हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने पर नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने पर नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Supreme Court on Reservation: सुप्रीम कोर्ट ने देश में धर्म परिवर्तन और आरक्षण के अधिकार से जुड़े एक मामले में ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाता है, तो वह केवल धर्म परिवर्तन के आधार पर पिछड़ा वर्ग (Backward Class) के अंतर्गत आरक्षण या सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के लाभ का दावा नहीं कर सकता।

 

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर की पीठ ने तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी। ALSO READ: OBC आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी मोहन सरकार, सॉलिसिटर जनरल से CM की मुलाकात

मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को रखा बरकरार

दरअसल, यह मामला तमिलनाडु सरकार के 9 मार्च 2024 के उस सरकारी आदेश से संबंधित था, जिसमें यह व्यवस्था दी गई थी कि पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग (MBC), डिनोटिफाइड समुदायों और अनुसूचित जातियों (SC) से जुड़े लोग यदि इस्लाम अपनाते हैं, तो उन्हें ‘पिछड़ा वर्ग मुस्लिम’ (BCM) श्रेणी का दर्जा दिया जा सकता है।

 

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के इस आदेश को रद्द कर दिया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत का रुख किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अब खारिज कर दिया है। ALSO READ: शिवसेना विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल, चुनाव आयोग ने क्यों नहीं ‘फ्रीज’ किया धनुष-बाण?

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि हिंदू सामाजिक व्यवस्था से निकलकर किसी गैर-हिंदू सामाजिक व्यवस्था (जैसे इस्लाम) में जाने वाला व्यक्ति केवल इस आधार पर अनुच्छेद 16(4) के तहत आरक्षण नहीं मांग सकता कि वह धर्म परिवर्तन से पहले पिछड़े वर्ग का हिस्सा था। न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि हिंदू सामाजिक व्यवस्था में झेली गई पिछड़ेपन की स्थिति को अपने आप आगे बढ़ाकर नए धर्म में किसी पिछड़े वर्ग का दर्जा हासिल करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

‘घर वापसी’ पर भी स्थिति साफ

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि कानूनन केवल हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म को मानने वाले व्यक्ति को ही अनुसूचित जाति का सदस्य माना जा सकता है। इन धर्मों के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाने पर व्यक्ति अपनी मूल जाति का दर्जा खो देता है और आरक्षण का लाभ नहीं मांग सकता। यदि कोई व्यक्ति इस्लाम अपनाने के बाद दोबारा हिंदू धर्म में लौटता है (घर वापसी), तो उसे उसका पुराना पिछड़े वर्ग का दर्जा अपने आप वापस नहीं मिलता।

क्या था पूरा मामला?

इस विवाद की शुरुआत थूथुकुडी जिले से हुई थी। वहां एक हिंदू दंपति के घर जन्मे परमसिवम नामक व्यक्ति ने धर्म परिवर्तन के बाद मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में अनुरोध किया गया था कि इस्लाम अपनाने के बावजूद उन्हें पिछड़े समुदाय का सदस्य माना जाए और उसी के अनुरूप लाभ प्रदान किए जाएं। इसी याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार के उस आदेश को निरस्त किया था, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मुहर लग गई है।

असल जिंदगी में बिल्कुल नॉन-ड्रामैटिक हैं आदित्य धर: यामी गौतम

बॉलीवुड अभिनेत्री यामी गौतम ने अपने पति और फिल्मकार आदित्य धर को असल जिंदगी में बेहद शांत और सहज स्वभाव का बताया है। सोनी मराठी के कार्यक्रम ‘कोण होणार करोडपति’ के आगामी एपिसोड में यामी अपनी फिल्म ‘नयी नवेली’ के प्रचार के दौरान अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के साथ बातचीत में अपनी प्रेम कहानी से जुड़े दिलचस्प किस्से साझा करेंगी।

इस एपिसोड में यामी गौतम और अभिनेता आदिनाथ कोठारे माधुरी दीक्षित के सामने हॉट सीट पर नजर आएंगे। इस दौरान यामी बताएंगी कि माधुरी की फिल्मों में दिखाई गई प्रेम कहानियों ने उनके प्यार को लेकर नजरिये को किस तरह प्रभावित किया।

