Gold Rate Today: देश में सोना हुआ और सस्ता, फेडरल रिजर्व के फैसले के बाद विदेश में कीमत बढ़ी; चेक करें नए रेट

देश में सोने की कीमत और नीचे आ गई है। 30 जुलाई की सुबह ज्यादातर शहरों में भाव और कम हो गया है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत फिसलकर 143650 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई। भारतीय रुपये की मजबूती से देश के अंदर कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव दिख रहा है। रुपया मजबूत होने पर विदेशी मुद्रा में सोना खरीदना सस्ता हो जाता है। इससे सर्राफा कारोबारियों के लिए लागत कम रहती है। लिहाजा भारत में सोने के खुदरा भाव में कमी दिखने लगती है।

रॉयटर्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोने के भाव में तेजी है। यह बढ़कर 4,080.38 डॉलर प्रति औंस हो गया है। अगस्त में डिलीवरी वाला US गोल्ड फ्यूचर्स भी बढ़कर 4,078 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अपनी जुलाई की मीटिंग में बेंचमार्क ब्याज दरों को बिना किसी बदलाव के 3.50%-3.75% पर ही छोड़ दिया है। ब्याज दरों में कमी या इसे स्थिर रखा जाना, सोने और चांदी जैसे एसेट्स के लिए पॉजिटिव ट्रिगर का काम करता है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 143650 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 131690 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 131540 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 143500 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 143500 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 131540 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 143500 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 131540 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली132990143650
मुंबई131540143500
अहमदाबाद131590143550
चेन्नई131540143500
कोलकाता131540143500
हैदराबाद131540143500
जयपुर131690143650
भोपाल131590143550
लखनऊ131690143650
चंडीगढ़131690143650

चांदी का भाव

दूसरी कीमती धातु चांदी की कीमत में भी देश के अंदर गिरावट है। 30 जुलाई की सुबह चांदी 234900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। रॉयटर्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत बढ़कर 58.20 डॉलर प्रति औंस हो गई है।

भारत ने न्यूयॉर्क टाइम्स को फटकार लगाई:PoK को पाकिस्तानी कश्मीर बताने पर आपत्ति जताई , कहा- यह भारत का अभिन्न हिस्सा है

भारत ने न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) द्वारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को ‘पाकिस्तानी कश्मीर’ बताए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है।
अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि ‘पाकिस्तानी कश्मीर’ जैसा कुछ नहीं है, केवल पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) है। दूतावास ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं तथा हमेशा रहेंगे। दूतावास ने पाकिस्तान पर इन क्षेत्रों के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा करने और वहां रहने वाले लोगों के खिलाफ हिंसा करने का आरोप भी लगाया। भारत ने कहा कि इस मुद्दे पर उसका रुख पहले से स्पष्ट और अपरिवर्तित है। भारतीय दूतावास की यह प्रतिक्रिया न्यूयॉर्क टाइम्स की उस रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें पीओके में हालिया अशांति और स्थानीय चुनावों का जिक्र करते हुए इस क्षेत्र को ‘पाकिस्तानी कश्मीर’ कहा गया था। रिपोर्ट में मीरपुर में सुरक्षा बलों और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बीच झड़प, दो लोगों की मौत और चुनावी प्रक्रिया पर पड़े असर का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही अखबार ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों के कुछ दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

AIIMS NORCET 11 Registration 2026: एम्स ने शुरू की 2218 नर्सिंग अधिकारी के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया, 13 अगस्त तक है आवेदन करने का मौका

AIIMS NORCET 11 Registration 2026: नर्सिंग के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले और इसमें करियर बनाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए जरूरी अपडेट है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली ने नर्सिंग ऑफिसर रिक्रूटमेंट कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (NORCET) 11 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए एम्स नई दिल्ली और दूसरे हिस्सा लेने वाले एम्स और सरकारी मेडिकल संस्थानों में नर्सिंग ऑफिसर के 2,218 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 13 अगस्त तक एम्स के आधिकारिक परीक्षा पोर्टल aiimsexams.ac.in के जरिए अपनी एप्लीकेशन जमा कर सकते हैं। यह भर्ती नर्सिंग ऑफिसर (ग्रुप B) पोस्ट के लिए पे मैट्रिक्स के लेवल 7 (प्री-रिवाइज्ड पे बैंड Rs 9,300-34,800 और ग्रेड पे Rs 4,600) पर हो रही है।

एम्स नॉरसेट 11 पंजीकरण 2026: आवेदन करने के लिए योग्यता

नॉरसेट 11 के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास नीचे दी गई शैक्षिक योग्यता में से कोई एक होनी चाहिए :

इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) या स्टेट नर्सिंग काउंसिल से मान्यता प्राप्त इंस्टिट्यूट या यूनिवर्सिटी से बीएससी (ऑनर्स) नर्सिंग, बीएससी नर्सिंग, या पोस्ट-बेसिक बीएससी नर्सिंग, साथ ही स्टेट नर्सिंग काउंसिल या इंडियन नर्सिंग काउंसिल के साथ नर्स और मिडवाइफ के तौर पर रजिस्ट्रेशन।

