Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत की संभावना से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, ब्रेंट $72 प्रति बैरल के करीब

Crude Oil Price: मंगलवार को तेल की कीमतों में गिरावट आई क्योंकि इन्वेस्टर्स दोहा में होने वाली US-ईरान बातचीत के नतीजे का इंतज़ार कर रहे थे, जबकि दोनों पक्षों ने वीकेंड में मिसाइल हमले किए, जिससे चार महीने से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के मकसद से किया गया अंतरिम सीजफ़ायर दबाव में आ गया।

मंगलवार को एक्सपायर होने वाला अगस्त डिलीवरी का ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.03%, या 75 सेंट गिरकर $72.40 प्रति बैरल पर आ गया। ज़्यादा एक्टिवली ट्रेड होने वाला सितंबर ब्रेंट कॉन्ट्रैक्ट 0.54%, या 40 सेंट गिरकर $73.51 प्रति बैरल पर आ गया।

इस बीच, US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.66%, या 47 सेंट गिरकर $70.32 प्रति बैरल पर आ गया।

आज कच्चे तेल की कीमतों को क्या चला रहा है?

ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी के हवाले से रॉयटर्स ने सोमवार को कहा कि ईरानी और ओमानी एक्सपर्ट्स आने वाले दिनों में होर्मुज स्ट्रेट के जरिए ट्रांजिट रूट को फिर से तय करने पर बातचीत शुरू कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ईरान जहाजों को तय शिपिंग लेन से बाहर जाने से रोकने की कोशिश करेगा।

साथ ही, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बघाई ने साफ किया कि आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ किसी भी लेवल पर कोई मीटिंग या बातचीत तय नहीं है।

संभावित बातचीत को लेकर अलग-अलग संकेतों ने 17 जून के सीज़फ़ायर समझौते की कमज़ोरी को दिखाया, जिसने होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए दुनिया भर में तेल शिपमेंट में रुकावट डालने वाली दुश्मनी को कुछ समय के लिए रोक दिया था और नवंबर में होने वाले कांग्रेस चुनावों से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक पॉलिटिकल टेस्ट खड़ा कर दिया था।

इज़राइल अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया से बाहर रहा है और उसने सार्वजनिक रूप से इस समझौते से खुद को दूर रखा है।

शिपिंग डेटा के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर नए हमलों और अमेरिका और ईरान के बीच नए हमलों के बावजूद, मिडिल ईस्ट के एनर्जी प्रोड्यूसर कच्चे तेल और LNG कार्गो लोड करना जारी रखे हुए हैं।

Crude Oil Price: US- ईरान शांति वार्ता अटकी, क्रूड में उबाल, $70 के ऊपर बना है भाव

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Iran-US Talk: ट्रंप को भाव नहीं दे रहा ईरान, कहा- अमेरिका के साथ फिलहाल कोई मीटिंग तय नहीं,अधर में लटकी दोहा शांति वार्ता

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को घोषणा की थी कि अमेरिका और ईरान मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में बातचीत करने वाले हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने इस बैठक का अनुरोध किया है। मगर ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत या बैठक की खबरों और अटकलों को पूरी तरह खारिज कर

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Asian Markets Today: एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार, निक्केई में बढ़त,US-ईरान बातचीत पर फोकस

एशियाई बाज़ार

वॉल स्ट्रीट पर रात भर की तेज़ी के बाद, मंगलवार को एशियाई बाज़ार ज़्यादातर ऊपर कारोबार कर रहे थे। जापान का निक्केई 225 0.29% और टॉपिक्स 0.17% बढ़ा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.92% गिरा, जबकि कोसडैक 0.88% गिरा। हांगकांग हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स ने कम शुरुआत का संकेत दिया।

गिफ्ट निफ्टी 24,011 के लेवल के आसपास कारोबार कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोज से लगभग 38 पॉइंट्स का प्रीमियम था, जो भारतीय स्टॉक मार्केट इंडेक्स के लिए हल्की पॉजिटिव शुरुआत का संकेत देता है।

