Cow Urine: अब दूध के साथ गोमूत्र से भी बंपर कमाई करेंगे किसान! यूपी के इन जिलों में ₹10 प्रति लीटर खरीद शुरू

Cow Urine Pilot Project: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले गो-संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल शुरू की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत बुलंदशहर में गोमूत्र की खरीद का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके तहत किसानों और पशुपालकों से 10 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदा जा रहा है। योगी सरकार ने बुलंदशहर में किसानों से गाय का मूत्र इकट्ठा करने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। उम्मीद है कि इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। साथ ही महिलाओं को कमाई का एक अतिरिक्त जरिया मिलेगा। साथ ही उन गायों की देखभाल में मदद मिलेगी जो अब दूध नहीं देतीं।

इकट्ठा किए गए गाय के मूत्र का इस्तेमाल खेती-बाड़ी के कामों में कच्चे माल के तौर पर किए जाने की उम्मीद है। ऐसी आशा है कि यह केमिकल वाले उत्पादों की जगह ले सकता है। अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो एक औपचारिक नीति बनाई जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि चुनाव से पहले इस प्रोजेक्ट को पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।

क्या है मकसद?

इस पहल का उद्देश्य गोमूत्र से कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार करना, पशुपालकों की अतिरिक्त आमदनी बढ़ाना, महिलाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना है। पायलट प्रोजेक्ट सफल रहने पर इसे प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी लागू करने की तैयारी है।

बुलंदशहर के 15 गांवों में शुरू हुआ मॉडल

यह पहल बुलंदशहर की स्याना तहसील के नरसेना गांव में डॉ. प्रवीण के नेतृत्व में एक किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से शुरू की गई है। फिलहाल आसपास के 15 गांवों को इस परियोजना से जोड़ा गया है। इन गांवों में गोमूत्र जमा करने के लिए स्थानीय कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं। इन केंद्रों के जरिए वर्तमान में करीब 500 लीटर गोमूत्र प्रतिदिन एकत्र किया जा रहा है। भविष्य में गोमूत्र की खरीद कीमत को बढ़ाकर 20 रुपये प्रति लीटर करने की भी योजना बताई गई है।

पशुपालकों को नहीं जाना पड़ेगा दूर

गोमूत्र संग्रह के लिए गांवों में 200 लीटर क्षमता वाले टैंक लगाए गए हैं। इससे पशुपालकों को गोमूत्र बेचने के लिए दूर स्थित किसी केंद्र तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। गांव में ही कलेक्शन और खरीद की व्यवस्था होने से इस योजना में अधिक से अधिक पशुपालकों को जोड़ने में मदद मिल रही है। खासकर ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

महिलाओं को हर लीटर पर 2 रुपये कमीशन

इस मॉडल की एक खास बात महिलाओं की आर्थिक भागीदारी है। गांवों में गोमूत्र संग्रह में मदद करने वाली महिलाओं को हर लीटर पर 2 रुपये कमीशन दिया जा रहा है। इससे महिलाओं के लिए गांव में रहते हुए अतिरिक्त आमदनी का एक नया जरिया तैयार हुआ है। इस पहल से करीब 300 महिलाओं को शुरुआत में जोड़ा गया है। उन्हें इस मॉडल में शेयरधारक भी बनाया गया है।

यानी महिलाएं सिर्फ गोमूत्र संग्रह करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें पूरे आर्थिक मॉडल से सीधे जोड़ा गया है। डॉ. प्रवीण ने न्यूज एजेंसी यूएनआई को बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल गोमूत्र की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है। बल्कि इसे महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जोड़ना है।

गोमूत्र से बनाए जाएंगे खेती में काम आने वाले उत्पाद

संग्रह किए गए गोमूत्र का इस्तेमाल कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार करने में किया जा रहा है। इसके लिए गोमूत्र में विभिन्न जड़ी-बूटियों को मिलाकर कृषि में इस्तेमाल होने वाले मिश्रण और उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों को स्थानीय समितियों और सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इस मॉडल का उद्देश्य खेती में इस्तेमाल होने वाले कुछ रासायनिक उत्पादों के विकल्प के रूप में गोमूत्र आधारित प्राकृतिक उत्पादों को बढ़ावा देना भी है।

दूध के साथ गोमूत्र से भी आमदनी

ग्रामीण इलाकों में पशुपालन से होने वाली आमदनी मुख्य रूप से दूध और डेयरी उत्पादों पर निर्भर रहती है। इस पहल के जरिए पशुपालकों की आय में गोमूत्र को भी एक अतिरिक्त आर्थिक संसाधन के रूप में जोड़ने की कोशिश की जा रही है। यानी पशुपालक परिवारों के लिए एक ही पशु से दूध के अलावा गोमूत्र के जरिए भी अतिरिक्त आय का रास्ता बनाया जा रहा है। विशेष रूप से पशुपालन से जुड़े परिवारों की महिलाओं के लिए यह पहल घर और गांव के आसपास रहते हुए अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकती है।

