8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर पर एक्सपर्ट्स का बड़ा खुलासा, सिर्फ भत्ते बढ़ने से नहीं चलेगा काम; जानिए सैलरी बढ़ाने का असली गणित

8th CPC Fitment Factor Calculator: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। ओडिशा के भुवनेश्वर में चल रही दो दिवसीय क्षेत्रीय बैठकों (6-7 जुलाई) के बाद अब पूरा फोकस इस बात पर टिक गया है कि इस बार कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने के लिए कौन सा फॉर्मूला अपनाया जाएगा। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा पेंच फंसा है ‘फिटमेंट फैक्टर’ पर, जिसे लेकर कर्मचारी यूनियनों और सरकार के बीच अंदरखाने बहस जारी है।

आसान भाषा में कहें तो फिटमेंट फैक्टर ही वह ‘जादुई नंबर’ है जो तय करता है कि आने वाले 10 सालों में सरकारी कर्मचारियों की जेब में कितनी सैलरी आएगी। आइए समझते हैं कि एक्सपर्ट्स इस बार किस नंबर की उम्मीद कर रहे हैं और क्यों केवल भत्तों के भरोसे रहने से कर्मचारियों का बड़ा नुकसान हो सकता है।

क्या है यह फिटमेंट फैक्टर और क्यों अड़े हैं कर्मचारी?

इसे बहुत ही सरल तरीके से समझें तो फिटमेंट फैक्टर एक ‘सैलरी मल्टीप्लायर’ है। पुराने वेतन आयोग की बेसिक सैलरी को इस नंबर से गुणा करके नए वेतन आयोग की न्यूनतम बेसिक सैलरी तय की जाती है।

7वें वेतन आयोग का उदाहरण: पिछले वेतन आयोग में सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था। इसके कारण कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7000 से बढ़कर सीधे ₹18000 हो गई थी।

8वें वेतन आयोग की स्थिति: आयोग का गठन हुए 8 महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन सरकार ने अभी तक इस नंबर को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। जूनियर लेवल के कर्मचारियों की मांग है कि इस मल्टीप्लायर को इस बार और बड़ा रखा जाए ताकि महंगाई के इस दौर में उन्हें एक बेहतर सैलरी हाइक मिल सके।

एक्सपर्ट्स की दो राय: 1.90 से लेकर 2.86 तक का अनुमान

8वें वेतन आयोग में यह नंबर कितना तय होगा, इसे लेकर देश के बड़े फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के बीच दो अलग-अलग गणित चल रहे हैं:

बैंकबाजार के एक्सपर्ट के मुताबिक, फिलहाल फिटमेंट फैक्टर की रेंज 2.28 से 2.86 के बीच रहने की उम्मीद है। अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार बढ़ती महंगाई और कर्मचारियों की उम्मीदों के बीच कैसे तालमेल बैठाती है।

एक और एक्सपर्ट का मानना है कि देश की वित्तीय स्थिति और बजटीय सीमाओं को देखते हुए सरकार इस नंबर को 1.90 से 2.10 के दायरे में सीमित रख सकती है। उनके अनुसार, वित्तीय दबाव के कारण इस नंबर का 2.3 से पार जाना थोड़ा मुश्किल लग रहा है।

सिर्फ भत्ते बढ़ने से क्यों नहीं बनेगी बात?

आम तौर पर यह माना जाता है कि अगर सरकार फिटमेंट फैक्टर को थोड़ा कम भी रखती है, तो वह हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस या डियरनेस अलाउंस (DA) बढ़ाकर कर्मचारियों को खुश कर सकती है। लेकिन एक्सपर्ट्स ने इस सोच के पीछे का एक बड़ा कड़वा सच उजागर किया है।

गणित बहुत सीधा है आपका मिलने वाला HRA, महंगाई भत्ता (DA) या रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन ये सभी चीजें आपकी रिवाइज्ड बेसिक सैलरी के आधार पर तय होती हैं। अगर फिटमेंट फैक्टर कम रहेगा, तो आपकी बेसिक सैलरी की नींव ही कमजोर रह जाएगी। जब बुनियादी सैलरी ही कम बढ़ेगी, तो उस पर कैलकुलेट होने वाले भत्तों की रकम भी आनुपातिक रूप से छोटी ही रहेगी। इसलिए, भत्ते कभी भी एक कमजोर फिटमेंट फैक्टर की भरपाई नहीं कर सकते।

सैलरी का पूरा स्ट्रक्चर: किस पर कितना असर?

अगर आप सोच रहे हैं कि इस फैसले से आपकी टेक-होम सैलरी पर क्या असर पड़ेगा। समझे सैलरी कंपोनेंट 8वें वेतन आयोग में इसका गणित

फिटमेंट फैक्टर- नए वेतन ढांचे की नींव है; यह तय करेगा कि न्यूनतम बेसिक पे कितनी बढ़ेगी।

हाउस रेंट अलाउंस (HRA)- नए बेसिक पे पर ही कैलकुलेट होगा, यानी फिटमेंट फैक्टर अच्छा तो HRA भी तगड़ा।

पेंशन लाभ- रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन भी बेसिक पे के रिवीजन से लिंक है, पेंशनर्स के लिए भी यह नंबर अहम है।

सरकारी खजाना- आयोग को कर्मचारियों की खुशहाली के साथ-साथ देश के वित्तीय बजट का भी ध्यान रखना होगा।

अब आगे क्या होने वाला है?

