राम मंदिर चढ़ावा चोरी, पूछताछ में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने मानी गलती

Ayodhya Ram Mandir donation theft case

Ayodhya Ram Mandir donation theft case: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए दान चोरी मामले की जांच को यूपी पुलिस और एसआईटी (SIT) ने तेज कर दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के बयान दर्ज किए गए हैं, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि दान चोरी की बात सामने आने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराने में उनसे देरी हुई। दूसरी ओर, पुलिस अब चंपत राय समेत ट्रस्ट के कई प्रमुख सदस्यों की वित्तीय संपत्तियों और बैंक खातों की गहन जांच कर रही है।

 

पुलिस और एसआईटी के सामने दिए अपने बयान में पूर्व महासचिव चंपत राय ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। चंपत राय ने बताया कि ट्रस्ट को जून के पहले हफ्ते में ही इस बात की भनक लग गई थी कि मंदिर के दान में हेराफेरी और चोरी हो रही है। जानकारी मिलते ही ट्रस्ट के लोगों ने आंतरिक स्तर पर कार्रवाई की थी और भारी मात्रा में कैश भी बरामद किया था। ALSO READ: चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी

 

चंपत राय ने जांचकर्ताओं से कहा कि मैंने खुद एसआईटी को इस मामले की शिकायत दी थी, जिसके आधार पर केस दर्ज हुआ। लेकिन हां, यह मेरी गलती है कि मैंने आधिकारिक तौर पर पुलिस शिकायत दर्ज करने में देरी की। हम अपने स्तर पर आंतरिक जांच करने में लगे हुए थे। उल्लेखनीय है कि इस मामले में 8 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें सोमवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। 

5 जून का फुटेज और कैश रिकवरी का सच

चंपत राय ने पूछताछ में 5 जून की उस घटना का भी जिक्र किया, जब ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारी आरोपी अविनाश शुक्ला के घर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट को पहले ही इसकी जानकारी मिल गई थी और छापेमारी के दौरान अविनाश शुक्ला के घर से भारी मात्रा में कैश बरामद किया गया था। हालांकि, जांच अधिकारियों का मानना है कि इस पूरे मामले को संभालने में चंपत राय एक अच्छे प्रशासक (एडमिनिस्ट्रेटर) साबित नहीं हुए और उनकी ओर से गंभीर लापरवाही बरती गई। ALSO READ: राम मंदिर चढ़ावा विवाद में योगी का बड़ा दांव! क्या संघ और भाजपा के भीतर बदल रहे हैं शक्ति समीकरण?

तीखे सवालों पर साधी चुप्पी

सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान जब जांचकर्ताओं ने चंपत राय से कुछ कड़े और तकनीकी सवाल पूछे, तो वे उनका स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए और कई मौकों पर चुप्पी साध गए। इस बीच, पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा समेत ट्रस्ट के कई वरिष्ठ सदस्यों की फाइनेंशियल डिटेल्स (वित्तीय विवरण) खंगालना शुरू कर दी है। इन सभी नेताओं और पदाधिकारियों के बैंक खातों, लेन-देन और संपत्तियों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इस मामले के तार किसी बड़े वित्तीय नेटवर्क से तो नहीं जुड़े हैं।

70 से अधिक लोगों को नोटिस जारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों, कर्मचारियों और संदिग्ध गतिविधियों से संबंध रखने वाले लगभग 70 लोगों को नोटिस जारी कर जांच में शामिल होने का निर्देश दिया है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों और इसके पीछे की पूरी साजिश का पर्दाफाश किया जाएगा।

Edited by: Vrijendar Singh Jhala 

2026 Ducati Multistrada V4 Rally launched at Rs 32.40 lakh

2026 Ducati Multistrada V4 Rally static at sunset

The 2026 Ducati Multistrada V4 Rally was unveiled for global markets last October and, less than a year later, the adventure tourer has arrived in India with prices starting at Rs 32.40 lakh. For 2026, it receives a number of updates, including revised suspension and enhanced electronics.

  1. Gets Automatic Lowering Device and Forward Collision Warning
  2. Powered by the 1,158cc V4 Granturismo engine producing 170hp and 123Nm
  3. Available in Ducati Red and Jade Green

2026 Ducati Multistrada V4 Rally India price and details

The bike gets an updated semi-active Adaptive Ducati Skyhook Suspension (DSS) EVO system

The updated Ducati Multistrada V4 Rally continues to be powered by the 1,158cc V4 Granturismo engine, producing 170hp at 10,750rpm and 123Nm at 9,000rpm. It also retains the rear-cylinder deactivation feature at standstill and low engine speeds.

Notable chassis updates include a repositioned, higher-mounted swingarm pivot and a larger 280mm rear brake disc. Ducati has also revised the windscreen, making it 40mm wider and 20mm taller, redesigned the centre stand to make it easier to use, and made heated grips with five temperature settings standard fitment.

The semi-active Marzocchi suspension now uses the updated Adaptive Ducati Skyhook Suspension (DSS) EVO system, which adjusts damping in real time based on road conditions and riding style. The bike also gets Ducati Vehicle Observer (DVO), an algorithm that processes inputs from 70 sensors to further refine the intervention of rider aids such as cornering ABS and wheelie control. A new Automatic Lowering Device automatically lowers the bike below 10kph to make low-speed manoeuvres easier before returning it to its standard ride height once speeds exceed 50kph on-road or 20kph off-road. The radar suite has also been expanded to include Forward Collision Warning alongside the existing Adaptive Cruise Control and Blind Spot Detection.

