Ketan Agarwal Murder Case: पुणे पुलिस को शक! केतन मर्डर केस में आ सकता है ‘सोनम रघुवंशी जैसा मोड़’

Ketan Agarwal Murder Case: मेघालय हनीमून मर्डर केस में सोनम रघुवंशी को जमानत दिलाने वाली कानूनी खामियों से सबक लेते हुए, पुणे ग्रामीण पुलिस अब पुणे के बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की लोणावला (लोहगढ़ किले) में हुई हत्या के मामले में एक “पूरी तरह मजबूत और बिना गलती वाली” चार्जशीट तैयार करने में जुटी है। यह जानकारी महाराष्ट्र पुलिस के शीर्ष सूत्रों ने न्यूज18 को दी है।

जांच अधिकारी केतन की मंगेतर और मुख्य आरोपी सिया गोयल का पॉलीग्राफ (झूठ पकड़ने वाला) टेस्ट कराने पर जोर दे रहे हैं। हालांकि, यह टेस्ट कोर्ट में सीधे सबूत के तौर पर मान्य नहीं होता, लेकिन पुलिस का मानना है कि इससे कुछ अहम सुराग मिल सकते हैं, जिन्हें बाद में डिजिटल या फॉरेंसिक सबूतों से जांचकर पक्का किया जा सकता है।

यह सावधानी हाल ही में हुए सोनम रघुवंशी मामले को देखते हुए बरती जा रही है, जिसमें गिरफ्तारी की प्रक्रिया में हुई तकनीकी खामियों के कारण आरोपी को जमानत मिल गई थी और बाद में हाई कोर्ट ने भी उस जमानत को बरकरार रखा था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं कि सिया के खिलाफ उनके मुकदमे को किसी भी तरह की ऐसी तकनीकी चूक से कमजोर न होने दिया जाए।

पुलिस पॉलीग्राफ टेस्ट क्यों करवाना चाहती है?

भारतीय कानून के तहत, पॉलीग्राफ टेस्ट के नतीजे अदालत में मुख्य सबूत के तौर पर स्वीकार्य नहीं होते हैं। हालांकि, जांचकर्ताओं का कहना है कि यह टेस्ट जांच के दौरान नई जानकारियां या सुराग हासिल करने के लिए एक टूल के तौर पर काम आ सकता है।

महाराष्ट्र पुलिस के सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ से ऐसी जानकारी मिल सकती है जो पहले पता नहीं थी। उदाहरण के लिए, अगर सिया अनजाने में यह बता देती है कि उसने लोहागढ़ किले की चट्टान की ऊंचाई के बारे में जानकारी जुटाई थी, या ऐसी किसी डिजिटल गतिविधि का जिक्र करती है जिसके बारे में जांचकर्ताओं को पहले पता नहीं था, तो पुलिस उस डिजिटल सबूत को स्वतंत्र रूप से हासिल कर सकती है।

पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान ब्राउजर हिस्ट्री, लोकेशन डेटा या डिलीट की गई सर्च जैसी जानकारी, अगर सही कानूनी प्रक्रियाओं से हासिल की जाए, तो कोर्ट में सबूत के तौर पर मानी जा सकती है, भले ही पॉलीग्राफ टेस्ट के जवाब खुद सबूत के तौर पर मान्य न हों।

पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, “मकसद पॉलीग्राफ रिपोर्ट को सबूत के तौर पर इस्तेमाल करना नहीं है। इसका मकसद छिपे हुए तथ्यों का पता लगाना है, जिनकी बाद में कानूनी रूप से मान्य डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों से पुष्टि की जा सके।”

प्रत्यक्ष सबूत नहीं, केवल परिस्थिति पर टिका पूरा मामला

जांच करने वाले मानते हैं कि उन्हें सबूत जुटाने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा कोई चश्मदीद गवाह नहीं है जिसने केतन को चट्टान से धक्का देते हुए देखा हो। न ही इस कथित घटना का कोई CCTV फुटेज मौजूद है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उपलब्ध CCTV फुटेज में सह-आरोपी और सिया के प्रेमी चेतन चौधरी को हुडी पहने हुए घटना वाली जगह के पास ही देखा गया है, लेकिन इससे हत्या साबित नहीं होती।

पुलिस ने डमी का इस्तेमाल करके कथित अपराध वाली जगह का सीन भी दोबारा बनाया है, लेकिन अधिकारी निजी तौर पर मानते हैं कि ऐसे प्रदर्शनों का सबूत के तौर पर बहुत कम महत्व होता है। एक सूत्र ने कहा, “डमी किस तरह गिरती है, यह उसके वजन के बंटवारे, कोण और गति पर निर्भर करता है। इससे वैज्ञानिक रूप से यह साबित नहीं किया जा सकता कि पीड़ित को जान-बूझकर धक्का दिया गया था या वह गलती से फिसल गया था।”

इन्हीं सब वजह से, जांचकर्ता इस मामले को पूरी तरह से परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित मानते हैं, जिसमें अपराध साबित करने के लिए हर सबूत का आपस में सही ढंग से जुड़ना जरूरी है ताकि कोई शक न रहे।

अभियोजन पक्ष मकसद और डिजिटल सबूतों पर भरोसा कर रहा है

जांचकर्ताओं के मुताबिक, प्रॉसिक्यूशन की मुख्य थ्योरी यह है कि सिया और चेतन ने केतन को रास्ते से हटाने की साजिश रची थी, क्योंकि सिया कथित तौर पर उससे शादी नहीं करना चाहती थी।

इसलिए, चार्जशीट दाखिल करने से पहले पुलिस डिजिटल, फोरेंसिक और हालात से जुड़े सबूत इकट्ठा करने पर ध्यान दे रही है, जो इस कथित साजिश को पुख्ता कर सकें।