वॉल स्ट्रीट

US स्टॉक मार्केट सोमवार को तेज़ी से ऊपर बंद हुआ, जिसमें डाउ जोन्स ने प्रमुख टेक्नोलॉजी शेयरों में तेज़ी के कारण रिकॉर्ड ऊंचाई पर क्लोजिंग की।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 306.63 पॉइंट्स या 0.59% बढ़कर 52,182.74 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 86.41 पॉइंट्स या 1.18% बढ़कर 7,440.43 पर पहुंच गया। नैस्डैक कंपोजिट 522.53 पॉइंट्स या 2.07% बढ़कर 25,820.14 पर बंद हुआ।

एनवीडिया के स्टॉक की कीमत 1.27% बढ़ी, AMD के शेयर 3.43% बढ़े, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 1.18% गिरे, अमेज़न के शेयर 3.20% बढ़े, एप्पल के स्टॉक की कीमत 0.72% गिरी, अल्फाबेट के शेयर 4.96% बढ़े, मेटा 2.24% बढ़ा, टेस्ला के स्टॉक की कीमत 8.46% बढ़ी और स्पेसएक्स के शेयर 7.15% बढ़े।

US-ईरान बातचीत

ईरान ने उन खबरों से इनकार किया है कि आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ उसकी कोई बातचीत तय है। इस बीच, व्हाइट हाउस ने घोषणा की कि US के स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीनियर सलाहकार, जेरेड कुशनर, ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत के लिए मंगलवार को दोहा जाएंगे।

जापान फैक्ट्री आउटपुट

जापान का फैक्ट्री आउटपुट मई में पिछले महीने की तुलना में उम्मीद से कम गति से बढ़ा। मई में इंडस्ट्रियल आउटपुट पिछले महीने की तुलना में 0.5% बढ़ा, जबकि औसत बाजार अनुमान 1.1% बढ़ोतरी का था। यह बढ़ोतरी का दूसरा महीना था।

आज सोने का रेट

सोने की कीमतों में 1% से ज़्यादा की गिरावट आई और यह लगातार चौथे महीने गिरावट के लिए तैयार था। स्पॉट गोल्ड की कीमत 1.5% गिरकर $3,957.74 प्रति औंस हो गई और यह 12.7% की मासिक गिरावट के लिए तैयार थी। अगस्त डिलीवरी के लिए US गोल्ड फ्यूचर्स 1.7% गिरकर $3,971.60 पर आ गया। स्पॉट सिल्वर की कीमतें 2.4% गिरकर $56.89 प्रति औंस हो गईं।

क्रूड ऑयल की कीमतें

दोहा में US-ईरान बातचीत की उम्मीद से पहले क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 1.03% गिरकर $72.40 प्रति बैरल हो गई, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.83% गिरकर $70.16 पर आ गया।

डॉलर

डॉलर इंडेक्स, जो US करेंसी को छह दूसरी यूनिट्स के मुकाबले मापता है, पिछले सेशन में 0.26% गिरने के बाद 101.6 पर था, लेकिन दूसरी तिमाही में 1.3% बढ़ने की उम्मीद है। येन 40 साल के सबसे निचले स्तर 162.27 प्रति डॉलर पर आ गया। यूरो $1.14165 पर था, जबकि स्टर्लिंग पिछली बार $1.3251 पर था।

 

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Iran US Deal: कतर पर टिकी दुनिया की नजर… ‘तेहरान के साथ होगी वार्ता’, ट्रंप ने किया बड़ा दावा, होर्मुज में तनाव के बाद ईरान ने किया था इनकार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि ईरान ने हालिया तनाव के बाद अमेरिका के साथ बैठक की मांग की है। यह बैठक मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में होनी है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा, “ईरान ने बैठक की मांग की है। यह कल दोहा में होगी!”हालांकि ईरान

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Iran-US War: गुड न्यूज! अमेरिका और ईरान हमले रोकने पर हुए सहमति, कतर में होगी होर्मुज पर वार्ता

Iran-US War: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच एक गुड न्यूज आई है। अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर के बावजूद दोनों देशों की तरफ से किए गए हमले के बाद यह सहमति बनी है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी का हवाला देते हुए ‘एक्सियोस’ (Axios) ने रिपोर्ट दी है कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपने विवाद को सुलझाने के लिए मंगलवार 30 जून को कतर में बैठक करेंगे।

