Tata Sierra EV कल होगी लॉन्च, फीचर्स और रेंज ने मचाया तहलका, जानिए क्या मिलेगा खास

Tata Sierra EV कल यानी 30 जून को भारतीय बाजार में आधिकारिक तौर लॉन्च कर दी जाएगी। दिलचस्प बात यह है कि लॉन्च से पहले ही ब्रांड के टीजर से इसके बारे में काफी जानकारी मिल चुकी है। हाल ही में Tata Motors ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर Sierra EV के डिजाइन, इंटीरियर और कई फीचर्स की झलक दिखाई है। अगर आप इस कार और इसकी प्रतिद्वंद्वी कारों, जैसे Creta Electric या Mahindra BE 6 के बीच फैसला करने का इंतजार कर रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए अहम है, क्योंकि लॉन्च से पहले ही आपको इस कार के केबिन और ड्राइवट्रेन के बारे में काफी कुछ पता चल चुका है, जो आम तौर पर खरीदारों को लॉन्च के दिन ही पता चलता है।

Tata Sierra EV की रेंज की जानकारी

टाटा मोटर्स ने कन्फर्म किया है कि Tata Sierra EV के सबसे पावरफुल डुअल-मोटर AWD (ऑल-व्हील ड्राइव) वेरिएंट में 500 Nm का टॉर्क मिलेगा। इसके साथ बूस्ट मोड और अलग-अलग तरह की सड़कों पर बेहतर ड्राइविंग के लिए 6 कस्टमाइजेबल टेरेन मोड्स भी दिए जाएंगे।

उम्मीद की जा रही है कि Tata Sierra EV में Tata Harrier EV वाले बैटरी विकल्प मिलेंगे। इसमें 65 kWh बैटरी के साथ सिंगल-मोटर RWD वेरिएंट आ सकता है, जिसकी अनुमानित रेंज 538 किलोमीटर होगी। वहीं, 75 kWh बैटरी वाला सिंगल-मोटर RWD वेरिएंट लगभग 627 किलोमीटर की रेंज दे सकता है। इसके अलावा, डुअल-मोटर AWD वेरिएंट में पीछे 234.7 hp और आगे 156 hp की मोटर मिलने की उम्मीद है, जिसकी अनुमानित रेंज करीब 622 किलोमीटर हो सकती है।

हालांकि, कंपनी ने अभी इन रेंज के आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ये सभी आंकड़े Tata Harrier EV के हार्डवेयर के आधार पर लगाए गए अनुमान हैं। लॉन्च के बाद ही कंपनी इसकी सही रेंज और सभी स्पेसिफिकेशन की घोषणा करेगी।

Tata Sierra EV का इंटीरियर

टाटा Motors ने लॉन्च से पहले ही Tata Sierra EV के इंटीरियर की कई अहम जानकारियां शेयर कर दी हैं। कंपनी ने पुष्टि की है कि इसमें ब्लैक-एंड-व्हाइट थीम वाला केबिन, पैनोरमिक सनरूफ, तीन स्क्रीन वाला डैशबोर्ड और हेड-अप डिस्प्ले (HUD) मिलेगा। कार का बाहरी और अंदरूनी डिजाइन काफी हद तक इसके पेट्रोल-डीजल (ICE) मॉडल जैसा ही होगा, लेकिन इसमें EV से जुड़े कुछ खास बदलाव देखने को मिलेंगे।

इसके अलावा, उम्मीद है कि इसमें वायरलेस Apple CarPlay और Android Auto, 12-स्पीकर JBL साउंड सिस्टम, वेंटिलेटेड फ्रंट सीटें, मेमोरी फंक्शन के साथ 6-वे पावर एडजस्टेबल ड्राइवर सीट, ड्यूल-जोन क्लाइमेट कंट्रोल और कनेक्टेड कार फीचर्स भी मिलेंगे। सेफ्टी के लिए इसमें 6 एयरबैग, 360-डिग्री कैमरा, लेवल 2 ADAS और इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल जैसे फीचर्स की उम्मीद है, हालांकि टाटा ने अभी तक फीचर्स की कोई ऑफिशियल लिस्ट जारी नहीं की है।

Tata Sierra EV की अनुमानित कीमत

इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, इसकी शुरुआती कीमत 15 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से ज्यादा हो सकती है। हालांकि, अगर टाटा लॉन्च के समय ‘बैटरी-एज-ए-सर्विस’ (BAAS) का ऑप्शन देती है, तो यह कीमत कम हो सकती है। क्योंकि इस ऑप्शन में बैटरी की कीमत को शुरुआती कीमत से अलग रखा जाता है, जैसा कि कुछ दूसरी EV बनाने वाली कंपनियां पहले से ही करती हैं।

