हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए एक्शन में योगी सरकार, जल जीवन मिशन की होगी जमीनी मॉनिटरिंग

Yogi Adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार जल जीवन मिशन को केवल योजनाओं तक सीमित न रखकर उसकी जमीनी गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में भी लगातार सक्रिय है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए अब जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह स्वयं गांवों में जाकर नल से जलापूर्ति व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करेंगे।

 

15 से 25 जुलाई के बीच प्रस्तावित इस विशेष अभियान के तहत जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह एक दर्जन से अधिक जिलों के गांवों का दौरा करेंगे। इस दौरान वे न केवल पेयजल आपूर्ति और पानी की गुणवत्ता की जांच करेंगे, बल्कि ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं और सुझाव भी जानेंगे। इस अभियान में नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उनके साथ रहेंगे।
 

जलशक्ति मंत्री और विभागीय अधिकारी गांवों में रात्रि विश्राम भी करेंगे। इस दौरान ग्रामीणों से सीधे संवाद स्थापित किया जाएगा और योजनाओं की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष आकलन होगा। निरीक्षण के दौरान गांवों में 'जल अर्पण' कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिनमें ग्रामीणों को जलापूर्ति व्यवस्था के संरक्षण और संचालन में सहभागी बनाया जाएगा।

 

जिलों के दौरे के साथ ग्रामीणों से लिया जाएगा फीडबैक

15 और 16 जुलाई को जलशक्ति मंत्री ललितपुर, झांसी और जालौन के गांवों का औचक निरीक्षण करेंगे। इसके बाद 18 और 19 जुलाई को सुल्तानपुर, जौनपुर, मिर्जापुर और सोनभद्र के ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर जलापूर्ति व्यवस्था का जायजा लेंगे। इन सभी स्थानों पर वे ग्रामीणों से सीधा फीडबैक लेकर योजनाओं के प्रभाव का मूल्यांकन करेंगे।

 

यमुना की सफाई के लिए संतों और ग्रामीणों से संवाद

24 जुलाई को जलशक्ति मंत्री मथुरा में संतों के साथ विशेष संवाद करेंगे। इस बैठक में यमुना नदी की स्वच्छता और संरक्षण को लेकर सुझाव लिए जाएंगे। साथ ही यमुना तटवर्ती ग्रामीणों को भी इस अभियान से जोड़कर नदी सफाई के प्रति जागरूक किया जाएगा।

 

जलापूर्ति में लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन मुख्यालय में सोमवार को आयोजित समीक्षा बैठक में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि किसी जिले से जलापूर्ति संबंधी शिकायत प्राप्त होती है तो संबंधित चीफ इंजीनियर और अधीक्षण अभियंता के विरुद्ध जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी चीफ इंजीनियरों को प्रत्येक परियोजना की व्यक्तिगत समीक्षा करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने निर्देश दिए कि सभी चीफ इंजीनियर अपने स्तर पर भी गांवों में जल अर्पण कार्यक्रम का आयोजन करें। इन आयोजनों में ग्रामवासियों को जलापूर्ति की व्यवस्था सौंपने के साथ-साथ ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति भी सचेत किया जाए। Edited by : Sudhir Sharma

Gold Price: पुराने गहनों की बिक्री 43% बढ़ी, कीमत गिरने के डर से मुनाफा वसूल रहे लोग

Gold Price: भारतीय परिवारों में पुराने गहने बेचने का चलन तेजी से बढ़ा है। इसकी वजह सोने का भाव है। दरअसल, लोगों को डर है कि इस साल की रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद सोने के दाम और नीचे आ सकते हैं। ऐसे में कई लोग अभी मुनाफा वसूलना बेहतर समझ रहे हैं।

43% बढ़ी पुराने सोने की बिक्री

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में करीब 50 टन पुराने सोने की बिक्री हुई। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 43% ज्यादा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की कीमत करीब 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ गई है। इसके बाद भी लोगों को आशंका है कि भाव 1.20 लाख रुपये तक गिर सकते हैं। इसी वजह से कई लोग पुराने गहनों को बदलने की बजाय सीधे बेचकर नकद ले रहे हैं।

क्यों बेच रहे हैं लोग?

