शहबाज को ट्रंप ने बड़ा बना दिया

संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा की सालाना बैठक में आमतौर पर कुछ सब्सटेंटिव नहीं होता है। वहां से कोई देश कुछ हासिल करके नहीं लौटता है। यूएनजीए में कुल जमा हासिल नेताओं का भाषण होता है। इसी की चर्चा होती है और उसी में सूत्र खोजे जाते हैं। भारत की ओर से इस बार प्रधानमंत्री नहीं गए थे। भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस जयशंकर ने किया था। इसलिए पहले से ही तय लग रहा था कि भारत का प्रतिनिधित्व बहुत हाईलाइट नहीं होगा। लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाईलाइट चुरा ली। ऊपर से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दोपक्षीय वार्ता के लिए अमेरिका में थे। इसलिए लाइमलाइट शी पर था। बाद में राष्ट्रपति ट्रंप ने शहबाज का भाव भी बढ़ा दिया।

असल में शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में भारत को लेकर जो अनाप शनाप बोला वह अपनी जगह है। लेकिन उन्होंने पिछले साल मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए खुले दिल से राष्ट्रपति ट्रंप की तारीफ की और उन्होंने कहा कि समय से दखल देकर राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्ध रूकवाया और दक्षिण एशिया के करोड़ों लोगों की जान बचाई। ध्यान रहे भारत इस बात से इनकार करता है कि अमेरिका ने युद्ध रुकवाया लेकिन शहबाज बार बार दोहराते हैं। पहले तो ट्रंप भी कहते थे। इस बार भी ट्रंप ने शहबाज शरीफ के भाषण का यह वाला हिस्सा निकाल कर उसे अपने ट्रूथ सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर साझा किया। इससे शहबाज की हैसियत बढ़। ट्रंप ने राष्ट्रपति शी को भी गले लगाया और उनके हिसाब से समझौते किए। यह दोनों घटनाक्रम भारत के लिए चिंता की बात होनी चाहिए।

Iran-US War Update: ‘ईरान में लोग मर रहे हैं, पैसे के लिए खोलना चाहता है होर्मुज’; ट्रंप का बड़ा दावा, तेहरान ने किया पलटवार

Iran-US War Update: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार (26 सितंबर) को दावा किया कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना चाहता है, क्योंकि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के चलते उसके पास पैसे नहीं आ रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने खुद ही अपने लिए मुश्किल खड़ी कर ली है। मीडिया रिपोर्टर्स से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “वे तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना चाहते हैं। जानते हैं क्यों? क्योंकि वे मुश्किल में हैं। उनके पास पैसे नहीं आ रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपना पैसा होर्मुज से मिलता है। इसलिए उन्होंने खुद को ही मात दे दी।”

ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से पूरी दुनिया के लिए परेशानी पैदा हुई। लेकिन अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर अब तक की सबसे बड़ी नाकेबंदी लागू कर दी। उन्होंने इसे ‘स्टील की दीवार’ बताते हुए कहा कि इसके कारण ईरान के पास अब धन का प्रवाह नहीं हो रहा है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान ने सोचा था कि जलडमरूमध्य बंद करने से दुनिया के लिए समस्या खड़ी होगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने जवाब में जलडमरूमध्य को ईरान के लिए बंद कर दिया। जबकि अन्य देशों को इसका इस्तेमाल करने की अनुमति दी।

ईरान के शांति प्रस्ताव को ट्रंप ने ठुकराया

ट्रंप की यह टिप्पणी एक दिन बाद आई, जब उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने कतर के मध्यस्थों के जरिए ईरान की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान ने इस प्रस्ताव की घोषणा इसी सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान की थी। इसके बाद ईरान ने रविवार को कहा कि अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष का समाधान केवल कूटनीति के जरिए ही संभव है। तेहरान ने यह भी कहा कि वह अभी अपने प्रस्ताव पर अमेरिका के आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है।

क्या था ईरान का प्रस्ताव?

न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने प्रस्ताव दिया था कि अगर अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी हटाता है, तेहरान तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में छूट देगा। साथ ही अगर सभी मोर्चों पर युद्धविराम लागू होता है, तो ईरान सात दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने के लिए तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि ट्रंप द्वारा प्रस्ताव खारिज किए जाने की बात अभी आधिकारिक तौर पर तेहरान तक नहीं पहुंची है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा रूट्स में से एक है। इसके जरिए बड़ी मात्रा में तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है। जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में मौजूदा युद्ध 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ।

इसके बाद ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया। इसके बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारी उथल-पुथल और कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली।

जयशंकर ने रूस और ईरान के विदेश मंत्रियों से की मुलाकात

रूस और ईरान से तेल एवं गैस खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध से संबंधित एक नए कानून पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षर किए जाने के कुछ दिन बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के इतर रूस और ईरान के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान और रूस के अपने समकक्षों से मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय मुद्दों, ब्रिक्स समूह में सहयोग और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष समेत विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात कर द्विपक्षीय मुद्दों और ब्रिक्स समूह में सहयोग पर चर्चा की।

