USA Independence Day: गर्मियों के कहर में झुलसा 4 जुलाई का जश्न, फीकी पड़ी आजादी की 250वीं वर्षगांठ

USA Independance Day: भीषण गर्मी में अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ झुलस गई। अमेरिका के मध्य और पूर्वी हिस्सों में शुक्रवार को भीषण गर्मी की लहर ने 4 जुलाई यानी स्वतंत्रता दिवस को होने वाले जश्न बुरी तरह प्रभावित किया। राजधानी वॉशिंगटन समेत कई जगहों पर अधिकारियों को दर्जनों परेड, संगीत कार्यक्रम और आतिशबाजी के शो रद्द करने पड़े या टालने पड़े। न्यूज एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक गर्मी की इस लहर में वॉशिंगटन के नेशनल मॉल में आयोजित ग्रेट अमेरिकन स्टेट फेयर भी झुलस गया जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका के 250वीं वर्षगांठ के समारोहों का प्रमुख हिस्सा था।

46 डिग्री गर्मी ने किया जश्न फीका

शुक्रवार की देर रात नेशनल पार्क सर्विस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए वॉशिंगटन की इंडिपेंडेंस डे परेड रद्द करने का ऐलान किया था। यह परेड शनिवार अमेरिकी समयानुसार सुबह 10:30 बजे शुरू होनी थी। मौसम विभाग ने अनुमान लगाया था कि हीट इंडेक्स 115 डिग्री फ़ारेनहाइट (लगभग 46 डिग्री सेल्सियस) तक पहुंच सकता है। अमेरिका में गर्मियों का कहर हीटडोम के चलते है, जो एक हाई-प्रेशर सिस्टम है। इसमें गर्म हवा एक क्षेत्र में फंस जाती है और ह्यूमिडिटी बढ़ जाती है।

अमेरिका 4 जुलाई को ब्रिटेन से 1776 में आजादी के ऐलान पर हर साल स्वतंत्रता दिवस मनाता है। इस दिन अमेरिकी बापबेक्यू, परेड और आतिशबाजी जैसे कार्यक्रमों के लिए इकट्ठा होते हैं। हालांकि इस बार गर्मियों ने इसका जश्न फीका कर दिया और धड़ाधड़ प्रोग्राम कैंसल हो रहे। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक फिलाडेल्फिया में अधिकारियों ने भीषण गर्मी के चलते शहर के जश्न के मुख्य कार्यक्रम ‘सैल्यूट टू इंडिपेंडेंस परेड’ को रद्द कर दिया। यह फैसला गुरुवार को तापमान के 103 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंचने के बाद लिया गया। इससे पहले इतना तापमान साल 1901 में था।

गर्मी के चलते अमेरिका में दूसरी जगहों पर भी कार्यक्रम रद्द हुए या टल गए। न्यू जर्सी के हैडन टाउनशिप ने भी अपनी सालाना 4 जुलाई की परेड रद्द कर दी तो अपस्टेट न्यूयॉर्क के वॉटरटाउन ने अपना इंडिपेंडेंस डे कॉन्सर्ट और आतिशबाजी का कार्यक्रम रद्द कर दिया। इसके अलावा बोस्टन में अधिकारियों ने नदी के किनारे होने वाले सालाना आतिशबाजी के जश्न में एंट्री का समय चार घंटे आगे बढ़ाकर दोपहर के बजाय शाम 4 बजे कर दिया।

अमेरिका में कैसी है हालत?

भीषण गर्मी के चलते अमेरिका में पावरग्रिड पर दबाव बढ़ा। अमेरिका के सबसे बड़े पावर ग्रिड ऑपरेटर पीजेएम ने इमरजेंसी कंवर्जेशन प्रोग्राम के ग्राहकों को बिजली बिजली की खपत कम करने को कहा है। पीजेएम मिड-अटलांटिक, दक्षिण और वाशिंगटन डीसी में 6.7 करोड़ लोगों को बिजली सप्लाई करती है। पीजेएम ने अब लोगों से बिजली कम खर्च करने का आग्रह किया है। न्यूयॉर्क में शुक्रवार देर दोपहर तक 17 हजार लोग बिना बिजली के थे। मांग बढ़ने पर कंपनी ने न्यूयॉर्क शहर और वेस्टचेस्टर काउंटी के ग्राहकों से बिजली बचाने की अपील की। न्यूयॉर्क शहर में गर्मी से गोंद पिघलने के कारण जूते मैनहट्टन की सड़कों पर चिपक रहे थे।