भुवनेश्वर की दो दिवसीय बैठक खत्म होने के बाद, अब 8वें वेतन आयोग की टीम 9-10 जुलाई को कोलकाता में राज्य और केंद्र के कर्मचारी संगठनों व पेंशनर्स के साथ सीधा संवाद करेगी। आने वाले महीनों में देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही क्षेत्रीय बैठकें होंगी। आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट मध्य-2027 तक सरकार को सौंपनी है, जिसके बाद ही कर्मचारियों की अंतिम सैलरी और पेंशनर्स के भाग्य का फैसला होगा।

8th Pay Commission: पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी! न्यूनतम पेंशन 67% और उम्र के साथ 100% हाइक की मांग, देखें पूरी लिस्ट

8th Pay Commission Pension Revision Demands: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ देश के करीब 65 लाख रिटायर्ड पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण खबर आ रही है। आयोग इस समय विभिन्न राज्यों का दौरा करके कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और हितधारकों से मुलाकात कर सुझाव जुटा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले इस आयोग के कार्यक्षेत्र में 31 दिसंबर 2025 या उससे पहले रिटायर होने वाले पेंशनर्स की पेंशन की समीक्षा करना भी शामिल है। अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने पेंशन को लेकर कई बड़ी और क्रांतिकारी मांगें रखी हैं। आइए समझते हैं कि पेंशनर्स के लिए क्या-क्या मुख्य मांगें की गई हैं और इन्हें कब तक लागू किया जा सकता है।

प्रमुख कर्मचारी संगठनों की क्या हैं मांगें?

नेशनल काउंसिल फॉर जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन और ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लॉयीज फेडरेशन (AIDEF) जैसे बड़े संगठनों ने आयोग को अपनी विस्तृत मांगें सौंपी हैं:

NC-JCM: संशोधित वेतन के साथ पेंशन का स्ट्रक्चरल अलाइनमेंट किया जाए।

महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन: पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में सुधार और इसे DA से जोड़ा जाए।

AIDEF: नए रिवाइज्ड पे-स्ट्रक्चर के आधार पर सभी पेंशनर्स के लिए एक समान पेंशन लागू की जाए।

पेंशन रिवीजन से जुड़ी 5 सबसे बड़ी मांगें

हितधारकों और कर्मचारी यूनियनों द्वारा उठाई गई प्रमुख मांगें नीचे दी गई हैं:

  1. न्यूनतम पेंशन में बंपर बढ़ोतरी: पेंशनर्स के लिए न्यूनतम पेंशन को आखिरी बार मिले वेतन या आखिरी 10 महीनों के औसत वेतन का 67% किया जाए।
  2. फिटमेंट फैक्टर और डीआर में सुधार: पेंशन कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले फिटमेंट फैक्टर को संशोधित किया जाए और डियरनेस रिलीफ (DR) के ढांचे की समीक्षा करके इसे पेंशन लाभों में जोड़ा जाए।
  3. फैमिली पेंशन और ग्रेच्युटी: फैमिली पेंशन के दायरे को बढ़ाया जाए, ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा में बढ़ोतरी हो और पेंशन कम्यूटेशन यानी पेंशन की एकमुश्त रकम के नियमों में सुधार किया जाए।
  4. पेंशन स्कीम चुनने की आजादी: रिटायर्ड कर्मचारियों को उनकी सुविधा के अनुसार पुरानी पेंशन योजना (OPS), नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) या यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया जाए।
  5. उम्र बढ़ने के साथ बढ़ेगी पेंशन: जैसे-जैसे पेंशनभोगी की उम्र बढ़े, उसकी पेंशन में भी आनुपातिक बढ़ोतरी की जाए। 90 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए इसे आखिरी वेतन का 100% करने का प्रस्ताव है।

उम्र के हिसाब से कितनी पेंशन बढ़ाने की है मांग?

संगठनों ने बढ़ती उम्र के साथ पेंशनर्स की चिकित्सा और अन्य जरूरतों को देखते हुए इस प्रकार पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है:

उम्र के हिसाब से कितनी पेंशन बढ़ाने की है मांग?

आयोग का अगला शेड्यूल और देशव्यापी बैठकें

8वें वेतन आयोग ने अप्रैल, मई और जून में कई राज्यों का दौरा किया है। जुलाई में भी बैठकों का दौर जारी है:

भुवनेश्वर (ओडिशा): 6 और 7 जुलाई को आयोग यहां हितधारकों के साथ अहम चर्चा कर रहा है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन 15 जून को ही बंद हो चुके थे।

कोलकाता (पश्चिम बंगाल): इसके बाद आयोग 9 और 10 जुलाई को कोलकाता का दौरा करेगा।

मुंबई दौरा: आयोग ने मुंबई में सेंट्रल रेलवे जोन के तहत विभिन्न रेलवे विभागों का दौरा करने की इच्छा भी जताई है, ताकि कर्मचारियों की कामकाजी परिस्थितियों को करीब से समझा जा सके।

कब तक लागू होंगी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें?

आमतौर पर वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने में गठन के बाद से करीब 18 महीने का समय लगता है, जो मध्य-2027 (फरवरी या अप्रैल 2027) के आसपास पूरा होगा।

रिपोर्ट सौंपने के बाद, पिछले ट्रेंड्स बताते हैं कि केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने और इसे पूरी तरह लागू होने में 2 से 3 साल का समय लग जाता है। इसका मतलब है कि 2027 में घोषित होने वाली वेतन और पेंशन बढ़ोतरी साल 2029 या 2030 तक पूरी तरह से जमीन पर लागू हो पाएगी।

8th Pay Commission: ₹18000 से बढ़कर ₹69000 हो जाएगी बेसिक सैलरी! जानिए इस डिमांड के पीछे का पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission Minimum Basic Pay: आठवें वेतन आयोग के गठन की सुगबुगाहट के बीच केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी को लेकर एक बड़ी मांग चर्चा में है। कर्मचारी संगठनों ने सरकारी कर्मचारियों की मौजूदा न्यूनतम बेसिक सैलरी को ₹18,000 से बढ़ाकर सीधे ₹69,000 करने का प्रस्ताव रखा है।

हालांकि, सोशल मीडिया पर इस तेजी के पीछे सिर्फ 3.833 के फिटमेंट फैक्टर की चर्चा हो रही है, लेकिन असल में इस ₹69,000 की मांग के पीछे एक बहुत बड़ा इकोनॉमिक कैलकुलेशन है। नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की स्टाफ साइड ने सरकार को सौंपे ज्ञापन में न्यूनतम वेतन तय करने के पूरे फॉर्मूले को ही बदलने का सुझाव दिया है। आइए समझते हैं कि इस ₹69,000 की मांग के पीछे का पूरा गणित क्या है।

क्यों उठी फॉर्मूला बदलने की मांग?

