फ्रिज में रखते ही गल जाता है धनिया? बस अपनाएं यह एक पेपर टॉवल हैक तो हफ्तों तक रहेगा ताजा

भारतीय रसोई में हरा धनिया सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले हर्ब्ल में से एक है। चटनी और करी से लेकर गार्निशिंग और सलाद तक हर चीज में धनिये का स्वाद डाला जाता है। इतना इस्तेमाल होने के बावजूद धनिया के साथ एक दिक्कत ये है कि ये बहुत जल्दी खराब हो जाता है। गलत तरीके से स्टोर करने पर बाजार से लाने के एक ही दिन के भीतर धनिया मुरझा जाता है और पीला पड़ने लगता है। धनिये की पत्तियों में नमी ज्यादा होती है। ये हवा और गर्मी के संपर्क में आने के बाद इसे तेजी से खराब कर देती है। लेकिन इसे धोने, सुखाने और स्टोर करने के तरीके में थोड़े से बदलाव करके आप धनिये की शेल्फ लाइफ को काफी बढ़ा सकते हैं।

स्टोर करने से पहले धोना और सुखाना है बेहद जरूरी

ज्याजा नमी धनिया के जल्दी खराब होने की सबसे बड़ी वजह है, इसलिए धनिये को फ्रिज में स्टोर करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। स्टोर करने से पहले धनिये की जड़ों को काटकर अलग कर दें। मिट्टी या गंदगी हटाने के लिए पत्तियों को ठंडे पानी से अच्छी तरह धो लें। धोने के बाद धनिये का सारा पानी सुखाना बेहद जरूरी है। एक्स्ट्रा पानी को झटक दें और बची हुई नमी को सुखाने के लिए धनिये को कुछ मिनटों के लिए साफ किचन टॉवल या पेपर टॉवल पर फैला दें। गीले धनिये को सीधे स्टोर करने से वह तेजी से सड़ने लगता है, क्योंकि फंसी हुई नमी फफूंद पैदा करती है।

फ्रिज में स्टोर करने का सबसे बेस्ट ‘पेपर टॉवल हैक

एक बार जब धनिया पूरी तरह से सूख जाए, तो इसे लंबे समय तक ताजा रखने के लिए पेपर टॉवल का इस्तेमाल करें। सूखे हुए धनिये को हल्के हाथों से पेपर टॉवल में लपेटें। इसके बाद इसे किसी एयरटाइट डिब्बे या जिप-लॉक बैग के अंदर रखकर फ्रिज में रख दें। पेपर टॉवल समय के साथ बनने वाली किसी भी नमी को सोख लेता है। इस तरीके से धनिया आमतौर पर दो सप्ताह तक एकदम ताजा रहता है। धनिये के डिब्बे को फ्रिज के वेजिटेबल क्रिस्पर ड्रॉवर में रखना चाहिए। यहां नमी थोड़ी कम होती है।

पानी का इस्तेमाल करके स्टोर करने का तरीका

धनिये को ताजा रखने का एक दूसरा असरदार तरीका इसे फूलों के गुलदस्तेकी तरह रखना है। धनिये के तनों को थोड़े से पानी से भरे जार या ग्लास में रखें। पत्तियों के ऊपर एक ढीला प्लास्टिक बैग ढंक दें और जार को फ्रिज में रख दें। बैक्टीरिया डेवलप होने से को रोकने के लिए हर दो से तीन दिनों में जार का पानी बदलते रहें। यह तरीका धनिये के उन गुच्छों के लिए बहुत अच्छा काम करता है जिनके लंबे तने होते हैं।

लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए ऐसे करें फ्रीज

अगर आप धनिये को बहुत लंबे समय तक के लिए स्टोर करना चाहते हैं, तो इसे फ्रीज भी किया जा सकता है। धनिये को बारीक काटकर थोड़े से पानी या तेल के साथ आइस क्यूब ट्रे में जमा दें। एक बार जब क्यूब्स जम जाएं, तो उन्हें किसी फ्रीजर-सेफ बैग या कंटेनर में डाल दें। यह तरीका खाना पकाने के दौरान काफी काम आता है, क्योंकि इसमें फ्रेश गार्निशिंग की जरूरत नहीं होती। हालांकि जमाया हुआ धनिया देखने में भले ठीक न लगे लेकिन लेकिन करी, दाल और ग्रेवी में इस्तेमाल के लिए इसका स्वाद बरकरार रहता है।

धनिया स्टोर करते समय न करें ये आम गलतियां

धनिये को सुखाए बिना सीलबंद डिब्बे में रखना सबसे आम गलती है, क्योंकि अंदर बंद नमी सड़न को तेज करती है। धनिये को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर छोड़ना खासकर गर्मियों के महीनों में इसकी शेल्फ लाइफ को काफी कम कर देता है। धनिये को सेब और केले जैसे फलों के पास रखने से बचना चाहिए। ये फल एथिलीन गैस छोड़ते हैं, जो हरी पत्तेदार चीजों को जल्दी गला या सुखा देती है।

Independence Day Special: आजादी के साल में सोने में ₹1000 का निवेश आज बढ़कर कितना हुआ होता?

Independence Day Special: भारत 1947 में आजाद हुआ था। तब सोने की कीमत सिर्फ 88.62 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। करीब 80 साल बाद सोने की कीमत 1.51 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम है। इसका मतलब है कि 80 साल में सोने की कीमत 1,711 गुना हो गई है। सवाल है कि अगर किसी ने तब सोने में 1000 रुपये का निवेश किया होता तो आज उसकी वैल्यू कितनी होती?

