Mohan Bhagwat: ‘सिर्फ सत्ता बदलने से समस्याएं खत्म नहीं होतीं’, फ्रांस-बांग्लादेश के हालात का जिक्र कर बोले मोहन भागवत

Mohan Bhagwat: देश में हाल के दिनों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि “भारत को कमजोर करने” की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इन कोशिशों को “कुछ ऐसे तत्वों का समर्थन मिल रहा है, जो अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं से प्रेरित हैं।”

RSS के विजयादशमी समारोह में, फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल में चल रही अशांति की ओर इशारा करते हुए RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, “कुछ पश्चिमी ताकतें समाजों को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं। फ्रांस और अल्बानिया में जो हो रहा है, उसे देखिए; साथ ही बांग्लादेश और नेपाल के घटनाक्रमों पर भी नजर डालिए। बाहरी प्रभाव इस तरह की अशांति को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसमें सत्ता परिवर्तन की बातें भी शामिल हैं। लेकिन, केवल सत्ता परिवर्तन से किसी देश की समस्याएं हल नहीं हो जातीं।”

भागवत ने आगे कहा, “भारत और संघ को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं। पिछले एक दशक में, भारत ने अनुशासित तरीके से प्रगति की है, और कुछ ऐसी ताकतें हैं जो इस प्रगति में बाधा डालना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी कोशिशों को कुछ ऐसे तत्वों का साथ मिल रहा है, जो अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं से प्रेरित हैं।”

भागवत ने आरोप लगाया कि दुनिया भर में इस तरह की गतिविधियां चलाई जाती हैं, ताकि अपने स्वार्थ साधने वाले लोग और उनके “मोहरे” अपना दबदबा बनाए रखें। उन्होंने कहा कि भारत की तरक्की इन कोशिशों के आड़े आती है।

उन्होंने कहा कि “असली समस्या यह है कि समाज को इन चुनौतियों को समझने की जरूरत है। लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन एक अहम हिस्सा हैं, लेकिन विरोध का मकसद समस्याओं का समाधान खोजना होना चाहिए, न कि समाज में और ज्यादा बंटवारा पैदा करना।”

बता दें कि RSS प्रमुख की यह टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार की नियुक्ति में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच आई है।

भागवत ने की युवाओं की तारीफ

अपने संबोधन के दौरान भागवत ने देश और दुनिया के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का श्रेय भारत की युवा पीढ़ी को दिया। उन्होंने कहा कि समाज के भीतर हुए इस प्रयास ने इन ताकतों के कथित मंसूबों को नाकाम कर दिया है।

एक विकासशील देश में विरोध-प्रदर्शनों और आंदोलनों के बारे में बात करते हुए, RSS प्रमुख ने कहा कि समस्याएं बनी रहेंगी क्योंकि भारत अभी पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “अगर समस्याएं हैं, तो आंदोलन भी होंगे। लोकतंत्र में आंदोलन तो होंगे ही।”

मोहन भागवत ने हाल ही में हुई ‘फ्लाईदुबई’ (Flydubai) घटना का भी जिक्र किया, उन्होंने कहा, “RSS हिंदू चेतना को जगाने और पूरे समाज को एक सुसंगठित और मजबूत समाज के रूप में ढालने का काम कर रहा है… इन्हीं मूल्यों ने कैप्टन स्मित मच्छार को वह करने के लिए प्रेरित किया, जो उन्होंने किया…”

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मोदी, भागवत पर राहुल का हमला

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ अपनी बातचीत का एक वीडियो शनिवार को जारी किया। इसमें छात्रों से बात करते हुए राहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस के ऊपर तीखा हमला किया। राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, इनका लोकतंत्र मे विश्वास नहीं है।

