दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल: दिल्ली में बनेगा प्रॉपर्टी आधार कार्ड! जानिए क्या है ये और कैसे करेगा काम

Delhi Land Record Bill 2026: दिल्ली में प्रॉपर्टी और जमीन के मालिकाना हक से जुड़े रिकॉर्ड्स को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने के लिए दिल्ली सरकार एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। दिल्ली सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल, 2026 के तहत दिल्ली की हर संपत्ति को एक खास डिजिटल पहचान दी जाएगी। इसे प्रॉपर्टी आधार कार्ड कहा जा रहा है। इस नए कानून को पारित कराने के लिए दिल्ली विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया जाएगा। इसके बाद पूरी दिल्ली में वैज्ञानिक सर्वे शुरू होगा। इसके माध्यम से हर गांव के घर, जमीन के टुकड़े से लेकर शहरों के फ्लैट्स और कमर्शियल बिल्डिंग्स तक का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

क्या है नया बिल और कैसे होगा सर्वे?

इस कानून के तहत दिल्ली के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को मिलाकर पूरी दिल्ली का वैज्ञानिक सर्वे अनिवार्य किया जाएगा। जमीन और प्रॉपर्टी की सीमाओं मैपिंग ड्रोन से सर्वे करके की जाएगी। इसमें सर्वे ऑफ इंडिया की भी मदद ली जाएगी। अभी अलग-अलग सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों के पास जो रिकॉर्ड्स हैं उन्हें एक ही सिंगल प्लेटफॉर्म पर लेकर आया जाएगा।

बहुमंजिला इमारतों में हर फ्लोर के लिए एक अलग डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, ताकि इसमें इंडिविजुअल यूनिट्स भी शामिल की जा सकें। सरकार को उम्मीद है कि इस पूरी व्यवस्था से प्रॉपर्टी से जुड़े विवादों में कमी आएगी और अदालतों व राजस्व अधिकारियों का बोझ घटेगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस पहल की तुलना लोगों के आधार कार्ड से करते हुए कहा कि दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल, 2026 के माध्यम से दिल्ली की हर संपत्ति को अब एक सुरक्षित और प्रामाणिक डिजिटल पहचान मिलेगी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की स्वामित्व (SVAMITVA) योजना के तहत 30 ग्रामीण गांवों में सफल क्रियान्वयन के अनुभवों के आधार पर इसे पूरी दिल्ली में लागू किया जाएगा। फिलहाल यह विधेयक मंत्रियों के समूह की समीक्षा के बाद मंजूरी की प्रक्रिया से गुजर रहा है और सरकार इसे आगे बढ़ाने के लिए एक विशेष विधानसभा सत्र आयोजित करने की योजना बना रही है।

लाल डोरा क्षेत्रों के लिए क्यों अहम है यह कदम?

लाल डोरा क्षेत्र वे ग्रामीण आवासीय क्षेत्र हैं जिन्हें राजस्व रिकॉर्ड में लाल स्याही से मार्क किया जाता है। इनका इस्तेमाल खेती और गैर खेती दोनों ही उद्देश्यों के लिए होता है और यहां कंस्ट्रक्शन पर कुछ पाबंदियां होती हैं। सीएम रेखा गुप्ता के मुताबिक लाल डोरा क्षेत्रों में लंबे समय से व्यवस्थित और प्रामाणिक संपत्ति रिकॉर्ड का अभाव रहा है। स्वामित्त्व पहल का उद्देश्य इन क्षेत्रों के निवासियों को पहली बार औपचारिक और सत्यापन योग्य दस्तावेज प्रदान करके दशकों पुराने इस अंतर को दूर करना है।

कैसे काम करेगा स्मार्ट प्रॉपर्टी आधार कार्ड?

स्वामित्व योजना के तहत जारी होने वाला यह कार्ड PVC फॉर्मेट में होगा। इसे UIDAI मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इस कार्ड में कई जानकारियां दर्ज की जाएंगी। कार्ड पर एक प्रॉपर्टी आइडेंटिफिकेशन नंबर (PID), जारी करने की तारीख, गांव व जिले का विवरण, कब्जाधारक व परिवार की जानकारी, जमीन का क्षेत्रफल और एक ‘भू-आधार नंबर’ मौजूद होगा। कार्ड पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करने पर संपत्ति का पूरा डिजिटल स्केच, सीमाओं का विवरण, आसपास की संपत्तियों के PID, खसरा नंबर और कानूनी रूप से मान्य सर्टिफिकेट ऑफ ऑक्यूपेंसी लिंक रहेगा।

वैसे सरकार ने अभी यह जानकारी नहीं दी है कि ये प्रॉपर्टी कार्ड स्वयं मालिकाना हक के प्रमाण के रूप में काम करेगा या मौजूदा दस्तावेजों से जुड़े एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन रिकॉर्ड के रूप में। स्वामित्व सत्यापन, त्रुटियों के सुधार और विवादित प्रविष्टियों से संबंधित नियम विधानसभा में बिल पास होने के बाद तय किए जाएंगे।

पायलट प्रोजेक्ट: अब तक कितना हुआ काम?

दिल्ली के 48 ग्रामीण गांवों में से 30 गांवों को इस प्रोजेक्ट के पायलट फेज में शामिल किया गया है। इन गांवों में सर्वे और पहचान का काम पूरा हो चुका है।संबंधित दस्तावेजों को संकलित करते हुए प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जा रहे हैं। अब तक 12232 संपत्तियों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। इनमें से 8423 (लगभग 69 प्रतिशत) संपत्तियां पूरी तरह विवाद-मुक्त पाई गई हैं। दक्षिण और उत्तर-पश्चिम जिलों में सर्वे की गई सभी संपत्तियों के मामलों का शत-प्रतिशत समाधान हो चुका है। इन रिकॉर्ड्स को अंततः दिल्ली ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन इंफॉर्मेशन सिस्टम (DORIS) के साथ रियल-टाइम में इंटिग्रेट किया जाएगा। इन 30 गांवों के अनुभवों के आधार पर पायलट फेज पूरा होते ही इस प्रोजेक्ट का विस्तार पूरी दिल्ली की आवासीय, व्यावसायिक और अन्य श्रेणियों की संपत्तियों पर किया जाएगा।

दिल्लीवासियों को क्या होगा फायदा?

