पाकिस्तान बोला- हमारा पानी रोका तो हाथ काट देंगे:सिंधु जल संधि अब भी लागू, भारत इसे एकतरफा खत्म नहीं कर सकता

पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर एक बार फिर भारत को धमकी दी है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने कहा कि अगर किसी ने पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश की तो हम उन हाथों को काट देंगे। उन्होंने दावा किया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकना चाहता है। मुसादिक मलिक ने सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के साथ जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री के हाथ में एक नल है। वह कहते हैं कि पाकिस्तान में पानी की एक बूंद भी नहीं जाने देंगे। जो हमारे हिस्से के पानी पर दावा करेंगे, उनके हाथ काट दिए जाएंगे। वहीं अताउल्लाह तरार ने कहा कि सिंधु जल संधि कानूनी रूप से अब भी लागू है। उनके मुताबिक, भारत इसे न तो एकतरफा स्थगित कर सकता है, न रद्द कर सकता है और न ही इसमें बदलाव कर सकता है। सिंधु जल संधि पर सेमिनार करेगा पाकिस्तान पाकिस्तानी मंत्रियों ने बताया कि मंगलवार को इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर पहला अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया जाएगा। इसमें कानूनी एक्सपर्ट, जल एक्सपर्ट्स और विदेशी प्रतिनिधि शामिल होंगे। सेमिनार में संधि के कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा होगी। डॉन के मुताबिक, तरार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पाकिस्तान के अधिकार सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पहले भी साफ कर चुके हैं कि पानी हमारी जीवनरेखा है और यह हमारी रेड लाइन भी है। 21 जून को PAK रक्षा मंत्री बोले थे- भारत के खिलाफ जंग छेड़ सकते हैं पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने 21 जून को सिंधु जल संधि स्थगित रहने को लेकर भारत को धमकी दी थी। पाकिस्तानी चैनल ARY न्यूज से बातचीत में आसिफ ने कहा कि अगर पाकिस्तान को लगा कि उसकी जल सुरक्षा खतरे में है, तो वह भारत के खिलाफ जंग छेड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी के प्रवाह में दखल दे रहा है और रणनीतिक हथियार के तौर पर इसका इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले एक साल में इस मामले में क्या नए घटनाक्रम हुए हैं, इसकी उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि बहाल नहीं की जाएगी। भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता क्या है? सिंधु नदी प्रणाली में कुल 6 नदियां हैं- सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज। इनके किनारे का इलाका करीब 11.2 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसमें 47% जमीन पाकिस्तान, 39% जमीन भारत, 8% जमीन चीन और 6% जमीन अफगानिस्तान में है। इन सभी देशों के करीब 30 करोड़ लोग इन इलाकों में रहते हैं। 1947 में भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के पहले से ही भारत के पंजाब और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच नदियों के पानी के बंटवारे का झगड़ा शुरू हो गया था। 1947 में भारत और पाकिस्तान के इंजीनियरों के बीच ‘स्टैंडस्टिल समझौता’ हुआ। इसके तहत दो मुख्य नहरों से पाकिस्तान को पानी मिलता रहा। ये समझौता 31 मार्च 1948 तक चला। 1 अप्रैल 1948 को जब समझौता लागू नहीं रहा तो भारत ने दोनों नहरों का पानी रोक दिया। इससे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की 17 लाख एकड़ जमीन पर खेती बर्बाद हो गई। दोबारा हुए समझौते में भारत पानी देने को राजी हो गया। इसके बाद 1951 से लेकर 1960 तक वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में भारत पाकिस्तान में पानी के बंटवारे को लेकर बातचीत चली और आखिरकार 19 सितंबर 1960 को कराची में भारत के PM नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच दस्तखत हुए। इसे इंडस वाटर ट्रीटी या सिंधु जल संधि कहा जाता है। सिंधु जल समझौता स्थगित करने का पाकिस्तान पर असर पाकिस्तान में खेती की 90% जमीन यानी 4.7 करोड़ एकड़ एरिया में सिंचाई के लिए पानी सिंधु नदी प्रणाली से मिलता है। पाकिस्तान की नेशनल इनकम में एग्रीकल्चर सेक्टर की हिस्सेदारी 23% है और इससे 68% ग्रामीण पाकिस्तानियों की जीविका चलती है। ऐसे में पाकिस्तान में आम लोगों के साथ-साथ वहां की बेहाल अर्थव्यवस्था और बदतर होने लगी है। पाकिस्तान के मंगल और तारबेला हाइड्रोपावर डैम को पानी नहीं मिल पा रहा है। इससे पाकिस्तान के बिजली उत्पादन में 30% से 50% तक की कमी आ सकती है। साथ ही औद्योगिक उत्पादन और रोजगार पर असर पड़ेगा। —————– ये भी पढ़ें… सिंधु नदी का पानी न मिलने से पाकिस्तान परेशान:आर्मी चीफ भारत के खिलाफ जंग की सा​जिश रच रहे, LoC पर 35 ड्रोन यूनिट तैनात पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु नदी का पानी रोका, तो पाकिस्तान की परेशानियां बढ़ गई हैं। पाकिस्तान ने यह मसला अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भी लेकिन वहां भी इस पर कोई फैसला नहीं हुआ। इसके बाद अब रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भारत को जंग छेड़ने की धमकी दे रहे हैं। वहीं, आर्मी चीफ आसिम मुनीर जंग की साजिश रचने में जुटे हैं। नियंत्रण रेखा यानी LoC पर पाकिस्तानी सेना की 8 ब्रिगेड ने 35 एंटी ड्रोन यूनिट तैनात की हैं। पाकिस्तान ने एआई फेंसिंग भी की है। इसके तहत टारगेटिंग और सर्विलांस को तेज किया गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

