UCC Bill West Bengal: पश्चिम बंगाल में सोमवार को UCC बिल होगा पेश, जानें इसमें क्या है खास?

UCC Bill West Bengal: पश्चिम बंगाल अब समान नागरिक संहिता (UCC) की दिशा में कदम बढ़ाने वाला अगला भाजपा शासित राज्य बनने जा रहा है। इस सोमवार को राज्य विधानसभा में UCC बिल पेश किया जाएगा। गौरतलब है कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में UCC लागू करने का वादा किया था और इसे नई सरकार की प्राथमिक प्राथमिकताओं में शामिल किया था।

बता दें कि पश्चिम बंगाल उन BJP-शासित राज्यों की बढ़ती सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने UCC की दिशा में कदम उठाए हैं। जबकि उत्तराखंड ने इसे सबसे पहले लागू किया था, जिसके बाद असम, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात ने भी ऐसा किया।

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) क्या है?

UCC का मकसद धर्म-आधारित पर्सनल कानूनों की जगह एक ऐसा एकसमान कानूनी ढांचा लाना है जो सभी नागरिकों के लिए – चाहे उनका धर्म कोई भी हो – शादी, तलाक, विरासत, संपत्ति के बंटवारे और गोद लेने जैसे सिविल मामलों को नियंत्रित करे।

इसके समर्थकों का तर्क है कि यह कानून के सामने समानता सुनिश्चित करता है और धर्म-आधारित पर्सनल कानूनों से होने वाले भेदभाव को खत्म करता है।

पश्चिम बंगाल के UCC में क्या-क्या शामिल होगा?

भाजपा द्वारा प्रस्तावित ढांचे के आधार पर, इस विधेयक में निम्नलिखित मुद्दों को संबोधित किए जाने की उम्मीद है:

क्षेत्रक्या बदलाव होंगे
विवाह (Marriage)सभी समुदायों के लिए विवाह की समान न्यूनतम कानूनी उम्र; सभी शादियों का अनिवार्य पंजीकरण
लैंगिक समानता (Gender Equality)बहुविवाह पर प्रतिबंध; महिलाओं को संपत्ति और उत्तराधिकार में समान अधिकार; धर्म की परवाह किए बिना समान कानूनी सुरक्षा
लिव-इन संबंध (Live-in Relationships)लिव-इन संबंधों का शुरुआत और अंत दोनों समय अनिवार्य पंजीकरण, निर्धारित प्राधिकरण के पास
तलाक (Divorce)तलाक की प्रक्रिया के लिए एक समान कानूनी ढांचा, जो धर्म-आधारित या पारंपरिक तरीकों की जगह लेगा; दोनों पक्षों को समान कानूनी अधिकार और राहत

पश्चिम बंगाल में यह बात खास तौर पर क्यों अहम है?

राजनीतिक नेताओं ने बताया है कि अल्पसंख्यक बहुल जिलों – मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तरी दिनाजपुर के कुछ हिस्सों में इसका बड़ा राजनीतिक और सामाजिक असर हो सकता है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं का एक वर्ग UCC प्रस्ताव का स्वागत कर रहा है। उनका कहना है कि इससे शादी, तलाक और विरासत से जुड़े उनके कानूनी अधिकार मजबूत हो सकते हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

भाजपा के लिए UCC एक लंबे समय से चला आ रहा वैचारिक और नीतिगत संकल्प है। अगर यह विधेयक पारित हो जाता है, तो इसे पश्चिम बंगाल की पहली भाजपा सरकार के सबसे महत्वपूर्ण विधायी सुधारों में से एक माना जाएगा।

इस पर राजनीतिक बहस कैसी हो सकती है?

समर्थक UCC को कानूनी एकरूपता और लैंगिक समानता की दिशा में एक कदम के तौर पर देखते हैं। आलोचकों के धर्म-आधारित पर्सनल लॉ और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों पर इसके संभावित असर को लेकर चिंता जताने की उम्मीद है। यह बहस पश्चिम बंगाल जैसे विविध जनसंख्या और राजनीतिक संरचना वाले राज्य में काफी तीखी हो सकती है।

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Ketan Agarwal Murder Case: ‘अगर उसने हमें बताया होता…’: केतन अग्रवाल मर्डर केस में सिया के भाई ने किया सनसनीखेज दावा

Ketan Agarwal Murder Case: केतन अग्रवाल की हत्या की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले में नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब पीड़ित और आरोपी सिया गोयल के परिवार के बयानों ने इस केस को नया मोड़ दे दिया है। पुलिस पूछताछ के दौरान सिया के बड़े भाई साहिल गोयल ने बताया कि परिवार को कभी यह नहीं बताया गया था कि सिया अपनी शादी से खुश नहीं थी। CNN-News18 के सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान पुलिस ने साहिल से पूछा कि क्या परिवार को पता था कि सिया इस शादी से खुश नहीं थी या उसने इस रिश्ते पर कोई आपत्ति जताई थी।

इसके जवाब में, साहिल ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि सिया ने केतन से शादी करने को लेकर कभी कोई नाराजगी या आपत्ति नहीं जताई थी। उसने यह भी दावा किया कि अगर सिया ने अपनी चिंताएं बताई होतीं, तो परिवार उसकी शादी सह-आरोपी चेतन चौधरी से कराने के लिए मान जाता।

साहिल ने जांचकर्ताओं को बताया, “परिवार को चेतन से क्या दिक्कत होगी? वह भी उसी समुदाय से है, एक कारोबारी परिवार से आता है और हमारी तरह ही अच्छी-खासी आर्थिक स्थिति वाला है।”

केतन अग्रवाल के परिवार ने भी ऐसी ही बातें कही हैं। उनके पिता ने जांच करने वालों को बताया कि उन्हें भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि सिया कथित तौर पर उनके बेटे से शादी नहीं करना चाहती थी।

खबरों के मुताबिक, केतन के पिता ने कहा, “हम एक अच्छे-खासे परिवार से हैं। हम अपने बेटे के लिए कई दूसरी लड़कियां ढूंढ सकते थे।” उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि कभी ऐसा कोई संकेत नहीं मिला जिससे पता चले कि सिया शादी के खिलाफ थी।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिया गोयल ने कथित तौर पर जांच करने वालों को बताया था कि अपने मंगेतर केतन अग्रवाल को “मार डालना”, परिवार को यह बताने से “आसान” था कि वह उससे शादी नहीं करना चाहती।

