Lenovo ने भारत में लॉन्च किया Tab Plus Gen 2 और LOQ गेमिंग मॉनिटर्स, जानें कीमत और फीचर्स

Lenovo ने आज भारत में नया Lenovo Tab Plus Gen 2 और LOQ गेमिंग मॉनिटर्स की नई सीरीज लॉन्च की है। इस टेक कंपनी (जिसका हेडक्वार्टर बीजिंग में है) ने अपना नया Android टैबलेट MediaTek Dimensity 7400 चिपसेट के साथ पेश किया है। इसमें 12.1 इंच का बड़ा 2.5K डिस्प्ले और JBL ट्यून किए गए 9 स्पीकर वाला ऑडियो सिस्टम दिया गया है। इसके साथ ही कंपनी ने गेमर्स के लिए तीन नए LOQ गेमिंग मॉनिटर भी लॉन्च किए हैं, जो तेज रिफ्रेश रेट और फास्ट रिस्पॉन्स टाइम के लिए बनाए गए हैं।

Lenovo Tab Plus Gen 2 के स्पेसिफिकेशन और फीचर्स

Motorola की पैरेंट कंपनी ने Lenovo Tab Plus Gen 2 में 12.1-इंच की 2.5K IGZO LCD डिस्प्ले दी है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट, 800 निट्स तक की हाई ब्राइटनेस मोड और 16:10 आस्पेक्ट रेशियो को सपोर्ट करती है। टैबलेट में MediaTek Dimensity 7400 प्रोसेसर है, साथ ही 12GB तक LPDDR5 RAM और 256GB तक UFS 3.1 स्टोरेज है, जिसे माइक्रो-SD कार्ड के जरिए 2TB तक बढ़ाया जा सकता है। यह टैबलेट Android 16 पर चलता है और Lenovo का कहना है कि इसे 2030 तक दो बड़े Android OS अपग्रेड और चार साल के सिक्योरिटी अपडेट मिलेंगे।

कैमरे की बात करें तो, इस डिवाइस में ऑटोफोकस के साथ 13MP का रियर कैमरा और वीडियो कॉल व सेल्फी के लिए 8MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है। इसकी एक खास खूबी JBL-इंजीनियर्ड नौ-स्पीकर सेटअप है जिसमें Dolby Atmos की सुविधा है, साथ ही इसमें एक बिल्ट-इन रोटेटिंग किकस्टैंड भी है जो कई तरह के व्यूइंग मोड को सपोर्ट करता है, जैसे कि थिएटर, हैंगिंग, स्टैंड और लीन मोड।

कनेक्टिविटी के मामले इस फोन में Wi-Fi 6, Bluetooth 5.4, IP52-रेटेड प्रोटेक्शन, Bluetooth स्पीकर मॉड और Lenovo Tab Pen Plus व वायरलेस कीबोर्ड जैसे ऑप्शनल एक्सेसरीज का सपोर्ट शामिल है। इसके अलावा, टैबलेट में 45W फास्ट चार्जिंग वाली 10200mAh की बैटरी है, जो 15 घंटे तक YouTube स्ट्रीमिंग दे सकती है।

नए LOQ मॉनिटर के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

टैबलेट के साथ-साथ, Lenovo ने LOQ 24-10, LOQ 27-10 और LOQ 27Q-10 गेमिंग मॉनिटर भी पेश किए हैं। फ्लैगशिप LOQ 27Q-10 में 27-इंच का QHD IPS डिस्प्ले है, जिसमें 180Hz रिफ्रेश रेट, 0.5ms रिस्पॉन्स टाइम, HDR10 सपोर्ट और 99% sRGB कलर कवरेज मिलता है। इसमें स्मूद गेमप्ले के लिए AMD FreeSync और VESA Adaptive Sync का सपोर्ट भी दिया गया है।

लेनोवो का कहना है कि नए मॉनिटर लाइनअप PlayStation 5, Xbox और Nintendo Switch जैसे पॉपुलर गेमिंग प्लेटफॉर्म के साथ कम्पैटिबल हैं, जिससे ये PC और कंसोल, दोनों तरह के गेमर्स के लिए सही हैं।

