IMD की चेतावनी- अल-नीनो की वजह से अगस्त-सितंबर में बारिश को लेकर आया नया अनुमान, मौसम विभाग ने कही चिंता वाली बात

El Nino impact: दक्षिण-पश्चिम मानसून के दूसरे चरण यानी अगस्त और सितंबर महीने को लेकर भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक चिंताजनक पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग ने बताया है कि अल-नीनो के मजबूत होने की वजह से देश में मानसून के दूसरे छमाही के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने अगस्त 2026 के लिए बारिश और तापमान के डिटेल अनुमान के साथ-साथ प्रशांत महासागर और हिंद महासागर की मौसमी स्थितियों पर भी अपनी रिपोर्ट साझा की है।

अगस्त-सितंबर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान

IMD के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 के दूसरे चरण (अगस्त-सितंबर) के दौरान देश भर में कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) के 94 प्रतिशत से कम यानी सामान्य से कम रहने की संभावना है। इसी दौरान देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होगी।वैसे प्रायद्वीपीय भारत कुछ हिस्सों, मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत के उत्तरी क्षेत्रों और पूर्व व पूर्वोत्तर भारत के कुछ इलाकों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जा सकती है।

अगस्त महीने में कैसा रहेगा बारिश का हाल?

अगस्त 2026 के लिए विशेष रूप से जारी पूर्वानुमान में IMD ने बताया कि इस महीने भी देश भर में कुल बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) के 94 प्रतिशत से कम यानी सामान्य से कम रहने की उम्मीद है। देश के बड़े हिस्से में सूखा या कम बारिश का सामना करना पड़ सकता है। इस महीने में भी पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के कई क्षेत्रों, उत्तर-पश्चिम व मध्य भारत के कुछ हिस्सों और पूर्व व पूर्वोत्तर भारत के अलग-अलग इलाकों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान जताया गया है।

अगस्त में तापमान का पूर्वानुमान: बढ़ेगी गर्मी और उमस

बारिश में कमी के साथ-साथ अगस्त महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहने वाला है। अगस्त 2026 के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक औसत अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। सिर्फ उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों और उससे सटे दक्षिणी प्रायद्वीप के छिटपुट इलाकों में औसत अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है। देश के अधिकांश हिस्सों में रात और सुबह का मासिक औसत न्यूनतम तापमान भी सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक दर्ज किए जाने की उम्मीद है।

अल-नीनो बना बड़ी चिंता, इसके और मजबूत होने के संकेत

मौसम विभाग ने मानसून के दूसरे चरण में बारिश की कमी की मुख्य वजह भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में बने अल-नीनो असर को बताया है। अभी मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। ऐसे में मॉडरेट अल-नीनो देखने को मिल रहा है। मानसून मिशन कपल्ड फॉरकास्ट सिस्टम (MMCFS) के पूर्वानुमान के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून के बाकी सीजन के दौरान अल-नीनो की यह स्थिति और अधिक मजबूत होने की आशंका है, जो मानसूनी हवाओं और बारिश को प्रभावित कर सकती है।

हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) की क्या है स्थिति?

अभी हिंद महासागर में न्यूट्रल इंडियन ओशिनिक डिपोल (IOD) की स्थिति बनी हुई है। MMCFS के मॉडल संकेत देते हैं कि मानसून सीजन के बाकी बचे समय में यह तटस्थ स्थिति जारी रह सकती है। कुछ अंतरराष्ट्रीय पूर्वानुमान केंद्रों के जलवायु अनुमानों से संकेत मिलता है कि सितंबर 2026 के दौरान पॉजिटिव आईओडी स्थितियां भी बन सकती हैं। ये मानसून के लिए कुछ हद तक राहतकारी साबित हो सकती हैं।

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 ‘इन-हैंड सैलरी कितनी मिलेगी?’ बस इतना पूछा और कंपनी ने कर दिया रिजेक्ट, सोशल मीडिया पर छिड़ गई बहस

नौकरी की तलाश में हर उम्मीदवार चाहता है कि उसे कंपनी, काम और सैलरी से जुड़ी पूरी जानकारी पहले से मिल जाए। लेकिन एक शख्स के लिए सिर्फ सैलरी के बारे में सवाल पूछना ही परेशानी का कारण बन गया। उसने जॉब ऑफर मिलने के बाद जब अपनी इन-हैंड सैलरी जाननी चाही, तो कंपनी के जवाब ने उसे हैरान कर दिया। इस पूरे मामले को उम्मीदवार ने Reddit पर शेयर किया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर नौकरी में पारदर्शिता और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