The 2026 Ducati Multistrada V4 Rally is available in Ducati Red at Rs 32.40 lakh and Jade Green at Rs 32.73 lakh (both prices ex-showroom, India).

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में योगी का बड़ा दांव! क्या संघ और भाजपा के भीतर बदल रहे हैं शक्ति समीकरण?

अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा और दान अनियमितता विवाद ने केवल एक धार्मिक संस्थान की पारदर्शिता पर सवाल नहीं खड़े किए हैं, बल्कि इसने भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली शक्ति केंद्रों के बीच मौजूद समीकरणों को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस विवाद से राजनीतिक रूप से कमजोर होंगे या पहले से अधिक मजबूत होकर उभरेंगे?

 

योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में जिस आक्रामकता के साथ विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया और सार्वजनिक रूप से यह संदेश दिया कि “किसी को बख्शा नहीं जाएगा”, उससे यह स्पष्ट संकेत गया कि वे इस मामले को केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रखना चाहते। यह कदम उनकी उस राजनीतिक छवि को और मजबूत करता है जिसमें वे कानून और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी प्रकार के समझौते के लिए तैयार नहीं दिखाई देते।

 

हालांकि इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक परत यह है कि विवाद के केंद्र में मौजूद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कई प्रमुख चेहरे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद की पृष्ठभूमि से जुड़े माने जाते हैं। ऐसे में योगी सरकार की सख्त कार्रवाई को संघ परिवार के कुछ प्रभावशाली वर्गों द्वारा केवल प्रशासनिक निर्णय के बजाय राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ इस अवसर का उपयोग स्वयं को एक ऐसे हिंदुत्व नेता के रूप में स्थापित करने के लिए कर रहे हैं जो संगठन, पद या प्रभाव की परवाह किए बिना कार्रवाई करने की क्षमता और इच्छाशक्ति रखता है। यदि यह धारणा जनता के बीच मजबूत होती है तो इसका सीधा लाभ उन्हें उत्तर प्रदेश की राजनीति से आगे राष्ट्रीय राजनीति में भी मिल सकता है।

 

यही कारण है कि इस पूरे घटनाक्रम को कई लोग भाजपा के भीतर उभरते नेतृत्व संतुलन के नजरिए से भी देख रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद पार्टी और व्यापक हिंदुत्व राजनीति में भविष्य के नेतृत्व को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। योगी आदित्यनाथ पहले से ही भाजपा के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्रियों में गिने जाते हैं और उनकी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है।

 

इस विवाद के दौरान ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे और एसआईटी जांच की दिशा ने इस धारणा को और मजबूत किया है कि मुख्यमंत्री इस मामले को अंत तक ले जाने के पक्ष में हैं। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या प्रशासनिक लापरवाही साबित होती है, तो योगी की “जीरो टॉलरेंस” वाली छवि और मजबूत हो सकती है।


लेकिन इस रणनीति के जोखिम भी कम नहीं हैं। राम मंदिर केवल उत्तर प्रदेश या भाजपा का राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह संघ परिवार के दशकों लंबे वैचारिक और सामाजिक आंदोलन का प्रतीक रहा है। ऐसे में यदि जांच की दिशा संघ और उससे जुड़े वरिष्ठ चेहरों तक पहुंचती है, तो इससे संगठन के भीतर असहजता बढ़ सकती है। यही वजह है कि इस पूरे मामले पर संघ नेतृत्व की चुप्पी भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

 

कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षक यह भी मानते हैं कि योगी आदित्यनाथ और राम मंदिर ट्रस्ट के बीच दूरी की पृष्ठभूमि नई नहीं है। गोरखनाथ मठ और राम जन्मभूमि आंदोलन के ऐतिहासिक संबंधों के बावजूद ट्रस्ट गठन के समय गोरखनाथ परंपरा का कोई प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व न होना लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। ऐसे में वर्तमान घटनाक्रम को कुछ लोग पुराने राजनीतिक और संस्थागत असंतोष के विस्तार के रूप में भी देखते हैं।

 

दूसरी ओर, भाजपा और संघ के लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती लेकर आई है। यदि जांच को कमजोर करने की कोशिश होती है तो विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के संरक्षण के रूप में पेश करेगा, जबकि यदि जांच पूरी कठोरता से आगे बढ़ती है तो संगठन के कुछ प्रभावशाली चेहरों की साख प्रभावित हो सकती है।

 

सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि जनता इस पूरे विवाद को किस नजरिए से देखती है। यदि मतदाता इसे “आस्था की रक्षा के लिए कार्रवाई” के रूप में देखते हैं, तो इसका सबसे बड़ा राजनीतिक लाभ योगी आदित्यनाथ को मिल सकता है। लेकिन यदि यह धारणा बनती है कि मामला केवल आंतरिक शक्ति संघर्ष या राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश है, तो इसका असर उल्टा भी पड़ सकता है।

 

