राजस्थान के टोंक का इंजीनियर बना आयरलैंड का प्लेयर ऑफ द सीरीज

राजस्थान के टोंक में पैदा हुए जय मुंदड़ा भारत के खिलाफ 11 की औसत से 5 विकेट लेकर मैन ऑफ द सीरीज बन गए। उन्होंने दूसरे टी-20 मैच में 4 ओवर में 32 रन दिए और भारत के शीर्ष क्रम संजू सैमसन (गोल्डन डक), अभिषेक शर्मा (गोल्डन डक) और कप्तान श्रेयस अय्यर को (10 रन 7 गेंदें) को आउट कर मैन ऑफ द मैच का पुरुस्कार भी पाया।

आयरलैंड के लिए पदार्पण करने के बाद मूंदड़ा ने ‘क्रिकेट आयरलैंड’ से कहा, “बाएं हाथ के गेंदबाज के रूप में मेरा कोण मेरी सबसे बड़ी ताकत है। मैं नई गेंद से स्विंग का इस्तेमाल करने, पैड और स्टंप को निशाना बनाने और बल्लेबाज को लगातार असहज करने की कोशिश करता हूं। मेरी कोशिश होती है कि बल्लेबाज मुझे परखने में नाकाम रहे और मैं उनसे गलतियां करवा सकूं।”

अभी तक नहीं छोड़ा भारतीय पासपोर्ट है Work Permit का इंतजार

भारत के खिलाफ मुकाबले में उनकी यह सोच पूरी तरह रंग लाई और उनकी पहली ही गेंद पर भारत के टी20 विश्व कप के नायक संजू सैमसन आउट हो गए। मूंदड़ा ने कहा, “आयरलैंड की भारत पर पहली और ऐतिहासिक जीत का हिस्सा बनना मेरे लिए बेहद खास है। यह पल मैं जीवनभर याद रखूंगा। यह टीम और आयरिश क्रिकेट के लिए गर्व का क्षण है।” आयरलैंड क्रिकेट के साथ हालांकि उनका भविष्य अब भी अनिश्चित है क्योंकि उनका वर्क परमिट जल्द समाप्त हो रहा है और उनके पास केंद्रीय अनुबंध भी नहीं है। ऐसे में वे केवल मैच फीस पर निर्भर हैं। इस प्रदर्शन ने हालांकि यह संकेत जरूर दे दिया है कि आयरलैंड को एक प्रतिभाशाली तेज गेंदबाज मिल सकता है, जो आने वाले समय में टीम का अहम हिस्सा बन सकता है।

B.Tech हैं मुंदड़ा, किया है Intel में काम

वह जब 2021 में डबलिन पहुंचे थे और ‘यूनिवर्सिटी ऑफ डबलिन’ से इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकम्युनिकेशन में एमटेक की पढ़ाई कर रहे थे, तब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट उनके जीवन की प्राथमिकताओं में नहीं था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने इंटेल जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी हासिल की और एक स्थिर पेशेवर जीवन की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने क्रिकेट से दूरी बना ली थी, लेकिन खेल उनसे पूरी तरह कभी दूर नहीं हुआ। दिलचस्प बात यह है कि इस अवधि में उन्होंने अपनी गेंदबाजी शैली भी बदल दी थी और तेज गेंदबाज से बाएं हाथ के स्पिनर के रूप में खुद को ढाल लिया था, साथ ही जरूरत पड़ने पर शीर्ष क्रम में बल्लेबाजी भी करते थे।

क्रिकेट के उनके सफर में असली मोड़ 2024 में आया, जब उन्होंने कॉरपोरेट जीवन को अलविदा कहने के बाद डबलिन स्थित ‘लेइनस्टर क्रिकेट क्लब’ से जुड़कर क्रिकेट को पूरी तरह अपनाने का फैसला किया। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्हें कई तरह के त्याग भी करने पड़े। कई दिनों तक वे डबलिन से बेलफास्ट तक लंबा सफर तय कर सिर्फ अभ्यास सत्रों में हिस्सा लेने पहुंचते थे और देर रात वापस लौटकर फिर अगले दिन इसी दिनचर्या को दोहराते थे। उनके इस जोखिम ने अंततः उनके करियर को सबसे बड़ा इनाम दिया।