पुलिस कस्टडी में पूछताछ के दौरान, सिया ने कथित तौर पर कहा कि उसने शादी न करने की अपनी इच्छा के बारे में परिवार को इसलिए नहीं बताया क्योंकि वह उन्हें दुख नहीं पहुंचाना चाहती थी।

डिलीट चैट और 17 जून की कैफे मीटिंग भी जांच के दायरे में

जांचकर्ताओं ने डिजिटल सबूतों को भी जांच में शामिल किया है, क्योंकि कथित तौर पर पता चला है कि दोनों आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से बातचीत और ऑनलाइन एक्टिविटी के रिकॉर्ड हटा दिए थे।

फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स अभी डिवाइस से मिले डिलीट किए गए WhatsApp मैसेज, Instagram पर हुई बातचीत और दूसरे डेटा की जांच कर रहे हैं। पुलिस को शक है कि लोहगढ़ की घटना से पहले और बाद में, दोनों ही समय कुछ बातचीत मिटाई गई थी।

सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने अपनी बातचीत छिपाने के लिए रीसायकल बिन खाली करने और डिलीट की गई फ़ाइलों के निशान मिटाने जैसे अतिरिक्त कदम उठाए थे। इस वजह से जांचकर्ताओं को बातचीत की कड़ियों को जोड़ने के लिए फ़ोरेंसिक तकनीकों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

इस बीच, पुलिस सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच हुई उस मुलाकात की भी जांच कर रही है जो केतन अग्रवाल की मौत से एक दिन पहले हुई थी। जांच करने वालों ने बताया कि दोनों 17 जून को पुणे के लुल्ला नगर इलाके के एक कैफे में मिले थे और वहां शाम 4.30 बजे से 5.30 बजे के बीच लगभग एक घंटा बिताया था। अधिकारी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उस मुलाकात के दौरान कथित अपराध के बारे में कोई बातचीत हुई थी।

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Ketan Murder Case: ‘सिया को पहले से थी सारी जानकारी…’, केतन हत्याकांड में पिता ने तोड़ी चुप्पी, किया ये बड़ा दावा

Ketan Murder Case: पूरे देश को झकझोर कर रख देने वाले पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। केतन अग्रवाल हत्याकांड में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है,उसमें नई बातें सामने आ रही हैं। अब इस पूरे मामले पर मृतक केतन के पिता विशाल अग्रवाल का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने पुलिस जांच में सामने आ रही उस थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया है कि केतन के लुक और उनके ‘हेयर विग’ के कारण उनकी मंगेतर इस शादी से नाखुश थी और इसी वजह से हत्या की गई।

विग की वजह से की गई हत्या?

पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किले में 18 जून को मारे गए 25 वर्षीय कारोबारी केतन अग्रवाल के पिता ने उन खबरों को पूरी तरह गलत बताया है। केतन के पिता विशाल अग्रवाल का दावा है कि शादी से पहले ही उन्होंने सिया गोयल के परिवार को बेटे के विग पैच की जानकारी दे दी थी। विशाल अग्रवाल ने कहा कि उनके बेटे को एक मेडिकल समस्या के कारण बाल झड़ने की परेशानी थी। इसी वजह से वह हेयर विग का इस्तेमाल करता था। उन्होंने बताया कि इस बात की जानकारी सगाई तय होने से काफी पहले ही सिया गोयल और उसके परिवार को दे दी गई थी। इसलिए हत्या की वजह विग को बताना पूरी तरह गलत और भ्रामक है।

सगाई से पहले दी गई थी ये जानकारी

केतन अग्रवाल के पिता विशाल अग्रवाल ने बताया कि उनके बेटे को एक मेडिकल समस्या के कारण सिर के एक हिस्से के बाल झड़ गए थे। उन्होंने कहा कि सगाई तय होने से काफी पहले ही इस बारे में सिया गोयल और उसके परिवार को पूरी जानकारी दे दी गई थी। उन्होंने कहा, “अगर उन्हें इस बात से कोई आपत्ति होती, तो वे शादी से इनकार कर सकते थे।” वहीं, पुलिस का मानना है कि केतन की मौत एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। जांच के मुताबिक, इस मामले में उसकी मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी की भूमिका सामने आई है। शुरुआत में इस घटना को हादसा माना गया था, लेकिन बाद में जांच के दौरान मिले सबूतों ने इसे हत्या के मामले में बदल दिया।

पुलिस हत्या की साजिश के एंगल से कर रही है जांच

पुलिस के अनुसार, घटना से पहले सिया गोयल कई बार केतन अग्रवाल को लोहागढ़ किले लेकर गई थी। जांच में दावा किया गया है कि 14 जून को सिया ने कथित तौर पर केतन को एक चट्टान से धक्का देने की कोशिश की थी, लेकिन वह झाड़ी पकड़ लेने की वजह से बच गया। पुलिस का कहना है कि 18 जून को सिया फिर केतन को लोहागढ़ किले ले गई। इस दौरान उसका कथित प्रेमी चेतन चौधरी भी पीछे-पीछे पहुंचा। आरोप है कि दोनों ने मिलकर केतन को खाई में धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

जांच में सामने आए कॉल रिकॉर्ड के मुताबिक, सिया और चेतन के बीच हजारों बार बातचीत हुई थी। इनमें कई कॉल कई घंटों तक चली थीं। पूछताछ में चेतन ने कथित तौर पर बताया कि सिया सगाई तोड़ना नहीं चाहती थी, क्योंकि उसे परिवार की बदनामी का डर था। फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर हत्या और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है।

Ketan Murder case: मंगेतर सिया गोयल का चैट लग गया पुलिस के हाथ! पर इस डिटेल ने तो केस को और फंसा दिया

पुणे के बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की मौत के मामले में पुलिसिया जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, यह केस सुलझने के बजाय और उलझता जा रहा है। पुलिस के हाथ अब आरोपी मंगेतर सिया गोयल का मोबाइल चैट लगा है लेकिन इस नए डिजिटल सबूत ने पूरे मामले को और ज्यादा फंसा दिया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी सिया गोयल के मोबाइल फोन से बरामद किए गए मैसेजेस और पूछताछ के दौरान दिए गए उसके बयानों में भारी अंतर है, जिससे पुलिस के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