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि राम मंदिर चढ़ावा विवाद केवल एक कथित वित्तीय अनियमितता की जांच नहीं रह गया है। यह भाजपा, संघ परिवार और हिंदुत्व राजनीति के भीतर बदलते शक्ति संतुलन की एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन चुका है।

 

आने वाले महीनों में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली राजनीतिक प्रतिक्रियाएं यह तय करेंगी कि यह प्रकरण योगी आदित्यनाथ के लिए जोखिम साबित होता है या फिर उनके राष्ट्रीय राजनीतिक कद को और ऊंचा उठाने वाला मोड़ बन जाता है।

2,000 साल पुरानी कार्ला गुफाओं में बड़ा रहस्य, सिंह स्तंभ के नीचे मिली गुप्त गुफा

gupta gufa ka rahasya Karla Caves

महाराष्ट्र के लोनावला (पुणे) के पास स्थित प्रसिद्ध कार्ला गुफाओं (Karla Caves) को लेकर हाल ही में एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम जब कार्ला गुफा परिसर में एक पुराने पानी के टैंक (cistern) की सफाई और वहां से अतिक्रमण हटाने का काम कर रही थी, तब उन्हें गुफा के मुख्य आकर्षण 'लायन पिलर' (Lion Pillar/सिंह स्तंभ) के बिल्कुल नीचे एक छिपी हुई गुप्त जगह (Cavity) मिली।

 

खतरे की बात:

इस खोखली जगह के कारण स्तंभ के नीचे की चट्टानें आपस में जुड़ी हुई नहीं थीं। मौसम के प्रभाव और पानी के रिसाव के कारण यह खोखलापन बढ़ गया था, जिससे इस 2,000 साल पुराने ऐतिहासिक स्तंभ के ढहने या उसमें दरारें आने का बड़ा खतरा पैदा हो सकता था।

 

ASI की तुरंत कार्रवाई:

गनीमत यह रही कि स्तंभ को कोई नुकसान पहुँचने से पहले ही पुरातत्व विभाग ने इसे ढूंढ निकाला। एएसआई (ASI) ने तुरंत कदम उठाते हुए स्तंभ के आधार को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सपोर्ट (स्ट्रक्चरल स्टेबलाइजेशन) तैयार किया है, ताकि खंभे का वजन बराबर बंटा रहे और भविष्य में इसके गिरने का कोई खतरा न रहे।

 

कार्ला गुफाओं के बारे में कुछ खास बातें:

  • यह भारत के सबसे बड़े और सबसे सुरक्षित बौद्ध चैत्य गृह (प्रार्थना हॉल) के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
  • इस गुफा के ठीक बाहर एक विशाल स्तंभ है, जिसके ऊपर चार सिंह (शेर) चारों दिशाओं में मुंह किए बैठे हैं (यह काफी हद तक हमारे राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ जैसा दिखता है)। इसी स्तंभ के नीचे यह खराबी पाई गई थी।
  • इस गुफा परिसर के बाहर ही प्रसिद्ध एकवीरा देवी का मंदिर भी स्थित है।
  • इनका निर्माण दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से पांचवीं शताब्दी ईस्वी के बीच मुख्यतः मौर्य और उत्तर-मौर्य काल के दौरान हुआ था।
  • यह मुंबई-पुणे मार्ग पर लोनावला के पास बनघटा पहाड़ियों पर स्थित है।
  • इन्हें बौद्ध भिक्षुओं द्वारा सिर्फ छेनी और हथौड़े से पहाड़ी को तराश कर बनाया गया था।
  • गुफा संख्या 8 में यहाँ भारत का सबसे बड़ा, भव्य और सबसे सुरक्षित रॉक-कट चैत्यगृह (प्रार्थना हॉल) स्थित है, जो 45 मीटर लंबा और 14 मीटर चौड़ा है।
  • गुफाओं का प्रवेश द्वार एक विशाल मेहराब (Arch) से सुसज्जित है। हॉल के भीतर बौद्ध देवी-देवताओं और रूपांकनों की सुंदर नक्काशीदार मूर्तियां हैं।
  • इस परिसर में भिक्षुओं के रहने और ध्यान लगाने के लिए कई आवासीय कक्ष (विहार) बने हैं।
  • यह लगभग 2 वर्ग किलोमीटर में फैला 16 गुफाओं का समूह है, जिसकी देखरेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) करता है।

 

बेडसे की गुफाएं:

इन गुफाओं के पास ही बेडसे की गुफाएं भी हैं। ये पहली शताब्दी ईस्वी पूर्व (ईसा पूर्व) की हैं, जिनका निर्माण सातवाहन साम्राज्य के काल में हुआ था।  यह पुणे (महाराष्ट्र) के पास कार्ला और भाजा गुफाओं के समीप स्थित है। यद्यपि ये कार्ला गुफाओं की तुलना में आकार में छोटी हैं, लेकिन बेहद कलात्मक हैं। दोनों ही गुफाएं भिक्षुओं के निवास (विहार) और पूजा स्थल (चैत्य) के रूप में विकसित की गई थीं। जहाँ कार्ला गुफाएं अपने विशालकाय चैत्य हॉल के लिए विख्यात हैं, वहीं बेडसे गुफाएं अपनी अनूठी स्तंभ कला और बारीक वेदिका अलंकरण के लिए जानी जाती हैं। ये स्थल प्राचीन भारत की धार्मिक प्रथाओं, व्यापारिक मार्गों और शिल्पकला के क्रमिक विकास का जीवंत प्रमाण हैं।

 

Fact Check: क्या दिल्ली में Petrol Bike की बिक्री पर 1 जुलाई 2026 से लग रहा है बैन? जानिए पूरा सच!