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ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। भारत ने इस महीने की शुरुआत में ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी भाग लिया था।

Gorakhpur Rain Alert: गोरखपुर में मूसलाधार बारिश का कहर! 4 लोगों की मौत, सांसद रवि किशन के आवास में भी घुसा पानी

Gorakhpur Rain Alert: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में शनिवार (26 सितंबर) को तेज हवा और भारी बारिश के कारण अलग-अलग स्थानों पर पेड़ गिरने से चार लोगों की मौत हो गई। वहीं, बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में 14 अन्य लोग घायल हो गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि जिले के कैंपियरगंज थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव के गजरहिया टोला में शाम करीब चार बजे एक पेड़ झोपड़ी पर गिर गया। इस हादसे में सुभाष (55), महानंद की पत्नी ज्ञानमती देवी (45) और किशन प्रजापति (13) की मौत हो गई। जबकि राममिलन एवं सिरजावती नाम की महिला गंभीर रूप से घायल हो गए।

अधिकारियों के अनुसार, तेज हवा के दौरान कई ग्रामीण गांव के बाहरी हिस्से में बनी इस झोपड़ी में शरण लिए हुए थे। उन्होंने बताया कि पेड़ गिरने के बाद स्थानीय लोगों ने मलबा हटाकर घायलों को बाहर निकाला। कैंपियरगंज के उपजिलाधिकारी (SDM) और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी की। एक अन्य घटना में गगहा थाना क्षेत्र के गजपुर पुलिस चौकी के पास महुआ का पेड़ गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई।

80 साल पुराना पेड़ गिरा, पूरा परिवार चपेट में आया

पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान गगहा निवासी भीम कुमार विश्वकर्मा के रूप में हुई। पुलिस के मुताबिक, करीब साढ़े तीन बजे धर्मशाला क्षेत्र के जटेपुर दक्षिणी मोहल्ले की काली मंदिर गली में करीब 80 वर्ष पुराना एक पेड़ एक मकान पर गिर गया। पुलिस ने बताया कि इस हादसे के समय घर में करीब 12 लोग मौजूद थे। पुलिस के मुताबिक, पेड़ गिरने से सुरेश, सुभाष, मुन्नी और चुन्नी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पुलिस ने बताया कि पेड़ गिरने से बिजली के कई खंभे भी क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बाधित रही। जिलाधिकारी दीपक मीणा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SP) कौस्तुभ ने जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और सहायता कार्य जारी है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार अगले कुछ दिनों तक गोरखपुर में मूसलाधार बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रहने की आशंका है।

सांसद रवि किशन के आवास में घुसा पानी

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण गोरखपुर शहर में कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। इसी दौरान बीजेपी सांसद रवि किशन के आवास में भी बारिश का पानी पहुंच गया। इसके बाद रवि किशन खुद बाहर निकले और शहर में जलभराव की स्थिति तथा जल निकासी व्यवस्था का जायजा लिया। गोरखपुर में लगातार बारिश के बीच प्रशासन और नगर निगम की टीमें जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखने में जुटी हैं। मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने शनिवार को शहर के प्रमुख नाले का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ जल निकासी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

भारी बारिश के कारण शहर के निचले इलाकों में भी जलभराव की समस्या सामने आई है। इससे पहले लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन ने 26 सितंबर को क्लास 1 से 12वीं तक के सभी स्कूल बंद रखने का आदेश जारी किया था। जलभराव की समस्या को लेकर स्थानीय लोगों ने भी नगर निगम के अधिकारियों से शिकायतें की हैं। विभिन्न इलाकों में जल निकासी की व्यवस्था की निगरानी की जा रही है। लोगों को जलभराव की वजह से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

रवि किशन ने जलभराव का निरीक्षण किया

भारी बारिश के बाद गोरखपुर के सांसद रवि किशन ने शहर के जलभराव वाले इलाकों का निरीक्षण किया। रवि किशन ने कहा, “15 से 19 साल में कभी किसी ने ऐसी बरसात नहीं देखी… पूरे शहर में काफी पानी भर गया। अब पानी काफी जगह से उतर रहा है… प्रशासन की तैयारी हमेशा रहती है… महादेव से प्रार्थना है कि बरसात न हो और अगर बरसात नहीं होती है तो यह कल-परसों तक स्थिति सामान्य हो जाएगी।”

अभिनेता से नेता बने बीजेपी सांसद ने आगे कहा, “अगर बरसात होती है तो आप सभी लोग कृपया बचें और घर से न निकलें…आकाशीय बिजली भी गिर रही है। कैंपियरगंज में पेड़ गिरने से 3 लोगों की मौत हुई है। उनके परिवार के प्रति संवेदना है… हम लोग 24 घंटा मुस्तैद हैं, प्रशासन मुस्तैद है तो पैनिक होने की जरूरत नहीं है।”

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‘आतंकवाद का सीरियल प्रैक्टिशनर है पाकिस्तान’; UNGA में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शहबाज शरीफ को जमकर धोया

