इंजन खराब होने से लेकर वारंटी खत्म होने तक… E20 Petrol पर सरकार ने इन बड़े दावों की बताई सच्चाई

सोशल मीडिया पर इन दिनों E20 Petrol को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। E20 पेट्रोल को लेकर पानी, इंजन डैमेज, माइलेज और वारंटी से जुड़े कई दावे भी किए जा रहे हैं। वहीं सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से फैल रहा है कि इसका इस्तेमाल करने पर वाहन का बीमा क्लेम या कंपनी की वारंटी खत्म हो सकती है। इस दावे के वायरल होने के बाद केंद्र सरकार ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की और लोगों से ऐसी भ्रामक जानकारी पर भरोसा न करने की अपील की।

सरकार ने इन बड़े दावों की बताई सच्चाई

सरकार ने साफ किया है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। संबंधित बीमा कंपनियों और वाहन निर्माता कंपनियों ने भी स्पष्ट किया है कि E20 ईंधन के उपयोग से न तो वाहन का बीमा प्रभावित होता है और न ही कंपनी की वारंटी पर कोई असर पड़ता है। सरकार की ओर से साझा की गई जानकारी में कहा गया कि बीमा कंपनियों और वाहन निर्माता कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि E20 फ्यूल का इस्तेमाल करने से भारत में किसी भी वाहन के बीमा या कंपनी की वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ता। इसलिए इस तरह की अफवाहों पर भरोसा करने की जरूरत नहीं है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि वाहन निर्माता कंपनियों के संगठन ने स्पष्ट किया है कि जिन गाड़ियों को E20 ईंधन के लिए तैयार किया गया है और जो तय मानकों को पूरा करती हैं, उनकी कंपनी वारंटी पहले की तरह जारी रहेगी। यानी E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इससे पहले भी सरकार ने E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही कई गलत जानकारियों पर विस्तार से जवाब दिया था। सरकार ने एक विस्तृत जानकारी जारी कर इंजन की सुरक्षा, ईंधन की खपत, वाहन की वारंटी, माइलेज और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर जैसे मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि E20 कार्यक्रम के तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जाता है। मंत्रालय के अनुसार, यह योजना वैज्ञानिक अध्ययनों, तय सुरक्षा मानकों और कई देशों के अनुभव को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। मंत्रालय ने बताया कि इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल दुनिया के कई देशों में लंबे समय से इस्तेमाल किया जा रहा है। अमेरिका, ब्राज़ील, कनाडा, थाईलैंड, जापान और कई यूरोपीय देशों में भी यह ईंधन पहले से उपयोग में है। मंत्रालय के अनुसार, E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहन के प्रदर्शन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता और माइलेज में भी केवल मामूली बदलाव देखने को मिलता है।

सरकार का मानना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम देश की तेल आयात पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। फिलहाल भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव और वैश्विक परिस्थितियों का सीधा असर देश पर पड़ता है। ऐसे में इथेनॉल के बढ़ते इस्तेमाल से ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और आयात का बोझ कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

E20 Petrol: एथेनॉल वाले पेट्रोल को लेकर मचे बवाल के बीच मारुति की 1.5 करोड़ पुरानी गाड़ियों की सर्विसिंग से क्या पता चला?

E20 Petrol Row: देश में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर लोगों के बीच मौजूद चिंताओं और बहस के बीच ऑटोमोबाइल सेक्टर की दिग्गज कंपनी मारुति सुजुकी ने एक बड़ा और राहत देने वाला दावा किया है। नई दिल्ली में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और सड़क परिवहन औ राजमार्ग मंत्रालय द्वारा आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाहन उद्योग के दिग्गजों ने E-20 फ्यूल को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।

प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की एक रिलीज के मुताबिक इस उच्च स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में मारुति सुजुकी के कॉरपोरेट अफेयर्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने कंपनी के सर्विस डेटा के आधार पर एथेनॉल वाले पेट्रोल से इंजन खराब होने के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया।

मारुति सुजुकी की 1.5 करोड़ पुरानी गाड़ियों की सर्विसिंग से क्या पता चला?

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मारुति सुजुकी के राहुल भारती ने एक बेहद महत्वपूर्ण आंकड़ा पेश किया। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में मारुति सुजुकी ने कुल 2.84 करोड़ कारों की सर्विसिंग की थी। इन गाड़ियों में से 1.5 करोड़ से अधिक कारें तीन साल से ज्यादा पुरानी थीं। यानी वे तकनीकी रूप से ई20 सर्टिफाइड नहीं थीं।

भारती ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में पुरानी गाड़ियों की सर्विसिंग के बावजूद फील्ड से ई20 फ्यूल की वजह से इंजन में जंग, सामान्य टूट-फूट या गाड़ी के किसी भी पार्ट/कंपोनेंट की लाइफ खराब होने की एक भी शिकायत या समस्या सामने नहीं आई है। उन्होंने भरोसा दिया कि ई10 के लिए डिजाइन किए गए वाहनों का ई20 ईंधन के साथ सभी मापदंडों पर परीक्षण किया जा चुका है और इसमें चिंता की कोई बात नहीं है।