Electric Vehicle

दिल्ली सरकार ने अपनी नई Electric Vehicle (EV) Policy 2.0 (2026-2030) को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। यह नीति 1 जुलाई 2026 से लागू हो रही है। सोशल मीडिया और खबरों में 'पेट्रोल बाइक बैन' को लेकर कई तरह की अफवाहें चल रही हैं। आइए सीधा फैक्ट-चेक करते हैं कि असलियत क्या है।

Fact Check: क्या है नया नियम और कब से लागू होगा?
इंटरनेट पर चल रहे दावों और सरकार के आधिकारिक नोटिफिकेशन के बीच का सच नीचे दी गई तालिका से समझिए:

अफवाह (Myth) सच (Fact) लागू होने की तारीख
दिल्ली में पुरानी पेट्रोल बाइक चलाना तुरंत बंद हो जाएगा। गलत। यह नियम सिर्फ नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर लागू होगा। आपकी मौजूदा बाइक सुरक्षित है। कोई बैन नहीं (पुरानी गाड़ियां वैध रहेंगी)
अब दिल्ली में कभी पेट्रोल-सीएनजी ऑटो नहीं मिलेंगे। सच (सिर्फ नए रजिस्ट्रेशन के लिए)। नए पेट्रोल/CNG थ्री-व्हीलर्स का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह बंद होगा। 1 जनवरी, 2027
दिल्ली में नई पेट्रोल बाइक और स्कूटर की बिक्री पर पूरी तरह रोक। सच। इस तारीख के बाद दिल्ली में सिर्फ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का ही नया रजिस्ट्रेशन (RTO) होगा। 1 अप्रैल, 2028

दिल्ली कैबिनेट (मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में) और परिवहन विभाग द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार:

Electric Vehicle

  • पुरानी गाड़ियों का क्या होगा?: आपके पास जो पेट्रोल बाइक या स्कूटर पहले से मौजूद है, उसे आप उसकी पूरी वैध लाइफ (15 साल) तक दिल्ली की सड़कों पर कानूनी रूप से चला सकते हैं। यह बैन सिर्फ 1 अप्रैल 2028 या उसके बाद खरीदी जाने वाली नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन पर लागू है।
  • हाइब्रिड कारों को झटका: नई नीति में स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड (Strong Hybrid) कारों को टैक्स में छूट देने का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। सरकार का पूरा ध्यान सिर्फ प्योर (Pure) इलेक्ट्रिक वाहनों पर है।
  • बड़ा बजट और सब्सिडी: दिल्ली सरकार इस बदलाव के लिए 15,000 करोड़ खर्च कर रही है। नीति के पहले साल में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने पर 30,000 तक की सीधी सब्सिडी और रोड टैक्स/रजिस्ट्रेशन फीस में 100% की छूट मिलेगी।

नोट: यदि आप अपनी पुरानी BS-IV या उससे पुरानी पेट्रोल बाइक को स्क्रैप (Scrap) करते हैं, तो सरकार आपको 10,000 का अतिरिक्त स्क्रैपेज इंसेंटिव (Incentive) भी देगी।
क्या आप अगले दो सालों में दिल्ली में नई बाइक खरीदने की योजना बना रहे हैं, या इस नीति को लेकर आपके मन में कोई और उलझन है?

अमेरिकी सांसद बोले- भारत-अमेरिका रिश्ते 30 साल में सबसे खराब:ट्रम्प की टैरिफ नीति और एकतरफा फैसलों ने भरोसे को नुकसान पहुंचाया