राजस्थान के टोंक में परिवार के जश्न का वीडियो वायरल

राजस्थान के टोंक जिले में उनका परिवार आज भी रहता है। यह दुविधा ही कही जा सकती है कि परिवार को भारत बनाम आयरलैंड मैच में भारत का और जब गेंदबाजी करने मुंदड़ा आए तो उनका समर्थन करना पड़ रहा था।  जब उनको मैन ऑफ द सीरीज का अवार्ड दिया गया तो उनके परिवार ने पटाखे फोड़े इस पर पड़ोसियों ने ऐतराज किया क्योंकि मैच भारत हार चुका था। तब उन्होंने समझाया कि वह मुंदड़ा की सफलता के लिए खुश हैं।

CBSE की नई भाषा नीति लागू, जानिए किन छात्रों पर नहीं होंगे नए नियम और किसे पढ़नी होगी अतिरिक्त भारतीय भाषा

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सोमवार को तीन-भाषा नीति (Three-Language Policy) को लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में कक्षा 10 में पढ़ रहे छात्रों पर नई भाषा व्यवस्था लागू नहीं होगी। CBSE ने यह भी कहा कि कक्षा 7, 8 और 9 में पढ़ रहे छात्रों को भी जब वे कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देने की अनिवार्यता नहीं होगी।

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दो विदेशी भाषाएं चुनने वाले छात्रों को मिलेगी राहत

बोर्ड के अनुसार, जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाओं (Foreign Languages) का विकल्प चुना है, उन्हें उसी भाषा संयोजन (Language Combination) के साथ आगे पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, ऐसे छात्रों को इसके साथ एक अतिरिक्त भारतीय भाषा (भारतीय भाषा/Bhartiya Bhasha) का अध्ययन करना अनिवार्य होगा।

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पहले भी दी थी राहत

शुक्रवार को अधिकारियों ने बताया था कि कक्षा 7 से 9 के वे छात्र, जिन्होंने तीन-भाषा नीति के तहत दो विदेशी भाषाओं का चयन किया है, उन्हें कक्षा 10 तक उसी भाषा संयोजन के साथ पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी जाएगी। CBSE के इन नए दिशा-निर्देशों से लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच नई भाषा नीति को लेकर बनी असमंजस की स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।

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समय पर उपलब्ध कराई जाएंगी नई अध्ययन सामग्री

CBSE ने कहा कि संशोधित भाषा नीति के तहत छात्रों के लिए कक्षा-उपयुक्त (Grade-Appropriate) अध्ययन सामग्री तय समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाएगी। बोर्ड का कहना है कि नई भाषा नीति का उद्देश्य भाषा सीखने की प्रक्रिया को अधिक अर्थपूर्ण, रोचक और समृद्ध बनाना है, ताकि छात्रों के समग्र विकास (Holistic Development) को बढ़ावा मिल सके। Edited by : Sudhir Sharma

CBSE की नई भाषा नीति लागू, जानिए किन छात्रों पर नहीं होंगे नए नियम और किसे पढ़नी होगी अतिरिक्त भारतीय भाषा

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सोमवार को तीन-भाषा नीति (Three-Language Policy) को लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में कक्षा 10 में पढ़ रहे छात्रों पर नई भाषा व्यवस्था लागू नहीं होगी। CBSE ने यह भी कहा कि कक्षा 7, 8 और 9 में पढ़ रहे छात्रों को भी जब वे कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देने की अनिवार्यता नहीं होगी।

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दो विदेशी भाषाएं चुनने वाले छात्रों को मिलेगी राहत

बोर्ड के अनुसार, जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाओं (Foreign Languages) का विकल्प चुना है, उन्हें उसी भाषा संयोजन (Language Combination) के साथ आगे पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, ऐसे छात्रों को इसके साथ एक अतिरिक्त भारतीय भाषा (भारतीय भाषा/Bhartiya Bhasha) का अध्ययन करना अनिवार्य होगा।

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पहले भी दी थी राहत

शुक्रवार को अधिकारियों ने बताया था कि कक्षा 7 से 9 के वे छात्र, जिन्होंने तीन-भाषा नीति के तहत दो विदेशी भाषाओं का चयन किया है, उन्हें कक्षा 10 तक उसी भाषा संयोजन के साथ पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी जाएगी। CBSE के इन नए दिशा-निर्देशों से लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच नई भाषा नीति को लेकर बनी असमंजस की स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।

