सूर्यकुमार ने कहा बाहर से करता हूं टीम इंडिया का समर्थन, बाकी पोस्ट फेक

Suryakumar Yadav

पूर्व टी-20 अंतरराष्ट्रीय कप्तान सुर्यकुमार यादव ने वायरल हो रही पोस्ट को फेक बताते हुए कहा कि वह टीम से बाहर रहकर भी टीम इंडिया का समर्थन करते हैं। सूर्यकुमार यादव ने साथ ही कहा कि फैंस ऐसी किसी भी पोस्ट पर यकीन ना  करें जो यह बताए कि वह टीम इंडिया के हालिया फॉर्म को देखते हुए बहुत खुश है।


सूर्यकुमार यादव ने 5 साल के क्रिकेट करियर में इतना कुछ कमा लिया जितना क्रिकेट खिलाड़ी दस साल में नहीं कमा पाते। खासकर 2013 से 2023 के कालखंड के लिए तो यह कहा जा सकता है। विराट कोहली जैसा क्रिकेटर भी टी-20 विश्वकप विजेता कप्तान नहीं बन पाया, यह तथ्य इस बात को साबित करने के लिए काफी है।

हालांकि 35 वर्षीय सूर्यकुमार यादव को जब टी-20 अंतरराष्ट्रीय टीम में नहीं चुना गया तो उनके करियर पर अर्धविराम लग गया। इस उम्र में वापस टीम में जगह बनाना काफी मुश्किल है क्योंकि युवा खिलाड़ियों की खेप इंडियन प्रीमियर लीग में हर साल तैयार हो रही है।

Video: हार्ट अटैक के बाद एम्बुलेंस वालों ने मांगे 15 हजार रुपये, फिर Blinkit ने किया ऐसा काम

मेडिकल इमरजेंसी में सबसे बड़ी जरूरत होती है समय पर इलाज और अस्पताल तक जल्दी पहुंचना। लेकिन कई बार एम्बुलेंस की उपलब्धता और उसका भारी किराया मरीज के परिवार के लिए नई परेशानी खड़ी कर देता है। हाल ही में गुरुग्राम की एक महिला ने सोशल मीडिया पर अपना ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने हजारों लोगों का ध्यान खींचा। उन्होंने बताया कि एक आपात स्थिति के दौरान उन्हें ऐसी सेवा मिली, जिसने न सिर्फ समय बचाया बल्कि आर्थिक बोझ भी कम कर दिया। उनका वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया और लोग इस पहल की जमकर तारीफ करने लगे।

कई यूजर्स ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि समय पर मिली मदद ने मुश्किल घड़ी में बड़ी राहत दी। इस घटना ने एक बार फिर इमरजेंसी सेवाओं की अहमियत और उनकी पहुंच को लेकर नई चर्चा छेड़ दी।

एम्बुलेंस के लिए मांगे गए 10 से 15 हजार रुपये

कंटेंट क्रिएटर कोमल खंडेलवाल के मुताबिक, बुजुर्ग महिला को तुरंत अस्पताल पहुंचाना जरूरी था। लेकिन जब उन्होंने अलग-अलग एम्बुलेंस सेवाओं से संपर्क किया तो 10 हजार से 15 हजार रुपये तक का किराया बताया गया।

ऐसे मुश्किल समय में परिवार के सामने इलाज के साथ-साथ एम्बुलेंस का खर्च भी बड़ी चिंता बन गया।

तभी सामने आया Blinkit का फ्री एम्बुलेंस विकल्प

इसी दौरान किसी ने सुझाव दिया कि Blinkit के जरिए एम्बुलेंस बुक की जा सकती है। परिवार ने तुरंत इस सेवा का इस्तेमाल किया और कुछ ही समय में एम्बुलेंस मौके पर पहुंच गई।

कोमल ने बताया कि इस सेवा के लिए उनसे कोई शुल्क नहीं लिया गया, जिससे समय पर मरीज को अस्पताल पहुंचाने में मदद मिली।

‘यह किसी फाइव स्टार एम्बुलेंस से कम नहीं थी’

वीडियो में कोमल ने एम्बुलेंस की सुविधाओं की भी तारीफ की। उनके मुताबिक इसमें मरीज को ले जाने के लिए स्ट्रेचर, व्हीलचेयर, जरूरी मेडिकल उपकरण, दवाइयां और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ मौजूद था।

उन्होंने मजाकिया अंदाज में इसे “फाइव स्टार एम्बुलेंस” तक कह दिया।

Blinkit से की खास अपील

कोमल ने वीडियो में Blinkit का धन्यवाद करते हुए कहा कि कंपनी को यह सेवा हमेशा मुफ्त रखनी चाहिए।

उनका कहना था कि हर व्यक्ति के पास अचानक मेडिकल इमरजेंसी में हजारों रुपये खर्च करने की क्षमता नहीं होती। अगर किसी के पास पैसे न हों, तो सिर्फ इसी वजह से उसकी जान खतरे में नहीं पड़नी चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों ने की जमकर तारीफ

वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने अपने अनुभव भी साझा किए।

एक यूजर ने लिखा कि Blinkit की यह पहल शानदार है और जरूरतमंद लोगों के लिए बड़ी मदद साबित हो सकती है।