सहकारी समितियों के जरिए बाजार तक पहुंचेंगे उत्पाद

गोमूत्र से तैयार कृषि उत्पादों को केवल किसानों तक पहुंचाने पर ही जोर नहीं है, बल्कि इनके लिए स्थानीय बाजार तंत्र भी विकसित किया जा रहा है। तैयार उत्पादों को सहकारी समितियों और स्थानीय समितियों के जरिए किसानों और बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इससे गांव में संग्रह से लेकर उत्पाद तैयार करने और फिर उसकी बिक्री तक एक स्थानीय आर्थिक चक्र विकसित करने की कोशिश है।

गो-संरक्षण, रोजगार और प्राकृतिक खेती को जोड़ने की कोशिश

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, बुलंदशहर में शुरू किया गया मॉडल गो-संरक्षण, ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तीकरण और प्राकृतिक/जैविक खेती को एक साथ जोड़ने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है। इस मॉडल में गांवों से गोमूत्र इकट्ठा किया जाता है। फिर महिलाएं कलेक्शन प्रक्रिया से आमदनी हासिल करती हैं।

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इसके बाद गोमूत्र से कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार कर उन्हें सहकारी समितियों और स्थानीय समितियों के माध्यम से बाजार तक पहुंचाया जाता है। फिलहाल, यह योजना पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बुलंदशहर में चलाई जा रही है। इसके अनुभव और परिणामों के आधार पर इसे उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी विस्तार देने की तैयारी है।

यूपी में परिवहन प्रवर्तन को मिलेगी नई ताकत, डंपिंग यार्ड निर्माण को जल्द मिलेगी रफ्तार


लखनऊ, 5 अगस्त। योगी सरकार प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को और बेहतर व व्यवस्थित बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। इसी दिशा में मंडलीय मुख्यालयों पर डिटेंशन/डंपिंग यार्ड विकसित किए जा रहे हैं। प्रदेश के पांच जिलों में इन यार्ड के निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था सीएनडीएस को कुल 6.03 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई है।

 

परिवहन विभाग के मुताबिक बुलंदशहर, शामली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और बाराबंकी में डिटेंशन/डंपिंग यार्ड के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। बाराबंकी, पीलीभीत और शाहजहांपुर के लिए दूसरी और शेष किश्त के रूप में क्रमश: 1.62 करोड़, 1.44 करोड़ और 1.34 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसमें मिट्टी भराई के लिए 16.04 लाख रुपये भी शामिल हैं। स्वीकृत राशि को कार्यदायी संस्था के खाते में भेजने की कार्रवाई की जा रही है।

 

इसके साथ ही लखनऊ और औरैया में भी डिटेंशन यार्ड बनाने की दिशा में काम आगे बढ़ा है। इन दोनों जिलों में नि:शुल्क भूमि उपलब्ध होने की सूचना मिली है। लखनऊ के लिए 2.55 करोड़ रुपये और औरैया के लिए 4.07 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन दोनों मामलों में प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति जारी होने के साथ धनराशि कार्यदायी संस्था के खाते में भेजी जा चुकी है।

 

वहीं, उन्नाव और अलीगढ़ में भी डिटेंशन यार्ड के लिए नि:शुल्क भूमि उपलब्ध होने के बाद आगणन (आकलन) तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। आगणन का परीक्षण समिति द्वारा किया जा चुका है और इसे शासन को भेजने की तैयारी है।

 

अपर परिवहन आयुक्त प्रवर्तन केडी सिंह गौर ने बताया कि प्रदेश के कई जनपदों में पकड़े गए वाहनों को थानों में निरुद्ध करने की समस्या है। थानों में जगह न होने के कारण वाहनों को चालान करके छोड़ना पड़ता है। वाहनों को निरुद्ध करने के लिए सुरक्षित अभिरक्षा के लिए स्थान की अनुपलब्धता, प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई के लिए बड़ी बाधा है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित सड़क सुरक्षा कोष प्रबंधन समिति ने भी प्रथम चरण में प्रदेश के सभी मंडल मुख्यालय वाले जनपदों में डिटेंशन यार्ड बनाने पर बल दिया है और यह कार्य प्रगति पर है।

 

प्रवर्तन व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

योगी सरकार की इस पहल से परिवहन विभाग की प्रवर्तन कार्रवाई के दौरान रोके जाने वाले वाहनों को रखने के लिए बेहतर और व्यवस्थित जगह उपलब्ध होगी। डंपिंग यार्ड विकसित होने से वाहनों के रख-रखाव और प्रवर्तन व्यवस्था को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