मोबाइल चैट और बयानों में भारी विरोधाभास (Inconsistencies)

लोनावला पुलिस के मुताबिक जांच के दौरान सिया के मोबाइल फोन से जो चैट्स बरामद हुए हैं, वे उसके उन बयानों से बिल्कुल मेल नहीं खा रहे हैं जो उसने पूछताछ के दौरान पुलिस को दिए थे। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह डिजिटल सबूत घटनाक्रम को स्थापित करने में एक बेहद महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है। फिलहाल पुलिस अधिकारी बरामद की गई बातचीत, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स, सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की बारीकी से जांच कर रहे हैं ताकि मौत से जुड़ी कड़ियों को जोड़ा जा सके।

एक-दूसरे पर दोष मढ़ रहे हैं दोनों आरोपी प्रेमी

इस मामले ने तब और पेचीदा मोड़ ले लिया जब पुलिस की पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अलग-अलग कहानियां सुनाना शुरू कर दिया। पुलिस के मुताबिक। आरोपी मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने पूछताछ के दौरान अलग-अलग बयान दिए हैं। दोनों ही आरोपी इस खौफनाक अपराध की साजिश रचने की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर मढ़ रहे हैं। दोनों का कहना है कि प्लानिंग दूसरे ने की थी। अब पुलिस को उम्मीद है कि यह डिजिटल ट्रेल यह तय करने में मदद करेगी कि इस साजिश में किस आरोपी की कितनी भूमिका थी और इस कथित साजिश के पीछे का असल सच क्या है।

नवंबर में होनी थी शादी, पर रास्ते से हटा दिया

यह पूरा मामला एक सोची-समझी साजिश का परिणाम नजर आता है। पुलिस के मुताबिक 25 वर्षीय केतन अग्रवाल और सिया गोयल की शादी इसी साल नवंबर में होने वाली थी। लेकिन सिया, केतन से शादी नहीं करना चाहती थी। इसके बाद सिया और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर केतन को रास्ते से हटाने की साजिश रची और उसे अंजाम दे दिया। आरोप है कि 18 जून को पुणे जिले के मावल तालुका में स्थित लोहागढ़ किले में घूमने के दौरान सिया और चेतन ने केतन को पहाड़ी से नीचे खाई में धक्का दे दिया था। इससे उसकी मौत हो गई।

हादसे से मर्डर मिस्ट्री तक पहुंची जांच

शुरुआत में इस मामले को महज एक दुर्घटना यानी पैर फिसलने से हुआ हादसा माना जा रहा था। लेकिन जब पुलिस ने गहराई से जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड्स व फॉरेंसिक सबूतों को खंगाला तो यह मामला पूरी तरह से हत्या में तब्दील हो गया। इस मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस अंतिम चार्जशीट दाखिल करने से पहले सभी उपलब्ध डिजिटल और फॉरेंसिक सबूतों को गहनता से जांच रही है।

मंगेतर केतन के मर्डर की मास्टरमाइंड सिया गोयल के पिता को आया हार्ट अटैक! भावुक मां ने बेटी को लेकर कही ये बात

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की लोहगढ़ किले में हुई कथित हत्या के हाई-प्रोफाइल मामले में एक और बड़ी खबर सामने आई है। मर्डर केस की मुख्य आरोपी केतन की मंगेतर सिया गोयल के पिता प्रवीण गोयल को हार्ट अटैक आया है। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच आरोपी सिया गोयल की मां पूजा गोयल ने अपनी बेटी को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर उनकी बेटी दोषी है तो उसे फांसी पर लटका दिया जाए।

सदमे में पिता: अस्पताल से बयां किया अपना दर्द

हमारी सहयोगी न्यूज 18 की एक रिपोर्ट में पुणे के एक स्थानीय न्यूज प्लेटफॉर्म न्यूजडॉटज के हवाले से बताया गया है कि अस्पताल में बातचीत करते हुए सिया के पिता प्रवीण गोयल ने कहा कि केतन अग्रवाल की मौत से उनका पूरा परिवार पूरी तरह टूट चुका है। उन्होंने केतन की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनका परिवार केतन को अपने बेटे की तरह मानता था।

प्रवीण गोयल ने भावुक होते हुए कहा कि ‘जो कुछ भी हुआ, वह एक बेहद दुखद घटना है। हम अभी भी इस पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने (केतन के माता-पिता) अपना बेटा खोया है और उनका बेटा हमारा भी था। हम उससे बहुत प्यार करते थे। मुझे उससे इतना लगाव हो गया था कि ऐसा लगता था जैसे वह हमारा अपना ही बेटा हो। हमने एक बेहद प्यार करने वाला, होनहार और अच्छा लड़का खो दिया है। हम इससे गहरे सदमे में हैं। इससे ज्यादा दुखद कुछ नहीं हो सकता। हमने भविष्य के लिए बहुत सारे अच्छे सपने देखे थे।’

उदयपुर में महंगी शादी की खबरों को किया खारिज

प्रवीण गोयल ने उन मीडिया रिपोर्ट्स और अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें दावा किया जा रहा था कि उदयपुर में सिया और केतन की बेहद भव्य और खर्चीली शादी की प्लानिंग चल रही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वहां कोई एयरक्राफ्ट बुकिंग नहीं की गई थी। उदयपुर में होटल बुकिंग सहित पूरी शादी में लगभग 3 से 5 करोड़ रुपये का खर्च आता।

‘शादी से खुश थी सिया, कभी नहीं जताई कोई आपत्ति’

पुलिस पूछताछ में जहां यह बात सामने आ रही थी कि सिया इस रिश्ते से नाखुश थी, वहीं उसके पिता प्रवीण गोयल ने इस बात का खंडन किया है। उनका दावा है कि सिया ने कभी भी केतन से शादी को लेकर कोई आपत्ति या हिचकिचाहट नहीं जताई थी। पिता के अनुसार जब से रिश्ता तय हुआ था, वह हमेशा खुश रहती थी। वह हमेशा केतन के बारे में ही बातें करती थी। अगर उनके (केतन के माता-पिता) पास थोड़ी सी भी ऐसी जानकारी होती कि कुछ गलत चल रहा है और वे हमें सूचित करते तो हम उनसे इस बारे में जरूर बात करते।

मां बोली- दोषी है तो फांसी दे दो

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला और बड़ा बयान सिया की मां पूजा गोयल का आया है। उन्होंने एक मां होने के नाते अपनी बेटी का पक्ष लेने के बजाय कानून और न्याय का समर्थन किया है। पूजा गोयल ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि अगर अदालत में उनकी बेटी के खिलाफ आरोप साबित हो जाते हैं तो उसे सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर वह दोषी है, तो उसे सबसे सख्त सजा मिलनी चाहिए। अगर वह दोषी है तो उसे फांसी दे दो, यह बात एक मां कह रही है।

क्या है पूरा मामला?