1947 से अब तक सोने की कीमतें सालाना 9.9 फीसदी बढ़ी हैं

1947 में सोने में 1000 रुपये के निवेश की वैल्यू आज बढ़कर 17.1 लाख रुपये हो गई होती। इसका मतलब है कि इस दौरान सोने की कीमत सालाना करीब 9.9 फीसदी बढ़ी हैं। हालांकि, इस दौरान सोने की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव रहा। किसी खास पीरियड में सोने की कीमतों में नरमी दिखी तो किसी दूसरे पीरियड में ज्यादा तेजी दिखी।

1980 में सोने का भाव 1000 रुपये प्रति 10 ग्राम था

1950 में सोने का भाव 99.18 रुपये प्रति 10 ग्राम था। लेकिन, 1964 में कीमत गिरकर 63.25 रुपये पर आ गई। 1970 में फिर से भाव चढ़कर 184.50 रुपये पर पहुंच गया। 1980 तक भाव 1000 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल को पार कर गया। तब इसका भाव 1,330 रुपये प्रति 10 ग्राम था।

साल 2000 के बाद से सोने की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं

साल 2000 के बाद सोने की कीमतों की रफ्तार काफी तेज रही। 2000-01 में सोने का औसत भाव 4,473.60 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। 2010-11 में यह बढ़कर 19,227.08 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। 2020-21 में सोने का भाव 48,723.22 रुपये पर पहुंच गया। 2024-25 में औसत भाव 75,841.87 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

1970-71 के मुकाबले आज चांदी की कीमत 370 गुना हो गई है

चांदी की बात की जाए तो 1970-71 से इसका आरबीआई का रेट उपलब्ध है। तब एक किलो चांदी की कीमत 536.08 रुपये थी। 14 अगस्त, 2026 को चांदी का भाव 1,98,461 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इसका मतलब है इस दौरान चांदी कीमतें करीब 370 गुना हो गई हैं। सोने और चांदी को दशकों से सुरक्षित निवेश का सबसे भरोसेमंद जरिया माना जाता है।

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सोने और चांदी की कीमतों का कैलकुलेशन PIB और RBI के डेटा के आधार पर

सोने की कीमतों का एतिहासिक डेटा प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो और इंडियन इकोनॉमी पर आरबीआई की हैंडबुक पर आधारित है। आरबीआई इस हैंडबुक में गोल्ड और सिल्वर के प्राइसेज पब्लिश करता है। कीमतों का उपर्युक्त कैलकुलेशन इसी दोनों स्रोतों से उपलब्ध डेटा के आधार पर किया गया है।

1.5 लाख वाला आईफोन अब 1 लाख रुपये से कम! iPhone 17 Pro Max पर जानिए बैंक और एक्सचेंज का ये है बेस्ट ऑफर

iPhone 17 Pro Max Offer: प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए एक शानदार मौका है। एप्पल का फ्लैगशिप स्मार्टफोन iPhone 17 Pro Max (Cosmic Orange, 256 GB) ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट पर बैंक डिस्काउंट और एक्सचेंज ऑफर्स के साथ बेहद कम कीमत पर उपलब्ध है। तमाम ऑफर्स को मिलाकर इस फोन की इफेक्टिव प्राइज 1 लाख रुपये से भी नीचे आ जा रही है।

आइए जानते हैं फ्लिपकार्ट पर मिल रही इस डील की पूरी डिटेल, बैंक डिस्काउंट और एक्सचेंज ऑफर का गणित।

Flipkart पर iPhone 17 Pro Max की कीमत और डिस्काउंट

फ्लिपकार्ट पर iPhone 17 Pro Max के 256 GB स्टोरेज वेरिएंट की मूल लिस्टेड कीमत 149900 रुपये है। फ्लिपकार्ट पर यह फोन 5% के डिस्काउंट के साथ 141900 रुपये की सेलिंग प्राइस पर लिस्टेड है। फ्लिपकार्ट ग्राहकों के लिए 8000 रुपये का एक्स्ट्रा डिस्काउंट भी दिखा रहा है। फ्लिपकार्ट के प्रोडक्ट पेज पर सभी एलिजिबल ऑफर्स लगाने के बाद फोन की सबसे कम इफेक्टिव प्राइज 98300 रुपये हाइलाइट की जा रही है।

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एक्सचेंज ऑफर और बैंक डिस्काउंट से ऐसे मिलेगी बड़ी बचत

फोन की कीमत को 1 लाख रुपये के नीचे लाने में एक्सचेंज ऑफर और बैंक डिस्काउंट की सबसे बड़ी भूमिका है। फ्लिपकार्ट पर दिखाई गई डील के मुताबिक अगर आप अपने पुराने Apple iPhone 16 को एक्सचेंज करते हैं तो आपको 35600 रुपये तक का एक्सचेंज वैल्यू मिल सकता है। ध्यान रहे कि पुराना फोन बदलने पर मिलने वाली फाइनल एक्सचेंज वैल्यू फोन की कंडिशन और एलिजिबिलिटी पर डिपेंड करती है।

इसके अलावा ग्राहकों को Flipkart Axis Bank Credit Card के जरिए भुगतान करने पर 8000 रुपये का सीधा डिस्काउंट दिया जा रहा है। एक्सचेंज बोनस और बैंक डिस्काउंट को 141900 रुपये की बिक्री कीमत के साथ मिलाने पर ग्राहक के लिए ये कीमत 98300 रुपये बैठती है।

iPhone 17 Pro Max के मुख्य फीचर्स और स्पेसिफिकेशंस

बेहतरीन ऑफर्स के साथ आने वाले इस प्रीमियम स्मार्टफोन में कई दमदार फीचर्स दिए गए हैं। इस फोन में 6.9-इंच का बड़ा OLED डिस्प्ले दिया गया है। यह डिवाइस 6-कोर प्रोसेसर वाली पावरफुल A19 चिप से लैस है। फ्लिपकार्ट पर लिस्टेड यह मॉडल 256 GB इनबिल्ट स्टोरेज के साथ आता है। इसमें रियर में ट्रिपल कैमरा सेटअप मौजूद है, जिसमें 48MP + 48MP + 48MP के तीन सेंसर्स दिए गए हैं।