भारत में Lenovo Tab Plus Gen 2 और LOQ मॉनिटर की कीमत और उपलब्धता

Lenovo Tab Plus Gen 2 के 8GB RAM + 128GB स्टोरेज वाले मॉडल की शुरुआती कीमत Rs. 35,999 है। जबकि, 8GB RAM + 256GB स्टोरेज वाले मॉडल की कीमत Rs. 38,999 है। यह टैबलेट सिर्फ Celestial White कलर में उपलब्ध है और इसे Lenovo India की वेबसाइट, प्रमुख ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म और देश के ऑथराइज्ड रिटेल स्टोर से खरीदा जा सकता है।

वहीं दूसरी ओर, टैबलेट के साथ-साथ, भारत में Lenovo LOQ मॉनिटर सीरीज की शुरुआती कीमत Rs. 9,799 है और ये Amazon पर उपलब्ध होंगे। इस लाइनअप में अभी LOQ 24-10, LOQ 27-10 और LOQ 27Q-10 मॉडल शामिल हैं।

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WhatsApp Username फीचर पर सरकार की सख्ती, Meta को नोटिस; भारत में लॉन्च पर फिलहाल रोक

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केंद्र सरकार ने भारत में WhatsApp के प्रस्तावित Username फीचर को लेकर Meta को नोटिस जारी किया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार ने कंपनी को निर्देश दिया है कि इस फीचर को भारत में तब तक लॉन्च न किया जाए, जब तक इस संबंध में चल रही परामर्श प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।

 

सरकार इस फीचर के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। फिलहाल सरकार और मेटा की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने Meta से इस नए फीचर पर तीन दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा है। सरकार इस बात का आकलन कर रही है कि कहीं इस फीचर का दुरुपयोग फर्जी पहचान (Impersonation), साइबर धोखाधड़ी और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए तो नहीं किया जा सकता।

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प्रस्तावित Username फीचर के तहत WhatsApp यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए एक यूनिक यूजरनेम के माध्यम से दूसरे लोगों से संपर्क कर सकेंगे। हाल ही में WhatsApp ने घोषणा की थी कि इस वर्ष व्यापक रोलआउट से पहले यूजर्स को अपना यूनिक यूजरनेम रिजर्व करने की सुविधा दी जाएगी।

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हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि Meta को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि भारत में यह फीचर तब तक लागू नहीं किया जाएगा, जब तक सरकार और कंपनी के बीच इस विषय पर सभी आवश्यक परामर्श पूरे नहीं हो जाते।

Ketan Agarwal Murder Case: सिया गोयल का पब में पार्टी करते वीडियो वायरल, शराब पीते देखी गईं

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी और अपने मंगेतर केतन अग्रवाल की कथित हत्या की आरोपी सिया गोयल एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। उनका एक नया वीडियो सामने आया है जिसमें वह एक नाइटक्लब में पार्टी करती और शराब पीती हुई दिख रही हैं। वीडियो में सिया गोयल भीड़-भाड़ वाले पब में फोन पर बात करते हुए और हाथ में एक बोतल जैसी चीज पकड़े हुए नजर आ रही हैं। यह क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले की चल रही जांच पर फिर से लोगों का ध्यान गया है।

वहीं, वीडियो सामने आने के बाद, अग्रवाल परिवार ने आरोप लगाया है कि रिश्ते के आगे बढ़ने से पहले उन्हें जान-बूझकर सिया की जीवनशैली से जुड़ी यह बात और कई अन्य जानकारी नहीं बताई गई थी। उन्होंने एक बार फिर इस मामले की सभी पहलुओं से निष्पक्ष और पूरी जांच करने की मांग दोहराई है।

हालांकि, यह वीडियो कब का है इसकी पुष्टि अभी तक नहीं है, लेकिन यह क्लिप तेजी से वायरल हो रही है, जिससे जांच को लेकर बहस और तेज हो गई है। साथ ही यह मर्डर केस तब से ही देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है, जब से यह मामला सामने आया है।

बता दें कि पुणे के रहने वाले रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल को कथित तौर पर 18 जून को पुणे जिले के लोहागढ़ किले में एक चट्टान से धक्का देकर मार डाला गया था। बताया जाता है कि केतन और उनकी मंगेतर की सगाई हो चुकी थी और इस साल नवंबर में उनकी शादी होने वाली थी।