India-Pakistan Dispute: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार (26 सितंबर) को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए पाकिस्तान पर जमकर तीखा हमला बोला। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसे ‘आतंकवाद का सीरियल प्रैक्टिशनर’ करार दिया। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को सामान्य बनाने या उसके लिए किसी तरह की छूट मांगने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद लंबे समय से वैश्विक शांति के लिए खतरा बना हुआ है। उन्होंने विशेष रूप से राज्य प्रायोजित आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती बताया।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में विश्व नेताओं से कहा, “ऐसी गतिविधियों में शामिल सरकारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। आतंकवाद के प्रति हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति में किसी तरह की ढील नहीं होनी चाहिए। खास तौर पर आतंकवाद के वित्तीय पहलुओं को उजागर किया जाना चाहिए और उनका मुकाबला किया जाना चाहिए।”

शहबाज पर जयशंकर का सीधा निशाना

पाकिस्तान का नाम लिए बिना जयशंकर ने कहा, “कल आतंकवाद का एक सीरियल प्रैक्टिशनर इस महासभा के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रहा था। आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से बचने के लिए तर्क दिए गए। ऐसा नहीं चल सकता।”

विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत को आतंकवादी हमलों से अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। वह इसका इस्तेमाल करेगा। उन्होंने कहा कि दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ सह-अस्तित्व में नहीं रह सकते। जयशंकर ने कहा, “आतंकवाद को अंजाम देने वाले को ही अपना रास्ता सुधारना होगा।”

पाक PM के नापाक बयान के बाद आया पलटवार

जयशंकर की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के शुक्रवार को UNGA में दिए भाषण के एक दिन बाद आई। शरीफ ने अपने संबोधन में सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, बाधित करने या मोड़ने की किसी भी कोशिश को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। शहबाज शरीफ ने UNGA में एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा भी उठाया।

भारत ने ‘राइट टू रिप्लाई’ में भी दिया जवाब

भारत की ओर से राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने शरीफ के बयानों को अजीब करार दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा का ध्यान पाकिस्तान पर लगे उन आरोपों की ओर दिलाया, जिनमें उस पर हाई-प्रोफाइल आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगाया जाता रहा है।

गहलोत ने विशेष रूप से 9/11 हमलों के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन का जिक्र किया और कहा कि वह पाकिस्तान में रह रहा था। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच केंद्रीय मुद्दा पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद की लंबे समय से चली आ रही नीति है। गहलोत ने कहा कि भारत ने पिछले वर्ष यह स्पष्ट कर दिया था कि आतंकवादियों के लिए न तो कोई सुरक्षित ठिकाना होगा और न ही छिपने की कोई जगह।

‘अंतहीन युद्ध का अब अंत होना चाहिए’

भारत ने खाड़ी क्षेत्र में अशांति पर चिंता जताने के साथ यूक्रेन में संघर्ष को भी समान रूप से चिंताजनक बताते हुए कहा कि अंतहीन युद्ध का अब अंत होना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र की आम चर्चा को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “इस साल हम खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष देख रहे हैं, जिससे पहले से ही मुश्किल हालात और बिगड़ रहे हैं। जारी तनाव को लेकर हम बेहद चिंतित हैं।” उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और नाविकों को निशाना बनाए जाने को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।

जयशंकर ने कहा, “भारत सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऊर्जा तथा व्यापार के निर्बाध प्रवाह को बनाए रखने का आह्वान करता है।” उन्होंने कहा कि यूक्रेन में संघर्ष समान रूप से चिंताजनक है। जयशंकर ने अगस्त में बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा, “अंतहीन युद्ध का अब अंत होना चाहिए।”

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उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी हिंसा पर भी चिंता जताई। जयशंकर ने इजराइल-फलस्तीन संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा, “पश्चिम एशिया या मध्य पूर्व में भी तनाव और हिंसा दुर्भाग्य से जारी है। हमारा दृढ़ विश्वास है कि स्थायी और दीर्घकालिक शांति के लिए दो-राष्ट्र समाधान जरूरी है।” जयशंकर ने कहा, “इस बीच, भारत फलस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत प्रयासों में योगदान दे रहा है।”