IBJA के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता के मुताबिक, लोग ऊंची कीमत का फायदा उठाकर नकदी जुटाना चाहते हैं।

उनका कहना है कि साल की शुरुआत में सोना करीब 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। अब कीमत घटकर करीब 1.40 लाख रुपये रह गई है। ऐसे में लोगों को डर है कि आगे और गिरावट आ सकती है, इसलिए वे अभी सोना बेच रहे हैं।

गोल्ड रीसाइक्लिंग को मिल रही रफ्तार

पुराने सोने की बढ़ती बिक्री से देश के संगठित गोल्ड रीसाइक्लिंग कारोबार को भी फायदा हो रहा है। अब लोग घर में पड़ा बेकार सोना बेचकर उसे फिर से बाजार में ला रहे हैं।

इंडस्ट्री के मुताबिक, 2025 में भारत में 125 से 150 टन रीसाइकल्ड गोल्ड बाजार में आया था। अगर मौजूदा रुझान जारी रहा, तो 2026 में यह आंकड़ा 200 से 250 टन तक पहुंच सकता है।

आयात पर निर्भरता घटाने में मिलेगी मदद

भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयात करने वाले देशों में शामिल है। FY26 में देश ने करीब 72.4 अरब डॉलर का सोना आयात किया। इंडस्ट्री का मानना है कि अगर पुराने सोने की रीसाइक्लिंग बढ़ती है, तो आयात पर निर्भरता कम होगी। साथ ही, घरेलू बाजार में सोने की उपलब्धता भी बढ़ेगी।

क्या अब सुरक्षित निवेश नहीं रहा सोना? युद्ध के बीच भी लगातार चौथे महीने गिरा दाम

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क्या Pakistan के साथ Track 2 Dialogue करेगा भारत, विदेश सचिव का बड़ा बयान

भारत सरकार ने भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे कथित Track 2 Dialogue को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए इससे दूरी बना ली है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि इस तरह की बैठकें पूरी तरह निजी पहल होती हैं और इनमें भारत सरकार की कोई आधिकारिक भागीदारी या समर्थन नहीं होता। उन्होंने बताया कि जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यापार समझौते को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति बनी थी।

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मीडिया सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि ऐसे अनौपचारिक संवाद नए नहीं हैं और न ही इन्हें भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनियाभर में इस तरह की कई निजी बैठकें विभिन्न विषयों पर होती रहती हैं, जिनका सरकार से कोई संबंध नहीं होता।  विक्टोरिया (सेशेल्स) में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विदेश सचिव ने बताया कि कोलंबो में हुए हालिया कार्यक्रम में भारत और पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी, पूर्व राजनयिक और अन्य विशेषज्ञ शामिल हुए थे, लेकिन यह एक निजी स्तर का आयोजन था।

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उन्होंने कहा कि ऐसे दर्जनों आयोजन दुनिया भर में होते रहते हैं। इनमें कुछ भी नया या विशेष नहीं है। ये पूरी तरह निजी संस्थाओं द्वारा आयोजित निजी कार्यक्रम होते हैं। भारत सरकार की इसमें कोई आधिकारिक भागीदारी या समर्थन नहीं है। 

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मिस्री ने यह भी साफ किया कि इनमें शामिल भारतीय प्रतिभागी- चाहे वे पूर्व राजनयिक हों या पूर्व सैन्य अधिकारी- अपनी व्यक्तिगत क्षमता में हिस्सा लेते हैं और उनके विचार सरकार की आधिकारिक नीति को नहीं दर्शाते। इसके अलावा विदेश सचिव ने भारत- अमेरिका व्यापार वार्ता का भी जिक्र किया। Edited by : Sudhir Sharma

मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की तैयारी, किसे मिलेगा मौका और किसकी होगी छुट्‍टी, किसका बदलेगा विभाग

modi cabinet reshuffle: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मोदी सरकार 3.0 के पहले बड़े 'मिड-टर्म रीसेट' यानी केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल की तैयारियां अंतिम चरण में मानी जा रही हैं। हाल ही में केंद्रीय राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद इन अटकलों को और बल मिला है। इस फेरबदल में न केवल कई मंत्रियों के विभाग बदलेंगे, बल्कि खराब परफॉर्मेंस वाले चेहरों की छुट्टी भी हो सकती है, जबकि चुनावी राज्यों के युवा चेहरों को टीम मोदी में एंट्री मिलने की उम्मीद है।

 

जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले इस पूरी कवायद को अंजाम दिया जा सकता है। यह फेरबदल केवल प्रशासनिक स्तर पर विभागों का बदलाव नहीं होगा, बल्कि इसके जरिए आगामी विधानसभा चुनावों (उत्तर प्रदेश, बिहार) और 2029 के सियासी समीकरणों को साधने की भी कोशिश की जाएगी। मंगलवार यानी 30 जून को मोदी सभी विभागों के सचिवों के साथ भी बैठक करने वाले हैं। संभवत: इस बैठक के माध्यम से वे मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा भी कर लें। ALSO READ: भारत की समुद्री शक्ति को नई उड़ान, PM मोदी ने INS Dunagiri, Agray और Sanshodhak किए कमीशन

 

यह बदलाव सरकार के साथ-साथ भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में भी दिखेगा, जहां पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में 'टीम नितिन नबीन' का भी ऐलान होने जा रहा है। माना जा रहा है कि जिन मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा, उन्हें संगठन में एडजस्ट किया जा सकता है। अगले साल यानी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव खासकर उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात को ध्यान में रखते हुए वहां के नेताओं को मंत्रिमंडल में स्थान ज्यादा मिल सकता है। इसके साथ ही जिन मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो चुका है, साथ ही उन्हें दोबारा नहीं चुना गया है, उनकी छुट्‍टी भी तय मानी जा रही है। 

किसकी हो सकती है छुट्टी?

इस फेरबदल में 'परफॉर्मेंस' और 'संगठनात्मक जरूरत' को सबसे बड़ा पैमाना बनाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कई बड़े और चौंकाने वाले नाम इस लिस्ट में शामिल हो सकते हैं। कुछ मंत्रालयों से जुड़े हालिया विवादों के बाद मंत्रियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। विशेष रूप से पेपर लीक मामलों और अन्य प्रशासनिक विसंगतियों के चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक भविष्य को लेकर कयासों का बाजार गर्म है।

 

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष बने पंकज चौधरी और दिल्ली भाजपा की कमान संभालने वाले हर्ष मल्होत्रा जैसे नेताओं को 'एक व्यक्ति-एक पद' के नियम के तहत संगठन में पूरी तरह सक्रिय करने के लिए मंत्री पद से मुक्त किया जा सकता है। हाल ही में जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने और पार्टी द्वारा उन्हें दोबारा न भेजे जाने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। इसी तरह हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा के संदर्भ में भी चर्चाएं तेज हैं। ALSO READ: नीट विवाद के बीच 11 छात्रों ने की खुदकुशी, अभिजीत दीपके ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, 1 करोड़ मुआवजे की मांग

किसे मिल सकता है मौका?

कैबिनेट विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन के साथ-साथ युवाओं को तरजीह दी जाएगी। उत्तर प्रदेश और पंजाब के आगामी चुनावों को देखते हुए इन राज्यों से नए सामाजिक समीकरणों को साधने वाले चेहरों को शामिल किया जाएगा। बिहार से मुख्‍यमंत्री पद छोड़कर केन्द्र में आए नीतीश कुमार को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलना तय है। उन्हें उनकी पसंद का रेल मंत्रालय भी दिया जा सकता है।

पंजाब चुनाव को देखते हुए आप छोड़कर आए राघव चड्‍ढा और भाजपा नेता चुघ को मंत्री बनाया जा सकता है। टीएमसी और शिवसेना यूबीटी छोड़कर आए नेताओं को भी मौका मिल सकता है। शिवसेना से एकनाथ शिंदे के बेटे एकनाथ शिंदे का नाम प्रमुखता से चल रहा है। इनके साथ ही कुछ महिला चेहरों को भी मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है। 

किसका बदलेगा विभाग?

वित्त मंत्रालय और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े भारी-भरकम मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की गई है। चर्चा है कि नितिन गडकरी को कुछ अतिरिक्त या नए महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि कुछ अन्य आर्थिक मंत्रालयों में मंत्रियों के पोर्टफोलियो बदले जा सकते हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का विभाग बदलकर उन्हें शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। सरकार से संगठन में बदलाव: कुछ कद्दावर मंत्रियों को सरकार से हटाकर संगठन (BJP) में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष या महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भेजा जा सकता है, ताकि राज्य स्तर पर पार्टी को मजबूत किया जा सके।

क्या है इस फेरबदल की मुख्य वजह?

सरकार चाहती है कि संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले नए मंत्री अपने विभागों को संभाल लें ताकि विपक्ष के हमलों का मजबूती से जवाब दिया जा सके। बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम की घोषणा भी इसी के साथ होनी है, जिससे सरकार और संगठन में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके। कहा जा रहा है कि विभिन्न राज्यों के आगामी चुनावों में किसी भी प्रकार के असंतोष को थामने के लिए जमीनी पकड़ रखने वाले नेताओं को आगे लाने की योजना है।

 

दिल्ली के सियासी गलियारों में बैठकों का दौर जारी है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की जेपी नड्डा और नितिन नबीन के साथ अंतिम दौर की चर्चा पूरी हो चुकी है और जल्द ही नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण की तारीख सामने आ सकती है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के अगले विदेश दौरे से पहले नए मं‍त्री शपथ ले सकते हैं। 

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

 

IND vs ENG: डेब्यू के लिए वैभव सूर्यवंशी को करना होगा और इंतजार? भारत के कोच ने किया बड़ा खुलासा

भारत का 2 मैचों की टी20 सीरीज का आयरलैंड दौरा खत्म हो गया। भारत को इस दौरे पर 2-0 से करारी शिकस्त मिली है। वहीं अब इस हार को भुलाकर भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबला खेलने उतरेगी। भारत और इंग्लैंड के बीच 5 मैचों की टी20 सीरीज का शुरुआत 1 जुलाई से होगी। इस सीरीज में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय डेब्यू को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं भारतीय टीम के सहायक कोच रायन टेन डोएशेट ने कहा कि, युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने की पूरी क्षमता है। उन्होंने साफ किया कि सिर्फ प्रतिभा के आधार पर टीम में जगह नहीं मिलती। 15 वर्षीय वैभव को भी बाकी खिलाड़ियों की तरह लगातार अच्छा प्रदर्शन करके अपनी जगह पक्की करनी होगी।

आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में भारत की 2-0 से हार के बाद युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में मौका न मिलने को लेकर काफी चर्चा हुई। दूसरे मुकाबले में भारत को 1 रन से हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद कई लोगों ने सवाल उठाया कि वैभव को टीम में शामिल क्यों नहीं किया गया।

टेन डोएशेट ने क्या कहा

टेन डोएशेट ने मैच के बाद कहा, “वैभव सूर्यवंशी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। लेकिन संजू सैमसन भी ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने कुछ महीने पहले हमें टी20 विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई थी।” उन्होंने आगे कहा कि टीम मैनेजमेंट लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखना चाहता है। उन्होंने आगे कहा, “खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें लंबे समय तक मौके देना हमारे लिए जरूरी है। हम भी वैभव को खेलते हुए देखने के लिए एक्साईटमेंट हैं, लेकिन उन्हें भी बाकी खिलाड़ियों की तरह अपनी बारी का इंतज़ार करना होगा। उनकी टैलेंट पर किसी को कोई शक नहीं है।”

बैटिंग कोच ने भी कहीं थी ये बात

सहायक कोच रायन टेन डोएशेट की राय बल्लेबाजी कोच सीतांशु कोटक के पहले दिए गए बयान से मिलती-जुलती है। सीरीज शुरू होने से पहले भी कोटक ने कहा था कि वैभव सूर्यवंशी को लेकर काफी एक्साईटेड है, लेकिन उन्हें टीम में जगह पाने के लिए सही समय का इंतजार करना होगा। उनका मानना था कि हर खिलाड़ी की तरह वैभव को भी अपने प्रदर्शन के दम पर मौका मिलेगा। अगर वैभव को इस दौरे पर खेलने का मौका मिलता है, तो वह भारत के सबसे कम उम्र के पुरुष इंटरनेशनल क्रिकेटर बन जाएंगे। वहीं वैभव सचिन तेंदुलकर के 16 साल के डेब्यू का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ देंगे।

आईपीएल में खेली शानदार पारी

वैभव सूर्यवंशी ने अपने शानदार आईपीएल प्रदर्शन से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। बाएं हाथ के इस युवा ओपनर ने पूरे सीजन में 230 से अधिक के स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाए और सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने। उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर और इमर्जिंग प्लेयर दोनों पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिसके बाद उन्हें भारत के सबसे होनहार युवा खिलाड़ियों में गिना जाने लगा।

Yamuna Water Pact Explained: राजस्थान का हरियाणा संग खत्म हुआ 30 साल पुराना झगड़ा, यमुना का पानी कैसे और कितना मिलेगा सब जानिए

राजस्थान और हरियाणा ने सोमवार को यमुना जल परियोजना को लागू करने के लिए एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के साथ यमुना नदी के पानी के बंटवारे को लेकर करीब 30 साल से चला आ रहा विवाद खत्म हो गया। राजधानी दिल्ली में हुए इस समझौते पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए। सरकार का कहना है कि इस समझौते से दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे का रास्ता साफ हो गया है।

हरियाणा और राजस्थान के बीच 1994 में समझौता हुआ था। इसके तहत सरप्लस पानी राजस्थान को देने की बात हुई थी लेकिन इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका था और इस कारण राजस्थान का शेखावटी क्षेत्र पानी के संकट से जूझ रहा था।

 खत्म हुआ 30 साल पुराना झगड़ा

समझौते के अनुसार, हर साल जुलाई से अक्टूबर के बीच राजस्थान को यमुना नदी का करीब 580 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी दिया जाएगा। यह पानी तीन बड़ी भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए पहुंचाया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य दोनों राज्यों के लोगों को बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध कराना है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, इस समझौते में पानी के बंटवारे, परियोजना की लागत, पानी की आपूर्ति, बुनियादी ढांचे के रखरखाव, निगरानी व्यवस्था और किसी भी विवाद के समाधान के लिए स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। मंत्रालय का कहना है कि इस समझौते को इस तरह तैयार किया गया है, ताकि भविष्य में पानी के बंटवारे को लेकर किसी तरह का विवाद न हो और दोनों राज्यों को लंबे समय तक इसका लाभ मिलता रहे।

राजस्थान के इन जिलों को होगा फायदा 

इस परियोजना से राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनूं जिलों के साथ-साथ हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद जिले के लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराया जाएगा। समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह परियोजना दोनों राज्यों में पेयजल की समस्या को काफी हद तक दूर करने में मदद करेगी। उन्होंने बताया कि जो पानी पहले बेकार बह जाता था, अब उसे बड़े तालाबों में जमा करके भूजल स्तर बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

इस योजना के तहत राजस्थान को पश्चिमी यमुना नहर से जुड़ी भूमिगत पाइपलाइन के जरिए यमुना नदी के पानी का उसका तय हिस्सा मिलेगा। इससे वर्ष 1994 में हुए समझौते के तहत राजस्थान को आवंटित यमुना जल का बेहतर तरीके से उपयोग किया जा सकेगा।

July 2026 Pradosh Vrat: जुलाई में इस दिन किया जाएगा प्रदोष व्रत, जानें दोनों उपवासों की सही तारीख और पूजा का शुभ समय

July 2026 Pradosh Vrat: हिंदी कैलेंडर में हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव कैलाश पर प्रदोष काल में प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते है। इसलिए त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष काल में पूजा का विशेष महत्व है। इस व्रत का नाम भी प्रदोष व्रत इसी कारण पड़ा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नियमित प्रदोष व्रत करने से पितृ दोष से शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। जुलाई में लगभग पूरे समय आषाढ़ का महीना रहेगा। इस माह में भी हर माह की तरह दो प्रदोष व्रत किए जाएंगे। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस माह में दोनों प्रदोष व्रत रविवार को होने का संयोग बन रहा है। ऐसे में इन्‍हें रवि प्रदोष कहा जाएगा। आइए जानें इस दोनों व्रतों की सही तारीख और पूजा का शुभ समय क्या रहेगा?

आषाढ़ कृष्ण पक्ष रवि प्रदोष व्रत 2026

इस बार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष का रवि प्रदोष व्रत रविवार 12 जुलाई 2026 को मनाया जाएगा। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है। ऐसे में शिव और सूर्य का संयोग बहुत ही शुभ माना गाया है। इस दिन भक्‍त व्रत रखकर इन दोनों का ही आशीर्वाद पा सकते हैं। साथ ही इस संयोग से जीवन में मान-सम्‍मान बढ़ता है और दीर्घ आयु मिलती है।

आषाढ़ कृष्ण पक्ष रवि प्रदोष व्रत पूजा का मुहूर्त

12 जुलाई 2026 को प्रात: 2 बजकर 4 मिनट पर त्रयोदशी तिथि का आरंभ होगा और रात्रि 10 बजकर 29 मिनट पर त्रयोदशी तिथि समाप्‍त हो जाएगी। प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शाम 7 बजकर 22 मिनेट से लेकर रात्रि 9 बजकर 24 मिनट तक का समय सबसे शुभ है।

आषाढ़ शुक्ल पक्ष रवि प्रदोष व्रत 2026

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष का रवि प्रदोष व्रत रविवार 26 जुलाई 2026 को मनाया जाएगा। आषाढ़ में पड़ने वाले प्रदोष व्रत में भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करने से, सभी पापों से मुक्ति मिलती है। धार्मिक शास्‍त्रों के आधार पर यह वो समय होता है, जब भगवान शिव प्रसन्‍न होते हैं और भक्‍तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

आषाढ़ शुक्ल पक्ष रवि प्रदोष व्रत पूजा का मुहूर्त

26 जुलाई 2026 को दोपहर 1 बजकर 57 मिनट पर त्रयोदशी तिथि आरंभ होगी और 27 जुलाई 2026 को शाम 4 बजकर 14 मिनट पर तिथि समाप्‍त हो जाएगी। प्रदोष व्रत की पूजा 26 जुलाई को शाम 7 बजकर 16 मिनट से लेकर रात्रि 9 बजे से लेकर 21 मिनट तक की जा सकती है।

रवि प्रदोष का महत्‍व

रवि प्रदोष का व्रत रखने से भक्‍त निरोग रहता है और समाज में उसका यश भी बढ़ता है। साथ ही भगवान शिव और सूर्य देव की विशेष कृपा भी प्रप्‍ता होती है।

Jyeshtha Purnima 2026 Upay: आज ज्येष्ठ पूर्णिमा पर आज सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए जरूर करें ये उपाय, जानें इनके बारे में

Stocks to Watch: 30 जून को फोकस में रहेंगे ये 10 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: शेयर बाजार में मंगलवार, 30 जून को कई कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। कुछ कंपनियों ने बड़े ऑर्डर हासिल किए हैं, तो कुछ ने फंड जुटाने, डिविडेंड, अधिग्रहण और मैनेजमेंट से जुड़े अहम ऐलान किए हैं। इससे इन 10 शेयरों में हलचल दिख सकती है।

HDFC Bank और Axis Bank

प्राइवेट सेक्टर के Axis Bank के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) पुनीत शर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, पुनीत HDFC Bank अपने अगले CFO बन सकते हैं। वह मौजूदा CFO श्रीनिवासन वैद्यनाथन की जगह ले सकते हैं।

BSE

स्टॉक एक्सचेंज BSE 1 जनवरी 2027 से अपने इंटरनेशनल मार्केट डेटा बिजनेस को खुद संभालेगी। अभी यह काम Deutsche Börse AG करती है। इससे विदेशी ग्राहकों को BSE की सेवाएं सीधे मिलेंगी और कंपनी को अपने ग्लोबल मार्केट डेटा कारोबार पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा।

Sterling & Wilson Renewable Energy

रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी Sterling & Wilson Renewable Energy को विदेश में करीब 56 करोड़ डॉलर का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर उसकी 50:50 जॉइंट वेंचर कंपनी को मिस्र के West Minya Solar Project के लिए मिला है।

Afcons Infrastructure

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Afcons Infrastructure ने FY26 के लिए प्रस्तावित 2 रुपये प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की रिकॉर्ड डेट 23 जुलाई 2026 तय की है। कंपनी की 50वीं AGM 30 जुलाई को होगी। शेयरधारकों की मंजूरी मिलने पर डिविडेंड का भुगतान 28 अगस्त 2026 तक कर दिया जाएगा।

RITES

सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी RITES ने Container Corporation of India (CONCOR) के साथ एक समझौता (MoU) किया है। इसके तहत दोनों कंपनियां लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी (PMC) सेवाओं में साथ मिलकर काम करेंगी।

Bandhan Bank

प्राइवेट सेक्टर के बैंक Bandhan Bank ने बताया कि उसके चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) और की मैनेजेरियल पर्सन राजीव मंत्री ने इस्तीफा दे दिया है। बैंक को उनका इस्तीफा 29 जून 2026 को मिला।

Yes Bank

प्राइवेट सेक्टर के बैंक Yes Bank के बोर्ड ने 7,500 करोड़ रुपये तक के योग्य सिक्योरिटीज जारी कर फंड जुटाने और 8,500 करोड़ रुपये तक के डेट सिक्योरिटीज जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके लिए शेयरधारकों और नियामकीय मंजूरी की जरूरत होगी।

Jagsonpal Pharmaceuticals

फार्मा कंपनी Jagsonpal Pharmaceuticals ने Aequitas Healthcare Pvt. Ltd. में 85% हिस्सेदारी खरीदने के लिए शेयर परचेज एग्रीमेंट (SPA) किया है। इस अधिग्रहण से कंपनी घरेलू दवा बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।

Juniper Hotels

होटल कंपनी Juniper Hotels ने बताया कि उसके चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) तरुण जेटली ने इस्तीफा दे दिया है। वह 15 जुलाई 2026 से अपने पद से हट जाएंगे।

SJVN

सरकारी पावर कंपनी SJVN ने Gujarat Urja Vikas Nigam Ltd (GUVNL) के साथ तीन जलविद्युत परियोजनाओं से ग्रीन पावर सप्लाई के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) पर हस्ताक्षर किए हैं। हिमाचल प्रदेश की धौलासिद्ध (66 मेगावाट), लुहरी स्टेज-I (210 मेगावाट) और सुन्नी डैम (382 मेगावाट) परियोजनाओं की कुल क्षमता 658 मेगावाट होगी।

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ओबीसी युवाओं को डिजिटल ताकत दे रही योगी सरकार, ओ लेवल-सीसीसी प्रशिक्षण बना सहारा

OBC Digital Training

Yogi Government OBC Digital Training: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगारपरक योजनाओं को नई दिशा मिली है। इसी क्रम में पिछड़ा वर्ग के युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई ओ लेवल एवं सीसीसी कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना युवाओं के लिए बड़ी सौगात बनकर सामने आई है।

 

योगी सरकार ने इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दिया है। इच्छुक छात्र-छात्राएं 10 जुलाई 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट http://obccomputertraining.upsdc.gov.in पर आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 1 अगस्त 2026 से प्रशिक्षण शुरू हो जाएगा।

नीलिट से मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से कराया जाता है प्रशिक्षण

पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित इस योजना के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के युवक-युवतियों को 'ओ' लेवल और 'सीसीसी' कंप्यूटर प्रशिक्षण निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना का लाभ उन्हीं ओबीसी छात्र-छात्राओं को मिलेगा, जिन्होंने इंटरमीडिएट उत्तीर्ण किया हो। साथ ही उनके माता-पिता या अभिभावक की वार्षिक आय 1 लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए। इसके अलावा लाभार्थी किसी अन्य शिक्षण संस्थान से छात्रवृत्ति प्राप्त नहीं कर रहा हो। विशेष बात यह है कि प्रशिक्षण भारत सरकार की नीलिट से मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से कराया जाता है। 

तीन महीने में पूरा होता है सीसीसी कोर्स

'ओ' लेवल कंप्यूटर प्रशिक्षण की अवधि एक वर्ष निर्धारित है, जबकि 'सीसीसी' कोर्स तीन महीने में पूरा होता है। दोनों ही पाठ्यक्रम रोजगार की दृष्टि से बेहद उपयोगी माने जाते हैं। इस योजना के तहत 'ओ' लेवल प्रशिक्षण के लिए प्रति छात्र 15,000 रुपये की राशि सरकार द्वारा वहन की जाती है। वहीं 'सीसीसी' प्रशिक्षण के लिए प्रति छात्र 3,500 रुपये का भुगतान सीधे विभाग द्वारा किया जाता है। इससे छात्रों पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ता है और वे पूरी तरह निःशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त कर पाते हैं।

पिछले वर्ष हजारों छात्रों ने प्रशिक्षण किया प्राप्त

वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के अंतर्गत कुल 29,191 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें 22,407 छात्रों ने 'ओ' लेवल और 6,784 छात्रों ने 'सीसीसी' कोर्स पूरा किया है। प्रदेश में वर्तमान समय में कुल 299 संस्थाएं इस योजना के तहत चयनित हैं। इनमें 52 संस्थान केवल ओ लेवल, 43 संस्थान केवल सीसीसी और 204 संस्थान दोनों कोर्स संचालित कर रहे हैं। 

 

पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने सभी पात्र छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे 10 जुलाई 2026 तक विभाग की ओर से जारी आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन जरूर करें। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण न केवल युवाओं को डिजिटल रूप से दक्ष बनाएगा, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और रोजगार के लिए सक्षम बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Edited by: Vrijenedra Singh Jhala 

योगी सरकार का बड़ा फैसला, 1.04 करोड़ रुपए से संवरेगा गोमती नदी का उद्गम स्थल, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। अयोध्या, काशी, मथुरा, नैमिषारण्य और विंध्य धाम जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों के व्यापक विकास के बाद अब प्रदेश सरकार ने जीवनदायिनी मां गोमती नदी के उद्गम स्थल को भी विश्वस्तरीय पर्यटन एवं आस्था केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।

इसी क्रम में पीलीभीत जनपद के पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र की कलीनगर तहसील स्थित गोमती उद्गम स्थल के विकास के लिए पर्यटन विभाग ने 1.04 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की है। इसके तहत प्रथम चरण में 78 लाख रुपये की धनराशि जारी कर दी गई है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन का नया आकर्षण बनेगा।

 

करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका का आधार

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मानव सभ्यता का विकास सदैव नदियों के तटों पर हुआ है। प्रदेश की जीवनदायिनी एवं सांस्कृतिक आस्था की प्रतीक गोमती नदी का उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटांडा ग्राम के समीप गोमत ताल (पूर्व नाम फुलहर झील) से होता है। सनातन परंपरा में अत्यंत प्रतिष्ठित गोमती नदी प्रदेश के विशाल भूभाग को सिंचित करते हुए करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका का आधार है। उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग द्वारा गोमती उद्गम स्थल को एक प्रमुख आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा रहा है।

 

पर्यटन आकर्षण के लिए होंगे कई काम

परियोजना के अंतर्गत श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए आधुनिक आधारभूत संरचनाओं का निर्माण कराया जाएगा। इसके तहत लगभग 48.69 लाख रुपये की लागत से बहुउद्देशीय हॉल बनाया जाएगा, जबकि 13.44 लाख रुपये से आधुनिक शौचालय ब्लॉक और 9.45 लाख रुपये से शेड का निर्माण कराया जाएगा।

इसके अतिरिक्त इंटरलॉकिंग मार्ग, आकर्षक उद्यान एवं सौंदर्यीकरण, सोलर आधारित सुविधाओं, अन्य यात्री सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। इस परियोजना को पूरा करने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) को मिली है।

 

धार्मिक विरासत को मिलेगा सम्मान

गोमती नदी को सनातन परंपरा में विशेष सम्मान प्राप्त है। इसका उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटांडा क्षेत्र स्थित पौराणिक फुलहर झील (गोमत ताल) से होता है। लगभग 960 किलोमीटर की यात्रा करते हुए यह नदी पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, सुल्तानपुर और जौनपुर आदि जनपदों को जीवन प्रदान करती हुई अंततः गाजीपुर जिले में गंगा नदी में समाहित हो जाती है।
 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने गोमती नदी में स्नान कर पुण्य अर्जित किया था। वहीं नैमिषारण्य में 33 कोटि देवी-देवताओं की तपस्थली भी गोमती नदी के तट पर ही मानी जाती है। यही कारण है कि गोमती नदी प्रदेश की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की वाहक मानी जाती है।

 

मां गोमती सनातन आस्था की प्रतीक

मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश अपनी प्राकृतिक धरोहरों को विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। मां गोमती का उद्गम स्थल महज एक भौगोलिक बिंदु न होकर, हमारी सनातन आस्था और लोकजीवन का महत्वपूर्ण स्थल भी है। इसके समग्र विकास से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। हमारा प्रयास है कि प्रदेश की प्रत्येक पवित्र धरोहर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर सम्मानजनक स्थान दिलाया जाए। Edited by : Sudhir Sharma