आईएनसी या स्टेट नर्सिंग काउंसिल से मान्यता प्राप्त इंस्टिट्यूट से जनरल नर्सिंग और मिडवाइफरी (GNM) में डिप्लोमा, साथ ही स्टेट नर्सिंग काउंसिल या इंडियन नर्सिंग काउंसिल के साथ नर्स और मिडवाइफ के तौर पर रजिस्ट्रेशन, और जरूरी योग्यता मिलने के बाद कम से कम 50 बेड वाले हॉस्पिटल में दो साल का अनुभव।

एम्स ने साफ किया है कि जीएनएम आवेदकों के लिए जरूरी दो साल का अनुभव कोर्स पूरा करने, रिजल्ट घोषित करने और स्टेट नर्सिंग काउंसिल या इंडियन नर्सिंग काउंसिल के साथ रजिस्ट्रेशन के बाद मिलना चाहिए।

एम्स नॉरसेट 11 रजिस्ट्रेशन 2026: उम्र सीमा

सभी एम्स संस्थान के लिए आवेदकों की उम्र सीमा 18 से 30 साल है। उम्र में छूट संबंधित हिस्सा लेने वाले संस्थान के भर्ती नियमों के अनुसार लागू होगी। ऑनलाइन पंजीकरण की आखिरी तारीख 13 अगस्त, 2026 को कैंडिडेट की उम्र तय करने के लिए कट-ऑफ तारीख माना जाएगा।

एम्स नॉरसेट 11 रजिस्ट्रेशन 2026: आवेदन शुल्क

जनरल/OBC: Rs 3,000

SC/ST/EWS: Rs 2,400

बेंचमार्क डिसेबिलिटी वाले लोग (PwBD): छूट मिलेगी

उम्मीदवार आवेदन शुल्क डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग से दे सकते हैं। एम्स ने कहा है कि एप्लीकेशन फीस नॉन-रिफंडेबल है। हालांकि, परीक्षा में बैठने वाले SC/ST कैंडिडेट की दी गई फीस रिजल्ट आने के बाद उनके कैटेगरी सर्टिफिकेट के वेरिफिकेशन के बाद वापस कर दी जाएगी।

एम्स नॉरसेट 11 रजिस्ट्रेशन 2026: जरूरी तारीखें

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन : 24 जुलाई से 13 अगस्त, 2026 (शाम 5 बजे तक)

एनओसी जमा करने की आखिरी तारीख (सरकारी कर्मचारियों के लिए): 18 अगस्त, 2026 (शाम 5 बजे तक)

परीक्षा शहर पर्ची : 3 सितंबर, 2026

एडमिट कार्ड रिलीज : 9 सितंबर, 2026

नॉरसेट स्टेज 1 (प्रीलिमिनरी CBT): 12 सितंबर, 2026 (शनिवार)

नॉरसेट स्टेज 2 (मेन्स CBT): 30 सितंबर, 2026 (बुधवार)

परीक्षा पूरे भारत में निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में होगी। एम्स ने कैंडिडेट्स को यह भी बताया है कि दिए गए परीक्षा केंद्र को बदलने की रिक्वेस्ट पर विचार नहीं किया जाएगा।

Army Bharti 2026: लॉ ग्रेजुएट्स के लिए भारतीय सेना में निकली बंपर भर्ती, तुरंत करें अप्लाई, जानें- सैलरी समेत सबकुछ

नीलेकणी क्या नीट खत्म करने की सिफारिश करेंगे?

इंफोसिस के सह संस्थापक और भारत में आधार क्रांति के सूत्रधार नंदन नीलेकणी के ऊपर केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देने का जिम्मा सौंपा है। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के पूर्व प्रमुख एस सोमनाथ को भी इस उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी का सदस्य बनाया गया है। पता नहीं लोगों को याद हो कि न हो, दो साल पहले इसरो के पूर्व प्रमुख के राधाकृष्णन की अध्यक्षता में परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देने के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। जैसे 2026 में नीट यूजी पेपर लीक के बाद यह कमेटी बनी है वैसे ही 2024 में नीट यूजी पेपर लीक के बाद वह कमेटी बनी थी। राधाकृष्ण कमेटी ने एक सौ ज्यादा सिफारिशें की थीं। एक रिपोर्ट के मुताबिक उनकी 27 सिफारिशें ऐसी हैं, जिन पर ध्यान नहीं दिया गया। कुछ सिफारिशें आंशिक तौर पर मानी गईं और 57 सिफारिशों को पूरी तरह से स्वीकार किया गया। लेकिन उसका क्या नतीजा निकला? दो साल के बाद फिर पेपर लीक हो गया!