 

वाहनों की निगरानी व रिकॉर्ड प्रबंधन होगा बेहतर

डिटेंशन/डंपिंग यार्ड बनने से परिवहन विभाग को प्रवर्तन कार्रवाई में सुविधा मिलेगी। जांच के दौरान रोके या जब्त किए गए वाहनों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रखने के लिए निर्धारित स्थान उपलब्ध होगा। इससे सड़कों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर जब्त वाहनों को खड़ा करने की समस्या कम होगी। वाहनों की निगरानी और रिकॉर्ड प्रबंधन भी बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। मंडलीय मुख्यालयों पर डंपिंग यार्ड विकसित होने से परिवहन विभाग की प्रवर्तन व्यवस्था मजबूत होगी और कार्रवाई को अधिक व्यवस्थित ढंग से संचालित करने में मदद मिलेगी।

कांवड़ यात्रा : ‘बोल बम’ का सनातन संदेश

-हरिशंकर मिश्र

Kanwar Yatra social harmony: किसी भी समाज में प्रेम, सहयोग और समरसता का वातावरण तब स्वतः निर्मित होता है, जब व्यक्ति अपने अहंकार का त्याग कर भक्ति का पथ अपनाता है। कांवड़ यात्रा इसी सत्य का सजीव प्रतीक है। मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने वाली सांस्कृतिक चेतना की यह एक विराट यात्रा है जिसमें जाति, वर्ग, भाषा, क्षेत्र, आर्थिक स्थिति और सामाजिक भेदभाव गौण हो जाते हैं। कांवड़ यात्रा हमारे लिए यह बड़ी सीख भी है कि सामाजिक समरसता किसी उपदेश से नहीं, बल्कि साझा आस्था, सहभागिता और परस्पर सम्मान से विकसित होती है और इसे वर्तमान में प्रत्यक्ष रूप में देखा भी जा सकता है जबकि एक साथ हजारों लोग कंधे पर गंगाजल लिए शिवालयों की ओर बढ़ रहे हैं।

 

विविधताओं के बीच एकात्मता का यह दृश्य इस सावन में जीवंत हो उठा है। प्रेम, सेवा, सह-अस्तित्व और सामाजिक समरसता पर टिकी हुई यह श्रद्धा यात्रा वह आध्यात्मिक शक्ति है जो लोगों को समाज और राष्ट्र के व्यापक हित से जोड़ती है। इस सामूहिक अनुशासन के पीछे एक साक्षा पहचान है-भोला। यानि वह संज्ञा जो मनुष्य को शिव से एकाकार करती है।

 

‘भोला’ कोई साधारण संबोधन नहीं है। यह बराबरी का संवाद है। कांवड़ उठाते ही श्रद्धालु का नाम, उसका कुल, उसकी आर्थिक हैसियत गौण हो जाती है। सड़क किनारे सेवा शिविर में एक करोड़पति व्यापारी का बेटा और एक दिहाड़ी मजदूर का बेटा एक ही पंगत में बैठकर बराबरी से भोजन करते हैं। यह सिर्फ भूख मिटाना भर नहीं हैं। यह सदियों पुरानी सामाजिक दूरियों को पाटने का एक मौन प्रयास है और आस्था की स्वाभाविक शक्ति से यह भाव जन्म लेता है।

 

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस सामाजिक आयाम को गहराई से समझा है और यही कारण है कि कांवड़ यात्रा को व्यवस्थागत समर्थन लगातार दिया जा रहा है। योगी सरकार की दृष्टि में यह यात्रा ऐसा सामाजिक अवसर है जहां समाज अपने भीतर की खाइयों को स्वयं पाटने का काम करता है। सड़कों की मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा शिविर, पेयजल और विश्राम स्थलों की व्यवस्था, यह सब एक तरह से सामाजिक समरसता के ढांचे को मजबूती देने का प्रयास है।

 

इस समरसता का एक और भावनात्मक पक्ष हिंदू-मुस्लिम सहभागिता के रूप में दिखाई देता है। बरेली, मेरठ, मुजफ्फरनगर और दिल्ली के कई कस्बों में कांवड़ बनाने का काम पीढ़ियों से मुस्लिम कारीगरों के हाथों में रहा है। बांस को मोड़ना, रंगीन कागज और कपड़े से सजावट करना, घंटियां टांकना, यह हुनर उन परिवारों की जीविका का हिस्सा है, जो साल भर सावन का इंतजार करते हैं। उम्मीद के इस भाव के साथ कि सावन आए और उनकी कारीगरी किसी शिवभक्त के कंधे की शोभा बने। यह भारतीय समाज की उस गहरी बुनावट का प्रमाण है, जहां श्रद्धा और आजीविका एक-दूसरे से जुड़ते हैं।