वहीं, इस मामले में केतन की मंगेतर सिया गोयल (20) और उनके कथित साथी चेतन चौधरी (22) को आरोपी बनाया गया है, और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

कथित हत्या के बाद, दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और जांच जारी रहने तक उन्हें 3 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस कई पहलुओं से मामले की जांच कर रही है, जबकि यह मामला पूरे देश में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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स्वास्थ्य क्षेत्र का हारावल दस्ता बनीं आशा वर्कर, UP में 1.60 लाख से ज्यादा संख्‍या

ASHA Workers

National Rural Health Mission: हाल के वर्षों में आशा कार्यकर्ता (एक्रेडिटेड सोशल हेल्थ एक्टिविस्ट) भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बनकर उभरी हैं। आशा कार्यकर्ता गांव की अपने ही समुदाय से चुनी जाती हैं और स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने का काम करती हैं। इन्हें “स्वास्थ्य क्षेत्र का हारावल दस्ता” इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, बच्चों और पूरे परिवार की स्वास्थ्य सुरक्षा एवं जागरूकता के लिए सबसे आगे रहती हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्ष 2005 में शुरू की गई यह योजना आज सामुदायिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में पूरी दुनिया के लिए एक सफल मॉडल बन चुकी है।

 

दो दशक का काम और कमाल

आशा कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत हुई। वर्ष 2006 से इनकी नियुक्ति और प्रशिक्षण शुरू हुआ तथा अगले कुछ वर्षों में इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया। आज भारत में लगभग 10.5 लाख से अधिक आशा कार्यकर्ताएं कार्यरत हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता नेटवर्क माना जाता है। इनकी सबसे अधिक तैनाती ग्रामीण क्षेत्रों में है।

 

काम का तरीका : आशा कार्यकर्ता उसी गांव की 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग की महिलाएं होती हैं। सामान्यतः उन्होंने कम से कम आठवीं या दसवीं तक शिक्षा प्राप्त की होती है। वे घर-घर जाकर स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता फैलाती हैं, गर्भवती महिलाओं की पहचान और पंजीकरण कराती हैं, प्रसवपूर्व जांच सुनिश्चित कराती हैं तथा लाभार्थियों को स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने में मदद करती हैं।

 

मुख्य कार्य :

  • संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना और जरूरत पड़ने पर गर्भवती महिला के साथ अस्पताल तक जाना।
  • प्रसव के बाद मां और नवजात की देखभाल (होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर) सुनिश्चित करना।
  • बच्चों का नियमित टीकाकरण, कुपोषण की रोकथाम तथा परिवार नियोजन के बारे में जागरूकता फैलाना।
  • टीबी, मलेरिया, डेंगू सहित अन्य संचारी रोगों के संभावित मरीजों की पहचान कर उन्हें सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाना।
  • स्वास्थ्य दिवसों का आयोजन, रिकॉर्ड संधारण तथा समुदाय को विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़ना।
  • आशा कार्यकर्ताएं एएनएम  आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और चिकित्सकों के साथ समन्वय बनाकर काम करती हैं। इन्हें विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं के आधार पर प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।

कोविड-19 महामारी में भी बनीं फ्रंटलाइन योद्धा

कोविड-19 महामारी के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने अग्रिम पंक्ति के योद्धा के रूप में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उन्होंने घर-घर सर्वेक्षण किया, संदिग्ध मरीजों की पहचान की, मास्क वितरण, होम आइसोलेशन की निगरानी, टीकाकरण के प्रति जागरूकता तथा लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इनके काम से स्वास्थ्य क्षेत्र में क्या सुधार आया?

आशा कार्यक्रम ने देश के स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार किया है। वर्ष 2005-06 में संस्थागत प्रसव 40.8 प्रतिशत था, जो 2019-21 में बढ़कर 88.6 प्रतिशत हो गया। मातृ मृत्यु अनुपात वर्ष 2000 के आसपास 301 प्रति एक लाख जीवित जन्म था, जो 2020-22 में घटकर 93 प्रति एक लाख जीवित जन्म रह गया है। इसी प्रकार शिशु मृत्यु दर वर्ष 2005 में 58 प्रति 1000 जीवित जन्म थी, जो घटकर हाल के वर्षों में लगभग 26 प्रति 1,000 जीवित जन्म रह गई है।