कई लोगों ने कहा कि किसी भी जॉब को स्वीकार करने से पहले वेतन, कटौती और मिलने वाली रकम की जानकारी लेना एक सामान्य प्रक्रिया है। वहीं, कुछ यूजर्स ने कंपनी के रवैये पर सवाल उठाए और इसे नौकरी देने वालों की सोच से जोड़कर देखा।

2 LPA की नौकरी, लेकिन सवाल पूछते ही बदल गया रवैया

उम्मीदवार ने बताया कि उसने Indeed के जरिए एक कंपनी में आवेदन किया था। कुछ समय बाद एक छोटी कंपनी के प्रतिनिधि ने उससे संपर्क किया और बताया कि इस पद के लिए 2 LPA का पैकेज ऑफर किया जा रहा है। जब उम्मीदवार ने नौकरी में रुचि दिखाई, तो उसने सिर्फ इतना पूछा कि कटौती के बाद हर महीने मिलने वाली इन-हैंड सैलरी कितनी होगी।

‘अगर सिर्फ सैलरी चिंता है तो हमारी कंपनी सही नहीं’

उम्मीदवार के सवाल का जवाब देने के बजाय रिक्रूटर ने कहा कि अगर सैलरी ही आपकी मुख्य चिंता है, तो शायद यह कंपनी आपके लिए सही जगह नहीं है। इसके बाद कंपनी ने उम्मीदवार को शुभकामनाएं देते हुए बातचीत खत्म कर दी। अचानक मिले इस जवाब से उम्मीदवार हैरान रह गया।

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कैंडिडेट ने कहा- सवाल पूछना गलत नहीं था

उम्मीदवार ने दोबारा जवाब देते हुए कहा कि उसका सवाल सिर्फ पैसों को लेकर नहीं था, बल्कि वह ऑफर को सही तरीके से समझना चाहता था। उसने लिखा कि नौकरी करने का एक बड़ा कारण कमाई भी होती है, इसलिए सैलरी से जुड़ी जानकारी लेना एक सामान्य और जरूरी सवाल है। उसने यह भी कहा कि अगर संभावित कर्मचारियों के साथ कंपनी का रवैया ऐसा है, तो कंपनी के लिए भी शुभकामनाएं।

सोशल मीडिया ने कहा- ‘अच्छा हुआ वहां नौकरी नहीं मिली’

पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स उम्मीदवार के समर्थन में आ गए। लोगों ने कहा कि किसी भी नौकरी को स्वीकार करने से पहले इन-हैंड सैलरी, कटौती और अन्य शर्तों की जानकारी लेना बिल्कुल जायज है। एक यूजर ने लिखा कि 2 LPA का पैकेज काफी कम है और ऐसी जगह काम करने से बच जाना बेहतर है।

कंपनी के रवैये पर उठे सवाल

कई लोगों ने कहा कि अगर कोई कंपनी शुरुआती बातचीत में ही सैलरी से जुड़े सवालों पर ऐसा व्यवहार करती है, तो भविष्य में कर्मचारियों के साथ उसका रवैया कैसा होगा, यह सोचने वाली बात है। एक यूजर ने मजाक में कहा कि अगर बाद में कर्मचारी वेतन बढ़ाने की मांग करता, तो शायद कंपनी उसे यह कहकर मना कर देती कि “हम यहां अनुभव के लिए काम करते हैं।”

जॉब मार्केट में पारदर्शिता की मांग

इस घटना ने एक बार फिर नौकरी में पारदर्शिता को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। उम्मीदवारों का कहना है कि सैलरी, इन-हैंड पेमेंट और कंपनी की नीतियों के बारे में पहले से स्पष्ट जानकारी मिलना जरूरी है, ताकि दोनों पक्ष सही फैसला ले सकें।

किसिंग वीडियो वायरल होने के बाद बदला पूरा मामला, सोशल मीडिया ने पूछ लिया ये सवाल

Video: बेंगलुरु में ₹60 हजार किराया देकर मिला ऐसा व्यू, महिला ने पूछा, ‘क्या इतनी कीमत सही है’

बेंगलुरु में बढ़ते किराए अक्सर लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं। खासकर आईटी हब कहे जाने वाले इस शहर में लोग यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि महंगे किराए के बदले उन्हें वास्तव में क्या मिल रहा है। अब एक महिला ने अपने किराए के घर से दिखने वाले शानदार नजारे का वीडियो साझा किया है, जिसने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। महिला ने अपने कमरे से दिखने वाले व्यू को दिखाते हुए लोगों से पूछा कि क्या हर महीने ₹60,000 किराया देना इस लोकेशन और नजारे के लिए सही फैसला है?