कुछ ही दिन पहले पुणे ग्रामीण पुलिस ने बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की मौत के मामले में उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया है। जांचकर्ताओं और पुलिस का आरोप है कि सिया और चेतन ने मिलकर केतन अग्रवाल को रास्ते से हटाने की आपराधिक साजिश रची थी। इसी साजिश के तहत बीते 18 जून को दोनों ने पुणे के पास स्थित लोहगढ़ किले की एक ऊंची पहाड़ी से केतन को कथित तौर पर नीचे खाई में धक्का दे दिया था। इससे उसकी मौत हो गई। फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है।

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Farmer Pension Scheme: सिर्फ 55 रुपये महीने जमा करें और 60 साल के बाद पाएं ₹3,000 मासिक पेंशन, ये किसान और मजदूर तुरंत करें अप्लाई

Farmer Pension Scheme: देश के करोड़ों श्रमिक असंगठित सेक्टर में काम करते हैं। इनमें रेहड़ी-पटरी विक्रेता, रिक्शा चालक, कामगार मजदूर, घरेलू कामगार, दर्जी, ड्राइवर, कृषि मजदूर और अन्य दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिक शामिल हैं। इन श्रमिकों को आमतौर पर कर्मचारी भविष्य निधि (PF), ग्रेच्युटी या अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में बुढ़ापे में नियमित आय का कोई साधन नहीं होने से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) योजना शुरू की है। यह एक स्वैच्छिक पेंशन योजना है। इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर लाभार्थी को हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन दी जाती है।

आवेदक की उम्र कितनी होनी चाहिए?

इस पेंशन योजना का लाभ सड़क किनारे रेहड़ी-पटरी लगाने वाले, रिक्शा चालक, निर्माण मजदूर, घरेलू कामगार, ड्राइवर, प्लंबर, दर्जी, कृषि मजदूर, मोची, धोबी, बीड़ी मजदूर, हैंडलूम कर्मी और अन्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को मिलता है। योजना में शामिल होने के लिए आवेदक की मासिक आय 15,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही उसकी आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना है। बेहद कम मासिक अंशदान के साथ यह योजना वृद्धावस्था में नियमित आय की गारंटी देती है। खासकर ऐसे श्रमिक जिनके पास भविष्य के लिए कोई पेंशन या बचत व्यवस्था नहीं है, उनके लिए यह योजना आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार साबित हो सकती है।

55 से 200 रुपये का करें योगदान

इस योजना की खास बात यह है कि श्रमिक जितनी राशि मासिक अंशदान के रूप में जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके अकाउंट में जमा करती है। 18 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने पर केवल 55 रुपये प्रति माह जमा करने होते हैं। जबकि 40 वर्ष की आयु में शामिल होने वालों को 200 रुपये प्रति माह का योगदान देना पड़ता है। योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद लाभार्थी को हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन मिलती है।

यदि किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है तो उसका जीवनसाथी योजना को आगे जारी रख सकता है। वहीं पेंशन शुरू होने के बाद सदस्य के निधन पर जीवनसाथी को 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन का लाभ मिलता है। हालांकि, ईपीएफओ, ईएसआईसी या एनपीएस जैसी किसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े कर्मचारी और आयकरदाता इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते।

कौन उठा सकता है योजना का लाभ?

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (Pradhan Mantri Shram Yogi Maandhan Yojana) का लाभ असंगठित क्षेत्र में कार्यरत उन श्रमिकों को मिलता है जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये या उससे कम है। योजना में शामिल होने के लिए आवेदक की उम्र 18 वर्ष से कम और 40 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए। योजना के पात्र लाभार्थियों में घरेलू कामगार, सड़क विक्रेता, रिक्शा चालक, मजदूर, कृषि मजदूर, बीड़ी श्रमिक, मोची, धोबी, चमड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिक, प्लंबर, ड्राइवर, दर्जी, हैंडलूम और पावरलूम श्रमिक, मिड-डे मील कर्मचारी तथा अन्य असंगठित क्षेत्र के कामगार शामिल हैं।

कौन नहीं ले सकता लाभ?

इस योजना का लाभ उन लोगों को नहीं मिलेगा जो पहले से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) या राष्ट्रीय पेंशन सिस्टम (NPS) जैसी किसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा आयकर का भुगतान करने वाले लोग भी इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।

सरकार भी करती है बराबर का योगदान

इस पेंशन स्कीम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लाभार्थी जितनी राशि मासिक अंशदान के रूप में जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके बैंक अकाउंट में जमा करती है। यानी यह एक सह-अंशदायी (Co-Contributory) पेंशन योजना है। इससे श्रमिकों को भविष्य के लिए बड़ा लाभ मिलता है।

18 साल की उम्र में सिर्फ 55 रुपये महीना जमा करें

कम उम्र में योजना से जुड़ने पर कम राशि जमा करनी पड़ती है। 18 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति को केवल 55 रुपये प्रति माह जमा करने होते हैं। 19 वर्ष की आयु पर 58 रुपये, 20 वर्ष पर 61 रुपये, 21 वर्ष पर 64 रुपये और 22 वर्ष की आयु में 68 रुपये मासिक योगदान देना होता है। इसी तरह 23 साल की उम्र पर 72 रुपये, 24 वर्ष पर 76 रुपये, 25 वर्ष पर 80 रुपये, 26 वर्ष पर 85 रुपये, 27 वर्ष पर 90 रुपये और 28 वर्ष की आयु पर 95 रुपये मासिक जमा करने होते हैं।

29 से 40 वर्ष तक कितना देना होगा योगदान?