दावा-स्विट्जरलैंड में पाकिस्तानी आर्मी चीफ को मारने का प्लान था:पीस डील में शामिल होने गए थे, PAK की धमकी के बाद फैसला बदलना पड़ा

इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने स्विट्जरलैंड में ईरान शांति वार्ता के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और उनके डेलिगेशन की हत्या की साजिश रची थी। यह दावा ब्राजील के पत्रकार पेपे एस्कोबार ने एक पॉडकास्ट में किया है। पत्रकार के दावे के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों को जब ये बात पता चली तो उन्होंने धमकी दी जिसके बाद इजराइल को अपना प्लान बदलना पड़ा। यह दावा उस समय से जुड़ा है जब पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में मौजूद थे। वहीं ईरान और अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया के संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत का पहला दौर पूरा हुआ था। दावा- पाकिस्तान ने इजराइल को धमकी भरा मैसेज भेजा पॉडकास्ट के दौरान पॉलिटिकल कमेंटेटर मारियो नॉफल के पॉडकास्ट में एस्कोबार ने कहा कि पाकिस्तानी सेना को बेहद विश्वसनीय जानकारी मिली थी कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आदेश पर मोसाद हमला करने की तैयारी कर रहा है। एस्कोबार ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में इजराइल को जगह नहीं मिली, इसलिए वह इस प्रक्रिया से खुश नहीं था। उनका यह भी कहना है कि लेबनान में इजराइल के सैन्य अभियान ने शांति समझौते की राह और मुश्किल बना दी। एस्कोबार ने आगे कहा इस साजिश की जानकारी मिलने के बाद पाकिस्तान ने इजराइल को चेतावनी भी भेजी थी। उनके मुताबिक यह मैसेज शायद ओमान के जरिए पहुंचाया गया था। इसमें पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि अगर पाकिस्तानी डेलिगेशन को कुछ हुआ तो इजराइल को नक्शे से मिटा दिया जाएगा। हालांकि यह दावा सामने आते ही पाकिस्तान की ओर से इसे खारिज कर दिया गया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने साजिश से इनकार किया एआरवाई न्यूज के चेयरमैन कमरान खान ने एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा कि यह आरोप पूरी तरह बकवास और निरर्थक है। अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असिम मुनीर का पूरा स्विट्जरलैंड दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार और बिना किसी परेशानी के पूरा हुआ। अधिकारी के मुताबिक दौरे के दौरान किसी भी समय कोई सुरक्षा अलर्ट जारी नहीं किया गया था। न स्विट्जरलैंड की सुरक्षा एजेंसियों ने और न ही अमेरिकी सुरक्षा टीमों ने किसी संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने यह भी कहा कि लूसर्न में प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख की सुरक्षा व्यवस्था पूरे समय सामान्य और पूरी तरह सक्रिय रही। किसी तरह की हत्या की साजिश या सुरक्षा खतरे की कोई जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने इसे काल्पनिक कहानी बताया। पाकिस्तान आज भी इजराइल को देश नहीं मानता इजराइल और पाकिस्तान लंबे समय से एक-दूसरे को विरोधी मानते रहे हैं। दोनों देशों के बीच कोई रणनीतिक साझेदारी नहीं है। पाकिस्तान आज भी इजराइल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता। इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने क्षेत्रीय युद्धविराम प्रयासों पर चर्चा के दौरान इजराइल की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने इजराइल को बुराई और मानवता के लिए अभिशाप बताया था। साथ ही उस पर लेबनान में नरसंहार करने का आरोप लगाया था। पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न इस्लामी देश है। वहीं, इजराइल को भी परमाणु शक्ति माना जाता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के इन बयानों पर इजराइली अधिकारियों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए सवाल उठाया था कि जब पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ मंत्री इस तरह के बयान दे रहे हैं, तो क्या इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। पाकिस्तान के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म डी करंट के अनुसार, कई पत्रकारों ने इस कहानी को निराधार और तथ्यों से रहित बताया।