इस वीडियो में राहुल छात्रों से कह रहे हैं, ‘ऊपर बैठे लोगों में से अधिकांश डेमोक्रेसी में विश्वास नहीं करते। प्रधानमंत्री, मोहन भागवत, आरएसएस के लोग डेमोक्रेसी में विश्वास नहीं करते’। उन्होंने देश के संभ्रांत वर्ग पर भी निशाना साथा और कहा, ‘एलीट वर्ग के लोग डेमोक्रेसी में विश्वास नहीं करते। शिक्षा का अनप्राइवेटाइज सिस्टम डेमोक्रेसी का सॉलिड प्रोटेक्टर है’।

इस वीडियो में राहुल ने उन प्रदर्शनकारी छात्रों से बात की, जो पुलिस की कार्रवाई का शिकार हुए थे। राहुल ने वीडियो के साथ एक पोस्ट भी लिखी है, जिसमें उन्होंने कहा है, ‘यौन उत्पीड़न, कपड़े खींचना और प्राइवेट पार्ट्स पर हमला, लोकतंत्र के लिए आवाज उठाने वाले छात्रों और महिलाओं के खिलाफ दिल्ली पुलिस की बर्बरता ने शर्मनाक हदें पार कर दी हैं’। इस वीडियो में प्रदर्शनकारी छात्र और छात्राओं ने अपना अनुभव सुनाया है। उन्होंने बताया है कि पुलिस ने उनके ऊपर किस तरह से हमला किया। एक छात्रा ने पुलिसकर्मियों द्वारा पिन चुभोने के आरोप भी लगाए।

आयोग और भाजपा पर राहुल का हमला

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ के दौरान संसद मार्ग पर रोके जाने के बाद चुनाव आयोग के साथ साथ केंद्र सरकार और भाजपा पर भी जोरदार हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी करने में भाजपा की मदद की है। राहुल ने यह भी कहा कि भाजपा, चुनाव आयोग और आरएसएस ने देश में लोकतंत्र को खत्म कर दिया है। राहुल कई घंटे तक धरने पर भी बैठे रहे।

राहुल ने कहा, ‘तीन सौ लोकसभा और राज्यसभा के सांसद आए थे। हम चाहते थे ज्ञानेश कुमार और उनके दो चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे। पुलिस ने हमें रोका। चुनाव आयोग से 50 गज दूर बैठाकर रखा है हमें जाने नहीं दे रहे हैं। तीन सौ सांसद ज्ञानेश कुमार से मिलना चाहते हैं। ज्ञानेश कुमार डरे हुए हैं। अगर जनप्रतिनिधियों से चुनाव आयोग नहीं मिलेगा तो लोकतंत्र का क्या मतलब है’।

एक सवाल के जवाब में राहुल ने कहा, ‘मैं लोकतंत्र बचाने यहां खड़ा हूं। अमित शाह, नरेंद्र मोदी, ज्ञानेश कुमार और मोहन भागवत ने देश के लोकतंत्र को खत्म कर दिया है। देश के युवा ये बात जानते हैं’। उन्होंने आगे कहा, ‘चुनाव को मोदी, शाह ने हाइजैक किया है और ज्ञानेश कुमार ने उनकी मदद की है। यहां पुलिस वाले भी यही कर रहे हैं। इनमें से कोई भी बचकर नहीं जाएगा। जो इन्होंने देश के साथ किया है, वह देशद्रोह है’।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह आंदोलन देश के युवाओं, महिलाओं, किसानों और गरीबों के अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सत्ता में बने रहने के लिए लोगों के अधिकार छीन रही है और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है। खड़गे ने कहा कि जिस तरह से सत्ता हासिल की गई, वह उचित नहीं था और इसे तुरंत खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर देश में नौ राज्यों की विधानसभाएं भंग की जा सकती हैं, तो यहां की अवैध व्यवस्था भी खत्म होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता इस मुद्दे पर चुप नहीं रहेगी।

विपक्ष के इस प्रदर्शन में शामिल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, ‘अगर ज्ञानेश कुमार निष्पक्ष हैं तो उन्हें हमारी बात सुननी चाहिए। यह लोकतंत्र बचाने की बात है। पुलिस को बच्चों के साथ और प्रदर्शनकारियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए’।

मोहन भागवत के मुताबिक किसका उदय होगा?