 

विभिन्न अध्ययनों में पाया गया है कि जिन महिलाओं तक आशा कार्यकर्ताओं की नियमित पहुंच होती है, उनमें संस्थागत प्रसव, प्रसवपूर्व जांच तथा बच्चों के पूर्ण टीकाकरण की संभावना उल्लेखनीय रूप से अधिक होती है। कुल मिलाकर आशा कार्यकर्ताओं ने गरीब, ग्रामीण और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उत्तर प्रदेश में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका

उत्तर प्रदेश में लगभग 1.60 लाख से अधिक आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत कड़ी के रूप में कार्य कर रही हैं। विशाल आबादी वाले इस राज्य में वे गांव-गांव जाकर गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, नवजात एवं शिशु स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, पोषण, टीबी, मलेरिया तथा अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

 

प्रदेश के दूरदराज और वंचित क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में आशा कार्यकर्ताओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। चूंकि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्वास्थ्य और इससे जुड़ी सेवाओं और चुनौतियों की बहुत बेहतर समझ है,इसलिए वह अक्सर इनके सेवाओं की तारीफ भी करते हैं। राज्य सरकार ने हाल ही में विधानसभा में आशा कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी कर्मियों के मानदेय व इंसेंटिव को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने के संकेत दिए हैं।

 

आशा कार्यकर्ता केवल स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समुदाय को जागरूक और सशक्त भी बनाती हैं। “आशा” नाम अपने आप में सार्थक है—वे वास्तव में समाज के लिए आशा की किरण हैं। बेहतर प्रशिक्षण, समय पर प्रोत्साहन राशि, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान मिलने से उनका मनोबल और बढ़ेगा तथा देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था और मजबूत होगी। एक पंक्ति में कहें तो आशा कार्यकर्ताओं ने स्वयं को भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र का वास्तविक हारावल दस्ता सिद्ध किया है।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

‘जोहो का नाम लिया और 90% कम हो गई कीमत’ Zoho के को-फाउंडर ने शेयर किया किस्सा

माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस लाइसेंस की कीमत को लेकर जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू का एक दावा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। जोहो के को-फाउंडर और चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बू ने दावा किया कि एक भारतीय कस्टमर को माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस लाइसेंस रिन्यूअल की कीमत में 90 परसेंट की कमी मिली, जब उसने सॉफ्टवेयर की बड़ी कंपनी को बताया कि वह जोहो के ऑफिस-सूट प्रोडक्ट्स को देख रही है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की गई अपनी पोस्ट में श्रीधर वेम्बू ने बताया कि, संबंधित ग्राहक पहले से जोहो के कुछ प्रोडक्ट्स इस्तेमाल कर रहा था। उनके अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट ने लाइसेंस रिन्यूअल साइकिल के दौरान कीमत में तेजी से बढ़ोतरी की थी। इसके बाद ग्राहक ने कंपनी को बताया कि वह जोहो के ऑफिस सॉफ्टवेयर को अपनाने पर विचार कर रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई पोस्ट

श्रीधर वेम्बू ने कस्टमर के हवाले से कहा, “माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस का एक बड़ा लाइसेंस रिन्यूअल आया और उन्होंने कीमत में भारी बढ़ोतरी कर दी। हमने उन्हें बताया कि हम जोहो ऑफिस सूट देख रहे हैं और उन्होंने कीमत में 90 परसेंट की कमी कर दी।” उन्होंने आगे कहा कि कस्टमर ने बाद में कंपनी के पैसे बचाने में मदद करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया, “भले ही हमारा ऑफिस सूट खरीदा न हो।” श्रीधर वेम्बू ने अपनी पोस्ट में ग्राहक की पहचान, माइक्रोसॉफ्ट के अनुबंध का आकार या छूट किन शर्तों पर दी गई, इसकी कोई जानकारी शेयर नहीं की।

उन्होंने सुझाव दिया कि जिन संस्थानों या कंपनियों का माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस लाइसेंस नवीनीकरण होने वाला है, वे बातचीत के दौरान जोहो को एक संभावित ऑप्शन के रूप में सामने रख सकते हैं। श्रीधर वेम्बू ने ये एग्जांपल तकनीकी क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर अपनी बात रखते हुए शेयर किया। वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नए मॉडलों को लेकर चर्चा कर रहे थे और उनका कहना था कि चीन के ओपन-सोर्स एआई मॉडल्स से बढ़ते मुकाबले के कारण बड़ी टेक कंपनियों को भी अपनी रणनीति और पेशकश में अधिक आक्रामक बदलाव करने पड़ रहे हैं।