दावा-स्विट्जरलैंड में पाकिस्तानी आर्मी चीफ को मारने का प्लान था:पीस डील में शामिल होने गए थे, PAK की धमकी के बाद फैसला बदलना पड़ा

इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने स्विट्जरलैंड में ईरान शांति वार्ता के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और उनके डेलिगेशन की हत्या की साजिश रची थी। यह दावा ब्राजील के पत्रकार पेपे एस्कोबार ने एक पॉडकास्ट में किया है। पत्रकार के दावे के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों को जब ये बात पता चली तो उन्होंने धमकी दी जिसके बाद इजराइल को अपना प्लान बदलना पड़ा। यह दावा उस समय से जुड़ा है जब पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में मौजूद थे। वहीं ईरान और अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया के संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत का पहला दौर पूरा हुआ था। दावा- पाकिस्तान ने इजराइल को धमकी भरा मैसेज भेजा पॉडकास्ट के दौरान पॉलिटिकल कमेंटेटर मारियो नॉफल के पॉडकास्ट में एस्कोबार ने कहा कि पाकिस्तानी सेना को बेहद विश्वसनीय जानकारी मिली थी कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आदेश पर मोसाद हमला करने की तैयारी कर रहा है। एस्कोबार ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में इजराइल को जगह नहीं मिली, इसलिए वह इस प्रक्रिया से खुश नहीं था। उनका यह भी कहना है कि लेबनान में इजराइल के सैन्य अभियान ने शांति समझौते की राह और मुश्किल बना दी। एस्कोबार ने आगे कहा इस साजिश की जानकारी मिलने के बाद पाकिस्तान ने इजराइल को चेतावनी भी भेजी थी। उनके मुताबिक यह मैसेज शायद ओमान के जरिए पहुंचाया गया था। इसमें पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि अगर पाकिस्तानी डेलिगेशन को कुछ हुआ तो इजराइल को नक्शे से मिटा दिया जाएगा। हालांकि यह दावा सामने आते ही पाकिस्तान की ओर से इसे खारिज कर दिया गया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने साजिश से इनकार किया एआरवाई न्यूज के चेयरमैन कमरान खान ने एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा कि यह आरोप पूरी तरह बकवास और निरर्थक है। अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असिम मुनीर का पूरा स्विट्जरलैंड दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार और बिना किसी परेशानी के पूरा हुआ। अधिकारी के मुताबिक दौरे के दौरान किसी भी समय कोई सुरक्षा अलर्ट जारी नहीं किया गया था। न स्विट्जरलैंड की सुरक्षा एजेंसियों ने और न ही अमेरिकी सुरक्षा टीमों ने किसी संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने यह भी कहा कि लूसर्न में प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख की सुरक्षा व्यवस्था पूरे समय सामान्य और पूरी तरह सक्रिय रही। किसी तरह की हत्या की साजिश या सुरक्षा खतरे की कोई जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने इसे काल्पनिक कहानी बताया। पाकिस्तान आज भी इजराइल को देश नहीं मानता इजराइल और पाकिस्तान लंबे समय से एक-दूसरे को विरोधी मानते रहे हैं। दोनों देशों के बीच कोई रणनीतिक साझेदारी नहीं है। पाकिस्तान आज भी इजराइल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता। इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने क्षेत्रीय युद्धविराम प्रयासों पर चर्चा के दौरान इजराइल की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने इजराइल को बुराई और मानवता के लिए अभिशाप बताया था। साथ ही उस पर लेबनान में नरसंहार करने का आरोप लगाया था। पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न इस्लामी देश है। वहीं, इजराइल को भी परमाणु शक्ति माना जाता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के इन बयानों पर इजराइली अधिकारियों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए सवाल उठाया था कि जब पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ मंत्री इस तरह के बयान दे रहे हैं, तो क्या इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। पाकिस्तान के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म डी करंट के अनुसार, कई पत्रकारों ने इस कहानी को निराधार और तथ्यों से रहित बताया।