वहीं सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए सामने 18MP का कैमरा मिलता है। फोन को पावर देने के लिए इसमें 4823mAh की बैटरी दी गई है। इसके साथ ही एप्पल की 1 साल की लिमिटेड वारंटी भी मिलती है। अगर आप iPhone 17 Pro Max खरीदने की योजना बना रहे हैं तो एक्सचेंज और बैंक डिस्काउंट का यह कॉम्बिनेशन इसे स्टैंडर्ड 1.41 लाख रुपये की लिस्टेड कीमत की तुलना में काफी सस्ता बना देता है।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना लगातार दूसरे दिन गिरा, चांदी की कीमतें अपरिवर्तित

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 14 अगस्त यानी शुक्रवार को सोने में लगातार दूसरे दिन गिरावट आई। हालांकि, चांदी की कीमतों में स्थिरता रही। सोना 800 रुपये गिरकर 1,56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। चांदी बगैर किसी बदलाव के 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बनी रही।

अंतरराष्ट्रीय बाजार से कमजोर संकेतों का असर

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के कमजोर संकेतों का असर घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर पड़ा। हालांकि, अमेरिका में प्रोड्यूसर प्राइस डेटा उम्मीद के मुकाबले नरम रहे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने में गिरावट की दूसरी वजह मुनाफावसूली रही।

लगातार 7 सत्रों की तेजी के बाद सोने में मुनाफावसूली

13 अगस्त से पहले लगातार सात सत्रों में सोने में तेजी दिखी थी। इससे इसका भाव 12000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा चढ़ गया था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतनी तेजी आने के बाद मुनाफावसूली स्वाभाविक है। इनवेस्टर्स सोने में उछाल के बाद नई खरीदारी करने से हिचक रहे हैं। इसका असर भी सोने की कीमतों पर पड़ा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में नरमी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में हल्की नरमी दिखी। इसका भाव 4,351 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। हालांकि, चांदी में तेजी दिखी। इसका भाव 0.33 फीसदी की तेजी के साथ 64.68 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड की कीमतों में 14 अगस्त को तेजी दिखी। जब तक क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रहेगी, महंगाई बढ़ने का डर बना रहेगा। इससे फेडरल रिजर्व अनुमान से पहले इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है।

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क्रूड में उछाल जारी रहने से महंगाई बढ़ने का डर

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के कोई संकेत नहीं दिखे हैं। इसका सीधा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ रहा है। इस रास्ते ऑयल टैंकर्स की आवाजाही नाममात्र की हो रही है। इससे क्रूड की सप्लाई में कमी दिखी रही है। अगर यह स्थिति बनी रहती है तो क्रूड की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। इसका निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ेगा।

BSNL का धमाकेदार ऑफर! सिर्फ 1 रुपये में अनलिमिटेड कॉलिंग, रोज एक GB डेटा और 100 SMS लेकिन ये है शर्त

सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने अपने ग्राहकों के लिए 1 रुपये वाला प्री-पेड रिचार्ज प्लान फिर से लॉन्च कर दिया है। कुछ समय के लिए पोर्टफोलियो से हटाए जाने के बाद कंपनी ने इसे सभी टेलीकॉम सर्किलों में नए ग्राहकों के लिए दोबारा पेश किया है। इस किफायती रिचार्ज प्लान में 24 दिनों की सर्विस वैलिडिटी के साथ डेटा, एसएमएस और अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग जैसी कई सुविधाएं दी जा रही हैं। अगर आप BSNL का नया सिम लेने की सोच रहे हैं तो लंबे समय के प्लान पर जाने से पहले इस ऑफर के जरिए कंपनी की सेवाओं को बेहद कम लागत में टेस्ट कर सकते हैं।

BSNL का 1 रुपये वाला प्लान: किसे मिलेगा इसका फायदा?

वैसे बीएसएनएल के इस 1 रुपये वाले ऑफर का लाभ उठाने के लिए एक शर्त भी है। यह प्लान सिर्फ और सिर्फ BSNL के नए सब्सक्राइबर्स के लिए ही उपलब्ध है। इस प्लान को एफआरसी (First Recharge Coupon) के रूप में कैटेगराइज किया गया है। इसका मतलब यह है कि ग्राहकों को नया BSNL सिम खरीदने के बाद इसे अपने पहले रिचार्ज के तौर पर इस्तेमाल करना होगा। बीएसएनएल के मौजूदा यूजर्स या पुराने कनेक्शन इस्तेमाल कर रहे ग्राहक इस 1 रुपये वाले ऑफर का फायदा नहीं उठा सकते हैं।

24 दिनों की वैलिडिटी और रोज 1GB डेटा

बीएसएनएल का यह 1 रुपये वाला एफआरसी प्लान 24 दिनों की सर्विस वैलिडिटी के साथ आता है। इस पूरी वैलिडिटी के दौरान ग्राहकों को रोजाना 1GB मोबाइल डेटा दिया जाता है। इस तरह 24 दिनों की पूरी अवधि में सब्सक्राइबर्स को कुल 24GB डेटा मिलता है। कंपनी इस 1 रुपये के एफआरसी प्लान में वॉइस कॉलिंग और मैसेजिंग की बेहतरीन सुविधाएं दे रही है। ग्राहकों को पूरी वैलिडिटी अवधि के दौरान बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग का लाभ मिलता है। इसमें रोजाना 100 मैसेज (SMS) भेजने की सुविधा शामिल है। इस तरह 24 दिनों में ग्राहक कुल 2400 SMS तक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

पुराने और नए 1 रुपये वाले प्लान में क्या बदला है?