माधुरी की फिल्मों की प्रेम कहानियों को याद करते हुए यामी कहती हैं आपकी फिल्में देखकर हमें लगता था कि प्रेम कहानी हो तो ऐसी हो। हर लड़की ऐसे ही किसी लम्हे का सपना देखती है, जिसमें मन ही मन लगे-‘पलट, पलट!’ लेकिन असल जिंदगी में आदित्य और मुझमें एक बात एक जैसी है। हम दोनों ही बहुत कम खुलने वाले और बिल्कुल नॉन-ड्रामैटिक लोग हैं।

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यामी ने बताया कि उनकी पहली मुलाकात फिल्म ‘उरी’ के सेट पर हुई थी। उस समय आदित्य फिल्म का निर्देशन कर रहे थे और यामी अभिनय कर रही थीं। शूटिंग के दौरान दोनों के बीच ज्यादा बातचीत नहीं हुई, लेकिन फिल्म के प्रचार के दौरान साथ में इंटरव्यू देते हुए उन्हें एक-दूसरे को बेहतर ढंग से जानने का मौका मिला।

यामी के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि जिंदगी, परिवार और संस्कारों को लेकर दोनों की सोच काफी मिलती है। आदित्य का शांत स्वभाव, सभी के प्रति सम्मान और काम के प्रति जुनून उन्हें बेहद पसंद आया।

यामी ने कहा हमारी पहली मुलाकात ‘उरी’ के सेट पर हुई थी। शूटिंग के दौरान हमारी ज्यादा बातचीत नहीं हुई। लेकिन प्रमोशन के समय जब हम साथ इंटरव्यू देते थे, तो एक-दूसरे के जवाब भी सुनते थे। तभी मुझे लगा कि इनके उसूल और पारिवारिक संस्कार मेरे जैसे हैं। आदित्य की यही बात मुझे बहुत अच्छी लगी। सेट पर मैं पहले ही देख चुकी थी कि वह कैसे इंसान हैं। ऐसे लोग बहुत कम मिलते हैं। वह कभी किसी पर गुस्सा नहीं करते थे, सबकी इज्जत करते थे और अपने काम को लेकर बेहद जुनूनी थे। साथ ही, बहुत शांत और सुलझे हुए भी थे।

इस पर माधुरी दीक्षित ने मुस्कुराते हुए कहा बिल्कुल आपकी तरह। यामी ने अपने जीवनसाथी के बारे में कहा ऐसा साथी मिलना बहुत बड़ी बात होती है। मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि आदित्य मेरे पति हैं। ‘कोण होणार करोडपति’ का यह विशेष एपिसोड सोनी मराठी पर सोमवार से शनिवार रात नौ बजे प्रसारित होता है। दर्शक इसे सोनी लिव पर भी देख सकते हैं।

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अंकिता भंडारी प्रकरण में धामी सरकार की संवेदनशीलता और सख्त कार्रवाई, न्याय की लड़ाई में हर स्तर पर उठाए कदम

अंकिता भंडारी प्रकरण में धामी सरकार की संवेदनशीलता और सख्त कार्रवाई, न्याय की लड़ाई में हर स्तर पर उठाए कदम

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अंकिता भंडारी हत्याकांड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने त्वरित कार्रवाई, निष्पक्ष जांच, प्रभावी अभियोजन और पीड़ित परिवार को सहायता उपलब्ध कराने के स्तर पर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। घटना सामने आने के बाद आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी से लेकर विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन, अभियोजन की व्यवस्था और परिवार की मांगों पर निर्णय लेने तक सरकार ने इस संवेदनशील प्रकरण को गंभीरता से लिया।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुरुआत से ही स्पष्ट किया कि महिलाओं की सुरक्षा और अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सरकार की प्राथमिकता है। इसी क्रम में पुलिस को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए। घटना के सामने आने के 24 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। प्रकरण की गहन जांच के लिए एसआईटी गठित की गई, ताकि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

 

एसआईटी जांच और अभियोजन को मजबूत करने पर जोर

प्रकरण की जांच के दौरान साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में मामले की पैरवी की। आरोपियों के विरुद्ध गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई। मामले में न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। यह फैसला न्यायालय द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर दिया गया। सरकार की ओर से इस मामले में कानून के अनुरूप कार्रवाई और अभियोजन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। प्रकरण में जमानत संबंधी न्यायिक आदेशों ने भी अपनी भूमिका निभाई।

 

परिजनों की भावनाओं और मांगों को दिया सम्मान

अंकिता भंडारी प्रकरण में प्रदेश सरकार ने पीड़ित परिवार की भावनाओं और मांगों को भी महत्व दिया। परिजनों की मांग के अनुरूप सरकारी अधिवक्ताओं में बदलाव किए गए, ताकि वे अपनी बात और अपेक्षाएं न्यायिक प्रक्रिया के समक्ष रख सकें। इसके साथ ही अंकिता के माता-पिता द्वारा सीबीआई जांच की मांग उठाए जाने पर मुख्यमंत्री ने उनकी मांग पर निर्णय लेते हुए सीबीआई जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