ईरान की ‘फटकार’ के बाद घुटनों पर आए शहबाज शरीफ! ‘बड़बोलेपन’ पर यू-टर्न लेकर अब ट्रंप को ही सिखा रहे पाठ

Pakistan PM Shehbaz Sharif: पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपनी ‘इंटरनेशनल बेइज्जती’ कराने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देते। इस बार उन्होंने कुछ ऐसा ही तीर हवा में चलाया, जो सीधा घूमकर उन्हीं को लग गया। हाल ही उन्होंने अपनी संसद में खड़े होकर सीना ठोकते हुए दावा कर दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच तेहरान के ‘बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम’ को लेकर बातचीत चल रही है।

बस फिर क्या था, ईरान को शहबाज शरीफ का यह ‘ज्ञान’ कतई रास नहीं आया। ईरान ने सरेआम पाकिस्तान को ऐसी फटकार लगाई कि शहबाज शरीफ को तुरंत ‘यू-टर्न’ लेना पड़ा। अब वह कल तक जिस मिसाइल प्रोग्राम पर अमेरिका-ईरान की पंचायत करा रहे थे, आज उसी मिसाइल प्रोग्राम के सबसे बड़े रक्षक बन गए हैं! आइए समझते हैं पाकिस्तान के इस नए कूटनीतिक ब्लंडर की पूरी कहानी।

जब ईरान के राष्ट्रपति के सामने ही खुल गई शहबाज की ‘ज्ञान की पोटली’

ये पूरा ड्रामा तब शुरू हुआ जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान खुद इस्लामाबाद के दौरे पर थे। मेहमान घर में बैठा था और शहबाज शरीफ ने पाकिस्तानी संसद में खड़े होकर अपनी कूटनीतिक समझ का ढिंढोरा पीट दिया। उन्होंने कह डाला कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच ईरान की मिसाइलों को लेकर गुपचुप चर्चा चल रही है।

ईरान का करारा जवाब

ईरान के वार्ताकारों और अधिकारियों को जैसे ही इस ‘अफवाह’ की भनक लगी, उन्होंने तुरंत शहबाज शरीफ के बयान को सरेआम खारिज कर दिया। ईरानी टीम ने दो टूक कहा, ‘पाकिस्तानी पीएम को चल रही राजनयिक प्रक्रियाओं के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है, उनका यह दावा पूरी तरह गलत है।’ ईरान ने साफ कर दिया कि उनकी मिसाइलें उनका संप्रभु रक्षा मामला हैं और यह किसी भी टेबल पर बातचीत का हिस्सा नहीं हैं।

फटकार पड़ते ही पलटे शहबाज

अंतरराष्ट्रीय मंच पर ‘नो-इंफॉर्मेशन’ का तमगा मिलने के बाद शहबाज शरीफ ने जो यू-टर्न लिया, उसे देखकर गिरगिट भी शरमा जाए। एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अचानक शहबाज शरीफ के सुर बदल गए। अब वह ईरान के मिसाइल कार्यक्रम का खुलकर बचाव करने लगे।

शहबाज शरीफ ने उलटे दुनिया से ही सवाल पूछ लिया कि आखिर सिर्फ तेहरान के बैलिस्टिक मिसाइल जखीरे की ही आलोचना क्यों की जा रही है? उन्होंने यह ज्ञान भी दे डाला कि इस मुद्दे को विवाद बनाना क्षेत्रीय तनाव को कम करने के प्रयासों को और उलझा सकता है।

एक तरफ ट्रंप, दूसरी तरफ ईरान; ‘सैंडविच’ बन गया पाकिस्तान!