जांचकर्ता डिजिटल सर्च हिस्ट्री, मोबाइल फोन डेटा और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की भी जांच कर रहे हैं, जिनसे साजिश या पहले से योजना बनाने की बात साबित हो सके। सूत्रों का कहना है कि ऐसे डिजिटल सबूत हासिल करना, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा सके, जांच की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।

‘एक कमजोर कड़ी पूरे केस को गिरा सकती है’

पुलिस सूत्रों का मानना ​​है कि केस का नतीजा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या वे घटनाओं की एक अटूट कड़ी बना पाते हैं या नहीं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “अगर बचाव पक्ष उस कड़ी की एक भी अहम कड़ी को तोड़ने में कामयाब हो जाता है, तो अभियोजन पक्ष का केस काफी कमजोर पड़ सकता है।” उन्होंने ऐसे हाई-प्रोफाइल मामलों का जिक्र किया जिनमें सबूतों की कमी के कारण कोर्ट में मुश्किलें आईं।

यही एक वजह है कि जांच करने वाले अधिकारी फाइनल चार्जशीट दाखिल करने से पहले बहुत सावधानी बरत रहे हैं।

सोनम रघुवंशी का मामला एक सबक क्यों बन गया है?

पुलिस सूत्रों के अनुसार, हाल ही का सोनम रघुवंशी मामला-जिसमें उन पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप है-अब पुलिस के लिए एक चेतावनी बन गया है। यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत जांच प्रक्रिया के कड़ाई से पालन करने के महत्व को और पुख्ता करता है।

सोनम के मामले में, कोर्ट में प्रक्रिया से जुड़ी कमियां सामने आने के बाद अभियोजन पक्ष को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जमानत के आदेश के मुताबिक, पुलिस आरोपी को हिरासत में लेते समय गिरफ्तारी के असल कारणों के बारे में साफ तौर पर नहीं बता पाई। गिरफ्तारी मेमो और उससे जुड़े दस्तावेजों में BNS की धारा 403(1) का जिक्र किया गया था, जो संपत्ति के बेईमानी से गबन से जुड़ी है, जबकि हत्या के मामले में उसकी जांच धारा 103(1) के तहत हो रही थी।

कोर्ट ने माना कि ऐसी गलतियों की वजह से आरोपी के संवैधानिक अधिकारों पर असर पड़ा, जिससे उसे शुरुआती जांच चरण में अपना बचाव ठीक से करने का मौका नहीं मिला। इसी आधार पर कोर्ट ने उसे जमानत दे दी, जिसे बाद में हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि मजबूत जनमत या मीडिया की कड़ी नजर भी अदालत में हुई प्रक्रियात्मक गलतियों की भरपाई नहीं कर सकती। महाराष्ट्र पुलिस के एक वरिष्ठ सूत्र ने News18 को बताया, “अदालतें सबूतों और कानूनी वैधता के आधार पर मामले तय करती हैं। यहां तक ​​कि क्लर्क की कोई छोटी सी गलती या तय कानूनी प्रक्रिया का पालन न करना भी बचाव पक्ष के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।”

चूंकि कोई चश्मदीद गवाह या सीधा वीडियो सबूत नहीं है, इसलिए पुणे ग्रामीण पुलिस अब इस बात पर ध्यान दे रही है कि प्रक्रिया का हर कदम कानूनी रूप से सही हो। साथ ही, वे डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों को भी मजबूत कर रहे हैं, जिनके बारे में उनका मानना ​​है कि ये सिया के खिलाफ उनके मामले का मुख्य आधार बनेंगे।

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Ketan Agarwal Murder Case: केतन हत्याकांड की आरोपी सिया गोयल का 17 सेकंड का वीडियो वायरल, मीडिया को दिखाई मिडिल फिंगर

अपने मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी सिया गोयल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह पुलिस जांच नहीं, बल्कि उनका एक वायरल वीडियो है। 17 सेकंड की इस क्लिप में सिया पुलिस के साथ घर से बाहर निकलती दिखाई देती हैं। इसी दौरान वह बाहर मौजूद मीडिया कर्मियों की ओर देखकर कथित तौर पर मिडिल फिंगर दिखाती नजर आती हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पुलिस जांच के लिए घर पहुंची थी टीम

यह घटना पुणे के मार्केट यार्ड इलाके की है। पुलिस जांच के सिलसिले में सिया गोयल को उनके घर ले जाया गया था। जांच पूरी होने के बाद जब पुलिस उन्हें वापस लेकर बाहर निकली, तभी कैमरों के सामने उन्होंने कथित तौर पर आपत्तिजनक इशारा किया। यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। इस वीडियो को न्यूज एजेंसी IANS ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर शेयर किया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 18 जून का है, जब केतन अग्रवाल की मौत पुणे के पास स्थित लोहगढ़ किले की खाई में गिरने से हुई थी। शुरुआत में सिया ने पुलिस को बताया था कि केतन का पैर फिसल गया था और यह एक हादसा था। इसी आधार पर पहले दुर्घटना का मामला दर्ज किया गया।

पुलिस को कैसे हुआ शक?

जांच के दौरान पुलिस को सिया के व्यवहार पर शक हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, केतन की मौत के बाद सिया के चेहरे पर दुख के कोई खास भाव नहीं दिखे। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की, जिसमें कई नए तथ्य सामने आए और सिया गोयल व चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया।

मंगेतर की हत्या की रची गई थी साजिश?

