योगी सरकार का बड़ा कदम, 82000 से ज्यादा स्कूली वाहनों की हो रही निगरानी

योगी सरकार का बड़ा कदम, 82000 से ज्यादा स्कूली वाहनों की हो रही निगरानी

UP School Vehicles Safety Drive: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर स्कूली विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर प्रदेश में मिशन सेफ फ्यूचर के साथ ही कई अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके तहत उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग स्कूली वाहनों की फिटनेस जांच के साथ-साथ वाहन चालकों का चरित्र सत्यापन भी करा रहा है। मुख्यमंत्री ने हाल में स्कूली वाहनों की फिटनेस पर विशेष ध्यान देने और चालकों का अनिवार्य रूप से सत्यापन कराने के निर्देश दिए थे।

 

परिवहन विभाग के 13 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में फिलहाल 19,680 स्कूल हैं। इनमें 74,337 वाहन स्कूल के नाम से पंजीकृत हैं, जबकि 8,022 वाहन स्कूलों से अनुबंधित हैं। इस तरह प्रदेश में कुल 82,259 स्कूली वाहन हैं।

स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर फोकस

अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) केडी सिंह गौर ने बताया कि मिशन सेफ फ्यूचर समेत अन्य सभी अभियान के तहत परिवहन विभाग का जोर स्कूली वाहनों को फिट रखने और चालकों का सत्यापन कराने पर है। इसका उद्देश्य स्कूली बच्चों को सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों व चालकों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

जांच में 6,066 वाहन अनफिट मिले

विभिन्न अभियानों के दौरान प्रदेशभर में स्कूली वाहनों की जांच की गई। जांच में 6,066 स्कूली वाहन अनफिट पाए गए। इन वाहनों के खिलाफ नोटिस जारी करने की कार्रवाई की गई। वहीं प्रवर्तन टीमों ने 1,072 स्कूली वाहनों का चालान किया और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 356 वाहनों को बंद यानी सीज किया।

27,066 चालकों का चरित्र सत्यापन

अभियान के तहत अब तक 27,066 स्कूल वाहन चालकों का चरित्र सत्यापन कराया जा चुका है। परिवहन विभाग ने स्कूली वाहनों के चालकों की सुरक्षा जांच को लेकर सभी संबंधित स्कूलों को निर्देश दिए हैं।

सभी बोर्ड के स्कूलों को अहम निर्देश

परिवहन विभाग ने यूपी बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड, आईसीएसई बोर्ड, यूपी मदरसा शिक्षा बोर्ड व अन्य बोर्ड के स्कूलों को बस और वैन चालकों का पुलिस चरित्र सत्यापन और मेडिकल परीक्षण अनिवार्य रूप से कराने के सख्त निर्देश दिए हैं। विभाग की ओर से इसके लिए पत्र भी जारी किया गया है। इसमें संबंधित बोर्ड के अंतर्गत आने वाले स्कूलों में नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए कहा गया है।

उद्योगों को त्वरित बिजली कनेक्शन देने पर योगी सरकार का फोकस, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

उद्योगों को त्वरित बिजली कनेक्शन देने पर योगी सरकार का फोकस, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

CM Yogi Adityanath

उत्तर प्रदेश में उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को गति देने के लिए योगी सरकार ने विद्युत कनेक्शन प्रक्रिया को और तेज व पारदर्शी बनाने की दिशा में सख्त कदम उठाए हैं। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं उ.प्र. पावर कारपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने विद्युत व्यवस्था की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं।
 

उन्होंने कहा कि सरकार की उद्योगों एवं व्यापारिक गतिविधि को बढ़ावा देना प्रमुख प्राथमिकता है। इसलिये निवेश मित्र पोर्टल आदि पर कनेक्शन के आवेदनों का अतिशीघ्र निस्तारण होना चाहिए। 

 

लंबित मामलों के समाधान पर विशेष जोर

 

यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने कहा कि कनेक्शन देना हमारा काम है, इसमें विलंब ठीक नहीं है। अगर कहीं विलंब की शिकायत आएगी तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। विद्युत निगमों के कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि विद्युत कनेक्शन देने में आनाकानी या विलंब की शिकायत आने पर कार्रवाई के साथ जिम्मेदार अधिकारी की विजिलेंस जांच भी कराई जाएगी। झटपट एवं निवेश मित्र पोर्टल पर लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण पर विशेष जोर देते हुए अधिकारियों को आवेदनवार स्थिति की निगरानी करने तथा जहां आवश्यक हो, आवेदकों से तत्काल संपर्क कर लंबित मामलों का समाधान कराने को भी कहा है।

 

उपभोक्ता सेवाओं में सुधार के निर्देश

 

यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने बैठक में नगरीय, तहसील एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की स्थिति, फीडर मीटरों के आंकड़ों तथा वितरण व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मानकों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि फीडर स्तर के आंकड़ों का नियमित विश्लेषण करते हुए जहां भी कमियां सामने आएं, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करें।