व्यवस्थित रिकॉर्ड न होने की वजह से दिल्लीवासियों को दशकों से मालिकाना हक साबित करने, संपत्ति के लेन-देन, विरासत, बैंक लोन प्राप्त करने, नक्शा पास कराने और अदालती विवादों को सुलझाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। प्रामाणिक डिजिटल रिकॉर्ड बनने से सीमा विवाद खत्म होंगे और नागरिकों को संपत्ति के हस्तांतरण, बैंक ऋण लेने, उत्तराधिकार और मकान का नक्शा पास कराने में काफी आसानी, पारदर्शिता और भरोसा मिलेगा।

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Har Ghar Tiranga 2026: यूपी में 5 करोड़ घरों तक पहुंचेगा अभियान, 14-15 अगस्त को सिनेमाघरों में राष्ट्रगीत-राष्ट्रगान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से 'हर घर तिरंगा' अभियान में बढ़-चढ़कर सहभागिता का आह्वान करते हुए इस वर्ष 5 करोड़ घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि 'हर घर तिरंगा' केवल एक अभियान नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देश के गौरवशाली इतिहास से जन-जन को जोड़ने का राष्ट्रीय अभियान है।

इसे व्यापक जनभागीदारी के साथ जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि 14 और 15 अगस्त को प्रदेश के सभी सिनेमाघरों में राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान का अनिवार्य रूप से प्रसारण सुनिश्चित किया जाए। 

 

शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने 'हर घर तिरंगा' अभियान, स्वतंत्रता दिवस तथा विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के आयोजनों की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने पिछले वर्षों में इस अभियान को अभूतपूर्व जनसहभागिता के साथ सफल बनाकर पूरे देश के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। सभी सरकारी, अर्धसरकारी, सहायता प्राप्त विभाग/संस्थान, स्थानीय निकाय, शैक्षणिक संस्थान, ग्राम पंचायतें, राशन की उचित दर की दुकानें, औद्योगिक एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठान तथा सामाजिक संगठन अपने भवनों पर तिरंगा फहराएं। उन्होंने कहा है कि समन्वित प्रयासों से अभियान अभूतपूर्व सफलता प्राप्त करेगा।

 

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2022 में प्रदेश के 4.10 करोड़ से अधिक, वर्ष 2023 और 2024 में 4.50 करोड़ से अधिक तथा वर्ष 2025 में 4.76 करोड़ घरों पर तिरंगा फहराया गया था। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय ध्वजों के निर्माण, उपलब्धता और वितरण की समुचित व्यवस्था समय से सुनिश्चित की जाए। स्वयं सहायता समूहों, खादी एवं ग्रामोद्योग संस्थाओं, एमएसएमई इकाइयों तथा स्थानीय उत्पादन केंद्रों को अभियान से जोड़ा जाए। राशन की दुकानों, ग्राम पंचायत भवनों, जन सेवा केंद्रों, तहसीलों, विकास खंड कार्यालयों, विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, डाकघरों, पेट्रोल पंपों तथा अन्य निर्धारित केंद्रों के माध्यम से आमजन को राष्ट्रीय ध्वज सहज उपलब्ध कराया जाए।

 

बैठक में बताया गया कि प्रदेशभर में तिरंगा रैली, तिरंगा संगीत समारोह, तिरंगा प्रदर्शनी, तिरंगा विषयक कलाकृतियों की प्रदर्शनी, तिरंगा थीम आधारित रंगोली, प्रकाश सज्जा तथा 'सेल्फी विद तिरंगा' जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रमुख सरकारी भवनों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, हवाई अड्डों, सार्वजनिक स्थलों, प्रमुख बाजारों और चौराहों को तिरंगा थीम पर सजाया जाएगा। विद्यालयों और महाविद्यालयों में स्वतंत्रता सेनानियों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी, वंदे मातरम का गायन, चित्रांकन प्रतियोगिताएं तथा अन्य राष्ट्रभक्ति आधारित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जिससे युवा पीढ़ी स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से जुड़ सके।

 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 9 अगस्त को काकोरी ट्रेन एक्शन दिवस तथा 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के सभी कार्यक्रम पूरे सम्मान, गरिमा और राष्ट्रभक्ति के भाव के साथ आयोजित किए जाएं। 9 से 15 अगस्त तक प्रदेशभर में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े सभी स्मारकों, स्मृति स्थलों और शहीद स्थलों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इन स्थलों की समुचित साफ-सफाई, रंगाई-पुताई, साज-सज्जा एवं प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और अमर शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया जाए। कार्यक्रमों में पुलिस बैंड की सहभागिता भी रहे, जिससे राष्ट्रभक्ति का वातावरण सृजित हो। 

 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन आयोजनों से पूर्व पूरे प्रदेश में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाए। स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों के योगदान को व्यापक रूप से जन-जन तक पहुंचाया जाए। राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रमों, तिरंगा रैलियों, तिरंगा संगीत समारोहों तथा सामूहिक 'वंदे मातरम्' के माध्यम से प्रत्येक नागरिक को अभियान से जोड़ा जाए। ग्राम पंचायतों में अमृत सरोवरों और ग्राम सचिवालयों पर भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। 

 

बैठक में 14 अगस्त को आयोजित होने वाले विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के विभाजन की त्रासदी को केवल इतिहास के एक अध्याय के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने की प्रेरणा के रूप में नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए। ऐसे कार्यक्रम आयोजित हों, जिनसे युवाओं को विभाजन की पीड़ा, लाखों लोगों के विस्थापन और उनके संघर्ष के वास्तविक इतिहास को जानने का अवसर मिले।

 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 14 अगस्त को राजधानी लखनऊ सहित प्रत्येक जिला मुख्यालय पर विभाजन विभीषिका विषयक प्रदर्शनी आयोजित की जाए। प्रत्येक जनपद में नामित मंत्रिगण तथा जनप्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए। पंजाबी, सिंधी और बंगाली सहित विभाजन की त्रासदी से प्रभावित परिवारों को आमंत्रित कर उनके अनुभव साझा कराए जाएं। बांग्लादेश से आए शरणार्थी परिवारों को भी कार्यक्रमों में सहभागी बनाया जाए तथा उनके साथ कैंडल मार्च आयोजित किए जाएं।

विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में परिचर्चाओं, संवादों तथा विचार गोष्ठियों के माध्यम से युवाओं को विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उसके दुष्परिणामों और राष्ट्रीय एकता के महत्व से अवगत कराया जाए। अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए एनसीसी, एनएसएस, स्वयंसेवी संगठनों, व्यापार मंडलों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा विभिन्न संचार माध्यमों का सहयोग लिया जाए, ताकि स्वतंत्रता पर्व के सभी आयोजन व्यापक जनभागीदारी के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हों।

Omkareshwar Darshan 2026 : ओंकारेश्वर में सावन में बदल गई दर्शन व्यवस्था, श्रद्धालु जान लें मंदिर का नया वन-वे रूट

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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में सावन के महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए जिला प्रशासन ने दर्शन और आवागमन की व्यवस्था में बदलाव किया है। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए मंदिर क्षेत्र में एकांगी मार्ग यानी वन-वे सिस्टम लागू किया गया है। अगर आप सावन में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने जा रहे हैं, तो मंदिर पहुंचने से पहले नई व्यवस्था और मार्ग की जानकारी जरूर जान लें। 

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सामान्य श्रद्धालु

पुराने बस स्टैंड से रूट

निर्वाणी अखाड़ा जूता-चप्पल स्टैंड → जेपी चौक → पुराना पुल → रैम्प → गर्भगृह → झूला पुल → स्काईब्रिज → निर्वाणी अखाड़ा।

न्यू बस स्टैंड (दांडी तिराहा) की ओर से रूट

गजानन आश्रम → ब्रह्मपुरी जूता-चप्पल स्टैंड → स्काईब्रिज → जेपी चौक → पुराना पुल → रैम्प → गर्भगृह → झूला पुल → ब्रह्मपुरी जूता-चप्पल स्टैंड -> गजानन आश्रम -> प्रसादालय पार्किंग।

प्रोटोकॉल एवं शीघ्र दर्शन श्रद्धालु

प्रोटोकॉल एवं शीघ्र दर्शन टिकटधारी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निर्वाणी अखाड़ा एवं ब्रह्मपुरी पार्किंग में रिस्टबैंड काउंटर स्थापित किए गए हैं, जहां जूता-चप्पल स्टैंड की भी व्यवस्था है।

पुराने बस स्टैंड से रूट 

निर्वाणी अखाड़ा सेंटर → स्काईब्रिज → झूला पुल → गर्भगृह → झूला पुल → स्काईब्रिज → निर्वाणी अखाड़ा।

न्यू बस स्टैंड से रूट

प्रसादालय पार्किंग  -> गजानन आश्रम → ब्रह्मपुरी पार्किंग सेंटर → झूला पुल → गर्भगृह → झूला पुल → ब्रह्मपुरी पार्किंग सेंटर।

जिला प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से निर्धारित मार्ग व्यवस्था का पालन करते हुए प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है।

क्या है ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में पवित्र नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर, भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह स्थान न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ के ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी एक ऐसी अलौकिक मान्यता भी है, जो भक्तों को विस्मित कर देती है। कहा जाता है कि इस पावन धाम में हर रात स्वयं भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती शयन के लिए आते हैं, और सोने से पहले वे चौपड़ का खेल भी खेलते हैं। यह मान्यता सदियों से चली आ रही है और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है।

 

रात्रि शयन और चौपड़ की दिव्य लीला

ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी सबसे अद्भुत और रहस्यमयी मान्यता यह है कि भगवान शिव तीनों लोकों का भ्रमण करके प्रतिदिन रात को इसी मंदिर में शयन करने आते हैं। उनके साथ माता पार्वती भी होती हैं। भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि रात्रि के समय मंदिर के पट बंद होने के बाद, भोलेनाथ और माता पार्वती यहाँ चौसर (चौपड़) का खेल खेलते हैं।

 

इस मान्यता के चलते, मंदिर में प्रतिदिन रात्रि में पंडित के अलावा किसी को शामिल होने की अनुमति नहीं है। शयन आरती के बाद, गर्भगृह में ज्योतिर्लिंग के सामने चौपड़-पांसे की बिसात सजाई जाती है। सुबह जब मंदिर के पट खुलते हैं, तो कई बार चौसर और उसके पासे कुछ इस तरह से बिखरे मिलते हैं, जैसे रात्रि के समय उन्हें किसी ने खेला हो। यह दृश्य भक्तों के विश्वास को और भी पुख्ता करता है। यह एक ऐसा रहस्य है जिसे विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया है, और यह सिर्फ़ श्रद्धा और आस्था का विषय है।

 

ओंकारेश्वर और ममलेश्वर: एक ही ज्योति का दो रूप

ओंकारेश्वर द्वीप नर्मदा नदी के मध्य में 'ॐ' के आकार में स्थित है, और यहीं पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग विराजमान है। नर्मदा के दक्षिणी तट पर ममलेश्वर मंदिर स्थित है, जिसे प्राचीन काल में अमरेश्वर के नाम से जाना जाता था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने अपने ओंकारेश्वर नामक लिंग के दो भाग किए थे, जिनमें से एक ओंकारेश्वर और दूसरा ममलेश्वर कहलाया। दोनों शिवलिंगों का स्थान भले ही अलग हो, लेकिन उनकी सत्ता और स्वरूप एक ही माना जाता है। शिवपुराण में इन दोनों ज्योतिर्लिंगों की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है।

 

इस स्थान पर ध्यान और पूजा करने से मन को शांति और आध्यात्मिक बल मिलता है। यह माना जाता है कि ओंकारेश्वर में नर्मदा स्नान और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बिना सभी तीर्थ यात्राएं अधूरी मानी जाती हैं। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत आस्था का प्रतीक है, जहाँ लाखों भक्त दूर-दूर से इस चमत्कारिक ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने आते हैं, यह विश्वास लेकर कि यहाँ आने से उनके सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