राधाकृष्ण कमेटी ने सिफारिश की थी नीट यूजी सहित करीब 20 प्रतियोगिता परीक्षाएं कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए में विषय के विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। इस सिफारिश को स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद भी पेपर लीक होना जारी है और दूसरी गड़बड़ियां भी हो ही रही हैं तो इसका अर्थ है कि एकमात्र समस्या यह नहीं है कि एनटीए में विषय के विशेषज्ञ नहीं हैं। समस्या संरचनात्मक और व्यवस्थागत है। अगर नंदन नीलेकणी संरचनात्मक समस्याओं को समझ कर उसे ठीक करने का सुझाव देते हैं तब तो ठीक है अन्यथा इसका भी कोई मतलब नहीं होगा।

उनके सामने सबसे पहली और बड़ी चुनौती यह है कि क्या वे अखिल भारतीय परीक्षा के सिद्धांत को खत्म करने की सिफारिश करेंगे? क्या वे कहेंगे कि एक बार में 24 लाख छात्रों वाली नीट यूजी की परीक्षा नहीं होनी चाहिए? क्या वे यह सिफारिश कर सकते हैं कि मेडिकल में दाखिले की पुरानी व्यवस्था बहाल हो और नीट यूजी की बजाय राज्यों को अपने कॉलेजों में दाखिले का अधिकार पहले जैसा दिया जाए? यानी शिक्षा और परीक्षा के मामले में राज्यों की स्वायत्तता सुनिश्चित की जाए। अगर नंदन नीलेकणी की कमेटी नीट समाप्त करने और मेडिकल में दाखिले की परीक्षा का विकेंद्रीकरण करने की सिफारिश नहीं करती है तो उनकी सिफारिशों का स्कोप बहुत सीमित हो जाएगा और तब किसी बड़े सुधार की संभावना कम हो जाएगी।

अब सवाल है कि अगर नीट समाप्त करने या नीट जैसी दूसरी अखिल भारतीय परीक्षाएं खत्म करने की सिफारिश नीलेकणी कमेटी नहीं करती है तो उसके पास क्या विकल्प बचेगा? सबसे अच्छा तो यही होगा कि नीट को समाप्त किया जाए। लेकिन अगर सरकार की ओर से कमेटी की सिफारिशों का जो स्कोप तय किया जाएगा यानी जो फ्रेमवर्क दिया जाएगा उसमें पहले ही यह स्पष्ट कर दिया जाए कि नीट की परीक्षा जारी रहेगी तो फिर नीलेकणी कमेटी को नीट को इंजीनियरिंग में दाखिले की परीक्षा जेईई की तरह दो चरणों में कराने की सिफारिश करनी चाहिए। ध्यान रहे अगले साल नीट की परीक्षा जेईई की तरह कंप्यूटर आधारित होगी और कई पालियों में होगी। हालांकि उसमें प्रश्नपत्रों की कठिनता के आधार पर अंकों के सामान्यीकरण की अलग समस्या आती है। फिर भी कंप्यूटर बेस्ड परीक्षा पेपर लीक की संभावना को कम करती है। इसके साथ साथ अगर नीट की परीक्षा भी जेईई के तरह दो चरण में हो तो पेपर लीक की संभावना और कम हो सकती है। दो चरण का अर्थ है कि पहले चरण में प्रारंभिक परीक्षा हो और दूसरे चरण में एडवांस परीक्षा हो। पहले चरण में मल्टीपल च्वाइस वाले प्रश्न हों और दूसरे चरण में सब्जेक्टिव प्रश्न पूछे जाएं।

इसके अलावा नीलेकणी कमेटी को मेडिकल की पढ़ाई की फीस को नियमित करने के बारे में भी सुझाव देने चाहिए। अभी मेडिकल की परीक्षा में सबसे ज्यादा प्रश्न पत्र इसलिए लीक होते हैं कि एक बार में परीक्षा होती है और 720 अंकों की परीक्षा में अगर अच्छे अंक आ गए तो देश के प्रीमियम संस्थान में बहुत कम फीस में पढ़ने का मौका मिलता है। अन्यथा निजी कॉलेजों में फीस इतनी ज्यादा है कि लोग स्वाभाविक रूप से पेपर लीक पर पैसा खर्च करने के लिए प्रेरित होते हैं। खुद सरकार इसी वजह से इसे हाई स्टेक यानी बड़े दांव वाली परीक्षा मानती है। नीट के बचाव में तर्क दिया जाता है कि इसमें क्वालिफाई करके गरीब बच्चे भी मेडिकल की पढ़ाई कर सकते हैं। यह गलत है। निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस एक से डेढ़ करोड़ रुपए तक है। ऐसे में कौन गरीब अपने बच्चों को वहां पढ़ा पाएगा! अगर डोनेशन नहीं देना पड़े तब भी निजी कॉलेजों में मेडिकल की पढ़ाई का खर्च सामान्य लोगों की पहुंच से बाहर है।