एक अन्य यूजर ने बताया कि उन्होंने सड़क हादसे में घायल एक व्यक्ति के लिए Blinkit से एम्बुलेंस बुक की थी, जो बिना किसी शुल्क के बहुत जल्दी पहुंच गई।

वहीं एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि सुबह 5 बजे दवा ऑर्डर करने के बाद Blinkit की ओर से डॉक्टर का कॉल आया, जिसने उनकी तबीयत के बारे में जानकारी ली। इस पहल को भी लोगों ने काफी सराहा।

कुछ लोगों ने सरकार से भी उठाए सवाल

जहां बड़ी संख्या में लोगों ने Blinkit की तारीफ की, वहीं कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि ऐसी बुनियादी सुविधाएं निजी कंपनियों के बजाय सरकार की ओर से आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए।

उनका कहना था कि इमरजेंसी एम्बुलेंस जैसी सेवाएं हर नागरिक तक सुलभ और किफायती होना जरूरी है।

Blinkit ने भी दिया जवाब

वीडियो पर मिली तारीफ के बाद Blinkit ने भी कमेंट सेक्शन में प्रतिक्रिया दी और दिल वाले इमोजी के साथ यूजर्स का आभार जताया।

इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि सही समय पर मिली मदद किसी की जिंदगी बचाने में कितनी अहम भूमिका निभा सकती है।

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तूफान में गिरा आंगन का पेड़, 85 साल के बुजुर्ग को बना गया लाखों का मालिक

तेज बारिश और आंधी के बाद पेड़ों का गिरना आमतौर पर नुकसान की खबर लेकर आता है, लेकिन बेंगलुरु के 85 वर्षीय एनजी केसरी की कहानी बिल्कुल अलग है। उनके घर के आंगन में करीब 40 साल से खड़ा एक चंदन का पेड़ तूफान में गिर गया, जो पहली नजर में एक बड़ी क्षति लग रही थी। लेकिन यही पेड़ बाद में उनके लिए किस्मत बदलने वाला साबित हुआ। वर्षों तक प्यार और जिम्मेदारी से इस पेड़ की देखभाल करने वाले केसरी को इसके बदले करीब 28 लाख रुपये मिले।

इतना ही नहीं, पेड़ के संरक्षण और नियमों का पालन करने के लिए उन्हें राज्य स्तर पर सम्मान भी मिला। यह कहानी बताती है कि प्रकृति की देखभाल और धैर्य का फल कई बार बेहद खास तरीके से मिलता है।

अपने आप उगा था चंदन का पौधा, प्यार से बनाया पेड़

करीब चार दशक पहले केसरी के घर के आंगन में चंदन का एक छोटा-सा पौधा अपने आप उग आया था। उन्होंने उसे हटाने के बजाय उसकी देखभाल करने का फैसला किया।

धीरे-धीरे वह छोटा पौधा एक विशाल चंदन के पेड़ में बदल गया। पेड़ की खुशबू आसपास के लोगों का ध्यान खींचने लगी और उसकी कीमत बढ़ने के साथ खतरा भी बढ़ गया।

चोरों से बचाने के लिए लगाया लोहे का सुरक्षा घेरा

चंदन की लकड़ी की कीमत और मांग को देखते हुए पेड़ पर तस्करों और लकड़ी चोरों की नजर पड़ने लगी। केसरी ने पेड़ की सुरक्षा के लिए उसके चारों ओर मजबूत लोहे का घेरा लगवा दिया।

उन्होंने कई वर्षों तक अपनी मेहनत और सतर्कता से इस अनमोल पेड़ को सुरक्षित रखा।

तूफान ने गिराया पेड़, लेकिन केसरी ने नहीं तोड़ा नियम

जून में भारी बारिश और तेज हवाओं के दौरान पास का एक बड़ा पेड़ गिर गया, जिसकी चपेट में आकर चंदन का पेड़ भी जमीन पर आ गया।

इतना कीमती पेड़ मिलने के बाद भी केसरी ने खुद उसे बेचने या काटने की कोशिश नहीं की। उन्होंने तुरंत वन विभाग को इसकी जानकारी दी और सभी कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा किया।

एक टन वजन वाली चंदन की लकड़ी बनी बड़ी कमाई

वन विभाग की जांच के बाद पता चला कि गिरे हुए चंदन के पेड़ का वजन करीब एक टन था। इसके बाद लकड़ी को सरकारी चंदन डिपो, मैसूर भेजा गया। बाद में इसे कर्नाटक सोप्स एंड डिटर्जेंट्स लिमिटेड (KSDL) ने खरीदा, जो चंदन आधारित उत्पादों के लिए जानी जाती है।

इस बिक्री से केसरी को करीब 28 लाख रुपये की राशि मिली।

पैसों के साथ मिला बड़ा सम्मान

केसरी के लिए यह सिर्फ आर्थिक लाभ नहीं था। चंदन के पेड़ को इतने लंबे समय तक सुरक्षित रखने और संरक्षण के प्रति उनकी जिम्मेदारी को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने उन्हें ‘चंदन शिरोमणि’ पुरस्कार से सम्मानित किया।

धैर्य और संरक्षण की मिसाल बनी कहानी

एनजी केसरी की कहानी बताती है कि प्रकृति की देखभाल और धैर्य का फल कभी-कभी अप्रत्याशित रूप से मिलता है। जिस पेड़ के गिरने को शुरुआत में नुकसान माना जा रहा था, वही पेड़ वर्षों की मेहनत के बाद उनके लिए सम्मान और बड़ी उपलब्धि लेकर आया।

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पत्थरों के हाथियों का एक ऐसा राज, जो लोगों को खींच लाता है फेमस हाइलैंड्स डेस्टिनेशन की ओर!