भारतीय मूल के अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों की वजह से भारत और अमेरिका के रिश्ते पिछले 30 साल में सबसे खराब दौर में पहुंच गए हैं। वॉशिंगटन में आयोजित यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 में उन्होंने कहा कि ट्रम्प की टैरिफ नीति, ईरान के साथ युद्ध और सहयोगी देशों से बिना सलाह लिए फैसले करने से अमेरिका की साख को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने भारत, यूरोप और कनाडा जैसे अपने सहयोगी देशों से बात किए बिना ईरान पर सैन्य कार्रवाई की। इस तरह के फैसलों से अपने सहयोगी देशों का भरोसा कमजोर हुआ है। खन्ना बोले- टैरिफ से भरोसे की एक पीढ़ी खत्म हो गई रो खन्ना ने ट्रम्प की टैरिफ नीति को भी गलत बताया। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में चीन यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात एक भारतीय राजदूत से हुई। खन्ना के मुताबिक, राजदूत ने उनसे कहा, “आपके राष्ट्रपति की वजह से भरोसे की एक पूरी पीढ़ी खत्म हो गई है।” उन्होंने कहा कि अगर ट्रम्प की नीतियों से हुए नुकसान को स्वीकार नहीं किया गया तो यह सच्चाई से मुंह मोड़ने जैसा होगा। रो खन्ना ने ट्रम्प को ‘लेम डक’ राष्ट्रपति बताते हुए दावा किया कि डेमोक्रेटिक पार्टी अगले मिड-टर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करेगी और 2028 का राष्ट्रपति चुनाव भी जीतेगी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अमेरिका के साथ-साथ दुनिया के देशों के साथ उसके रिश्ते भी दोबारा मजबूत करने होंगे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट का जिक्र करते हुए कहा कि वे दुनिया के देशों के साथ मिलकर चलने में विश्वास रखते थे और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का भी समर्थन करते थे। अमेरिकी राजदूत बोले- भारत के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं कार्यक्रम में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि अमेरिका भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना चाहता है और दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत को पूरी तरह स्वीकार करता है। गोर ने कहा, “हम भारत के साथ एक और बड़े समझौते को पूरा करने के बहुत करीब हैं। प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है।” गोर ने बताया कि कुछ सप्ताह पहले नई दिल्ली में एक भारतीय मंत्री से उनकी मुलाकात हुई थी। मंत्री ने उनसे कहा, खबरों में चाहे जो दिखे, 50 साल बाद भी भारत और अमेरिका दोस्त रहेंगे। अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है और भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र। गोर ने मोदी-ट्रम्प की दोस्ती का किस्सा भी सुनाया गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प की दोस्ती का एक किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले ट्रम्प सुबह 6 बजे (भारतीय समयानुसार) ही पीएम मोदी को फोन करना चाहते थे। गोर ने बताया कि वह मियामी में एक UFC इवेंट के दौरान ट्रम्प के साथ बैकस्टेज बैठे थे। तभी ट्रम्प ने कहा, “चलो प्रधानमंत्री मोदी को फोन करते हैं।” जब गोर ने बताया कि भारत में उस समय सुबह के 6 बजे हैं, तो ट्रम्प ने जवाब दिया, “वो उठे होंगे। वो मेरी तरह हैं, सोते नहीं।” हालांकि, ट्रम्प को कुछ देर बाद मंच पर जाना था, इसलिए दोनों नेताओं की बातचीत अगले दिन तय की गई। गोर ने कहा कि यह दिखाता है कि ट्रम्प, प्रधानमंत्री मोदी को अपना करीबी दोस्त मानते हैं। उन्होंने कहा, “जब कोई आपका दोस्त होता है तो हर बातचीत पहले से तय नहीं करनी पड़ती। आप सीधे फोन करके पूछ सकते हैं कि कैसे हैं।” उन्होंने कहा कि ट्रम्प भारत का सम्मान करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी को कई दूसरे विश्व नेताओं से अलग नजर से देखते हैं। गोर के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच यही भरोसा भारत-अमेरिका संबंधों को भी मजबूत करता है।

अमेरिकी सांसद बोले- भारत-अमेरिका रिश्ते 30 साल में सबसे खराब:ट्रम्प की टैरिफ नीति और एकतरफा फैसलों ने भरोसे को नुकसान पहुंचाया

भारतीय मूल के अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों की वजह से भारत और अमेरिका के रिश्ते पिछले 30 साल में सबसे खराब दौर में पहुंच गए हैं। वॉशिंगटन में आयोजित यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 में उन्होंने कहा कि ट्रम्प की टैरिफ नीति, ईरान के साथ युद्ध और सहयोगी देशों से बिना सलाह लिए फैसले करने से अमेरिका की साख को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने भारत, यूरोप और कनाडा जैसे अपने सहयोगी देशों से बात किए बिना ईरान पर सैन्य कार्रवाई की। इस तरह के फैसलों से अपने सहयोगी देशों का भरोसा कमजोर हुआ है। खन्ना बोले- टैरिफ से भरोसे की एक पीढ़ी खत्म हो गई रो खन्ना ने ट्रम्प की टैरिफ नीति को भी गलत बताया। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में चीन यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात एक भारतीय राजदूत से हुई। खन्ना के मुताबिक, राजदूत ने उनसे कहा, “आपके राष्ट्रपति की वजह से भरोसे की एक पूरी पीढ़ी खत्म हो गई है।” उन्होंने कहा कि अगर ट्रम्प की नीतियों से हुए नुकसान को स्वीकार नहीं किया गया तो यह सच्चाई से मुंह मोड़ने जैसा होगा। रो खन्ना ने ट्रम्प को ‘लेम डक’ राष्ट्रपति बताते हुए दावा किया कि डेमोक्रेटिक पार्टी अगले मिड-टर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करेगी और 2028 का राष्ट्रपति चुनाव भी जीतेगी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अमेरिका के साथ-साथ दुनिया के देशों के साथ उसके रिश्ते भी दोबारा मजबूत करने होंगे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट का जिक्र करते हुए कहा कि वे दुनिया के देशों के साथ मिलकर चलने में विश्वास रखते थे और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का भी समर्थन करते थे। अमेरिकी राजदूत बोले- भारत के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं कार्यक्रम में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि अमेरिका भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना चाहता है और दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत को पूरी तरह स्वीकार करता है। गोर ने कहा, “हम भारत के साथ एक और बड़े समझौते को पूरा करने के बहुत करीब हैं। प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है।” गोर ने बताया कि कुछ सप्ताह पहले नई दिल्ली में एक भारतीय मंत्री से उनकी मुलाकात हुई थी। मंत्री ने उनसे कहा, खबरों में चाहे जो दिखे, 50 साल बाद भी भारत और अमेरिका दोस्त रहेंगे। अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है और भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र। गोर ने मोदी-ट्रम्प की दोस्ती का किस्सा भी सुनाया गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प की दोस्ती का एक किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले ट्रम्प सुबह 6 बजे (भारतीय समयानुसार) ही पीएम मोदी को फोन करना चाहते थे। गोर ने बताया कि वह मियामी में एक UFC इवेंट के दौरान ट्रम्प के साथ बैकस्टेज बैठे थे। तभी ट्रम्प ने कहा, “चलो प्रधानमंत्री मोदी को फोन करते हैं।” जब गोर ने बताया कि भारत में उस समय सुबह के 6 बजे हैं, तो ट्रम्प ने जवाब दिया, “वो उठे होंगे। वो मेरी तरह हैं, सोते नहीं।” हालांकि, ट्रम्प को कुछ देर बाद मंच पर जाना था, इसलिए दोनों नेताओं की बातचीत अगले दिन तय की गई। गोर ने कहा कि यह दिखाता है कि ट्रम्प, प्रधानमंत्री मोदी को अपना करीबी दोस्त मानते हैं। उन्होंने कहा, “जब कोई आपका दोस्त होता है तो हर बातचीत पहले से तय नहीं करनी पड़ती। आप सीधे फोन करके पूछ सकते हैं कि कैसे हैं।” उन्होंने कहा कि ट्रम्प भारत का सम्मान करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी को कई दूसरे विश्व नेताओं से अलग नजर से देखते हैं। गोर के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच यही भरोसा भारत-अमेरिका संबंधों को भी मजबूत करता है।