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने पिछले दिनों युवा धर्म संसद कार्यक्रम में अपने भाषण में कहा कि जिसका उदय होता है उसका अस्त निश्चित है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई समझता है कि हमेशा सब कुछ उसके हिसाब से ही होगा तो ऐसा नहीं होता है। उनके इस बयान के बाद एक कयास तो इस बात का लगाया जा रहा है कि उन्होंने किसके अस्त होने की बात कही है। लेकिन साथ ही यह चर्चा भी शुरू हो गई है, अगर उनके हिसाब से किसी का अस्त होना है तो उसके बाद किसका उदय होगा? ध्यान रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्र 76 साल है और पार्टी के अंदर उनके उत्तराधिकारी की चर्चा शुरू हो गई है।

इसी संदर्भ में यह सवाल पूछा जा रहा है कि जिस तरह से नरेंद्र मोदी का उदय हुआ उनके बाद उस तरह का उदय किसका होगा? अमित शाह सबसे प्रबल दावेदार हैं और ऐसी जानकारी देने वाले कई लोग हैं, जिनका कहना है कि वे उप प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं और इस वजह से मंत्रिमंडल में फेरबदल टल रही है। उनके अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं, जो अगर अगले साल मार्च में फिर जीतते हैं तो बड़े दावेदार होंगे। इनके अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस का नाम भी चर्चा में है। वे संघ की पसंद बताए जा रहे हैं। फिर सवाल है कि बरसों से संघ की सबसे बड़ी पसंद रहे नितिन गडकरी का क्या होगा? मोहन भागवत और संघ की दुविधा गडकरी और फड़नवीस की होगी।

भागवत का अस्त होने वाला इशारा किसके

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने युवा धर्म संसद में फिर ऐसी बात कही है, जिसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं और कयास लगाया जा रहा है कि वे किसकी ओर इशार कर रहे थे। उन्होंने अहंकार को लेकर कहा कि जिसका उदय हुआ है उसका अस्त भी होगा। इसके लिए उन्होंने सूर्य का उदाहरण दिया। भागवत ने कहा कि अगर कोई समझता है कि हर समय उसकी ही सत्ता रहेगी और सब कुछ उसके हिसाब से ही होगा तो ऐसा नहीं होता है। उनके इस बयान के बाद अटकलों का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि उनका इशारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर है।

यह भी कहा जा रहा है कि संघ प्रमुख ने मोदी का जन्मदिन बहुत व्यापक पैमाने पर मनाने और आम लोगों से दीये जलवाए जाने की घटना के संदर्भ में यह बात कही। हो सकता है कि उन्होंने मोदी को लक्ष्य करके य़ह बात कही हो। लेकिन उनका ट्रैक रिकॉर्ड ऐसे हर बयान के बाद मोदी और उनकी सरकार के समर्थन में बोलने का भी रहा है। तभी ऐसा लग रहा है कि कहीं दीये जलवाने और इतने बड़े पैमाने पर जन्मदिन मनाने के लिए हो रही आलोचना के बीच मोहन भागवत ने सेफ्टी वाल्व की भूमिका निभाने के लिए तो यह बयान नहीं दिया है? ऐसा हो सकता है कि उनके बयान के बाद वो तमाम लोग आलोचना बंद कर दें, जो पहले सवाल उठा रहे थे।

छह लोगों का सिस्टम पर कब्जा

इंदौर। राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में नेता, उद्योगपति और अधिकारी के नेक्सस को सिस्टम बताते हुए कहा कि भारत के सिस्टम पर छह लोगों का कब्जा है। उन्होंने मंच पर बड़ी स्क्रीन के ऊपर छह लोगों की तस्वीर दिखाई और दावा किया कि ये छह लोग देश का सिस्टम चला रहे हैं। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल और दो कारोबारी गौतम अडानी व मुकेश अंबानी की तस्वीर थी।

