कासगंज में ट्रेनी विमान क्रैश, 50 फुट की ऊंचाई से गिरा, महिला पायलट घायल, जानिए कैसे हुआ हादसा

उत्तरप्रदेश के कासगंज में सोमवार दोपहर 3.30 बजे एक ट्रेनी विमान क्रैश हो गया। विमान उड़ा रही 27 साल की महिला ट्रेनी पायलट घायल हो गईं। संतुलन बिगड़ने के वक्त विमान करीब 50 फुट ऊपर था। इसके बाद विमान हाईटेशन तारों में उलझकर नीचे गिर गया।  हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। अलीगढ़ से ट्रेनिंग सेंटर के अधिकारी-कर्मचारी मौके पर पहुंचे। घायल पायलट को अपने साथ अलीगढ़ ले गए। 

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घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस प्रशासन और संबंधित एजेंसियां पहुंच गई। वहीं, एजेंसियां दुर्घटना के कारणों की जांच में जुट गई हैं। इस घटना से आसपास के ग्रामीणों में दहशत फैल गई। Edited by : Sudhir Sharma (फाइल फोटो)

जुलाई में आ रही हैं ये 5 धांसू कारें! Maruti Brezza फेसलिफ्ट से लेकर Nissan Tekton और Honda ZR-V तक, देखें संभावित कीमत और फीचर्स

अगर आप पिछले कुछ समय से कार लेने की योजना बना रहे हैं तो ये खबर आपके काम की है। जुलाई 2026 ऑटोमोबाइल बाजार के लिए काफी खास रहने वाला है। इस महीने कई बड़ी कंपनियां अपनी नई कारों और एसयूवी को भारतीय बाजार में लॉन्च करने जा रही हैं। अलग-अलग बजट वाले ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए कंपनियां कई नए ऑप्शन पेश करने की तैयारी में हैं। निसान, होंडा, टोयोटा, मारुति सुजुकी और ऑडी जैसी कंपनियां अलग-अलग बजट और सेगमेंट में नए मॉडल पेश करेंगी। आइए जानते हैं जुलाई में महिनें में कौन-कौन सी गाड़ियां लॉन्च होने वाली है।

Nissan Tekton

निसान अपनी नई मिडसाइज एसयूवी टेक्टन को 9 जुलाई को ग्लोबल लेवल पर पेश करने जा रही है। माना जा रहा है कि इसमें डस्टर की तरह 1.0 लीटर टर्बो पेट्रोल और 1.3 लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन के ऑप्शन मिल सकते हैं, जो बेहतर प्रदर्शन और दमदार ड्राइविंग अनुभव देंगे। नई निसान टेक्टन में दोनों इंजन विकल्पों के साथ 6-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स मिलने की उम्मीद है। वहीं, 1.3 लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन के साथ 7-स्पीड ड्यूल-क्लच ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन का ऑप्शन भी दिया जा सकता है।

कीमत की बात करें तो इस एसयूवी को डस्टर के समान प्राइस रेंज में लॉन्च किया जा सकता है, जिसकी संभावित शुरुआती कीमत करीब 10.50 लाख रुपये से लेकर 18.70 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक हो सकती है।

Honda ZR-V

होंडा अपनी नई हाइब्रिड एसयूवी ZR-V को 15 जुलाई के आसपास भारतीय बाजार में लॉन्च कर सकती है। यह प्रीमियम एसयूवी करीब 40 से 50 लाख रुपये की कीमत में आ सकती है। इसमें 2.0 लीटर पेट्रोल इंजन के साथ ड्यूल-मोटर स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड सिस्टम मिलने की उम्मीद है। साथ ही इसमें e-CVT गियरबॉक्स दिया जा सकता है, जो आगे के पहियों को पावर देगा और बेहतर माइलेज के साथ स्मूद ड्राइविंग का अनुभव देगा। होंडा ZR-V कुल 184 हॉर्सपावर और 315Nm टॉर्क पैदा करेगा।

इस दमदार पावर की बदौलत यह एसयूवी 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार लगभग 8 सेकंड में पकड़ सकती है। इसकी अधिकतम रफ्तार 172 किमी/घंटा होगी, जबकि कंपनी का दावा है कि यह करीब 22.79 किमी प्रति लीटर का माइलेज दे सकती है।

Toyota Hilux

टोयोटा अपनी लोकप्रिय पिकअप ट्रक हिलक्स को 15 जुलाई के आसपास नए अपडेट के साथ लॉन्च कर सकती है। इसकी संभावित शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत करीब 35 लाख रुपये हो सकती है। नई हिलक्स में 2.8 लीटर डीजल इंजन के साथ 48-वोल्ट माइल्ड-हाइब्रिड सिस्टम मिलने की उम्मीद है, जो हाल ही में नई फॉर्च्यूनर में भी दिया गया है। इसके अलावा इसमें 6-स्पीड मैनुअल और 6-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का ऑप्शन मिलेगा, जबकि दोनों वेरिएंट में फोर-व्हील ड्राइव (4WD) सिस्टम भी दिया जा सकता है।

Maruti Suzuki Brezza

मारुति सुजुकी अपनी लोकप्रिय कॉम्पैक्ट एसयूवी ब्रेजा का फेसलिफ्ट मॉडल 23 जुलाई को लॉन्च कर सकती है। साल 2022 में आई दूसरी पीढ़ी की ब्रेजा के बाद ये उसका पहला बड़ा अपडेट होगा। नई ब्रेजा में डिजाइन और फीचर्स में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। साथ ही, इसकी कीमत मौजूदा मॉडल के मुकाबले थोड़ी अधिक होने की संभावना है। इसकी शुरुआती कीमत करीब 8.50 लाख रुपये से लेकर 13.50 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक हो सकती है, जो मौजूदा मॉडल से थोड़ी अधिक होगी। इस अपडेट की सबसे बड़ी खासियत नया 1.0 लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन हो सकता है। इसके साथ मौजूदा 1.5 लीटर पेट्रोल इंजन का विकल्प भी मिलेगा।

Audi A6

ऑडी अपनी नई A6 लग्जरी सेडान को 25 जुलाई 2026 के आसपास भारतीय बाजार में लॉन्च कर सकती है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत करीब 70 लाख रुपए रहने की उम्मीद है। नई कार में 2.0 लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन मिलेगा। वहीं, इसके एक्सटीरियर में नया फ्रंट ग्रिल, आकर्षक एलईडी हेडलाइट्स और पहले से ज्यादा स्टाइलिश व एयरोडायनामिक डिजाइन देखने को मिल सकता है।

YEIDA Master Plan: जेवर एयरपोर्ट से सीधे जुड़ेगा हाथरस का नया 10000 एकड़ का इंडस्ट्रियल हब, हींग से EV तक सबको बूस्ट, देखें पूरी डिटेल

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाथरस को बड़ा औद्योगिक और रोजगार केंद्र बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। योगी सरकार, हाथरस को इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के साथ हजारों रोजगार पैदा करने वाला डेस्टिनेशन बनाने की योजना पर काम कर रही है। यमुना एक्सप्रेसवे के फेज-2 विकास के तहत ‘महायोजना/मास्टर प्लान 2041’ के अंतर्गत ‘हाथरस अर्बन सेंटर’ को एक हाईटेक औद्योगिक और आवासीय सैटेलाइट टाउन के रूप में विकसित किया जा रहा है।

बता दें कि, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) की मास्टर प्लान 2041 योजना के तहत हाथरस में करीब 10 हजार एकड़ में एक आधुनिक ग्रीनफील्ड अर्बन सेंटर विकसित किया जाएगा। बता दें कि, यह परियोजना जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ी होगी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उद्योगों व रोजगार को नई रफ्तार देगी।

50 से ज्यादा गांवों में विकसित होगी नई सिटी

बता दें कि, यह हाईटेक सिटी हाथरस और सासनी तहसील के 50 से अधिक गांवों में लगभग 4,000 हेक्टेयर (करीब 10 हजार एकड़) क्षेत्र में विकसित की जाएगी। यह अलीगढ़, मथुरा और आगरा के साथ विकसित किए जा रहे चार प्रमुख शहरी केंद्रों में से एक होगी। योजना का मास्टर प्लान तैयार करने के लिए जीआईएस तकनीक की मदद ली जा रही है। इसके लिए आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स लिमिटेड को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूरे क्षेत्र का 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हरियाली और खुले स्थानों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि पर्यावरण का संतुलन बना रहे।

उद्योग और रहने की सभी सुविधाएं होंगी

यह परियोजना एक आधुनिक औद्योगिक और आवासीय शहर के रूप में विकसित होगी। इसमें उद्योग, आवास, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और ग्रीन जोन के लिए अलग-अलग क्षेत्र बनाए जाएंगे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, यमुना एक्सप्रेसवे और कई प्रमुख राजमार्गों से अच्छी कनेक्टिविटी होने के कारण यह इलाका उद्योग लगाने के लिए आकर्षक केंद्र बनेगा। इसे आगरा के सैटेलाइट टाउन के रूप में भी विकसित किया जाएगा, जिससे आगरा पर बढ़ता औद्योगिक दबाव कम हो सके।

हींग, गुलाल और EV उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

बता दें कि, हाथरस पहले से ही 10 हजार से अधिक MSE इकाइयों का केंद्र है। नई परियोजना से यहां के स्थानीय उद्योगों को और मजबूती मिलेगी। ‘एक जिला-एक उत्पाद (ODOP)’ योजना के तहत हाथरस की प्रसिद्ध हींग और गुलाल बनाने वाले कारोबारियों को आधुनिक पैकेजिंग और निर्यात की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, होजरी, कांच के मोती, पीतल के आभूषण, मशीन टूल्स और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) के पुर्जों के लिए विशेष औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। आगे चलकर मेडिकल उपकरण, सर्जिकल डिवाइस और पावर ग्रिड मशीनरी जैसे आधुनिक उद्योगों को भी यहां लाने की योजना है।

डीपीआर और जमीन अधिग्रहण का काम शुरू

प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (DPR) तैयार करने और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। परियोजना पूरी होने के बाद बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे और हाथरस पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल हो जाएगा। इसी दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस दौरे में 548 करोड़ रुपये से अधिक की 143 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। साथ ही मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभार्थियों को घरों की चाबियां भी सौंपीं।

Gold-Silver Price Today: तीन दिन गिरने के बाद उछला सोना, पर चांदी ₹2000 टूटी; चेक करें लेटेस्ट प्राइस

Gold Price Today: लगातार तीन कारोबारी सत्र की गिरावट के बाद सोमवार को सोने की कीमतों में जोरदार वापसी हुई। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट शुद्धता वाला सोना 1,300 रुपये महंगा हुआ। इसकी कीमत 1,46,600 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स सहित) पहुंच गई। इससे पहले गुरुवार को भाव 1,45,300 रुपये प्रति 10 ग्राम था। शुक्रवार को मुहर्रम के कारण सर्राफा बाजार बंद रहे थे।

चांदी में चौथे दिन भी गिरावट

सोने में तेजी के उलट चांदी लगातार चौथे कारोबारी सत्र में कमजोर रही। इसकी कीमत 2,000 रुपये घटकर 2,24,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) रह गई। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,26,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।

सोना क्यों चढ़ा?

एनालिस्टों के मुताबिक, हालिया गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तर पर खरीदारी की। इससे सोने की कीमतों को सहारा मिला। वहीं, Lemonn Markets Desk के रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग ने कहा कि वैश्विक बाजार की कमजोरी की वजह से घरेलू बाजार में चांदी पर दबाव बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 54.14 डॉलर यानी 1.32% गिरकर 4,035.12 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, चांदी की कीमत में करीब 3% की गिरावट आई और यह 57.62 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखी।

अमेरिका-ईरान तनाव और डॉलर का असर

Mirae Asset Sharekhan के हेड (कमोडिटीज एंड करेंसी) प्रवीण सिंह के मुताबिक, वीकेंड में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में तेजी आई। इसका असर सोने पर पड़ा।

हालांकि बाद में दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई, लेकिन निवेशक अभी भी सतर्क बने हुए हैं। इसी वजह से बुलियन बाजार पर दबाव बना हुआ है।

अब किन आंकड़ों पर रहेगी नजर?

HDFC Securities के सीनियर एनालिस्ट (कमोडिटीज) सौमिल गांधी के मुताबिक, अब बाजार की नजर अमेरिका के नॉन-फार्म पेरोल और ISM मैन्युफैक्चरिंग PMI जैसे आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। इनसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की अगली दिशा का संकेत मिल सकता है।

क्या अब सुरक्षित निवेश नहीं रहा सोना? युद्ध के बीच भी लगातार चौथे महीने गिरा दाम

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रामपुर को 690 करोड़ की सौगात देंगे CM योगी, मेधावी छात्रों का करेंगे सम्मान, बरेली में करेंगे समीक्षा बैठक

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार 30 जून को रामपुर व बरेली के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री मुरादाबाद से सीधे रामपुर पहुंचेंगे, जहां शाहाबाद में वह रामपुर के मिलक एवं बिलासपुर विधानसभा

क्षेत्रों में 690 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 102 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। यहां वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे। 

 

कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी इंटरमीडिएट/हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्राओं को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र देंगे। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लाभार्थियों को लैपटॉप, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के लाभार्थियों को चेक वितरित करेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के पात्र परिजनों को अनुदान राशि देंगे। मुख्यमंत्री सामाजिक विकास में विशेष योगदान देने वाले व्यापारियों का सम्मान भी करेंगे। 

 

रामपुर के बाद मुख्यमंत्री बरेली पहुंचेंगे, जहां वह सर्किट हाउस में बरेली मंडल के लोक निर्माण विभाग के पुराने कार्यों की समीक्षा और नए कार्यों की कार्ययोजना के संबंध में बैठक करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री बरेली के विकास कार्यों एवं कानून व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। Edited by : Sudhir Sharma

हिमाचल में मौसम का तांडव; लाहौल-स्पीति में सैलाब, सड़क संपर्क टूटा, वाहन फंसे

हिमाचल प्रदेश में मॉनसून से पहले ही मौसम का तांडव नजर आया है। लाहौल-स्पीति के जहालमा नाले में भारी बारिश के कारण बाढ़ आ गई। इससे मनाली-उदयपुर मार्ग का वैकल्पिक रास्ता बह गया। 

Dairy Scheme: डेयरी फॉर्म खोलने का सुनहरा मौका, सरकार दे रही 11.80 लाख रुपये तक की सब्सिडी! जानिए पूरी योजना

अगर आप डेयरी फार्म खोलना चाहते हैं या गाय पालन का व्यवसाय बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है। उत्तर प्रेदश सरकार प्रदेश में उच्च गुणवत्ता वाली देसी गायों की संख्या बढ़ाने और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष योजना चला रही है। बता दें कि, इस योजना का नाम ‘मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना’ है। इस योजना के तहत पात्र पशुपालकों को 10 गायों की डेयरी यूनिट लगाने पर परियोजना लागत का 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 11.80 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा।

यह योजना प्रदेश के सभी जिलों में लागू है। इसके तहत साहीवाल, गिर और थारपारकर जैसी उच्च उत्पादन क्षमता वाली देसी गायों का पालन करने वाले पशुपालकों को आर्थिक सहायता मिलेगी। 10 गायों की एक यूनिट की कुल परियोजना लागत 23.60 लाख रुपये तय की गई है, जिसमें सरकार 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी देगी।

ऐसे मिलेगी आर्थिक सहायता

इस योजना में कुल परियोजना लागत का 15 प्रतिशत लाभार्थी को स्वयं लगाना होगा। 35 प्रतिशत राशि बैंक ऋण के रूप में मिलेगी, जबकि 50 प्रतिशत राशि सरकार अनुदान के रूप में देगी। अनुदान दो चरणों में जारी किया जाएगा। पहले चरण में आधारभूत ढांचा तैयार होने के बाद परियोजना लागत का 25 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इसके बाद गायों की खरीद पूरी होने पर शेष 25 प्रतिशत अनुदान लाभार्थी के खाते में भेजा जाएगा।

किन गायों की खरीद करनी होगी?

योजना के तहत केवल साहीवाल, गिर और थारपारकर नस्ल की गायों की खरीद की जा सकेगी। कोशिश की जाएगी कि इन गायों को प्रदेश के बाहर उनके मूल प्रजनन क्षेत्रों (ब्रीडिंग ट्रैक्ट) से खरीदा जाए, ताकि अच्छी नस्ल के पशु उपलब्ध हो सकें। इसके अलावा खरीदी जाने वाली गाय पहली या दूसरी बार बछड़ा देने वाली होनी चाहिए और उसका बछड़ा दिए हुए 45 दिन से अधिक समय नहीं हुआ होना चाहिए।

इन नियमों का पालन करना होगा

योजना का लाभ लेने वाले सभी पशुपालकों के लिए खरीदी गई गायों का ईयर टैग लगवाना और उनका बीमा कराना अनिवार्य होगा। इससे पशुओं की पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

कौन कर सकता है आवेदन?

इस योजना का लाभ वही व्यक्ति ले सकेगा, जिसके पास गाय या भैंस पालन का कम से कम तीन वर्ष का अनुभव हो। इस अनुभव का प्रमाण संबंधित मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से सत्यापित होना जरूरी होगा।

इसके अलावा आवेदक के पास कम से कम 0.20 एकड़ भूमि डेयरी की आधारभूत संरचना के लिए और 0.80 एकड़ भूमि चारा उत्पादन के लिए होनी चाहिए। यह भूमि स्वयं की, पैतृक, साझेदारी की या कम से कम 7 वर्ष के पंजीकृत लीज समझौते पर ली गई हो सकती है। भूमि जलभराव से मुक्त होना भी जरूरी है।

किन लोगों को नहीं मिलेगा लाभ?

जो पशुपालक पहले से कामधेनु योजना, मिनी या माइक्रो कामधेनु योजना, नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत नंदिनी कृषक समृद्धि योजना या मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना का लाभ ले चुके हैं, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।

आवेदन कैसे करें?

योजना के लिए आवेदन ऑनलाइन किए जाएंगे। हालांकि, जब तक नंद बाबा दुग्ध मिशन का ऑनलाइन पोर्टल शुरू नहीं होता, तब तक इच्छुक पशुपालक ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन संबंधित जिले के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) या मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के कार्यालय में रजिस्टर्ड डाक या स्वयं जाकर जमा किया जा सकता है। यदि आवेदन निर्धारित संख्या से अधिक आते हैं, तो पात्र लाभार्थियों का चयन मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा।

सीधे बैंक खाते में आएगा पैसा

योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी की पूरी राशि डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। इससे प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी और अनुदान सीधे पात्र पशुपालकों तक पहुंचेगा।

सपा की साइकिल चलेगी तो दंगा ही कराएगी, बबुआ तो 12 बजे सोकर उठते हैं, योगी का अखिलेश पर निशाना

CM Yogi in Pilibhit

CM Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को विस्थापित 2500 बंगाली परिवारों को नागरिकता एवं भूमि अधिकार पत्र वितरित किए। उन्होंने इस अवसर पर समाजवादी पार्टी व कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जनता जनार्दन ने समाजवादी पार्टी की साइकिल पंक्चर कर दी है, क्योंकि यह साइकिल चलेगी तो दंगा कराएगी, कर्फ्यू लगाएगी और बेटी-व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगाएगी। पूर्व मुख्यमंत्री दंगाइयों को सरकारी विमान से बुलाकर आवास पर सम्मानित करते थे। कांग्रेस नेतृत्व अडिग रहता और जिन्ना अपनी मौत मर गया होता तो देश का विभाजन नहीं होता, लाखों हिंदू परिवारों को घर व जमीन छोड़नी न पड़ती। बंटवारे के बाद भी कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण में ही जुटी रही और उसके पापों का खामियाजा हिंदू समाज भुगतता रहा।

 

मुख्यमंत्री पीलीभीत के बरखेड़ा और बीसलपुर विधानसभा क्षेत्र में 569 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 66 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित हिंदू, बौद्ध, सिख व जैन परिवारों को नागरिकता व भूमि अधिकार पत्र और विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र व सहायता राशि के चेक वितरित किए। सीएम ने सभी लाभार्थी परिवारों को बधाई व शुभकामनाएं दीं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन इसलिए विशेष है, क्योंकि लगभग 56 वर्ष पहले पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से प्रताड़ित होकर भारत आए हिंदू, बौद्ध, सिख व जैन परिवारों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप पीलीभीत में पुनर्वास और भारतीय नागरिकता का अधिकार मिल रहा है। अब कोई भी ताकत इन लोगों को यहां से नहीं निकाल सकती। अब कोई इन्हें पराया नहीं कह सकेगा। यह ऐतिहासिक कार्य पीएम मोदी जी व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में संभव हुआ है। इन परिवारों को यूपी में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार मिल गया है। अब इन लोगों को पुलिस, राजस्व, वन अथवा किसी अन्य सरकारी विभाग द्वारा परेशान नहीं किया जाएगा।

… तो देश का विभाजन नहीं होता

सीएम ने कहा कि कांग्रेस की नीतियों व सत्ता लोलुपता के कारण देश का विभाजन हुआ। यदि कांग्रेस नेतृत्व अडिग रहता, जिन्ना अपनी मौत मर गया होता तो पाकिस्तान का निर्माण नहीं होता और लाखों हिंदुओं को अपनी पैतृक भूमि छोड़ने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। विभाजन के बाद विस्थापित हिंदुओं, बौद्धों, सिखों व जैनियों की कांग्रेस ने कभी सुधि नहीं ली। जिन लोगों को आज नागगिरका और आवास व भूमि के अधिकार पत्र दिए जा रहे हैं, उनमें ज्यादातर दलित हैं, वंचित हैं, अति पिछड़ी जाति के हैं। लंबे समय तक देश-प्रदेश में शासन करने वाली कांग्रेस व सपा ने इनके लिए आवाज क्यों नहीं उठाई? उन्हें शर्म से डूब जाना चाहिए।

कांग्रेस-सपा की चिंता सिर्फ मुसलमानों तक सीमित

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस व सपा की चिंता केवल मुसलमानों तक सीमित रही। हिंदू, सिख, बौद्ध व जैन समाज के कत्लेआम की कीमत पर भी सत्ता प्राप्त करना इन दलों की प्राथमिकता थी। डबल इंजन सरकार बनने के बाद पीएम मोदी जी के नेतृत्व में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू किया गया, जिससे पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू, बौद्ध, सिख व जैन परिवारों को नागरिकता और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने का रास्ता खुला।

विस्थापितों को अधिकार देने का विरोध किया कांग्रेस-सपा ने

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएए का कांग्रेस व सपा ने देशभर में विरोध किया और आंदोलन किए। इन दलों की सोच हमेशा देश के संसाधनों पर मुसलमानों का पहला अधिकार सुनिश्चित करने की रही। उनके इस पाप का खामियाजा हिंदू, सिख, बौद्ध व जैन समाज को उठाना पड़ा। आज लगभग 2500 परिवार यानी करीब 15 हजार लोग इसी सीएए का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। सीएम ने उन सभी जनप्रतिनिधियों को भी धन्यवाद दिया, जिन्होंने इन बंगाली परिवारों को उनका अधिकार दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए।

प्रदेश के अन्य जिलों में भी विस्थापितों को मिलेगी नागरिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगभग 55 हजार ऐसे विस्थापित परिवार रह रहे हैं। बाराबंकी, बहराइच, बिजनौर और अब पीलीभीत में प्रथम चरण का कार्य पूरा किया जा रहा है। यह अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। कुछ मामलों में वन विभाग व भारत सरकार से स्वीकृति मिलना शेष है। जैसे ही यह स्वीकृति प्राप्त होगी, अन्य पात्र परिवारों को भी उनका अधिकार दिया जाएगा। रामपुर में भी बड़ी संख्या में ऐसे परिवारों को नागरिकता व भूमि अधिकार दिए जाएंगे।

सपा ने कभी गरीबों की तकलीफ सुनने की कोशिश नहीं की

मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा को चार बार प्रदेश में शासन करने का अवसर मिला, लेकिन उसने कभी गरीबों की तकलीफ सुनने की कोशिश नहीं की। जब बबुआ 12 बजे सोकर उठेंगे, 2 बजे तक तैयार होंगे और फिर 5 बजे जिम चले जाएंगे तो गरीबों की पीड़ा सुनने का समय कहां होगा। उनके लिए विकास का मतलब केवल सैफई था। पीलीभीत उनके एजेंडे में होता तो मेडिकल कॉलेज बन जाता। पीलीभीत की बांसुरी को वैश्विक पहचान मिल चुकी होती। पीलीभीत व लखीमपुर को जोड़ने वाला पुल बन गया होता तथा टाइगर रिजर्व को भी विश्वस्तरीय पहचान मिल गई होती। विस्थापित परिवारों को भी उसी समय नागरिकता व जमीन का अधिकार मिल गया होता, लेकिन उनके पास परिवार से बाहर किसी के बारे में सोचने का समय नहीं था।

जनता जनार्दन ने पंक्चर की सपा की साइकिल

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग केवल अपने परिवार तक सीमित रहते हैं, वे समाज व देश का कल्याण नहीं कर सकते। जनता जनार्दन ने इसी कारण सपा की साइकिल पंचर कर दी। आज जहां गौशालाएं बनी हैं, उन सार्वजनिक जमीनों पर 2017 से पहले सपाइयों ने कब्जा कर रखा था। भाजपा सरकार बनने के बाद पहले ही दिन घोषणा की गई थी कि कब्जा छोड़ दें, अन्यथा 48 घंटे में जो कार्रवाई होगी, सात पीढ़ियां याद रखेंगी। कार्रवाई के डर से कई लोगों ने स्वयं जमीन वापस कर दी।

 

पिछली सरकारों में माफिया सीना तानकर चलते थे। थानों व तहसीलों पर दबाव बनाते थे। किसी की भी जमीन पर कब्जा कर लेते थे और विकास कार्यों को रोक देते थे। बहन-बेटियों की सुरक्षा खतरे में रहती थी। दंगे होने पर पूर्व मुख्यमंत्री दंगाइयों को सरकारी विमान से बुलाकर आवास पर सम्मानित करते थे। 2017 से पहले यही प्रदेश की पहचान थी।

आज जान की भीख मांग रहे माफिया

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब ‘नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा’ है। कभी सीना तानकर चलने वाले माफिया गले में तख्ती लटका कर जान की भीख मांग रहे हैं। कह रहे हैं, साहब जान बख्श दो, ठेला लगाकर पेट भर लेंगे। भाजपा सरकार की प्रतिबद्धता गरीब, युवा, महिला, व्यापारी व किसान के प्रति है, किसी गुंडे या माफिया के प्रति नहीं। सरकार किसी भी अपराधी को संरक्षण नहीं देगी। पीलीभीत के लोगों ने अच्छे जनप्रतिनिधि चुने हैं, इसलिए विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों की सराहना करते हुए कहा कि इनके प्रयासों से मेडिकल कॉलेज, सड़कें, पुल व अन्य विकास योजनाएं धरातल पर उतर रही हैं। पीलीभीत जैव विविधता और इको-टूरिज्म के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बना रहा है।

पिछली सरकारों में कट्टा-बम बनते थे, अब ब्रह्मोस मिसाइल

सीएम योगी ने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर वर्ग तक पहुंच रहा है। किसी युवा को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना का लाभ मिल रहा है, किसी को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का, किसी को मुख्यमंत्री आवास योजना का तो कहीं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत लखपति दीदियों को सहायता दी जा रही है। विस्थापित परिवारों को नागरिकता व जमीन के दस्तावेज दिए गए। भविष्य में किसी भी हिंदू को विस्थापित न होना पड़े, इसके लिए मोदी जी के विजन के अनुरूप यूपी में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर विकसित कर ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण हो रहा है। पिछली सरकारों में कट्टा-बम बनते थे, आज यूपी देश की सुरक्षा मजबूत करने वाली मिसाइलें बना रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत से पाकिस्तान भी घबरा कर बाप-बाप चिल्लाता है।

पीलीभीत बनेगा इको-टूरिज्म का बड़ा केंद्र

सीएम ने कहा कि प्रदेश में इकोनॉमिक कॉरिडोर व आधुनिक सड़क नेटवर्क का तेजी से विस्तार हो रहा है। पीलीभीत से शामली, पानीपत, मुरादाबाद, गोरखपुर और आगे सिलीगुड़ी तक बेहतर संपर्क स्थापित किया जा रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे जैसी विश्वस्तरीय परियोजनाएं प्रदेश को मिली हैं। पीलीभीत की जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं, बेहतर सड़क संपर्क और विकास परियोजनाओं की बधाई देते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में पीलीभीत इको-टूरिज्म का बड़ा केंद्र बनेगा। मुख्यमंत्री ने जनता से अपने प्रतिनिधियों का सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि जो भी विकास प्रस्ताव सरकार के सामने आएंगे, उन्हें पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

CM Yogi in Pilibhit

सीएम के हाथों मिले नागरिकता व भूमि प्रमाण पत्र

मुख्यमंत्री के हाथों नागरिकता एवं भूमि संबंधित अधिकार पत्र प्राप्त करने वालों में कृष्णापद मंडल, अधीर कुमार बैरागी, मनोस मंडल, नोनी गोपाल, नरेश विश्वास, सुनीता मंडल, तारा चंद्र सरकार, जनक सरकार, राम चंद्र, राम मिलन, रामजी, सतीश रॉय व संतोष पाल प्रमुख हैं। 

इन्हें मिले विभिन्न योजनाओं के चेक व चाबी 

सीएम ने अपने हाथों से पुष्पा देवी, अंशिका, मीनू, सोनी देवी, हेमंत राठौर, पुष्पा देवी, पूजा देवी, कमलेश गंगवार,धीरेन्द्र सिंह,अनुराग शर्मा, प्रीति सिंह, अरविंद, इन्द्रावती को विभिन्न लाभार्थी योजनाओं के तहत चेक, चाबी व प्रमाण पत्र वितरित किए।

 

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद, राज्य सरकार के मंत्री बलदेव सिंह औलख, संजय सिंह गंगवार, विधायक स्वामी प्रवक्तानंद, बाबूराम पासवान, विवेक कुमार वर्मा, विधान परिषद सदस्य सुधीर गुप्ता, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दलजीत कौर, भाजपा जिलाध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य, पूर्व मंत्री विनोद तिवारी, महिला आयोग की सदस्य श्रीमती पुष्पा पांडेय, पूर्व विधायक किशन लाल राजपूत, पीलीभीत नगर पालिका अध्यक्ष आस्था अग्रवाल, पूरनपुर नगर पालिका अध्यक्ष शैलेंद्र गुप्ता, सुरेश गंगवार, गुलशन आनंद आदि मौजूद रहे।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

Viral Post: ‘ह्यूमैनिटीज छात्रों के लिए प्लेसमेंट नहीं’, DU में 84% नंबर के बाद भी नौकरी के लिए भटकती रही छात्रा, वायरल हुई कहानी

Viral Post: सोशल मीडिया पर इस समय दिल्ली विश्वविद्यालय के एक इतिहास (ऑनर्स) ग्रेजुएट की कहानी चर्चा का विषय बनी हुई है। एक वायरल लिंक्डइन पोस्ट में ह्यूमैनिटीज के छात्रों को प्लेसमेंट के दौरान आने वाली मुश्किलों और कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। पोस्ट में कहा कि जब कंपनियांअक्सर कम्युनिकेशन और क्रिटिकल थिंकिंग स्किल्स की अहमियत पर जोर देते हैं, फिर भी कैंपस रिक्रूटमेंट में ह्यूमैनिटीज ग्रेजुएट्स को नजरअंदाज क्यों किया जाता है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

स्टार्टअप फाउंडर हर्षित खरे ने लिंक्डइन पर अपने एक दोस्त की कहानी शेयर की, तब ये मामला चर्चा में आया। उनके दोस्त ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास (ऑनर्स) में पढ़ाई की और 84 प्रतिशत अंक हासिल किए और बेहतरीन प्रदर्शन के कारण उनका नाम डीन की सूची में भी शामिल हुआ। इसके बावजूद उन्हें नौकरी पाने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

शेयर किया पोस्ट

पोस्ट में हर्षित ने लिखा, “मेरी एक दोस्त ने पिछले साल दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास (ऑनर्स) में ग्रेजुएशन किया था। उसके 84 प्रतिशत अंक आए थे और उसका नाम डीन की लिस्ट में भी शामिल था। वह औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था (कॉलोनियल इकोनॉमिक्स) जैसे विषयों पर घंटों चर्चा कर सकती थी और मेरी जानकारी में ज्यादातर लोगों से बेहतर लिखती थी।” लेकिन जब उसने नौकरी के लिए कॉलेज के प्लेसमेंट सेल से संपर्क किया, तो उसे जवाब मिला, “माफ कीजिए, हमारे पास ह्यूमैनिटीज के छात्रों के लिए कोई कंपनी नहीं आ रही है।”

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12k की मिली नौकरी

हर्षित खरे के अनुसार, प्लेसमेंट सेल से जवाब मिलने के बाद छात्रा को कोई खास मदद या मार्गदर्शन नहीं मिला। इसके बाद उसने करीब आठ महीने तक अलग-अलग कंपनियों को ईमेल भेजे और कई इंटरव्यू दिए। लेकिन हर बार उसके इतिहास विषय की पढ़ाई को देखते हुए उसे उपयुक्त उम्मीदवार नहीं माना गया। लगातार निराशा मिलने के बाद वह अपने करियर के फैसले पर ही सवाल उठाने लगी। उन्होंने आगे बताया कि काफी कोशिशों के बाद छात्रा को एक छोटे स्टार्टअप में कंटेंट से जुड़ी नौकरी मिली, जहां उसे 12,000 रुपये प्रति महीने की सैलरी दी गई।

उन्होंने लिखा, “ऐसा इसलिए नहीं हुआ क्योंकि उसमें टैलेंट की कमी थी, बल्कि इसलिए क्योंकि सिस्टम ने उसके ग्रेजुएट होने से पहले ही तय कर लिया था कि उसकी डिग्री प्लेसमेंट ड्राइव के लिए योग्य नहीं है।”

