FPI ने 4 महीनों बाद की वापसी, जुलाई में अब तक खरीदे ₹15157 करोड़ के भारतीय शेयर

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार 4 महीने तक बिकवाली करने के बाद जुलाई में बायर नजर आ रहे हैं। इस महीने में अब तक उन्होंने भारतीय शेयरों में 15,157 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध निवेश किया है। बेहतर होते घरेलू व्यापक आर्थिक संकेतकों, रुपये की स्थिरता और वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की बढ़ती धारणा से यह रुझान देखने को मिला है। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले FPI ने जून में भारतीय शेयरों से 49,340 करोड़ रुपये, मई में 32,963 करोड़ रुपये, अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये और मार्च में 1.17 लाख करोड़ रुपये निकाले थे।

इस बिकवाली के दौर से पहले फरवरी में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था। साल 2026 में अब तक FPI भारतीय शेयरों से कुल 2.60 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। पिछले साल की समान अवधि में उन्होंने 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी की थी।

एक्सपर्ट्स का क्या है मानना

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मॉर्निंगस्टार इनवेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल मैनेजर (रिसर्च) हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि जुलाई में FPI की वापसी वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की बढ़ती प्रवृत्ति, भू-राजनीतिक तनाव कम होने से ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंता घटने और भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक स्थिति पर बढ़े भरोसे का नतीजा है।

जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार का कहना है कि घरेलू व्यापक आर्थिक स्थिति में सुधार और रुपये की स्थिरता ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।सेमीकंडक्टर कारोबार में कमजोरी और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में FPI की बिकवाली के कारण निवेश का एक हिस्सा भारत की ओर आया है। इसके साथ ही श्रीवास्तव ने आगाह किया कि भले ही जुलाई में FPI के निवेश की यह मजबूत वापसी उत्साहजनक है, लेकिन आगे उनका रुख वैश्विक परिस्थितियों और भारत की घरेलू आर्थिक वृद्धि की मजबूती पर निर्भर करेगा।

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बॉन्ड मार्केट में कितना निवेश

भारत के डेट या बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेशकों की रुचि बनी हुई है। जुलाई में अब तक FPI ने फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत डेट सिक्योरिटीज में 6,625 करोड़ रुपये और जनरल रूट से 3,228 करोड़ रुपये का निवेश किया।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

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आने वाले हफ्ते में निफ्टी को अगर अप्रैल के हाई पर वापस पहुंचना है तो 24,500-24,550 के रेजिस्टेंस जोन को मजबूती से पार करना होगा। वहीं बैंक निफ्टी अगर 58,600 के ऊपर लगातार बना रहता है, तो 59,200 की ओर रैली का रास्ता खुल सकता है। ऐसा मानना है SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह का। उन्होंने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में निफ्टी को लेकर क्या उम्मीद जताई, नए शुरू हो रहे सप्ताह के लिए उनके टॉप स्टॉक आइडियाज क्या हैं, आइए जानते हैं…

क्या आपको लगता है कि खरीदारी में नई दिलचस्पी को देखते हुए निफ्टी 50 आने वाले हफ्ते में अपने अप्रैल के हाई लेवल पर वापस पहुंच सकता है?

बाजार में खरीदारी में नई दिलचस्पी दिखी है, लेकिन हमारा मानना ​​है कि आने वाले हफ्ते में निफ्टी के अप्रैल के हाई लेवल पर वापस पहुंचने की संभावना कम है। ऐसा तब तक होना कम संभव लगता है, जब तक कि यह 24,500-24,550 के रेजिस्टेंस जोन को मजबूती से पार न कर ले। इंडेक्स पिछले चार हफ्तों से एक बड़े कंसोलिडेशन फेज में फंसा हुआ है और वीकली चार्ट पर छोटी बॉडी वाली कैंडल बना रहा है। यह बुल्स और बेयर्स के बीच किसी स्पष्ट दिशा को लेकर भरोसे की कमी को दिखाता है।

इसके बावजूद, उतार-चढ़ाव लगातार बढ़ रहा है और निफ्टी ने पिछले सात हफ्तों में अपनी सबसे बड़ी वीकली ट्रेडिंग रेंज देखी है। बढ़ते उतार-चढ़ाव और लंबे समय तक कंसोलिडेशन का ऐसा मेल अक्सर किसी बड़े दिशात्मक बदलाव से पहले होता है। हालांकि, मोमेंटम इंडिकेटर न्यूट्रल बने हुए हैं, डेली और वीकली RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) दोनों ही एक रेंज में हैं और डेली ADX भी कमजोर है। यह किसी मजबूत ट्रेंड की कमी को दिखाता है।

इसलिए, हालांकि बाजार का मूड पॉजिटिव है और खरीदारी में नई दिलचस्पी इंडेक्स को 24,500-24,550 के जोन को चुनौती देने में मदद कर सकती है, लेकिन अप्रैल के हाई लेवल तक पहुंचने के लिए इस रुकावट को मजबूती से पार करना जरूरी होगा। तब तक निफ्टी के एक रेंज में बने रहने की संभावना है, जिसमें 23,950-23,900 का जोन इमीडिएट सपोर्ट का काम करेगा।

बुल्स की मजबूत वापसी को देखते हुए, क्या बैंक निफ्टी 59,000 के लेवल पर वापस पहुंच पाएगा?