Kanwar Yatra UP 2026

यात्रा के दौरान सामाजिक समरसता के अन्य बिंदु भी देखने को मिलते हैं। कई कस्बों में मुस्लिम परिवार अपने घरों के बाहर कांवड़ियों के लिए पानी और शरबत की व्यवस्था करते हैं। कुछ जगहों पर मस्जिद परिसर में थके यात्रियों को विश्राम की अनुमति दी जाती है। यात्रा के दौरान उभरने वाली यह सहजता दिखाती है कि आस्था और मानवता, राजनीतिक विमर्श से कहीं गहरे स्तर पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। फिर भी कुछ लोग प्रश्न उठाते हैं कि क्या यह समरसता समाज में स्थायी छाप भी छोड़ जाती है? इसका उत्तर है कि मानव मन स्मृतियों से बनता है और हम अपनी यात्रा के अनुभव कभी नहीं भूलते। यात्रा के अनुभव समाज की सामूहिक चेतना में धीरे-धीरे जमा होते रहते हैं। सामाजिक बदलाव ऐसे ही संचित अनुभवों से आता है, थोड़ा धीमे-धीमे, लेकिन निश्चित रूप से।

 

आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो भी कांवड़ यात्रा हमें समरसता से ओतप्रोत करती है। शिव स्वयं समरसता के प्रतीक हैं। वह श्मशान में विराजते हैं और कैलाश पर भी, वह भस्म रमाते हैं और चंद्रमा भी धारण करते हैं, उनके गले में सर्प है और जटाओं से गंगा प्रवाहित होती है। शिव को विरोधाभासों का देवता कहा जाता है। वह कल्याण भी करते हैं और विध्वंस भी। कांवड़िया जब अपने कलश में गंगाजल भरता है, तब उसे अहसास होता है कि उसके भीतर की सारी भिन्नताएं उस जल में समाहित हो रही हैं। इसके बाद उसके शरीर के साथ ही उसकी आत्मा भी यात्रा करती है। वह आत्मा जो किसी जाति, किसी वर्ग, किसी संप्रदाय को नहीं जानती।

 

इसमें कोई संदेह नहीं कि शिक्षा, आर्थिक अवसर, न्यायसंगत नीतियां और निरंतर सामाजिक संवाद, यह सब मिलकर परिवर्तन लाते हैं, लेकिन कांवड़ यात्रा जैसे आयोजन वह भूमि तैयार करते हैं, जिस पर बड़े सामाजिक परिवर्तन के बीज बोए जा सकते हैं। योगी सरकार में इस यात्रा के लिए जो प्रतिबद्धता दिखाई देती है, उसके मूल में यही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके लिए सारी व्यवस्थाएं पूरी कर एक तरह से गहरा सामाजिक निवेश करते हैं, जो भविष्य की पीढ़ी के लिए आधार के रूप में कार्य करेगा। 

 

वस्तुतः समरसता एक ऐसा अनुभव है, जिसे जीना पड़ता है, बांटना पड़ता है, कंधे पर उठाना पड़ता है। यह यात्रा हर वर्ष याद दिलाती है कि विभाजन की रेखाएं मनुष्य की बनाई हुई हैं, जबकि साझी श्रद्धा, साझी प्यास, साझी थकान और साझा विश्राम, यह सब हमारी सामाजिक एकता के प्रमाण हैं। ‘बोल बम’ की गूंज केवल शिव का आह्वान नहीं, बल्कि उस समाज का आह्वान भी है जो अपने भीतर एकत्व, समरसता और आत्मबोध की चाह रखता है।

 

यह उद्घोष हमें स्मरण कराता है कि शिव अंतर्मन में विद्यमान उस चेतना के प्रतीक हैं जो भेदभाव से ऊपर उठकर समता, करुणा और लोकमंगल का मार्ग प्रशस्त करती है। अहंकार, स्वार्थ और विकारों का परित्याग करने को प्रेरित करती है। जब मन निर्मल हो, व्यवहार करुणामय हो और जीवन लोककल्याण के संकल्प से जुड़ जाए, तभी शिव की उपासना पूर्ण होती है। यही ‘बोल बम’ का सनातन संदेश है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं) 

 

यूपी में आबकारी विभाग का नया कीर्तिमान, 4 माह में 20,862 करोड़ से अधिक का राजस्व

Excise Revenue UP: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का आबकारी विभाग राजस्व संग्रह और अवैध शराब के विरुद्ध कार्रवाई, दोनों मोर्चों पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में विभाग ने 20,862.42 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

