PB Fintech का शेयर बाजार खुलते ही क्रैश, ब्लॉक डील के बाद बढ़ा बिकवाली का दबाव

पीबी फिनटेक का शेयर 3 जुलाई को बाजार खुलते ही क्रैश कर गया। कंपनी के शेयरों में एक बड़ी ब्लॉक डील हुई। कंपनी के 2.3 फीसदी शेयरों की बिक्री करीब 1,741 करोड़ रुपये में हुई। इसके बाद शेयरों पर बड़ा दबाव दिखा। 10 बजे शेयर 7.31 फीसदी गिरकर 1,563.50 रुपये पर चल रहा था। पहले खबर आई थी कि सिंगापुर की सॉवरेन इनवेस्टमेंट फर्म टेमासेक होल्डिंग्स पीबी फिनटेक में अपनी हिस्सेदारी घटाना चाहती है।

इस साल अब तक 14 फीसदी गिर चुका है शेयर 

PB Fintech का शेयर इस साल अब तक करीब 14 फीसदी गिर चुका है। इस दौरान निफ्टी में 7 फीसदी गिरावट आई है। पीबी फिनटेक का मार्केट कैपिटलाइजेशन 72,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। स्टॉक एक्सचेंज के डेटा के मुताबिक, ब्लॉक डील में 1.08 शेयरों का ट्रांजेक्शन प्रति शेयर 1,601 रुपये के रेट पर हुआ है। यह 2 जुलाई को शेयर के 1,682.10 रुपये के क्लोजिंग प्राइस से करीब 4.8 रुपये का डिस्काउंट है।

अभी खरीदार और बेचने वाले की जानकारी उपलब्ध नहीं

स्टॉक एक्सचेंजों पर अभी शेयर खरीदने वाले और बेचने वाले की जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह ट्रांजेक्शन 2 जुलाई को आई खबरों के मुताबिक है। खबरों में कहा गया है था कि टेमासेक होल्डिंग्स अपनी एक सब्सिडियरी के जरिए पीबी फिनेटक के 1.19 करोड़ शेयर बेचना चाहती है। यह पीबी फिनेटक में 2.6 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर है। खबरों में प्रति शेयर करीब 1,909 रुपये की कीमत पर ब्लॉक डील होने का अनुमान जताया गया था।

बीते कुछ महीनों में कई बड़े शेयरहोल्डर्स ने बेची हिस्सेदारी

इस ट्रांजेक्शन से पहले टेमासेक होल्डिंग्स की सब्सिडियरी MacRitchie Investments की PB Fintech में 6.47 फीसदी हिस्सेदारी थी। सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया को इस डील का एकलौता प्लेसमेंट एजेंट बताया गया था। बताया गया था कि इस डील के बाद टेमासेक पर अपनी बाकी हिस्सेदारी बेचने के लिए 60 दिन का लॉक-अप लागू होगा। बीते कुछ महीनों में पीबी फिनटेक में कई बड़े शेयरहोल्डर्स ने हिस्सेदारी बेची है।

मई में दहिया और बंसल ने भी बेचे थे कंपनी के शेयर

इस साल मई में पीबी फिनेटक के को-फाउंडर्स यशीश दहिया और आलोक बंसल ने करीब 38 लाख शेयर बेचे थे। यह कंपनी में करीब 0.8 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर था। यह ट्रांजेक्शन 654 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील के जरिए हुआ था। मई में ही चीन की टेक्नलोजी कंपनी Tencent ने पीबी फिनटेक में अपनी बाकी 1.05 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी थी।

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लगातार तीसरे दिन शेयर बाजारों में तेजी

3 जुलाई को शेयर बाजारों में अच्छी तेजी दिखी। 10:20 बजे निफ्टी 0.68 फीसदी यानी 165 अंक चढ़कर 24,342 पर चल रहा था। सेंसेक्स 0.65 फीसदी यानी 506 अंक के उछाल के साथ 78,000 पर था। बैंक निफ्टी में भी 0.23 फीसदी की तेजी दिखी। आज बाजार में अच्छी तेजी का लगातार तीसरा दिन है।

International Plastic Bag Free Day: इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे कब और क्यों मनाया जाता है?

Image caption: A photo conveying the message of International Plastic Bag Free Day and providing information on tackling the serious issue of plastic pollution

antarrashtriya plastic bag mukt divas kab manaya jata hai: प्रत्येक वर्ष 3 जुलाई को दुनिया भर में 'इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे' यानी अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मकसद बहुत सीधा और साफ है, सिंगल-यूज़ (एक बार इस्तेमाल होने वाले) प्लास्टिक बैग के हानिकारक प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करना और उन्हें कपड़े या जूट के थैलों जैसे सुरक्षित विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

  • कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत?
  • यह दिन क्यों मनाया जाता है? जानें इसके पीछे की बड़ी वजहें…
  • पर्यावरण को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाना
  • समुद्री और वन्य जीवों की सुरक्षा
  • मानव स्वास्थ्य की रक्षा
  • ड्रेनेज सिस्टम का ब्लॉक होना
  • हम इस मुहिम में क्या योगदान दे सकते हैं?