कर्मचारी संगठनों (NC-JCM) का तर्क है कि 7वें वेतन आयोग का पुराना फॉर्मूला आज के समय में बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की वास्तविक लागत को नहीं दर्शाता है। इसलिए, उन्होंने ‘नीड-बेस्ड लिविंग वेज’ की गणना के लिए परिवार के आकार, खान-पान, मकान और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से जुड़े खर्चों के मानकों में बड़े बदलाव किए हैं।

1. 3 के बजाय 5 यूनिट का परिवार

₹69,000 की मांग के पीछे सबसे बड़ा बदलाव परिवार के आकार को लेकर है:

पुराना नियम (7th Pay Commission): इसमें केवल 3 यूनिट का परिवार माना जाता था, जिसमें कर्मचारी, उसकी पत्नी/पति और दो बच्चे शामिल थे।

नया प्रस्ताव (8th Pay Commission): कर्मचारी पक्ष ने इसे बढ़ाकर 5 यूनिट का परिवार करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें पहली बार कर्मचारी के आश्रित माता-पिता और सास-ससुर को भी शामिल करने की मांग की गई है।

नए फॉर्मूले के तहत परिवार का गणित:

  • कर्मचारी: 1 यूनिट
  • जीवनसाथी: 1 यूनिट (पहले इसे 0.8 यूनिट माना जाता था)
  • दो बच्चे: 0.8 यूनिट प्रति बच्चा (कुल 1.6 यूनिट)
  • आश्रित माता-पिता/सास-ससुर: 0.8 यूनिट
  • कुल जोड़: 5.2 यूनिट (जिसे वेतन गणना के लिए राउंड ऑफ करके 5 यूनिट माना गया है)।

2. खाने-पीने और रहन-सहन के खर्चों में बदलाव

परिवार के आकार के अलावा, रोजमर्रा के खर्चों को लेकर भी नया कैलकुलेशन दिया गया है:

कैलोरी इनटेक: इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की ताजा सिफारिशों के आधार पर अब प्रति दिन 3,490 कैलोरी के हिसाब से भोजन और कपड़ों का खर्च तय करने की मांग है।

घर का खर्च: मकान के खर्च को पुराने फॉर्मूले के 3% से बढ़ाकर सीधे 7.5% करने का प्रस्ताव है।

बिजली-पानी: ईंधन, बिजली और पानी के खर्च को कुल लागत का 20% तय किया गया है।

स्किल डेवलपमेंट: बच्चों की पढ़ाई और कौशल विकास के खर्च को 25% पर आंका गया है।

सामाजिक जिम्मेदारी: शादी-ब्याह, त्योहार, मनोरंजन और सामाजिक दायित्वों के लिए अतिरिक्त 5% खर्च जोड़ा गया है।

कैसे निकल कर आया 3.833 का फिटमेंट फैक्टर?

इन सभी नए और संशोधित खर्चों को जोड़ने के बाद, NC-JCM ने गणना की है कि एक केंद्रीय कर्मचारी की न्यूनतम मासिक बेसिक सैलरी कम से कम ₹69,000 होनी चाहिए।

फिटमेंट फैक्टर का गणित: चूंकि अभी न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 है, इसलिए ₹18,000 से ₹69,000 तक पहुंचने के लिए 3.833 का फिटमेंट फैक्टर निकल कर आता है (यानी 18,000×3.833=69,000 लगभग)।

पेंशनर्स पर भी असर: कर्मचारी संगठनों ने सिफारिश की है कि पेंशन को रिवाइज करते समय भी इसी 3.833 के फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

यह मांग हाल के महीनों में चर्चा में रहे 2 से 2.5 के फिटमेंट फैक्टर की तुलना में काफी अधिक है। हालांकि, सरकार ने अभी तक इस आंकड़े पर अपनी कोई सहमति या पसंदीदा नंबर नहीं बताया है।

आगे क्या होगा?

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ₹69,000 की न्यूनतम सैलरी और 3.833 का फिटमेंट फैक्टर अभी केवल कर्मचारी यूनियनों द्वारा रखा गया एक प्रस्ताव है। 8वां वेतन आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले सभी कर्मचारी संगठनों, विभिन्न मंत्रालयों और अन्य हितधारकों के अभ्यावेदनों की जांच करेगा। इसके बाद आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें सरकार को सौंपेगा और अंतिम फैसला केंद्र सरकार का होगा।

अगर वेतन आयोग इस नए फॉर्मूले को आंशिक रूप से भी स्वीकार करता है, तो इसका असर केवल शुरुआती सैलरी पर नहीं बल्कि पूरे पे-मैट्रिक्स पर पड़ेगा। इसके चलते सभी स्तरों के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी, भत्ते और पेंशन में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

Central Government Employees DA: केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज को 7वें पे कमीशन के तहत डीए मिलेगा या 8वें के तहत?