साथ ही विद्युत बिलों में सुधार के लिए लगाए जा रहे शिविरों की प्रगति पर भी अधिकारियों से जानकारी ली। 

 

निर्देश दिए कि शिविरों के माध्यम से उपभोक्ताओं की बिल संबंधी शिकायतों का मौके पर अधिक से अधिक निस्तारण किया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। अधिक लाइन हानि वाले फीडरों एवं क्षेत्रों में चल रही कार्रवाई की जानकारी लेते हुए फीडरवार कार्य योजना बनाकर नियमित कार्यवाई करने के निर्देश दिए हैं।

 

*लाइन हानि कम करने और राजस्व बढ़ाने पर जोर*

 

वितरण निगमों में केंद्रीकृत सामग्री की निविदाओं, क्षतिग्रस्त वितरण परिवर्तकों की स्थिति तथा इनके लिए उत्तरदायी कार्मिकों के विरुद्ध की गई कार्रवाई की जानकारी ली। 100 केवीए से कम क्षमता वाले वितरण परिवर्तकों पर फ्यूज सेट लगाने की प्रगति में तेजी लाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व वृद्धि, लाइन हानियों में कमी, बेहतर बिलिंग, स्मार्ट मीटर की प्रभावी मॉनिटरिंग और उपभोक्ता सेवाओं में सुधार के लक्ष्य तभी पूरे होंगे जब प्रत्येक स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

 

उन्होंने अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों की नियमित निगरानी करते हुए परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनाने तथा उपभोक्ताओं को बेहतर, पारदर्शी एवं निर्बाध विद्युत सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। शक्ति भवन में हुई इस समीक्षा बैठक में कारपोरेशन के प्रबन्ध निदेशक नितीश कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अमिताभ बच्चन ने किया यूपी की ‘खाकी’ को सलाम, ‘खाकी का सितारा’ में दिखी पुलिस के जज्बे की पूरी कहानी

अमिताभ बच्चन ने किया यूपी की 'खाकी' को सलाम, ‘खाकी का सितारा’ में दिखी पुलिस के जज्बे की पूरी कहानी

up police

उत्तरप्रदेश पुलिस के पहले आधिकारिक एंथम ‘खाकी का सितारा’ का 6.5 मिनट का पूरा वीडियो यूट्यूब पर रिलीज हो गया है। महानायक अमिताभ बच्चन ने भी उत्तर प्रदेश पुलिस के पोस्ट को कोट ट्वीट करते हुए इस एंथम को अपने खास अंदाज में सलाम किया। अमिताभ बच्चन ने लिखा, 'कुछ सितारे आसमान में चमकते हैं… कुछ ख़ाकी पहनकर ज़मीन पर। ख़ाकी का सितारा।'

 

‘खाकी का सितारा’ सिर्फ एक म्यूजिक वीडियो नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस की जिम्मेदारियों और उसके कामकाज के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाने की कोशिश है। एंथम में कानून-व्यवस्था से लेकर महिला सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट, तकनीक, आपदा एवं राहत कार्य, जनसेवा और रोजमर्रा की पुलिसिंग तक खाकी के अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं।

 

खास बात यह है कि इस एंथम की शूटिंग एक-दो दिन में नहीं, बल्कि महाकुंभ 2025 से स्वतंत्रता दिवस 2026 तक अलग-अलग मौकों और परिस्थितियों में की गई। उत्तर प्रदेश पुलिस के इस इन-हाउस क्रिएटिव प्रोडक्शन को तैयार करने में एक वर्ष से अधिक का समय लगा। महाकुंभ की विशाल पुलिस व्यवस्था से लेकर अलग-अलग मौकों पर कानून-व्यवस्था संभालते पुलिसकर्मियों तक, कैमरे ने खाकी की ड्यूटी के कई पहलुओं को रिकॉर्ड किया।

 

दरअसल, उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में रही है। ऐसे में ‘खाकी का सितारा’ के जरिए पुलिस की उसी भूमिका को एक अलग अंदाज में पेश किया गया है। वीडियो में पुलिस को केवल कार्रवाई करने वाली एजेंसी के तौर पर नहीं, बल्कि संकट के समय सबसे पहले पहुंचने वाली और आम लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाली व्यवस्था के रूप में दिखाया गया है।

 

त्योहार हो या आपदा, भीड़ का दबाव हो या कानून-व्यवस्था की चुनौती- खाकी हर जगह मौजूद दिखाई देती है। यही इस एंथम का मूल संदेश है। वीडियो में वर्दी के पीछे के उस इंसान को भी दिखाने की कोशिश की गई है, जो अपने परिवार और निजी जीवन से दूर रहकर ड्यूटी करता है और कई बार बिना किसी पहचान या अपेक्षा के अपना कर्तव्य निभाता है।

 

इस एंथम को देश के जाने-माने कलाकारों ने अपनी आवाज और प्रतिभा दी है। इसमें अमिताभ बच्चन की प्रभावशाली आवाज, पद्मश्री शंकर महादेवन का स्वर और संगीत तथा जाने-माने कवि एवं गीतकार आलोक श्रीवास्तव के शब्द हैं। अभिनेता करण आनंद ने इसमें पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई है।