 

 

आइए जानते हैं कि इस खास दिन की शुरुआत कब हुई और इसे मनाने की ज़रूरत क्यों पड़ी:

 

कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत?

इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे की शुरुआत साल 2008 में हुई थी। इसे 'ज़ीरो वेस्ट यूरोप' (Zero Waste Europe) के एक सदस्य 'रीज़ेरो' (Rezero) द्वारा शुरू किया गया था। शुरुआत में यह अभियान सिर्फ यूरोप के कुछ देशों तक सीमित था। लेकिन धीरे-धीरे, जैसे-जैसे दुनिया को प्लास्टिक से होने वाले नुकसान का अहसास हुआ, यह एक वैश्विक (Global) आंदोलन बन गया। अब हर साल 3 जुलाई को दुनिया के दर्जनों देश मिलकर इस मुहिम का हिस्सा बनते हैं।

 

यह दिन क्यों मनाया जाता है? जानें इसके पीछे की बड़ी वजहें…

प्लास्टिक बैग हमारे लिए कुछ मिनटों की सुविधा तो लाते हैं, लेकिन यह हमारी धरती के लिए सैकड़ों सालों का सिरदर्द बन जाते हैं। इस दिन को मनाने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

 

1. पर्यावरण को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाना

प्लास्टिक बैग 'नॉन-बायोडिग्रेडेबल' (Non-biodegradable) होते हैं, यानी ये प्राकृतिक रूप से कभी नष्ट नहीं होते। एक साधारण प्लास्टिक बैग को पूरी तरह से टूटने या गलने में 100 से 500 साल का समय लग सकता है। तब तक यह मिट्टी और पानी में मिलकर जहरीले सूक्ष्म कणों (Microplastics) में बदल जाता है, जो प्रकृति को नुकसान पहुंचाते हैं।

 

2. समुद्री और वन्य जीवों की सुरक्षा

हर साल लाखों टन प्लास्टिक कचरा समुद्र में पहुंचता है। समुद्री जीव- जैसे कछुए, मछलियां और व्हेल्स अक्सर प्लास्टिक बैग को खाना समझकर निगल लेते हैं, जिससे उनके पेट में ब्लॉक हो जाता है और दम घुटने से उनकी मौत हो जाती है। ठीक इसी तरह, शहरों में लावारिस घूमने वाले पशु- जैसे गाय कचरे के ढेर से प्लास्टिक बैग खा लेते हैं, जो उनके लिए जानलेवा साबित होता है।

 

3. मानव स्वास्थ्य की रक्षा

जब प्लास्टिक बैग मिट्टी में दबे रहते हैं, तो इनसे निकलने वाले हानिकारक केमिकल्स जमीन के अंदर के पानी (Groundwater) में मिल जाते हैं। जब पशु या मछलियां इसे अनजाने में खाते हैं, तो यह फूड चेन (खाद्य श्रृंखला) के जरिए इंसानों के शरीर तक पहुंच जाता है, जिससे कैंसर और हार्मोनल असंतुलन जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

 

4. ड्रेनेज सिस्टम का ब्लॉक होना

शहरी इलाकों में प्लास्टिक बैग्स का सबसे बड़ा साइड-इफेक्ट यह दिखता है कि ये नालियों और सीवर पाइपों में फंस जाते हैं। बारिश के मौसम में इसकी वजह से सड़कों पर पानी भर जाता है और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।

 

हम इस मुहिम में क्या योगदान दे सकते हैं?

बदलाव हमेशा घर से शुरू होता है। इस दिन को सार्थक बनाने के लिए हम अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ये छोटे बदलाव कर सकते हैं:

 

'नो' कहना सीखें: जब भी आप सब्जी या राशन लेने जाएं, तो दुकानदार से प्लास्टिक बैग लेने से साफ मना करें।

 

विकल्प अपनाएं: हमेशा अपनी गाड़ी में या जेब में एक कपड़े या जूट का थैला साथ रखें।

 

जागरूकता फैलाएं: अपने परिवार और दोस्तों को भी प्लास्टिक के नुकसान बताएं और उन्हें भी थैला इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करें।

 

