सीतापुर में CM योगी का बड़ा एक्शन, चौकी इंचार्ज निलंबित; SHO के खिलाफ जांच शुरू, 3 आरोपी हिरासत में

सीतापुर में CM योगी का बड़ा एक्शन, चौकी इंचार्ज निलंबित; SHO के खिलाफ जांच शुरू, 3 आरोपी हिरासत में

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सीतापुर के किशोरी की मौत के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई की है। यूपी में अपराध करेंगे तो कार्रवाई होगी और अपराधियों को बचाने की कोशिश हुई तो जिम्मेदार भी नहीं बचेंगे। कोतवाली देहात क्षेत्र में किशोरी का पेड़ पर लटका शव मिलने के मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर तीन आरोपियों को हिरासत में लिया है। वहीं पुलिस की लापरवाही पर चौकी इंचार्ज को निलंबित कर दिया गया है और एसएचओ के खिलाफ जांच शुरू है।

 

अपराधियों पर सीधा प्रहार, बचाने वालों की भी खैर नहीं

 

योगी सरकार की निगरानी में पुलिस ने मामले में तेजी से कार्रवाई की है। तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण हैंगिंग बताया गया है। जांच में सामने आने वाले हर तथ्य को गंभीरता से लिया जा रहा है। सरकार का रुख स्पष्ट है कि अपराधी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून के शिकंजे से बच नहीं सकता।

 

कानून-व्यवस्था में चूक पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई

 

सीतापुर मामले में कार्रवाई केवल आरोपियों तक सीमित नहीं रही। पुलिस की भूमिका में लापरवाही मिलने पर चौकी इंचार्ज को निलंबित कर दिया गया है, जबकि एसएचओ के विरुद्ध जांच चल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति में अपराध के साथ-साथ कर्तव्य में लापरवाही के लिए भी कोई जगह नहीं है। कानून-व्यवस्था में चूक पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जा रही है। यह कार्रवाई सरकार के उस सख्त संदेश को दोहराती है कि उत्तर प्रदेश में अपराध और अपराधियों के लिए रत्ती भर भी जगह नहीं है। अपराध करने वाला हो, उसे संरक्षण देने वाला हो या कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाला जांच में दोषी मिलने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

योगी सरकार का बड़ा एक्शन, यूपी में एनालॉग पनीर समेत क्रीम, घी पर लगा बैन

उत्तर प्रदेश सरकार ने दूध और दूध से बने सामान में मिलावट करने वाली डेयरी यूनिट्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया है। सरकार ने साफ कहा है कि दूध, पनीर, घी और खोया जैसी चीजों में हानिकारक केमिकल या प्रतिबंधित चीजें मिलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जांच के दौरान अगर किसी डेयरी यूनिट के दूध या दूसरे डेयरी उत्पादों में हानिकारक केमिकल, रिफाइंड तेल, गलत तरह की चर्बी या कोई अन्य प्रतिबंधित चीज मिलती है, तो उन उत्पादों की बिक्री तुरंत रोक दी जाए।

यह फैसला राज्य के कई जिलों में हुई खाद्य सुरक्षा जांच के दौरान दूध के नमूनों में मिलावट पाए जाने की खबरों के बाद लिया गया है। सरकार ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को इन निर्देशों को सख्ती से लागू करने और मिलावट करने वाली डेयरी यूनिट्स पर जरूरी कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

इस आदेश के तहत अधिकारियों को डेयरी यूनिट्स की जांच के दौरान गड़बड़ी मिलने पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • अगर किसी डेयरी यूनिट में हानिकारक केमिकल या वनस्पति तेल/फैट पाया जाता है, तो वहां बने सभी दूध और डेयरी उत्पादों की बिक्री तुरंत रोक दी जाएगी।
  • ऐसी यूनिट में उत्पादन का काम भी बंद कराया जाएगा।
  • अगर लोगों की सेहत के लिए खतरनाक केमिकल के जानबूझकर और बड़े स्तर पर इस्तेमाल के सबूत मिलते हैं, तो यूनिट के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।

    नियमों का उल्लंघन साबित होने पर संबंधित डेयरी यूनिट का खाद्य कारोबार लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन तुरंत निलंबित कर दिया जाएगा।

  • गंभीर मामलों में संबंधित ब्रांड के दूध और डेयरी उत्पादों की पूरे उत्तर प्रदेश में बिक्री पर रोक लगाई जा सकती है।
  • अगर उत्तर प्रदेश के बाहर बने किसी दूध या डेयरी उत्पाद में भी हानिकारक केमिकल या प्रतिबंधित चीजें पाई जाती हैं, तो सरकार राज्य में उनकी बिक्री पर भी रोक लगा सकती है।
  • सरकारी आदेश में दूध में मिलावट के लिए इस्तेमाल होने वाली कुछ चीजों का खास तौर पर जिक्र किया गया है। इनमें डिटर्जेंट, टाइटेनियम डाइऑक्साइड, लिक्विड ग्लूकोज और हाइड्रोजन पेरोक्साइड शामिल हैं
  • सरकार ने अधिकारियों को ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई करने और लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाली मिलावट पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
  • सरकार ने अधिकारियों को यह कार्रवाई बिना देरी के करने और खाद्य सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

स्कूलों में बेटियों को गरिमा के साथ मिलेगी सुविधा, मास्टर ट्रेनर तैयार कर रही योगी सरकार

स्कूलों में बेटियों को गरिमा के साथ मिलेगी सुविधा, मास्टर ट्रेनर तैयार कर रही योगी सरकार

