बच्चियों भी पहुंची थी। एक पल की भी देरी किए बिना, मुख्यमंत्री ने पूरे वात्सल्य के साथ उन दोनों बहनों को अपने पास बुलाया और उन्हीं नन्हे हाथों से इस भव्य श्री राम वाटिका का फीता कटवाकर इसे जनता को समर्पित कर दिया। बच्चियों के चेहरों की मुस्कान और इस अनूठे पल ने वहां मौजूद हर शख्स का दिल जीत लिया।