वैसे तो प्लान की कीमत 1 रुपये ही रखी गई है, लेकिन इसके फायदों और वैलिडिटी में कंपनी ने बदलाव किए हैं। पुराने 1 रुपये वाले प्लान में ग्राहकों को 30 दिनों की वैलिडिटी और रोजाना 2GB डेटा मिलता था, जिससे कुल 60GB डेटा का बंडल डेटा हो जाता था। दोबारा पेश किए गए नए प्लान में वैलिडिटी को घटाकर 24 दिन और रोजाना मिलने वाले डेटा को घटाकर 1GB कर दिया गया है। अनलिमिटेड कॉलिंग और रोजाना 100 SMS की सुविधा पहले की तरह ही बरकरार रखी गई है।

ICICI Pru ने महिलाओं के लिए लॉन्च किया एक्सक्लूसिव इंश्योरेंस प्लान, जानिए इसकी खास बातें

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस ने महिलाओं के लिए एक खास प्लान लॉन्च किया है। इसका नाम ‘आईसीआईसीआई प्रू आईप्रोटेक्ट स्मार्ट हर’ है। यह एक टर्म प्लान है, जिसे महिलाओं की हेल्थ और बदलती फाइनेंशियल जरूरतों को ध्यान में रख तैयार किया गया है। इस प्लान में 15 फीसदी लाइफ टाइम प्रीमियम डिस्काउंट मिलेगा। साथ ही प्रेग्नेंसी ब्रेक बेनेफिट भी मिलेगा।

इस प्लान में बच्चों के एजुकेशन के लिए बढ़ता इनकम पेआउट ऑप्शन भी है। इसके तहत डेथ बेनेफिट का पेमेंट इनकम के रूप में नॉमिनी को होता है, जो 10 साल के दौरान हर साल 10 फीसदी तक बढ़ता जाता है। इस प्लान में महिलाओं की हेल्थ से जुड़ी खास मैनेजमेंट सर्विसेज शामिल हैं।

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ के चीफ प्रोडक्ट अफसर विकास गुप्ता ने कहा, “भारतीय महिलाएं कई तरह की भूमिकाएं निभाती हैं। इसके चलते उनकी फाइनेंशियल प्लानिंग की जरूरतें अलग हैं। जीवन के अलग-अलग चरण में इनमें बदलाव होता रहता है। ICICI Pru iProtect Smart Her महिला को फुल प्रोटेक्शन देने के मकसद से तैयार किया गया है। साथ ही हेल्थकेयर और वेलनेस से जुड़ी उसकी जरूरतों का भी ध्यान रखा गया है।

इस प्लान के हेल्थ मैनेजमेंट सर्विसेज के तहत महिलाओं को मल्टीपल स्पेशियलिटीज में टेलीकंसल्टेशंस, एनुअल हेल्थ चेक-अप, हेल्थ रिस्क एसेसमेंट, वेलनेस कंटेंट, फॉर्मेसी एंड डायग्नॉस्टिक डिस्काउंट जैसे बेनेफिट्स मिलेंगे। कुल मिलाकर इस प्रोडक्ट में 92,100 रुपये का बेनेफिट्स ऑफर किया गया है।

इस प्लान को ग्राहकों तक आसानी से पहुंचाने के लिए कंपनी अपनी डिजिटल कपैबिलिटी का इस्तेमाल करेगी। इससे ग्राहक आसानी से इस प्लान को खरीद सकेंगे। साथ ही कंपनी का बगैर किसी रुकावट वाला क्लेम प्रोसेस भी उपलब्ध होगा। कंपनी का फोकस यूजर्स के क्लेम सेटलमेंट पर रहा है। FY27 की पहली तिमाही में इसका सेटलमेंट रेशियो 99.3 फीसदी रहा।

इंडियन आर्मी में अग्निवीर बनना गल्फ जाने से बेहतर…जानिए गोरखा भर्ती में अड़ंगा लगाना नेपाल को कैसे पड़ रहा भारी

भारतीय सेना प्रमुख की काठमांडू यात्रा (16 अगस्त) से ठीक पहले नेपाल के पोखरा में पूर्व गोरखा सैनिकों और उनके समर्थकों ने एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया है। इन पूर्व सैनिकों की मुख्य मांग है कि भारत सरकार अपनी अग्निपथ योजना के तहत नेपाली युवाओं को भारतीय सेना में भर्ती करने की प्रक्रिया को तुरंत फिर से शुरू करे। हमारी सहयोगी वेबसाइट फर्स्टपोस्ट के एक एक्सप्लेनर आर्टिकल के मुताबिक यह प्रदर्शन बुधवार को इंडियन एक्स-सर्विसमेन गोरखा ब्रिगेड नेपाल पोखरा द्वारा आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने पोखरा स्टेडियम से कास्की जिले के जिला प्रशासन कार्यालय तक रैली निकाली और बाद में नेपाल की फेडरल गवर्नमेंट को दो सूत्री ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में अग्निवीर भर्ती को तत्काल बहाल करने और अपने नाम में सैनिक शब्द का इस्तेमाल करने वाले पूर्व सैनिक संगठनों का नवीनीकरण करने की मांग की गई है।

