8th Pay Commission: सैलरी बढ़ाने की तैयारी तेज! वेतन आयोग और DA हाइक पर सरकारी कर्मचारियों के लिए नए अपडेट

8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दी थी। साथ ही आयोग का टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) भी जारी किया गया। आयोग करीब 55 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स के वेतन, पेंशन, भत्तों और सेवा शर्तों की समीक्षा करेगा। इसके बाद सरकार को नई सिफारिशें देगा।

अलग-अलग राज्यों में हो रही बैठकें

अभी आयोग देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बैठकें कर रहा है। इन बैठकों में कर्मचारी संगठन, यूनियन और महासंघ अपनी मांगें रख रहे हैं। आयोग उनके सुझाव और ज्ञापन भी ले रहा है।

आने वाली बैठकें

  • दिल्ली: 7 और 10 अगस्त 2026 (अपॉइंटमेंट की आखिरी तारीख 31 जुलाई)
  • चेन्नई: 7 और 8 सितंबर 2026 (अपॉइंटमेंट की आखिरी तारीख 18 अगस्त)
  • पुडुचेरी: 9 सितंबर 2026 (अपॉइंटमेंट की आखिरी तारीख 18 अगस्त)

कब आएगी आयोग की रिपोर्ट?

सरकार ने नवंबर 2025 में आयोग का गठन किया था। उम्मीद है कि आयोग 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगा।

जुलाई 2026 का DA कब बढ़ेगा?

केंद्र सरकार हर साल दो बार महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) बढ़ाती है। जनवरी 2026 के लिए DA में 2% की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद कुल DA 60% हो गया।

अब कर्मचारियों की नजर जुलाई 2026 के DA पर है। पेंशन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका ऐलान आमतौर पर सितंबर में होता है। हालांकि, कुछ बार इसमें देरी होकर अक्टूबर भी हो सकता है। जुलाई 2026 का DA मई और जून 2026 के AICPI-IW के आंकड़ों के आधार पर तय होगा।

पश्चिम बंगाल में भी बना नया वेतन आयोग

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने 22 जुलाई को 7वें राज्य वेतन आयोग का गठन किया। इसके साथ आयोग का टर्म्स ऑफ रेफरेंस भी जारी किया गया। यह आयोग राज्य कर्मचारियों के वेतन, भत्तों, पेंशन और दूसरी सुविधाओं की समीक्षा करेगा।

कौन बने आयोग के अध्यक्ष?

सरकार ने अतनु चक्रवर्ती (रिटायर्ड IAS) को आयोग का अध्यक्ष बनाया है। वह पहले वित्त मंत्रालय में सचिव रह चुके हैं। आयोग का मुख्यालय कोलकाता में होगा। इसे गठन की तारीख से 6 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है।

किन बातों पर होगा फैसला?

आयोग कर्मचारियों के पे मैट्रिक्स, फिटमेंट फैक्टर, सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ और नए वेतन ढांचे को लागू करने के तरीके का अध्ययन करेगा। इसके बाद सरकार विस्तृत आदेश जारी करेगी।

DA में भी मिली बड़ी बढ़ोतरी

हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए DA और DR में 20% की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद राज्य कर्मचारियों का कुल DA और DR बढ़कर बेसिक सैलरी का 38% हो गया।

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8th Pay Commission: बेसिक पे से लेकर भत्तों तक, जानिए 7 और 10 अगस्त को वेतन आयोग किस बात पर करेगा महत्वपूर्ण चर्चा

8th Pay Commission Salary Structure: देश के करीब एक करोड़ सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स में आठवां वेतन आयोग को लेकर खूब चर्चा है। यह आयोग अब अपने सबसे महत्वपूर्ण फेज में पहुंच चुका है। इस दौरान कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्ते और पेंशन में संशोधन के लिए हितधारकों, कर्मचारी यूनियनों से लगातार चर्चा की जा रही है।

7 और 10 अगस्त को होगी बड़ी बैठक

आठवें केंद्रीय वेतन आयोग ने अगले वेतन संशोधन पर चल रहे परामर्श के तहत दिल्ली स्थित केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों (UT) के कर्मचारी संघों, परिसंघों और यूनियनों को 7 अगस्त और 10 अगस्त 2026 को बैठक के लिए आमंत्रित किया है। 23 जुलाई 2026 को जारी एक नोटिस में आयोग ने बताया कि यह बैठक उसकी हितधारक परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके जरिए वह अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले कर्मचारी प्रतिनिधियों के सुझाव और सिफारिशें जुटा रहा है।

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8वें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी का नया गणित मुख्यतः तीन हिस्सों में तय किया जा रहा है:

A. बेसिक पे और फिटमेंट फैक्टर

बेसिक पे आपकी सैलरी और पेंशन की सबसे मजबूत नींव है, क्योंकि ग्रेच्युटी, पीएफ और बाकी भत्ते इसी के आधार पर तय होते हैं। पुराने बेसिक पे को नए बेसिक पे में बदलने के लिए फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। नेशनल काउंसिल – जेसीएम (NC-JCM) ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है।

वहीं ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन (AINPSEF) ने परिवार की निर्भरता इकाई को 3 से बढ़ाकर 4.4 करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे बेसिक पे में बड़ा उछाल आएगा।

B. भत्ते (DA, HRA और TA)

नए बेसिक पे के लागू होते ही उस पर आधारित सभी प्रमुख भत्ते री-कैलकुलेट होंगे:

HRA (मकान किराया भत्ता): एआईएनपीएसईएफ ने X कैटेगरी के शहरों के लिए 36%, Y के लिए 24% और Z कैटेगरी के लिए 12% HRA करने की सिफारिश की है। साथ ही यह भी प्रस्ताव है कि जब भी DA बढ़े, HRA में खुद-ब-खुद बढ़ोतरी हो।

TA (ट्रेवल भत्ता): लेवल-1 के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम TA बढ़ाकर ₹9,000 प्रति महीने करने का प्रस्ताव है।

C. ग्रॉस सैलरी

बेसिक पे और सभी भत्तों को मिलाकर आपकी कुल कमाई तय होती है। उदाहरण के तौर पर, अगर यूनियनों के ये सभी प्रस्ताव मान लिए जाते हैं, तो लेवल-1 के कर्मचारियों की सैलरी ₹37,080 से बढ़कर सीधे ₹61,344 तक पहुंच सकती है यानी करीब 65% तक की भारी बढ़ोतरी!

