Market View : गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें, डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का अच्छा मौका

Market View : गुरुवार को पिछले कारोबारी सत्र में आखिरी घंटे में बाजार में ऊपरी स्तर से मुनाफावसूली आई थी। सेंसेक्स-निफ्टी ऊपरी स्तर से फिसलकर बंद हुए थे। हालांकि सेंसेक्स 109 प्वाइंट चढ़कर 77,100 पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी 34 प्वाइंट चढ़कर 24,056 पर बंद हुआ था। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए थे। ऑटो और FMCG शेयरों में खरीदारी आई थी। मेटल,PSE और तेल-गैस इंडेक्स गिरावट पर बंद हुए थे। IT और एनर्जी शेयरों में दबाव देखने को मिला था। बैंक निफ्टी 27 प्वाइंट चढ़कर 58,177 पर बंद हुआ था। मिडकैप 400 प्वाइंट गिरकर 61,796 पर बंद हुआ था।

निफ्टी के 50 में से 26 शेयरों में बिकवाली देखने को मिली थी। सेंसेक्स के 30 में से 19 शेयरों में बिकवाली रही थी। बैंक निफ्टी के 14 में से 8 शेयरों में गिरावट आई थी। डॉलर के मुकाबले रुपया 27 पैसे मजबूत होकर 94.40/$ पर बंद हुआ था।

बंधन AMC में VP-इक्विटीज,प्रतीक पोद्दार ने बाजार पर बात करते हुए कहा कि गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें। यह डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का मौका है। गिरावट में अच्छे स्टॉक्स सस्ते दाम पर मिलते हैं। मिड और स्मॉलकैप में भी अवसर मिलने पर एग्रेसिव खरीदारी की जा सकती है। ऑटोमैटिक रीबैलेंसिंग से रिस्क कंट्रोल में रहता है। इस समय पैनिक सेलिंग नहीं,डिसिप्लिन्ड एलोकेशन पर जोर होना चाहिए।

डेट पोर्टफोलियो की रणनीति

प्रतीक पोद्दार ने बताया कि उनके फंड का डेट हिस्से का लगभग पूरा पैसा निवेशित है। कैश होल्डिंग बहुत सीमित। सिर्फ हाई क्वालिटी डेट इंस्ट्रूमेंट्स पर फोकस है। AAA रेटेड बॉन्ड्स में बड़ा एक्सपोजर है। इसका ड्यूरेशन करीब 4 साल के आसपास है। बाजार गिरने पर डेट से पैसा निकालकर इक्विटी में शिफ्ट करने पर फोकस है।

रीबैलेंसिंग की स्ट्रैटेजी

रीबैलेंसिंग का सबसे बड़ा आधार है वैल्यूएशन। जहां रिस्क-रिवॉर्ड बेहतर दिखता है,वहां निवेश बढ़ाते हैं। सेक्टर और स्टॉक दोनों का लगातार रिव्यू करते रहना चाहिए। महंगे पॉकेट्स से निकलकर सस्ते अवसरों की तलाश की सलाह होगी।

बाजार की गिरावट में डेट का रोल?

डेट का अहम काम वोलैटिलिटी कम करना है। डेट रिटर्न्स को ज्यादा स्थिर बनाए रखता है। यह पश्चिम एशिया संकट और टैरिफ वॉर जैसे इवेंट्स में सुरक्षा कवच का काम करता है। बाजार गिरते ही इक्विटी वेट घटता है और डेट वेट बढ़ता है।

Daily Voice : ग्लोबल AI थीम से जुड़े शेयरों के वैल्यूएशन को लेकर रहें सतर्क, अगले 6-9 महीनों में मार्केट के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने की संभावना कम

बंधन एग्रेसिव हाइब्रिड फंड

बंधन एग्रेसिव हाइब्रिड फंड (Bandhan Aggressive Hybrid Fund) के बारे में बताते हुए प्रतीक पोद्दार ने कहा कि यह फंड सिर्फ हाई-रिस्क निवेशकों के लिए नहीं है। मॉडरेट रिस्क प्रोफाइल वाले भी इसे चुन सकते हैं। इसमें इक्विटी-डेट का बैलेंस कॉम्बिनेशन है। इसमें सिर्फ रिटर्न नहीं,रिस्क मैनेजमेंट पर भी फोकस है। निवेशकों को बार-बार रीबैलेंसिंग की जरूरत नहीं होती। यह 3-5 साल के नजरिया के लिए बेहतर है।

 

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Daily Voice : ग्लोबल AI थीम से जुड़े शेयरों के वैल्यूएशन को लेकर रहें सतर्क, अगले 6-9 महीनों में मार्केट के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने की संभावना कम

Daily Voice : INVasset PMS के पार्टनर और फंड मैनेजर अनिरुद्ध गर्ग ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि नैस्डैक कंपोजिट में हालिया गिरावट महीनों से चली आ रही बहुत ज्यादा उम्मीदों के बाद वैल्यूएशन में आया बदलाव है,न कि फंडामेंटल्स में कोई बड़ी गिरावट। वह इस स्ट्रक्चरल थीम को लेकर तो पॉज़िटिव हैं,लेकिन इसके वैल्यूएशन को लेकर सावधान हैं। उनका मानना ​​है कि पिछले दो सालों में हुई बड़ी री-रेटिंग के मुकाबले,अब इनका रिटर्न ज्यादातर चुनिंदा शेयरों और कंपनियों की कमाई पर निर्भर करेगा।

उनके मानना है कि बाजार के नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए जरूरी है कि अर्निंग का स्तर वैल्यूएशन के बराबर हो और ग्लोबल वोलैटिलिटी कम हो। लेकिन इस दौरान इनमें से किसी की भी गारंटी नहीं है। इसलिए,अगले छह से नौ महीनों में बाजार के एक सीमित दायरे में रहने और खास शेयरों पर फोकस्ड रहने की ज्यादा संभावना है। अगर अर्निंग अच्छी रहती है,तो दूसरी छमाही में बाजार धीरे-धीरे ऊपर जा सकता है।

क्या आपको लगता है कि ग्लोबल AI स्टॉक्स में अभी भी काफी बढ़त की गुंजाइश है,या आप टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में हालिया गिरावट को लेकर चिंतित हैं?

ग्लोबल AI में आसानी से मिलने वाले फायदे का ज्यादातर हिस्सा पहले ही हासिल किया जा चुका है। हाल की गिरावट (जिसमें सेमीकंडक्टर सेक्टर की वैल्यूएशन में एक ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की कमी आई और नैस्डैक में एक ही सेशन में जबरदस्त गिरावट देखी गई) असल में महीनों से चली आ रही बहुत ज्यादा उम्मीदों के बाद वैल्यूएशन का रीसेट है,न कि फंडामेंटल्स में कोई बड़ी गिरावट। इस स्ट्रक्चरल थीम को लेकर तो पॉज़िटिव नजरिया है,लेकिन इसके वैल्यूएशन को लेकर सावधानी की जरूरत है। पिछले दो सालों में हुई बड़ी री-रेटिंग के मुकाबले,अब इस सेक्टर का रिटर्न ज्यादातर चुनिंदा शेयरों और कंपनियों की कमाई पर निर्भर करेगा।

क्या निवेशकों को IT सर्विस कंपनियों और AI इकोसिस्टम में निवेश करने में जल्दबाजी से बचना चाहिए?

हैं, धैर्य रखना सही रहेगा,लेकिन यह धैर्य भी हकीकत पर आधारित होना चाहिए। भारतीय IT सर्विस कंपनियां AI साइकिल के एक मुश्किल दौर में हैं। AI से जुड़ी मांग बढ़ने और उसकी जगह लेने से पहले ही ऑटोमेशन की वजह से हर प्रोजेक्ट से होने वाली कमाई कम हो जाती है। बड़ी कंपनियों के लिए FY27 का कमजोर गाइडेंस (यानी ‘कांस्टेंट-करेंसी’के आधार पर कम सिंगल-डिजिट ग्रोथ) इसी बात को दिखाता है।

टेक्नोलॉजी कंपनियों को डील मिलने की रफ़्तार अच्छी बनी हुई है,लेकिन कीमतों का दबाव और प्रोडक्टिविटी में कमी की वजह से निकट भविष्य में अर्निंग्स की रफ़्तार सीमित रह सकती है। ऐसे में मजबूत कंपनियों में निवेश बनाए रखेंगे,लेकिन रिटर्न की उम्मीदों को कम रखने की सलाह होगी। यह सेक्टर ऐसा है जिसका साइकल बदल रहा है। ऐसे में अभी इसमें सोच समझकर निवेश बनाए रखना चाहिए और बहुत ज्यादा निवेश करने से बचाना चाहिए।

क्या आपको उम्मीद है कि अगले 6-9 महीनों में भारतीय इक्विटी मार्केट नई ऊंचाई पर पहुंचेंगे?

ऐसा हो सकता है,लेकिन हमें इसे ‘बेस केस'(सबसे ज्यादा संभावित स्थिति) नहीं मानना चाहिए। निफ्टी अभी भी अपने पीक (उच्चतम स्तर)से काफी नीचे 24,000 के आसपास है और मोमेंटम इंडिकेटर पक्के भरोसे के बजाय दुविधा की ओर इशारा कर रहे हैं। नई ऊंचाई तक पहुंचने के लिए जरूरी है कि अर्निंग,वैल्यूएशन के बराबर हो और ग्लोबल वोलैटिलिटी कम हो। लेकिन इस समय इसकी कोई गारंटी नहीं है।

अगले छह से नौ महीनों में बाजार के एक सीमित दायरे में रहने और खास स्टॉक्स पर फोकस्ड रहने की ज्यादा संभावना है। अगर कंपनियों की अर्निंग अच्छी रही,तो दूसरी छमाही में बाजार धीरे-धीरे ऊपर जा सकता है। हम रिकॉर्ड स्तर तक तेजी से पहुँचने की उम्मीद करने के बजाय,इस धीरे-धीरे होने वाले सुधार के हिसाब से अपनी रणनीति बनाएंगे।

US-Iran के बीच संभावित डील से जुड़ी गतिविधियों के अलावा,आपको आगे चलकर मार्केट के लिए कौन सी बड़ी चुनौतियां दिखती हैं?

बाजार के लिए कई चुनौतियां हैं। इनमें से पहली है, वैल्यूएशन। मार्केट में अभी भी अभी भी कुछ लोग यह मानकर चल रहे हैं सब कुछ एकदम सही तरीके से होगा। ऐसे में अगर अर्निंग उम्मीद के मुताबिक नहीं रही,तो नुकसान से बचने की गुंजाइश बहुत कम होगी। दूसरी,चुनौती बड़ी ग्लोबल टेक और AI सेक्टर में करेक्शन है। अगर विदेशी बाजारों में वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट आती है,तो विदेशी पैसा इमर्जिंग मार्केट (जिनमें भारत भी शामिल है) से बाहर निकल जाएगा। तीसरी चुनौती US में ब्याज दरों में कटौती की रफ्तार और डॉलर की मजबूती को लेकर अभी भी बनी अनिश्चितता है,जिसका सीधा असर FIIs पर पड़ता है।

चौथी चुनौती घरेलू अर्निंग की मजबूती है जहां मार्जिन पर दबाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा ट्रेड पॉलिसी को लेकर भी चिंता बनी हुई है। भारत और अमेरिका के बीच कैसा समझौता होगा,इसको लेकर स्थितियां साफ नहीं हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए बाजार में सावधानी बरतने की सलाह होगी।

क्या आपको लगता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में लंबे समय के लिए स्ट्रक्चरल निवेश के अच्छे मौके हैं?

ये स्ट्रक्चरल मौके तो हैं,लेकिन मैं इन्हें’सबसे अच्छे’कहने से बचने की जरूरत है। कई भारतीय प्लेटफॉर्म्स में मज़बूत नेटवर्क इफेक्ट और आगे बढ़ने की अच्छी गुंजाइश है,फिर भी कई प्लेटफॉर्म बहुत ज्यादा वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं। इस वैल्यूएशन में यह मान लिया जाता है कि इनका काम बिना किसी गलती के होगा,जबकि इनके लिए मुनाफा,रेगुलेशन और कड़ी प्रतिस्पर्धा असल जोखिम बने हुए हैं।

हम उन्हें एक बड़े स्ट्रक्चरल बास्केट के हिस्से के तौर पर देखते हैं,जिसमें मैन्युफैक्चरिंग,बचत का फाइनेंशियलाइज़ेशन और प्रीमियम कंजम्पशन भी शामिल हैं । ये ऐसे थीम हैं जिनकी कमाई की संभावना आज ज्यादा साफ है। लेबल से ज्यादा जरूरी है सही चुनाव करना। हम उन कुछ ऐसे प्लेटफ़ॉर्म में निवेश करेंगे जो साफ तौर पर मुनाफ़ा कमा रहे हैं और ग्रोथ के लिए किसी भी कीमत पर निवेश करने से बच रहे हैं।

 

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डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Prabhjeet Singh: कौन हैं OpenAI के India MD प्रभजीत सिंह, कंधों पर ChatGPT मेकर की ग्रोथ को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी

ChatGPT मेकर OpenAI ने प्रभजीत सिंह को भारत के लिए अपना मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। वह सितंबर 2026 से कंपनी के साथ जुड़ेंगे और भारत में OpenAI के सबसे सीनियर एग्जीक्यूटिव होंगे। प्रभजीत सिंह अभी तक उबर इंडिया एंड साउथ एशिया प्रेसिडेंट थे। कंपनी में एक दशक से ज्यादा समय बिताने के बाद उन्होंने उबर का साथ छोड़ दिया है। उबर में उनकी जगह कौन लेगा, इसकी घोषणा अभी नहीं हुई है।

OpenAI में वह एशिया पैसिफिक (APAC) के मैनेजिंग डायरेक्टर किरण मणि को रिपोर्ट करेंगे और देश में कंज्यूमर ग्रोथ, एंटरप्राइज अडॉप्शन, स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप, रेगुलेटरी मामलों और बिजनेस ऑपरेशन्स जैसे कामकाज संभालेंगे। OpenAI में भारत के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर सिंह के कंधों पर कंज्यूमर और एंटरप्राइज दोनों सेगमेंट में OpenAI की ग्रोथ को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। OpenAI का कहना है कि सिंह ज्यादा कंज्यूमर्स, एंटरप्राइज, शैक्षणिक संस्थानों और पब्लिक सेक्टर संगठनों को AI टेक्नोलॉजी अपनाने में मदद करने पर ध्यान देंगे।

IIT खड़गपुर और IIM-अहमदाबाद के रह चुके हैं छात्र

प्रभजीत सिंह IIT खड़गपुर और IIM-अहमदाबाद के छात्र रह चुके हैं। वह अगस्त 2015 में मैकिन्से एंड कंपनी से उबर में शामिल हुए थे। जुलाई 2020 में उन्हें भारत और साउथ एशिया के लिए कंपनी का प्रेसिडेंट नियुक्त किया गया। सिंह को कॉर्पोरेट लीडरशिप में उनकी शानदार उपलब्धियों के लिए IIM-अहमदाबाद से ‘यंग एलुमनाई अचीवर्स अवार्ड 2022’ मिला था।

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उबर में क्या देखते थे

उबर इंडिया एंड साउथ एशिया प्रेसिडेंट की भूमिका में प्रभजीत सिंह पर भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका में Uber के मोबिलिटी बिजनेस की जिम्मेदारी थी। उन्होंने इस क्षेत्र में Uber के विकास और विस्तार के अगले चरण का नेतृत्व किया।

OpenAI के लिए भारत क्यों अहम

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब OpenAI भारत में अपना निवेश बढ़ा रही है। भारत ChatGPT के लिए सबसे बड़े और तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में से एक बन गया है, जिसे कंज्यूमर्स, स्टार्टअप्स, एंटरप्राइज, डेवलपर्स और शैक्षणिक संस्थानों में बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है। कंपनी ने नवंबर 2025 में नई दिल्ली में अपना पहला ऑफिस खोला था और देश भर में तेजी से पार्टनरशिप कर रही है।

Persistent Systems की हो जाएगी जर्मनी की Nagarro, खरीदेगी सारे शेयर; स्टॉक में दिख सकता है बड़ा उछाल

पर्सिस्टेंट सिस्टम्स जर्मनी की डिजिटल इंजीनियरिंग फर्म Nagarro SE के सभी बकाया शेयर 81 यूरो प्रति शेयर की कैश डील में खरीदना चाहती है। इसके लिए कंपनी एक वॉलंटरी पब्लिक टेकओवर ऑफर दे रही है। यह खरीद सब्सिडियरी गैलेक्सी जर्मनी होल्डिंग के जरिए करने का प्लान है। पर्सिस्टेंट सिस्टम्स का कहना है कि डील के अक्टूबर-दिसंबर 2026 या जनवरी-मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। पर्सिस्टेंट को पहले ही Nagarro की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर, Lantano Beteiligungen GmbH का साथ मिल चुका है, जिसने कंपनी में अपनी पूरी 21 प्रतिशत हिस्सेदारी पर्सिस्टेंट को बेचने पर सहमति जताई है।

Nagarro का मैनेजमेंट और सुपरवाइजरी बोर्ड भी इस ट्रांजेक्शन के सपोर्ट में है। फाइनल ऑफर डॉक्यूमेंट का रिव्यू करने के बाद उस पर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। इस ट्रांजेक्शन पर अभी रेगुलेटरी मंजूरियां और जर्मनी के फाइनेंशियल रेगुलेटर BaFin की मंजूरी लिया जाना भी बाकी है। प्रस्तावित अधिग्रहण से Persistent की AI-बेस्ड इंजीनियरिंग और क्लाउड क्षमताएं, Nagarro की यूरोपियन डिजिटल इंजीनियरिंग, ERP और कस्टमर एक्सपीरियंस विशेषज्ञता के साथ आएंगी। इससे एक ऐसी कंपनी बनेगी, जिसका सालाना रेवेन्यू रन रेट लगभग 2.9 अरब डॉलर होगा। इसके 40 से अधिक देशों में 46,000 से अधिक कर्मचारी होंगे।

इस सौदे के लिए फंडिंग बार्कलेज (Barclays) से कमिटेड फाइनेंसिंग के जरिए की जाएगी। यह अधिग्रहण यूरोप में पर्सिस्टेंट सिस्टम्स की मौजूदगी को काफी मजबूत करेगा। इस ट्रांजेक्शन के बाद बनने वाली कंपनी के रेवेन्यू में यूरोप की हिस्सेदारी लगभग 22 प्रतिशत की होगी। नॉर्थ अमेरिका का योगदान लगभग 62 प्रतिशत रहेगा।

Nagarro डीलिस्ट होगी

जर्मनी के म्यूनिख में हेडक्वार्टर वाली Nagarro ने कैलेंडर वर्ष 2025 में लगभग 1 अरब यूरो का रेवेन्यू कमाया। इसके 40 से अधिक देशों में लगभग 18,500 कर्मचारी हैं। कंपनी की ऑटोमोटिव, इंडस्ट्रियल, कंज्यूमर, टेलीकॉम और BFSI सेक्टर में अच्छी मौजूदगी है। डील पूरी होने के बाद पर्सिस्टेंट की योजना नगारो को फ्रैंकफर्ट स्टॉक एक्सचेंज के प्राइम स्टैंडर्ड सेगमेंट से डीलिस्ट करने की है। हालांकि, सौदा पूरा होने के बाद कम से कम दो साल तक डोमिनेशन और प्रॉफिट एंड लॉस ट्रांसफर एग्रीमेंट (DPLTA) करने का कोई इरादा नहीं है।

Persistent Systems का कहना है कि डील के अक्टूबर-दिसंबर 2026 या जनवरी-मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। 

सोमवार को चढ़ सकता है Persistent Systems का शेयर

इस नए डेवलपमेंट से सोमवार, 29 जून को Persistent Systems के शेयर में उछाल आ सकता है। शेयर की वर्तमान कीमत बीएसई पर 4840.45 रुपये है। शेयर 6 महीनों में 24 प्रतिशत गिरा है। कंपनी में मार्च 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 30.29 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। कंपनी का मार्केट कैप 76300 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

12 साल में IIT पास, 24 में PhD और अब AI में करियर, जानिए सत्यम कुमार की कहानी

बिहार के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे सत्यम कुमार ने बचपन से ही अपनी पढ़ाई में असाधारण प्रतिभा दिखाई। किताबों के प्रति उनका लगाव और तेज दिमाग उन्हें बाकी बच्चों से अलग बनाता था। जैसे-जैसे उनकी क्षमता सामने आने लगी, परिवार ने भी उनके सपनों को समझा और उन्हें बेहतर तैयारी के लिए कोटा भेजने का फैसला किया। यही वह मोड़ था, जहां से उनकी मेहनत और संघर्ष की असली शुरुआत हुई। कोटा पहुंचकर उन्होंने पढ़ाई को नई दिशा दी और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए दिन-रात मेहनत की।

सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लगातार आगे बढ़ते रहे। उनकी यही लगन और फोकस आगे चलकर उन्हें बड़ी उपलब्धियों की ओर ले गया और उनकी कहानी आज लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई।

12 साल में IIT पास कर बनाया रिकॉर्ड

सत्यम ने सिर्फ 12 साल की उम्र में IIT-JEE पास कर सबको चौंका दिया और देश के सबसे कम उम्र के IITian बन गए। इसके बाद उन्होंने फिर से परीक्षा दी और AIR 670 हासिल कर अपनी काबिलियत को और मजबूत किया।

IIT कानपुर में बढ़ा ज्ञान और हुनर

बेहतरीन रैंक के साथ उन्होंने IIT कानपुर में एडमिशन लिया। यहां उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसे नए और आधुनिक विषयों में रुचि दिखाई।

24 साल की उम्र में हासिल की पीएचडी

पढ़ाई को आगे बढ़ाते हुए सत्यम अमेरिका गए और केवल 24 साल की उम्र में पीएचडी पूरी कर ली। इस दौरान उन्हें Apple में इंटर्नशिप का भी मौका मिला, जहां उन्होंने AI तकनीक पर काम किया।

आज AI की दुनिया में कर रहे काम

फिलहाल सत्यम कुमार अमेरिका की कंपनी Texas Instruments में मशीन लर्निंग रिसर्च इंजीनियर हैं। वह नई AI तकनीकों को विकसित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

लोगों के लिए बनी प्रेरणा

उनकी कहानी सोशल मीडिया पर लोगों को बहुत प्रेरित कर रही है। यूजर्स उन्हें मेहनत, लगन और टैलेंट का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।

मेहनत से मिली बड़ी सफलता

सत्यम कुमार की यात्रा यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो साधारण पृष्ठभूमि से भी असाधारण सफलता हासिल की जा सकती है।

Tata Motors to sharpen focus on product quality, service

Tata

After spending the past few years expanding its product portfolio and nearly quintupling passenger vehicle volumes, Tata Motors is shifting its focus to an area where it has faced criticism in the past – product quality. “We have to prepare the system proactively rather than reactively,” managing director and CEO Shailesh Chandra said, outlining the company’s strategy to strengthen quality through AI, digital engineering, predictive diagnostics and total quality management (TQM).