एक कड़वा सच: एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में हर मिनट लगभग 20 लाख प्लास्टिक बैग्स का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि उनका औसत उपयोग समय सिर्फ 12 मिनट होता है। इस 12 मिनट की सुविधा के लिए हम अपनी धरती को सदियों का नुकसान पहुंचा रहे हैं।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के इस न्यूनतम फॉर्मूले से भी 18000 की सैलरी सीधे होगी 33000 रुपये! ये है पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission Calculate Minimum Salary Hike: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और इसकी सिफारिशों को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि नए वेतन आयोग के लागू होने पर उनकी हर महीने आने वाली इनहैंड सैलरी और पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी। इस पूरी कैलकुलेशन को तय करने वाली सबसे महत्वपूर्ण चाबी फिटमेंट फैक्टर है।

केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों की तरफ से फिटमेंट फैक्टर को 3.83 तक बढ़ाने की मांग की जा रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार वित्तीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए अपेक्षाकृत सावधानीपूर्ण और रूढ़िवादी रुख अपना सकती है। अगर सरकार सबसे न्यूनतम पैमाना यानी 1.83 का फिटमेंट फैक्टर भी अपनाती है तो भी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी 18000 रुपये से बढ़कर सीधे लगभग 33000 रुपये हो जाएगी। आइए समझते हैं इस पूरे गणित और कैलकुलेशन को।

फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह कैसे काम करता है?

फिटमेंट फैक्टर वह गणितीय मल्टीप्लायर या गुणांक होता है जिसका इस्तेमाल पुराने बेसिक पे (7th CPC) को नए संशोधित बेसिक पे (8th CPC) में बदलने के लिए किया जाता है। सरकारी यूनियनों और कर्मचारियों की नजरें इसी पर टिकी हैं क्योंकि यही आपकी बेसिक सैलरी तय करता है।

इसे निकालने का सीधा और आसान फॉर्मूला ये है: रिवाइज्ड बेसिक पे= मौजूदा बेसिक पे×फिटमेंट फैक्टर

ध्यान देने वाली बात ये है कि फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल सीधे तौर पर हाउस रेंट अलाउंस या अन्य भत्तों पर नहीं होता लेकिन यह आपकी बेसिक सैलरी को बढ़ा देता है। चूंकि महंगाई भत्ता, HRA और कई अन्य भत्ते बेसिक सैलरी के आधार पर ही तय होते हैं इसलिए बेसिक पे बढ़ते ही पूरा सैलरी पैकेज खुद-ब-खुद काफी बड़ा हो जाता है। पिछली बार 7वें वेतन आयोग के तहत सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया था। इस वजह से कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 7000 रुपये से बढ़कर सीधे 18000 रुपये हो गई थी।

न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर (1.83) पर सैलरी का पूरा कैलकुलेशन

अगर सरकार सबसे कम यानी 1.83 का फिटमेंट फैक्टर तय करती है तो अलग-अलग पे-मैट्रिक्स लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में इस तरह बढ़ोतरी देखने को मिलेगी-

लेवल-1 कर्मचारी (न्यूनतम वेतन श्रेणी): 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल-1 कर्मचारियों का मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन 18000 रुपये है। 1.83 का फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर यह बढ़कर करीब 32940 रुपये तक पहुंच जाएगा।

लेवल-2 कर्मचारी: इन कर्मचारियों का मौजूदा मूल वेतन 19900 रुपये है। इस न्यूनतम फॉर्मूले से बढ़कर लगभग 36417 रुपये हो जाएगा।

लेवल- 6 कर्मचारी: इस पद पर कार्य करने वाले कर्मचारियों का मूल वेतन 35,400 रुपये है। इस न्यूनतम फॉर्मूले से बढ़कर लगभग यह 64,782 रुपये हो जाएगा।

लेवल-10 कर्मचारी: इस स्तर के कर्मचारियों का मौजूदा मूल वेतन 56100 रुपये है। 1.83 के गुणांक से संशोधित होने के बाद 1.02 लाख रुपये से अधिक हो जाएगा।

इस पूरे कैलकुलेशन को डायग्राम के जरिए समझें

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वहीं 8वें वेतन आयोग में अगर फिटमेंट फैक्टर को 2 गुना, 2.5 गुना या 3 गुना तय किया जाता है, तो अलग-अलग पे-मैट्रिक्स लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी पर इसका सीधा असर इस प्रकार दिखेगा:

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पेंशनभोगियों पर भी होगा बड़ा असर

न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर लागू होने की स्थिति में पेंशनभोगियों की भी बेसिक पेंशन इसी अनुपात में बढ़ जाएगी। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत जो न्यूनतम पेंशन 9000 रुपये तय है, वह इस नए फॉर्मूले के लागू होने के बाद बढ़कर लगभग 16470 रुपये हो जाएगी।