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14 अगस्त को लोक भवन में हुआ था लॉन्च

 

‘खाकी का सितारा’ का औपचारिक लॉन्च 14 अगस्त को लोक भवन, लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। इस मौके पर पद्मश्री शंकर महादेवन, पद्मश्री नाना पाटेकर, गीतकार आलोक श्रीवास्तव, अभिनेता करण आनंद सहित फिल्म और संगीत जगत से जुड़े कई कलाकार मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और पुलिसकर्मी भी शामिल हुए।

 

लॉन्च के दौरान शंकर महादेवन ने ‘खाकी का सितारा’ से जुड़ने को अपने जीवन के खास पलों में से एक बताया। उन्होंने इस एंथम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूरे उत्तर प्रदेश पुलिस परिवार को समर्पित किया। उन्होंने गीत की पंक्तियां “सुरक्षा आपकी, संकल्प हमारा” और “हम डटे रहे, हम खड़े रहे, चट्टानों जैसे अड़े रहे” सुनाते हुए कहा कि संगीत के जरिए पुलिस की सेवा, साहस और संकल्प को आवाज देना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा।

 

खाकी के कई रंग, एक ही संकल्प

 

‘खाकी का सितारा’ में पुलिस की सख्ती के साथ उसकी संवेदनशीलता को भी जगह दी गई है। कहीं कानून-व्यवस्था संभालते जवान नजर आते हैं, तो कहीं महिला सुरक्षा और जनसेवा में जुटी पुलिस दिखाई देती है। कहीं महाकुंभ जैसे विशाल आयोजन की जिम्मेदारी है, तो कहीं आपदा और राहत के बीच लोगों तक पहुंचती खाकी।

यानी यह एंथम सिर्फ पुलिस की वर्दी का गीत नहीं, बल्कि उस जिम्मेदारी की कहानी है जिसे उत्तर प्रदेश पुलिस हर दिन निभाती है। “सुरक्षा आपकी, संकल्प हमारा” के संदेश के साथ ‘खाकी का सितारा’ योगी सरकार के उस कानून-व्यवस्था मॉडल की भी तस्वीर पेश करता है, जिसमें पुलिस को अपराध नियंत्रण के साथ-साथ जनता की सुरक्षा, सेवा और भरोसे की जिम्मेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।

 

अमिताभ बच्चन के शब्दों में कहें तो कुछ सितारे आसमान में चमकते हैं और कुछ खाकी पहनकर जमीन पर- ‘खाकी का सितारा’ इसी जमीन पर चमकने वाली खाकी को समर्पित है।

गोरखपुर में राप्ती नदी में डूब रहे युवक के लिए फरिश्ता बने पीएसी जवान

गोरखपुर में राप्ती नदी में डूब रहे युवक के लिए फरिश्ता बने पीएसी जवान

उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए योगी सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के लिए प्रशासन को पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में राहत दलों की तैनाती, मोटरबोट समेत आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और जवानों को बचाव कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन तैयारियों का असर गोरखपुर में उस समय देखने को मिला, जब राप्ती नदी में डूबते एक युवक के लिए बाढ़ राहत दल के जवान फरिश्ता बनकर पहुंचे।

 

युवक ने नौसढ़ रामघाट से राप्ती नदी में छलांग लगा दी थी और देखते ही देखते गहरे पानी में डूबने लगा। मौके पर मौजूद 26वीं वाहिनी पीएसी के बाढ़ राहत दल ने बिना वक्त गंवाए मोटरबोट से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। जवानों की तत्परता, साहस और सूझबूझ से युवक को सकुशल नदी से बाहर निकाल लिया गया।

 

राप्ती नदी के रामघाट, नौसढ़ में शुक्रवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक युवक ने आत्महत्या के इरादे से नदी में छलांग लगा दी। गहरे पानी में डूब रहे युवक की जान बचाने के लिए मौके पर मौजूद 26वीं वाहिनी पीएसी, गोरखपुर के बाढ़ राहत दल ने बिना देर किए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

बाढ़ राहत का प्रशिक्षण के दौरान चलाया बचाव अभियान

26वीं वाहिनी पीएसी गोरखपुर के मुताबिक संतकबीरनगर के धनघटा निवासी उमेश कुमार ने करीब शाम छह बजे राप्ती नदी में छलांग लगाई। उस समय रामघाट पर पीएसी का बी दल बाढ़ राहत प्रशिक्षण और ड्यूटी पर तैनात था। आरक्षियों को बाढ़ राहत का प्रशिक्षण दिया जा रहा था। युवक को नदी में डूबता देख हेड कांस्टेबल महात्म प्रसाद ने तत्काल मोर्चा संभाला।

 