हां, पिछले हफ्ते दिखी मजबूत रिकवरी ने बैंक निफ्टी के जल्द ही 59,000 के मार्क पर वापस पहुंचने की संभावना को बेहतर बना दिया है। हाल के स्विंग लो से थोड़ा नीचे गिरने के बाद, इंडेक्स को अपने 20-वीक के EMA (एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज) के आस-पास मजबूत सपोर्ट मिला और इसने तेज रिकवरी की। इसके कारण आखिरकार वीकली चार्ट पर ड्रैगनफ्लाई डॉजी पैटर्न बना। यह कैंडल फॉर्मेशन निचले लेवल पर खरीदारी में मजबूत दिलचस्पी को दिखाती है और संकेत देती है कि बुल्स धीरे-धीरे कंट्रोल वापस हासिल कर रहे हैं।

टेक्निकल नजरिए से, बैंक निफ्टी अपने मुख्य मूविंग एवरेजेज से ऊपर आराम से ट्रेड कर रहा है। डेली RSI 60 के लेवल को पार करने वाला है, जो बेहतर होते बुलिश मोमेंटम का संकेत है। हालांकि, इंडेक्स के लिए तुरंत रुकावट 58,500-58,600 के जोन में है। अगर यह 58,600 के ऊपर लगातार बना रहता है, तो 59,200 की ओर रैली का रास्ता खुल सकता है। नीचे की तरफ, 57,400-57,300 का जोन मजबूत सपोर्ट देगा और तेजी के बड़े स्ट्रक्चर को बरकरार रखेगा।

अगले हफ्ते के लिए आपके टॉप 2 स्टॉक आइडिया कौन से हैं जिनमें अच्छा रिटर्न देने की क्षमता है?

गोदरेज प्रॉपर्टीज: इस शेयर ने वीकली चार्ट पर एक अहम नीचे की ओर झुकी हुई ट्रेंडलाइन को तोड़ा है, जो ट्रेंड बदलने का संभावित संकेत है। वॉल्यूम में अच्छी बढ़ोतरी, बढ़ता ADX, +DI/-DI गैप का बढ़ना और वीकली RSI का 60 के ऊपर जाना बुलिश आउटलुक को मजबूत करता है। इस स्टॉक में ₹2,115-2,140 के जोन में खरीदारी की सलाह दी जाती है, जिसमें स्टॉप-लॉस ₹2,050 पर सही रहेगा। ऊपर की ओर टारगेट ₹2,300 होगा।

लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी: लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी डेली चार्ट पर एक सिमेट्रिकल ट्रायंगल पैटर्न से ब्रेकआउट करने की कगार पर है, जो तेजी जारी रहने का संभावित संकेत है। स्टॉक को अपने 50-दिन के EMA के पास लगातार सपोर्ट मिल रहा है, जबकि बेहतर होते मोमेंटम इंडिकेटर पॉजिटिव आउटलुक को सपोर्ट करते हैं। इस स्टॉक में ₹1,785-1,805 के दायरे में खरीदारी (एक्युमुलेशन) की सलाह दी जाती है। स्टॉप-लॉस ₹1,730 पर रखा जा सकता है। ₹1,930 का अपसाइड टारगेट रखा जा सकता है।

क्या कल्याण ज्वेलर्स और इंडियन बैंक के चार्ट अगले हफ्ते भी रैली जारी रहने का संकेत दे रहे हैं?

कल्याण ज्वेलर्स के स्टॉक ने मजबूत वॉल्यूम सपोर्ट के साथ डेली चार्ट पर कंसोलिडेशन फेज से ब्रेकआउट किया है। DI लाइनों का फैलना और RSI का 60 के ऊपर आना बुलिश मोमेंटम के मजबूत होने का संकेत है। जब तक यह ₹430-425 के ऊपर बना रहता है, तब तक तेजी बने रहने की संभावना है। इंडियन बैंक के मामले में 10 प्रतिशत की तेज गिरावट के बाद RSI मजबूत हुआ है, जो बेहतर होते मोमेंटम को दिखाता है। ₹885-890 के रेजिस्टेंस जोन के ऊपर एक निर्णायक ब्रेकआउट, रिकवरी को और बढ़ा सकता है।

क्या हॉरिजॉन्टल ट्रेंडलाइन ब्रेकआउट से Paytm और CDSL में आगे चलकर तेज बढ़त की संभावना की पुष्टि होती है?