श्रीधर वेम्बू ने कहा कि, सॉफ्टवेयर बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सबसे बड़ा फायदा ग्राहकों को मिलता है। उनके अनुसार, जब बाजार में कई मजबूत विकल्प मौजूद होते हैं, तो बड़ी कंपनियां मनमाने तरीके से कीमतें तय नहीं कर पातीं और ग्राहकों को बेहतर दाम व विकल्प मिलते हैं। उसी पोस्ट में श्रीधर वेम्बू ने अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े एंटीट्रस्ट मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि साल 2000 में एक संघीय अदालत ने कंपनी को मोनोपॉली से जुड़े मामले में दोषी माना था।

वेम्बू के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सॉफ्टवेयर और क्लाउड सेवाओं जैसे क्षेत्रों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहना जरूरी है, क्योंकि इससे बाजार संतुलित रहता है और ग्राहकों को बेहतर विकल्प मिलते हैं। श्रीधर वेम्बू ने दावा किया कि माइक्रोसॉफ्ट लंबे समय से अपने ग्राहकों से अधिक कीमत वसूलती रही है।

ईरान के सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार में नितिन नबीन और खड़गे को न्योता, भारत के कई नेताओं को भी मिला आमंत्रण

ईरान ने अपने सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार से पहले भारत की सत्ताधारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी पार्टी कांग्रेस दोनों से संपर्क किया है। CNN-News18 के सूत्रों के अनुसार, ईरान ने भारत के सभी राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं को निमंत्रण भेजा है।

सूत्रों ने बताया कि, यह निमंत्रण BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद, जो वर्तमान में कांग्रेस के विदेश मामलों के विभाग प्रमुख हैं, को भेजा गया है।

सूत्रों के मुताबिक, खड़गे ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि वे निमंत्रण स्वीकार करेंगे या नहीं। साथ ही, वे कांग्रेस के उस प्रतिनिधिमंडल के गठन पर भी फैसला लेंगे जो अंतिम संस्कार के लिए तेहरान जा सकता है।

इसके अलावा, ईरान ने BJP और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती को भी इस राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है।

सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कार की तैयारी

यह निमंत्रण भारत के सभी राजनीतिक दलों तक तेहरान की पहुंच को दर्शाता है। बता दें कि ईरान अपने इतिहास के सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कारों में से एक की तैयारी कर रहा है, जो इस साल की शुरुआत में अमेरिकी-इजरायली सैन्य अभियान के दौरान खामेनेई की मौत के बाद आयोजित किया जा रहा है।

वहीं, भारत सरकार पहले ही तय कर चुकी है कि वह तेहरान में होने वाले अंतिम संस्कार समारोह में अपना आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजेगी। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (रिटायर्ड) करेंगे। उम्मीद है कि वे कई दिनों तक चलने वाले राजकीय अंतिम संस्कार के दौरान भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनकी यह यात्रा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए गए निमंत्रण के बाद हो रही है।

सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी और कांग्रेस नेताओं को निमंत्रण देने के अलावा, ईरान ने शिया समुदाय के कई भारतीय सांसदों को भी अंतिम संस्कार की रस्मों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है, जिनमें रुहुल्लाह मेहदी, हाजी हनीफा, इमरान मसूद और अफजल अंसारी शामिल हैं।

बता दें कि ईरान ने इस हफ्ते के आखिर से कई अंतिम संस्कार समारोहों की योजना बनाई है। खमेनेई का पार्थिव शरीर तेहरान की ग्रैंड मोसाल्ला में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा और उसके बाद दूसरे शहरों में भी समारोह आयोजित किए जाएंगे।

वहीं, ईरान के अधिकारियों का अनुमान है कि सार्वजनिक अंतिम संस्कार में 1.5 करोड़ से 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं, जिससे यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा राजकीय अंतिम संस्कार बन सकता है।

