Gold Silver Rates Today: सोने और चांदी में बड़ी गिरावट, चांदी एक दिन में 6700 रुपये फिसली

Gold Silver Rates Today: सोने और चांदी में 8 जुलाई को बड़ी गिरावट आई। देश और विदेश में बुलियन में गिरावट की वजह क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल और डॉलर में मजबूती रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान के साथ सीजफायर खत्म हो गया है। इस खबर का असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 1.1 फीसदी गिरकर 4,061.32 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। यूएस गोल्ड फ्यूचर्स में भी 2 फीसदी की गिरावट आई।

गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में गिरावट

भारत में कमोडिटी एक्सचेंज एमएसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में गिरावट आई। गोल्ड फ्यूचर्स 1.16 फीसदी यानी 1,692 रुपये गिरकर 1,43,710 रुपये प्रति 10 ग्राम पर चल रहा था। सिल्वर फ्यूचर्स 2.93 फीसदी यानी 6,763 रुपये गिरकर 2,24,201 रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रहा था। ट्रेडर्स का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव फिर से बढ़ने से क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ा है।

बुलियन पर क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल का असर

ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान के साथ सीजफायर खत्म हो गया है। इसका मतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी युद्धविराम को लेकर बातचीत की संभावना फिलहाल खत्म हो गई है। इस खबर से क्रूड ऑयल की कीमतें 6 फीसदी से ज्यादा चढ़ गईं। इससे महंगाई बढ़ेंगी। महंगाई को कंट्रोल में करने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट बढ़ाएगा। इसका निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ेगा। फेड की मीटिंग के मिनट्स आज देर रात जारी होंगे। इससे पता चलेगा कि महंगाई को लेकर फेड की क्या सोच है।

फिर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने का खतरा बढ़ा

लेमन मार्केट्स डेस्क में रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग ने कहा, “घरेलू बाजार में गोल्ड की कीमतों में नरमी आई। इसकी वजह मध्यपूर्व में जियोपॉलिटिकल टेंशन का बढ़ना है। फिर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऑयल और गैस सहित दूसरी चीजों का आवागमन बाधित होगा। इस वजह से ऑयल की कीमतों में उछाल आया।” आज लगातार तीसरा दिन है जब सोने में गिरावट आई है।

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गोल्ड की कीमतों में ज्यादा गिरावट की उम्मीद नहीं

एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड की कीमतों पर आगे दबाव दिख सकता है। हालांकि, दुनिया के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से सोने में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। कुछ समय तक इसकी कीमतें सीमित दायरे में ऊपर-नीचे जा सकती हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, मई में केंद्रीय बैंकों ने गोल्ड में निवेश बढ़ाया। खबर है कि तंजानिया के केंद्रीय बैंक ने बीते 18 महीनों में करीब 28 टन सोना खरीदा है।

Stock Market Crash: ट्रंप के बयान से तबाही! सिर्फ 40 मिनट में सेंसेक्स 1000 अंक टूटा; अब तीन फैक्टर पर मार्केट की नजर

Stock Market Crash: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने बुधवार को दुनिया भर के बाजारों में भारी गिरावट (why market is down today) ला दी। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हुआ सीजफायर अब खत्म हो चुका है। इसके बाद भारतीय शेयर बाजार में भी जोरदार बिकवाली शुरू हो गई। महज 40 मिनट में सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा टूट गया। वहीं, बाजार में डर का पैमाना माने जाने वाला India VIX 27% उछल गया।

दोपहर 1:40 बजे सेंसेक्स 77,603.90 पर कारोबार कर रहा था। अगले 40 मिनट में यह करीब 1,076 अंक लुढ़ककर 76,527.81 पर आ गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,677.12 अंक यानी 2.15% टूटकर 76,503.60 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 516.65 अंक यानी 2.12% गिरकर 23,882.05 पर बंद हुआ। बाजार में चौतरफा बिकवाली रही। करीब 3,095 शेयर गिरे, जबकि सिर्फ 1,000 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।

ट्रंप ने ईरान सीजफायर पर क्या कहा?

ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ अंतरिम शांति समझौता अब खत्म हो चुका है। उन्होंने साफ कहा कि अब वह ईरान के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते। उन्होंने ईरानी नेताओं पर भी तीखा हमला बोला। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार हुए, तो वह उनका इस्तेमाल करने से नहीं हिचकेगा।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनके प्रतिनिधि ईरान से बातचीत जारी रखेंगे। लेकिन उन्हें नहीं लगता कि उससे कोई नतीजा निकलेगा।

तनाव अचानक क्यों बढ़ गया?

ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने ईरान पर फिर से हवाई हमले किए हैं। साथ ही अमेरिका ने वह छूट भी खत्म कर दी है, जिसके तहत ईरान वैश्विक बाजार में तेल बेच रहा था।

इसके जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान ने एक अमेरिकी MQ-9 Reaper ड्रोन मार गिराने का भी दावा किया है।

इसके बाद बहरीन और कुवैत में एयर रेड सायरन बजने लगे। कुवैत की सेना ने कहा कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम दुश्मन के हमलों का जवाब दे रही है। हालांकि, अमेरिकी सेना की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

बाजार गिरने के अन्य 6 बड़े वजह

कच्चे तेल में तेज उछाल: अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड 6% उछलकर 76 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए महंगा तेल बाजार के लिए चिंता की बात है।

FII निवेश पर अनिश्चितता: Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी.के. विजयकुमार के मुताबिक, हाल में FII की खरीदारी से बाजार मजबूत हो रहा था। लेकिन अमेरिका-ईरान तनाव ने इस सकारात्मक माहौल पर फिलहाल सवाल खड़े कर दिए हैं।

FII खरीदारी बनी हुई है: पिछले तीन कारोबारी सत्र में FIIs ने करीब 1,991 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। हालांकि रकम बड़ी नहीं है, लेकिन लगातार खरीदारी को बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

टेक्निकल संकेत अभी कमजोर: SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक, निफ्टी के लिए 24,120-24,140 का स्तर अहम सपोर्ट है। अगर यह टूटता है, तो अगला सपोर्ट 23,970-23,990 के बीच होगा। वहीं 24,370-24,390 के ऊपर निकलने पर तेजी फिर लौट सकती है।

ज्यादातर सेक्टरों में बिकवाली: फाइनेंशियल सर्विसेज, FMCG, ऑटो और हेल्थकेयर सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। इससे बाजार की गिरावट और बढ़ गई।

बड़े शेयरों में भारी कमजोरी: मारुति सुजुकी में 3% से ज्यादा गिरावट आई। इसके अलावा IndiGo, Hindustan Unilever, UltraTech Cement और Bharat Electronics जैसे हैवीवेट शेयर भी दबाव में रहे।

India VIX में तेज उछाल: बाजार में डर का पैमाना माने जाने वाला India VIX इंट्राडे कारोबार में 23% से ज्यादा उछलकर 14.33 पर पहुंच गया। VIX में तेज बढ़त आमतौर पर आने वाले दिनों में ज्यादा उतार-चढ़ाव का संकेत देती है।

बाजार में गिरावट पर एक्सपर्ट की राय

Geojit Investments के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि पश्चिम एशिया में फिर बढ़े तनाव ने भारतीय शेयर बाजार का माहौल पूरी तरह बदल दिया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से महंगाई की चिंता फिर बढ़ गई है। इसका असर भारत और अमेरिका दोनों देशों के बॉन्ड यील्ड पर भी देखने को मिला।

उनके मुताबिक, India VIX में तेज उछाल यह दिखाता है कि निवेशकों के बीच डर बढ़ गया है। यही वजह रही कि लगभग सभी सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली। इसके साथ ही पहली तिमाही (Q1) के कमजोर नतीजों की आशंका ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया।

तीन फैक्टर तय करेंगे बाजार की चाल

विनोद नायर का कहना है कि सिर्फ कंपनियों के नतीजे ही बाजार की दिशा तय नहीं करेंगे। निवेशकों की नजर मैनेजमेंट की कमेंट्री और भविष्य ग्रोथके आउटलुक पर भी रहेगी। इससे पता चलेगा कि कमाई में कमजोरी दूसरी तिमाही (Q2) तक बनी रहती है या नहीं।

उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल तीन बड़े फैक्टर्स पर निर्भर करेगी। पहला, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जुलाई की मौद्रिक नीति। दूसरा, अमेरिका के रेसिप्रोकल टैरिफ ट्रूस की अवधि खत्म होने का असर। और तीसरा, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है या कम होता है, क्योंकि यही आगे बाजार की दिशा तय करेगा।