वीडियो सामने आने के बाद कुछ लोगों ने इसे महंगे किराए का उदाहरण बताया, तो कुछ ने खूबसूरत माहौल और शांति को इसकी बड़ी खासियत माना। इस वीडियो ने एक बार फिर बेंगलुरु के रेंट कल्चर और घर की कीमत तय करने वाले फैक्टर्स पर चर्चा शुरू कर दी है।

घर नहीं, व्यू ने खींचा लोगों का ध्यान

आमतौर पर लोग अपने घर की सजावट या सुविधाएं दिखाते हैं, लेकिन बेंगलुरु की करिश्मा नाम की महिला ने अपने कमरे से दिखने वाले नजारे को सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने लोगों से पूछा कि क्या उनके घर से मिलने वाला यह शानदार व्यू हर महीने दिए जा रहे ₹60,000 किराए को सही ठहराता है?

महिला ने लोगों से मांगी राय

करिश्मा ने वीडियो में बताया कि उन्होंने पहले भी अपने घर के किराए के बारे में जानकारी दी थी। इस बार उन्होंने अपने कमरे से बाहर का नजारा दिखाते हुए दर्शकों से पूछा कि क्या यह जगह ₹60 हजार महीने के किराए के लायक है या फिर वह ज्यादा पैसे चुका रही हैं।

उन्होंने वीडियो के कैप्शन में भी लिखा, “बताइए आपको यह व्यू कैसा लगा।”

खुला आसमान और शांत नजारा बना चर्चा का विषय

वीडियो में कमरे से आसपास का बड़ा और खुला इलाका दिखाई देता है। हरियाली, खुली जगह और शांत माहौल देखकर कई लोगों को यह व्यू पसंद आया। करिश्मा ने खुद कोई फैसला नहीं सुनाया, बल्कि यह जिम्मेदारी सोशल मीडिया यूजर्स पर छोड़ दी कि वे तय करें कि यह नजारा किराए की कीमत के हिसाब से सही है या नहीं।

सोशल मीडिया पर छिड़ी किराए को लेकर बहस

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों की अलग-अलग राय सामने आई। कुछ यूजर्स का कहना था कि ₹60,000 हर महीने सिर्फ किराए के लिए बहुत ज्यादा हैं, चाहे व्यू कितना भी अच्छा क्यों न हो। वहीं कुछ लोगों ने घर के आसपास के शांत माहौल और खूबसूरत नजारे की तारीफ की। एक यूजर ने लिखा कि यह व्यू शानदार है, जबकि कई अन्य लोगों ने भी इसे पसंद किया।

₹60 हजार का किराया या खूबसूरत नजारे की कीमत?

करिश्मा का वीडियो एक बार फिर दिखाता है कि बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में किराए की कीमत सिर्फ घर के आकार से नहीं, बल्कि लोकेशन, सुविधाओं और मिलने वाले अनुभव से भी तय होती है। अब फैसला लोगों के हाथ में है कि यह व्यू ₹60 हजार महीने के किराए के लायक है या नहीं।

700 बार रिजेक्ट हुआ, फिर भी नहीं मानी हार… आज 22 LPA की नौकरी कर रहा है ये युवक

700 बार रिजेक्ट हुआ, फिर भी नहीं मानी हार… आज 22 LPA की नौकरी कर रहा है ये युवक

कैरियर में बदलाव का फैसला अक्सर आसान नहीं होता। इसके साथ अनिश्चितता, नई चुनौतियां और खुद को फिर से साबित करने का दबाव भी जुड़ा होता है। कई लोग सुरक्षित रास्ता चुनते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो अपने सपनों के लिए जोखिम उठाने से पीछे नहीं हटते। नई स्किल्स सीखना, लगातार मेहनत करना और असफलताओं के बावजूद आगे बढ़ते रहना ही उन्हें दूसरों से अलग बनाता है। हाल ही में ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा। एक 24 वर्षीय युवक ने अपने संघर्ष, करियर बदलने के फैसले और सफलता तक पहुंचने के सफर को साझा किया।