उम्मीद है कि सिएरा EV का मुकाबला Hyundai Creta Electric, Maruti Suzuki e Vitara, Mahindra BE 6, MG ZS EV, VinFast VF7 और Toyota Urban Cruiser EV जैसी गाड़ियों से होगा। इसकी फाइनल कीमत और पूरी स्पेसिफिकेशन की जानकारी कल होने वाले लॉन्च इवेंट में ही कन्फर्म होगी।

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BMW X6 image gallery

BMW X6

The BMW X6 has returned to India exclusively in the range-topping M60i xDrive guise, priced at Rs 1.78 crore (ex-showroom). Imported as a completely built unit (CBU), it is powered by a 530hp, 750Nm 4.4-litre twin-turbo V8 petrol engine with 48V mild-hybrid technology, paired with an 8-speed automatic gearbox and BMW’s xDrive all-wheel-drive system. The coupe-SUV also gets adaptive suspension, rear-wheel steering and an M Sport differential. Along with updated styling, the X6 M60i comes with a refreshed interior, an extensive equipment list and M-specific design elements.

15 मिनट लेट हुई ट्रेन तो मिलेगा अलर्ट, रेलवे का ‘Punctuality BZA’ ऐप लॉन्च…देगा अहम जानकारियां

भारत में ट्रेनों का लेट होना लंबे समय से यात्रियों की सबसे बड़ी परेशानी रहा है। कई बार ट्रेन कितनी देर से चल रही है, इसकी सही जानकारी भी समय पर नहीं मिल पाती। हालांकि, रेलवे अब इस समस्या से निपटने के लिए तकनीक का सहारा ले रहा है। इंडियन रेलवे ने ट्रेनों के समय पर चलने और उनकी देरी पर रियल-टाइम नजर रखने के लिए अपना पहला एंड्रॉयड आधारित मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। इस ऐप का नाम ‘पंक्चुअलिटी’ (Punctuality BZA) है। इसे साउथ कोस्ट रेलवे के विजयवाड़ा मंडल ने तैयार किया है।

रेलवे ला रहा है ये नया ऐप

यह ऐप रेलवे अधिकारियों को ट्रेनों की आवाजाही और देरी की जानकारी तुरंत उपलब्ध कराएगा। इस ऐप की मदद से रेलवे अधिकारी और कंट्रोल रूम के कर्मचारी कहीं से भी ट्रेनों की स्थिति पर नजर रख सकेंगे। इसके लिए अब डेस्कटॉप सिस्टम पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। जानकारी के मुताबिक यह नया ऐप पुराने ICMS वेब पोर्टल की कई परेशानियों को भी दूर करता है। पहले अधिकारियों को अलग-अलग स्क्रीन पर जाना पड़ता था और बार-बार ओटीपी डालकर लॉग इन करना पड़ता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया काफी आसान और तेज हो गई है।

15 मिनट से ज्यादा लेट हुई ट्रेन तो मिलेगा अलर्ट

साउथ कोस्ट रेलवे के मुताबिक, ‘Punctuality BZA’ ऐप में ट्रेनों से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी एक ही डैशबोर्ड पर मिल जाती है। इस ऐप के जरिए अधिकारी अलग-अलग रेल सेक्शन में ट्रेनों की स्थिति, लेट चल रही ट्रेनों की निगरानी, समय पर चलने से जुड़े आंकड़े और रास्ते में छूट गई ट्रेनों की जानकारी आसानी से देख सकते हैं। इस ऐप की एक खास सुविधा यह भी है कि अगर कोई ट्रेन 15 मिनट से ज्यादा देर होती है, तो अधिकारियों को अपने आप नोटिफिकेशन मिल जाता है। इससे वे तुरंत स्थिति का पता लगाकर जरूरी कदम उठा सकते हैं।

रियल-टाइम निगरानी में मिलेगी काफी मदद

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह ऐप ट्रेनों की रियल-टाइम निगरानी में काफी मदद करेगा। इससे हालात को बेहतर तरीके से समझना, जल्दी फैसला लेना और ट्रेनों को समय पर चलाने के लिए तुरंत जरूरी कार्रवाई करना आसान होगा। नए ‘Punctuality BZA’ ऐप को लेट ट्रेन मॉनिटरिंग (LTM BZA) सिस्टम से भी जोड़ा गया है। यह रेलवे का अंदरूनी सिस्टम है, जो ट्रेन मैनेजरों के लिए ट्रेन संचालन से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड और दस्तावेज अपने आप तैयार करता है। इस ऐप की मदद से रेलवे अधिकारी रियल-टाइम में ट्रेनों की देरी और उनकी आवाजाही की पूरी जानकारी देख सकते हैं। इससे किसी भी परिचालन समस्या की पहचान जल्दी हो जाती है और अधिकारी तुरंत जरूरी कार्रवाई कर सकते हैं। इससे ट्रेनों के समय पर संचालन को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी।

योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में तेजी से हो रहा आर्द्रभूमियों का संरक्षण

Yogi adityanath

Wetlands Conservation UP: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) के संरक्षण और विकास पर लगातार काम कर रही है। वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत प्रदेशभर में आर्द्रभूमियों की पहचान, सीमांकन और अधिसूचना की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है।

 

मुख्य सचिव के समक्ष हुए प्रस्तुतीकरण के अनुसार, प्रदेश के 75 जिलों में से 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियों को अब तक अधिसूचित किया जा चुका है। इनमें कानपुर नगर सहित गोरखपुर, बाराबंकी, महाराजगंज, प्रयागराज, आगरा, सहारनपुर, कुशीनगर, उन्नाव और अन्य जिले शामिल हैं। इन आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 2750 हेक्टेयर है। वहीं 36 जिलों से 44 नई आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने के प्रस्ताव भी सरकार को प्राप्त हुए हैं।

इसलिए जरूरी हैं आर्द्रभूमियां

आर्द्रभूमियां केवल तालाब या झील नहीं होतीं, बल्कि ये प्रकृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने, भूजल स्तर बनाए रखने, सिंचाई में मदद करने, बाढ़ और सूखे के प्रभाव को कम करने, मछली पालन और अन्य आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के सुरक्षित आवास के रूप में भी काम करती हैं। इसके अलावा ये पर्यावरण को संतुलित रखने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं।

सीमांकन और संरक्षण पर विशेष जोर

योगी सरकार आर्द्रभूमियों की सीमाओं का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण भी करा रही है ताकि उन पर अतिक्रमण न हो और उनका संरक्षण बेहतर ढंग से किया जा सके। प्रदेश के सभी 75 जिलों में 14,562 स्थानों पर सीमा निर्धारण का कार्य पूरा किया जा चुका है।

अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी

सरकार राज्य की प्रमुख आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भी प्रयास कर रही है। इसके लिए रामसर साइट के मानकों के अनुरूप आवश्यक दस्तावेज, मानचित्र, फोटोग्राफ और अन्य तकनीकी जानकारी तैयार की जा रही है, ताकि उत्तर प्रदेश की अधिक से अधिक आर्द्रभूमियां वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।

Edited by: Vrijenedra Singh Jhala 

Guru Hargobind Jayanti 2026: गुरु हरगोविंद सिंह जयंती: जानें उनके बताए सिद्धांत, जो आज भी हैं प्रासंगिक

The image features Sri Guru Hargobind Singh- the sixth Guru of Sikhism- alongside Sri Akal Takht Sahib and the Golden Temple (Harmandir Sahib) of Amritsar

Sixth Sikh Guru Guru Hargobind: छठे सिख गुरु, गुरु हरगोविंद सिंह जी की जयंती या प्रकाश पर्व सिख इतिहास का एक ऐसा गौरवशाली पन्ना है, जिसने सिख कौम को एक नई दिशा दी। गुरु हरगोविंद सिंह जी ही थे जिन्होंने सिखों को संत के साथ-साथ 'सिपाही'/ संत-सिपाही बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने सिखाया कि धर्म केवल माला जपने में नहीं, बल्कि अत्याचार के खिलाफ तलवार उठाने में भी है।ALSO READ: Guru Amar Das Jayanti: गुरु अमरदास जयंती कैसे मनाएं, जानें जीवन परिचय, महत्व और योगदान

 

आज के इस आधुनिक और उथल-पुथल भरे दौर में भी गुरु हरगोविंद सिंह जी के जीवन मूल्य और उनके द्वारा स्थापित सिद्धांत बेहद प्रासंगिक हैं। 

 

आइए जानते हैं उनके ऐसे ही 5 बड़े सिद्धांत जो आज भी हमारा मार्गदर्शन करते हैं:

 

1. 'मीरी' और 'पीरी' का सिद्धांत: अध्यात्म और शक्ति का संतुलन

गुरु हरगोविंद सिंह जी ने सिख इतिहास में सबसे बड़ा क्रांतिकारी बदलाव करते हुए 'मीरी और पीरी' नामक दो तलवारें धारण कीं।

