Trading Plan: F&O एक्सपायरी के दिन सीमित दायरे में कारोबार होने की उम्मीद, बाजार में देखने को मिल सकती है रिकवरी की कोशिश

Trading Plan : एक दिन की गिरावट के बाद मार्केट में रिकवरी की कोशिश हो सकती है,लेकिन कुल मिलाकर रेंजबाउंड ट्रेडिंग की ही उम्मीद है। निफ्टी को 24,000-24,100 के जोन में तत्काल रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि,मंथली F&O एक्सपायरी सेशन के दौरान 23,900-23,800 के जोन में सपोर्ट बना हुआ है। वहीं, पिछले सेशन में प्रॉफिट बुकिंग के बावजूद,बैंक निफ्टी का ट्रेंड मज़बूत बना हुआ है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि बैंक निफ्टी 58,000-58,300 के रेजिस्टेंस जोन को फिर से हासिल करने की कोशिश कर सकता है,जबकि 57,400-57,300 का जोन तत्काल सपोर्ट का काम कर सकता है।

निफ्टी आउटलुक और रणनीति

आनंद राठी में सीनियर मैनेजर इक्विटी रिसर्च जिगर एस पटेल का कहना है कि निफ्टी अपने 50 डे सिंपल मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड करता रहा,जिससे पता चलता है कि शॉर्ट-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। इसके अलावा,डेली चार्ट पर इंडेक्स इचिमोकू क्लाउड(Ichimoku Cloud)से ऊपर ट्रेड कर रहा है,जो बुलिश ट्रेंड को और मज़बूत करता है। डेली RSI 53 पर है,जो स्थिर मोमेंटम और आगे और बढ़त की गुंजाइश का संकेत देता है।

हालांकि,अगली दिशा तय करने वाली चाल से पहले कुछ कंसोलिडेशन की संभावना है। आने वाले सेशन में इंडेक्स के 23,800–24,200 की रेंज में ट्रेड करने की उम्मीद है। जब तक निफ्टी अहम सपोर्ट लेवल से ऊपर बना रहता है,तब तक कुल मिलाकर आउटलुक अच्छा रहेगा और गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाने की सलाह होगी।

अहम रेजिस्टेंस: 24,200, 24,300

अहम सपोर्ट: 23,800, 23,600

स्ट्रैटेजी: 23,900 के आस-पास पुलबैक पर निफ्टी फ्यूचर्स खरीदें,जिसमें स्टॉप-लॉस 23,700 और टारगेट 24,300 रखें।

मिरे एसेट शेयरखान के हेड ऑफ रिटेल रिसर्च सोमिल मेहता का कहना है कि निफ़्टी को 24,100–24,200 के जोन में लगातार रुकावट का सामना करना पड़ रहा है और चार्ट पर इसके आसपास कई बार रिजेक्शन देखने है। इंडेक्स एक ही दायरे (साइडवेज़ रेंज)में घूम रहा है,जिससे पता चलता है कि इसमें कोई साफ तेजी या मंदी (डिसाइसिव मोमेंटम) का संकेत नहीं है।

नीचे की तरफ,23,800–23,650 का लेवल एक अहम सपोर्ट ज़ोन बना हुआ है और यह हाल के गैप जोन से मेल खाता है। जब तक यह सपोर्ट बना रहता है,तब तक बुल्स का कंट्रोल रहेगा। 24,200 के ऊपर ब्रेकआउट होने पर तेजी आ सकती है। जब तक निफ्टी 24,200 के ऊपर टिका नहीं रहता,तब तक 23,800-23,650 तक शॉर्ट-टर्म करेक्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

अहम रेजिस्टेंस: 24,200, 24,600

अहम सपोर्ट: 23,800, 23,650

स्ट्रैटेजी: मौजूदा मार्केट प्राइस पर या 23,800 के लेवल पर गिरावट आने पर निफ्टी फ्यूचर्स खरीदें। इसमें क्लोजिंग बेसिस पर 23,650 का स्टॉप-लॉस रखें और 24,500-24,600 का टारगेट सेट करें।

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बैंक निफ्टी आउटलुक और रणनीति

जिगर एस पटेल का कहना है कि बैंक निफ्टी 57,456 के अहम ब्रेकआउट लेवल से ऊपर बना हुआ है,जो दिखाता है कि मौजूदा अपट्रेंड जारी है। यह इंडेक्स डेली चार्ट पर अपने 20-दिन और 50-दिन के DEMA से ऊपर भी ट्रेड कर रहा है,जो लगातार तेजी का मोमेंटम दिखाता है। इसके अलावा,डेली और वीकली दोनों टाइमफ्रेम पर RSI 50 से ऊपर है,जो मज़बूती और पॉजिटिव मार्केट सेंटीमेंट की पुष्टि करता है।

57,000 के आस-पास एक अहम ट्रेंडलाइन सपोर्ट है,जो गिरावट की स्थिति में एक मजबूत सहारे का काम करेगा। जब तक बैंक निफ्टी इस सपोर्ट के ऊपर बना रहता है,तब तक ओवरऑल रुख पॉजिटिव रहेगा और गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाने की सलाह होगी।

अहम रेजिस्टेंस: 58,300, 58,700

अहम सपोर्ट: 57,500, 57,000

स्ट्रैटेजी: 57,800-57,500 के आस-पास पुलबैक पर बैंक निफ्टी फ्यूचर्स खरीदें,जिसमें स्टॉप-लॉस 57,000 और टारगेट 59,000 रखें।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market cues : मोमेंटम पड़ा कमजोर,शॉर्ट टर्म में 23800-24200 की रेंज में ट्रेड होने की उम्मीद

Trade setup for today : 30 जून को डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की मंथली एक्सपायरी से ठीक पहले,29 जून को निफ्टी में दूसरे हाफ में प्रॉफिट बुकिंग देखी गई और यह 0.50 फीसदी गिरकर बंद हुआ। इंडेक्स अपने शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है,इसलिए इसका अंडरलाइंग ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। हालांकि,मोमेंटम इंडिकेटर और ऑसिलेटर एक ऐसे दौर का संकेत दे रहे हैं जिसमें बाजार में कोई खास हलचल नहीं होगी और यह एक दायरे में बना रहेगा। शॉर्ट टर्म में इंडेक्स के 23,800-24,200 की रेंज में ट्रेड करने की संभावना है। जानकारों के मुताबिक,अगर यह इस रेंज से नीचे जाता है तो बाजार पर गिरावट का दबाव बन सकता है। जबकि अगर यह वापस ऊपर आता है और इस स्तर से ऊपर बना रहता है,तो इंडेक्स 24,500-24,600 के जोन की ओर बढ़ सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 23,922, 23,876 और 23,802

