डायमंड लीग में नहीं होगी नीरज चोपड़ा और अरशद नदीम की भिड़त, पाक खिलाड़ी ने अचानक वापस लिया नाम

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पाकिस्तान के स्टार जैवलिन थ्रोअर और ओलंपिक गोल्ड मेडल विनर अरशद नदीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। वहीं खराब प्रदर्शन के बाद नदीम ने इस महीने के अंत में लॉजेन में होने वाली डायमंड लीग प्रतियोगिता से हटने का फैसला किया है। लुसाने डायमंड लीग का आयोजन 21 अगस्त को होगी। इस लीग से नदीम ने अपना नाम वापस ले लिया है। वहीं अब डायमंड लीग में भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा का सामना पाकिस्तान के अरशद नदीम के साथ नहीं होगा।

एशियन गेम के लिए करना चाहते हैं तैयार

नदीम के डायमंड लीग से पीछे हटने की वजह एशियन गेम्स 2026 और विश्व एथलेटिक्स अल्टीमेट चैंपियनशिप के लिए तैयारी बताया जा रहा है। फिलहाल नदीम लाहौर में प्रैक्टिस कर रहे हैं। इसके बाद वह अपने कोच टेरसियस लिबेनबर्ग और स्थानीय प्रशिक्षकों की देखरेख में कुछ हफ्तों की ट्रेनिंग के लिए दक्षिण अफ्रीका जाएंगे। अरशद नदीम के पर्सनल ट्रेनर सलमान बट के अनुसार, नदीम अब सितंबर में होने वाले एशियन गेम्स के लिए खुद को पूरी तरह तैयार करना चाहते हैं। इसके लिए वह अपनी फिटनेस और शरीर पर खास ध्यान दे रहे हैं। इसके बाद वह 6 से 14 सितंबर तक बुडापेस्ट में होने वाली वर्ल्ड एथलेटिक्स अल्टीमेट चैंपियनशिप में नजर आएंगे।

कॉमनवेल्थ गेम्स खराब प्रदर्शन

कॉमनवेल्थ गेम्स में अरशद नदीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। ग्लासगो की ठंडी और तेज हवाओं वाली परिस्थितियों में वह टॉप-8 में भी जगह नहीं बना सके। इस मुकाबले में श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरगे ने 89.75 मीटर के थ्रो के साथ पहला स्थान हासिल किया, जबकि भारत के नीरज चोपड़ा ने सिल्वर और यशवीर सिंह ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। खराब प्रदर्शन के बाद नदीम को पाकिस्तान में आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, जिसके जवाब में उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपना पक्ष रखा था।

PAAF ने नदीम से बनाई दूरी

इस बीच पाकिस्तान के अधिकारियों पर भी सवाल उठे। PTI की रिपोर्ट के अनुसार, कोच सलमान बट को पद पर बनाए रखने को लेकर विवाद के बाद पाकिस्तान एमेच्योर एथलेटिक्स फेडरेशन (PAAF) ने अरशद नदीम से दूरी बना ली। इसके चलते ओलंपिक चैंपियन को अपनी ट्रेनिंग और तैयारियों का ज्यादातर काम खुद ही संभालना पड़ा। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड ने विदेशी कोचों के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद भी रोक दी थी। इसके कारण अरशद नदीम को ग्लासगो की अलग मौसम परिस्थितियों के बावजूद लाहौर में सलमान बट की देखरेख में ही ट्रेनिंग करनी पड़ी। इससे उनकी तैयारियों पर भी असर पड़ा।

Commonwealth Games में भारतीय सेना के खिलाड़ियों ने जीते 16 पदक (Video)

Neeraj Chopra

भारतीय सेना ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में अपने खिलाड़ियों के ‘शानदार प्रदर्शन’ की मंगलवार को तारीफ की और कहा कि यह अलग-अलग खेलों में उनके जोश और लगन का सबूत है।सेना ने बताया कि उसके खिलाड़ियों ने इस प्रतियोगिता में 16 पदक जीते और इस बात पर जोर दिया कि ये उपलब्धियां विश्व स्तरीय खिलाड़ियों को तैयार करने और देश की खेल से जुड़ी उम्मीदों को आगे बढ़ाने के लिए उसकी प्रतिबद्धता को फिर से साबित करती हैं।