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समय पर उपलब्ध कराई जाएंगी नई अध्ययन सामग्री

CBSE ने कहा कि संशोधित भाषा नीति के तहत छात्रों के लिए कक्षा-उपयुक्त (Grade-Appropriate) अध्ययन सामग्री तय समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाएगी। बोर्ड का कहना है कि नई भाषा नीति का उद्देश्य भाषा सीखने की प्रक्रिया को अधिक अर्थपूर्ण, रोचक और समृद्ध बनाना है, ताकि छात्रों के समग्र विकास (Holistic Development) को बढ़ावा मिल सके। Edited by : Sudhir Sharma

Delhi EV 2.0 policy to take effect from July 1

Tata Curvv EV

The Delhi EV 2.0 policy will be implemented from July 1, 2026, and remain in effect till March 31, 2030. Over this period, the government plans to invest around Rs 15,000 crore to curb vehicular pollution and accelerate the transition towards electric vehicles in the national capital. Investments in charging infrastructure, public transport electrification and supporting infrastructure will be made, Delhi Chief Minister Rekha Gupta said.

Delhi EV 2.0 policy key highlights

The Delhi EV 2.0 policy comprises a 100 percent exemption on road tax and registration charges for electric cars priced up to Rs 30 lakh, something that was proposed earlier in April 2026. It also offers purchase incentives of up to Rs 30,000 for electric two-wheelers, Rs 50,000 for electric three-wheelers and Rs 1 lakh for electric goods vehicles (N1 category). Owners replacing older vehicles will also be eligible for scrapping incentives ranging from Rs 5,000 to Rs 1 lakh.

The policy also aims to expand Delhi’s EV charging network with more than 30,000 charging points across the city. From January 1, 2027, only new electric auto-rickshaws and N1 goods carriers will be registered, while from April 1, 2028, only new electric two-wheelers will be eligible for registration. Notably, all eligible incentives will be transferred directly to beneficiaries’ bank accounts through the direct benefit transfer.

No incentive for hybrid cars

The April draft had also proposed a 50 percent exemption from both road tax and registration fees for strong hybrid vehicles priced up to Rs 30 lakh, but that did not materialise. In fact, incentives for hybrid vehicles was a major sticking point in Delhi’s new EV Policy, but the focus is clearly on EVs. 

A traditional strong hybrid vehicle has an internal combustion engine, which works with an electric motor. Power is supplied to the electric motor via a separate battery, allowing the car to run on electric power alone at certain times, reducing both fuel consumption and pollution. Thus, hybrids have the potential to serve as a practical middle ground, effectively bridging the gap until EV infrastructure improves and charging times become more convenient.

Only electric two-wheelers to be registered in Delhi from April 1, 2028

Ather Rizta tracking shot

The Delhi Cabinet has formally approved the Delhi EV Policy 2026, confirming measures that we had earlier reported were under consideration. The policy comes into effect on July 1, 2026, and will remain in force until March 31, 2030. Its most significant provision for the two-wheeler industry is that only new electric two-wheelers will be eligible for registration in Delhi from April 1, 2028.

  1. Delhi EV Policy 2026 approved; comes into effect July 1, 2026
  2. Only electric two-wheelers to be registered in Delhi from April 1, 2028
  3. Purchase incentives of up to Rs 30,000 for electric two-wheelers

Delhi EV Policy 2026: Key details

Electric auto-rickshaws and N1 goods carriers face an earlier January 2027 deadline

The policy introduces a tiered timeline for transitioning different vehicle categories to electric. Electric auto-rickshaws and N1 goods carriers face an earlier deadline – from January 1, 2027, only new electric versions of these vehicles will be registered in Delhi. The two-wheeler deadline follows on April 1, 2028.

To support the transition, the policy offers purchase incentives of up to Rs 30,000 for electric two-wheelers, Rs 50,000 for electric three-wheelers and up to Rs 1 lakh for electric N1 goods vehicles. Scrappage incentives ranging from Rs 5,000 to Rs 1 lakh are also available for replacing older, more polluting vehicles with electric alternatives. All incentives will be transferred directly to beneficiaries’ bank accounts.

On the infrastructure front, the policy targets the installation of more than 30,000 EV charging points across Delhi.