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,072, 24,118 और 24,192

निफ्टी ने डेली टाइमफ्रेम पर स्मॉल अपर और लोअर शैडो के साथ एक बेयरिश कैंडल बनाई। इससे पता चलता है कि सेलिंग प्रेशर है,रुकावट के लेवल पर ब्रेकआउट फेल हो गया है और उस लेवल के आसपास इंडेक्स एक दायरे में ही घूम रहा है। इंडेक्स अपने शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा था,लेकिन 100-दिन के EMA को वापस हासिल नहीं कर पाया और अप्रैल की रैली के 23.6 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट लेवल से नीचे आ गया। RSI 53.89 पर सिग्नल लाइन के करीब पहुंच गया,जबकि MACD हिस्टोग्राम पर हरा बार लगातार छठे सेशन में छोटा हो गया। इन सबसे पता चलता है कि तेजी का ट्रेंड तो बना हुआ है,लेकिन मोमेंटम कमज़ोर पड़ गया है,जिससे निकट भविष्य में रेंज-बाउंड ट्रेड की संभावना बढ़ गई है।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 58,154, 58,315 और 58,575

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 57,634, 57,473 और 57,213

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,678

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 57,332, 56,465

बैंक निफ्टी ने डेली चार्ट पर एक’बेयरिश कैंडल’बनाई,जिससे पता चलता है कि प्रॉफिट बुकिंग हुई है और यह ऊंचे स्तरों पर टिक नहीं पाया। हालांकि, इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से काफी ऊपर बना रहा और उनमें से ज़्यादातर ऊपर की ओर ही बढ़ रहे थे। RSI 60 के लेवल से ऊपर 61.92 पर रहा,हालांकि इसमें’बेयरिश क्रॉसओवर’दिखा। MACD जीरो और सिग्नल लाइन के ऊपर बना रहा,लेकिन MACD और सिग्नल लाइन के बीच का अंतर और कम हो गया। यह हिस्टोग्राम पर दिख रही हरी पट्टी से पता चलता है,जो लगातार छठे सेशन में छोटी हुई है। इन सबसे पता चलता है कि ओवरऑल ट्रेंड तो पॉज़िटिव है,लेकिन तेज़ी का मोमेंटम कम हो रहा है,जिससे संकेत मिलता है कि जल्द ही कंसोलिडेशन या रेंज-बाउंड ट्रेडिंग का दौर आ सकता है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

29 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹1,350 करोड़ के शेयर बेचे और वे नेट सेलर बन गए। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार पांचवें सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और ₹2,800 करोड़ के शेयर खरीदे।

इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव की उम्मीद को मापने वाला इंडिया VIX 4.29 प्रतिशत बढ़कर 13.61 पर पहुंच गया,जिससे तेजड़ियों को थोड़ी परेशानी हुई। हालांकि,यह सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे बना रहा,जो’बुल्स’के लिए अच्छी बात है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 29 जून को पिछले सेशन के 1.06 से घटकर 0.85 हो गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक:कोई नहीं

 

 

HDFC बैंक ने एक्सिस बैंक के पूर्व एग्जीक्यूटिव पुनीत शर्मा को नियुक्त किया CFO, 1 दिसंबर से संभालेंगे कामकाज

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Outlook : बाजार में बढ़त का सिलसिला थमा, जानिए 30 जून को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : भारतीय इक्विटी इंडेक्स का दो दिन से जारी बढ़त का सिलसिला 29 जून को टूट गया और बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। निफ्टी 24,000 के नीचे रहा। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 372.10 अंक या 0.48 प्रतिशत गिरकर 76,728.37 पर और निफ्टी 109.75 अंक या 0.46 प्रतिशत गिरकर 23,946.25 पर बंद हुआ। लगभग 1681 शेयरों में बढ़त हुई,2471 शेयरों में गिरावट आई और 202 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक,M&M,मारुति सुजुकी,अदाणी एंटरप्राइजेज और इंटरग्लोब एविएशन शामिल रहे। जबकि बढ़त वाले शेयरों में मैक्स हेल्थकेयर,कोल इंडिया,डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज,एटरनल और ट्रेंट शामिल रहे।

सेक्टरों की बात करें तो ऑटो इंडेक्स में 2% की गिरावट आई। जबकि PSU बैंक,मीडिया,IT और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 1-1% की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर,मेटल,फार्मा और हेल्थकेयर इंडेक्स में 1-1% की बढ़त हुई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.4 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.6 प्रतिशत नीचे आया।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि US-ईरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते के टिके रहने को लेकर निवेशकों के सतर्क नजरिए के कारण अहम साइकोलॉजिकल लेवल के पास प्रॉफिट बुकिंग जारी रही। फिलहाल बाजार में निकट भविष्य के लिए कोई साफ दिशा नहीं दिख रही है। सप्लाई की कमी,लगातार बने महंगाई क दबाव और कमजोर मॉनसून की संभावनाओं के बीच Q1FY27 अर्निंग्स सीजन को लेकर उम्मीदें कमजोर बनी हुई हैं। इन सभी का असर मार्जिन पर पड़ने की आशंका है। बाजार में हर तरफ बिकवाली रही। हालांकि,फ़ार्मा और हेल्थकेयर जैसे डिफेंसिव सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन किया, क्योंकि इनकी मांग में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता और इनकी अर्निंग का अनुमान लगाना आसान होता है।

निवेशक US के आने वाले’नॉन-फ़ार्म पेरोल’डेटा को लेकर भी सतर्क हैं। यह डेटा फेडरल रिज़र्व की पॉलिसी की दिशा पर असर डाल सकता है और ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की मौजूदा उम्मीदों को या तो मज़बूत कर सकता है या उनमें कमी ला सकता है। घरेलू बाजार से FII की निकासी में कमी और AI-आधारित ग्लोबल मार्केट के जोश का ठंडा होना,आगे चलकर बाजार के सेंटीमेंट को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि निफ्टी ने हफ्ते की शुरुआत कमजोरी के साथ की और पूरे समय दबाव में रहा,क्योंकि इंडेक्स ऑवर्ली चार्ट पर 50EMA के नीचे आ गया। मोमेंटम इंडिकेटर भी कमजोर रहा और RSI में’बेयरिश क्रॉसओवर’दिखा,जो बताता है कि निकट भविष्य में सेंटीमेंट कमजोर रह सकता है।

मंगलवार को NSE की मंथली एक्सपायरी के कारण एकआध दिन उतार-चढ़ाव ज्यादा रह सकता है। हालांकि,जब तक इंडेक्स 23,800 के सपोर्ट लेवल के ऊपर बना हुआ है,तब तक शॉर्ट-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव बना रहेगा। जब तक निफ्टी 23,800 के नीचे नहीं जाता,तब तक गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए। ऊपरी स्तर पर 24,200 के तत्काल रेजिस्टेंस के तौर पर काम करते रहने की संभावना है।

कोटक सिक्योरिटीज के हेड इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान का कहना है कि आज बेंचमार्क इंडेक्स में ऊंचे लेवल पर प्रॉफिट बुकिंग देखी गई। निफ्टी 110 अंक गिरकर बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स में 372 अंकों की गिरावट आई। सेक्टर की बात करें तो फार्मा,हेल्थकेयर और मेटल इंडेक्स में लगभग 1 प्रतिशत की तेजी आई,जबकि ऑटो इंडेक्स में 1.65 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

टेक्निकल तौर पर सुस्त शुरुआत के बाद बाजार में पूरे दिन ऊंचे लेवल पर बिकवाली का दबाव देखा गया। डेली चार्ट पर एक’बेयरिश कैंडल’भी बनी,जो मौजूदा लेवल से और कमजोरी आने का संकेत देती है।