CDSL का स्टॉक डेली चार्ट पर लंबे समय के कंसोलिडेशन से बाहर निकल गया है और इसमें वॉल्यूम भी काफी ज्यादा रहा है। साथ ही, यह अपने मुख्य मूविंग एवरेजेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है। DI लाइनों का दायरा बढ़ना मजबूत खरीदारी की दिलचस्पी का संकेत है। जब तक यह स्टॉक ₹1,365-1,370 के स्तर से ऊपर बना रहता है, तब तक इसमें बुलिश रुख बने रहने की संभावना है।

One 97 Communications (Paytm) ने 6 सेशन के छोटे से ठहराव के बाद फिर से तेजी पकड़ी है। बढ़ता ADX एक मजबूत ट्रेंड का संकेत देता है। ₹1,350-1,370 के रेजिस्टेंस जोन से निर्णायक ब्रेकआउट, रैली के अगले चरण की शुरुआत कर सकता है।

Grasim Industries: 17% तक दौड़ सकता है शेयर! मोतीलाल ओसवाल ने फिर कहा ‘Buy’

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Happy Steels या Devson Catalyst, किसके IPO में लगाएं पैसे, 13 जुलाई को आखिरी मौका

IPO News: हैप्पी स्टील्स और देवसन कैटेलिस्ट के आईपीओ में कल यानी 13 जुलाई को पैसा लगाने का आखिरी मौका है। ये दोनों इश्यू पूरी तरह ओवरसब्सक्राइब हो चुके हैं लेकिन देवसन कैटेलिस्ट के आईपीओ को अधिक बेहतर रिस्पांस मिलता दिख रहा है। ग्रे मार्केट में भी इसकी सेहत अधिक मजबूत है। ग्रे मार्केट में हैप्पी स्टील्स आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से ₹14 यानी 21.21% और देवसन कैटेलिस्ट ₹45 यानी 38.14% की जीएमपी पर है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय किसी आईपीओ में बोली लगाने से पहले कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल्स पर ध्यान देना चाहिए। इनके लिस्टिंग की बात करें तो हैप्पी स्टील के शेयर एनएसई एसएमई पर और देवसन कैटेलिस्ट के शेयर बीएसई एसएमई पर 16 जुलाई को लिस्ट होंगे।

Happy Steels IPO

ऑटोमोटिव फॉर्ज्ड एंड मशीन्ड कंपोनेंट्स के लिए एक्सल्स बनाने वाली हैप्पी स्टील्स के ₹25 करोड़ के आईपाओ में ₹62-₹66 के प्राइस बैंड और 2000 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकते हैं। अभी तक यह इश्यू 3.14 गुना भर चुका है जिसमें QIB (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स) के हिस्से को 0.63 गुना, NII (नॉन-इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स) के हिस्से को 5.40 गुना और खुदरा निवेशकों के आरक्षित हिस्से को 3.61 गुना बोली मिली है। इस इश्यू के तहत 37.88 लाख लाख नए शेयर जारी होंगे। कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-26 के दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा उठा-पटक के साथ 14% के सीएजीआर से बढ़कर ₹7.10 करोड़ और टोटल इनकम सालाना 5% की रफ्तार से बढ़कर ₹96.57 करोड़ पर पहुंच गया।

Devson Catalyst IPO

ऑयल और गैस रिफाइनरीज, पेट्रोकेमिकल्स, स्टील, फर्टिलाइजर्स और अन्य इंडस्ट्रियल प्रोसेसिंग सेक्टर्स के लिए कैटेलिस्ट्स एडजॉर्बेंट्स और सेरामिक बाल बनाने वाली देवसन कैटेलिस्ट के ₹42 करोड़ के आईपीओ में ₹112-₹118 और 1200 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकते हैं। ओवरऑल यह इश्यू 29.35 गुना सब्सक्राब हो चुका है जिसमें से QIB के आरक्षित हिस्से को 2.60 गुना, एनआईआई के हिस्से को 36.48 गुना, इंडिविजुअल इंवेस्टर्स के हिस्से को 42.92 गुना और एंप्लॉयीज के हिस्से को 0.81 गुना बोली मिली है। इस इश्यू के तहत ₹39 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे और ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत 2.5 लाख शेयरों की बिक्री होगी। कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-26 के दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना 45% से अधिक की रफ्तार से बढ़कर ₹12.52 करोड़ और टोटल इनकम भी 9% के सीएजीआर से बढ़कर ₹56.84 करोड़ पर पहुंच गया।

SBI Funds Management IPO: प्री-IPO राउंड के बाद साइज घटकर ₹9813 करोड़

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SBI Funds Management IPO: प्री-IPO राउंड के बाद साइज घटकर ₹9813 करोड़, SBI एंप्लॉयीज और शेयरहोल्डर के लिए भी शेयर रिजर्व

SBI फंड्स मैनेजमेंट के प्री-IPO राउंड के बाद इसके IPO का साइज घटकर ₹9812.9 करोड़ रह गया है। पहले यह ₹11692.91 करोड़ था। कंपनी ने प्री-IPO राउंड के दौरान 30 बड़े इनवेस्टर्स से ₹1880 करोड़ जुटाए। इस दौरान SBI ने 2.88 करोड़ शेयर (1.42 प्रतिशत हिस्सेदारी) ₹1655 करोड़ में और अमुंडी इंडिया होल्डिंग ने 39.19 लाख शेयर 225 करोड़ रुपये में बेचे। इस तरह कुल 3.27 करोड़ शेयरों या 1.6 प्रतिशत हिस्सेदारी को प्री-IPO राउंड में बेचा गया।

