Share Market Crash: खास वजहों से IT-Pharma Sector में बिकवाली की आंधी, 500 प्वाइंट्स टूट गया Sensex

Share Market Crash: अधिकतर एशियाई बाजारों में रौनक के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आंच में घरेलू बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स और निफ्टी फिसल गए। फार्मा सेक्टर में जेनेरिक्स दवाईयों पर अमेरिकी टैरिफ और एआई से जुड़े शेयरों में तेजी के चलते भारतीय आईटी स्टॉक्स पर दबाव में सेंसेक्स 500 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी 50 भी फिसलकर 24000 के एकदम करीब आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का दबाव दिख रहा है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में करीब आधे फीसदी तक की गिरावट है।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 09:34 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 564.77 प्वाइंट्स यानी 0.73% की गिरावट के साथ 76,905.34 और निफ्टी (Nifty) 158.00 प्वाइंट्स यानी 0.65% की फिसलन के साथ 24,029.70 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 581.61 प्वाइंट्स टूटकर 76,888.50 और निफ्टी 168.30 प्वाइंट्स गिरकर 24,019.40 तक आ गया था।

Share Market Crash: ये है वजह

US-Iran War

अमेरिका ने ईरान पर लगातार 11वीं रात हवाई हमले किए। इन हमलों में मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर, एयरक्राफ्ट हैंगर और ड्रोन स्टोरेज साइट्स को निशाना बनाया गया। इन हमलों के बाद वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव कम होने के फिलहाल कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। इसने मार्केट में सेंटिमेंट कमजोर किया है।

आईटी-फार्मा सेक्टर में तेज बिकवाली

मार्केट पर आज सबसे अधिक दबाव फार्मा सेक्टर ने बनाया है। ट्रंप ने अपनी पॉलिसी में जेनेरिक्स दवाईयों को भी शामिल किया तो इस सेक्टर की कंपनियों को झटका लगा और निफ्टी फार्मा 1% से अधिक फिसल गया। इसके अलावा एआई से जुड़े स्टॉक्स में तेजी के चलते भारतीय मार्केट में आईटी कंपनियों पर दबाव पड़ा और निफ्टी आईटी 1% से अधिक टूट गया। इसके अलावा बैंकिंग सेक्टर में भी बिकवाली का तेज दबाव है और सरकारी और प्राइवेट बैंकों के निफ्टी इंडेक्स में आधे-आधे फीसदी से अधिक की गिरावट है।

India VIX में उछाल

मार्केट की घबराहट को मापने वाले इंडिया विक्स में गिरावट ने मार्केट पर दबाव बनाया। फिलहाल यह 3.25% की गिरावट के साथ 13.01 पर है। इसके अधिक होने का मतलब वोलैटिलिटी अधिक होने की आशंका है तो कम होने का मतलब वोलैटिलिटी कम होने की संभावना है।

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US-Iran War: अब आर-पार के मूड में ट्रंप! अमेरिका ने ईरान के मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर पर की बमबारी, होर्मुज में बढ़ा तनाव

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

US Iran War: ईरान युद्ध पर ट्रंप ने दे दिया एक बड़ा अपडेट! क्या अब थम जाएगा युद्ध, समझें अमेरिका का पूरा प्लान

US Iran War Ceasefire Update: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो हफ्तों से ज्यादा समय से चल रहे भीषण संघर्ष को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जद्दोजहद जारी हैं। कतर, ओमान, मिस्र और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रीय देश वाशिंगटन और तेहरान को बातचीत की मेज पर लाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। यहां तक कि 10 दिनों के एक अस्थायी सीजफायर का प्रस्ताव भी तैयार है।

लेकिन इन सब के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल युद्ध पर ‘पॉज’ बटन दबाने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं। Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अभी युद्ध उस मोड़ पर नहीं पहुंचा है जहां कूटनीति सैन्य दबाव से बेहतर डील दे सके। आइए समझते हैं कि अमेरिका सीजफायर के प्रस्ताव पर कदम पीछे क्यों खींच रहा है और इसके पीछे की असली वजह क्या है।

10 दिनों का सीजफायर प्रस्ताव क्या है और किसने तैयार किया?