शहबाज बोले-भारत सिंधु का पानी रोकने की गलती नहीं करे:यह जंग शुरू करने के बराबर; कश्मीर को गले की नस बताया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को UN में भारत को सिंधु नदी का पानी न रोकने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि पानी रोकने की कोशिश को ‘युद्ध की कार्रवाई’ माना जाएगा। भारत को इसे लेकर कोई गलती नहीं करनी चाहिए। हर बार की तरह एक बार फिर से पाकिस्तान ने UN में कश्मीर मुद्दा उठाया और इसे UN के नियमों के मुताबिक सुलझाने की बात कही। शहबाज ने कहा कि कश्मीर उनके लिए जगुलर वेन (गर्दन की नस) है। भारत यहां पर लोगों के साथ ज्यादती कर रहा है।
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आतंकी हाफिज पर सवाल से भागे पाकिस्तान PM:शहबाज UN में पत्रकारों ने पूछा- आतंकियों को पनाह देना कब बंद करेंगे; कोई जवाब नहीं दिया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पहुंचे। यहां पत्रकारों ने उनसे लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद को लेकर सवाल किया, लेकिन शहबाज सवालों को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ गए। UN मुख्यालय में दाखिल होते समय पत्रकारों ने शहबाज से पूछा, “प्रधानमंत्री, आप आतंकियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?” शहबाज ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया। बाहर निकलते समय पत्रकारों ने फिर पूछा कि पाकिस्तान हाफिज सईद पर कार्रवाई कब करेगा, लेकिन शहबाज ने दोबारा कोई जवाब नहीं दिया। हाफिज सईद 26/11 मामले में आरोपी हाफिज सईद प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का संस्थापक है। भारत ने उसे UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया है। वह 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में आरोपी है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की जांच में दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में भी सईद को आरोपी बनाया है। NIA ने उसे कथित साजिश में आरोपी नंबर 8 बताया है और पाकिस्तान स्थित LeT के आतंकियों की भूमिका का आरोप लगाया है। भारत बोला- PAK आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों को घर छोड़ने पर मजबूर किया संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में कश्मीर और अल्पसंख्यकों को लेकर पाकिस्तान के बयान पर भारत ने पलटवार किया। भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान ने जिन आतंकियों को हथियार और ट्रेनिंग दी, उन्हीं ने 1990 में कश्मीरी पंडितों को उनके घरों से निकलने पर मजबूर किया। पाकिस्तान ने भारत में कश्मीर और अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए थे। त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान को भारत पर सवाल उठाने से पहले अपने यहां के हालात देखने चाहिए। त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान ने आतंकियों को हथियार और ट्रेनिंग देकर भारत भेजा। उन्होंने कहा कि यही आतंकी बाद में कश्मीर में अलग-अलग धर्मों के लोगों को निशाना बनाते रहे, जिनमें बड़ी संख्या में मुस्लिम भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि जिस पाकिस्तान ने इन आतंकियों को समर्थन दिया, वही अब UN में मानवाधिकारों की बात कर रहा है। भारत ने पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों का मुद्दा उठाया भारत ने पाकिस्तान में हिंदू, सिख और ईसाई समुदायों की स्थिति का भी मुद्दा उठाया। त्यागी ने जबरन धर्म परिवर्तन और शादी, ईशनिंदा कानून और शिया, अहमदिया, इस्माइली और हजारा समुदायों के खिलाफ भेदभाव का जिक्र किया। त्यागी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और रहेगा। उन्होंने पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर के उसके कब्जे वाले हिस्से को खाली करने को कहा। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान को अपनी कर्ज में डूबी अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने की सलाह दी। ————————

ट्रम्प की ईरान को धमकी-समझौता करो, वरना तबाह कर देंगे:ईरान मिसाइलों की आड़ में परमाणु बम बना रहा था; दुनिया देखती रही, अमेरिका ने रोका