कब तक लागू हो सकती हैं सिफारिशें?

आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को 18 महीने की अवधि के लिए किया गया था। इसके अनुसार, आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट फरवरी 2027 से मध्य-2027 के बीच सौंप सकता है।

अगर हम ऐतिहासिक ट्रेंड्स को देखें तो सिफारिशें आने के बाद सरकार द्वारा इसे पूरी तरह लागू करने में 2 से 3 साल का समय लगता है। हालांकि, कयास लगाए जा रहे हैं कि यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से एरियर के साथ प्रभावी हो सकती है।

8th Pay Commission: सिर्फ फिटमेंट फैक्टर ही नहीं! जानिए वे 5 बड़े आर्थिक कारण जो तय करेंगे आपकी सैलरी

8th Pay Commission Salary Revision Factors: क्या 8वें वेतन आयोग में सिर्फ ‘फिटमेंट फैक्टर’ ही आपकी सैलरी और पेंशन बढ़ाएगा? जवाब है- नहीं! 3 नवंबर 2025 को बने इस आयोग का आधा समय यानी 9 महीने पूरा हो चुका है और अब फोकस केवल मांगों पर नहीं, बल्कि देश की आर्थिक हकीकत पर शिफ्ट हो रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में कर्मचारियों का पे-स्केल तय करने के लिए 5 ऐसे बड़े आर्थिक कारण होंगे, जिन पर सरकार का सबसे ज्यादा जोर रहेगा।

आइए जानते हैं कि वे कौन-से 5 बड़े आर्थिक फैक्टर हैं, जो 1.1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन संशोधन को आकार देंगे।

फिटमेंट फैक्टर की मांग और इतिहास

फिटमेंट फैक्टर वह फॉर्मूला या मल्टीप्लायर है, जिसके जरिए कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी तय की जाती है।

पुराने वेतन आयोगों का ट्रेंड: 5वें वेतन आयोग में कोई एक समान ऑफिशियल मल्टीप्लायर नहीं था। वहीं 6वें वेतन आयोग में 1.86 और 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया गया था।

यूनियनों की मांग: 8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी संगठन 3.0 से 4.0 के बीच फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, ‘वेतन आयोग हमेशा एक समग्र दृष्टिकोण अपनाते हैं। फिटमेंट फैक्टर भले ही सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरता है, लेकिन यह व्यापक मूल्यांकन का केवल एक हिस्सा है।’

सैलरी और पेंशन तय करने वाले 5 मुख्य आर्थिक कारण

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सिर्फ फिटमेंट फैक्टर से फैसला क्यों नहीं हो सकता?

फिटमेंट फैक्टर सीधे तौर पर मूल वेतन में वृद्धि तय करता है, इसलिए यह सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है। हालांकि, कोई भी वेतन आयोग देश की आर्थिक वास्तविकताओं की अनदेखी करके सिर्फ एक आंकड़े पर फैसला नहीं ले सकता।

आयोग को कर्मचारियों की आकांक्षाओं और देश के राजकोषीय संतुलन के बीच तालमेल बिठाना होता है। हाल ही में भुवनेश्वर (6-7 जुलाई) और कोलकाता (9-10 जुलाई) में आयोजित क्षेत्रीय बैठकों में मिले सुझावों को भी ध्यान में रखा जा रहा है।

कब तक आएगी 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट?

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट मई या जून 2027 के आसपास केंद्र सरकार को सौंपेगा। जब तक आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंप देता और सरकार उसे मंजूरी नहीं दे देती, तब तक वेतन वृद्धि या पेंशन सुधार को लेकर किए जाने वाले सभी अनुमान केवल संभावित हैं।

8th Pay Commission Updates: फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगी सैलरी में होने वाली बढ़ोतरी, जानिए कितना रहेगा फिटमेंट फैक्टर

आठवें वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन में संशोधन की सिफारिशें देने से पहले चर्चा की प्रक्रिया तेज कर दी है। एंप्लॉयीज की नजरें वेतन आयोग की सिफारिशों पर लगी हैं। इस बार आयोग वेतन में संशोधन, अलाउन्सेज, सैलरी स्ट्रक्चर सहित कई मसलों के बारे में अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। इसका फायदा एक करोड़ से ज्यादा लोगों को मिलेगा। इनमें केंद्र सरकार के करीब 50 लाख एंप्लॉयीज और 65 लाख पेंशनर्स शामिल हैं।

आयोग की 9 दौर की बैठकें हो चुकी हैं

आठवां वेतन आयोग अब तक रीजनल और केंद्रीय एंप्लॉयीज यूनियंस और दूसरे पक्षों के साथ नौ दौर की बैठकें पूरी कर चुका है। इस महीने की 9 और 10 तारीख को उसने कोलकाता में बैठक की। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों को कहना है कि आयोग की सिफारिशें अगले साल जून-जुलाई तक आने की उम्मीद है। उसके बाद केंद्र सरकार सिफारिशों पर विचार करने के बाद उन्हें लागू करने के बारे में अंतिम फैसला लेगी।