यह केवल एक न्यूनतम अनुमान है, बढ़ सकती है सीमा

एक्सपर्ट्स और कर्मचारी संगठनों का मानना है कि 1.83 का फिटमेंट फैक्टर केवल एक सबसे रूढ़िवादी या न्यूनतम अनुमान है। महंगाई और जीवन स्तर में सुधार को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि अंतिम फिटमेंट फैक्टर अधिकत रह सकता है। फिलहाल 8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी यूनियनों ने इसे 3.83 तक करने की मांग रखी है। 8वें वेतन आयोग के लिए आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर पर अभी सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। वर्तमान में आयोग सभी स्टेकहोल्डर्स और कर्मचारी यूनियनों की मांगों पर विचार-विमर्श, मूल्यांकन और कंसल्टेशन मीटिंग्स (जैसे लखनऊ, भुवनेश्वर, कोलकाता) लगातार कर रहा है। आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगा जिसके बाद केंद्रीय कैबिनेट उस पर अपनी मुहर लगाएगी।

सरकार का आखिरी फैसला पूरी तरह से देश की राजकोषीय क्षमता पर निर्भर करेगा क्योंकि सरकार को यह भी देखना होगा कि सैलरी और पेंशन में इतनी बड़ी बढ़ोतरी के बाद वित्तीय देनदारियों का देश के बजट पर क्या असर पड़ेगा। अंतिम फैसला आने के बाद ही केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने वाली वास्तविक वेतन वृद्धि पूरी तरह स्पष्ट होगी।

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LIVE: मुंबई में भारी बारिश, IMD ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट

mumbai rain

Latest News Today Live Updates in Hindi : मुंबई में शुक्रवार को भी भारी बारिश का दौर जारी। लगातार हो रही बारिश की वजह से कई स्थानों पर पानी भर गया। मुंबई में अगले 3 घंटे भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पल पल की जानकारी…

-दक्षिण अफ्रीका को 40 रन से हराकर इंग्लैंड महिला विश्व कप के फाइनल में पहुंचा। कप्तान नेट सिवर ब्रंट और हीथर नाइट ने खेली शानदार अर्थशतकीय पारियां। फाइनल में इंंग्लैंड का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से होगा मुकाबला। 

-पुर्तगाल ने क्रोएशिया को 2-1 से हराकर फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 16 में प्रवेश किया। क्रिस्टियानो रोनाल्डो और गोंजालो रामोस ने पुर्तगाल के लिए दागे गोल। ऑस्ट्रिया को 3-0 से हराकर स्पेन भी अगले दौर में पहुंचा।
-फीफा विश्व कप में आज स्विट्‍जरलैंड का मुकाबला अल्जिरिया से होगा वहीं अंतिम 16 में पहुंचने के लिए ऑस्ट्रेलिया की भिडंत इजिप्ट होगी।

पहलगाम और बालटाल के लिए अमरनाथ यात्रियों का पहला जत्था पवित्र गुफा के लिए निकला। हर हर महादेव और बम बम भोले के जयकारों के साथ बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए निकले श्रद्धालु। यात्रा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ने अमरनाथ यात्रियों को पत्र लिखते हुए कहा कि बाबा बर्फानी के दर्शन से जुड़ी श्री अमरनाथ यात्रा हमारी आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक एकता का शाश्वत अध्याय है। मेरी कामना है कि शिवभक्तों की यह यात्रा हर तरह से सुरक्षित और मंगलमय हो! 

मुंबई में शुक्रवार को भी भारी बारिश का दौर जारी है। लगातार हो रही बारिश की वजह से कई स्थानों पर पानी भर गया। मौसम विभाग ने मुंबई में अगले 3 घंटे भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। 

Electric Scooter : बरसात में अपने EV scooter का कैसे रखें ध्यान, जानिए 5 iMP टिप्स

मानसून का मौसम भीषण गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इलेक्ट्रिक स्कूटर (Electric Scooter) चलाने वालों के लिए यह अतिरिक्त सावधानी बरतने का समय भी होता है। मानसून के दौरान सही रखरखाव करने से न केवल बैटरी की उम्र बढ़ती है, बल्कि बेहतर रेंज, सुरक्षित राइडिंग और लंबे समय तक भरोसेमंद प्रदर्शन भी मिलता है। थोड़ी-सी सावधानी आपको भविष्य में होने वाले बड़े खर्च से भी बचा सकती है।

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क्यों जरूरी है बैटरी की देखभाल?