SBI फंड्स मैनेजमेंट देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी है। यह भारत की सबसे पुरानी एसेट मैनेजमेंट कंपनी भी है और SBI म्यूचुअल फंड के लिए इनवेस्टमेंट मैनेजर के तौर पर काम करती है। कंपनी के प्रमोटर SBI और अमुंडी इंडिया होल्डिंग हैं। SBI फंड्स मैनेजमेंट का पब्लिक इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसमें नए शेयर जारी नहीं होंगे। लिहाजा IPO से होने वाली कमाई शेयर बेचने वालों के पास जाएगी।

OFS में पहले प्रमोटर्स की ओर से 20.37 करोड़ इक्विटी शेयरों को बिक्री के लिए रखे जाने का प्लान था। लेकिन अब प्री-IPO राउंड के बाद 17.09 करोड़ शेयरों की बिक्री होगी। अब OFS में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 9,95,01,649 शेयर (4.8851 प्रतिशत हिस्सेदारी) और अमुंडी इंडिया होल्डिंग 7,14,54,982 शेयर (3.5082 प्रतिशत हिस्सेदारी) बेचेंगे। प्री-IPO राउंड के बाद अब SBI के पास SBI फंड्स मैनेजमेंट में 60.32 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि अमुंडी के पास 36.06 प्रतिशत हिस्सेदारी है। पहले इनके पास क्रमश: 61.76 प्रतिशत और 36.26 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

प्री-IPO राउंड में किसने खरीदे शेयर

SBI Funds Management के प्री-IPO राउंड में SIG की कंपनी Susquehanna Asia Technology Pty Ltd और WhiteOak Capital India Opportunities Fund ने अमुंडी से SBI फंड्स मैनेजमेंट के 39.19 लाख शेयर खरीदे, जबकि बाकी 28 निवेशकों ने SBI से 2.88 करोड़ शेयर खरीदे। निवेशकों में अजीम प्रेमजी के निवेश वाला PI Opportunities Fund और आकाश मनेक भंसाली प्री-IPO राउंड में सबसे बड़े भागीदार रहे। दोनों ने 200 करोड़ रुपये मूल्य के 34.84 लाख शेयर खरीदे। प्रशांत जैन के निवेश वाले 3P India Equity Fund ने 150 करोड़ रुपये के 26.13 लाख शेयर खरीदे।

इसके अलावा, व्हाइटओक कैपिटल, Tata AIG General Insurance, Hara Global Capital Master Fund और Clarus Capital में से हर एक ने 99.9 करोड़ रुपये के 17.42 लाख शेयर खरीदे। प्री-IPO राउंड में भाग लेने वाले अन्य निवेशकों में मालाबार इंडिया फंड, 360 ONE, Carnelian, Dymon Asia, Bennett Coleman, गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस, आनंद राठी ग्लोबल फाइनेंस और NEO Series शामिल थे।

14 जुलाई से इस भाव पर ओपनिंग

IPO 14 जुलाई को खुलने जा रहा है। इसमें 16 जुलाई तक निवेश किया जा सकेगा। प्राइस बैंड ₹545-574 प्रति शेयर और लॉट साइज 26 शेयर है। एंकर इनवेस्टर 13 जुलाई को बोली लगा सकेंगे। इश्यू बंद होने के बाद अलॉटमेंट 17 जुलाई को फाइनल हो सकता है और कंपनी BSE, NSE पर 21 जुलाई को लिस्ट हो सकती है।

SBI फंड्स मैनेजमेंट और SBI के कर्मचारियों को छूट पर मिलेंगे शेयर

SBI फंड्स मैनेजमेंट ने IPO में अपने कर्मचारियों के लिए 2.7 लाख शेयर, SBI के कर्मचारियों के लिए 29.87 लाख शेयर और SBI के शेयरहोल्डर्स के लिए 1.3 करोड़ शेयर रिजर्व रखे हैं। SBI फंड्स मैनेजमेंट और SBI, दोनों के कर्मचारियों को फाइनल ऑफर प्राइस पर प्रति शेयर 54 रुपये की छूट पर शेयर मिलेंगे। SBI के मौजूदा शेयरहोल्डर्स को कोई छूट नहीं मिलेगी। IPO में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

NSE दुनिया के 30 से ज्यादा इनवेस्टर्स को इस महीने अपने आईपीओ के बारे में बताएगा

ग्रे मार्केट में प्रीमियम गिरा

ग्रे मार्केट लिस्टिंग अच्छी रहने का संकेत दे रहा है, हालांकि प्रीमियम में थोड़ी गिरावट आई है। ग्रे मार्केट में SBI फंड्स मैनेजमेंट का शेयर IPO के अपर प्राइस बैंड 574 रुपये से 15.33 प्रतिशत के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। एक दिन पहले प्रीमियम 17.42 प्रतिशत तक चला गया था। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं। इस पब्लिक इश्यू के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, एक्सिस कैपिटल, जेफरीज इंडिया, ICICI सिक्योरिटीज, HSBC सिक्योरिटीज एंड कैपिटल मार्केट्स (इंडिया), मोतीलाल ओसवाल इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स, JM फाइनेंशियल, SBI कैपिटल मार्केट्स और BofA सिक्योरिटीज, बुक-रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार Kfin Technologies Ltd है।