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Donald Trump ने शेयर की फर्जी गैस स्टेशन की तस्वीर, पेट्रोल की कीमतें कम होने के किया दावा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया। इसमें उन्होंने दावा किया कि पेट्रोल की कीमतें कम हो रही हैं। उन्होंने ‘फ्रीडम फ्यूल नेटवर्क’ नाम की एक नई गैस स्टेशन चेन की तस्वीर भी साझा की। लेकिन इसके साथ ट्रंप ने फर्जी गैस स्टेशन की तस्वीर पोस्ट करदी।ट

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Mojtaba Khamenei: इस डर की वजह से पिता अली खामेनेई के जनाजे में शामिल नहीं होंगे नए सुप्रीम लीडर मोजतबा! ईरान से आया बिग अपडेट

Mojtaba Khamenei: ईरान से एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आ रहा है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के अपने पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के जनाजे में सार्वजनिक रूप से शामिल होने की संभावना बेहद कम है। इस फैसले के पीछे सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंताएं और संभावित हमलों का डर बताया जा रहा है क्योंकि इस समय इजरायल के साथ तनाव काफी बढ़ा हुआ है। इंडिया टुडे की फॉरेन अफेयर्स एडिटर गीता मोहन के साथ एक विशेष इंटरव्यू में अयातुल्ला हकीम इलाही ने बताया कि मोजतबा खुद जनता से मिलना चाहते हैं लेकिन सुरक्षा एजेंसियां उन्हें ऐसा न करने की सख्त सलाह दे रही हैं।

तेहरान के लिए रवाना होने से पहले इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बातचीत करते हुए इलाही ने कहा कि मैं पिछले हफ्ते ईरान में था और मेरे कुछ दोस्तों से मिला जिन्होंने मोजतबा से मुलाकात की थी। उन्होंने बताया कि मोजतबा बाहर आना चाहते हैं और लोगों से मिलना चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां उन्हें इसकी इजाजत नहीं दे रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह बेहद खतरनाक है और वे उनके लिए सुरक्षा मुहैया नहीं करा सकते। मुझे लगता है कि वह बाहर नहीं आएंगे।

कड़े सुरक्षा पहरे के बीच होगा अंतिम संस्कार

अली खामेनेई के जनाजे में हजारों शोककुल लोगों और विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के तेहरान पहुंचने की उम्मीद है। यह समारोह इस्लामिक गणराज्य ईरान के लिए एक धार्मिक और राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षण बनने जा रहा है। इस साल की शुरुआत में ईरान, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) के बीच हुए युद्ध के बाद से सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। संभावित जवाबी कार्रवाई या टारगेटेड अटैक्स की आशंकाओं को देखते हुए अधिकारियों द्वारा अंतिम संस्कार के जुलूस के आसपास व्यापक सुरक्षा बल तैनात किए जाने की उम्मीद है।

इलाही ने बताया कि खामेनेई की मौत के बाद ईरान में माहौल बेहद भावुक है। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए एक बहुत-बहुत बड़ा नुकसान है। उन्हें लगता है कि उन्होंने अपनी आत्मा, अपने प्राण खो दिए हैं। उनका मानना है कि कोई भी उनकी जगह नहीं ले सकता। उन्होंने यह भी बताया कि ईरान और विदेशों से समर्थक दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए यात्रा कर रहे हैं। वे एकजुटता दिखाने और यह कहने आ रहे हैं कि हम आपके साथ हैं, हम आपको कभी नहीं भूलेंगे और आपके रास्ते पर चलेंगे।

मोजतबा की पब्लिक अपियरनेंस नहीं होने पर उठ रहे सवाल

मोजतबा खामेनेई की संभावित अनुपस्थिति से उनकी स्थिति और उनके अधिकार को लेकर कयासबाजी और तेज होने की संभावना है। 28 फरवरी को हुए अमेरिका-इजरायल हवाई हमले में अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद मोजतबा को सुप्रीम लीडर बनाया गया था। तब से वह लोगों के बीच से दूर रहे हैं। हालांकि उन्होंने एक दर्जन से अधिक लिखित संदेश जारी किए हैं और आधिकारिक संचार चैनलों के माध्यम से सक्रिय उपस्थिति बनाए रखी है लेकिन अभी तक उनकी कोई भी प्रमाणित सार्वजनिक उपस्थिति सामने नहीं आई है।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि जिस हवाई हमले में खामेनेई परिवार के कई सदस्य और मोजतबा की पत्नी जहरा हदाद अदेल मारी गई थीं, उसी हमले में मोजतबा खुद भी घायल हो गए थे। उनकी इस लंबी अनुपस्थिति ने राजनयिक और खुफिया हलकों में उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा स्थिति दोनों को लेकर अटकलों को हवा दी है। अगर वह अपने पिता के जनाजे में शामिल नहीं होते हैं तो उनके नेतृत्व और सार्वजनिक वैधता पर सवाल और गहरे हो सकते हैं।

आपको बता दें कि अपने पिता के विपरीत मोजतबा खामेनेई ने अपने करियर का अधिकांश समय पर्दे के पीछे बिताया है। अली खामेनेई सुप्रीम लीडर बनने से बहुत पहले ही एक प्रमुख राजनीतिक व्यक्ति थे। उन्होंने 1989 में देश का सर्वोच्च पद संभालने से पहले 1981 से 1989 तक ईरान के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया था। इसके उलट मोजतबा ने कभी भी औपचारिक रूप से कोई सरकारी पद नहीं संभाला है। विश्लेषकों का मानना है कि उन्होंने सुप्रीम लीडर के कार्यालय के भीतर एक प्रभावशाली भूमिका निभाई और शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ करीबी संबंध बनाए रखे।

साल 2019 में संयुक्त राज्य अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने मोजतबा पर प्रतिबंध लगा दिया था और उन पर ईरान के कट्टरपंथी क्षेत्रीय एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद करने का आरोप लगाया था। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप था कि उन्होंने ईरान के बाहरी ऑपरेशन्स और आंतरिक सुरक्षा तंत्र का समर्थन करने के लिए कुद्स फोर्स और बासिज मिलिशिया के साथ मिलकर काम किया था। उनका नाम ईरान के राजनीतिक विवादों में भी बार-बार सामने आया है।

क्या मोजतबा कायम कर पाएंगे पिता जैसा दबदबा?

भले ही मोजतबा सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन विश्लेषक इस बात को लेकर बंटे हुए हैं कि क्या वह अपने पिता जैसा प्रभाव हासिल कर पाएंगे। खुफिया आकलनों का हवाला देने वाली ब्लूमबर्ग की एक जांच के मुताबिक मोजतबा ने तेल राजस्व और अपतटीय निवेशों से जुड़े नेटवर्क के माध्यम से पर्याप्त संपत्ति और प्रभाव बनाया है। कई जानकारों का तर्क है कि संस्थागत शक्ति सीधे तौर पर व्यक्तिगत अधिकार में नहीं बदल जाती। यूनिवर्सिटी ऑफ ओटावा के प्रोफेसर थॉमस जूनो ने कहा कि मोजतबा के पास अभी भी उस कद की कमी है जो उनके पिता ने दशकों में बनाया था। जूनो ने कहा कि मोजतबा खामेनेई की भूमिका अभी अस्पष्ट है। इस मोड़ पर इसकी संभावना बहुत कम है कि उनके पास उतना प्रभाव हो जितना उनके पिता का हुआ करता था।

तनाव के बावजूद ईरान जता रहा है भरोसा

जब इलाही से इजरायल की ओर से मिल रही नई धमकियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हालिया सैन्य तनाव के बावजूद ईरान मजबूत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कई देश ईरान की तारीफ कर रहे थे और कह रहे थे कि ईरान युद्ध जीत गया। ईरान अब भी बहुत मजबूत है और डटने के लिए तैयार है। फिलहाल सभी की निगाहें तेहरान पर टिकी हैं कि क्या मोजतबा खामेनेई ईरान के आधुनिक राजनीतिक इतिहास के इस सबसे महत्वपूर्ण मोड़ पर आखिरकार सार्वजनिक रूप से सामने आते हैं या नहीं।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक नए बोइंग 747-8 एयरोप्लेन में अपनी पहली यात्रा पूरी की। ये विमान कतर ने डोनाल्ड ट्रंप को गिफ्ट किया है। फिलहाल ये बेहद आलीशान जहाज अस्थायी रूप से एयर फोर्स वन के रूप में अपनी सेवाएं देगा। इसे उड़ता हुआ महल या पैलेस इन द व्हील्स भी कहा जा रहा है। खास बात ये है कि इसे ट्रंप की जरूरतों और पसंद के मुताबिक कस्टमाइज भी किया गया है।

इसमें हैं इन-बिल्ट मसाज चेयर्स और सोने की कलाकृति

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक इस 400 मिलियन डॉलर (40 करोड़ डॉलर) के बोइंग 747-8 विमान के अंदर लग्जरी और मॉडर्न टेक्नोलॉजी का अद्भुत तालमेल है। इस जहाज के अंदर रीक्लाइनिंग सीटें लगाई गई हैं। ये सीटें इन-बिल्ट मसाज फंक्शन से लैस हैं। विमान के इंटीरियर में जगह-जगह सोने की नक्काशी और सुनहरे रंग का इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ ही लाइट फिक्सचर्स भी सुनहरे रंग के हैं। जहाज के अंदर का हिस्सा बेज, क्रीम और भूरे रंगों से सजाया गया है। इसमें लेगरूम को काफी बड़ा किया गया है और हर सीट के लिए पर्सनल एंटरटेनमेंट स्क्रीन के साथ चार्जिंग पोर्ट दिए गए हैं। वाइट हाउस के स्टाफ द्वारा साझा की गई तस्वीरों में विमान के भीतर एक कॉन्फ्रेंस रूम, सोफा सीटिंग और अमेरिकी स्मारकों की तस्वीरों से सजी दीवारें दिखाई दी हैं।

36 साल पुराने विमानों से काफी बड़ा और आधुनिक

यह नया विमान उन पुराने बोइंग विमानों की तुलना में एक बहुत बड़ा अपग्रेड है जो पिछले 36 वर्षों से एयर फोर्स वन के रूप में सेवाएं दे रहे थे। नया बोइंग 747-8 विमान पिछले 747 विमान की तुलना में लगभग 20 फीट अधिक लंबा है और इसका विंगस्पैन भी करीब 30 फीट अधिक चौड़ा है। इस विमान के बाहरी हिस्से पर नीले, लाल, सुनहरे और सफेद रंग का पेंट स्कीम किया गया है। रिपोर्ट का दावा है कि इस कलर कंबिनेशन का चयन खुद डोनाल्ड ट्रंप ने किया था।

नॉर्थ डकोटा के लिए भरी पहली उड़ान, परिवार भी रहा साथ

इस नए जहाज ने डोनाल्ड ट्रंप को व्हाइट हाउस से नॉर्थ डकोटा पहुंचाया। ट्रंप यहां थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन के लिए गए थे। अपनी इस पहली यात्रा पर निकलने से पहले ट्रंप ने विमान की जमकर तारीफ की और इसे अब तक का सबसे शानदार कमर्शियल प्लेन तक बता दिया। ट्रंप ने कहा कि देश को इस पर बहुत गर्व होना चाहिए, यह बेहद खूबसूरत है। इस यात्रा में ट्रंप के साथ उनके बेटे एरिक और डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ-साथ उनकी बहू बेटिना भी मौजूद थीं।

कतर के गिफ्ट पर उठे सवाल, ट्रंप ने दिया जवाब

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कतर से इस विमान को उपहार के रूप में स्वीकार किए जाने के बाद से ही यह विमान लगातार जांच और विवादों के घेरे में है। आलोचकों ने इस पूरे समझौते की नैतिकता और विमान की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यात्रा पर रवाना होने से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने इन सभी चिंताओं को खारिज कर दिया। ट्रंप ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि यह विमान एक ऐसे देश (कतर) से आया है जिसने हमारे साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया है।

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‘We’ll have a threesome’, अपने बेटों को लेकर दिया डोनाल्ड ट्रंप का अजीब बयान वायरल, फिर मुस्कुराते हुए बोले, “मैं मजाक कर रहा था”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक कार्यक्रम में ऐसा मजाक किया जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। मजाक के दौरान उन्होंने अनजाने में एक संवेदनशील शब्द इस्तेमाल कर दिया।डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यक्रम में अपने बेटों लेकर किए गए मजाक से लोग हैरान रह गए। बुधवार को नॉर्

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Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत के बीच लगातार तीसरे सेशन में गिरे क्रूड के दाम, $71 के नीचे आया ब्रेंट का भाव

Crude Oil Price: ईरान और अमेरिका के बीच पॉजिटिव बातचीत की खबरों से कच्चे तेल में लगातार तीसरे सेशन में नरमी देखने को मिल रहा। क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से कच्चे तेल की शिपमेंट बढ़ी और US और ईरान के बीच इनडायरेक्ट बातचीत में प्रोग्रेस के संकेत दिखे।

सितंबर डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड पिछले दो सेशन में 3% से ज़्यादा गिरने के बाद $71 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट $68 प्रति बैरल के आसपास था।

आज कच्चे तेल की कीमतों को क्या चला रहा है?

ब्लूमबर्ग ने US अधिकारी के हवाले से कहा कि स्ट्रेटेजिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट से तेल शिपमेंट बढ़कर 10 मिलियन बैरल प्रति दिन से ज़्यादा हो गया है, जो समुद्री ट्रैफिक को रोकने की ईरान की घटती क्षमता को दिखाता है। इस बीच, US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने चल रही बातचीत में हुई प्रोग्रेस का स्वागत किया।

कतर ने कहा कि अगले राउंड की बातचीत ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद जल्द से जल्द तय की जाएगी, जो लड़ाई शुरू होने पर एक एयर स्ट्राइक में मारे गए थे। ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया कि ये सेरेमनी 4 जुलाई से शुरू होंगी और कई दिनों तक चलेंगी।

2020 के बाद से तिमाही में सबसे बड़ी गिरावट के बाद तेल की कीमतों में गिरावट जारी है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल का शिपमेंट – जो फारस की खाड़ी के प्रोड्यूसर्स को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने वाला एक ज़रूरी रास्ता है – वीकेंड में हुई झड़पों के बावजूद बिना रुके जारी रहा। हालांकि कुल सप्लाई कुछ हद तक सीमित है, यूनाइटेड अरब अमीरात ने अल्टरनेटिव लॉजिस्टिक्स के ज़रिए एक्सपोर्ट को लड़ाई से पहले के लेवल पर वापस ला दिया है, जबकि अमेरिकी तेल की कमज़ोर मांग के बीच अमेरिका के बड़े कच्चे तेल के बेंचमार्क डिस्काउंट पर आ गए हैं।

कतर में बातचीत से पहले, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग पर कंट्रोल बनाए रखने के अपने इरादे को फिर से पक्का किया, और अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम और लेबनान में लड़ाई सहित कुछ खास रुकावटों पर ज़ोर दिया, जो 60-दिन के सीज़फ़ायर पीरियड के दौरान बातचीत को मुश्किल बना रहे हैं। इस बीच, अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को वर्जीनिया में रिपोर्टर्स से बात करते हुए दोहराया कि ईरान को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए।

Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत में अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ब्रेंट क्रूड $73 के पास

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Trump Crypto Income: डोनाल्ड ट्रंप ने क्रिप्टो से कितनी कमाई की? फाइलिंग के बाद सामने आया एक साल का ये आंकड़ा होश उड़ा देगा

Donald Trump Income news: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सालाना वित्तीय जानकारी सामने आई है। आंकड़े ऐसे हैं जो आपको चौंकने पर मजबूर कर सकते हैं। बतौर अमेरिकी राष्ट्रपति अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही साल में ट्रंप ने क्रिप्टो और मीमकॉइन से जुड़े बिजनेस के जरिए कम से कम $1.4 बिलियन (1.4 अरब डॉलर) की बंपर कमाई की है। ‘ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स’ के अनुसार, क्रिप्टो से हुई यह कमाई राष्ट्रपति ट्रंप की आय का अब तक का सबसे बड़ा जरिया बनकर उभरी है। इसके बाद उनकी कुल नेटवर्थ बढ़कर $7.6 बिलियन (7.6 अरब डॉलर) पर पहुंच गई है।

927 पन्नों के दस्तावेज में क्रिप्टो से बंपर कमाई का खुलासा

हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘सीएनबीसी टीवी 18’ की एक रिपोर्ट में एजेंसियों के इनपुट के हवाले से बताया गया है कि ट्रंप की वित्तीय जानकारी के 927 पन्नों के आधिकारिक दस्तावेज सामने आए हैं। इससे पता चलता है कि डॉनल्ड ट्रंप की इस अरबों डॉलर की कमाई के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े क्रिप्टो सोर्स रहे हैं।

1- वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल: इस क्रिप्टो फर्म की सेल्स से ट्रंप ने $594 मिलियन (59.4 करोड़ डॉलर) से अधिक की कमाई की है। इस फर्म के को-फाउंडर्स में ट्रंप के बेटे और उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ शामिल हैं। विटकॉफ के बेटे जैक इस फर्म के सीईओ हैं।

2- मीमकॉइन बिजनेस और रॉयल्टी: ट्रंप के मीमकॉइन बिजनेस सीआईसी डिजिटल एलएलसी (CIC Digital LLC) ने $636 मिलियन (63.6 करोड़ डॉलर) की भारी इनकम की है। यह पूरी कमाई सेलिब्रेशन कॉइन्स के साथ हुए एक लाइसेंस समझौते से मिली रॉयल्टी के जरिए हुई है। सीआईसी ने डिजिटल वॉलेट में कम से कम $60 मिलियन (6 करोड़ डॉलर) मूल्य की विभिन्न क्रिप्टोकरेंसी रखने का भी खुलासा किया है।

3- स्टेबलकॉइन होल्डको: इस कंपनी की हिस्सेदारी बेचने से अमेरिकी राष्ट्रपति को $197 मिलियन (19.7 करोड़ डॉलर) की मोटी रकम हासिल हुई है।

गोल्फ क्लब और मार-ए-लागो रिसॉर्ट से भी करोड़ों की आय

क्रिप्टो के अलावा डोनाल्ड ट्रंप के पारंपरिक बिजनेस और संपत्तियों से भी अच्छी खासी कमाई हुई है। ट्रंप के प्रसिद्ध ‘मार-ए-लागो’ रिसॉर्ट से उन्हें $77 मिलियन (7.7 करोड़ डॉलर) की आय हुई है। उनके नॉर्दर्न वर्जीनिया गोल्फ क्लब से $25 मिलियन (2.5 करोड़ डॉलर) की कमाई दर्ज की गई है।

एक साल में दोगुने हुए व्यक्तिगत निवेश, आलोचकों ने उठाए सवाल

वित्तीय फाइलिंग के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 के अंत तक ट्रंप द्वारा किए गए व्यक्तिगत निवेशों की संख्या बढ़कर 6181 हो गई है। साल 2024 के अंत में यह संख्या 3314 थी। यानी निवेश की संख्या करीब दोगुनी हो चुकी है। निवेशों में आए इस भारी उछाल के बाद आलोचकों और विरोधियों ने एक बार फिर चिंता जताना शुरू कर दिया है। आलोचकों का आरोप है कि ट्रंप राष्ट्रपति पद का फायदा उठाकर मुनाफा कमा रहे हैं और अपने राष्ट्रपति पद के दायित्वों तथा वित्तीय हितों को आपस में मिला रहे हैं।

ट्रंप ऑर्गेनाइजेशन की सफाई: थर्ड-पार्टी संभाल रही है सारा काम

आलोचनाओं के बीच ट्रंप ऑर्गेनाइजेशन की तरफ से इस पर सफाई दी गई है। कंपनी का कहना है कि ट्रंप की होल्डिंग्स और निवेश का प्रबंधन अब पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से थर्ड-पार्टी वित्तीय संस्थानों द्वारा किया जा रहा है। सभी निवेश संबंधी फैसले उन्हीं संस्थानों के पास सुरक्षित हैं। ट्रेडिंग पूरी तरह से एक ऑटोमेटेड प्रक्रिया के तहत की जा रही है। ट्रंप ऑर्गेनाइजेशन ने दावा किया है कि इन लेन-देन में न तो खुद डॉनल्ड ट्रंप न उनके परिवार का कोई सदस्य और न ही उनकी कंपनी की कोई भूमिका है।

ट्रंप पर करोड़ों डॉलर का कर्ज और अदालती हर्जाना भी बकाया

इस बंपर कमाई और अरबों की नेटवर्थ के बीच ट्रंप की फाइलिंग में कई बड़े बकाए कर्ज भी सूचीबद्ध किए गए हैं। इसमें लेखिका ई जीन कैरोल द्वारा उनके खिलाफ जीते गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े दो अदालती फैसले शामिल हैं। इनका भुगतान होना बाकी है।

ट्रंप पर रियल एस्टेट से जुड़े तीन बड़े लोन भी बकाया हैं। इनमें ट्रंप टॉवर और ट्रंप नेशनल डोरल पर $50 मिलियन (5 करोड़ डॉलर) से अधिक की रकम के मॉर्टगेज शामिल हैं। ट्रंप ने साल 2025 में ऐसे तीन मॉर्टगेज लोन पूरी तरह चुका दिए हैं, जिनकी वैल्यू कभी $50 मिलियन (5 करोड़ डॉलर) से अधिक हुआ करती थी।

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Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत में अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ब्रेंट क्रूड $73 के पास

US-ईरान युद्ध: बुधवार, 1 जुलाई को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में तेजी आई, जब ईरान ने कहा कि वह US अधिकारियों के साथ सीधी बातचीत नहीं करेगा, जिससे दोनों देशों के बीच चार महीने से चल रहे संघर्ष को कुछ समय के लिए रोकने वाले नाज़ुक सीज़फ़ायर को लेकर नई चिंताएं बढ़ गई।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 50 सेंट, या 0.69% बढ़कर $73.45 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 63 सेंट, या 0.91% बढ़कर $70.13 प्रति बैरल हो गया।

आज कच्चे तेल की कीमतों में क्या तेजी है?

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के दामाद, जेरेड कुशनर, और स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ मंगलवार को दोहा पहुँचे, जिसे व्हाइट हाउस ने हाई-लेवल बातचीत बताया। हालाँकि, ईरान और मेज़बान देश कतर ने साफ़ किया कि US डेलीगेशन सीधे ईरानी प्रतिनिधियों के बजाय मीडिएटर्स से बात करेगा। कतर ने कहा कि प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी उन अधिकारियों में शामिल थे जो विटकॉफ और कुशनेर से मिले थे।

बुधवार की बढ़त के बावजूद, तिमाही आधार पर भारी गिरावट के बाद तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड साल की पहली और दूसरी तिमाही के बीच लगभग $45 प्रति बैरल गिरा, जो 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल संकट के बाद सबसे बड़ी तिमाही गिरावट है। इसी दौरान US क्रूड फ्यूचर्स लगभग $31 प्रति बैरल गिरा, जो 2020 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है, जब COVID-19 महामारी ने ग्लोबल फ्यूल डिमांड को बुरी तरह प्रभावित किया था।

यह तेज गिरावट तब आई जब मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने की दिशा में हुई प्रगति ने उस रिस्क प्रीमियम को उलट दिया जिसने संघर्ष के दौरान कीमतों को बढ़ा दिया था।

मंगलवार को जारी रॉयटर्स के एक पोल से पता चला कि एनालिस्ट्स ने ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार 2026 के लिए अपने तेल कीमतों के अनुमान को कम किया, जिससे लगातार पांच महीनों से ऊपर की ओर बदलाव का सिलसिला खत्म हो गया। होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने से ग्लोबल तेल सप्लाई में लंबे समय से रुकावटों की चिंता कम हो गई है। इस बीच, US के वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने फिर कहा कि वॉशिंगटन ईरान को होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाजों पर ट्रांज़िट फीस लगाने की इजाज़त नहीं देगा। उन्होंने कहा कि यह स्थिति ईरान के स्ट्रेटेजिक रूप से ज़रूरी इस पानी के रास्ते का इस्तेमाल करने वाले “जहाजों पर टोल वसूलने” से खत्म नहीं होगी।

Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत की संभावना से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, ब्रेंट $72 प्रति बैरल के करीब

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ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी को झटका, बर्थराइट सिटिजनशिप पर आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा झटका दिया है। US सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यूनाइटेड स्टेट्स में बर्थराइट सिटिजनशिप पर रोक लगाने की वाली उनकी कोशिश को खारिज कर दिया। अदालत का यह फैसला अमेरिका की इमिग्रेशन नीति और संविधान के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के अनुसार, अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी बच्चों को नागरिकता मिलने का अधिकार है। अदालत ने इस पुराने संवैधानिक प्रावधान को फिर से सही माना।

इस साल दूसरी बार हुआ है जब कोर्ट ने ट्रंप की किसी बड़ी पहल को अमान्य कर दिया है, इससे पहले फरवरी में उनके बड़े ग्लोबल टैरिफ को खत्म करने का फैसला लिया गया था।

ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी को झटका

दरअसल, जनवरी 2025 में राष्ट्रपति पद संभालने के पहले दिन डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इस आदेश का उद्देश्य उन बच्चों को जन्म के साथ मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता से वंचित करना था, जिनके माता-पिता अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे हों या अस्थायी वीजा पर हों। इस आदेश के तहत केवल उन्हीं बच्चों को जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता देने का प्रस्ताव था, जिनके कम से कम एक माता-पिता अमेरिकी नागरिक हों या कानूनी रूप से स्थायी निवासी (ग्रीन कार्ड धारक) हों। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह आदेश लागू नहीं हो सकेगा।

बर्थराइट सिटिजनशिप  पर आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द

डोनाल्ड ट्रंप की इमिग्रेशन नीति को बड़ा झटका देते हुए अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें ट्रंप के इस कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी गई थी। डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से कहते रहे हैं कि जन्म के आधार पर अपने-आप मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता की मौजूदा व्यवस्था का कुछ लोग गलत फायदा उठाते हैं, जिससे देश की इमिग्रेशन व्यवस्था प्रभावित होती है। वहीं, ट्रंप के विरोधियों का आरोप है कि उनकी सरकार की कई इमिग्रेशन नीतियां भेदभावपूर्ण रही हैं और उनका असर खास समुदायों के लोगों पर अधिक पड़ता है।

यह मामला अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन में मौजूद नागरिकता संबंधी प्रावधान से जुड़ा है। इस प्रावधान में कहा गया है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले या कानूनी रूप से अमेरिकी नागरिक बनने वाले सभी लोग, जो देश के कानून के दायरे में आते हैं, अमेरिका के नागरिक माने जाएंगे। पिछले 150 से ज्यादा वर्षों से इस नियम का यही मतलब माना जाता रहा है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी बच्चों को जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है, चाहे उनके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अमेरिका के सॉलिसिटर जनरल डी. जॉन सॉयर ने ट्रंप प्रशासन की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी संविधान के नागरिकता संबंधी प्रावधान का मुख्य उद्देश्य पहले गुलाम रहे लोगों और उनकी आने वाली पीढ़ियों को अमेरिकी नागरिकता का अधिकार देना था। सॉयर ने यह भी कहा कि “बर्थ टूरिज्म” यानी सिर्फ बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए दूसरे देशों के लोगों का अमेरिका जाकर बच्चे को जन्म देने का चलन बढ़ रहा है। उनका दावा था कि कई विदेशी नागरिक इसी मकसद से अमेरिका आते हैं। हालांकि, जब सुप्रीम कोर्ट के जजों ने उनसे इस दावे के समर्थन में आंकड़े मांगे, तो उन्होंने स्वीकार किया कि इस तरह के मामलों की संख्या बताने वाला कोई ठोस या आधिकारिक डेटा उनके पास नहीं है।

‘ट्रंप बोले- PM मोदी को फोन मिलाओ, मैंने कहा सुबह के 6 बजे होंगे तो जवाब मिला वो मेरी तरह…’,सर्जियो गोर ने समझाया दोनों क्यों हैं सच्चे दोस्त

अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने हाल ही में IX USISPF लीडरशिप समिट 2026 में भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती पर एक दिलचस्प कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सच्चा दोस्त मानते हैं और दोनों नेताओं के बीच संबं

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