Nifty Outlook: लगातार 7 हफ्ते गिरा निफ्टी, अब 28 सितंबर को कैसी रहेगी चाल? जानिए एक्सपर्ट्स से

Nifty Outlook: पिछले हफ्ते बुधवार की तेज बिकवाली के बाद शुक्रवार को निफ्टी संभला। इंडेक्स 77 अंक चढ़कर 23,140 पर बंद हुआ। हालांकि, पूरे हफ्ते निफ्टी 0.88% नीचे रहा। यह लगातार सातवां हफ्ता है, जब इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ है।

निफ्टी दिन के निचले स्तर से करीब 142 अंक संभला। इसके बावजूद अगस्त की शुरुआत के 24,772 के स्तर से इंडेक्स अब 1,750 अंक से ज्यादा नीचे आ चुका है।

इन शेयरों में दिखी तेजी

Axis Bank, Asian Paints और M&M शुक्रवार को निफ्टी के टॉप गेनर्स रहे। दूसरी तरफ Max Healthcare, Tata Motors Passenger Vehicles और Infosys सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में रहे।

सेक्टोरल इंडेक्स में भी तस्वीर मिली-जुली रही। Consumer Durables, Realty और Auto में खरीदारी दिखी। वहीं Healthcare, Media और IT कमजोर रहे।

ब्रॉडर मार्केट में भी ज्यादा हलचल नहीं रही। Nifty Midcap 100 में 0.14% की गिरावट आई। वहीं Nifty Smallcap 100 में 0.15% की बढ़त रही।

रुपये में भी मजबूती

भारतीय रुपया 15 पैसे मजबूत होकर करीब 95.81 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। एशियाई करेंसी में मजबूती से रुपये को सपोर्ट मिला।

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का भी फायदा मिला। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की संभावित बातचीत से भी बाजार को राहत मिली।

अगले हफ्ते किन चीजों पर नजर?

अगले हफ्ते बाजार की नजर कच्चे तेल और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड पर रहेगी। पश्चिम एशिया की खबरें भी बाजार की चाल तय कर सकती हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। सऊदी अरब और हूती तनाव पर भी नजर रहेगी। इन घटनाक्रमों का असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। अगर होर्मुज रूट को चरणबद्ध तरीके से फिर खोलने की दिशा में कोई प्रगति होती है, तो बाजार को राहत मिल सकती है।

ग्लोबल मार्केट से मिलेंगे ये संकेत

चीन के आधिकारिक और Caixin PMI आंकड़े अगले हफ्ते अहम रहेंगे। अमेरिका के Consumer Confidence और JOLTS Job Openings के आंकड़ों पर भी नजर होगी।

यूरोजोन की सितंबर की महंगाई के आंकड़े भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के तीन अधिकारियों के बयान और Bank of Japan की बैठक के मिनट्स भी ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं।

23,000 है सबसे अहम सपोर्ट

HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर अहम है। अगर इंडेक्स इसके नीचे निर्णायक रूप से फिसलता है तो कमजोरी बढ़ सकती है। ऐसे में 22,600 तक गिरावट का रास्ता खुल सकता है।

ऊपर की तरफ 23,350 के आसपास रेजिस्टेंस दिख रहा है। यानी इस स्तर के ऊपर टिकना भी बाजार के लिए अहम होगा।

23,000 के नीचे और दबाव संभव

Angel One के ओशो कृष्णन भी 23,000 को अहम सपोर्ट मानते हैं। उनके मुताबिक, इसके नीचे तेज गिरावट आती है तो निफ्टी 22,800-22,700 के जोन तक जा सकता है।

ऊपर की तरफ 23,280-23,350 का स्तर शुरुआती रेजिस्टेंस है। इसके बाद 23,500-23,550 का जोन अहम रहेगा।

23,600 के ऊपर तस्वीर बदल सकती है

HDFC Securities के नंदीश शाह के मुताबिक, 23,300 और 23,600 निफ्टी के लिए अहम रेजिस्टेंस हैं। 23,600 का स्तर हाल के फ्लैग पैटर्न के ब्रेकडाउन लेवल से भी जुड़ा है।

नीचे की तरफ 23,000 के बाद 22,700 अगला सपोर्ट है। शाह के मुताबिक, 23,600 के ऊपर निफ्टी टिकता है तो शॉर्ट टर्म का रुझान बदलकर न्यूट्रल हो सकता है।

23,300 के ऊपर मजबूती के संकेत

LKP Securities के रूपक डे के मुताबिक, 23,000 तत्काल सपोर्ट है। इसके बाद 22,700 अगला अहम स्तर है।

ऊपर की तरफ 23,200-23,300 तत्काल रेजिस्टेंस है। निफ्टी 23,300 के ऊपर टिकता है तो टेक्निकल तस्वीर बेहतर हो सकती है। वहीं 23,000 के नीचे निर्णायक गिरावट आने पर कमजोरी फिर बढ़ सकती है।

