योगी सरकार ने महिला कावड़ियों के लिए किए विशेष प्रबंध, जलाभिषेक करने उमड़ पड़ी नारीशक्ति

Yogi government makes special arrangements for female Kanwariyas

– प्रयागराज में महिला शिवभक्तों के लिए संगम और गंगा के प्रमुख घाटों पर चेंजिंग रूम और महिला सहायता केंद्र बनाए गए

– सुविधा और सुरक्षा के वातावरण में नदियों का पवित्र जल लेकर काशी के लिए प्रस्थान कर रहीं हैं महिला शिवभक्त 

– आपदा सखियों ने भी महिला शिवभक्तों की मदद के लिए घाटों और मार्गों पर संभाला मोर्चा

– महिला शिव भक्तों के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम, महिला पुलिस फोर्स की हुई तैनाती

Uttar Pradesh News : कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की प्राथमिकता है। इसका असर श्रावण मास में चल रही कांवड़ यात्रा पर भी दिख रहा है। कांवड़ यात्रा कर रहे शिवभक्तों में महिला शिवभक्तों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। इन महिला शिव भक्तों की सुरक्षा और सुविधाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है। 

 

घाटों में महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती

पवित्र श्रावण मास में शिवभक्त कावड़ियों की कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुगम एवं सकुशल संपन्न कराने के योगी सरकार के निर्देश के क्रम में प्रयागराज में भी यात्रा मार्ग, कांवड शिविरों, भंडारों एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के दृष्टिगत व्यवस्था की गई है।

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संगम नगरी प्रयागराज में कांवड़ लेकर चलने वाली शिवभक्त महिला कांवड़ियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने महिला शिवभक्तों के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। प्रयागराज में दशाश्वमेध और संगम घाट से सबसे अधिक महिला कांवड़ियां जल लेकर काशी के लिए निकलती हैं। डीएम प्रयागराज मनीष कुमार वर्मा बताते हैं कि महिला शिव भक्तों के लिए संगम और गंगा नदी के प्रमुख घाटों पर चेंजिंग रूम और महिला सहायता केंद्र बनाए गए हैं।

घाटों पर महिला पुलिस कर्मियों के दस्ते तैनात हैं। आजीविका मिशन की 44 आपदा सखियां भी महिला कांवड़ियों की मदद के लिए मुस्तैद हैं। इसके अलावा प्रयागराज से वाराणसी के बीच बनाए गए कांवड़ पथ में भी प्रमुख स्थानों में जगह-जगह महिला पुलिस एवं वॉलिंटियर्स मुस्तैद हैं। मनकामेश्वर, सोमेश्वर महादेव , ब्रह्मेश्वर महादेव सहित शहर के सभी प्रमुख शिव मंदिरों में महिला सुरक्षा कर्मी मुस्तैद हैं। 

 

नारी शक्ति ने उठाई कांवड़, निर्भय होकर कर रहीं जलाभिषेक

 भगवान शंकर की आराधना के लिए श्रावण मास में महिलाओं की जितनी लंबी कतारें शिवालयों में लगती थीं, अब उतनी ही उनकी भागीदारी अब कांवड़ यात्रा में भी दिख रही है। छोटे कस्बों और गांवों से बड़ी संख्या में महिला शिवभक्त घरों से निकल कर कांवड़ यात्रा पर जा रही हैं।

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प्रयागराज के दारागंज के दशाश्वमेध घाट में गंगा जी से जल लेकर काशी के लिए कांवड़ यात्रा पर निकली ज्योति कहती हैं कि अब महिलाएं रास्ते में सुरक्षित हैं, किसी तरह का भय नहीं है इसलिए उनके कस्बे भरवारी से कई महिलाएं कांवड़ यात्रा में जा रही हैं। 
 

सदियापुर की मीरा देवी भी परिवार के आठ सदस्यों के साथ प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट से जल लेकर बैजनाथ धाम कांवड़ यात्रा के लिए निकली हैं। मीरा देवी बताती हैं कि उनके साथ उनकी तीन पीढ़ियां इस बार यात्रा में जा रही है। उनके साथ उनकी दो बहुएं, एक बेटी और तीन नातिन भी जा रहीं हैं। इसके अलावा उनका बेटा भी साथ है। मीरा बताती हैं कि अब कांवड़ मार्गों में किसी तरह की असुरक्षा और असुविधा नहीं दिखती।

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योगी जी की सरकार आने के बाद महिला शिवभक्त हर स्थान पर सुरक्षित हैं। कांवड़ मार्ग में जगह -जगह महिला शिवभक्तों के विश्राम शिविर बनाए गए हैं। सामूहिक यात्रा में भोले बाबा का भजन और कीर्तन करते हुए पूरी उत्साह और हर्ष के साथ महिलाएं कांवड़ यात्रा में निकल रही हैं।

Sawan Shivratri 2026: सावन में कब मनाई जाएगी शिवरात्रि? जानिए सही तारीख, पूजा और जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

Sawan Shivratri 2026: सावन का महीना शुरू हो चुका है। भगवान शिव को समर्पित इस माह में कई प्रमुख व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इनमें से एक है शिवरात्रि का पर्व। यूं तो शिवरात्रि हिंदू कैलेंडर के हर माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है, लेकिन सावन के महीने में आने वाले शिवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धालु कांवड़ में जल भरकर लाते हैं और अपने आराध्य भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

सावन शिवरात्रि, भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व मानी जाती है। यह श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, व्रत और शिव पूजन करते हैं। इस दिन पूजा, व्रत और रुद्राभिषेक का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से कई ग्रह दोष भी शांत होते हैं। आइए जानें इस साल सावन शिवरात्रि कब है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

सावन शिवरात्रि 2026 की तिथि व शुभ मुहूर्त

शिवरात्रि का पर्व सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 11 अगस्त 2026, सुबह 04:54 बजे से हो रहा है। सावन कृष्ण चतुर्दशी तिथि का समापन 12 अगस्त 2026, रात 01:52 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार, शिवरात्रि का पर्व 11 अगस्त 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा।

निशिता काल पूजा मुहूर्त : 11 अगस्त की रात 12:05 बजे से 12:48 बजे तक

जलाभिषेक का समय : 11 अगस्त सुबह 04:54 बजे से लेकर 12 अगस्त रात 01:52 बजे तक

चार प्रहर की पूजा का समय

रात्रि में भगवान शिव की चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है:

प्रथम प्रहर : शाम 07:04 बजे से रात 09:45 बजे तक

द्वितीय प्रहर : रात 09:45 बजे से रात 12:26 बजे तक

तृतीय प्रहर : रात 12:26 बजे से सुबह 03:07 बजे तक (12 अगस्त)

चतुर्थ प्रहर : सुबह 03:07 बजे से सुबह 05:49 बजे तक (12 अगस्त)

सावन 2026 शिवरात्रि पूजा सामग्री

जल, कच्चा दूध, दही, शहद, गंगाजल, बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, सफेद फूल, फल और भस्म।

सावन 2026 शिवरात्रि पूजा विधि

  • प्रातः काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • शिवलिंग का जल और पंचामृत से अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा और फल-फूल चढ़ाकर “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जाप करें।
  • शिव आरती करें व प्रसाद वितरित करें।
  • शिवलिंग पर तुलसी पत्र, केतकी का फूल, सिंदूर या हल्दी अर्पित न करें।

Grahan In August 2026: गर्भवती महिलाएं अगस्त में इन बातों का रखें ध्यान, दो ग्रहण से बच्चे पर पड़ सकता है बुरा असर

Grahan In August 2026: गर्भवती महिलाएं अगस्त में इन बातों का रखें ध्यान, दो ग्रहण से बच्चे पर पड़ सकता है बुरा असर

Grahan In August 2026: सूर्य और चंद्र ग्रहण दुर्लभ लेकिन सामान्य खगोलीय घटनाए हैं। हर साल दो सूर्य और दो चंद्र ग्रहण लगते हैं। साल 2026 के पहले सूर्य और चंद्र ग्रहण लग चुके हैं और अब अगस्त के महीने में दूसरे और आखिरी सूर्य-चंद्र ग्रहण लगेंगे। यह दिलचस्प आसमानी घटना में खगोलय नजरिए से काफी लोगों की रुचि होती है। लेकिन हिंदू मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण गहरे धार्मिक और ज्योतिषीय प्रभाव होते हैं। इस समय में ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण सभी 12 राशियों के जातक प्रभावित होते हैं।

हिंदू धर्म में ग्रहण काल को अशुभ समय माना गया है। इसलिए, ग्रहण काल के दौरान शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं, मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और लोग मंत्र जाप या आध्याम्तिक साधना करते हैं। माना जाता है कि, ग्रहण काल के समय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक बढ़ जाता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को खासतौर पर अधिक सावधानी बरतनी चाहिए अन्यथा होने वाले बच्चे पर इसका बुरा प्रभाव भी पड़ सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को ग्रहण से पहले खुद को सुरक्षित करने के लिए तैयार कर लेनी चाहिए। आइए जानें अगस्त 2026 में सूर्य और चंद्र ग्रहण कब लगेंगे और उनसे कैसे करें बचाव?

12 अगस्त को लगेगा सूर्य ग्रहण

ज्योतिषियों के अनुसार, अगस्त महीने में साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 तारीख को लगेगा। भारतीय समयानुसार, यह ग्रहण 12 अगस्त की रात 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे समाप्त होगा। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।

दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण

अगस्त में साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को लगेगा। यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। यह 28 अगस्त को सुबह 6:53 बजे शुरू होकर दोपहर 12:31 बजे तक प्रभावी होगा। यह ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल प्रभावी नहीं माना जाएगा।

गर्भवती महिलाएं रखें इन 5 बातों का ध्यान

  • ग्रहण के दौरान घर के अनावश्यक कार्य न करें और घर की सभी खिड़कियां-दरवाजे बंद रखना उचित रहेगा।
  • ग्रहण के समय अनावश्यक यात्रा न करें और खुले आसमान के नीचे जाने से बचें।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल में भोजन करने और रसोई से जुड़े कार्यों से बचना चाहिए।
  • गर्भवती महिलाएं भूलकर भी सुई, कैंची या किसी भी नुकीली वस्तु का प्रयोग न करें। यह अशुभ होता है।
  • ग्रहण के दौरान सोने की बजाय भगवान का ध्यान, मंत्र जाप करना चाहिए। इसके सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।

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Surya Grahan 2026 August: हरियाली अमावस्या पर लगेगा साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण, करियर, सेहत और संपत्ति को लेकर 4 राशियां रहें सावधान

Surya Grahan 2026 August: सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिसे धार्मिक और ज्योतिषीय रूप से भी अहम माना जाता है। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण फरवरी में लगा था, जबकि दूसरा सूर्य ग्रहण सावन के महीने में हरियाली अमावस्या के दिन लगेगा। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, यह ग्रहण चंद्रमा की राशि कर्क राशि में लगेगा, जिसका नकारात्मक प्रभाव मेष, कर्क, तुला और मकर राशि पर देखने को मिलेगा। खास बात ये है कि साल के दूसरे और अंतिम सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य, चंद्रमा, बुध और गुरु कर्क राशि में होंगे, जिससे चतुर्ग्रही योग का निर्माण होगा।

अंतिम सूर्य ग्रहण 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन आमवस्या तिथि 12 अगस्त को मध्यरात्रि 01:52 बजे से लेकर रात 11:06 बजे तक है। उदया तिथि के अनुसार, श्रावणी अमावस्या 12 अगस्त को होगी। इसी दिन साल का अंतिम सूर्य ग्रहण भी लगेगा। इसका समय रात में 9 बजकर 4 मिनट पर लगेगा। इसका समापन या मोक्ष 13 अगस्त को प्रात: 4 बजकर 25 मिनट पर होगा।

कब से कब तक रहेगा सूतक काल

ज्योतिष गणना के अनुसार, सूर्य ग्रहण का सूतक काल प्रारंभ समय से 12 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है। इस आधार पर सूर्य ग्रहण का सूतक काल सुबह में 09:04 बजे से लगना चाहिए, लेकिन यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा। इस वजह इसका सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा।

सूर्य ग्रहण पर सतर्क रहें 4 राशियां 

सूर्य ग्रहण भारत में नहीं लग रहा है और उसका सूतक काल नहीं मान्य होगा। लेकिन ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण का प्रभाव सभी 12 राशियों पर होगा। यह सूर्य ग्रहण 4 राशिवालों के लिए मुश्किल हो सकता है। सूर्य ग्रहण का अशुभ प्रभाव मेष, कर्क, तुला और मकर राशि के जातकों पर होने की आशंका है। इन राशियों के जातकों को 12 अगस्त से लेकर 12 जनवरी तक सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। इन्हें अपनी सेहत, करियर, मान-सम्मान, धन-संपत्ति को लेकर सावधान रहना चाहिए। धन हानि, प्रॉपर्टी विवाद, बीमारी, अपयश, तनाव आदि से आप लोग परेशान हो सकते हैं।

सूर्य ग्रहण के दुष्प्रभावों से बचने के उपाय

इन चार राशि के लोगों को 12 अगस्त से 6 माह तक भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। हर सोमवार के दिन आप भगवान शिव का जलाभिषेक करें। शिव जी की कृपा से सभी ग्रह, दोष और संकट दूर होंगे।

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First Sawan Somwar 2026 Shubh Yog: 04 शुभ योगों में 03 अगस्त को होगा सावन के पहले सोमवार का व्रत, जानें जलाभिषेक और शिव पूजन का शुभ मुहूर्त

First Sawan Somwar 2026 Shubh Yog: यूं तो हर सप्ताह सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है। लेकिन सावन के महीने में आने वाले सोवमार का विशेष स्थान है। शिव भक्तों के लिए यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन वे अपने आराध्य के लिए खास पूजा, उपवास और अनुष्ठान करते हैं। साल 2026 में सावन के महीने में 4 सोमवार का सौभाग्य बन रहा है। सावन के सोमवार व्रत करने वाले श्रद्धालु इस व्रत का उद्यापन चौथे और अंतिम सोमवार को करते हैं।

सावन के पहले सोमवार पर बने रहे हैं 4 शुभ योग

इस साल पहले सावन सोमवार पर 4 शुभ योग बन रहे हैं, जो लोगों के लिए शुभ फलदायी हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन का पहला सोमवार श्रावण कृष्ण पंचमी तिथि को है। उस दिन हंसराज योग, सुकर्मा योग, धृति योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बनेंगे।

हंसराज योग : पंच महापुरुष योगों में से एक होता है। इस समय गुरु ग्रह अपनी उच्च राशि कर्क में विराजमान हैं, जिसकी वजह से हंसराज योग बना है।

सर्वार्थ सिद्धि योग : पहले सावन सोमवार को सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग मध्यरात्रि 00:01 बजे से लेकर सुबह 05 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। इस योग में पूजा, जप, तप, दान आदि का पुण्य फल प्राप्त होता है।

सुकर्मा योग : इस दिन सुकर्मा योग प्रात:काल से लेकर रात 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। सुकर्मा योग के स्वामी देव इंद्र और ग्रह मंगल हैं। यह शुभता प्रदान करने वाला मंगलकारी योग है।

धृति योग : पहले सावन सोमवार पर धृति योग रात में 9:13 बजे से पूर्ण रात्रि तक है। इसमें नया बिजनेस, भूमि पूजन, मकान की नींव डालना, नई वस्तु की खरीदारी करना अच्छा रहता है।

चोर पंचक में सावन के पहले सोमवार का व्रत

पहले सावन सोमवार को पूरे दिन चोर पंचक रहेगा। उत्तर भाद्रपद नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 10:00 पी एम तक है, उसके बाद रेवती नक्षत्र है।

पहला सावन सोमवार 2026 जलाभिषेक मुहूर्त

सावन के पहले सोमवार को जलाभिषेक के साथ ही शिव जी की पूजा की जाएगी।

ब्रह्म मुहूर्त: 04:19 ए एम से 05:01 ए एम

अभिजीत मुहूर्त: 12:00 पी एम से 12:54 पी एम

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: 05:44 ए एम से 07:24 ए एम

शुभ-उत्तम मुहूर्त: 09:05 ए एम से 10:46 ए एम

चर-सामान्य मुहूर्त: 02:08 पी एम से 03:49 पी एम

लाभ-उन्नति मुहूर्त: 03:49 पी एम से 05:30 पी एम

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: 05:30 पी एम से 07:11 पी एम

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Sawan Putrada Ekadashi 2026: संतान प्राप्ति के लिए कब किया जाएगा पुत्रदा एकादशी का व्रत, जानें श्रीहरि के साथ शिव कृपा पाने की सही तारीख

Sawan Putrada Ekadashi 2026: सावन का पवित्रा महीना शुरू हो चुका है। इसके साथ ही चारों भोलेनाथ के भक्तों के जयकारे भी गूंजने लगे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस माह में भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित कई व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। सावन में नि:संतान दंपतियों को उम्मीद देने वाला एक उपवास भी किया जाता है। इस व्रत का नाम है श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत। यह व्रत संतान की इच्छा रखने वाले और संतान की शुभ की कामना करने वाली माताएं भी करती हैं। आइए जानें इस साल ये व्रत किस दिन किया जाएगा और इसमें पूजा का मुहूर्त क्या होगा?

सावन पुत्रदा एकादशी 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल 23 अगस्त को मध्यरात्रि 02:00 बजे सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत हो रही है। इस तिथि का समापन 24 अगस्त को प्रात: 04:18 बजे होगा। उदयातिथि के आधार पर सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त दिन रविवार को रखा जाएगा, लेकिन 24 अगस्त को भी यह व्रत रहेगा। 23 अगस्त को गृहस्थ लोग सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत रखेंगे, वहीं वैष्णव लोग सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत 24 अगस्त सोमवार को रखेंगे क्योंकि 23 अगस्त को हरि वासर का समापन सुबह 10:49 बजे होगा।

सावन पुत्रदा एकादशी 2026 मुहूर्त

23 अगस्त को सावन पुत्रदा एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 04:26 बजे से लेकर प्रात: 05:10 बजे तक है। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:58 बजे से लेकर दोपहर 12:49 बजे तक है। जबकि 24 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 04:27 बजे से प्रात: 05:11 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक है। 23 अगस्त को सुबह 07:32 बजे से लेकर दोपहर 12:24 बजे के बीच आप विष्णु पूजा कर सकते हैं, वहीं 24 अगस्त को विष्णु पूजा सुबह 05:55 बजे से 07:32 बजे और सुबह 09:09 बजे से 10:46 बजे के बीच कर सकते हैं।

सावन पुत्रदा एकादशी 2026 पारण समय

23 अगस्त को सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत करने वाले श्रद्धालु 24 अगस्त को पारण दोपहर 01:41 बजे से शाम 04:16 पारण के बीच कर सकते हैं। वहीं, 24 अगस्त को व्रत रखने वाले लोग पारण 25 अगस्त को सुबह 05:55 पारण से 06:20 पारण के बीच कर सकते हैं।

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Sawan Bhadon: सांवली सलोनी रेखा के संग काम करने को तैयार नहीं थे नवीन निश्चल, फिर शूटिंग के समय अफेयर के उड़े रूमर्स

Sawan Bhadon: फिल्म इंडस्ट्री में रेखा की शुरुआत मुश्किलों से भरी रही है। साउथ सिनेमा में बतौर बाल कलाकार काम शुरू करने के बाद वे 70 के दशक में हिंदी सिनेमा की तरफ आईं। आईकॉनिक रेखा ने बॉलीवुड डेब्यू ‘सावन भादों’ से किया। 2 सितंबर 1970 को रिलीज हुई इस फिल्म के लिए साउथ इंडियन रेखा ने हिंदी भाषा सीखी थी। मूवी के लीड हीरो नवीन निश्चल भी इस फिल्म से फिल्मी दुनिया में कदम रख रहे थे। इसके अलावा अभिनेता रंजीत ने भी इसी फिल्म से अभिनय की दुनिया में कदम रखा था।

रेखा के साथ काम नहीं करना चाहते थे नवीन

फिल्म ‘सावन भादों’ ने दर्शकों का दिल जीत लिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नवीन निश्चल फिल्म ‘सावन भादों’ में रेखा के साथ काम करना नहीं चाहते थे। उनके मुताबिक एक्ट्रेस ‘काली’ और ‘मोटी’ थीं। हालांकि, बाद में इस फिल्म की शूटिंग करते हुए दोनों के अफेयर के खूब चर्चे हुआ करते थे। पुलिस ऑफिसर के रोल में ज्यादातर नजर आने वाले अभिनेता इफ्तेखार नेगेटिव रोल में दिखाई दिए थे।

मोहन सहगल ने नवीन को किया था लॉन्च

फिल्म ‘सावन भादों’ का डायरेक्शन मोहन सहगल ने किया था। इस मूवी में नवीन निश्चल की कास्टिंग बेहद अनोखे तरीके से हुई थी। अपने कॉलेज के दिनों में नवीन निश्चल का परफॉमेंस काफी बुरा चल रहा होता था। नवीन के पिता के साथ मोहन सहगल उनके कॉलेज पहुंचे थे। उस दौरान एक्टर के पिता ने मोहन सहगल से अपने बेटे के भविष्य को लेकर चिंता जाहिर की थी और मदद करने को कहा था। मोहन सहगल ने नवीन को पूना फिल्म इंस्टीट्यूट भेजा और उनकी फीस भरी। नवीन निश्चल पूना फिल्म इंस्टीट्यूट के गोल्ड मेडलिस्ट बने। नवीन जब लौटे तो ‘सावन भादो’ से उन्हें बॉलीवुड में लॉन्च किया गया।

फिल्म के लिए रेखा ने हिंदी पर बनाई पकड़

रेखा की शुरुआत हिंदी फिल्मों में साल 1969 में ‘अंजाना सफर’ से होने वाली थी, लेकिन यह फिल्म कुछ सीन्स की वजह से सेंसर बोर्ड में फंसी रही। पूरे एक दशक बाद ‘दो शिकारी’ टाइटल से इसे 1979 में रिलीज किया गया था। ‘सावन भादों’ में रेखा ने गांव की एक लड़की चंदा का रोल किया था। नवीन निश्चल के किरदार विक्रम का दिल चंदा पर फिदा हो जाता है। इस फिल्म के बाद रेखा ने हिंदी सिनेमा में अलग मुकाम हालिस किया और एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दीं।

सिर्फ पहनावा नहीं बदला पूरा अंदाज, जानिए क्यों ट्रेंड कर रहा है सूट से लेकर आई मेकअप तक ग्रीन लुक?

सावन (Sawan) में फैशन और ब्यूटी लुक में हरे रंग का ट्रेंड (trend) बढ़ जाता है। अगर आप भी तीज या सावन के खास मौकों पर हरे आउटफिट (green outfit) के साथ कुछ नया और स्टाइलिश ट्राई करना चाहती हैं, तो आई मेकअप (eye makeup) आपके पूरे लुक को बदल सकता है। ये आई मेकअप आइडियाज आपके फेस्टिव अंदाज को और खास बना सकते हैं:

Classic Green Touch (क्लासिक ग्रीन टच)

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हल्के हरे आईशैडो के साथ बनाया गया यह लुक सिंपल होने के साथ काफी अट्रैक्टिव लगता है। अगर आप ज्यादा हैवी मेकअप पसंद नहीं करती हैं, तो यह गर्लिश और एलिगेंट लुक तीज जैसे मौकों के लिए परफेक्ट रहेगा।

Light Green Smokey Eyes (लाइट ग्रीन स्मोकी आईज)

स्मोकी आईज को इस बार ब्लैक की जगह ग्रीन टच दें। हल्के ग्रीन शेड के साथ लोअर वॉटरलाइन पर शिमरी ग्रीन (shimmery green) लगाएं, जिससे आंखें ज्यादा बड़ी और खूबसूरत नजर आएंगी।

Cut Crease Eyes (कट क्रीज आई मेकअप)

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कट क्रीज स्टाइल आंखों को डिफाइन और ग्लैमरस लुक देता है। इसमें ग्रीन शेड के साथ अच्छा ब्लेंडिंग और मस्कारा (mascara) यूज करने से आंखों की खूबसूरती और बढ़ जाती है।

Metallic Green Eyes (ग्रीन मैटेलिक आई लुक)

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अगर आप फेस्टिव फंक्शन में थोड़ा ग्लैम टच चाहती हैं, तो मैटेलिक ग्रीन आईशैडो (eyeshadow) चुन सकती हैं। शिमरी फिनिश और हल्के आई लेंस के साथ यह लुक काफी मॉडर्न और स्टाइलिश लगता है।

Festive Green Charm (फेस्टिव ग्रीन चार्म)

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जो लोग ज्यादा बोल्ड मेकअप पसंद नहीं करते, उनके लिए यह लुक अच्छा ऑप्शन है। हल्के ग्रीन शेड, ग्लिटर लाइनर (glitter liner) और सॉफ्ट बेस के साथ आप ट्रेडिशनल आउटफिट में भी खूबसूरत नजर आ सकती हैं।

Shimmer Touch Eyes (शिमर टच आईज)

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सिंपल आई मेकअप को खास बनाने के लिए शिमर का इस्तेमाल करें। हल्के और गहरे ग्रीन शेड (dark green shade) को कॉर्नर पर लगाकर बीच में थोड़ा ग्लिटर टच देने से आंखों में फेस्टिव चमक आ जाती है।

Green Smokey Eyes (ग्रीन स्मोकी आईज)

QUICK Green Smokey Eye Makeup Tutorial

अगर आप थोड़ा बोल्ड और स्टेटमेंट लुक चाहती हैं, तो ग्रीन स्मोकी आई मेकअप ट्राई करें। यह लुक साड़ी, सूट या लहंगे के साथ काफी खूबसूरत लगता है और सावन-तीज (Sawan and Teej) के लिए एकदम ट्रेंडी भी है।

Guru Purnima 2026: आज गुरु पूर्णिमा के साथ मनाया जाएगा व्यास जयंति और शिव शयनोत्सव का पर्व, जानें आज मनाए जा रहे त्योहारों का महासंगम

Guru Purnima 2026: आज आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि है। धार्मिक मान्यतओं के अनुसार, आज के दिन गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है, जो जीवन में मार्ग दर्शन करने वाले सभी गुरुओं को समर्पित है। साथ ही, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत के रचयिता महर्षि वेद वयास का जन्म भी आषाढ़ पूर्णिमा के दिन हुआ था। इसलिए आज व्यास जयंति भी मनाते हैं। इसके अलावा, आज के दिन भागवान शिव का शयनोत्सव भी मनाया जाता है। आषाढ़ पूर्णिमा के दिन आषाढ़ी पूर्णिमा, सत्यनारायण व्रत और बुधवार व्रत का पावन संयोग भी बन रहा है। ज्योतिष और धर्मशास्त्र के अनुसार एक ही दिन इन सभी पर्वों का संगम साधना, ज्ञान, भक्ति और पुण्य प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालुओं को इस दिन गुरु पूजन, भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना के साथ व्रत एवं दान-पुण्य करने का अवसर मिल रहा है। आइए जानें आज कौन-कौन से पर्व मनाए जाएंगे

गुरु पूर्णिमा : गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। इस दिन अपने गुरु का पूजन, आशीर्वाद प्राप्त करना तथा शिक्षा और आध्यात्मिक उन्नति का संकल्प लेना विशेष फलदायी माना जाता है।

आषाढ़ी पूर्णिमा : आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को आषाढ़ी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। यह दिन स्नान, जप, तप, दान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। साथ ही पितरों के नाम का भोजन और दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।

व्यास पूजा : गुरु पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। उन्होंने वेदों का विभाजन, महाभारत और अनेक पुराणों की रचना कर सनातन ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाया। इसलिए इस दिन व्यास पूजा कर उन्हें आदिगुरु के रूप में स्मरण किया जाता है।

सत्यनारायण व्रत : पूर्णिमा तिथि भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की पूजा के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। इस दिन सत्यनारायण व्रत और कथा का सुनने के बाद श्रद्धालु पंचामृत, फल और प्रसाद अर्पित करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से श्रीहरि और माता लक्ष्मी की कृपा रहती है।

शिव शयनोत्सव : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा पर भगवान शिव का शयनोत्सव भी मनाया जाता है। जैसे देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु योग निद्रा में जाते हैं, उसी तरह भगवान शिव भी शयन के लिए चले जाते हैं और सृष्टि का कार्यभार रूद्र संभालते हैं। इस दिन शिव मंदिरों में विशेष श्रृंगार, रुद्राभिषेक और शयन आरती की जाती है।

बुधवार व्रत : इस बार पूर्णिमा तिथि बुधवार के दिन पड़ रही है। बुधवार का दिन प्रथम पूज्य भगवान गणेश और ग्रहों के राजकुमार बुधदेव को समर्पित है। मान्यत है कि इस दिन गणपति की पूजा करने से बुद्धि, विवेक, व्यापार, शिक्षा और वाणी से जुड़े कार्यों में सफलता प्राप्त होती है और कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होती है।

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Guru Purnima 2026 Date: 28 या 29, कब है गुरु पूर्णिमा? जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और सही तारीख

Guru Purnima 2026 Date: गुरु पूर्णिमा, जिसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं, हिंदू धर्म के अत्यंत प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है। यह पर्व अपने शिक्षक या गुरु के प्रति आभार और सम्मान प्रकट करने का अवसर प्रदान करता है। हिंदू धर्म में गुरु का स्थान माता-पिता और भगवान से भी ऊपर माना जाता है। “गुरु” शब्द संस्कृत से आया है, जहां ‘गु’ का मतलब है ‘अंधेरा’ या ‘अज्ञान’ और ‘रु’ का मतलब है ‘अंधेरे को दूर करने वाला’। गुरु पूर्णिमा न सिर्फ हिंदू धर्म में मनाई जाती है, बल्कि जैन और बौद्ध धर्म में भी इसका बहुत महत्व है।

हिंदू धर्म में, गुरु पूर्णिमा महर्षि वेद व्यास के सम्मान में मनाई जाती है। वहीं, बौद्ध धर्म में, यह सारनाथ में भगवान बुद्ध के पहले उपदेश का प्रतीक है। जबकि, जैन धर्म में, यह भगवान महावीर के पहले शिष्य, गौतम स्वामी के सम्मान में मनाई जाती है। कुल मिलाकर, यह त्योहार आभार, सीखने और आध्यात्मिक विकास का प्रतीक है। गुरु पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, इस दिन व्यक्ति का अन्न दान भी किया जाता है, मान्यता है कि अन्न दान करने से लोगों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं, मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्यक्ति को स्नान-ध्यान करने के बाद गुरु के पास जाकर उनकी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।

गुरु पूर्णिमा 2026: तारीख, समय और तिथि

द्रिक पंचांग के अनुसार, गुरु पूर्णिमा 2026 बुधवार, 29 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। यह त्योहार हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ महीने की पूर्णिमा (पूर्णिमा) को पड़ता है।

गुरु पूर्णिमा समय

पूर्णिमा तिथि शुरू : 28 जुलाई, 2026 को शाम 06:18 बजे

पूर्णिमा तिथि खत्म : 29 जुलाई, 2026 को रात 08:05 बजे

गुरु पूर्णिमा 2026 : मतलब और महत्व

सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा का पर्व अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन गुरुओं को समर्पित होता है, जिन्होंने हमें ज्ञान, संस्कार और सही दिशा दिखाई है। इसी पावन तिथि पर महर्षि वेद व्यास जी का जन्म भी हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गुरुजनों का पूजन कर उनका आशीर्वाद लेने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और ज्ञान का प्रकाश फैलता है।

गुरु पूर्णिमा स्नान दान मुहूर्त

गुरु पूर्णिमा के दिन स्नान और दान ब्रह्म मुहूर्त में करना चाहिए। इसका मुहूर्त सुबह 4 बजकर 17 मिनट से लेकर सुबह 4 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।

क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा?

धार्मिक पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही महाभारत, 18 पुराणों और ब्रह्मसूत्रों के रचयिता महर्षि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। महर्षि व्यास को ही सनातन परंपरा में प्रथम गुरु का दर्जा प्राप्त है, क्योंकि उन्होंने ही चारों वेदों का वर्गीकरण किया था। इसी कारण गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन शिष्य अपने गुरुओं की पूजा करते हैं, उन्हें उपहार भेंट करते हैं और उनके बताए सन्मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।

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