ट्रंप ने खत्म किया सीजफायर! अब तेल, सोना और चांदी पर क्या होगा असर; जानिए एक्सपर्ट्स से

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

दिल्ली में सोना 1400 रुपये गिरा, चांदी में भी कमजोरी

दिल्ली सर्राफा बाजार में 7 जुलाई को सोने में गिरावट आई। यह 1,400 रुपये गिरकर 1.49 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी में भी 200 रुपये की गिरावट आई। विदेश में सोने और चांदी में कमजोरी का असर घरेलू बाजार पर पड़ा। 6 जुलाई को दिल्ली में सोने का भाव 1,50,650 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुआ था।

लगातार दूसरे दिन सोने में नरमी

चांदी 7 जुलाई को दिल्ली सर्राफा बाजार में 200 रुपये गिरकर 2.40 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रही। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में कमोडिटी के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, “गोल्ड की कीमतों में मंगलवार को कमजोरी जारी रही। इनवेस्टर्स फेडरल रिजर्व की जून की मीटिंग के मिनट्स जारी होने से पहले सावधानी बरत रहे हैं।”

फेड के मिनट्स पर लगी निगाहें

उन्होंने कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत के दूसरे दौर के नतीजों से गोल्ड की कीमतों को दिशा मिल सकती है। एनालिस्ट्स का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती का भी असर सोने की कीमतों पर पड़ा।

विदेश में भी सोने और चांदी में गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.59 फीसदी गिरकर 4,140.59 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। सिल्वर 2 फीसदी गिरकर 60.89 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। मिरै एसेट शेयरखान में कमोडिटीज के हेड प्रवीण सिंह ने कहा कि क्रूड की कीमतों में हल्की तेजी से विदेश में स्पॉट गोल्ड में नरमी है।

शॉर्ट टर्म में सीमित दायरे में रह सकती हैं कीमतें

उन्होंने कहा कि सोने और चांदी की कीमतें शॉर्ट टर्म में सीमित दायरे में बनी रह सकती हैं। हालांकि, अगर पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होता है तो बुलियन की कीमतों पर पॉजिटिव असर दिख सकता है। इस साल 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी की कीमतों पर दवाब दिखा था।

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2025 में सोने ने दिया था 70 फीसदी रिटर्न 

इस साल जनवरी के आखिर में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद उनमें तेज गिरावट आई। अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई ने बुलियन की कीमतों पर दबाव और बढ़ा दिया। 2025 में सोने ने निवेशकों को बहुत अच्छा रिटर्न दिया था। इससे पहले के कुछ सालों में भी सोने का रिटर्न पॉजिटिव रहा था। लेकिन, इस साल सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव दिख रहा है।

Gold Silver Rates Today: देश और विदेश में गोल्ड और सिल्वर में गिरावट, एक दिन में चांदी 5000 रुपये फिसली

Gold Silver Rates Today: देश और विदेश में 7 जुलाई को सोने और चांदी में गिरावट आई। सोना लगातार दूसरे दिन फिसला। विदेश में स्पॉट गोल्ड 0.8 फीसदी गिरकर 4,129.90 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। स्पॉट सिल्वर 1.9 फीसदी गिरकर 60.93 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। पिछले हफ्ते सोने में अच्छी तेजी दिखी थी। यह 2 फीसदी से ज्यादा चढ़ा था। लेकिन, यह हफ्ता सोने के लिए अब तक कमजोर रहा है।

गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में गिरावट 

भारत में भी गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में कमजोरी दिखी। कमोडिटी एक्सचेंज MCX में गोल्ड फ्यूचर्स 1.07 फीसदी यानी 1,567 रुपये गिरकर 1,45,350 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। सिल्वर फ्यूचर्स 2.16 फीसदी यानी 5,096 रुपये गिरकर 2,30,979 रुपये प्रति किलो पर आ गया। सोने ने 2025 में 70 फीसदी रिटर्न दिया था।

डॉलर इंडेक्स में मजबूती का सोने पर असर

सोने में गिरावट की वजह डॉलर में मजबूती है। डॉलर इंडेक्स 0.10 फीसदी चढ़ा। डॉलर मजबूत होने से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिसका असर सोने पर पड़ता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि 7 जुलाई को आई गिरावट की वजह पिछले हफ्ते की तेजी के बाद कंसॉलिडेशन है।

इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर घटेगी गोल्ड की चमक

ट्रेडर्स को अमेरिकी केंद्रीय बैंक की बैठक के मिनट्स का इंतजार है। यह 8 जुलाई को आएगा। इससे पता चलेगा कि इनफ्लेशन के बारे में फेडरल रिजर्व की क्या सोच है। निवेशकों को अब सितंबर में इंटरेस्ट रेट बढ़ने का 56 फीसदी अनुमान है। अगर फेड इंटरेस्ट रेट बढ़ाता है तो इसका निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ेगा। इंटरेस्ट रेट में कमी आने पर सोने की चमक बढ़ती है। इसके उलट इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की चमक घटती है।

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सोना रिकॉर्ड ऊंचाई से 30 फीसदी फिसला

इस साल की शुरुआत में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी। उसके बाद उनमें तेज गिरावट देखने को मिली। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी पर दबाव बढ़ गया। सोना अपने पीस से करीब 30 फीसदी गिर चुका है। जून में सोने में करीब 14 फीसदी की गिरावट आई थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने में तेजी टिक नहीं पा रही है। यही हाल चांदी का है। कुछ समय तक बुलियन कंसॉलिडेशन फेज में रह सकते हैं।

Gold Silver price Today: COMEX पर सोना $4,160 प्रति औंस से नीचे फिसला, चांदी भी लगभग 1% गिरी

Gold Silver price Today: इंटरनेशनल मार्केट में मंगलवार (7 जुलाई) को शुरुआती कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई। पिछले हफ्ते निवेशकों के US मॉनेटरी पॉलिसी और बड़े मार्केट डेवलपमेंट के आउटलुक का आकलन करने के बाद मजबूत रिकवरी के बाद कुछ गिरावट आई।

COMEX सोना $4,152 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जो $15.50 या 0.37% नीचे था, जबकि दिन में यह $4,179.50 प्रति औंस के हाई लेवल को छू गया था। COMEX चांदी $62.59 प्रति औंस के सेशन हाई लेवल को छूने के बाद 0.89% गिरकर $61.775 प्रति औंस पर आ गई।यह गिरावट पिछले हफ्ते बुलियन की कीमतों में तेज तेजी के बाद आई है।

उम्मीद से कमजोर US जॉब्स डेटा के बाद कमजोर US डॉलर के सपोर्ट से सोना लगभग 2% बढ़ा, जबकि चांदी लगभग 5% बढ़ी, जिससे उम्मीद बढ़ी कि US फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट्स पर कम एग्रेसिव रवैया अपना सकता है।

रिद्धिसिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी के मुताबिक, बुलियन को होर्मुज स्ट्रेट के आसपास जियोपॉलिटिकल टेंशन से सपोर्ट मिला, जबकि गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स में कमजोर इनफ्लो के बावजूद सेंट्रल बैंक की लगातार खरीदारी ने एक्स्ट्रा सपोर्ट दिया।

कोठारी ने कहा कि हाल के निचले लेवल से गोल्ड का रिबाउंड तेज रहा है, जिससे बड़े लेवल पर अपट्रेंड शुरू होने से पहले शॉर्ट-टर्म पुलबैक मुमकिन है। उन्होंने कहा कि सिल्वर में भी हाल की रैली के बाद कुछ कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है, इससे पहले कि वह एक और ऊपर जाने की कोशिश करे।

मार्केट पार्टिसिपेंट्स अब इंटरेस्ट रेट के रास्ते के बारे में सुराग के लिए नए इकोनॉमिक डेटा और US फेडरल रिजर्व से सिग्नल का इंतज़ार कर रहे हैं। कम इंटरेस्ट रेट्स आमतौर पर गोल्ड जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट्स को सपोर्ट करते हैं, क्योंकि उन्हें रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट कम हो जाती है।

इस बीच, इन्वेस्टर्स ग्लोबल कमोडिटी मार्केट्स में हो रहे डेवलपमेंट्स पर भी नज़र रख रहे हैं।

मंगलवार (7 जुलाई) को तेल की कीमतें बढ़ीं, हालांकि बढ़त सीमित रही क्योंकि ट्रेडर्स ने ग्लोबल डिमांड के आउटलुक के मुकाबले OPEC+ प्रोड्यूसर्स से बढ़ी सप्लाई पर विचार किया। कच्चे तेल के बाज़ार में मजबूती से महंगाई की उम्मीदों पर असर पड़ सकता है, जिससे सोने जैसे सेफ़-हेवन एसेट्स की मांग पर असर पड़ सकता है।