 

इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी उसकी सबसे महंगी और महत्वपूर्ण यूनिट होती है।

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लगातार बारिश, बढ़ी हुई नमी और जलभराव वाली सड़कें इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी और इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर असर डाल सकती हैं। अगर समय रहते सही देखभाल न की जाए तो बैटरी की परफॉर्मेंस, रेंज और लाइफ कम हो सकती है। हालांकि, कुछ आसान मेंटेनेंस टिप्स अपनाकर आप अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी को मानसून के दौरान भी सुरक्षित और बेहतर स्थिति में रख सकते हैं।

 

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1. जलभराव वाली सड़कों पर जाने से बचें

बारिश के दौरान जहां तक संभव हो, गहरे पानी या जलभराव वाली सड़कों पर स्कूटर चलाने से बचें। अधिक पानी इलेक्ट्रिकल पार्ट्स और चार्जिंग पोर्ट को प्रभावित कर सकता है। यदि बारिश में निकलना जरूरी हो तो धीरे-धीरे चलें और वैकल्पिक रास्ता चुनने की कोशिश करें।

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2. हमेशा सूखी जगह पर चार्ज करें

इलेक्ट्रिक स्कूटर को चार्ज करते समय यह सुनिश्चित करें कि चार्जिंग एरिया पूरी तरह सूखा और सुरक्षित हो। बारिश में स्कूटर भीग गया हो तो उसे पहले अच्छी तरह सूखने दें, उसके बाद ही चार्जिंग शुरू करें। साथ ही केवल कंपनी द्वारा दिए गए या अनुशंसित चार्जर का ही उपयोग करें।

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3. स्कूटर को साफ और सूखा रखें

 

बारिश के बाद स्कूटर पर जमा कीचड़, धूल और नमी को मुलायम कपड़े से साफ करें। बैटरी हाउसिंग और वायरिंग के आसपास हाई-प्रेशर पानी का इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि इससे पानी संवेदनशील हिस्सों तक पहुंच सकता है।

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4. सही जगह पर पार्क करें

 

मानसून में स्कूटर को हमेशा ढकी हुई, सूखी और हवादार जगह पर पार्क करें। लंबे समय तक खुले में बारिश के बीच स्कूटर खड़ा रखने से बैटरी और इलेक्ट्रिकल पार्ट्स पर नमी का असर पड़ सकता है।

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5. बैटरी को पूरी तरह डिस्चार्ज न होने दें

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अगर कई दिनों तक स्कूटर का इस्तेमाल नहीं करना है तो बैटरी को पूरी तरह खाली न होने दें। समय-समय पर चार्ज लेवल जांचते रहें ताकि बैटरी स्वस्थ बनी रहे और उसकी लाइफ प्रभावित न हो।

Baby Do Die Do Review: क्राइम, सस्पेंस और इमोशन से भरपूर है ‘बी डू डाई डू’ , हुमा कुरैशी का कतिलाना अंदाज जीत लेगा दिल

फिल्म- बेबी डू डाई डू

कलाकार- हुमा कुरैशी, सिकंदर खेर, चंकी पांडे, सीमा पाहवा, विद्या मालवड़े, हिमांशु मलिक, रूपेश बाने, अरुण कुशवाह, मरुधर शेखावत, रचित सिंह

निर्देशक- नचिकेत सामंत

निर्माता- साकिब सलीम

रेटिंग- 3.5/5

Baby Do Die Do Review: क्राइम थ्रिलर फिल्मों में अक्सर बदले की कहानी देखने को मिलती है, लेकिन ‘बेबी डू डाई डू’ उसी पुराने विषय को नए अंदाज में पेश करती है। फिल्म की नायिका न सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट किलर है, बल्कि वह बोल और सुन भी नहीं सकती। यही बात इस फिल्म को बाकी थ्रिलर्स से अलग बनाती है। फिल्म में सस्पेंस, एक्शन, रोमांस और डार्क ह्यूमर का बैलेंस्ड मिक्चर देखने को मिलता है।

कहानी

फिल्म की शुरुआत एक दर्दनाक हादसे से होती है। बचपन में बेबी और उसकी जुड़वा बहन एक सुनसान होटल में एक मर्डर देख लेती हैं। अपनी पहचान छिपाने के लिए अपराधी बेबी की बहन की जान ले लेता है। इस घटना के बाद बेबी का पूरा जीवन बदल जाता है।

वह धीरे-धीरे अपराध की दुनिया का हिस्सा बन जाती है और पीएम जैन के मार्गदर्शन में सुपारी किलर के रूप में काम करने लगती है। उसकी पहचान उसका अलग अंदाज है, जिसमें वह छाते को हथियार बनाकर अपने टारगेट खत्म करती है। हालांकि उसके लिए हर हत्या सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि अपनी बहन के कातिल तक पहुंचने का रास्ता भी है। कहानी आगे बढ़ते हुए कई ट्विस्ट लेकर आती है और क्लाइमेक्स तक दर्शकों को लगातार बांधे रखती है।