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Gold Price Outlook: सोना अभी खरीदे या थोड़ा और रुकें? एक्सपर्ट्स ने बताया दिवाली तक का ये टारगेट

Gold Price Diwali Target Outlook: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता और महंगाई का डर एक बार फिर बढ़ गया है। इस तनाव के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की चमक एक बार फिर बढ़ गई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $4,000 प्रति औंस के करीब पहुंच गया है, वहीं घरेलू बाजार में सोने की कीमतें फिलहाल ₹1.40 लाख से ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम के बीच बनी हुई हैं। ऐसे में निवेशक और आम खरीदार असमंजस में हैं कि अभी सोना खरीदना चाहिए या नहीं। आइए समझते हैं कि दिवाली तक सोने की चाल कैसी रह सकती है।

क्या सोने की कीमतों में आएगी बड़ी गिरावट?

बाजार के जानकारों और एक्सपर्ट्स का मानना है कि हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद सोने की कीमतों में किसी बड़ी या भारी गिरावट की उम्मीद बहुत कम है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोना मौजूदा स्तरों पर अपना एक मजबूत आधार बना चुका है। अगर यहां से कीमतों में कोई गिरावट आती भी है, तो वह महज 5% तक ही सीमित रहने की संभावना है। घरेलू बाजार में सोने को ₹1.35 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बेहद मजबूत सपोर्ट पर है। इसलिए ग्राहकों को बहुत ज्यादा दाम गिरने की उम्मीद में अपनी खरीदारी को टालना नहीं चाहिए।

क्यों बढ़ रही हैं सोने की कीमतें?

सोने की मौजूदा तेजी के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण काम कर रहे हैं:

भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच गहराते विवाद ने निवेशकों को शेयर बाजार जैसी जोखिम भरी जगहों से निकालकर सोने की तरफ आकर्षित किया है।

कच्चा तेल और महंगाई: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने दुनिया भर में महंगाई की चिंता को दोबारा हवा दे दी है, जिससे हेजिंग के लिए सोने की मांग बढ़ी है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व: अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित कर रही है।

दिवाली तक कहां पहुंच सकता है सोना?

दिवाली पर सोने के भाव को लेकर विश्लेषकों ने दो तरह की संभावनाएं जताई हैं:

पहली स्थिति: अगर वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और स्थितियां सामान्य होती हैं, तो घरेलू बाजार में सोने की कीमतें छलांग लगाते हुए ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर तक जा सकती हैं।

दूसरी स्थिति: अगर तनाव और अनिश्चितता का माहौल आगे भी बरकरार रहता है, तो सोने के दाम ₹1.35 लाख से ₹1.45 लाख के सीमित दायरे में ही बने रहेंगे।

ग्लोबल टारगेट: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने को $3,800 पर मजबूत सपोर्ट है, जबकि लंबी अवधि के लिए $5,100 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ज्वैलरी मार्केट में लौटी रौनक, खरीदारी का अच्छा मौका

सोने की कीमतों में आई हालिया मामूली गिरावट ने ज्वैलरी बाजार में ग्राहकों की डिमांड को फिर से जिंदा कर दिया है। जब कीमतें अपने रिकॉर्ड हाई पर थीं, तब बिक्री में भारी गिरावट देखी गई थी, लेकिन अब इसमें सुधार हो रहा है। अगस्त और सितंबर से शुरू होने वाले आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए सर्राफा कारोबारियों को उम्मीद है कि इस साल दिवाली पर सोने की मांग पिछले साल के मुकाबले बेहतर या उसके बराबर रह सकती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

एक साल में ₹1 लाख को बना दिया ₹10 लाख! AI या डिफेंस नहीं, कंडोम बनाने वाली इस कंपनी ने किया कमाल

Cupid Share Price Multibagger Return: शेयर बाजार में पिछले एक साल से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिफेंस सेक्टर के शेयरों की धूम है। लेकिन इन सबके बीच मार्केट का सबसे बड़ा वेल्थ क्रिएटर एक ऐसे बिजनेस से निकलकर आया है जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था।

मेल और फीमेल कंडोम, ल्यूब्रिकेंट्स और डायग्नोस्टिक उत्पाद बनाने वाली स्मॉलकैप कंपनी क्यूपिड लिमिटेड (Cupid Ltd) के शेयरों ने पिछले एक साल में निवेशकों को छप्परफाड़ रिटर्न देकर निवेशकों को मालामाल कर दिया है। पिछले एक साल में इस शेयर ने 866% से ज्यादा की तूफानी तेजी दिखाई है। आइए जानते हैं कि कैसे इस स्मॉलकैप शेयर ने बाजार में गदर मचाया है और इसके पीछे की वजह क्या है।

1 साल का जादुई रिटर्न: ₹1 लाख बन गए ₹9.7 लाख

क्यूपिड लिमिटेड के शेयरों की रफ्तार पिछले कुछ महीनों से लगातार तेज है:

1 साल का रिटर्न: एक साल पहले जिन निवेशकों ने इस शेयर में ₹1 लाख लगाए थे, उनकी वैल्यू आज बढ़कर करीब ₹9.7 लाख हो चुकी है।