महात्म प्रसाद के नेतृत्व में टीम मोटरबोट लेकर तत्काल नदी में उतरी और डूब रहे युवक की तलाश शुरू की। टीम ने बेहद कम समय में युवक को सुरक्षित खोज निकाला। रेस्क्यू के बाद युवक को आवश्यक कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। अब उसकी स्थिति सामान्य है। इस साहसिक रेस्क्यू अभियान में हेड कांस्टेबल महात्म प्रसाद के साथ कांस्टेबल संजय कुमार गौतम, कृष्णचंद मौर्य, रमेश यादव, मनोज शुक्ला, जितेंद्र कुमार, रवि गौतम और धीरेंद्र गोंड शामिल रहे। बचाव दल की तत्परता और कर्तव्यनिष्ठा की दलनायक तथा थाना राजघाट प्रभारी ने भी सराहना की।

खरीफ में खाद की पर्याप्त उपलब्धता पर योगी सरकार का जोर

खरीफ में खाद की पर्याप्त उपलब्धता पर योगी सरकार का जोर

Kharif 2026 Fertilizer: योगी सरकार ने खरीफ-2026 अभियान के दौरान किसानों को उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और वितरण व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सहकारिता विभाग में खरीफ-2026 में उर्वरक की उपलब्धता एवं वितरण की समीक्षा बैठक में किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और कम अथवा शून्य स्टॉक वाली समितियों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए।

 

समीक्षा के अनुसार 12 अगस्त तक प्रदेश में यूरिया की उपलब्धता 5.02 लाख मीट्रिक टन और फास्फेटिक उर्वरक की उपलब्धता 4.04 लाख एलएमटी दर्ज की गई। खरीफ 2026 में अब तक 10.83 लाख एलएमटी उर्वरक का क्रमिक वितरण किया जा चुका है। पिछले खरीफ सत्र की तुलना में यूरिया के क्रमिक वितरण में 2.73 लाख एलएमटी तथा फास्फेटिक उर्वरक में 1.70 लाख एलएमटी स्टाक में उपलब्ध है।

 

बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी समितियों एवं वितरण केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित किया जाए। शून्य एवं अल्प स्टॉक वाली समितियों की विशेष समीक्षा करते हुए आवश्यकतानुसार तत्काल आपूर्ति किया जाए। प्रत्येक जनपद में एडीएम अथवा सीडीओ स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी नामित किया जाए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को उर्वरक की उपलब्धता में किसी प्रकार की कठिनाई न हो, इसके लिए आवश्यकता पड़ने पर उन्हें नजदीकी समिति से संबद्ध करने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

 

मुख्य सचिव ने सीडीओ को प्रतिदिन तथा जिलाधिकारी को साप्ताहिक स्तर पर उर्वरक उपलब्धता एवं वितरण की समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उर्वरक की ओवररेटिंग अथवा अनधिकृत टैगिंग से संबंधित शिकायत किसी भी स्थिति में प्राप्त नहीं होनी चाहिए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को खाद के लिए परेशानी न हो, इसके लिए उन्हें नजदीकी वैकल्पिक समितियों से जोड़ने की व्यवस्था भी करने को कहा गया है। जनपदों में उर्वरक के परिवहन के लिए पर्याप्त ट्रकों की उपलब्धता भी कराई गई है।  

किसानों की सुविधा के लिए नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय 

 योगी सरकार की किसान-केंद्रित व्यवस्था के तहत खाद की उपलब्धता पर जिला स्तर तक निगरानी बनाए रखने के साथ ही किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर विशेष जोर दिया जा रहा है। किसानों की सुविधा के लिए सहकारिता विभाग ने नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय रखा है। दस्तावेज में दिए गए नंबरों के अनुसार 0522-2289887 पर सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक तथा 1800-180-5551 पर संपर्क किया जा सकता है।

​यूपी के अंबेडकर नगर में IPS आशुतोष मिश्र की मां की हत्या, जेवरात लूटे, हाथ पर मिला इंजेक्शन का निशान

​यूपी के अंबेडकर नगर में IPS आशुतोष मिश्र की मां की हत्या, जेवरात लूटे, हाथ पर मिला इंजेक्शन का निशान

IPS Mishra mother Murder in UP

IPS Ashutosh Mishra Mother Murder in UP: ​उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर में बेखौफ बदमाशों ने एक दिल दहला देने वाली वारदात को अंजाम दिया है। लखनऊ में तैनात आईपीएस अधिकारी आशुतोष मिश्र की मां इंद्रा देवी की उनके ही घर में लूटपाट के दौरान बेरहमी से हत्या कर दी। बदमाशों ने वृद्धा के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया, शरीर से सोने के तमाम कीमती आभूषण निकाल लिए और कमरे का दरवाजा बाहर से बंद करके फरार हो गए।

​स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में हुई थीं शामिल

अम्बेडकर नगर के मालीपुर (धवरुआ मजरे रूढ़ा गांव) स्थित गजाधरनाथ मर्यादा इंटर कॉलेज में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम था। आईपीएस आशुतोष मिश्र अपनी मां इंद्रा देवी के साथ कार्यक्रम में शामिल होने गांव आए थे। शनिवार शाम 6 से 7 बजे के बीच आईपीएस मिश्र लखनऊ लौट गए, जबकि मां इंद्रा देवी स्कूल में चल रहे अधूरे वायरिंग के काम को पूरा कराने के लिए वहीं रुक गईं। ALSO READ: योगी सरकार का भूमाफियाओं पर बड़ा एक्शन, 2 लाख एकड़ जमीन कराई कब्जामुक्त, अब बनेगा यूपी का बड़ा ‘लैंडबैंक’