इस पूरे वाकये ने इस्लामाबाद को सांप-छछूंदर वाली स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं, जो ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर लगातार आंखें लाल किए रहते हैं। दूसरी तरफ पड़ोसी देश ईरान है, जिससे पाकिस्तान को अपनी सीमाएं और संबंध बचाकर रखने हैं।

अब ईरान पर हमला नहीं कर पाएंगे ट्रंप! अमेरिकी सीनेट ने दिया बड़ा झटका, इस प्रस्ताव के बाद क्या पंगु हो गए राष्ट्रपति?

शहबाज शरीफ का यह यू-टर्न अब कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारों का कहना है कि तेहरान से मिली सीधी और तीखी सार्वजनिक प्रतिक्रिया के बाद शहबाज शरीफ केवल अपनी गलती को सुधारने और ईरान के गुस्से को शांत करने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।

ट्रम्प बोले- ईरान परमाणु ठिकानों की जांच कराने को तैयार:इससे लंबे समय तक भरोसा बनेगा; UN के अधिकारी फिर तैनात होंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों की अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए तैयार हो गया है। ट्रम्प के मुताबिक, इससे दुनिया को लंबे समय तक भरोसा रहेगा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम हथियार बनाने के लिए नहीं है। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी IAEA के अधिकारी फिर से ईरान में तैनात किए जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह 2015 के परमाणु समझौते जैसी व्यवस्था की वापसी होगी, जिससे ट्रम्प ने 2018 में अमेरिका को बाहर कर लिया था। इसके बाद ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी सीमित कर दी थी। स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई हालिया वार्ता के बाद अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगी कुछ पाबंदियों में 60 दिन की ढील दी है। वहीं, परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम भंडार से जुड़े सबसे कठिन मुद्दों पर बातचीत अभी बाकी है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. PAK पीएम बोले- अमेरिका-ईरान वार्ता सफल: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत सकारात्मक रही। दोनों पक्ष 60 दिन के भीतर अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ने, हाई लेवल कमेटी बनाने और तकनीकी स्तर की वार्ता जारी रखने पर सहमत हुए। 2. अमेरिका ने ईरान को 60 दिन तेल बेचने की छूट दी: ट्रम्प प्रशासन ने ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन और बिक्री पर 21 अगस्त तक के लिए प्रतिबंधों में ढील दे दी। अमेरिका का कहना है कि यह फैसला होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही जारी रखने पर ईरानी सहमति के बाद लिया गया। 3. ईरान ने कहा- बातचीत के बीच भी सेना पूरी तरह अलर्ट: ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी गदीर नेजामी ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत जारी रहने के बावजूद सेना की तैयारियों में कोई कमी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए ईरानी सेना पूरी तरह तैयार है। 4. होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर बढ़ने लगी: करीब 20 लाख बैरल तेल लेकर दो टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। यह टैंकर किस देश के हैं इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई हैं। हालांकि, जहाजों की संख्या अभी भी युद्ध से पहले के स्तर से काफी कम है। 5. स्विट्जरलैंड वार्ता के बाद गालिबाफ और अराघची ओमान रवाना: ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची अमेरिका के साथ बातचीत के बाद ओमान पहुंचे हैं। वहां होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन पर चर्चा होगी। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

Congress vs Tharoor: शशि थरूर के कश्मीर दौरे पर विवाद, कांग्रेस के भीतर आपसी झगड़े सबके सामने आए

Congress vs Tharoor: कांग्रेस नेता शशि थरूर ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से उनके सरकारी आवास पर भेंट की। तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सदस्य शशि थरूर के हालिया कश्मीर दौरे ने उनकी पार्टी कांग्रेस के साथ एक और विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई ने इस बात के लिए उनकी आलोचना की है कि उन्होंने अपनी पार्टी के सहयोगियों से मुलाकात नहीं की, जबकि उन्होंने उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की थी।