Central Government Employees DA: आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने में अभी वक्त लगेगा। इस बीच केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की नजरें डीए में अगले संशोधन पर लगी हैं, जिसका समय आ चुका है। लेबर ब्यूरो की तरफ से रिलीज नए इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के डेटा से पता चलता है कि इस साल मई में इंडेक्स 150.8 पर चला गया। यह अप्रैल में 149.9 था। मई तक के इनफ्लेशन के डेटा के आधार पर जुलाई से डीए में करीब 3 फीसदी वृद्धि हो सकती है।

नया पे स्केल अगले साल के अंत तक होगा लागू

आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें अगले साल के अंत तक लागू होने की उम्मीद है। हालांकि, वेतन में वृद्धि जनवरी 2026 से लागू की जा सकती है। इसका मतलब है कि एंप्लॉयीज को 18-24 महीने का एरियर मिलेगा। जुलाई 2026 के डीए का कैलकुलेशन सातवें वेतन आयोग के तहत होने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि इस साल जनवरी से जून पीरियड का डीए का कोई एरियर बकाया नहीं रहेगा।

नए पे स्केल लागू होने के बाद डीए का एरियर मिलेगा

एंप्लॉयी यूनियन के एक सूत्र ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि जुलाई 2026 के बाद 7वें वेतन आयोग के तहत डीए में होने वाली वृद्धि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद एरियर्स हो जाएंगी। इसका मतलब है कि अगर एंप्लॉयीज का सातवें वेतन आयोग के तहत जुलाई 2026 में डीए बढ़ता है और बाद में 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं तो सरकार को पहले से हो चुके डीए के पेमेंट और रिवाइज्ड पे स्केल पर आधारित डीए के बीच के फर्क का पेमेंट बतौर एरियर करना होगा।

साल में दो बार होता है डीए में संशोधन

एक साल में दो बार केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज के डीए में संशोधन होता है। यह 1 जनवरी और 1 जुलाई से लागू होता है। हालांकि, इसका ऐलान कुछ महीने की देर से होता है, लेकिन एंप्लॉयी को पहले की तारीख से रिवाइज्ड डीए का पेमेंट होता है। जुलाई 2026 के डीए का ऐलान इस साल अक्तूबर में दीवाली के करीब होने की उम्मीद है। अगर डीए 3 फीसदी बढ़ता है तो एंप्लॉयीज को मिल चुके डीए और 8वें वेतन आयोग की सिफारिश के आधार पर संसोधित डीए के बीच का फर्क बतौर एरियर मिलेगा।

यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission: फैमिली यूनिट में माता-पिता को शामिल करने की मांग, इससे बढ़ेगा मिनिमम बेसिक पे

डीए 58 से बढ़कर 60 फीसदी हो चुका है

हालांकि, जब तक सरकार लागू होने की तारीख, फिटमेंट फैक्टर, पे मैट्रिक्स और डीए ट्रांजिशन फॉर्मूला का ऐलान नहीं कर देती है, एंप्लॉयीज को इस बारे में तस्वीर साफ होने का इंतजार करना होगा। बीते 12 महीनों के एवरेज सीपीआई-आईडब्ल्यू डेटा पर डीए का कैलकुलेशन होता है। इससे पहले केंद्र सरकार ने डीए 2 फीसदी बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे डीए 58 फीसदी से बढ़कर 60 फीसदी हो गया।

8th Pay Commission Updates: क्या केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की सैलरी 283 फीसदी बढ़ने जा रही है?

आठवां वेतन आयोग केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज और पेंशनर्स के वेतन वृद्धि के बारे में अपनी सिफारिशें देने के लिए देशभर में अलग-अलग पक्षों के विचार जानने की कोशिश कर रहा है। एंप्लॉयीज यूनियंस 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे है। अगर यह मांग मान ली जाती है तो मिनिमम बेसिक पे 283 फीसदी बढ़ जाएगा। यह 18,000 रुपये से बढ़कर करीब 68,940 रुपये हो जाएगा। नए पे स्केल का फायदा केंद्र सरकार के करीब 50 लाख एंप्लॉयीज और 70 लाख पेंशनर्स को मिलेगा।

एंप्लॉयीज यूनियंस ने बताई अपनी मांगें

कनफेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एंप्लॉयीज एंड वर्कर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल में 8वें वेतन आयोग को एक व्यापक मेमोरेंडम सौंपा है। इसमें मिनिमम बेसिक पे 69,000 रुपये करने, 3.83 फिटमेंट फैक्टर, ओल्ड पेंशन स्कीम फिर से लागू करने और ज्यादा हाउस रेंट अलाउन्स (HRA) की मांग की गई है।

7वें वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर माना था

फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज और पेंशनर्स के पे में संशोधन करने के लिए होता है। रिवाइज्ड बेसिक सैलरी तय करने के लिए फिटमेंट फैक्टर के आधार पर एंप्लॉयीज के मौजूदा बेसिक पे में बदलाव किया जाता है। एंप्लॉयीज यूनियंस ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। अगर यह लागू हुआ तो मिनिमम बेसिक पे करीब 69,000 रुपये हो जाएगा। 7वें वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल किया था।

इस महीने भुवनेश्वर और कोलकाता में बैठक

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यूनियंस के प्रस्ताव मान लिए जाते हैं तो रिवाइज्ड बेसिक सैलरी का कैलकुलेशन मौजूदा बेसिक पे में 3.83 से गुणा कर किया जाएगा। हालांकि, 8वां वेतन आयोग कितना फिटमेंट फैक्टर रखता है, अभी इस बारे में कहना मुश्किल है। आयोग देश के अलग-अलग शहरों में एंप्लॉयीज के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहा है। 22-23 जून को लखनऊ की बैठक के बाद 6-7 जुलाई को भुवनेश्वर और 9-10 जुलाई को कोलकाता में बैठक होने वाली है।

सातवें आयोग ने मिनिमम बेसिक पे 18000 किया था

कुछ एंप्लॉयीज यूनियंस ने मिनिमम बेसिक पे बढ़ाकर 55,000 रुपये करने की मांग की है। उनका कहना है कि बीते कुछ सालों में कॉस्ट ऑफ लिविंग काफी बढ़ी है। खासकर हेल्थकेयर और एजुकेशन पर होने वाला खर्च काफी बढ़ा है। ऐसे में 18000 रुपये का मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे पर्याप्त नहीं रह गया है। इससे पहले के वेतन आयोग ने मिनिमम बेसिक पे करीब ढ़ाई गुना कर दिया था। 7वें वेतन आयोग ने मिनिमम बेसिक पे को 7000 से बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दिया था। यह 10 साल पहले की बात है।

