व्रत और मानसून का डबल असर! सावन में फिट रहने के लिए अपनाएं ये 7 आदतें

सावन (Sawan) हिंदू धर्म का सबसे पवित्र महीना माना जाता है, जिसमें भगवान शिव की पूजा, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है। यह महीना मानसून (monsoon) के बीच आता है, जब मौसम सुहावना तो होता है, लेकिन इंफेक्शन, वायरल फीवर और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। कई लोग इस दौरान व्रत रखते हैं और डाइट में बदलाव करते हैं, इसलिए शरीर की सही देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है। अगर कुछ आसान आदतों को अपनाया जाए, तो आप पूरे सावन भर खुद को फिट और एनर्जेटिक रख सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे जरूरी हेल्थ टिप्स:

Drink clean and boiled water (साफ और उबला हुआ पानी ही पिएं)

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सावन (Saawan)और बारिश के मौसम (monsoon season) में दूषित पानी से टाइफाइड (typhoid), डायरिया (diarrhea) और पेट के इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हमेशा फिल्टर या उबला (boiled water) हुआ पानी ही पिएं। घर से बाहर निकलते समय अपनी पानी की बोतल साथ रखें और रोड साइड मिलने वाले खुले हुए खाने से बचें।

Eat fresh, light, and balanced meals (ताजा, हल्का और संतुलित भोजन)

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बारिश के मौसम में डाइजेस्टिव सिस्टम (digestive system) थोड़ा कमजोर हो सकता है। ऐसे में बासी, तला-भुना और ज्यादा मसालेदार भोजन खाने से बचें। घर का ताजा खाना, मौसमी फल, दाल, हरी सब्जियां और हल्का भोजन शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ इम्यूनिटी (immunity) भी मजबूत रखने में मदद करता है।

Prevent nutritional deficiencies (व्रत में शरीर में पोषण की कमी न होने दें)

सावन (Saawan) में कई लोग सोमवार का व्रत (fast) रखते हैं। ऐसे में सिर्फ भूखे रहने के बजाय फल, दूध, दही, मखाना, मेवे, नारियल पानी और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ (adequate fluid) लें। इससे शरीर में एनर्जी बनी रहती है और कमजोरी, चक्कर या डिहाइड्रेशन जैसी प्रॉब्लम से बचाव होता है।

Yoga, Pranayama or light exercise (रोज योग, प्राणायाम या हल्की एक्सरसाइज)

बारिश के कारण बाहर टहलना संभव न हो, तब भी घर पर 20–30 मिनट योग, स्ट्रेचिंग (stretching) या प्राणायाम जरूर करें। इससे शरीर एक्टिव रहता है, ब्लड सर्कुलेशन (blood circulation) बेहतर होता है और इम्यूनिटी (immunity) मजबूत होती है। रेगुलर एक्सरसाइज मेंटल स्ट्रेस कम करने में भी मदद करता है।

Adequate Sleep and Rest (पर्याप्त नींद और शरीर का आराम)

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हेल्दी रहने के लिए अच्छी नींद उतनी ही जरूरी है जितना अच्छा खानपान (nutritious diet)। रोज 7–8 घंटे की नींद लेने से शरीर खुद को रिपेयर करता है और इम्यून सिस्टम मजबूत होती है। अगर आप व्रत रख रहे हैं या एक्टिविटीज में बिजी हैं, तो बीच-बीच में आराम करना भी जरूरी है, ताकि शरीर पर अधिक थकान न पड़े।

cleanliness and personal hygiene (साफ-सफाई और पर्सनल हाइजीन का ध्यान)

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बारिश के मौसम में बैक्टीरिया (Bacteria) और वायरस (viruses) तेजी से फैलते हैं। इसलिए खाना खाने से पहले और बाहर से आने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। गीले कपड़े ज्यादा देर तक न पहनें और पैरों को साफ व सूखा रखें, ताकि फंगल इंफेक्शन का खतरा कम हो।

Protect mosquitoes and infections (मच्छरों और इंफेक्शन से बचे)

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मानसून (monsoon) में जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा रहता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।

Sawan 2026 Special: शुरू होने वाला है महादेव का प्रिय माह, जानें त्रिशूल से लेकर चांद और गंगा नदी तक शिव के हर चिह्न के हैं गहरे आध्यात्मिक अर्थ

Sawan 2026 Special: हिंदू कैलेंडर का पांचवां महीना सावन अब कुछ ही दिन दूर है। इस माह को देवाधिदेव महादेव का प्रिय मास माना जाता है। दुनियाभर के लाखों-करोड़ों शिवभक्त इस पूरे माह में शिवभक्ति में लीन रहते हैं। शिव की पूजा, उपवास के साथ-साथ भजन-कीर्तन भी करते हैं। शिव के प्रति अपनी अनन्य आस्था प्रकट करने के लिए बहुत से श्रद्धालु उनके प्रतीक चिह्न भी अपने साथ रखते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि महादेव से जुड़े हर चिह्न सिर्फ उनके रूप का हिस्सा नहीं हैं, ये ज्ञान, संतुलन, साहस और भक्ति जैसे जरूरी जीवन के सबक दिखाते हैं। त्रिशूल और डमरू से लेकर चांद और गंगा नदी तक, हर प्रतीक के गहरे आध्यात्मिक अर्थ है।