शॉर्ट टर्म का रिटर्न: पिछले 6 महीने में यह शेयर 145%, पिछले 3 महीने में 128% और महज पिछले एक महीने में 40% से ज्यादा चढ़ चुका है।

मार्केट कैप: 10 जुलाई को क्यूपिड के शेयर ₹212.24 पर बंद हुए, जिससे कंपनी का कुल मार्केट कैप बढ़कर करीब ₹28,500 करोड़ पर पहुंच गया है।

क्यों भाग रहा है शेयर? मुनाफे में आया बंपर उछाल

बाजार में कई स्मॉलकैप शेयर बिना किसी ठोस वजह के सिर्फ हवा में भागते हैं, लेकिन क्यूपिड के साथ ऐसा नहीं है। इस शेयर की तेजी को कंपनी के मजबूत वित्तीय नतीजों का पूरा सपोर्ट मिला है:

सालाना प्रदर्शन (FY26): वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का रेवेन्यू दोगुने से अधिक बढ़कर ₹391 करोड़ हो गया, जो इससे पिछले साल ₹183 करोड़ था।

नेट प्रॉफिट में उछाल: कंपनी का शुद्ध मुनाफा ₹41 करोड़ से बढ़कर सीधे ₹108 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, ऑपरेटिंग मार्जिन भी सुधरकर 38% हो गया।

मार्च तिमाही के नतीजे: मार्च तिमाही में सालाना आधार पर रेवेन्यू 116% बढ़कर ₹132 करोड़ और नेट प्रॉफिट 214% बढ़कर ₹36 करोड़ से ज्यादा रहा, जो कंपनी के इतिहास की सबसे बेहतरीन तिमाहियों में से एक है।

मैनेजमेंट का भरोसा: रेवेन्यू गाइडेंस में बड़ी बढ़ोतरी

जून तिमाही के लिए कंपनी द्वारा जारी किए गए मजबूत बिजनेस अपडेट ने इस शेयर में रॉकेट जैसी तेजी ला दी है:

Q1 FY27 का अनुमान: मैनेजमेंट को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1 FY27) में रेवेन्यू ₹150 करोड़ के पार निकल जाएगा।

पूरे साल का टारगेट बढ़ाया: कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने रेवेन्यू गाइडेंस को ₹600 करोड़ से बढ़ाकर ₹660 करोड़ से अधिक कर दिया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती मांग, घरेलू प्राइवेट सेक्टर की डिमांड, सरकारी खरीद और PFSCM के साथ हुई रणनीतिक साझेदारी के दम पर कंपनी को आने वाले दिनों में बड़ी ग्रोथ की उम्मीद है।

सिर्फ कंडोम नहीं, डायग्नोस्टिक्स में भी जलवा

क्यूपिड को भले ही लोग कंडोम बनाने वाली कंपनी के रूप में जानते हैं, लेकिन अब इसका दायरा काफी बड़ा हो चुका है। कंपनी कंडोम और वाटर-बेस्ड ल्यूब्रिकेंट्स के अलावा पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स और इन विट्रो डायग्नोस्टिक्स (IVD) किट्स भी बनाती है।

क्यूपिड दुनिया की पहली ऐसी कंपनी है जिसे पुरुष और महिला दोनों कंडोम की सप्लाई के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) से प्री-क्वालिफिकेशन मिला हुआ है। इसी वजह से यह कंपनी वैश्विक स्तर पर बड़े-बड़े हेल्थकेयर टेंडर्स में आसानी से हिस्सा ले पाती है।

रिटेल निवेशकों की भीड़, लेकिन वैल्यूएशन बहुत महंगा

कंपनी के शानदार प्रदर्शन को देखकर रिटेल निवेशक इस शेयर पर टूट पड़े हैं। मार्च 2026 तक कंपनी के शेयरधारकों की संख्या बढ़कर 2.09 लाख के पार पहुंच गई है, जो तीन साल पहले महज 26,000 थी। कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी करीब 46% है।

एक्सपर्ट नोट- दे रही छप्परफाड़ रिटर्न लेकिन सावधानी है जरूरी

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, क्यूपिड कंपनी के फंडामेंटल्स बेहद मजबूत हैं, लेकिन इस भारी तेजी के कारण शेयर का वैल्यूएशन काफी महंगा हो गया है। क्यूपिड का शेयर फिलहाल अपनी कमाई के मुकाबले 264 के पीई मल्टीपल और बुक वैल्यू के 63 गुना से अधिक पर ट्रेड कर रहा है, जो एफएमसीजी सेक्टर की अन्य कंपनियों से काफी ज्यादा है। इसका मतलब है कि निवेशकों ने भविष्य की बड़ी ग्रोथ को पहले से ही इस कीमत में शामिल कर लिया है, इसलिए नए निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Home Loan Rates: नया घर खरीदने का है प्लान? देखें जुलाई 2026 में सरकारी, प्राइवेट बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की ताजा ब्याज दरें