माइलेज पर कितना पड़ता है असर? मारुति ने समझाया पूरा गणित

माइलेज में गिरावट के दावों पर मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर ने स्पष्ट गणित समझाया। उन्होंने कहा कि ई10 पेट्रोल की तुलना में ई20 पेट्रोल की कैलोरीफिक वैल्यू लगभग 3 से 3.5 प्रतिशत कम होती है। माइलेज पर इसका असर भी केवल इसी सीमा तक सीमित है। जैसे कि अगर कोई कार 20 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है तो ई20 की वजह से उसका माइलेज केवल 0.6 किलोमीटर प्रति लीटर ही कम होगा।

इसकी तुलना में टायर का प्रेशर, ड्राइविंग का तरीका, सही गियर का इस्तेमाल, अचानक एक्सीलरेट करना, बार-बार ब्रेक लगाना और गाड़ी का रखरखाव जैसी वजहें माइलेज में इससे कहीं ज्यादा बड़ा अंतर पैदा करते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि माइलेज में होने वाले इस मामूली नुकसान की भरपाई बेहतर एक्सीलरेशन, बेहतर एंटी-नॉकिंग और शुद्ध पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल से होने वाले बेहद कम प्रदूषण से पूरी हो जाती है।

क्या बाजार में उपलब्ध हैं रेट्रोफिटमेंट किट?

राहुल भारती ने साफ किया कि वाहनों को ई20 कंप्लायंस की तय सीमा से कहीं अधिक सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में बाजार में पुरानी गाड़ियों को ई20 के अनुकूल बनाने के लिए कोई भी रेट्रोफिटमेंट किट नहीं बेची जा रही है। इस तरह के समाधान फिलहाल सिर्फ रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के स्तर तक ही सीमित हैं।

टोयोटा और हीरो मोटोकॉर्प ने भी जताई सहमती

प्रेस कॉन्फ्रेंस में टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट विक्रम गुलाटी ने कहा कि ऑटोमोटिव उद्योग सबसे कड़े रेग्युलेटेड क्षेत्रों में से एक है। वाहनों को बाजार में उतारने से पहले और बाद में वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा कड़े परीक्षणों से गुजरना पड़ता है।

भारत यूएनईसीई (UNECE) का हिस्सा है, इसलिए यहां के टेस्टिंग प्रोटोकॉल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ई20 को लागू करने का निर्णय पुरानी गाड़ियों पर कड़े परीक्षणों के बाद ही लिया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में शुरू किए गए E85 डिस्पेंसिंग स्टेशन विशेष रूप से केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए हैं जो भविष्य की नीति की दिशा तय करते हैं।

वहीं, दुनिया की सबसे बड़ी टू-व्हीलर निर्माताओं में से एक हीरो मोटोकॉर्प के चीफ बिजनेस ऑफिसर आशुतोष वर्मा ने भी मारुति के दावों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कंपनी ने अपने व्यापक सर्विस डेटा का विश्लेषण किया है और पाया है कि ई20 ईंधन पर चलने वाले वाहनों में पहले के ईंधन की तुलना में किसी भी तरह के नुकसान या खराबी की कोई अधिक घटना सामने नहीं आई है।

वैज्ञानिक सबूतों और वैश्विक मानकों पर आधारित है ई20 प्रोग्राम

इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) की पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर वर्तिका शुक्ला ने बताया कि एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम को सभी हितधारकों के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसे वैज्ञानिक सबूतों और वाहन निर्माताओं द्वारा किए गए व्यापक परीक्षणों का पूरा समर्थन प्राप्त है जो वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है। वर्तमान में ई20 ईंधन बीआईएस मानक और बीएस-VI (BS-VI) उत्सर्जन मानदंडों के पूरी तरह अनुरूप है और देश के सभी रिटेल आउटलेट्स पर समान रूप से उपलब्ध है।

ये भी पढ़ें- Ram Mandir Chanda Chori: चढ़ावे के सोने को बना दिया बिस्कुट और फिर… राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सनसनीखेज खुलासा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में टीवीएस मोटर कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रसाद कृष्णन, हुंडई मोटर इंडिया के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट पुनीत आनंद और बजाज ऑटो लिमिटेड के सर्कल हेड (सेल्स- नॉर्थ एंड ईस्ट) मनप्रीत सिंह बिंद्रा सहित पूरे पैनल ने ई20 कार्यक्रम पर सामूहिक विश्वास जताया और उपभोक्ताओं के हर सवाल का पारदर्शिता से जवाब देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

E20 Petrol: क्या एथेनॉल वाले पेट्रोल से सच में घटती है माइलेज और खराब होता है इंजन? ऑयल इंडस्ट्री के 2 दिग्गज एक्सपर्ट ने बताया पूरा सच