OnePlus का नया बजट फोन लॉन्च! 7000mAh बैटरी, 120Hz डिस्प्ले से होगा लैस, जानें कीमत

OnePlus Nord N6x: अगर आप कम रेंज में स्मार्टफोन में लेने की सोच रहे हैं तो, OnePlus आपके लिए शानदार फोन लेकर आया है। दरअसल, चीन की स्मार्टफोन निर्माता कंपनी ने भारतीय बाजार में अपना OnePlus Nord N6x लॉन्च कर दिया है। इसमें आपको 7000mAh बैटरी, 6.8 इंच का डिस्प्ले और 120 रिफ्रेश रेट मिलेगा। बता दें कि इस डिवाइस का डिजाइन काफी आकर्षक है। इसके पिछले हिस्से (रियर पैनल) के ऊपरी बाएं कोने में पिल-शेप का कैमरा मॉड्यूल है और बीच में OnePlus की ब्रांडिंग दी गई है। इसके अलावा, इस डिवाइस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें 3.5mm जैक भी दिया गया है, जो लंबे समय से अलग-अलग प्राइस रेंज वाले डिवाइस से गायब था।

भारत में OnePlus N6x की कीमत और उपलब्धता

OnePlus N6x के 4GB RAM और 64GB इंटरनल स्टोरेज वाले वेरिएंट को भारतीय बाजार में ₹19,999 में खरीदा जा सकता है। वहीं, 4GB RAM और 128GB इंटरनल स्टोरेज वाला वेरिएंट ₹20,999 में उपलब्ध है। यह डिवाइस आपको दो कलर ऑप्शन Ice Blue और Burgundy Red में मिलेगा। इस फोन की बिक्री 4 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। ग्राहक इसे OnePlus India की आधिकारिक वेबसाइट और Amazon के जरिए खरीद सकेंगे।

OnePlus N6x के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

OnePlus N6x में 6.8-इंच का IPS LCD डिस्प्ले है, जिसका रिफ्रेश रेट 120Hz और पीक ब्राइटनेस 700 निट्स है। इसमें MediaTek Dimensity 6360 Apex प्रोसेसर लगा है और इसके टॉप वेरिएंट में 4GB RAM और 64GB इंटरनल स्टोरेज मिलती है। यह डिवाइस Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम पर बेस्ड है और इसमें OxygenOS स्किन दी गई है। बता दें कि इस हैंडसेट की बैटरी इसकी एक बड़ी खासियत (USP) हो सकती है, क्योंकि इसमें 7000mAh की बैटरी और 15W वायर्ड चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है।

कैमरे की बात करें तो, निराशा की बात यह है कि OnePlus N6x में सिर्फ एक 13MP का रियर कैमरा है। आप इससे बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं कर सकते, क्योंकि इसमें OIS के बिना सिर्फ एक ही सेंसर है। इसके अलावा, सेल्फी और वीडियो कॉल करने के लिए इस फोन में 5MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है।

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Weather Update : क्या कहता है कल का मौसम, किन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, कहां आंधी-ओलों से बढ़ेगी परेशानी

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Weather Forecast Tomorrow : देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय बना हुआ है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 1 अगस्त को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान की स्थिति बन सकती है। कुछ इलाकों में तेज हवाओं की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।

 

मध्यप्रदेश में 1 अगस्त 2026 के लिए मानसूनी गतिविधियों के चलते भारी बारिश, तेज हवाओं के चलने और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा प्रदेश के 14 जिलों में अचानक बाढ़ आने का खतरा भी जताया गया है और पूरे सूबे के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. मौसम की स्थिति को देखते हुए किसानों, मछुआरों और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है।

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इन 19 राज्यों में बारिश और आंधी का अलर्ट

 

1 अगस्त को उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, असम और अरुणाचल प्रदेश में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत में अगले कुछ दिनों के दौरान छिटपुट से लेकर काफी व्यापक बारिश जारी रहने की संभावना है। कुछ इलाकों में भारी बारिश भी हो सकती है।

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पहाड़ी राज्यों में बढ़ सकती है मुश्किल

 

उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन, सड़क बाधित होने और नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ने का खतरा बना रह सकता है।

 

ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और वहां जाने वाले पर्यटकों को मौसम की स्थिति देखकर ही यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी जाती है।

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पूर्वोत्तर में बाढ़ का खतरा

 

असम और अरुणाचल प्रदेश समेत पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में लगातार बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है। निचले क्षोभमंडल स्तर पर मध्य असम के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है, जो मौसम की गतिविधियों को प्रभावित कर रहा है।

गुजरात से केरल तक भी मौसम सक्रिय

मौसम विभाग के अनुसार तट से दूर बना एक निम्न दबाव क्षेत्र दक्षिणी गुजरात से उत्तरी केरल तक फैले मौसम तंत्र को प्रभावित कर रहा है। इसके चलते पश्चिमी और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।

हर-हर महादेव का उद्घोष, कंधों पर आस्था लिए बढ़ चले शिवभक्त

Kanwar Yatra UP 2026

Kanwar Yatra UP 2026: सावन का पहला दिन, न कोई थकान, न कोई चिंता, बस एक ही धुन, एक ही गूंज ‘बम-बम भोले!’। कंधे पर कांवड़, होठों पर जयकारा और मन में एक अटूट विश्वास कि शिव कल्याण करेंगे। सुबह की पहली किरण के साथ ही शिवालयों में घंटियों की गूंज शुरू हो गई और भक्तों की कतारें मंदिरों के बाहर लंबी होती चली गईं।

उत्तर प्रदेश के कांवड़ मार्ग श्रद्धा-आस्था से प्रकाशमान हो चले हैं। उत्तराखंड की ओर से आनेवाले कांवड़िये यूपी सीमा पर अपने सत्कार से अभिभूत हैं। काशी, अयोध्या और प्रयागराज में भी शिवभक्त लंबी यात्रा की तैयारी में जुटे हैं। सबका भरोसा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पर है जो हर साल ही उनके लिए हर इंतजाम करती आई है। सरकार ने इस बार भी सेवा और सुरक्षा दोनों के इंतजाम कर रखे हैं। 