Home Loan Interest Rates July 2026 Comparison: अगर आप अपने सपनों का आशियाना खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है। होम लोन लेने से पहले अलग-अलग बैंकों और वित्तीय संस्थानों की ब्याज दरों की तुलना करना आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि मामूली सा अंतर भी आपकी मंथली ईएमआई (EMI) और कुल ब्याज के खर्च को लाखों रुपये कम कर सकता है।

वर्तमान में कई सरकारी बैंक 7.10% की शुरुआती दर पर होम लोन की पेशकश कर रहे हैं। हालांकि, आपको किस दर पर लोन मिलेगा, यह आपके क्रेडिट स्कोर, लोन की राशि, आपकी आय और रीपेमेंट हिस्ट्री जैसे कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं देश के प्रमुख सरकारी, प्राइवेट बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs) की जुलाई 2026 की ताजा ब्याज दरें।

RBI की नीति और होम लोन का कनेक्शन

होम लोन की ब्याज दरें सीधे तौर पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति से जुड़ी होती हैं. आरबीआई ने अपनी हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है, जिसके चलते मार्केट में लोन की दरें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं.

1. सरकारी बैंकों की होम लोन दरें

सरकारी बैंक आमतौर पर सबसे किफायती दरों पर लोन ऑफर करते हैं. यहां प्रमुख सरकारी बैंकों की ब्याज दरों की लिस्ट दी गई है:

  • सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: 7.10% से 9.15%
  • बैंक ऑफ महाराष्ट्र: 7.10% से 9.90%
  • बैंक ऑफ इंडिया: 7.10% से 10.25%
  • यूको बैंक (UCO Bank): 7.15% से 9.25%
  • इंडियन बैंक: 7.15% से 9.55%
  • यूनियन Bank ऑफ इंडिया: 7.15% से 9.60%

1. सरकारी बैंकों की होम लोन दरें

2. प्राइवेट बैंकों की होम लोन दरें

प्राइवेट सेक्टर के बैंक बेहतर और फास्ट सर्विस के साथ इन दरों पर होम लोन दे रहे हैं:

  • साउथ इंडियन बैंक: 7.20% से शुरुआत
  • फेडरल बैंक: 7.35% से 10.25%
  • HSBC बैंक: 7.45% से शुरुआत
  • कर्नाटक बैंक: 7.49% से 11.72%
  • ICICI बैंक: 7.55% से शुरुआत
  • कोटक महिंद्रा बैंक: 7.60% से शुरुआत

2. प्राइवेट बैंकों की होम लोन दरें

3. हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की दरें

अगर आप बैंकों के बजाय हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों का रुख करना चाहते हैं, तो उनकी दरें इस प्रकार हैं:

  • LIC हाउसिंग फाइनेंस: 7.15% से शुरुआत
  • बजाज हाउसिंग फाइनेंस: 7.25% से शुरुआत
  • PNB हाउसिंग फाइनेंस: 7.50% से शुरुआत
  • ICICI होम फाइनेंस: 7.50% से शुरुआत
  • गोदरेज हाउसिंग फाइनेंस: 7.65% से शुरुआत
  • आदित्य बिड़ला कैपिटल: 7.75% से शुरुआत

3. हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की दरें

सबसे सस्ता लोन पाने के लिए ‘क्रेडिट स्कोर’ है सबसे जरूरी

अगर आप बैंकों द्वारा ऑफर की जा रही सबसे न्यूनतम ब्याज दर (जैसे- 7.10%) का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आपका क्रेडिट स्कोर 800 या उससे अधिक होना चाहिए। इसके अलावा ब्याज दरें इस बात पर भी निर्भर करती हैं कि आवेदन करने वाला व्यक्ति नौकरीपेशा है या सेल्फ-एंप्लॉयड। नौकरीपेशा लोगों को बैंक अक्सर ब्याज दरों में थोड़ी एक्स्ट्रा छूट देते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

विदेशी निवेशकों के खरीदारी शुरू करने से बाजार में लौटी रौनक, जुलाई में 1968 करोड़ रुपये की खरीदारी की

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रुख भारतीय शेयर बाजारों को लेकर बदला है। उन्होंने 10 जुलाई को भी भारतीय बाजार में अच्छी खरीदारी की। उन्होंने 2,603.72 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवशकों (डीआईआई) ने भी 2,019.68 करोड़ रुपये की खरीदारी की। यह जानकारी स्टॉक एक्सचेंजों के प्रोविजनल डेटा पर आधारित है। एफआईआई और डीआईआई की खरीदारी से 10 जुलाई को भारतीय बाजार में अच्छी रौनक दिखी।

10 जुलाई को ज्यादातर सूचकांकों में रही तेजी

बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स सहित सभी दूसरे सूचकांक 10 जुलाई को हरे निशान में बंद हुए। Nifty 1.02 फीसदी यानी 244.10 अंक चढ़कर 24,206 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.08 फीसदी यानी 827 अंक के उछाल के साथ 77,569 पर क्लोज हुआ। बैंक निफ्टी में 1.39 फीसदी की तेजी आई। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स को छोड़ बाकी सभी सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। 9 जुलाई को भी बाजार के प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद हुए थे। 8 जुलाई को बाजार में बड़ी गिरावट आई थी, जिसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर टूटना था।