 

सरकार का यह रुख दर्शाता है कि संवेदनशील मामलों में केवल प्रशासनिक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार का विश्वास बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। परिवार की आशंकाओं और मांगों को सुनना तथा कानून के दायरे में उन पर निर्णय लेना शासन की जवाबदेही का हिस्सा है।

 

परिवार को आर्थिक सहायता और रोजगार से मिला संबल

अंकिता के निधन के बाद परिवार को आर्थिक और सामाजिक संबल प्रदान करने के लिए प्रदेश सरकार ने ₹25 लाख की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। इसके अतिरिक्त परिवार के सदस्यों को रोजगार उपलब्ध कराने के कदम भी उठाए गए। सरकार ने इन निर्णयों के माध्यम से यह संदेश दिया कि किसी गंभीर अपराध से प्रभावित परिवार को न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ जीवन की कठिनाइयों से उबरने में भी सहयोग मिलना चाहिए।

 

महिलाओं की सुरक्षा और न्याय के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता

अंकिता भंडारी प्रकरण ने महिलाओं की सुरक्षा, अपराधों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर व्यापक चर्चा को जन्म दिया। ऐसे मामलों में पुलिस जांच, अभियोजन, न्यायालय और शासन की अपनी-अपनी निर्धारित भूमिकाएं होती हैं। सरकार की जिम्मेदारी है कि जांच एजेंसियों को कानून के अनुरूप कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जाए, अभियोजन की व्यवस्था प्रभावी रहे और पीड़ित परिवार को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई, जांच, परिवार की मांगों पर विचार और आर्थिक सहायता जैसे कदम उठाए। सरकार का संदेश स्पष्ट है कि महिलाओं के विरुद्ध अपराधों को गंभीरता से लिया जाएगा और प्रत्येक मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

 

अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने का विषय केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की सुरक्षा, संवेदनशील शासन और कानून के प्रति विश्वास से भी जुड़ा है। इस प्रकरण में सरकार द्वारा उठाए गए कदम उसकी प्रशासनिक जवाबदेही और पीड़ित परिवार के प्रति संवेदनशीलता को सामने रखते हैं।

 

विद्या बालन करेंगी पर्थ के पहले भारतीय फिल्म महोत्सव का उद्घाटन

भारतीय सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री विद्या बालन 22 से 24 जनवरी 2027 तक आयोजित होने वाले इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ पर्थ (आईएफएफपी) के पहले संस्करण का उद्घाटन करेंगी। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में पहली बार आयोजित हो रहे इस महोत्सव में वह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी।

इस महोत्सव का उद्देश्य पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के दर्शकों तक भारतीय सिनेमा की विविधता, समृद्ध कहानियों और विभिन्न भाषाओं की फिल्मों को पहुंचाना तथा भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना है।

इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ पर्थ, इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न (आईएफएफएम) और इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ सिडनी (आईएफएफएस) की टीम की नई पहल है। मेलबर्न और सिडनी में भारतीय सिनेमा को मिले मंच की सफलता के बाद अब पर्थ में भी भारतीय फिल्मों, फिल्म निर्माताओं और दर्शकों को जोड़ने के लिए एक नया मंच तैयार किया जा रहा है।

महोत्सव की घोषणा पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के प्रीमियर रोजर कुक की भारत यात्रा के दौरान की गई थी। इस पहल को दोनों क्षेत्रों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक और रचनात्मक संबंधों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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विद्या बालन भारतीय सिनेमा की प्रमुख अभिनेत्रियों में शामिल हैं। उन्होंने अपने करियर में महिला-केंद्रित फिल्मों और विविध विषयों पर आधारित कहानियों में उल्लेखनीय भूमिकाएं निभाई हैं। महोत्सव में उनकी उपस्थिति से भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने के प्रयासों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

महोत्सव की घोषणा पर फेस्टिवल डायरेक्टर मितु भौमिक लांगे एएम ने कहा कि पर्थ में भारतीय फिल्म महोत्सव की शुरुआत करना गर्व का क्षण है। मेलबर्न और सिडनी में सफल मंच तैयार करने के बाद अब पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के नए दर्शकों और फिल्म प्रेमियों तक पहुंचने का अवसर मिला है।