पुलिस का दावा है कि सिया और केतन की शादी इसी साल नवंबर में होने वाली थी। लेकिन सिया के कथित प्रेमी चेतन चौधरी को यह रिश्ता पसंद नहीं था। जांच में सामने आया कि दोनों ने मिलकर केतन को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

पहली कोशिश नाकाम रही

पुलिस के अनुसार, 14 जून को भी केतन को मारने की कोशिश की गई थी। आरोप है कि सिया ने उन्हें किले के पास धक्का दिया, लेकिन वह झाड़ियों का सहारा लेकर बच गए। इसके बाद सिया ने सांप देखने का बहाना बनाकर पूरा मामला सामान्य दिखाने की कोशिश की और बाद में केतन को भरोसे में लिया।

दूसरी बार बुलाकर खाई में धक्का देने का आरोप

जांच एजेंसियों का आरोप है कि कुछ दिनों बाद सिया ने केतन को दोबारा लोहगढ़ किले पर बुलाया, जहां चेतन चौधरी पहले से मौजूद था। पुलिस का कहना है कि दोनों ने पीछे से धक्का देकर केतन को खाई में गिरा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

आज कोर्ट में होगी पेशी

पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। सिया गोयल और चेतन चौधरी को शुक्रवार दोपहर 2:30 बजे वडगांव कोर्ट में पेश किया जाना है। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

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Ketan Agarwal Murder Case: केतन अग्रवाल मर्डर केस में बड़ा अपडेट, आरोपी सिया और चेतन ने पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए दी सहमति

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या की जांच में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। इस मामले की मुख्य आरोपी सिया गोयल ने पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के लिए अपनी सहमति दे दी है।जिसके बाद पुलिस अब सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी, दोनों का लाइ डिटेक्टर टेस्ट कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। इसके लिए जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई है और सरकारी वकील ने भी इसकी पुष्टि की है।

सिया गोयल का होगा पॉलीग्राफ टेस्ट

गोयल के वकील विपुल डुसिंग ने बताया कि 20 साल की सिया ने गुरुवार को लोनावाला ग्रामीण पुलिस को पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए अपनी सहमति दे दी है। बता दें कि ऐसे टेस्ट के लिए आरोपी की सहमति कानूनी तौर पर जरूरी होती है।

वहीं, जांचकर्ताओं का मानना है कि इस टेस्ट से मामले से जुड़े कई अहम राज सामने आ सकते हैं, क्योंकि अब तक जांच मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य और तकनीकी सबूतों पर आधारित रही है।

18 जून को हुई केतन की हत्या

पुलिस के अनुसार, 26 वर्षीय केतन अग्रवाल की 18 जून को पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किले की करीब 400 मीटर गहरी खाई में धक्का देकर हत्या कर दी गई थी। जांच में पुलिस का दावा है कि सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी 22 वर्षीय चेतन चौधरी ने मिलकर इस हत्या की साजिश रची थी।

पुलिस का कहना है कि सिया गोयल की इसी साल नवंबर में केतन अग्रवाल से शादी होने वाली थी। दोनों की सगाई फरवरी में हुई थी। आरोप है कि शादी से बचने के लिए सिया और चेतन ने मिलकर केतन की हत्या की योजना बनाई। फिलहाल दोनों आरोपी 3 जुलाई तक पुलिस हिरासत में हैं।

केतन अग्रवाल मर्डर केस में पुलिस पॉलीग्राफ टेस्ट क्यों करवाना चाहती है?

इस केस में कई चुनौतियां हैं क्योंकि पुलिस को कोई चश्मदीद गवाह नहीं मिला है और न ही कोई ऐसा CCTV फुटेज मिला है जिसमें उस जगह को दिखाया गया हो जहां से केतन अग्रवाल के कथित तौर पर चट्टान से गिरने की बात कही जा रही है। पुलिस का यह भी दावा है कि आरोपियों ने घटना से पहले और बाद में अपने मोबाइल फोन से कॉल रिकॉर्ड और डेटा (रीसायकल बिन की फाइलों सहित) डिलीट कर दिए थे, ताकि सबूत मिटाए जा सकें।

इसके अलावा, शादी की तैयारियों को लेकर परिवार के सदस्यों और आरोपियों के अलग-अलग बयानों ने कथित मकसद का पता लगाने की कोशिशों को और मुश्किल बना दिया है। ऐसे में पुलिस का मानना है कि पॉलीग्राफ (लाइ डिटेक्टर) टेस्ट से आरोपियों के बयानों की सच्चाई जांचने, विरोधाभासों का पता लगाने और जांच में नए सुराग मिलने में मदद मिल सकती है।

लाइ डिटेक्टर टेस्ट से क्या पता चल सकता है?

हालांकि, पॉलीग्राफ के नतीजों को कोर्ट में सीधे सबूत के तौर पर नहीं माना जाता, लेकिन जांच करने वाले अक्सर इनका इस्तेमाल जांच के एक टूल के तौर पर करते हैं। इस टेस्ट में व्यक्ति के सवालों के जवाब देने के दौरान उसके शरीर की प्रतिक्रियाओं, जैसे सांस लेने का तरीका, दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर और त्वचा की कंडक्टिविटी को रिकॉर्ड किया जाता है। इसके बाद जांच करने वाले इन प्रतिक्रियाओं में आए बदलावों का विश्लेषण करते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि जरूरी सवालों के जवाब सामान्य प्रतिक्रियाओं (बेसलाइन रिस्पॉन्स) से काफी अलग हैं या नहीं।

लाइ डिटेक्टर टेस्ट के बारे में कानून क्या कहता है?

सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में ‘सेल्वी बनाम कर्नाटक राज्य’ मामले में एक अहम फैसला सुनाया था। इसमें कहा गया था कि पॉलीग्राफ टेस्ट, नार्को-एनालिसिस और ब्रेन-मैपिंग टेस्ट संबंधित व्यक्ति की सहमति के बिना नहीं किए जा सकते। कोर्ट ने माना कि ऐसे टेस्ट जबरदस्ती करने से संविधान के आर्टिकल 20(3) के तहत खुद के खिलाफ गवाही न देने के अधिकार और आर्टिकल 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन होता है। इसलिए, पॉलीग्राफ टेस्ट करने से पहले आरोपी की अपनी मर्जी से सहमति लेना जरूरी है।

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Ketan Agarwal Murder Case: सिया गोयल का पब में पार्टी करते वीडियो वायरल, शराब पीते देखी गईं