इसके अलावा, भारत में गोल्ड-बैक्ड फ़ाइनेंसिंग की मांग मज़बूत बनी हुई है। हाल ही में आई CRISIL रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में गोल्ड लोन सबसे बड़ा सिक्योरिटाइज़्ड एसेट क्लास बनकर उभरा, जो देश के सिक्योरिटाइज़ेशन वॉल्यूम का लगभग 31% था, और इसने व्हीकल लोन को पीछे छोड़ दिया।

रिपोर्ट में इस ट्रेंड का कारण गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में मजबूत ग्रोथ को बताया गया है, जिसमें NBFC लगातार क्रेडिट मांग के बीच फ़ंड जुटाने के लिए सिक्योरिटाइज़ेशन का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं।

Gold Silver price: इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतें 2 हफ्ते के ऊंचे स्तर पर रही स्थिर

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Today: चांदी 5000 रुपये सस्ती हुई, सोने के भी गिरे दाम; चेक करें लेटेस्ट प्राइस

Gold Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को गिरावट दर्ज की गई। राष्ट्रीय राजधानी में 24 कैरेट सोना 150 रुपये सस्ता होकर 1,50,650 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। पिछले कारोबारी सत्र में इसकी कीमत 1,50,800 रुपये प्रति 10 ग्राम थी।

वहीं, चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसकी कीमत 5,000 रुपये टूटकर 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। शुक्रवार को चांदी 2,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।

क्यों गिरे सोने और चांदी के भाव?

सर्राफा कारोबारियों के मुताबिक, वैश्विक बाजार में नरमी और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से निवेशकों ने सोने और चांदी में मुनाफावसूली की। इसका असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला।

ट्रेडर्स का कहना है कि फिलहाल बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। एक तरफ पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव अब भी बना हुआ है। दूसरी तरफ मजबूत डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता निवेशकों को सतर्क बनाए हुए है।

अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर नजर

बाजार की नजर अब अमेरिका के महंगाई (Inflation) के आंकड़ों पर है। निवेशकों का मानना है कि इन आंकड़ों से यह संकेत मिल सकता है कि फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाएगा।

इसके अलावा वॉशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहे घटनाक्रम पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी नरमी

वैश्विक बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई।

स्पॉट गोल्ड घटकर 4,160.60 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, स्पॉट सिल्वर 62.24 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।

एक्सपर्ट की राय

LKP Securities के वीपी (रिसर्च एनालिस्ट- कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी का कहना है कि मजबूत अमेरिकी डॉलर की वजह से गोल्ड में हल्की गिरावट आई, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखा।

जतीन त्रिवेदी का कहना है कि अब बाजार की नजर इस सप्ताह आने वाले अमेरिका के मैन्युफैक्चरिंग PMI, नॉन-मैन्युफैक्चरिंग PMI और फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स पर रहेगी। इन आंकड़ों से डॉलर और सोने की कीमतों को नई दिशा मिल सकती है। उनके मुताबिक, इन अहम आर्थिक आंकड़ों के आने तक सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

*एजेंसी इनपुट के साथ

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GIFT Nifty दे रहा सेंसेक्स-निफ्टी के फ्लैट शुरुआत के संकेत, एशिया बाजार में मिलाजुला कारोबार

GIFT Nifty ने सोमवार को इंडियन बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के लिए धीमी शुरुआत का संकेत दिया, भले ही ग्लोबल संकेत काफी पॉजिटिव थे, क्योंकि इन्वेस्टर्स ने घरेलू इक्विटी में हालिया रैली के मुकाबले क्रूड ऑयल की घटती कीमतों, रिस्क सेंटिमेंट में सुधार और ग्लोबल अर्निंग्स सीजन की उम्मीद के बीच बैलेंस बनाया। OPEC+ के प्रोडक्शन बढ़ाने के फैसले और मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होने के बाद ऑयल की कम कीमतों ने मार्केट के लिए सपोर्टिव बैकग्राउंड बनाए रखा।

GIFT Nifty सुबह करीब 8.30 बजे 24,327.50 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले निफ्टी क्लोज से 27.00 पॉइंट या 0.11 परसेंट नीचे था, जिससे पता चलता है कि शुक्रवार को लगातार तीसरे सेशन में बढ़त के बाद सेंसेक्स और निफ्टी थोड़ी कम खुल सकते हैं।