क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए मध्य पूर्व के 4 प्रमुख देश कतर, ओमान, मिस्र और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। प्रस्ताव के ये है मुख्य बिंदु:

  • अमेरिका और ईरान के बीच तत्काल 10 दिनों का अस्थायी सीजफायर लागू हो।
  • इस विराम के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने पर सीधी बातचीत हो।
  • यदि 10 दिनों का विराम सफल रहता है, तो एक व्यापक राजनीतिक और सुरक्षा ढांचे पर आगे की चर्चा की जाए।
  • कतर, ओमान, मिस्र और पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मतभेदों को दूर करने के लिए बातचीत जारी रखेंगे।

ईरान ने इस बात को स्वीकार किया है कि उसे सीजफायर का प्रस्ताव मिला है और वह इस पर विचार कर रहा है, हालांकि उसने अभी तक कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया है।

सीजफायर के प्रस्ताव को क्यों टाल रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस प्रस्ताव पर तुरंत मुहर न लगाने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े रणनीतिक कारण हैं:

A. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बार्गेनिंग पावर: अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरान ने अभी तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जहाजों की आवाजाही के लिए नहीं खोला है। यह वही समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। वाशिंगटन का मानना है कि ईरान पर सैन्य दबाव जारी रखने से अमेरिका को बातचीत की मेज पर ज्यादा बढ़त मिलेगी।

B. अमेरिकी सैनिकों की मौत का बदला: हाल ही में जोर्डन में हुए एक ईरानी मिसाइल हमले में 2 अमेरिकी सैनिक शहीद हो गए थे। इस घटना ने वाशिंगटन के रुख को और सख्त कर दिया है। अब अमेरिका का ध्यान युद्ध रोकने से हटकर जवाबी कार्रवाई पर केंद्रित हो गया है। अमेरिका किसी भी स्थिति में खुद को कमजोर दिखाकर बातचीत में शामिल नहीं होना चाहता।

ये 4 देश ही क्यों कर रहे हैं मध्यस्थता?

इन चारों देशों के अमेरिका और ईरान दोनों के साथ गहरे कूटनीतिक और रणनीतिक संबंध हैं:

ओमान: ओमान लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच एक गुप्त बैकचैनल के रूप में काम करता आया है।

कतर: कतर में मध्य पूर्व का सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य अड्डा है, और साथ ही ईरान के साथ भी इसके कामकाजी संबंध हैं।

मिस्र: मिस्र अरब जगत का एक प्रमुख देश है, जो क्षेत्रीय युद्ध को फैलने से रोकने के लिए लगातार सक्रिय रहता है।

पाकिस्तान: पाकिस्तान की सीमाएं ईरान से लगती हैं और खाड़ी देशों व अमेरिका दोनों के साथ उसके करीबी संबंध हैं। वह इस डर से मध्यस्थता में जुटा है ताकि युद्ध से उसका अपना क्षेत्र अस्थिर न हो।

इस युद्ध से दांव पर क्या लगा है?

यह सीजफायर सिर्फ लड़ाई रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर ग्लोबल इकोनॉमी पर भी पड़ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है और कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। अगर यह समुद्री मार्ग जल्द नहीं खुलता है, तो भारत जैसे प्रमुख ऊर्जा आयातक देशों के लिए क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ना और आर्थिक दबाव महसूस होना तय है।

Iran पर 9 दिनों तक ताबड़तोड़ हमले के बाद अमेरिका ने दिखाई उम्मीद की किरण, मार्को रुबियो बोले- ईरान के अलग-अलग चैनलों से बातचीत के मिल रहे संकेत

