गुरुग्राम को मिली बड़ी सौगात! 27 स्टेशनों वाली नई मेट्रो लाइन से बदल जाएगी शहर की तस्वीर

अगर आप गुरुग्राम में रहते हैं या रोजाना मेट्रो से सफर करते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। शहर में जल्द ही 28.5 किलोमीटर लंबा नया मेट्रो कॉरिडोर तैयार होने जा रहा है, जिससे लाखों यात्रियों का सफर पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज होगा। इस परियोजना के पूरा होने के बाद पुराने गुरुग्राम के कई इलाकों को पहली बार मेट्रो कनेक्टिविटी मिलेगी। साथ ही यात्रियों को एक मेट्रो लाइन से दूसरी लाइन पर बिना स्टेशन से बाहर निकले ट्रेन बदलने की सुविधा भी मिलेगी। आधुनिक इंटरचेंज स्टेशन और डबल डेकर ट्रैक इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत होंगे।

मेट्रो के इस नए कॉरिडोर में होंगे 27 स्टेशन

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुग्राम में लोगों का मेट्रो सफर जल्द ही और आसान होने वाला है। शहर में 28.5 किलोमीटर लंबा नया मेट्रो कॉरिडोर बनाया जाएगा। इस परियोजना के पूरा होने के बाद यात्रियों को एक मेट्रो लाइन से दूसरी लाइन पर आसानी से बदलने की सुविधा मिलेगी। साथ ही, पुराने गुरुग्राम के उन इलाकों तक भी मेट्रो पहुंचेगी, जहां अभी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।

यह नया मेट्रो कॉरिडोर 27 स्टेशनों वाला होगा। इसकी शुरुआत मिलेनियम सिटी सेंटर से होगी, जो दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन से जुड़ा है। इसके बाद यह मेट्रो सेक्टर-45, साइबर पार्क, सुभाष चौक, पालम विहार, उद्योग विहार फेज-1 और साइबर सिटी जैसे प्रमुख इलाकों से होकर गुजरेगी। इस रूट का अंतिम स्टेशन द्वारका एक्सप्रेसवे स्पर पर सेक्टर-101 होगा।

बनेंगे ये बड़े इंटरचेंज

रिपोर्ट के मुताबिक, रूट का निरीक्षण करने के बाद गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) के प्रबंध निदेशक चंद्र शेखर खरे ने बताया कि इस परियोजना में आधुनिक मल्टी-मॉडल ट्रांसफर हब और डबल डेकर एलिवेटेड ट्रैक बनाए जाएंगे। इससे यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और भीड़भाड़ वाले इलाकों में जमीन अधिग्रहण की जरूरत भी कम पड़ेगी। इस परियोजना के तहत साइबर सिटी और मिलेनियम सिटी सेंटर में बड़े इंटरचेंज स्टेशन बनाए जाएंगे।

साइबर सिटी में यात्री एक ही परिसर के अंदर नई जीएमआरएल मेट्रो लाइन, मौजूदा रैपिड मेट्रो और भविष्य में बनने वाले दिल्ली-अलवर रैपिड रेल कॉरिडोर के बीच आसानी से ट्रेन बदल सकेंगे। वहीं, मिलेनियम सिटी सेंटर पर दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन के साथ प्लेटफॉर्म-टू-प्लेटफॉर्म इंटरचेंज की सुविधा मिलेगी। यानी यात्रियों को ट्रेन बदलने के लिए स्टेशन से बाहर निकलने की जरूरत नहीं होगी।

इस परियोजना के तहत सुभाष चौक पर प्रस्तावित भोंडसी मेट्रो लाइन, हीरो होंडा चौक पर दिल्ली-एसएनबी रैपिड रेल कॉरिडोर (आरआरटीएस), सेक्टर-5 में गुरुग्राम रेलवे स्टेशन और सेक्टर-10 में बनने वाले मेगा बस टर्मिनल को भी मेट्रो से जोड़ने की योजना है। इससे यात्रियों को अलग-अलग परिवहन सेवाओं के बीच आसानी से सफर करने की सुविधा मिलेगी।