प्रदर्शन के दौरान पूर्व सैनिक और उनके परिजन अपने हाथों में बैनर और तख्तियां लिए हुए थे। इन पर ‘अग्निपथ के तहत नेपाली युवाओं को भारतीय सेना में भर्ती करो’, ‘गृह मंत्रालय के पत्र को रद्द करो’ और ‘पूर्व सैनिकों की आवाज सुनो’ जैसे नारे लिखे थे। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए ब्रिगेड के अध्यक्ष कर्नल कृष्ण बहादुर खत्री ने चेतावनी दी कि सुगौली संधि के दौर से चली आ रही 200 साल से भी अधिक पुरानी परंपरा अब खतरे में पड़ गई है। उन्होंने कहा कि सुगौली संधि के बाद भारत में नेपाली युवाओं की भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई थी और यह 207 वर्षों से लगातार जारी थी। भारत द्वारा अग्निपथ योजना लागू किए जाने के बाद नेपाल सरकार ने विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए नेपाली युवाओं को भारतीय सेना में भर्ती होने से रोक दिया है, जिससे सैकड़ों युवाओं के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

नेपाल की ‘रातोपाटी’ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व सैनिकों द्वारा सरकार को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि 50 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले खाड़ी (गल्फ) देशों में जाकर न्यूनतम वेतन पर काम करने की तुलना में भारतीय सेना में नौकरी करना सैकड़ों गुना बेहतर है। अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सेवा के दौरान युवा विभिन्न सुविधाओं के साथ लगभग 45 से 50 लाख रुपये कमा लेते हैं।

क्या है भारत की अग्निपथ योजना?

भारत सरकार ने साल 2022 में सैन्य भर्ती प्रक्रिया में बदलाव लाने के उद्देश्य से अग्निपथ योजना की घोषणा की थी। इस योजना के तहत भारतीय सशस्त्र बलों में अधिकारी रैंक से नीचे (सैनिक, एयरमैन और नाविक) के जवानों को चार साल के कार्यकाल के लिए भर्ती किया जाता है। चार साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद योग्यता और संगठनात्मक जरूरतों के आधार पर अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को 15 साल के स्थायी कमीशन के लिए शामिल किया जाता है, जबकि बाकी 75 प्रतिशत को एकमुश्त राशि देकर सेवामुक्त कर दिया जाता है। इन्हें पेंशन नहीं दी जाती।

अगर किसी अग्निवीर की ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो जाती है तो उनके परिवार को 1 करोड़ रुपये की एकमुश्त राशि और बची हुई सेवा अवधि का पूरा वेतन मिलता है। वहीं दिव्यांगता के मामले में सैन्य सेवा के कारण हुई विकलांगता के प्रतिशत के आधार पर 44 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाता है। इस योजना की घोषणा के समय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि अग्निपथ सशस्त्र बलों के लिए एक गेम चेंजर है और यह सेना को युवा, हाई-टेक और अति-आधुनिक बनाता है। इस योजना का उद्देश्य सशस्त्र बलों में युवा खून को शामिल करना और सेना के वेतन तथा पेंशन बिल को कम करना है।

नेपाल को अग्निपथ योजना पर क्यों थी आपत्ति?

अग्निपथ योजना से पहले भारतीय सेना स्वतंत्रता के समय नेपाल, भारत और ब्रिटेन के बीच साइन की गई त्रिपक्षीय संधि के तहत नेपाली गोरखा सैनिकों की भर्ती करती थी। इस संधि के तहत गोरखा सैनिकों की चार रेजिमेंट (2nd, 6th, 7th और 10th) ब्रिटिश सेना को सौंपी गई थीं। बाकी रेजिमेंट (1st, 3rd, 4th, 5th, 8th और 9th) भारतीय सेना के पास रहीं। आजादी के तुरंत बाद भारत ने 11वीं गोरखा राइफल्स नाम से एक नई रेजिमेंट भी बनाई थी। इस समझौते में भारतीय सेना में सेवारत नेपाली गोरखा सैनिकों के नियम, शर्तें, सेवानिवृत्ति के लाभ और पेंशन तय की गई थी।

रिपोर्टों के मुताबिक किसी भी समय भारतीय सेना में लगभग 32000 से 35000 नेपाली गोरखा सैनिक अपनी सेवाएं देते थे। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक नेपाल में भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों की आबादी लगभग 1.32 लाख है। जब भारत ने अग्निपथ योजना की शुरुआत की तो काठमांडू स्थित नेपाल सरकार ने भारतीय सेना में अपने युवाओं की भर्ती पर रोक लगा दी। नेपाल सरकार का तर्क था कि यह योजना 1947 के त्रिपक्षीय समझौते के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है और भर्ती नियमों में किसी भी बदलाव से पहले नेपाल से चर्चा की जानी चाहिए थी। नेपाली टाइम्स से बातचीत में नेपाल के इतिहासकार प्रत्युष ओंटा ने भी कहा था कि त्रिपक्षीय समझौते का सदस्य होने के नाते भारत सरकार को कोई भी फैसला लेने से पहले नेपाल से राय लेनी चाहिए थी।

गोरखा भर्ती रोकने से नेपाल को क्या हो रहा है नुकसान?