यह पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि की तुलना में 2,279.23 करोड़ रुपए यानी 12.27 प्रतिशत अधिक है। अकेले जुलाई महीने में विभाग ने 5,052.86 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त किया, जो पिछले वर्ष के जुलाई की तुलना में 16.04 प्रतिशत अधिक रहा।

71,278 करोड़ का राजस्व लक्ष्य निर्धारित

आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार की पारदर्शी नीतियों, प्रभावी निगरानी और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था के कारण विभाग लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में आबकारी विभाग के लिए 71,278 करोड़ रुपए का राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे हासिल करने के लिए विभाग पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि समाज को नशे के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखना भी है। 

819 आरोपियों को भेजा गया जेल

आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि राजस्व वृद्धि के साथ-साथ अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और तस्करी पर भी सख्त कार्रवाई जारी है। अप्रैल से जून 2026 के दौरान 29,294 अभियोग दर्ज कर अवैध मदिरा एवं मादक पदार्थ बरामद किए गए। इस दौरान 4,673 लोगों को गिरफ्तार किया गया, 819 आरोपियों को जेल भेजा गया तथा तस्करी में प्रयुक्त 30 वाहन जब्त किए गए। जुलाई में भी 9,769 अभियोग दर्ज कर 1,704 लोगों की गिरफ्तारी कर 271 को जेल भेजा गया।

24 पोते बने 95 वर्षीय दादी सोनदेवी के श्रवण कुमार, हरिद्वार में कराया गंगा स्नान

Soni devi kanwar Meerut

Yogi Government Kanwar Arrangements: सावन की कांवड़ यात्रा में जहां डीजे की धुन, भव्य कांवड़ और शिवभक्तों का उत्साह हर किसी को आकर्षित कर रहा है, वहीं सिवाया टोल प्लाजा पर सोमवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने लोगों की आंखें नम कर दीं। 95 वर्षीय सोनदेवी पालकी में हाथ जोड़कर भोलेनाथ का जयघोष कर रही थीं और उनके 24 पोते बारी-बारी से पालकी को अपने कंधों पर उठाकर आगे बढ़ रहे थे। यह दृश्य देखते ही राहगीरों के कदम थम गए। जिसने भी इस परिवार का समर्पण देखा, उसने इसे आज के दौर की सबसे खूबसूरत तस्वीर बताया। 

दादी की अधूरी इच्छा को बनाया अपना संकल्प

बुलंदशहर के हसनपुर जागीर निवासी सोनदेवी की वर्षों से इच्छा थी कि वह हरिद्वार जाकर मां गंगा में स्नान करें और कांवड़ यात्रा का हिस्सा बनें। उम्र के इस पड़ाव पर उनके लिए यह यात्रा संभव नहीं थी। ऐसे में परिवार के युवाओं ने उनकी इच्छा को अपना संकल्प बना लिया। 'महाकाल ग्रुप' के नाम से यात्रा कर रहे 24 पोतों ने दादी को हरिद्वार ले जाकर गंगास्नान कराया और अब पालकी में बैठाकर गांव तक लेकर जा रहे हैं। पोतों का कहना है कि योगी सरकार ने कांवड़ यात्रा में जिस तरह के इंतजाम किए हैं, उससे किसी को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।  

हर कुछ दूरी पर बदल जाते हैं कंधे

महाकाल ग्रुप के सदस्यों ने बताया कि टोली में शामिल सभी 24 युवक रिश्ते में सोनदेवी के पोते हैं। यात्रा के दौरान कोई एक व्यक्ति लगातार पालकी नहीं उठाता। कुछ दूरी तय करने के बाद दूसरे पोते कंधा संभाल लेते हैं, ताकि दादी को बिना किसी परेशानी के पूरी यात्रा कराई जा सके। परिवार का कहना है कि दादी की खुशी ही उनके लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद है।

सिवाया टोल पर लगा लोगों का जमावड़ा

जैसे ही कांवड़ यात्रा सिवाया टोल प्लाजा पहुंची, पालकी में बैठी सोनदेवी को देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई। कोई उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेने पहुंचा तो किसी ने इस भावुक पल को मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया। दादी पूरे रास्ते हाथ जोड़कर 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष करती रहीं, जबकि पोते पूरे उत्साह के साथ उनकी सेवा में जुटे रहे।

आस्था से बढ़कर बना संस्कारों का संदेश

कांवड़ यात्रा में यह दृश्य केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि भारतीय परिवारों के संस्कार और बुजुर्गों के प्रति सम्मान का भी प्रतीक बन गया। जहां एक ओर युवा कांवड़िए भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं, वहीं सोनदेवी के 24 पोतों ने यह साबित कर दिया कि माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा ही सबसे बड़ी भक्ति है। कांवड़ मार्ग पर यह अनोखा कारवां लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र होने के साथ-साथ प्रेरणा का संदेश भी देता नजर आया।