कंधे का बोझ नहीं, आस्था का प्रसाद है कांवड़

कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, यह त्याग, संयम और समर्पण की एक जीती-जागती मिसाल है। यह तपस्या भगवान शिव के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा का प्रतीक है। रास्ते भर लगे सेवा शिविरों में जैसे ही उनका डेरा पहुंचता है, अनजान हाथ उन्हें पानी का गिलास थमाते हैं। जाति, धर्म और भेद की कोई दीवार नहीं, बस एक ही भाव शेष है, सेवा का भाव। हरिद्वार से 131 लीटर गंगाजल लेकर बागपत की ओर बढ़ रहे कांवड़िया अभिषेक त्यागी की आंखों में गजब की चमक थी। उन्होंने कहा, ‘योगी सरकार ने इस बार कांवड़ यात्रा के लिए बेहतरीन व्यवस्थाएं की हैं। पूरे मार्ग पर सुरक्षा, सफाई, चिकित्सा और सेवा शिविरों की उत्कृष्ट व्यवस्था है। पुलिस की मुस्तैदी से श्रद्धालु निश्चिंत होकर यात्रा कर रहे हैं। इससे हमारी आस्था की यात्रा और अधिक सुगम व सुरक्षित बनी है।‘

नन्हे कदमों में अटूट श्रद्धा

इस यात्रा की सबसे मार्मिक तस्वीरें तब सामने आती हैं जब उम्र की सीमाएं भी आस्था के आगे बौनी पड़ जाती हैं। हरियाणा के कैथल निवासी महज 11 वर्ष के एक बालक ने हरिद्वार से 31 लीटर गंगाजल उठाया और अपने गंतव्य की ओर चल पड़ा। सहारनपुर के गागलहेड़ी क्षेत्र में जब यह नन्हा शिवभक्त पहुंचा, तो उसका उत्साह देखकर स्थानीय थाना प्रभारी और पुलिसकर्मी स्वयं भी उसके साथ काफी दूरी तक चलते हुए उसका हौसला बढ़ाते नजर आए। यह दृश्य ऐसा लगता है जैसे योगी सरकार इस बालक का नमन कर रही हो। कांवड़ यात्रा पूरे समाज का साझा आस्था का उत्सव बन चुकी है, जिसमें प्रशासन भी भक्ति के रंग में रंग गया है।

सेवा शिविरों में बहती स्नेह की धारा

मार्ग में जगह-जगह लगे सेवा शिविर इस यात्रा की आत्मा हैं। मेरठ के पूठखास गांव में शुरू हुए एक ऐसे ही शिविर का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया, जहां कांवड़ियों के लिए भोजन, जल और विश्राम की समुचित व्यवस्था की गई है। ऐसे सैकड़ों शिविर पूरे मार्ग पर सजे हैं, जहां स्वयंसेवक बिना किसी स्वार्थ के दिन-रात सेवा में जुटे हैं। यही निःस्वार्थ सेवा भाव इस यात्रा को केवल एक धार्मिक परंपरा से आगे बढ़ाकर मानवता के एक महान उत्सव में बदला है।

सीमा द्वारों से गुजरते ही होती है अलौकिक अनुभूति

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा पर बने भव्य सीमा द्वार, जिन्हें विशेष रूप से सजाया गया है। यहां मुख्यमंत्री य़ोगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कांवड़ियों का सत्कार हो रहा है। जैसे ही शिवभक्त इन द्वारों से गुजरते हैं, उनके मन में एक अलौकिक अनुभूति जागृत होती है, मानो पूरा उत्तर प्रदेश ही उनकी अगवानी कर रहा हो। यह क्षण हर कांवड़िए के लिए यात्रा की थकान को भुला देने वाला होता है, जहां आस्था अपने चरम पर पहुंच जाती है।

हर कदम में गूंजता एक ही भाव ‘शिवोहम्’

पंचक काल के चलते भले ही अभी कांवड़ियों की संख्या सीमित हो, लेकिन जो भी भक्त निकल पड़े हैं, उनके कदमों में कोई शिथिलता नहीं। वे जानते हैं कि उनकी यह यात्रा केवल गंगाजल ढोने की नहीं, बल्कि स्वयं को शिव तत्व से जोड़ने की है। हर हर महादेव के जयघोष के बीच, धूल भरे रास्तों पर नंगे पांव चलते ये शिवभक्त असल में यह संदेश देते हैं कि सच्ची भक्ति में न मौसम की परवाह होती है, न राह की कठिनाई की, बस मन में एक ही भाव होता है, समर्पण का, ‘शिवोहम्’ का। उन्हें किसी बात की चिंता नहीं। जानते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार ने उनकी सुरक्षा सेवा के हर इंतजाम कर रखे हैं।

यूपी को वैश्विक व्यापार, विनिर्माण और निर्यात का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम होगा UP इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026

UP International Trade Show 2026

UP International Trade Show 2026: उत्तर प्रदेश को वैश्विक व्यापार, विनिर्माण और निर्यात के अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) का चौथा संस्करण आगामी 25 से 29 सितम्बर तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को आयोजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए इसे उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमता, नवाचार, उत्पादों और निर्यात सामर्थ्य को विश्व के समक्ष प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर बताया। 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो ने पिछले तीन संस्करणों में प्रदेश के उत्पादों, उद्यमों और उद्योगों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनाया है। अब यह आयोजन केवल एक व्यापार प्रदर्शनी नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' और 'मेक फॉर द वर्ल्ड' के विजन को आगे बढ़ाने वाला वैश्विक मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश यानी 'अनलिमिटेड पोटेंशियल' का प्रदेश है और यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो इस सामर्थ्य को अनुभव करने का सबसे प्रभावी मंच है। उन्होंने निर्देश दिए कि देश और विदेश में इस आयोजन का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक निवेशक, खरीदार और आगंतुक इसमें सहभागी बनें। 