यह भी पढ़ें: गोल्ड पीक से 28% फिसला, अगर आप गोल्ड लोन लेने जा रहे हैं तो ये बातें जरूर जान लें

अगले साल के मध्य में आयोग सौंप सकता है रिपोर्ट

अनुमान है कि 8वां वेतन आयोग अगले साल के मध्य में अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप देगा। इसके बाद केंद्र सरकार इस रिपोर्ट पर व्यापक विचार करेगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतिम फैसला लेने से पहले केंद्र सरकार अपनी वित्तीय स्थिति का भी ध्यान रखेगी। सरकार ने पिछले साल जीएसटी के रेट्स में कमी किए हैं। इस साल अमेरिका-ईरान में लड़ाई की वजह से क्रूड में उछाल आया था। इससे सरकार का इंपोर्ट बिल काफी बढ़ गया था।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के सामने रखी जाएंगी ये 5 बड़ी शर्तें, नए पे स्केल के इंतजार में बैठे कर्मचारियों के लिए आया अपडेट

8th Pay Commission: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, पेंशन और सेवा से जुड़े सुधारों को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। भारत सरकार का आठवां केंद्रीय वेतन आयोग देशव्यापी दौरों और हितधारकों से बातचीत के अपने अजेंडे के तहत 6 और 7 जुलाई को ओडिशा का दौरा करने जा रहा है। वित्त मंत्रालय की एक ऑफिशियल नोटिस के मुताबिक आयोग ने उन सभी केंद्र सरकार के संगठनों, संस्थानों, एसोसिएशनों और यूनियनों को ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने के लिए आमंत्रित किया है जो भुवनेश्वर दौरे के दौरान इस पैनल से बातचीत करने में रुचि रखते हैं। इस बीच कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर् के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में 8वें वेतन आयोग से मुलाकात की और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 69000 रुपये सैलरी की मांग करते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।

क्या है फिटमेंट फैक्टर का पूरा गणित?

यूनियन ने नए पे स्केल के तहत 3.83 फिटमेंट फैक्टर को लागू करने की जोरदार मांग की है। फिटमेंट फैक्टर वह मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल नया वेतन आयोग लागू होने पर कर्मचारियों के मूल वेतन को संशोधित करने के लिए किया जाता है। यूनियन के इस प्रस्ताव के तहत अगर 3.83 का फिटमेंट फैक्टर मंजूर हो जाता है तो वर्तमान न्यूनतम मूल वेतन 18000 से बढ़कर सीधे लगभग 69000 रुपये हो जाएगा।

वेतन आयोग के सामने रखी गईं ये 5 बड़ी शर्तें

कर्मचारी संगठन ने वेतन आयोग के सामने न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण शर्तें और मांगें रखी हैं-

1- ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की बहाली

प्रतिनिधित्व कर रहे कर्मचारी संगठन ने वर्तमान व्यवस्था को हटाकर पुरानी पेंशन योजना को फिर से बहाल करने की बड़ी मांग सामने रखी है।

2- हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में भारी बढ़ोतरी

शहरों की कैटिगरी के आधार पर हाउस रेंट अलाउंस की दरों को बढ़ाकर 40%, 35% और 30% करने की मांग की गई है। इसके साथ ही हाउस बिल्डिंग एडवांस और कंप्यूटर लोन जैसे कल्याणकारी एडवांस को भी दोबारा शुरू करने की बात कही गई है।

3- वेतन विसंगतियों को दूर करना और फाइनेंशियल अपग्रेडेशन

वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए पे लेवल्स का रेशनलाइजेशन किया जाए। इसके अलावा कर्मचारियों के पूरे सर्विस पीरियडके दौरान पांच फाइनेंशियल अपग्रेडेशन दिए जाएं।

4- स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार

कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से CGHS और ECHS के तहत व्यापक स्वास्थ्य देखभाल कवरेज के विस्तार की मांग रखी गई है।

5- संविदा और आकस्मिक कर्मचारियों के लिए नीतियां

सामाजिक सुरक्षा को और व्यापक बनाने के साथ-साथ संविदात्मक और आकस्मिक श्रमिकों के लिए नियमितीकरण नीतियों को लागू करने की मांग की गई है।

1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों-पेंशनभोगियों पर पड़ेगा असर

8वां वेतन आयोग वर्तमान में देश भर के हितधारकों से लगातार फीडबैक और सुझाव जुटा रहा है। इस पैनल द्वारा दी जाने वाली सिफारिशों का सीधा असर देश के लगभग 50 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारियों और करीब 65 लाख पेंशनभोगियों के भविष्य पर पड़ेगा।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के इस न्यूनतम फॉर्मूले से भी 18000 की सैलरी सीधे होगी 33000 रुपये! ये है पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission Calculate Minimum Salary Hike: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और इसकी सिफारिशों को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि नए वेतन आयोग के लागू होने पर उनकी हर महीने आने वाली इनहैंड सैलरी और पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी। इस पूरी कैलकुलेशन को तय करने वाली सबसे महत्वपूर्ण चाबी फिटमेंट फैक्टर है।

केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों की तरफ से फिटमेंट फैक्टर को 3.83 तक बढ़ाने की मांग की जा रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार वित्तीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए अपेक्षाकृत सावधानीपूर्ण और रूढ़िवादी रुख अपना सकती है। अगर सरकार सबसे न्यूनतम पैमाना यानी 1.83 का फिटमेंट फैक्टर भी अपनाती है तो भी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी 18000 रुपये से बढ़कर सीधे लगभग 33000 रुपये हो जाएगी। आइए समझते हैं इस पूरे गणित और कैलकुलेशन को।

फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह कैसे काम करता है?