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को धमकी देते हुए कहा कि या तो वे समझौता करे या हम उन्हें तबाह कर देंगे। ट्रम्प ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में 40 मिनट भाषण दिया। उन्होंने कहा- मेरे सामने एक बड़ा फैसला है। अमेरिका के पास दो रास्ते हैं- ईरान के साथ समझौता करना या उसे खत्म कर देना। ट्रम्प ने कहा कि मैंने यूरोपीय देशों को बताया था कि ईरान बैलिस्टिक मिसाइलों की आड़ में परमाणु बम बना रहा था। जब दूसरे नेता केवल इंतजार कर रहे थे, तब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई कर उसे रोका। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रम्प की चेतावनी के 5 बड़े मायने 1. ईरान पर हमले से 66% अमेरिकी जनता ट्रम्प से नाराज रॉयटर्स/इप्सोस के सर्वे के मुताबिक, ईरान पर हमला करने से 66% अमेरिकन ट्रम्प से नाराज हैं। सिर्फ 34% लोग ही ट्रम्प के सपोर्ट में हैं। 3 नवंबर को अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन हैं। ट्रम्प नहीं चाहते कि उनकी पार्टी को नुकसान हो। इसी वजह से वो ईरान युद्ध को अब अंजाम तक पहुंचाना चाहते हैं। 2. ट्रम्प की पार्टी के लोग युद्ध से दूरी बना रहे मिडटर्म चुनाव से पहले कुछ रिपब्लिकन उम्मीदवार अब ईरान युद्ध जल्द खत्म करने की बात कर रहे हैं। वजह है ईंधन की बढ़ती कीमत और युद्ध को लेकर मतदाताओं की नाराजगी। ऐसे में ट्रम्प की कड़ी चेतावनी अपनी पार्टी के नेताओं और समर्थकों को भी एकजुट रखने का संदेश हो सकती है। 3. हूती के हमलों से अरब देश परेशान ईरान के समर्थन वाले हूती लड़ाके लगातार सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं। हूती लाल सागर और बाब-अल-मंदेब के आसपास भी एक्टिव हैं। यह रास्ता एशिया और यूरोप के बीच तेल और सामान पहुंचाने के लिए बेहद अहम है। ईरान पर अमेरिकी दबाव बढ़ा तो हूती के हमले और बढ़ सकते हैं। इससे जहाजों को लंबा रास्ता लेना पड़ेगा और तेल-सामान महंगा हो सकता है। ट्रम्प नहीं चाहते कि हूती अरब देशों और अमेरिकी सहयोगियों पर हमले बढ़ाएं। 4. ट्रम्प अपनी जीत दिखाना चाहते हैं ईरान युद्ध करीब 7 महीने से चल रहा है और अमेरिका पर इसकी लागत 3 लाख करोड़ रूपए से ज्यादा हो चुकी है। ट्रम्प अब इसे लंबा खींचने के बजाय किसी समझौते तक पहुंचकर यह दिखाना चाहते हैं कि उनकी सैन्य कार्रवाई का नतीजा निकला। 5. दुनिया को संदेश: अमेरिका पीछे नहीं हटेगा UN में ट्रम्प की कड़ी भाषा सिर्फ ईरान के लिए नहीं है। वह सहयोगी देशों और विरोधियों दोनों को यह संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइलों और उसके सहयोगी समूहों के मामले में पीछे हटने वाला नहीं है। ट्रम्प ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड से समझौता किया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ सुरक्षा मजबूत करने के लिए समझौते पर साइन किया। समझौते के तहत ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई जाएगी, लेकिन द्वीप डेनमार्क के कंट्रोल में ही रहेगा। ट्रम्प ने UN में भाषण के दौरान कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड में बड़े पैमाने पर सैन्य मौजूदगी बढ़ाएगा। इसके तहत वहां दो बड़े सैन्य अड्डे बनाने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड में अब अमेरिका के किसी भी दुश्मन देश को सैन्य मौजूदगी बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब ट्रम्प लंबे समय से ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की बात कहते रहे हैं। उन्होंने इसे हासिल करने के लिए डेनमार्क पर दबाव बनाने और जरूरत पड़ने पर कब्जा करने की धमकी भी दी थी। कई नेताओं से अलग मुलाकात करेंगे ट्रम्प ट्रम्प कई देशों के नेताओं के साथ अलग मुलाकात करेंगे। इनमें ब्रिटेन के PM एंडी बर्नहैम, जापान की PM साने ताकाइची और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की शामिल हैं। ब्रिटेन के PM एंडी बर्नहैम के साथ यह ट्रम्प की पहली आमने-सामने की मुलाकात होगी। ट्रम्प गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के नेताओं के साथ भी बैठक करेंगे, जिसमें सऊदी अरब, UAE, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा वे वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज से भी मुलाकात करेंगे। UNGA के दौरान इराक के प्रधानमंत्री अली फालेह अल-जैदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी ट्रम्प की मुलाकात प्रस्तावित है। ——————-

इमरान खान के बाद अब उनकी 3 बहनें भी जेल में, 27 सितंबर के प्रदर्शन से पहले सहमी शहबाज सरकार की खुली धमकी

इमरान खान के बाद अब उनकी 3 बहनें भी जेल में, 27 सितंबर के प्रदर्शन से पहले सहमी शहबाज सरकार की खुली धमकी

Imran Khan

Imran Khan PTI Long March: पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई और संविधान की बहाली की मांग को लेकर 27 सितंबर को होने वाले ‘लॉन्ग मार्च’ से पहले शहबाज शरीफ सरकार सख्त रुख अपना रही है। सरकार और सेना इमरान खान के समर्थन में उठने वाली हर आवाज को दबाने में जुटी है। इमरान के बाद अब उनकी तीन बहनों को जेल भेज दिया गया है, वहीं सरकार ने प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद आने पर गंभीर परिणाम भुगतने की खुली चेतावनी दी है।

बहनें कोट लखपत जेल में बंद

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान के परिवार पर शिकंजा कसता जा रहा है। कानून और व्यवस्था बनाए रखने के बहाने पुलिस ने इमरान खान की दो और बहनों, नूरीन नियाजी और उजमा खान को 30 दिनों के लिए हिरासत में ले लिया है। इससे एक दिन पहले ही उनकी तीसरी बहन अलीमा खान को हिरासत में लेकर लाहौर की कोट लखपत जेल भेजा गया था। ALSO READ: इमरान को जेल में धीरे-धीरे मार रहे आसिम मुनीर, इमरान के बेटों का सनसनीखेज आरोप

जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तीनों बहनों को इसी जेल में रखा गया है। इससे पहले अलीमा खान के दो बेटों, शहरज खान और शेर शाह को भी लाहौर में हिरासत में लिया गया था। हालांकि, वकील राणा मुदस्सिर ने पुष्टि की है कि कुछ समय बाद दोनों को रिहा कर दिया गया। ALSO READ: आधी रात शिफा अस्पताल पहुंचे इमरान खान, 6 डॉक्टरों ने की जांच; फिर अडियाला जेल भेजे गए

सरकार की खुली धमकी

27 सितंबर को इस्लामाबाद तक निकाले जाने वाले ‘लॉन्ग मार्च’ को रोकने के लिए शहबाज सरकार की तरफ से धमकियों का दौर शुरू हो गया है। पाकिस्तान के गृह राज्यमंत्री तलाल चौधरी ने साफ लहजे में चेतावनी दी कि विरोध प्रदर्शन के दौरान जो लोग कथित तौर पर ‘आतंकवाद या हिंसा’ का सहारा लेंगे, उन्हें इस्लामाबाद से वापस नहीं जाने दिया जाएगा।