फेमस हाइलैंड्स की खूबसूरत वादियों में एक ऐसी कहानी छिपी है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है। यहां पर पत्थर जैसे दिखने वाले हाथियों को लेकर एक अनोखी लोककथा सुनने को मिलती है। कहा जाता है कि यह एक अधूरी प्रेम कहानी है। आइए जानते हैं इस रहस्य से जुड़ी दिलचस्प बातें:

1. हाथी जैसे पत्थर के स्ट्रक्चर

Lần trở lại thăm NÚI ĐÁ VOI MẸ - Xã Yang Réh, huyện Krông ...

मध्य हाइलैंड्स (जैसे श्रीलंका के पहाड़ी क्षेत्र) में कुछ जगहों पर बड़े-बड़े पत्थरों से बनी हाथी जैसे स्ट्रक्चर मिलते हैं। ये नेचुरल चट्टानें भी हो सकती हैं या इंसानो की बनायीं गई। देखने पर ऐसा लगता है जैसे ये किसी बहुत कहानी का हिस्सा हों। यह दिखने में इतनी असली लगती है कि लोग इन्हें देखकर हैरान रह जाते हैं।

 

2. पॉपुलर “प्रेम कहानी”

Elephanta Caves: A Rendezvous With History on the Island of Shiva - Roaming With Roads

वहां के लोकल लोगों के बीच एक कहानी चलती है कि ये दो हाथी प्रेम में थे, लेकिन किसी कारण से वे हमेशा के लिए पत्थर बन गए। यह कहानी पूरी तरह लोककथा पर बेस्ड है। लोग इसे भावनात्मक और रहस्यमय अंदाज में सुनाते हैं। यह कहानी समय के साथ और भी पॉपुलर हो गई है।

3. नेचर या ह्यूमन क्रिएशन?

Elephant Rock Mountain and things you should discover - DonGanh Homestay

साइंस की नजर से देखा जाए तो कई ऐसे स्ट्रक्चर नेचुरल erosion (घिसाव) से बने होते हैं, जबकि कुछ पुरानी मूर्तियां मानव सभ्यता के आर्ट का हिस्सा हो सकती हैं। अभी तक इन स्ट्रक्चर की पूरी तरह चेकिंग नहीं हुई है। यही रहस्य इसे और भी दिलचस्प बनाता है।

 

4. टूरिस्ट अट्रैक्शन

 

The Legend of the Largest Monolith in Vietnam | Vietnam Times

इन रहस्यमय पत्थर स्ट्रक्चर को देखने के लिए टूरिस्ट दूर-दूर से आते हैं। गाइड इन्हें रोमांचक कहानियों के साथ जोड़कर बताते हैं, जिससे जगह और भी अट्रैक्टिव लगती है। लोग यहां फोटो और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं।

5. संस्कृति और मान्यताएं

The mysterious 'love story' of the stone elephants in the Central Highlands.

लोकल कल्चर में हाथियों को शक्ति, प्रेम और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इन पत्थर के स्ट्रक्चर को लोग पवित्र और रहस्यमय मानते हैं। कई लोग यहां आकर प्रार्थना और परंपरागत रीति-रिवाज भी करते हैं।

6. रोमांटिक सिंबल जैसी कहानी

 

Elephant in the Rock, by Eknath Easwaran

“पत्थर के हाथियों की प्रेम कहानी” असल में एक सिंबॉलिक कहानी है, जो प्रेम की स्थायित्व और अमरता को दिखाती है—कि सच्चा प्यार कभी खत्म नहीं होता। यही कारण है कि यह कहानी लोगों के दिल को छू जाती है। इसे अक्सर प्रेम की ताकत से जोड़कर देखा जाता है।

7. आज की पहचान

Yang Tao" Images – Browse 33 Stock Photos, Vectors, and Video | Adobe Stock

आज यह कहानी टूरिस्ट और लोककथाओं का हिस्सा बन चुकी है। लोग इसे रोमांच और रहस्य के रूप में सुनना और साझा करना पसंद करते हैं, भले ही इसका हिस्टोरिकल एविडेंस साफ न हो। सोशल मीडिया ने इसे और ज्यादा वायरल बना दिया है।

यह रहस्यमय कहानी भले ही लोककथाओं और कल्पनाओं पर बेस्ड हो, लेकिन इसकी वजह से यह जगह और भी खास बन जाती है। पत्थर के हाथियों की यह कथा प्रेम और रहस्य का सुंदर प्रतीक मानी जाती है। आज यह कहानी टूरिस्ट के घूमने का कारण बनी हुई है। यही इसे एक अनोखी और यादगार जगह बनाती है।

Monsoon Health Tips: बारिश के मौसम के लिए जानें खास 7 डाइट प्लान और इम्युनिटी बढ़ाने वाले घरेलू उपाय

A photo providing information on a diet plan for staying healthy during the rainy season