US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच भीषण युद्ध जारी है। दोनों ही पक्ष अपने कदम खींचने को तैयार नहीं है। एक ओर अमेरिका लगातार ईरान पर जोरदार हमले कर रहा है। वहीं, ईरान का भी पलटवार जारी है। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिका का दावा है कि ईरान फिर से बातचीत की मेज पर लौटना चाह

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US Iran War News: क्या ईरान ने अमेरिका के सामने किया सरेंडर? ट्रंप के मंत्री ने तेहरान से बातचीत के दिए संकेत

US Iran War News: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को कई माध्यमों से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि ईरान बातचीत करना चाहता है। हालांकि, ईरानी नेतृत्व के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद भी बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। CNN से बातचीत में रुबियो ने कहा, “हमें कई चैनलों के जरिए ईरान की ओर से बातचीत की इच्छा के संकेत मिल रहे हैं। लेकिन वहां की सत्ता और नेतृत्व के भीतर इस मुद्दे को लेकर विभाजन भी बढ़ रहा है।”

सैन्य कार्रवाई के बीच कूटनीति के संकेत

रुबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच लगातार सैन्य हमले जारी हैं। अमेरिका का कहना है कि उसकी कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों पर हमलों के लिए किया जा रहा है।

इससे पहले भी रुबियो ने आरोप लगाया था कि ईरान क्षेत्रीय संघर्ष में हॉर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर रहा है। उन्होंने अन्य देशों से भी वैश्विक समुद्री व्यापार और जहाजरानी की सुरक्षा के लिए अधिक सहयोग देने की अपील की।

दुनिया के देशों से सहयोग की अपील

फिलीपींस रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा कि अमेरिका समुद्री रूट्स की सुरक्षा के लिए अपने प्रयास जारी रखेगा। लेकिन अन्य देशों को भी उपकरण, संसाधन और आर्थिक सहयोग देकर इस जिम्मेदारी में भागीदारी करनी चाहिए।

लगातार नौवीं रात अमेरिकी हमले

ईरान पर अमेरिकी हमलों का सिलसिला लगातार नौवीं रात भी जारी रहा। ईरानी मीडिया के मुताबिक, देश के दक्षिणी तटीय इलाकों में कई धमाके हुए। इसके अलावा मौजूदा अभियान के दौरान पहली बार उत्तर-पश्चिमी शहर तबरीज (Tabriz) में भी विस्फोटों की खबर सामने आई है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि सैन्य अभियान का दायरा अब और बढ़ाया जा रहा है।

ट्रंप बोले- फिर किया जोरदार हमला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताजा हमलों के बाद कहा कि यह कार्रवाई उन तीन महान देशभक्तों को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने इस संघर्ष में अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। ‘फीफा क्लब विश्व कप’ फाइनल से वॉशिंगटन लौटने के बाद ट्रंप ने कहा, “हमने आज रात फिर उन पर बहुत जोरदार हमला किया।”

बातचीत का रास्ता अब भी खुला

हालांकि, सैन्य संघर्ष लगातार तेज हो रहा है, लेकिन मार्को रुबियो ने साफ किया कि अमेरिका अब भी कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, सैन्य कार्रवाई और बातचीत दोनों प्रक्रियाएं एक साथ चल सकती हैं, और यदि ईरान वार्ता के लिए आगे आता है तो अमेरिका उस विकल्प पर भी विचार करने को तैयार है।

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LPG Gas Price Today: गैस सिलेंडर की कीमतों पर बड़ा अपडेट! आज क्या है 14.2 किलो LPG का रेट, क्या बढ़ने वाली हैं कीमतें?

LPG Price Today (17 जुलाई): अगर आप आज यानी 17 जुलाई को घरेलू गैस सिलेंडर बुक कराने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर और 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में आज भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। देशभर में गैस सिलेंडर की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत ₹942 है। जबकि 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2,930 बनी हुई है। वहीं, दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा और गाजियाबाद में घरेलू गैस सिलेंडर ₹939.50 में उपलब्ध है। इन शहरों में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत भी ₹2,930 है।

क्या अमेरिका-ईरान तनाव का पड़ेगा असर?