बहरहाल, नीलेकणी कमेटी को सिर्फ नीट पर विचार नहीं करना है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को दुरुस्त करने के सुझाव देने हैं। इसकी शुरुआत एनटीए से हो सकती है। भारत सरकार ने एक देश, एक परीक्षा की महत्वाकांक्षी योजना के तहत एनटीए का गठन किया। इसके बाद एक एक करके परीक्षाओं को अखिल भारतीय स्वरूप दिया जाने लगा। मेडिकल की परीक्षा के साथ साथ केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए भी सीयूईटी की परीक्षा ली जाने लगी। इसमें अलग समस्याएं हैं। वास्तविकता यह है कि एनटीए देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधार में शून्य योगदान दे रहा है। सो, नीलेकणी कमेटी एनटीए को खत्म करने और पुरानी विकेंद्रित परीक्षा व्यवस्था बहाल करने की सिफारिश करे। सवाल है कि अगर एनटीए को समाप्त करना उसके स्कोप ऑफ वर्क से बाहर हो तो क्या करना चाहिए? तब उसे एनटीए में सुधार की सिफारिश करनी चाहिए।

सबसे पहला सुधार तो यह जरूरी है कि एनटीए को कम से कम वैधानिक दर्जा दिया जाए। अगर सरकार चाहती है कि यूपीएससी की तरह इसकी परीक्षाएं विश्वसनीय बनें तो इसे संवैधानिक नहीं तो वैधानिक दर्जा दिया जाए। इसका अपना कैडर बने ताकि तदर्थ ढंग से काम नहीं हो। अभी इधर उधर से ले आकर अधिकारियों को रखा जाता है और गड़बड़ी होने पर बाद में उनको वापस अपने कैडर में भेज दिया जाता है। इससे जवाबदेही नहीं बनती है। इसके बाद ठेके पर नियुक्ति रोकने की सिफारिश की जाए और परीक्षा से जुड़े काम आउटसोर्स करने पर रोक लगे। यूपीएससी की तरह एनटीए का अपना बुनियादी ढांचा बने। विशेषज्ञों की नियुक्ति हो और पूरे साल इसका काम चले। जैसे यूपीएससी की परीक्षा में प्रश्न पत्र के ढेर सारे सेट बनते हैं और किसी को पता नहीं होता है कि परीक्षा में कौन से सेट का इस्तेमाल होगा वैसी व्यवस्था एनटीए द्वारा आय़ोजित की जाने वाली परीक्षाओं के लिए भी की जाए। एनटीए जिन परीक्षाओं का आयोजन करता है उसके अलावा भी कई एजेंसियां हैं, जो दाखिला और भर्ती परीक्षा आयोजित करती हैं। उनमें भी एनटीए की तर्ज पर ही सुधार की सिफारिश होनी चाहिए। हालांकि सिर्फ कमेटी की सिफारिशों से कुछ खास नहीं होगा। सरकार की मंशा और राजनीतिक इच्छाशक्ति भी होनी चाहिए तभी जरूरी सुधार होंगे।

एमपी सरकार का बड़ा निर्णय, 25 की जगह 60% किया जाएगा मूंग का उपार्जन, ई-टोकन से खाद वितरण व्यवस्था भी खत्म

भोपाल में किसानों के लगातार आंदोलन के बीच सरकार ने कई बड़े फैसले किए है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के मुद्दों को हल करने के लिए मंत्री समूह का गठन किया था। इस समूह की किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ मंत्रालय में बैठक हुई। बैठक में कई किसान हितैषी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए । इसके संबंध में प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सदैव किसानों के हित में कार्य करती आई है। हमारे अन्नदाता प्रदेश की अर्थव्यवस्था और समृद्धि का आधार हैं और उनके परिश्रम से उत्पादित उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

 

प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने कहा कि जैसा कि हम सभी जानते हैं भारत सरकार द्वारा इस वर्ष ग्रीष्मकालीन मूंग के उपार्जन के लिए मध्यप्रदेश को 4.52 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। भारत सरकार की योजना के अंतर्गत राज्य के कुल उत्पादन का अधिकतम 25 प्रतिशत उपार्जन किए जाने का प्रावधान है। भारत सरकार के इसी नियम के अंतर्गत निर्णय लिया गया था कि प्रदेश के मूंग उत्पादक किसानों से उनकी उपज का 25 प्रतिशत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर उपार्जित किया जाएगा।

 

किसानों के हित को रखा ध्यान में-मंत्री कंसाना ने बताया कि आज किसान प्रतिनिधियों के साथ हुई चर्चा के बाद किसानों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब प्रत्येक पात्र किसान से उसकी मूंग उपज का 25 प्रतिशत नहीं, बल्कि 60 प्रतिशत उपार्जन किया जाएगा, जो नर्मदापुरम, सीहोर एवं हरदा जैसे जिलों में लगभग 3 क्विंटल प्रति एकड़ आता है। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा और हमारा प्रयास रहेगा कि अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिले ।

 

स्लॉट बुकिंग 10 दिन बढ़ाई-

मंत्री कंसाना ने कहा कि किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अवधि भी 10 दिन बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब किसान 30 जुलाई के स्थान पर 10 अगस्त तक स्लॉट बुकिंग कर सकेंगे। इसी प्रकार उपार्जन की अंतिम तिथि भी 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त की जा रही है। मैं प्रदेश के किसान भाइयों-बहनों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश सरकार सदैव किसानों के हित में खड़ी है। जहां तक खाद वितरण के लिए लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था से संबंधित शिकायतों और व्यावहारिक समस्याओं का प्रश्न है, यह व्यवस्था राज्य शासन का एक महत्वपूर्ण सुधार है और आने वाले समय में इससे किसानों को काफी सुविधा एवं लाभ मिलेगा।