उसकी कहानी बताती है कि सही दिशा में लगातार प्रयास, धैर्य और सीखने की इच्छा हो तो सीमित संसाधन या अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी सफलता की राह में स्थायी बाधा नहीं बनती। यही वजह है कि आज उसकी यह कहानी हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

CAT की तैयारी छोड़ चुना अलग रास्ता

2022 में BBA की पढ़ाई पूरी करने के बाद युवक CAT परीक्षा की तैयारी कर रहा था। लेकिन उसे लगा कि अच्छे बिजनेस स्कूल में दाखिला पाने के लिए कई साल लग सकते हैं। इसलिए उसने इंतजार करने के बजाय नया रास्ता चुनने का फैसला किया।

बिना इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के सीखी Data Science

युवक ने Data Science में करियर बनाने का फैसला किया, जबकि उसके पास न इंजीनियरिंग की डिग्री थी और न ही कोडिंग का अनुभव। उसने करीब डेढ़ साल तक YouTube और Udemy की मदद से SQL, Python और अन्य जरूरी स्किल्स सीखी।

उसके मुताबिक, यह दौर बेहद कठिन था। जहां उसके दोस्त नौकरी कर रहे थे या विदेश पढ़ाई के लिए जा रहे थे, वहीं वह रोज घंटों बैठकर कोडिंग सीख रहा था।

अकेलापन, तनाव और Panic Attacks ने बढ़ाई मुश्किलें

सिर्फ पढ़ाई ही चुनौती नहीं थी। गैर-तकनीकी बैकग्राउंड होने की वजह से लोगों की आलोचना, परिवार और दोस्तों का कम समर्थन और भविष्य की चिंता उसे लगातार परेशान करती रही। उसने बताया कि कई बार रात में घबराहट और Panic Attacks तक आते थे।

700 से ज्यादा आवेदन, फिर मिली पहली नौकरी

नई स्किल्स सीखने के बाद भी नौकरी मिलना आसान नहीं था। अधिकांश HR इंटरव्यू से पहले ही उसका रिज्यूमे रिजेक्ट कर देते थे क्योंकि उसके पास टेक्निकल डिग्री और अनुभव नहीं था। करीब 700 से अधिक आवेदन करने के बाद उसे पहली नौकरी मिली, जहां उसकी सैलरी 25 हजार रुपये प्रति माह थी।

पहली नौकरी भी छूटी, दो महीने की सैलरी भी नहीं मिली

सिर्फ तीन महीने बाद स्टार्टअप में काम खत्म होने की वजह से उसकी नौकरी चली गई। इतना ही नहीं, कंपनी ने आखिरी दो महीने का वेतन भी नहीं दिया। उसने यह बात घरवालों से भी छिपाकर रखी और अगले ही दिन फिर से नौकरी की तलाश शुरू कर दी।

दूसरी नौकरी से मिली नई उड़ान

करीब चार महीने बाद उसे 6 LPA की नौकरी मिली। यहां काम करते हुए उसने लगातार नई स्किल्स सीखीं और लगभग 1.7 साल बाद बेहतर अवसर की तलाश में नौकरी बदली।

इस मेहनत का नतीजा यह रहा कि आज वह एक अमेरिकी MNC में 22 LPA के पैकेज पर काम कर रहा है।

इन स्किल्स ने दिलाई बड़ी सफलता

युवक के अनुसार Data Analyst बनने के लिए इन स्किल्स पर मजबूत पकड़ जरूरी है—

  • SQL
  • Python
  • Power BI
  • Tableau
  • Communication Skills

उसका कहना है कि इंटरव्यू में सिर्फ तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि अपने विचार स्पष्ट तरीके से रखना भी बेहद जरूरी होता है।

नौकरी पाने के लिए अपनाई ये खास रणनीति

उसने बताया कि केवल ऑनलाइन आवेदन करना काफी नहीं होता। उसने अपना रिज्यूमे ATS फ्रेंडली बनाया, हर जॉब पोस्ट के मुताबिक जरूरी Keywords जोड़े और LinkedIn पर संबंधित कंपनियों के कर्मचारियों से Referral भी मांगा। इसी रणनीति से उसे कई इंटरव्यू कॉल मिले।