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी और अपने मंगेतर केतन अग्रवाल की कथित हत्या की आरोपी सिया गोयल एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। उनका एक नया वीडियो सामने आया है जिसमें वह एक नाइटक्लब में पार्टी करती और शराब पीती हुई दिख रही हैं। वीडियो में सिया गोयल भीड़-भाड़ वाले पब में फोन पर बात करते हुए और हाथ में एक बोतल जैसी चीज पकड़े हुए नजर आ रही हैं। यह क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले की चल रही जांच पर फिर से लोगों का ध्यान गया है।

वहीं, वीडियो सामने आने के बाद, अग्रवाल परिवार ने आरोप लगाया है कि रिश्ते के आगे बढ़ने से पहले उन्हें जान-बूझकर सिया की जीवनशैली से जुड़ी यह बात और कई अन्य जानकारी नहीं बताई गई थी। उन्होंने एक बार फिर इस मामले की सभी पहलुओं से निष्पक्ष और पूरी जांच करने की मांग दोहराई है।

हालांकि, यह वीडियो कब का है इसकी पुष्टि अभी तक नहीं है, लेकिन यह क्लिप तेजी से वायरल हो रही है, जिससे जांच को लेकर बहस और तेज हो गई है। साथ ही यह मर्डर केस तब से ही देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है, जब से यह मामला सामने आया है।

बता दें कि पुणे के रहने वाले रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल को कथित तौर पर 18 जून को पुणे जिले के लोहागढ़ किले में एक चट्टान से धक्का देकर मार डाला गया था। बताया जाता है कि केतन और उनकी मंगेतर की सगाई हो चुकी थी और इस साल नवंबर में उनकी शादी होने वाली थी।

वहीं, इस मामले में केतन की मंगेतर सिया गोयल (20) और उनके कथित साथी चेतन चौधरी (22) को आरोपी बनाया गया है, और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

कथित हत्या के बाद, दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और जांच जारी रहने तक उन्हें 3 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस कई पहलुओं से मामले की जांच कर रही है, जबकि यह मामला पूरे देश में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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Ketan Murder: क्या केतन अग्रवाल की कुंडली में था हत्या का संकेत? वायरल दावों के बीच ज्योतिषियों ने बताए खतरनाक ग्रह योग, दी ये अहम चेतावनी

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस मामले में जहां पुलिस हत्या की साजिश की जांच कर रही है। वहीं सोशल मीडिया पर केतन और उनकी मंगेतर सिया गोयल की कुंडली को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। दावा किया जा रहा है कि शादी से पहले दोनों की कुंडली का मिलान कराया गया था, जिसमें 36 में से 27 गुण मिले थे। कुंडली में किसी भी बड़े दोष का संकेत नहीं मिला था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ज्योतिष ऐसी घटनाओं की भविष्यवाणी कर सकता है?

पुलिस के अनुसार, 26 वर्षीय युवा कारोबारी केतन अग्रवाल की 18 जून को पुणे के पास लोहागढ़ किले से धक्का देकर हत्या किए जाने का आरोप उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी पर है। दोनों फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं। फिलहाल, मामले की जांच जारी है।

कुंडली को लेकर कई तरह के दावे वायरल

इसी बीच, सोशल मीडिया पर दोनों की कुंडली को लेकर कई तरह के दावे वायरल होने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शादी तय होने से पहले दोनों परिवारों ने ज्योतिषीय मिलान कराया था। News18 मराठी की रिपोर्ट के मुताबिक केतन का ‘देव गण’ और सिया का ‘मनुष्य गण’ होने के बावजूद दोनों के 36 में से 27 गुण मिले थे। किसी भी बड़े दोष (दोष) की बात सामने नहीं आई थी। वैवाहिक जीवन को सामान्य एवं सुखद बताया गया था।

हालांकि, कथित हत्या की घटना के बाद लोगों के बीच यह सवाल तेज हो गया है कि यदि कुंडली अनुकूल थी, तो इतनी बड़ी त्रासदी कैसे हुई? इसी मुद्दे पर Zee News से बातचीत में ज्योतिषाचार्य डॉ. अरुण बंसल और डॉ. अजय भाम्बी ने कुछ पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, जन्म कुंडली में मंगल का पांचवें या नौवें भाव में होना, बृहस्पति का कमजोर होना या शनि का ऐसे स्थान पर होना जिससे सप्तम भाव प्रभावित हो, कुछ परिस्थितियों में व्यक्ति के स्वभाव, क्रोध या वैवाहिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाले योग माने जाते हैं।

हालांकि दोनों ज्योतिषियों ने स्पष्ट किया कि ऐसे ग्रह योग किसी व्यक्ति को अपराधी घोषित नहीं करते। उनके मुताबिक, ये केवल कुछ प्रवृत्तियों या मानसिक झुकाव का संकेत माने जाते हैं। जबकि किसी व्यक्ति का व्यवहार उसके संस्कार, पारिवारिक माहौल, मानसिक स्वास्थ्य और जीवन के अनुभवों से भी गहराई से प्रभावित होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति में अत्यधिक क्रोध, आवेग या मानसिक अस्थिरता जैसी समस्याएं दिखाई दें, तो केवल ज्योतिषीय उपायों पर निर्भर रहने के बजाय मनोवैज्ञानिक परामर्श, ध्यान, योग और परिवार का सहयोग अधिक महत्वपूर्ण है। पारंपरिक मान्यताओं के तहत रुद्राक्ष धारण करने, नियमित ध्यान करने और भगवद्गीता के छठे अध्याय का पाठ करने की भी सलाह दी गई।

सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ी बहस?

सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि कुंडली पूरी तरह अनुकूल थी तो कथित तौर पर इतनी भयावह घटना कैसे हुई। वहीं कई यूजर्स का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के निर्णय, रिश्ते और अपराध जैसे मामलों को केवल कुंडली के आधार पर नहीं समझा जा सकता।

News18 मराठी की रिपोर्ट के मुताबिक, रिश्ता पक्का करने से पहले केतन के पिता और सिया के भाई साहिल ने एक ज्योतिषी से शादी को लेकर सलाह ली थी। कहा जा रहा है कि कुंडली अच्छी तरह से मिली थी। केतन का ‘देव गण’ और सिया का ‘मनुष्य गण’ आपसी समझ का संकेत दे रहे थे। दोनों के 36 में से 27 गुण मिल रहे थे। कोई बड़ा दोष नहीं पाया गया था। ज्योतिषियों ने जोड़े के लिए सुखद वैवाहिक जीवन की भविष्यवाणी की थी।

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(डिस्क्लेमर: यह खबर ज्योतिषाचार्यों द्वारा व्यक्त पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। ज्योतिष आस्था और व्यक्तिगत विश्वास का विषय है। इससे किसी व्यक्ति के स्वभाव, भविष्य या अपराध में संलिप्तता की पुष्टि नहीं की जा सकती। केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच जारी है और आरोपितों का दोष न्यायालय में विधिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।)

फार्महाउस, स्कॉर्पियो और 65 लाख का घर….कौन है अनुकल्प मिश्रा? जिसपर है राम मंदिर चढ़ावे में घपला करने का आरोप

Ram Mandir Donation Theft Case: राम मंदिर चढ़ावा विवाद में एक और नया मामला सामने आया है। पुलिस अब अनुकल्प मिश्रा की संपत्ति और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। जांचकर्ताओं को शक है कि भक्तों के चढ़ावे की कथित चोरी में वह मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था। अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या अनुकल्प की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी और हाल की खरीदारी के लिए मंदिर के दान का पैसा इस्तेमाल किया गया था। गौरतलब है कि इस वित्तीय जांच का मकसद आरोपी से जुड़े संदिग्ध पैसों के लेन-देन का पता लगाना है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अनुकल्प मंदिर में नकद दान की गिनती करने वाली आउटसोर्स टीम का हिस्सा था और कथित तौर पर उसने इस साजिश में मुख्य भूमिका निभाई थी।

फार्महाउस, मकान और एसयूवी की जांच जारी

जांचकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि अनुकल्प ने आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से अपने साले लवकुश मिश्रा को भी उसी नकदी गिनती टीम में शामिल करवाया था। ये दोनों इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए आठ लोगों में शामिल हैं।

बता दें कि जांच के सिलसिले में पुलिस अयोध्या जिले में अनुकल्प के पैतृक गांव बसावा गई।अधिकारियों ने पाया कि उसका घर आस-पास के घरों की तुलना में काफी आलीशान था। गांव वालों ने जांचकर्ताओं को बताया कि पिछले कुछ सालों में परिवार की आर्थिक स्थिति काफी बेहतर हुई है।

पुलिस इस बाद की पुष्टि करने में जुटी है कि क्या अनुकल्प ने हाल ही में गांव के बाहरी इलाके में एक फार्महाउस बनवाया था और पिछले साल अयोध्या में एक घर खरीदा था, जिसकी कीमत कथित तौर पर लगभग 65 लाख रुपये थी। साथ ही उन दावों की भी जांच की जा रही है वह महिंद्रा स्कॉर्पियो SUV खरीदने की प्रक्रिया में था।

जांच का एक अहम हिस्सा 30 अप्रैल को अनुकल्प द्वारा अपने गांव में कथित तौर पर आयोजित सात दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम भी है। पुलिस इस कार्यक्रम में हुए खर्च और इस्तेमाल किए गए फंड के स्रोत की पुष्टि कर रही है, क्योंकि राम मंदिर प्रतिष्ठान से जुड़े वरिष्ठ लोगों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों सहित कई प्रमुख हस्तियां इस कार्यक्रम में शामिल हुई थीं।

वित्तीय रिकॉर्ड की जांच जारी

जांचकर्ता लवकुश मिश्रा के वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच कर रहे हैं। आरोप है कि वह अनुकल्प मिश्रा की सिफारिश पर राम मंदिर में दान गिनने वाली टीम में शामिल हुआ था। इसके अलावा, पुलिस उन दावों की भी जांच कर रही है कि लवकुश ने हाल ही में 1 लाख रुपये से ज्यादा की मोटरसाइकिल खरीदी थी, जबकि बताया जाता है कि वह किराए के मकान में रहता है।

अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपियों के बैंक अकाउंट, प्रॉपर्टी के रिकॉर्ड, निवेश, संपत्ति और खर्च करने के तरीकों की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या ये उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से ज्यादा हैं।

जांच करने वालों ने कहा कि यह कवायद इस बात का पता लगाने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है कि क्या कथित तौर पर दान की चोरी से मिली रकम को चल या अचल संपत्ति में निवेश किया गया था। पुलिस ने संकेत दिया है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

जांचकर्ताओं के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया इस बात का पता लगाने के लिए की जा रही है कि क्या कथित दान चोरी से मिले पैसे को चल या अचल संपत्तियों में लगाया गया था। पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि जांच आगे बढ़ने पर और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

अब तक आठ आरोपी गिरफ्तार

मामले में गिरफ्तार किए गए आठ लोगों में राम शंकर यादव उर्फ ​​टीनू यादव, मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं।

जांचकर्ताओं के अनुसार, राम शंकर यादव (उर्फ टिन्नू) राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी सहयोगी और पूर्व ड्राइवर रहे हैं। मनीष यादव, टिन्नू का भतीजा बताया जाता है और वह दान गिनने के काम में शामिल था।

सुभाष श्रीवास्तव बैंक के पूर्व कर्मचारी हैं जिन्होंने कैश की गिनती की देखरेख की थी, जबकि अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे और रमाशंकर मिश्रा उस टीम का हिस्सा थे जो मंदिर के दान और कीमती सामान का काम संभालते थे।

पुलिस ने बताया कि राम मंदिर के दान (जिसमें कैश और कीमती सामान शामिल था) की कथित चोरी और हेराफेरी के मामले में FIR दर्ज होने के बाद इन आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांचकर्ताओं ने कहा कि जांच जारी है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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Bajaj Auto outlines FY27 roadmap

Bajaj factory entrance

Bajaj Auto Chairman Niraj Bajaj has outlined the company’s key priorities for FY27 in its annual report, identifying the domestic 125cc-plus motorcycle segment, the Chetak electric scooter business and exports as its primary growth drivers. The announcement comes on the back of a record FY26, during which Bajaj Auto crossed five million annual unit sales for the first time.