 

​आईपीएस आशुतोष मिश्र ने शनिवार रात 10 बजे लखनऊ से मां से फोन पर बात की थी। लेकिन रविवार सुबह 6 बजे जब उन्होंने दोबारा कॉल किया, तो कोई जवाब नहीं मिला। सुबह करीब 9 बजे जब काम करने वाली महिला पियारी देवी पहुंची, तो मुख्य दरवाजा बाहर से बंद था। अंदर जाने पर उसने देखा कि इंद्रा देवी हाल में बेड पर पड़ी थीं और उनके मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था। पड़ोसी राम नायक ने मौके पर पहुंचकर मुंह से कपड़ा निकाला, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं।

​शरीर पर इंजेक्शन और खरोंच के निशान

दोपहर करीब 1 बजे आईपीएस आशुतोष मिश्र गांव पहुंचे। इंद्रा देवी के शरीर से सोने की चेन, कंगन, कुंडल और अंगूठी जैसे भारी आभूषण गायब थे। जांच के दौरान उनके हाथ पर इंजेक्शन लगाने का निशान और शरीर पर खरोंच के निशान भी मिले हैं, जिससे आशंका जताई जा रही है कि हत्या से पहले उन्हें बेहोश करने या जहर देने की कोशिश की गई थी।

​शीर्ष अधिकारियों ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही एसपी प्राची सिंह, एएसपी डॉ. तेजवीर सिंह, सीओ अनूप सिंह और थानाध्यक्ष शशांक शुक्ल ने मौके पर पहुंचकर बारीकी से मुआयना किया। ​शाम करीब 6 बजे अयोध्या जोन के डीआईजी सोमेन बर्मा ने घटनास्थल और छत का गहन निरीक्षण किया और फॉरेंसिक टीमों को साक्ष्य जुटाने के सख्त निर्देश दिए। आईपीएस पुत्र आशुतोष मिश्र की तहरीर पर पुलिस ने लूट और हत्या की धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस प्रशासन ने दावा किया है कि बदमाशों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यूपी में सड़क सुरक्षा व शून्य मृत्युदर की दिशा में परिवहन विभाग ने उठाए कड़े कदम

यूपी में सड़क सुरक्षा व शून्य मृत्युदर की दिशा में परिवहन विभाग ने उठाए कड़े कदम

Transport Department in UP has taken stringent measures towards road safety and achieving a zero-fatality rate

– मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सड़क दुर्घटनाओं में शून्य मृत्युदर का लक्ष्य पाने का दे चुके हैं निर्देश

– ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों से पिछले वित्तीय वर्ष में वसूला 474 करोड़ का प्रशमन शुल्क

– चालू वित्तीय वर्ष के 4 महीने में 5 लाख चालान किए और 172 करोड़ रुपए लगाया जुर्माना

– परिवहन विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य यातायात नियमों के प्रति अनुशासन बढ़ाना

Uttar Pradesh News : उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ती वाहन संख्या के बीच सड़क सुरक्षा को लेकर योगी सरकार का फोकस लगातार बढ़ा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और शून्य मृत्यु दर की दिशा में विभिन्न अवसरों पर विभागों को जरूरी निर्देश देते रहे हैं। इसका असर सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों के पालन को लेकर परिवहन विभाग की प्रवर्तन कार्रवाई में भी दिखाई दे रहा है। बीते वित्तीय वर्ष में 474 करोड़ रुपए और चालू वित्तीय वर्ष में 172 करोड़ रुपएप्रशमन शुल्क (जुर्माना) वसूला गया है। इस अवधि में 20 लाख से ज्यादा चालान भी किए गए हैं।

 

अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) केडी सिंह गौर ने कहा कि सड़क पर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने और यातायात नियमों का पालन कराना परिवहन विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसी क्रम में विभाग के प्रवर्तन दल ने नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ प्रदेशभर में अभियान चलाया। कार्रवाई का उद्देश्य महज जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदार बनाना और सड़क सुरक्षा को मजबूत करना है।

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15 लाख चालान के जरिए 474 करोड़ का जुर्माना

वित्तीय वर्ष 2025-26 में परिवहन विभाग के प्रवर्तन दल ने प्रदेशभर में करीब 15 लाख चालान किए। इन कार्रवाई के माध्यम से 474 करोड़ रुपये का प्रशमन शुल्क वसूला गया। यह बड़े पैमाने पर की गई प्रवर्तन कार्रवाई को दर्शाता है, जिसके जरिए सड़क पर नियमों का पालन सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया।

 