अब निफ्टी में 24,000 का लेवल डे ट्रेडर्स के लिए एक अहम रेफरेंस प्वाइंट होगा। इस लेवल के नीचे,निफ्टी 50-दिन के SMA(सिंपल मूविंग एवरेज)या 23,800–23,750 के लेवल को फिर से टेस्ट कर सकता है। दूसरी ओर,24,000 के ऊपर जाने पर तेजी 24,150–24,200 तक जारी रह सकती है। इंट्राडे मार्केट का ट्रेंड किसी खास दिशा में नहीं है। इसलिए,डे ट्रेडर्स के लिए लेवल-बेस्ड ट्रेडिंग सबसे अच्छी रणनीति होगी।

 

Trading Strategy: बाजार में रीबैलेंसिंग की बिकवाली की वजह से भी बना थोड़ा दबाव,आज और कल की चाल को ना समझें बड़ा ट्रेंड

 

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market cues : निफ्टी के 24200 के नीचे बने रहने तक कंसोलिडेशन जारी रहने की उम्मीद, 23800–23750 पर अहम सपोर्ट

Trade setup for today : 25 जून को,तेल की कम कीमतों और VIX के निचले स्तरों के बावजूद,दूसरे हाफ में प्रॉफिट बुकिंग के कारण निफ्टी 50 दिन के हाई से थोड़ा नीचे बंद हुआ। ऊपर की तरफ 24,100–24,200 का जोन निफ्टी के लिए एक अहम रेजिस्टेंस लग रहा है,क्योंकि पिछले हफ्ते यह क्लोजिंग के आधार पर इस लेवल से ऊपर टिक नहीं पाया था। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक निफ्टी 24,200 के नीचे ट्रेड करता रहेगा,तब तक कंसोलिडेशन जारी रह सकता है। इसके लिए 23,800–23,750 पर अहम सपोर्ट है। हालांकि,जानकारों का यह भी मानना ​​है कि अगर इंडेक्स मजबूती से 24,200 के जोन के ऊपर बंद होता है तो यह 24,500–24,600 के अगले अहम रेजिस्टेंस जोन तक पहुंच सकता है। इससे निफ्टी के 24,800 के स्तर की ओर बढ़ने का रास्ता साफ हो रहा है। एक्सपर्ट्स की होर्मुज जलडमरूमध्य में नए तनाव के बाद सावधानी बरतने की भी सलाह है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 24,034, 23,981 और 23,896

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,204, 24,256 और 24,341

डेली चार्ट पर निफ्टी ने एक छोटी बेयरिश कैंडल बनाई,जिसकी ऊपरी शैडो लंबी थी। इससे पता चलता है कि अहम रेजिस्टेंस लेवल पर बुल्स को रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। इंडेक्स क्लोजिंग के आधार पर गिरती हुई रेजिस्टेंस ट्रेंडलाइन (जो 21 अप्रैल और 18 जून के हाई को जोड़ती है) के ऊपर टिक नहीं पाया। यह क्लोजिंग के आधार पर 100-दिन के EMA के ऊपर भी नहीं टिक सका,लेकिन शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से काफी ऊपर बना रहा,जो ऊपर की ओर बढ़ रहे थे। मोमेंटम इंडिकेटर्स ने कंसोलिडेशन का संकेत दिया,क्योंकि पॉजिटिव क्रॉसओवर के बावजूद RSI 56.97 पर स्थिर रहा। लगातार पांचवें सेशन में हरे हिस्टोग्राम बार के छोटे होने से पता चलता है कि MACD और सिग्नल लाइन के बीच का अंतर और कम हो गया। यह सब पॉजिटिव रुझान के साथ लगातार कंसोलिडेशन का संकेत देता है,हालांकि रैली के अगले चरण को शुरू करने के लिए रेजिस्टेंस जोन के ऊपर एक निर्णायक ब्रेकआउट की जरूरत है।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 58,559, 58,699 और 58,927

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 58,103, 57,963 और 57,735

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,678

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 57,332, 56,465

बैंक निफ्टी 27 पॉइंट्स की बढ़त के साथ दिन के हाई के पास बंद हुआ और डेली टाइमफ्रेम पर एक रेड कैंडल बनाई,जिसके ऊपरी हिस्से में एक बड़ी शैडो (upper shadow) थी। यह ऊंचे लेवल पर प्रॉफिट बुकिंग का संकेत है। इस प्रॉफिट बुकिंग के बावजूद,ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव बना रहा,क्योंकि बैंकिंग इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा था और शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज,मीडियम और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बने हुए थे। RSI बढ़कर 66.60 हो गया और इसमें बुलिश क्रॉसओवर देखा गया। लगातार पांचवें सेशन में हरे हिस्टोग्राम बार के छोटे होने से पता चलता है कि MACD और सिग्नल लाइन के बीच का अंतर और कम हो गया। इन सबसे पता चलता है कि ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है,हालांकि मोमेंटम थोड़ा धीमा हुआ है और निकट भविष्य में कुछ कंसोलिडेशन या रेंज-बाउंड मूवमेंट जारी रह सकता है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

25 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 383 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी 5,747 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव की उम्मीद को मापने वाला इंडिया VIX निचले स्तरों और सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे बना रहा। इसमें 2.5 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 13.05 पर आ गया,जिससे बुल्स को राहत मिली। अगर यह 12 के स्तर से नीचे आता है तो बुल्स का भरोसा और बढ़ सकता है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 25 जून को पिछले सेशन के 1.21 से गिरकर 1.06 पर आ गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक:कोई नहीं

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

कच्चे तेल की नरमी और जियोपॉलिटिकल जोखिम कम होने से इन सेक्टर्स को होगा फायदा, इन पर रहे नजर

अमर सिंह

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश के तौर पर,भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा तेल आयात करता है। इसलिए,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से उसे फायदा होता है। ब्रेंट क्रूड की कीमत में प्रति बैरल $1 की गिरावट से देश के सालाना आयात बिल में आम तौर पर लगभग 10,000 से 13,000 करोड़ रुपये की बचत होती है।

इसके साथ ही जियोपॉलिटिकल जोखिम कम हो रहे हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव का घटना,ईरान-इजरायल युद्ध का समाधान,होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही का शुरू होना भी भारत के लिए फायदेमंद है। इससे देश को महंगाई कम होने,करंट अकाउंट घाटा घटने,रुपये को सहारा मिलने और RBI व सरकार के लिए पॉलिसी बनाने की बेहतर गुंजाइश मिलने जैसे फायदे होंगे।

इतिहास गवाह है कि तेल की कीमतों में भारी गिरावट (जैसे 2014-16 के दौरान) ने कुछ खास सेक्टर को काफी फायदा पहुंचाया है,भले ही ग्लोबल ग्रोथ की रफ्तार धीमी रही हो। मौजूदा हालात से फायदे में रहने वाले सेक्टर एक जैसे नहीं हैं। ये फायदे उन इंडस्ट्रीज़ तक सीमित हैं जहां फ्यूल या कच्चे तेल से जुड़े कच्चे माल की लागत का हिस्सा बहुत ज्यादा होता है,या जहां कम महंगाई और ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम से बिक्री की मात्रा(वॉल्यूम)सीधे तौर पर बढ़ती है।