यह घटनाक्रम कई दिनों से चल रहे सैन्य टकराव के बढ़ने के बाद पहली बड़ी कूटनीतिक सफलता हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्ष दोहा में बातचीत आगे बढ़ने के दौरान सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमत हुए हैं। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “हमने सभी तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया है।”

कतर में होर्मुज पर होगी चर्चा

कतर की राजधानी दोहा में होने वाली बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े तनाव को सुलझाने पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है। यह दुनिया के सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री रूट्स में से एक है, जहां हालिया हमलों ने शिपिंग को बाधित किया है।

इसके अलावा, न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने रिपोर्ट दी है कि 17 जून को हुए 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत दोनों पक्षों के बीच तकनीकी बातचीत जारी रहेगी। एक वरिष्ठ अधिकारी का हवाला देते हुए रॉयटर्स ने बताया, “MoU के सभी क्षेत्रों पर तकनीकी बातचीत जारी रहेगी। दोनों पक्ष फिलहाल पीछे हटेंगे और जहाज स्वतंत्र रूप से आ-जा सकेंगे।” यह उस समझौते का जिक्र है जिसके तहत होर्मुज को समुद्री ट्रैफिक के लिए फिर से खोला जाएगा।

ईरान के हमले के बाद शुरू हुआ युद्ध

गुरुवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कार्गो जहाज पर ईरानी प्रोजेक्टाइल (मिसाइल या रॉकेट) के हमले के बाद लड़ाई फिर से शुरू हो गई थी। इसमें दोनों देशों ने एक-दूसरे पर संघर्ष विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। रविवार तड़के ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइलें और ड्रोन दागे। इससे कुछ समय पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर इस्लामिक रिपब्लिक संघर्ष खत्म करने के समझौते का सम्मान करने में विफल रहता है, तो उसका अस्तित्व खत्म हो जाएगा।

ट्रंप ने दी चेतावनी

होर्मुज जलडमरूमध्य में एक टैंकर पर हमले के कुछ घंटों बाद अमेरिकी सेना ने ईरान पर नए हमले भी किए थे। यह एक प्रमुख वैश्विक ऊर्जा शिपिंग रूट्स है जिसे तेहरान ने संघर्ष के दौरान काफी हद तक बंद कर दिया था। ‘Axios’ की रिपोर्ट प्रकाशित होने से पहले, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी थी कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई तेज कर सकता है।

ट्रंप ने लिखा, “एक समय ऐसा आ सकता है जब हम अब समझदारी से काम न ले पाएं, और हमें उस काम को सैन्य रूप से पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़े जिसे हमने बहुत सफलतापूर्वक शुरू किया था।” उन्होंने आगे कहा, “अगर ऐसा होता है, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व ही नहीं रहेगा!

राजनयिक कोशिशों को झटका लगा

17 जून के अंतरिम शांति समझौते का मकसद लड़ाई रोकना, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत बड़े मुद्दों पर बातचीत का रास्ता बनाना था। स्विट्जरलैंड में मध्यस्थता वाली बातचीत का एक दौर पहले ही हो चुका था, जिसकी अगुवाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसदीय स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने की थी।

वाशिंगटन ने तेहरान पर लगे प्रतिबंध भी हटा दिए थे। लेकिन इन राजनयिक कोशिशों के बावजूद सैन्य टकराव फिर से शुरू हो गया। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि उसकी नौसेना और वायु सेना ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। उसने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमलों ने संघर्ष-विराम का उल्लंघन किया है।

IRGC ने चेतावनी दी कि अमेरिकी हमलों के कारण सभी राजनयिक प्रक्रियाएं पूरी तरह से रुक जाएंगी। जबकि उसके नौसैनिक कमांड ने कहा कि इस इलाके में अमेरिकी ठिकानों को आने वाले दिनों में नरक जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा।

एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को पुष्टि की है कि ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था। लेकिन कहा कि किसी अमेरिकी के हताहत होने या बड़े नुकसान की खबर नहीं है। हालांकि स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