शशि थरूर ने रविवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर के अपने दौरे के दौरान उन्हें सकारात्मक चीजें महसूस हुईं। इस केंद्र शासित प्रदेश में हालात सामान्य होने की दिशा में उत्साहजनक प्रगति हुई है। ‘नालंदा डायलॉग्स’ के लिए श्रीनगर पहुंचे थरूर ने लोक भवन में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में ये बातें कहीं।

कांग्रेस सांसद ने कहा, “श्रीनगर में! आज लोक भवन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के साथ एक बेहतरीन बैठक का सौभाग्य मिला। हमने राज्य के हालात और सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रही उत्साहजनक प्रगति पर चर्चा की।’’ उन्होंने कहा कि लोक भवन के दौरे पर उन्होंने सकारात्मक पहल देखी।

उन्होंने आगे कहा, “जब मैं वहां पहुंचा, तो वह (सिन्हा) कश्मीरी लेखक संघ और महिला संगठन की अध्यक्ष से बातचीत कर रहे थे, जो एक सकारात्मक पहल है, जिसका मैंने स्वागत किया। अब भी कई चुनौतियां हैं और बहुत कुछ किया जाना बाकी है, लेकिन बैठक के बाद मुझे सकारात्मकता का अहसास हुआ।”

कांग्रेस हुई आगबबूला

कांग्रेस की J&K यूनिट ने इस बात पर निराशा जताई कि थरूर ने कश्मीर के लोगों या अपनी पार्टी के साथियों से मुलाकात नहीं की। JKPCC के प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने थरूर की X पोस्ट के जवाब में लिखा, “कश्मीर के लोग भी उम्मीद कर रहे थे कि आप उनसे मिलेंगे ताकि जमीनी हकीकत को बेहतर ढंग से समझ सकें। कम से कम आप उन पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए थोड़ा समय तो निकाल सकते थे जो उस राज्य का दर्जा वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिसे 7 साल पहले हमसे छीन लिया गया था।”

यह घटनाक्रम थरूर और उनकी अपनी पार्टी के बीच हुई तनातनी के ठीक बाद सामने आया है। कांग्रेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करने को लेकर शनिवार को अपने नेता शशि थरूर की आलोचना की। कांग्रेस ने कहा कि पार्टी सांसद द्वारा प्रधानमंत्री के लिए प्रशंसा अब मानो भौतिक दुनिया की सीमाओं से भी आगे निकल गई है।

पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने यह कटाक्ष भी किया कि अब वे शायद वह भी सुन सकते हैं, जो प्रधानमंत्री मोदी ने कहा ही नहीं। थरूर ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि उनका बयान भारतीय नाविकों की सुरक्षा से जुड़ा था। लेकिन इसे दलगत विवाद में बदल दिया गया।

थरूर ने क्या कहा था?

दरअसल, शशि थरूर ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को भारत की चिंताओं से अवगत कराया। साथ ही इस बात को मजबूती से रखा कि युद्ध के समय कमर्शियल नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

खेड़ा ने एक्स पर पोस्ट किया, “मेरे वरिष्ठ सहयोगी डॉ. शशि थरूर की प्रधानमंत्री मोदी के प्रति प्रशंसा अब मानो भौतिक दुनिया की सीमाओं से भी आगे निकल गई है। अब वह शायद उसे भी सुन सकते हैं, जो मोदी ने कहा ही नहीं।”

उन्होंने कहा, “जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी-ट्रंप बैठक पर भारतीय विदेश मंत्रालय की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, ओमान की खाड़ी में अमेरिका द्वारा तीन भारतीय नाविकों की निर्मम हत्या का कोई उल्लेख नहीं है।”

खेड़ा का कहना है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद यह मोदी–ट्रंप की पहली मुलाकात थी। फिर भी कहीं यह संकेत नहीं मिलता कि प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप के उस बार-बार दोहराए गए दावे का प्रतिवाद किया कि उन्होंने भारत को व्यापार की धमकी देकर युद्धविराम कराया।

ये भी पढ़ें- ‘एक भारतीय और एक पाकिस्तानी…’; शहबाज शरीफ के सामने अपनी पत्नी को लेकर ऐसा क्या बोले जेडी वेंस? वीडियो हुआ वायरल

‘एक मेरी पत्नी, दूसरे….’, जेडी वेंस ने बताए अपने दो पसंदीदा लोग, एक भारतीय तो दूसरा निकला पाकिस्तानी