 

मीरी: सांसारिक, राजनीतिक और सैन्य शक्ति का प्रतीक है, जो समाज की रक्षा करती है।

 

पीरी: आध्यात्मिक शक्ति और गुरुता का प्रतीक है, जो आत्मा को शुद्ध करती है।

 

आज के दौर में प्रासंगिकता: यह सिद्धांत हमें सिखाता है कि जीवन में संतुलन बेहद जरूरी है। इंसान को अंदर से शांत, दयालु और आध्यात्मिक होना चाहिए, लेकिन समय आने पर अन्याय, अत्याचार और शोषण के खिलाफ शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होकर डटने की क्षमता भी उसमें होनी चाहिए। केवल कोरी बातें नहीं, बल्कि एक्शन भी जरूरी है।

 

2. अकाल तख्त की स्थापना (स्वतंत्र विचार और न्याय)

गुरु जी ने अमृतसर में हरिमंदिर साहिब स्वर्ण मंदिर के ठीक सामने 'श्री अकाल तख्त साहिब' (काल से रहित ईश्वर का सिंहासन) की नींव रखी। जहां हरिमंदिर साहिब अध्यात्म का केंद्र था, वहीं अकाल तख्त दुनिया के राजनीतिक और सामाजिक फैसलों का मंच बना।

 

* अकाल तख्त का संदेश था कि सच और न्याय किसी भी दुनियावी राजा या सरकार के अधीन नहीं होते। आज के समाज में यह सिद्धांत हमें स्वतंत्र सोच रखने, सच का साथ देने और किसी भी प्रकार की तानाशाही या गलत व्यवस्था के आगे न झुकने की प्रेरणा देता है।

 

3. 'संत-सिपाही' का निर्माण/ कमजोरों की रक्षा

अपने पिता और पांचवें गुरु, गुरु अर्जुन देव जी की शहादत के बाद गुरु हरगोविंद सिंह जी ने महसूस किया कि केवल शांति से क्रूर शासकों का हृदय परिवर्तन नहीं किया जा सकता। उन्होंने सिखों को शास्त्र विद्या, घुड़सवारी और आत्मरक्षा के गुर सिखाए।

 

* गुरु जी ने सेना का गठन किसी पर हमला करने या साम्राज्य विस्तार के लिए नहीं, बल्कि कमजोरों, मजलूमों और धर्म की रक्षा के लिए किया था। आज के समाज में महिलाओं, बच्चों और समाज के पिछड़े वर्गों की सुरक्षा के लिए आत्मरक्षा/ सेल्फ डिेफेंस और शारीरिक रूप से सक्षम होना कितना जरूरी है, यह गुरु जी सदियों पहले बता गए थे।

 

4. 'बंदी छोड़' दाता: मानवाधिकार और सबको साथ लेकर चलना

जब मुगल बादशाह जहांगीर ने गुरु हरगोविंद सिंह जी को ग्वालियर के किले में कैद कर दिया था, तो बाद में गुरु जी की महानता को देखकर उसने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया। लेकिन गुरु जी ने अकेले जाने से मना कर दिया और शर्त रखी कि उनके साथ कैद सभी 52 हिंदू राजाओं को भी आजाद किया जाए। गुरु जी ने 52 कलियों वाला एक विशेष चोगा सिलवाया, जिसकी एक-एक कली पकड़कर सभी राजा जेल से बाहर आए। इसी याद में उन्हें 'बंदी छोड़ दाता' कहा जाता है।

 

आज के दौर में यह घटना सिखाती है कि सच्ची सफलता या आजादी वह है जिसमें हम स्वार्थी न बनें, बल्कि समाज के हर वर्ग को अपने साथ लेकर आगे बढ़ें। यह सिद्धांत आज के वैश्विक मानवाधिकारों और सर्वधर्म समभाव का सबसे बड़ा उदाहरण है।

 

5. स्वाभिमान और निडरता से जीना

गुरु हरगोविंद सिंह जी ने सिखों को आदेश दिया कि वे अब उनके पास धन-दौलत के बजाय अच्छे घोड़े और उत्तम हथियार भेंट स्वरूप लाएं। उन्होंने सिखों के अंदर से गुलामी की मानसिकता और डर को पूरी तरह निकाल फेंका और उन्हें राजाओं की तरह 'शाही ठाट' और स्वाभिमान से जीना सिखाया।

 