अब खुद की कंपनी बनाने का सपना

24 वर्षीय युवक का अगला लक्ष्य अपनी खुद की कंपनी शुरू करना है, जो Data Science और Analytics Solutions उपलब्ध कराए। उसका मानना है कि लगातार सीखने और मेहनत करने से किसी भी बैकग्राउंड का व्यक्ति अपने करियर में बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।

एक दिन देर से ही सही पूरे देश में छा तो गया मानसून पर बारिश के ये 3 आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले, IMD का बिग अपडेट

Monsoon Rain Update: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गुरुवार को एक बड़ा अपडेट शेयर किया है। इसके मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून ने राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के बचे हुए हिस्सों में आगे बढ़ते हुए पूरे देश को कवर कर लिया है। पूरे देश में मानसून के छाने में सामान्य तिथि (8 जुलाई) के मुकाबले इस बार महज एक दिन की देरी हुई है। भले ही मानसून पूरे भारत में पहुंच चुका है लेकिन मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए बारिश के तीन आंकड़े देश के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं। देश में इस समय कुल मिलाकर बारिश की कमी बनी हुई है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो स्थितियों का उभरना इसके पीछे का एक मुख्य कारण माना जा रहा है। अल नीनो की स्थिति भारत में कम बारिश की वजह बनती है। आइए जानते हैं मौसम विभाग के वे 3 आंकड़े जो चिंता बढ़ा रहे हैं:

चिंता बढ़ाने वाले बारिश के 3 बड़े आंकड़े

IMD के डेटा के मुताबिक मानसूनी सीजन की शुरुआत से लेकर अब तक बारिश के आंकड़ों में गंभीर गिरावट दर्ज की गई है। इसे नीचे बिंदुवार समझा जा सकता है-

1- जून महीने में 40% की भारी कमी

भारत में इस साल जून के महीने में करीब 40 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई थी। इसमें सबसे बुरी मार मध्य भारत पर पड़ी। यहां जून में 50.4 प्रतिशत की भारी कमी देखी गई। इतना ही नहीं देश में इस साल जून के दौरान साल 1901 के बाद से अब तक की पांचवीं सबसे कम (99.5 मिमी) बारिश दर्ज की गई है।

2- ओवरऑल सीजनल डेफिसिट अभी भी 14% पर

भले ही जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश दिख रही है लेकिन IMD के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 9 जुलाई की अवधि के लिए देश में कुल मिलाकर बारिश की कमी अभी भी 14 प्रतिशत पर बनी हुई है।

3- जुलाई महीने का सूखा अनुमान (94% LPA)

मौसम विभाग ने 30 जून को जारी अपने मासिक पूर्वानुमान में बताया था कि जुलाई के पहले 7 से 10 दिनों में देश भर में बारिश होगी (जो वर्तमान में दिख भी रही है) लेकिन इसके साथ ही विभाग ने आगाह किया है कि पूरा जुलाई महीना सामान्य से अधिक सूखा रहेगा। जुलाई में देश भर में होने वाली बारिश दीर्घावधि औसत (LPA) का महज 94 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है।

क्या होता है LPA?

एलपीए (Long-Period Average) का मतलब किसी दिए गए समय (जैसे एक महीना या सीजन) के दौरान किसी विशेष क्षेत्र में दर्ज की गई बारिश के उस औसत से होता है जो आम तौर पर 30 से 50 वर्षों की एक लंबी अवधि का निकाला जाता है। वर्ष 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर पूरे देश में मौसमी बारिश का एलपीए (LPA) 87 सेमी है।

जुलाई के शुरुआती 9 दिनों में रहा बड़ा सरप्लस

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक अगर सिर्फ जुलाई महीने के शुरुआती आंकड़ों को देखें तो भारत ने अब तक बारिश का एक बड़ा सरप्लस (अधिकता) देखा है। जहां जुलाई के पहले 9 दिनों में सामान्य बारिश का आंकड़ा 73.8 मिमी होता है, वहीं देश में इस अवधि में अब तक 101.9 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है।