10 जुलाई को FIIs ने की 2019 करोड़ रुपये की खरीदारी

FII ने 10 जुलाई को 15,318.07 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि 12.714.35 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस तरह भारतीय बाजार में उनकी शुद्ध खरीदारी 2,603.73 करोड़ रुपये की रही। DII ने 17,171.75 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि 15,152.07 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस तरह उनकी शुद्ध खरीदारी 2,019 करोड़ रुपये की रही। डीआआई ने लगातार खरीदारी कर घरेलू शेयर बाजार को सहारा दिया है।

विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रही तो चढ़ेगा बाजार

विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख में बदलाव दिख रहा है। जुलाई में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs/FPIs) ने भारतीय बाजारों में शुद्ध रूप से खरीदारी की है। उन्होंने इस महीने 1,968.81 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। इस दौरान DII ने 9,245.91 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों का लौटना भारतीय शेयर बाजारों के लिए शुभ संकेत है। अगर आगे वे खरीदारी जारी रखते हैं तो बाजार में तेज रिकवरी आ सकती है।

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निवेशकों की नजरें जून तिमाही के नतीजों पर

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि इनवेस्टर्स का फोकस अब जून तिमाही के कंपनियों के नतीजों पर है। आगे इन नतीजों से बाजार की दिशा तय होगी। डॉलर के मुकाबले रुपये में स्थिरता है। अगर क्रूड की कीमतें भी स्टेबल रहती हैं तो बाजार का सेंटिमेंट पॉजिटिव रह सकता है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच डील को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यह बाजार के लिए बड़ा रिस्क है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Milky Mist IPO: जुलाई में ही लॉन्च हो सकता है डेयरी सेक्टर का सबसे बड़ा इश्यू, ₹2035 करोड़ जुटाने पर नजर

मिल्की मिस्ट डेयरी फूड लिमिटेड अपना 20.35 अरब रुपये (2035 करोड़ रुपये) का IPO इसी महीने यानि जुलाई में ही लॉन्च कर सकती है। यह भारत के डेयरी सेक्टर का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है। यह बात ब्लूमबर्ग की ​एक रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वालों के हवाले से कही गई है। मिल्की मिस्ट पनीर से लेकर आइसक्रीम तक बनाती है। मिल्की मिस्ट अपने एक्सपेंशन प्लांस के लिए अतिरिक्त पूंजी जुटाने के लिए IPO का विकल्प चुन रही है। इस इश्यू को SEBI ने अक्टूबर 2025 में मंजूरी दी थी।

कंपनी की शुरुआत 1985 में एक मिल्क ट्रेडिंग कंपनी के रूप में हुई थी। इसने 1994 में पनीर (कॉटेज चीज) का उत्पादन शुरू किया। इसके बाद इसने दही, मक्खन, चीज, आइसक्रीम जैसे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स को भी अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में जोड़ा। कंपनी के फाउंडर टी सतीश कुमार हैं। तमिलनाडु के इरोड में स्थित मिल्की मिस्ट का संचालन कुमार, उनकी पत्नी अनीता सतीश कुमार और सीईओ के. रत्नम करते हैं।

इनवेस्टर्स के साथ मीटिंग खत्म

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, कंपनी ने इनवेस्टर्स के साथ रोडशो पूरे कर लिए हैं और वह इस महीने के आखिर में या अगस्त की शुरुआत में शेयरों की बिक्री शुरू करने का लक्ष्य बना रही है। IPO के मामले में रोड शो का मतलब है- संबंधित कंपनी के मैनेजमेंट की ओर से इनवेस्टर्स के साथ मीटिंग्स और रिप्रेजेंटेशंस। मीटिंग्स में IPO ला रही कंपनी के अधिकारी संभावित निवेशकों से बातचीत करते हैं और उन्हें समझाते हैं कि उनके IPO में निवेश करना क्यों उचित है। अक्सर, कंपनियां IPO के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए बड़े शहरों में कई मीटिंग आयोजित करती हैं।

SBI Funds Management IPO: एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट ने प्री-आईपीओ प्लेसमेंट में 30 इनवेस्टर्स से जुटाए 1655 करोड़ रुपये

IPO में रहेंगे 17.85 अरब रुपये तक के नए शेयर

ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, मिल्की मिस्ट के पब्लिक इश्यू में 17.85 अरब रुपये तक के नए शेयर जारी होंगे। साथ ही फाउंडर्स की ओर से 2.5 अरब रुपये तक के शेयरों को ऑफर फॉर सेल के तहत बिक्री के लिए रखा जाएगा। कंपनी प्री-IPO प्लेसमेंट के जरिए 3.57 अरब रुपये तक जुटा सकती है। ऐसा हुआ तो IPO में नए शेयरों के इश्यू का साइज घट जाएगा। फाइलिंग के अनुसार, मिल्की मिस्ट नए शेयरों को जारी कर हासिल हुए पैसों का इस्तेमाल अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और कर्ज चुकाने के लिए करने की योजना बना रही है। IPO के लिए JM फाइनेंशियल लिमिटेड, एक्सिस कैपिटल लिमिटेड और IIFL कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड, बुक-रनिंग लीड मैनेजर हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।