* आज के समय में जब लोग डिप्रेशन, मानसिक तनाव और हीनभावना का शिकार हो रहे हैं, गुरु जी का यह सिद्धांत याद दिलाता है कि ईश्वर ने हर इंसान को स्वतंत्र और संप्रभु बनाया है। अपनी पहचान पर गर्व करें, निडर रहें और किसी के सामने घुटने न टेकें।

 

संक्षेप में, गुरु हरगोविंद सिंह जी की जयंती पर उनका संदेश और जीवन हमें यही सिखाता है कि एक हाथ में माला/ अध्यात्म और दूसरे हाथ में समाज की रक्षा के लिए सामर्थ्य/ शक्ति होना जरूरी है। सच्चे अर्थों में धर्म वही है जो कायरता नहीं, बल्कि वीरता और करुणा दोनों एक साथ सिखाए। उन्होंने दुनिया को आध्यात्मिक शक्ति और सांसारिक उत्तरदायित्व के संतुलन का जो मार्ग दिखाया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना सदियों पहले था।

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BMW X6 vs rivals: Specifications and prices compared

BMW X6 vs Audi SQ8 vs Mercedes GLE Coupe specs comparison

BMW has brought the X6 back to India after a period of about three years, making it available only in the M60i guise. The BMW X6 started the whole ‘Coupe SUV’ segment when it was first introduced in 2007. Since then, Audi and Mercedes-Benz have entered this space with models such as the SQ8 and GLE Coupe, respectively. So, how do these three German SUVs compare against each other in terms of their technical specifications and prices?

BMW X6 vs rivals: Dimensions

The X6 sits between the GLE Coupe and SQ8 in terms of its overall size

BMW X6 vs rivals: Dimensions

 

BMW X6 M60i

Audi SQ8

Mercedes-AMG GLE 53 Coupe

Length (mm)

4,960

5,005

4,944

Width (mm)

2,004

1,995

2,018

Height (mm)

1,700

1,695

1,720

Wheelbase (mm)

2,975

3,000

2,935

Boot space (litres)

580

604

655

Wheel size (inches)

21

21

21

The BMW X6 M60i is 45mm shorter in length than the Audi SQ8, and its wheelbase also trails behind the Audi. On the other hand, the X6 is wider and slightly taller at the roof than the SQ8, but finds itself slightly narrower and shorter in height than the GLE 53 Coupe. In terms of boot space, the X6’s luggage capacity is considerably lesser than that offered by either the Merc or the Audi. Overall, the BMW X6 M60i sits in between the SQ8 and GLE 53 Coupe in terms of size. All three SUVs come with 21-inch alloy wheels as standard, with Audi and Mercedes offering 22-inch rims as an option.

BMW X6 vs rivals: Powertrain options

The X6 produces the most horsepower and is the second quickest to 100kph

BMW X6 vs rivals: Powertrain options

Specifications

BMW X6 M60i

Audi SQ8

Mercedes-AMG GLE 53 Coupe

Engine

4.4-litre 8-cyl twin-turbocharged petrol

4.0-litre 8-cyl twin-turbocharged petrol

3.0-litre 6-cyl turbocharged petrol

Power (hp)

530

507

435

Torque (Nm)

750

770

560

Transmission

8-speed automatic

8-speed automatic

9-speed automatic

Claimed 0-100kph (sec)

4.3

4.1

5

Top speed (kph)

250

250

250

The BMW X6 M60i’s twin-turbocharged V8 comes with a 48V mild-hybrid system, and it produces 23hp more than the Audi SQ8’s eight-cylinder mill. However, its torque output is lower than the Audi by 20Nm. Despite this, the X6 M60i hits 100kph a claimed 0.2 seconds ahead of the SQ8.

When compared to the Mercedes-AMG GLE 53 Coupe, the X6 has a power and torque advantage of 95hp and 190Nm, respectively. While the GLE Coupe’s integrated starter generator provides an extra 20hp, its lack of outright oomph is noticeable. Then again, with its 3.0-litre inline-six configuration, the Merc’s engine is much smaller than that powering the BMW X6 M60i.

BMW X6 vs rivals: Price

The SQ8 and X6 M60i have near-identical prices, but the GLE Coupe is priced lower

BMW X6 vs rivals: Price (in Rs, crore)

Models

BMW X6 M60i

Audi SQ8

Mercedes-AMG GLE 53 Coupe

Prices

1.78

1.78

1.52

The BMW X6 in its M60i guise costs almost the same as the Audi SQ8. In comparison, the Mercedes-AMG GLE 53 Coupe is Rs 26 lakh more affordable than either. However, it’s relatively older and lacks the outright punch of the X6. As for the SQ8, it’s slightly quicker to 100kph than the X6 M60i while offering a twin-turbo V8 as well.