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसका अधिकांश आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के रास्ते होता है।

यदि इस समुद्री मार्ग पर किसी तरह की बाधा आती है या संघर्ष और बढ़ता है, तो भारत में LPG की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। ऐसे में आने वाले समय में गैस सिलेंडर की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

क्या फिर बढ़ सकती हैं गैस सिलेंडर की कीमतें?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और LPG की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, तो सरकार के सामने दो विकल्प होंगे। या तो LPG पर सब्सिडी बढ़ाई जाए या फिर घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की जाए।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक सरकारी तेल कंपनियों को प्रत्येक घरेलू LPG सिलेंडर पर लगभग ₹500 से ₹700 तक का नुकसान उठाना पड़ रहा था। ऐसे में लंबे समय तक वैश्विक कीमतें ऊंची रहने पर उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल क्या करें उपभोक्ता?

फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि 17 जुलाई को LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में कीमतों और सप्लाई दोनों पर नजर रखना जरूरी होगा।

आज के प्रमुख रेट

दिल्ली: घरेलू LPG (14.2 किग्रा)- ₹942, कमर्शियल (19 किग्रा) – ₹2,930

नोएडा: घरेलू LPG – ₹939.50, कमर्शियल – ₹2,930

गाजियाबाद: घरेलू LPG – ₹939.50, कमर्शियल – ₹2,930

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US-Iran War Update: ईरान पर अमेरिकी हवाई हमले तेज! पुल, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट को बनाया निशाना, ट्रंप की चेतावनी के बाद बढ़ा तनाव

US-Iran War Update: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार (17 जुलाई) को अमेरिका ने लगातार छठी रात ईरान पर हवाई हमले किए। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इस बार हमलों का निशाना दक्षिणी ईरान का महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर बना, जिसमें एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, पुल और संचार सुविधाएं शामिल हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बयान जारी कर कहा कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को और कमजोर करना था। हालांकि, ईरानी मीडिया का दावा है कि हमलों में परिवहन नेटवर्क, संचार व्यवस्था और कुछ नागरिक क्षेत्रों को भी नुकसान पहुंचा है।

एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और पुलों पर हमले

ईरानी सरकारी मीडिया IRIB के मुताबिक, दक्षिण-पूर्वी ईरान स्थित इरानशहर एयरपोर्ट के पास जोरदार धमाके हुए। अमेरिकी मिसाइल ने एयरपोर्ट परिसर को निशाना बनाया। वहीं, ‘तस्नीम न्यूज’ एजेंसी ने दावा किया कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने एयरपोर्ट पर मिसाइल हमला किया।

बंदर अब्बास शहर में स्थित रेलवे जंक्शन स्टेशन पर भी हमला होने की खबर है। ‘मेहर’ न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस हमले में रेलवे के दो कर्मचारी घायल हो गए। इसके अलावा, होर्मोजगान प्रांत के बंदर खमीर के पास दो पुलों पर भी हमले किए गए।

स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, इन हमलों में दो लोगों की मौत हो गई। जबकि चार अन्य घायल हुए हैं। नुकसान के बाद बंदर अब्बास, खमीर और लार को जोड़ने वाले प्रमुख सड़क मार्गों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।

कई इलाकों में धमाके, बिजली प्रभावित

ईरानी मीडिया के अनुसार, क़ेश्म द्वीप, बुशेहर और अहवाज समेत दक्षिणी ईरान के कई हिस्सों में भी विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। तस्नीम न्यूज एजेंसी ने बताया कि बंदर अब्बास में एक मोबाइल टावर भी हमले की चपेट में आया, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित हुई और सात लोग घायल हो गए।