Monsoon and Health: स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन, नियमित व्यायाम, व्यक्तिगत स्वच्छता और मच्छरों से बचाव जैसी आदतें अपनाकर कई मौसमी बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही यदि तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते, लगातार कमजोरी या उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय रहते डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।ALSO READ: Monsoon health tips: सावधान! बारिश में बीमारियों के खतरे से कैसे बचाएं खुद को, ये लक्षण दिखें तो ना करें नजरअंदाज

 

अगर आप जानना चाहते हैं कि मानसून में क्या खाएं, किन बातों का ध्यान रखें, इम्यूनिटी कैसे मजबूत करें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के आसान उपाय क्या हैं, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगा। यहां आपको मानसून में स्वस्थ और सक्रिय रहने के लिए जरूरी स्वास्थ्य टिप्स, सावधानियां और विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए महत्वपूर्ण उपाय विस्तार से बताए गए हैं।

 

यहां जानें मानसून डाइट प्लान

 

* सुबह की शुरुआत

गुनगुना पानी पिएं।

नाश्ते में पोहा, दलिया, ओट्स, मूंग दाल चीला या इडली जैसी हल्की और पौष्टिक चीजें लें।

मौसमी फलों का सेवन करें, लेकिन उन्हें अच्छी तरह धोकर खाएं।

 

* दोपहर का भोजन

दाल, रोटी, चावल और मौसमी सब्जियों का संतुलित भोजन करें।

दही की जगह यदि मौसम या स्वास्थ्य के अनुसार उपयुक्त लगे तो छाछ या अन्य हल्के विकल्प लें।

अधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन सीमित रखें।

 

* शाम का नाश्ता

भुना चना, मखाना, स्प्राउट्स या सूप जैसे हल्के विकल्प चुनें।

चाय के साथ तले हुए स्नैक्स की बजाय पौष्टिक नाश्ता लें।

 

* रात का खाना

हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करें।

रात में बहुत देर से भोजन करने से बचें।

 

* इम्युनिटी बढ़ाने वाले घरेलू उपाय

1. हल्दी वाला दूध

हल्दी में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा का समर्थन करने में सहायक माने जाते हैं।

 

2. अदरक और तुलसी की चाय

अदरक और तुलसी से बनी गर्म चाय गले को आराम पहुंचा सकती है और मौसम बदलने के दौरान आरामदायक महसूस कराने में मदद कर सकती है।

 

3. विटामिन C युक्त खाद्य पदार्थ

आंवला, अमरूद, संतरा और नींबू जैसे खाद्य पदार्थ विटामिन C के अच्छे स्रोत हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली के सामान्य कार्य में भूमिका निभाते हैं।

 

4. पर्याप्त पानी पिएं

प्यास कम लगने पर भी दिनभर पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीते रहें।

 

5. पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम

रोज 7–8 घंटे की नींद लें और कम से कम 30 मिनट योग, वॉक या हल्की एक्सरसाइज करें।

 

6. प्रोटीन युक्त आहार लें

दालें, पनीर, अंडे (यदि आप खाते हों), सोया और अन्य प्रोटीन स्रोत शरीर के संतुलित पोषण में मदद करते हैं।ALSO READ: Health Benefits of Banana: कच्चे और पके केले में कौन कौनसे विटामिन होते हैं?

 

* स्वच्छता का रखें ध्यान

बाहर से आने के बाद हाथ धोएं।

गीले कपड़े तुरंत बदलें।

घर के आसपास पानी जमा न होने दें, ताकि मच्छरों का प्रजनन कम हो।

 

* किन चीजों से बचें?

 

* बासी या खुले में रखा भोजन।

* अस्वच्छ स्थानों का स्ट्रीट फूड।

*  बहुत अधिक तला-भुना और अत्यधिक मीठा भोजन।

* बिना आवश्यकता के एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का सेवन।

 

संक्षेप में कहा जाए तो मानसून में फिट रहने के लिए कोई एक 'जादुई' खाद्य पदार्थ या घरेलू नुस्खा पर्याप्त नहीं होता। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, अच्छी स्वच्छता और मच्छरों से बचाव-इन सभी का संयोजन बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि तेज बुखार, लगातार उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, गंभीर कमजोरी या डेंगू, मलेरिया अथवा चिकनगुनिया जैसे संक्रमण के लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Monsoon Health Tips: बारिश में फिट कैसे रहें?

 

गोल्डन टेंपल में निक्कर पहनकर पहुंचे विदेशी कपल को रोका,VIDEO:माथा टेकने जा रहे थे, सिख ने कहा- एंट्री फ्री, पहले पूरे कपड़े पहनो

अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल में निक्कर पहन कर माथा टेकने जा रहे विदेशी कपल को सिख ने रोक दिया। महिला और युवक दोनों ने निक्कर पहनी हुई थी। सिख ने उन्हें गेट पर रोका और नियमों के बारे में बताया। सिख ने बताया कि निक्कर पहनकर अंदर जाना मना है। इस दौरान विदेशी महिला ने टिकट के बारे में भी पूछा, जिस पर उसे बताया गया कि यहां एंट्री पूरी तरह फ्री है। दोनों को पूरे कपड़े पहनकर आने की सलाह दी। नियम समझने के बाद विदेशी महिला ने सहमति जताई। ये वीडियो 4 जुलाई का है। जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। गुरुघर की मर्यादा से अवगत कराने के लिए सूचना बोर्ड लगाया गया है। इन पर स्पष्ट लिखा है कि कैप, शॉर्ट पैंट (निक्कर), कैप्री, मोजे और मिनी स्कर्ट पहनकर प्रवेश की अनुमति नहीं है। श्रद्धालुओं से सिर ढकने और पूरे कपड़े पहनकर ही गुरुद्वारा साहिब में प्रवेश करने की अपील की गई है। अब पढ़ें वीडियो क्या है…
वीडियो में दिख रहा कि एक विदेशी महिला और उसके साथ मौजूद युवक गोल्डन टेंपल में प्रवेश करने की तैयारी कर रहे थे। तभी एक सिख ने उन्हें बताया कि गुरुद्वारा साहिब के अंदर निक्कर या हाफ पैंट पहनकर जाना मना है। उन्होंने समझाया कि दर्शन करने के लिए पूरे कपड़े या पजामा पहनना जरूरी है। बातचीत के दौरान विदेशी महिला ने पूछा कि क्या अंदर जाने के लिए किसी प्रकार का टिकट लेना पड़ता है। इस पर स्पष्ट किया कि गोल्डन टेंपल में प्रवेश पूरी तरह फ्री है और केवल गुरुघर की मर्यादा के अनुसार कपड़े पहनना जरूरी है। इसके बाद महिला ने अपने साथी की ओर इशारा करते हुए पूछा कि क्या उन पर भी यही नियम लागू होता है। सिख ने बताया कि यह नियम सभी श्रद्धालुओं और टूरिस्टों पर समान रूप से लागू होता है, चाहे वे किसी भी देश या धर्म से संबंध रखते हों। सिख ने दोनों को पास के बाजार से पायजामा या पूरे कपड़े खरीदने की सलाह भी दी। सिख और विदेशी महिला के बीच हुई बातचीत… सिख: “इनसाइड द गुरुद्वारा साहिब, प्लीज वियर द प्रॉपर पायजामा। (गुरुद्वारा साहिब के अंदर, कृपया पूरा पायजामा पहनें)
विदेशी महिला: ओके, वेल (अच्छा, ठीक है) सिख: मार्केट की तरफ इशारा करते हुए यू शुड ट्राय द मार्केट एंड बाय फ्रॉम देयर। देन यू कैन गो इनसाइड द गुरुद्वारा। (आप मार्केट जाकर वहां से खरीद सकती हैं। उसके बाद आप गुरुद्वारा साहिब के अंदर जा सकती हैं।)
विदेशी महिला: आई वॉज गोइंग देयर। व्हेयर आई बाय द टिकट? (मैं वहीं जा रही थी। मुझे टिकट कहां से मिलेगी?) सिख: आह नो, देयर इज नो टिकट। टिकट इज नो टिकट। यू शुड वियर द प्रॉपर क्लोथ्स, देन यू कैन गो। (अरे नहीं, यहां कोई टिकट नहीं है। कोई टिकट नहीं लगती। आपको बस सही कपड़े पहनने होंगे, फिर आप जा सकती हैं।)
विदेशी महिला: अपने साथी की तरफ इशारा करते हुए) ही इज फाइन?(क्या ये ठीक हैं?) सिख: नो, ही इज ऑल्सो… निक्कर इज नॉट अलाउड। दिस इज नॉट अलाउड। (नहीं, ये भी… निक्कर यहां अलाउड नहीं है। यह पहनना मना है।)
विदेशी महिला: ओके। (ठीक है।) सिख: यू वियर प्रॉपर पायजामा, फुल पैंट, देन यू कैन गो। (आप लोग पूरा पायजामा या फुल पैंट पहनें, फिर आप अंदर जा सकते हैं।)
विदेशी महिला: ओके। (ठीक है।) गोल्डन टेंपल में लगाया बोर्ड… ——— ये खबर भी पढ़ें…. गोल्डन टेंपल में भगवंत मान की फोटो वाले आईकार्ड उतरवाए अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल में शनिवार को नया विवाद हो गया। यहां मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत पंजाब के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान की तस्वीर वाले पहचान पत्र पहनकर पहुंचे श्रद्धालुओं के गले से ये पहचान पत्र उतरवाए गए। (पढ़ें पूरी खबर)

Viral Video: ‘लंदन में फोन छिपाकर चलती हूं, भारत में बिना डर के’, विदेशी महिला के इस वीडियो ने इंटरनेट पर मचाया धमाल

सोशल मीडिया पर इन दिनों विदेशी महिला टूरिस्ट का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में विदेशी महिला भारत में अपने घूमने के एक्सपीरिएंस को शेयर करती हुई नजर आ रही है। उसने बताया कि भारत के कई राज्यों की यात्रा के दौरान उसे सार्वजनिक जगहों पर मोबाइल इस्तेमाल करने में कोई डर नहीं लगा। वहीं इस मामले में भारत उन्हें लंदन से भी ज्यादा सेफ लगा। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं इस वीडियो पर लोगों ने अपना रिएक्शन भी दिया है।

डिजिटल क्रिएटर एम्मा ने बताया कि, केरल और मेघालय समेत भारत के कई राज्यों की यात्रा के दौरान उनका एक्सपीरिएंस काफी अच्छा रहा। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, “ये बात विवादित लग सकती है, लेकिन सच कहूं तो मुझे लंदन की तुलना में भारत में अपना फोन इस्तेमाल करने को लेकर कम चिंता हुई।”

सड़कों पर रिकॉर्ड की वीडियो

वीडियो में एम्मा भारत की सड़कों पर आराम से चलते हुए अपने फोन से व्लॉग रिकॉर्ड करती नजर आती हैं। वह बिना किसी डर के खुलेआम मोबाइल का इस्तेमाल करती दिखाई देती हैं। वीडियो पर लिखा था, “मैं भारत में अपना फोन हाथ में लेकर चल रही हूं।” इसके बाद वीडियो का दूसरा हिस्सा लंदन का है, जहां वह अपना फोन पहले सावधानी से बैग में रखती हैं और फिर उसे सेफ रखने के लिए मजबूती से हाथ में पकड़ लेती हैं।

फोन की नहीं थी चिंता

उन्होंने लिखा, “केरल, वर्कला, गुवाहाटी और मेघालय जैसी जगहों की यात्रा करने के बाद मेरी सोच पूरी तरह बदल गई। भारत आने से पहले मैंने जो बातें सुनी थीं, मेरा अनुभव उनसे बिल्कुल अलग रहा। मैं आराम से वीडियो शूट कर रही थी, खुलेआम अपना फोन इस्तेमाल कर रही थी और एक पल के लिए भी मुझे यह महसूस नहीं हुआ कि मुझे हर समय अपना सामान संभालकर रखना है।”

लंदन में फोन चोरी का डर

उन्होंने अपने इस अनुभव की तुलना लंदन की रोजमर्रा की जिंदगी से करते हुए लिखा, “वहीं दूसरी ओर लंदन में हालात बिल्कुल अलग हैं। वहां मुझे हमेशा फोन चोरी होने की चिंता रहती है। सच कहूं तो ऐसा लगता है जैसे मेरा फोन मेरे हाथ से चिपका हुआ हो, क्योंकि मैं उसे एक पल के लिए भी ढीला नहीं छोड़ती।” उन्होंने आगे लिखा, “हर जगह के अपने-अपने जोखिम होते हैं और यह सिर्फ मेरा निजी अनुभव है। मेरा यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि कहीं भी बिना सावधानी के घूमना चाहिए। लेकिन इतना जरूर कहना चाहूंगी कि इंटरनेट पर जो बातें दिखाई देती हैं, वे हमेशा पूरी सच्चाई नहीं बतातीं।”

लोगों ने पोस्ट पर किए कमेंट

उनकी पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही। वहीं इस तुलना पर लोग अपनी-अपनी राय रखी और अपने यात्रा के एक्सपीरिएंश भी शेयर किए। कई यूजर्स ने कहा कि उन्हें भारत के कई शहरों में खुलेआम फोन इस्तेमाल करने में सुरक्षित महसूस हुआ, वहीं कुछ लोगों का मानना था कि सुरक्षा हर शहर और इलाके के हिसाब से अलग हो सकती है। एक यूजर ने लिखा, “बिल्कुल सही… यूके में तो अब घड़ियां भी सुरक्षित नहीं हैं।” दूसरे यूजर ने कहा, “ये वीडियो शेयर करने के लिए धन्यवाद। आजकल चोरी के मामलों में यूरोप, भारत के मुकाबले ज्यादा असुरक्षित लगता है।”

एक दूसरे यूजर ने कहा, “भारत में ज्यादा समस्या स्कैम की है, सड़क पर फोन छीनने जैसी घटनाएं उतनी आम नहीं हैं, क्योंकि यहां ज्यादातर लोगों के पास पहले से अच्छे स्मार्टफोन हैं।” वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा, “ऐसा बिल्कुल नहीं है। मेरे एक दोस्त के भाई का फोन गुरुग्राम में सड़क पर चलते समय बात करते-बात करते छीन लिया गया था। हम भी सड़क पर चलते समय अपना फोन या हैंडबैग हमेशा सुरक्षित रखते हैं। मुझे लगता है कि यह पोस्ट सिर्फ ध्यान खींचने के लिए बनाई गई है।”

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8 साल के एक्सपीरियंस वाले SBI मैनेजर की CTC 35.25 लाख रुपये की पर इसका चौंकाने वाला ब्रेकअप और कैच हुआ वायरल

भारत में सरकारी नौकरी आज भी सुरक्षित करियर और अच्छी सैलरी की वजह से लोगों की पहली पसंद मानी जाती है। खासकर अगर आपकी नौकरी सरकारी बैंक में हो तो अलग ही बात होती है। हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के एक स्केल-3 मैनेजर की बताई जा रही सैलरी स्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे इस डाक्युमेंट में सालाना करीब 35.24 लाख रुपये की ग्रॉस सैलरी दिखाई गई है, लेकिन कई लोगों का कहना है कि इसकी पूरी तस्वीर कुछ अलग है। इसे देखने के बाद लोग सरकारी बैंक कर्मचारियों की सैलरी और उससे जुड़ी सुविधाओं को लेकर अलग-अलग राय दे रहे हैं।