For India’s two-wheeler industry, the April 2028 deadline marks a significant shift. A Crisil impact assessment published in April projected that the move could increase the share of electric two-wheelers in Delhi’s new vehicle sales to 21-23 percent by FY29 and add nearly 6 lakh electric two-wheelers to national sales volumes, compared to a projected 18-20 percent without the policy. With two-wheelers accounting for nearly 67 percent of Delhi’s registered vehicle stock, Crisil also noted that the capital’s move could encourage other states to adopt similar mandates.

IIP Data: मई में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन की बढ़ी रफ्तार, बिजली और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने दिखाया दम

IIP Data: भारत का इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन मई 2026 में बढ़कर 5.1% हो गया। अप्रैल में यह 4.9% था। इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बिजली और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अच्छी बढ़त की वजह से इंडस्ट्रियल ग्रोथ तेज हुई है। यह आंकड़ा दिखाता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश में घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने संभाली कमान

IIP में सबसे ज्यादा करीब 76% हिस्सेदारी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की है। मई में इस सेक्टर की ग्रोथ 5.5% रही। हालांकि, अप्रैल के मुकाबले इसमें मामूली नरमी रही, लेकिन कुल मिलाकर रफ्तार बनी रही।

इस दौरान इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, फैब्रिकेटेड मेटल, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा।

इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा तेजी

मई में इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट सेक्टर का प्रोडक्शन 20.8% बढ़ा। वहीं, फैब्रिकेटेड मेटल प्रोडक्ट्स में 15.5%, मोटर व्हीकल्स में 14.5%, अन्य ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट में 14.3% और कंप्यूटर व इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स में 11.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे साफ है कि निवेश से जुड़े सेक्टरों में मांग मजबूत बनी हुई है।

बिजली उत्पादन में उछाल

मई में बिजली और गैस सेक्टर का उत्पादन 9.9% बढ़ा। अकेले बिजली उत्पादन में 11.1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसकी बड़ी वजह गर्मियों के दौरान बिजली की बढ़ी हुई मांग रही।

माइनिंग सेक्टर अब भी दबाव में

दूसरी ओर माइनिंग और क्वारिंग सेक्टर का प्रदर्शन कमजोर रहा। मई में इसका उत्पादन 1.6% घट गया। हालांकि, अप्रैल में इसमें 3.7% की गिरावट आई थी। कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और गैर-धातु खनिजों के कमजोर उत्पादन का असर इस सेक्टर पर पड़ा।

कुछ सेक्टरों में रही कमजोरी

सभी सेक्टरों का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। गारमेंट्स का उत्पादन 8.8% घटा। प्रिंटिंग सेक्टर में 10.3% की गिरावट आई। रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का उत्पादन 4.7% और केमिकल्स का उत्पादन 1.3% घट गया।

कैपिटल गुड्स में बनी रही मजबूती

निवेश से जुड़े कैपिटल गुड्स का उत्पादन मई में 12.9% बढ़ा। अप्रैल में इसकी ग्रोथ 12% थी। इससे संकेत मिलता है कि मशीनरी और उपकरणों की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है। वहीं, इन्फ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स में 5.8% और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 7.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

हालांकि, कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स की ग्रोथ सिर्फ 3.6% रही। इससे रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले सामान की मांग अभी भी कमजोर नजर आती है।

ICRA ने क्या कहा?

ICRA के प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट राहुल अग्रवाल ने कहा कि मई में मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ घटकर 5.5% रह गई, जबकि अप्रैल में यह 6.1% थी। उन्होंने बताया कि 23 में से 15 मैन्युफैक्चरिंग सब-सेक्टरों की रफ्तार धीमी हुई है। वहीं, माइनिंग सेक्टर में लगातार पांचवें महीने गिरावट दर्ज की गई। हालांकि इसकी रफ्तार पहले से कुछ कम रही।

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Updated Maruti Brezza to debut on July 23

Maruti Brezza rear quarter static

Maruti-Suzuki is slated to introduce a comprehensive update to the Brezza on July 23, 2026. The carmakers’ answer to the compact SUV space is expected to arrive with a fresh exterior, better interiors, new features and most importantly, a new engine option. 

  1. Expected to arrive with a new turbo-petrol engine, likely from the Fronx.
  2. Subtle design revisions and feature additions are in the works.