 

किसानों के लिए नई व्यवस्था-मंत्री कंसाना ने कहा कि चूंकि यह एक नई व्यवस्था है, इसलिए प्रारंभिक स्तर पर सामने आ रही समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृषि उत्पादन आयुक्त, की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है। यह समिति ई-टोकन व्यवस्था से जुड़ी सभी समस्याओं का परीक्षण कर राज्य सरकार को अपनी अनुशंसाएं प्रस्तुत करेगी। समिति की अनुशंसाओं के आधार पर आवश्यक सुधार तत्काल किए जाएंगे । सुझाव प्राप्त होकर सुधार होने तक ई-टोकन से खाद वितरण की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से स्थगित की जा रही है।

Rohit Sharma: रोहित शर्मा के वर्ल्ड कप प्लान पर सस्पेंस, शुभमन गिल पर अब टिकी सबकी निगाहें…जानें क्यों

टेस्ट और टी20 से संन्यास लेने के बाद भारत के दिग्गज खिलाड़ी रोहित शर्मा केवल एक ही फॉर्मेट में खेलते हैं। पिछले काफी समय से रोहित शर्मा के वनडे क्रिकेट से रिटायरमेंट को लेकर खबरें आती रहती है। वहीं इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज में रोहित ने शानदार प्रदर्शन कर आलोचकों को शांत कर दिया है। अगले साल वनडे वर्ल्ड कप दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में खेला जाएगा। रिटायरमेंट की चर्चाओं के बीच रोहित शर्मा ने साफ कर दिया कि उनका अभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। वह अगले साल दक्षिण अफ्रीका में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप में भारत के लिए खेलना चाहते हैं। इसी बीच पूर्व भारतीय बल्लेबाज मोहम्मद कैफ ने कहा कि, टीम का माहौल और दिशा तय करने में कप्तान की अहम भूमिका होती है।

मोहम्मद कैफ ने कहा कि अगर रोहित शर्मा को वनडे वर्ल्ड कप तक टीम बनाए रखना है, तो शुभमन गिल को खुलकर उनका समर्थन करना चाहिए। उनके मुताबिक, गिल को सार्वजनिक रूप से भी रोहित पर भरोसा जताना चाहिए।

शुभमन गिल की राय हमेशा अहम होती है

मोहम्मद कैफ ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, “मुझे लगता है कि अभी इस मामले में इंतजार करना होगा। काफी असमंजस की स्थिति है, लेकिन जल्द ही तस्वीर साफ होनी चाहिए। शुभमन गिल को सामने आकर प्रेस में ये कहना चाहिए कि वह वर्ल्ड कप के लिए रोहित शर्मा को टीम में देखना चाहते हैं।” कैफ ने कहा, “जब टीम बनाई जाती है, तो कप्तान की राय हमेशा अहम होती है। कई बार खिलाड़ियों को एक-दूसरे के खेल की जितनी समझ होती है, उतनी चयनकर्ताओं को नहीं होती। ऐसे में कप्तान को कोच और चयनकर्ताओं से बात करनी चाहिए, उन्हें अपनी बात समझानी चाहिए और टीम से जुड़े अहम फैसलों में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।”

रोहित का करना चाहिए समर्थन

कैफ ने आगे कहा, “जब वीरेंद्र सहवाग और युवराज सिंह रन नहीं बना पा रहे थे, तब सौरव गांगुली हमेशा उनके समर्थन में खड़े रहे और कहते थे कि वे वापसी करेंगे। महेंद्र सिंह धोनी ने भी अपने खिलाड़ियों का हर मुश्किल समय में साथ दिया। रोहित शर्मा ने भी हमेशा अपनी टीम के खिलाड़ियों पर भरोसा जताया है।” अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कैफ ने कहा कि अगर शुभमन गिल सार्वजनिक रूप से रोहित शर्मा का समर्थन करते हैं, तो इससे पूरे मामले में स्पष्टता आएगी और कप्तान के तौर पर उनकी भूमिका और नेतृत्व भी मजबूत होगा।

PAK आर्मी की बर्बरता! बलूच लड़की को मारी गोली, फिर हमास स्टाइल में निकाला परेड

बलूचिस्तान में इन दिनों पाकिस्तान के खिलाफ विरोध लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। कई बलूच समूह और कार्यकर्ता पाकिस्तान की सेना और वहां की खुफिया एजेंसियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैंय़ बलूचों ने पाकिस्तानी सेना को सीधी चुनौती दे दी कि बलूचिस्तान छोड़कर चले जाएं। वहीं इनसबके बीच बलूच लोगों पर पाक सेना का दमन भी बढ़ता जा रहा है। बलूचिस्तान से सामने आई कुछ रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो के बाद पाकिस्तान की सेना की कार्रवाई को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं।