  1. Bajaj Auto to strengthen 125cc-plus motorcycle business 
  2. Plans to expand Chetak brand while improving product proposition and profitability
  3. Exports to remain a major focus

Bajaj Auto FY27 priorities

KTM turnaround described as a “work in progress, well underway”

On the domestic motorcycle front, Bajaj Auto’s priority for FY27 is to strengthen its competitiveness in the 125cc-plus segment through a combination of new products, brand interventions and improved market execution. One of those products is likely to be the next-generation Pulsar, which was recently spotted testing on an all-new platform with updated styling. It is expected to be launched ahead of the festive season.

Chetak volumes reached a new high in FY26, recovering strongly in the second half of the year after supply disruptions caused by restrictions on rare-earth material exports. Looking ahead to FY27, Bajaj Auto aims to significantly accelerate the electric scooter’s growth while further strengthening its product proposition and profitability. Meanwhile, KTM and Triumph, both of which posted their best-ever performance in FY26, are also expected to maintain their momentum. 

On the export front, Bajaj Auto – which manufactures in India for over 100 countries – saw monthly volumes cross two lakh units after a prolonged gap in FY26. Latin America recorded another record year, while Sri Lanka, Nepal and the Philippines posted strong growth. In FY27, the company plans to build on that recovery while managing continued disruptions in global logistics.

Regarding KTM, Niraj Bajaj said the company had worked with the Austrian management following Bajaj’s acquisition of control in November 2025 to strengthen governance, reconstitute the board and put a new leadership team in place. “While the turnaround remains a work in progress, it is well underway,” he said, adding that Bajaj remained confident in the strength of the KTM brand and its ability to return to its earlier performance levels over time.

Darshan Nakhwa & Ketan Thakkar

Ketan Murder Update: मंगेतर सिया ने बैठकर दिया था मौत का इशारा, प्रेमी चेतन के साथ मिलकर रची थी साजिश

Ketan Murder Update: महाराष्ट्र के पुणे जिले में 25 वर्षीय प्रॉपर्टी कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में पुलिस जांच में लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस के अनुसार, केतन की मंगेतर 20 वर्षीय सिया गोयल ने अपने कथित प्रेमी 22 वर्षीय चेतन चौधरी को केतन की हत्या का संकेत देने के लिए जानबूझकर बैठने का इशारा किया था। यह केवल हमला शुरू करने का संकेत नहीं था। बल्कि खुद को सुरक्षित रखने की भी सोची-समझी रणनीति थी।

पुलिस के मुताबिक, 18 जून को लोहागढ़ किले पर पहुंचने के बाद योजना के अनुसार सिया को पानी पीने या जूते का फीता बांधने के बहाने बैठना था। जैसे ही वह बैठती, चेतन पीछे से आकर अनजान केतन को खाई में धक्का दे देता। जांच अधिकारियों का कहना है कि दोनों ने इस योजना को पूरी तरह उसी तरह अंजाम दिया, जैसा पहले से तय किया गया था।

बैठने का संकेत का मकसद

जांच में यह भी सामने आया है कि बैठने का संकेत इसलिए चुना गया था ताकि धक्का दिए जाने के समय सिया केतन की पहुंच से दूर रहे। पुणे पुलिस का मानना है कि दोनों को आशंका थी कि यदि धक्का लगने के बाद केतन खुद को बचाने के लिए सिया को पकड़ने की कोशिश करता, तो वह भी खाई में गिर सकती थी। इसलिए उसकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह संकेत तय किया गया था।

पुलिस ने बताया कि चेतन चौधरी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए भी पूरी तैयारी की थी। वह पुणे से लगभग 90 किलोमीटर दूर लोहागढ़ किले तक कार की बजाय स्कूटर से गया, क्योंकि उसे डर था कि कार टोल प्लाजा के CCTV कैमरों में दर्ज हो सकती है। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किया गया स्कूटर जब्त कर लिया है।

जांच में यह भी सामने आया कि चेतन किले पर चढ़ते समय ‘हुडी’ पहनकर गया था। बाद में उसने हुडी उतारकर काली टी-शर्ट पहन ली। फिर वापस लौटते समय फिर से हुडी पहन ली। पुलिस का मानना है कि उसने लोगों का ध्यान भटकाने और पहचान छिपाने के लिए ऐसा किया।

क्राइम सीन रीक्रिएशन

रविवार को पुलिस सिया गोयल को घटनास्थल पर लेकर गई, जहां एक डमी की मदद से पूरे घटनाक्रम का क्राइम सीन रीक्रिएशन किया गया। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि 18 जून को हत्या किस तरह अंजाम दी गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया है कि हत्या से पहले वे लोहागढ़ किले पर उपयुक्त स्थान की तलाश करने गए थे।

इतना ही नहीं, उन्होंने वारदात को अंजाम देने से पहले वहां हत्या की प्रैक्टिस भी की थी। हालांकि पुलिस अभी यह पता लगाने में जुटी है कि उन्होंने किस स्थान पर यह प्रैक्टिस किया था। मामले में दोनों आरोपियों की पुलिस हिरासत सोमवार को समाप्त हो रही है। ऐसे में उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा और पुलिस आगे की जांच के लिए उनकी रिमांड बढ़ाने की मांग करेगी।