लंबी और मध्यम अवधि के लिहाज से यह शेयरों में निवेश का शानदार मौका, एक्सपर्ट ने बताई इसकी खास वजह

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Fortis का दावा, Daiichi-Singh Brothers विवाद से कोई लेना-देना नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने दी ऑडिट को मंजूरी

Fortis Healthcare News: हेल्थकेयर सेक्टर की दिग्गज कंपनी फोर्टिस हेल्थकेयर का कहना है कि दाइची सैंक्यो (Daiichi Sankyo) और सिंह ब्रदर्स (मलविंदर मोहन सिंह और शिविंदर मोहन सिंह) के बीच चल रहे कानूनी विवाद में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। फोर्टिस का अपने बचाव में मुख्य रूप से कहना है कि इस विवाद में वह पूरी तरह बाहरी पक्ष है और सिंह ब्रदर्स की फोर्टिस में अपनी हिस्सेदारी खत्म करने या इधर-उधर किए जाने में कंपनी की कोई भूमिका नहीं थी। कंपनी ने यह दलील सुप्रीम कोर्ट में दी और इसके बारे में आज 27 सितंबर को एक्सचेंज फाइलिंग में बताया।

क्या कहना है सुप्रीम कोर्ट का और वहां कैसे पहुंचा मामला

दिल्ली हाई कोर्ट ने 31 अगस्त के अपने आदेश में फोर्टिस का फोरेंसिक ऑडिट कराने का निर्देश दिया था, जिसके खिलाफ कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। हालांकि 25 सितंबर को कोर्ट ने फोर्टिस की SLP (स्पेशल लीव पिटीशन) का निपटारा करते हुए फोरेंसिक ऑडिट को आगे बढ़ाने की अनुमति दी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में जो कुछ भी कहा यानी जो भी टिप्पणी की, वह सिर्फ यह तय करने के लिए थी कि ऑडिट होना चाहिए या नहीं और अब ऑडिट स्वतंत्र रूप से किया जाएगा, जिस पर हाईकोर्ट की टिप्पणी का कोई असर नहीं होगा।।

क्या है Fortis की दलील

फोर्टिस का कहना है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने उस पर कोई देनदारी या जुर्माना नहीं लगाया है और न ही यह दाईची सैंक्यो और सिंह ब्रदर्स के बीच चल रहे आर्बिट्रेशन प्रोसिडिंग्स यानी कानूनी मामले में कभी पक्षकार रही है। फोर्टिस का कहना है कि वह एक लिस्टेड कंपनी है और उसके पास प्रमोटर्स के शेयरों के लेन-देन को कंट्रोल करने की कोई शक्ति ही नहीं थी। फोर्टिस का यह भी कहना है कि पुराने प्रमोटर्स के शेयरों के लेन-देन से कोई पैसा भी नहीं मिला।

फोर्टिस का कहना है कि जब सिंह ब्रदर्स की शेयरहोल्डिंग 1% से कम हो गई और उन्होंने मार्च 2018 तक बोर्ड से इस्तीफा दे दिया, तो इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डर्स ने इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को नियुक्त किया। इसके बाद इंडिपेंडेंट बोर्ड ने जून 2018 में एक नया इन्वेस्टर खोजने और उसे शामिल करने के लिए कॉम्पिटिटिव बिडिंग प्रोसेस शुरू किया।

कंपनी के अनुसार उसके मौजूदा प्रमोटर शेयरहोल्डर और IHH हेल्थकेयर बरहाद ग्रुप की नॉर्दर्न टीके वेंचर प्राइवेट लिमिटेड ने नवंबर 2018 में इसमें इक्विटी शेयरों के नए इश्यू के जरिए निवेश किया था और इसे लेकर पहले ही CCI, SEBI, स्टॉक एक्सचेंजों और शेयरहोल्डर्स समेत सभी कानूनी और रेगुलेटरी मंजूरियां ले ली गई थीं। फोर्टिस का कहना है कि यह ट्रांजैक्शन तब हुआ जब सिंह ब्रदर्स का कंपनी के साथ कोई संबंध नहीं रह गया था और इसमें उनसे शेयरों का ट्रांसफर शामिल नहीं था। फिलहाल कंपनी ने भरोसा जताया है कि स्वतंत्र तरीके से फोरेंसिक ऑडिट में ये तथ्य सही साबित होंगे।

Cars24 IPO के लिस्टिंग की तैयारी, अप्रैल तक फाइल होगा ड्राफ्ट, अभी गुजर रही इस लंबे प्रोसेस से

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Cars24 IPO: लिस्टिंग की तैयारी, अप्रैल तक फाइल होगा ड्राफ्ट, अभी गुजर रही इस लंबे प्रोसेस से