भारत में E20 (20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण वाले) पेट्रोल का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही आम जनता के बीच गाड़ी के माइलेज में गिरावट और इंजन को संभावित नुकसान पहुंचने की बहस भी तेज हो गई है। उपभोक्ताओं की इसी चिंता और भ्रम को दूर करने के लिए ऑयल और एनर्जी इंडस्ट्री के दो दिग्गज एक्सपर्ट्स शनिवार को सामने आए और उन्होंने इस ईंधन से जुड़े तमाम मिथकों की सच्चाई उजागर की। मुंबई में आयोजित एक हाई-लेवल मीडिया ब्रीफिंग के दौरान समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए बीपीसीएल (BPCL) के रिटायर्ड डायरेक्टर (रिफाइनरीज) आर रामचंद्रन और आईजीएल (IGL) के रिटायर्ड चेयरमैन व बीपीसीएल के डायरेक्टर राज कुमार दुबे ने लैब के पुख्ता डेटा के आधार पर सड़क के व्यक्तिगत अनुभवों से पैदा हुए भ्रम को दूर किया और E20 को भविष्य का ईंधन बताया।

क्या E20 पेट्रोल से सच में 10% घट जाती है माइलेज?

वाहन चालकों की ओर से अक्सर यह शिकायत आती है कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ी की माइलेज में 10 फीसदी तक की गिरावट आ रही है। इस पर बात करते हुए आर रामचंद्रन ने साफ किया कि व्यापक इंस्टीट्यूशनल टेस्टिंग से पता चलता है कि माइलेज पर इसका सिर्फ मामूली असर पड़ता है। रामचंद्रन ने समझाया कि कुछ इससे अलग मामले भी हो सकते हैं, जिन्हें अलग तरीके से ठीक किया जा सकता है। उन्होंने इशारा किया कि वाहनों का पुराना होना, सामान्य टूट-फूट या अग्रेसिवी सिटी ड्राइविंग जैसी स्थिति भी कम माइलेज के पीछे की असल वजह हो सकती है।

इस मुद्दे पर राज कुमार दुबे ने एक बेहद दिलचस्प बात जोड़ी। उन्होंने कहा कि वाहन चालक पिछले एक साल से भी ज्यादा समय से बिना जाने ही E20 जैसा ब्लेंडेड ईंधन खरीद रहे हैं। दुबे ने कहा कि अचानक अगर आप यह सवाल उठाते हैं कि माइलेज नाटकीय रूप से कम हो रहा है तो इन बातों का कोई तार्किक आधार नहीं है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे किसी व्यक्तिगत राय के बजाय टेस्टिंग एजेंसियों के दावों पर भरोसा करें।

क्या 2023 से पहले की गाड़ियों के इंजन हो जाएंगे खराब?

साल 2023 से पहले बनी देश की लाखों पुरानी गाड़ियों में सीधे तौर पर E20 ईंधन के इस्तेमाल की फैक्ट्री कंप्लायंस नहीं है। ऐसे में मैकेनिकल नुकसान के डर पर एक्सपर्ट्स ने स्थिति स्पष्ट की। राज कुमार दुबे ने बताया कि एक्सेलरेटेड टेस्टिंग से यह सामने आया है कि पुराने इंजनों के लिए दीर्घकालिक तौर पर सिर्फ मामूली बदलावों की ही जरूरत होगी। दुबे ने कहा कि बहुत पुराने वाहनों में रबर के पार्ट्स पर कुछ असर पड़ सकता है। सामान्य तौर पर मान लीजिए कि आप 10 साल में रबर पार्ट्स बदलना चाहते हैं तो इस ईंधन के साथ आपको रबर पार्ट्स को शायद आठ साल में बदलने पर विचार करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि इतने बड़े राष्ट्रीय अभियान के लिए यह बहुत ही छोटी कीमत है।

इसके साथ ही आर रामचंद्रन ने बीमा से जुड़ी उन अफवाहों को भी खारिज कर दिया जिनमें दावा किया जा रहा था कि ऐसी गाड़ियों का इंश्योरेंस अमान्य हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्पष्ट अधिसूचनाएं इसकी पुष्टि करती हैं कि इंश्योरेंस पॉलिसियां पूरी तरह से वैध रहती हैं।

पर्यावरण को नुकसान और पानी की बर्बादी का सच

कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया था कि एक लीटर एथेनॉल ईंधन के उत्पादन में 10000 लीटर तक पानी बर्बाद हो जाता है। इन पर्यावरण संबंधी चिंताओं को दोनों दिग्गजों ने सिरे से खारिज कर दिया। रामचंद्रन ने कहा कि कृषि उत्पादन में होने वाली पानी की खपत का बोझ एथेनॉल पर नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अधिकांश नए जमाने की डिस्टिलरीज 100% वाटर रीसाइक्लिंग और जीरो-इफ्लुएंट डिस्चार्ज के सिद्धांत पर काम कर रही हैं।