फ्लाईओवर के ऊपर बनाया जाएगा मेट्रो ट्रैक

पुराने गुरुग्राम में जगह की कमी को देखते हुए गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) सेक्टर-7 से साइबर सिटी के बीच डबल डेकर मेट्रो स्टेशन बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इस हिस्से में बाजघेरा रोड और सेक्टर-21 भी शामिल हैं। इस डिजाइन के तहत मेट्रो ट्रैक मौजूदा फ्लाईओवर के ऊपर बनाया जाएगा। इससे जमीन का कम अधिग्रहण करना पड़ेगा और निर्माण के दौरान ट्रैफिक भी कम प्रभावित होगा। इस नई मेट्रो परियोजना से सेक्टर-3, सेक्टर-4, सेक्टर-5, सेक्टर-7, सेक्टर-9, बसई और पालम विहार जैसे घनी आबादी वाले इलाकों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। वहीं, बसई गांव से सेक्टर-101 तक बनने वाले दो स्टेशनों वाले लिंक के जरिए तेजी से विकसित हो रहे द्वारका एक्सप्रेसवे को भी सीधा मेट्रो कनेक्शन मिलेगा।

आएगी इतनी लागत

मेट्रो परियोजना का निर्माण कार्य अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। करीब 1,503 करोड़ रुपये की लागत वाले पहले चरण का काम जारी है। इस चरण में 15.2 किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना के लिए कास्टिंग यार्ड शुरू हो चुके हैं और जीएमडीए कार्यालय से हीरो होंडा चौक तक पाइलिंग और पिलर बनाने का काम चल रहा है। गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) के अनुसार, मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर-9 तक का मेट्रो कॉरिडोर अगस्त 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 21 जुलाई तक इस पूरी परियोजना का करीब 11 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका था।

Yamuna Water Pact Explained: राजस्थान का हरियाणा संग खत्म हुआ 30 साल पुराना झगड़ा, यमुना का पानी कैसे और कितना मिलेगा सब जानिए

राजस्थान और हरियाणा ने सोमवार को यमुना जल परियोजना को लागू करने के लिए एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के साथ यमुना नदी के पानी के बंटवारे को लेकर करीब 30 साल से चला आ रहा विवाद खत्म हो गया। राजधानी दिल्ली में हुए इस समझौते पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए। सरकार का कहना है कि इस समझौते से दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे का रास्ता साफ हो गया है।

हरियाणा और राजस्थान के बीच 1994 में समझौता हुआ था। इसके तहत सरप्लस पानी राजस्थान को देने की बात हुई थी लेकिन इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका था और इस कारण राजस्थान का शेखावटी क्षेत्र पानी के संकट से जूझ रहा था।

 खत्म हुआ 30 साल पुराना झगड़ा

समझौते के अनुसार, हर साल जुलाई से अक्टूबर के बीच राजस्थान को यमुना नदी का करीब 580 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी दिया जाएगा। यह पानी तीन बड़ी भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए पहुंचाया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य दोनों राज्यों के लोगों को बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध कराना है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, इस समझौते में पानी के बंटवारे, परियोजना की लागत, पानी की आपूर्ति, बुनियादी ढांचे के रखरखाव, निगरानी व्यवस्था और किसी भी विवाद के समाधान के लिए स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। मंत्रालय का कहना है कि इस समझौते को इस तरह तैयार किया गया है, ताकि भविष्य में पानी के बंटवारे को लेकर किसी तरह का विवाद न हो और दोनों राज्यों को लंबे समय तक इसका लाभ मिलता रहे।

राजस्थान के इन जिलों को होगा फायदा 

इस परियोजना से राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनूं जिलों के साथ-साथ हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद जिले के लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराया जाएगा। समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह परियोजना दोनों राज्यों में पेयजल की समस्या को काफी हद तक दूर करने में मदद करेगी। उन्होंने बताया कि जो पानी पहले बेकार बह जाता था, अब उसे बड़े तालाबों में जमा करके भूजल स्तर बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

इस योजना के तहत राजस्थान को पश्चिमी यमुना नहर से जुड़ी भूमिगत पाइपलाइन के जरिए यमुना नदी के पानी का उसका तय हिस्सा मिलेगा। इससे वर्ष 1994 में हुए समझौते के तहत राजस्थान को आवंटित यमुना जल का बेहतर तरीके से उपयोग किया जा सकेगा।