ईरान में अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां तेज

फिलहाल, ईरान की राजधानी में तैयारियां तेज हो गई हैं, समारोह से पहले ग्रैंड मोसाला कॉम्प्लेक्स के आस-पास खामेनेई की बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगाई गई हैं, सड़कों को कुछ हद तक बंद कर दिया गया है और सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सरकारी टेलीविजन ने अंतिम संस्कार में आने से पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने की अपील की है और अंतिम संस्कार के दौरान तापमान बढ़ने की संभावना को देखते हुए लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है।

सार्वजनिक समारोहों के अलावा, तेहरान शुक्रवार को विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के लिए एक अलग कार्यक्रम भी आयोजित कर रहा है। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि इसमें लगभग 30 देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।

ईरान ने नहीं दिया यूरोपीय देशों को निमंत्रण 

हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि उसने यूरोपीय देशों को आधिकारिक तौर पर कोई निमंत्रण नहीं भेजा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने हालिया संघर्ष के दौरान यूरोपीय सरकारों पर “इतिहास के गलत पक्ष” में खड़े होने का आरोप लगाया और अमेरिका-इजराइल सैन्य अभियान पर उनके रुख की आलोचना की।

गौरतलब है कि यह अंतिम संस्कार पहले युद्ध की वजह से टाल दिया गया था। अब यह ऐसे समय में हो रहा है, जब ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में संघर्ष रोकने के लिए एक शुरुआती समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding – MoU) पर सहमति बनी है। हालांकि, इस समझौते को लागू करने को लेकर दोनों देश अब भी एक-दूसरे को चेतावनी दे रहे हैं।

अधिकारियों ने अंतिम संस्कार के दौरान तेहरान के साथ-साथ पवित्र शहर कोम और मशहद में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है। राजधानी में होने वाले कार्यक्रमों के बाद, खमेनेई के पार्थिव शरीर को इराक के पवित्र शहर नजफ और कर्बला ले जाए जाने की उम्मीद है। इसके बाद, 9 जुलाई को मशहद में स्थित इमाम रजा के मकबरे में उन्हें दफनाया जाएगा, जो उनका जन्मस्थान भी है।

फिलहाल यह अभी स्पष्ट नहीं है कि खमेनेई के बेटे और उत्तराधिकारी, मोजतबा खमेनेई, अंतिम संस्कार के दौरान सार्वजनिक रूप से सामने आएंगे या नहीं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कोई भी घोषणा ‘सर्वोच्च नेता’ के कार्यालय से की जाएगी।

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सांसद महुआ मोइत्रा पर फिर बरसाए अंडे, TMC भड़की, भाजपा पर लगाया आरोप

Mahua Moitra News

Mahua Moitra egg attack: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की फायरब्रैंड सांसद महुआ मोइत्रा इन दिनों अपने बयानों से ज्यादा अपने ऊपर हो रहे 'अंडा हमलों' को लेकर सुर्खियों में हैं। बुधवार को बंगाल के नादिया जिले में कुछ ऐसा हुआ जिसने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया। महुआ मोइत्रा जब पार्टी की एक बैठक में शामिल होने पहुंचीं, तो बाहर खड़े प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ उन्हें काले झंडे दिखाए, 'चोर-चोर' के नारे लगाए, बल्कि उन पर अंडों की बौछार भी कर दी।

TMC का फूटा गुस्सा

इस घटना के बाद ममता बनर्जी की पार्टी बैकफुट पर आने के बजाय आक्रामक हो गई है। टीएमसी विधायक सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने इसे बंगाल के गिरते स्तर से जोड़ते हुए कहा कि यह अब पश्चिम बंगाल का नया कल्चर बन गया है। यहां कोई सुरक्षित नहीं है। हम ममता दीदी के नेतृत्व में फिर से सड़कों पर उतरेंगे। वहीं टीएमसी नेता कुणाल घोष ने पुलिस की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस को बेअसर कर के असल में टीएमसी का गला घोंटा जा रहा है। ALSO READ: TMC के बाद शिवसेना UBT में बगावत, महुआ मोइत्रा का तंज- सिर्फ 15 करोड़ रुपए? सस्ते में क्यों जा रहे हैं?