त्रिशूल: त्रिशूल भगवान शिव का दिव्य अस्त्र है। माना जाता है कि इसके तीन कांटे बनाने, बचाने और नष्ट करने को दिखाते हैं। ये भूत, वर्तमान और भविष्य को भी दिखाते हैं। यह भक्तों को याद दिलाते हैं कि शिव समय से परे हैं।

डमरू : डमरू उस आवाज को दिखाता है जिससे माना जाता है कि सृष्टि की शुरुआत हुई है। यह बनाने, लय और जीवन के लगातार चलने वाले चक्र को दिखाता है, जो हमें याद दिलाता है कि बदलाव जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है।

तीसरा नेत्र : भगवान शिव की तीसरी आंख ज्ञान, समझ और ऊंची चेतना का प्रतीक है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब शिव अपनी तीसरी आंख खोलते हैं, तो यह बुराई, अज्ञानता और नेगेटिविटी को खत्म कर देता है।

आधा चांद : शिव के सिर पर आधा चांद समय, शांति और भावनात्मक संतुलन का प्रतीक है। यह भक्तों को याद दिलाता है कि जैसे चांद अलग-अलग चरणों से गुजरता है, वैसे ही जिंदगी भी लगातार बदलती रहती है।

गंगा नदी : शिव की जटाओं से बहने वाली पवित्र गंगा नदी पवित्रता, जीवन और दया को दिखाती है। कहानी के अनुसार, शिव ने धरती पर पहुंचने से पहले इस शक्तिशाली नदी का ज़ोर कम करने के लिए इसे अपनी जटाओं में पकड़ लिया था।

गले में सांप : भगवान शिव के गले में कोबरा निडरता और डर और इच्छा पर काबू पाने का प्रतीक है। यह मुश्किल हालात में सजगता और शांत रहने की क्षमता को भी दिखाता है।

नीलकंठ : भगवान शिव का नीला कंठ समुद्र मंथन की कहानी से आया है, जब उन्होंने दुनिया को बचाने के लिए हलाहल विष पिया था। यह आत्म-बलिदान, हिम्मत और दूसरों की रक्षा करने का प्रतीक है।

विभूति : शिव के शरीर पर लगाई गई पवित्र राख भक्तों को याद दिलाती है कि दुनिया की हर चीज कुछ समय के लिए है। यह विनम्रता, वैराग्य और आध्यात्मिक विकास पर ध्यान देने के लिए बढ़ावा देती है।

बाघ की खाल : भगवान शिव को अक्सर बाघ की खाल पर बैठे हुए दिखाया जाता है, जो घमंड और बेकाबू इच्छाओं पर जीत का प्रतीक है। यह आत्म संतुलन से मिलने वाली ताकत को भी दिखाता है।

रुद्राक्ष की माला : माना जाता है कि रुद्राक्ष की माला भगवान शिव के आंसुओं से निकली है। ये शांति, भक्ति, सुरक्षा और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक हैं और भक्त इन्हें पूजा के दौरान बड़े पैमाने पर पहनते हैं।

नंदी : नंदी, भगवान शिव का वाहन, विश्वास, वफादारी, धैर्य और नेकी का प्रतीक है। यह ज्यादातर शिव मंदिरों में, नंदी शिवलिंग की ओर मुंह करके खड़े होते हैं, जो महादेव के प्रति अटूट भक्ति का प्रतीक है।

शिवलिंग : शिवलिंग भगवान शिव का सबसे पवित्र प्रतीक है। यह भगवान के अनंत और निराकार स्वरूप के साथ-साथ सृष्टि के अनंत चक्र और कॉस्मिक एनर्जी के मिलन को भी दिखाता है।

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श्रावण मास में शाक खाना क्यों है वर्जित?

Image related to information about not consuming green leafy vegetables during the month of Shravan

Why Shak is prohibited in Sawan: सनातन धर्म में श्रावण (सावन) मास भगवान शिव की उपासना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस पूरे महीने भक्त व्रत, पूजा, जप, दान और सात्विक जीवनशैली का पालन करते हैं। सावन के दौरान खान-पान को लेकर भी कई विशेष नियम बताए गए हैं। इन्हीं में से एक है शाक यानी हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन न करना। कई लोग इसे केवल धार्मिक परंपरा मानते हैं, जबकि इसके पीछे धार्मिक, आयुर्वेदिक और व्यावहारिक कारण भी बताए जाते हैं।ALSO READ: Monsoon Health Tips: बारिश में फिट कैसे रहें?