सेना ने कहा, ‘‘हर काम, देश के नाम, जनरल धीरज सेठ, सीओएएस और भारतीय सेना में सभी पद के लोग राष्ट्रमंडल खेले ग्लास्गो 2026 में शानदार प्रदर्शन के लिए भारतीय सेना के खिलाड़ियों को दिल से बधाई देते हैं।’’ सेना ने बताया कि उसके खिलाड़ियों ने जूडो, मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, पैरा-एथलेटिक्स और भारोत्तोलन में बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने जीत के पलों की झलक दिखाने वाली एक वीडियो क्लिप भी साझा की।

सेना ने कहा, ‘‘भारतीय सेना के खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन उनके जोश और लगन का सबूत है। ये उपलब्धियां विश्व स्तरीय खिलाड़ियों को तैयार करने और मिशन ओलंपिक 2036 के जरिए देश की खेल से जुड़ी उम्मीदों को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को फिर से साबित करती हैं।’’

तीन अगस्त को संपन्न राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने कुल 39 पदक जीते जिसमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य पदक शामिल हैं। भारत चौथे स्थान पर रहा। गुजरात का अहमदाबाद 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करेगा जिससे दो दशक बाद इस प्रतियोगिता की भारत में वापसी होगी।भारत ने पिछली बार 2010 में नयी दिल्ली में इन खेलों की मेजबानी की थी।

वतन वापसी पर कॉमनवेल्थ मेडलिस्ट का हुआ देश में जोरदार स्वागत (Video)

commonwealth games

राष्ट्रमंडल खेल 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले भारतीय एथलीट्स की वतन वापसी पर भव्य स्वागत हुआ। गौरतलब है कि भारत ने इन खेलों में उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन किया जब कई वैश्विक खेल जिनमें भारत दर्जन भर मेडल लाता था इन खेलों से नदारद थे। इस बार हॉकी, बैडमिंटन, शूटिंग, कुश्ती नहीं शामिल हुए थे।

इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही खिलाड़ियों का ढोल-नगाड़ों, देशभक्ति गीतों और फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। परिजन और समर्थक खिलाड़ियों के साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए उत्साहित नजर आए।भारतीय पैरा एथलेटिक्स दल ने भी इतिहास रचते हुए रिकॉर्ड सात पदक अपने नाम किए, जिसके दम पर भारत समग्र पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंचा।

खिलाड़ी मंगलवार तड़के करीब चार बजे जैसे ही हवाई अड्डे के टर्मिनल से बाहर निकले, ढोल-नगाड़ों की गूंज और देशभक्ति गीतों से पूरा माहौल उत्साह से भर उठा। परिजनों ने पदक विजेता खिलाड़ियों का फूल-मालाएं पहनाकर गर्मजोशी से स्वागत किया, जबकि बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए मौजूद थे।

राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले जूडो खिलाड़ी हर्ष सिंह और अस्मिता डे मंगलवार तड़के हवाई अड्डे से बाहर निकलने वाले शुरुआती खिलाड़ियों में शामिल रहे। उनका भी यहां गर्मजोशी से स्वागत किया गया। हर्ष ने कहा, ‘‘ मैंने कभी नहीं सोचा था कि इस तरह का स्वागत मिलेगा। सभी से मिलकर बेहद अच्छा लग रहा है।’’ उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक अस्मिता डे ने कहा, ‘‘मुझे जीवन में पहली बार ऐसा स्वागत मिल रहा है और मेरे लिए यह अनुभव बेहद खास है।’’

खेल मंत्रालय ने दिए नकद पुरुस्कार

खेल मंत्री ने कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार उपलब्धियों के लिए गोल्ड मेडल जीतने वालों को 30 लाख रुपये, सिल्वर मेडल जीतने वालों को 20 लाख रुपये और ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने वालों को 10 लाख रुपये का नकद इनाम दिया। इन खेलों में भारतीय वेटलिफ्टरों ने देश का अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन किया।

खिलाड़ियों को बधाई देते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि पूरे देश ने उनकी उपलब्धियों का जश्न मनाया। उन्होंने कहा, “संसद में भी, हर बार जब आपने मेडल जीते, तो घोषणाएं की गईं। उन पलों ने हर भारतीय को गौरवान्वित किया।”

खेल मंत्री ने कोचों, जिनमें द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता विजय शर्मा भी शामिल थे की जमकर तारीफ की और चैंपियन बनाने में उनकी अहम भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “एक खिलाड़ी के सफर में गुरु की सबसे बड़ी भूमिका होती है। चैंपियन बनाने में कोच के योगदान से बड़ी कोई चीज नहीं है।”

अगला मेजबान होने के कारण भारत को मिला कॉमनवेल्थ ध्वज और मशाल (Video)

राष्ट्रमंडल खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले भारत देश को अब खेलों की मशाल भी मिल गई क्योंकि अगला  राष्ट्रमंडल खेल भारत के अहमदाबाद में होने वाला है। भारत की ओर से नीरज चोपड़ा ने इस मशाल और ध्वज को थामा। इससे पहले संगीत और नृत्य के ताने बाने में तैयार किये गए अद्भुत सांस्कृतिक कार्यक्रम ने भारत की पहचान ऐसे देश के रूप में रखी जहां परंपरा और आधुनिकता साथ में बसते हैं।

किंग चार्ल्स तृतीय के प्रतिनिधि प्रिंस एडवर्ड (ड्यूक आफ एडिनबर्ग) ने खेलों के समापन की औपचारिक घोषणा की।उन्होंने कहा ,‘‘ जिस तरह से आपने प्रतिस्पर्धा की, खेलों का आयोजन किया और समर्थन किया , उसके लिये धन्यवाद। आपने आज एक बार फिर राष्ट्रमंडल की भावना और मूल्यों को जीवंत कर दिया। शुक्रिया ग्लास्गो। ’’उन्होंने कहा ,‘‘ मैं सभी देशों और प्रदेशों के खिलाड़ियों को भारत के अहमदाबाद आने का न्योता देता हूं जहां चार साल बाद 24वें राष्ट्रमंडल खेल होंगे जो इन खेलों का शताब्दी संस्करण भी है।’

बॉक्सिंग में भारत की स्वर्ण पदक विजेता महिलाओं की 57 किग्रा बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल जीतने वाली जैस्मिन लैंबोरिया को  समापन समारोह के लिए भारत का ध्वजवाहक चुना गया था।भारत कुल 39 पदक -13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य – के साथ मेडल स्टैंडिंग में चौथे स्थान पर काबिज है। इन गेम्स में खेलों की संख्या कम होने के बावजूद यह एक बड़ी उपलब्धि है।

मुकाबले खत्म होने के बाद ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स आधिकारिक तौर पर समापन समारोह के साथ समाप्त हो गया जो 3 अगस्त को तड़के 1:30 बजे (भारतीय समयानुसार) प्रसारित किया गया।

हॉकी, कुश्ती और शूटिंग के बिना भी भारत ने Commonwealth Games में जीते 39 मेडल

commonwealth games

कई मुख्य खेल जैसे कि हॉकी, कुश्ती और शूटिंग के ना होने के बावूजद भी भारत ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में खेले गए राष्ट्रमंडल खेलों में अपना दम दिखाया और 39 मेडल पाकर अंकतालिका में चौथा स्थान प्राप्त किया। ऐसा माना जा रहा था जहां भारत के सफलतम वैश्विक खेल नदारद है वहां मेडल तालिका में भारत अंकतालिका में शीर्ष दस देशों में आ जाए तो बड़ी बात होगी।

टेबल टेनिस में भी सिर्फ पुरुष और महिला के टीम मैच हुए थे, एकल और युगल नहीं। टेबल टेनिस में भारत ने मलेशिया को हराकर दोनों स्वर्ण पदक पर कब्जा किया।लेकिन भारोत्तोलन, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स के ट्रैक एंड फी्लड इवेंट के साथ पैरा एथलेटिक्स में भी भारत ने झंडे गाढे़।