ट्रंप ने पहले ही दी थी चेतावनी

इन हमलों से दो दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान बातचीत की मेज पर नहीं लौटता, तो अमेरिका उसके अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा। ‘फॉक्स न्यूज’ को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ईरान के बिजली प्लाटों और पुलों पर भी हमला कर सकता है। उन्होंने कहा, “अगले हफ्ते हालात उनके लिए और खराब होंगे। हम उनके बिजली प्लाटं और पुलों को तबाह कर देंगे, यदि वे बातचीत के लिए तैयार नहीं होते।”

लगातार छठी रात कार्रवाई

शुक्रवार के हमलों के साथ ही अमेरिका ने लगातार छठी रात ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखा है। इस घटनाक्रम के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।

ईजब अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था, तब तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को समुद्री ट्रैफिक के लिए प्रभावी रूप से बंद कर दिया था। इस कदम से तेल, उर्वरक और कई अन्य वस्तुओं की कीमतें न केवल क्षेत्र में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी तेजी से बढ़ गई थीं। इससे वार्ता में ईरान की स्थिति मजबूत हो गई। अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि युद्ध में अमेरिका का पलड़ा भारी है।

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Karnataka Doctor Murder: कर्नाटक के धारवाड़ से एक बेहद सनसनीखेज और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। एक महिला डॉक्टर पर अपने ही डॉक्टर पति की चाकू मारकर हत्या करने और 8 साल के बेटे पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जब परिजन और पुलिस मौके पर पहुंचे, तब आरोपी महिला कथित तौर पर बेड पर लेटी हुई मोबाइल चला रही थी। जबकि पति और बेटा खून से लथपथ पड़े थे। वहां का नजीरा डरावना था। पूरे अपार्टमेंट में खून फैला हुआ था।

डॉक्टर पति की बेरहमी से हत्या

मृतक की पहचान डॉ. किरण होन्नन्नावर (45) के रूप में हुई है। वह धारवाड़ के चिरायु अस्पताल में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ (Anaesthetist) थे। उनकी पत्नी डॉ. प्रियंका कट्टनहल्ली एमबीबीएस और नेत्र रोग विशेषज्ञ (MS Ophthalmology) हैं। महिला पर अपने पति की हत्या का आरोप है। यह घटना बुधवार 15 जुलाई को शहर के एक अपार्टमेंट की छठी मंजिल पर स्थित उनके फ्लैट में हुई। पुलिस के मुताबिक, कपल के 8 वर्षीय बेटे पर भी चाकू से हमला किया गया। बच्चे की सांस चल रही थी। इसके बाद उसे तुरंत निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है।

पुलिस पहुंची तो सामने था खौफनाक मंजर

पड़ोसियों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची तो पूरे फ्लैट में खून फैला हुआ था। एक कमरे में डॉ. किरण का शव पड़ा था। जबकि उनका बेटा गंभीर रूप से घायल था। पुलिस कमिश्नर एन. शशिकुमार ने बताया कि शुरुआती टीम को लगा था कि बच्चा भी मर चुका है। लेकिन उन्होंने उसकी नब्ज जांची तो पता चला कि वह जीवित है। इसके बाद तुरंत उसे अस्पताल भेजा गया, जिससे उसकी जान बचाई जा सकी। महिला डॉक्टर कथित तौर पर बेड पर लेटी मोबाइल स्क्रॉल कर रही थी। इस सीन ने सभी को स्तब्ध कर दिया।

परिजनों को देती रही झूठी जानकारी

जांच में सामने आया है कि मंगलवार रात और बुधवार सुबह जब परिजनों और दोस्तों ने डॉ. किरण को फोन किया, तो उनकी पत्नी प्रियंका ने कॉल उठाकर कहा कि वह आराम कर रहे हैं। बाद में उसने यह भी कहा कि वह ड्यूटी पर गए हैं। लेकिन जब लंबे समय तक संपर्क नहीं हुआ तो बुधवार शाम परिजन फ्लैट पहुंचे। दरवाजा खुलने पर उन्होंने अंदर का भयावह सीन देखा। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि घटना के समय घर में कोई बाहरी व्यक्ति मौजूद था। फ्लैट के अंदर केवल पति, पत्नी और बेटा ही थे। फिलहाल, मामले की जांच सभी एंगल से चल रही है।