29 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने पर 100 रुपये प्रति माह, 30 वर्ष पर 105 रुपये, 31 वर्ष पर 110 रुपये, 32 वर्ष पर 120 रुपये, 33 वर्ष पर 130 रुपये और 34 वर्ष पर 140 रुपये मासिक किस्त देना होगा। वहीं 35 वर्ष के व्यक्ति को 150 रुपये, 36 वर्ष पर 160 रुपये, 37 वर्ष पर 170 रुपये, 38 वर्ष पर 180 रुपये, 39 वर्ष पर 190 रुपये और 40 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति को 200 रुपये प्रति माह जमा करने होंगे। सरकार भी प्रत्येक मामले में उतनी ही राशि अपने हिस्से से जमा करती है।

60 साल के बाद मिलेगी 3,000 रुपये मासिक पेंशन

योजना के तहत नियमित अंशदान करने वाले लाभार्थी को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन मिलेगी। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। इससे वृद्धावस्था में आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और किसी पर निर्भरता कम होगी।

सदस्य की मृत्यु होने पर क्या होगा?

यदि योजना से जुड़े सदस्य की किसी कारणवश निधन हो जाती है, तो उसका जीवनसाथी योजना को आगे जारी रख सकता है। इसके लिए उसे नियमित रूप से अंशदान जमा करना होगा। यदि सदस्य 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन का लाभ ले रहा हो और उसके बाद उसकी मृत्यु हो जाए, तो उसके जीवनसाथी को पेंशन राशि का 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन के रूप में दिया जाएगा।

बीच में योजना छोड़ने पर क्या हैं नियम?

यदि कोई सदस्य योजना में शामिल होने के 10 साल के भीतर बाहर निकलना चाहता है, तो उसे उसके द्वारा जमा की गई राशि बचत बैंक अकाउंट की ब्याज दर के अनुसार वापस कर दी जाएगी। यदि सदस्य 10 साल पूरे होने के बाद लेकिन 60 वर्ष की आयु से पहले योजना छोड़ता है, तो उसे उसकी जमा राशि के साथ योजना के अनुसार अर्जित ब्याज भी वापस मिलेगा। अगर किसी कारणवश सदस्य कुछ समय तक किस्त जमा नहीं कर पाता है, तो वह बाद में बकाया राशि और निर्धारित ब्याज का भुगतान करके योजना को दोबारा एक्टिव कर सकता है।

कैसे करें अप्लाई?

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना में शामिल होने के लिए इच्छुक व्यक्ति को अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाना होगा। वहां आधार कार्ड, बैंक या जनधन खाते की जानकारी और मोबाइल नंबर देना होगा। सभी जानकारियां दर्ज होने के बाद कंप्यूटर सिस्टम खुद मासिक किस्त की राशि बता देगा। पहली किस्त जमा करने के बाद रजिस्ट्रेशन पूरा हो जाएगा और लाभार्थी को श्रम योगी कार्ड जारी कर दिया जाएगा। योजना में रजिस्ट्रेशन के लिए लाभार्थी को नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर आधार कार्ड और बैंक या जनधन खाते की जानकारी देनी होगी। पहली किस्त जमा करने के बाद श्रम योगी कार्ड जारी कर दिया जाता है।

कौन कर सकता है अप्लाई?

उम्र: 18 से 40 साल

महीने की कमाई: ₹15,000 तक

जरूरी डॉक्यूमेंट

आधार कार्ड।

सेविंग्स बैंक अकाउंट या जन धन अकाउंट होना चाहिए।

एम्प्लॉईज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन, एम्प्लॉईज स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन या नेशनल पेंशन सिस्टम का सदस्य नहीं होना चाहिए।

इनकम टैक्स भरने वाले लोग इसके लिए योग्य नहीं हैं।

हेल्पलाइन नंबर

योजना से जुड़ी किसी भी जानकारी या सहायता के लिए श्रमिक टोल फ्री नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए श्रमिक सरकार के टोल फ्री नंबर 1800-267-6888 पर संपर्क कर सकते हैं। यह योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए बुढ़ापे में नियमित आय सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।

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Ketan Agarwal Murder: ‘मर्डर इसने किया, मैंने नहीं…’; मंगेतर मर्डर केस में सिया गोयल पुलिस के सामने अलग ही कहानी सुनाने लगी

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के लोहगढ़ किले के पास हुए 25 वर्षीय कारोबारी केतन अग्रवाल की मर्डर मिस्ट्री ने पूरे देश को चौंका दिया है। शुरुआती जांच में जिसे महज एक हादसा समझा जा रहा था, वह अब सोची-समझी साजिश के तहत किया गया मर्डर का मामला बन चुका है। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसका बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी अब एक-दूसरे पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा रहे हैं। पुलिस के सामने दोनों आरोपी अलग-अलग कहानियां सुनाकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

मंगेतर और बॉयफ्रेंड का ब्लेम गेम!

केतन अग्रवाल की कथित हत्या के बाद से सिया गोयल और चेतन चौधरी दोनों ही सलाखों के पीछे हैं। लेकिन पूछताछ के दौरान दोनों का रवैया एक-दूसरे पर दोष मढ़ने का है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक चेतन ने जांचकर्ताओं के सामने दावा किया है कि वह सिया के साथ भाग जाना चाहता था। उसका आरोप है कि सिया गोयल ने ही केतन अग्रवाल को रास्ते से हटाने यानी उसकी हत्या करने पर जोर दिया था।

दूसरी तरफ सिया गोयल ने पुलिस को एक बिल्कुल अलग कहानी सुनाई है। सिया का दावा है कि हत्या की पूरी योजना चेतन चौधरी के दिमाग की उपज थी। सिया ने यह भी बताया कि इससे पहले 14 जून को भी केतन को मारने की एक कोशिश की गई थी लेकिन जब वह योजना विफल हो गई तो चेतन उसके सामने भावुक होकर रोने लगा था।