बेटियों की शिक्षा किसी जैविक प्रक्रिया के कारण बाधित न हो और विद्यालय उनके लिए सुरक्षित, सम्मानजनक एवं संवेदनशील वातावरण का स्थान बने—योगी सरकार इस दिशा में व्यवस्थागत पहल को जमीन तक पहुंचा रही है। इसी क्रम में मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़े विषयों पर शिक्षकों की समझ और संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए प्रदेश के सभी 75 जनपदों में मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जा रहे हैं। 

 

राज्य स्तर पर आयोजित दो दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम में प्रत्येक जनपद से तीन प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। पहले दिन 13 अगस्त को 37 जनपदों के 111 प्रतिभागियों का उन्मुखीकरण पूरा हुआ, जबकि शेष जनपदों से आए 112 प्रतिभागियों का उन्मुखीकरण 14 अगस्त को होगा। इस प्रकार दो दिनों में कुल 223 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

 

यह पहल डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार एवं अन्य प्रकरण के संदर्भ में विद्यालयों में मासिक धर्म स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाओं और संवेदनशील शैक्षिक वातावरण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रशिक्षण में यह समझ विकसित की जा रही है कि मासिक धर्म स्वास्थ्य को केवल सैनिटरी पैड की उपलब्धता तक सीमित न रखते हुए सुरक्षित टॉयलेट, पानी, साबुन, उचित निस्तारण, गोपनीयता, जागरूकता और सहयोगी वातावरण से जोड़कर देखा जाए। प्रशिक्षण सामग्री में भी मासिक धर्म स्वास्थ्य को बालिकाओं की गरिमा, शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए व्यापक दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है। 

 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना को विद्यालय स्तर तक पहुंचाने की तैयारी

प्रशिक्षण में 30 जनवरी 2026 के डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मासिक धर्म स्वास्थ्य से संबंधित बताए गए व्यापक पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण सामग्री के अनुसार मासिक धर्म स्वास्थ्य को गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार से जोड़ा गया है तथा सुरक्षित और सम्मानजनक मासिक धर्म प्रबंधन उपलब्ध कराने में राज्य और शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी पर बल दिया गया है। साथ ही सरकारी एवं निजी तथा ग्रामीण एवं शहरी सभी विद्यालयों में आवश्यक व्यवस्थाओं और यह सुनिश्चित करने पर जोर है कि मासिक धर्म के कारण किसी छात्रा की शिक्षा प्रभावित न हो। 

 

हर जनपद से तीन मास्टर ट्रेनर होंगे तैयार

राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम में प्रत्येक जनपद से नामित तीन प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। पहले दिन 37 जनपदों के 111 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में सहभागिता की। इनमें आगरा, अलीगढ़, प्रयागराज, अंबेडकर नगर, अमेठी, औरैया, अयोध्या, आजमगढ़, बागपत, बहराइच, बलिया, बलरामपुर, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, भदोही, बिजनौर, बदायूं, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, एटा, इटावा, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, फिरोजाबाद, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हमीरपुर, हापुड़, हरदोई और हाथरस के प्रतिभागी शामिल रहे। शेष 112 प्रतिभागियों का उन्मुखीकरण 14 अगस्त को निर्धारित है।

 

मास्टर ट्रेनर पहुंचाएंगे प्रशिक्षण को विद्यालयों तक 

राज्य स्तर पर प्रशिक्षित तीनों मास्टर ट्रेनर अपने-अपने जनपदों में जाकर सभी विद्यालयों के महिला एवं पुरुष शिक्षक-शिक्षिकाओं को ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इस व्यवस्था के माध्यम से राज्य स्तर पर तैयार प्रशिक्षण सामग्री और समझ को सीधे विद्यालय स्तर तक पहुंचाया जाएगा। शिक्षकों को मासिक धर्म स्वास्थ्य, बालिकाओं की गरिमा एवं गोपनीयता, संवेदनशील व्यवहार, आवश्यक सुविधाओं तथा विद्यालय में सहयोगी वातावरण तैयार करने से संबंधित जानकारी दी जाएगी। इससे प्रशिक्षण का दायरा केवल चुनिंदा प्रतिभागियों तक सीमित न रहकर प्रत्येक विद्यालय और शिक्षक तक पहुंचेगा। प्रशिक्षण सामग्री में भी शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया है। बिना शर्म या भेदभाव के बालिकाओं का सहयोग करना, मासिक धर्म को सामान्य जैविक प्रक्रिया के रूप में समझाना तथा जरूरत पड़ने पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है। 

 

‘पैड से आगे’ व्यापक व्यवस्था पर जोर

प्रशिक्षण में स्पष्ट किया जा रहा है कि मासिक धर्म स्वच्छता का अर्थ केवल सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना नहीं है। विद्यालयों में क्रियाशील बालिका शौचालय, पानी और साबुन की उपलब्धता, सुरक्षित निस्तारण व्यवस्था, गोपनीयता तथा आपात स्थिति में आवश्यक सहायता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण सामग्री में भी टॉयलेट, पानी, साबुन और सुरक्षित निस्तारण को मासिक धर्म स्वास्थ्य की आवश्यक आधारभूत व्यवस्था के रूप में रेखांकित किया गया है।

 

जागरूकता से बदलेगा विद्यालयी वातावरण

प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण पक्ष मासिक धर्म से जुड़े मिथकों, झिझक और भेदभाव को दूर करना है। शिक्षकों को यह समझाया जा रहा है कि संवेदनशील और वैज्ञानिक जानकारी से बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाया जा सकता है तथा मासिक धर्म के कारण होने वाली अनावश्यक अनुपस्थिति को कम करने में विद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रशिक्षण सामग्री में मासिक धर्म स्वच्छता को स्वास्थ्य, गरिमा, समानता, गोपनीयता और शिक्षा से जोड़कर देखने पर जोर दिया गया है। 