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US-Iran War Update: पश्चिम एशिया में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रूट्स में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अपनी ‘अटूट रेड लाइन’ (unbreakable red line) घोषित करते हुए अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। तेहरान ने साफ कहा है कि यदि अमेरिका ने इस रणनीतिक जलमार्ग में किसी भी तरह का हस्तक्षेप किया तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका लगातार पांचवीं रात ईरान पर हवाई हमले कर चुका है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान युद्ध छोड़ बातचीत की मेज पर नहीं लौटता तो उसके बिजली प्लांटों और प्रमुख पुलों को भी निशाना बनाया जा सकता है।

क्या है ईरान की ‘रेड लाइन’?

एक वरिष्ठ ईरानी सैन्य अधिकारी के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी दखल किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि यह ईरान की ‘अटूट रेड लाइन’ है। इसे पार करने की कोशिश गंभीर परिणाम ला सकती है। ईरान पहले भी कह चुका है कि जब तक अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई नहीं रोकता, तब तक होर्मुज को बंद रखने का विकल्प उसके पास मौजूद है।

दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रूट माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी (Liquefied Natural Gas) का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यदि यहां आवाजाही प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

दुनिया का लगभग 20% पेट्रोलियम (करीब 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन) और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का एक बड़ा हिस्सा रोजाना इसी रास्ते से होकर गुजरता है। हालांकि, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों ने इस रास्ते से बचने के लिए जमीनी पाइपलाइनें बनाई हैं। लेकिन वे कुल तेल का केवल एक छोटा हिस्सा ही ले जा सकती हैं। खाड़ी देशों के अधिकांश तेल निर्यात के पास इस जलमार्ग के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

अमेरिका ने तेज किए हमले

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास समेत कई स्थानों पर ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है जिससे वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इससे पहले ग्रेटर तुंब द्वीप पर तटीय रक्षा ठिकानों और क्रूज मिसाइल साइटों पर भी हमले किए गए थे।

ईरान में कई जगह धमाके

ईरानी मीडिया के मुताबिक, हालिया हमलों का दायरा पहले की तुलना में कहीं ज्यादा व्यापक रहा। उत्तरी ईरान के सेमनान एयरपोर्ट के पास एक प्रोजेक्टाइल गिरा। जबकि लोरेस्तान प्रांत में भी विस्फोटों की खबरें सामने आईं। राजधानी तेहरान के आसपास एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए। वहीं, खुजेस्तान प्रांत के अहवाज क्षेत्र में एक बच्चों के कैंसर अस्पताल के पास भी हमले की सूचना मिली, जिसकी ईरान ने कड़ी निंदा की है।

35 लोगों की मौत, 300 से ज्यादा घायल

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हालिया अमेरिकी हमलों में कम से कम 35 लोगों की मौत हुई है। जबकि 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। स्थानीय लोगों ने लगातार हो रहे धमाकों से दहशत का माहौल बताया है।

ईरान की पलटवार की धमकी

अमेरिका की कार्रवाई के जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि हमले जारी रहे तो केवल होर्मुज जलडमरूमध्य ही नहीं। बल्कि पूरे क्षेत्र में अमेरिकी हितों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। ईरानी सेना ने कहा कि अगर अमेरिका आगे बढ़ता है तो क्षेत्र का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर ईरानी सशस्त्र बलों के जवाबी हमलों की जद में आ सकता है।