UPI यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट! 2000 रुपए से ऊपर के बिजनेस पेमेंट पर लग सकता है MDR चार्ज, जानिए किस पर पड़ेगा असर

MDR Charges on UPI payment

सरकार ने संसद में ऐसा बिल पेश किया है जिससे 2000 रुपए से ऊपर के UPI बिजनेस ट्रांजैक्शन पर 0.25% से 0.4% तक MDR चार्ज लगाने का रास्ता खुल सकता है। यह चार्ज व्यक्ति से व्यक्ति के ट्रांसफर पर यह लागू नहीं होगा। प्रस्तावित चार्ज केवल दुकानदारों और व्यापारियों पर लागू होगा, ग्राहकों की जेब से पैसे नहीं कटेंगे। ALSO READ: योगी सरकार का स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ा तोहफा, 2,023 रुपए करोड़ का प्रावधान, 5 मंडलों में खुलेंगे आयुष मेडिकल कॉलेज

 

निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किया बिल

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में पेश किए गए टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल में बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स पर इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड पर एमडीआर लगाने के प्रतिबंध को हटाने का प्रस्ताव रखा है। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि इसे कब लागू किया जाएगा, इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।

 

क्या है MDR? 

एमडीआर वह फीस है जो मर्चेंट यानी दुकानदार डिजिटल पेमेंट की सुविधा के लिए बैंकों, पेमेंट एग्रीगेटर्स और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक एमडीआर फ्रेमवर्क को रेगुलेट करता है। जनवरी 2020 से सरकार ने डिजिटल पेमेंट को तेजी से अपनाने के लिए यूपीआई और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर जीरो एमडीआर जरूरी कर दिया है। ALSO READ: Dabur के शहद, घी और तेल पर बड़ा एक्शन! FSSAI ने ‘100%’ दावे वाले कई प्रोडक्ट्स की बिक्री रोकी

 

बड़े व्यापारियों के लिए मुफ्त नहीं रहेगा UPI

यूपीआई भारत का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम बन चुका है, जहां हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन होते हैं। ऐसे में सिस्टम को मजबूत और टिकाऊ बनाए रखने के लिए सरकार और रेगुलेटर्स नए विकल्प तलाश रहे हैं। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो आम यूजर्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन बड़े व्यापारियों के लिए यूपीआई पेमेंट मुफ्त नहीं रहेगा।

 

95 फीसदी लेनदेन पर नहीं लगेगा MDR?

दावा किया जा रहा है कि 2000 की सीमा कुल यूपीआई लेनदेन का सिर्फ 5 फीसदी कवर करेगी, लेकिन इन लेनदेन का मूल्य कुल ट्रांजेक्शन वैल्यू का 65 फीसदी है। रोजमर्रा की खरीदारी जैसे दूध, सब्जी, किराना या ऑटो-टैक्सी के भुगतान पर इसका असर नहीं पड़ेगा। जुलाई में 23.7 अरब यूपीआई लेनदेन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 29.9 लाख करोड़ रुपए रही। कहा जा रहा है कि अगर लागू भी हुआ तो 95 फीसदी लेनदेन पर एमडीआर नहीं लगेगा। इसके अलावा, सभी बिजनेस इस फीस को ग्राहकों पर नहीं डालेंगे, जो बहुत छोटी राशि होगी।

UP News: राजा टोडरमल भूलेख प्रशिक्षण संस्थान बनेगा विश्वविद्यालय, योगी सरकार ने बजट में 10 करोड़ रुपए किए आवंटित

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योगी सरकार ने विधानसभा में पेश अनुपूरक बजट 2026-27 में राजा टोडरमल सर्वेक्षण एवं भूलेख प्रशिक्षण संस्थान, हरदोई को विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने इसके लिए 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता प्रस्तावित की है। इससे संस्थान के विस्तार और प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक रूप देने की राह मजबूत होगी।

 

हरदोई में स्थित राजा टोडरमल सर्वेक्षण एवं भूलेख प्रशिक्षण संस्थान उत्तर प्रदेश के राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां भूलेख, भूमि सर्वेक्षण और राजस्व कार्यों से जुड़े प्रशिक्षण दिए जाते हैं। अब अनुपूरक बजट में 10 करोड़ रुपये के प्रस्ताव से संस्थान को विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की योजना को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे भविष्य में राजस्व एवं भूलेख से जुड़े प्रशिक्षण को और व्यापक, आधुनिक व तकनीक आधारित बनाने का रास्ता खुल सकता है।

 