पुलिस का दावा- यह दोनों की डिफेंस स्ट्रेटेजी

दोनों आरोपियों द्वारा एक-दूसरे पर मढ़ जा रहे आरोपों को लेकर जांच टीम का हिस्सा रहे एक पुलिस अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है कि वे साजिश का जिम्मा एक-दूसरे पर डालने की कोशिश कर रहे हैं। यह स्पष्ट रूप से उनकी डिफेंस स्ट्रेटेजी लग रही है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि मौजूदा सूबत साफ कर रहे हैं कि इस साजिश में दोनों की बराबर की हिस्सेदारी रही है।

पुणे के कैफे में हुई मुलाकात और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस

पुलिस इस मामले में डिजिटल और फिजिकल सबूतों को पुख्ता करने में जुटी है। जांच में पुलिस को पता चला है कि सिया और चेतन के बीच 31 मई से 4 जून के बीच पुणे के एक कैफे में मुलाकात हुई थी। पुलिस अब इस बैठक की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह स्थापित किया जा सके कि क्या यह मुलाकात भी उसी मर्डर की साजिश का हिस्सा थी। जांचकर्ताओं ने सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल रिकॉर्ड और आरोपियों के बीच हुए कम्युनिकेशन को खंगाला है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि यह मर्डर पूरी तरह से प्री-प्लान्ड था।

शादी की तैयारी और अनचाहा रिश्ता: क्या थी मर्डर की वजह?

मृतक केतन अग्रवाल एक बड़े रियल एस्टेट व्यवसायी का बेटा था और अपनी पारिवारिक फर्म में निदेशक के पद पर काम कर रहा था। वह बोस्टन से अपनी मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद हाल ही में भारत लौटा था। केतन और सिया के परिवार एक-दूसरे को 1990 के दशक से जानते थे। इसी साल गुलबर्गा में एक शादी के दौरान दोनों की मुलाकात हुई, जिसके बाद शादी की बातचीत तेजी से आगे बढ़ी और महज एक सप्ताह के भीतर दोनों की सगाई हो गई।

पुलिस के मुताबिक सिया पहले से ही चेतन चौधरी के साथ रिलेशनशिप में थी और वह केतन से शादी नहीं करना चाहती थी। इसके बावजूद दोनों परिवारों की ओर से इस साल के अंत में राजस्थान में एक भव्य और विस्तृत शादी समारोह आयोजित करने की तैयारियां चल रही थीं।

हादसे की मनगढ़ंत कहानी से ऐसे उठा पर्दा

बीती 18 जून को पुणे के लोहगढ़ किले के पास एक गहरी खाई में गिरने के कारण केतन अग्रवाल की मौत हो गई थी। घटना के तुरंत बाद सिया ने केतन के परिवार और पुलिस को सूचित करते हुए दावा किया था कि केतन का पैर अनजाने में फिसल गया और यह एक हादसा था। पुलिस को सिया के बयानों में कई विसंगतियां नजर आईं।

इसके बाद जब पुलिस ने घटना स्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो वहां एक संदिग्ध शख्स दिखाई दिया, जिसकी पहचान बाद में सिया के बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के रूप में हुई। इसी सुराग ने पुलिस को गहरी जांच के लिए प्रेरित किया और यह साफ हो गया कि केतन फिसला नहीं था बल्कि उसे सिया और चेतन ने कथित तौर पर धक्का दिया था।

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जांच के बाद पुलिस ने 23 जून को सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपी फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और जांचकर्ता इस बात का पता लगा रहे हैं कि क्या इस पूरी आपराधिक साजिश में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था।

Ketan Murder Update: पुणे के कैफै में चेतन और सिया ने इस तरह रची थी केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश, पहली बार सामने आया CCTV फुटेज

Ketan Agarwal Murder Update: पुणे के 26 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या मामले में एक नया खुलासा हुआ है। केतन अग्रवाल की कथित हत्या से एक दिन पहले सिया गोयल और उसका प्रेमी चेतन चौधरी पुणे के एक कैफै में मिले थे। यह CCTV फ़ुटेज अब जांच का एक अहम हिस्सा बन गया है। बताया जा रहा है कि 17 जून को पुणे में सिया गोयल और उनके बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के बीच एक कॉफी डेट हुई थी। इस दौरान कथित तौर पर सिया के मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या की साज़िश रची गई थी।

पुलिस के मुताबिक, यह घटना अग्रवाल को पुणे के लोहागढ़ किले में एक खाई में धकेले जाने से एक दिन पहले हुई थी। शुरुआती जांच के अनुसार, दोनों ने कैफै में बैठकर हत्या के बारे में बातचीत की और योजना बनाई। पुलिस ने बताया कि सिया ने चेतन के साथ लोहागढ़ किले के बारे में जानकारी शेयर की थी। इसके बाद YouTube वीडियो की मदद से उससे उस जगह के बारे में चर्चा की थी।

मारने का आइडिया कैसे आया?

पुलिस के मुताबिक, 31 मई को सिया और केतन लोहागढ़ किले गए थे। वहां केतन एक खतरनाक जगह बैठा था। तभी सिया के दिमाग में उसे मारने का आइडिया आया। बताया जा रहा है कि 14 जून को भी केतन को किले से धक्का देने की कोशिश की गई थी। उस वक्त सिया ने सांप दिखने का बहाना बनाकर घटना को हादसा बताने की साजिश रची थी, लेकिन केतन बच गया था। इसके बाद सिया ने अपने प्रेमी चेतन चौधरी से पुणे के एक कैफे में मिली। वहां दोनों ने लोहागढ़ किले पर केतन को खाई में धक्का देने की योजना पर डिटेल्स चर्चा की थी।

बैकअप प्लान भी था तैयार 

‘दैनिक भास्कर’ के मुताबिक, इस दौरान दोनों ने वह पॉइंट भी ढूंढ लिया, जहां से केतन को धक्का देना था। यदि केतन इससे भी बच जाता तो 20 जून के बाद सड़क हादसे में मारने का बैकअप प्लान तैयार था। ‘इंडिया टुडे’ को मिले CCTV फुटेज में वे दोनों हत्या के एक दिन पहले शाम करीब 4:35 बजे कैफ़े में आते और लगभग 5:30 बजे वहां से निकलते हुए दिखाई दे रहे हैं।