फिटमेंट फैक्टर वह गणितीय मल्टीप्लायर या गुणांक होता है जिसका इस्तेमाल पुराने बेसिक पे (7th CPC) को नए संशोधित बेसिक पे (8th CPC) में बदलने के लिए किया जाता है। सरकारी यूनियनों और कर्मचारियों की नजरें इसी पर टिकी हैं क्योंकि यही आपकी बेसिक सैलरी तय करता है।

इसे निकालने का सीधा और आसान फॉर्मूला ये है: रिवाइज्ड बेसिक पे= मौजूदा बेसिक पे×फिटमेंट फैक्टर

ध्यान देने वाली बात ये है कि फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल सीधे तौर पर हाउस रेंट अलाउंस या अन्य भत्तों पर नहीं होता लेकिन यह आपकी बेसिक सैलरी को बढ़ा देता है। चूंकि महंगाई भत्ता, HRA और कई अन्य भत्ते बेसिक सैलरी के आधार पर ही तय होते हैं इसलिए बेसिक पे बढ़ते ही पूरा सैलरी पैकेज खुद-ब-खुद काफी बड़ा हो जाता है। पिछली बार 7वें वेतन आयोग के तहत सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया था। इस वजह से कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 7000 रुपये से बढ़कर सीधे 18000 रुपये हो गई थी।

न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर (1.83) पर सैलरी का पूरा कैलकुलेशन

अगर सरकार सबसे कम यानी 1.83 का फिटमेंट फैक्टर तय करती है तो अलग-अलग पे-मैट्रिक्स लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में इस तरह बढ़ोतरी देखने को मिलेगी-

लेवल-1 कर्मचारी (न्यूनतम वेतन श्रेणी): 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल-1 कर्मचारियों का मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन 18000 रुपये है। 1.83 का फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर यह बढ़कर करीब 32940 रुपये तक पहुंच जाएगा।

लेवल-2 कर्मचारी: इन कर्मचारियों का मौजूदा मूल वेतन 19900 रुपये है। इस न्यूनतम फॉर्मूले से बढ़कर लगभग 36417 रुपये हो जाएगा।

लेवल- 6 कर्मचारी: इस पद पर कार्य करने वाले कर्मचारियों का मूल वेतन 35,400 रुपये है। इस न्यूनतम फॉर्मूले से बढ़कर लगभग यह 64,782 रुपये हो जाएगा।

लेवल-10 कर्मचारी: इस स्तर के कर्मचारियों का मौजूदा मूल वेतन 56100 रुपये है। 1.83 के गुणांक से संशोधित होने के बाद 1.02 लाख रुपये से अधिक हो जाएगा।

इस पूरे कैलकुलेशन को डायग्राम के जरिए समझें

WhatsApp Image 2026-07-03 at 9.53.46 AM

वहीं 8वें वेतन आयोग में अगर फिटमेंट फैक्टर को 2 गुना, 2.5 गुना या 3 गुना तय किया जाता है, तो अलग-अलग पे-मैट्रिक्स लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी पर इसका सीधा असर इस प्रकार दिखेगा:

WhatsApp Image 2026-07-03 at 9.54.27 AM

पेंशनभोगियों पर भी होगा बड़ा असर

न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर लागू होने की स्थिति में पेंशनभोगियों की भी बेसिक पेंशन इसी अनुपात में बढ़ जाएगी। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत जो न्यूनतम पेंशन 9000 रुपये तय है, वह इस नए फॉर्मूले के लागू होने के बाद बढ़कर लगभग 16470 रुपये हो जाएगी।

यह केवल एक न्यूनतम अनुमान है, बढ़ सकती है सीमा

एक्सपर्ट्स और कर्मचारी संगठनों का मानना है कि 1.83 का फिटमेंट फैक्टर केवल एक सबसे रूढ़िवादी या न्यूनतम अनुमान है। महंगाई और जीवन स्तर में सुधार को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि अंतिम फिटमेंट फैक्टर अधिकत रह सकता है। फिलहाल 8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी यूनियनों ने इसे 3.83 तक करने की मांग रखी है। 8वें वेतन आयोग के लिए आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर पर अभी सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। वर्तमान में आयोग सभी स्टेकहोल्डर्स और कर्मचारी यूनियनों की मांगों पर विचार-विमर्श, मूल्यांकन और कंसल्टेशन मीटिंग्स (जैसे लखनऊ, भुवनेश्वर, कोलकाता) लगातार कर रहा है। आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगा जिसके बाद केंद्रीय कैबिनेट उस पर अपनी मुहर लगाएगी।

सरकार का आखिरी फैसला पूरी तरह से देश की राजकोषीय क्षमता पर निर्भर करेगा क्योंकि सरकार को यह भी देखना होगा कि सैलरी और पेंशन में इतनी बड़ी बढ़ोतरी के बाद वित्तीय देनदारियों का देश के बजट पर क्या असर पड़ेगा। अंतिम फैसला आने के बाद ही केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने वाली वास्तविक वेतन वृद्धि पूरी तरह स्पष्ट होगी।

यह भी पढ़ें: EPF में 1800 रुपये से ज्यादा कटवाना ठीक या VPF, PPF, NPS और Mutual Fund SIP बेहतर? समझिए पूरा गणित

8th Pay Commission: केन्द्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग पर ये है 5 बड़े अपडेट, जुलाई में होने वाली हैं कई अहम बैठकें

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ी खबर आ रही है। सरकार द्वारा 3 नवंबर 2025 को गठित किया गया यह आयोग अब अपने सबसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुका है। जुलाई के महीने में आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर कई बड़ी बैठकों और दौरों का शेड्यूल जारी किया गया है।

18 महीने के कुल कार्यकाल में से करीब 8 महीने का समय बीत चुका है और अब सिर्फ 10 महीने बचे हैं, जिसके बाद आयोग अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगा। इस बीच सैलरी हाइक, फिटमेंट फैक्टर और भत्तों को लेकर क्या चल रहा है, इसे 5 बड़े पॉइंट्स में समझें:

1. जुलाई में भुवनेश्वर और कोलकाता में होंगी अहम बैठकें

आयोग इस समय देश भर में घूम-घूमकर अलग-अलग राज्यों और विभागों से सुझाव और सबूत जुटा रहा है। इसी कड़ी में जुलाई 2026 में दो बड़े दौरे तय किए गए हैं। आयोग 6-7 जुलाई 2026 को भुवनेश्वर में और 9-10 जुलाई 2026 को कोलकाता में कर्मचारी यूनियनों, मंत्रालयों और स्टेकहोल्डर्स के साथ सीधे मुलाकात करेगा। इन बैठकों से भविष्य का सैलरी स्ट्रक्चर तय करने में मदद मिलेगी।

2. कौन तय कर रहा है आपकी नई सैलरी?