Cars24 IPO: पुराने कारों की बिक्री के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ऑफर करने वाली कार्स24 सात महीने में आईपीओ के लायक हो सकती है। कंपनी के सीएफओ Shivanshu Makkar का कहना है कि सिंगापुर से भारत में अपने रिवर्स फ्लिप की प्रक्रिया पूरी करने के बाद वह अप्रैल तक आईपीओ का ड्राफ्ट यानी DRHP (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) दाखिल कर सकेगी। रिवर्स फ्लिप में छह से नौ महीने तक का समय लग सकता है। शिवांशु ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से इंटरव्यू में बताया कि 2015 में सिंगापुर में बनी कार्स24 को रिवर्स फ्लिप के लिए मंजूरी मिल चुकी है और अब यह भारत में अपने आईपीओ का ड्राफ्ट फाइल कर सकती है।

कब तक आ सकता है आईपीओ?

शिवांशु ने कहा था कि अभी कार्स24 सिंगापुर सिंगापुर की कंपनी है लेकिन अब इसे भारतीय कंपनी बनाने की तैयारी है। यह रिवर्स फ्लिप प्रक्रिया है, जैसा कि फ्लिकार्ट (Flipkart) और मिंत्रा (Myntra) ने किया था। शिवांशु की कहना है कि कंपनी को सिंगापुर से मंजूरी मिल चुकी है और भारत में दाखिल करने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें 6 से 9 महीने लग सकते हैं। आधिकारिक तौर पर भारतीय कंपनी बनने के बाद ही यह आईपीओ का ड्राफ्ट दाखिल कर सकेगी। शिवांश को उम्मीद है कि अप्रैल तक कंपनी ऐसा करने के योग्य हो जाएगी। इसके बाद सेबी की मंजूरी, आईपीओ की प्राइस तय करने और बुक-बिल्डिंग जैसी प्रक्रियाओं में करीब 3 से 4 महीने लग सकते हैं।

कैसी है Cars24 की स्थिति

कार्स24 ने आखिरी बार साल 2022 में फंडिंग जुटाई थी, जिसके बाद कंपनी का वैल्यूएशन करीब $330 करोड़ हो गया। शिवांशु के मुताबिक इसके बाद से शिवांशु ने बाहर से कोई नया निवेश नहीं जुटाया, क्योंकि उसे अतिरिक्त पूंजी की जरूरत नहीं पड़ी। उन्होंने कहा कि कंपनी के पास अभी भी पर्याप्त पूंजी मौजूद है और वह फिलहाल कैश बर्न नहीं कर रही है। ऐसे में शिवांशु का कहना है कि अगर कंपनी आईपीओ लाती है तो इसका मुख्य उद्देश्य तत्काल पैसों की जरूरत पूरी करना नहीं, बल्कि भारत में विस्तार और देश के बाहर दूसरे बाजारों में एंट्री के लिए पूंजी तैयार करना होगा।

उनका कहना है कि फिलहाल भारत में 100 में से सिर्फ 5 भारतीयों के पास कार है, तो इस मार्केट में विस्तार की काफी संभावनाएं हैं। शिवांशु का कहना है कि कार्स24 का रिटेल कारोबार इस समय देश के करीब 25 शहरों में है, जिसे बढ़ाकर लगभग 200 शहरों तक ले जाने और करीब 50,000 कारों तक विस्तार करने पर विचार चल रहा है।

शिवांशु का कहना है कि भारत के अलावा कार्स24 खाड़ी के देशों और ऑस्ट्रेलिया में भी अपने कारोबार को बढ़ाने पर विचार कर रही है। अभी यूएई में पुरानी कारों के बाजारों में कार्स24 की लगभग 7% हिस्सेदारी है और यह लगभग 30% की दर से बढ़ रही है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में इसने तीन शहरों तक अपना विस्तार किया है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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M&M Price Hike: महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) की एसयूवी एक बार और महंगी हो सकती हैं। कमोडिटीज यानी कच्चे माल के बढ़ते भाव के चलते कंपनी इसकी योजना बना रही है और अगले कुछ हफ्तों में कंपनी इस पर फैसला ले सकती है। यह जानकारी कंपनी के ऑटोमोटिव प्रेसिडेंट और सीईओ Nalinikanth Gollagunta ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को एक इंटरव्यू में दी। उन्होंने कहा कि कंपनी साल पहले ही तीन बार- जनवरी, अप्रैल और जुलाई में कीमतें बढ़ा चुकी हैं और अब एक बार फिर इसकी तैयारी है। जुलाई में तो कंपनी ने एसयूवी की कीमतें करीब 2.7% तक बढ़ाई थी। अब चौथी बार बढ़ोतरी को लेकर उन्होंने कहा कि इस पर अगले कुछ हफ्तों में फैसला हो सकता है कि कीमतें बढ़ाने की जरूरत है या नहीं।

दाम में बढ़ोतरी का बिक्री पर कितना असर?