इस साल सामान्य से कम रह सकती है कुल मानसूनी बारिश

केरल में इस साल मानसून की शुरुआत 4 जून को हुई थी जिसने देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन (जून से सितंबर) की शुरुआत की थी। आमतौर पर केरल में मानसून 1 जून को दस्तक देता है। मौसम विभाग के कुल पूर्वानुमान के मुताबिक इस साल पूरे मानसून सीजन में होने वाली कुल बारिश दीर्घावधि औसत (LPA) की सिर्फ 90 प्रतिशत होने की संभावना है। इसमें 4 प्रतिशत का मॉडल एरर शामिल है। अल नीनो की स्थिति के चलते इस कमी को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

Monsoon Watch 1 July: पंजाब और हरियाणा में भी हुई मानसून की एंट्री पर दिल्ली में नहीं! अब IMD ने जारी किया ये नया अनुमान

Progress of SW Monsoon: देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार लगातार तेज हो रही है। 1 जुलाई को मानसून ने उत्तर भारत के कई नए इलाकों में धमाकेदार एंट्री मार ली है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक मानसून अब पंजाब और हरियाणा के भी कुछ हिस्सों में पहुंच गया है लेकिन देश की राजधानी दिल्ली को इसने अभी थोड़ा तरसाया है। वैसे दिल्लीवालों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा क्योंकि मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर में मानसून के दस्तक देने को लेकर बेहद राहत भरा नया अनुमान जारी किया है।

पंजाब-हरियाणा समेत इन राज्यों में बढ़ा मानसून, जानें कहां से गुजर रही सीमा

IMD के मुताबिक एक जुलाई को दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तर अरब सागर के कुछ और हिस्सों, गुजरात, पूरे दमन और दीव, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ गया है। इसके अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के बचे हुए हिस्सों सहित पूरे जम्मू-कश्मीर और हरियाणा व पंजाब के कुछ हिस्सों में मानसून ने अपनी पहुंच दर्ज करा दी है। अभी मानसून की उत्तरी सीमापोरबंदर, वल्लभ विद्यानगर, शाजापुर, नौगांव, मिर्जापुर, आजमगढ़, अयोध्या, बदायूं, मेरठ, करनाल, गुरदासपुर से होकर गुजर रही है।

दिल्ली में कब आएगा मानसून? IMD का नया अनुमान

भले ही 1 जुलाई की एंट्री में दिल्ली का नाम सीधे तौर पर शामिल नहीं रहा लेकिन मौसम विभाग ने साफ कर दिया है कि दिल्ली के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार अगले 2 दिनों के भीतर दक्षिण-पश्चिम मानसून के उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के कुछ और हिस्सों, पूरे हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली, पंजाब और राजस्थान के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ने के लिए मौसम का सिस्टम पूरी तरह तैयार है। यानी अगले 48 घंटों में दिल्ली में मानसून की आधिकारिक एंट्री हो जाएगी।

पूरे हिमाचल प्रदेश में मानसून सक्रिय, सामान्य से 6 दिन की देरी

पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश से बड़ी खबर है कि बुधवार को मानसून ने पूरे राज्य को आधिकारिक तौर पर कवर कर लिया है। हिमाचल में मानसून का यह आगमन सामान्य तारीख से 6 दिन की देरी से हुआ है। 1 जुलाई को मानसून ने शिमला जिले (शिमला शहर सहित), सिरमौर, मंडी, कुल्लू, लाहुल-स्पीति और कांगड़ा के बचे हुए हिस्सों को कवर कर लिया।

इसके साथ ही सोलन, ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और चंबा जिलों में भी मानसून पूरी तरह फैल गया है। राज्य में इस पूरे हफ्ते व्यापक बारिश होने की उम्मीद है। 2 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जिससे हिमाचल समेत पूरे क्षेत्र में बारिश की गतिविधियों में और तेजी आएगी।

जुलाई महीने के लिए पूरे देश का ओवरऑल वेदर आउटलुक

मौसम विभाग ने जुलाई 2026 के महीने के लिए देश भर में होने वाली औसत बारिश का भी एक अनुमान जारी किया है। आईएमडी के मुताबिक जुलाई के दौरान पूरे देश में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम रहने की सबसे अधिक संभावना है।

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1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर जुलाई में देश भर में वर्षा का लॉन्ग-पीरियड एवरेज (LPA) लगभग 280.4 मिमी हो सकता है। देश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है लेकिन उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ इलाकों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक बारिश देखी जा सकती है।