इलाके में तनाव बरकरार

इजरायल ने रविवार को दक्षिणी लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के ठिकानों पर एक और हमला किया। इससे पहले शनिवार को भी लेबनान के साथ हुए हालिया संघर्ष-विराम समझौते के बावजूद एक अलग हमला किया गया था। ईरान का कहना है कि अगर व्यापक क्षेत्रीय समझौते को बनाए रखना है, तो लेबनान में लड़ाई खत्म होनी चाहिए।

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वहीं, दूसरी ओर बहरीन ने कहा कि ईरान के हमले से मुहर्रक प्रांत में एक रिहायशी इमारत को नुकसान पहुंचा है। लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इमरजेंसी मीटिंग बुलाने की मांग की है।

Iran-US War: अमेरिका ने ईरान पर लगातार दूसरी बार किया हमला, ट्रंप बोले- ‘तेहरान का अब अस्तित्व ही नहीं रहेगा’

Iran-US War: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से युद्ध शुरू हो गया है। अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान पर हमले किए हैं। इन हमलों की वजह एक कमर्शियल जहाज पर हुआ हमला बताया गया है। शनिवार 27 जून को हुए ये नए हमले इस बात का संकेत हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौते के तहत लागू हुआ सीजफायर (युद्धविराम) अब टूटने की कगार पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि ईरान ने पनामा के तेल टैंकर पर ड्रोन हमला कर सीजफायर को तोड़ा है।

अमेरिकी सेना ने सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान समझौते को नहीं मानता तो उसकी अस्तिव ही नहीं रहेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार तड़के कहा कि अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर नए सैन्य हमले किए हैं। उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा युद्धविराम समझौते का फिर से उल्लंघन करने के बाद की गई।

‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा, “अमेरिकी विमानों ने युद्धविराम समझौते का ‘फिर से’ उल्लंघन करने के कारण ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज ठिकानों तथा तटीय रडार साइटों पर हमला किया है!” उन्होंने आगे कहा, “बहुत मुमकिन है कि वे कभी न सीखें! एक समय ऐसा आ सकता है जब हम समझदारी से काम न ले पाएं और हमें उस काम को मिलिट्री के ज़रिए पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़े, जिसे हमने बहुत कामयाबी से शुरू किया था।”

ट्रंप ने ईरान को दी कड़ी चेतावनी

ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “अगर ऐसा हुआ, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा!” अमेरिकी सेना के अनुसार, ये हमले ट्रंप के निर्देश पर किए गए थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि शनिवार को एक कमर्शियल जहाज पर हमले के बाद अमेरिकी सैन्य विमानों ने ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया।

ईरान में कहां किया हमला?

CENTCOM ने बताया कि इस ऑपरेशन में ईरान के मिलिट्री सर्विलांस इंफ्रास्ट्रक्चर, कम्युनिकेशन सिस्टम, एयर डिफेंस साइट्स, ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटीज और माइन-लेयरिंग क्षमताओं को निशाना बनाया गया। बाद में यह साफ किया गया कि इन हमलों में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और उसके आसपास कई जगहों पर ईरान के 10 मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाया गया।

सेना ने कहा कि ईरान के पास सीजफायर समझौते का सम्मान करने का मौका था। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके बजाय, उसकी सेनाओं ने कथित तौर पर ‘किकू’ (Kiku) नाम के ऑयल टैंकर पर वन-वे ड्रोन से हमला किया।

अमेरिका ने हमलों को ऑयल टैंकर पर हुए हमले से जोड़ा

CENTCOM के अनुसार, जब ‘किकू’ होर्मुज स्ट्रैट से गुज़र रहा था, तब उस पर हमला हुआ। उस समय उसमें 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) लदा हुआ था। यह टैंकर पिछले हफ्ते की शुरुआत में कतर के एक ऑयल फील्ड से निकला था और ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) में स्थित संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एक बंदरगाह की ओर जा रहा था।