देश को मिल रहा है भारी आर्थिक फायदा

एक्सपर्ट्स ने बताया कि इस नीति से देश को बहुत बड़ा व्यापक आर्थिक लाभ मिल रहा है। सरकार को इससे 1.8 लाख करोड़ रुपये से 1,9 लाख करोड़ रुपये तक की विदेशी मुद्रा की बचत होने की उम्मीद है। राज कुमार दुबे ने ध्यान दिलाया कि यह नीति अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उतार-चढ़ाव भरी कीमतों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच का काम करती है। उन्होंने दलील देते हुए कहा कि अगर E20 पेट्रोल अस्तित्व में न होता और इस 20 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्से को भी हमें विदेशों से आयात करना पड़ता तो इस देश में पेट्रोल की कीमत क्या होती? आज पेट्रोल के दाम 5 से 7 रुपये प्रति लीटर और ज्यादा बढ़ गए होते। उन्होंने ये भी कहा कि देश की पूंजी को घरेलू अर्थव्यवस्था के भीतर बनाए रखने से सीधा फायदा हमारे स्थानीय गन्ना किसानों को मिल रहा है और वे समृद्ध हो रहे हैं।

Top 10 Selling Cars in June: टॉप 10 कारों में Tata दबदबा, Punch और Nexon SUV लिस्ट में सबसे ऊपर, Maruti के 6 मॉडल भी शामिल

Top 10 Selling Cars in June:  जून,2026 में भारत के कार मार्केट में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (TMPV) सबसे ज्यादा बढ़त हासिल करने वाली कंपनी रही। इस दौरान कंपनी की Punch SUV और Nexon SUV ने देश की टॉप 10 बिकने वाली कारों की सूची में पहला और दूसरा स्थान हासिल किया। वहीं, इस मजबूत प्रदर्शन के साथ कंपनी की घरेलू बिक्री में साल-दर-साल (y-o-y) 69% की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इसके अलावा, Maruti Suzuki ने भी मार्केट में पकड़ बनाए रखते हुए लिस्ट में 6 मॉडल शामिल किए। जबकि Hyundai Motor India की Creta SUV प्रोडक्शन में कुछ समय की रुकावट के कारण लिस्ट से बाहर हो गई।

बता दें कि Tata Motors ने जून में घरेलू पैसेंजर व्हीकल (PV) की 63,083 यूनिट्स (इलेक्ट्रिक व्हीकल्स या EVs सहित) बेचीं, जो पिछले साल इसी महीने में 37,237 यूनिट्स थीं। कंपनी ने कहा कि Punch और Tiago के नए वर्जन्स को ‘बहुत जबरदस्त’ रिस्पॉन्स मिला है और सभी तरह के पावरट्रेन में बुकिंग तेजी से बढ़ी है, जबकि इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री इस महीने रिकॉर्ड 14,800 यूनिट्स तक पहुंच गई।

पहले Punch SUV की बात करें तो, यह जून में भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली पैसेंजर व्हीकल बनी, जिसकी 21,006 यूनिट्स की बिक्री हुई। दूसरे नंबर पर Nexon रही, जिसकी 18,335 यूनिट्स बिकीं। तीसरे स्थान पर Maruti Suzuki की Dzire रही, जिसने 17,899 यूनिट्स की बिक्री के साथ देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली सेडान का दर्जा बनाए रखा।

चौथे स्थान पर 16,952 यूनिट्स के साथ ‘Wagon R’ हैचबैक रही, जबकि ‘Ertiga’ MPV ने 16,111 यूनिट्स बेचकर टॉप पांच में जगह बनाई। Maruti Suzuki की ‘Swift’ हैचबैक 15,215 यूनिट्स के साथ छठे स्थान पर रही, और उसके बाद Mahindra ‘Scorpio’ SUV 14,097 यूनिट्स के साथ सातवें स्थान पर रही।

Maruti Suzuki की ‘Fronx’ SUV 13,135 यूनिट्स की बिक्री के साथ 8वें स्थान पर रही, जो ‘Baleno’ हैचबैक (12,488 यूनिट्स) से आगे रही। इसके अलावा, Hyundai की ‘Venue’ SUV 10,776 यूनिट्स की बिक्री के साथ टॉप 10 की लिस्ट में शामिल रही।

हालांकि टाटा मोटर्स ने टॉप 2 स्थान हासिल किए, लेकिन मारुति सुजुकी इस रैंकिंग में सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व करने वाली कंपनी रही, जिसके 6 मॉडल-Dzire, WagonR, Ertiga, Swift, Fronx और Baleno-टॉप 10 में शामिल रहे। इन मॉडल्स की कुल बिक्री 91,780 यूनिट रही, जो जून में टॉप 10 कारों की कुल बिक्री का 57% से ज्यादा है। इससे हैचबैक, सेडान, MPV और SUV सेगमेंट में कंपनी की मजबूत मौजूदगी का पता चलता है।