IT, फार्मा, मेटल और रियल्टी स्टॉक्स में बड़े पैमाने पर खरीदारी से सपोर्टेड, इंडियन बेंचमार्क इंडेक्स ने शुक्रवार को अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा। सेंसेक्स 261.79 पॉइंट्स या 0.34 परसेंट बढ़कर 77,763.91 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 95.15 पॉइंट्स या 0.39 परसेंट बढ़कर 24,270.85 पर बंद हुआ।

एशियाई मार्केट में मजबूती, कमाई की उम्मीद से माहौल बेहतर हुआ

सोमवार को एशियाई इक्विटीज़ में ज़्यादातर बढ़त रही क्योंकि इन्वेस्टर्स ग्लोबल कमाई के सीज़न की शुरुआत पर ध्यान दे रहे थे, जबकि US लेबर मार्केट के नरम डेटा ने जल्द ही फेडरल रिजर्व रेट में बढ़ोतरी को लेकर चिंताओं को कम किया।

जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स 0.4 परसेंट बढ़ा। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स की तिमाही कमाई से पहले साउथ कोरिया के कोस्पी में 2 परसेंट से ज़्यादा की बढ़त हुई, एनालिस्ट्स को AI से जुड़ी मेमोरी चिप की मज़बूत डिमांड से मुनाफ़े में तेज़ उछाल की उम्मीद थी। पिछले हफ़्ते की मज़बूत बढ़त के बाद जापान का निक्केई थोड़ा गिरा।

स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी के कारण शुक्रवार को US मार्केट बंद रहे। हालांकि, एशियाई घंटों में US फ्यूचर्स में बढ़त हुई, जिसमें S&P 500 फ्यूचर्स 0.5 परसेंट और नैस्डैक फ्यूचर्स 1.4 परसेंट बढ़े, जो कॉर्पोरेट अर्निंग्स और टेक्नोलॉजी स्टॉक्स को लेकर उम्मीद दिखाता है।

OPEC+ के आउटपुट में बढ़ोतरी से क्रूड पर दबाव बना हुआ है

OPEC+ के अगस्त से प्रोडक्शन टारगेट फिर से बढ़ाने पर सहमत होने के बाद तेल की कीमतें कम हुईं, जिससे ग्लोबल सप्लाई में सुधार की उम्मीदें बढ़ गईं। ब्रेंट क्रूड लगभग 0.6 परसेंट गिरकर $71.7 प्रति बैरल के करीब आ गया, जो चार महीने के सबसे निचले स्तर के करीब है, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड लगभग $68.4 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था। होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए शिपमेंट में रिकवरी और जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने से भी एनर्जी की कीमतों को कम रखने में मदद मिली है।

इस बीच, उम्मीद से कम US पेरोल डेटा ने US फेडरल रिजर्व द्वारा रेट में बढ़ोतरी की उम्मीदों को कम कर दिया, जिसके बाद सोना दो हफ़्ते के हाई के पास बना रहा।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि US-ईरान के सुधरते हालात और होर्मुज स्ट्रेट से बिना रुकावट शिपिंग से एनर्जी सप्लाई में रुकावट की चिंता कम हुई है, जबकि OPEC+ के प्रोडक्शन बढ़ाने के फैसले से तेल की कम कीमतों को और सपोर्ट मिला है। निवेशक AI से चलने वाले सेमीकंडक्टर की मांग पर नए संकेतों के लिए सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स की कमाई पर भी करीब से नज़र रखेंगे, जो ग्लोबल टेक्नोलॉजी सेंटिमेंट पर असर डाल सकता है।

टेक्निकल नज़रिए से, पोनमुडी ने कहा कि निफ्टी एक कंस्ट्रक्टिव स्ट्रक्चर बनाए हुए है, जिसमें 24,400 का लेवल तुरंत रेजिस्टेंस का काम कर रहा है। इस ज़ोन से ऊपर लगातार मूव करने से 24,500-24,600 की ओर बढ़ने का रास्ता बन सकता है। नीचे की तरफ, 24,200 पहला ज़रूरी सपोर्ट बना हुआ है, इसके बाद 24,000 का साइकोलॉजिकल लेवल है।