उन्होंने कहा कि सिनेमा लोगों को जोड़ने, सीमाओं से परे जाने और एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझने का माध्यम है। विद्या बालन का पहले महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना विशेष है। महोत्सव के जरिए भारतीय कहानियों की विविधता का जश्न मनाने के साथ भारत और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ पर्थ में भारतीय सिनेमा की विभिन्न भाषाओं, शैलियों और विषयों पर आधारित फिल्मों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही फिल्म निर्माताओं, दर्शकों और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच संवाद, सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के अवसर भी उपलब्ध होंगे।

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मध्य प्रदेश सरकार का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हित में बड़ा निर्णय, 45 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके कर्मचारियों को पदोन्नति में सीपीसीटी से मिलेगी छूट

मध्य प्रदेश सरकार का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हित में बड़ा निर्णय, 45 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके कर्मचारियों को पदोन्नति में सीपीसीटी से मिलेगी छूट

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुरूप राज्य शासन ने मध्यप्रदेश के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हित में बड़ा निर्णय लेते हुए सहायक ग्रेड 3 और समकक्ष पदों पर पदोन्नति के लिए सीपीसीटी में छूट आदि से संबंधित समेकित निर्देश जारी किया है। अब जहां सहायक ग्रेड 3 के पद पर पदोन्नति के लिए 45 वर्ष से अधिक के कर्मियों को सीपीसीटी स्कोर कार्ड से पूरी छूट दी है वहां अन्य पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति के बाद निर्धारित कम्प्यूटर अर्हताएं प्राप्त करने के लिए अधिकतम 5 वर्ष का अवसर दिया गया है।

 

सामान्य प्रशासन विभाग ने म.प्र. लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 के तहत सभी विभागों में पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू होने के बाद आ रही भ्रांतियों को दूर करने के लिए यह निर्देश जारी किए हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति के लिए कम्प्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा (CPCT) एवं कम्प्यूटर डिप्लोमा की अनिवार्यता के संबंध में संशोधित निर्देश जारी किए हैं।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में 45 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके कर्मचारियों को CPCT स्कोर कार्ड की अनिवार्यता से छूट प्रदान की गई है। साथ ही अन्य पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति के बाद निर्धारित कम्प्यूटर अर्हताएं प्राप्त करने के लिए अधिकतम 5 वर्ष का अवसर दिया गया है। अब सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता रखने वाले ऐसे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, जिन्हें CPCT एवं कम्प्यूटर डिप्लोमा की अर्हता प्राप्त करना आवश्यक है, उन्हें पदोन्नति के बाद 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि में CPCT परीक्षा उत्तीर्ण करना होगी तथा मान्यता प्राप्त संस्थान से एक वर्षीय कम्प्यूटर डिप्लोमा अथवा निर्धारित समकक्ष योग्यता प्राप्त करना होगी।

 

यदि कर्मचारी 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि में आवश्यक अर्हताएं प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो उनकी परिवीक्षा अवधि अधिकतम 3 वर्ष और बढ़ाई जा सकेगी। इस प्रकार उन्हें पदोन्नति के बाद कुल 5 वर्ष के भीतर निर्धारित योग्यता प्राप्त करनी होगी। इस अवधि में आवश्यक योग्यता प्राप्त नहीं करने पर संबंधित कर्मचारी को उसके मूल चतुर्थ श्रेणी पद पर वापस पदस्थ कर दिया जाएगा।उक्त प्रावधान केवल विभागीय पदोन्नति के मामलों में लागू होंगे।

 

सीधी भर्ती आदि में नहीं मिलेगा लाभ-सीधी भर्ती अथवा अन्य किसी माध्यम से होने वाली नियुक्तियों में CPCT एवं कम्प्यूटर डिप्लोमा की निर्धारित अर्हताएं यथावत अनिवार्य रहेंगी।

 

45 वर्ष से अधिक वालों को बड़ी राहत-आदेश अनुसार शासकीय सेवक अपनी पदोन्नति की तिथि को 45 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं, उन्हें सहायक ग्रेड-3 पर पदोन्नति हेतु CPCT स्कोर कार्ड से छूट प्रदान की गई है, परंतु कम्प्यूटर दक्षता की अनिवार्यता बनी रहेगी।

बांग्लादेश प्रोटेस्ट वाले बयान पर घिरीं AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, बीजेपी बोली- यह राहुल गांधी की ‘पोस्टर गर्ल’