कच्चे तेल के भाव कम होने से एविएशन सेक्टर को सीधा और बड़ा फायदा मिलता है। भारतीय एयरलाइंस के ऑपरेटिंग खर्च में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF)का हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत होता है। कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट से ATF की कीमतें तुरंत कम हो जाती हैं,जिससे इंडिगो,एयर इंडिया और स्पाइसजेट के ऑपरेटिंग मार्जिन में सीधे तौर पर बढ़ोतरी होती है।

तेल के भाव घटने से एयरलाइंस या तो अपने मार्जिन को सुरक्षित रख सकती हैं या कम किराए के जरिए डिमांड बढ़ा सकती हैं। ये दोनों ही बातें इस सेक्टर के लिए अच्छी हैं। कीमतों में उतार-चढ़ाव कम होने से हेजिंग की लागत भी कम हो जाती है। पहले के दौर में,तेल की कीमतों में बदलाव पर एयरलाइन शेयरों ने अच्छी तेजी दिखाई है। घरेलू हवाई ट्रैफिक में अभी भी मजबूत बढ़त बनी हुई है,इसलिए ईंधन की कम लागत इनके मुनाफे और क्षमता बढ़ाने में आने वाली एक बड़ी रुकावट को दूर कर सकती है।

इसके बाद डाउनस्ट्रीम ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs)और कच्चे तेल से जुड़े मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का नंबर आता है। इंडियन ऑयल,BPCL और HPCL जैसी कंपनियों को कच्चा तेल खरीदने की कम लागत का फायदा मिलता है। जब रिटेल फ्यूल की कीमतों में बदलाव में देरी होती है या टैक्स की वजह से कीमतों में आई गिरावट का कुछ हिस्सा एडजस्ट हो जाता है। ऐसे में इनका मार्केटिंग मार्जिन बढ़ जाता है। इनको इन्वेंट्री से होने वाला फायदा भी मिल सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में कमी से पेंट सेक्टर को फायदा होता है। इनके कच्चे माल की लागत (जैसे सॉल्वैंट्स,रेजिन और कुछ एडिटिव्स)का 35-50 प्रतिशत हिस्सा कच्चे तेल से जुड़ा होता है। ऐसे में कच्चे तेल में नरमी से एशियन पेंट्स,बर्जर पेंट्स और ऐसी दूसरी कंपनियों को अच्छे मार्जिन या कीमतें तय करने में लचीलेपन का फायदा मिलता है।

टायर बनाने वाली कंपनियों (अपोलो टायर्स,MRF,सिएट,JK टायर)को सिंथेटिक रबर और कार्बन ब्लैक की लागत में कमी से राहत मिल रही है। लुब्रिकेंट्स और कुछ खास केमिकल सेगमेंट को भी इसका फायदा हो रहा है। जब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है तो इन कंपनियों के लिए लागत कम,मार्जिन ज्यादा वाली क्लासिक स्थितियां बनती हैं।

तेल की कीमतों में कमी से ऑटोमोबाइल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को लागत और मांग,दोनों ही फ्रंट पर फायदा होता है। टू-व्हीलर और पैसेंजर गाड़ियों के मामले में,पेट्रोल और डीजल की कम कीमतें गाड़ियों की कुल ओनरशिप लागत (टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप)को बेहतर बनाती हैं। कीमत को लेकर संवेदनशील बाजार में यह खरीदारी का एक अहम कारण होता है। पहले भी देखा गया है कि जब ईंधन की कीमतें कम रही हैं,तब एंट्री-लेवल और मास-मार्केट सेगमेंट में रिटेल बिक्री में तेजी आई है।

इसके अलावा क्रूड की कीमतों में कमी से कमर्शियल गाड़ियों और बड़े लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम (ट्रकिंग,लास्ट-माइल डिलीवरी)को डीजल खर्च पर सीधे बचत होती है,जो वेरिएबल कॉस्ट का एक बड़ा हिस्सा होता है। इससे लॉजिस्टिक्स कंपनियों की ऑपरेटिंग लेवरेज बेहतर होती है और ज्यादा ब्याज दरों वाले माहौल में वॉल्यूम रिकवरी में मदद मिल सकती है। भारत में सामान की ढुलाई के लिए सड़क परिवहन ही मुख्य जरिया (70%) है,इसलिए सप्लाई चेन पर इसका मल्टीप्लायर असर काफी अहम है।

कच्चे तेल में नरमी से कंज्यूमर-फेसिंग सेक्टर और फाइनेंशियल सेक्टर को मैक्रो-लेवल पर दूसरे दौर के फायदे मिलते हैं। फ्यूल और ट्रांसपोर्ट की लागत कम होने से महंगाई कम होती है। इससे RBI को पॉलिसी रेट्स को मैनेज करने के लिए ज्यादा गुंजाइश मिलती है। इससे क्रेडिट ग्रोथ और एसेट क्वालिटी में सुधार होता है। जिन बैंकों और NBFCs का रिटेल और SME पोर्टफोलियो मज़बूत है,उन्हें कम महंगाई,स्थिर या कम रेट्स और बेहतर होते कॉर्पोरेट कैश फ्लो के अच्छे चक्र से फायदा होता है।

इसके अलावा ईंधन और ट्रांसपोर्ट पर खर्च कम होने से’कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी’और कुछ खास FMCG कैटेगरी में खर्च करने लायक आय(डिस्पोजेबल इनकम)में थोड़ी लेकिन वास्तविक बढ़ोतरी देखने को मिलती है। अगर कम महंगाई और बेहतर फिस्कल हेडरूम (ईंधन सब्सिडी का दबाव कम होने से)से बेहतर कैपेक्स(पूंजीगत व्यय)माहौल बनता है या ब्याज दरों पर निर्भर मांग में सुधार होता है,तो रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा हो सकता है।

भू-राजनीतिक जोखिम कम होने से इन प्रभावों का असर सिर्फ तेल के गणित से कहीं ज्यादा बढ़ जाता है। ग्लोबलअनिश्चितता कम होने से इक्विटी रिस्क प्रीमियम घटता है,FII निवेश को बढ़ावा मिलता है और कुल मिलाकर जोखिम लेने की क्षमता बेहतर होती है। ग्लोबल ट्रेड और कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़े सेक्टर जैसे कुछ कैपिटल गुड्स,चुनिंदा मैन्युफैक्चरिंग और टूरिज़्म/हॉस्पिटैलिटी शेयरों के लिए अनुकूल माहौल बनता है। सप्लाई-चेन में स्थिरता से आयात पर निर्भर असेंबली इंडस्ट्रीज को भी मदद मिलता है।

सस्ती एनर्जी और शांत भू-राजनीतिक स्थिति का मेल वोलैटिलिटी के उन मुख्य कारणों में से एक को घटाता है,जिन्होंने समय-समय पर भारत की विकास गाथा में बाधा डाली है।