Maruti Suzuki Brezza update: What to expect?

Credit: @HarshitMakkarvlogs via YouTube

The biggest change to the updated Brezza could be under the hood. It is expected to have a turbo-petrol engine for the first time in its lineup, with the Fronx’s 1.0-litre unit likely to be utilised. The engine could be paired to a 6-speed manual gearbox, as a test mule of the SUV was spied with this gearbox in February 2026. For reference, in the Fronx, the engine churns out 100hp and 148Nm. If introduced with the update, the engine would finally make the Brezza eligible for sub-4m tax benefits, thus reducing its price.  Currently, the Brezza is the only SUV in its segment that does not offer a turbo-petrol engine. In line with Maruti’s standards, the engine can also be expected to be paired to a CNG kit.

To have revised exterior styling and upmarket interior bits

Credit: @HarshitMakkarvlogs via YouTube

The updated Brezza is likely to arrive with minor cosmetic enhancements. This includes redone bumpers and lighting.  The LED tail-lamps could be connected by a segmented bar, as seen on the larger Victoris SUV. Spy shots of the Brezza also revealed a new 4-spoke alloy wheel design, suggesting that new rim designs for the updated version can be anticipated.

Current Maruti Brezza interior used for representation. 

Not many changes are expected to the overall cabin layout, save for newer trim material and colour scheme. As fr features, Maruti could equip the updated Brezza with the Victoris’ 10.1-inch infotainment screen, a powered driver seat, front seat ventilation and ambient lighting. A level 2 ADAS could also be part of the safety package. Test mules also revealed the presence of front parking sensors on the bumper, which could be a possible inclusion.

Maruti Suzuki Brezza update: Expected price

With the extensive updates, expect the updated Brezza to have a slight premium over the current version, whose price ranges between Rs 8.26 lakh and Rs 12.86 lakh. It will continue to take on the likes of the Hyundai Venue, Tata Nexon, Skoda Kylaq, Mahindra XUV 3XO, Kia Sonet and Syros.

MYSAA: ‘मैसा’ की शूटिंग से सामने आया दिलचस्प BTS फोटो, मेकर्स ने दिया बड़ा हिंट

MYSAA: साल 2026 की मोस्ट अवेटेड फिल्मों में शामिल मैसा (Mysaa) अपनी हर नई अपडेट के साथ दर्शकों का उत्साह लगातार बढ़ा रही है। पैन इंडिया स्टार रश्मिका मंदाना इस फिल्म की लीड हैं और इसे पहली महिला-केंद्रित पैन इंडिया एक्शन थ्रिलर के तौर पर पेश किया जा रहा है। इस फिल्म में रश्मिका अपने करियर के सबसे दमदार और ट्रांसफॉर्मेटिव किरदारों में से एक निभाती नजर आएंगी। फिल्म के ऐलान के बाद से ही फैंस मेकर्स की ओर से साझा की जा रही हर झलक पर नजर बनाए हुए हैं।

इसी उत्साह को बरकरार रखते हुए मेकर्स ने हाल ही में शूटिंग के दौरान की एक मजेदार बिहाइंड द सीन्स तस्वीर शेयर की। इस फोटो में फिल्म के सिनेमैटोग्राफर की पीठ पर कीचड़ से बने हाथों के निशान दिखाई दे रहे हैं, जिन पर खुद रश्मिका के साइन भी हैं।

इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए मेकर्स ने मजाकिया अंदाज में लिखा, “The blood marks are on their way,” यानी खून के निशान भी जल्द आने वाले हैं, जिससे फिल्म के दमदार एक्शन की झलक मिलती है। इसके साथ ही उन्होंने मजाक में यह भी लिखा, “हमने इस खूबसूरत कलाकारी में थोड़ा-सा खून और अंबर पाउडर भी मिला दिया है!”

तस्वीर शेयर करते हुए मेकर्स ने लिखा, “MYSAA @rashmika_mandanna की तरफ से Signed! खून के निशान अब रास्ते में हैं। @unformulafilms इस खूबसूरत आर्ट में हमें थोड़ा खून और अंबर पाउडर भी मिला देना चाहिए था! अगली बार ज़रूर! @rawindrapulle @unformulafilms”

अनफॉर्मूला फिल्म्स के बैनर तले बनी और रविंद्र पुल्ले के निर्देशन में तैयार मैसा एक इमोशनल एक्शन थ्रिलर है, जिसकी कहानी आदिवासी इलाकों की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म दमदार विजुअल्स, रोमांचक कहानी और रश्मिका मंदाना के अब तक के सबसे यादगार और दमदार परफॉर्मेंस का वादा करती है।

China की भारत के साथ चालाकी, बांग्लादेश के तीस्ता प्रोजेक्ट पर बयान, आखिर क्यों बढ़ी भारत की चिंता

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बांग्लादेश में प्रस्तावित तीस्ता बैराज एवं नदी प्रबंधन परियोजना को लेकर चीन ने बड़ा बयान दिया है। चीन ने कहा है कि इस परियोजना में उसकी संभावित भागीदारी किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाने के लिए नहीं है और वह इस मामले में किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप का भी समर्थन नहीं करता। बीजिंग में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने साफ शब्दों में कहा कि चीन और बांग्लादेश का यह आपसी सहयोग किसी तीसरे देश को निशाना नहीं बनाता है, इसलिए इसे किसी तीसरे देश के प्रभाव या दखल से पूरी तरह मुक्त होना चाहिए। 

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चीन के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने इसे आम लोगों से जुड़ा प्रोजेक्ट बताया। तीस्ता नदी से जुड़े इस सहयोग का भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत लंबे समय से तीस्ता नदी के जल बंटवारे और इस क्षेत्र से जुड़े रणनीतिक पहलुओं को लेकर संवेदनशील रहा है।

 

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीटीआई के पत्रकार ने कहा कि भारत को चीन और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी पर सहयोग को लेकर गंभीर चिंताएं हैं, क्योंकि यह परियोजना भारत-बांग्लादेश सीमा और भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के काफी करीब स्थित है। पत्रकार ने सवाल किया कि क्या चीन इन चिंताओं को समझता है और क्या इस मुद्दे पर दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच चर्चा हुई है? इस पर जवाब देते हुए गुओ जियाकुन ने कहा कि तीस्ता नदी के व्यापक प्रबंधन और पुनर्वास की परियोजना बांग्लादेश के लिए एक महत्वपूर्ण जनकल्याण परियोजना है।

 

उन्होंने कहा कि चीन इस परियोजना में हरसंभव सहयोग देने के लिए तैयार है। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि चीन और बांग्लादेश के बीच सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाता और इसे किसी तीसरे पक्ष के प्रभाव से भी मुक्त रहना चाहिए। 

बांग्लादेश के नजदीक आया चीन 

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि बीजिंग, ढाका के साथ विकास रणनीतियों में बेहतर तालमेल स्थापित करने और विशेष रूप से अर्थव्यवस्था, व्यापार, जल संसाधन प्रबंधन और जनकल्याण के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करना चाहता है।

क्या है चीन और बांग्लादेश का प्लान 

 

बांग्लादेश और चीन के बीच समेकित नदी प्रबंधन (Integrated River Management) को लेकर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है, जिसमें तीस्ता नदी परियोजना प्रमुख केंद्र में है। बांग्लादेश ने औपचारिक रूप से चीन से लंबे समय से लंबित तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन एवं पुनर्स्थापन परियोजना (Teesta River Comprehensive Management and Restoration Project) में तकनीकी और आर्थिक सहयोग देने का अनुरोध किया है।

 

भारत की चिंता क्यों बढ़ी 

तीस्‍ता नदी क्षेत्र भारत के पूर्वोत्‍तर इलाके के काफी करीब है और इसी वजह से भारत की टेंशन अब बढ़ने जा रही है। चीन और बांग्‍लादेश में जो समझौता हुआ है, उसके तहत तीस्‍ता समेत बांग्‍लादेश की नदियों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। एक्‍सपर्ट का कहना है कि इस ऐलान पर भारत की पैनी नजर बनी रहेगी। इसी के पास में भारत का चिकननेक कहा जाने वाला सिलिगुड़ी कॉरिडोर है जो पश्चिम बंगाल को पूर्वोत्‍तर के अन्‍य राज्‍यों से जोड़ता है। इस कॉरिडोर पर चीन ने लंबे समय से नजर गड़ा रखी है। Edited by : Sudhir Sharma

Monsoon Delayed Impact: मानसून की देरी का पहला झटका, समझिए क्यों महंगी हो सकती है उड़द दाल