खाड़ी देशों पर भी बढ़ा खतरा

ईरान की सेना रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई में जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। वहीं, जॉर्डन ने कई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है। कुवैत ने ड्रोन गिराने की जानकारी दी। जबकि बहरीन में एयर रेड सायरन बजाए गए। इराक के एरबिल क्षेत्र में भी विस्फोटक ड्रोन को रोके जाने की खबर सामने आई है।

कूटनीतिक रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं

हालांकि, दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव चरम पर है। लेकिन कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों से बातचीत फिर शुरू करने की अपील की है। वहीं, ईरान ने संकेत दिया है कि यदि उसे किसी समझौते का लाभ नहीं मिलता तो वह उस पर कायम रहने का कोई कारण नहीं देखता। उधर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोहराया कि यदि ईरान जल्द बातचीत के लिए तैयार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

दुनिया पर क्या होगा असर?

यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ता है या वहां जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, पेट्रोल-डीजल की कीमतों, समुद्री व्यापार और पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह टकराव केवल क्षेत्रीय नहीं। बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी चिंता बनता जा रहा है।

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US Iran War: ईरान पर ट्रंप के तेवर कड़े! तेहरान पर अमेरिका ने पहली बार दिन के उजाले में बरसाए बम, बेहद खतरनाक फेज में पहुंचा युद्ध

US Launches First Daylight Airstrikes On Iran: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य टकराव अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख के बीच, अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपनी रणनीति बदलते हुए पहली बार दिन के उजाले में हवाई हमले (Daylight Airstrikes) शुरू कर दिए हैं। इसके साथ ही यह युद्ध अब एक बिल्कुल नए फेज में प्रवेश कर चुका है।

पिछले कई दिनों से ट्रंप प्रशासन के निर्देश पर अमेरिकी वायुसेना सिर्फ रात के अंधेरे में ईरान पर बमबारी कर रही थी, लेकिन बुधवार को अचानक दिन में हुए हमलों ने सबको चौंका दिया है। दोनों देशों के बीच हुआ अंतरिम समझौता (Interim Deal) पूरी तरह टूट चुका है, जिसके बाद दोनों महाशक्तियां आमने-सामने आ गई हैं। आइए जानते हैं क्या है मिडिल ईस्ट में भड़के इस महायुद्ध की मौजूदा स्थिति।

CENTCOM ने की दिन में हवाई हमलों की पुष्टि

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बुधवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर इस नए सैन्य ऑपरेशन की पुष्टि की है:

सुबह 6 बजे शुरू हुए हमले: सेंटकॉम के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईस्टर्न टाइम (ET) के मुताबिक सुबह 6 बजे ईरान पर हवाई हमलों की नई लहर शुरू की।

रणनीति में बड़ा बदलाव: रात के बजाय दिन के उजाले में हमला करना अमेरिकी सेना की आक्रामक रणनीति और बढ़ते सैन्य दबाव को साफ दर्शाता है।

आखिर क्यों ईरान पर बम बरसा रहा है अमेरिका?

इस पूरे सैन्य टकराव के केंद्र में दुनिया का सबसे व्यस्त समुद्री ऊर्जा गलियारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है:

कमर्शियल जहाजों पर हमला: अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के मुताबिक, पिछले सात दिनों में ईरान ने जानबूझकर सात कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाया है, जिसमें लगभग एक दर्जन नागरिक क्रू मेंबर्स की मौत हुई है या वे लापता/घायल हैं।

पड़ोसी देशों पर मिसाइल दागना: ईरान ने अपने पड़ोसी खाड़ी देशों की तरफ भी दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का मकसद अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करना और ईरान की आक्रामकता का करारा जवाब देना है।

समझौता टूटने के बाद बिगड़े हालात

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए जो राजनयिक प्रयास चल रहे थे, वे अब पूरी तरह ठप हो चुके हैं:

इंटरिम डील हुई तबाह: दोनों देशों के बीच हुआ अंतरिम समझौता पूरी तरह से बिखर चुका है, जिससे कूटनीति के रास्ते बंद हो गए हैं और दोनों देश सीधे सैन्य टकराव के रास्ते पर लौट आए हैं।

बढ़ेगा ग्लोबल एनर्जी संकट: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर दुनिया का एक बड़ा तेल और गैस का कारोबार गुजरता है। यहां लगातार हो रहे हमलों और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति ठप होने और क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान छूने का खतरा मंडराने लगा है।

कुल मिलाकर अमेरिकी सेना के इस कदम से साफ है कि वाशिंगटन अब तेहरान पर किसी भी तरह का सैन्य दबाव कम करने के मूड में नहीं है। रात के बाद अब दिन में भी शुरू हुई इस बमबारी ने मिडिल ईस्ट में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आहट को और तेज कर दिया है।

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US-Iran War News: होर्मुज को लेकर ट्रंप का बड़ा ऐलान! ईरानी जहाजों पर पूरी नाकाबंदी, शुल्क लगाने की धमकी से पीछे हटे

US-Iran War News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ईरान और खाड़ी क्षेत्र को लेकर कई बड़े ऐलान किए हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना की वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान को छोड़कर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सभी देशों के लिए खुला रहेगा। जबकि ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों पर पूरी नाकाबंदी लागू की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।

इन हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। जबकि 10 अन्य घायल हो गए। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार सुबह ईरान दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब किया और इन हमलों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने कहा कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के दौरान ‘ए अल बहियाह’ और ‘एमटी मोम्बासा’ नाम के दो पोत पर हुए हमलों को लेकर बेहद चिंतित है।

टैरिफ वाले बयान से पीछे हटे

डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले माल पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की अपनी योजना से एक दिन बाद ही पीछे हटते हुए कहा कि इसके बजाय पश्चिम एशियाई देश अमेरिका के साथ निवेश और व्यापार समझौते करेंगे।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा. “पश्चिम एशिया के नेताओं के साथ अत्यंत सकारात्मक बातचीत के आधार पर मैंने 20 प्रतिशत अमेरिकी प्रतिपूर्ति शुल्क को उन व्यापार और निवेश समझौतों से बदलने का फैसला किया है। उन्हें विभिन्न खाड़ी देश अमेरिका में करेंगे।”

राष्ट्रपति ने कहा कि ये निवेश बहुत बड़े पैमाने पर होंगे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ये उन नई प्रतिबद्धताओं से अलग होंगे या नहीं, जिनकी घोषणा ट्रंप ने पिछले साल पश्चिम एशिया यात्रा के बाद की थी।

ईरान का हिंसक दौर अब खत्म होगा?

ट्रंप ने दुनिया को भरोसा दिलाते हुए संकल्प लिया है कि अमेरिका, ईरान को कभी भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) हासिल नहीं करने देगा। ट्रंप ने दावा किया है कि इन कड़े कदमों के बाद अब क्षेत्र में ईरान का हिंसक और आक्रामक दौर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

होर्मुज में हमले में एक भारतीय की मौत

भारत ने कमर्शियल पोत ‘एमटी अल बहिया’ और ‘एमटी मोम्बासा’ पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। उन पर कुल 30 भारतीय नाविक सवार थे। भारत ने पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता लाने के लिए हिंसा को तुरंत रोकने और बातचीत व कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपनी अपील दोहराई।

संयुक्त अरब अमीरात के दो तेल टैंकरों पर हमले अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुए। ईरान पर 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद शुरू हुए संघर्ष में पश्चिम एशिया में 14 भारतीयों की मौत हो चुकी है।

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विदेश मंत्रालय ने मारे गए भारतीय नागरिक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताई और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की। मंत्रालय ने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भारतीय मिशन हालात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। साथ ही प्रभावित भारतीय नाविकों को हर संभव मदद दिलाने के लिए खाड़ी देश के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं।