Adani Power Q1 Results: अदाणी पावर को ₹4806 करोड़ का मुनाफा, रेवेन्यू भी रिकॉर्ड स्तर पर

Adani Power Q1 Results: अदाणी ग्रुप की बिजली कंपनी Adani Power ने जून तिमाही में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है। कंपनी का मुनाफा, रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट तीनों रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह देश में रिकॉर्ड बिजली मांग, ज्यादा बिजली बिक्री और बेहतर टैरिफ रही। नतीजों के बाद कंपनी के शेयर में भी अच्छी तेजी देखने को मिली।

मुनाफा और रेवेन्यू में दमदार बढ़त

अप्रैल-जून तिमाही में अदाणी पावर का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 42% बढ़कर ₹4,806 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹3,385 करोड़ था।

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू भी 34% बढ़कर ₹18,902 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹14,109 करोड़ था। वहीं, EBITDA करीब 40% बढ़कर ₹7,948 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। EBITDA मार्जिन भी 40.3% से बढ़कर 42% हो गया।

भीषण गर्मी का फायदा मिला 

इस बार गर्मी ने बिजली की मांग को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया। मई महीने में देश की पीक पावर डिमांड 270.8 गीगावॉट रही। वहीं, जून तिमाही में बिजली की कुल खपत 8.4% बढ़कर 485.4 बिलियन यूनिट हो गई।

इसका सीधा फायदा Adani Power को मिला। कंपनी ने इस तिमाही में 31 बिलियन यूनिट बिजली पैदा की, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। वहीं, बिजली की बिक्री 16.9% बढ़कर 28.8 बिलियन यूनिट रही।

बिजली महंगी बिकी, कमाई बढ़ी

लॉन्ग टर्म PPA के तहत बिजली बिक्री 30% से ज्यादा बढ़कर 24.5 बिलियन यूनिट हो गई। इसके साथ ही औसत टैरिफ 8.5% बढ़कर ₹5.95 प्रति यूनिट पहुंच गया।

मर्चेंट और शॉर्ट टर्म मार्केट में भी कंपनी को बेहतर दाम मिले। यहां औसत टैरिफ 13.1% बढ़कर ₹7.04 प्रति यूनिट रहा। कंपनी ने कहा कि बुटीबोरी और मुतियारा (तूतीकोरिन) जैसे पहले बिना PPA वाले प्लांट्स को नए करार मिलने से भी बिजली बिक्री बढ़ी। इंडियन एनर्जी एक्सचेंज में बिजली की कीमतें बढ़ने का फायदा भी कंपनी को मिला।

कोयला महंगा हुआ, फिर भी बढ़ा मुनाफा

ज्यादा बिजली उत्पादन और आयातित कोयले की ऊंची कीमतों की वजह से ईंधन लागत 30% बढ़कर ₹9,513 करोड़ हो गई। इसके बावजूद कंपनी का मुनाफा बढ़ा। इसकी वजह बेहतर ऑपरेटिंग एफिशिएंसी और फाइनेंस कॉस्ट पर मजबूत नियंत्रण रहा।

इस तिमाही में कंपनी ने ₹1,386 करोड़ की पिछली अवधि की आय भी दर्ज की। वहीं, अतिरिक्त कोयला लागत के बदले ₹898 करोड़ के टैरिफ मुआवजे को भी रेवेन्यू में शामिल किया गया।

विस्तार पर बड़ा दांव

अदाणी पावर के बोर्ड ने ₹15,000 करोड़ तक जुटाने की मंजूरी दी है। यह रकम QIP या दूसरे रास्तों से जुटाई जाएगी। साथ ही कंपनी ने अपनी उधारी सीमा ₹75,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹1 लाख करोड़ करने का प्रस्ताव भी रखा है। इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी लेनी होगी।

Adani Power ने हाल ही में दिवाला प्रक्रिया के तहत Jaiprakash Associates की कई बिजली परिसंपत्तियां भी खरीदी हैं। इनमें 180 मेगावॉट का Churk थर्मल पावर प्लांट, Jaiprakash Power Ventures में 24% हिस्सेदारी और Prayagraj Power Generation Company में 11.49% हिस्सेदारी शामिल हैं।

आगे की क्या है योजना?

अदाणी पावर के CEO एस.बी. ख्यालिया ने कहा कि रिकॉर्ड EBITDA दिखाता है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल मजबूत है। उन्होंने कहा कि Adani Power 45 गीगावॉट उत्पादन क्षमता के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है। इसके साथ ही कंपनी हाइड्रो पावर में विस्तार कर रही है और भविष्य में न्यूक्लियर पावर सेक्टर के अवसरों पर भी नजर बनाए हुए है।

अदाणी पावर के शेयरों का हाल

Adani Power का शेयर बुधवार को शेयर 1.51% गिरकर ₹217.05 पर बंद हुआ। नतीजों के बाद ₹211.90 के निचले स्तर से उछलकर ₹221.70 के इंट्राडे हाई तक पहुंचा था। पिछले 1 साल में स्टॉक ने 83.77% रिटर्न दिया है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Adani Energy Q1 Results: अदाणी ग्रुप की कंपनी का मुनाफा 124% बढ़ा, शेयर ने बनाया नया रिकॉर्ड

Adani Energy Q1 Results: अदाणी ग्रुप की Adani Energy Solutions ने जून तिमाही में दमदार नतीजे पेश किए हैं। मजबूत कमाई के बाद मंगलवार को कंपनी का शेयर करीब 3% चढ़कर ₹1,781.2 के नए रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ मुनाफावसूली भी देखने को मिली।

मुनाफा 124% उछला

अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 124% बढ़कर ₹1,149 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने ₹513 करोड़ का मुनाफा कमाया था।

कंपनी ने इस तिमाही में ₹29 करोड़ की रेगुलेटरी डिफरल इनकम दर्ज की। पिछले साल इसी अवधि में इसी मद में ₹504 करोड़ का खर्च दर्ज हुआ था। इससे भी मुनाफे को अच्छा सहारा मिला।

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 42.4% बढ़कर ₹9,711 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹6,819 करोड़ था।

EBITDA बढ़ा, लेकिन मार्जिन घटा

तिमाही के दौरान EBITDA 30% बढ़कर ₹3,008 करोड़ रहा। पिछले साल यह ₹2,314.5 करोड़ था। हालांकि EBITDA मार्जिन 33.9% से घटकर 31% रह गया।

इन कारोबारों ने दिखाई सबसे तेज रफ्तार

अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के ट्रांसमिशन बिजनेस का रेवेन्यू 52.4% बढ़कर ₹3,335.3 करोड़ हो गया। डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस का रेवेन्यू भी 5% बढ़कर ₹3,520.4 करोड़ रहा।

सबसे तेज बढ़त स्मार्ट मीटरिंग बिजनेस में देखने को मिली। इसका रेवेन्यू 200% से ज्यादा बढ़कर ₹346.9 करोड़ पहुंच गया। वहीं, एनर्जी सॉल्यूशंस प्लेटफॉर्म का रेवेन्यू 9 गुना से ज्यादा बढ़कर ₹1,906.8 करोड़ हो गया। यह इस तिमाही की सबसे बड़ी खासियत रही।

शेयर में आई तेजी

मजबूत नतीजों के बाद निवेशकों ने कंपनी पर भरोसा दिखाया। शेयर कारोबार के दौरान ₹1,781.2 के नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ मुनाफावसूली हुई। यह 0.44% बढ़कर 1,737 रुपये पर बंद हुआ। पिछले एक महीने में शेयर 13% चढ़ चुका है, जबकि साल 2026 में अब तक इसमें 67% की तेजी आ चुकी है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

म्यूचुअल फंड से वेल्थ क्रिएशन के मंत्र, जानिए निफ्टी 50 और Nifty50 Equal Weight में से किसमें निवेश रहेगा फायदेमंद

Nifty 50 से तो हर निवेशक परिचित है,लेकिन क्या हम जानते हैं कि इसी Nifty के 50 शेयरों में निवेश का एक और तरीका भी है,जो पोर्टफोलियो में बेहतर संतुलन ला सकता है? यहां बात हो रही है Nifty50 Equal Weight Index की,जहां बड़ी और छोटी सभी 50 कंपनियों को बराबर वेटेज मिलता है। क्या इससे कंसन्ट्रेशन रिस्क (Concentration Risk) कम होता है? किन बाजार परिस्थितियों में यह रणनीति बेहतर काम करती है? और क्या लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए ये रेगुलर Nifty 50 Index Fund का बेहतर ऑप्शन हो सकता है? आज इन्हीं सवालों के जवाब देने के लिए हमारे साथ हैं एक्सिस AMC में हेड प्रोडक्ट्स दिव्या मेनन

NIFTY50 इक्वल वेट इंडेक्स: इंडेक्स फंड क्यों जरूरी?

दिव्या मेनन ने कहा कि इंडेक्स फंड इक्विटी पोर्टफोलियो की मजबूत नींव बन सकते हैं। इनमें अलग-अलग शेयर चुनने की बजाय पूरे बाजार में निवेश का मौका मिलता है। ये निवेश में अनुशासन लाते हैं और बिहैवियरल बायस (Behavioural Biases) को कम करते हैं। इंडेक्स फंड लंबी अवधि में वेल्थ बनाने का सरल और प्रभावी तरीका होते हैं।

NIFTY50 इक्वल वेट इंडेक्स:निफ्टी से कैसे अलग?

NIFTY50 इक्वल वेट इंडेक्स में वही 50 कंपनियां शामिल होती हैं जो निफ्टी 50 का हिस्सा हैं। फर्क सिर्फ वेटेज देने के तरीके में है। निफ्टी में फ्री-फ्लोट मार्केट कैप पर ज्यादा वेटेज मिलता है। वहीं, NIFTY50 इक्वल वेट इंडेक्स में सभी को बराबर वेटेज होता है। इसमें समय-समय पर रीबैलेंसिंग करके बैलेंस बनाते हैं। यानी इसमें कंपनियों की टीम वही होती है,लेकिन वेटेज तय करने की रणनीति अलग होती है।

NIFTY50 इक्वल वेट इंडेक्स:आजकल चर्चा में क्यों?

निवेशकों का कंसंट्रेशन रिस्क आकलन पर फोकस बढ़ा है। कई मार्केट-कैप इंडेक्स कुछ चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित हैं। ऐसे में Equal Weight रणनीति सभी कंपनियों को एक जैसी अहमियत देती है। पिछले कुछ सालों में इस कैटेगरी में निवेशकों की रुचि बढ़ी है।

NIFTY 50 बनाम NIFTY50 इक्वल वेट इंडेक्स:पोर्टफोलियो में कितना अंतर?

दोनों इंडेक्स में शामिल शेयरों की सूची बिल्कुल एक समान होती है। अंतर केवल वेटेज तय करने के तरीके में होता है। निफ्टी 50 में सबसे बड़ी कंपनी का वेटेज 10% से ज्यादा हो सकता है। निफ्टी 50 में सबसे छोटी कंपनियों का वेटेज 1% से भी कम हो सकता है। Equal Weight Index में हर कंपनी को लगभग 2% का वेटेज मिलता है।

NIFTY50 इक्वल वेट इंडेक्स:कंसंट्रेशन रिस्क कैसे होता है कम?

कंसंट्रेशन रिस्क कम करना NIFTY50 इक्वल वेट इंडेक्स की सबसे बड़ी खासियतों में से एक है। निफ्टी 50 में टॉप 10 शेयरों का वेटेज 50% से अधिक है। इसमें टॉप 10 शेयरों का कुल वेटेज करीब 20% है। इसका रिटर्न चुनिंदा बड़ी कंपनियों के बजाय ज्यादा कंपनियों से प्रभावित होता है। NIFTY50 इक्वल वेट इंडेक्स ने लंबी अवधि में निफ्टी 50 के मुकाबले प्रदर्शन से बेहतर प्रदर्शन किया है।

 

 

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India-UK FTA : 15 जुलाई से लागू होगा भारत-UK के बीच FTA, ब्रिटेन से इंपोर्ट होने वाली कारों पर नोटिफिकेशन जारी

India-UK FTA : भारत-UK के बीच FTA (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट )15 जुलाई से लागू होगा। इस बीच विदेश व्यापार महानिदेशालय (Directorate General of Foreign Trade) ने ब्रिटेन से इंपोर्ट वाली कारों पर लागू होने होने वाले टैरिफ रेट कोटा का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस खबर पर ज्यादा डिटेल्स के साथ सीएनबीसी -आवाज़ के इकोनॉमिक पॉलिसी एडिटर लक्ष्मण रॉय ने बताया कि ब्रिटेन से इंपोर्ट होने वाली कारों पर नोटिफिकेशन जारी किया जा चुका है। DGFT ने टैरिफ रेट कोटा नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। 15 जुलाई से भारत-UK के बीच FTA लागू होगा। इसके तहत पहले साल 20,000 कारें कम ड्यूटी पर इंपोर्ट हो पाएंगी। 3000cc+ से 2500cc+ की 10,000 कारें इंपोर्ट हो सकेंगी। इन कारों पर कस्टम ड्यूटी 110% से घटकर 30% होगी।

1500cc से 3000cc तक की 5,000 कारें इंपोर्ट हो सकेंगी। इन कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी 66% से घटकर 50% होगी। 1500cc इंजन वाली 5,000 कारों पर 50% ड्यूटी लगेगी। 5 साल तक इंपोर्ट कोटा बढ़ेगा फिर 15 साल बाद कम होगा। 15 साल बाद कारों पर 10% कस्टम ड्यूटी लगेगी। पहले साल 2,500 कारें और कमर्शियल व्हीकल इंपोर्ट होंगे। EV हाइब्रिड और हाइड्रोजन कारों पर कोटा 6वें साल से लागू होगा।

लक्ष्मण रॉय ने आगे बताया कि भारत से यूके को होने वाले 99% एक्सपोर्ट पर अलग-अलग चरणों में आगे चलकर कोई ड्यूटी नहीं लगेगी। उल्टा जब यूके का सामान यहां पर आएगा तो हम उसके 91% प्रोडक्ट पर ड्यूटी में रियायत देंगे। भारत से यूके जाने वाले सामानों में कई सारे आइटम बहुत महत्वपूर्ण है। मिसाल के तौर पर टेक्सटाइल गारमेंट पर यूके में 12% की ड्यूटी लगती है। यूके में केमिकल पर 8% की ड्यूटी लगती है। बेस मेटल पर 10% की ड्यूटी लगती है। अब इस एफटीए के लागू होने के बाद इन सारे प्रोडक्ट पर यूके में कोई ड्यूटी नहीं लगेगी। इसी तरह भारत से जाने वाले प्रोसेस्ड फ़ूड पर यूके में 70% की ड्यूटी लगती है। वह भी जीरो हो जाएगी। मरीन प्रोडक्ट पर यूके में 20% की ड्यूटी लगती है। वह भी ज़ीरो हो जाएगी। ऐसे में भारत के इन सारे सेक्टरों को बहुत ज्यादा राहत मिलेगी।

यूके से जो सामान भारत आएगा उसमें दो आइटम काफी अहम हैं। इनमें से एक है स्कॉच व्हिस्की। इस पर भारत में अभी 150% की ड्यूटी लगती है। वो किस्तों में घट करके आपको 40% पे आ जाएगा। यूके मेड इन इंग्लैंड जो कारें वहां से इंपोर्ट होती है उस पर 100% की ड्यूटी लगती है। FTA लागू होने के बाद यह किस्तों में घट कर 10% हो जाएगी।

 

 

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Adani Defence: ₹2500 करोड़ का डिफेंस प्लांट लगाएगा अदाणी ग्रुप, 5000 लोगों को मिलेगा रोजगार

Adani Defence: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रविवार को शिवपुरी में 2,500 करोड़ रुपये के डिफेंस प्लांट की नींव रखी। यह प्लांट अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस लगाएगी, जो अदाणी ग्रुप की कंपनी है।

इस प्लांट में मिसाइल कॉम्प्लेक्स, कॉम्पोजिट प्रोपेलेंट यूनिट और TNT प्लांट बनाया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत मिशन को मजबूती मिलेगी।

आसपास के लोगों को भी मिलेगा फायदा

इस प्रोजेक्ट से हजारों लोगों के लिए रोजगार के मौके बनेंगे। स्थानीय लोगों को भी नौकरियां मिल सकती हैं। इसके अलावा, इलाके के छोटे कारोबार और MSME भी डिफेंस सेक्टर की सप्लाई चेन से जुड़ सकेंगे। इस कार्यक्रम में करण अदाणी और जीत अदाणी भी मौजूद रहे।

जीत अदाणी ने क्या कहा?

Adani Airport Holdings Limited (AAHL) के डायरेक्टर जीत अदाणी ने कहा कि कंपनी भारत में ही रक्षा उपकरण बनाने पर जोर दे रही है। इसके लिए DRDO और तीनों सेनाओं के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। कोशिश है कि रक्षा सामान के लिए विदेशों पर निर्भरता कम हो।

उन्होंने कहा कि ग्वालियर में कंपनी पहले से लाइट मशीन गन (LMG), असॉल्ट राइफल और कार्बाइन बना रही है। जीत अदाणी ने बताया कि कंपनी अब तक भारतीय सेनाओं को 2,000 लाइट मशीन गन दे चुकी है। खास बात यह है कि यह सप्लाई तय समय से 11 महीने पहले पूरी कर ली गई।

शिवपुरी प्लांट में क्या बनेगा?