न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की शिप-ट्रैकिंग जानकारी के अनुसार, ऐसा लग रहा था कि यह जहाज ओमान के तट के पास वाले रास्ते का इस्तेमाल कर रहा था। यह रूट ईरान द्वारा अपने जलक्षेत्र से तय किए गए रास्ते के विकल्प के तौर पर उभरा है।

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जल्द भारत आने वाले है ट्रंप! अमेरिकी विदेश मंत्री का बड़ा ऐलान, फाइनल स्टेज में है ‘ट्रेड डील’

India-US Relations: भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों को लेकर एक बड़ा पॉजिटिव अपडेट आया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिए हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत का दौरा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर भी बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

समाचार एजेंसी ‘आईएएनएस’ से बातचीत के दौरान मार्को रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते बेहद शानदार चल रहे हैं। ट्रंप के संभावित भारत दौरे पर उन्होंने कहा, ‘हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं कि अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप भारत आएं। भारत और अमेरिका बेहद करीबी पार्टनर और सहयोगी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच के रिश्ते इससे बेहतर नहीं हो सकते, जो कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं।’

राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप का पहला भारत दौरा!

अगर यह दौरा तय समय पर होता है, तो व्हाइट हाउस में दूसरी बार सत्ता संभालने के बाद डोनाल्ड ट्रंप की यह पहली भारत यात्रा होगी। इससे पहले ट्रंप फरवरी 2020 में भारत आए थे। हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर एक द्विपक्षीय बैठक हुई थी, जो पिछले 16 महीनों में दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की मुलाकात थी।

इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने 12-13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति ट्रंप के निमंत्रण पर अमेरिका का दौरा किया था। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के उद्घाटन के बाद पीएम मोदी की वह पहली अमेरिकी यात्रा थी, जिसमें व्यापार, रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग पर व्यापक चर्चा हुई थी।

ट्रेड डील पर कहां फंसा है पेंच?

दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अंतिम दौर में है, लेकिन भारतीय वार्ताकार कुछ शर्तों पर पूरी स्पष्टता चाहते हैं:

धारा 301 टैरिफ: भारत ने अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 के तहत लगाए जाने वाले टैरिफ पर अधिक स्पष्टता मांगी है। भारतीय पक्ष का तर्क है कि डील फाइनल होने से पहले भारत को अन्य व्यापारिक साझेदारों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलनी चाहिए।

अमेरिकी ट्रेजरी का रुख: अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि ये टैरिफ धारा 301 के तहत पिछले स्तरों पर वापस आ जाएंगे।

हाल के महीनों में क्यों बढ़ा था तनाव?

पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के व्यापारिक और कूटनीतिक रिश्तों में कुछ खटास देखी गई थी, जिसे सुधारने के लिए विदेश मंत्री मार्को रुबियो क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के सिलसिले में भारत आए हुए हैं:

रूसी तेल और भारी टैरिफ: राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में भारतीय आयातों पर कुल 50% का भारी टैरिफ लगा दिया था। इसमें 25% का पारस्परिक टैरिफ और भारत द्वारा रूस से लगातार तेल खरीदने के कारण लगाया गया 25% का अतिरिक्त जुर्माना शामिल था, जो 27 अगस्त 2025 से लागू हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के पारस्परिक टैरिफ को खारिज किए जाने के बाद, वर्तमान में भारतीय निर्यातों पर केवल 10% का बेसलाइन टैरिफ लग रहा है, जबकि वाशिंगटन अपनी व्यापार नीतियों की समीक्षा कर रहा है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर भी हैं वैचारिक मतभेद

व्यापार के अलावा दोनों देशों के बीच एक अन्य कूटनीतिक मतभेद भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर को लेकर भी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उन्होंने ही भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराया था।

हालांकि, भारत ने ट्रंप के इस दावे को हमेशा सिरे से खारिज किया है। भारत का स्पष्ट स्टैंड है कि यह सीजफायर दोनों देशों के बीच बिना किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के, सीधे डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) स्तर की बातचीत के जरिए हुआ था।