All prices are ex-showroom, India

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एक झटके में खत्म हुआ टीम इंडिया का 3 साल का दबदबा! आखिरी बार कब हारी थी टी20 सीरीज

टी20 क्रिकेट में भारत का जीत का सिलसिला आयरलैंड के खिलाफ खत्म हो गया। श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली टीम तीन दिनों के अंदर दो मैचों की टी20 सीरीज में 0-2 से हार गई। इस हार के साथ टीम इंडिया का टी20 क्रिकेट में शानदार सफर और दबदबा फिलहाल थम गया है। बेलफास्ट में खेले गए दोनों मुकाबलों में आयरलैंड ने शानदार खेल दिखाते हुए पहली बार भारत को टी20 सीरीज में क्लीन स्वीप कर इतिहास रच दिया। भारतीय फैंस के लिए ये हार किसी बड़े झटके से कम नहीं है। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों से बेहद शानदार रहा है।

टीम इंडिया ने बाइलेटरल सीरीज के साथ-साथ बड़े टूर्नामेंटों में भी लगातार बेहतरीन खेल दिखाया है। साल 2020 के बाद से टीम इंडिया को सिर्फ तीसरी बार किसी बाइलेटरल टी20 सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले अगस्त 2023 में वेस्टइंडीज के हाथों पांच मैचों की सीरीज में भारत को 3-2 से हार का सामना करना पड़ा था

आखिरी बार कब हारी थी टीम इंडिया

आयरलैंड दौरे से पहले भारतीय टीम लगातार 16 द्विपक्षीय टी20 सीरीज से अजेय चल रही थी। इससे पहले उसे आखिरी बार अगस्त 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज गंवानी पड़ी थी, जहां पांच मैचों की सीरीज में भारत 3-2 से हार गया था। उस दौरे में टीम इंडिया शुरुआती दोनों मुकाबले हार गई थी। शुरुआती दो मैच हारने के बाद भारत ने शानदार वापसी करते हुए लगातार दो मुकाबले जीत लिए और सीरीज 2-2 से बराबर कर दी। इसके बाद आखिरी और निर्णायक मुकाबला अमेरिका के लॉडरहिल में खेला गया। इस मैच में भारतीय टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए 9 विकेट पर 165 रन ही बना सकी। जवाब में वेस्टइंडीज ने लक्ष्य को दो ओवर शेष रहते हासिल कर लिया और सीरीज़ अपने नाम कर ली।

आयरलैंड के लिए भारत को हराना उसकी क्रिकेट यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। इससे पहले टीम ने 2011 वनडे विश्व कप में इंग्लैंड को हराकर इतिहास रचा था, लेकिन इस बार मौजूदा टी20 विश्व चैंपियन भारत को सीरीज में हराना उससे भी बड़ी सफलता माना जा रहा है।

आयरलैंड से हारी भारतीय टीम

तेज गेंदबाजों के लिए अनुकूल परिस्थितियों का जय मूंदड़ा ने शानदार फायदा उठाया। उन्होंने अपनी सटीक गेंदबाजी से भारतीय बल्लेबाजों को खूब परेशान किया। जय ने संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा को बिना खाता खोले पवेलियन भेजा, वहीं कप्तान श्रेयस अय्यर का अहम विकेट लेकर उन्होंने 3 विकेट झटके और अपनी टीम की जीत में बड़ी भूमिका निभाई। बेलफास्ट में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में आयरलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 विकेट पर 154 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम 155 रन के टारगेट का पीछा करते हुए 9 विकेट पर 153 रन ही बना सकी और 1 रन से मैच हार गई। आखिर में हर्षित राणा ने 10 गेंदों में 21 रन बनाकर जीत की उम्मीद जगाई, लेकिन अंतिम ओवर में उनका विकेट गिरते ही भारत की उम्मीदें भी खत्म हो गईं।

F&O ट्रेडिंग में जल्द बड़ा बदलाव! लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स को लेकर SEBI का ये है नया प्लान

SEBI Long Term Derivatives Market: जल्द ही फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता हैं। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय के उस प्रस्ताव को मार्केट एक्सपर्ट्स और पार्टिसिपेंट्स का बड़ा समर्थन मिल रहा है, जिसमें उन्होंने बाजार में लंबी अवधि के F&O कॉन्ट्रैक्ट्स को बढ़ावा देने की बात कही थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कदम से भारतीय कैपिटल मार्केट मजबूत होगा।

हालांकि, बाजार के दिग्गजों का यह भी कहना है कि ये लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स तभी कामयाब हो सकते हैं, जब लिक्विडिटी, मार्केट मेकिंग, मार्जिन नियमों और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी जैसी ढांचागत कमियों को दूर किया जाए। आइए समझते हैं कि लॉन्ग-टर्म F&O को लेकर SEBI का क्या है पूरा प्लान और इसके सामने क्या चुनौतियां हैं।

क्यों है लॉन्ग-टर्म F&O पर सेबी का फोकस?