फैमिली यूनिट्स की परिभाषा बदलने की मांग

ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लॉयीज फेडरेशन ने आयोग से फैमिली यूनिट्स की परिभाषा में बदलाव करने की सलाह दी है। आयोग फैमिली यूनिट्स के आधार पर वेतन में संशोधन का कैलकुलेशन करता है। फेडरेशन का कहना है कि फैमिली यूनिट्स 3 से बढ़ाकर 4.4 की जानी चाहिए। इसमें आश्रित माता-पिता को भी शामिल किया जाना चाहिए। इससे फिटमेंट फैक्टर 2.05 से बढ़कर 2.10 हो जाएगा। फिटमेंट फैक्टर बढ़ने से बेसिक सैलरी भी बढ़ जाएगी।

मेट्रो शहरों के लिए 36 फीसदी एचआरए की मांग

एंप्लॉयीज यूनियंस को उम्मीद है कि वेतन आयोग डीए, एचआरए और ट्रैवल अलाउंसेज पर भी विचार करेगा और इनके कैलकुलेशन के तरीकों में जरूरी संशोधन करेगा। एंप्लॉयीज के प्रतिनिधि एक्स कैटेगरी के शहरों के लिए 36 फीसदी एचआरए की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वाय कैटेगरी के शहरों के लिए एचआरए 24 फीसदी और जेड कैटेगरी के शहरों के लिए 12 फीसदी होना चाहिए। ट्रैवल अलाउंसेज को भी लेवल 1 एंप्लॉयीज के लिए कम से कम प्रति माह 9000 रुपये करने की मांग की जा रही है।

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एंप्लॉयीज की सबसे ज्यादा नजरें फिटमेंट फैक्टर पर 

एंप्लॉयीज की सबसे ज्यादा नजरें फिटमेंट फैक्टर पर है। एंप्लॉयीज के प्रतिनिधि और यूनियंस 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं। सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। अगर 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग मान ली जाती है तो केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज का मिनिमम बैसिक पे बढ़कर प्रति माह 69,000 रुपये हो जाएगा। अभी यह 18,000 रुपये है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि क्रूड की कीमतों में उछाल से सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ा है। ऐसे में फिटमेंट फैक्टर 1.82-2.57 के बीच रह सकता है।

8th Pay Commission पर कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए आया ये बड़ा अपडेट! जानिए सैलरी और HRA पर कितना पड़ेगा असर

8th Pay Commission: 8वां केंद्रीय वेतन आयोग केवल सैलरी में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक गैजेट नोटिफिकेशन के अनुसार, इसके नियम और शर्तें केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के भत्तों, पेंशन और काम करने के तरीकों में बड़े बदलावों की ओर इशारा कर रहे हैं।

3 नवंबर 2025 को गठित इस आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। हाल ही में आयोग ने भुवनेश्वर और कोलकाता (9-10 जुलाई 2026) में विभिन्न कर्मचारी यूनियनों और हितधारकों के साथ बैठकें पूरी की हैं।

1. सभी भत्तों (Allowances) की गहन समीक्षा

गैजेट के अनुसार, आयोग वर्तमान में मिलने वाले सभी प्रकार के भत्तों के ढांचे और उनके नियमों की समीक्षा कर रहा है।

उद्देश्य: बड़ी संख्या में मिलने वाले अलग-अलग भत्तों को सरल और युक्तिसंगत बनाना।

असर: कर्मचारियों को न केवल संशोधित दरें मिल सकती हैं, बल्कि पात्रता के नियमों में बदलाव, क्लेम प्रोसेस का आसान होना या कई भत्तों का आपस में विलय भी देखने को मिल सकता है। कर्मचारी संगठनों द्वारा HRA को बढ़ाकर 40% तक करने की मांग भी ज़ोरों पर है।

2. परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव पर जोर 

गैजेट में साफ तौर पर कहा गया है कि आयोग वर्तमान बोनस सिस्टम और परफॉर्मेंस आधारित भुगतानों की जांच करेगा और एक ऐसा इंसेंटिव फ्रेमवर्क तैयार करेगा जो उत्पादकता को बढ़ावा दे।

असर: भविष्य में मिलने वाला कंपंसेशन केवल समय-समय पर होने वाले वेतन संशोधन पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि कर्मचारी की जवाबदेही, दक्षता और मापने योग्य नतीजों से भी जोड़ा जा सकता है।

3. NPS, UPS, पेंशन और ग्रेच्युटी की समीक्षा

रिटायरमेंट बेनिफिट्स इस बार आयोग के सबसे बड़े फोकस एरिया में से एक हैं। गैजेट में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए ‘डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी’ की समीक्षा करने के निर्देश हैं।

असर: जो कर्मचारी NPS या UPS के दायरे से बाहर हैं, उनके लिए भी पेंशन और ग्रेच्युटी लाभों की जांच की जाएगी ताकि विसंगतियों को दूर कर उन्हें बेहतर लाभ दिए जा सकें।

4. प्राइवेट सेक्टर और CPSUs की सैलरी का आकलन

एक अनोखा और महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि आयोग को केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSUs) और निजी क्षेत्र में चल रहे मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर, मिलने वाले फायदों और वर्किंग कंडीशंस पर भी विचार करने को कहा गया है।

उद्देश्य: सरकार ऐसा वेतन ढांचा तैयार करना चाहती है जिससे बेहतरीन टैलेंट को आकर्षित किया जा सके और उसे रोक कर रखा जा सके, साथ ही देश के राजकोषीय अनुशासन पर भी कोई आंच न आए।

5. फाइनल से पहले अंतरिम रिपोर्ट सौंपने की छूट

हालांकि आयोग को अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने (मई-जून 2027 तक) का समय मिला है, लेकिन गैजेट नोटिफिकेशन सरकार को यह लचीलापन देता है कि आयोग विशिष्ट मामलों पर अपनी अंतरिम रिपोर्ट पहले भी दे सकता है।

असर: अगर सरकार चाहे, तो कुछ खास मुद्दों या भत्तों से जुड़ी सिफारिशों को अंतिम रिपोर्ट आने से पहले ही लागू करने पर विचार कर सकती है।

8th Pay Commission: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. 8वें वेतन आयोग का गठन कब हुआ और इसके अध्यक्ष कौन हैं?

उत्तर: 8वें वेतन आयोग को आधिकारिक तौर पर 3 नवंबर 2025 को एक गैजेट नोटिफिकेशन के जरिए गठित किया गया था। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।

Q2. इस आयोग की सिफारिशें कब से लागू होने की उम्मीद है?

उत्तर: हालांकि सरकार ने अभी किसी आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की है, लेकिन परंपरा के अनुसार 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रहा था। इस लिहाज से नई संशोधित सैलरी और पेंशन 1 जनवरी 2026 से (बैकडेट या एरियर के साथ) प्रभावी होने की पूरी संभावना है।

Q3. क्या आयोग ने फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) की घोषणा कर दी है?

उत्तर: नहीं, आयोग की तरफ से अभी तक किसी भी फिटमेंट फैक्टर, वेतन वृद्धि की दर या संशोधित पे-मैट्रिक्स की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। कर्मचारी संगठन लगातार 2.86 से लेकर 3.8 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में 2, 2.5 या 3 फिटमेंट फैक्टर मिला तो इतनी हो जाएगी सैलरी, एक्सपर्ट ने बताया आगे का प्लान

8th Pay Commission updates: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के तहत संभावित वेतन वृद्धि को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी के साथ केंद्र सरकार के कर्मचारियों ने अपने पर्सनल फाइनेंस की प्लानिंग भी शुरू कर दी है। हालांकि विभिन्न फिटमेंट फैक्टर के परिदृश्यों के तहत मूल वेतन और सैलरी से जुड़े कंपोनेंट्स में होने वाले बदलावों को लेकर बहस जारी है लेकिन इसके साथ ही इस अतिरिक्त आमदनी को सही जगह प्लान करना भी बेहद जरूरी है। आपको बता दें कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी हो चुका है। हालांकि इसे असल में लागू करने और लोगों की सैलरी बढ़ने की बात करें तो पैनल द्वारा 2027 के मध्य के आसपास अपनी सिफारिशें सौंपने और सरकार द्वारा उन्हें मंजूरी दिए जाने के बाद ही होने की संभावना है।

मनी कंट्रोल पर दिपेन प्रधान की रिपोर्ट में अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर के आधार पर संभावित सैलरी कैलकुलेट की गई है और एक्सपर्ट के हवाले से समझाया गया है कि बढ़ी सैलरी पर बेस्ट इन्वेस्टमेंट की स्ट्रैटिजी क्या होनी चाहिए। आइए जानते हैं कि अलग-अलग सैलरी लेवल पर इसका क्या असर पड़ेगा और बढ़े हुए पैसे को निवेश करने का एक्सपर्ट्स का क्या प्लान है।

2.0 फिटमेंट फैक्टर पर कितनी हो जाएगी सैलरी?

8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) से लगभग 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और अनुमानित 69 लाख पेंशनभोगियों के मूल वेतन में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है। 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू करके लेवल 1 के कर्मचारियों का मूल वेतन बढ़ाकर ₹18000 कर दिया था। अब अगर 8वां वेतन आयोग इस मल्टीप्लायर को उदाहरण के तौर पर 2 बढ़ाता है तो कर्मचारियों की सैलरी में कुछ इस तरह बदलाव आएगा-

  • लेवल 1कर्मचारी: इस स्तर के कर्मचारी का शुरुआती मूल वेतन ₹36000 ({Rs 18000 ×2) हो जाएगा।
  • लेवल 7 कर्मचारी: इस स्तर के कर्मचारियों का मासिक मूल वेतन बढ़कर ₹89800 हो जाएगा।
  • लेवल 13 कर्मचारी: इस स्तर के अधिकारियों का मासिक मूल वेतन बढ़कर ₹246200 प्रति माह हो जाएगा।

बाकी अगर फिटमेंट फैक्टर अगर 2.5 या 3 फिक्स किया गया तो बढ़ी हुई संभावित सैलरी का कैलकुलेशन यहां नीचे देखा जा सकता है-

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वेतन वृद्धि के बाद क्या होनी चाहिए एसेट एलोकेशन स्ट्रेटजी?

किंग स्टब एंड कसिवा एडवोकेट्स एंड अटॉर्नी के पार्टनर रोहिताश्व सिन्हा ने बढ़े हुए वेतन का संतुलित उपयोग करने के लिए एक खास एलोकेशन स्ट्रेटजी सुझाई है-

  • 40-50 प्रतिशत हिस्सा: दीर्घकालिक निवेश और रिटायरमेंट प्लानिंग में लगाएं।
  • 20-30 प्रतिशत हिस्सा: महंगे या उच्च ब्याज वाले कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल करें।
  • 10-20 प्रतिशत हिस्सा: इमरजेंसी सेविंग्स बनाने में लगाएं।
  • शेष 10-20 प्रतिशत हिस्सा: लाइफस्टाइल को अपग्रेड करने पर खर्च कर सकते हैं।

एक्सपर्ट की खास सलाह

रोहिताश्व सिन्हा के मुताबिक इसका मुख्य मंत्र सही सीक्वेंसिंग है। अपनी इच्छाओं पर खुलकर खर्च करने से पहले महंगे कर्ज को चुकाएं और अपने वित्तीय आधार को स्थिर करें। सैलरी हाइक स्थायी होती है इसलिए इसे आदर्श रूप से स्थायी संपत्ति में बदला जाना चाहिए न कि इसे सिर्फ स्थायी रूप से खर्च बढ़ाने की आदत बना लेना चाहिए।

सैलरी स्तर के हिसाब से निवेश की रणनीति

बैंकबाजार के सीईओ अधिल शेट्टी का मानना है कि कर्मचारियों को वेतन वृद्धि के बाद अपनी जरूरतों के हिसाब से पर्सनल फाइनेंस प्लानिंग पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अलग-अलग आय वर्ग के लिए ये सुझाव दिए हैं:

सीमित बचत वाले कर्मचारी: जिन कर्मचारियों के पास बचत कम है वे सबसे पहले छह महीने का इमरजेंसी फंड बनाएं और फिर ऊंचे ब्याज वाले लोन चुकता करें।

मध्यम आय वर्ग: इन्हें मुख्य रूप से एसआईपी और रिटायरमेंट के लिए ऊंचे योगदान को प्राथमिकता देनी चाहिए।

उच्च आय वर्ग वाले कर्मचारी: जिनकी सैलरी अधिक है वे घर खरीदने या बच्चों की शिक्षा की फंडिंग जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए अधिक निवेश कर सकते हैं।

अधिल शेट्टी ने आगे कहा कि सैलरी बढ़ोतरी का एक छोटा हिस्सा अपनी लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने पर खर्च करना पूरी तरह ठीक है लेकिन इस बात से बचें कि पूरी की पूरी सैलरी हाइक आपके ऊंचे मासिक खर्चों में तब्दील हो जाए। इसके अलावा जोखिम भरे निवेशों पर विचार करने से पहले कर्मचारियों को पर्याप्त स्वास्थ्य और जीवन बीमा सुनिश्चित करना चाहिए।

करियर के पड़ाव के अनुसार कैसे करें निवेश?

अगर रोहिताश्व सिन्हा के बताए 40-50 प्रतिशत के एलोकेशन को आधार माना जाए तो 2.0 का फिटमेंट फैक्टर मानकर कर्मचारियों के पास लंबी अवधि के निवेश के लिए हर महीने एक बड़ी राशि बचेगी। यह बचत कुछ इस तरह की हो सकती है:

लेवल 1 के कर्मचारी: करीब ₹7200 से ₹9000 प्रति माह।

लेवल 7 के कर्मचारी: करीब ₹17960 से ₹22450 प्रति माह।

लेवल 13 के कर्मचारी: करीब ₹49240 से ₹61550 प्रति माह।

करियर के अलग-अलग चरणों के लिए रोहिताश्व सिन्हा ने अलग अलग सुझाव दिए हैं। युवा कर्मचारियों को इक्विटी एसआईपी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और साथ ही एनपीएस योगदान को जारी रखना चाहिए। मिड-करियर कर्मचारियों को अपने प्रमुख वित्तीय लक्ष्यों के इर्द-गिर्द एनपीएस, एसआईपी और डेट इन्वेस्टमेंट्स के बीच एक संतुलन बनाना चाहिए। रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों को वीपीएफ, एनपीएस और फिक्स्ड-इनकम इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से पूंजी के संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए।

ध्यान दें कि बिना किसी उचित वित्तीय योजना के सैलरी में हुई बढ़ोतरी बहुत तेजी से गायब हो सकती है। ऐसे में पहले से ही इस अतिरिक्त आय का उपयोग करने की योजना बनाना भविष्य में बड़ी संपत्ति बनाने में मदद कर सकता है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

8th Pay Commission पर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए नया अपडेट! इतनी बढ़ जाएगी बेसिक सैलरी और HRA, देखें लेवल 1 से 10 का पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission Salary HRA Hike: आठवें वेतन आयोग में सैलरी बढ़ने को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच खूब चर्चा है। हालांकि, इसके एक प्रमुख कंपोनेंट हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर लोगों का उतना ध्यान नहीं जाता, लेकिन सैलरी बढ़ाने में इसका बड़ा योगदान होता है। कोलकाता में स्टेकहोल्डर्स के साथ वेतन आयोग की बैठकों का दौर समाप्त हो चुका है। इन बैठकों में कर्मचारी यूनियनों ने बेसिक सैलरी बढ़ाने के साथ-साथ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की मौजूदा दरों को बढ़ाने की पुरजोर मांग की है।

चूंकि एचआरए (HRA) सीधे तौर पर बेसिक सैलरी का एक निश्चित प्रतिशत होता है, इसलिए जैसे ही 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर के आधार पर बेसिक सैलरी बढ़ेगी, कर्मचारियों का एचआरए भी रॉकेट की तरह बढ़ जाएगा। आइए समझते हैं कि 2.0, 2.1, 2.28 और 2.57 के फिटमेंट फैक्टर पर लेवल 1 से लेकर लेवल 10 तक के कर्मचारियों की सैलरी और एचआरए में कितना बंपर उछाल आ सकता है।

कर्मचारी संगठनों की मांग: 40% तक हो HRA

फिलहाल 7वें वेतन आयोग के नियमों के मुताबिक, शहरों को तीन कैटेगरी X, Y और Z में बांटा गया है। जनवरी 2024 में महंगाई भत्ता (DA) 50% पहुंचने के बाद मौजूदा एचआरए दरें क्रमशः 30% (X शहर), 20% (Y शहर) और 10% (Z शहर) हैं।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बड़े शहरों में मकानों के किराए बहुत ज्यादा बढ़ चुके हैं, इसलिए मौजूदा एचआरए नाकाफी है। संगठनों ने वेतन आयोग के सामने ये मांगें रखी हैं:

NC-JCM, AIDEF और FNPO जैसे कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि एचआरए की तीन स्लैब को बढ़ाकर 40% (X), 35% (Y) और 30% (Z) किया जाए। साथ ही इसे महंगाई भत्ते (DA) की बढ़ोतरी से जोड़ा जाए और पेंशनर्स को भी इसका लाभ मिले।

AINPSEF ने X, Y और Z शहरों के लिए क्रमशः 36%, 24% और 12% एचआरए की मांग की है।

फिटमेंट फैक्टर का खेल: कैसे तय होगा नया HRA?

एचआरए की गणना हमेशा बेसिक पे पर होती है। मान लीजिए अभी दिल्ली (X सिटी) में कार्यरत एक लेवल 1 के कर्मचारी की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 है, तो उसे 30% के हिसाब से ₹5,400 एचआरए मिलता है।

अगर 8वां वेतन आयोग न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर 2.0 तय करता है, तो बेसिक सैलरी ₹36,000 हो जाएगी और 30% के हिसाब से एचआरए सीधे ₹10,800 हो जाएगा। वहीं अगर फिटमेंट फैक्टर 2.28 या 2.57 तय होता है, तो यह फायदा और ज्यादा बढ़ जाएगा।

HRA कैलकुलेटर: देखें अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर पर अनुमानित गणित

नीचे दिए गए आंकड़ों में मौजूदा एचआरए दरों (X-30%, Y-20%, Z-10%) को आधार मानकर अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर पर लेवल 1 से लेवल 10 तक के कर्मचारियों के नए वेतन और एचआरए का अनुमान लगाया गया है:

 

HRA से सैलरी में दिखेगा बंपर उछाल

अगर सरकार न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर 2.28 या 2.57 को मंजूरी देती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी में ऐतिहासिक बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। उदाहरण के तौर पर, एक एंट्री-लेवल अफसर (लेवल 10) जो अभी दिल्ली जैसे शहर में रह रहा है, उसका सिर्फ मकान किराया भत्ता (HRA) ही बढ़कर ₹43,250 प्रति माह तक पहुंच सकता है।

8th Pay Commission से रेलवे इंजीनियरों ने सैलरी रिवीजन के साथ कर दी ये बड़ी डिमांड, जानें क्या-क्या बदलेगा

8th Pay Commission Railway: 8वें वेतन आयोग के सामने केंद्रीय कर्मचारियों ने अपनी मांगें रख दी हैं। ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित एक अहम बैठक के दौरान रेलवे इंजीनियरों ने वेतन विसंगति, प्रमोशन और करियर ग्रोथ से जुड़ी अपनी कई पुरानी और बड़ी शिकायतें आयोग के सामने उठाई हैं।

‘ऑल इंडिया रेलवे इंजीनियर्स फेडरेशन’ (AIREF) और ‘ईस्ट कोस्ट रेलवे इंजीनियर्स एसोसिएशन’ (ECoREA) के प्रतिनिधियों ने ये मांगें 8वें वेतन आयोग के सदस्य सचिव पंकज जैन के सामने पेश कीं। आइए जानते हैं कि रेलवे इंजीनियरों की मुख्य मांगें क्या हैं और इससे उनके करियर पर क्या असर पड़ेगा।

‘5वें वेतन आयोग जैसा ढांचा हो बहाल’- वेतन में सुधार की मांग

AIREF के महासचिव बीपी दास के मुताबिक, रेलवे इंजीनियरों का मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर मौजूदा आर्थिक चुनौतियों और महंगाई से निपटने के लिए नाकाफी है। उन्होंने आरोप लगाया कि छठे वेतन आयोग के लागू होने के बाद से इंजीनियरों के वेतन ढांचे में लगातार गिरावट आई है।

गैर-तकनीकी काडरों को ज्यादा वेतन: रेलवे इंजीनियरों पर बेहद संवेदनशील सुरक्षा और तकनीकी जिम्मेदारियां होती हैं। इसके बावजूद, कई गैर-तकनीकी और गैर-सुरक्षा काडरों को इस समय उनसे ज्यादा वेतन मिल रहा है।

समानता बहाल करने की मांग: फेडरेशन ने मांग की है कि 8वां वेतन आयोग उस वेतन पदानुक्रम को दोबारा बहाल करे जो 5वें वेतन आयोग तक लागू था।

रेलवे इंजीनियरों को मिले ‘ग्रुप-B’ का दर्जा

फेडरेशन की एक और प्रमुख मांग यह है कि रेलवे इंजीनियरों को अन्य केंद्रीय मंत्रालयों के अधिकारियों की तरह ग्रुप-B का दर्जा दिया जाए।

ग्रुप-B पदों की भारी कमी: रेलवे में इस समय ग्रुप-B पदों का प्रतिनिधित्व बेहद कम है। भारतीय रेलवे में वर्तमान में केवल 0.29% पद ही ग्रुप-B के हैं।

प्रमोशन के मौके बढ़ाने की अपील: AIREF ने मांग की है कि रेलवे में ग्रुप-B पदों की हिस्सेदारी को बढ़ाकर राष्ट्रीय औसत 7.5% के बराबर किया जाए। पद कम होने की वजह से इंजीनियरों के सामने करियर में आगे बढ़ने और प्रमोशन के मौके बेहद सीमित हो जाते हैं। संगठन के सचिव शिवकांत सिंह ने भी इंजीनियरों में बढ़ते ठहराव और मोटिवेशन की कमी का मुद्दा उठाया।

रेलवे कर्मचारियों की मुख्य मांगों पर एक नजर

मुख्य मुद्दा मौजूदा स्थिति AIREF की मांग
वेतन ढांचाकई गैर-तकनीकी काडरों से कम वेतन  5वें वेतन आयोग की तरह समानता बहाल हो
ग्रुप-B पदरेलवे में मात्र 0.29% हिस्सेदारी  राष्ट्रीय औसत के तहत इसे 7.5% किया जाए
करियर ग्रोथप्रमोशन के बेहद सीमित अवसरठहराव को दूर कर प्रमोशन के नए रास्ते खुलें
सर्विस स्टेटसमौजूदा सब-ऑर्डिनेट ढांचाअन्य केंद्रीय मंत्रालयों की तरह ग्रुप-B का दर्जा

देशभर में चल रहा है बैठकों का दौर

8वें वेतन आयोग की यह बैठक 6 और 7 जुलाई को आयोजित की गई थी, जो कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगियों और अन्य हितधारकों के साथ देशव्यापी विचार-विमर्श का हिस्सा थी। आयोग आज यानी 10 जुलाई को कोलकाता में अपना यह परामर्श दौरा पूरा कर रहा है। इससे पहले दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद, श्रीनगर और लद्दाख में भी ऐसी बैठकें हो चुकी हैं।

रेलवे के अलावा, देशभर के अन्य कर्मचारी संगठन भी हायर फिटमेंट फैक्टर, भत्तों में सुधार, पेंशन सुधार, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में संशोधन और एमएसीपी (MACP) योजना में सुधार के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं।

आगे क्या होगा?

हालांकि इन बैठकों से तुरंत वेतन में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन यह कर्मचारी संगठनों को अपने दावों के पक्ष में सबूत और जमीनी अनुभव पेश करने का मौका देता है। 3 नवंबर 2025 को गठित किए गए 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा असर 1.1 करोड़ से अधिक सेवारत केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ने वाला है।

8th Pay Commission: क्या सच में ₹18000 से बढ़कर ₹69000 हो जाएगी मिनिमम बेसिक सैलरी? एक्सपर्ट से जानें इस वायरल दावे का पूरा सच

8th Pay Commission Minimum Basic Pay: इन दिनों सरकारी दफ्तरों से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह एक ही चर्चा सबसे है क्या आठवें वेतन आयोग में न्यूनतम बेसिक सैलरी सीधे ₹18,000 से बढ़कर ₹69,000 हो जाएगी? इस दावे को लेकर हर कर्मचारी के मन में उत्सुकता और असमंजस दोनों है।

मार्केट एक्सपर्ट और फाइनेंशियल एनालिस्ट संजय कथूरिया ने इस पूरे गणित का गहराई से विश्लेषण किया है। उनके इस एनालिसिस के आधार पर आइए समझते हैं कि इस वायरल दावे के पीछे की सच्चाई क्या है और असल में आपकी सैलरी कितनी बढ़ सकती है।

समझें सैलरी का गणित: बेसिक पे क्यों है सबसे जरूरी?

हर 10 साल में सरकार महंगाई, आर्थिक बदलावों और रहन-सहन के खर्च को देखते हुए वेतन आयोग का गठन करती है। लेकिन सैलरी का बढ़ना सिर्फ आपके टेक-होम पे यानी हाथ में आने वाले पैसे से नहीं जुड़ा होता, बल्कि इसकी शुरुआत बेसिक पे से होती है।

आपकी ग्रॉस सैलरी का ढांचा कुछ ऐसा होता है:

ग्रॉस सैलरी = बेसिक पे + महंगाई भत्ता (DA) + हाउस रेंट अलाउंस (HRA) + अन्य भत्ते

इसी ग्रॉस सैलरी में से एनपीएस (NPS) और इनकम टैक्स जैसी कटौतियों के बाद आपके बैंक खाते में नेट सैलरी आती है। जब भी नया वेतन आयोग आता है, तो मौजूदा महंगाई भत्ते (DA) को शून्य करके उसे नई बेसिक पे में मर्ज कर दिया जाता है। यही वजह है कि सिर्फ पुरानी और नई बेसिक पे की तुलना करने से अक्सर भ्रामक खबरें बनने लगती हैं। 8वें वेतन आयोग में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

क्या है ‘फिटमेंट फैक्टर’ का पूरा खेल?

सैलरी कितनी बढ़ेगी, यह फिटमेंट फैक्टर तय करता है। यह वह नंबर होता है जिससे मौजूदा बेसिक पे को गुणा करके नई बेसिक पे निकाली जाती है। इसे लेकर संजय कथूरिया, CFA ने दो बड़े पहलू सामने रखे हैं:

पहला पहलू: ₹69,000 की उम्मीद कितनी सच?

कर्मचारी यूनियनों ने 5 सदस्यों वाले परिवार के उपभोग मॉडल के आधार पर 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है। अगर सरकार इस मांग को मान लेती है, तब गणित कुछ ऐसा होगा:

₹18,000 (मौजूदा न्यूनतम बेसिक) × 3.83 = ₹68,940 (लगभग ₹69,000)

यही वो नंबर है जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। लेकिन क्या आर्थिक मोर्चे पर यह व्यावहारिक है?

दूसरा पहलू: आर्थिक हकीकत और असली अनुमान

संजय कथूरिया के मुताबिक, सरकारें सैलरी को अकेले में नहीं बढ़ातीं। उन्हें देश का राजकोषीय घाटा, डिफेंस का खर्च, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, वेलफेयर स्कीम्स और केंद्रीय दायित्वों के साथ राज्यों के वित्तीय संतुलन को भी देखना होता है।

इन कड़वी आर्थिक हकीकतों को देखते हुए कई पॉलिसी एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिटमेंट फैक्टर 2.0 से 2.6 के बीच रहना ही सबसे ज्यादा संभावित है। इस आधार पर नई न्यूनतम बेसिक सैलरी का दायरा इस प्रकार हो सकता है:

₹36,000 से ₹47,000 के बीच (अगर सीधे ₹18,000 से गणना की जाए)

अंतिम सिफारिशों और ढांचे के आधार पर यह दायरा ₹40,000 से ₹52,000 के आसपास भी बैठ सकता है।

यानी, हकीकत का यह आंकड़ा हेडलाइंस में चल रहे ₹69,000 के दावे से काफी कम है।

पैसा हाथ में आने में कितना लगेगा समय?

भले ही इन सिफारिशों को जनवरी 2026 से लागू करने की बात कही जा रही हो, लेकिन इतिहास गवाह है कि असल में पैसा जेब तक पहुंचने में लंबा वक्त लगता है। पिछले वेतन आयोगों के ट्रेंड को देखें, तो कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन और उसका पूरा एरियर साल 2027 के आखिर या फिर 2028 की शुरुआत में ही मिलने की उम्मीद है।

8th Pay Commission पर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बिग अपडेट! सैलरी में 70% से ज्यादा बढ़ोतरी का प्रस्ताव, जानें HRA और DA का ये नया गणित

8th Pay Commission Salary Hike Proposals: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग को लेकर एक बेहद जबरदस्त खबर आ रही है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों और यूनियनों की ओर से सौंपे गए नए प्रस्तावों के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि आठवें वेतन आयोग के लागू होने से कर्मचारियों की सैलरी में 70% से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

यह अनुमानित बढ़ोतरी सिर्फ फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर नहीं है। बल्कि, बेसिक पे में संशोधन, हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) में बढ़ोतरी और डियरनेस अलाउंस (DA) के मर्जर के संयुक्त प्रभाव के कारण यह आंकड़ा 70% के पार जा रहा है। आइए समझते हैं कि इस नए प्रस्ताव का पूरा गणित क्या है और लेवल-1 के कर्मचारियों की सैलरी पर इसका क्या असर पड़ेगा।

लेवल-1 कर्मचारियों की सैलरी ₹37080 से बढ़कर हो जाएगी ₹63500

ऑल इंडिया नेशनल पब्लिक सेक्टर एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) सहित कई प्रमुख कर्मचारी यूनियनों ने सरकार को जो प्रस्ताव भेजे हैं, उनके अनुसार एक्स-कैटेगरी (X-Category) के शहरों में काम करने वाले लेवल-1 कर्मचारियों की मौजूदा सैलरी करीब ₹37080 से बढ़ाकर लगभग ₹63500 करने की सिफारिश की गई है। यह सीधे तौर पर 71% तक की कुल बढ़ोतरी को दर्शाता है।

आपको बता दें कि ये आंकड़े कर्मचारी यूनियनों द्वारा की गई सिफारिशों और प्रस्तावों पर आधारित हैं। यह सरकार या आठवें वेतन आयोग का अंतिम फैसला नहीं है। अंतिम निर्णय वेतन आयोग की रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद केंद्र सरकार द्वारा ही लिया जाएगा।

70% से ज्यादा सैलरी बढ़ने की मुख्य वजहें क्या हैं?

सिर्फ बेसिक पे बढ़ने से सैलरी इतनी ज्यादा नहीं भागती, बल्कि बेसिक पे के साथ जुड़े अन्य भत्ते भी ऑटोमैटिकली बढ़ जाते हैं। यूनियनों ने ये मांगें रखी हैं:

DA का बेसिक पे में विलय: कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि नए पे-स्केल को तय करने और लागू करने से पहले महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक पे में मर्ज किया जाए। इससे सैलरी का आधार काफी बड़ा हो जाएगा।

हायर ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA): मासिक भत्ते को सीधे बढ़ाने के लिए ऊंचे ट्रांसपोर्ट अलाउंस की सिफारिश की गई है।

HRA दरों में संशोधन: शहरों की कैटेगरी के हिसाब से हाउस रेंट अलाउंस बढ़ाने का प्रस्ताव है।

HRA में बड़े बदलाव की तैयारी: X, Y और Z शहरों का नया ढांचा

केंद्र सरकार ने रहने के खर्च और आबादी के हिसाब से शहरों को तीन श्रेणियों- X, Y और Z में बांटा है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद और पुणे जैसे बड़े महानगर X कैटेगरी में आते हैं, जहाँ रहने का खर्च सबसे ज्यादा है।

वर्तमान में HRA की दरें 30%, 20% और 10% हैं। यूनियनों ने आठवें वेतन आयोग के तहत इसे बढ़ाकर 36%, 24% और 12% करने का प्रस्ताव रखा है।

कितनी बढ़ सकती है सैलरी?

8th Pay Commission पर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बिग अपडेट! सैलरी में 70% से ज्यादा बढ़ोतरी का प्रस्ताव, जानें HRA और DA का ये नया गणित

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

प्रोजेक्शंस और अनुमानों के अनुसार एक्सपर्ट्स का मानना है कि, ‘70% से अधिक की अनुमानित वृद्धि केवल फिटमेंट फैक्टर पर नहीं, बल्कि कई मान्यताओं के संयोजन पर आधारित है। हालांकि संशोधित बेसिक पे मुख्य ड्राइवर है, लेकिन चूंकि HRA और ट्रांसपोर्ट अलाउंस जैसे घटक सीधे बेसिक पे से जुड़े होते हैं, इसलिए बेस बढ़ते ही पूरी सैलरी का पैकेज काफी बड़ा दिखने लगता है।’

वैसे ये सभी बातें इस पर निर्भर करेंगी कि अंतिम फिटमेंट फैक्टर क्या रहता है और सरकार अलाउंस के इस नए स्ट्रक्चर को किस तरह स्वीकार करती है। जब तक आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट नहीं सौंपता, इसे एक मजबूत उम्मीद या संकेतक के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

ओडिशा में यूनियनों की बैठकें समाप्त होने और पश्चिम बंगाल में नए दौर की चर्चाएं शुरू होने के साथ ही, कर्मचारियों के बीच इस 70% सैलरी हाईक के फॉर्मूले पर बहस और तेज हो गई है।