 

विद्यालय स्तर पर जवाबदेही और व्यवस्थागत सुधार पर जोर

योगी सरकार की इस पहल का फोकस प्रशिक्षण के साथ-साथ विद्यालयी व्यवस्था को संवेदनशील और उत्तरदायी बनाने पर है। शिक्षकों के माध्यम से बालिकाओं को आवश्यक सहयोग, सुरक्षित वातावरण और सही जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में मास्टर ट्रेनर महत्वपूर्ण कड़ी होंगे, जो राज्य स्तर की पहल को जनपद और फिर विद्यालय स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाएंगे।

 

कोट:

बालिकाओं की शिक्षा और गरिमा से जुड़ा कोई भी विषय संवेदनशीलता के साथ विद्यालय तक पहुंचना चाहिए। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक शिक्षक को आवश्यक जानकारी और प्रशिक्षण मिले, ताकि विद्यालयों में बेटियों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और सहयोगी वातावरण तैयार हो। प्रत्येक मास्टर ट्रेनर के माध्यम से यह प्रशिक्षण प्रदेश के सभी विद्यालयों तक पहुंचाया जाएगा।

– संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

योगी सरकार की निर्यात नीति से किसानों को सीधा लाभ, निवेश की नई लहर

योगी सरकार की निर्यात नीति से किसानों को सीधा लाभ, निवेश की नई लहर

 

 

 

 

 

 


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने निर्यात क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। प्रदेश देश का पहला राज्य बना है, जिसने निर्यात के लिए समर्पित त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति (2026-29) लागू की है। एक अप्रैल 2026 से प्रभावी इस नीति के शुरुआती दो माह में ही इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अप्रैल-मई 2026 में प्रदेश से निर्यात 84.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि देश का समग्र निर्यात 6.3 प्रतिशत बढ़ा। राष्ट्रीय निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 8.1 प्रतिशत से बढ़कर 14 प्रतिशत हो गई और प्रदेश पांचवें स्थान से तीसरे स्थान पर पहुंच गया।
 

 

यूपी ने 39.4 लाख डॉलर की वृद्धि अर्जित की

 

अप्रैल-मई 2026 में देश से कुल 6.15 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ, जिसमें उत्तर प्रदेश का योगदान 86 लाख डॉलर रहा। पिछले वर्ष इसी अवधि में देश का निर्यात 5.78 करोड़ डॉलर और प्रदेश का योगदान 46.6 लाख डॉलर था। इस दौरान देश के निर्यात में 36.5 लाख डॉलर की वृद्धि हुई, जबकि उत्तर प्रदेश ने अकेले 39.4 लाख डॉलर की वृद्धि अर्जित की। बस्ती से 25,000 कुंतल शीरे का निर्यात भी हुआ, जिससे 5,00,000 अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा मिली। शीरा भिन्न शुल्क वर्गीकरण में आता है, अतः यह अर्जन उपरोक्त आंकड़ों में सम्मिलित नहीं है और उनसे अतिरिक्त है। महत्वपूर्ण यह है कि राज्य ने इसके लिए कोई आर्थिक सहायता या अनुदान नहीं दिया, बल्कि नियामक शुल्कों को तर्कसंगत बनाया है। प्रत्येक निर्यात बोतल पर ट्रैक एंड ट्रेस व्यवस्था लागू है। एपीडा ने इस क्षेत्र के लिए करीब एक अरब अमेरिकी डॉलर का राष्ट्रीय निर्यात लक्ष्य रखा है और उत्तर प्रदेश लगातार अपना योगदान बढ़ा रहा है।

 

निवेश और रोजगार के नए अवसर

 

नीति की 3 वर्ष की स्थिरता से उद्योग जगत का भरोसा बढ़ा है। यूनाइटेड ब्रुअरीज उन्नाव और माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज हरदोई में नई इकाई स्थापित कर रही हैं। वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने फर्रुखाबाद में इकाई स्थापित की है। एलाइड ब्लेंडर्स एण्ड डिस्टिलर्स ने मुरादाबाद की बंद इकाई को पुनर्जीवित किया है। गोरखपुर में लगभग एक वर्ष पहले एथेनॉल उत्पादन के लिए स्थापित कियान डिस्टिलरी ने पेय आसवनी और ब्रुअरी, दोनों की स्थापना के लिए आवेदन किया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार रैडिको खेतान अन्य राज्यों से अपने सीतापुर और रामपुर संयंत्रों में निर्यात उत्पादन स्थानांतरित कर रहा है। एक अन्य अंतरराष्ट्रीय कंपनी का स्थल चयन अंतिम चरण में है, जबकि कई मौजूदा आसवनियां क्षमता विस्तार कर रही हैं।

 

किसानों को बढ़ी मांग का सीधा फायदा

 

आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने बताया कि इस नीति का महत्वपूर्ण लाभ प्रदेश के किसानों को मिल रहा है। ईएनए उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों के शीरे की मांग बढ़ी है, जिससे गन्ना किसानों को अप्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। वहीं ग्रेन आधारित आसवनियों में उत्पादन बढ़ने से अनाज की खरीद भी बढ़ी है। यानी निर्यात बढ़ने के साथ प्रदेश की औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन, किसानों से खरीद और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। नीति में किसान हित को लेकर सख्त प्रावधान भी किए गए हैं। जिस आसवनी अथवा उसके स्वामी की किसी अन्य इकाई या चीनी मिल पर गन्ना मूल्य भुगतान अथवा आबकारी देयों की वसूली प्रमाण-पत्र प्रभावी है, उसे नीति की कोई छूट नहीं मिलेगी। इससे निर्यात प्रोत्साहन को सीधे किसानों के भुगतान से जोड़ा गया है।