19 जून 2026 को हुई सेबी की बोर्ड बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा था कि शॉर्ट-टर्म के अलावा लॉन्ग-टर्म डेरिवेटिव्स भी मार्केट में मिलने चाहिए। सेबी इस समय रिटेल निवेशकों के नुकसान को लेकर एक बड़ा स्टडी डेटा जुलाई 2026 में जारी करने वाला है, जिसके बाद डेरिवेटिव मार्केट की समीक्षा की जा रही है। सेबी का मानना है कि लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स आने से बाजार में केवल सट्टेबाजी नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म हेजिंग यानी जोखिम प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा।

लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए मार्जिन कम करना क्यों जरूरी?

हेज फंड मैनेजर मयंक बंसल के मुताबिक, भारत का मौजूदा मार्जिन फ्रेमवर्क लॉन्ग-टर्म डेरिवेटिव्स को आकर्षक नहीं बनाता। इस समय लंबी अवधि के इंडेक्स डेरिवेटिव्स पर मार्जिन काफी ज्यादा है:

रेगुलर इंडेक्स डेरिवेटिव्स मार्जिन: 9.3%

लॉन्ग-टर्म ऑप्शंस के लिए स्पैन फ्लोर: 17.7% (जो कि काफी ज्यादा है)

एक्सपोजर मार्जिन (ELM): 5%

सेबी के पूर्व होल-टाइम मेंबर अनंत नारायण जी ने भी कहा कि लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए मार्जिन नियमों को तर्कसंगत बनाने की गुंजाइश है, लेकिन इसके लिए एक विस्तृत स्टडी और रिव्यू की जरूरत है।

मार्केट मेकर्स और STT पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय?

क्रॉस सीज कैपिटल के एमडी राजेश बहेती ने कहा कि इन प्रोडक्ट्स की सफलता के लिए ‘डेजिग्नेटेड मार्केट मेकर्स’ की जरूरत होगी, जो दोनों तरफ यानी बाय और सेल के कोट्स उपलब्ध करा सकें। इसके लिए उन्हें मिलने वाला इंसेंटिव ट्रांजैक्शन कॉस्ट और STT से ज्यादा होना चाहिए।

एनएमआई के नेशनल प्रेसिडेंट कमलेश श्रॉफ का मानना है कि शुरुआत में इन्हें इंडेक्स डेरिवेटिव्स जैसे- निफ्टी, सेंसेक्स में लागू किया जाना चाहिए क्योंकि इनमें उतार-चढ़ाव कम होता है और मैनिपुलेशन का रिस्क नहीं रहता। बाद में इसे चुनिंदा लिक्विड स्टॉक्स में बढ़ाया जा सकता है।

क्या वीकली एक्सपायरी जैसे वॉल्यूम की बराबरी कर पाएगा लॉन्ग-टर्म?

एक्सपर्ट्स का साफ मानना है कि मार्जिन कम होने के बाद भी लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स कभी भी वीकली या मंथली कॉन्ट्रैक्ट्स के वॉल्यूम की बराबरी नहीं कर पाएंगे। ऑप्शंस ग्रीक्स के काम करने के तरीके के कारण लॉन्ग-टर्म ऑप्शंस में कम अवधि के मुकाबले प्रति यूनिट कैपिटल पर रिटर्न काफी कम मिलता है। अमेरिका, यूरोप और दक्षिण कोरिया जैसे वैश्विक बाजारों में भी वीकली और शॉर्ट-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स का वॉल्यूम ही सबसे ज्यादा रहता है, जबकि लॉन्ग-टर्म का इस्तेमाल पेंशन फंड्स और एसेट मैनेजर्स अपनी होल्डिंग को हेज करने के लिए करते हैं।

BSE के एमडी और सीईओ सुंदररमन आर ने सेबी के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि बीएसई पहले से ही ‘BSE Focused IT Index’ और ‘Bankex’ जैसे लॉन्ग-टर्म सुइट्स पर काम कर रहा है। उन्होंने भी माना कि एसटीटी और मार्जिन फ्रेमवर्क की समीक्षा से इसे तेजी से अपनाने में मदद मिलेगी।