बता दें कि यह परफॉर्मेंस तब देखने को मिली जब जून में मारुति सुजुकी ने अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में एक हफ्ते के लिए मेंटेनेंस के कारण काम बंद रखा था, जिस दौरान कोई गाड़ी नहीं बनी थी।

रैंकिंग में Hyundai Creta का नाम नहीं

जून की रैंकिंग में एक खास नाम जो गायब था, वह है Hyundai Creta; यह कार देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों में हमेशा शामिल रही है। इसके रैंकिंग में शामिल न होने के पिछे एक सप्लायर प्लांट में आग लगने की वजह रही है, जिससे प्रोडक्शन में कुछ समय के लिए रुकावट आई और होलसेल बिक्री पर असर पड़ा। इसी कारण यह SUV टॉप 10 की लिस्ट से बाहर हो गई।

एक और खास नाम जो लिस्ट में नहीं था, वह है Maruti Suzuki Brezza SUV। इस महीने के आखिर में इसके अपडेटेड वर्जन के लॉन्च से पहले इसकी सप्लाई पर असर पड़ा था।

जून की रैंकिंग से भारतीय खरीदारों के बीच SUV की लगातार लोकप्रियता का भी पता चला। टॉप 10 में पांच SUV – पंच, नेक्सॉन, स्कॉर्पियो, फ्रॉन्क्स और वेन्यू – शामिल थीं। वहीं, डिजायर ने SUV के ट्रेंड से अलग अपनी जगह बनाए रखी और भारत की सबसे ज़्यादा बिकने वाली सेडान बनी रही।

जून की रैंकिंग से यह भी साफ हुआ कि भारतीय बाजार में SUV की लोकप्रियता लगातार बनी हुई है। टॉप 10 में कुल 5 SUV-Punch, Nexon, Scorpio, Fronx और Venue-शामिल रहीं। वहीं Dzire ने SUV ट्रेंड से अलग अपनी जगह बनाए रखी और देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली सेडान बनी रही।

जून में सबसे ज्यादा बिकने वाली टॉप 10 कारें

रैंककार मॉडलबिक्री (यूनिट्स)
1टाटा पंच21,006
2टाटा नेक्सॉन18,335
3मारुति सुजुकी डिजायर17,899
4मारुति सुजुकी वैगनआर16,952
5मारुति सुजुकी अर्टिगा16,111
6मारुति सुजुकी स्विफ्ट15,215
7महिंद्रा स्कॉर्पियो14,097
8मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स13,135
9मारुति सुजुकी बलेनो12,488
10हुंडई वेन्यू10,776

यह भी पढ़ें: E20 Petrol: क्या सच में एथेनॉल वाले पेट्रोल से कम हो जाता है गाड़ी का माइलेज और खराब होता है इंजन? इस डिटेल FAQ में हर सवाल का जवाब

E20 Petrol: क्या सच में एथेनॉल वाले पेट्रोल से कम हो जाता है गाड़ी का माइलेज और खराब होता है इंजन? इस डिटेल FAQ में हर सवाल का जवाब

देश में इस समय एथेनॉल और E20 पेट्रोल की काफी चर्चा हो रही है। E20 फ्यूल का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत साधारण पेट्रोल मिला होता है। देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की अफवाहें और भ्रामक दावे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। कोई कह रहा है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है, तो कोई दावा कर रहा है कि इससे गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो जाता है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि E20 बनाने में हजारों लीटर पानी बर्बाद होता है।

वहीं इन दावों पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने विस्तृत जानकारी जारी करते हुए कहा है कि ये बातें पूरी तरह गलत, बेबुनियाद और वैज्ञानिक तथ्यों से परे हैं। मंत्रालय ने ऑटोमोबाइल अनुसंधान संस्थानों और वाहन उद्योग से जुड़ी कई रिपोर्टों का हवाला देते हुए इन अफवाहों को खारिज किया है।

  • E20 पेट्रोल क्या है और इसकी इतनी चर्चा क्यों हो रही है?

E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। इथेनॉल एक जैव ईंधन (बायोफ्यूल) है, जिसे गन्ना, मक्का और अतिरिक्त चावल जैसी कृषि फसलों से तैयार किया जाता है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को घटाना और देश में जैव ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा देना है।

भारत ने दिसंबर 2025 तक पूरे देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया, जबकि यह लक्ष्य पहले 2030 तक पूरा करना था। इसके बाद सोशल मीडिया पर ई20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि इसका गाड़ी के इंजन, माइलेज, वारंटी और लंबे समय तक वाहन के प्रदर्शन पर क्या असर पड़ेगा।

  • क्या E20 पेट्रोल से इंजन खराब होता है या माइलेज कम हो जाता है?