2026 की सबसे डिमांडिंग नौकरियां! अगर सीख लीं ये 3 स्किल्स, तो कंपनियां देंगी 30 लाख रुपए तक का पैकेज!

highest paying jobs 2026

highest paying jobs 2026: जून के अंत और जुलाई की शुरुआत भारत में कॉलेज ग्रेजुएट्स (Freshers) के पास आउट होने और वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए 'हाफ-इयरली' स्विच प्लान करने का समय होता है। यही कारण है कि इस समय इंटरनेट और गूगल ट्रेंड्स पर High-Paying Tech Skills की सर्च अपने चरम पर है।

 

पारंपरिक कोडिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से हटकर अब टेक इंडस्ट्री का पूरा फोकस AI (Artificial Intelligence), Data Science और Cloud Computing पर शिफ्ट हो चुका है। आइए समझते हैं कि 2026 में इन सेक्टर्स में कितनी सैलरी मिल रही है और कौन सी स्किल्स आपको सबसे आगे रख सकती हैं।

2026 Salary Snapshot : स्किल्स और कमाई का पूरा ब्योरा

भारतीय टेक मार्केट (विशेषकर बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम जैसे हब्स) में इन तीनों डोमेन के लिए अनुभव के आधार पर मिलने वाला सालाना पैकेज (LPA) इस प्रकार है:

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Deep Dive: इन 3 स्किल्स में ऐसा क्या खास है?

1. Artificial Intelligence (AI) & ML Engineer

आज कंपनियां सिर्फ AI टूल्स का इस्तेमाल नहीं कर रही हैं, बल्कि वे अपने खुद के कस्टम AI मॉडल्स और Generative AI (LLMs) ऐप्स बना रही हैं।

  • जरूरी स्किल्स : Python, TensorFlow, PyTorch, NLP (Natural Language Processing), और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग।
  • कमाई का सच : इस फील्ड में सचमुच कुशल लोगों की भारी कमी है, इसलिए अनुभवी इंजीनियर्स को ₹30 लाख से ₹45 लाख तक का पैकेज आसानी से मिल रहा है।

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2. Cloud Computing (Architect/DevOps)

अब लगभग हर छोटी-बड़ी कंपनी अपना डेटा लोकल सर्वर्स से हटाकर क्लाउड पर ले जा चुकी है। नैसकॉम (NASSCOM) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की जीडीपी में क्लाउड टेक का योगदान लगातार बढ़ रहा है।

  • जरूरी स्किल्स : Amazon Web Services (AWS), Microsoft Azure, Google Cloud Platform (GCP), और Docker/Kubernetes जैसी कंटेनराइजेशन टूल्स।
  • कमाई का सच : यदि आप क्लाउड सर्टिफाइड (जैसे AWS Certified Solutions Architect) हैं, तो फ्रेशर होने पर भी आपका शुरुआती पैकेज आम डेवलपर्स से 30% तक ज्यादा होता है।

3. Data Science & Analytics

  • “Data is the new oil” – कंपनियां रोज़ाना करोड़ों गीगाबाइट डेटा जनरेट करती हैं। इस डेटा को साफ करके, समझकर बिजनेस के काम लायक फैसले लेने का काम डेटा साइंटिस्ट करते हैं।
  • जरूरी स्किल्स : SQL, Advanced Excel, Power BI या Tableau (विजुअलाइजेशन के लिए), और Python (Pandas/NumPy)।
  • कमाई का सच : यह फील्ड उन लोगों के लिए भी बेहतरीन प्रवेश द्वार है जो नॉन-कंप्यूटर साइंस (जैसे कॉमर्स या प्योर साइंस) बैकग्राउंड से आते हैं।

Expert Advice : करियर की शुरुआत कैसे करें?