महुआ बोलीं- कोर्ट जाऊंगी

महुआ मोइत्रा ने इस हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए सीधे बीजेपी (BJP) पर उंगली उठाई है। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था चरमरा गई है और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि मैं चुप नहीं बैठूंगी। मैं पुलिस थाने जाऊंगी, हाई कोर्ट जाऊंगी और जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाऊंगी।

मेटल डिटेक्टर अंडा नहीं पकड़ सकता

इस पूरे मामले पर भाजपा ने बेहद तंज भरे लहजे में पल्ला झाड़ लिया है। बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने चुटकी लेते हुए कहा कि इसमें बीजेपी का कोई हाथ नहीं है। यह या तो आम जनता का गुस्सा है या फिर टीएमसी की आपसी गुटबाजी। वैसे भी पुलिस के पास सिर्फ मेटल डिटेक्टर होते हैं, ऐसी कोई मशीन नहीं बनी जो यह बता सके कि कौन अपनी जेब में अंडा छिपाकर घूम रहा है। ALSO READ: पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज मार्कंडेय काटजू ने बनाई 'इश्क करो पार्टी', महुआ मोइत्रा को भी दे डाला ये ऑफर!

आखिर क्या है पूरा मामला?

यह घटना बुधवार को पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के कालीगंज (पलाशी) में हुई। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा वहां अपनी ही पार्टी की विधायक अलीफा अहमद के घर पर आयोजित एक संगठित तृणमूल बैठक में हिस्सा लेने गई थीं। महुआ जैसे ही वहां पहुंचीं, अहमद के घर के बाहर प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा हुजूम इकट्ठा हो गया।

 

प्रदर्शनकारियों ने महुआ मोइत्रा के खिलाफ 'गो बैक' (वापस जाओ) और 'चोर-चोर' के नारे लगाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते विरोध इतना उग्र हो गया कि भीड़ में से महुआ मोइत्रा को निशाना बनाकर अंडे फेंके जाने लगे। महुआ का आरोप है कि ये आम लोग नहीं बल्कि योजनाबद्ध तरीके से भेजे गए भाजपा के कार्यकर्ता थे। स्थिति बिगड़ती देख मौके पर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को मोर्चा संभालना पड़ा, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों को वहां से खदेड़ा गया। ALSO READ: फ्लाइट के अंदर महुआ मोइत्रा के साथ क्या हुआ? नारेबाजी और हंगामे का वीडियो वायरल होने पर भड़कीं सांसद

पहले भी हुई है ऐसी घटना

खास बात यह है कि महुआ मोइत्रा के साथ अंडे फेंकने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 13 जून को भी जब महुआ कृष्णानगर जिला अदालत में एक मामले के सिलसिले में पेश होने पहुंची थीं, तब वहां मौजूद भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने उन पर अंडा फेंकने का प्रयास किया था। तभी से महुआ और भाजपा के बीच यह 'अंडा युद्ध' लगातार जारी है।

बिना सात फेरे के कैसा विवाह? गुजरात हाईकोर्ट ने शून्य घोषित की शादी, मैरिज सर्टिफिकेट को किया खारिज

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landmark verdict Gujarat High Court: गुजरात हाई कोर्ट ने हिंदू विवाह की वैधता को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि विवाह के दौरान 'सप्तपदी' (सात फेरे) जैसी पारंपरिक और अनिवार्य धार्मिक रीतियां नहीं निभाई गई हैं, तो केवल सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज विवाह पंजीकरण या मैरिज सर्टिफिकेट को कानूनी रूप से मान्य नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद पिछले साल नवंबर महीने में फैमिली कोर्ट द्वारा पारित किया गया एक आदेश रद्द हो गया है।

पारंपरिक रीतियों का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व

जस्टिस इलेश वोरा और जस्टिस आरटी वाछाणी की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए हिंदू संस्कृति में विवाह संस्कार के महत्व पर विशेष जोर दिया। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि भारत में भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधताओं के बावजूद, पारंपरिक धार्मिक रीतियां व्यक्ति के आध्यात्मिक अस्तित्व को शुद्ध और रूपांतरित करती हैं। सप्तपदी जैसी अनिवार्य रीतियां ही हिंदू विवाह का असली आधार हैं और इसके बिना विवाह अधूरा है।

क्या है पूरा विवाद और फैमिली कोर्ट का फैसला?