सामने आया हैरान कर देना वाला वीडियो 

वीडियो में दावा किया जा रहा है कि सेना की कार्रवाई के दौरान एक लड़की की मौत हो गई और बाद में उसके शव के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। हालांकि, इस वायरल वीडियो और उससे जुड़े दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। वहीं, बलूचिस्तान में लंबे समय से पाकिस्तान की सेना की कार्रवाई और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब बलूचिस्तान में हाल के हफ्तों में तनाव बढ़ा हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक, 5 जुलाई से शुरू किए गए आतंकवाद-रोधी अभियान के बाद से पाकिस्तान सरकार की कार्रवाई में कई लोगों की मौत हुई है।

रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना पर आरोप है कि उसने एक लड़की को गोली मार दी। इसके बाद उसके शव को एक बख्तरबंद सैन्य वाहन के आगे रखकर सड़कों पर घुमाया गया। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। हालांकि, इन दावों और वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

पीओके में पाक सेना की बर्रबता है जारी

इस बीच, सोमवार को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के रावलकोट इलाके से हिंसा की खबरें सामने आईं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पीओके में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि सरकार इन प्रदर्शनकारियों को “भारत जैसा दुश्मन” मानती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल एक वीडियो में ख्वाजा आसिफ कथित तौर पर कहते सुनाई दे रहे हैं, “मैं POK के प्रदर्शनकारियों को भारत की श्रेणी में रखता हूं और उन्हें भी भारत की तरह दुश्मन मानता हूं।” वहीं, कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पिछले दो दिनों के दौरान रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है। हालांकि, इन मौतों की संख्या और सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

OTT पर इस हफ्ते मिलेगा एंटरटेनमेंट का तगड़ा डोज, रिलीज हो रही ये फिल्में और सीरीज

ओटीटी पर हर हफ्ते कई वेब सीरीज और फिल्में रिलीज होती रहती है। जुलाई के आखिरी वीकेंड में भी दर्शकों को मनोरंजन का भरपूर डोज मिलने वाला है। इस हफ्ते कई बड़े शो और फिल्में रिलीज हो रही हैं, जिनमें फेमस सीक्वल, ट्रू-क्राइम डॉक्यूमेंट्री और इमोशनल ड्रामा शामिल हैं। एक ओर मेरिल स्ट्रीप और ऐनी हैथवे ‘द डेविल वियर्स प्राडा 2’ के साथ वापसी कर रही हैं, तो दूसरी ओर ‘कर्ण’ भी इसी हफ्ते रिलीज होने वाली है। आइए जानते हैं 27 जुलाई से 31 जुलाई के बीच अलग-अलग ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कौन सी फिल्में और वेब रिलीज होने वाली है।

‘द डेविल वियर्स प्राडा 2’

‘द डेविल वियर्स प्राडा 2’ 29 जुलाई को JioHotstar पर रिलीज होगी। इस फिल्म में ऐनी हैथवे और मेरिल स्ट्रीप एक बार फिर अपने मशहूर किरदारों में नजर आएंगी। कहानी में फैशन मैगजीन रनवे डिजिटल दौर और घटती कमाई की वजह से मुश्किल दौर से गुजर रही है। ऐसे में मिरांडा प्रीस्टली अपनी पहचान और मैगजीन को बचाने की कोशिश करती है। वहीं, एंडी सैक्स कई साल बाद फिर से रनवे लौटती है। दोनों की मुलाकात पुराने रिश्तों, टकराव और बदलती फैशन इंडस्ट्री के बीच नई चुनौतियों को सामने लाती है।

‘बैटमैन: केप्ड क्रूसेडर सीजन 2’

‘बैटमैन: केप्ड क्रूसेडर सीजन 2’ 31 जुलाई को प्राइम वीडियो पर रिलीज होगा। नए सीजन में बैटमैन एक बार फिर गोथम सिटी को अपराधियों से बचाने के मिशन पर नजर आएगा। बड़े गैंगस्टरों की गिरफ्तारी के बाद शहर में अपराध की नई जंग शुरू हो जाती है, जहां नए दुश्मन सत्ता हासिल करने की कोशिश करते हैं। ये सीजन ब्रूस वेन के शुरुआती सुपरहीरो सफर और उसके संघर्ष को भी करीब से दिखाएगा।

‘द लेजेंड ऑफ कर्ण’

‘द लेजेंड ऑफ कर्ण’ 31 जुलाई को SonyLIV पर रिलीज होगी। यह हिंदी एनिमेटेड पौराणिक सीरीज महाभारत के महान योद्धा कर्ण के जीवन पर आधारित है। सीरीज में उनके जन्म से लेकर सारथी परिवार में पालन-पोषण, धनुर्विद्या में उनकी असाधारण प्रतिभा और समाज में मिली उपेक्षा तक की कहानी दिखाई गई है। कर्ण के संघर्ष, त्याग और सम्मान की तलाश को इस सीरीज में भावनात्मक और रोचक अंदाज में पेश किया गया है।

‘बालन: द बॉय’