नलिनकांत का दावा है कि पूरे ऑटो इंडस्ट्री में हाल ही में हुई प्राइस हाइक का ग्राहकों की इंक्वायरी और बुकिंग्स पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। इसकी एक बड़ी वजह उन्होंने बताई कि महिंद्रा की गाड़ियां अभी भी जीएसटी में कटौती से पहले की कीमतों की तुलना में सस्ती हैं। अब आगे की बात करें तो उन्हें फेस्टिव सीजन से पॉजिटिव उम्मीदें हैं। उनका कहना है कि गाड़ियों की कीमतें अभी भी जीएसटी में कटौती से पहले की तुलना में सस्ती हैं तो महिंद्रा के नए और अपडेटेड मॉडल आ रहे हैं, जिनसे फेस्टिव सीजन में मांग अच्छी दिख सकती हैं

क्या है Mahindra & Mahindra की स्ट्रैटेजी

हाइब्रिड टेक्नोलॉजी को लेकर नलिनकांत ने कहा कि कंपनी का फोकस फिलहाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) पर बना हुआ है लेकिन नियमों में बदलाव पर उसके हिसाब से कंपनी खुद को ढाल लेगी। उन्होंने कहा कि CAFE (कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिसिएंसी) से जुड़े नियमों में ईवी और हाइब्रिड को मिलने वाले फायदों में साफ फर्क है जिसकी वजह से कंपनी का फोकस ईवी पर है।

कैपेसिटी को लेकर उन्होंने कहा कि कंपनी के पास अभी हर महीने तेल से चलने वाली 60 हजार और 8 हजार इलेक्ट्रिक गाड़ियां बनाने की क्षमता है और अगले साल मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत तक तेल से चलने वाली गाड़ियों के प्रोडक्शन की क्षमता हर महीने 70 हजार और ईवी की 12 हजार करने का लक्ष्य है। इस प्रकार कंपनी का लक्ष्य अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी को करीब छह महीने में मौजूदा 68 हजार से बढ़ाकर 84 हजार करने की है। साथ ही कंपनी अगली दो तिमाहियों में तेल से चलने वाली एक और एक ईवी लॉन्च करने की तैयारी में है।

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Stocks to Watch: 25 सितंबर को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, PB फिनटेक से वारी एनर्जीज तक शामिल

Stocks to Watch: शेयर बाजार में 25 सितंबर को कई स्टॉक्स खबरों के चलते फोकस में रहेंगे। PB Fintech के शेयर 36% तक टूटने के बाद IRDAI के प्रस्ताव पर नजर है। वहीं Waaree Energies, Sterlite Technologies और Wheels India से भी अहम अपडेट आए हैं।

PB Fintech

फिनटेक कंपनी PB Fintech के शेयर गुरुवार को 36% तक टूट गए। इसकी वजह IRDAI के इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े बड़े बदलावों का प्रस्ताव है। कंपनी ने एनालिस्ट कॉल में कहा कि नए नियमों का जनरल इंश्योरेंस बिजनेस के रेवेन्यू पर गंभीर असर पड़ सकता है। एजेंट कमीशन और नई भर्तियों की रफ्तार को लेकर भी चिंता जताई गई।

Waaree Energies

सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी Waaree Energies की सब्सिडियरी Waaree Clean Energy Solutions ने स्पेशलिटी गैस बिजनेस में एंट्री की है। कंपनी भारत में सेमीकंडक्टर और सोलर सेल बनाने वाली कंपनियों को अल्ट्रा-हाई प्योरिटी गैस और केमिकल्स सप्लाई करेगी।

Interarch Building Solutions

प्री-इंजीनियर्ड बिल्डिंग सॉल्यूशन कंपनी Interarch Building Solutions ने आंध्र प्रदेश के अट्टीवरम में नई हेवी स्ट्रक्चरल स्टील मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी शुरू की है। इसकी शुरुआती क्षमता 24,000 मीट्रिक टन सालाना है। इससे कंपनी की कॉम्प्लेक्स और हेवी स्टील स्ट्रक्चर बनाने की क्षमता बढ़ेगी।

Dr Lal PathLabs

डायग्नोस्टिक सर्विस कंपनी Dr Lal PathLabs ने SN Genelab में 70% हिस्सेदारी खरीदने को मंजूरी दी है। यह सौदा कैश में अधिकतम ₹168 करोड़ का है। इसके अलावा कंपनी को प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम ₹31.5 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है।

JSW Cement

सीमेंट कंपनी JSW Cement को सेंट्रल टैक्स विभाग की ओर से ₹229.85 करोड़ की GST डिमांड का शो-कॉज नोटिस मिला है। बेलगावी ऑडिट कमिश्नरेट ने यह नोटिस जारी किया है। इसमें लागू ब्याज और 10% पेनल्टी का भी प्रस्ताव है।

Inox Green Energy

रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी Inox Green Energy का QIP गुरुवार को खुल गया है। इसके लिए फ्लोर प्राइस ₹174.36 प्रति शेयर तय किया गया है। कंपनी इस फ्लोर प्राइस पर 5% तक की छूट भी दे सकती है।

Sterlite Technologies

टेलीकॉम और ऑप्टिकल फाइबर कंपनी Sterlite Technologies ने अपने Neuralis डेटा सेंटर प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में रेडीमेड फाइबर ऑप्टिक केबल की नई रेंज जोड़ी है। इन केबल्स में 48 से लेकर 6,912 तक ऑप्टिकल फाइबर हो सकते हैं। कंपनी के मुताबिक, ये प्रोडक्ट डेटा सेंटर की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।

Inox Green Energy Services

रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी Inox Green Energy Services का QIP खुल गया है। कंपनी ने इसके लिए ₹174.36 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। QIP के जरिए कंपनी संस्थागत निवेशकों से फंड जुटाएगी।

Wheels India

ऑटोमोबाइल कंपोनेंट कंपनी Wheels India Ltd ने गुरुवार, 24 सितंबर को ₹250 करोड़ का QIP लॉन्च किया है। कंपनी ने इसका इंडिकेटिव इश्यू प्राइस ₹2,088 प्रति शेयर रखा है। इस पर निवेशकों को अधिकतम 4.3% तक की छूट मिल सकती है।

M&M Financial Services

NBFC कंपनी M&M Financial Services प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए ₹2,000 करोड़ तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCDs) जारी करने की तैयारी में है। इससे कंपनी को फंड जुटाने में मदद मिलेगी।

LCC

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी LCC राजस्थान में ₹653.34 करोड़ के सिंचाई प्रोजेक्ट के लिए L-1 बिडर बनी है। यानी टेंडर में कंपनी ने सबसे कम बोली लगाई है। अब प्रोजेक्ट से जुड़ी आगे की प्रक्रिया पर बाजार की नजर रहेगी।

Transport Corporation of India

लॉजिस्टिक्स कंपनी Transport Corporation of India का बोर्ड 29 सितंबर को शेयर बायबैक के प्रस्ताव पर विचार करेगा। बोर्ड बैठक में बायबैक से जुड़े प्रस्ताव पर फैसला लिया जा सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Autocar’s Day Out: M-ployees of the month

Autocar's Day Out: M-ployees of the month
Autocar's Day Out: M-ployees of the month

Company off-sites are designed to take employees away from the chaos and stress of everyday work for a few moments of relaxation. At Autocar India, things are a bit different. No cocktails by the pool or playing Housie before dinner. Instead, what we got were six BMW M cars (four M4s and two M2s) and a deserted concrete ground thanks to our friends at Raymond Realty. The day brought pouring rain, wet socks and no breakfast. Sounds like punishment, but not to us.

The objective was simple: pick a car, do your best in the three challenges and earn bragging rights for the rest of the year.

We rarely get to compete against each other, and with equal machinery, there could be no excuses. This was going to be intense.

Challenge 1: The Slalom Switch

Partners picked by (un)lucky draw from a bag of M&M’s as colourful as our Ms, each pair then picks a BMW and makes their way through the cones to the other side. Switch drivers and race back through the cones, then stop within the start box. Hit a cone or fail to stop within the box and you earn a penalty.

The M4 might be tail-happy, but it can also dance its way through cones with precision.

Gavin and Ameya chose an M2 for its compact size. However, the drivers’ wildly different body sizes would play spoilsport here, as finding a seat position that suited both was an issue. A clean run with decent athleticism resulted in a time of 35.93sec.

Soham and Sergius followed in the other M2, with a bit of wheelspin off the line. A rapid driver change, thanks to their slender builds, meant a quick 34.36sec. The time to beat.

Lenny and I went against conventional wisdom and picked the bigger, more powerful M4 over the compact and nimble M2. It might be heavier, but we wanted the power advantage for off-the-line speed, given that each run had, in reality, two launches. We went through the cones super-quick, but we bungled the driver swap, nearly running into each other, and with Soham slamming the door shut and me spending precious seconds opening it, the time, then, was simply thrown away and, well, not worthy of printing. 

What was meant to be a relaxing team outing turned into a war.

The chaos subsided as Hormazd arrived with Renuka. Ready to prove that experience counts more than anything else, they put in an honest effort with the M4, which was commendable. But on the way back, Renuka clipped a few cones, which added big chunks to their time. 

Self-proclaimed racers Saumil and Rahul were confident as they snuck into the fuchsia M4, certain they could put down the power best. A clean run and swap, but a controversial on-the-line stop caused a ruckus. Penalty given; the time was 36.23sec.

Rahul advising us all before each run, and we dutifully didn’t follow a word of what he said.

Next, Shapur and Nikhil. Power over light weight here, as the pair went for another 530hp M4. The speed gained at launch was soon lost at the driver swap – they both literally ran into each other – and for good measure, hit a cone on the way back, resulting in a penalty and a time of 42.24sec. A new low.

In the end, seeing how incompetent we were at working together, we abandoned teamwork and did the runs by ourselves and agreed the following challenges should be run solo. 

Challenge 2: The Free Kick

Hop into an M2, line up behind the large inflatable football and race to the finish line, ensuring the ball goes past the flag poles. The fastest to score a goal wins. The M2 was the car of choice, thanks to its upright front-end, which would be a safe bet for pushing a giant football.

The M2 is agile, surefooted and has massive grip.

With the pressure of being from football-crazy Goa, Sergius had his work cut out. But he did Goans proud, guiding the ball with swift, deft steering corrections, and in 9.9sec, we had our first goal and the time to beat.
A run-up-style start with a hard launch turned out to be the fastest way, though, as Rahul scored the goal in just over seven seconds. Talk about choosing the wrong career.

A Zidane-style Panenka was Ameya’s strategy as the ball flicked up with none of Zidane’s flair. A poor 16.64sec, but he managed to score. After watching the slow approach fail, Soham powered through the first half, only to lose the ball and have to reverse to get it in. Way off the times set so far.  With a smooth start, Gavin lost the ball towards the end and had to waste time getting around it, which took over 18 seconds. At least the goal counts.

Content is king, and the more angles we have, the more the evidence.

Since the company had paid for the ball (and would also likely have to cover any damage to the car), Hormazd chose the slow-and-steady way. He eased the ball very slowly into the goal, but we cheered louder than we ever had. Appraisals are around the corner. An overly cautious approach, using 4 of the 460hp available, still resulted in Nikhil missing the ball and failing to get it through the posts. Second attempt made it through at a glacial pace.

With enough evidence of how to go about it, I had to choose between rough and smooth, and the former was more enticing. It looked dramatic as the ball flung high, but pushing it through the goal wasted time.

Finally, in an attempt to beat Rahul, using his style, Shapur hit the ball so far off that, by the time it bounced once, he had already reached ahead. He managed to get it in after much effort, but by his next attempt, the ball had deflated. Good riddance.

Challenge 3:The Drift King

Engage ‘Drift Mode’ in the M4 and achieve the best possible score on the Drift Meter.

Rear wheel drive mode and adjustable traction settings allow for some proper tail-out fun on the M4. 

Before we got to sideways action, we stopped for some grub. As ridiculous as it sounded to have lunch right before drifting in circles, who can get between a bunch of car journos and brown bags of greasy food? After washing down carbs with sugar, we hopped into the M4s for the ultimate bragging rights. The M4 and M2 are both exceptionally playful, and it doesn’t take a lot to get them to break traction. However, the Drift Meter and the extra power of the M4 made it the default choice for drifting.

The drift analyser on the M4 gives you a detailed report of your work with no place to hide.

To begin with, we were all pretty rubbish, but the levels of traction control and the incredible steering feel meant it wasn’t long before everyone got meaningful slides in. Holding it and making circles was something only a few of us managed, with the Drift Meter further confusing us all. Still, the table alongside tells the story, and while it will start a new war in the office, it was surely worth it.

Off-sites like these might seem like another day at work, but if the point is to relax and rejuvenate, no beach resort will ever come close to smoking some tyres.

M-ployee

Drift angle

Drift distance

Goal time

Slalom time

Sergius

23.4deg

233 metres

9.96 seconds

18.88 seconds

Hormazd

30deg

248 metres

16.28 seconds

22.85 seconds

Lenny

25.5deg

241 metres

31.34 seconds

17.68 seconds

Nikhil

36.4deg

34 metres

30.85 seconds

17.39 seconds

Soham

28.5deg

161 metres

24.51 seconds

18.51 seconds

Shapur

28.7deg

186 metres

31.31 seconds

17.6 seconds

Gavin

34deg

337 metres

18.93 seconds

18.66 seconds

Jay

27.3deg

129 metres

17.38 seconds

18.03 seconds

Rahul

26.5deg

128 metres

7.4 seconds

17.89 seconds

Saumil

39deg

341 metres

19.91 seconds

22.96 seconds

रिकवरी के बावजूद Sensex 374 प्वाइंट्स कमजोर, Nifty 23914 पर बंद, डूबे निवेशकों के ₹2.69 लाख करोड़

Share Market Crash: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर युद्ध की आंच तेज हुई तो कच्चा तेल उबल पड़ा और इन दोनों ने मिलकर दुनिया भर में कोहराम मचा दिया। घरेलू स्टॉक मार्केट में सेंसेक्स 800 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी टूटकर 23800 के नीचे आ गया और निचले स्तर पर रिकवरी के बावजूद यह गहरे लाल बंद हुआ। ब्रोडर लेवल पर भी रिकवरी हल्की ही रही और शुरुआती कारोबार में 1% की गिरावट से हल्की रिकवरी के साथ निफ्टी मिडकैप 100 आज 0.53% तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 भी 0.37% की गिरावट के साथ बंद हुआ।

सेक्टरवाइज आईटी और आईटी सेक्टर ने मार्केट पर ऐसा दबाव बनाया कि यह संभल ही नहीं पाया। निफ्टी ऑटो डेढ़ फीसदी से अधिक और निफ्टी आईटी 1% से अधिक कमजोर हुआ। सरकारी बैंकों ने रिकवरी तो कर ली लेकिन इसके निफ्टी इंडेक्स में बढ़त मामूली रही तो दूसरी तरफ प्राइवेट बैंकों के निफ्टी इंडेक्स में आधे फीसदी से अधिक की गिरावट आई। बिकवाली के इस दबाव में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक गिर गया।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज 02 सितंबर को सेंसेक्स (Sensex) 373.93 प्वाइंट्स यानी 0.49% की फिसलन के साथ 76,570.35 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 141.35 प्वाइंट्स यानी 0.59% की कमजोरी के साथ 23,914.45 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 808.56 प्वाइंट्स टूटकर 76,135.72 और निफ्टी 269.00 प्वाइंट्स गिरकर 23,786.80 पर आ गया।

निवेशकों के ₹2.69 लाख करोड़ स्वाहा

एक कारोबारी दिन पहले यानी 01 सितंबर 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,89,41,989.64 करोड़ था। आज यानी 02 सितंबर 2026 को यह घटकर ₹4,86,72,129.50 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹269,860.14 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex के 10 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें 10 आज ग्रीन रहे। दिन के आखिरी में आज अदाणी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व और पावरग्रिड सबसे अधिक बढ़त के साथ बंद हुए तो दूसरी तरफ एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक और एमएंडएम में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Sensex और Nifty, लगातार दूसरे दिन इंट्रा-डे के निचले स्तर पर बंद, ₹3.69 लाख करोड़ स्वाहा

Sensex-Nifty closes red: अधिकतर एशियाई बाजारों से कमजोर संकेतों के बीच घरेलू स्टॉक मार्केट में शुरुआती कारोबार की अधिकतर रौनक गायब हो गई। लगातार दूसरे कारोबारी दिन आज सेंसेक्स और निफ्टी इंट्रा-डे के निचले स्तर पर बंद हुए हैं। सेंसेक्स डे-हाई से आज 761 प्वाइंट्स नीचे आ गया तो निफ्टी भी फिसलकर 20100 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का दबाव दिखा और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 लाल बंद हुए।

सेक्टरवाइज मार्केट को आज सरकारी बैंकों और मेटल कंपनियों ने तोड़ दिया, जिनके निफ्टी इंडेक्स करीब 1-1% टूट गए। निफ्टी ऑटो और निफ्टी आईटी में भी आधे फीसदी से थोड़ी कम गिरावट रही। निफ्टी फार्मा ने मार्केट को संभालने की काफी कोशिश की और इसका निफ्टी इंडेक्स आधे फीसदी से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुआ है। बिकवाली के इस माहौल में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक गिर गया।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज 27 अगस्त को सेंसेक्स की मंथली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स (Sensex) 539.35 प्वाइंट्स यानी 0.70% की गिरावट के साथ 76,933.59 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 116.90 प्वाइंट्स यानी 0.48% की फिसलन के साथ 24,090.85 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 330.75 प्वाइंट्स चढ़कर 77,986.84 तक पहुंचा था जिससे यह फिर 761.38 प्वाइंट्स गिरकर 76,933.59 तक आ गया तो दूसरी तरफ निफ्टी भी 44.05 प्वाइंट्स उछलकर 24,378.60 तक पहुंचा था जिससे यह 106.60 प्वाइंट्स टूटकर 24,090.85 तक आ गया और इन्हीं पर बंद हुआ।

निवेशकों के ₹3.69 लाख करोड़ स्वाहा

एक कारोबारी दिन पहले यानी 26 अगस्त 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,95,23,276.02 करोड़ था। आज यानी 27 अगस्त 2026 को यह घटकर ₹4,91,54,107.21 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹3,69,168.81 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex के सिर्फ 6 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें सिर्फ 6 ही आज ग्रीन रहे। दिन के आखिरी में आज कोटक बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और टेक महिंद्रा सबसे अधिक बढ़त के साथ बंद हुए तो दूसरी तरफ इंफोसिस, एयरटेल और एलएंडटी में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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157 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4526 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 1824 शेयर आज मजबूत हुए तो 2491 में गिरावट रही जबकि 211 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 157 शेयर एक साल के हाई और 80 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 8 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 44 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

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इन चार वजहों से आज मार्केट में कोहराम

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

सुनील सिंघानिया ने इन 2 शेयरों से निकाला पूरा पैसा, इस नए स्टॉक में लगाई बड़ी बाजी; चेक करें पूरी लिस्ट

Sunil Singhania Abakkus MF Changes: दिग्गज निवेशक सुनील सिंघानिया के अबक्कस म्यूचुअल फंड ने जुलाई महीने में अपने पोर्टफोलियो में बड़ा फेरबदल किया है। फंड हाउस की दो प्रमुख इक्विटी स्कीम अबक्कस फ्लेक्सीकैप फंड और अबक्कस स्मॉल कैप फंड से सरकारी बैंक ‘बैंक ऑफ बड़ौदा’ को पूरी तरह बेच दिया है।

इसके अलावा, स्मॉल कैप फंड ने आईटी कंपनी Cyient से भी एग्जिट कर लिया है, जबकि आईजीआई (IGI) जैसे शेयरों में नई हिस्सेदारी खरीदी है। आइए जानते हैं जुलाई के महीने में सुनील सिंघानिया के फंड हाउस ने किन शेयरों में बिकवाली की और किन दिग्गजों पर भरोसा बढ़ाया है।

IGI में नई एंट्री, HDFC Bank और SBI पर बढ़ाया दांव

₹6,338 करोड़ के एसेट साइज वाले अबक्कस फ्लेक्सीकैप फंड ने जुलाई में अपने पोर्टफोलियो के 34 शेयरों में हिस्सेदारी बढ़ाई और 3 में घटाई। महीने के अंत तक इसके पोर्टफोलियो में कुल 45 शेयर थे।

फंड ने IGI में 0.6% हिस्सेदारी के साथ नई पोजीशन ली, जबकि जून में 2.7% वेटेज वाले Bank of Baroda को पूरी तरह से बेचकर एग्जिट कर लिया।

फंड ने HDFC Bank (4% से बढ़ाकर 4.72%), SBI (3.6% से 3.89%), L&T (1.5% से 3.2%), वेदांता एल्युमीनियम (2% से 2.65%) और M&M (2.6% से 2.84%) में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है।

टॉप-5 होल्डिंग्स: ICICI Bank (5.55%) फंड की सबसे बड़ी होल्डिंग है। इसके बाद HDFC Bank (4.72%), SBI (3.89%), रिलायंस इंडस्ट्रीज (3.10%) और डिविस लैबोरेटरीज (2.95%) का नंबर आता है।

सेक्टर आवंटन: बैंकिंग सेक्टर 17% हिस्सेदारी के साथ सबसे ऊपर है, जिसके बाद फार्मा (7.7%) और कैपिटल मार्केट्स (5.2%) हैं।

अबक्कस स्मॉल कैप फंड: Cyient से एग्जिट, BEML और मिसेज बेक्टर्स की एंट्री

₹2,113 करोड़ के अवाकस स्मॉल कैप फंड में जुलाई में जबरदस्त हलचल देखी गई। फंड ने 56 शेयरों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई और महीने के अंत में कुल 62 शेयरों का पोर्टफोलियो मेंटेन किया।

नए शेयर शामिल किए: फंड ने BEML (1.5%), मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशलिटीज (1%) और इंडो-MIM (0.4%) को अपने पोर्टफोलियो में जगह दी।

इन दो शेयरों से पूरी तरह बाहर: स्मॉल कैप फंड ने Bank of Baroda (जून में 1.1% वेटेज) और Cyient (जून में 1.3% वेटेज) को पूरी तरह बेच दिया।

इनमें बढ़ाया निवेश: कॉनकॉर, किर्लोस्कर ऑयल इंजन, लीला पैलेसेस, एलेम्बिक फार्मा, पीजी इलेक्ट्रोप्लास्ट, तानला प्लेटफॉर्म्स और आईजीआई में एक्सपोजर बढ़ाया गया।

टॉप होल्डिंग्स: डॉ लाल पाथलैब्स (1.80%) और वेल्सपन कॉर्प (1.80%) फंड की सबसे बड़ी होल्डिंग्स हैं, जिसके बाद कैम्स (1.79%), आईजीआई (1.76%) और करूर वैश्य बैंक (1.74%) का स्थान है।

दोनों फंड्स का शानदार प्रदर्शन: बेंचमार्क इंडेक्स को पछाड़ा

सुनील सिंघानिया के इन दोनों फंड्स ने जुलाई महीने और बीते कुछ महीनों में अपने संबंधित बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले बेहतरीन रिटर्न दिया है:

दोनों फंड्स का शानदार प्रदर्शन: बेंचमार्क इंडेक्स को पछाड़ा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।