यूजर ने पोस्ट किया सैलरी स्लिप

एक्स (X) पर शेयर की गई पोस्ट के कैप्शन में लिखा गया, “लोग अक्सर कहते हैं कि एसबीआई कर्मचारियों की जिंदगी पूरी तरह से सेटल होती है, लेकिन इस स्केल-3 मैनेजर की सैलरी स्लिप देखने के बाद आपकी सोच बदल सकती है।” पोस्ट करने वाले यूजर ने दावा किया कि, संबंधित कर्मचारी ने करीब आठ साल पहले एसबीआई में प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) के रूप में नौकरी शुरू की थी। बाद में पदोन्नति मिलने के बाद वह स्केल-3 मैनेजर बन गया। पोस्ट के साथ शेयर किए गए वित्त वर्ष 2025-26 के फॉर्म-16 के अनुसार, उसकी कुल वार्षिक ग्रॉस सैलरी 35,24,315.88 रुपये बताई गई है।

व्यक्ति ने कही ये बात

पोस्ट शेयर करने वाले व्यक्ति ने ये भी साफ किया कि ग्रॉस सैलरी को कर्मचारी की हर महीने मिलने वाली आय नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस रकम में लीव फेयर कंसेशन (LFC) एनकैशमेंट और लीव एनकैशमेंट शामिल हैं, जो सैलरी के बार-बार मिलने वाले हिस्से के बजाय एक बार या कभी-कभी मिलने वाले फायदे हैं। पोस्ट में आगे लिखा गया, “इसके अलावा, हर महीने आयकर, एनपीएस (NPS), ईपीएफ (EPF), होम लोन की ईएमआई, कार लोन और टू-व्हीलर लोन जैसी कई मदों में कटौती होती है। इसलिए फॉर्म-16 में दिखाई गई ग्रॉस सैलरी और हर महीने बैंक खाते में आने वाली वास्तविक रकम में काफी अंतर हो सकता है।”

सोशल मीडिया पर किया कमेंट

इस पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच नई बहस शुरू हो गई। एक यूजर ने लिखा, “फॉर्म-16 देखने में भले ही शानदार लगता हो, लेकिन हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी असली स्थिति बताती है। ग्रॉस सैलरी के बड़े आंकड़े हमेशा बैंक कर्मचारियों की वास्तविक कमाई नहीं दिखाते।” दूसरे यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा, “यही सबसे बड़ी बात है। हम अक्सर सिर्फ बड़े आंकड़े देखकर राय बना लेते हैं, जबकि टैक्स, कटौतियां, जिम्मेदारियां और आखिर में हाथ में आने वाली रकम को नजरअंदाज कर देते हैं।”

एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए लिखा, “आठ साल की नौकरी के बाद स्केल-3 पर करीब 2 लाख रुपये इन-हैंड सैलरी मिल रही है। मेरे हिसाब से यह काफी अच्छा पैकेज है। इतने ही अनुभव वाले कई क्लास-ए गजेटेड अधिकारियों से भी यह बेहतर माना जा सकता है।”

Viral Post: बेंगलुरु में टीचर की सिर्फ 6000 रुपये सैलरी? वायरल पोस्ट पर लोगों ने जताई हैरानी

Viral Post: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। पोस्ट में एक प्राइवेट स्कूल में काम करने वाली टीचर की सैलरी सुनकर हर कोई हैरान है। सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में एक यूजर ने बताया की बेंगलुरु के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने वाली टीचर की कथित 6,000 रुपये मासिक सैलरी मिलती है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। व्यक्ति के इस दावे के बाद लोगों के बीच प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों के कम वेतन और बड़े शहरों में लगातार बढ़ रही खर्चों को लेकर बहस शुरू हो गई है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा पोस्ट

सोशल मीडिया एक्स (X) पर मोहम्मद नौसाथ नाम के एक यूजर ने दावा किया कि, उनकी भाभी को बेंगलुरु के एक प्री-स्कूल में टीचर की नौकरी मिली है। उन्होंने बताया कि उन्हें हर महीने केवल 6,000 रुपये वेतन देने की बात कही गई। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मेरी भाभी को अभी-अभी बेंगलुरु के एक प्ले-स्कूल/किंडरगार्टन में टीचर की नौकरी मिली है और उन्हें हर महीने सिर्फ 6,000 रुपये वेतन मिलेगा। एक तरफ स्कूलों की फीस लगातार बढ़ रही है, जबकि दूसरी तरफ शिक्षकों को इतनी कम सैलरी दी जा रही है। आखिर कोई भी व्यक्ति किसी मेट्रो शहर में 6,000 रुपये महीने में कैसे गुजारा कर सकता है?” इसके साथ ही उन्होंने लोगों से इस मुद्दे पर अपनी राय भी मांगी।

लोगों ने किए कमेंट

ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यूजर ने इस पर तरह-तरह के रिएक्श दे रहे हैं। कई यूजर्स ने प्राइवेट स्कूलों में टीचरों को मिलने वाले कम वेतन, काम करने की परिस्थितियों और शिक्षा क्षेत्र में वेतन व्यवस्था को लेकर खुलकर अपनी राय रखी। कई यूजर्स ने इतनी कम सैलरी पर कर्मचारियों से की जाने वाली उम्मीदों पर सवाल उठाए। एक व्यक्ति ने व्यंग्य करते हुए लिखा कि 6,000 रुपये महीने में पहले किराया, बिजली-पानी के बिल, पढ़ाई और राशन का खर्च निकाल लें, फिर अगर कुछ पैसे बच जाएं तो परिवार के साथ बाहर खाना भी खा सकते हैं।