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इस बीच पुलिस ने सिया गोयल के पिता, मां और भाई से भी लंबी पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की गहन जांच की जा रही है। केतन मर्डर की साजिश से जुड़े सभी तथ्यों को अदालत के सामने रखा जाएगा।

भाई से झगड़ा, फिर चाय का ब्रेक… बाली ट्रिप से पहले कैब ड्राइवर ने सिया को लेकर किया बड़ा खुलासा

Ketan Agrawal Murder Case: केतन अग्रवाल मर्डर केस में एक के बाद एक नए खुलासे होते जा रहे हैं। इस बार केतन और हत्या की आरोपी सिया को छोड़ने वाले कैब ड्राइवर ने बड़ा दावा किया है। ड्राइवर के मुताबिक, रास्ते में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर सिया ने गाड़ी रुकवाई थी। इसके बाद उसने कार की डिक्की खोली और अपने पर्स से कुछ निकाला। इसके कुछ समय बाद दोनों एयरपोर्ट पहुंच गए, जहां बाद में पता चला कि केतन का पासपोर्ट गायब है।

वहीं, इस दावे को जांच में काफी अहम माना जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बाली में होने वाले प्री-वेडिंग फोटोशूट से पहले केतन का पासपोर्ट कैसे गायब हुआ। शुरुआती जांच से यह संकेत मिल रहे हैं कि पासपोर्ट को जानबूझकर गायब किया गया था।

कैब ड्राइवर वैभव जाधव ने मीडिया के साथ खास बातचीत में इस यात्रा की जानकारी दी। जाधव ने बताया कि उन्होंने सुबह करीब 10 बजे पुणे से यात्रियों को पिक किया था। उनके मुताबिक, सिया ने पहले कैब में बैठने से मना कर दिया था, लेकिन उनके भाई साहिल ने उन्हें जबरदस्ती गाड़ी में बिठाया। इसके बाद कैब रावेत पहुंची, जहां केतन अग्रवाल उसमें सवार हुए।

कैब ड्राइवर ने दावा किया कि मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर सफर के दौरान सिया ने चाय पीने के लिए एक फूड मॉल पर गाड़ी रुकवाई। करीब 10 मिनट बाद वह वापस आई और उसने ड्राइवर से कार की डिक्की खोलने को कहा।

ड्राइवर के मुताबिक, डिक्की के पास जाकर सिया ने अपने पर्स से कुछ सामान निकाला। इसके बाद करीब 15 से 20 मिनट बाद दोनों यात्रियों ने उसे वापस गाड़ी के पास बुलाया और फिर मुंबई एयरपोर्ट के लिए सफर शुरू कर दिया।

जाधव ने बताया कि उन्होंने सभी यात्रियों को मुंबई एयरपोर्ट पर उतार दिया था। करीब दो मिनट बाद, उन्हें एक कॉल आया जिसमें बताया गया कि कैब में एक छोटा बैग छूट गया है। उन्होंने कहा कि वह उस समय लगभग 200 मीटर दूर थे और वापस आकर बैग लौटा दिया।

ड्राइवर ने आगे बताया कि 500 ​​मीटर और आगे जाने के बाद, उन्हें एक और कॉल आया जिसमें कहा गया कि केतन का पासपोर्ट कैब में ही गिर गया है। जाधव ने बताया कि उन्होंने पहले ही पूरी गाड़ी देख ली थी और पासपोर्ट नहीं मिला था। इसके बावजूद उनसे वीडियो कॉल करके कैब का अंदर का हिस्सा दिखाने को कहा गया, लेकिन तब भी पासपोर्ट नहीं मिला।

जाधव के मुताबिक, इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट वापस लौटने के लिए कहा गया, जहां साहिल और केतन ने खुद कैब की तलाशी ली। उन्होंने दावा किया कि गाड़ी की तलाशी लेने के बावजूद पासपोर्ट नहीं मिला। तलाशी के बाद, दोनों पक्ष एयरपोर्ट से चले गए।

जाधव ने यह भी दावा किया कि पुणे से रावेत तक के सफर के दौरान सिया और उसके भाई साहिल के बीच बहस हुई थी; रावेत में ही केतन उनके साथ सफर में शामिल हुआ था। उसने फिर से कहा कि सिया ने उससे गाड़ी की डिक्की (बूट) खुलवाकर उसमें से कुछ निकाला था, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि वह चीज क्या थी।

बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की मौत से कुछ हफ्ते पहले बाली की प्री-वेडिंग ट्रिप (शादी से पहले की यात्रा) को रद्द करने की वजह बना एक खोया हुआ पासपोर्ट अब जांचकर्ताओं के लिए कथित हत्या की साजिश का एक अहम सुराग बन गया है; इस घटना ने पूरे महाराष्ट्र को चौंका दिया है।

पासपोर्ट का गायब होना एक बड़ी साज़िश का हिस्सा: पुलिस

इससे पहले, पुणे ग्रामीण पुलिस ने यह भी कहा था कि केतन की मंगेतर सिया गोयल ने कथित तौर पर उसका पासपोर्ट चुराकर नष्ट कर दिया था, जिससे वह विदेश नहीं जा सका। यह कोई अलग-थलग घटना नहीं थी, बल्कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी, जिसका अंत आखिरकार 26 वर्षीय युवक की लोहागढ़ किले में मौत के साथ हुआ।

बता दें कि केतन और सिया की सगाई फरवरी में हुई थी और वे शादी से पहले के फोटोशूट के लिए 6 जून को बाली जाने वाले थे। चार लोग साथ यात्रा कर रहे थे, लेकिन मुंबई एयरपोर्ट पहुंचने पर जब केतन को पता चला कि उसका पासपोर्ट गायब है, तो यात्रा अचानक रद्द कर दी गई।

पासपोर्ट गायब होने के हालात संदिग्ध: केतन के पिता

केतन के पिता, विशाल अग्रवाल ने कहा कि पासपोर्ट के गायब होने के हालात संदिग्ध लग रहे हैं।