बांग्लादेश प्रोटेस्ट वाले बयान पर घिरीं AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, बीजेपी बोली- यह राहुल गांधी की 'पोस्टर गर्ल'

Pradeep Bhandari attacks rahul gandhi on Neha Bora controversial statement

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने बांग्लादेश में छात्र आंदोलन से प्रेरित होकर भारत में भी ऐसा आंदोलन खड़ा करने की बात कहकर बवाल खड़ा कर दिया। उनके बयान को लेकर भाजपा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष पर निशाना साधा है। भाजपा ने कहा कि राहुल और उनके साथी लोकतंत्र के लिए खतरा है। वे बांग्लादेश जैसा आंदोलन भारत में करना चाहते हैं। ALSO READ: दिल्ली इंटरनेट बैन पर सुप्रीम कोर्ट में झुकी सरकार: गृह सचिव गोविंद मोहन ने मांगी बिना शर्त माफी

 

क्या बोली नेहा बोरा?

नेहा बोरा का एक बयान सामने आया है, जिसमें वह बांग्लादेश में हुए छात्र आंदोलन और भारत में चल रहे जेन-जी आंदोलनों के बीच समानता बताती नजर आ रही हैं। इसमें वह कह रही हैं कि बांग्लादेश में हुए Gen-Z आंदोलन ने भारत के नौजवानों को भी रास्ता दिखाया है। नेहा ने बांग्लादेश के आंदोलन को लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकार से जोड़ते हुए कहा कि आज भारत में भी यही मुद्दे सामने हैं। ALSO READ: राहुल गांधी के घर चाय पर चर्चा की इनसाइड स्टोरी? CJP से नेहा बोरा तक कौन किसके साथ, कौन किसके खिलाफ?

 

प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर नेहा बोरा के बयान को साझा करते हुए राहुल गांधी पर हमला बोला। उन्होंने नेहा बोरा को राहुल गांधी की विचारधारा का समर्थन करने वाली प्रमुख चेहरों में से एक बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का विरोध केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सत्ता परिवर्तन करना है। भंडारी ने नेहा बोरा को ‘राहुल गांधी की पोस्टर गर्ल’ बताया और कहा कि वह बांग्लादेश के सत्ता परिवर्तन से प्रेरित हैं और वैसी ही स्थिति भारत में दोहराना चाहती हैं।

कौन है नेहा बोरा?

नेहा एक प्रमुख छात्र नेता, रंगकर्मी, सामाजिक कार्यकर्ता और शोधार्थी हैं। उन्होंने रंगमंच का उपयोग स्ट्रीट प्ले (नुक्कड़ नाटक) और जन-जागरूकता आंदोलनों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों को उठाने के लिए किया है। वह वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और देश की युवा (Gen-Z) राजनीति में एक चर्चित चेहरा बनकर उभरी हैं। वे मूल रूप से उत्तराखंड के खटीमा (पिथौरागढ़/कुमाऊं क्षेत्र) की रहने वाली हैं। 

 

चूंकि उनके पिता भारतीय सेना में रहे, इसलिए उनका बचपन देश के अलग-अलग शहरों में बीता और उनकी शुरुआती पढ़ाई सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) के दिल्ली पब्लिक स्कूल से हुई। हिंदू कॉलेज/दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से समाजशास्त्र (Sociology) में स्नातक किया। डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली से मास्टर डिग्री हासिल की। नेहा वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के ‘स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स’ (School of Arts and Aesthetics) में पीएचडी की शोधार्थी हैं। उनकी पीएचडी थियेटर और कला के सामाजिक अध्ययन पर केंद्रित है।

 

नीट पेपर लिक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और अन्य छात्र नेताओं के साथ 23 दिनों तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की थी। इसके बाद से ही वे प्रदर्शनों में बड़ा चेहरा बन गई। वे अभिजीत दिपके और राहुल गांधी दोनों के ही साथ प्रदर्शन में दिखाई दी है। 

 

मध्यप्रदेश में फिलहाल नहीं जुड़ेंगे लाड़ली बहनों के नए नाम, मंत्री निर्मला भूरिया की दो टूक, रजिस्ट्रेशन के लिए पोर्टल खोलने का कोई प्रस्ताव नहीं

मध्यप्रदेश में फिलहाल नहीं जुड़ेंगे लाड़ली बहनों के नए नाम, मंत्री निर्मला भूरिया की दो टूक, रजिस्ट्रेशन के लिए पोर्टल खोलने का कोई प्रस्ताव नहीं