Urad Dal Price Hike Rules: देश के आम उपभोक्ताओं के बजट पर मानसून की बेरुखी का पहला बड़ा झटका लगने जा रहा है। मानसून में देरी और बारिश की कमी के कारण देश में उड़द दाल की बुवाई में 40% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बुवाई घटने से देश में दालों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे आने वाले दिनों में इसकी कीमतें आसमान छू सकती हैं।

घरेलू कमी को पूरा करने के लिए भारत को विदेशों से आयात बढ़ाना पड़ सकता है, जिसका सीधा असर आम आदमी की रसोई के बजट पर पड़ेगा। आइए समझते हैं कि उड़द दाल के महंगे होने के पीछे की असली वजह क्या है।

प्रमुख उत्पादक राज्यों में 40% कम हुई बुवाई, किसानों ने बदला रुख

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान देश के प्रमुख उड़द उत्पादक राज्य हैं, जिनकी कुल हिस्सेदारी देश के कुल उत्पादन में लगभग आधी (50%) है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल मानसून की सुस्ती को देखते हुए इन राज्यों के किसानों ने अपनी रणनीति बदल ली है। किसान अब उड़द की जगह सोयाबीन, मक्का और मोटे अनाजों की बुवाई को प्राथमिकता दे रहे हैं। किसानों का मानना है कि इन फसलों में मौसम का जोखिम कम होता है और बाजार में इनके दाम भी बेहतर और स्थिर मिलते हैं।

मौसम की मार: क्यों उड़द की खेती से कतरा रहे हैं किसान?

उड़द की फसल मौसम के प्रति बेहद संवेदनशील होती है। इसकी बढ़ोतरी के समय अगर बारिश कम हो, तो फसल सूख जाती है और अगर कटाई के समय ज्यादा बारिश हो जाए, तो पूरी फसल बर्बाद हो जाती है। पिछले कुछ वर्षों से मौसम के अनिश्चित पैटर्न के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। यही वजह है कि देश में उड़द का सालाना उत्पादन फाइनेंशियल ईयर 2022 के 28 लाख टन से घटकर फाइनेंशियल ईयर 2026 में महज 22 लाख टन रह गया है।

बाजार में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे दाम, MSP भी बढ़ी

घरेलू उत्पादन में आई इस गिरावट का असर कीमतों पर साफ दिख रहा है:

थोक बाजार का हाल: इंदौर के थोक बाजार में उड़द दाल की कीमत ₹9200 प्रति क्विंटल के पार पहुंच चुकी है, जो तीन साल पहले तक ₹5500 से ₹7200 के दायरे में थी।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने उड़द की एमएसपी को साल 2022 के ₹6600 से बढ़ाकर अब ₹8200 प्रति क्विंटल कर दिया है। एमएसपी बढ़ने से किसानों का नुकसान तो सीमित होगा, लेकिन रिटेल मार्केट में आम खरीदारों के लिए लागत बढ़ना तय है।

विदेशी इंपोर्ट पर बढ़ी निर्भरता, मार्च 2027 तक का अनुमान

घरेलू बाजार में मांग और आपूर्ति के अंतर को पाटने के लिए भारत को बड़े पैमाने पर उड़द का आयात करना पड़ रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2023 में जहां भारत ने केवल 6.11 लाख टन उड़द का आयात किया था, वहीं फाइनेंशियल ईयर 2026 में यह बढ़कर 10.5 लाख टन पर पहुंच गया।कमोडिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा हालात को देखते हुए मार्च 2027 तक सालाना आयात का यह आंकड़ा 12 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर को छू सकता है।

सरकार ने शुरू की ‘प्राइस सपोर्ट स्कीम’ (PSS)

इस मानसून सीजन में अब तक राष्ट्रीय औसत वर्षा सामान्य से 42% कम रही है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने किसानों को सुरक्षा देने के लिए उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और हरियाणा में ‘प्राइस सपोर्ट स्कीम’ (PSS) के तहत मूंग, उड़द और मूंगफली की सरकारी खरीद को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस कदम से किसानों को सही दाम तो मिलेगा, लेकिन बाजार में सप्लाई सीमित होने से आम उपभोक्ताओं के लिए उड़द दाल की कीमतें तेज हो सकती हैं।