भारतीय खिलाड़ियों ने 11 दिन तक चले खेलों में मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, जूडो, पैरा खेलों और भारोत्तोलन में बेहतरीन प्रदर्शन करके साबित कर दिया कि भारत राष्ट्रमंडल खेल महाशक्तियों में से एक है।भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य पदक जीते। आस्ट्रेलिया 70 स्वर्ण समेत 171 पदक जीतकर शीर्ष रहा जबकि इंग्लैंड ने 110 और कनाडा ने 62 पदक जीते।

मेजबान स्कॉटलैंड 39 पदक जीतकर पांचवें स्थान पर रहा। मुक्केबाजों ने सात स्वर्ण और तीन रजत समेत दस पदक जीते। जूडो खिलाड़ियों ने भी जबर्दस्त प्रदर्शन करके पदक जीते।निशानेबाजी, बैडमिंटन, कुश्ती, हॉकी और टेबल टेनिस जैसे खेल नहीं होने से भारत के पदकों की संख्या कम हुई है लेकिन बाकी खेलों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपना लोहा मनवाया।

कुछ घटनाओं ने निराश भी किया जैसे खेलों से पहले ही जूडो खिलाड़ी तूलिका मान डोपिंग रोधी नियमों के तहत ठिकाने का पता बनाने में तीन बार नाकाम रहने के कारण अस्थायी तौर पर निलंबित हो गई और खेलों में हिस्सा नहीं ले पाई।ग्लास्गो से विदा लेने के बाद अब नजरें अहमदाबाद पर होंगी जहां 2030 में खेल होने हैं।

हॉकी, कुश्ती और शूटिंग के बिना भी भारत ने Commonwealth Games में जीते 39 मेडल

commonwealth games

कई मुख्य खेल जैसे कि हॉकी, कुश्ती और शूटिंग के ना होने के बावूजद भी भारत ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में खेले गए राष्ट्रमंडल खेलों में अपना दम दिखाया और 39 मेडल पाकर अंकतालिका में चौथा स्थान प्राप्त किया। ऐसा माना जा रहा था जहां भारत के सफलतम वैश्विक खेल नदारद है वहां मेडल तालिका में भारत अंकतालिका में शीर्ष दस देशों में आ जाए तो बड़ी बात होगी।

टेबल टेनिस में भी सिर्फ पुरुष और महिला के टीम मैच हुए थे, एकल और युगल नहीं। टेबल टेनिस में भारत ने मलेशिया को हराकर दोनों स्वर्ण पदक पर कब्जा किया।लेकिन भारोत्तोलन, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स के ट्रैक एंड फी्लड इवेंट के साथ पैरा एथलेटिक्स में भी भारत ने झंडे गाढे़।


भारतीय खिलाड़ियों ने 11 दिन तक चले खेलों में मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, जूडो, पैरा खेलों और भारोत्तोलन में बेहतरीन प्रदर्शन करके साबित कर दिया कि भारत राष्ट्रमंडल खेल महाशक्तियों में से एक है।भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य पदक जीते। आस्ट्रेलिया 70 स्वर्ण समेत 171 पदक जीतकर शीर्ष रहा जबकि इंग्लैंड ने 110 और कनाडा ने 62 पदक जीते।

मेजबान स्कॉटलैंड 39 पदक जीतकर पांचवें स्थान पर रहा। मुक्केबाजों ने सात स्वर्ण और तीन रजत समेत दस पदक जीते। जूडो खिलाड़ियों ने भी जबर्दस्त प्रदर्शन करके पदक जीते।निशानेबाजी, बैडमिंटन, कुश्ती, हॉकी और टेबल टेनिस जैसे खेल नहीं होने से भारत के पदकों की संख्या कम हुई है लेकिन बाकी खेलों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपना लोहा मनवाया।

कुछ घटनाओं ने निराश भी किया जैसे खेलों से पहले ही जूडो खिलाड़ी तूलिका मान डोपिंग रोधी नियमों के तहत ठिकाने का पता बनाने में तीन बार नाकाम रहने के कारण अस्थायी तौर पर निलंबित हो गई और खेलों में हिस्सा नहीं ले पाई।ग्लास्गो से विदा लेने के बाद अब नजरें अहमदाबाद पर होंगी जहां 2030 में खेल होने हैं।

Lovlina Borgohain ने ग्लास्गो के रेस्टोरेंट में पकड़ी बड़ी गलती, भारत के नक्शे पर जताई आपत्ति

Lovlina Borgohain

ग्लासगो के रेस्टोरेंट में भारत के नक्शे से नॉर्थ ईस्ट का हिस्सा गायब, बॉक्सर लवलीना ने जताई नाराजगी

स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदकों के साथ कुल 39 पदक अपने नाम किए। भारत ने स्पर्धा में चौथा स्थान हासिल किया है। जीत का जश्न मनाने एक रेस्टोरेंट पहुंची मुक्केबाजों की टीम उस समय हैरान रह गई जब उन्हें मिले नैपकिन से पूर्वोत्तर गायब मिला। जम्मू कश्मीर को भी गलत तरीके से दिखाया गया था।

 

रेस्टोरेंट में शनिवार को डिनर के दौरान रजत पदक विजेता बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने बड़ी गलती पकड़ी। उन्होंने भारतीय रेस्टोरेंट में डिनर के दौरान मिले नैपकिन पर बने भारत के नक्शे से नॉर्थ-ईस्ट को गायब करने पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई। उनके साथ भारतीय दल के अधिकारी भी थे। लवलीना बोरगोहेन की इस आपत्ति को वहां के लोगों ने गंभीरता से लिया। 

ग्लासगो के पॉपुलर भारतीय रेस्टोरेंट मिस्टर सिंग्स इंडिया में भारतीय मुक्केबाजों का दल यहां डिनर के लिए पहुंचा था। टेबल पर रखी नैपकिन पर नजर पड़ते ही खुशियों का माहौल अचानक गर्मा गया। स्टार बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने ध्यान दिया कि रेस्टोरेंट के नैपकिन पर भारत का जो नक्शा छपा था, उसमें से नॉर्थ ईस्ट इंडिया का पूरा हिस्सा गायब था। इस गंभीर लापरवाही पर लवलीना ने तुरंत अपनी नाराजगी जाहिर की।

उन्होंने कहा कि रेस्टोरेंट के नैपकिन पर छपे नक्शे से हमारा नॉर्थ ईस्ट इंडिया गायब है। भारत का हर एक हिस्सा बेहद अहम है और हर जगह देश का सही और पूरा नक्शा ही दिखाया जाना चाहिए।

 

BFI अध्यक्ष ने भी किया लवलीना का समर्थन

उनकी आपत्ति का बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) के अध्यक्ष अजय सिंह ने भी तत्काल समर्थन किया। अजय सिंह ने न केवल उत्तर-पूर्व के बारे में बोरगोहेन की बात का समर्थन किया, बल्कि उसी नक्शे में जम्मू-कश्मीर को गलत तरीके से दिखाए जाने की ओर भी इशारा किया।

 

उन्होंने बताया कि इस नक्शे में सिर्फ नार्थ ईस्ट इंडिया ही नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर को भी सही तरीके से नहीं दिखाया गया था। अजय सिंह ने रेस्टोरेंट प्रबंधन से इन सभी नैपकिन को तुरंत हटाने और सही नक्शे का इस्तेमाल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विदेशों में भारतीय संस्कृति और पहचान को बढ़ावा देने वाले किसी भी स्थान पर ऐसी बड़ी गलतियों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। ग्लासगो में मेहमाननवाजी के लिए मशहूर 'मिस्टर सिंह्स इंडिया' रेस्टोरेंट ने इस भौगोलिक गलती को सुधारने पर तत्काल ही ध्यान दिया और शीघ्र ही इसको दुरुस्त किया जाएगा।

CWG 2026 Medal List: ग्लासगो में भारत ने जीते कितने मेडल? देखें गोल्ड-सिल्वर-ब्रॉन्ज की पूरी लिस्ट और मेडल टैली

Commonwealth Games 2026 Medal List: 11 दिनों तक चले रोमांचक मुकाबलों के बाद ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 का शानदार समापन हो गया है। रविवार 2 अगस्त को एक रंगारंग समापन समारोह के साथ राष्ट्रमंडल खेलों का फ्लैग और बेटन अगले मेजबान देश भारत को सौंप दिया गया। भारतीय दल ने ग्लासगो में कई पारंपारिक और पदक दिलाने वाले खेलों (जैसे शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, हॉकी और टेबल टेनिस) को शामिल न किए जाने के बावजूद शानदार प्रदर्शन किया। भारत ने कुल 39 पदक (13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य) जीतकर मेडल टैली में चौथा स्थान हासिल किया है।

2030 में अहमदाबाद करेगा शताब्दी संस्करण की मेजबानी

समारोह के दौरान स्कॉटलैंड के अधिकारियों ने राष्ट्रमंडल खेल संघ का ध्वज और बेटन भारतीय प्रतिनिधियों ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पीटी उषा और गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी को सौंपा।

वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन भारत के अहमदाबाद शहर में होगा। ये इन खेलों का 100वां यानी शताब्दी संस्करण होगा। भारत इससे पहले 2010 में नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों का सफल आयोजन कर चुका है। इसके साथ ही भारत, ऑस्ट्रेलिया के बाद एक से अधिक बार इन खेलों की मेजबानी करने वाला दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा।

राष्ट्रमंडल खेल 2026: अंतिम मेडल टैली में टॉप 5 देश

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 की पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर अपना वर्चस्व कायम करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया। ऑस्ट्रेलिया कुल 171 पदकों के साथ पहले स्थान पर रहा, जिसमें 70 स्वर्ण, 45 रजत और 56 कांस्य पदक शामिल हैं। इंग्लैंड ने 29 स्वर्ण, 45 रजत और 36 कांस्य पदक जीतकर कुल 110 पदकों के साथ दूसरा स्थान प्राप्त किया। जबकि कनाडा 19 स्वर्ण, 20 रजत और 23 कांस्य मिलाकर कुल 62 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

भारत के खाते में आए 39 मेडल

भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदकों के साथ कुल 39 मेडल जीतकर तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। मेजबान स्कॉटलैंड ने भी कुल 39 पदक जीते। लेकिन उसके खाते में 13 स्वर्ण, 9 रजत और 17 कांस्य पदक आए। भारत के पास स्कॉटलैंड से अधिक रजत पदक (17) होने के कारण भारतीय दल पदक तालिका में पांचवें स्थान पर रहे स्कॉटलैंड से ऊपर चौथे स्थान पर रहा।

खेलों में भारत का प्रदर्शन: बॉक्सिंग का रहा दबदबा

भारतीय एथलीटों ने मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, जूडो, पैरा स्पोर्ट्स और भारोत्तोलन में बेहतरीन प्रदर्शन किया। मुक्केबाजी भारत का सबसे सफल खेल रहा, जिसने कुल 10 पदक दिलाए (7 स्वर्ण और 3 रजत)। ट्रैक एंड फील्ड और पैरा एथलीट्स ने कई ऐतिहासिक पदक जीते। जूडोकाओं ने अहम पदक जोड़े, जबकि वेटलिफ्टरों ने भारत के मेडल खाते को मजबूती दी। हालांकि जुडोका तुलिका मान को एंटी-डोपिंग नियमों के तहत सस्पेंड होने के कारण खेलों से बाहर होना पड़ा, जो भारत के लिए एक शुरुआती झटका था।

CWG 2026: भारत के पदक विजेताओं की पूरी लिस्ट

1- बॉक्सिंग (Boxing) – 10 मेडल (7 Gold, 3 Silver)

गोल्ड: प्रीति पवार (महिला 51 किग्रा)

गोल्ड: साक्षी चौधरी (महिला 54 किग्रा)

गोल्ड: जैस्मिन लंबोरिया (महिला 57 किग्रा)

गोल्ड: प्रिया घनघस (महिला 60 किग्रा)

गोल्ड: अरुंधति चौधरी (महिला 66 किग्रा)

गोल्ड: सचिन सिवाच (पुरुष 55 किग्रा)

गोल्ड: अंकुश पंघाल (पुरुष 65 किग्रा)

सिल्वर: लवलीना बोरगोहेन (महिला 75 किग्रा)

सिल्वर: जादुमणि सिंह (पुरुष 50 किग्रा)

सिल्वर: नरेंद्र बेरवाल (पुरुष +90 किग्रा)

2- पैरा एथलेटिक्स – 6 मेडल (3 Gold, 2 Silver, 1 Bronze)

गोल्ड: शर्मीला ढाका (महिला शॉट पुट F57)

गोल्ड: दिलीप गावित (पुरुष 100 मीटर T47)

गोल्ड: सोमन राणा (पुरुष शॉट पुट F57)

सिल्वर: मोहम्मद बासिल (पुरुष 100 मीटर T47)

सिल्वर: शुभम जुयाल (पुरुष शॉट पुट F57)

कांस्य: शिल्पा शैला (महिला शॉट पुट F57)

3- जूडो – 4 मेडल (2 Gold, 1 Silver, 1 Bronze)

गोल्ड: अस्मिता डे (महिला 48 किग्रा)

गोल्ड: हर्ष सिंह (पुरुष 60 किग्रा)

सिल्वर: यामिनी मौर्या (महिला 57 किग्रा)

कांस्य: उन्नति शर्मा (महिला 63 किग्रा)

4- भारोत्तोलन – 8 मेडल (1 Gold, 6 Silver, 1 Bronze)

गोल्ड: सायखोम मीराबाई चानू (महिला 48 किग्रा)

सिल्वर: ऋषिकान्त सिंह (पुरुष 60 किग्रा)

सिल्वर: मुथुपंडी राजा (पुरुष 65 किग्रा)

सिल्वर: ज्ञानेश्वरी यादव (महिला 53 किग्रा)

सिल्वर: वल्लूरी अजय बाबू (पुरुष 79 किग्रा)

सिल्वर: हरजिंदर कौर (महिला 69 किग्रा)

सिल्वर: लवप्रीत सिंह (पुरुष +110 किग्रा)

कांस्य: बिंद्यारानी देवी (महिला 58 किग्रा)

5- एथलेटिक्स – 10 मेडल (5 Silver, 5 Bronze)

सिल्वर: नीरज चोपड़ा (पुरुष भाला फेंक / Javelin Throw)

सिल्वर: मुरली श्रीशंकर (पुरुष लंबी कूद / Long Jump)

सिल्वर: प्रवीण चित्रवेल (पुरुष ट्रिपल जंप / Triple Jump)

सिल्वर: सर्वेश अनिल कुशारे (पुरुष ऊंची कूद / High Jump)

सिल्वर: गुलवीर सिंह (पुरुष 10,000 मीटर दौड़)

कांस्य: यशवीर सिंह (पुरुष भाला फेंक / Javelin Throw)

कांस्य: सेल्वा प्रभु थिरुमारन (पुरुष ट्रिपल जंप / Triple Jump)

कांस्य: गुलवीर सिंह (पुरुष 5,000 मीटर दौड़)

कांस्य: तेजस्विन शंकर (पुरुष डेकाथलॉन / Decathlon)

कांस्य: सीमा कालीरामना (महिला डिस्क थ्रो / Discus Throw)

6 – पैरा पावरलिफ्टिंग – 1 मेडल (1 Bronze)

कांस्य : झंडू कुमार (पुरुष हैवीवेट)

ग्लासगो 2026 के सफल समापन के बाद अब भारतीय खेल जगत की निगाहें 2030 अहमदाबाद राष्ट्रमंडल खेलों पर टिक गई हैं।

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CWG 2026: ‘न फंड मिला, न विदेशी कोच…’ पाकिस्तान ने छोड़ा ओलंपिक मेडल विनर अरशद नदीम का साथ! रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पाकिस्तान के स्टार जैवलिन थ्रोअर और ओलंपिक गोल्ड मेडल विनर अरशद नदीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। जैवलिन थ्रो के फाइनल में नदीम शीर्ष आठ खिलाड़ियों में भी जगह बनाने में सफल नहीं हुए और नौवें स्थान पर रहकर प्रतियोगिता से बाहर हो गए। वहीं ओलंपिक विनर के खराब प्रदर्शन के बाद उनके खेल और तैयारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों के मुताबिक, अरशद नदीम के खराब प्रदर्शन की वजह सिर्फ उनका फॉर्म ही नहीं, बल्कि तैयारी के दौरान आई दिक्कतें भी जिम्मेदार हो सकती हैं।