इस हाई-लेवल कमिटी की कमान चेयरपर्सन जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के हाथों में है। उनके साथ इस पैनल में प्रोफेसर पुलक घोष (पार्ट-टाइम मेंबर) और श्री पंकज जैन (मेंबर-सेक्रेटरी) शामिल हैं, जो कर्मचारियों और पेंशनर्स से मिले ज्ञापनों का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। बता दें कि सुझाव भेजने की आखिरी तारीख को बढ़ाकर 15 जून 2026 किया गया था, जो अब बंद हो चुकी है।

3. फिटमेंट फैक्टर पर सस्पेंस बरकरार

कर्मचारियों की सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि इस बार ‘फिटमेंट फैक्टर’ क्या होगा। आपको बता दें कि छठे वेतन आयोग में यह 1.86 था, जबकि 7वें वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर 2.57 किया गया था। हालांकि, 8वें वेतन आयोग के लिए फिटमेंट फैक्टर का फॉर्मूला अभी तक फाइनल नहीं हुआ है, इस पर अभी भी चर्चा चल रही है।

4. पेंशनर्स को भी मिलेगा बड़ा तोहफा

यह आयोग सिर्फ मौजूदा कर्मचारियों के लिए नहीं है। इसके तहत पेंशनर्स की पेंशन में संशोधन और सुधार को लेकर भी समीक्षा की जा रही है। रिटायर हो चुके कर्मचारियों को महंगाई के इस दौर में कितनी राहत मिलनी चाहिए और उनका नया बेसिक स्ट्रक्चर क्या होगा, यह भी आयोग की अंतिम सिफारिशों में शामिल रहेगा।

5. कब लागू होगी नई सैलरी और कब आएगी रिपोर्ट?

कैबिनेट नोट के अनुसार, आयोग का कार्यकाल मई 2027 के आसपास समाप्त होगा, यानी साल 2027 के मध्य में आयोग अपनी फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंप सकता है। जहां तक इसके लागू होने की बात है, तो चर्चाओं के अनुसार नए पे-साइकिल के लिए 1 जनवरी 2026 को रेफरेंस डेट माना जा रहा है, लेकिन वास्तविक रूप से इसे कब लागू किया जाएगा और पिछला एरियर मिलेगा या नहीं, इस पर अंतिम मुहर केंद्रीय कैबिनेट ही लगाएगी।

8th Pay Commission: वेतन आयोग का वो सीक्रेट फॉर्मूला, जो पूरी तरह बदल देगा कर्मचारियों का पे-मैट्रिक्स; जानिए क्या है ये

8th Pay Commission Family Unit Formula: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग के गठन और सैलरी रिवीजन को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ रही है। इस बार फिटमेंट फैक्टर के अलावा एक और चीज है जो कर्मचारियों की सैलरी तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकती है, और वह है ‘फैमिली यूनिट’ का फॉर्मूला।

आमतौर पर लोग सोचते हैं कि सैलरी सिर्फ महंगाई के हिसाब से बढ़ती है, लेकिन हकीकत में न्यूनतम मूल वेतन तय करने के पीछे वेतन आयोग का एक खास गणित काम करता है। आइए समझते हैं कि यह ‘फैमिली यूनिट’ क्या है और इसके बदलने से केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में कितना बड़ा उछाल आ सकता है।

क्या होता है ‘फैमिली यूनिट’ का नियम और इसका महत्व?

बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी के मुताबिक, ‘फैमिली यूनिट’ वह मानक या मानकर चली गई धारणा है जिसका इस्तेमाल वेतन आयोग किसी सरकारी कर्मचारी के घर को चलाने की न्यूनतम लागत का अनुमान लगाने के लिए करता है।

7वें वेतन आयोग का ने फैमिली यूनिट को 3.0 माना था। इसका मतलब था कि इस यूनिट में कर्मचारी, उसकी पत्नी और दो बच्चों के जरूरी खर्चों को ही शामिल किया गया था। इस फॉर्मूले में कर्मचारी पर निर्भर बुजुर्ग माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्यों के खर्चों को सीधे तौर पर शामिल नहीं किया गया था।

बदलते समय के साथ क्यों उठ रही है इसे बढ़ाने की मांग?

पिछले कुछ वर्षों में पारिवारिक ढांचा और जरूरतें काफी बदल चुकी हैं। आज के समय में ज्यादातर सरकारी कर्मचारियों के कंधों पर अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और उनके इलाज का बड़ा खर्च होता है। बढ़ती महंगाई के बीच हेल्थकेयर, रोजमर्रा के सामान और बच्चों की पढ़ाई की लागत काफी बढ़ गई है। यही वजह है कि कई कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग से इस ‘फैमिली यूनिट’ के दायरे को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

फैमिली यूनिट बढ़ने से कैसे बढ़ेगी बेसिक सैलरी?