इस वर्ष 5 लाख चालान काटे गए

वहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों में ही करीब 5 लाख चालान किए जा चुके हैं। इन कार्रवाई से 172 करोड़ रुपए का प्रशमन शुल्क प्राप्त हुआ है। इससे साफ है कि सड़क सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग की निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई लगातार जारी है।

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चालान से सड़क सुरक्षा पर असर

परिवहन विभाग के मुताबिक इस सख्ती का व्यापक उद्देश्य वाहन चालकों में यातायात नियमों के प्रति अनुशासन बढ़ाना है। नियमों का पालन होने से सड़क पर ओवरस्पीडिंग, बिना जरूरी दस्तावेज वाहन चलाने, क्षमता से अधिक सवारी या माल ढोने और अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन जैसी स्थितियों पर प्रभावी नियंत्रण में मदद मिलती है।

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सुरक्षित यातायात के लिए वाहन चालकों और आम नागरिकों की भी बराबर भागीदारी जरूरी है। परिवहन विभाग की प्रवर्तन कार्रवाई इसी जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का काम कर रही है। यही प्रयास प्रदेश को शून्य मृत्युदर के लक्ष्य की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

दिव्यांगजनों को डिजिटल सशक्त बना रही योगी सरकार, स्मार्टफोन-टैबलेट से बढ़ी पहुंच

दिव्यांगजनों को डिजिटल सशक्त बना रही योगी सरकार, स्मार्टफोन-टैबलेट से बढ़ी पहुंच

Yogi government is Divyangjan empowering persons with Divyangjan

– कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना बनी दिव्यांगजनों का मजबूत संबल

– ब्रेल किट और स्मार्ट केन से आसान हुआ दिव्यांगजनों का दैनिक जीवन

– जरूरत के मुताबिक ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर और अन्य उपकरण उपलब्ध

– 40 प्रतिशत या अधिक दिव्यांगता वाले पात्र लाभार्थियों को मिल रहा लाभ

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर, सम्मानजनक और सुविधाजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के माध्यम से पात्र दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप कृत्रिम अंग एवं विभिन्न सहायक उपकरण निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बदलते समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजना को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा गया है, जिसके तहत पात्र लाभार्थियों को स्मार्टफोन, टैबलेट और डेजी प्लेयर जैसे डिजिटल उपकरण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

 

स्मार्टफोन और टैबलेट से बढ़ी डिजिटल पहुंच

डिजिटल युग में शिक्षा, संचार, सूचना और सरकारी सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाने के उद्देश्य से योजना के अंतर्गत पात्र दिव्यांगजनों को स्मार्टफोन एवं टैबलेट जैसे डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे विशेष रूप से दिव्यांग छात्र-छात्राओं और युवाओं को ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल संचार, अध्ययन सामग्री तथा विभिन्न ऑनलाइन सरकारी सेवाओं एवं सूचनाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है।

 

वित्तीय वर्ष 2025-26 में 34,420 पात्र दिव्यांगजनों को विभिन्न कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरित किए गए हैं। डिजिटल उपकरणों को योजना से जोड़ने से दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण को तकनीक का नया आयाम मिला है।

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जरूरत के अनुसार मिल रहे अनेक सहायक उपकरण

कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के अंतर्गत दिव्यांगजनों को उनकी शारीरिक आवश्यकता एवं चिकित्सकीय संस्तुति के आधार पर विभिन्न प्रकार के उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। इनमें ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी, श्रवण यंत्र, एमआर किट, ब्रेल किट, एडीएल किट, वॉकर, रोटेटर और स्मार्ट केन सहित अनेक सहायक उपकरण शामिल हैं।

 

दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों के लिए ब्रेल किट एवं स्मार्ट केन जैसे उपकरण दैनिक जीवन को अधिक सुगम बनाने में सहायक हैं, जबकि गतिबाधित दिव्यांगजनों के लिए ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर एवं अन्य मोबिलिटी उपकरण आवागमन और स्वतंत्र गतिशीलता को बढ़ावा देते हैं। चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार विभिन्न प्रकार के कृत्रिम अंग भी उपलब्ध कराए जाते हैं। वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत पात्र दिव्यांगजनों को 15 हजार रुपये तक की लागत वाले निर्धारित कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।

 

योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित है पात्रता

कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना का संचालन विभागीय पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जा रहा है। योजना का लाभ सामान्यतः 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता प्रमाणित होने पर निर्धारित पात्रता के अनुसार दिया जाता है। संबंधित उपकरण की आवश्यकता के संबंध में चिकित्साधिकारी की संस्तुति भी आवश्यक होती है।

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पात्रता के लिए आवेदक को निर्धारित आय सीमा एवं अन्य शर्तों को पूरा करना होता है। सामान्यतः ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वार्षिक पारिवारिक आय सीमा 46,080 रुपये तथा शहरी क्षेत्रों के लिए 56,460 रुपये निर्धारित है। आवेदक को पिछले तीन वर्षों में उसी उद्देश्य के लिए समान उपकरण का लाभ नहीं मिला होना चाहिए।

नियमित शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए निर्धारित अवधि एक वर्ष है। आवेदन के लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, फोटो तथा संबंधित उपकरण के लिए चिकित्सकीय संस्तुति सहित आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने होते हैं।

 

ऑनलाइन प्रक्रिया से पारदर्शिता और सुगमता

योजना को ऑनलाइन किए जाने से पात्र दिव्यांगजनों के लिए आवेदन एवं योजना तक पहुंच अधिक सुगम हुई है। विभाग का प्रयास है कि पात्र लाभार्थियों का चिन्हांकन, सत्यापन एवं उपकरण वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी, समयबद्ध और सुगम तरीके से पूरी की जाए।

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दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना प्राथमिकता

दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के उपनिदेशक डॉ. अमित कुमार राय ने बताया कि विभाग का उद्देश्य केवल दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, रोजगार, डिजिटल सेवाओं और समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर बनाना है।

उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन, टैबलेट और डेजी प्लेयर जैसे डिजिटल उपकरणों के साथ-साथ मोबिलिटी एवं अन्य सहायक उपकरण दिव्यांगजनों की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उनके जीवन को अधिक सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

यूपी में दिखता है बदलाव, मजबूत नेतृत्व से कानून व्यवस्था में बढ़ा लोगों का भरोसा : नाना पाटेकर

यूपी में दिखता है बदलाव, मजबूत नेतृत्व से कानून व्यवस्था में बढ़ा लोगों का भरोसा : नाना पाटेकर

Actor Nana Patekar's statement regarding law and order situation in UP

– उत्तर प्रदेश पुलिस के थीम गीत ‘खाकी का सितारा’ के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे अभिनेता नाना पाटेकर

– नाना पाटेकर बोले- योगी सरकार ने लोगों की सुरक्षा को दी सर्वोच्च प्राथमिकता

– फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर ने की यूपी की कानून व्यवस्था की सराहना

– नाना पाटेकर बोले- 25 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में सुरक्षा आसान नहीं

Film actor Nana Patekar : प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था की जमकर सराहना की. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि इतने बड़े और विविधताओं से भरे प्रदेश में प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है और इसके सकारात्मक परिणाम आज स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस के थीम गीत ‘खाकी का सितारा’ के विमोचन कार्यक्रम में नाना पाटेकर ने कहा कि लगभग 25 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में केवल पुलिस बल की संख्या बढ़ाने से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि इसके लिए मजबूत नेतृत्व, स्पष्ट नीति और दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में पुलिस को आधुनिक संसाधन, नई तकनीक और आत्मविश्वास प्रदान किया गया है, जिससे कानून व्यवस्था मजबूत हुई है। नाना पाटेकर ने कहा कि पिछले कई दशकों में उन्होंने उत्तर प्रदेश में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है।

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उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है, प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार दिखाई देता है और सरकार की कार्यशैली में निर्णय लेने की स्पष्टता नजर आती है। उन्होंने कहा कि पुलिस जितनी आधुनिक होगी, नागरिक उतना सुरक्षित होगा और नागरिक जितना जागरूक होगा, अपराधियों के लिए काम करना उतना ही कठिन हो जाएगा।

 

नाना पाटेकर ने साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट जैसे बढ़ते खतरों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध आज एक वास्तविक चुनौती है और इसका शिकार कोई भी हो सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस, सीबीआई या किसी अन्य एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से डराने और पैसे मांगने का प्रयास करे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार तकनीक नहीं, बल्कि लोगों का डर होता है।

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उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा डिजिटल अरेस्ट के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए बनाई गई फिल्म की भी सराहना की और कहा कि यदि कलाकारों की भागीदारी से किसी परिवार की जीवनभर की कमाई बचाई जा सकती है या किसी बुजुर्ग को ठगी से बचाया जा सकता है, तो इससे बड़ा सामाजिक योगदान और कुछ नहीं हो सकता।

 

नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों और जवानों के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों के पास फिल्मों की तरह रीटेक का अवसर नहीं होता। उन्हें कठिन परिस्थितियों में तत्काल निर्णय लेने पड़ते हैं और यही उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तर प्रदेश पुलिस जनता के भरोसे को आगे भी बनाए रखेगी तथा प्रदेश को और अधिक सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।

यूपी के गो संरक्षण में अब जेन जी की एंट्री, गांव-गांव तैयार होंगे 10 हजार ‘गो मित्र’

यूपी के गो संरक्षण में अब जेन जी की एंट्री, गांव-गांव तैयार होंगे 10 हजार 'गो मित्र'

Gen Z enters fray for cow conservation in UP

– यूपी में बच्चों के मन में गो माता के प्रति प्रेम बढ़ाने के लिए गांव गांव चलेगा अभियान

– योगी सरकार नई पीढ़ी को बनाएगी गो संरक्षण के प्रति सजग

– तैयार किए जाएंगे मास्टर ट्रेनर, देंगे अन्य ट्रेनर को प्रशिक्षण

– गो संरक्षण में रुचि रखने वालों को दी जाएगी वरीयता

Cow Protection Campaign : योगी सरकार की प्रदेश में गो संरक्षण अभियान से अब नई पीढ़ी, खासकर जेन जी को भी जोड़ने की तैयारी है। गांव-गांव अभियान चलाकर युवाओं को गोवंश के संरक्षण, गो सेवा और इसके सामाजिक-आर्थिक महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके लिए करीब 10 हजार ‘गो मित्र’ तैयार किए जाएंगे। पहले मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षित होंगे और फिर उनके माध्यम से अन्य लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। गो संरक्षण और गो सेवा में पहले से रुचि रखने वाले लोगों को इसमें वरीयता दी जाएगी। इसके साथ ही योगी सरकार गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तीकरण, हरित ऊर्जा और रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भरता का मॉडल विकसित करने पर काम कर रही है।

 

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो संरक्षण को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल किया है। सरकार का प्रयास है कि गोवंश का संरक्षण केवल गो आश्रय स्थलों तक सीमित न रहे, बल्कि इससे रोजगार और ग्रामीण समृद्धि के नए अवसर भी पैदा हों। इसी सोच के तहत गोशालाओं को गोबर और गोमूत्र आधारित उत्पादों, प्राकृतिक खेती, बायोगैस और अन्य आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

 

बच्चों और युवाओं तक पहुंचेगा गो संरक्षण का संदेश

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि नई पहल में सबसे ज्यादा जोर बच्चों और युवाओं को गो संरक्षण से जोड़ने पर रहेगा। गांवों में अभियान चलाकर उन्हें देसी गोवंश, गो सेवा, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गाय के महत्व की जानकारी दी जाएगी। उद्देश्य यह है कि नई पीढ़ी गो संरक्षण के पर्यावरणीय और आर्थिक पहलुओं को भी समझे।

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अभियान को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने के लिए मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे। ये मास्टर ट्रेनर आगे अन्य लोगों को प्रशिक्षण देंगे। इस व्यवस्था के जरिए गांव-गांव प्रशिक्षित लोगों का नेटवर्क खड़ा करने की तैयारी है। गो संरक्षण में रुचि रखने वाले लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।

 

7,500 से अधिक गो आश्रय स्थलों में 12 लाख से ज्यादा गोवंश

उत्तर प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण और भरण-पोषण के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश में साढ़े सात हजार से अधिक गो आश्रय स्थल विकसित किए गए हैं, जिनमें 12 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। किसानों की फसलों को निराश्रित पशुओं से होने वाले नुकसान को कम करने के साथ गोवंश को सुरक्षित आश्रय देना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।

योगी सरकार ने गोवंश के भरण-पोषण के लिए दी जाने वाली सहायता राशि में भी वृद्धि की है। प्रति गोवंश प्रतिदिन मिलने वाली राशि को 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये किया गया है। वहीं अधिकांश गो आश्रय स्थलों पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था भी की गई है।

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1.15 लाख पशुपालकों को सौंपे गए करीब 1.85 लाख गोवंश

गोवंश संरक्षण में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन को भी आगे बढ़ाया गया है। इसके तहत करीब 1.15 लाख पशुपालकों को लगभग 1.85 लाख गोवंश सुपुर्द किए गए हैं। इससे गोवंश को परिवार आधारित संरक्षण मिलने के साथ पशुपालकों को भी इससे जुड़ने का अवसर मिला है।

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा पशुधन वाला राज्य है और दुग्ध उत्पादन में भी देश में पहले स्थान पर है। सरकार अब इस क्षमता को ग्रामीण आय और रोजगार बढ़ाने के बड़े माध्यम के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है।

 

गोशाला से गो आधारित उद्योग तक बढ़े कदम

सरकार की रणनीति गोशालाओं को धीरे-धीरे आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में गोबर से गो-काष्ठ, गो-पेंट, वर्मीकम्पोस्ट, धूपबत्ती, अगरबत्ती, गमले और दीपक जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ पंचगव्य, घनामृत और जीवामृत जैसे उत्पादों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

इन गतिविधियों में महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाई जा रही है। इससे महिलाओं के लिए गांव में ही स्वरोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। जो गोबर पहले सामान्य अपशिष्ट के रूप में देखा जाता था, वही अब खाद, ऊर्जा और विभिन्न उत्पादों के जरिए आय का साधन बन रहा है।

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हर जिले की गोशालाओं का होगा मूल्यांकन

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने प्रदेश की गोशालाओं की क्षमता का व्यापक मूल्यांकन करने की पहल की है। इसके पीछे उद्देश्य अलग-अलग जिलों की स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार गो-आधारित आर्थिक गतिविधियां विकसित करना है।

 

योजना है कि किसी जिले में गोबर से बायोगैस की संभावना बेहतर है तो वहां उस पर जोर दिया जाए, जबकि दूसरे जिले में जैविक खाद, गो-काष्ठ या गोमूत्र आधारित उत्पादों की इकाइयां विकसित की जाएं। सरकार का लक्ष्य गो संरक्षण को स्थानीय रोजगार से जोड़ना और गांवों में आय के नए स्रोत तैयार करना है।