सेटेलाइट व कोऑर्डिनेट आधारित तकनीक का प्रयोग

संस्थान में राजस्व विभाग के कर्मचारियों को उनके काम से संबंधित व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके महत्व ऐसे समझा जा सकता है कि 2017 में यहां आधुनिक तकनीक से खेतों की सीमा और भूमि की पैमाइश के लिए सेटेलाइट व कोऑर्डिनेट आधारित तकनीक के प्रयोग की शुरुआत की गई। 

 

चंकबंदी अधिकारियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था

अनुपूरक बजट में चकबंदी अधिकारियों के प्राविधिक प्रावधानों के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता जताई है। इसके तहत करीब 1.46 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता प्रस्तावित की गई है। इस बजट से चकबंदी अधिकारियों के प्रशिक्षण, जरूरी कार्यों और विभागीय व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

UP News : योगी सरकार का स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ा तोहफा, 2,023 रुपए करोड़ का प्रावधान, 5 मंडलों में खुलेंगे आयुष मेडिकल कॉलेज

CM Yogi Adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रथम अनुपूरक बजट में आयुष और स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया है। सरकार ने आयुष विभाग के लिए 23.25 करोड़ रुपये और चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए 2,000.25 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 

 

पांच मंडलों में खुलेंगे नए आयुष मेडिकल कॉलेज

 

अनुपूरक बजट में आयुष क्षेत्र के आधुनिकीकरण और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार और आईआईटी कानपुर के सहयोग से गंगवाल स्कूल ऑफ साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी, आईआईटी कानपुर में आयुर्वेद अनुसंधान क्लीनिकल प्रमाणीकरण केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसके लिए 3.25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार ने प्रदेश के उन पांच मंडलों आगरा, बस्ती, गोंडा, मेरठ और मिर्जापुर में नए राजकीय एकीकृत आयुष चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय स्थापित करने का निर्णय लिया है, जहां अभी कोई आयुष चिकित्सा महाविद्यालय संचालित नहीं है। इसके लिए 23.25 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

 

स्वास्थ्य क्षेत्र को 2000.25 करोड़ रुपये का प्रावधान

 

योगी सरकार ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए 2000.25 करोड़ रुपये के अतिरिक्त प्रावधान में कई महत्वपूर्ण योजनाओं को शामिल किया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 1500 करोड़ रुपये का है। सरकार ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए भी बड़ा प्रावधान किया है। 

 

अनुपूरक बजट में 108 ई.एम.टी.एस 'स्वास्थ्य सेवा' के संचालन हेतु 200 करोड़ रुपये एवं 102 एम्बुलेंस के संचालन मद में भारत सरकार से प्राप्त अनुमोदन से अधिक की धनराशि का व्यवभार राज्य बजट से वहन किए जाने के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही प्रदेश के शहरी चिकित्सालयों में अग्निशमन व्यवस्था के लिए 96 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

 

चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक और सुलभ बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश में राज्य कैंसर मिशन की स्थापना, एसजीपीजीआई में क्वार्टनरी हेल्थ केयर सेंटर की स्थापना, ऑपरेशन थिएटर सुदृढ़ीकरण कार्यक्रम और स्मार्ट आईसीयू नेटवर्क विकसित करने की पहल की गई है। इसके साथ ही एकीकृत ट्रामा एवं इमरजेंसी नेटवर्क की स्थापना की जा रही है।

योगी सरकार ने अनुपूरक बजट में राजस्व विभाग के लिए खोला खजाना, विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार

yogi adityanath plantation drive on 12th july

UP Supplementary Budget: योगी सरकार ने विधानसभा में अनुपूरक बजट 2026-27 पेश करते हुए राजस्व विभाग और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। सरकार ने राजस्व विभाग के लिए अनुपूरक बजट में 1,014.11 करोड़ रुपए का प्रावधान प्रस्तावित किया है। इसके अंतर्गत राज्य आपदा मोचक निधि (एसडीएमएफ) के लिए 739 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है।

 

अनुपूरक बजट में संभल जनपद के मुख्यालय बहजोई में नवीन इंटीग्रेटेड कलेक्ट्रेट-कम-अनावासी भवन के निर्माण के लिए भी धनराशि का प्रावधान किया गया है। वहीं, वाराणसी में नवीन इंटीग्रेटेड कलेक्ट्रेट के अनावासी भवन के लिए 140.65 करोड़ रुपए की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे जिलों में प्रशासनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने और सरकारी कामकाज को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।

इंटीग्रेटेड आवासों के लिए व्यवस्था

सरकार ने संभल के बहजोई में इंटीग्रेटेड आवासों के निर्माण के साथ प्रदेश के मंडल, जनपद और तहसील स्तर पर आवासीय भवनों के नवनिर्माण, विस्तार, पुनर्निर्माण और सुदृढ़ीकरण पर भी जोर दिया है। इसके लिए 85 करोड़ रुपए की एकमुश्त बजट व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इस राशि का उपयोग आवश्यकतानुसार भूमि क्रय सहित विभिन्न कार्यों में किया जाएगा।