भारतीय सेना में गोरखा भर्ती पर रोक लगाने का नेपाल का फैसला खुद उसी पर भारी पड़ रहा है और देश को इसका बड़ा आर्थिक व सामाजिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जब नेपाली गोरखा भारतीय सेना में सेवा देते थे तो वे हर साल लगभग 1000 करोड़ रुपये का रेमिटेंस अपने घर नेपाल भेजते थे। भारत में नेपाल के पूर्व राजदूत रणजीत राय के मुताबिक यह पैसा नेपाल की अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ा सहारा था।

त्रिभुवन विश्वविद्यालय (काठमांडू) के सेन्ट्रल डिपार्टमेंट ऑफ रूरल डेवलपमेंट स्टडीज के लेक्चरर डॉ. रत्न मणि नेपाल के शोध पत्र ‘द गुरखा रिक्रूटमेंट, रेमिटेंस एंड डेवलपमेंट’ के मुताबिक विदेशी सेनाओं में काम करने वाले गोरखाओं से मिलने वाला रेमिटेंस नेपाल के दूर-दराज गांवों में सामाजिक आधुनिकीकरण और उद्यमिता विकास का एक स्थायी जरिया रहा है। इसके अलावा सेवानिवृत्त गोरखा राइफल्स के जवान दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण सद्भावना कड़ी (का काम करते हैं।

भारतीय सेना में नौकरी के अवसर बंद होने की वजह से नेपाल के कई युवा अब आजीविका के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना की ओर से लड़ने चले गए हैं। काठमांडू सरकार के अनुमान के मुताबिक 200 से अधिक नेपाली युवा पुतिन की सेना में शामिल होने के लिए रूस जा चुके हैं। आपको बता दें कि पूर्व रक्षा प्रमुख (CDS) जनरल अनिल चौहान ने इस मुद्दे पर कहा था कि भारतीय सेना में नेपाली गोरखाओं की भर्ती पर अंतिम फैसला काठमांडू सरकार को ही लेना है। अब यह काठमांडू पर निर्भर करता है कि वह अग्निपथ योजना के तहत अपने सैनिकों को भारतीय सेना में सेवा के लिए भेजता है या नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया था कि नेपाल के नागरिकों के लिए अलग योजना और भारतीय नागरिकों के लिए अलग योजना नहीं हो सकती।

हाथों में कटोरा लेकर आजादी मना रहा 80 साल का पाकिस्तान! कंगाली के ये निशान बयान कर रहे उसके असली हालात

पाकिस्तान को बने करीब 80 साल हो चुके हैं, लेकिन उसकी अर्थव्यवस्था आज भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के कर्ज पर निर्भर है। पिछले कई दशकों में पाकिस्तान को कई बार कर्ज और आर्थिक सुधारों के लिए मदद मिली है। इसके बावजूद देश बार-बार भुगतान संकट में फंसता रहा है और उसे अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए आईएमएफ का सहारा लेना पड़ता है। फिलहाल पाकिस्तान करीब 7 अरब डॉलर के IMF प्रोग्राम के तहत है। वहीं, देश पर सरकारी कर्ज उसकी अर्थव्यवस्था के कुल आकार यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 70 फीसदी है।

सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज और उसका ब्याज चुकाने में खर्च हो जाता है। इसके अलावा, पाकिस्तान ने रक्षा पर अपना खर्च बढ़ाया है, जबकि विकास से जुड़े कामों पर खर्च काफी सीमित है। आईएमएफ के हालिया कार्यक्रम से पाकिस्तान को 2023 के लगभग डिफॉल्ट की स्थिति के बाद अपनी विदेशी मुद्रा का भंडार बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को कुछ हद तक स्थिर करने में मदद मिली है। हालांकि, देश की कई पुरानी आर्थिक समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। इन्हीं समस्याओं के कारण पाकिस्तान को बार-बार आईएमएफ से कर्ज लेना पड़ता है।

पाकिस्तान में टैक्स से होने वाली कमाई कम है, निर्यात का दायरा सीमित है और कर्ज चुकाने में सरकार का बड़ा पैसा चला जाता है। इसके अलावा, ऊर्जा क्षेत्र की हालत भी खराब है और देश अपनी जरूरतों के लिए लगातार विदेशी कर्ज और आर्थिक मदद पर निर्भर रहता है। ऐसे में पाकिस्तान जब अपनी आजादी की 80वीं सालगिरह मना रहा है, तो बड़ा सवाल यह है कि उसे बार-बार आईएमएफ के पास क्यों जाना पड़ता है। साथ ही, कई वर्षों से चल रहे आर्थिक सुधार कार्यक्रम आखिर इस कर्ज के चक्र को खत्म करने में सफल क्यों नहीं हो पाए हैं।

पाकिस्तान 25 बार आईएमएफ के पास जा चुका है

आईएमएफ के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान 1950 में इस संस्था का सदस्य बना था। इसके बाद से वह 25 बार आईएमएफ के साथ अलग-अलग समझौते कर चुका है। इन समझौतों में कई तरह के कर्ज कार्यक्रम शामिल हैं। हालांकि, इनमें से हर कार्यक्रम को आर्थिक संकट से बाहर निकालने वाला बेलआउट पैकेज नहीं कहा जा सकता। फिर भी, बार-बार आईएमएफ की मदद लेने से पता चलता है कि पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक और विदेशी मुद्रा की कमी से जूझता रहा है।

पाकिस्तान का मौजूदा ‘विस्तारित कोष सुविधा’ कार्यक्रम करीब 7 अरब डॉलर का है। इसे सितंबर 2024 में 37 महीने के लिए मंजूरी दी गई थी। इससे पहले 2023 में पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर की ‘स्टैंडबाय व्यवस्था’ मिली थी। उस समय देश का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से कम हो रहा था और पाकिस्तान के कर्ज न चुका पाने यानी डिफॉल्ट का खतरा बढ़ गया था।

आईएमएफ ने मई 2026 में पाकिस्तान के मौजूदा आर्थिक कार्यक्रम की समीक्षा पूरी की। इसके बाद करीब 1.1 अरब डॉलर की एक और कर्ज की किस्त जारी करने को मंजूरी दी गई। आईएमएफ के मुताबिक, अलग ‘लचीलापन और स्थिरता सुविधा’ के तहत मिलने वाली रकम को जोड़ने पर दोनों कार्यक्रमों के तहत पाकिस्तान को अब तक करीब 4.8 अरब डॉलर जारी किए जा चुके थे।

इसी आर्थिक स्थिति के बीच पाकिस्तान अपनी आजादी के 80वें साल में प्रवेश कर रहा है। आईएमएफ के नए कार्यक्रमों से देश को कुछ समय के लिए आर्थिक स्थिरता जरूर मिली है, लेकिन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बार-बार संकट में डालने वाली बुनियादी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।

पाकिस्तान के हालात हैं बेहद खराब

पाकिस्तान की सबसे बड़ी आर्थिक समस्याओं में से एक लगातार विदेशी मुद्रा की कमी रही है। जब देश का आयात खर्च, पुराने कर्ज की किस्तें और दूसरी विदेशी देनदारियां उसकी निर्यात से होने वाली कमाई और विदेश से आने वाली रकम से ज्यादा हो जाती हैं, तो विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ने लगता है। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान को भुगतान संकट से बचने के लिए दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आर्थिक मदद लेनी पड़ती है। पाकिस्तान के आर्थिक इतिहास में यह स्थिति बार-बार देखने को मिली है। हर कुछ साल बाद देश के सामने विदेशी मुद्रा का संकट खड़ा होता है और उसे आईएमएफ से मदद लेनी पड़ती है।

2023 में पाकिस्तान डिफॉल्ट के करीब पहुंच गया था। इसके बाद सितंबर 2024 में आईएमएफ ने उसके लिए एक नया आर्थिक कार्यक्रम मंजूर किया। करीब 7 अरब डॉलर के इस कार्यक्रम का मकसद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को स्थिर करना, विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाना, टैक्स से होने वाली कमाई बढ़ाना, सरकारी कंपनियों में सुधार करना और ऊर्जा क्षेत्र की स्थिति बेहतर करना था। इसके साथ ही, लंबे समय तक टिकाऊ आर्थिक विकास के लिए बेहतर माहौल तैयार करने पर भी जोर दिया गया।

आजादी के 80 साल बाद भी पाकिस्तान का आईएमएफ के एक बड़े कार्यक्रम पर निर्भर रहना बताता है कि देश की कई पुरानी आर्थिक कमजोरियां अब तक दूर नहीं हो पाई हैं।

कछुए की चाल से बढ़ रहा पाकिस्तान

पाकिस्तान की आर्थिक रिकवरी अभी भी बहुत धीमी है। आईएमएफ के जुलाई 2026 के अनुमान के मुताबिक, 2026 में पाकिस्तान की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 3.6 फीसदी रहने की उम्मीद है। वहीं, खुदरा महंगाई करीब 7.2 फीसदी रह सकती है। 2025 में पाकिस्तान की कुल अर्थव्यवस्था का आकार करीब 407.8 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया था। आईएमएफ ने मई 2026 की समीक्षा में कहा था कि वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में पाकिस्तान की आर्थिक विकास दर में सुधार हुआ है। महंगाई भी नियंत्रण में रही और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने की दिशा में उम्मीद से बेहतर काम हुआ। हालांकि, आईएमएफ ने यह भी चेतावनी दी कि मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के सामने आगे भी अनिश्चितता बनी हुई है और जोखिम कम नहीं हुए हैं।

पाकिस्तान का रक्षा खर्च भी बढ़ा

पाकिस्तान की आर्थिक परेशानियों का एक संबंध देश में सेना की बढ़ती राजनीतिक ताकत से भी जोड़ा जा रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को पाकिस्तान की विदेश नीति पर सबसे ज्यादा प्रभाव रखने वाली शख्सियतों में से एक बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उनका प्रभाव अब सिर्फ सैन्य मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े फैसलों में भी उनकी भूमिका बढ़ गई है।

2025 में फील्ड मार्शल बनने के बाद आसिम मुनीर की स्थिति और मजबूत हुई है। इसी बीच, आईएमएफ के आर्थिक कार्यक्रम के तहत वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की जरूरत के बावजूद पाकिस्तान ने अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी की है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पाकिस्तान सरकार ने रक्षा क्षेत्र के लिए 3 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा है। यह पिछले साल की तुलना में करीब 18 फीसदी ज्यादा है। दूसरी ओर, सरकार ने विकास से जुड़े कामों के लिए सिर्फ 1 लाख करोड़ रुपये का संघीय बजट रखा है। इससे साफ है कि आर्थिक दबाव के बावजूद पाकिस्तान में रक्षा खर्च को विकास खर्च की तुलना में ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है।

Voltas Q1 Results: प्रॉफिट 53% बढ़कर ₹214 करोड़, Atomberg के साथ ज्वाइंट वेंचर बनाएगी

Voltas Q1 Results: वोल्टास ने 14 अगस्त को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट 53 फीसदी बढ़कर 214 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने शेयर बाजार बंद होने के बाद नतीजों का ऐलान किया। हालांकि, 14 अगस्त को शेयरों में अच्छी तेजी दिखी। 17 अगस्त को बाजार खुलने पर शेयरों पर नतीजों का असर दिखेगा।

रेवेन्यू 19 फीसदी बढ़कर 4,673 करोड़

Voltas को FY26 की जून तिमाही में 140 करोड़ रुपये का प्रॉफिट हुआ था। FY27 की जून तिमाही में ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू 19 फीसदी बढ़कर 4,673.50 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 3,938.58 करोड़ रुपये था। यह टाटा समूह की कंपनी है, जो एयर कंडिशनर सहित कई तरह के कूलिंग प्रोडक्ट्स बनाती है।