 

दूसरी ओर, सरकार की धमकियों और कार्रवाई के बावजूद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी अपने रुख पर कायम है। PTI खैबर पख्तूनख्वा के अध्यक्ष जुनैद अकबर ने स्पष्ट किया है कि पार्टी कार्यकर्ता पीछे हटने वाले नहीं हैं और वे अलग-अलग रास्तों से देश की राजधानी इस्लामाबाद में दाखिल होंगे। इस बीच, इमरान खान की रिहाई और देश में संविधान को पूर्ण रूप से लागू कराने की मांग को लेकर पूरे पाकिस्तान में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

पाकिस्तान के खजाने में अचानक 3 अरब डॉलर बढ़े:विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 26 अरब डॉलर पहुंचा; इसमें कमाई कम, कर्ज ज्यादा

पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में एक हफ्ते में 3 अरब डॉलर से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। 11 सितंबर तक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार का 21.39 अरब डॉलर पहुंच गया। यह बैंक के इतिहास का सबसे ऊंचा स्तर है। स्टेट बैंक और दूसरे बैंकों को मिलाकर पाकिस्तान का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 26.79 अरब डॉलर हो गया है। यह सितंबर 2021 के बाद सबसे ज्यादा है। हालांकि, इस अचानक बढ़ोतरी की बड़ी वजह विदेशी कर्ज है। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय बाजार से रकम जुटाने के लिए यूरोबॉन्ड जारी किया था। इससे उसके रिजर्व में बड़ी मात्रा में डॉलर जुड़े। यानी रिजर्व में आया यह पैसा पूरी तरह नई कमाई नहीं है। शहबाज बोले- रिजर्व बढ़ना आर्थिक नीतियों की सफलता प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने विदेशी मुद्रा भंडार के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने पर वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब, स्टेट बैंक के गवर्नर जमील अहमद और अपनी आर्थिक टीम की तारीफ की। उन्होंने विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी इस उपलब्धि में योगदान के लिए धन्यवाद दिया। शहबाज ने कहा कि स्टेट बैंक के पास रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार सरकार की आर्थिक टीम की लगातार मेहनत का नतीजा है। उन्होंने इसे इस बात का संकेत बताया कि सरकार की आर्थिक नीतियां सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार में दोबारा लौटने से दुनिया के निवेशकों का भरोसा उसकी अर्थव्यवस्था पर बढ़ रहा है। यूरोबॉन्ड से मुद्रा भंडार बढ़ा 11 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में 3.06 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। स्टेट बैंक के मुताबिक, इसका मुख्य कारण यूरोबॉन्ड से मिली रकम थी। यूरोबॉन्ड विदेशी बाजार से कर्ज लेने के लिए जारी किया जाने वाला एक तरह का बॉन्ड है। इसे खरीदने वाले निवेशक सरकार को पैसा देते हैं। सरकार तय समय के बाद यह रकम ब्याज के साथ वापस करती है। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरोबॉन्ड जारी कर रकम जुटाई और उसे अपने विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल कर लिया। इसलिए रिजर्व बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान ने एक हफ्ते में इतनी नई कमाई कर ली। डॉलर फिलहाल उसके पास जरूर हैं, लेकिन उनका एक बड़ा हिस्सा कर्ज के रूप में आया है। इससे पाकिस्तान को अभी विदेशी भुगतान करने के लिए ज्यादा गुंजाइश मिल गई है। लेकिन आगे इसी कर्ज को चुकाने के लिए उसे फिर विदेशी मुद्रा जुटानी होगी। अभी पाकिस्तान के पास कितने डॉलर हैं? एक हफ्ते पहले कुल रिजर्व 23.72 अरब डॉलर था। यानी सिर्फ सात दिन में इसमें करीब 3.08 