प्लेसमेंट सिस्टम पर उठाएं सवाल

हर्षित खरे ने मौजूदा प्लेसमेंट व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, कंपनियां कम्युनिकेशन और क्रिटिकल थिंकिंग की बात तो करती हैं, लेकिन ह्यूमैनिटीज के छात्रों को अक्सर मौका नहीं देतीं। उन्होंने लिखा, “हमने ऐसा प्लेसमेंट सिस्टम बना दिया है, जो सिर्फ इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए काम करता है और बाकी छात्रों को चुपचाप पीछे छोड़ देता है।” पोस्ट के अंत में उन्होंने कंपनियों से अपील की कि वे ह्यूमैनिटीज ग्रेजुएट्स को नौकरी देने के अपने अनुभव शेयर करें। उन्होंने लिखा, “आपकी डिग्री समस्या नहीं है, बल्कि सिस्टम अभी तक उसे सही तरीके से समझ नहीं पाया है।”

लोगों ने किया कमेंट

इस पोस्ट के वायरल होने के बाद कमेंट सेक्शन में लोगों ने अपनी-अपनी राय रखी। एक यूजर ने लिखा, “ह्यूमैनिटीज हमें सोचने का नया नजरिया देती है और सभी को साथ लेकर चलने की समझ भी विकसित करती है। लेकिन अफसोस की बात है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद इस क्षेत्र के छात्रों के पास नौकरी के बहुत कम ऑप्शन होते हैं।” दूसरे यूजर ने लिखा, “पहले हम रोल रिडंडेंसी की बात करते थे, अब डिग्री रिडंडेंसी का दौर आ गया है। आने वाले समय में भारत का शिक्षा सिस्टम भी अमेरिका की तरह हो सकता है, जहां कंपनियां डिग्री से ज्यादा स्किल्स को महत्व देती हैं।”

वनडे की टीम नहीं खेले टी-20 प्रारुप, फैंस की मांग पर क्या होंगे बड़े बदलाव

महिला टी20 विश्व कप में भारत के एक बार फिर नाकाम रहने के बाद कप्तान के तौर पर हरमनप्रीत कौर के भविष्य पर तो सवाल उठ रहे हैं। 37 वर्ष की हरमनप्रीत भारत की सबसे सफल टी20 कप्तान रही है।लेकिन सोशल मीडिया पर फैंस की भावनाओं की मानें तो टीम को आमूलचूल परिवर्तन करने होंगे। महिला टीम में कोई भी एकदिवसीय विश्वकप विजेता सदस्य देखना ही नहीं चाहता।टीम में से स्मृति मंधाना, जेमीमा रॉड्रिगेस और यस्तिका भाटिया को बाहर निकालने की मांग उठ रही है और शेफाली वर्मा और ऋचा घोष जैसी आक्रामक बल्लेबाजों को टीम के अंदर लाने की बात जोर पकड़ रही है।

छह बार की चैम्पियन आस्ट्रेलिया के हाथों रविवार को मिली छह विकेट से हार ने भारत की सेमीफाइनल खेलने की उम्मीदें तोड़ दी। टूर्नामेंट से पहले प्रबल दावेदारों में गिनी जा रही भारतीय टीम 50 ओवरों के विश्व कप वाला फॉर्म नहीं दोहरा सकी। टी20 विश्व कप में लगातार दूसरी बार हरमनप्रीत की कप्तानी में भारत नॉकआउट में नहीं पहुंच सका जिससे इस प्रारूप में टीम की प्रगति को लेकर प्रश्न उठने लगे हैं।

बल्लेबाजी में टीम हर बार एकदिवसीय जैसा प्रदर्शन करती है। इसमें स्ट्राइक रेट का महत्व होता है। ऐसे में विश्वकप में बैंच पर बैठी फूलमली को टीम में अधिक मौके दिए जा सकते हैं। इसके अलावा टीम से बाहर हरलीन देवोल जो एकदिवसीय विश्वकप में तेजी से रन बना रही थी इस प्रारुप में वापस आ सकती है।

भारत की तेज गेंदबाजी विकल्पों पर भी चर्चा हो सकती है। रेणुका सिंह ठाकुर को इस टूर्नामेंट में कम मौके मिले। वह टीम की मुख्य पेसर बन सकती है। क्रांति गौड़ और अरुंधती रेड्डी एक ही कलेवर की गेंदबाज हैं। ऐसे में दोनों के बीच प्रतियोगिता हो सकती है।

स्पिन विभाग में श्री चरणी टीम की मुख्य गेंदबाज है और उनके इर्दगिर्द दीप्ति शर्मा और शेफाली वर्मा को घुमाया जा सकता है लेकिन शेफाली से फाइनल में 4 ओवर का स्पैल करवाने जैसी बेवकूफी अब टीम प्रबंधन नहीं करेगा। कुल मिलाकर फैंस एक युवा भारतीय महिला टी-20 टीम की उस ही तरह मांग कर रहे हैं जैसे साल 2022 में रोहित कोहली की टीम जब सेमीफाइनल हार के आई थी।