यह पूरा मामला फैमिली कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में दायर अपील से जुड़ा है। इससे पहले, फैमिली कोर्ट ने पक्षों के बीच हुए कथित विवाह को शून्य (अवैध) घोषित करने से इनकार कर दिया था। फैमिली कोर्ट के इस फैसले से असंतुष्ट होकर यूनाइटेड किंगडम (UK) में रहने वाले अपीलकर्ता युवक कौशल सोनार ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और न्याय की गुहार लगाई थी।

अपीलकर्ता का कोर्ट के सामने चौंकाने वाला दावा

अपीलकर्ता कौशल सोनार ने हाई कोर्ट को बताया कि वह इस कथित विवाह से पूरी तरह अनजान था। जब प्रतिवादी महिला ने उसके माता-पिता से संपर्क किया और विवाह का सरकारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर खुद को कानूनी रूप से विवाहित पत्नी होने का दावा किया, तब जाकर उसे इस बात का पता चला। युवक ने कोर्ट के समक्ष दृढ़ता से दावा किया कि उसने महिला से कभी शादी नहीं की, कोई हिंदू रीति-रिवाज नहीं निभाए गए और वे कभी भी पति-पत्नी के रूप में साथ नहीं रहे।

फैमिली कोर्ट से हुई बड़ी चूक

इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब खुद प्रतिवादी महिला ने भी फैमिली कोर्ट के समक्ष स्पष्ट रूप से स्वीकार किया था कि उनके बीच कोई विवाह समारोह या धार्मिक रीतियां नहीं हुई थीं और वे कभी भी पति-पत्नी के रूप में एक साथ नहीं रहे। हाई कोर्ट ने नोट किया कि महिला की इस स्पष्ट स्वीकारोक्ति के बावजूद, फैमिली कोर्ट ने युवक की शादी रद्द करने की याचिका को खारिज करके बहुत बड़ी गलती की थी।

हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 7 का महत्वपूर्ण उल्लेख

गुजरात हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान 'हिंदू विवाह अधिनियम, 1955' की धारा 7 का विशेष रूप से उल्लेख किया। इस कानूनी धारा के अनुसार, किसी भी हिंदू विवाह को कानूनी रूप से पूर्ण और बाध्यकारी बनाने के लिए निर्धारित पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक अनुष्ठानों का पालन करना अनिवार्य है।

 

कोर्ट ने माना कि इस मामले में विवाह की इन मूलभूत और कानूनी शर्तों का पालन ही नहीं किया गया था। हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जब पक्षों के बीच कोई धार्मिक रीतियां ही नहीं निभाई गईं, तो केवल रजिस्ट्रेशन के आधार पर विवाह सिद्ध नहीं होता है। इसलिए हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के पुराने आदेश को पलट दिया और विवाह को शून्य घोषित कर दिया। 

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

ईरान ने BJP और कांग्रेस अध्यक्ष को खामेनेई के अंतिम संस्कार का भेजा निमंत्रण, जानिए कौन करेगा भारत का प्रतिनिधित्व

ईरान ने अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत के प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं को निमंत्रण भेजा है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष नितिन नवीन और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को 9 जुलाई को होने वाले अंतिम संस्कार समारोह के लिए आमंत्रित किया गया है। यह निमंत्रण ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान भारत के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

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भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे केंद्रीय मंत्री और बिहार के राज्यपाल

सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल आटा हसनैन ईरान में आयोजित अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होंगे। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया था।

 

अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 5 जुलाई से 9 जुलाई तक आयोजित होंगे। समारोह तेहरान, क़ोम और अंत में मशहद में संपन्न होंगे, जहां 9 जुलाई को अंतिम दफन संस्कार किया जाएगा।

फरवरी में हुई थी खामेनेई की मौत

 

अयातुल्ला अली खामेनेई, जिन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक ईरान का नेतृत्व किया, 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त सैन्य हमलों के दौरान मारे गए थे। उनकी मृत्यु को पश्चिम एशिया की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

 

पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की बातचीत

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और क्षेत्रीय शांति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और वैश्विक व्यापार के लिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में निर्बाध नौवहन की स्वतंत्रता बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने क्षेत्र के सभी विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकालने पर जोर देते हुए स्थायी शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता दोहराई। Edited by : Sudhir Sharma