केंद्र सरकार ने उन दावों को गलत बताया है, जिनमें कहा जा रहा है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है या गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो जाता है। सरकार ने बताया कि इस विषय पर ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), इंडियन ऑयल, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (देहरादून) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने मिलकर अध्ययन किया था। इसमें अलग-अलग तरह के वाहनों पर E20 पेट्रोल की जांच की गई।

स्टडी के अनुसार, कारों पर 40,000 किलोमीटर और दोपहिया वाहनों पर 20,000 किलोमीटर तक किए गए टेस्च में इंजन की एफिशिएंसी, गाड़ी स्टार्ट होने या धातु और प्लास्टिक के पुर्जों पर कोई बड़ी समस्या नहीं मिली। हालांकि, कुछ पुराने मॉडल की गाड़ियों में रबर के कुछ हिस्सों और गैस्केट को पहले बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

केंद्र सरकार का कहना है कि ई20 पेट्रोल, सामान्य पेट्रोल की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन कम करता है। सरकार के अनुसार, इथेनॉल की ऑक्टेन क्षमता अधिक होने के कारण ई20 के लिए तैयार किए गए वाहनों में इंजन की नॉकिंग कम होती है, गाड़ी की रफ्तार बेहतर होती है और ड्राइविंग का अनुभव भी अच्छा रहता है।

माइलेज को लेकर सरकार ने कहा है कि E20 पेट्रोल से बहुत ज्यादा माइलेज घटने की बातें सही नहीं हैं। मंत्रालय के मुताबिक, किसी भी गाड़ी का माइलेज सिर्फ ईंधन पर नहीं, बल्कि चलाने के तरीके, टायर में सही हवा, समय पर सर्विस और एयर कंडीशनर के इस्तेमाल जैसी कई बातों पर निर्भर करता है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी कहा कि रेसिंग कारों में लंबे समय से इथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि इससे गाड़ी का प्रदर्शन बेहतर होता है और इंजन की नॉकिंग कम होती है। उन्होंने माना कि माइलेज में हल्की कमी आ सकती है, लेकिन इसके बारे में पहले से ही साफ जानकारी दी गई है।

  • क्या E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ी का बीमा या वारंटी खत्म हो जाएगी?

केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ी का बीमा या कंपनी की वारंटी खत्म नहीं होती। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, बीमा कंपनियों और वाहन बनाने वाली कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि अगर वाहन कंपनी के तय मानकों के अनुसार ई20 पेट्रोल के लिए उपयुक्त है, तो इस ईंधन के इस्तेमाल से बीमा या वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) का भी हवाला दिया है। सियाम के अनुसार, ई20 पेट्रोल के अनुकूल वाहनों पर कंपनी की वारंटी पहले की तरह लागू रहेगी और ग्राहकों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

  • क्या इथेनॉल बनाने में बहुत ज़्यादा पानी का इस्तेमाल होता है?

सरकार का कहना है कि एक लीटर इथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी लगने का दावा सही नहीं है। सरकार के मुताबिक, धान की खेती में इस्तेमाल होने वाले पूरे पानी को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ना गलत है, क्योंकि धान और गेहूं की खेती सबसे पहले देश की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए की जाती है। जब जरूरत से ज्यादा चावल बच जाता है, तभी उसका इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किया जाता है।

सरकार का यही कहना गन्ने के मामले में भी है। उसके अनुसार, पहले देश में चीनी की जरूरत पूरी की जाती है और उसके बाद ही अतिरिक्त गन्ने या उससे बने कच्चे माल का उपयोग इथेनॉल बनाने के लिए किया जाता है।

सरकार ने यह भी बताया कि अब इथेनॉल बनाने में मक्के को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि मक्का उगाने में धान के मुकाबले काफी कम पानी लगता है। फिलहाल इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल में मक्के की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।

सरकार के अनुसार, इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया के दौरान एक लीटर इथेनॉल तैयार करने में आमतौर पर केवल 3 से 5 लीटर पानी की जरूरत होती है। इसके अलावा कई आधुनिक कारखानों में पानी को दोबारा इस्तेमाल करने की तकनीक अपनाई जाती है, जिससे पानी की खपत और भी कम हो जाती है।

  • EBP प्रोग्राम से क्या फायदे हुए हैं?

सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) योजना से देश को आर्थिक और पर्यावरण दोनों स्तर पर बड़े फायदे हुए हैं। सरकार के मुताबिक, साल 2014-15 के बाद इस योजना की वजह से 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई गई है। साथ ही किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।

सरकार के अनुसार, इस योजना से करीब 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का उत्सर्जन कम हुआ है और 310 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चे तेल की जगह इथेनॉल का इस्तेमाल किया गया है। इससे पेट्रोलियम पर देश की निर्भरता घटाने में भी मदद मिली है।

सरकार ने यह भी बताया कि इथेनॉल उत्पादन की सालाना क्षमता 2013-14 में करीब 38 करोड़ लीटर थी, जो अब बढ़कर लगभग 2,000 करोड़ लीटर हो गई है। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत से ज्यादा इथेनॉल मिलाने का फैसला तभी लिया जाएगा, जब वैज्ञानिक जांच, परीक्षण और वाहन कंपनियों से चर्चा के बाद संबंधित विशेषज्ञ संस्था की मंजूरी मिल जाएगी।

E20 Petrol: एथेनॉल वाले पेट्रोल को लेकर मचे बवाल के बीच अब सरकार ने इसकी ये 3 बड़ी खूबियां बताईं, तीसरी वाली पर ज्यादा जोर

E20 Petrol: सोशल मीडिया पर इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल की व्यापक आलोचना के बीच, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर बात की। दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, मंत्री ने बायोफ्यूल की अधिक मात्रा में ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने के सरकार के कदम का बचाव किया। इसके अलावा, उन्होंने मध्य पूर्व संकट के कारण ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी पर भी बात की।

क्या E20 पेट्रोल से माइलेज कम होता है?

इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज कम होने के बारे में बात करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गाड़ी मालिकों को माइलेज में थोड़ी कमी दिख सकती है। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल से गाड़ी की रफ्तार पकड़ने की क्षमता (एक्सेलरेशन) भी बेहतर होती है और बेहतर परफॉर्मेंस के लिए रेसिंग कारों में भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

मंत्री ने कहा, कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि E20 पेट्रोल से माइलेज कम हो जाएगा। लेकिन यह पहले से साबित है कि एथेनॉल का इस्तेमाल रेसिंग कारों में भी किया जाता है। इससे गाड़ी की एक्सीलरेशन (तेजी पकड़ने की क्षमता) बेहतर होती है और “नॉकिंग” भी कम होती है। हालांकि, उन्होंने माना कि माइलेज में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन यह बहुत मामूली होती है और कई कारणों पर निर्भर करती है।

इंश्योरेंस क्लेम

E20 पेट्रोल के इस्तेमाल की वजह से इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने की अफवाहों पर बात करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने फिर कहा कि इंश्योरेंस कंपनियों ने पहले ही ऐसी बातों को खारिज कर दिया है। मंत्री ने अपने बयान में कहा, “कोई कहता है, ‘अब आपका इंश्योरेंस इसे कवर नहीं करेगा’। इंश्योरेंस कंपनियों ने पहले ही साफ़ कर दिया है कि ऐसी कोई समस्या नहीं है।”

ज्यादा इथेनॉल-ब्लेंड वाले ईंधन

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने यह भी कहा, “इलेक्ट्रिक वाहनों और बायोफ्यूल-ब्लेंडेड वाहनों के लिए गुंजाइश है, और अभी हम इथेनॉल ब्लेंडिंग के मामले में 20% के स्तर पर हैं। अगर हम 20% से 25% की ओर बढ़ते हैं, तो ऐसा सभी जरूरी टेस्ट पूरे होने के बाद ही होगा। उन्होंने कहा, हाइब्रिड वाहनों और CNG वाहनों के लिए भी काफी गुंजाइश है।”

बता दें कि सरकार ने पहले 22%, 25%, 27% और 30% इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल के लिए BIS स्टैंडर्ड्स की घोषणा की थी और साथ ही इन ईंधनों पर एक्साइज ड्यूटी में छूट भी दी थी। हालांकि, बाद में पुरी के मंत्रालय ने साफ किया कि ये कदम पूरी तरह से रेगुलेटरी थे और इनका मतलब यह नहीं था कि ज्यादा इथेनॉल-ब्लेंडेड ईंधन तुरंत लॉन्च किए जा रहे हैं।

यह भी पढ़ें: BaaS मॉडल के साथ Hyundai की Creta Electric लॉन्च, कीमत में आई भारी गिरावट

क्या E20 फ्यूल से इंश्योरेंस पॉलिसी हो जाएगी बेकार? सरकार ने बताया पूरा सच

E20 Fuel: भारत सरकार ने कहा है कि देश का इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम सुरक्षित, ग्राहकों के लिए फायदेमंद और आर्थिक रूप से लाभकारी बना हुआ है। साथ ही सरकार ने उन चिंताओं को भी खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से गाड़ी के इंश्योरेंस पॉलिसी की वैधता पर असर पड़ सकता है।

वहीं, अब इस पर तेल मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि यह बात पूरी तरह गलत है। मंत्रालय ने बताया कि इस मामले को लेकर जिन-जिन लोगों या कंपनियों से बात करनी थी, उनसे बात कर ली गई है और यह साफ हो गया है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से इंश्योरेंस पर कोई असर नहीं पड़ता।