 

कांच से लेकर परिवहन तक बढ़ा कारोबार

 

आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि इस क्षेत्र की पश्च संबद्धता गन्ना, शीरा और अनाज जैसी कृषि उपज से जुड़ी है, जबकि अग्र संबद्धता में कांच, पैकेजिंग, ढक्कन, लेबलिंग, भंडारण और परिवहन जैसे उद्योग आते हैं। अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच प्रदेश की इकाइयों ने अन्य राज्यों को 1.64 करोड़ अधिक बोतलें भेजीं, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 45.7 प्रतिशत अधिक हैं। यह वृद्धि घरेलू आपूर्ति घटाकर नहीं, बल्कि कुल उत्पादन बढ़ने से हुई है।

 

देश के लिए मॉडल बनी योगी सरकार की नीति

 

केंद्र सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ओर से गठित टास्क फोर्स सभी राज्यों के लिए आदर्श निर्यात नीति तैयार कर रही है। इसमें एपीडा और विभिन्न राज्यों के आबकारी विभाग शामिल हैं। टास्क फोर्स की बैठक में उत्तर प्रदेश की नीति की सराहना करते हुए इसे अन्य राज्यों के लिए उपयोगी ढांचा बताया गया और राष्ट्रीय आदर्श नीति में प्रदेश के अनुभवों को शामिल करने के निर्देश दिए गए। इस तरह योगी सरकार की नीति ने किसान हित, निवेश, रोजगार और विदेशी मुद्रा अर्जन को एक साथ जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश को निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ ही राष्ट्रभक्ति का भी संदेश देगी ‘वंदे मातरम वाटिका’

पर्यावरण संरक्षण के साथ ही राष्ट्रभक्ति का भी संदेश देगी ‘वंदे मातरम वाटिका’

Vande Mataram Vatika in UP

Vande Mataram Vatika: योगी सरकार के मार्गदर्शन में वन विभाग विशिष्ट वनों की स्थापना कर रहा है। प्रदेश में बीते दिनों कई विशिष्ट वन स्थापित किए जा चुके हैं। अब 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) पर सभी 75 जनपदों में वंदे मातरम् वाटिका स्थापित की जाएगी। यह वाटिका पर्यावरण संरक्षण के साथ ही राष्ट्रभक्ति का भी संदेश देगी। राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूर्ण होने पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत हर जनपद में 150 पौधों का रोपण किया जाएगा। जनसहभागिता से इस वाटिका को बसाया जाएगा। 

हर जनपद में एक चयनित स्थल पर किया जाएगा 150 पौधों का रोपण

'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत 15 अगस्त को सभी जिलों में 'वंदे मातरम् वाटिका' स्थापित की जाएंगी। इसके लिए वन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रत्येक जनपद में एक चयनित स्थान पर 150 पौधों का रोपण किया जाएगा, जो राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रकृति को समर्पित श्रद्धांजलि होगी। वन विभाग प्रत्येक जनपद में 'वंदे मातरम् वाटिका' विकसित करेगा। इसमें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप छायादार, फलदार और पर्यावरण संरक्षण में उपयोगी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। इन पौधों के देखभाल की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर तय की जाएगी, जिससे अभियान स्थायी हरित धरोहर का रूप ले सके। 

Vande Mataram Vatika in UP

लखनऊ के कुकरैल में अशोक चक्र की तीलियों के बाहर के क्षेत्र में लगाए जाएंगे पौधे

अवध वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी सितांशु पांडेय ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस पर कुकरैल पिकनिक स्पॉट में वंदे मातरम् वाटिका को विस्तार दिया जाएगा। यहां अशोक चक्र बनवाया गया है, इसकी 24 तीलियों के बाहर के क्षेत्र में अशोक के पौधे लगाए जाएंगे। पौधों की सुरक्षा के लिए इसके चारों तरफ फेंसिंग भी होगी। इसमें भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त/वर्तमान के अधिकारियों समेत समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से पौधरोपण कराया जाएगा।

भावी पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, प्रकृति संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का संदेश देंगे पौधे

अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (सामाजिक वानिकी) दीपक कुमार ने बताया कि वंदे मातरम् वाटिका ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है। इस विशेष अभियान में आम नागरिकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित होगी। पौधरोपण कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, विद्यालयों/महाविद्यालयों/विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी, स्वयंसेवी संस्थाएं, सामाजिक संगठन, वंदे मातरम् फाउंडेशन/ट्रस्ट, स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार, एनसीसी/एनएसएस, युवक/महिला मंगल दल, भारतीय वन सेवा के वर्तमान/पूर्व अधिकारी और विभिन्न सरकारी विभाग सहभागी बनेंगे। स्वतंत्रता दिवस पर लगाए जाने वाले पौधे भावी पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, प्रकृति संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का संदेश देंगे।

 

योगी सरकार में राजस्व वादों के त्वरित निस्तारण को मिली रफ्तार, लाखों मामलों का हुआ निपटारा

योगी सरकार में राजस्व वादों के त्वरित निस्तारण को मिली रफ्तार, लाखों मामलों का हुआ निपटारा

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Yogi Government disposal of revenue cases: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की त्वरित न्याय और जनसमस्याओं के प्रभावी निस्तारण की नीति के तहत राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण की प्रक्रिया को लगातार तेज किया जा रहा है। शासन स्तर से की जा रही नियमित मॉनिटरिंग और विशेष अभियानों का असर राजस्व वादों के निस्तारण के आंकड़ों में दिखाई दे रहा है।