  1. Early-life vehicle issues are down by nearly 60 percent
  2. AI-based diagnostics to reduce repair times and repeat failures
  3. Digital twins and virtual testing to strengthen product validation

Quality processes being strengthened

Tata Motors acknowledged that rapid growth and increasing vehicle complexity were among the reasons why its after-sales services and product quality came under stress. The company claims it has already reduced early-life vehicle issues by nearly 60 percent through tighter factory quality gates, improved logistics processes and electronic proof-of-delivery systems.

“There are two stress points as far as [product] quality is concerned. One is steep growth, which leads to the system coming under stress, and the second is new technology,” said Chandra.

Predicting outcomes through AI and digital engineering

The company will expand the use of hardware-in-loop testing, software-in-loop validation and digital twins to validate systems virtually before physical testing. It also plans to use AI and telematics data to identify potential defects earlier and improve manufacturing processes.

Chandra noted that state-of-the-art quality infrastructure across the company’s plants will “enable precision manufacturing” and “leverage data and AI”, especially for early defect identification, outcome prediction and continuous learning.

“We are building the capability to detect early signals, predict outcomes and prevent issues before they manifest,” said Tata Motors PV chief product officer and chief corporate quality officer Mohan Savarkar, adding that digital engineering, diagnostics and software-defined vehicles would enable continuous improvement throughout a vehicle’s lifecycle.

AI to support after-sales operations

The company said TQM will be extended across its engineering, manufacturing, supplier and after-sales operations. It will also introduce AI-based diagnostic tools across its service network to improve fault detection, reduce repair times and minimise repeat failures.

“Going forward, you will have diagnostic tools which are AI-based, which completely map the fault tree and are able to immediately identify the real problem. Therefore, turnaround times become faster and repeat failures reduce,” stated Chandra.

दक्षिण कोरिया सहित जापान, हांगकांग, चीन के शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट, गिफ्ट निफ्टी भी गिरा

गिफ्ट निफ्टी 26 जून को गिरकर बंद हुआ। टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली का असर बड़े एशियाई बाजारों पर पड़ा। अमेरिका बाजार में टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव बढ़ा है। इसका असर 26 जून को दक्षिण कोरिया सहित दूसरे एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। भारतीय शेयर बाजार मुहर्रम की छुट्टी की वजह से 26 जून को बंद रहे। इस बीच, गिफ्ट निफ्टी 0.18 फीसदी यानी 44 अंक गिरकर 24,071 पर बंद हुआ।

टेक्नोलॉजी और AI शेयरों पर दबाव

आर्टफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव दिखा। यह माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शानदार तिमाही नतीजों पर भारी पड़ा। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख पर भी इनवेस्टर्स की नजरें बनी हुई हैं। उधर, क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट को इकोनॉमी के लिए पॉजिटिव माना जा रहा है। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा कम हुआ है।

प्रमुख एशियाई बाजारों में बड़ी गिरावट 

26 जून को एशियाई शेयर बाजारों पर दबाव दिखा। इसकी वजह टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली थी। जापान का निक्केई 4.63 फीसदी क्रैश कर गया। स्ट्रेट टाइम्स में 0.52 फीसदी कमजोरी दिखी। हैंगसेंग 1.79 फीसदी फिसला। कोस्पी 6.17 फीसदी क्रैश कर गया। शंघाई कंपोजिट में भी 2.31 फीसदी की गिरावट आई। दूसरे एशियाई बाजारों में भी दबाव देखने को मिला।

दक्षिण कोरिया का कोस्पी हफ्ते में दूसरी बार क्रैश

दक्षिण कोरिया का बाजार एक समय 9 फीसदी तक फिसल गया था। इस वजह से 20 मिनट के लिए ट्रेडिंग रोक दी गई। इस हफ्ते दूसरी बार कोरिया के प्रमुख सूचकांक कोस्पी में बड़ी गिरावट आई। हालांकि, कारोबार के अंत में यह 6.2 फीसदी गिरकर बंद हुआ। सबसे ज्यादा गिरावट सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और SK Hynix के शेयरों में आई। ये दोनों चिप बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनियां हैं, जिनकी कोस्पी में करीब 60 फीसदी वेटेज है।