पश्चिम बंगाल में OBC बिल पास! TMC के समय की रिजर्वेशन लिस्ट से 65 मुस्लिम सब-ग्रुप्स बाहर

West Bengal OBC Bills: पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सोमवार (29 जून) को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण से जुड़े दो संशोधन विधेयक पारित किए। इससे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार के लिए पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के समय तैयार की गई OBC लिस्ट को रद्द करने का रास्ता साफ हो गया है। नए प्रावधानों के तहत अब अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) से बाहर की 66 समुदायों को OBC आरक्षण का लाभ मिलेगा। इनमें 54 हिंदू और 12 मुस्लिम समुदाय शामिल हैं।

नई व्यवस्था में पहले की लिस्ट की तुलना में 65 मुस्लिम सब-ग्रुप्स और 9 हिंदू सब-ग्रुप्स को लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल सरकार की ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ (OBC) की पिछली लिस्ट में 113 सब-ग्रुप्स थे। इनमें से 77 मुस्लिम और 36 गैर-मुस्लिम थे। हाई कोर्ट ने मई 2024 में इस लिस्ट को रद्द कर दिया था। OBC रिजर्वेशन को 17% से घटाकर 7% कर दिया था।

क्या बदला है?

पहले राज्य की OBC सूची में कुल 113 उप-समुदाय शामिल थे, जिनमें 77 मुस्लिम और 36 गैर-मुस्लिम समुदाय थे। मई 2024 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस लिस्ट को कानूनी रूप से अस्थिर बताते हुए रद्द कर दिया था। इसके बाद OBC आरक्षण 17% से घटाकर 7% कर दिया गया था।

नई व्यवस्था में क्या होगा?

संशोधित कानून के तहत राज्य सरकार, पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों के आधार पर OBC आरक्षण का प्रतिशत तय करेगी और समय-समय पर उसमें संशोधन भी कर सकेगी। हालांकि कुल आरक्षण की सीमा 50% से अधिक नहीं होगी। सरकार को यह अधिकार भी होगा कि वह पिछड़ेपन के स्तर के आधार पर OBC समुदायों को अलग-अलग कैटेगरी में वर्गीकृत करे।

आयोग की भूमिका बढ़ी

संशोधन के तहत अब कोई भी व्यक्ति OBC सूची में शामिल किए जाने के लिए आवेदन कर सकेगा। यदि किसी समुदाय को सूची में गलत तरीके से शामिल या बाहर रखा गया है तो उस पर आपत्ति भी दर्ज कराई जा सकेगी। ऐसे मामलों में पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशें सरकार पर बाध्यकारी होंगी।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद बदलाव

मई 2024 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2010 के बाद जारी किए गए OBC प्रमाणपत्रों को रद्द करते हुए कहा था कि समुदायों को OBC लिस्ट में शामिल करने की प्रक्रिया कानून के अनुरूप नहीं अपनाई गई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने 66 OBC वर्गों को अधिसूचित करते हुए आरक्षण को 7% कर दिया था। राज्य सरकार का कहना है कि अब OBC सूची में किसी भी नए समुदाय को शामिल करने से पहले पिछड़ा वर्ग आयोग विस्तृत जांच करेगा। उसी की सिफारिश के आधार पर फैसला लिया जाएगा।