 

श्रावण/ सावन मास में शाक या हरी पत्तेदार सब्जियां खाने से क्यों बचा जाता है? जानें इसके धार्मिक, आयुर्वेदिक, वैज्ञानिक कारण, चातुर्मास के नियम और सही आहार संबंधी जानकारी।

 

चातुर्मास के नियम

बता दें कि हमारे शास्त्रों में अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में आहार संबंधी नियमों में कुछ भिन्नताएं मिलती हैं। इसलिए स्थानीय परंपरा और अपने गुरु या परिवार की परंपरा का पालन करना उचित माना जाता है। श्रावण मास चातुर्मास का हिस्सा होता है। चातुर्मास में ऋषि-मुनि और साधु-संत भी भोजन में संयम रखते थे। इस अवधि में कुछ खाद्य पदार्थों का त्याग करने की परंपरा बनी, जिसमें कई स्थानों पर शाक का भी उल्लेख मिलता है।

 

1. वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य कारण

कीड़े-मकोड़ों और जीवाणुओं यानी बैक्टिरिया (Bacteria) का बढ़ाव:

सावन का महीना बारिश का मौसम यानी मानसून का समय होता है। इस समय हवा में नमी बहुत अधिक होती है, जिसके कारण हरे पत्तों पर छोटे-छोटे सूक्ष्म जीव, कीड़े और उनके अंडे पनपने लगते हैं। कई बार ये इतने बारीक होते हैं कि अच्छे से धोने पर भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाते, जिससे पेट के संक्रमण यानी Infections का खतरा रहता है।

 

पाचन तंत्र का धीमा पड़ना:

मानसून के दौरान वातावरण में बदलाव के कारण हमारा पाचन तंत्र या पाचन अग्नि (Digestive System, Metabolism) मंद हो जाती है। साग में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जिसे पचाने के लिए शरीर को अधिक ऊर्जा लगानी पड़ती है। इस मौसम में साग खाने से गैस, एसिडिटी, अपच और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

 

वात दोष में वृद्धि:

आयुर्वेद के अनुसार, वर्षा ऋतु में शरीर में 'वात दोष' प्राकृतिक रूप से बढ़ता है। हरी पत्तेदार सब्जियां वात को और अधिक बढ़ाती हैं, जिससे जोड़ों में दर्द, वायु विकार और पेट की बीमारियां हो सकती हैं।

 

2. धार्मिक एवं आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

पित्त और वात का संतुलन: आयुर्वेद के नियम 'ऋतुचर्या' के अनुसार, सावन के महीने में शरीर को हल्का और सुपाच्य भोजन चाहिए होता है।

 

सात्विकता और व्रत: सावन मास शिव जी की भक्ति और सात्विक जीवन शैली का महीना है। इस दौरान शरीर को शुद्ध रखने के लिए उन चीजों के त्याग का विधान है जो पाचन पर भार डालती हैं या बीमारियों का कारण बन सकती हैं।

प्राचीन समय में आज की तरह सब्जियों को कीटाणुरहित करने के उन्नत साधन नहीं थे। इसलिए हमारे ऋषियों ने स्वास्थ्य सुरक्षा के इस नियम को धर्म और परंपरा से जोड़ दिया ताकि आम लोग मानसून में बीमारियों से सुरक्षित रह सकें।

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भारी-भरकम कपड़ों की जरूरत नहीं, बस इस ज्वेलरी से सिंपल सूट-साड़ी को बनाएं क्लासिक!

 सावन (Sawan) का महीना आते ही महिलाएं अपने लुक में ट्रेडिशनल और खूबसूरत अंदाज जोड़ना पसंद करती हैं। हरी साड़ी (green saree), सलवार सूट (salwar suit) या एथनिक आउटफिट के साथ सही ज्वेलरी पहनकर आप अपने फेस्टिव लुक को और भी खास बना सकती हैं। टेंपल डिजाइन ज्वेलरी (Temple-design jewelry)इस मौसम में ट्रेडिशनल के साथ रॉयल टच देने का बेहतरीन ऑप्शन है:

Temple Necklace (टेंपल नेकलेस) – रॉयल ट्रेडिशनल लुक

Temple Necklace Set

साड़ी या सलवार सूट के साथ टेंपल डिजाइन नेकलेस पहनने से पूरा लुक शाही नजर आता है। देवी-देवताओं की आकृति और गोल्डन फिनिश वाली डिजाइन सावन के त्योहारों के लिए परफेक्ट रहती है।

Temple Earrings (टेंपल झुमके) – चेहरे की बढ़ाएं खूबसूरती

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अगर आप ज्यादा ज्वेलरी पहनना पसंद नहीं करतीं, तो सिर्फ टेंपल डिजाइन झुमके भी काफी हैं। ये सिंपल सूट और साड़ी दोनों के साथ खूबसूरत लगते हैं।