हैदराबाद में बनी Donald Trump Avenue, ट्रंप बोले- ऐसा सम्मान पाने वाला पहला अमेरिकी राष्ट्रपति

trump avenue hyderabad

Hyderabad Donald Trump Avenue: हैदराबाद में अमेरिकी दूतावास से सटी सड़क का नाम बदलकर डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू कर दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैदराबाद में उनके नाम पर सड़क का नाम रखे जाने पर बेहद खुश नजर आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पहले किसी अमेरिकी राष्ट्रपति को इस तरह से सम्मानित नहीं किया गया। ALSO READ: ईरान के मिसाइल ठिकानों पर अमेरिकी हमला, तेहरान का पलटवार; मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा बढ़ा

 

तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और भारत में अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने 24 जून को इस सड़क का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया था। ट्रंप एवेन्यू में कई अंतरराष्ट्रीय टेक्नोलॉजी कंपनियां भी मौजूद हैं। इनमें माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और अमेजॉन जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं।

 

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, 'भारत के हैदराबाद में नया 'डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू' इस तरह सम्मानित होने वाला मैं पहला अमेरिकी राष्ट्रपति हूं। धन्यवाद'। ट्रंप ने उद्घाटन समारोह की तस्वीर भी शेयर की है। ALSO READ: Top News: वेनेजुएला में भूकंप से 920 मौतें, ईरान पर अमेरिकी हमला, हैदराबाद में ट्रंप एवेन्यू

गौरतलब है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने दिसंबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर सड़क का नामकरण करने का प्रस्ताव रखा था। अमेरिकी वाणिज्य दूतावास से सटी इस सड़क को पहले US कॉन्सुलेट रोड के नाम से जाना जाता था। 

edited by : Nrapendra Gupta

मिडिल ईस्ट में फिर छिड़ी जंग? अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद ईरान की खुली धमकी- ‘वाशिंगटन को भुगतना होगा अंजाम’

US Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में अभी शांति समझौता पूरी तरह लागू भी नहीं हुआ था कि अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई है। हाल ही में हुए सीजफायर के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही थी, लेकिन इसी बीच अमेरिकी फाइटर जेट्स ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी कर दी है।

इस हमले के बाद ईरान भड़क उठा है। ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने शनिवार को अमेरिका को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि इस हरकत के बाद वाशिंगटन को सिर्फ ‘पीछे हटना और पछताना’ पड़ेगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि अब अमेरिका का यह ‘ब्लेम गेम’ यानी एक-दूसरे पर दोष मढ़ने का खेल नहीं चलेगा। आइए जानते हैं कि इस ताजा विवाद की असल वजह क्या है।

क्यों भड़का विवाद? अमेरिका ने क्यों किए ईरान पर हमले?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने शुक्रवार को ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज लोकेशन्स के साथ-साथ तटीय रडार साइटों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। अमेरिका ने साफ किया कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा एक कमर्शियल जहाज पर किए गए हमले का बदला है।

25 जून की घटना: अमेरिकी सेना के मुताबिक, 25 जून को ईरान ने ओमान के तट के पास जलडमरूमध्य से गुजर रहे सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज ‘एम/वी एवर लवली’ पर वन-वे अटैक ड्रोन से हमला किया था।

रणनीतिक रास्ता: यह हमला होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हुआ, जो दुनिया के कुल ऊर्जा व्यापार के लगभग पांचवें हिस्से का मुख्य रास्ता है। इसी के जवाब में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक्शन लिया।

ईरान का पलटवार: ‘बातचीत के बीच में पीठ पर छुरा घोंपा’

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व कमांडर और सांसद इब्राहिम अजीजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अमेरिका को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा, ‘अमेरिका ने एक बार फिर बातचीत के बीच में ही ईरान पर हमला कर दिया है। नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति ने दिखा दिया है कि वह बातचीत या सीजफायर के सिद्धांतों को नहीं मानते हैं।’

अजीजी ने चेतावनी दी कि सीजफायर का यह लापरवाह उल्लंघन अमेरिका को भारी पड़ेगा। अजीजी के इस बयान के कुछ ही घंटों बाद IRGC ने भी ऐलान कर दिया कि उसने देश के दक्षिणी हिस्से पर हुए अमेरिकी हमलों के जवाब में पूरे क्षेत्र में फैले अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