विधानसभा में जोरदार बहस

बहस के दौरान, BJP विधायकों ने आरोप लगाया कि पिछली TMC सरकार ने अपने अल्पसंख्यक वोट बैंक को खुश करने के लिए मुस्लिम समुदाय के बड़ी संख्या में लोगों को शामिल करके जानबूझकर एक पक्षपाती OBC लिस्ट तैयार की थी। पार्टी ने यह भी दावा किया कि संशोधित लिस्ट में हिंदू समुदायों की कीमत पर मुस्लिम समुदायों को अतिरिक्त लाभ दिया गया था।

फिलहाल, TMC सरकार के समय संशोधित कानून के तहत OBC आरक्षण के लिए कैटेगरी A में 65 समुदाय और कैटेगरी B में 78 समुदाय शामिल हैं। उस समय मुख्य विपक्षी पार्टी रही BJP ने TMC सरकार के समय तैयार की गई नई लिस्ट पर आपत्ति जताई थी। साथ ही दावा किया था कि उस लिस्ट में मुस्लिम पृष्ठभूमि वाले समुदायों को अतिरिक्त लाभ दिया गया, जिससे ‘हिंदू’ पृष्ठभूमि वाले समुदाय वंचित रह गए।

अब आगे क्या होगा?

इन दो बिलों के पास होने से शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली BJP सरकार के लिए पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली कैबिनेट द्वारा तैयार OBC लिस्ट को रद्द करने का रास्ता साफ हो गया है। ये संशोधन पिछड़ा वर्ग आयोग को OBC लिस्ट में किसी भी समुदाय को शामिल करने या हटाने पर आपत्ति जताने का अधिकार भी देते हैं।

नए बिल में क्या है?

बिल में यह भी प्रावधान है कि राज्य सरकार, पिछड़ा वर्ग आयोग के साथ सलाह-मशविरा करके, राज्य सरकार की नौकरियों में OBC के लिए आरक्षण का प्रतिशत तय करेगी। हालांकि आरक्षण कोटा समय-समय पर बदला जा सकता है। लेकिन कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।

सरकार के पास आयोग की सलाह से OBC समुदायों को उनके पिछड़ेपन के स्तर के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में बांटने का अधिकार भी होगा। नया कानून, पहले की लेफ्ट फ्रंट सरकार द्वारा लाए गए आरक्षण कानून के ढांचे को फिर से लागू करता है। पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण, रंगनाथ मिश्रा आयोग की सिफारिशों के बाद 2010 में शुरू किया गया था।

तत्कालीन लेफ्ट फ्रंट सरकार ने (जिसका नेतृत्व स्वर्गीय बुद्धदेव भट्टाचार्य कर रहे थे) तत्कालीन पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री योगेश चंद्र बर्मन द्वारा पेश किए गए एक बिल के ज़रिए यह कानून बनाया था। इसमें कैटेगरी A समुदायों के लिए 10 प्रतिशत और कैटेगरी B समुदायों के लिए 7 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था।

ममता सरकार ने किया था बदलाव

2011 में सत्ता में आने के बाद TMC सरकार ने 2012 में कानून में संशोधन किया और कैटेगरी A में 65 समुदायों तथा कैटेगरी B में 78 समुदायों को बनाए रखा। अनुसूचित जातियों से धर्म परिवर्तन करके ईसाई बने लोगों को भी कैटेगरी B में शामिल किया गया था। इन संशोधनों के तहत मूल कानून की अनुसूचियों (schedules) को भी फिर से व्यवस्थित किया गया, जिसमें पहले की अनुसूची 1 और अनुसूची 2 को क्रमशः अनुसूची 2 और अनुसूची 3 में बदल दिया गया।

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सोमवार को पारित बिलों के तहत BJP सरकार ने लेफ्ट फ्रंट के समय की मूल अनुसूची 1 को फिर से लागू कर दिया है (जो TMC कानून के तहत अनुसूची 2 के बराबर थी)। जबकि TMC के समय की अनुसूची 1 और अनुसूची 3 को खत्म कर दिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा द्वारा सोमवार को पारित बिलों के तहत, राज्य सरकार की नौकरियों में OBC के लिए आरक्षण का प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग के साथ सलाह-मशविरा करके तय किया जाएगा।

Eicher Motors Share Price : तेज गिरावट के बाद आयशर मोटर्स बना निफ्टी का टॉप लूजर, दिल्ली की EV पॉलिसी ने दिया जोर का झटका

Eicher Motors Share Price : आज आयशर मोटर्स में तेज गिरावट दिख रही है। निचले स्तरों से ये कुछ रिकवर हुआ है,लेकिन अभी भी यह निफ्टी का टॉप लूजर बना हुआ है। फिलहाल 12 बजे के आसपास एनएसई पर यह शेयर 290 रुपए यानी 3.91 फीसदी की गिरावट के साथ 7138 रुपए के आसपास दिख रहा था। आज का इसका दिन का हाई 7,392.50 रुपए और दिन का लो 6,942.50 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक हाई 8,230 रुपए और 52 वीक लो 5,353 रुपए है।

निफ्टी का टॉप लूजर बना शेयर

आज यह शेयर निफ्टी का टॉप लूजर बना है। इसकी वजह पर नजर डालें तो इस स्टॉक पर दिल्ली की EV पॉलिसी का निगेटिव असर संभव है। दिल्ली में 1 अप्रैल 2028 से सिर्फ EV 2-W का रजिस्ट्रेशन होगा। 1 जनवरी 2028 से दिल्ली में ICE 2W रजिस्ट्रे्शन बंद होगा। 2 व्हीकल बिक्री में दिल्ली का 3 फीसदी हिस्सा है। FY26 में कंपनी के प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी ने FY26 में रिकॉर्ड रेवेन्यू,EBITDA और मुनाफा दर्ज किया है।