Bajaj Chetak, Ola S1 Pro, TVS iQube, Hero Vida V2 को टक्कर देने आ रहा है सस्ता विएतनामी इलेक्ट्रिक स्कूटर

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वियतनाम की इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी VinFast भारतीय बाजार में अपने इलेक्ट्रिक दोपहिया पोर्टफोलियो की तैयारी करती नजर आ रही है। कंपनी की ओर से भारत में एक नए इलेक्ट्रिक स्कूटर का डिजाइन पेटेंट दाखिल किया गया है, जिसे VinFast Viper या उसके अपडेटेड मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। इससे संकेत मिलते हैं कि कंपनी भविष्य में भारतीय इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में भी एंट्री कर सकती है।

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इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में Ola Electric, TVS, Bajaj, Ather और Hero MotoCorp जैसी कंपनियां पहले से मजबूत मौजूदगी रखती हैं।  इन्हें कड़ा मुकाबला मिलेगा और इसका फायदा ग्राहकों को होगा। यदि VinFast इस सेगमेंट में उतरती है, तो कंपनी केवल इलेक्ट्रिक कारों तक सीमित न रहकर बड़े शहरी ग्राहकों को भी अपना लक्ष्य बना सकेगी।

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फिलहाल VinFast ने भारत में Viper इलेक्ट्रिक स्कूटर के लॉन्च की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। हालांकि भारत में डिजाइन पेटेंट दाखिल होना इस बात का मजबूत संकेत माना जा रहा है कि कंपनी भविष्य में इस मॉडल को भारतीय बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है। संभावना है कि कंपनी पहले अपने इलेक्ट्रिक कार कारोबार को मजबूत करेगी और उसके बाद इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में प्रवेश करेगी।

भारत में ही क्यों है इंट्री 

भारत दुनिया के सबसे बड़े दोपहिया बाजारों में शामिल है। कंपनी पहले ही भारत में VF 6 और VF 7 इलेक्ट्रिक SUV के जरिए अपनी रणनीति पर काम कर रही है। साथ ही स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग और डीलरशिप नेटवर्क के विस्तार की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं। 

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 क्या है स्कूटर का नाम 

ऑनलाइन सामने आई पेटेंट जानकारी के मुताबिक VinFast Trading and Production Joint Stock Company ने इस डिजाइन को भारत में 30 अप्रैल 2026 को Design Number 500341-001 के तहत पंजीकृत कराया है। पेटेंट में इसे “Motorcycle” नाम दिया गया है, हालांकि तस्वीर में स्पष्ट रूप से एक आधुनिक इलेक्ट्रिक स्कूटर दिखाई देता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में VinFast Viper को 3,000W BLDC हब मोटर के साथ पेश किया गया है, जिसकी दावा की गई अधिकतम गति 70 किमी/घंटा है।
 

ये होंगे फीचर्स 

  • स्मार्ट की
  • व्हीकल ट्रैकिंग
  • रिमोट व्हीकल फाइंड
  • एंटी-थेफ्ट सिस्टम
  • LED प्रोजेक्टर हेडलैंप
  • ड्यूल रियर शॉक एब्जॉर्बर

 

रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें 1.5 kWh फिक्स्ड बैटरी मिलती है। इसके अलावा एक वैकल्पिक सेकेंडरी बैटरी पैक भी उपलब्ध है, जिससे रेंज बढ़ाई जा सकती है। स्टैंडर्ड बैटरी के साथ इसकी दावा की गई रेंज करीब 82 किलोमीटर है।

 

कैसा है डिजाइन  

सोशल मीडिया पर वायरल फोटो के मुताबिक स्कूटर का डिजाइन स्पोर्टी और मैक्सी-स्कूटर स्टाइल से प्रेरित है। इसमें ऊंचा फ्रंट एप्रन, शार्प LED हेडलाइट, कॉम्पैक्ट फ्लाईस्क्रीन, आकर्षक साइड पैनल और ड्यूल-टोन बॉडी फिनिश देखने को मिलती है।

 

इसका डिजाइन ग्लोबल मार्केट में उपलब्ध VinFast Viper से मिलता-जुलता है, लेकिन कुछ स्टाइलिंग अपडेट भी नजर आते हैं, जिससे माना जा रहा है कि यह इसका नया या फेसलिफ्ट वर्जन हो सकता है। स्कूटर में LED DRL, टेलीस्कोपिक फ्रंट फोर्क, ट्विन रियर शॉक एब्जॉर्बर और अलॉय व्हील्स जैसे फीचर्स भी दिखाई देते हैं।  Edited by : Sudhir Sharma