कर्मचारियों को बेहतर कार्यस्थल, लोगों को सेवाओं का लाभ

इस बजट से राजस्व प्रशासन का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा। संभल के बहजोई और वाराणसी में नए इंटीग्रेटेड कलेक्ट्रेट भवन बनने से अधिकारियों और कर्मचारियों को बेहतर कार्यस्थल मिल सकेगा व लोगों को भी सरकारी सेवाओं के लिए अधिक सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है। मंडल, जनपद और तहसील स्तर पर आवासीय भवनों के निर्माण, विस्तार और सुदृढ़ीकरण से कर्मचारियों की आवासीय सुविधा बेहतर होगी। भूमि खरीद के लिए बजट मिलने से जरूरी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। वहीं, एसडीएमएफ के लिए 739 करोड़ रुपए की व्यवस्था से आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों के लिए सरकार की क्षमता मजबूत होगी।

 

अनुपूरक बजट में समाज कल्याण विभाग को 1655 करोड़ की सौगात

UP Supplementary Budget: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के सामाजिक एवं शैक्षिक सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए अनुपूरक बजट में समाज कल्याण विभाग के लिए 1,655 करोड़ रुपए का अतिरिक्त प्रावधान किया है। सरकार का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को और प्रभावी बनाते हुए जरूरतमंदों तक समयबद्ध लाभ पहुंचाना है। मंगलवार को सदन में पेश हुए अनुपूरक बजट 2026-27 में सबसे बड़ा प्रावधान राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के लिए किया गया है। इसमें 1,500 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है, जिससे पात्र बुजुर्गों को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और उनकी सामाजिक सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

डॉ. आंबेडकर मूर्ति विकास योजना के लिए 407 करोड़ रुपए

योगी सरकार ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की स्मृतियों के संरक्षण और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डॉ. अंबेडकर मूर्ति विकास योजना के लिए 407 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। सामान्य वर्ग दशमोत्तर शुल्क प्रतिपूर्ति एवं छात्रवृत्ति योजना के लिए 155 करोड़ रुपए तथा मुख्यमंत्री मेधावी अनुसूचित जाति एवं जनजाति उच्च शिक्षा सहायता योजना के लिए 2 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। इन प्रावधानों से एक ओर बुजुर्गों को आर्थिक संबल मिलेगा, वहीं दूसरी ओर आर्थिक रूप से कमजोर और मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा जारी रखने में सहायता मिलेगी। सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और समावेशी विकास पर केंद्रित ये प्रावधान योगी सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को और मजबूती देने वाले माने जा रहे हैं।

अनुपूरक बजट से सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और समावेशी विकास को मिलेगी गति

अनुपूरक बजट में किए गए इन अतिरिक्त प्रावधानों से प्रदेश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। वृद्धावस्था पेंशन योजना के लिए अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध होने से पात्र लाभार्थियों को समय पर सहायता मिलेगी। वहीं छात्रवृत्ति एवं उच्च शिक्षा सहायता योजनाओं के लिए बढ़ाए गए बजट से आर्थिक रूप से कमजोर और मेधावी विद्यार्थियों की पढ़ाई को निरंतर समर्थन मिलेगा। डॉ. भीमराव आंबेडकर मूर्ति विकास योजना के लिए किए गए प्रावधान से सामाजिक समरसता और महापुरुषों की विरासत के संरक्षण से जुड़े कार्यों को भी गति मिलेगी। कुल मिलाकर अनुपूरक बजट 2026-27 सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और समावेशी विकास की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को नई मजबूती प्रदान करेगा।

भूजल जागरूकता के लिए 1.475 करोड़ रुपये का प्रावधान

योगी सरकार ने विधानसभा में वर्ष 2026-27 के लिए अनुपूरक बजट पेश किया है। इसमें नमामि गंगे व ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया गया है। विभाग के अनुपूरक बजट में करीब 1.475 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि प्रस्तावित की गई है। यह धनराशि लघु सिंचाई विभाग के भू-जल जन जागरूकता एवं प्रचार-प्रसार योजना के लिए रखी गई है। इसके तहत लोगों को भू-जल के महत्व, संरक्षण और इसके बेहतर उपयोग के प्रति जागरूक करने से जुड़े कार्य किए जाएंगे। 

 

जागरूकता से भूजल संरक्षण की योजना : योगी सरकार का यह प्रावधान प्रदेश में भू-जल संरक्षण को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। जागरूकता अभियानों के जरिए लोगों को भूजल के संरक्षण और उसके विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति प्रेरित किया जाएगा।