ट्रेड शो की थीम 'यूपी फॉर ग्लोबल ग्रोथ

बैठक में बताया गया कि इस वर्ष ट्रेड शो की थीम 'यूपी फॉर ग्लोबल ग्रोथ: इनोवेशन, मैन्युफैक्चरिंग एंड एक्सपोर्ट्स' रखी गई है। आयोजन में 2400 से अधिक प्रदर्शकों, 1.50 लाख से अधिक पंजीकृत बी2बी खरीदारों, 4.50 लाख से अधिक बी2सी आगंतुकों तथा 85 देशों से 550 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की सहभागिता का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही 4000 से अधिक एमओयू, ₹3200 करोड़ से अधिक प्रस्तावित एमओयू मूल्य और ₹13,500 करोड़ से अधिक बिजनेस इंक्वायरी होने का अनुमान है। मुख्यमंत्री ने सिंगापुर, ओमान, ऑस्ट्रिया, ब्राजील, थाईलैंड, जापान, इंडोनेशिया और रूस सहित अन्य देशों के साथ भी सक्रिय संवाद स्थापित कर उनकी अधिकाधिक सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 

 

मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि इस बार ओडीओपी, ओडीओसी, एमएसएमई, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी, रक्षा एवं एयरोस्पेस, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र, पर्यटन एवं फिल्म, अक्षय ऊर्जा, ऑटो एवं इलेक्ट्रिक वाहन, फार्मा एवं स्वास्थ्य, कौशल विकास, नागरिक उड्डयन, वित्तीय सेवाएं, स्टार्टअप, लॉजिस्टिक्स, फूड प्रोसेसिंग, हस्तशिल्प, खादी, वस्त्र, चमड़ा, फर्नीचर तथा अन्य प्रमुख क्षेत्रों का व्यापक प्रदर्शन किया जाएगा, जिससे उत्तर प्रदेश की विविध औद्योगिक एवं आर्थिक क्षमता एक ही मंच पर प्रदर्शित होगी। 

नॉलेज सेशन को उपयोगी बनाया जाए

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नॉलेज सेशन को उद्योग जगत, निवेशकों और उद्यमियों के लिए उपयोगी बनाया जाए। इन सत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं साइबर अपराध, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, बैंकिंग एवं वित्त, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, नई श्रम संहिताएं, खाद्य प्रसंस्करण नीति, सड़क सुरक्षा, ई-कॉमर्स, वैश्विक मुक्त व्यापार समझौते, एमएसएमई तथा अन्य समकालीन विषयों पर विशेषज्ञ चर्चा आयोजित की जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि व्यापारिक गतिविधियों के साथ उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी इस आयोजन की पहचान बने। इसके लिए सभी दिनों में शास्त्रीय संगीत, कथक, लोकनृत्य, लोकगायन, भजन, ग़ज़ल तथा अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आकर्षक आयोजन किया जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले अतिथि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता का भी अनुभव कर सकें। 

विदेशों में भारतीय मिशनों के साथ समन्वय

बैठक में यह भी बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को जोड़ने के लिए विदेशों में भारतीय मिशनों के साथ व्यापक समन्वय किया गया है। विभिन्न देशों के खरीदारों से लगातार संपर्क स्थापित किया जा रहा है तथा बायर-सेलर बैठकों के माध्यम से उत्तर प्रदेश के उद्यमियों और निर्यातकों को नए वैश्विक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री ने ट्रेड शो के दौरान उद्यमी मित्रों की तैनाती सुनिश्चित करने तथा स्थानीय विश्वविद्यालयों एवं अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों और युवाओं की सहभागिता बढ़ाने के निर्देश दिए, ताकि आगंतुकों, खरीदारों और उद्यमियों को बेहतर सुविधा एवं सहयोग उपलब्ध कराया जा सके। 

 

बैठक में वर्चुअल माध्यम से जुड़े पुलिस कमिश्नर गौतमबुद्ध नगर ने कार्यक्रम के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन, पार्किंग, वीआईपी आवागमन, सुरक्षा व्यवस्था तथा आमजन की सुविधा के लिए की जा रही तैयारियों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। वहीं ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने आयोजन स्थल पर विकसित की जा रही आधारभूत सुविधाओं एवं अन्य व्यवस्थाओं की प्रगति से भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान आगंतुकों की सुविधा के लिए ईवी बसों का संचालन भी सुनिश्चित किया जाए। 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो केवल व्यापारिक आयोजन नहीं, बल्कि विकसित उत्तर प्रदेश और एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध तैयारियां सुनिश्चित की जाएं, ताकि यह आयोजन उत्तर प्रदेश की औद्योगिक प्रगति, निवेश अनुकूल वातावरण और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का प्रभावी परिचायक बनकर उभरे।

औद्योगिक क्षेत्र विकास योजना की प्रगति की समीक्षा

मुख्यमंत्री ने बैठक में सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र विकास योजना की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्हें बताया गया कि प्रदेश को कौशल विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास का राष्ट्रीय केंद्र बनाने के उद्देश्य से तैयार की जा रही इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 27 मई को अभिरुचि आमंत्रण (ईओआई) जारी किया गया था, जिसमें बीवीजी समूह, टीसीएस और हीरानंदानी समूह ने रुचि दिखाई है।

अधिकारियों की टीम टाटा आईआईएस केंद्रों का अध्ययन कर चुकी है, जबकि टीसीएस ने योजना के तकनीकी भागीदार के रूप में सहयोग देने पर सहमति व्यक्त की है। अब तक 19 जनपदों में लगभग 1320 एकड़ भूमि चिन्हित की जा चुकी है तथा प्रथम चरण में एमएसएमई, यूपीसीडा, जीएनआईडीए, यीडा, यूपीईडा, बीडा और गीडा के माध्यम से 17 केंद्र विकसित किए जाएंगे। बैठक में बताया गया कि योजना के तहत नौ क्षेत्रीय हब एंड स्पोक मॉडल विकसित करते हुए प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण तथा 80 प्रतिशत प्रशिक्षित युवाओं के प्लेसमेंट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

 

मुख्यमंत्री ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करते हुए समयबद्ध ढंग से कार्य आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

यात्री परिवहन विजन समिट 2026: सीएम डॉ. मोहन बदलने जा रहे पब्लिक ट्रांसपोर्ट की दिशा, कई एक्सपर्ट एक साथ करेंगे मंथन, जानें क्या-क्या होगा समिट में?