एक बार होने वाले इन्वेंट्री या मार्जिन से मिलने वाले फायदे और लगातार होने वाली कमाई में बढ़ोतरी के बीच फ़र्क करना जरूरी है। ग्राहकों को कितना फायदा होगा और कंपनियां कितना फायदा अपने पास रखेंगी,यह टैक्स पॉलिसी,कॉम्पिटिशन की तीव्रता और प्राइसिंग डिसिप्लिन पर निर्भर करेगा। फायदा पाने वाले सेक्टर की हर कंपनी को एक जैसा फायदा नहीं होगा। बैलेंस-शीट की मजबूती,प्राइसिंग पावर और ऑपरेशनल क्षमता के आधार पर बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियां ज्यादा बेहतर स्थिति में रहेंगी।

बुनियादी नज़रिए से देखें तो,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और कम होते जियोपॉलिटिकल तनाव का मेल भारत के लिए एक अच्छा संकेत है। इससे बाहरी फैक्टर का दबाव कम होता है,महंगाई पर लगाम लगती है और ज्यादा कर्ज वाले सेक्टर में कंपनियों का मुनाफा बढ़ता है। जब तेल की कीमतें गिरती हैं और तो बाजार अक्सर तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है।

इस स्थिति में निवेशकों को ऐसी कंपनियों पर फोकस करना चाहिए जिनका ऑपरेटिंग लेवरेज ज़्यादा हो (खासकर ईंधन या कच्चे तेल से जुड़े इनपुट के मामले में),जिनकी बैलेंस शीट मज़बूत हो (ताकि वे किसी भी तरह के उतार-चढ़ाव का सामना कर सकें) और जिनकी वॉल्यूम ग्रोथ भरोसेमंद हो। ऐसे माहौल में, एविएशन,OMCs,पेंट,टायर,ऑटोमोबाइल,लॉजिस्टिक्स और ब्याज दरों से प्रभावित होने वाले फाइनेंशियल सेक्टर में चुनिंदा निवेश करना,भारत की जारी स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी में शामिल होने का एक भरोसेमंद तरीका है।

अमर सिंह एंजेल वन में रिसर्च के सीनियर VP हैं.

 

Market View : गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें, डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का अच्छा मौका

 

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market View : गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें, डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का अच्छा मौका

Market View : गुरुवार को पिछले कारोबारी सत्र में आखिरी घंटे में बाजार में ऊपरी स्तर से मुनाफावसूली आई थी। सेंसेक्स-निफ्टी ऊपरी स्तर से फिसलकर बंद हुए थे। हालांकि सेंसेक्स 109 प्वाइंट चढ़कर 77,100 पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी 34 प्वाइंट चढ़कर 24,056 पर बंद हुआ था। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए थे। ऑटो और FMCG शेयरों में खरीदारी आई थी। मेटल,PSE और तेल-गैस इंडेक्स गिरावट पर बंद हुए थे। IT और एनर्जी शेयरों में दबाव देखने को मिला था। बैंक निफ्टी 27 प्वाइंट चढ़कर 58,177 पर बंद हुआ था। मिडकैप 400 प्वाइंट गिरकर 61,796 पर बंद हुआ था।

निफ्टी के 50 में से 26 शेयरों में बिकवाली देखने को मिली थी। सेंसेक्स के 30 में से 19 शेयरों में बिकवाली रही थी। बैंक निफ्टी के 14 में से 8 शेयरों में गिरावट आई थी। डॉलर के मुकाबले रुपया 27 पैसे मजबूत होकर 94.40/$ पर बंद हुआ था।

बंधन AMC में VP-इक्विटीज,प्रतीक पोद्दार ने बाजार पर बात करते हुए कहा कि गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें। यह डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का मौका है। गिरावट में अच्छे स्टॉक्स सस्ते दाम पर मिलते हैं। मिड और स्मॉलकैप में भी अवसर मिलने पर एग्रेसिव खरीदारी की जा सकती है। ऑटोमैटिक रीबैलेंसिंग से रिस्क कंट्रोल में रहता है। इस समय पैनिक सेलिंग नहीं,डिसिप्लिन्ड एलोकेशन पर जोर होना चाहिए।

डेट पोर्टफोलियो की रणनीति

प्रतीक पोद्दार ने बताया कि उनके फंड का डेट हिस्से का लगभग पूरा पैसा निवेशित है। कैश होल्डिंग बहुत सीमित। सिर्फ हाई क्वालिटी डेट इंस्ट्रूमेंट्स पर फोकस है। AAA रेटेड बॉन्ड्स में बड़ा एक्सपोजर है। इसका ड्यूरेशन करीब 4 साल के आसपास है। बाजार गिरने पर डेट से पैसा निकालकर इक्विटी में शिफ्ट करने पर फोकस है।

रीबैलेंसिंग की स्ट्रैटेजी

रीबैलेंसिंग का सबसे बड़ा आधार है वैल्यूएशन। जहां रिस्क-रिवॉर्ड बेहतर दिखता है,वहां निवेश बढ़ाते हैं। सेक्टर और स्टॉक दोनों का लगातार रिव्यू करते रहना चाहिए। महंगे पॉकेट्स से निकलकर सस्ते अवसरों की तलाश की सलाह होगी।

बाजार की गिरावट में डेट का रोल?

डेट का अहम काम वोलैटिलिटी कम करना है। डेट रिटर्न्स को ज्यादा स्थिर बनाए रखता है। यह पश्चिम एशिया संकट और टैरिफ वॉर जैसे इवेंट्स में सुरक्षा कवच का काम करता है। बाजार गिरते ही इक्विटी वेट घटता है और डेट वेट बढ़ता है।

Daily Voice : ग्लोबल AI थीम से जुड़े शेयरों के वैल्यूएशन को लेकर रहें सतर्क, अगले 6-9 महीनों में मार्केट के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने की संभावना कम

बंधन एग्रेसिव हाइब्रिड फंड

बंधन एग्रेसिव हाइब्रिड फंड (Bandhan Aggressive Hybrid Fund) के बारे में बताते हुए प्रतीक पोद्दार ने कहा कि यह फंड सिर्फ हाई-रिस्क निवेशकों के लिए नहीं है। मॉडरेट रिस्क प्रोफाइल वाले भी इसे चुन सकते हैं। इसमें इक्विटी-डेट का बैलेंस कॉम्बिनेशन है। इसमें सिर्फ रिटर्न नहीं,रिस्क मैनेजमेंट पर भी फोकस है। निवेशकों को बार-बार रीबैलेंसिंग की जरूरत नहीं होती। यह 3-5 साल के नजरिया के लिए बेहतर है।

 

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Daily Voice : ग्लोबल AI थीम से जुड़े शेयरों के वैल्यूएशन को लेकर रहें सतर्क, अगले 6-9 महीनों में मार्केट के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने की संभावना कम

Daily Voice : INVasset PMS के पार्टनर और फंड मैनेजर अनिरुद्ध गर्ग ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि नैस्डैक कंपोजिट में हालिया गिरावट महीनों से चली आ रही बहुत ज्यादा उम्मीदों के बाद वैल्यूएशन में आया बदलाव है,न कि फंडामेंटल्स में कोई बड़ी गिरावट। वह इस स्ट्रक्चरल थीम को लेकर तो पॉज़िटिव हैं,लेकिन इसके वैल्यूएशन को लेकर सावधान हैं। उनका मानना ​​है कि पिछले दो सालों में हुई बड़ी री-रेटिंग के मुकाबले,अब इनका रिटर्न ज्यादातर चुनिंदा शेयरों और कंपनियों की कमाई पर निर्भर करेगा।

उनके मानना है कि बाजार के नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए जरूरी है कि अर्निंग का स्तर वैल्यूएशन के बराबर हो और ग्लोबल वोलैटिलिटी कम हो। लेकिन इस दौरान इनमें से किसी की भी गारंटी नहीं है। इसलिए,अगले छह से नौ महीनों में बाजार के एक सीमित दायरे में रहने और खास शेयरों पर फोकस्ड रहने की ज्यादा संभावना है। अगर अर्निंग अच्छी रहती है,तो दूसरी छमाही में बाजार धीरे-धीरे ऊपर जा सकता है।

क्या आपको लगता है कि ग्लोबल AI स्टॉक्स में अभी भी काफी बढ़त की गुंजाइश है,या आप टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में हालिया गिरावट को लेकर चिंतित हैं?