‘हिंसा का जवाब हिंसा से मिलेगा’

इस बीच अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान को दोटूक चेतावनी दी है। उन्होंने ‘X’ पर लिखा, ‘ईरान ने सीजफायर समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और हमने उसका सम्मान किया। अगर उन्हें एमओयू (MOU) के लागू होने के तरीके को लेकर कोई आपत्ति या असहमति थी, तो वे बात कर सकते थे। लेकिन हिंसा का जवाब हमेशा हिंसा से ही दिया जाएगा।’ वेंस ने ईरान से अपील की कि वे विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाएं।

नाजुक मोड़ पर बातचीत: क्या फिर छिड़ेगी जंग?

यह पूरा टकराव बेहद नाजुक समय पर हुआ है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को खत्म करने के लिए राजनयिक बातचीत चल रही थी। पिछले हफ्ते ही दोनों पक्षों के बीच सीजफायर का ऐलान हुआ था, जिसके बाद एक व्यापक फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने के लिए 60 दिनों का बातचीत का समय तय किया गया था। लेकिन इन हमलों के बाद शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है और मिडिल ईस्ट में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं।

होर्मुज में फिर बढ़ी टेंशन: ट्रंप का दावा…ईरान ने सीजफायर का किया उल्लंघन, जहाजों पर किया ड्रोन अटैक

अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे कारोबारी जहाजों पर ड्रोन से हमला करने का आरोप लगाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज जानकारी दी कि ईरान ने सीजफायर तोड़ दिया है। उसने होर्मुज से गुजर रहे एक जहाज पर ड्रोन अटैक कर दिया। जवाबी कार्रवाई में अमेरिका सेना ने भी पलटवार किया और ईरान के तीन ड्रोन मार गिराए। ट्रंप ने ईरान की इस कार्रवाई को मूर्खतापूर्ण बताया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति का बड़ा दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि एक मालवाहक जहाज पर हमला किया गया, जबकि अमेरिकी सेना ने तीन अन्य ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान ने इस अहम समुद्री मार्ग से गुजर रहे जहाजों पर चार आत्मघाती ड्रोन भेजे, जो दोनों देशों के बीच हुए सीजफायर का खुला उल्लंघन है। यह आरोप ऐसे समय में सामने आया है, जब हाल ही में दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिशें की गई थीं, लेकिन क्षेत्र में हालात अब भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

ईरान ने जहाजों पर किए ड्रोन हमले

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे जहाजों पर कम से कम चार आत्मघाती ड्रोन से हमला किया। ट्रंप के अनुसार, इनमें से एक ड्रोन एक बड़े मालवाहक जहाज के ऊपरी हिस्से से टकराया। इस हमले में जहाज को नुकसान पहुंचा, लेकिन वह अपना सफर जारी रखने में सफल रहा।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना ने बाकी तीन ड्रोन को समय रहते मार गिराया। ट्रंप ने इसे अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम (सीजफायर) का खुला उल्लंघन बताया। हालांकि, ट्रंप ने उस जहाज का नाम सार्वजनिक नहीं किया जिस पर कथित हमला हुआ था। उन्होंने हमले में हुए नुकसान या किसी के घायल होने की भी कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी।

 जहाज पर हमले से बढ़ी चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए सीजफायर के बाद पहली बड़ी चुनौती तब सामने आई, जब गुरुवार को सिंगापुर के झंडे वाले एक मालवाहक जहाज पर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय कथित हमला हुआ। इस घटना को दोनों देशों के बीच पिछले सप्ताह हुए उस समझौते के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य लंबे समय से जारी तनाव को कम करना और दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक पर सामान्य आवाजाही बहाल करना था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि यह हमला ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने किया। बताया जा रहा है कि यह घटना ईरान की उस चेतावनी के कुछ घंटों बाद हुई, जिसमें बिना मंजूरी वाले समुद्री मार्गों का इस्तेमाल करने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई थी।