अभिनय

हुमा कुरैशी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। बिना संवादों के अभिनय करना आसान नहीं होता, लेकिन उन्होंने अपने चेहरे के भाव और बॉडी लैंग्वेज के जरिए हर भावना को बखूबी दर्शाया है। बदले की आग, प्रोफेशनल किलर की ठंडक और निजी रिश्तों की संवेदनाएं- तीनों रूपों में उनका अभिनय प्रभाव छोड़ता है।

सिकंदर खेर ने अपने किरदार को गंभीरता और आत्मविश्वास के साथ निभाया है। चंकी पांडे अपने अलग अंदाज से चौंकाते हैं, जबकि सीमा पाहवा अपने अनुभव के दम पर हर दृश्य को विश्वसनीय बनाती हैं। विद्या मालवड़े, हिमांशु मलिक और बाकी कलाकार भी कहानी को मजबूती देते हैं।

निर्देशन और तकनीकी पक्ष

निर्देशक नचिकेत सामंत ने फिल्म को सिर्फ एक एक्शन थ्रिलर नहीं रहने दिया, बल्कि उसमें इमोशनल लेयर भी जोड़ी है। फिल्म का स्क्रीनप्ले तेज है और कहानी बिना भटके आगे बढ़ती है। डार्क ह्यूमर और सस्पेंस का इस्तेमाल भी संतुलित तरीके से किया गया है।

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी मुंबई के अंडरवर्ल्ड के माहौल को प्रभावी ढंग से पेश करती है। बैकग्राउंड म्यूजिक कई दृश्यों का प्रभाव बढ़ाता है और एक्शन सीक्वेंस स्टाइलिश लगते हैं। एडिटिंग की वजह से फिल्म कहीं भी जरूरत से ज्यादा लंबी महसूस नहीं होती।

फाइनल वर्डिक्ट

‘बेबी डू डाई डू’ एक प्रयोगधर्मी और मनोरंजक क्राइम थ्रिलर है, जो अपनी कहानी, सस्पेंस और दमदार परफॉर्मेंस की वजह से अलग पहचान बनाती है। हुमा कुरैशी का अभिनय इसकी सबसे बड़ी यूएसपी है, जबकि फिल्म का अनएक्सपेक्टेड क्लाइमेक्स इसे यादगार बनाता है। अगर आप कुछ नया और रोमांच से भरपूर देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है।

भारत की बेहतरीन मॉनसून सफ़ारी, जहां बारिश में भी खत्म नहीं होता वाइल्डलाइफ़ सीज़न और भी बन जाता है रोमांचक!

भारत में मॉनसून का मौसम केवल हरियाली और ठंडी फुहारों का ही नहीं, बल्कि वन्यजीवन को उसके सबसे जीवंत और प्राकृतिक रूप में देखने का भी अवसर लेकर आता है। बारिश के साथ जंगल नई ऊर्जा से भर उठते हैं, नदियां और झरने लबालब हो जाते हैं तथा वनस्पतियां अपने पूरे सौंदर्य के साथ खिल उठती हैं। कुछ नेशनल पार्क इस मौसम में संरक्षण कार्यों के कारण बंद रहते हैं, लेकिन कई ऐसे स्थान भी हैं जहां मॉनसून सफ़ारी नेचर को बेहद करीब से महसूस करने का अनूठा एक्सपीरियंस देती है। आइए जानते हैं भारत के ऐसे ही कुछ शानदार मॉनसून सफ़ारी स्थलों के बारे में:

पश्चिम बंगाल में सुंदरबन

How to Plan a Sundarban Tour | Beginner's Travel Guide by Anahita

सुंदरबन नेशनल पार्क दुनिया का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन है और यह गंगा, ब्रह्मपुत्र तथा मेघना नदियों के विशाल डेल्टा क्षेत्र में फैला हुआ है। मॉनसून के दौरान यहां की नदियां, जलमार्ग और घने मैंग्रोव जंगल एक अनोखा प्राकृतिक दृश्य प्रस्तुत करते हैं। यहां सफ़ारी जीप से नहीं बल्कि नाव के माध्यम से की जाती है, जो इसे भारत के अन्य राष्ट्रीय उद्यानों से अलग बनाती है। यह क्षेत्र Royal Bengal Tiger, Saltwater Crocodile, Fishing Cat, Water Monitor Lizard और Irrawaddy Dolphin सहित अनेक दुर्लभ जीवों का प्राकृतिक आवास है। पक्षी प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों के लिए भी यह एक शानदार डेस्टिनेशन माना जाता है।

उत्तराखंड का वैली ऑफ़ फ्लावर्स नेशनल पार्क

फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान: उत्तराखंड में यूनेस्को की धरोहर का एक अनमोल रत्न – रहस्यमय हिमाचल