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। कुल रिजर्व सितंबर 2021 के करीब 27.1 अरब डॉलर के स्तर से अभी थोड़ा कम है। हालांकि, अकेले स्टेट बैंक के पास मौजूद 21.39 अरब डॉलर अब तक का सबसे ज्यादा रिजर्व है। रिजर्व बढ़ने से पाकिस्तान को क्या फायदा? विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने का मतलब है कि पाकिस्तान के पास अब डॉलर का बड़ा बफर है। इन डॉलर का इस्तेमाल वह तेल, मशीनरी, कच्चा माल और दूसरी जरूरी चीजें खरीदने में कर सकता है। विदेशी कर्ज की किस्त और ब्याज चुकाने के लिए भी डॉलर की जरूरत होती है। पाकिस्तान का कुल 26.79 अरब डॉलर का रिजर्व करीब तीन महीने के आयात खर्च के बराबर है। इसका मतलब मौजूदा रिजर्व करीब तीन महीने के औसत आयात बिल के बराबर है। इसका यह मतलब नहीं कि पाकिस्तान तीन महीने तक बिना कोई नया डॉलर कमाए काम चला सकता है। विदेशों में काम करने वाले पाकिस्तानियों से भी मदद मिली पाकिस्तान के लिए विदेशों में काम करने वाले लोगों से आने वाला पैसा यानी रेमिटेंस भी विदेशी मुद्रा का बड़ा स्रोत है। अगस्त में पाकिस्तान को करीब 3.66 अरब डॉलर की रेमिटेंस मिली। जुलाई में यह रकम करीब 3.63 अरब डॉलर थी। इसी दौरान पाकिस्तान का बाकी दुनिया के बीच लेन-देन में घाटा भी सिर्फ 9.8 करोड़ डॉलर रहा। जुलाई में यह घाटा 44.5 करोड़ डॉलर था। यानी जुलाई के मुकाबले अगस्त में स्थिति बेहतर हुई, लेकिन घाटा अभी भी बना हुआ है। पाकिस्तान अभी भी आयात पर ज्यादा डॉलर खर्च कर रहा अगस्त में पाकिस्तान ने करीब 6.64 अरब डॉलर का सामान और सेवाएं आयात कीं, जबकि उसका निर्यात करीब 3.33 अरब डॉलर रहा। यानी पाकिस्तान विदेशों से जितने डॉलर का सामान और सेवाएं खरीद रहा है, उतने डॉलर वह बेचकर नहीं कमा पा रहा। जुलाई-अगस्त 2026 में पाकिस्तान का कुल घाटा करीब 54.3 करोड़ डॉलर रहा। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 85.3 करोड़ डॉलर था। इससे पता चलता है कि बाहरी खाते की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा की जरूरत अभी भी काफी ज्यादा है। अब सबसे बड़ी चुनौती रिजर्व को बनाए रखना पाकिस्तान के लिए अब सिर्फ विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाना ही काफी नहीं होगा। उसे आने वाले महीनों में इसे बनाए रखना भी होगा। इसके लिए तीन चीजें अहम रहेंगी: खासकर तेल की कीमत बढ़ने पर पाकिस्तान का आयात बिल बढ़ सकता है। इससे उसके विदेशी मुद्रा भंडार पर फिर दबाव पड़ेगा। पाकिस्तान का खजाना भरा, फिर भी विदेशी कर्ज की जरूरत रिकॉर्ड रिजर्व के बावजूद पाकिस्तान को पुराने कर्ज चुकाने हैं। सितंबर से दिसंबर 2026 के बीच उसे IMF को कई भुगतान करने हैं। साथ ही, पाकिस्तान दूसरे देशों और संस्थानों से भी विदेशी मुद्रा जुटाने के रास्ते खुले रखना चाहता है। रॉयटर्स के मुताबिक, पाकिस्तान चीन के साथ 30 अरब युआन की मुद्रा स्वैप व्यवस्था को 2027 में बढ़ाने पर विचार कर रहा है। इसके तहत जरूरत पड़ने पर दोनों देशों को एक-दूसरे की मुद्रा उपलब्ध कराई जा सकती है। वहीं, पाकिस्तान अमेरिका के साथ 10 अरब डॉलर की एक्सचेंज स्टेबिलाइजेशन सुविधा को लेकर भी बातचीत कर रहा है। इसका इस्तेमाल विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ने की स्थिति में किया जा सकता है। इसके अलावा पाकिस्तान का 7 अरब डॉलर का IMF कार्यक्रम भी जारी है। ——————– यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश में भी तुर्किये की ड्रोन यूनिट पाकिस्तान के बाद अब तुर्किये बांग्लादेश में भी अपनी रक्षा तकनीक का दायरा बढ़ा रहा है। दोनों देश मिलकर ड्रोन बनाने की तैयारी कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