अगर 8वां वेतन आयोग फैमिली यूनिट के आंकड़े को 3.0 से ऊपर संशोधित करता है, तो जीवन यापन की न्यूनतम लागत का अनुमान भी अपने आप बढ़ जाएगा। उदाहरण से समझिए:

अगर पिछले आयोग (7th PC) में माता-पिता को शामिल करके फैमिली यूनिट को 3.0 के बजाय 4.6 माना गया होता, तो कर्मचारियों की मिनिमम बेसिक सैलरी ₹18000 के बजाय करीब ₹27600 तय होती।

8वें वेतन आयोग में असर: चूंकि पूरा पे-मैट्रिक्स इसी न्यूनतम बेसिक सैलरी के इर्द-गिर्द तैयार होता है, इसलिए अगर इस बार बेंचमार्क बढ़ा, तो इसका कैस्केडिंग इफेक्ट दिखेगा। यानी निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक के सभी पे-लेवल के कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों में भारी बढ़ोतरी होगी।

यह पैरामीटर कोई सामान्य गणितीय आंकड़ा नहीं है, बल्कि कर्मचारियों की जेब पर सीधा असर डालने वाली एक महत्वपूर्ण चाबी है। 8वां वेतन आयोग अपनी बैठकों और जुलाई 2026 में होने वाले विचार-विमर्श में इस फॉर्मूले पर गंभीर चर्चा कर सकता है।

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट! वेतन आयोग की जुलाई बैठक से पहले सामने आईं ये 5 बड़ी मांगें

8th Pay Commission Latest Updates: देश के करीब 55 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था NC-JCM ने इस बार केवल पैसों की डिमांड नहीं की, बल्कि सर्विस कंडीशन में मौजूद उन 5 बड़ी विसंगतियों को टारगेट किया है जो लंबे समय से चुभ रही थीं। सबसे बड़ी बात यह है कि इन मांगों को कैबिनेट सचिव ने खुद आगे बढ़ाया है, जिससे यह साफ है कि जुलाई में भुवनेश्वर और कोलकाता की बैठकों में केवल चर्चा नहीं, बल्कि आर-पार का फैसला होने की उम्मीद है।

इन मांगों में पेंशन रिवीजन, सैलरी में विसंगतियां और मैटरनिटी बेनिफिट जैसे बड़े मुद्दे शामिल हैं। आइए जानते हैं कि कर्मचारियों की ये 5 मांगें क्या हैं और जुलाई में होने वाली बैठकें क्यों इतनी महत्वपूर्ण हैं।

8वें वेतन आयोग के सामने रखी गईं ये 5 मुख्य मांगें

NC-JCM की बैठक के दौरान स्टाफ साइड की तरफ से कई लंबे समय से लटके मुद्दों को उठाया गया, जिन्हें अब 8वें वेतन आयोग के पास भेजने या संबंधित विभागों द्वारा समीक्षा करने की सिफारिश की गई है। ये 5 बड़ी मांगें ये हैं:

हर 5 साल में पेंशन का रिवीजन: पेंशनर्स की मांग है कि हर पांच साल में उनकी पेंशन की समीक्षा की जाए और इसके साथ ही मिलने वाले ‘फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस’ को बढ़ाकर ₹3000 प्रति माह किया जाए।

फैमिली पेंशन में कटौती न हो: कर्मचारियों की मांग है कि किसी कर्मचारी या पेंशनर की मृत्यु के बाद उनकी फैमिली पेंशन को घटाकर मृतक की नोशनल पे का 30 फीसदी न किया जाए, बल्कि इसमें बढ़ोतरी की जाए।

फायरफाइटर्स के वेतन में समानता: केंद्रीय विभागों में काम करने वाले फायरफाइटर्स के पे-स्केल को ‘दिल्ली फायर सर्विस’ के बराबर लाकर समानता दी जाए।

MACP के बाद पे-फिक्सेशन का लाभ: जिन कर्मचारियों को एमएसीपी का लाभ मिलने के बाद प्रमोशन मिलता है, उन्हें FR-22(1)(a)(1) के तहत पे-फिक्सेशन का पूरा फायदा दिया जाए।

महिला कर्मचारियों को मैटरनिटी बेनिफिट: महिला केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ‘मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961’ के सभी प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाए।

ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) और अन्य मुद्दों पर भी दबाव

इन 5 मांगों के अलावा, कर्मचारी संगठनों ने सरकार और 8वें वेतन आयोग से कुछ अन्य पुरानी मांगों पर भी दोबारा विचार करने का अनुरोध किया है। इसमें मौजूदा पेंशनभोगियों की पेंशन में सुधार, कम्यूटेड पेंशन को समय से पहले बहाल करना और सबसे महत्वपूर्ण ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को वापस लागू करना शामिल है।

जुलाई में कहाँ और कब होंगी अहम बैठकें?

8वें वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट (https://8cpc.gov.in/) के अनुसार, आयोग अगले महीने विभिन्न कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों के साथ आमने-सामने बैठकर चर्चा करने जा रहा है। यह बैठकें दो बड़े शहरों में आयोजित होंगी:

भुवनेश्वर: 6 और 7 जुलाई को चर्चा होगी।

कोलकाता: 9 और 10 जुलाई को बैठकें की जाएंगी।

अगर इन बैठकों में अन्य यूनियनों ने भी इन मांगों का पुरजोर समर्थन किया, तो इन पर एक आम सहमति बन सकती है। हालांकि, आयोग ने अभी तक सैलरी में बढ़ोतरी या फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।

फाइनल रिपोर्ट आने में कितना समय बाकी है?

3 नवंबर 2025 को गठित हुए 8वें वेतन आयोग के लिए जुलाई की ये बैठकें एक बड़ा मील का पत्थर साबित होंगी, क्योंकि आयोग के गठन को लगभग 8 महीने पूरे होने वाले हैं। नियमों के मुताबिक, आयोग के पास सरकार को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए अब करीब 10 महीने का समय और बचा हुआ है। ऐसे में जुलाई के इस दौर की बातचीत से यह तय होगा कि आने वाले समय में केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों का ढांचा कैसा रहने वाला है।