उन्होंने कहा, “उन्हें 6 जून को प्री-वेडिंग शूट के लिए मुंबई से बाली, इंडोनेशिया जाना था। घर से निकलते समय कार में सिर्फ चार लोग थे। कार में बैठे-बैठे सभी ने अपने पासपोर्ट चेक किए और सभी पासपोर्ट, करेंसी, क्रेडिट कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और दूसरी कीमती चीजें एक ही पाउच में रखी गई थीं। वह पाउच कार में ही था।”

केतन के पिता ने आगे कहा, “एयरपोर्ट पहुंचने पर केतन को छोड़कर बाकी सभी के पास अपने पासपोर्ट थे। सिर्फ केतन का पासपोर्ट चोरी हो गया था। इस वजह से वह जा नहीं सका और उसे एयरपोर्ट से ही वापस लौटना पड़ा।”

पुलिस ने केतन मर्डर सीन को फिर से बनाया

वहीं, एक अधिकारी ने बताया कि रविवार को पुलिस सिया गोयल को लोहागढ़ किले ले गई ताकि क्राइम सीन को फिर से बनाया जा सके। इसके लिए एक डमी का इस्तेमाल किया गया ताकि उस पल को दोबारा दिखाया जा सके जब उसे धक्का देकर गिराया गया था और उसकी मौत हो गई थी।

उसे सुबह 6.30 बजे वहां ले जाया गया। पुलिस के मुताबिक, इस कवायद का मकसद उन घटनाओं के क्रम को ठीक-ठीक समझना है जिनकी वजह से 18 जून को केतन की जान चली गई थी।

क्राइम सीन को दोबारा बनाने के लिए एक पुतले (मैनक्विन) का इस्तेमाल किया गया। इस प्रक्रिया के तहत, डमी को किले की दीवारों से नीचे गिराया गया।

केतन अग्रवाल के पिता की भावुक अपील

शनिवार को, केतन अग्रवाल के पिता ने अपने बेटे के लिए न्याय की मांग करते हुए कैंडललाइट मार्च में हिस्सा लिया और एक भावुक अपील की। ​​उन्होंने उन लोगों से आगे आकर जांच में मदद करने की गुजारिश की जो 18 जून को लोहगढ़ किले में मौजूद थे – उस दिन केतन को कथित तौर पर उसकी मंगेतर सिया गोयल और उसके बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी ने पहाड़ी से नीचे धकेल दिया था।

पुणे के बाहरी इलाके गहुंजे में बेलमोंडो सोसाइटी में जमा हुए निवासियों, परिवार के सदस्यों और दोस्तों को संबोधित करते हुए विशाल अग्रवाल ने कहा कि किले में हुई इस घटना को कई लोगों ने देखा था, लेकिन वे अभी तक पुलिस के पास नहीं आए हैं।

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Ketan Murder Case: 640 मिनट तक इंटरनेट बंद! केतन अग्रवाल हत्याकांड में आरोपी की ‘ऑफलाइन’ चाल ने खोले कई राज

पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में आरोपी चेतन चौधरी का करीब 10 घंटे तक इंटरनेट बंद रखना पुलिस जांच का अहम हिस्सा बन गया है। पुलिस का मानना है कि 18 जून को चेतन ने जानबूझकर लगभग 640 मिनट तक अपना मोबाइल इंटरनेट बंद रखा, ताकि उसकी गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड सामने न आए। हालांकि, जांच अधिकारियों का कहना है कि इसी असामान्य हरकत से उन्हें पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ने में मदद मिली।

जांच के अनुसार, चेतन ने सुबह करीब 7 बजे अपना मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया था। पुलिस का कहना है कि उसने अपनी लोकेशन और ऑनलाइन गतिविधियों को छिपाने की कोशिश की। रिपोर्ट के मुताबिक, दिन में लोहगढ़ किले की ओर जाते समय उसने बातचीत करने के लिए बीच-बीच में अपने एक कर्मचारी का मोबाइल फोन भी इस्तेमाल किया।

पहचान छिपाने के लिए पहनी मोटी हुडी

पुलिस के अनुसार, आरोपी चेतन चौधरी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए भीषण गर्मी के बावजूद मोटी हुडी पहन रखी थी। पुलिस का दावा है कि उस समय तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस था, फिर भी वह ट्रेकिंग रास्ते पर केतन अग्रवाल और उनकी मंगेतर सिया गोयल का पीछा कर रहा था। जांच अधिकारियों के मुताबिक, दोपहर करीब 2:30 बजे सिया गोयल ने पहले से तय योजना के तहत विंचू काटा रिज के पास एक सुनसान जगह पर बैठकर इशारा किया। पुलिस का आरोप है कि इसके बाद चेतन चौधरी अपनी छिपी हुई जगह से बाहर आया और उसने केतन अग्रवाल को पहाड़ी से नीचे धक्का दे दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।

चेतन की ‘ऑफलाइन’ चाल नहीं आई काम

पुलिस जांच के मुताबिक, कई घंटे तक इंटरनेट बंद रखने के बाद आरोपी चेतन चौधरी ने शाम करीब 5:40 बजे दोबारा अपना मोबाइल इंटरनेट चालू किया। जांच अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल जांच के दौरान इंटरनेट कनेक्टिविटी में आया यह अचानक बदलाव उनके लिए एक अहम सुराग बना। इससे पूरे घटनाक्रम की समय-सीमा समझने में काफी मदद मिली।

मामले की जांच के तहत रविवार को पुलिस ने मुख्य आरोपी सिया गोयल की मौजूदगी में लोहगढ़ किले पर घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण किया और पूरी घटना को दोहराकर देखा। पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने बताया कि पुलिस ने आरोपियों के आने-जाने का रास्ता, घटनास्थल पर उनकी स्थिति, कथित तौर पर की गई हरकतों और पूरी घटना के क्रम को फिर से तैयार कर उसकी जांच की।