मंत्रालय ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग दुनिया भर में अपनाई जाने वाली एक मान्य प्रक्रिया है और इसे कई देशों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है, जिनमें अमेरिका, ब्राजील और जापान शामिल हैं। इसके अलवा, यह भी बताया कि ब्राजील ने लंबे समय से इथेनॉल की ज्यादा मात्रा मिलाने (ब्लेंडिंग) का तरीका अपनाया है, और वहां E27 पेट्रोल का स्टैंडर्ड ब्लेंड है।

सरकार के मुताबिक, इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम से कच्चे तेल का आयात कम हुआ है, जिससे भारत को विदेशी मुद्रा के रूप में 1.4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत करने में मदद मिली है। सरकार ने यह भी कहा कि इस प्रोग्राम से इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल होने वाले कृषि उत्पादों (फीडस्टॉक) की लगातार मांग बनी है, जिससे किसानों की आय बढ़ी है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।

वहीं सरकार के बयान में आगे कहा गया है, “इथेनॉल ब्लेंडिंग भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन को कम करने और देश को साफ-सुथरी मोबिलिटी की ओर ले जाने में अहम भूमिका निभाती है।”

सरकार ने कहा कि वह वैज्ञानिक सबूतों और सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार बातचीत के आधार पर, इस प्रोग्राम को “सुरक्षित, पारदर्शी और उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखते हुए” लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

यह भी पढ़ें: 3 बार फेल हुई और चौथी बार में मार ही डाला! मंगेतर को मारने के लिए सिया गोयल की खौफनाक साजिश की पूरी कहानी अब पता चली

E20 पेट्रोल से गाड़ी के फ्यूल टैंक पर चींटियां आती हैं? वायरल वीडियो पर BPCL ने बताई सच्चाई

देश में E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक कार के फ्यूल फिलर कैप (जहां पेट्रोल डाला जाता है) के आसपास बड़ी संख्या में चींटियां दिखाई दे रही हैं। दावा किया जा रहा है कि E20 पेट्रोल की वजह से चींटियां आकर्षित हो रही हैं और वाहन में जमा हो रही हैं।

हालांकि, इस दावे को भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है।

क्या है वायरल वीडियो?

वायरल क्लिप में एक कार के फ्यूल फिलर कैप के पास चींटियों का झुंड नजर आता है। वीडियो में कैप पर लगा E20 स्टिकर भी दिखाई देता है, जिससे यह दावा किया जाने लगा कि E20 पेट्रोल में मौजूद एथेनॉल चींटियों को आकर्षित करता है।

हालांकि, वीडियो में पूरी कार या घटना की पृष्ठभूमि नहीं दिखाई गई है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कब और कहां का है।

BPCL ने क्या कहा?

BPCL ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों की जांच के बाद कहा कि E20 पेट्रोल और चींटियों के बीच किसी भी तरह का संबंध होने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

कंपनी के मुताबिक, पेट्रोल में मिलाया जाने वाला एथेनॉल फर्मेंटेशन और डिस्टिलेशन जैसी प्रक्रियाओं से तैयार किया जाता है, जिनमें शर्करा (चीनी) पूरी तरह खत्म हो जाती है। इसके अलावा, फ्यूल ग्रेड एथेनॉल में ऐसे रसायन (Denaturants) मिलाए जाते हैं, जो कीड़ों और कीट-पतंगों को दूर रखते हैं।

BPCL ने यह भी स्पष्ट किया कि E20 पेट्रोल में पेट्रोल की गंध ही प्रमुख रहती है और इसमें ऐसा कोई तत्व नहीं होता जो चींटियों या अन्य कीड़ों को आकर्षित करे।

कंपनी ने साफ शब्दों में कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे दावे “निराधार हैं और किसी भी वैज्ञानिक प्रमाण से समर्थित नहीं हैं।”

क्या है E20 पेट्रोल?

E20 पेट्रोल सामान्य पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनॉल का मिश्रण होता है। एथेनॉल एक जैव ईंधन (Biofuel) है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है।

सरकार E20 को बढ़ावा इसलिए दे रही है ताकि कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के आयात पर भारत की निर्भरता कम हो और प्रदूषण में भी कमी आए। एथेनॉल पेट्रोल की तुलना में अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है, जिससे कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसों का उत्सर्जन कम होता है।

क्या E20 से गाड़ी को नुकसान होता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, आजकल बाजार में आने वाली अधिकांश नई कारें और दोपहिया वाहन E20 ईंधन के अनुकूल (Compatible) बनाए जा रहे हैं। हालांकि, कुछ पुराने वाहनों में मामूली बदलाव की जरूरत पड़ सकती है और माइलेज में हल्की कमी देखने को मिल सकती है।

फिलहाल BPCL के स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया है कि E20 पेट्रोल की वजह से चींटियां फ्यूल टैंक के पास जमा होती हैं, ऐसा दावा वैज्ञानिक रूप से गलत है और वायरल वीडियो के आधार पर इस तरह की बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।