ग्लोबल AI में आसानी से मिलने वाले फायदे का ज्यादातर हिस्सा पहले ही हासिल किया जा चुका है। हाल की गिरावट (जिसमें सेमीकंडक्टर सेक्टर की वैल्यूएशन में एक ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की कमी आई और नैस्डैक में एक ही सेशन में जबरदस्त गिरावट देखी गई) असल में महीनों से चली आ रही बहुत ज्यादा उम्मीदों के बाद वैल्यूएशन का रीसेट है,न कि फंडामेंटल्स में कोई बड़ी गिरावट। इस स्ट्रक्चरल थीम को लेकर तो पॉज़िटिव नजरिया है,लेकिन इसके वैल्यूएशन को लेकर सावधानी की जरूरत है। पिछले दो सालों में हुई बड़ी री-रेटिंग के मुकाबले,अब इस सेक्टर का रिटर्न ज्यादातर चुनिंदा शेयरों और कंपनियों की कमाई पर निर्भर करेगा।

क्या निवेशकों को IT सर्विस कंपनियों और AI इकोसिस्टम में निवेश करने में जल्दबाजी से बचना चाहिए?

हैं, धैर्य रखना सही रहेगा,लेकिन यह धैर्य भी हकीकत पर आधारित होना चाहिए। भारतीय IT सर्विस कंपनियां AI साइकिल के एक मुश्किल दौर में हैं। AI से जुड़ी मांग बढ़ने और उसकी जगह लेने से पहले ही ऑटोमेशन की वजह से हर प्रोजेक्ट से होने वाली कमाई कम हो जाती है। बड़ी कंपनियों के लिए FY27 का कमजोर गाइडेंस (यानी ‘कांस्टेंट-करेंसी’के आधार पर कम सिंगल-डिजिट ग्रोथ) इसी बात को दिखाता है।

टेक्नोलॉजी कंपनियों को डील मिलने की रफ़्तार अच्छी बनी हुई है,लेकिन कीमतों का दबाव और प्रोडक्टिविटी में कमी की वजह से निकट भविष्य में अर्निंग्स की रफ़्तार सीमित रह सकती है। ऐसे में मजबूत कंपनियों में निवेश बनाए रखेंगे,लेकिन रिटर्न की उम्मीदों को कम रखने की सलाह होगी। यह सेक्टर ऐसा है जिसका साइकल बदल रहा है। ऐसे में अभी इसमें सोच समझकर निवेश बनाए रखना चाहिए और बहुत ज्यादा निवेश करने से बचाना चाहिए।

क्या आपको उम्मीद है कि अगले 6-9 महीनों में भारतीय इक्विटी मार्केट नई ऊंचाई पर पहुंचेंगे?

ऐसा हो सकता है,लेकिन हमें इसे ‘बेस केस'(सबसे ज्यादा संभावित स्थिति) नहीं मानना चाहिए। निफ्टी अभी भी अपने पीक (उच्चतम स्तर)से काफी नीचे 24,000 के आसपास है और मोमेंटम इंडिकेटर पक्के भरोसे के बजाय दुविधा की ओर इशारा कर रहे हैं। नई ऊंचाई तक पहुंचने के लिए जरूरी है कि अर्निंग,वैल्यूएशन के बराबर हो और ग्लोबल वोलैटिलिटी कम हो। लेकिन इस समय इसकी कोई गारंटी नहीं है।

अगले छह से नौ महीनों में बाजार के एक सीमित दायरे में रहने और खास स्टॉक्स पर फोकस्ड रहने की ज्यादा संभावना है। अगर कंपनियों की अर्निंग अच्छी रही,तो दूसरी छमाही में बाजार धीरे-धीरे ऊपर जा सकता है। हम रिकॉर्ड स्तर तक तेजी से पहुँचने की उम्मीद करने के बजाय,इस धीरे-धीरे होने वाले सुधार के हिसाब से अपनी रणनीति बनाएंगे।

US-Iran के बीच संभावित डील से जुड़ी गतिविधियों के अलावा,आपको आगे चलकर मार्केट के लिए कौन सी बड़ी चुनौतियां दिखती हैं?

बाजार के लिए कई चुनौतियां हैं। इनमें से पहली है, वैल्यूएशन। मार्केट में अभी भी अभी भी कुछ लोग यह मानकर चल रहे हैं सब कुछ एकदम सही तरीके से होगा। ऐसे में अगर अर्निंग उम्मीद के मुताबिक नहीं रही,तो नुकसान से बचने की गुंजाइश बहुत कम होगी। दूसरी,चुनौती बड़ी ग्लोबल टेक और AI सेक्टर में करेक्शन है। अगर विदेशी बाजारों में वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट आती है,तो विदेशी पैसा इमर्जिंग मार्केट (जिनमें भारत भी शामिल है) से बाहर निकल जाएगा। तीसरी चुनौती US में ब्याज दरों में कटौती की रफ्तार और डॉलर की मजबूती को लेकर अभी भी बनी अनिश्चितता है,जिसका सीधा असर FIIs पर पड़ता है।

चौथी चुनौती घरेलू अर्निंग की मजबूती है जहां मार्जिन पर दबाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा ट्रेड पॉलिसी को लेकर भी चिंता बनी हुई है। भारत और अमेरिका के बीच कैसा समझौता होगा,इसको लेकर स्थितियां साफ नहीं हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए बाजार में सावधानी बरतने की सलाह होगी।

क्या आपको लगता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में लंबे समय के लिए स्ट्रक्चरल निवेश के अच्छे मौके हैं?