धारा-24 के 39,645 वादों का निस्तारण

सीमांकन/पैमाइश से संबंधित धारा-24 के तहत 31 दिसंबर 2025 तक 28,556 वाद विचाराधीन थे। 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 तक 91,472 नए वाद आए, जिनमें से 39,645 वादों का निस्तारण किया गया। वर्तमान में 80,383 वाद विचाराधीन हैं। पांच वर्ष से अधिक पुराने लंबित वादों की संख्या महज 24 है। धारा-24 के तहत सबसे अधिक विचाराधीन वादों वाले जिलों में प्रयागराज, प्रतापगढ़, लखनऊ, अमेठी और मथुरा शामिल हैं।

धारा-34 में विशेष अभियान से 2.21 लाख वाद निस्तारित

नामांतरण/दाखिल-खारिज से संबंधित धारा-34 में भी बड़े स्तर पर निस्तारण किया गया। 31 दिसंबर 2025 तक 48,910 वाद विचाराधीन थे। 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 के बीच 14,70,133 वाद आयोजित हुए, जिनमें से 10,96,814 वादों का निस्तारण किया गया। वहीं, 45 दिन से अधिक अवधि से लंबित नामांतरण वादों के निस्तारण के लिए 15 से 25 जून 2026 तक चलाए गए विशेष अभियान में ही 2,21,667 वादों का निस्तारण किया गया।

भू-उपयोग परिवर्तन के मामलों में भी तेजी

धारा-80 के तहत भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़े मामलों में 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 तक 28,797 वाद आए, जबकि 49,855 वादों का निस्तारण किया गया। पांच वर्ष से अधिक पुराने लंबित वादों की संख्या शून्य दर्ज की गई है।

पुराने मामलों के निस्तारण पर विशेष जोर

योगी सरकार द्वारा राजस्व न्यायालयों में पुराने और लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि विशेष अभियान, नियमित समीक्षा और तकनीक आधारित मॉनिटरिंग के माध्यम से लंबित वादों के निस्तारण की गति बढ़ी है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण, आमजन को समयबद्ध न्याय और राजस्व संबंधी मामलों में पारदर्शी एवं सुगम व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

स्मार्ट क्लासरूम से सर्वोदय विद्यालयों के विद्यार्थियों को मिलेगी डिजिटल शिक्षा की नई उड़ान

स्मार्ट क्लासरूम से सर्वोदय विद्यालयों के विद्यार्थियों को मिलेगी डिजिटल शिक्षा की नई उड़ान

प्रदेश के विद्यार्थियों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में अब पारंपरिक पढ़ाई के साथ डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल भी होगा। इसी क्रम में पांच सर्वोदय विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम की शुरुआत की गई है। सरकार की यह पहल ग्रामीण और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

 

गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में आयोजित कार्यक्रम में समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने स्मार्ट क्लासरूम परियोजना का उद्घाटन किया। FIRST ORIGIN NextGen Edutech Pvt. Ltd. के सहयोग से सीएसआर के तहत शुरू की गई इस परियोजना के प्रथम चरण में पांच विद्यालयों में एक-एक स्मार्ट क्लासरूम तैयार किया गया है। परियोजना की कुल लागत ₹35 करोड़ बताई गई है।

 

डिजिटल शिक्षा से प्रतिभाओं को मिलेगा नया मंच

 

समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 103 सर्वोदय विद्यालय संचालित हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तहत गाजियाबाद के निडोरी, बुलंदशहर के बदनौरा, मेरठ के हस्तिनापुर, बरेली और पीलीभीत के विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम शुरू किए गए हैं। इन कक्षाओं में स्मार्ट बोर्ड, स्मार्ट पैनल, दो एयर कंडीशनर और वुडेन फ्लोरिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इससे विद्यार्थियों को विषयों को दृश्य और डिजिटल माध्यम से समझने में मदद मिलेगी। कठिन विषयों को भी इंटरैक्टिव तरीके से पढ़ाने की सुविधा शिक्षकों को मिल सकेगी।

 

विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा देने का प्रयास

 

राज्यमंत्री असीम अरुण ने कहा कि स्मार्ट क्लासरूम सिर्फ पढ़ाई के तरीके में बदलाव नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा देने का प्रयास है। योगी सरकार का उद्देश्य है कि हर विद्यार्थी आधुनिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़े तथा भविष्य की प्रतिस्पर्धाओं के लिए तैयार हो। सरकार का फोकस अब केवल विद्यालयों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों को भविष्य के लिए सक्षम बनाने पर भी दिखाई दे रहा है। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव समाज कल्याण अनुराग यादव, निदेशक समाज कल्याण संजीव सिंह, उपनिदेशक जे राम और फर्स्ट ओरिजिन के मैनेजिंग डायरेक्टर अनुज कुमार वर्मा समेत विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

 

 

सीएसआर के सहयोग से बढ़ेगा आधुनिक शिक्षा का दायरा

 

फर्स्ट ओरिजिन के मैनेजिंग डायरेक्टर अनुज कुमार वर्मा ने बताया कि परियोजना के दूसरे चरण में चयनित अन्य विद्यालयों में भी स्मार्ट क्लासरूम और ऑनलाइन शिक्षा का विस्तार किया जाएगा। इससे प्रदेश के अधिक से अधिक सर्वोदय विद्यालयों के विद्यार्थी डिजिटल शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे। योगी सरकार की यह पहल शिक्षा में तकनीकी बदलाव के साथ सामाजिक समावेशन की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। सर्वोदय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आधुनिक संसाधन उपलब्ध होने से उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा और बदलते रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में मदद मिलेगी।