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पब्लिक ट्रांसपोर्ट की दिशा बदलने जा रहे हैं। यह दिशा एक ओर जहां आम लोगों की जिंदगी बेहतर करेगी, वहीं सरकारी सिस्टम को भी लाभ पहुंचाएगी। दरअसल, 11-12 सितंबर को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 'यात्री परिवहन विजन समिट-2026' का आयोजन होगा। यह समिट मध्यप्रदेश से सार्वजनिक परिवहन के नए भविष्य का निर्माण करेगी। इस समिट में कई विशेषज्ञ परिवहन संबंधित विषयों पर मंथन करेंगे। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समिट का औपचारिक उद्घाटन करेंगे और मध्य प्रदेश यात्री मोबिलिटी विजन 2030 पर संबोधन देंगे। वे मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना और यात्री परिवहन को सुदृढ़ करने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी की भूमिका पर विचार रखेंगे। इसके साथ-साथ सीएम डॉ. मोहन उद्योग जगत के प्रतिनिधियों-निवेशकों और नीति-निर्माताओं के साथ संवाद करेंगे। इस दौरान वे  शिखर सम्मेलन स्मारिका-ज्ञान प्रकाशन का विमोचन भी करेंगे।

 

रणनीतिक साझेदारियों से परिवर्तन की बदलेगी दिशा-बता दें, यह समिट वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, नीति-निर्माताओं, शहरी परिवहन विशेषज्ञों, परिवहन प्राधिकरणों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, ओईएम, वित्तीय संस्थानों और उद्योग जगत के अग्रणी नेताओं को एक मंच पर लाएगी। यह समिट नवाचार, डिजिटल तकनीकों और रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से सार्वजनिक परिवहन में परिवर्तन को नई दिशा देगी। गौरतलब है कि 'यात्री परिवहन विजन समिट 2026' भारत का प्रमुख राष्ट्रीय मंच है। यह मंच स्मार्ट-सुरक्षित-सतत और डिजिटल सार्वजनिक परिवहन के नए युग को गति देने के लिए समर्पित है। यह मंच इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, AI-संचालित फ्लीट प्रबंधन, डिजिटल टिकटिंग, एकीकृत मोबिलिटी समाधान और पीपीपी आधारित नवाचारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श और सहयोग का अवसर देगा।

 

'यात्री परिवहन विजन समिट-2026' के पहले दिन उद्घाटन सत्र, मुख्य वक्तव्य, उच्चस्तरीय पैनल चर्चाएं, उद्योग प्रदर्शनी, नेटवर्किंग सत्र तथा ज्ञान-साझाकरण संबंधी संवाद आयोजित किए जाएंगे। इनमें नीति, नवाचार, निवेश और यात्री परिवहन के भविष्य पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। जबकि, दूसरे दिन प्रतिनिधियों के लिए उज्जैन सांस्कृतिक-विरासत भ्रमण आयोजित किया जाएगा। इसमें श्री महाकालेश्वर मंदिर में महाकाल दर्शन शामिल होगा। इसके माध्यम से मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने के साथ-साथ राज्य की पर्यटन क्षमता को बढ़ावा दिया जाएगा।

 

समिट में इन विषयों पर होगी चर्चा

– एमपी मोबिलिटी विजन 2030: बस संचालन एवं इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम्स (ITMS) में सार्वजनिक-निजी भागीदारी

– भविष्य के लिए तैयार परिवहन अधोसंरचना: पीपीपी के माध्यम से निवेश के अवसरों को बढ़ावा देना

– डेटा आधारित निर्णय: इंट्रासिटी एवं इंटरसिटी बस मार्गों और संचालन की योजना (AI आधारित एनालिटिक्स सहित)

– वित्तीय रूप से टिकाऊ सार्वजनिक बस संचालन के निर्माण की रणनीतियां

– सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में जनसुरक्षा, विश्वसनीयता एवं सुविधा

– हरित मोबिलिटी: स्वच्छ ईंधन एवं भविष्य के लिए तैयार गाड़ियों का काफिला

– एकीकृत टिकटिंग एवं स्वचालित किराया संग्रहण के माध्यम से निर्बाध यात्राओं को सक्षम बनाना

– यात्री परिवहन में रोजगार एवं उद्यमिता के सृजन के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ उठाना

 

इन पर मिल सकते हैं अपेक्षित सकारात्मक परिणाम

– मध्यप्रदेश यात्री मोबिलिटी विजन 2030 के लिए तैयार हो सकता है सकता है रोडमैप

– यात्री परिवहन में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) पहलों में आ सकती है तेजी

– डिजिटल रूपांतरण एवं डेटा-आधारित मोबिलिटी गवर्नेंस को मिल सकता है बढ़ावा

– सतत एवं हरित मोबिलिटी समाधानों में निवेश को मिल सकता है प्रोत्साहन

– वित्तीय स्थिरता एवं गैर-किराया राजस्व सृजन के लिए नवाचारी मॉडलों की हो सकती है पहचान

– सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत एवं प्रौद्योगिकी भागीदारों के बीच बेहतर हो सकता है सहयोग

– केंद्र सरकार की योजनाओं एवं निजी क्षेत्र की भागीदारी से रोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों का हो सकता है सृजन

Tesla Model Y now available with Grok AI

Tesla Model Y L front quarter static

The Tesla Model Y is now available with new artificial intelligence features in India, the most significant being the Grok AI assistant. The new AI features, including Grok assistant integration, are pushed through an over-the-air (OTA) update at no additional cost and “bring conversational intelligence directly into the cabin of every Tesla Model Y in India”.

  1. Grok AI assistant can interact in Hindi, Marathi, Gujarati, Telugu, Tamil, and Kannada
  2. It can be accessed by saying “Hey Grok” or pushing the voice button on the steering wheel

Alongside the announcement of new AI features, Tesla has also announced the commencement of test drives for the Model Y Premium RWD variant across its dealerships in India.