बालन: द बॉय 31 जुलाई को ZEE5 पर रिलीज होगी। ये एक मलयालम साइकोलॉजिकल थ्रिलर है। इस फिल्म में एक ऐसे लड़के की कहानी दिखाई गई है, जिसकी परवरिश कई रहस्यों के बीच होती है। उसकी मां उसे अलग-अलग जगहों पर ले जाती है और बार-बार अपनी पहचान बदलती रहती है, लेकिन कभी ये नहीं बताती कि वह किससे छिप रही है। जब उसकी मां अचानक लापता हो जाती है, तो बालन उसके अतीत की सच्चाई जानने की कोशिश करता है। इसी तलाश के दौरान कई चौंकाने वाले राज सामने आते हैं, जो कहानी को और ज्यादा रोमांचक बना देते हैं।

‘पैन एम 103 पर बमबारी’

‘पैन एम 103 पर बमबारी’ 30 जुलाई को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। ये छह एपिसोड की लिमिटेड सीरीज साल 1988 में स्कॉटलैंड के लॉकरबी के ऊपर हुए पैन एम फ्लाइट 103 बम धमाके की सच्ची घटना पर आधारित है। इस हादसे में विमान में सवार सभी 259 यात्रियों और क्रू मेंबर्स के साथ जमीन पर मौजूद 11 लोगों की भी मौत हो गई थी। सीरीज में इस दर्दनाक घटना के बाद शुरू हुई बड़ी जांच, स्कॉटलैंड पुलिस और एफबीआई की संयुक्त कार्रवाई और दुनिया के कई देशों में जुटाए गए सबूतों की पूरी कहानी दिखाई जाएगी।

‘द डेविल्स माउथ’

द डेविल्स माउथ 29 जुलाई को प्राइम वीडियो पर रिलीज होगी। ये एक थ्रिलर फिल्म है, जिसमें पांच कॉलेज दोस्त ग्रेजुएशन से पहले छुट्टियां मनाने के लिए थाईलैंड जाते हैं। वहां वे ‘द डेविल्स माउथ’ नाम की समुद्री गुफाओं की सैर पर निकलते हैं, लेकिन अचानक उनका रोमांच डरावने अनुभव में बदल जाता है।

CM योगी का बड़ा बयान, सनातन संस्कृति को खत्म करना चाहती हैं कुछ ताकतें, भारत विरोधी साजिशों से किया आगाह

गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकों का आह्वान किया है कि वे देश की प्रगति यात्रा में बाधा उत्पन्न करने वालों से सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि हम सभी को भारत के खिलाफ होने वाली साजिशों को समझना होगा। कुछ ताकतें भारत की प्रगति यात्रा, सनातन संस्कृति एवं परंपरा को तबाह करना चाहती हैं। अपने ही समाज में कालनेमि का रूप धारण कर बैठे देशविरोधी षड्यंत्रकारियों से हम अनभिज्ञ बने रहेंगे तो अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसी स्थिति होगी। 

 

सीएम योगी बुधवार को गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन में विगत 23 जुलाई से चल रही श्रीराम कथा के विश्राम सत्र और गुरु पूर्णिमा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय दिग्विजयनाथ जी महाराज एवं महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के चित्रों पर पुष्पार्चन करने तथा व्यासपीठ का पूजन करने के उपरांत मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे ही समाज के कुछ लोग दुनिया की उन ताकतों के प्रवक्ता बने हुए हैं, जो सनातन संस्कृति पर आघात करने में लगी हुई हैं। समाज ऐसी ताकतों व उनके प्रवक्ताओं से सतर्क रहकर अपने परिमार्जन के लिए तैयार रहेगा, तो सुखी रहेगा। समाज सुखी रहेगा तो राष्ट्र को समृद्धि के पथ पर अग्रसर होने से कोई नहीं रोक पाएगा। 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत 12 वर्षों से तीव्र प्रगति कर रहा भारत अगले दो तीन सालों में दुनिया के तीन शीर्ष देशों में सम्मिलित हो जाएगा। अपनी प्रगति यात्रा में भारत ने जिन्हें पछाड़ा, उन्हें अच्छा न लगना स्वाभाविक है। कई ताकतों को भारत की प्रगति अच्छी नहीं लगती। ऐसी ताकतों ने देश में अस्थिरता, अशांति और अव्यवस्था फैलाने की साजिश शुरू कर दी है। 

 

नक्सलवाद समाप्त तो चैन से कैसे बैठेंगे इसे प्रेरित करने वाले

सीएम योगी ने कहा कि 12 वर्ष पूर्व देश के 120 जिलों में नक्सलवाद था। आज एक भी जिले में नक्सलवाद नहीं है। ऐसे में नक्सलवाद को प्रेरित एवं प्रोत्साहित करने वाले चैन से बैठने के बजाय दूसरे रूप में और छद्म नामों से आएंगे। मुख्यमंत्री ने रामायण कालखंड में हनुमानजी की राह रोकने वाले कालनेमि का उदाहरण देते हुए समझाया कि वर्तमान दौर के कालनेमियों से सबको सावधान रहना होगा। ऐसे लोगों से सतर्क रहना होगा जो भारत के खिलाफ षड्यंत्र में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भागीदार रहते हैं। समाज को एकजुट होकर हुंकार भरनी होगी कि हम देश के खिलाफ किसी भी षड्यंत्र को स्वीकार नहीं करेंगे।

 

बड़ी यात्रा में आने लगती हैं चुनौतियां

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत जब भी अपनी एक बड़ी यात्रा पर होता है तो बड़ी चुनातियों का आना भी शुरू हो जाता है। जब श्रीराम का राजतिलक होना था तो परिवार में फूट डालकर उन्हें वनवास दे दिया गया। वनवास से लौटकर जब उन्होंने रामराज्य की स्थापना की तो माता जानकी को वनवास के लिए जाना पड़ा। महाभारत कालखंड में जब इंद्रप्रस्थ अपने वैभव पर था, तब महाभारत का शंखनाद हो गया। भारत के स्वर्णयुग में भी ऐसी स्थिति आई। चंद्रगुप्त और चाणक्य की जोड़ी के समय विश्व की 45 प्रतिशत अर्थव्यवस्था पर भारत का कब्जा था। जब हम मुग्ध हो जाते हैं तो कुछ ऐसे लोग सक्रिय हो जाते हैं, जो खुरपेंच में विश्वास करते हैं। उनका प्रयास व्यवस्था को छिन्नभिन्न करने का होता है। हमें प्रगति पर मुग्ध होने से बचना होगा, व्यवस्था को छिन्नभिन्न करने वालों से सतर्क रहना होगा।

 

सनातन की पावन धारा में आ जाते हैं विषधर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन की पावन धारा में हर मत, संप्रदाय को संरक्षण मिलता है। इसमें कुछ विषधर आकर इसे डंसने का प्रयास करते हैं। सनातन संस्कृति व परंपरा पर आघात कर भारत को अस्थिर करने वाले प्रयासों के खिलाफ हमें जागरूक होना होगा। इसमें सिर्फ स्कूली शिक्षक ही नहीं, बल्कि गुरु के रूप में रहने वाले हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना होगा।

 

मातृशक्ति व मातृभूमि का अपमान करने वाले कठोर दंड के पात्र

सीएम योगी ने कहा कि इस देश में कई सारे लोग पश्चिम की हवा में बह गए हैं। वे दुर्गा पूजा के समय राक्षस चण्ड-मुण्ड की पूजा करेंगे। जेएनयू में उन्हें महिमामंडित करने का प्रयास करेंगे। सनातन पर्वों के आयोजनों में व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास करेंगे।

दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा, प्रदर्शनकारी को गोली लगने का दावा गलत, मेडिकल रिपोर्ट में नहीं मिले सबूत

नई दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी को गोली लगने के दावे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे थे। अब दिल्ली पुलिस ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि मेडिकल जांच में गोली लगने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में बताया कि घायल प्रदर्शनकारी की MLC (Medico-Legal Case) रिपोर्ट में दाहिने कान के आगे (Right Tragus) हिस्से में चोट दर्ज की गई है। डॉक्टरों के अनुसार यह चोट ब्लंट इंजरी (किसी ठोस वस्तु से लगी चोट) है और यह सामान्य श्रेणी की चोट है।

 

पुलिस ने कहा कि MLC में चोट की प्रकृति ब्लंट बताई गई है। डॉक्टर की राय के अनुसार यह साधारण चोट है और गोली लगने का कोई सबूत नहीं मिला है। दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।

 

दिल्ली पुलिस ने X से मांगी आपत्तिजनक पोस्ट हटाने की मांग

 

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व वाले प्रदर्शन के दौरान संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने वाली कथित आपत्तिजनक, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक सामग्री को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को पत्र लिखा था।

 

पुलिस ने X से ऐसी पोस्ट और वीडियो तुरंत हटाने की मांग की है। साथ ही संबंधित यूजर्स की पूरी जानकारी मांगी गई है, जिसमें:

 

यूजर का नाम

पता

संपर्क विवरण

ईमेल आईडी

लॉगिन और लॉगआउट रिकॉर्ड (समय और तारीख सहित)

 

शामिल हैं।

 

दिल्ली पुलिस ने प्लेटफॉर्म से संबंधित कंटेंट का डेटा सुरक्षित रखने को भी कहा है ताकि आगे की जांच में इसका इस्तेमाल किया जा सके। पुलिस ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) की धारा 63(4) के तहत प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की भी मांग की है।

 

पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट हटाने के निर्देश

दिल्ली पुलिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियों वाली पोस्ट और वीडियो हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिए हैं। पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन और 20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा वाले पोस्ट सामने आए थे।

 

दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम लगातार ऐसे कंटेंट की निगरानी कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि आपत्तिजनक सामग्री मिलने पर संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस जारी कर उसे हटाने के निर्देश दिए जाते हैं। पुलिस के मुताबिक, नोटिस के बाद प्रधानमंत्री के खिलाफ कई आपत्तिजनक टिप्पणियों और वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाया जा चुका है।