कार्यक्रम के दौरान तीन छात्रों ने राहुल से सिस्टम की बात की। इसका हवाला देते हुए राहुल ने स्क्रीन पर स्लाइड दिखाई और कहा, तीन फ्रेंड्स ने सिस्टम की बात की। सिस्टम क्या है, सिस्टम में कई लेयर हैं, टॉप लेवल पर छह लोग बैठे हैं। इसे मोदी चलाते हैं’। उन्होंने सबके बारे में बताते हुए कहा, ‘धमकाने का काम, उन्हें मारने का काम, पैलेट गन मारने का काम शाह करते हैं। अजित डोवाल कहते हैं कि देश को कंट्रोल करना है तो पांच सौ लोगों को कंट्रोल करने की जरूरत है। ये देश के कम्युनिकेशन पर कब्जा किए हैं। ये फोन टैपिंग कराते हैं, ये मोदी व शाह को सूचना देते हैं। आपके फोन के अंदर डोवाल बैठे हैं’।

बाकी तीन लोगों के बारे में राहुल ने कहा, ‘बीच में भागवत जी है जो विचारधारा की बात करते हैं, जिनके संगठन को हजारों करोड़ मिलते हैं। वहीं दूसरी तरफ अंबानी और अडानी हैं। ये लोग फाइनेंस करते हैं। पैसा घुमाकर भाजपा को दिया जाता है’। उन्होंने आगे कहा, ‘इस लेयर के नीचे हर संस्था को कैप्चर करके रखा है। इसमें मीडिया, एंटरनटेनमेंट, न्याय सभी में एक एक आदमी बिठा रखा है। जैसे देश में कई क्रिकेटर्स है लेकिन सिस्टम ने शाह के बेटे को क्रिकेट का ठेका दे दिया है। यहां डेमोक्रेसी की बात होती है लेकिन सिस्टम अपने आदमी को बिठा देता है’।

यूसीसी का इतना घुमावदार रास्ता क्यों?

भारतीय जनता पार्टी के गठन के बाद यानी छह अप्रैल 1980 से लेकर जितने भी चुनाव हुए उनमें तीन वादे जरूर होते थे। पहला जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करना। दूसरा, अयोध्या में राममंदिर का निर्माण और तीसरा, समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी। पहले दो वादे भाजपा ने पूरे कर दिए। 2019 के अगस्त में अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35 हटा दिया गया और इतना ही नहीं जम्मू कश्मीर का विभाजन करके दो राज्य बनाए गए और उसे केंद्र शासित प्रदेश भी बना दिया गया। अगस्त 2020 में राम जन्मभूमि मंदिर का शिलान्यास हुआ और जनवरी 2024 में उसका उद्घाटन भी हो गया। ये दोनों काम भाजपा ने डंके की चोट पर किए। राम मंदिर की जमीन का फैसला भले सुप्रीम कोर्ट ने किया लेकिन उसके बाद शिलान्यास और उद्घाटन दोनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत भी उनके साथ रहे। तभी सवाल है कि तीसरे वादे यानी यूसीसी लागू करने के लिए भाजपा की केंद्र सरकार सीधा रास्ता पकड़ने की बजाय क्यों इतना घुमावदार रास्ता ले रही है?

सरकार को जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने चुनौती दी है कि वह सीधे संसद से कानून बना कर पूरे देश में एक कानून लागू करे। पहले बात भी ऐसी ही हुई थी और वादा भी ऐसा ही था कि पूरे देश में एक कानून होना चाहिए। लेकिन पूरे देश के लिए एक समान नागरिक कानून बनाने की बजाय केंद्र सरकार ने राज्यों का रास्ता पकड़ा है। स्टेट रूट से वह एक समान कानून बनवा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुद कानून बनाने के लिए संसद में बिल पेश करने की बजाय ऐलान किया है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले देश के 21 उन राज्यों में यूसीसी लागू हो जाएगी, जहां भाजपा और एनडीए की सरकार है। हालांकि यह सवाल अपनी जगह है कि अगले दो साल में 14 राज्यों में चुनाव होने वाले हैं और अगर भाजपा अपने शासन वाले कुछ राज्यों में हार गई तो क्या होगा या एनडीए के सहयोगी तैयार नहीं हुए तो क्या होगा?

बड़ा सवाल घुमावदार रास्ता पकड़ने को लेकर है। जानकार सूत्रों का कहना है कि सरकार की तैयारी केंद्रीय कानून बनाने की ही थी। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव नतीजों से सारा मामला बिगाड़ दिया। बताया जा रहा है कि उत्तराखंड में जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कमेटी बनवा कर प्रायोगिक तौर पर इसे लागू करना था और उसके बाद उस कमेटी की सिफारिशों पर बने कानून को पूरे देश में लागू करने की योजना थी। लेकिन संसद में सरकार के पास दो तिहाई बहुमत नहीं है। ऊपर से महिला आरक्षण विधेयक के मामले में सरकार एक बार मात खा चुकी है। सरकार ने विशेष सत्र बुला कर इस कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा था लेकिन सरकार का बिल पास नहीं हो सका। हालांकि समान नागरिक संहिता के मामले में केंद्र सरकार ने राज्यों का रास्ता पहले ही पकड़ लिया था। जून 2024 के बाद ही भाजपा शासित राज्यों को कह दिया गया था कि वे समान नागरिक कानून का मसौदा तैयार कराएं। इसके लिए उत्तराखंड का कानून टेम्पलेट बना। उसमें थोड़ा बहुत बदलाव करके अलग अलग राज्यों में लागू किया जा रहा है। गुजरात, मध्य प्रदेश और असम ने विधानसभा से विधेयक पास करा लिया है। जल्दी ही अन्य राज्यों में भी इसे पास कराया जाएगा। हालांकि गोवा में खुद भाजपा ने इस बिल पर ब्रेक लगा दिया। सारी तैयारी के बावजूद फैसला किया गया कि चुनाव के बाद बिल पास कराया जाएगा।

यूजीसी का दिशानिर्देश कानून नहीं बनेगा

यह बात राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ यानी आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने कही है। वे एक जैन धर्मगुरू से मिलने गए थे, जहां उनसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी के समानता वाले दिशानिर्देशों के बारे में पूछा गया था। उन्होंने दो टूक अंदाज में कहा कि यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता बनाने का जो दिशानिर्देश जारी किया है वह अभी कानून नहीं बना है और कभी भी कानून नहीं बनेगा। उनका यह बयान बहुत बड़ा है और इससे दो सवाल उठते हैं। पहला सवाल तो यह है कि क्या मोहन भागवत की सरकार में कोई ऑथोरिटी है, जो वे कह रहे हैं कि यह कभी कानून नहीं बनेगा या सरकार के किसी व्यक्ति ने उनसे ऐसी बात कही है? अनौपचारिक रूप से सब जानते हैं कि भाजपा के ऊपर संघ का क्या असर है। लेकिन क्या औपचारिक रूप से संघ प्रमुख इस तरह की घोषणा कर सकते हैं? दूसरा सवाल यह है कि अभी यह ऐलान करने की जरुरत क्यों पड़ी है?