स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक में जहां एक ओर पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत हो रही है। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के एक बयान सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोर रहा है। अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने रविवार को अपनी जिंदगी के दो सबसे पसंदीदा लोगों के नाम बताए। इसमें एक भारतीय तो दूसरा पाकिस्तानी निकला। वेंस ने जिन दो लोगों को अपना सबसे पसंदीदा बताया, उसमें उनकी भारतीय पत्नी ऊषा वेंस और दूसरे पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर हैं।

जेडी वेंस ने कही ये बात

वेंस ने अपनी जिंदगी के दो सबसे महत्वपूर्ण लोगों का जिक्र करते हुए अपनी भारतीय मूल की पत्नी उषा वेंस और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का नाम लिया। उच्चस्तरीय वार्ता की शुरुआत में जेडी वेंस ने बातचीत को संभव बनाने में पाकिस्तान के नेताओं की भूमिका के लिए उनका धन्यवाद किया। इस दौरान उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में एक मजाक भी किया। वेंस ने कहा, “मैं अक्सर मजाक में कहता हूं कि मेरी जिंदगी में दो बेहद अहम लोग हैं। एक भारतीय हैं और एक पाकिस्तानी। भारतीय मेरी पत्नी उषा वेंस हैं और पाकिस्तानी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर हैं।”

मुनीर को लेकर कही ये बात

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने राजनयिक प्रयासों में सहयोग देने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की सराहना की। उन्होंने दोनों नेताओं को अमेरिका का महत्वपूर्ण सहयोगी बताते हुए उनकी भूमिका की प्रशंसा की। वेंस ने कहा, “पिछले तीन महीनों में मैंने शायद किसी और व्यक्ति की तुलना में फील्ड मार्शल मुनीर से सबसे ज्यादा बातचीत की है। उनकी समझ और दूरदर्शिता के बिना मैं आज यहां मौजूद नहीं होता।” उन्होंने आगे कहा कि आसिम मुनीर न सिर्फ एक कुशल सैन्य नेता हैं, बल्कि उन्होंने खुद को एक प्रभावी और सक्षम राजनयिक के रूप में भी साबित किया है।

जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को इस स्तर तक पहुंचाने में आसिम मुनीर की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने बताया कि इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य वॉशिंगटन और तेहरान के बीच शुरुआती सहमति को आगे बढ़ाना और पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव को कम करना है। वेंस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर कूटनीतिक प्रयास आगे बढ़ाने की अनुमति दी है। इनमें होर्मुज को दोबारा खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मामलों पर बातचीत को आगे बढ़ाना शामिल है। उन्होंने कहा कि अमेरिका क्षेत्र में स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए कूटनीतिक रास्ते पर काम करना जारी रखेगा।

VIDEO: ‘मेरी जिंदगी में एक भारतीय, एक पाकिस्तानी…’, वेंस ने अपनी लाइफ के दो खास लोगों के बारे में बताया, पास में खड़े शहबाज शरीफ का रिएक्शन VIRAL

रविवार को स्विट्जरलैंड में अहम कूटनीतिक बैठकों के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माहौल को हल्का-फुल्का बनाते हुए अपनी जिंदगी के दो सबसे अहम लोगों का जिक्र किया – एक भारतीय और एक पाकिस्तानी।वेंस ने कहा, “मैंने मजाक में कहा था कि मेरी जिंदगी में दो बहुत-बहुत अहम लोग हैं: ए

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ईरान बोला- समझौता टूटा तो अमेरिका जिम्मेदार होगा:लेबनान समेत सभी मोर्चों पर जंग खत्म कराए वॉशिंगटन; हिजबुल्लाह बोला- इजराइल का कब्जा मंजूर नहीं