ट्रम्प सरकार ने हूती विद्रोहियों से सीक्रेट डील की:अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करेंगे हूती लड़ाके, बदले में सऊदी की मदद नहीं करेगा अमेरिका

अमेरिकी अधिकारियों ने ओमान में हूती नेताओं से मुलाकात की। इसके बदले में ट्रम्प प्रशासन ने यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब को सैन्य मदद नहीं देने का फैसला किया है। ब्रिटिश अखबार द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि 2025 में दोनों पक्षों के बीच हुआ सीजफायर अभी कायम है और वे लाल सागर में अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। हालांकि, सऊदी अरब से जुड़े जहाजों और सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को वे अपना लक्ष्य मानते हैं। उपराष्ट्रपति वेंस बोले- हम हूतियों के साथ सीधे संपर्क में अमेरिकी अधिकारियों ने पिछले हफ्ते में ओमान की राजधानी मस्कट के अमेरिकी दूतावास में हूती नेताओं के साथ बैठक की। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को पुष्टि की कि अमेरिका हूतियों के साथ सीधे संपर्क में है। अमेरिका ने मार्च 2025 में हूतियों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था। इसके बावजूद हाल के महीनों में अमेरिकी अधिकारियों ने हूती नेताओं के अलावा हमास, हिजबुल्लाह और ईरान के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की है। सऊदी अरब को अकेले लड़ना पड़ सकता है पिछले हफ्ते हूतियों ने यमन के पश्चिमी हिस्से में लाल सागर के तट से लगे बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब ने अमेरिका से मदद की उम्मीद की थी। अमेरिका ने हूती गतिविधियों को बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य से नौवहन की स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया है, लेकिन अभी तक सऊदी अरब के समर्थन में सीधे सैन्य कार्रवाई नहीं की है। इसकी एक वजह यह भी है कि अमेरिका पहले से ईरान के साथ महंगे और संसाधन खपाने वाले संघर्ष में उलझा हुआ है। ईरान हूतियों का समर्थन करता है। यमन में अमेरिका के पूर्व उप राजदूत नबील खौरी ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन और हूतियों के बीच एक तरह की ‘मौन समझ’ बनी है। खौरी के मुताबिक, हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की लाल सागर में आवाजाही प्रभावित नहीं होगी। उनके अनुसार खतरा मुख्य रूप से सऊदी जहाजों या सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को है। सऊदी ने कहा- मक्का की ओर ड्रोन भेजा गया सऊदी अरब ने मंगलवार को दावा किया कि हूतियों ने पवित्र शहर मक्का की ओर ड्रोन भेजा था। सऊदी रक्षा बलों ने इसे नष्ट करने की बात कही। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्किये अल-मलिकी के मुताबिक, ड्रोन को स्थानीय समयानुसार शाम करीब 6:50 बजे मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र के पास रोका गया। सऊदी अरब ने कहा कि मक्का पर किसी भी तरह का हमला ‘रेड लाइन’ है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और 57 देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) ने भी इस दावे की निंदा की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे ‘घिनौना और जघन्य’ हमला बताया। हूतियों ने सऊदी के आरोप को ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताया हूती नेतृत्व ने सऊदी अरब के दावे को खारिज कर दिया। हूतियों ने इसे ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताते हुए कहा कि इस तरह के दावों से पहले भी लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई है। हूती उप विदेश मंत्री अब्दुल वहीद अबू रास ने उल्टा सऊदी अरब पर मक्का और मदीना जैसे पवित्र स्थलों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। हूतियों ने सऊदी F-15 गिराने का भी दावा किया हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने मारिब के पास सऊदी अरब का F-15 लड़ाकू विमान गिराया है। साथ ही लाल सागर के बंदरगाह शहर यानबू में सऊदी तेल कंपनी अरामको के एक संयंत्र पर हमला करने का दावा किया। हालांकि, हूती सैन्य प्रवक्ता ने इन दावों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। हूती वार्ता टीम के प्रमुख मोहम्मद अब्दुल सलाम ने कहा कि F-15 गिराने का दावा पश्चिमी देशों के लिए चेतावनी है कि वे सऊदी ‘प्रचार’ का शिकार न बनें। सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्किये से मदद मांग रहा हूती राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-फराह ने कहा कि सऊदी अरब यमन में मुश्किल स्थिति में है। उनके मुताबिक, सऊदी अरब ने युद्ध और नाकेबंदी के बावजूद अपने लक्ष्य हासिल नहीं किए। उन्होंने दावा किया कि अब सऊदी अरब पाकिस्तान, तुर्किये, अमेरिका, इजराइल और मिस्र से समर्थन मांग रहा है और मक्का पर हमले के दावे के जरिए मुस्लिम देशों को अपने साथ लामबंद करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका-इजराइल समेत अरब देशों के सैन्य प्रमुखों की गुप्त बैठक इस बीच, इजराइली अधिकारियों ने अमेरिका, इजराइल और कई अरब देशों के सैन्य अधिकारियों की जर्मनी में हुई एक गुप्त बैठक की जानकारी लीक की है। एक्सिओस के पत्रकार बराक रैविड के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने पिछले सप्ताह यह बैठक आयोजित की थी। बैठक में इजराइल, सऊदी अरब, UAE, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और मिस्र के सैन्य प्रमुख शामिल हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, छह महीने से ज्यादा समय पहले अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद यह इस तरह की पहली बैठक थी। इजराइल, जिसे पहले हूती हमलों का सामना करना पड़ा था, अब सऊदी अरब की ओर से यमन में हस्तक्षेप करने की पेशकश कर रहा है। UN में लाल सागर बंद करने की कोशिश की निंदा मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में लाल सागर को बंद करने की किसी भी कोशिश की निंदा की गई। बैठक में रूस के रुख में भी बदलाव के संकेत मिले। रूसी प्रतिनिधि ने पहले जहां यमन में अदन स्थित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को ही एकमात्र वैध सरकार माना था, अब उससे कुछ दूरी बनाते हुए नजर आए। चीन पहुंचा ईरान, होर्मुज पर समर्थन की कोशिश बुधवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन को लेकर ईरान की योजनाओं पर समर्थन हासिल करने की कोशिश की गई। ईरान और अमेरिका की अलग-अलग नाकेबंदी के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य अभी बंद है। चीन ने कहा कि वह नहीं चाहता कि क्षेत्रीय तनाव यमन और लाल सागर तक फैले। बीजिंग ने अमेरिका से जून में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के आधार पर बातचीत फिर शुरू करने की अपील की। चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और चाहता है कि क्षेत्र में जल्द कोई समझौता हो।