दिल्ली की EV पॉलिसी के अनुसार,दिल्ली में सभी नए पेट्रोल और CNG टू-व्हीलर्स का रजिस्ट्रेशन 1 अप्रैल,2028 से हमेशा के लिए बंद हो जाएगा। इस तारीख से शहर में बिकने वाला हर नया कम्यूटर टू-व्हीलर इलेक्ट्रिक होना जरूरी होगा। इसके लिए कोई एक्स्ट्रा समय (ग्रेस पीरियड)या हाइब्रिड गाड़ियों के लिए कोई छूट नहीं दी जाएगी।

आयशर मोटर्स की रॉयल एनफील्ड के लिए यह बहुत बुरी खबर है। इस ब्रांड के पास अपनी लाइन-अप में सिर्फ़ एक इलेक्ट्रिक मॉडल है और दिल्ली के EV सेगमेंट में इसकी कोई खास मौजूदगी नहीं है। बताते चलें कि दिल्ली में रॉयल एनफील्ड की स्थिति बहुत मज़बूत है। सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स’के आंकड़ों के मुताबिक,दिल्ली के कुल टू-व्हीलर मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 3.3% है। मिड-साइज़ पेट्रोल मोटरसाइकिलों पर बनी कंपनी मजबूत फ्रैंचाइजी अब इलेक्ट्रिक पर स्विच करना जरूरी होने के बाद ज़्यादा काम नहीं आएगी।

बाजार जानकारों का कहना है कि इस पॉलिसी की वजह से जिन पुरानी कंपनियों के पास भरोसेमंद EV रेंज नहीं है,उन्हें या तो अपने नए प्रोडक्ट्स तेज़ी से लॉन्च करने होंगे या फिर दिल्ली के कम्यूटर सेगमेंट से पूरी तरह बाहर होना पड़ेगा। डेडलाइन में दो साल से भी कम समय बचा है,ऐसे में रॉयल एनफील्ड पर अपनी इलेक्ट्रिक रेंज बढ़ाने का दबाव काफी बढ़ गया है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कंपनी के लिए भारत के सबसे बड़े टू-व्हीलर मार्केट में से एक में अपनी पकड़ खोने का खतरा हो सकता है।

Market Insight : अच्छे शेयर और थीम्स खोजें और उनमें बने रहें, इंडेक्स में फिलहाल के लिए इंट्राडे ही रहें

दिल्ली EV पॉलिसी पर नोमूरा की राय

नोमूरा की राय है कि दिल्ली EV पॉलिसी से IGL को बड़ा झटका लगेगा। इससे लॉन्ग टर्म में CNG वॉल्यूम घटेंगे। दिल्ली में बढ़ते इलेक्ट्रिक व्हीकल्स धीरे-धीरे CNG की डिमांड कम करेंगे। हालांकि MGL पर कोई डायरेक्ट असर नहीं होगा। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सेगमेंट में गुजरात गैस पर सबसे कम असर होगा। घरेलू और इंडस्ट्रियल PNG अब ग्रोथ ड्राइवर बनेगा।

 

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India-bound Yamaha NMax 155 design patented

Nmax 155 design patent

Earlier this month, we learnt that Yamaha was actively working on bringing the NMax 155 to India by 2027. The publication of a design patent for the maxi-scooter in India now adds further weight to those reports.

  1. Design patent filed for the Yamaha NMax 155 in India
  2. Maxi-scooter shares its 155cc engine with the Aerox 155
  3. Expected to be priced above the Aerox 155

Yamaha NMax 155 India launch details

The NMax shares its engine with the Aerox but differs significantly in size and equipment

Despite looking very different from the Aerox, the NMax 155 shares the same 155cc liquid-cooled, single-cylinder engine producing 15hp at 8,000rpm and 14Nm at 6,500rpm. Given that both scooters use the same engine and the Aerox is already E20 compliant, the NMax is expected to be similarly compatible.

The NMax rides on smaller 13-inch wheels compared to the Aerox’s 14-inch units, and is also quite different dimensionally. It has a lower 770mm seat height versus the Aerox’s 790mm, a marginally shorter 1,340mm wheelbase, and 125mm of ground clearance compared to the Aerox’s 145mm. Despite its smaller 5.5-litre fuel tank (versus 7.1 litres on the Aerox), the NMax weighs around 10kg more at 135kg with a full tank. Under-seat storage stands at 25 litres, marginally larger than the Aerox’s 24.5 litres and the Hero Xoom 160’s 22 litres.

In international markets, the NMax is offered with a comprehensive feature set that includes a Bluetooth-compatible 4.2-inch colour TFT display, keyless ignition, all-LED lighting, an idle stop-start system and two front storage cubbies – one open and one enclosed. It also gets a rear disc brake and dual-channel ABS, both of which are absent on the India-spec Aerox. Whether Yamaha carries over this equipment to the India-spec NMax remains to be seen, and we’ll update this story as more details emerge.