जीत अदाणी ने कहा कि शिवपुरी में छोटी, मध्यम और लंबी दूरी की मिसाइलों से जुड़ा पूरा इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा। इससे विदेशों से मिसाइल सिस्टम मंगाने की जरूरत कम होगी। भारत में ही इनका निर्माण होगा।

उन्होंने कहा कि यहां सिर्फ मिसाइल जोड़ने का काम नहीं होगा। कॉम्पोजिट प्रोपेलेंट, TNT और विस्फोटक बनाने में इस्तेमाल होने वाला खास सामान भी यहीं तैयार किया जाएगा।

3 साल में तैयार होगा प्लांट

जीत अदाणी ने कहा कि अगले तीन साल में 2,500 करोड़ रुपये की लागत से यह प्लांट तैयार हो जाएगा। इससे करीब 5,000 लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा।

उन्होंने बताया कि 50 से ज्यादा MSME भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ेंगे। ग्वालियर और शिवपुरी मिलकर मध्य प्रदेश में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के बड़े हब बनेंगे। यहां बनने वाले रक्षा उपकरण पूरी तरह भारत में तैयार होंगे।

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 211.29 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और भूमिपूजन भी किया।

*एजेंसी इनपुट के साथ

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Adani Enterprises QIP: अदाणी एंटरप्राइजेज ने लॉन्च किया QIP, 3034 रुपये का फ्लोर प्राइस तय

Adani Enterprises QIP: अदाणी एंटरप्राइजेज ने 2 जुलाई को क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) लॉन्च करने का ऐलान किया। कंपनी ने इसके लिए 3,034.68 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। यह फ्लोर प्राइस कंपनी के मौजूदा बाजार भाव 3,165 रुपये प्रति शेयर से करीब 4% कम है।

इस इश्यू के लिए SBI Capital Markets, Jefferies India, ICICI Securities और IIFL Capital Services को बुक रनिंग लीड मैनेजर (BRLM) बनाया गया है। QIP का अंतिम इश्यू प्राइस इनसे चर्चा के बाद तय होगा।

IHC करेगी $11 अरब का निवेश

इस बीच, अदाणी ग्रुप के लिए एक और बड़ी खबर आई है। अबू धाबी की International Holding Company (IHC) ओडिशा में अदाणी ग्रुप के साथ मिलकर 11.5 अरब डॉलर (करीब 98,000 करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। राज्य सरकार के एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।

अगर यह प्रोजेक्ट तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो यह भारत के मेटल सेक्टर का अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश हो सकता है।

50-50 की हिस्सेदारी वाला जॉइंट वेंचर

दोनों कंपनियों ने इस प्रोजेक्ट के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत IHC और अदाणी ग्रुप की 50-50% हिस्सेदारी होगी।

इस जॉइंट वेंचर के तहत एल्युमिना रिफाइनरी, एल्युमिनियम स्मेल्टर, कैप्टिव पावर प्लांट और डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम मैन्युफैक्चरिंग पार्क बनाया जाएगा। इसके साथ ओडिशा का सबसे बड़ा एल्युमिनियम कॉम्प्लेक्स भी बनेगा। इसकी उत्पादन क्षमता भी काफी ज्यादा होगी।

  • 40 लाख टन (4 MTPA) एल्युमिना
  • 20 लाख टन (2 MTPA) एल्युमिनियम
  • 10 लाख टन (1 MTPA) डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम प्रोडक्ट्स

53,500 लोगों को मिलेगा रोजगार

इस प्रोजेक्ट से बड़े पैमाने पर रोजगार भी पैदा होंगे। राज्य सरकार के अधिकारी के मुताबिक, कुल 53,500 लोगों को रोजगार मिलेगा। इनमें 35,000 नौकरियां निर्माण के दौरान मिलेंगी। प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद 18,500 लोगों को स्थायी रोजगार मिलेगा।

अभी एल्युमिनियम कारोबार में नहीं है अदाणी ग्रुप

अदाणी ग्रुप अभी एल्युमिनियम बनाने के कारोबार में नहीं है। हालांकि, कंपनी पहले ही ओडिशा में एल्युमिना रिफाइनरी और एल्युमिनियम प्रोजेक्ट लगाने की योजना का ऐलान कर चुकी है।

वहीं, अदाणी एंटरप्राइजेज के पास गुजरात में दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट कॉपर स्मेल्टर है। इसे बनाने में करीब 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया गया है।

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