हिमालय की गोद में बसा वैली ऑफ़ फ्लावर्स नेशनल पार्क मॉनसून के दौरान प्रकृति का सबसे मनमोहक रूप प्रस्तुत करता है। जुलाई से सितंबर के बीच पूरी घाटी 500 से ज्यादा प्रजातियों के रंग-बिरंगे जंगली फूलों से ढक जाती है, जिनमें ब्लू पॉपी, प्रिमुला, एनीमोन, कोबरा लिली और कई दुर्लभ हिमालयी वनस्पतियां शामिल हैं। UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल यह राष्ट्रीय उद्यान ट्रेकिंग, प्रकृति दर्शन और फोटोग्राफी के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां Himalayan Black Bear, Musk Deer, Blue Sheep और दुर्लभ Snow Leopard जैसे वन्यजीव भी पाए जाते हैं। बारिश के मौसम में बहते झरने, बादलों से घिरी पर्वत श्रृंखलाएँ और हरी-भरी वादियां इस स्थान को किसी स्वर्ग से कम नहीं बनातीं।

दक्षिण में केरल का पेरियार नेशनल पार्क

घूमिये केरल स्थित पेरियार नेशनल पार्क, लीजिए जीप सफारी और नौका विहार का आनंद

पेरियार नेशनल पार्कपश्चिमी घाट के सबसे समृद्ध वन क्षेत्रों में से एक है और मॉनसून के दौरान इसकी हरियाली और भी घनी हो जाती है। पार्क के बीचों-बीच स्थित Periyar Lake इसकी सबसे बड़ी पहचान है, जहां बोट सफ़ारी के दौरान हाथियों के झुंड, Gaur, Sambar Deer, Wild Boar और कभी-कभी Bengal Tiger की झलक भी मिल सकती है। यह पार्क 300 से अधिक पक्षी प्रजातियों का घर है और यहां बांस राफ्टिंग, नेचर वॉक, जंगल ट्रेक तथा इको-टूरिज़्म एक्टिविटीज पर्यटकों को प्रकृति के बेहद करीब ले जाती हैं। मॉनसून में झील के आसपास का शांत वातावरण और घने जंगल इसे यादगार एक्सपीरियंस बनाते हैं।

मध्य प्रदेश में बांधवगढ़ नेशनल पार्क

बांधवगढ़ नेशनल पार्क में अद्भुत शेष शैय्या, 65 फ़ीट लंबी शयन मुद्रा में है विष्णु मूर्ति - नियो पॉलिटिको

बेहद सुंदर हैं Madhya Pradesh के ये 2 नेशनल पार्क, दूर-दूर से इन्हें देखने आते हैं Tourist

बांधवगढ़ नेशनल पार्क भारत के सबसे प्रसिद्ध टाइगर रिज़र्वों में से एक है और यहां बाघों की अच्छी-खासी आबादी पाई जाती है। घने साल के जंगल, बांस के वन, घास के मैदान और प्राचीन Bandhavgarh Fort इस पार्क की ऐतिहासिक और प्राकृतिक पहचान हैं। यहां Bengal Tiger के अलावा Leopard, Sloth Bear, Jackal, Chital और Sambar Deer जैसे वन्यजीव बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। मॉनसून के दौरान पर्यटन क्षेत्र सामान्यतः कुछ समय के लिए बंद रहते हैं, लेकिन बारिश के बाद जंगल की ताज़गी, हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है।

कर्नाटक का अगुम्बे रेनफ़ॉरेस्ट

दक्षिण का चेरापूंजी कहलाता है कर्नाटक का यह गांव, बारिश, झरनों और हरियाली का ऐसा नजारा मानसून में स्वर्ग जैसा लगता है - News18 हिंदी

अगुम्बे रेनफ़ॉरेस्ट को “दक्षिण भारत का चेरापूंजी” कहा जाता है क्योंकि यहाँ देश में सबसे ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में से एक है। Western Ghats का हिस्सा होने के कारण यह जैव विविधता से भरपूर वर्षावन है। मॉनसून के दौरान यहां ऊंचे-ऊंचे झरने, घने जंगल, बादलों से ढकी पहाड़ियां और हरियाली मन मोह लेती है। यह क्षेत्र King Cobra के संरक्षण और अध्ययन के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इसके अलावा Lion-tailed Macaque, Malabar Giant Squirrel, Malabar Pit Viper तथा अनेक दुर्लभ पक्षी, मेंढक और तितलियों की प्रजातियां भी यहां पाई जाती हैं। ट्रेकिंग, बर्ड वॉचिंग, प्रकृति अध्ययन और वाइल्डलाइफ़ फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए अगुम्बे मॉनसून के दौरान एक आइडियल डेस्टिनेशन माना जाता है।