Tesla Model Y with Grok AI assistance: All you need to know

Grok AI assistance allows for easier voice-enabled navigation and vehicle intelligence capabilities

While the Grok AI assistant integration is new for Tesla cars in India, it has been offered internationally since 2025. The American manufacturer has now released the Summer 2026 update, which “enhances the Grok AI Assistant feature with new capabilities” and by which “automatic navigation has expanded beyond home and work to support any destination based on the driver’s personal habits and schedule”. All these features are now available to Model Y customers in India at no extra cost via an OTA update. 

Tesla said that the Grok features can be accessed by saying “Hey Grok” or using the voice button on the steering wheel. The AI assistant can interact in multiple Indian languages, including Hindi, Marathi, Gujarati, Telugu, Tamil, and Kannada. Among all features, Tesla has highlighted that the new AI-based assistant would help plan multi-stop journeys with voice commands, locate nearby Tesla Superchargers, coffee shops, restaurants, hospitals, ATMs and toilets, and explain the various alerts and warnings that pop up on the screens. The Grok AI’s tone, language, and conversational style can be personalised to suit the customer’s preferences.

The Tesla Model Y is offered in India in two trims: a 5-seater Premium RWD and a 7-seater L Premium AWD, priced from Rs 50.89 lakh to Rs 61.99 lakh (ex-showroom, India). It rivals the Hyundai Ioniq 5, Kia EV6, and BYD Sealion 7 in India.

Kiara Advani On Toxic: ‘हर एक्टर का ड्रीम होता है…’, बोल्ड सीन्स विवाद के बीच पहली बार ‘टॉक्सिक’ पर बोलीं कियारा आडवाणी

Kiara Advani On Toxic: कियारा आडवाणी इस साल की मोस्ट अवेटेड फिल्मों में से एक ‘टॉक्सिक ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ की रिलीज का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। यश की मुख्य भूमिका वाली यह एक्शन थ्रिलर फिल्म अगस्त में सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

इस बड़ी रिलीज से पहले कियारा ने बताया कि किस बात ने उन्हें इस प्रोजेक्ट के लिए साइन करने के लिए प्रेरित किया। ‘फेमिना’ से बात करते हुए, एक्ट्रेस ने बताया कि वह फिल्म की कई परतों वाली कहानी से तुरंत प्रभावित हो गईं। उन्होंने बताया कि डायरेक्टर गीतू मोहनदास की कहानी सुनाने के अंदाज ने उन पर गहरा असर डाला।

कियारा ने कहा कि एक एक्टर को जिन चीजों की तलाश होता है, वे सब इसमें हैं। वह याद करते हुए कहती हैं कि जब मैंने कहानी सुनी तो मैं काफी शॉक्ड और खुश थी कि यह किरदार कितनी अच्छी तरह से गढ़ा गया था। एक्ट्रेस ने बताया कि इस रोल के लिए जबरदस्त इमोशनल रेंज की जरूरत थी, जिससे उन्हें एक ही किरदार में मजबूती, कमजोरी, पागलपन, संवेदनशीलता और डिटेचमेंट जैसे इमोशन दिखाने का मौका मिला।

एक एक्टर की चाहत वाली हर चीज बताते हुए कियारा ने कहा, “मुझे लगा कि मैं अपने करियर के ऐसे पड़ाव पर पहुंच गई हूं, जहां मुझमें ऐसे किरदार को निभाने का आत्मविश्वास है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया, “मुझे महिलाओं को एक ही तरह के सांचे में ढालना या स्टीरियोटाइप करना पसंद नहीं है। हम उससे कहीं ज्यादा हैं, तो हमारे किरदार ऐसे क्यों नहीं हो सकते?” उन्होंने कहा कि स्क्रीन पर महिलाओं को मजबूत, असल और जटिल किरदारों के तौर पर दिखाया जाना चाहिए।

इसी इंटरव्यू में कियारा ने फिल्म की बड़ी स्टार कास्ट के बारे में भी बात की। उन्होंने अपनी को-स्टार्स नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत की तारीफ की और उनके साथ काम करने के अनुभव को “बेहद फ्रेश” बताया।

उन्होंने कहा, “हर महिला ने फिल्म में अपनी अलग ऊर्जा और पहचान जोड़ी। मुझे लगता है कि दर्शकों को एक ही सिनेमैटिक यूनिवर्स में इतने अलग-अलग महिला किरदारों को देखना पसंद आएगा। सेट पर ऐसे दिन भी थे जब सच में महसूस होता था कि हर कोई कुछ अनोखा बनाने के लिए अपनी लिमिट से आगे बढ़ रहा है। ये वही पल हैं, जो आपको याद दिलाते हैं कि आपको सिनेमा से प्यार क्यों हुआ था।”

यश और गीतू मोहनदास द्वारा लिखित और मोहनदास द्वारा निर्देशित, ‘Toxic A Fairytale for Grown-Ups’ एक एक्शन थ्रिलर फ़िल्म है जो पिता-बेटे की दुश्मनी पर आधारित है। इस मल्टी-लिंगुअल एक्शन थ्रिलर की शूटिंग कन्नड़ और अंग्रेजी में एक साथ की गई है, और इसके डब वर्शन हिंदी, तेलुगु, तमिल, मलयालम और कई अन्य भाषाओं में रिलीज किए जाएंगे।

इसकी टेक्निकल टीम की बात करें तो, नेशनल अवॉर्ड विजेता राजीव रवि सिनेमैटोग्राफर हैं, बैकग्राउंड स्कोर रवि बसरूर ने तैयार किया है और उज्ज्वल कुलकर्णी एडिटर हैं। हॉलीवुड स्टंट डायरेक्टर जेजे पेरी, जो ‘जॉन विक’ फ़्रैंचाइज़ी के लिए जाने जाते हैं, ने नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली जोड़ी अनबारिव और केचा खमफकडी के साथ मिलकर एक्शन सीक्वेंस कोरियोग्राफ किए हैं।

तारीख नोट कर लें! पहले यह फिल्म 19 मार्च, 2026 को रिलीज़ होने वाली थी, फिर इसे 4 जून के लिए बदला गया, और अब ‘Toxic: A Fairytale for Grown-Ups’ दुनिया भर के सिनेमाघरों में 26 अगस्त, 2026 को रिलीज होगी।