यूएस में टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव का असर दूसरे बाजारों पर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिकी शेयर बाजारों में टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में बड़ी गिरावट ने दूसरे बाजारों के टेक्नोलॉजी स्टॉक्स पर भी दबाव बढ़ाया है। 25 जून को भी नैस्डेक में गिरावट देखने को मिली। 26 जून को प्री-मार्केट ट्रेडिंग में माइक्रोन का शेयर करीब 5 फीसदी फिसला। इंटेल और माइक्रो डिवाइसेज के शेयरों में भी 3 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई।

दक्षिण कोरिया का बाजार इस साल सबसे ज्यादा चढ़ा है

इस साल दुनिया के बड़े शेयर बाजारों में आई तेजी की बड़ी वजह टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में निवेशकी की दिलचस्पी रही है। दक्षिण कोरिया के बाजार में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली है। कुछ शेयरों की कीमतें दो गुनी और तीन गुनी तक हो गई हैं। इसकी वजह सेमीकंडक्टर और चिप बनाने वाली कंपनियों में विदेशी निवेशकों की खरीदारी है। अब इन कंपनियों के शेयरों में तेजी जारी रहने को लेकर संदेह जताया जा रहा है।

Kangana Ranaut: ‘माता-पिता को दोषी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि…’, पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस पर कंगना रनौत ने कही ये बड़ी बात

Kangana Ranaut: पुणे के रहने वाले 26 साल के केतन अग्रवाल की मौत के मामले ने एक चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है और सोशल मीडिया पर इस पर काफी चर्चा हो रही है। शुरुआत में इसे एक दुखद हादसा माना जा रहा था क्योंकि खबर थी कि 18 जून को लोहगढ़ किले पर ट्रेकिंग के दौरान वे गिर गए थे, लेकिन अब इस मामले की जांच कथित हत्या के तौर पर की जा रही है।

खबरों के मुताबिक, केतन की मंगेतर सिया गोयल और उनके कथित साथी चेतन चौधरी पर केतन की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। आगे की जांच के लिए दोनों अभी पुलिस की हिरासत में हैं। जैसे-जैसे इस मामले से जुड़ी जानकारियां सामने आ रही हैं, एक्ट्रेस और नेता कंगना रनौत ने इस चौंकाने वाली घटना पर प्रतिक्रिया दी है।

कुछ समय पहले, कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर अपनी बात रखते हुए कहा कि बच्चों के कामों के लिए माता-पिता को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और किसी व्यक्ति के सोशल सर्कल के बढ़ते असर पर भी ज़ोर दिया और कहा कि ये चीज़ें लोगों की सोच, पसंद और व्यवहार को आकार देने में अहम भूमिका निभाती हैं।

सिया गोयल के पिता का बयान शेयर करते हुए कंगना ने लिखा, “आजकल सिर्फ़ परिवारों, घरों या माता-पिता को देखकर आप बच्चों के संस्कारों के बारे में पक्का नहीं कह सकते; ज़्यादा ज़रूरी यह है कि उन्हें कौन ‘प्रोग्राम’ कर रहा है? वे किसके साथ समय बिताते हैं, और सोशल मीडिया, AI या असल ज़िंदगी में उन पर किन चीज़ों का असर है। माता-पिता को दोषी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि लोग एक साथ कई तरह की ज़िंदगी जी रहे हैं।

वे बहुत सोच-समझकर अपनी एक अच्छी छवि बनाते हैं क्योंकि असल बात यह है कि वे कैसे दिखते हैं, न कि वे कैसा महसूस करते हैं या असल में कैसे हैं। इसलिए, बच्चों के कामों के लिए परिवारों को गलत नहीं ठहराया जा सकता।”

इस बीच, सिया गोयल के माता-पिता ने हाल ही में चल रही जांच पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनकी मां ने बताया कि केतन के साथ सिया की शादी तय करने से पहले उन्होंने सिया से पूछा था। उन्होंने इंडिया टुडे को बताया, “सिया की शादी तय करने से पहले हमने उससे बार-बार, कम से कम दस बार पूछा था। हमने उससे कहा, ‘सिया, हम तुम्हारी शादी की योजना बना रहे हैं। क्या तुम्हें केतन पसंद है? क्या तुम इस शादी के लिए आगे बढ़ना चाहती हो?’ हर बार उसने हमसे कहा, ‘हां, मुझे केतन पसंद है’।” हालांकि, उनके माता-पिता ने यह भी कहा कि अगर सिया दोषी पाई जाती है, तो अदालत को न्याय में देरी नहीं करनी चाहिए। उसे वही सज़ा मिलनी चाहिए।

Nothing Phone (3): ट्रांसपेरेंट डिजाइन और धांसू AI फीचर्स के साथ आ रहा है नथिंग का नया स्मार्टफोन, लीक हुई भारत में कीमत!

Nothing Phone 3 vs one plus 12 R

टेक इंडस्ट्री में अपनी अनोखी पहचान बनाने वाली कंपनी Nothing अपने अगले फ्लैगशिप स्मार्टफोन Nothing Phone (3) को भारत में लॉन्च करने के लिए पूरी तरह तैयार है। अगर आप भी नथिंग के सिग्नेचर ट्रांसपेरेंट डिजाइन और नए ग्लिफ इंटरफेस (Glyph Interface) के दीवाने हैं, तो आपके लिए बड़ी खबर है। ALSO READ: जून 2026 के 3 सस्ते स्मार्टफोन्स, 7000mAh बैटरी और गेमिंग परफॉर्मेंस का जबरदस्त कॉम्बो

 

प्रसिद्ध टेक टिपस्टर्स और इंडस्ट्री लीक्स के जरिए इस फोन की प्री-बुकिंग डेट, संभावित कीमत और सभी बड़े स्पेसिफिकेशन्स सामने आ चुके हैं। आइए जानते हैं कि यह नया स्मार्टफोन भारतीय बाजार में पहले से मौजूद दिग्गजों को कितनी कड़ी टक्कर देने वाला है।

 

'Nothing OS 3.0' और धांसू AI फीचर्स का कॉम्बिनेशन

लीक्स की मानें तो Nothing Phone (3) आउट-ऑफ-द-बॉक्स Nothing OS 3.0 पर काम करेगा, जो पूरी तरह से पर्सनलाइज्ड एआई (AI) फीचर्स से लैस होगा। इसमें एक नया AI Glyph Composer मिल सकता है, जो आपके मूड और नोटिफिकेशन के हिसाब से खुद ब खुद बैक पैनल की लाइट्स को कस्टमाइज कर देगा। इसके अलावा, फोटो एडिटिंग के लिए 'AI ऑब्जेक्ट इरेज़र' और रियल-टाइम वॉयस ट्रांसलेशन जैसे फीचर्स भी शामिल किए जा रहे हैं। ALSO READ: 15,000 रुपए में कौन सा फोन है बेस्ट? जानिए टॉप 5 5G स्मार्टफोन

 

कड़ा मुकाबला: Nothing Phone (3) vs OnePlus 12R

भारतीय प्रीमियम मिड-रेंज मार्केट में इस समय OnePlus 12R का दबदबा है। ऐसे में नथिंग अपने नए फोन को सीधे वनप्लस के खिलाफ उतार रहा है। विश्वसनीय टिपस्टर्स के अनुसार दोनों फोन्स की सटीक तुलना नीचे दी गई है:

nothing phone (3) vs one plus 12 R

 

भारत में क्या होगी कीमत और कब शुरू होगी प्री-बुकिंग?

  • संभावित कीमत: टेक एक्सपर्ट्स और मुकुल शर्मा जैसे बड़े टिपस्टर्स के अनुसार, भारत में Nothing Phone (3) के बेस वेरिएंट (8GB RAM + 128GB) की शुरुआती कीमत 42,999 से 44,999 रुपए के बीच हो सकती है। बैंक ऑफर्स के साथ यह और भी कम में मिल सकता है।
  • प्री-बुकिंग और लॉन्च डेट: लीक रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्लिपकार्ट (Flipkart) पर इस फोन का प्री-बुकिंग पेज अगले महीने के पहले हफ्ते में लाइव हो सकता है, जबकि फोन की ऑफिशियल लॉन्चिंग जुलाई 2026 के मध्य में होने की पूरी उम्मीद है।

 

फर्स्ट लुक ओपिनियन (Experience Note): अगर हम लीक हुए रेंडर्स और फर्स्ट लुक को देखें, तो इस बार नथिंग ने इन-हाथ फील (In-hand feel) को बेहतर करने के लिए किनारों को थोड़ा और बेवल (Beveled) किया है। इसके अलावा, कैमरा मॉड्यूल के चारों ओर ग्लिफ एलईडी लाइट्स की संख्या बढ़ाई गई है, जो चार्जिंग प्रोग्रेस को और अधिक बारीकी से दर्शाती है। ALSO READ: Honor करने वाला है धमाका, आने वाला है 10,000mAh बैटरी और 10,000 Nits ब्राइटनेस वाला सस्ता स्मार्टफोन

 

निष्कर्ष: यदि आप एक ऐसा स्मार्टफोन चाहते हैं जो भीड़ से अलग दिखे और जिसमें लेटेस्ट एआई फीचर्स के साथ क्लीन एंड्रॉइड एक्सपीरियंस (No Bloatware) मिले, तो आपको कुछ दिन रुककर Nothing Phone (3) की प्री-बुकिंग का इंतजार जरूर करना चाहिए।