योगी सरकार में निष्पक्ष-पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया जारी, 1828 पदों पर 1643 अभ्यर्थियों का अंतिम चयन

योगी सरकार में निष्पक्ष-पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया जारी, 1828 पदों पर 1643 अभ्यर्थियों का अंतिम चयन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में युवाओं को पारदर्शी एवं निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम सामने आया है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) ने विज्ञापन संख्या-03-परीक्षा/2024 के तहत आयोजित सहायक लेखाकार एवं लेखा परीक्षक मुख्य परीक्षा का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है। कुल 1828 विज्ञापित पदों के सापेक्ष 1643 अभ्यर्थियों का अंतिम चयन किया गया है। आयोग ने चयनित अभ्यर्थियों के अनुक्रमांकों की सूची तथा विभिन्न श्रेणियों की कटऑफ लिस्ट अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दी हैं।

 

668 सामान्य चयन पदों पर 570 अभ्यर्थी चयनित

आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा निदेशालय, उत्तर प्रदेश के अंतर्गत सहायक लेखाकार के 668 सामान्य चयन पदों के सापेक्ष 570 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। इनमें अनारक्षित वर्ग के 387, अन्य पिछड़ा वर्ग के 117 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 66 अभ्यर्थी शामिल हैं। अनुसूचित जाति के 88 और अनुसूचित जनजाति के 10 पदों के सापेक्ष संबंधित श्रेणी के अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने के कारण इन पदों को नियमानुसार अग्रनीत किया गया है।

 

950 विशेष चयन पदों में 866 अभ्यर्थियों को मिली सफलता

सहायक लेखाकार के 950 विशेष चयन पदों के सापेक्ष 866 अभ्यर्थी अंतिम रूप से चयनित हुए हैं। इनमें अनुसूचित जाति के 341, अनुसूचित जनजाति के 12 और अन्य पिछड़ा वर्ग के 513 अभ्यर्थी शामिल हैं। महिला क्षैतिज आरक्षण के तहत विज्ञापित 190 पदों के सापेक्ष सभी 190 महिला अभ्यर्थियों का चयन हुआ है।

 

लेखा परीक्षक के 209 पदों पर 206 चयनित

आयोग ने लेखा परीक्षक के 209 सामान्य चयन पदों के सापेक्ष 206 अभ्यर्थियों का चयन किया है। इनमें अनारक्षित वर्ग के 96, अनुसूचित जाति के 28, अनुसूचित जनजाति के 4, अन्य पिछड़ा वर्ग के 58 और ईडब्ल्यूएस वर्ग के 20 अभ्यर्थी शामिल हैं।

महिला क्षैतिज आरक्षण के तहत 41 पदों के सापेक्ष सभी 41 महिला अभ्यर्थियों का चयन किया गया है।

 

विधिक सेवा प्राधिकरण के पद पर भी चयन

उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के नियंत्रणाधीन सहायक लेखाकार के एक पद पर भी एक अभ्यर्थी का चयन हुआ है। यह पद अनारक्षित श्रेणी का था।

 

68 अभ्यर्थियों का चयन औपबंधिक

आयोग ने 68 अभ्यर्थियों को औपबंधिक रूप से अंतिम चयन परिणाम में शामिल किया है। इनका अंतिम चयन प्रस्तुत किए जाने वाले प्रमाण पत्रों एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों के परीक्षण के बाद आयोग और संबंधित अधियाचनकर्ता विभाग के निर्णय पर निर्भर होगा।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अंतिम चयन परिणाम संबंधित उच्च न्यायालय में विचाराधीन रिट याचिकाओं/विशेष अपीलों तथा भविष्य में दायर होने वाले संबंधित मामलों में पारित होने वाले आदेशों के अधीन रहेगा।

 

पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर सरकार का जोर

योगी सरकार लगातार प्रदेश में सरकारी भर्तियों को पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध बनाने पर जोर दे रही है। विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के साथ चयन आयोगों के माध्यम से परिणाम जारी किए जा रहे हैं। सहायक लेखाकार और लेखा परीक्षक के इन पदों पर चयन से बड़ी संख्या में युवाओं को सरकारी सेवा में आने का अवसर मिलेगा। 

 

वेबसाइट पर चयन सूची और कटऑफ उपलब्ध

यूपीएसएसएससी ने चयनित अभ्यर्थियों के अनुक्रमांक की सूची और श्रेणीवार कटऑफ आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। अभ्यर्थी अपने परिणाम एवं चयन से संबंधित विवरण आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।

आलू किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है योगी सरकार

आलू किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है योगी सरकार

योगी सरकार ने किसानों को सम्मान और स्वाभिमान का आधार बताया है। उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि खेती-किसानी के मार्ग में आने वाली हर बाधा को दूर करना सरकार की प्राथमिकता है। विशेष रूप से आलू किसानों की उत्पादन, भंडारण और विपणन संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए योगी सरकार लगातार प्रभावी कदम उठा रही है।

 

श्री सिंह ने बताया कि सरकार ने आलू किसानों को राहत देने के लिए पिछले वर्षाकालीन सत्र में भंडारण शुल्क में ₹1 प्रति किलोग्राम की दर से छूट देने का निर्णय लिया है। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में पहुंचाई जाएगी। इसके लिए ₹1,000 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।

 

इसी प्रकार किसानों को बाजार भाव में उतार-चढ़ाव से राहत देने के उद्देश्य से भामाशाह भाव स्थिरता कोष की स्थापना की गई है। इसके माध्यम से किसानों के हित में बाजार भाव को स्थिर रखने के लिए ₹1.50 प्रति किलोग्राम की दर से भावांतर भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जाएगा। इसके लिए ₹100 करोड़ का बजट प्राविधान किया गया है।

 

उन्होंने कहा कि नौ वर्ष में आलू किसानों के हित के लिए हरसंभव प्रयास किए गए हैं, ताकि उन्हें उत्पादन से लेकर विपणन तक किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। चालू वर्ष में भी फसल खेत में रहते ही विभाग ने आलू के बेहतर विपणन की संभावनाओं पर काम शुरू कर दिया था।

 

इसी क्रम में 30 जनवरी 2026 को ओडिशा के भुवनेश्वर में क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित किया गया। उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने ओडिशा के उपमुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, प्रगतिशील किसानों तथा प्रतिष्ठित व्यावसायियों के साथ संवाद कर उत्तर प्रदेश के आलू की ओडिशा में आपूर्ति बढ़ाने और किसानों को उचित मूल्य दिलाने की दिशा में प्रयास किया।

 

इसके अतिरिक्त अपर मुख्य सचिव व उद्यान निदेशक सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने देश के विभिन्न राज्यों का दौरा कर उत्तर प्रदेश के आलू के विपणन की संभावनाओं को तलाशा। सरकार का कहना है कि ऐसे प्रयासों का उद्देश्य किसानों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना और उन्हें उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना है।

 

उद्यान मंत्री ने प्रदेश के आलू किसानों से अपील की है कि योगी सरकार उनके साथ हर सुख-दुख में खड़ी है। किसानों से अपील की गई कि राजनीतिक दलों द्वारा सरकार को बदनाम करने के उद्देश्य से किए जाने वाले दुष्प्रचार पर ध्यान न दें और सरकार की किसान हितैषी योजनाओं एवं निर्णयों की वास्तविकता को समझें।

 

सरकार ने सभी किसानों के हितैषी लोगों से भी रचनात्मक सुझाव आमंत्रित किए हैं। डबल इंजन की सरकार की प्राथमिकता में किसान हैं और किसानों की आय, उनकी उपज के उचित मूल्य तथा विपणन की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए हरसंभव प्रयास जारी रहेंगे।

लखनऊ में नकली दवाओं के संगठित नेटवर्क पर एफएसडीए की बड़ी कार्रवाई, चार के खिलाफ एफआईआर

लखनऊ में नकली दवाओं के संगठित नेटवर्क पर एफएसडीए की बड़ी कार्रवाई, चार के खिलाफ एफआईआर

CM Yogi Adityanath

 

 

 

 

 

नकली और संदिग्ध दवाओं की सप्लाई चेन के खिलाफ योगी सरकार सख्ती से निपट रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने बुधवार को लखनऊ में एक और बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग के अनुसार, अमीनाबाद में बिना वास्तविक दवा की आपूर्ति किए फर्जी बिलिंग, क्रॉस-बिलिंग और कागजी लेनदेन के जरिए नकली एवं काउंटरफिट दवाओं को बाजार में खपाने का खेल चल रहा था। मामले में चार आरोपियों के खिलाफ थाना अमीनाबाद में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है।

 

एफआईआर में अंकुर अवस्थी, प्रोपराइटर हेल्थ प्लस, मनीष बाजपेयी, संचालक एमके फार्मा, गोविंद शुक्ला, संचालक राम फार्मा और ऐजाज अहमद, संचालक पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस, सहारनपुर को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि इन फर्मों के बीच बिना वास्तविक दवा सप्लाई के आपस में बिलिंग की गई और कागजों पर लेनदेन दिखाकर दवाओं की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड तैयार किया गया। 

 

बिना लाइसेंस दवाओं का कारोबार करने का आरोप

विभाग के मुताबिक अमीनाबाद स्थित हेल्थ प्लस के प्रोपराइटर अंकुर अवस्थी ने वैध औषधि लाइसेंस के बिना बड़े पैमाने पर दवाओं के भंडारण और लेनदेन का रिकॉर्ड तैयार किया। जांच में गोविंद शुक्ला की भूमिका भी सामने आई, जिन्हें विभाग ने फर्म के मुख्य कर्ताधर्ताओं में शामिल बताया है। जांच के अनुसार, हेल्थ प्लस और राम फार्मा एक ही फ्लोर पर संचालित हो रहे थे और इनके माध्यम से कथित तौर पर दवाओं के अवैध डायवर्जन और कागजी लेनदेन का नेटवर्क चलाया जा रहा था। सहारनपुर की पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस नामक फर्म, जो पिछले करीब दो वर्षों से बंद बताई गई है, का इस्तेमाल भी कथित तौर पर फर्जी खरीद और कागजी रोटेशन के लिए किया गया।

 

8.87 करोड़ रुपये की खरीद दिखाने का दावा

मामले में एमके फार्मा की भूमिका भी जांच के घेरे में है। विभाग के अनुसार, फर्म के संचालक मनीष बाजपेयी ने वित्तीय वर्ष 2026 में करीब 8.87 करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद दिखाई। जांच के दौरान विभाग को कथित तौर पर ऐसे दस्तावेज मिले, जिनमें अन्य फर्मों के नाम पर Zoryl M1, Augmentin और Dexorange Syrup की खरीद दर्शाई गई थी।

विभाग का कहना है कि साक्ष्य छिपाने के लिए लैपटॉप का पुराना डेटा भी डिलीट किया गया। दवाओं के निर्माताओं और संबंधित फर्मों से सत्यापन कराया गया तो उन्होंने इन दवाओं की बिक्री से इनकार किया और संबंधित बैचों को काउंटरफिट बताया।

