दिल्ली से दूर नहीं, लेकिन खूबसूरती में किसी हिल स्टेशन से कम नहीं हैं ये 7 जगहें

बारिश का मौसम आते ही दिल्ली (Delhi) और आसपास का नजारा पूरी तरह बदल जाता है। सूखी सड़कें हरियाली से भर जाती हैं, झीलें (lakes) और पार्क (parks) ताजगी से खिल उठते हैं और ठंडी हवाएं सफर का मजा दोगुना कर देती हैं। ऐसे मौसम में घर पर बैठने के बजाय छोटी-सी रोड ट्रिप (short road trip) का प्लान बनाना एक बेहतरीन आइडिया हो सकता है।

अगर आपके पास लंबी छुट्टी नहीं है, तो भी चिंता की बात नहीं। दिल्ली से करीब 4 घंटे या उससे कम दूरी पर कई ऐसी शानदार जगहें हैं, जहां आप दोस्तों या परिवार के साथ आराम से वीकेंड (weekend) बिता सकते हैं। यहां आपको नेचर, इतिहास, झीलें, किले, बर्ड वॉचिंग और शानदार खाने का मजा एक साथ मिलेगा:

Agra, आगरा: बारिश में और भी खूबसूरत लगता है ताजमहल

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दिल्ली (Delhi) से लगभग 3 से 4 घंटे की दूरी पर स्थित आगरा (Agra) सिर्फ ताजमहल (Agra) के लिए ही नहीं, बल्कि अपने स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड और ऐतिहासिक इमारतों के लिए भी मशहूर है। मानसून के दौरान बादलों के बीच ताजमहल का नजारा और भी अट्रैक्टिव लगता है। यहां आगरा किला (Agra Fort) देखने के साथ लोकल मार्केट और मशहूर पेठा का स्वाद भी जरूर लें।

Sohna, सोहना: कम समय में शानदार वीकेंड

Aravalli hills Images - Free Download on Magnific (formerly Freepik)

अगर ज्यादा दूर नहीं जाना चाहते, तो सोहना बेहतरीन ऑप्शन है। यह दिल्ली से केवल 1.5 से 2 घंटे की दूरी पर है। अरावली की पहाड़ियों (Aravalli hills) के बीच बसा यह इलाका अपने रिजॉर्ट, हरियाली और प्राकृतिक गर्म पानी के झरनों के लिए जाना जाता है। फैमिली के साथ एक दिन की छोटी और आरामदायक ट्रिप के लिए यह जगह परफेक्ट है।

Sultanpur National Park, सुल्तानपुर नेशनल पार्क: नेचर लवर के लिए खास

Sultanpur National Park: A Birdwatcher's Paradise Near Delhi

दिल्ली (Delhi) से करीब 1 से 1.5 घंटे की दूरी पर सुल्तानपुर नेशनल पार्क बर्ड वॉचिंग (birdwatching) के लिए मशहूर है। बारिश के मौसम में यहां कई तरह के पक्षी देखने को मिलते हैं। सुबह या शाम के समय पार्क घूमना सबसे अच्छा माना जाता है। यहां बैटरी से चलने वाली गाड़ियां भी अवेलेबल हैं, जिससे बुजुर्ग और बच्चों के साथ घूमना आसान हो जाता है।

Rewari, रेवाड़ी: हिस्ट्री और लोकल फ्लेवर का यूनिक एक्सपीरियंस

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दिल्ली से लगभग 2 से 2.5 घंटे की दूरी पर रेवाड़ी (Rewari) उन लोगों के लिए खास है जो कुछ अलग देखना चाहते हैं। यहां मौजूद रेवाड़ी स्टीम लोकोमोटिव शेड भारत के सबसे पुराने स्टीम इंजन शेड में से एक है। इसके अलावा आप शहर के लोकल बाजार (local market) घूम सकते हैं और हरियाणा के पारंपरिक खाने (Haryanvi cuisine) का स्वाद भी ले सकते हैं।

Alwar, अलवर: हिस्ट्री और नेचर का शानदार ब्लेंड

Bala Quila Fort Alwar | History, Timings, Entry Fee & Safari

राजस्थान (Rajasthan) का अलवर दिल्ली से लगभग 3 से 4 घंटे की दूरी पर है। बारिश के मौसम में अरावली की पहाड़ियां (Aravalli hills) हरी-भरी हो जाती हैं और यहां का मौसम काफी सुहावना रहता है। यहां आप बाला किला (Bala Quila), सिटी पैलेस (City Palace)और सिलीसेढ़ झील (Siliserh Lake)घूम सकते हैं। अगर भीड़ से दूर शांत जगह पर समय बिताना चाहते हैं, तो अलवर अच्छा ऑप्शन है।

Neemrana Fort Palace, नीमराना फोर्ट पैलेस: शाही अंदाज में बिताएं वीकेंड

Neemrana Fort Palace| Heritage Resort near Jaipur | Stay near Jaipur

दिल्ली से करीब 2.5 से 3 घंटे की दूरी पर बना नीमराना फोर्ट पैलेस इतिहास और लग्जरी का शानदार ब्लेंड है। कई सौ साल पुराने इस किले को अब हेरिटेज होटल (heritage hotel) में बदल दिया गया है। यहां की छतों, बगीचों और पुराने आंगनों से बारिश के बाद का नजारा बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। यहां एक दिन बिताकर भी रॉयल फील का एक्सपीरियंस लिया जा सकता है।

Bharatpur, भरतपुर: पक्षियों और हरियाली के बीच सुकून भरा दिन

The Palaces of Deeg — Google Arts & Culture

दिल्ली से करीब 3.5 से 4 घंटे की दूरी पर भरतपुर (Bharatpur) मानसून (monsoon) में बेहद खूबसूरत हो जाता है। यहां का केवलादेव नेशनल पार्क (Keoladeo National Park) बारिश के बाद हरियाली से भर जाता है और देश-विदेश के कई पक्षी यहां दिखाई देते हैं। पार्क को देखने के लिए साइकिल या साइकिल रिक्शा सबसे अच्छा ऑप्शन’है। अगर आपको फोटोग्राफी या नेचर पसंद है, तो यह जगह आपको जरूर पसंद आएगी।

सफर पर निकलने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

8 Best Places for a Romantic Stay During Monsoon in India 2026

मानसून ट्रिप (monsoon trip) पर निकलने से पहले कुछ छोटी-छोटी तैयारियां आपकी जर्नी को और आसान बना सकती हैं। कोशिश करें कि सुबह जल्दी निकलें ताकि ट्रैफिक से बच सकें और दिनभर घूमने का पूरा समय मिले। घर से निकलने से पहले मौसम का अपडेट जरूर देख लें। अपने साथ छाता या हल्की रेन जैकेट, आरामदायक वॉटरप्रूफ जूते, पानी की बोतल, हल्के स्नैक्स और जरूरी दवाइयां जरूर रखें। बारिश के दौरान गाड़ी सावधानी से चलाएं और जल्दबाजी करने के बजाय रास्ते की हरियाली, ठंडी हवाओं और खूबसूरत नजारों का भी भरपूर आनंद लें।

अपनी Pocket Money से बेजुबानों का पेट भरता है ये 10वीं का छात्र | Young Boy feeding birds

राजस्थान के भीलवाड़ा के हिमांशु अपनी पॉकेट मनी से हर दिन पक्षियों के लिए दाना, फल और पानी की व्यवस्था करते हैं। 30 दिनों के एक छोटे से चैलेंज से शुरू हुई उनकी पहल आज 100 दिनों के सफ़र में बदल चुकी है। शुरुआत में लोगों ने उनका विरोध किया, लेकिन आज उनकी कहानी कई लोगों को बेजुबान पक्षियों की मदद करने के लिए प्रेरित कर रही है।
अगर आपको भी यह कहानी पसंद आए, तो अपने घर की छत या बालकनी में पक्षियों के लिए थोड़ा-सा दाना और एक कटोरी पानी ज़रूर रखें।

@himanshu_sahu_7773

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Video: 500 रुपये के नोट ने मचाया बवाल! सरकारी स्कूल की टीचर पर छात्राओं के कपड़े उतरवाने का आरोप, वायरल हुआ वीडियो

राजस्थान के सवाई माधोपुर से सामने आए एक कथित मामले ने पूरे देश में चर्चा छेड़ दी है। सरकारी स्कूल की एक शिक्षिका पर छात्राओं के साथ कथित रूप से अपमानजनक व्यवहार करने का आरोप लगा है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। वायरल पोस्ट और वीडियो के सामने आने के बाद इस घटना को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि स्कूल, जहां बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिलना चाहिए, वहां इस तरह के आरोप बेहद गंभीर हैं। मामले ने बच्चों की सुरक्षा, शिक्षकों की जिम्मेदारी और स्कूलों में अपनाए जाने वाले व्यवहार को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।

बढ़ते विरोध और जनआक्रोश के बीच संबंधित शिक्षिका को निलंबित कर दिया गया है। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां और आगे की कार्रवाई स्पष्ट हो सकेगी

छात्राओं से कपड़े उतारने का लगाया गया आरोप

वायरल दावे के अनुसार, शिक्षिका ने कथित तौर पर छात्राओं से कपड़े हटाने को कहा ताकि गायब 500 के नोट की तलाश की जा सके। पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि जो छात्राएं ऐसा नहीं करना चाहती थीं, उनसे ₹500 देने की बात कही गई। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें कुछ छात्राएं रोती हुई नजर आ रही हैं। हालांकि, मामले की पूरी सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

सोशल मीडिया पर भड़का लोगों का गुस्सा

मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने कड़ी नाराजगी जताई। कई यूजर्स ने इसे बच्चों के सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

लोगों ने सवाल उठाए कि स्कूल जैसे सुरक्षित स्थान पर बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार कैसे किया जा सकता है।

विरोध के बाद शिक्षिका पर कार्रवाई

वायरल पोस्ट और बढ़ते विरोध के बीच शिक्षिका को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई। प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की जा रही है ताकि घटना की वास्तविकता और पूरी परिस्थिति का पता लगाया जा सके।

माता-पिता और यूजर्स ने मांगी सख्त कार्रवाई

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सिर्फ निलंबन को पर्याप्त नहीं बताया और कानूनी कार्रवाई की मांग की। कुछ यूजर्स ने कहा कि बच्चों के साथ किसी भी तरह का अपमानजनक व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर

फिलहाल मामला आरोपों और जांच के बीच है। अधिकारियों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना में क्या-क्या हुआ और आगे की कानूनी कार्रवाई किस दिशा में जाएगी। यह मामला स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और संवेदनशील व्यवहार को लेकर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।

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₹1 लाख का लोन लेकर शुरू किया काम, अब सालाना ₹8 लाख की कमाई! मिलिए छत्तीसगढ़ की ‘लखपति दीदी’ दिलमति से

Chhattisgarh Lakhpati Didi Dilmati Success Story: पारंपरिक खेती से जैसे-तैसे गुजारा करने से लेकर आज सालाना ₹8 लाख तक की कमाई करने तक, छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले की दिलमति की कहानी देश के ग्रामीण इलाकों में आ रहे बड़े बदलाव की मिसाल है। दिलमति ने एक सफल सुअर पालन व्यवसाय खड़ा करके न केवल अपने परिवार को आर्थिक तंगी से बाहर निकाला, बल्कि वे छत्तीसगढ़ की ‘लखपति दीदी’ बनकर उभरी हैं।

उनकी इस सफलता ने उनके गांव के कई अन्य परिवारों को भी इस बिजनेस से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है। आइए जानते हैं दिलमति के संघर्ष और उनकी कामयाबी की पूरी कहानी।

कौन हैं लखपति दीदी दिलमति?

दिलमति छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बलरामपुर जिले के लादुवा गांव की रहने वाली हैं। वे स्थानीय ‘मां दुर्गा महिला स्वयं सहायता समूह’ (SHG) की एक सक्रिय सदस्य हैं। कुछ साल पहले तक दिलमति का परिवार पूरी तरह से पारंपरिक खेती पर निर्भर था। सीमित आय के कारण उन्हें घर चलाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।दिलमति की जिंदगी में यू-टर्न तब आया जब वे स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। यहां उन्हें सरकार द्वारा समर्थित आजीविका के अवसरों और योजनाओं के बारे में जानकारी मिली।

₹1 लाख के लोन से ऐसे खड़ा किया साम्राज्य

समूह के अधिकारियों और जानकारों से प्रोत्साहन मिलने के बाद दिलमति ने एक साहसिक कदम उठाया। दिलमति ने स्वयं सहायता समूह (SHG) के जरिए ₹1 लाख का लोन लिया। इस रकम से उन्होंने सुअर पालन का काम शुरू करने के लिए पड़ोसी राज्य झारखंड से 10 सुअर खरीदे।

धीरे-धीरे उनका यह बिजनेस मुनाफे में बदल गया। उनके फार्म में प्रत्येक मादा सुअर 9 से 10 बच्चों (पिगलेट्स) को जन्म देती है, और एक-एक बच्चा बाजार में करीब ₹5,000 में बिकता है। आज के समय में दिलमति के पास 9 मादा सुअर हैं, जिससे उनकी सालाना आमदनी ₹7 लाख से ₹8 लाख के बीच हो जाती है।

कमाई से तैयार किए कमाई के नए साधन

दिलमति केवल सुअर पालन तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने इस बिजनेस से होने वाली कमाई को समझदारी से दूसरी जगहों पर री-इन्वेस्ट किया:

  1. उन्होंने सुअरों के रहने के लिए एक पक्का और आधुनिक शेड बनवाया है।
  2. खेती को आसान बनाने के लिए धान और मक्का की थ्रेशिंग (मिसाई) मशीनें खरीदीं।
  3. अपनी खेती में ड्रिप इरिगेशन तकनीक को अपनाया और बड़े पैमाने पर जैविक सब्जियों की खेती शुरू की।
  4. इन सब अलग-अलग जरियों से अब उनके परिवार के पास कमाई के कई माध्यम तैयार हो चुके हैं।

गांव की महिलाओं के लिए बनीं रोल मॉडल, प्रशासन भी करेगा मदद

दिलमति की इस बड़ी सफलता ने लादुवा गांव की तस्वीर बदल दी है। दिलमति की कामयाबी को देखकर गांव के करीब 10 से 15 अन्य परिवारों ने भी सुअर पालन को अपनी आजीविका के रूप में अपना लिया है। दिलमति खुद अब दूसरी महिलाओं को नियमित बचत करने, समूहों से जुड़ने और लोन लेकर अपना खुद का बिजनेस शुरू करने के लिए प्रेरित करती हैं।

दिलमति की इस उपलब्धि को देखते हुए बलरामपुर जिला प्रशासन अब इस तरह की आजीविका पहलों को बड़े पैमाने पर विस्तार देने की योजना बना रहा है। बलरामपुर के कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के मुताबिक, प्रशासन अब एक ‘गोट क्लस्टर प्रोजेक्ट’ तैयार कर रहा है। इसके तहत और भी अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने और ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए उन्नत नस्ल की बकरियां उपलब्ध कराई जाएंगी।

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में 2 महीने में 18 महिलाओं की मौत से हड़कंप! डिलीवरी के बाद मौतों के मामलों ने खड़े किए बड़े सवाल, क्या बोली सरकार?

Deaths of pregnant women in Rajasthan: राजस्थान में पिछले दो महीनों के दौरान सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद महिलाओं की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मई 2026 से अब तक राज्य के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में कम से कम 18 महिलाओं की डिलीवरी या सी-सेक्शन (सिजेरियन) के बाद मौत हो चुकी है। इनमें सबसे चिंताजनक बात यह है कि जुलाई की शुरुआत में केवल छह दिनों के भीतर ही 9 महिलाओं की जान चली गई।

मामले केवल मौतों तक सीमित नहीं हैं। प्रसव के बाद गंभीर रूप से बीमार हुई 7 अन्य महिलाओं की किडनी फेल होने के कारण डायलिसिस करनी पड़ रही है। इससे यह आशंका मजबूत हुई है कि यह अलग-अलग घटनाएं नहीं। बल्कि प्रसव के बाद होने वाली गंभीर जटिलताओं का एक बड़ा पैटर्न हो सकता है।

सिर्फ 6 दिन में 9 मौत?

‘न्यूज 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मई के बाद से भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, जोधपुर और अन्य सहित कम से कम पांच जिलों के सरकारी अस्पतालों में माताओं की 18 मौतों की खबर आई है। इनमें से नौ मौतें जुलाई की शुरुआत में सिर्फ छह दिनों में हुईं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ये मौतें भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, जोधपुर समेत कम से कम पांच जिलों के सरकारी अस्पतालों में हुई हैं। सभी मामलों में महिलाओं की मौत डिलीवरी या ऑपरेशन के बाद हुई, जिससे पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।

पहले मातृ मृत्यु दर में सुधार, अब फिर चिंता

राजस्थान ने हाल के वर्षों में मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Ratio) कम करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी। साल 2017-19 के दौरान प्रति 1 लाख जीवित जन्म पर 141 माताओं की मौत होती थी, जो 2018-20 में घटकर 113 रह गई। इस सुधार के कारण राजस्थान को मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश की सफलता की मिसाल माना गया था। लेकिन अब बेहद कम समय में एक साथ सामने आए इन मामलों ने एक्सपर्ट को भी चिंता में डाल दिया है कि आखिर अचानक ऐसी स्थिति क्यों बनी।

परिवारों ने लगाए गंभीर आरोप

मृतक महिलाओं के परिजनों का कहना है कि वे खुशहाल प्रसव की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे थे। लेकिन उनकी बेटियां, बहुएं और पत्नियां कभी घर वापस नहीं लौट सकीं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें इलाज से जुड़े पूरे मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए। यह भी स्पष्ट नहीं बताया कि आखिर मौत कैसे हुई। कई परिवारों ने इन मामलों की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने और पूरी पारदर्शिता की मांग की है।

रिश्तेदारों का दावा है कि कई महिलाएं भर्ती होने के समय सामान्य स्थिति में थीं, लेकिन सामान्य प्रसव या सी-सेक्शन के कुछ समय बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। इसके बाद उन्हें अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्ट-पार्टम हेमरेज), संक्रमण (सेप्सिस) या किडनी फेल होने जैसी गंभीर समस्याएं हुईं। कई महिलाओं की जिला अस्पतालों में मौत हो गई। जबकि कुछ को बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

इलाज में लापरवाही के आरोप

परिवारों ने अस्पतालों पर इलाज में देरी, मरीजों की पर्याप्त निगरानी न होने और एक्सपर्ट डॉक्टरों की कमी जैसे आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई उप-जिला अस्पतालों में एनेस्थेटिस्ट, फिजिशियन और आईसीयू सुविधाओं की भारी कमी है। परिजनों के मुताबिक कई बार मदद की गुहार लगाने के बावजूद समय पर डॉक्टर नहीं पहुंचे। कुछ अस्पतालों में एक ही डॉक्टर कई गंभीर मरीजों को संभाल रहा था, जबकि सीमित संसाधनों के बीच नर्सिंग स्टाफ मरीजों का इलाज करने की कोशिश कर रहा था।

सरकार ने क्या कहा?

राजस्थान सरकार ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए भीलवाड़ा और बांसवाड़ा सहित प्रभावित जिलों में विशेषज्ञ टीमों को जांच के लिए भेजा है। स्वास्थ्य विभाग ने कई जांच समितियां गठित की हैं और लगातार समीक्षा बैठकें भी की जा रही हैं। हालांकि, राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने इन मौतों को फिलहाल रहस्य बताया है। उनका कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि मई से अब तक इतनी बड़ी संख्या में माताओं की मौत आखिर क्यों हुई। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब तक किसी जांच समिति ने इन सभी मामलों के पीछे कोई एक स्पष्ट कारण नहीं बताया है।

शुरुआती जांच में क्या सामने आया?

स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक रिपोर्टों में कई संभावित कारणों का उल्लेख किया गया है। इनमें प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण (सेप्सिस), दवाओं के संभावित दुष्प्रभाव, गंभीर एनीमिया और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी जैसी स्थितियां शामिल हैं। हालांकि, अब तक जांच एजेंसियां ऐसा कोई साझा कारण नहीं खोज पाई हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इतने कम समय में अलग-अलग जिलों में एक जैसी घटनाएं क्यों सामने आईं।

एक्सपर्ट की चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन मामलों की जल्द और निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो इससे सरकारी अस्पतालों में प्रसव सेवाओं पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि हर मामले की मेडिकल ऑडिट कर यह पता लगाना जरूरी है कि कहीं इलाज में लापरवाही, संसाधनों की कमी या किसी अन्य प्रणालीगत समस्या के कारण तो ये मौतें नहीं हुईं। फिलहाल, राजस्थान में माताओं की लगातार हो रही मौतों का कारण अब भी स्पष्ट नहीं हो पाया है। जांच जारी है और पूरे राज्य की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर इन मौतों के पीछे असली वजह क्या है।

मामलों को लेकर सरकार गंभीर

राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सोमवार को कहा कि प्रसूताओं की मृत्यु की हालिया घटनाओं को लेकर राज्य सरकार संवेदनशील और गंभीर है। स्वास्थ्य भवन में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए खींवसर ने कहा कि इन सभी मामलों में मरीज विभिन्न स्थानों से रेफर होकर सरकारी अस्पतालों में भर्ती हुए थे। खींवसर ने कहा कि राज्य में मातृ मृत्यु के मामलों में लगातार कमी आई है।

पीटीआई के मुताबिक, उन्होंने कहा, “2023-24 में मातृ मृत्यु के 1,094 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2024-25 में घटकर 986 और 2025-26 में 824 रह गए। इस प्रकार वर्तमान सरकार के कार्यकाल में मातृ मृत्यु के मामलों में लगभग 25 प्रतिशत की कमी आई है।” उन्होंने कम समय में प्रसूताओं की लगातार हुई मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक घटना को गंभीरता से ले रही है। मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 2011 में जोधपुर में तीन दिन के भीतर 18 प्रसूताओं की मृत्यु हुई थी, जिनका कारण एक जैसा था। इसी प्रकार 2011-12 में जयपुर में भी आठ प्रसूताओं की क्रमिक मृत्यु हुई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान मामलों में ऐसा नहीं है। प्रत्येक मामले में मृत्यु के कारण अलग-अलग थे। बैठक के दौरान खींवसर ने ऑनलाइन माध्यम से बांसवाड़ा और भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के डॉक्टरों से मृत्यु के मामलों की विस्तृत जानकारी ली।

Narottam Mishra Datia: नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से दतिया में भारी बवाल, समर्थकों ने पुलिस पर किया पथराव, NH-44 को किया जाम

Narottam Mishra Datia: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को होने वाले उपचुनाव के लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शुक्रवार (10 जुलाई) को आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। तिवारी के नाम की घोषणा किए जाने के बाद वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मिश्रा को टिकट मिलने की उम्मीद थी। उन्होंने नामांकन पत्र भी खरीद लिया था। ऐसे में BJP का यह फैसला उनके लिए झटका माना जा रहा है।

सूत्रों ने बताया कि दतिया जिले के सेवढ़ा कस्बे के निवासी तिवारी लंबे समय से प्रदेश BJP संगठन में सक्रिय हैं। उम्मीदवार घोषित होने के बाद तिवारी ने प्रदेश BJP कार्यालय के बाहर पत्रकारों से कहा कि उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर उनका आभार व्यक्त किया है। हालांकि, दतिया में मिश्रा के समर्थकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।

पुलिस पर पथराव, हाईवे जाम

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने शनिवार सुबह पुलिस पर पथराव किया। वे इस बात का विरोध कर रहे थे कि BJP ने उन्हें आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए टिकट नहीं दिया। इस घटना में लोगों के घायल होने की खबर है। शुक्रवार रात उनके हजारों समर्थकों ने NH-44 को जाम कर दिया। इससे गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं और ट्रैफ़िक पूरी तरह ठप हो गया।

एक समर्थक बलराम ने पीटीआई से कहा कि कुछ कार्यकर्ताओं ने विरोध स्वरूप अपनी शर्ट उतारकर सड़क पर लेटकर प्रदर्शन किया। जबकि अन्य धरने पर बैठ गए। एक अन्य समर्थक ने कहा कि जब तक ‘नरोत्तम दादा’ को टिकट नहीं दिया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वे BJP छोड़ने का फैसला भी कर सकते हैं।

3000 उपद्रवियों का तांडव

दतिया के SP मयूर खंडेलवाल ने कहा, “कल दतिया शहर में 3000 से ज्यादा उपद्रवियों ने माहौल खराब करने की कोशिश की। उन्होंने बाजार बंद कराने की कोशिश की। वे कल शाम 6 बजे से ही ‘चक्का जाम’ के लिए यहां बैठे थे। कलेक्टर और मैंने उनसे कई बार यहां से हटने और ‘चक्का जाम’ खत्म करने के लिए बात की। इसकी वजह से लगभग 15 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया है। आस-पास के ज़िले भी प्रभावित हो रहे हैं। सुबह करीब 4 बजे उन्होंने अचानक पुलिस पर पथराव किया।”

अधिकारी ने आगे कहा, “पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसके बाद पथराव और तेज़ हो गया। हमारे 6 से ज़्यादा जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वे सभी अस्पताल में भर्ती हैं। मुझे और एडिशनल SP को भी चोटें आईं। फिर हमने दोबारा आंसू गैस के गोले छोड़े और सख्ती दिखाते हुए उन्हें भागया। वे अब छिपे हुए हैं। उनसे कहा गया है कि या तो सरेंडर करें या शांति से चले जाएं। ‘चक्का जाम’ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ट्रैफिक जाम को हटाया जा रहा है। पूरे जिले में पुलिस बल तैनात है।”

विधानसभा चुनाव में हुई थी हार

साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती ने तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,500 से अधिक मतों से हराया था। हालांकि, दिल्ली की एक अदालत ने इसी वर्ष अप्रैल में धोखाधड़ी के एक मामले में भारती को तीन साल के कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई और दतिया सीट पर उपचुनाव कराना आवश्यक हो गया। हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई।

भारत निर्वाचन आयोग ने हाल में अलग-अलग राज्यों की तीन विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा की थी। इनमें मध्यप्रदेश की दतिया सीट भी शामिल है। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार, दतिया के अलावा बिहार और गुजरात की एक-एक विधानसभा सीट पर भी 30 जुलाई को मतदान होगा। जबकि मतगणना तीन अगस्त को की जाएगी।

गाँव की बहू बनी इंटरनेट सेंसेशन | Rural India Inspiration | Rajasthan | | The Better India Hindi

“बहू को घर पर रहना चाहिए”
ऐसे तानों के बीच राजस्थान के एक छोटे से गाँव की संतु चौधरी ने अपनी अलग पहचान बनाई। राजस्थानी पहनावे, देसी खाना, देसी AC, मटके का फ्रिज और अपनी संस्कृति के साथ उन्होंने ऐसा कंटेंट बनाया कि सिर्फ 25 दिनों में 1 लाख लोग उनसे जुड़ गए।
आज फेसबुक पर 2.4 मिलियन और इंस्टाग्राम पर 1 मिलियन से ज्यादा लोग उनकी इस यात्रा का हिस्सा हैं।

@santuchoudhary_04

Rural India Content Creator, Village Influencer, Women Empowerment

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Reel बनाते-बनाते फिल्म तक पहुँची ये नन्ही कलाकार । Priyanshi Jatwa | Rajasthan | Child Artist Pihu

5 साल की एक बच्ची। ना acting, ना setup, ना सुविधाएँ। सिर्फ गांव की सादगी, टूटा tripod, छत पर खड़े होकर upload होती reels…और मन से किया गया छोटा सा खेल। आज वही खेल उसे फिल्म के Lead Role तक ले आया। ये कहानी बताती है—सपनों को luxury नहीं, लगन चाहिए।
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@iampihuofficial

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Jai Moondra: भारत को हराने वाला खिलाड़ी ढूंढ रहा फुल-टाइम नौकरी! जय मूंदड़ा की कहानी हुई वायरल

आयरलैंड के तेज गेंदबाज जय मूंदड़ा ने भारत के खिलाफ दो मैचों की टी20 सीरीज में शानदार गेंदबाजी कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। दोनों मुकाबलों में शानदार गेंदबाजी करते हुए कुल 5 विकेट चटका कर प्लेयर ऑफ द सीरीज का अवॉर्ड भी अपने नाम किया। उनकी सटीक और कसी हुई गेंदबाजी ने पूरी सीरीज में भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया और आयरलैंड की ऐतिहासिक जीत में बड़ी भूमिका निभाई। वहीं इसी बीच जय मूंदड़ा अपनी शानदार गेंदबाजी के अलाला किसी और वजह से भी चर्चा में हैं। जय मूंदड़ा आईटी सेक्टर में नौकरी की तलाश कर रहे हैं।

भारत के खिलाफ शानदार गेंदबाजी करने वाले जय मूंदड़ा सिर्फ क्रिकेटर ही नहीं, बल्कि आईटी सेक्टर से भी जुड़े हैं। उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, वह अभी भी फुल-टाइम नौकरी की तलाश में हैं।

2025 में छोड़ दी नौकरी

राजस्थान के टोंक के रहने वाले जय मूंदड़ा साल 2021 में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री की पढ़ाई के लिए आयरलैंड गए थे। आयरलैंड की राष्ट्रीय टीम से खेलने के बावजूद उनके पास अब भी भारतीय पासपोर्ट है। आयरलैंड जाने के बाद जय मूंदड़ा ने सितंबर 2022 में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री पूरी की। पढ़ाई खत्म होने के बाद उन्होंने इंटेल में प्रोडक्ट डेवलपमेंट इंजीनियर के रूप में काम शुरू किया। लेकिन, जून 2025 में उन्होंने ये नौकरी छोड़ दी। उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, इसके बाद से उन्होंने किसी नई कंपनी में काम शुरू नहीं किया है।

Jai Moondra (2)

नए नौकरी की तलाश में जय मूंदड़ा

29 वर्षीय जय मूंदड़ा फिलहाल इंजीनियरिंग क्षेत्र में नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं। उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल पर आयरलैंड और यूरोप में अवसरों के लिए OpenToWork का बैज भी दिखाई देता है। करीब छह महीने पहले जय मूंदड़ा ने लिंक्डइन पर आयरलैंड और यूरोप में टेक्नोलॉजी से जुड़ी नौकरियों की एक पोस्ट में रुचि दिखाई थी। वहीं लगभग एक महीने पहले उन्होंने एक अन्य पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए खुद को इंटेल का पूर्व कर्मचारी बताया और कहा कि वह नए नौकरी के अवसर की तलाश में हैं।

लोगों ने किया कमेंट

भारत को हराने के बाद आयरलैंड के गेंदबाज जय मूंदड़ा की लिंक्डइन प्रोफाइल पर लगा OpenToWork बैज भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कई लोगों ने इस बात पर हैरानी जताई कि एक तरफ वह नई नौकरी की तलाश में हैं और दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत जैसी मजबूत टीम के खिलाफ मैच जिताऊ प्रदर्शन कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “ये एक कॉर्पोरेट नौकरी है जिसने उन्हें दूसरा मौका दिया। मेहनत करने वाले की इज्जत करनी चाहिए। वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा, “वह भारत नहीं, बल्कि आयरलैंड के लिए खेल रहे हैं। इसलिए गुजारा चलाने के लिए उन्हें नौकरी भी करनी पड़ती है।”