वहीं कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के खेल अधिकारियों ने उन्हें जरूरी सुविधाएं और पूरा सहयोग नहीं दिया, जिससे उनकी तैयारी प्रभावित हुई।

पाकिस्तान ने नहीं दी कोई मदद

रिपोर्टों के अनुसार, वह पूरी तरह फिट नहीं थे और उनकी तैयारियां भी प्रभावित रहीं। PTI की एक रिपोर्ट में, एथलीट के करीबी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि, पिछले साल लंबे समय से अरशद नदीम के कोच रहे सलमान बट को बनाए रखने को लेकर हुए विवाद के बाद पाकिस्तान एमेच्योर एथलेटिक्स फेडरेशन (PAAF) ने उनसे दूरी बना ली। रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद फेडरेशन ने ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट को अपनी तैयारियां खुद संभालने के लिए छोड़ दिया और उनकी ट्रेनिंग से जुड़ी कई मांगों पर भी कोई जवाब नहीं दिया।

नहीं जारी किए फंड

रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड ने विदेशी कोच और ट्रेनर रखने के लिए जरूरी फंड भी जारी नहीं किए। इसके चलते अरशद नदीम को लाहौर में स्थानीय स्टाफ के साथ ही प्रैक्टिस करना पड़ा। बताया गया कि पिछले वर्षों की तरह इस बार उन्हें दक्षिण अफ्रीकी कोच टेरसियस लिबेनबर्ग के साथ काम करने का मौका नहीं मिला। इसके बजाय उन्होंने लाहौर और ग्लासगो के अलग-अलग मौसम के बावजूद अपने पुराने कोच सलमान बट की देखरेख में ही तैयारियां पूरी कीं।

अरशद नदीम के कोच सलमान बट ने भी माना कि वह कॉमनवेल्थ खेलों में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के करीब भी नहीं थे और पर्याप्त तैयारी के बिना प्रतियोगिता में उतरे। बताया गया कि खेलों से पहले उन्होंने स्विट्जरलैंड में सिर्फ एक तैयारी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था।

अस्मिता और हर्ष के एतिहासिक स्वर्ण पदक, जूडो में 3 पदक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

हर्ष सिंह और अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को पहली बार जूडो कराटे में मेडल दिलवाया वह भी गोल्ड। अस्मिता कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में गोल्ड जीतने वाली पहली महिला जूडोका बनी वहीं इसके बाद हर्ष सिंह भी पहले पुरष जूडोका बने जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स  में गोल्ड जीता। इसके अलावा यामिनी ने भी 48.किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीता।

भारत ने जूडो में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता जो 1990 के ऑकलैंड राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो के पदक खेल बनने के बाद भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

त्रिपुरा की 23 वर्षीय अस्मिता डे जूडो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गई जिन्होंने 48 किग्रा से कम भार वर्ग में कनाडा की हेडी क्वाच को नाटकीय ‘गोल्डन स्कोर’ मुकाबले में हराकर खिताब जीता।

हर्ष सिंह राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले पुरूष खिलाड़ी बन गए जिन्होंने आस्ट्रेलिया के अनुभवी जोशुआ कैट्ज को हराकर पुरूषों के 60 किलो फाइनल में स्वर्ण पदक जीता ।

पहली बार इन खेलों में उतरे 23 वर्ष के हर्ष ने खिताब के प्रबल दावेदार माने जा रहे जूडोका के खिलाफ संयम खोये बिना जबर्दस्त खेल दिखाया । यामिनी काफी करीब से स्वर्ण पदक जीतने से चूक गईं और उन्हें महिलाओं के 57 किग्रा से कम भार वर्ग के ‘गोल्डन स्कोर’ तक पहुंचे फाइनल में इंग्लैंड की अनुभवी एसिल्या टॉपराक से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा।