Gold Rate Today: सोने की गिरावट पर ब्रेक, 24 और 22 कैरेट दोनों के चढ़े भाव; चेक करें नई कीमत

देश में सोने की कीमत में गिरावट थम गई है। 27 जून की सुबह ज्यादातर शहरों में भाव बढ़ा है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत बढ़कर 142960 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। मुंबई में भाव 142760 रुपये प्रति 10 ग्राम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भाव 4000 डॉलर के मार्क को फिर से पार कर गया है। हाजिर सोना अब 4,077.64 डॉलर प्रति औंस पर है।

दरअसल अमेरिका में महंगाई पर अपडेट सामने आने के बाद डॉलर कमजोर हुआ। साथ ही अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें थोड़ी कम हुईं। अमेरिका में मई तक के 12 महीनों में U.S. पर्सनल कंजंप्शन एक्सपेंडिचर्स प्राइस इंडेक्स 4.1 प्रतिशत बढ़ गया।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 142960 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 131060 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 130860 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 142760 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 145100 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 133010 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 142760 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 130860 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली131060142960
मुंबई130860142760
अहमदाबाद130960142860
चेन्नई133010145100
कोलकाता130860142760
हैदराबाद130860142760
जयपुर131060142960
भोपाल130960142860
लखनऊ131060142960
चंडीगढ़131060142960

चांदी की कीमत

सोने की तरह दूसरी कीमती धातु चांदी में भी तेजी आई है। 27 जून की सुबह कीमत बढ़कर 240100 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 59.12 डॉलर प्रति औंस पर है।

2026 F1 Austrian GP schedule, India timings

F1 Austrian GP schedule

Formula 1 heads to Austria’s Red Bull Ring for Round 8 of the 2026 world championship. Fresh off Lewis Hamilton’s breakthrough win at Barcelona, will Ferrari keep the momentum going at Austria Or will Mercedes bounce back?

Red Bull Ring will also host Formula 2 this weekend, and that’s not all. The MotoGP title battle continues at Assen, and there’s also the 24 Hours of Spa featuring two Indian drivers – Arjun Maini and Sai Sanjay – on the grid. Here’s our ultimate guide for when and where to tune in from India. 

F1 Austrian GP schedule

F1 Austrian GP schedule IST

Lewis Hamilton scored a breakthrough win for Ferrari at the Barcelona GP, where the team brought some significant car upgrades. Ferrari has now confirmed that it will be introducing a power unit upgrade at the Austrian GP this weekend, as part of its ADUO (Additional Development and Upgrade Opportunities) allowance. The spotlight is also on championship leader Mercedes, following recent reliability concerns for both, the factory team as well as customer team McLaren.

Despite retiring at Barcelona, Kimi Antonelli still holds the overall lead, 41 points ahead of Hamilton and 50 points ahead of his Mercedes teammate George Russell.

With temperatures predicted to soar above 30°C across all three days at the Red Bull Ring, the FIA has declared a heat hazard for the Austrian GP. While it isn’t mandatory for drivers to wear a cooling vest, those who elect to not use one will need to carry a 0.5kg ballast in the car.

F1 Austrian GP: Where to watch?

All F1 Austrian GP sessions will be streamed live on the FanCode and F1 TV apps.

2026 F1 Austrian GP schedule IST

Date

Day

Session

Time

June 26

Friday

FP1

5pm

June 26

Friday

FP2

8:30pm

June 27

Saturday

FP3

4pm

June 27

Saturday

Qualifying

7:30pm

June 28

Sunday

Race 

6:30pm

MotoGP Dutch GP schedule

MotoGP Assen schedule IST

The Dutch GP has already delivered plenty of headlines before the bikes even hit the track. Francesco Bagnaia has confirmed that he’ll be moving from Ducati to Aprilia next year, as part of a four-year deal. Ducati, meanwhile, has signed current KTM rider Pedro Acosta alongside Marc Marquez.

Marquez comes to Assen with two back-to-back wins under his belt, firmly putting him back into championship contention. While he’s fourth in the standings, he’s only 40 points behind current championship leader Marco Bezzecchi.  

Two big changes come into force this weekend as well to improve safety at race starts. Holeshot devices (used at the race start to lower the bike) have now been banned from Assen onwards. The distance between each rider on the grid will also increase from three metres to four metres. 

MotoGP Dutch GP: Where to watch?

All MotoGP Dutch GP sessions will be streamed live on FanCode. Fans in India can also catch the live TV broadcast on Eurosport.

2026 MotoGP Dutch GP schedule IST

Date

Day

Session

Time

June 26

Friday

FP1

2:15pm

June 26

Friday

Practice

6:30pm

June 27

Saturday

FP2

1:40pm

June 27

Saturday

Qualifying

2:20pm

June 27

Saturday

Sprint

6:30pm

June 28

Sunday

Race

5:30pm

F2 Austrian GP schedule

F2 Austrian GP schedule IST

After a strong showing last time out at Barcelona, including taking victory in the Sprint Race, Kush Maini has moved up to ninth place in the F2 standings. He’ll be looking to carry forward that momentum at the Red Bull Ring.

Gabriele Mini currently leads the championship, with a six-point advantage over Nikola Tsolov. 

F2 Austrian GP: Where to watch?

All F2 Austrian GP sessions will be streamed live on the FanCode and F1 TV apps.

2026 F2 Austrian GP schedule IST

Date

Day

Session

Time

June 26

Friday

Practice

2:35pm

June 26

Friday

Qualifying

7:25pm

June 27

Saturday

Sprint Race

5:45pm

June 28

Sunday

Feature Race 

3:05pm

24 Hours of Spa schedule

24 Hours of Spa schedule IST

This iconic Spa-Francorchamps circuit will host the CrowdStrike 24 Hours of Spa race this weekend. The endurance race features only GT3 race cars, with competition divided into five categories – Pro, Gold Cup, Silver Cup, Bronze Cup and Pro-Am. 

69 cars will line up on this year’s grid, which will also feature two Indian drivers. Arjun Maini will be driving a Ford Mustang GT3 EVO for HRT Ford Racing in the headlining Pro category, while Sai Sanjay will compete in the Silver category behind the wheel of a McLaren 720S GT3 EVO for team CSA Racing.

24 Hours of Spa: Where to watch?

All 24 Hours of Spa sessions will be streamed live for free on the GTWorld YouTube channel.

24 Hours of Spa schedule IST

Date

Day

Session

Time

June 26

Friday

Superpole

6:35pm

June 27

Saturday

Race

8pm

प्रॉपर्टी या म्यूचुअल फंड, लंबे समय में कौन आपको बनाएगा ज्यादा अमीर? 4 पॉइंट्स में समझिए कहां मिलेगा बंपर रिटर्न

Real Estate vs Mutual Funds: लॉंग टर्म के लिए निवेश कैसे करें? जमीन खरीदे या फिर म्यूचुअल फंड में पैसे लगाए। भारत के निवेशकों के बीच लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन के लिए सालों से यह बहस चली आ रही है। वैसे दशकों तक हमारे देश में प्रॉपर्टी यानी जमीन या मकान खरीदना ही अमीर बनने और सुरक्षित भविष्य का सबसे भरोसेमंद जरिया माना जाता था। लेकिन पिछले कुछ सालों में म्यूचुअल फंड्स एक बेहद जबरदस्त ऑप्शन के तौर पर उभरे हैं।

प्रॉपर्टी और म्यूचुअल फंड, दोनों ने ही निवेशकों को अमीर बनाया है। लेकिन जब बात लंबे समय के लिए निवेश की हो, तो आपके लिए कौन सा विकल्प सबसे बेहतर रहेगा? आइए समझते हैं दोनों का पूरा नफा-नुकसान।

1- रियल एस्टेट: क्यों आज भी प्रॉपर्टी पर फिदा हैं लोग?

रियल एस्टेट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह एक ‘टैंजिबल एसेट’ है, यानी इसे आप देख सकते हैं, छू सकते हैं और खुद इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इसके अन्य बड़े फायदे इस प्रकार हैं:

किराए से रेगुलर इनकम: प्रॉपर्टी से आपको हर महीने रेंटल इनकम मिल सकती है, जो महंगाई के साथ बढ़ती जाती है।

बड़ी ग्रोथ की संभावना: अगर किसी इलाके में नया हाईवे, मेट्रो या कोई बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट आ रहा है, तो वहां की जमीन के दाम रातों-रात आसमान छू सकते हैं।

छिपी हुई लागत: प्रॉपर्टी खरीदते समय लोग अक्सर इसके अतिरिक्त खर्चों को भूल जाते हैं। स्टैंप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन चार्ज, सालाना प्रॉपर्टी टैक्स और मेंटेनेंस का खर्च आपके कुल मुनाफे को काफी कम कर देता है। इसके अलावा, अगर होम लोन लिया है, तो ब्याज का भारी बोझ भी जोड़ना पड़ता है।

2- लिक्विडिटी: सबसे बड़ा और मुख्य अंतर

रियल एस्टेट और म्यूचुअल फंड के बीच सबसे बड़ा फर्क पैसे की जरूरत पड़ने पर दिखता है। प्रॉपर्टी को तुरंत बेचना नामुमकिन होता है। एक सही खरीदार ढूंढने, डील पक्की करने और कागजी कार्रवाई पूरी करने में हफ्तों या महीनों का समय लग जाता है। मंदी के दौर में तो यह इंतजार और लंबा हो सकता है।

Gold Price Crash: रिकॉर्ड हाई से 29% टूटा सोना, अभी खरीदना सही या फिर करें और इंतजार? एक्सपर्ट ने ये बताया

म्यूचुअल फंड्स में लिक्विडिटी का कोई झंझट नहीं होता। आप जब चाहें अपने फंड्स को ऑनलाइन रिडीम कर सकते हैं और कुछ ही दिनों में पैसा सीधे आपके बैंक खाते में आ जाता है।

3- म्यूचुअल फंड्स क्यों बन रहे हैं आम लोगों की पहली पसंद?

म्यूचुअल फंड्स ने निवेश की पूरी प्रक्रिया को बहुत आसान और सुलभ बना दिया है। जहां प्रॉपर्टी खरीदने के लिए आपको एक साथ लाखों-करोड़ों रुपयों का इंतजाम करना पड़ता है या बड़ा लोन लेना पड़ता है, वहीं म्यूचुअल फंड में आप SIP के जरिए हर महीने महज ₹500 जैसी छोटी रकम से भी शुरुआत कर सकते हैं।

प्रॉपर्टी में निवेश करते समय आपका पूरा पैसा एक ही जगह ब्लॉक हो जाता है। इसके विपरीत, म्यूचुअल फंड आपका पैसा अलग-अलग कंपनियों और सेक्टर्स में लगाते हैं। इस डायवर्सिफिकेशन से रिस्क काफी कम हो जाता है।

4- वेल्थ क्रिएशन का ट्रैक रिकॉर्ड: कहां हुई ज्यादा कमाई?

इसका कोई एक तय जवाब नहीं है क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने क्या और कब खरीदा है।

रियल एस्टेट का गणित: एक बेहतरीन लोकेशन पर ली गई प्रॉपर्टी आपको रेंटल और कैपिटल एप्रिसिएशन यानी कीमत बढ़ना दोनों से तगड़ा रिटर्न दे सकती है। लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि भारी उम्मीदों के बावजूद किसी इलाके में प्रॉपर्टी के दाम सालों तक एक ही जगह थमे रहते हैं।

म्यूचुअल फंड का गणित: शेयर बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव का असर म्यूचुअल फंड पर जरूर पड़ता है। लेकिन जो निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव की परवाह किए बिना अपनी एसआईपी जारी रखते हैं, उन्हें लंबे समय में कंपाउंडिंग यानी ब्याज पर ब्याज का जबरदस्त फायदा मिलता है, जो वेल्थ को कई गुना बढ़ा देता है।

आपके लिए क्या हो सकता है बेस्ट?

अक्सर लोग सोचते हैं कि रियल एस्टेट या म्यूचुअल फंड में से किसी एक को ही चुनना होगा। लेकिन असलियत में कई सफल निवेशक दोनों में पैसा लगाते हैं। प्रॉपर्टी जहां आपके पोर्टफोलियो को स्थिरता और रेंटल इनकम देती है, वहीं म्यूचुअल फंड आपको लिक्विडिटी, डायवर्सिफिकेशन और तेजी से बढ़ने का मौका देते हैं।

निवेश करने से पहले यह न पूछें कि कौन सा एसेट क्लास बेहतर है, बल्कि यह देखें कि आपके वित्तीय लक्ष्य, आपकी जेब और आपकी जरूरत के हिसाब से आपके लिए कौन सा विकल्प सही बैठता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Price Crash: रिकॉर्ड हाई से 29% टूटा सोना, अभी खरीदना सही या फिर करें और इंतजार? एक्सपर्ट ने ये बताया

Gold Price Fall: ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेतों और मजबूत होते डॉलर के कारण शुक्रवार, 26 जून को सोने की कीमतें लगातार चौथे हफ्ते गिरावट की राह पर रहीं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना इस समय $4000 प्रति औंस के लेवल के आस पास संघर्ष कर रहा है। बुधवार को यह नवंबर 2025 के बाद पहली बार $4000 के स्तर से नीचे भी फिसल गया था। अगर आप भी सोने या चांदी में निवेश करते हैं, तो ग्लोबल मार्केट का यह पूरा गणित आपके लिए समझना बेहद जरूरी है।

लगातार चौथे हफ्ते टूटा सोना

शुक्रवार को हाजिर सोना 0.6% गिरकर $4002.77 प्रति औंस पर आ गया। वहीं, अगस्त डिलीवरी वाला अमेरिकी सोना वायदा भी 0.7% की गिरावट के साथ $4017.30 पर ट्रेड कर रहा था। इस पूरे हफ्ते की बात करें तो सोने ने करीब 3.8% की भारी गिरावट दर्ज की है।

रिकॉर्ड हाई से 29% की भारी गिरावट

इस साल 29 जनवरी को अमेरिका-इरान युद्ध के कारण बढ़ी वैश्विक महंगाई के चलते सोने ने $5594.82 प्रति औंस का ऑल-टाइम हाई रिकॉर्ड बनाया था। लेकिन उसके बाद से अब तक सोने की कीमतों में करीब 29% की बड़ी करेक्शन आ चुकी है।

OANDA के सीनियर मार्केट एनालिस्ट केल्विन वोंग का मानना है कि सोने में चल रहा यह गिरावट का दौर अभी और लंबा खिंच सकता है और लंबी अवधि में सोना फिसलकर $3400 के स्तर तक भी जा सकता है। यानी मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आने वाले दिनों में सोने की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

क्यों आ रही है सोने की कीमतों में गिरावट?

सोने के दाम गिरने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण काम कर रहे हैं:

1. मजबूत अमेरिकी डॉलर: फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण अमेरिकी डॉलर इंडेक्स मई 2025 के बाद से अपने सबसे मजबूत स्तर के करीब बना हुआ है। डॉलर लगातार दूसरे हफ्ते बढ़त की ओर है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं जैसे- भारतीय रुपया में सोना खरीदना काफी महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग घटती है।

2. अमेरिका में बढ़ती महंगाई और ब्याज दरें: गुरुवार को आए आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में खुदरा महंगाई मई महीने में 4% के पार निकल गई है, जो पिछले तीन सालों में सबसे ज्यादा है। आमतौर पर सोने को महंगाई के खिलाफ एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन जब महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरें बढ़ाई जाती हैं, तो सोने की चमक फीकी पड़ जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि सोने पर कोई ब्याज या यील्ड नहीं मिलता।

ट्रेडर्स को उम्मीद है कि अमेरिकी फेड इस साल तीन बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है, जिसमें सितंबर में रेट हाईक होने की संभावना 64% तक जताई जा रही है।

चांदी, प्लेटिनम और पैलेडियम का भी बुरा हाल

सोने के साथ-साथ अन्य कीमती धातुओं के लिए भी यह हफ्ता बेहद निराशाजनक रहा:

हाजिर चांदी: 2.6% टूटकर $56.39 प्रति औंस पर आ गई।

प्लेटिनम: 2% की गिरावट के साथ $1568.55 पर आ गया।

पैलेडियम: 0.6% फिसलकर $1177.12 पर ट्रेड कर रहा था।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

1 जुलाई से बदल जाएंगे ये 5 बड़े नियम; सैलरी, टैक्स, PF और क्रेडिट कार्ड यूजर्स पर पड़ेगा असर

जुलाई 2026 से कई बड़े वित्तीय बदलाव होने जा रहे हैं। इनका असर नौकरीपेशा लोगों, टैक्सपेयर्स, पेंशनर्स और क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों पर पड़ेगा।

इनमें EPFO की UPI से PF निकासी, ITR फाइलिंग की डेडलाइन, महंगाई भत्ता (DA) और क्रेडिट कार्ड के नए नियम शामिल हैं। अगर समय रहते इन बदलावों की जानकारी नहीं होगी, तो टैक्स फाइलिंग, बैंकिंग और दूसरे वित्तीय कामों में परेशानी हो सकती है।

ITR फाइल करने की डेडलाइन का रखें ध्यान

जुलाई में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने वालों के लिए सबसे जरूरी काम रिटर्न दाखिल करना है। ITR-1 और ITR-2 भरने वाले टैक्सपेयर्स के लिए वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) का रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है।

वहीं, ITR-3 और ITR-4 भरने वाले ऐसे टैक्सपेयर्स, जिनका टैक्स ऑडिट नहीं होता, वे 31 अगस्त 2026 तक रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। अगर तय समय तक ITR नहीं भरा गया, तो जुर्माना लग सकता है। कुछ टैक्स बेनिफिट्स भी नहीं मिलेंगे। साथ ही कुछ तरह के नुकसान (Loss) को अगले साल कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा भी नहीं मिलेगा।

UPI से PF निकालना हो सकता है आसान

जुलाई में EPFO 3.0 प्लेटफॉर्म लॉन्च होने की उम्मीद है। इसका मकसद EPFO की डिजिटल सेवाओं को पहले से ज्यादा आसान बनाना है।

नए सिस्टम के तहत EPF खाताधारकों को UPI के जरिए तुरंत PF निकालने की सुविधा मिल सकती है। अगर ऐसा होता है, तो PF निकालने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले काफी तेज और आसान हो जाएगी।

DA बढ़ने का इंतजार

जुलाई में लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर महंगाई भत्ते (DA) पर भी रहेगी। सरकार हर साल जनवरी और जुलाई में DA की समीक्षा करती है।

इसलिए इस बार भी जुलाई में DA में बढ़ोतरी की घोषणा का इंतजार रहेगा। इसका फायदा केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनर्स और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को मिल सकता है।

HDFC Bank क्रेडिट कार्ड के नियम

HDFC Bank ने अपने Regalia Gold और Diners Club Privilege क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। रिवॉर्ड पॉइंट्स से जुड़े कुछ बदलाव पहले ही लागू हो चुके हैं। अब 1 जुलाई 2026 से एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस के नए नियम लागू होंगे।

नए नियम के मुताबिक, Regalia Gold कार्डधारकों को मुफ्त घरेलू एयरपोर्ट लाउंज की सुविधा पाने के लिए पिछली तिमाही में कम से कम ₹60,000 खर्च करना होगा।

SBI Card में भी बदलेंगे नियम

SBI Card ने भी PhonePe SBI Card Purple और PhonePe SBI Card Select Black के नियमों में बदलाव किया है। नए नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे। इसके बाद हर महीने मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स की अधिकतम सीमा तय कर दी जाएगी।

बीमा प्रीमियम पर होने वाले खर्च और दूसरी कैटेगरी के खर्च के लिए अलग-अलग लिमिट होगी। इसके अलावा ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर मिलने वाले अधिकतम रिवॉर्ड पॉइंट्स भी पहले के मुकाबले कम कर दिए गए हैं।

Antyodaya Anna Yojana: अब प्रति व्यक्ति 7 किलो मिलेगा अनाज! ‘अंत्योदय अन्न योजना’ में बड़े बदलाव की तैयारी, जानें- नए नियम

Gold Silver Ratio: सोने के मुकाबले और ज्यादा गिर सकती है चांदी, चार्ट दे रहा बड़े संकेत; जानिए अब क्या करें निवेशक

Gold Silver Ratio: जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद से चांदी की कीमत में करीब 50% की गिरावट आ चुकी है। सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि सोने के मुकाबले भी चांदी एक-तिहाई से ज्यादा कमजोर हो गई है। अब टेक्निकल चार्ट इशारा कर रहे हैं कि यह गिरावट अभी थमने वाली नहीं है। ऐसे में सोने के मुकाबले चांदी और कमजोर पड़ सकती है।

जनवरी के बाद क्यों बदला माहौल?

रॉयटर्स के मुताबिक, 30 जनवरी के बाद से सोना और चांदी दोनों में दबाव बढ़ने लगा। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि बाजार को लगने लगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अब ब्याज दरों में कटौती करने के मूड में नहीं है। इसके उलट, अगर महंगाई बढ़ती रही तो ब्याज दरें बढ़ाने की नौबत भी आ सकती है।

इस बीच ईरान युद्ध के बाद महंगाई को लेकर चिंताएं और बढ़ गईं। इससे निवेशकों ने ब्याज दरों को लेकर अपने अनुमान बदलने शुरू कर दिए और कीमती धातुओं में बिकवाली तेज हो गई।

चांदी पर ज्यादा दबाव क्यों आया?

सोने की तुलना में चांदी पर असर ज्यादा पड़ा। इसकी वजह सिर्फ निवेशकों की बिकवाली नहीं है। दरअसल, चांदी केवल एक कीमती धातु नहीं, बल्कि औद्योगिक धातु भी है। इसका इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और कई उद्योगों में होता है।

इसलिए जब अर्थव्यवस्था या निवेशकों के जोखिम लेने के रुख को लेकर चिंता बढ़ती है तो चांदी पर दबाव भी ज्यादा आता है। एक वजह यह भी रही कि इससे पहले चांदी में सोने के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी आई थी। ऐसे में मुनाफावसूली शुरू होने पर इसमें गिरावट भी ज्यादा देखने को मिली।

टेक्निकल चार्ट क्या कह रहा है?

एनालिस्टों के मुताबिक, गोल्ड टु सिल्वर रेशियो यानी सोने और चांदी के भाव का अनुपात लगातार ऊपर जा रहा है। हाल ही में यह 200-डे मूविंग एवरेज (66.76) के ऊपर निकल गया है।

टेक्निकल एनालिसिस में 200-डे मूविंग एवरेज को लंबे समय के ट्रेंड का अहम पैमाना माना जाता है। किसी भी एसेट का इसके ऊपर या नीचे जाना अक्सर बाजार की दिशा का बड़ा संकेत देता है।

अब 70 के स्तर पर रहेगी नजर

अब इस अनुपात का अगला बड़ा लक्ष्य 70 माना जा रहा है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बाजार के लिए महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर भी है। ट्रेडर्स अक्सर ऐसे गोल आंकड़ों पर खास नजर रखते हैं।

अगर गोल्ड टु सिल्वर रेशियो मजबूती से 70 के ऊपर निकल जाता है, तो इसके बाद 6 फरवरी के 72.74 के स्तर तक पहुंचने की संभावना बढ़ जाएगी। इसके बाद अगला लक्ष्य 75.25 हो सकता है। यह अप्रैल 2025 के बाद सोने के मुकाबले चांदी की गिरावट के दायरे का लगभग आधा स्तर है।

अगर चांदी वापसी करती है तो क्या होगा?

हालांकि, चांदी के लिए उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अगर चांदी में फिर से खरीदारी लौटती है, तो सबसे पहले गोल्ड टु सिल्वर रेशियो को 200-डे मूविंग एवरेज (66.76) के नीचे आना होगा। इसके बाद यह 22 जून के 62.68 के स्तर तक फिसल सकता है।

अगर यह अनुपात 60.56 से भी नीचे चला जाता है, तो इसे चांदी के पक्ष में मजबूत संकेत माना जाएगा। ऐसे में बाजार में चांदी की तेजी को नई ताकत मिल सकती है।

निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब

अभी के संकेत बताते हैं कि निवेशकों का झुकाव चांदी की बजाय सोने की ओर ज्यादा है। जब तक गोल्ड टु सिल्वर रेशियो ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तब तक माना जाएगा कि सोना, चांदी से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

लेकिन अगर यह अनुपात नीचे आने लगता है, तो इसका मतलब होगा कि चांदी फिर से मजबूत होने लगी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उस वक्त चांदी में दोबारा खरीदारी दिख सकती है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

4% टूट गया Silver ETF, फीकी पड़ी Gold ETF की चमक, इस कारण फिसल रहा सोना-चांदी

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver rates Today: गोल्ड में गिरावट जारी, चांदी एक दिन में 5000 रुपये लुढ़की

सोने और चांदी में गिरावट का सिलसिला 25 जून को जारी रहा। दिल्ली सर्राफा बाजार में दोनों कीमती मेटल्स की कीमतों पर दबाव दिखा। सोना 2,800 रुपये गिरकर 1.45 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी में 5000 रुपये की गिरावट आई।

चांदी एक दिन में 5000 रुपये फिसली

चांदी में 24 जून को भी बड़ी गिरावट आई थी। आज यह 5000 रुपये गिराकर 2,26,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। विदेशी बाजारों में भी गोल्ड पर दबाव दिखा। लगातार तीसरे दिन गिरावट से सोना की कीमतें सात महीनों के निचले स्तर पर आ गई है।

विदेश में सोना 4000 डॉलर से नीचे आया

स्पॉट गोल्ड 0.5 फीसदी गिरकर 4000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। यूएस गोल्ड फ्यूचर्स में भी गिरावट दिखी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद और डॉलर में मजबूती की वजह से सोने में गिरावट आ रही है। अमेरिकी डॉलर 25 जून को 13 महीनों के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया।

इन दो वजहों से दबाव में आया 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका में इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी और डॉलर में मजबूती दोनों ही सोने के लिए खराब खबर हैं। डॉलर में मजबूती से दुनिया की दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। उधर, इंटरेस्ट रेट घटने के माहौल में सोने की चमक बढ़ती है। इसके उलट इंटरेस्ट बढ़ने के माहौल में सोने की चमक फीकी पड़ जाती है।

फेडरल की पॉलिसी के बाद बुलियन 6 फीसदी गिरे

पिछले हफ्ते अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की पॉलिसी आने के बाद से सोने और चांदी में 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। सोना नवंबर 2025 के बाद पहली बार 4000 डॉलर प्रति औंस के नीचे गया है। अगर इस साल की रिकॉर्ड ऊंचाई की बात की जाए तो सोना वहां से 28 फीसदी गिर चुका है। इस साल 29 जनवरी को सोना 5,594.82 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था, जो इसका सबसे हाई प्राइस है।

यह भी पढ़ें: सोना तो सोना है! टैक्स बढ़ने के बाद भी नहीं कम हो रही गोल्ड की चमक! सर्राफा बाजारों में उमड़ रही भारी भीड़

इस साल जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई से लगातर गिरा है सोना

इस साल ऊंचाई पर पहुंचने के बाद से सोने पर दबाव देखने को मिला है। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी में गिरावट देखने को मिली। उम्मीद थी कि दोनों देशों में डील होने के बाद बुलियन की चमक लौटेगी। लेकिन, अभी दोनों कीमती मेटल्स पर दबाव बना हुआ है।

सोना तो सोना है! टैक्स बढ़ने के बाद भी नहीं कम हो रही गोल्ड की चमक! सर्राफा बाजारों में उमड़ रही भारी भीड़

Gold Price Alert: आदित्य बिड़ला ग्रुप के ज्वैलरी ब्रांड ‘इंद्रिया’ (Indriya) के सीईओ संदीप कोहली ने सोने को लेकर एक बड़ी बात कही है। मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि गोल्ड पर कस्टम ड्यूटी बढ़ने के बाद मई महीने में बाजार थोड़ा सुस्त जरूर हुआ था, लेकिन अब ग्राहकों की डिमांड बहुत मजबूती से वापस लौट आई है।

संदीप कोहली ने कहा, ‘कस्टम ड्यूटी में 9 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद लोग नए भाव को समझने के लिए थोड़ा रुक गए थे। पूरे ज्वैलरी उद्योग में ग्राहकों की चहल-पहल थोड़ी धीमी हो गई थी, लेकिन पिछले दो हफ्तों में मांग बहुत तेजी से बढ़ी है।’

क्यों आई थी सुस्ती और अब क्यों लौट रही है रौनक?

सरकार ने मई महीने में सोने के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी को 6 फीसदी से सीधे बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था। सरकार का मकसद विदेशों से सोने की खरीद को कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाना था। इस 9% की सीधी बढ़ोतरी से अचानक सोना महंगा हो गया था।

वैसे कस्टम ड्यूटी बढ़ने के बाद अब सोने की कीमतों में आ रही हालिया गिरावट भी ग्राहकों को दोबारा शोरूम तक खींच रही है। दिल्ली में 22 कैरेट सोने का भाव ₹13244 प्रति ग्राम और मुंबई में ₹13229 प्रति ग्राम पर आ गया है, जिससे खरीदारों को राहत मिली है।

‘भारतीयों के लिए सोना सिर्फ निवेश नहीं, संस्कृति है’

जब उनसे पूछा गया कि क्या कीमतें बढ़ने से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की साख कम हुई है? तो कोहली ने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा, ‘भारत में ज्वैलरी की मांग कभी खत्म नहीं हो सकती क्योंकि यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है। कमोडिटी की कीमतें कैसी भी हों, ग्राहक दूसरे निवेशों के मुकाबले इसके रिटर्न का आकलन जरूर करते हैं, लेकिन मांग हमेशा बनी रहती है।’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब ग्राहक खास डिजाइन वाले गहने ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

तेजी से पैर पसार रहा है ‘इंद्रिया’ ब्रांड

साल 2024 में लॉन्च हुआ यह ब्रांड देश का सबसे तेजी से बढ़ता रिटेल ब्रांड बन गया है। फिलहाल 40 से ज्यादा शहरों में इसके 81 स्टोर्स हैं और फाइनेंशियल ईयर 2027 में कंपनी 40 नए स्टोर्स और खोलने की योजना बना रही है। कंपनी ने अपने स्टोर्स में ‘स्पार्कलस्कोप’ नाम की एक नई तकनीक लॉन्च की है। इसके जरिए ग्राहक खुद देख सकेंगे कि उनके हीरे में कितनी चमक है।

नेचुरल डायमंड पर है फोकस

भारत के ₹8,000 करोड़ के ज्वैलरी मार्केट में डायमंड-स्टडेड गहनों की हिस्सेदारी 11 फीसदी है, लेकिन ‘इंद्रिया’ के लिए यह हिस्सेदारी दोगुनी यानी 22 फीसदी है। आजकल बाजार में लैब में तैयार होने वाले हीरे का चलन बढ़ रहा है। जैसे कि टाटा ग्रुप के ‘टाइटैन’ ने पिछले साल दिसंबर में लैब-ग्रोन डायमंड कैटेगरी में कदम रखा है। लेकिन इसके उलट, ‘इंद्रिया’ पूरी तरह से नेचुरल हीरों पर ही फोकस कर रहा है।

संदीप कोहली का मानना है कि ग्राहकों के लिए हीरे की क्वालिटी (4Cs) के साथ-साथ उसकी चमक सबसे पहले मायने रखती है, और उनकी नई तकनीक इसी पर फोकस करती है।

650cc Bikes in India in 2026: RE Twins, Kawasaki, and More

650cc bikes in India including Royal Enfield Interceptor 650, Continental GT 650, Kawasaki Ninja 650 and BSA Gold Star 650

As the mid-capacity motorcycle space continues to evolve in India, the 650cc segment has grown into a highly competitive sweet spot. Moving up from the 300cc-400cc class brings a significant bump in performance, but the choices on offer vary drastically in engine architecture, styling, and intended usage. From simple, retro parallel-twins to fully faired sportbikes, the options available cater to very different riding requirements.

Here are five standout motorcycles in the 650cc segment, each bringing something different to the table for enthusiasts and everyday riders alike.

All prices are ex-showroom, Delhi.

Royal Enfield Interceptor 650

Price: Rs. 3.35 Lakh – Rs. 3.67 Lakh

The Interceptor 650 remains one of the most straightforward motorcycles in this segment. It is powered by Royal Enfield’s 648cc parallel-twin engine that produces 47hp, paired with a 6-speed gearbox. The engine’s strong mid-range and approachable nature have been key reasons behind the bike’s popularity.  It is offered in six colour options with chrome or blacked-out finishes and wire-spoke or alloy wheels, depending on the paint scheme you choose.

The Interceptor combines classic roadster proportions with a relaxed riding position, and its wide handlebars, as well as neutral ergonomics, make it equally comfortable in city traffic and on long highway rides. At 218kg kerb, it is not the lightest motorcycle here, but its predictable handling and friendly nature make it one of the easiest large-capacity motorcycles to live with. For more options from the brand, explore all Royal Enfield bikes in India.

Royal Enfield Continental GT 650

Price: Rs. 3.54 Lakh – Rs. 3.82 Lakh

The Continental GT 650 shares its mechanical foundation with the Interceptor 650 – the same 648cc, air/oil-cooled parallel twin making 47hp – but presents it in a very different package. This is a neo-retro cafe racer, and the ergonomics reflect that: the clip-on handlebars, rear-set footpegs, and the longer, lower stance place the rider in a more committed forward lean compared to the upright Interceptor. For buyers already considering the Interceptor 650, the Continental GT 650 is worth evaluating if a more sporty riding position appeals.

Kawasaki Ninja 650

Price: Rs 7.91 Lakh

The Ninja 650 is the most performance-oriented motorcycle on this list by a considerable margin. It is powered by a 649cc, liquid-cooled, parallel-twin engine producing 68hp – figures that put it in a different performance bracket compared to everything else here. The motor is paired with a 6-speed gearbox, and the bike has a claimed top speed of 210kph.

It is available in a single variant and one colour – Lime Green. At 196kg, it is substantially lighter than the retro roadsters in this displacement bracket, giving it a much higher power-to-weight ratio. Looking for more performance-focused motorcycles? Discover all Kawasaki bikes in India.

BSA Gold Star 650

Price: Rs 3.35 Lakh – Rs 3.60 Lakh

The Gold Star 650 is the most affordable motorcycle on this list and arguably the most distinctive. Unlike every other bike here, it uses a 652cc, liquid-cooled, single-cylinder engine – a configuration chosen deliberately to evoke the BSA Gold Stars of the 1950s and 60s, when large singles dominated the British motorcycle landscape. The motor produces 45hp, which arrives at a notably low point in the rev range, giving the bike a relaxed, torque-led character well suited to unhurried riding.

At 213kg, it is heavy for a single, and the weight does make itself felt at low speeds and in tight spaces. The seat height of 782mm is reasonably low and will suit a wide range of riders. Equipment includes dual-channel ABS, a slipper clutch, USB Type-A and Type-C charging ports, strong Brembo brakes and Pirelli Phantom tyres. The instrumentation is a dual-pod analogue setup with small LCD displays – appropriately retro in its presentation, although reading the information displayed on the digital insets can be tough. For more options from the brand, explore all BSA bikes in India.

अब गोल्ड इंपोर्ट का झंझट होगा कम! भारत की पहली प्राइवेट गोल्ड माइन चालू, अब जमीन से निकलेगा टन भर सोना

India’s First Private Gold Mine: भारतीय माइनिंग सेक्टर में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। आजादी के बाद देश में पहली बार किसी निजी कंपनी के स्वामित्व वाली सोने की खदान में कमर्शियल यानी व्यावसायिक कामकाज पूरी तरह शुरू हो गया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कुरनूल जिले के जोंनागिरी में इस महत्वाकांक्षी गोल्ड माइनिंग और प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट का औपचारिक उद्घाटन किया।

इस खास मौके पर मुख्यमंत्री ने न सिर्फ पहली यूनिट की शुरुआत की, बल्कि इस प्रोजेक्ट के दूसरे फेज की आधारशिला भी रखी। इस खदान के शुरू होने से आंध्र प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा और यहां से सालाना कितना सोना निकलेगा, आइए इसकी पूरी डिटेल जानते हैं।

405 करोड़ का होगा निवेश

इस ऐतिहासिक गोल्ड माइन को शुरू करने के लिए बड़े पैमाने पर तैयारी और निवेश किया गया है। यह प्रोजेक्ट कुल 405 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इसे जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (GMSI) द्वारा डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड की साझेदारी में चलाया जा रहा है।

इस ऐतिहासिक शुरुआत को देखते हुए आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने उद्घाटन से ठीक पहले ‘जोंनागिरी’ गांव का नाम बदलकर ‘स्वर्णगिरी’ करने को मंजूरी दे दी है।

राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 1500 एकड़ जमीन अलॉट की है, जिसके पहले फेज में 600 एकड़ पर माइनिंग शुरू हो चुकी है। खदान के कामकाज के लिए ‘हंद्री नीवा सुजला स्रवंती’ योजना के जरिए 18 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से पानी की सप्लाई की जा रही है।

कितना निकलेगा सोना? समझिए इसका पूरा गणित

इस खदान से सोने के उत्पादन को लेकर चरणबद्ध तरीके से लक्ष्य तय किए गए हैं:

पहले साल का लक्ष्य (2026-27): कमर्शियल ऑपरेशन के पहले पूरे साल के दौरान यहां से लगभग 400 किलोग्राम सोना निकालने का टारगेट रखा गया है।

आने वाले सालों का प्लान: इसके बाद सालाना उत्पादन को बढ़ाकर 1000 किलो तक ले जाया जाएगा।

दूसरे फेज के बाद धमाका: जिस दूसरी प्रोसेसिंग यूनिट का शिलान्यास किया गया है, उसके पूरी तरह चालू होने के बाद यहाँ से सालाना कुल उत्पादन क्षमता लगभग 2000 किलो सोने तक पहुंच सकती है।

किसे और क्या होगा फायदा?

इस प्राइवेट गोल्ड माइन के शुरू होने से स्थानीय लोगों से लेकर राज्य सरकार तक, सबको बड़ा फायदा होने वाला है:

स्थानीय लोगों को रोजगार: इस माइनिंग प्रोजेक्ट के जरिए सीधे तौर पर लगभग 700 लोगों को रोजगार मिलेगा। सबसे खास बात यह है कि इस वर्कफोर्स (कार्यबल) का लगभग 80% हिस्सा स्थानीय समुदायों से लिया जाएगा।

आंध्र सरकार की बंपर कमाई: सोने के उत्पादन से राज्य सरकार की तिजोरी में रॉयल्टी और वैधानिक शुल्कों के जरिए भारी राजस्व आएगा। 400 किलोग्राम के सालाना उत्पादन पर सरकार को करीब 57 करोड़ रुपये की कमाई होगी। वहीं, जब उत्पादन बढ़कर 900 किलोग्राम सालाना पहुंचेगा, तो यह कमाई 144 करोड़ रुपये प्रति वर्ष हो जाएगी।

क्या होती है प्राइमरी गोल्ड माइन?

यह देश की इकलौती ऑपरेशनल प्राइवेट ‘प्राइमरी गोल्ड माइन’ है। प्राइमरी गोल्ड माइन एक ऐसी ‘हार्ड-रॉक’ माइनिंग प्रक्रिया होती है, जिसमें सोना सीधे उसके मूल स्रोत यानी जमीन के भीतर चट्टानों और क्वार्ट्ज नसों से निकाला जाता है। माइनर्स पहले इन ठोस चट्टानों में ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग करते हैं, फिर इस अयस्क को सतह पर लाकर केमिकल और फिजिकल तरीकों से प्रोसेस करके शुद्ध सोना अलग करते हैं।

क्या यह भारत के लिए एक नए ‘कोलार’ (KGF) की शुरुआत है?

भूवैज्ञानिकों का मानना है कि कुरनूल का यह प्रोजेक्ट कोई इकलौता खजाना नहीं है। यह पूरा क्षेत्र एक बड़े खनिज बेल्ट के अंतर्गत आता है, जहां सोने का भारी भंडार होने की उम्मीद है। इसके अलावा अनंतपुर जिले के बोक्समपल्ली, रामागिरी और जवकूला जैसे कई अन्य साइट्स पर भी खोज जारी है।

इन प्राचीन भूवैज्ञानिक संरचनाओं की तुलना कर्नाटक की ऐतिहासिक ‘कोलार’ और ‘हुट्टी’ बेल्ट से की जा रही है, जो कभी दुनिया के सबसे अमीर गोल्ड फील्ड्स में गिने जाते थे। अगर आंध्र प्रदेश के इन क्षेत्रों से भी कर्नाटक जैसे नतीजे मिलते हैं, तो स्वर्णगिरी की यह शुरुआत राज्य को 2047 तक ‘स्वर्णांध्र प्रदेश’ बनाने के दृष्टिकोण में गेम-चेंजर साबित होगी।