पुणे के पास लोहागढ़ किले में अपनी मंगेतर सिया गोयल के साथ ट्रेकिंग के दौरान 18 जून को खाई में गिरने से केतन अग्रवाल की मौत हो गई। केतन अपने परिवार की रियल एस्टेट कंपनी, सक्सेस ग्रुप के डायरेक्टर और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर थे। कपल की सगाई इसी साल हुई थी और नवंबर में उनकी शादी होने वाली थी। पुलिस के मुताबिक, दोनों परिवारों ने राजस्थान के उदयपुर में एक भव्य शादी की योजना बनाई थी।

SIT गठित करने का निर्देश

इस बीच, महाराष्ट्र विधानसभा के पीठासीन अधिकारी राजू खरे ने सरकार को पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है। पुलिस ने मंगलवार को बताया कि 26 वर्षीय अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने 18 जून को पुणे में लोहागढ़ किले के निकट एक घाटी में उन्हें कथित तौर पर धक्का दे दिया था।

सिया गोयल (20) और चौधरी (22) को गिरफ्तार कर लिया गया है। अग्रवाल और गोयल की शादी नवंबर में राजस्थान के उदयपुर स्थित एक महल में होने वाली थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) सदस्य सुनील शेलके ने राज्य विधानसभा में यह मुद्दा उठाया और मांग की थी कि हत्या के मामले में गोयल के परिवार को भी आरोपी बनाया जाए।

उन्होंने दावा किया कि गोयल परिवार ने अग्रवाल परिवार से उसके (सिया) किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध होने की जानकारी छिपाई थी। उन्होंने कहा कि हत्या का मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाना चाहिए। खरे ने सरकार को हत्या की जांच के लिए एक एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया।

शेलके ने राज्य सरकार से पीड़ित के परिवार को न्याय सुनिश्चित करने की अपील की। विधायक ने कहा कि केतन अग्रवाल के परिवार को शुरुआत में बताया गया था कि उसकी मौत एक हादसे में हुई है। हालांकि, पुलिस की विस्तृत जांच में बाद में यह सामने आया कि यह हत्या का मामला था।

उन्होंने आरोपियों सिया गोयल और उसके प्रेमी के बीच कथित संबंधों का भी उल्लेख किया और दावा किया कि जांच के दौरान फोन कॉल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य सामने आए हैं। शेलके ने अधिकारियों से मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच करने की अपील की और मांग की कि इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द अदालत में की जाए।

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Nandani Bosmiya: 23 साल की नंदनी बोसमिया की मौत कैसे हुई, इस केस में जिस असलम का जिक्र आ रहा वो कौन?

Nandani Bosmiya Death New: गुजरात के राजकोट में 23 वर्षीय पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) उम्मीदवार नंदनी बोसमिया की संदिग्ध मौत ने नया मोड़ ले लिया है। 22 जून को नंदिनी अपने अपार्टमेंट में फंदे से लटकी हुई मिली थीं। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का लगा। लेकिन अब उनके परिवार ने इसे हत्या बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि नंदिनी की मौत को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई है।

परिजनों का कहना है कि इसके पीछे उनके लिव-इन पार्टनर असलम सामा (Aslam Sama) का हाथ हो सकता है। पीड़ित परिवार का दावा है कि असलम पहले से शादीशुदा था। दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। राजकोट पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है।

लिव-इन रिश्ते को लेकर बढ़ रहा था तनाव

परिवार ने दावा किया है कि नंदिनी पिछले कुछ समय से असलम सामा के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थीं। आरोप है कि असलम पहले से शादीशुदा था। वह नंदिनी के अलावा जूनागढ़ में अपनी पत्नी से भी संबंध बनाए हुए था। रिश्तेदारों का कहना है कि इसी वजह से दोनों के बीच पिछले कुछ महीनों में लगातार विवाद होने लगे थे। नंदिनी कथित तौर पर मानसिक तनाव, भावनात्मक प्रताड़ना और परेशानियों का सामना कर रही थीं।

धमकी और उत्पीड़न के आरोप

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, नंदिनी के परिवार ने आरोप लगाया है कि असलम सामा उसे लगातार प्रताड़ित कर रहा था। नंदिनी को वह धमकियां भी देता था। उनका कहना है कि नंदिनी ने कई बार अपने करीबियों को रिश्ते में चल रही समस्याओं और तनाव के बारे में बताया था। परिजनों का आरोप है कि इन परिस्थितियों ने उनकी मौत को संदिग्ध बना दिया है। इसलिए मामले की गहन जांच की जानी चाहिए।

नंदनी के पिता आनंद बोस्मिया ने आरोप लगाया है कि असलम कई बार उनकी बेटी के साथ मारपीट भी किया था। यही वजह है कि मौत के बाद परिवार सीधे तौर पर असलम की भूमिका पर सवाल उठा रहा है। फिलहाल पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

न्यूज 18 के मुताबिक, विवाद के बाद नंदनी कुछ समय के लिए एक ऐसे शख्स के पास चली गई थीं जिसे वह अपना भाई मानती थीं। हालांकि बाद में वह दोबारा उसी फ्लैट में लौट आई। परिवार का दावा है कि इसके बाद भी हालात सामान्य नहीं थे। दोनों के बीच तनाव बना हुआ था।

पुलिस ने शुरू की डिटेल्स जांच

पुलिस का कहना है कि शुरुआती सबूतों से मौत फांसी लगने की प्रतीत होती है। लेकिन अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच एजेंसियां सभी संभावित पहलुओं (जिनमें हत्या की आशंका भी शामिल है) की जांच कर रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, डिजिटल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य तथ्यों की जांच की जा रही है।

घटना वाले दिन नंदनी का फोन लगातार बंद मिला। परिवार का उनसे संपर्क नहीं हो पाया। इसके बाद परिवार को चिंता हुई। फिर एक परिचित को फ्लैट पर भेजा गया। उन्हें बताया गया कि फ्लैट के अंदर नंदनी फंदे से लटकी हुई मिलीं। इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।

फोरेंसिक और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मौत का वास्तविक कारण फोरेंसिक और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। जांच पूरी होने तक किसी भी संभावना को खारिज नहीं किया गया है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह आत्महत्या थी या इसके पीछे किसी आपराधिक साजिश का हाथ था। वहीं, नंदिनी के परिवार ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। एक अधिकारी ने कहा कि मौत की असली वजह फोरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगी।

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Emergency in NCERT textbook: एनसीईआरटी की कक्षा 9 की किताब में पहली बार शामिल हुआ आपातकाल, भारतीय नदियों के नाम भी शामिल

Emergency in NCERT textbook: भारत में इमरजेंसी लागू होने के पांच दशक से भी ज्यादा समय बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने पहली बार क्लास 9 की किताब में इस ऐतिहासिक टॉपिक को शामिल किया है। इसे ‘बड़ी चुनौतियों में से एक’ के तौर पर पेश किया गया है, क्योंकि उस दौरान ज्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, इमरजेंसी का जिक्र नई बनी सोशल साइंस की किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में है।

इसमें भारतीय लोकतंत्र की खूबियों और चुनौतियों पर चर्चा करने वाले चैप्टर में इमरजेंसी को शामिल किया गया है। ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में 1975-77 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। NCERT के एक अधिकारी ने कंफर्म किया है कि यह पहली बार है जब क्लास 9 की किताब में इमरजेंसी पर कोई सेक्शन जोड़ा गया है।

स्कूल के सिलेबस में बदलाव

स्कूल के सिलेबस में यह एक अहम बदलाव है, क्योंकि हाल ही में देश ने 1975 में इमरजेंसी की घोषणा के 50 साल पूरे किए हैं। इस सेक्शन में लिखा है, “भारत में लोकतंत्र के सामने एक बड़ी चुनौती तब आई जब 1975-77 में इमरजेंसी लागू की गई। 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी की सरकार के प्रति लोगों में असंतोष बढ़ रहा था। बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कुशासन के आरोपों के कारण बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए।”

इसमें आगे कहा गया है, “जून 1975 में सरकार ने आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की। इस दौरान, ज्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं और एक्टिविस्टों को अरेस्ट किया गया। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भारी दबाव पड़ा और नागरिकों की आजादी सीमित कर दी गई।”

जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी जोर

किताब में इमरजेंसी के ख़िलाफ आंदोलन में जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी जोर दिया गया है। किताब के एक हिस्से में लिखा है, “जयप्रकाश नारायण एक राजनीतिक नेता और समाजवादी विचारक थे और जिन्हें ‘लोक नायक’ के नाम से जाना जाता है। उनके नेतृत्व में चले जन-आंदोलनों ने छात्रों और नागरिकों, खासकर बिहार और गुजरात में लामबंद किया। 1977 में इमरजेंसी हटा ली गई और आम चुनाव हुए, जिससे लोगों को वोट के जरिए अपनी इच्छा जाहिर करने का मौका मिला। सत्ताधारी सरकार की हार ने भारतीय लोकतंत्र की ताकत को दिखाया और लोकतंत्र के महत्व को उजागर किया।”

इमरजेंसी वाला यह सेक्शन लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर व्यापक चर्चा का हिस्सा है। इमरजेंसी के अलावा, यह किताब लोकतांत्रिक कामकाज के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे कि फेक न्यूज, गलत जानकारी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, सार्वजनिक नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रीयता, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा करती है।

‘लोकतंत्र और आप’

इस चैप्टर में “लोकतंत्र और आप” नाम का एक नया सेक्शन भी जोड़ा गया है। NCERT का कहना है कि इसे पहली बार इसलिए शामिल किया गया है ताकि छात्र क्लासरूम में सीखी गई बातों को एक नागरिक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदार के तौर पर अपनी भूमिका से जोड़ सकें। इमरजेंसी के अलावा, नई किताब में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर भी काफी जोर दिया गया है। इसमें भारत में लोकतांत्रिक कामकाज की शुरुआत शुरुआती ऐतिहासिक दौर से ही बताई गई है और आज के शासन-प्रशासन में उनकी अहमियत को भी समझाती है।

लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका

इस किताब में लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर भी एक खास सेक्शन है, जिसमें मीडिया को “लोकतंत्र का चौथा स्तंभ” बताया गया है। लोगों की चिंताओं को उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने में इसकी भूमिका पर जोर दिया गया है। भारत के लोकतांत्रिक सिस्टम के बड़े पैमाने को दिखाने के लिए, किताब में वोटरों की भागीदारी, वोटिंग से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े तथ्य और आंकड़े शामिल किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि 2024 में भारत में 96.8 करोड़ से ज़्यादा रजिस्टर्ड वोटर थे और पूरे देश में फैले वोटिंग सेंटर्स के बड़े नेटवर्क का भी ज़िक्र किया गया है।

यह चैप्टर शासन-प्रशासन में नागरिकों की भागीदारी दिखाने के लिए जमीनी स्तर के लोकतंत्र के उदाहरणों का भी इस्तेमाल करता है, जैसे गुजरात की एक पंचायत और त्रिपुरा की महिलाओं के अनुकूल पंचायत। महिलाओं के वोटिंग अधिकारों और स्थानीय निकायों में आरक्षण के लिए भी एक अलग सेक्शन दिया गया है।

भारत की नदियों के नाम भी शामिल

ANI के मुताबिक, NCERT ने अपनी भाषा की टेक्स्टबुक्स का नाम भारत की नदियों के नाम पर रखा है। ‘कृष्णा’ नाम कृष्णा नदी के नाम पर रखा गया है। हिंदी टेक्स्टबुक का नाम ‘गंगा’ रखा गया है, इंग्लिश टेक्स्टबुक का नाम ‘कावेरी’ रखा गया है, और उर्दू टेक्स्टबुक का नाम ‘जमुना’ रखा गया है। इसी तरह, कन्नड़ टेक्स्टबुक का नाम ‘कृष्णा’ रखा गया है क्योंकि यह कर्नाटक में बहने वाली मुख्य नदियों में से एक है।

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इस टेक्स्टबुक के चैप्टर 6 में बैलेंस्ड डाइट के बारे में बताया गया है। इसे पेज 63 पर एक अलग हेडिंग, ‘बैलेंस्ड डाइट’ के तहत भी कवर किया गया है। पेज 63 पर दी गई तस्वीर में वेजिटेरियन और नॉन-वेजिटेरियन दोनों तरह के खाने की चीज़ें शामिल हैं। टेक्स्टबुक में कहीं भी वेजिटेरियनिज़्म के बारे में बताया या उसे सही नहीं ठहराया गया है, न ही नॉन-वेजिटेरियन खाने का विरोध किया गया है।