सीक्रेट टिप: आज के समय में सिर्फ सर्टिफिकेट्स (Certificates) की वैल्यू नहीं है। कंपनियां आपका GitHub Portfolio और लाइव प्रोजेक्ट्स देखना चाहती हैं। अगर आप कॉलेज स्टूडेंट हैं या जॉब बदलना चाहते हैं, तो आज ही से छोटे-छोटे AI या डेटा एनालिसिस प्रोजेक्ट्स बनाकर उन्हें LinkedIn पर शेयर करना शुरू कर दें।

 

El Nino Impact in July: IMD के मंथली आउटलुक में जुलाई में भी मानसून वाली बारिश का हाल ठीक नहीं, अल नीनो का खतरा यहां तक पहुंचा

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई 2026 के लिए अपना मासिक आउटलुक जारी कर दिया है। मौसम विभाग का यह पूर्वानुमान चिंता बढ़ाने वाला है। आईएमडी के मुताबिक जुलाई के महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की बारिश का हाल ठीक नहीं रहने वाला है और इसके सामान्य से कम होने की पूरी संभावना है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो को माना जा रहा है। इसका खतरा अब और बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

जुलाई में सामान्य से कम रहेगी बारिश: IMD का पूर्वानुमान

IMD द्वारा मल्टी-मॉडल एनसेंबल फोरकास्टिंग सिस्टम के आधार पर अपने पूर्वानुमान जारी किए गए हैं। इसके मुताबिक जुलाई के दौरान पूरे देश में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम (<94% of Long Period Average – LPA) रहने की सबसे अधिक संभावना है।

क्या है बारिश का सामान्य आंकड़ा (LPA)?

साल 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर जुलाई महीने के लिए पूरे देश की दीर्घकालिक औसत वर्षा लगभग 280.4 मिमी है। IMD का पूर्वानुमान है कि देश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई में कम बारिश होगी। उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में बारिश सामान्य से ऊपर या सामान्य रहने की संभावना है।

मजबूत हो रहा है अल नीनो, न्यूट्रल रहेगा आईओडी

मौसम विभाग ने मानसून की बारिश पर असर डालने वाले वजहों के बारे में भी बताया है। IMD के मुताबिक अभी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के ऊपर कमजोर अल नीनो की स्थिति बनी हुई है। लेकिन मानसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) और अन्य वैश्विक जलवायु मॉडलों के ताजा संकेत बताते हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह अल नीनो स्थितियां और अधिक मजबूत हो सकती हैं।

इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति कैसी है?

इस समय हिंद महासागर में न्यूट्रल आईओडी की स्थिति देखी जा रही है। मॉडल के पूर्वानुमानों के अनुसार, पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह न्यूट्रल आईओडी स्थिति ही बनी रहने की संभावना है। इंडियन ओशन डाइपोल हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के समुद्री सतह के तापमान में अंतर को दर्शाने वाली जलवायु सिस्टम है। सामान्य तौर पर यदि IOD सकारात्मक रहता है तो यह भारतीय मानसून को मजबूत करने में मदद करता है। साथ ही अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर देता है। लेकिन इस बार IOD के तटस्थ रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि यह मानसून को अतिरिक्त मजबूती नहीं दे पाएगा और अल नीनो का प्रभाव अधिक हावी रहेगा।

जुलाई में सताएगी गर्मी, तापमान रहेगा सामान्य से अधिक

कम बारिश के अनुमान के बीच जुलाई के महीने में देशवासियों को सामान्य से अधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। जुलाई के दौरान, देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है। हालांकि, पश्चिम-मध्य भारत के कुछ छिटपुट इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है। रात के समय या न्यूनतम तापमान की बात करें तो देश के अधिकांश क्षेत्रों में यह भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। सिर्फ मध्य और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ अलग-अलग हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य रह सकता है।

कम बारिश से बढ़ेंगी चुनौतियां, तैयारी करने की सलाह

आईएमडी ने आगाह किया है कि जुलाई में सामान्य से कम बारिश होने के कारण कई मोर्चों पर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। बारिश की कमी के कारण कृषि, जल संसाधन, जलविद्युत उत्पादन, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और पीने के पानी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

मौसम विभाग ने बताया कि वह नुकसान को कम करने के लिए विस्तारित अवधि के पूर्वानुमान, जिला-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान, कृषि-मौसम विज्ञान सलाहकार सेवाएं और प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान जारी करता रहता है। ये किसान, आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और बिजली क्षेत्र के योजनाकारों के लिए मददगार हैं।

अगला पूर्वानुमान कब?

आईएमडी द्वारा मानसून सीजन के दूसरे भाग (अगस्त + सितंबर 2026) के लिए और विशेष रूप से अगस्त महीने की बारिश का पूर्वानुमान जुलाई 2026 के अंत में जारी किया जाएगा