ये स्ट्रक्चरल मौके तो हैं,लेकिन मैं इन्हें’सबसे अच्छे’कहने से बचने की जरूरत है। कई भारतीय प्लेटफॉर्म्स में मज़बूत नेटवर्क इफेक्ट और आगे बढ़ने की अच्छी गुंजाइश है,फिर भी कई प्लेटफॉर्म बहुत ज्यादा वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं। इस वैल्यूएशन में यह मान लिया जाता है कि इनका काम बिना किसी गलती के होगा,जबकि इनके लिए मुनाफा,रेगुलेशन और कड़ी प्रतिस्पर्धा असल जोखिम बने हुए हैं।

हम उन्हें एक बड़े स्ट्रक्चरल बास्केट के हिस्से के तौर पर देखते हैं,जिसमें मैन्युफैक्चरिंग,बचत का फाइनेंशियलाइज़ेशन और प्रीमियम कंजम्पशन भी शामिल हैं । ये ऐसे थीम हैं जिनकी कमाई की संभावना आज ज्यादा साफ है। लेबल से ज्यादा जरूरी है सही चुनाव करना। हम उन कुछ ऐसे प्लेटफ़ॉर्म में निवेश करेंगे जो साफ तौर पर मुनाफ़ा कमा रहे हैं और ग्रोथ के लिए किसी भी कीमत पर निवेश करने से बच रहे हैं।

 

Market trend : निफ्टी जल्द ही हासिल कर सकता है 24728 के टारगेट, आगे हफ्ते इन दो शेयरों में हो सकती है बंपर कमाई

 

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Market Outlook : हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 29 जून को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : 25 जून को भारतीय इक्विटी इंडेक्स ने दिन के दौरान हुई ज्यादातर बढ़त गंवा दी और मामूली बढ़त के साथ बंद हुए। निफ्टी 24,050 के आसपास रहा। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 109.25 अंक या 0.14 प्रतिशत बढ़कर 77,100.47 पर और निफ्टी 34.35 अंक या 0.14 प्रतिशत बढ़कर 24,056.00 पर सेयल हुआ। लगभग 1544 शेयरों में बढ़त हुई,2488 शेयरों में गिरावट आई और 180 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन,M&M,मैक्स हेल्थकेयर,मारुति सुजुकी और टाटा कंज्यूमर शामिल रहे। जबकि ONGC,पावर ग्रिड कॉर्प,हिंडाल्को और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक महिंद्रा में गिरावट देखने को मिली।

सेक्टोरल इंडेक्स मिले-जुले रहे। FMCG में 0.7%,रियल्टी में 0.3% और ऑटो इंडेक्स में 2% से ज्यादा की बढ़त हुई। जबकि IT,एनर्जी,मीडिया,मेटल और ऑयल एंड गैस इंडेक्स 0.5-1% नीचे रहे। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.5 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि दिन के शुरुआती कारोबार में हुई बढ़त के बाद प्रॉफिट बुकिंग की वजह से घरेलू बाजार बिना किसी बड़े बदलाव के बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से रुपये को सहारा मिला और कुछ राहत भी मिली,लेकिन यह बढ़त की रफ़्तार बनाए रखने के लिए काफी नहीं थी।

सेक्टर के हिसाब से देखें तो ऑटो शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। इसकी वजह रही मेटल की कीमतों में नरमी,सप्लाई चेन की दिक्कतों में कमी और महीने के दौरान रिटेल डिमांड में सुधार।

कुल मिलाकर बाजार का मूड पॉजिटिव रहा। हालांकि,FII की लगातार बिकवाली से तेजी सीमित हो सकती है। आने वाले समय में,Q1 के नतीजों को लेकर कमजोर उम्मीदों और मॉनसून की असमान स्थिति का असर बाजार के मूड पर पड़ सकता है,इसलिए इन पर नजर रखनी होगी।

Hedged.in में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट, HNI ​एंड डेरिवेटिव्स,रियांक अरोड़ा का कहना है कि भारतीय इक्विटी मार्केट में आज का ट्रेडिंग सेशन थोड़ा पॉजिटिव रहा। दिन भर उतार-चढ़ाव सीमित दायरे में रहने के बावजूद बेंचमार्क इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। अहम सपोर्ट लेवल के ऊपर बने रहना लगातार खरीदारी की रुचि को दिखाता है। मार्केट में नए ट्रिगर्स आने से पहले निवेशक सोच-समझकर कदम उठा रहे हैं।

निफ्टी 30 अंक यानी 0.12%) बढ़कर 24,050 पर बंद हुआ। यह इंडेक्स 24,000 के अहम लेवल के ऊपर बना हुआ है,जो बताता है कि शॉर्ट-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 24,000–23,950 के आसपास है और इसके बाद 23,850 के आसपास मजबूत सपोर्ट जोन है। ऊपर की तरफ, रेजिस्टेंस 24,100–24,150 और उसके बाद 24,250 पर दिख रहा है। लगातार इन लेवल के ऊपर बने रहने से और बढ़त का रास्ता खुल सकता है।

BSE सेंसेक्स 105 अंक यानी 0.14% बढ़कर 77,100 पर बंद हुआ। इंडेक्स सीमित दायरे में ट्रेड करता रहा लेकिन पॉजिटिव जोनन में बंद होने में कामयाब रहा,जो निचले लेवल पर लगातार खरीदारी का सपोर्ट दिखाता है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 76,900–76,700 के आसपास है। जबकि रेजिस्टेंस 77,300–77,500 के पास दिख रहा है। इस जोन के ऊपर ब्रेकआउट से बुलिश मोमेंटम और मजबूत हो सकता है।

कुल मिलाकर मार्केट पॉजिटिव रुख के साथ कंसोलिडेट होता रहा,जिससे पता चलता है कि सेशन के दौरान सीमित बढ़त के बावजूद खरीदारों का दबदबा बना हुआ है। जब तक अहम सपोर्ट लेवल बने हुए हैं,तब तक मार्केट का स्ट्रक्चर पॉजिटिव बना रहेगा। ट्रेडर्स अच्छे रिस्क मैनेजमेंट के साथ गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपना सकते हैं, क्योंकि मुख्य ट्रेंड अभी भी पॉजिटिव है।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स में हेड ऑफ़ रिसर्च,राजीव शरण का कहना है कि ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरकर लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल पर आना ग्लोबल कमोडिटी मार्केट की कहानी में एक बड़ा बदलाव है। यह बदलाव मांग में कमी के कारण नहीं,बल्कि जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने की वजह से आया है। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। इससे सप्लाई में आई वह रुकावट दूर हो रही है।

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े क्रूड आयातक देश भारत के लिए यह निश्चित रूप से अच्छी खबर है। तेल की कीमतों में प्रति बैरल 10 डॉलर की गिरावट से भारत का सालाना आयात बिल लगभग 12 से 15 अरब डॉलर कम हो जाता है। इससे करंट अकाउंट पर दबाव कम होता है और भारतीय रिजर्व बैंक को विकास को बढ़ावा देने के लिए उधार की लागत (ब्याज दरों) को अनुकूल बनाए रखने की अधिक गुंजाइश मिलती है।

घरेलू बाजारों ने इस पर अच्छी प्रतिक्रिया दी है। 25 जून को सेंसेक्स 77,000 के स्तर को पार कर गया और निफ्टी 24,100 के आसपास मज़बूत बना रहा। इसमें ऑटो,एविएशन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के शेयरों ने बढ़त में अहम भूमिका निभाई। भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए निकट भविष्य का आउटलुक अच्छा दिख रहा है,बशर्ते क्रूड की कीमतें 70 से 75 डॉलर प्रति बैरल की रेंज में स्थिर रहें और मॉनसून उम्मीद के मुताबिक अच्छा रहे।

इक्विरस वेल्थ के MD और बिज़नेस हेड,अंकुर पुंज का कहना है कि बाजार में लंबी छुट्टी से पहले,निवेशकों ने कारोबारी सत्र के अंतिम हिस्से में मुनाफावसूली की,जिससे बाजार मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। चूंकि मुहर्रम के कारण शुक्रवार को बाजार बंद रहेंगे,इसलिए निवेशकों ने अपनी इक्विटी होल्डिंग कम कर दी। भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमी पर अभी भी अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं,ऐसे में निवेशकों के लिए चुनिंदा शेयरों में खरीदारी करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

कोटक सिक्योरिटीज में VP टेक्निकल रिसर्च अमोल अठावले ने कहा कि इस हफ्ते बेंचमार्क इंडेक्स में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। काफी उतार-चढ़ाव के बाद,निफ्टी 0.18 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ। जबकि सेंसेक्स में 297 अंकों की बढ़त हुई। सेक्टरों की बात करें तो फार्मा इंडेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई,जबकि मेटल इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट हुई और यह 4.40 प्रतिशत नीचे आया। हफ्ते के दौरान,तेज गिरावट के बाद मार्केट को 50 डे SMA (सिंपल मूविंग एवरेज)के पास सपोर्ट मिला और इसमें तेजी से सुधार हुआ। हालांकि,एक बार फिर इसे 24,200/77,800 के रेजिस्टेंस जोन के पास प्रॉफिट बुकिंग का सामना करना पड़ा।

टेक्निकल तौर पर मार्केट ने एक रेंज-बाउंड पैटर्न बनाया है। नीचे की तरफ,इसे 50 डे SMA या 23,800/76,200 के पास सपोर्ट मिला है,जबकि 24,200-24,250/77,800-78,000 के रेजिस्टेंस लेवल के पास लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है। पोजीशनल ट्रेडर्स के लिए, 24,000/77,000 एक इमीडिएट सपोर्ट जोनन का काम करेगा। इस लेवल के ऊपर,मार्केट 24,200/77,800 को फिर से टेस्ट कर सकता है। 24,200/77,800 के लेवल को सफलतापूर्वक पार करने पर मार्केट 24,400-24,500/78,400-78,700 की ओर बढ़ सकता है।

दूसरी ओर 24,000/77,000 के नीचे जाने पर मार्केट 23,800/76,200 तक गिर सकता है। गिरावट का सिलसिला जारी रह सकता है और इंडेक्स 23,650/75,700 तक जा सकता है।

बैंक निफ्टी के लिए,सपोर्ट जोन 57,800 और 57,500 पर हैं। इन लेवल के ऊपर,तेजी 58,700-59,000 की ओर जारी रह सकती है। इसके उलट, 57,500 के नीचे जाने पर अपट्रेंड कमजोर हो सकता है।

 

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Market cues : हाल के कंसोलिडेशन के बावजूद ट्रेंड अभी भी बुल्स के पक्ष में, 24100 के ऊपर जाने पर निफ्टी में 24500 का लेवल मुमकिन

Trade setup for today : एक दिन की गिरावट के बाद निफ्टी ने अपने नुकसान का एक बड़ा हिस्सा रिकवर कर लिया और 24 जून को इसमें 0.8 प्रतिशत की बढ़त हुई। इसमें कुछ हद तक तेल की कीमतों में और गिरावट का भी योगदान रहा। हाल के कंसोलिडेशन के बावजूद,ट्रेंड अभी भी बुल्स के पक्ष में है,क्योंकि इंडेक्स मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज के ऊपर वापस आ गया है और पिछले दो सेशन में इंट्राडे आधार पर अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज को बनाए रखने में कामयाब रहा है। आगे निफ्टी को 24,100-24,200 के जोन में तत्काल रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है। अगर यह इस जोन के ऊपर मजबूती दिखाता है,तो 24,500 की तरफ बढ़ने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि,जानकारों के मुताबिक,तब तक 23,800-23,750 का जोन निफ्टी 50 के लिए तत्काल और अहम सपोर्ट एरिया का काम करेगा।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 23,852, 23,781 और 23,666

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,082, 24,153 और 24,268

निफ्टी ने पिछले दिन की रेड कैंडल के साथ एक लंबी बुलिश कैंडल बनाई,जो डेली चार्ट पर’पियर्सिंग लाइन’जैसे पैटर्न (हालांकि पूरी तरह से क्लासिकल नहीं)जैसा दिखता है। यह बताता है कि बिकवाली का दबाव कम हो रहा है और खरीदार ट्रेंड को ऊपर ले जाने के लिए आगे आ रहे हैं। आज के सेशन में इसकी पुष्टि की जरूरत है। इंडेक्स अपने शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से काफी ऊपर बना रहा,जबकि RSI बुलिश क्रॉसओवर के साथ बढ़कर 56.24 पर पहुंच गया। MACD भी सिग्नल और जीरो लाइन से ऊपर बना रहा,हालांकि हरा हिस्टोग्राम बार छोटा होता रहा। ये सभी बातें बुलिश मोमेंटम में सुधार का संकेत देती हैं,हालांकि इसके कन्फर्मेशन के लिए और खरीदारी (फॉलो-थ्रू बाइंग) की जरूरत है।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 58,279, 58,557 और 59,009

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 57,376, 57,097 और 56,646

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,678

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 56,946, 56,152

बैंक निफ्टी ने न सिर्फ बेंचमार्क निफ्टी से बेहतर प्रदर्शन किया,बल्कि 1.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद होकर पिछले दिन हुए सारे नुकसान की भरपाई भी कर ली। डेली चार्ट पर एक लंबी बुलिश कैंडल बनी,जिसने मंगलवार की रेड कैंडल को पूरी तरह कवर कर लिया। हाल के कंसोलिडेशन के बाद यह एक मजबूत पॉजिटिव संकेत है। इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से काफी ऊपर बना रहा और लगभग चार महीनों में पहली बार 58,000 के स्तर के ऊपर बंद हुआ। शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज ऊपर की ओर बढ़ते रहे। RSI बढ़कर 66.46 हो गया,जबकि MACD सिग्नल और जीरो लाइन से ऊपर बना रहा,हालांकि लगातार चौथे सेशन में भी ग्रीन हिस्टोग्राम बार और छोटा हो गया। मोमेंटम इंडिकेटर्स में थोड़ी नरमी के बावजूद,ये सभी बातें लगातार तेजी के रुझान और मजबूत अंडरलाइंग ट्रेंड की ओर इशारा करती हैं।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

24 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹1,843 करोड़ के शेयर बेचे और वे नेट सेलर बने रहे। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार तीसरे सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और ₹3,637 करोड़ के शेयर खरीदे,जिससे घरेलू बाजार को सहारा मिला।

इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव की उम्मीद को मापने वाला इंडिया VIX कल 4% गिरकर 13.38 पर आ गया और सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे बना रहा, जिससे बुल्स को राहत मिली। बुल्स का भरोसा और मज़बूत करने और मार्केट में अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए इसके 13-12 के जोन से नीचे आना जरूरी है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 24 जून को पिछले सेशन के 0.88 से बढ़कर 1.21 हो गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

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F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक:केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया

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