 

39.20 लाख Zoryl M1 का नहीं मिला हिसाब

जांच में एमके फार्मा से Zoryl M1 की करीब 39.20 लाख दवाओं का हिसाब नहीं मिलने की बात सामने आई है। विभाग का आरोप है कि इन दवाओं को अवैध तरीके से बाजार में खपाया गया, जिससे लोगों के स्वास्थ्य और जान को गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। एफएसडीए के अधिकारियों के मुताबिक, पूरे मामले में फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने, कूटरचना, नकली दवाओं के कारोबार और अवैध धन अर्जित करने की आशंका की जांच की जा रही है। इसी आधार पर चारों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 111, 276, 277, 278, 318, 319, 336 और 338 के तहत कार्रवाई की गई है।

 

लखनऊ में पहले भी सामने आ चुके हैं कई मामले

नकली दवाओं और फर्जी बिलिंग के खिलाफ चल रहे अभियान में लखनऊ में इससे पहले भी कई बड़ी कार्रवाई की जा चुकी हैं। विभाग के अनुसार, अमीनाबाद की आठ फर्मों और एक सॉफ्टवेयर डिस्ट्रीब्यूटर के खिलाफ फर्जी बिलिंग और सॉफ्टवेयर में हेरफेर के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इनमें महाराजा इंटरप्राइजेज, शिव शक्ति फार्मा, श्री अशोक फार्मास्युटिकल्स, अपोलो फार्मेसी, शिव शक्ति मेडिकल, मीत इंटरप्राइजेज, विद्या फार्म और आरएन फार्मा के साथ मार्ग सॉफ्टवेयर के डिस्ट्रीब्यूटर आबिद अली शामिल हैं।

 

जुलाई 2026 में अमीनाबाद के एक कथित अवैध गोदाम से करीब 21 लाख रुपये की नकली दवाएं बरामद की गई थीं। इसी तरह आलमबाग मेट्रो स्टेशन के पास करीब 1.60 लाख रुपये की संदिग्ध दवाएं जब्त की गईं। बख्शी का तालाब क्षेत्र में भी अवैध भंडारण और परिवहन के मामले में कार्रवाई की गई।

 

आगरा में भी सामने आया बड़ा नेटवर्क

एफएसडीए के अभियान के दौरान आगरा में भी नकली, री-लेबल की गई और सरकारी सप्लाई की दवाओं के अवैध कारोबार के कई मामले सामने आए हैं। विभाग के अनुसार, कम्बूटोला, मुबारक महल, शू मार्केट और नवबिया मार्केट में की गई कार्रवाई में 15 से अधिक संचालकों के खिलाफ नौ एफआईआर दर्ज कराई गईं।

जांच में कथित तौर पर फर्जी बिलों के जरिए टोरेंट फार्मा की नकली Chymoral Forte और Aciloc जैसी दवाओं की बिक्री तथा ESI और सरकारी कोटे की दवाओं की कालाबाजारी का मामला सामने आया। इसके अलावा अस्पतालों और सरकारी संस्थानों के लिए भेजी गई दवाओं के मूल लेबल हटाकर नए लेबल और मनमानी एमआरपी लगाकर खुले बाजार में बेचने का मामला भी पकड़ा गया।

 

आगरा में एक अन्य कार्रवाई में Telma-H और Jardiance जैसी दवाओं की कथित री-लेबलिंग तथा निरस्त या कागजी फर्मों के जरिए करीब 1.88 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग का खुलासा हुआ।

 

विभाग के अनुसार, आगरा में अब तक 3.63 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अवैध, नकली तथा सरकारी/डिफेंस सप्लाई की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं। मई 2026 में एक अवैध गोदाम से करीब 2.5 करोड़ रुपये मूल्य की इंसुलिन, वैक्सीन और डिफेंस/ईएसआई

सप्लाई की दवाएं बिना आवश्यक कोल्ड-चेन के रखी मिली थीं। वहीं, करीब 50 लाख रुपये की नकली Oxalgin DP भी जब्त की गई थी।

 

दूसरे राज्यों तक फैले नेटवर्क की जांच

एफएसडीए अब नकली दवाओं के इस नेटवर्क के अंतरराज्यीय कनेक्शन की भी जांच कर रहा है। विभाग के मुताबिक लखनऊ के अमीनाबाद में एक अवैध गोदाम से बरामद नकली दवाओं के स्रोत की जांच राजस्थान तक पहुंची है। इस मामले में भूपेंद्र शर्मा और ट्रांसपोर्टर सतेन्द्र गुज्जर के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई गई है। देहरादून में कथित तौर पर विभिन्न ब्रांड की नकली दवाएं तैयार करने वाली एक अवैध निर्माण इकाई के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की गई है। मामले में राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा, विनय भटनागर, गौरव त्यागी और विनय चन्द्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।

 

लाइसेंस निरस्तीकरण और एजेंटों पर भी होगी कार्रवाई

विभाग ने नकली और काउंटरफिट दवाओं की सप्लाई चेन तोड़ने के लिए प्रदेशभर में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश डॉ. रोशन जैकब ने सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े कारोबारियों, स्थानीय थोक फर्मों और एजेंटों पर लगातार निगरानी रखने को कहा है। उनके अनुसार, जांच में दोषी पाए जाने वाले कारोबारियों के लाइसेंस निरस्त करने के साथ उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी। उद्देश्य नकली, अमानक, री-लेबल और अवैध दवाओं की सप्लाई चेन को उसके स्रोत तक पहुंचकर समाप्त करना है।