ईरान ने कहा है कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर जंग खत्म कराने की जिम्मेदारी अमेरिका की है। अगर समझौते का उल्लंघन होता है, तो इसके लिए वॉशिंगटन को जिम्मेदार माना जाएगा। यह बयान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार से फोन पर बातचीत में दिया। इधर, इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम लागू होने की खबरों के कुछ घंटे बाद हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने कहा कि संगठन इजराइली कब्जे को कभी स्वीकार नहीं करेगा। बेरूत में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हिजबुल्लाह कब्जे वाली जमीन को मुक्त कराने के अपने लक्ष्य पर कायम है। संगठन लेबनान के संविधान के दायरे में काम करता है और विदेशी दबदबे को खारिज करता है। कासिम ने कहा, अगर दुश्मन हमारे खिलाफ हथियारों का इस्तेमाल करता है, तो हम भी हथियारों से जवाब देंगे। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान-अमेरिका वार्ता टली: अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाली पहली औपचारिक वार्ता टाल दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेबनान में लगातार इजराइली हमलों को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद बने हुए हैं। 2. लेबनान में इजराइली हमलों में 47 लोगों की मौत: लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान और बेका घाटी में शुक्रवार देर रात से हुए इजराइली हवाई हमलों में 47 लोग मारे गए और 97 घायल हुए। 2 मार्च से अब तक मरने वालों की संख्या 3,980 पहुंच गई है। 3. होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बढ़ी: अमेरिका-ईरान समझौते के बाद 18 जून को 25 कारोबारी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। यह अप्रैल के बाद एक दिन में सबसे ज्यादा संख्या है। हालांकि, 500 से ज्यादा जहाज और 11 हजार नाविक अब भी खाड़ी में फंसे हुए हैं। 4. ट्रम्प बोले- ईरान को एक पैसा भी नहीं मिलेगा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका मजबूरी में बातचीत की मेज पर नहीं आया, बल्कि ईरान खुद आया है। उन्होंने कहा कि अगले 60 दिनों तक ईरान को अमेरिका से एक पैसा भी नहीं मिलेगा। 5. पाकिस्तानी PM ने सऊदी क्राउन प्रिंस से की बात: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने साऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय शांति और अगले दौर की बातचीत को कूटनीति और संवाद के जरिए आगे बढ़ाने पर जोर दिया। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

मोजतबा खामेनेई का बड़ा दावा, ईरान डील के लिए ‘बेताब’ ट्रंप ने हर तरह के हथकंडे अपनाए

Mojtaba Khamenei: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने एक खास पोस्ट के जरिए अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि यह समझौता ईरान की इच्छा से नहीं, बल्कि अमेरिका की मजबूरी की वजह से हुआ है। खामेनेई ने अपने पोस्ट में लिखा, “जैसा कि आपको बताया गया है, ईरान और अमेरिका के राष्ट्रपतियों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।”

उन्होंने कहा कि हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इस समझौते तक पहुंचने के लिए ईमानदारी से काम किया था, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने ही इसके लिए सबसे ज्यादा जोर डाला था। खामेनेई के मुताबिक, “अमेरिकी राष्ट्रपति ने ही मजबूरी में आकर इसे अंजाम देने के लिए हर तरह के दबाव और साधनों का इस्तेमाल किया।”

बता दें कि समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा वर्साय पैलेस में आयोजित डिनर के दौरान किए गए। यह कार्यक्रम G7 शिखर सम्मेलन के समापन के बाद हुआ था। मैक्रों ने X पर इस घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि यह समझौता “स्थायी शांति का रास्ता बनाता है और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की अनुमति देता है।”

औपचारिक हस्ताक्षर समारोह पहले शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आयोजित होने वाला था। हालांकि, तेहरान ने पुष्टि की है कि जिनेवा में प्रस्तावित बैठक अपने तय कार्यक्रम के अनुसार होगी।

अमेरिका-ईरान समझौते में क्या कहा गया है?

इस दस्तावेज का औपचारिक नाम “संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के इस्लामी गणराज्य के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन” है। इसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करने की बात कही गई है।

इसकी शर्तों के तहत, अमेरिका ने 30 दिनों के भीतर ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का वादा किया है। उम्मीद है कि इस दौरान जहाजों की आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर पर लौट आएगी। अमेरिका अंतिम समझौता होने के 30 दिनों के भीतर ईरान के आस-पास से अपनी सेना हटाने पर भी सहमत हो गया है।

वहीं, ईरान ने भी कमर्शियल जहाजों को 60 दिनों तक बिना किसी शुल्क के सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करने पर सहमति जताई है।

बता दें कि संधि पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद, दोनों पक्षों के पास व्यापक अंतिम समझौते की शर्तों पर बातचीत करने के लिए 60 दिन का समय है।

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