पिछले सेशन में इंस्टीट्यूशनल फ्लो मिला-जुला रहा। विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर 3 जुलाई को चार सेशन की बिकवाली के बाद नेट बायर बन गए, और उन्होंने 1,355 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी। इस बीच, घरेलू इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने आठ सेशन की खरीदारी का सिलसिला तोड़ा और नेट सेलर बन गए, और 1,953 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए।

Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

Share Market Live Update: मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के बीच बेंचमार्क Nifty50 इंडेक्स के लिए GIFT Nifty ने धीमी शुरुआत दिखाई, जबकि निवेशक US फेडरल रिजर्व की जून मीटिंग के मिनट्स का इंतज़ार कर रहे थे, जो इस हफ़्ते के आखिर में पब्लिश होने वाले हैं। फ्यूचर्स 24,354 पर फ्लैट कोट किए गए।

सोमवार को शुरुआती कारोबार में ज़्यादातर एशियाई बाज़ारों में बढ़त हुई क्योंकि तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही और टेक्नोलॉजी शेयरों में उछाल आया। कोस्पी और CSI 300 क्रमशः 0.62 प्रतिशत और 0.26 प्रतिशत ऊपर थे।

हालांकि US-ईरान बातचीत में कोई और प्रोग्रेस नहीं हुई, लेकिन जहाज़ होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रते रहे। इसके अलावा, पेट्रोलियम एक्सपोर्ट करने वाले देशों के संगठन और उसके सहयोगी (OPEC+) जून और जुलाई में इसी तरह के आउटपुट बढ़ोतरी के बाद अगस्त से आउटपुट बढ़ाने पर सहमत हुए।

जुलाई फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर $71.78 प्रति बैरल पर कोट किया गया, जो 0.47 प्रतिशत नीचे था।

सोने और चांदी के फ्यूचर्स क्रमशः 2.11 प्रतिशत और 3.56 प्रतिशत ऊपर ट्रेड कर रहे थे।

Stock Market News: कच्चा तेल, मानसून और तिमाही नतीजे; इन बातों से तय होगी Sensex-Nifty की चाल

Stock Market Trend This Week: 6 जुलाई से शुरू हो रहे इस कारोबारी हफ्ते शेयर मार्केट में मार्केट सेंटिमेंट कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक रुझानों और कॉरपोरेट आय सीजन की शुरुआत पर निर्भर करेगी। एनालिस्ट्स के मुताबिक आईटी सेक्टर की प्रमुख कंपनी टीसीएस 9 जुलाई को जून तिमाही के कारोबारी नतीजे पेश करेगी, जिस पर निवेशकों की खास नजर रहेगी। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्थिति और विदेशी निवेशकों की खरीदारी-बिकवाली से भी बाजार की दिशा तय होगी। पिछले कारोबारी हफ्ते सेंसेक्स 663.44 प्वाइंट्स यानी 0.86% की बढ़त के साथ 77,763.91 तो निफ्टी 214.85 प्वाइंट्स यानी 0.89% के उछाल के साथ 24270.85 पर बंद हुआ।

मार्केट की चाल पर क्या है एक्सपर्ट्स का रुझान

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है कि निवेशकों की नजर 9 जुलाई को टीसीएस के कारोबारी नतीजे पर रहेगी। अजीत के मुताबिक निवेशकों का ध्यान खास तौर पर डिमांड ट्रेंड, डिस्क्रेशनरी स्पेंडिंग और एआई से जुड़े बिजनेस मौकों को लेकर मैनेजमेंट की बातों पर रहेगा।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट प्रवेश गौड़ का भी कहना है कि घरेलू स्तर पर निवेशकों का ध्यान 9 जुलाई से शुरू होने रहे वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के अर्निंग्स सीजन पर रहेगा। उनका मानना है कि कॉरपोरेट अर्निंग्स और मैनेजमेंट की कमेंट्री से डिमांड के माहौल, मार्जिन के रुझानों और अर्निंग्स विलिबिलिटी को लेकर अहम संकेत मिलेगा। प्रवेश के मुताबिक दक्षिण पश्चिम मानसून और खरीफ की बुवाई भी गांवों में मांग, महंगाई की रफ्तार और ओवरऑल इकनॉमिक ग्रोथ को लेकर अहम संकेत देगा।

इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच टेक्निकल बातचीत का अगला दौर 11 जुलाई को होने की उम्मीद है, हालांकि बैठक की जगह के बारे में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से सप्लाई को लेकर चिंता कम होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें प्रति बैरल $68-$69 के आसपास स्थिर हो गए हैं और अब इन पर निवेशकों की नजर रहेगी। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका के लेबर मार्केट के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे, जिससे फेडरल रिजर्व के रुख में नरमी की उम्मीदें बढ़ी हैं। ऐसे में निवेशकों की नजर फेड की जून पॉलिसी मीटिंग के मिनट्स यानी बैठक के ब्यौरे पर रहेगी ताकि अर्थव्यवस्था और ब्याज दरों को लेकर स्पष्ट रुझान मिल सकें।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक के मिनट्स, घरेलू अर्निंग्स सीजन की शुरुआत और मानसून की दिशा से तय होगी।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Outlook: इस हफ्ते गोल्ड में तेजी से निवेशकों ने लीं राहत की सांस, जेपी मॉर्गन ने दिया 4500 डॉलर का टारगेट

Gold Outlook: इस हफ्ते गोल्ड के निवेशकों ने राहत की सांस ली है। गोल्ड में तेजी का यह मई के बाद पहला हफ्ता है। अंततरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4200 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया। इस हफ्ते गोल्ड में 2.2 फीसदी की तेजी आई। हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को भी देश और विदेश में गोल्ड में तेजी दिखी। चांदी भी गोल्ड के पीछे चलती नजर आई।

इन वजहों से गोल्ड में आई तेजी

गोल्ड़ की कीमतों में तेजी की कई वजहें हैं। अमेरिका में इंटरेस्ट बढ़ने की उम्मीद घटी है। रोजगार के नए मौकों के जून के डेटा आने के बाद माना जा रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट जल्द बढ़ाने नहीं जा रहा है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने के माहौल में गोल्ड की चमक घट जाती है। उधर, डॉलर में कमजोरी दिखी है। काफी समय बाद डॉलर इंडेक्स में नरमी है। तीसरा, WGC ने कहा है कि केंद्रीय बैंकों ने मई में गोल्ड की खरीदारी बढ़ाई है।

4200 डॉलर के करीब पहुंचा गोल्ड

टीडी सिक्योरिटीज में कमोडिटीज स्ट्रेटेजी के ग्लोबल हेड बार्ट मेलेक ने कहा कि गोल्ड के 4,280 डॉलर प्रति औंस के रेसिस्टेंस लेवल की तरफ बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, इनफ्लेशनरी प्रेशर की वजह से इसके अगले साल से पहले 5,300 डॉलर के टारगेट तक पहुंचने की उम्मीद कम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3 जुलाई को स्पॉट गोल्ड 1.3 फीसदी चढ़कर 4,176.94 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। सिल्वर 2 फीसदी के उछाल के साथ 62.42 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

भारत में भी गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स में उछाल

इधर, भारत में गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में 3 जुलाई को तेजी दिखी। कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स 1.10 फीसदी यानी 1,607 रुपये चढ़कर 1,47,365 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। सिल्वर फ्यूचर 2.11 फीसदी यानी 4,845 रुपये के उछाल के साथ 2,34,081 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ। देश और विदेश में गोल्ड में तेजी इस बात का संकेत है कि गोल्ड रिकवरी के रास्ते पर है। इसमें जियोपॉलिटिकल टेंशन में कमी का भी हाथ है।

जेपी मॉर्गन ने दिया 4500 डॉलर का टारगेट 

दिग्गज अमेरिकी बैंक जेपी मॉर्गन ने चौथी तिमाही में गोल्ड के 4,500 डॉलर पर पहुंच जाने की उम्मीद जताई है। उसने तीसरी तिमाही में गोल्ड की कीमतें 4,300 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान जताया है। हालांकि, उसने कहा है कि गोल्ड की डिमांड उतनी स्ट्रॉन्ग नहीं है, जितनी उसने उम्मीद की थी। 9 जून को उसने गोल्ड की कीमतें इस साल के अंत तक 6000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच जाने का अनुमान जताया था।

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केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से तेजी जारी रहने का अनुमान

जेपी मॉर्गन का कहना है कि गोल्ड का लॉन्ग टर्म आउटलुक पॉजिटिव है। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से 2027 में तेजी जारी रहेगी। उसने चांदी की औसत कीमतें भी 60-65 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान जताया है। इस साल की शुरुआत में गोल्ड और सिल्वर की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी। फिर, उनमें तेज गिरावट देखने को मिली। 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद गोल्ड और सिल्वर पर दबाव दिखा था।