गौरतलब है कि यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों के कैम्पस में कथित तौर पर समानता बहाल करने के लिए इस साल फरवरी में एक नया दिशानिर्देश जारी किया था। उसे लेकर बहुत तीव्र विरोध हुआ क्योंकि उससे ज्यादा असमानता बनाने वाला और भेदभाव को बढ़ाने वाला सरकारी निर्देश आज तक आजाद भारत में नहीं जारी हुआ था। वह दिशानिर्देश कैम्पस में प्रवेश से पहले ही सामान्य वर्ग के छात्र को अपराधी बना देने वाला है। अगर ये निर्देश लागू हो जाते तो किसी भी सामान्य वर्ग के छात्र को, जिसकी दाखिले के समय 18 साल के आसपास उम्र होगी उसे उत्पीड़न के आरोप में फंसाया जा सकता था। फंसाने वाले के आरोप अगर गलत निकलते तब भी उसके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं होती। सो, जैसे ही ये निर्देश जारी हुए वैसे ही इसका विरोध हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो अदालत ने इस पर रोक लगा दी। पिछले सात महीने से यथास्थिति बनी हुई है और भेदभाव रोकने का 2012 का पुराना दिशानिर्देश लागू है।

इसलिए सात महीने बाद मोहन भागवत ने ऐलान किया है कि यह कभी कानून नहीं बनेगा इसका अर्थ है कि अब सामान्य वर्ग के लोगों की नाराजगी की आंच संघ और भाजपा दोनों को महसूस होने लगी है। उनको लगने लगा है कि वे सामान्य वर्ग को नाराज कर अपनी ताकत गंवा रहे हैं। धारणा के स्तर पर, मीडिया और सोशल मीडिया में समर्थन के स्तर पर और राजनीतिक व चुनावी स्तर पर भी यह दबाव महसूस हो रहा है। तभी भागवत ने यह बात कही है। और तभी ऐसा लग रहा है कि सरकार इसे नहीं लागू करने जा रही है। गौरतलब है कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई तो केंद्र सरकार ने कहा कि वह इन दिशानिर्देशों पर पुनर्विचार कर रही है। इसके बाद मामला टल गया।

इस बीच सरकार के सूचना सलाहकारों में से एक दिलीप मंडल ने इसे लेकर एक लंबी पोस्ट लिखी। वे दलित, आदिवासी और पिछड़ा उत्पीड़न के लिए सामान्य वर्ग को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं। लेकिन उनका सुर बदला हुआ था। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि रोहित वेमुला मामले के बाद कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट गए थे और कोर्ट ने नए दिशानिर्देश बनाने को कहा था, जिसके बाद यूजीसी के कुछ अधिकारियों ने दिशानिर्देश बना दिए। इसके आगे उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें लागू नहीं किया है। उन्होंने अपनी तरफ से अधिकारियों पर ठीकरा फोड़ कर राजनीतिक नेतृत्व को बचाने का प्रयास किया। इससे भी लग रहा है कि सरकार इस मसले पर पीछे हट गई है।

राजस्थान के नतीजों से परेशानी

यह बहुत दिलचस्प संयोग है कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का यूजीसी के दिशानिर्देशों को लेकर बयान उस दिन आया, जिस दिन राजस्थान के स्थानीय निकायों के चुनाव नतीजे आ रहे थे। सोमवार की सुबह नतीजे आने शुरू हुए तो भाजपा के सारे बड़े नेता हैरान थे। राजस्थान के तमाम बड़े और प्रभावशाली नेताओं के गढ़ में भाजपा हार रही थी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अपने भरतपुर इलाके में भाजपा हार गई। वसुंधरा राजे के झालावाड़ इलाके में भाजपा हार गई। अजमेर में पहली बार कांग्रेस पार्टी को बढ़त मिली। इसके बाद मीडिया की रिपोर्ट में खुल कर वहां के रिपोर्टर और जानकार कहने लगे कि कई इलाकों में यूजीसी के दिशानिर्देशों का जवाब सामान्य वर्ग के लोगों ने दिया है। हो सकता है कि संघ प्रमुख के बयान का राजस्थान के नतीजों से कोई लेना देना न हो लेकिन यह भाजपा और संघ दोनों के लिए चिंता की बात है।

ध्यान रहे राजस्थान में भले हर पांच साल पर सत्ता बदलती है और बारी बारी से भाजपा व कांग्रेस सरकार में आते हैं। लेकिन भाजपा को लगता है कि गुजरात और मध्य प्रदेश की तरह राजस्थान को स्थायी गढ़ बनाया जा सकता है। लेकिन गुजरात और मध्य प्रदेश के मुकाबले पिछले लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनावों में राजस्थान में भाजपा का प्रदर्शन कमजोर रहा। उसने जीत कर सरकार बना ली लेकिन जीत एकतरफा नहीं थी। भजनलाल शर्मा के मुख्यमंत्री बनने के बाद से संघ और भाजपा दोनों को सरकार के कामकाज की फीडबैक सकारात्मक नहीं है। स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन से सबकी चिंता बढ़ी है।

आमतौर पर स्थानीय निकाय सत्तारूढ़ दल ही जीतते हैं लेकिन भाजपा को 4,179 सीटें मिली हैं, जबकि 36 सौ से ज्यादा सीट जीत कर कांग्रेस उसके बिल्कुल नजदीक रही। 22 सौ से ज्यादा निर्दलीय पार्षद जीत गए। इतनी संख्या में निर्दलीय पार्षद जीतने को कॉकरोच जनता पार्टी के असर के तौर पर देखा जा रहा है। सीजेपी ने स्कूलों का सवाल उठा कर एक तीसरी ताकत के उभरने की संभावना बढ़ा दी है।

रेखा गुप्ता 19 सितंबर को फतेहगढ़ साहिब से करेंगी ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ को रवाना

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पंजाब इकाई की ओर से ‘भाजपा का नारा, नशा मिटाना सारा’ अभियान के तहत निकाली जा रही चार ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के दूसरे चरण में 19 सितंबर को फतेहगढ़ साहिब से यात्रा शुरू होगी जिसे दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगी।

भाजपा पंजाब के महासचिव एवं ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के प्रदेश संयोजक राजेश बाघा ने मंगलवार को बताया कि श्रीमती गुप्ता सबसे पहले गुरुद्वारा श्री ज्योति स्वरूप साहिब में माथा टेकेंगी और छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह तथा बाबा फतेह सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगी। इसके बाद वह स्थानीय अनाज मंडी में जनसभा को संबोधित करेंगी और फिर यात्रा को रवाना करेंगी।

श्री बाघा ने कहा कि यात्रा के दौरान पंजाब के सामने मौजूद तीन प्रमुख चुनौतियों-नशे की बढ़ती समस्या, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और तहसीलों तथा थानों से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक कथित भ्रष्टाचार-को प्रमुखता से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान नहीं है, बल्कि नशे के कारण पंजाबी पहचान, सांस्कृतिक मूल्यों, चढ़दी कला की भावना और गुरुओं की धरती की गौरवशाली पहचान पर पड़ रहे कथित खतरे के खिलाफ जनमत तैयार करने का प्रयास है।

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भाजपा नेता ने कहा कि नशे की समस्या से परिवार टूट रहे हैं और विशेष रूप से माताओं एवं बहनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सेना, खेल और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाला पंजाब का युवा नशे की गिरफ्त में जा रहा है, जिससे अपराध, हिंसा और गिरोह से जुड़ी गतिविधियां बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि उपचार का खर्च उठाने के लिए कई परिवारों को कर्ज लेने या जमीन-जायदाद बेचने तक की नौबत आ रही है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

फतेहगढ़ साहिब से शुरू होने वाली दूसरी यात्रा समराला, पायल, खन्ना, अमलोह, बस्सी पठाना, डेराबस्सी, एसएएस नगर, खरड़, चमकौर साहिब, रोपड़, आनंदपुर साहिब, गढ़शंकर, चब्बेवाल, होशियारपुर, शाम चौरासी, दसूहा, मुकेरियां, उड़मुड़, आदमपुर, बलाचौर, नवांशहर, बंगा और फगवाड़ा विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी तथा जालंधर में इसका समापन होगा।

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