 Atomberg के साथ ज्वाइंट वेंचर का ऐलान

जून तिमाही में कंपनी का EBITDA 48.7 फीसदी बढ़कर 265.5 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 178.5 करोड़ रुपये था। कंपनी का मार्जिन इस दौरान बढ़कर 5.7 फीसदी रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 4.5 फीसदी था। वोल्टास ने Atomberg के साथ ज्वाइंट वेंचर बनाने का ऐलान किया है।

जेवी रूम एयरकंडिशनर्स के कंप्रेशर बनाएगा

कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई जानकारी में कहा है कि एटमबर्ग के साथ प्रस्तावित ज्वाइंट वेंचर रूम एयरकंडिशनर्स के लिए कंप्रेशनर और इससे जुड़े पार्ट्स बनाएगा। जेवी का फोकस हाई एनर्जी एफिशियंसी, ऑपरेशनल रियलाबिलिटी और कॉस्ट कॉम्पिटिटिवनेस पर होगा।

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शेयर 2.52 फीसदी चढ़कर 1,322 रुपये पर बंद

Voltas का शेयर 14 अगस्त को 2.52 फीसदी चढ़कर 1,322 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर 3.70 फीसदी चढ़ा है। 14 अगस्त को शेयर बाजारों पर दबाव दिखा। निफ्टी 0.12 फीसदी और सेंसेक्स 0.09 फीसदी गिरकर बंद हुए। बैंक निफ्टी में भी दबाव दिखा। यह 0.25 फीसदी गिरकर बंद हुआ।

Ekta Kapoor: गौरव खन्ना संग श्रद्धा आर्या की बनी जोड़ी, स्टार प्लस पर एकता कपूर के नए रोमांटिक ड्रामा में आएंगे नजर!

Ekta Kapoor: टीवी एक्टर्स गौरव खन्ना और श्रद्धा आर्या जल्द ही एक नए शो में साथ नजर आ सकते हैं। खबरों के मुताबिक, दोनों एक्टर्स स्टार प्लस के लिए एकता कपूर के आने वाले रोमांटिक फैमिली ड्रामा में लीड रोल निभाने के लिए बातचीत कर रहे हैं। हालांकि यह प्रोजेक्ट अभी शुरुआती स्टेज में है और मेकर्स ने अभी तक कास्ट की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन इस जोड़ी के बारे में सुनकर ही टीवी दर्शकों में उत्सुकता बढ़ गई है। इससे दोनों एक्टर्स की डेली सोप में वापसी होगी।

नया शो किस बारे में है?

टेली मसाला के अनुसार, आने वाली सीरीज को एक रोमांटिक फैमिली ड्रामा के तौर पर प्लान किया जा रहा है, जिसमें रिश्तों और परिवार के आपसी समीकरण कहानी का अहम हिस्सा होंगे। इस प्रोजेक्ट को एकता कपूर के प्रोडक्शन हाउस बालाजी टेलीफ़िल्म्स द्वारा डेवलप किया जा रहा है और माना जा रहा है कि अभी इसकी कास्टिंग चल रही है।

ऐसी भी अटकलें हैं कि नया शो स्मृति ईरानी के शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ की जगह ले सकता है। हालांकि, इसके लॉन्च शेड्यूल या प्रस्तावित टाइम स्लॉट के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ रिपोर्ट्स का कहना है कि इस सीरीज को अक्टूबर 2026 में स्टार प्लस पर लॉन्च करने का प्लान है।

एक्टर्स के बारे में

गौरव खन्ना ‘अनुपमा’ में अनुज कपाड़िया के रोल से घर-घर में मशहूर हुए। इस पॉपुलर डेली सोप से अलग होने के बाद भी, एक्टर रियलिटी टीवी के ज़रिए चर्चा में बने रहे। वह अभी ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ का हिस्सा हैं और इससे पहले ‘बिग बॉस 19’ के विनर भी रह चुके हैं।

खबर है कि श्रद्धा आर्या को इसी शो में फीमेल लीड रोल के लिए सोचा जा रहा है। यह एक्ट्रेस ‘कुंडली भाग्य’ में प्रीता का रोल निभाने के लिए जानी जाती हैं, इस रोल ने उन्हें हिंदी टेलीविज़न का एक जाना-माना चेहरा बना दिया। उन्होंने 2017 से 2024 तक यह रोल निभाया। यह टीवी शो ‘कुमकुम भाग्य’ का स्पिन-ऑफ था और इसे एकता कपूर ने प्रोड्यूस किया था। इसलिए, अगर सब कुछ ठीक रहा, तो एकता के बैनर तले यह उनका दूसरा प्रोजेक्ट होगा।

‘कुंडली भाग्य’ के साथ लंबे समय तक जुड़े रहने के बाद श्रद्धा रेगुलर डेली फिक्शन रोल से दूर रही हैं। एक्ट्रेस की शादी हुई और जुड़वां बच्चे हुए, जिसके बाद उन्होंने ब्रेक लिया। लेकिन, उन्हें कुछ समय के लिए ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ में देखा गया था। अगर कास्टिंग फाइनल हो जाती है, तो यह शो गौरव और श्रद्धा को एक नई टेलीविज़न जोड़ी के तौर पर साथ ला सकता है।

अभी ऑफिशियल अनाउंसमेंट का इंतज़ार है

फिलहाल, यह प्रोजेक्ट अभी डेवलपमेंट स्टेज में है और गौरव खन्ना और श्रद्धा आर्या की कास्टिंग की खबरों की ऑफिशियल पुष्टि नहीं हुई है। न तो एक्टर्स और न ही एकता कपूर या स्टार प्लस ने शो के बारे में कोई अनाउंसमेंट किया है।