महाराष्ट्र का संजय गांधी नेशनल पार्क

610+ Sanjay Gandhi National Park Stock Photos, Pictures & Royalty-Free Images - iStock | Mumbai, Delhi india, Jaipur

देश के सबसे अनोखे नेशनल पार्क में गिना जाने वाला यह पार्क महानगर मुंबई के बीचों-बीच स्थित है। लगभग 104 वर्ग किलोमीटर में फैला यह नेशनल पार्क मॉनसून के दौरान घने जंगलों, हरे-भरे पहाड़ी रास्तों, झरनों और समृद्ध जैव विविधता के कारण प्रकृति प्रेमियों का पसंदीदा टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन जाता है। यहाँ Leopard, Spotted Deer, Sambar Deer, Rhesus Macaque और अनेक पक्षियों एवं तितलियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। पार्क के भीतर स्थित लगभग 2,000 वर्ष पुरानी Kanheri Caves इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को और भी खास बनाती हैं। मॉनसून में यहां की हरियाली, छोटी-छोटी जलधाराएं, नेचर ट्रेल, साइक्लिंग मार्ग और वन्यजीवों की एक्टिविटीज टूरिस्ट को शहर की भागदौड़ से दूर प्रकृति के बीच सुकून का एक्सपीरियंस कराती हैं।

मॉनसून सफ़ारी यह साबित करती है कि बारिश का मौसम वन्यजीवन के रोमांच को कम नहीं करता, बल्कि प्रकृति को और भी जीवंत बना देता है। हरे-भरे जंगल, कल-कल बहते झरने, धुंध से ढकी पहाड़ियां और वन्यजीवों की अनोखी एक्टिविटीज इस मौसम को खास बनाती हैं। यदि आप प्रकृति की असली खूबसूरती और जैव विविधता को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो मॉनसून में इन राष्ट्रीय उद्यानों की यात्रा एक यादगार अनुभव साबित हो सकती है। बस यात्रा से पहले पार्क के नियमों और मौसम की जानकारी जरूर ले, ताकि आपका सफर सेफ रहे।

Silver Price Today: आज क्या है चांदी कीमत? दिल्ली, मुंबई समेत जानें अपने शहर का रेट

Silver Price Today: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चल रही उतार-चढ़ाव की स्थिति का सीधा असर चांदी की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। हर दिन कीमतों में हल्का बदलाव हो रहा है, जिससे निवेशकों से लेकर आम खरीदारों तक सभी की नजरें लगातार चांदी के रेट पर टिकी हुई हैं। आज बाजार खुलने से पहले मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव 0.2% बढ़कर यानी 455 रुपये की तेजी के साथ 2,29,691 रुपये प्रति किलो पहुंच गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 2,29,236 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ था। वहीं, इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक शुक्रवार सुबह तक चांदी का भाव 2,28,850 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया, जबकि गुडरिटर्न्स के अनुसार यह बढ़कर 2,45,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।

दूसरी ओर, दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत टैक्स समेत बढ़कर 2,40,000 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है। वैश्विक स्तर पर हाजिर चांदी भी उछलकर 59.89 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई है।

ऐसे में चांदी की कीमतों में लगातार हो रहे इस बदलाव के बीच अगर आप गहने खरीदने या निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो अपने शहर के ताजा रेट जानना बेहद जरूरी हो जाता है।

भारत के शहरों में चांदी के ताजा भाव

शहर10 ग्राम चांदी100 ग्राम चांदी1 किलो चांदी
दिल्ली₹2450₹24500₹245000
मुंबई₹2450₹24500₹245000
कोलकाता₹2450₹24500₹245000
चेन्नई₹2500₹25000₹250000
पटना₹2450₹24500₹245000
लखनऊ₹2450₹24500₹245000
मेरठ₹2450₹24500₹245000
अयोध्या₹2450₹24500₹245000
कानपुर₹2450₹24500₹245000
गाजियाबाद₹2450₹24500₹245000
नोएडा₹2450₹24500₹245000
गुरुग्राम₹2450₹24500₹245000
चंडीगढ़₹2450₹24500₹245000
जयपुर₹2450₹24500₹245000
लुधियाना₹2450₹24500₹245000
गुवाहाटी₹2450₹24500₹245000
जलगांव₹2450₹24500₹245000
इंदौर₹2450₹24500₹245000

पिछले दिन क्या रही चांदी की कीमत

गुरुवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली। इस दौरान चांदी के भाव में 5,000 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई, जिससे यह बढ़कर 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स समेत) पर पहुंच गई। इससे पिछले सत्र में चांदी का भाव 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी करीब 1.3 प्रतिशत की बढ़त के साथ बढ़कर 59.89 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

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