इन दावों को कुछ लोगों ने किया खारिज

वहीं कई लोगों ने इस दावे पर भरोसा नहीं किया। उनका कहना था कि बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में किसी शिक्षक को सिर्फ 6,000 रुपये महीने की सैलरी मिलना यकीन करना मुश्किल है। एक यूजर ने टिप्पणी की कि दक्षिण भारत के कई इलाकों में निर्माण कार्य करने वाले मजदूर भी इससे कहीं अधिक कमाई कर लेते हैं, इसलिए इस दावे की सच्चाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है। एक अन्य यूजर ने इस कथित वेतन की तुलना दूसरे क्षेत्रों में मिलने वाली शुरुआती नौकरियों की सैलरी से की। उनका कहना था कि कई संस्थानों में हेल्पर और सपोर्ट स्टाफ को भी इससे अधिक वेतन मिलता है। ऐसे में एक शिक्षक को सिर्फ 6,000 रुपये महीने मिलने का दावा कई लोगों को अविश्वसनीय लगा।

बाइकर की मदद करना इस शख्स को पड़ा भारी, कुछ ही सेकेंड्स में गंवाया 1 लाख रुपये का फोन, ऐसे में कोई क्यों हेल्प करे?

ऐसी दुनिया में जहां लोगों को अक्सर जरूरतमंद अजनबियों की मदद करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, हैदराबाद की एक घटना ने लोगों को मदद के लिए आगे बढ़ने से पहले दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया है। सरूरनगर का एक CCTV फुटेज वायरल हुआ है, जिसमें दो लोग सड़क के बीचों-बीच गिरने का नाटक करते हुए एक राहगीर का ध्यान भटकाते हैं और फिर उसका महंगा मोबाइल फोन चुरा लेते हैं।

क्लिप में देखा जा सकता है कि काले कपड़ों में एक व्यक्ति ने U-टर्न लिया और सड़क पार कर रहे राहगीर की ओर आया। कुछ ही पल बाद, बाइकर ने सड़क पर गिरने का नाटक किया, जैसे उसकी बाइक का बैलेंस बिगड़ गया हो। उसे परेशान होते देख, पास ही चल रहा व्यक्ति तुरंत उसकी मदद के लिए उसके पास पहुंचा।

अनजान व्यक्ति ने उसकी बाइक पकड़कर और उसे उठाने में मदद करने की कोशिश की। तभी, बाइकर के साथ आया एक और व्यक्ति उन दोनों के पास पहुंचा। जैसे ही मदद करने के लिए वह व्यक्ति झुका, संदिग्धों में से एक ने ध्यान भटकने का फायदा उठाया और बड़ी आसानी से उसका मोबाइल फ़ोन चुरा लिया, जो उसने अपनी शर्ट की सामने वाली जेब में रखा था। बताया जा रहा है कि फ़ोन की कीमत 1 लाख रुपये थी।

कुछ ही सेकंड में, वे दोनों आदमी वापस मोटरसाइकिल पर बैठे और तेज़ी से भाग निकले, जबकि एक राहगीर उन्हें जाते हुए देख रहा था। जब वह आगे बढ़ रहा था, तो उसने अपनी जेब पर हाथ रखा और तभी उसे पता चला कि उसका स्मार्टफ़ोन चोरी हो गया है। वह घबरा गया और ज़मीन पर उसे ढूंढने लगा, फिर उसे एहसास हुआ कि उन बाइक सवारों ने ही उसे चुराया होगा, इसलिए वह उनके पीछे भागा। यह पूरी घटना एक मिनट से भी कम समय में हुई, जिससे पता चलता है कि उन दोनों ने कितनी तेजी से चोरी को अंजाम दिया।

इस घटना से लोग परेशान हैं और कई लोग दूसरों को आपातकालीन स्थितियों में भी अजनबियों की मदद न करने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि उन्हें पता नहीं होता कि उनकी मंशा क्या हो सकती है। वहीं, कुछ लोगों ने दूसरों से अपने आस-पास के माहौल को लेकर सतर्क रहने को कहा है।

एक यूज़र ने कहा, “इसी वजह से लोगों ने सड़क पर अजनबियों की मदद करना बंद कर दिया है। सबसे बुरी बात यह है कि ऐसे कुछ लोगों की वजह से, भविष्य में किसी ऐसे व्यक्ति को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है जिसे सच में मदद की ज़रूरत हो।”

एक और यूज़र ने लिखा, “ऐसे ही लोगों की वजह से लोग ज़रूरतमंदों की मदद करने से डरते हैं। उन्हें न सिर्फ़ चोरी के लिए, बल्कि धोखाधड़ी के लिए भी गिरफ्तार किया जाना चाहिए। किसी और ने कहा, “कोई बात नहीं, एक दिन कर्मा उन्हें इतनी जोरदार चोट देगा कि वे ज़िंदगी में हिल भी नहीं पाएंगे।