Waist Chain (कमरबंद/वेस्ट चेन) – एथनिक लुक में चार चांद

साड़ी के साथ कमरबंद या वेस्ट चेन पहनकर आप अपने ट्रेडिशनल लुक को और स्टाइलिश बना सकती हैं। यह खासकर फेस्टिव और पूजा के अवसरों पर सुंदर लगता है।

Temple Bangles (टेंपल कंगन) – हाथों को दें खास अंदाज

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हरी चूड़ियों के साथ टेंपल डिजाइन कंगन पहनकर आप सावन के लुक में ट्रेडिशनल टच जोड़ सकती हैं। ये साड़ी और सूट दोनों के साथ अच्छे लगते हैं।

Temple Hair Pin (टेंपल हेयरपिन) – बालों में जोड़ें खूबसूरती

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जूड़े या खुले बालों के साथ टेंपल डिजाइन हेयरपिन लगाने से लुक और भी अट्रैक्टिव बन जाता है। यह छोटे फंक्शन या त्योहारों के लिए अच्छा ऑप्शन है।

Simple Temple Jewellery (सिंपल टेंपल ज्वेलरी) – हल्का और एलिगेंट लुक

Cute antique gold plated round ganesh finger ring I Temple Jewellery

अगर आप ज्यादा भारी ज्वेलरी नहीं पहनना चाहतीं, तो छोटे पेंडेंट, हल्के झुमके या मिनिमल टेंपल डिजाइन चुन सकती हैं। यह ऑफिस, पूजा और फैमिली सेलिब्रेशन के लिए भी परफेक्ट रहता है।

वर्किंग वुमन की पहली पसंद बने हरे कंगन, इस सावन आप भी करें ट्राई

सावन (Sawan) का महीना आते ही हरे रंग का फैशन हर तरफ छा जाता है। जहां पहले महिलाएं हरी चूड़ियां (green bangle) पहनना पसंद करती थीं, वहीं अब उनकी जगह स्टाइलिश हरे रंग के कंगन (kangan) तेजी से ट्रेंड में हैं। अगर आप भी इस सावन अपने लुक को ट्रेडिशनल के साथ मॉडर्न टच देना चाहती हैं, तो खूबसूरत ग्रीन कंगन डिजाइन्स आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन हो सकते हैं:

Emerald Elegance (एमराल्ड एलिगेंस कंगन)

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अगर आप सावन (Sawan) में क्लासी और रॉयल लुक चाहती हैं, तो एमराल्ड ग्रीन स्टोन (stones) वाले कंगन बेहतरीन ऑप्शन हैं। इनका गहरा हरा रंग सिल्क, बनारसी और कॉटन साड़ियों के साथ शानदार लगता है। इन्हें सिंगल पीस के रूप में पहनने पर भी हाथों की खूबसूरती निखर जाती है।

Kundan Glow (कुंदन ग्लो कंगन)

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कुंदन वर्क (Kundan work) वाले ग्रीन कंगन ट्रेडिशनल आउटफिट के साथ बेहद अट्रैक्टिव लगते हैं। हल्के गोल्डन टच और हरे रंग का कॉम्बिनेशन इन्हें त्योहारों और पूजा के लिए परफेक्ट बनाता है। इन्हें साड़ी, सूट या लहंगे के साथ आसानी से स्टाइल किया जा सकता है।

Metallic Charm (मेटैलिक चार्म कंगन)

जो महिलाएं कांच की चूड़ियों की जगह टिकाऊ ऑप्शन चाहती हैं, उनके लिए ग्रीन मेटल कंगन अच्छी चॉइस हैं। ये हल्के, आरामदायक और लंबे समय तक चलने वाले होते हैं। ऑफिस या डेली वियर आउटफिट के साथ भी ये आसानी से मैच हो जाते हैं।

Gold Fusion (गोल्ड फ्यूजन कंगन)

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गोल्डन फिनिश के साथ ग्रीन इनामेल या स्टोन वाले कंगन इन दिनों काफी ट्रेंड में हैं। ये ट्रेडिशनल और मॉडर्न (modern look) दोनों तरह के लुक को खूबसूरती से पूरा करते हैं। फॉर्मल एथनिक वियर के साथ भी इनका स्टाइल अलग नजर आता है।

Mint Sparkle (मिंट स्पार्कल कंगन)

हल्के हरे यानी मिंट ग्रीन शेड वाले कंगन सॉफ्ट और एलिगेंट लुक देते हैं। इनमें लगे स्टोन (crystal) या क्रिस्टल (crystal) इन्हें और भी अट्रैक्टिव बनाते हैं। दिन के फंक्शन, ऑफिस सेलिब्रेशन या छोटी-सी पूजा के लिए ये शानदार ऑप्शन हैं।

Stack Style (स्टैक स्टाइल कंगन सेट)

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अगर आपको एक साथ कई कंगन पहनना पसंद है, तो मल्टी-बैंगल सेट आपके लिए सही रहेगा। चार या उससे ज्यादा कंगनों का सेट हाथों को भरा-भरा लुक देता है और पहनने में भी कम्फर्टेबल रहता है। इसे डेली वियर में भी आसानी से कैरी किया जा सकता है।

Floral Grace (फ्लोरल ग्रेस कंगन)

फूलों की डिजाइन, पत्तियों के पैटर्न (leaf pattern) या नक्काशी वाले ग्रीन कंगन (Green bangle) सावन की थीम से पूरी तरह मैच होते हैं। ये सिंपल आउटफिट को भी खास बना देते हैं और नई शादीशुदा महिलाओं के बीच काफी पसंद किए जाते हैं।

Minimal Luxe (मिनिमल लक्स कंगन)

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अगर आपको ज्यादा हैवी ज्वेलरी पसंद नहीं है, तो पतले और मिनिमल डिजाइन वाले ग्रीन कंगन (green kangan) चुनें। ये वर्कवियर, इंडो-वेस्टर्न और सिंपल एथनिक ड्रेस के साथ बेहद स्टाइलिश लगते हैं। इन्हें पूरे दिन पहनने पर भी हाथों में भारीपन महसूस नहीं होता।

Lunar Eclipse 2026: अगस्त में लगने वाला चंद्र ग्रहण इन राशियों के लिए हो सकता है भारी, शतभिषा नक्षत्र और कुंभ राशि में होगा ग्रहण

Lunar Eclipse 2026: ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिसे धार्मिक और ज्योतिषीय रूप से भी अहम माना जाता है। साल 2026 का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण इस साल अगस्त या सावन के महीने में श्रावणी पूर्णिमा के दिन होगा। यह एक दिलचस्प और दुर्लभ खगोलीय घटना है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण चाहे भारत में दिखे या न दिखे, उसके अच्छे-बुरे प्रभाव सौर मंडल की सभी 12 राशियों पर होते हैं। 28 अगस्त को लगने वाला साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन का मेष से लेकर मीन राशि पर प्रभाव पड़ेगा। कुछ राशियों के लिए साल का आखिरी चंद्र ग्रहण अत्यंत अशुभ साबित हो सकता है। जानें साल के आखिरी चंद्रग्रहण के बारे में पांच जरूरी बातें।

किस राशि और नक्षत्र में लगेगा चंद्र ग्रहण : 28 अगस्त को लगने वाला चंद्र ग्रहण शतभिषा नक्षत्र और कुंभ राशि में लगेगा। इस दिन राहु कुंभ राशि में और सूर्य सिंह राशि में केतु के साथ गोचर करेंगे। पूर्णिमा के दिन सूर्य राहु से और चंद्रमा केतु से कुछ देशों में 10 डिग्री की दूरी पर रहेंगे, जिससे उन जगहों पर ग्रहण हों की स्थिति बनेगी।

चंद्र ग्रहण का किन राशियों पर पड़ेगा अशुभ प्रभाव : ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, चंद्र ग्रहण की घटना का मेष से लेकर मीन राशि पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा। 28 अगस्त को लगने वाला चंद्र ग्रहण सिंह, वृश्चिक, मकर, और कुंभ राशि के लिए अशुभ साबित हो सकता है। इस समय इन राशियों को नकारात्मक फलों की प्राप्ति हो सकती है।

चंद्र ग्रहण भारत में नजर आएगा या नहीं : भारत में यह ग्रहण दिन में लगेगा, जिसके कारण चंद्र ग्रहण का प्रभाव नहीं रहेगा। भारत में चंद्र ग्रहण के समय उजाला हो जाएगा और चंद्रास्त रहेगा, जिसके कारण यह ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा। भारत में नहीं दिखने के कारण चंद्र ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा।

चंद्र ग्रहण का कितने बजे से शुरू होगा : भारतीय समयानुसार यह चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को सुबह 06 बजकर 53 मिनट पर शुरू होगा और दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगा। चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 05 घंटे 39 मिनट की मानी जा रही है।

चंद्र ग्रहण किन देशों में नजर आएगा : चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी और दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका महाद्वीप में दिखाई देगा।

Sawan 2026: सावन के महीने में 4 ग्रहों के गोचर से मौज काटेंगे 3 राशियों के जातक, जानें किस दिन होगा किस ग्रह का गोचर

Sawan 2026: सावन के महीने में 4 ग्रहों के गोचर से मौज काटेंगे 3 राशियों के जातक, जानें किस दिन होगा किस ग्रह का गोचर

Sawan 2026: हिंदू धर्म सावन का महीना विशेष स्थान रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह भगवान शिव का प्रिय महीना है। माना जाता है कि इस माह में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा खासतौर से फलदायी रहती है। श्रद्धा और विधि-विधान से महादेव की पूजा करने वाले भक्तों के सभी दुख दूर होते हैं और जीवन में खुशहाली आती है। इस साल सावन का महीना और भी खास रहने वाला है। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस साल सावन के महीने में 4 प्रमुख ग्रहों का गोचर होगा। इस गोचर का प्रभाव, यूं तो सभी 12 राशियों पर होगा, लेकिन 3 राशियों के जातकों को सबसे ज्यादा लाभ होगा। आइए जानें किस दिन किस ग्रह का राशि परिवर्तन होगा ?

कौन सा ग्रह कब बदलेगा राशि?

इस वर्ष सावन का महीना 30 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक चलने वाला है। इस महीने में 4 बड़े ग्रह शुक्र, मंगल, बुध और सूर्य का राशि परिवर्तन देखने को मिलेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, 1 अगस्त को शुक्र कन्या राशि, 2 अगस्त को मंगल मिथुन राशि में, 5 अगस्त को बुध कर्क राशि में प्रवेश करेंगे 17 अगस्त को सूर्य स्वराशि सिंह में गोचर करेंगे। फिर 22 अगस्त को बुध सिंह राशि में गोचर करेंगे।

वृषभ राशि : वृषभ राशि के जातकों के लिए सावन का महीना आर्थिक मामलों में शुभ संकेत दे सकता है। कमाई में स्थायी बढ़ोतरी के योग बन रहे हैं और धन लाभ मिलने की संभावना है। करियर के लिहाज से नौकरीपेशा लोगों को नई नौकरी का प्रस्ताव मिल सकता है।

तुला राशि : तुला राशि वालों के लिए सावन का महीना आर्थिक राहत लेकर आ सकता है। सैलरी में बढ़ोतरी या अधिक वेतन वाली नई नौकरी मिल सकती है। करियर में भाग्य का पूरा साथ मिल सकता है। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं और पुराने विवादों का समाधान निकल सकता है।

मीन राशि : मीन राशि के जातकों के लिए सावन का महीना आर्थिक रूप से लाभकारी माना जा रहा है। बैंक बैलेंस में बढ़ोतरी होने की संभावना है। आय बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं और उनका लाभ उठाने का मौका भी मिलेगा। करियर में शुभ समाचार मिल सकता है। कारोबारियों के लिए बिक्री बढ़ने के संकेत हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

Shani Vakri 2026 Date: 27 जुलाई से शनि चलेंगे उल्टी चाल, तीन राशियों के लिए कष्टकारी होंगे ये 140 दिन

Devshayani Ekadashi Vrat Ke Niyam: 25 जुलाई को योगनिद्रा में चले जाएंगे भगवान विष्णु, जानें हरिशयनी व्रत के ये अहम नियम

Devshayani Ekadashi Vrat Ke Niyam: हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी का व्रत किया जाता है। इस साल यह व्रत 25 जुलाई को किया जाएगा। इस दिन से भगवान विष्णु चार माह के लिए पाताल लोक में निवास करते हैं और योगनिद्रा में चले जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन से चतुर्मास लग जाते हैं और इस अवधि में शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। शास्त्रों और पद्मपुराण के अनुसार, इस दिन व्रत में कुछ नियमों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए अन्यथा व्रत का फल अधूरा रह सकता है।

देवशयनी एकादशी व्रत के नियम

देवशयनी एकादशी व्रत में क्या करना चाहिए?

  • देवशयनी एकादशी के दिन व्रती को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। शास्त्रों में ब्रह्ममुहूर्त में स्नान का खास महत्व बताया गया है। इसके पश्चात मन में भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु को एकादशी के दिन पीले, पुष्प, तुलसी दल, पंचामृत और नैवेद्य अवश्य अर्पित करना चाहिए। साथ ही, भगवान विष्णु के साथ-साथ देवी लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। ज्योतिष एक्सपर्ट पिनाकी मिश्रा बताते हैं कि तुलसी दल के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • व्रती को श्रीहरि की पूजा के दौरान ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ द्वादशाक्षरी मंत्र का जप भी अवश्य करना चाहिए। वैष्णव परंपरा में इसे भगवान विष्णु के प्रमुख उपासना मंत्रों में से एक माना गया है।
  • ज्योतिष एक्सपर्ट बताते हैं कि यदि निर्जला या निराहार व्रत करना संभव न हो, तो ऐसी स्थिति में क्षमता और स्वास्थ्य अनुसार फलाहार करना चाहिए। क्योंकि, व्रत का उद्देश्य केवल भोजन त्याग नहीं, बल्कि मन और इंद्रियों का संयम भी है।
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अपनी क्षमता अनुसार अनुसार दान करें। साथ ही, इस व्रत में सेवा और दया का भी विशेष महत्व बताया गया है।

देवशयनी एकादशी व्रत में क्या नहीं करना चाहिए?

  • भूलकर भी देवशयनी एकादशी के दिन तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से प्रतिकूल प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में एकादशी तिथि पर मांस, मदिरा और अन्य तामसिक चीजों से दूरी बनाए रखें।
  • एकादशी के व्रत का पारण द्वादशी तिथि को करने का विधान होता है। इस दिन नियमानुसार पारण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
  • एकादशी व्रत में चावल सहित धान्य का सेवन करना वर्जित माना गया है। इस नियम का परिवार के सदस्यों को भी ख्याल रखना चाहिए।
  • भूलकर भी किसी असहाय या अन्य व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए। साथ ही, एकादशी के दिन अहिंसा जैसे कार्यों से भी बचना चाहिए।
  • कभी भी एकादशी के दिन कटु वचन का प्रयोग नहीं करना चाहिए। क्रोध और असत्य से भी बचना चाहिए क्योंकि, यह व्रत केवल आहार का नहीं, बल्कि विचार और व्यवहार की शुद्धि का भी पर्व है।

Sawan 2026 Grahan: सावन में 15 दिन में लगेंगे दो ग्रहण, क्या महादेव की आराधना, व्रत और त्योहार पर होगा कोई असर? जानिए यहां

Sawan 2026 Grahan: सावन में 15 दिन में लगेंगे दो ग्रहण, क्या महादेव की आराधना, व्रत और त्योहार पर होगा कोई असर? जानिए यहां

Sawan 2026 Grahan: हिंदू धर्म में सावन का महीना विशेष स्थान रखता है। इस महीने की दो विशेषताएं हैं, एक चारों ओर हरियाली का मंजर रहता है और हर तरफ भगवान शिव के जयकारों की गूंज सुनाई देती है। माना जाता है कि सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इसलिए इस माह में भगवान शिव की विभिन्न रूपों में पूजा और उपवास किया जाता है। देश ही नहीं दुनिया में भी शिवभक्त सावन के महीने का इंतजार करते हैं। इसी महीने में अमरनाथ यात्रा होती है और कांवड़िये कांवड़ भरकर महादेव का अभिषेक करते हैं।

साल 2026 में भोलेनाथ का प्रिय महीना बहुत खास माना जा रहा है। इस माह में कई ग्रहों का गोचर होगा, कई शुभ योग बनेंगे और 15 दिनों के अंतराल पर दो-दो ग्रहण भी लगेंगे। जी हां, इस साल का अंतिम सूर्य और चंद्र ग्रहण सावन के महीने में ही लगेगा। सूर्य ग्रहण हरियाली अमावस्या के दिन लगेगा, जबकि चंद्र ग्रहण श्रावणी पूर्णिमा को रक्षा बंधन के दिन होगा। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या दो ग्रहण की वजह से महा देव की पूजा पर असर होगा, या व्रत और त्योहारों पर इसका क्या प्रभाव होगा?

पंडित जी से जानें इस दुविधा का समाधान

हिंदू पंचांग के अनुसार, 12 अगस्त 2026 को अमावस्या तिथि पर सूर्य ग्रहण लगेगा, जबकि दूसरा 28 अगस्त 2026 को चंद्र ग्रहण होगा। अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम ने न्यूज 18 को बताया कि इस वर्ष लगने वाले दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे। शास्त्रों के अनुसार, जिस ग्रहण का दृश्य भारत में नहीं होता, उसका सूतक काल मान्य नहीं होता। लेकिन ग्रहण के दौरान सावधानी रखनी चाहिए। दूसरी तरफ इन ग्रहणों का भारत में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों, मंदिरों की पूजा व्यवस्था, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक या सावन सोमवार के व्रत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

नहीं रुकेंगे पूजा-पाठ और खुले रहेंगे मंदिर

सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा। ऐसे में श्रद्धालु बिना किसी संशय के भगवान शिव की नियमित पूजा, अभिषेक और व्रत कर सकते हैं। मंदिरों के कपाट भी सामान्य दिनों की तरह खुले रहेंगे और पूजा-पाठ की सभी धार्मिक गतिविधियां पूर्ववत जारी रहेंगी।

धार्मिक ग्रंथों में ग्रहण काल के दौरान विशेष नियमों का पालन करने का उल्लेख मिलता है, लेकिन यह नियम मुख्य रूप से उन क्षेत्रों पर लागू होते हैं, जहां ग्रहण दिखाई देता है। भारत में ग्रहण अदृश्य रहने के कारण सूतक नहीं लगेगा और किसी भी प्रकार का धार्मिक प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

शिव आराधना अत्यंत शुभ

पंडित कल्कि राम का कहना है कि सावन का पूरा महीना भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ रहेगा। श्रद्धालु श्रद्धा और विश्वास के साथ सोमवार का व्रत रखें, शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। इससे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

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सावन के व्रत में नहीं होगी थकान, ना बढ़ेगी ब्लड शुगर, बनाएं ये झटपट स्वादिष्ट और एनर्जेटिक फलाहार!

सावन (Sawan) 2026 की शुरुआत 30 जुलाई (July) से हो रही है। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना और व्रत-उपवास के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दौरान कई लोग पूरे महीने या सोमवार के व्रत रखते हैं और फलाहारी (falahari) भोजन का सेवन करते हैं। अगर आप भी इस सावन व्रत की थाली में स्वाद का तड़का लगाना चाहते हैं, तो ये 6 आसान और स्वादिष्ट फलाहारी व्यंजन जरूर ट्राई करें:

Sabudana Khichdi (साबूदाना खिचड़ी)

This may contain: two plates filled with rice and vegetables next to a plate of food on a table

साबूदाना खिचड़ी व्रत में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले व्यंजनों में से एक है। साबूदाने को 5-6 घंटे भिगो दें। कड़ाही में घी डालकर जीरा, हरी मिर्च और करी पत्ता भूनें। इसमें उबले आलू और भुनी मूंगफली डालें। फिर भीगा साबूदाना, सेंधा नमक और काली मिर्च मिलाकर 4-5 मिनट पकाएं। आखिर में नींबू का रस और हरा धनिया डालकर सर्व करें। यह डिश स्वादिष्ट होने के साथ लंबे समय तक पेट भरा रखने में भी मदद करती है।

 

Kuttu Atta Puri (कुट्टू के आटे की पूरी)

कुट्टू के आटे की पूरी(Kuttu ke atte ki poori recipe in Hindi)

अगर व्रत में कुछ कुरकुरा और पेट भरने वाला खाना चाहते हैं, तो कुट्टू के आटे की पूरी बेहतरीन ऑप्शन है। कुट्टू के आटे में उबले आलू, सेंधा नमक और थोड़ा पानी मिलाकर नरम आटा गूंध लें। छोटी-छोटी पूरियां बेलकर गर्म घी या तेल में सुनहरा होने तक तलें। इसे फलाहारी आलू की सब्जी या दही के साथ परोसें।

Singhare Ke Atte Ka Cheela (सिंघाड़े के आटे का चीला)

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सिंघाड़े के आटे में उबले आलू, हरी मिर्च और हरा धनिया मिलाकर तैयार किया गया चीला स्वाद और सेहत दोनों का अच्छा मेल है। सिंघाड़े के आटे में उबले आलू, बारीक कटी हरी मिर्च, हरा धनिया, सेंधा नमक और थोड़ा पानी मिलाकर बैटर तैयार करें। तवे पर थोड़ा घी लगाकर दोनों तरफ सुनहरा होने तक सेंक लें। इसे दही या फलाहारी चटनी के साथ खाएं।

Makhane Ki Kheer (मखाने की खीर)

50+ Makhana Kheer Stock Photos, Pictures & Royalty-Free Images - iStock

सावन व्रत में मीठा खाने का मन हो, तो मखाने की खीर शानदार ऑप्शन है। घी में मखानों को हल्का भून लें। एक पैन में दूध उबालें और उसमें मखाने डाल दें। 10-15 मिनट तक पकाएं। फिर चीनी, इलायची पाउडर और कटे हुए बादाम-पिस्ता डालकर 5 मिनट और पकाएं। गर्म या ठंडी दोनों तरह से इसका स्वाद बेहतरीन लगता है। यह खीर स्वादिष्ट होने के साथ पोषण से भी भरपूर होती है।

 

 

Sweet Potato Chaat (शकरकंद चाट)

Sweet Potato Chaat

शकरकंद को उबालकर या भूनकर छोटे टुकड़ों में काट लें। इसमें सेंधा नमक, काली मिर्च, भुना जीरा पाउडर, नींबू का रस और हरा धनिया मिलाएं। चाहें तो ऊपर से अनार के दाने डालकर सर्व करें। झटपट स्वादिष्ट फलाहारी चाट तैयार की जा सकती है। यह हल्की, हेल्दी और एनर्जी देने वाली डिश है।

 

Rajgira Tikki (राजगीरा टिक्की)

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राजगीरे के आटे और उबले आलू से बनी टिक्की व्रत के लिए बेहतरीन स्नैक है। राजगीरे के आटे में उबले आलू, हरी मिर्च, हरा धनिया और सेंधा नमक मिलाकर मिश्रण तैयार करें। इसकी छोटी-छोटी टिक्कियां बनाकर तवे पर घी डालकर दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेंक लें। इसे फलाहारी हरी चटनी या दही के साथ परोसें। इसका स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है।