भोपाल। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत नए नाम जोड़ने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। लाड़ली बहनों को लेकर सरकार के दो मंत्री आमने सामने आ गए है। महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल नए नाम जोड़ने के लिए पोर्टल खोलने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
 

मीडिया से बात करते हुए निर्मला भूरिया ने दो टूक शब्दों में कहा  कई बार लाड़ली बहनों को लेकर कई तरह के सवाल  आते है, कई बार कांग्रेस भी उठाती है और कई बार अन्य लोग भी बयाान  देते है लेकिन फिलहाल तत्काल पोर्टल खुल रहा है, ऐसा कुछ है। उन्होंने मंत्री नरेंद्र शिवारजी पटेल के मुख्यमंत्री के निर्देश वाली बात पर कहा कि कई बार मंत्री उस भाषा में बोले देते है।

 

दरअसल बुधवार को स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बयान दिया था कि लाड़ली बहना योजना में छूट गई महिलाओं के नाम जोड़ने के लिए आने वाले समय में पोर्टल फिर खोला जाएगा। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निकट भविष्य में योजना से छूटी हुई महिलाओं को जोड़ने की बात कही है। इसके लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि योजना से वंचित रह गई महिलाओं की संख्या का आकलन किया जाए। कितनी महिलाएं योजना का लाभ लेने से छूट गई हैं, इसकी जानकारी जुटाने के लिए आंतरिक स्तर पर निर्देश दिए गए हैं।

 

वहीं अब इस पर महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने साफ कर दिया है अभी ऐसा कोई भी प्रस्ताव विचार में नहीं है और फिलहाल नए नाम जोड़ने के लिए पोर्टल खोलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि बहनों के सशक्तिकरण के लिए सरकार कटिबद्ध है। कई बार लाड़ली बहनों को  लेकर कई तरह के सवाल  आते है, कई बार कांग्रेस भी उठाती है और कई बार अन्य लोग भी बयाान  देते है। महिलाओं के लिए और बहनों के जो कुछ भी हो सकता है, वह सरकार कर रही है। चाहे वह लाड़ली बहना हो या कोई दूसरी योजना हो। सरकार लगातार लाड़ली बहनों के खातों में पैंसा डाल रही है।  वहीं मंत्री निर्मला भूरिया से कहा कि लाड़ली बहनों के लिए एक बड़ी राशि ट्रांसफर की जाती है।

 

गौरतलब है कि पिछले भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से  जब लाडली बहनों को लेकर सवाल किया गया  था उन्होंने  कहा था किउन्हें मुख्यमंत्री बनने के बाद अंदाजा नहीं था कि योजना से सरकार पर इतना भारी आर्थिक भार पड़ेगा। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “तुमको मालूम नहीं, लाड़ली बहना ही बहुत महंगी पड़ गई।

 

कांग्रेस ने सरकार पर कसा तंज- वहीं लाड़ली बहनों को लेकर सरकार के दो मंत्रियों के विरोध बयान पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने तंज कसते हुए कहा कि लाड़ली बहना का भविष्य खतरे में, सरकार में तालमेल गायब। लाड़ली बहना योजना के नए रजिस्ट्रेशन को लेकर भाजपा सरकार के दो मंत्रियों के अलग-अलग बयान सरकार के भीतर तालमेल की कमी उजागर कर रहे हैं। एक मंत्री पोर्टल खुलने का दावा कर रहे हैं, तो दूसरी मंत्री इससे इनकार कर रही हैं। जब सरकार के मंत्रियों को ही योजना के भविष्य की स्पष्ट जानकारी नहीं है, तो प्रदेश की लाखों लाड़ली बहनों का भरोसा कैसे कायम रहेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि उनको पूरी स्थिति को साफ करना चाहिए कि लाड़ली बहनों को योजना से जोड़ना है या सिर्फ़ घोषणाओं में उलझाए रखना है।

 

दिल्ली इंटरनेट बैन पर सुप्रीम कोर्ट में झुकी सरकार: गृह सचिव गोविंद मोहन ने मांगी बिना शर्त माफी

दिल्ली इंटरनेट बैन पर सुप्रीम कोर्ट में झुकी सरकार: गृह सचिव गोविंद मोहन ने मांगी बिना शर्त माफी

delhi protest

केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने दिल्ली में पाबंदी लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि 9 अक्टूबर के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन नहीं किया गया। उन्होंने अवमानना नोटिस रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की ओर से लगाई गई पाबंदियों का मकसद शांति बनाए रखना और कानून-व्यवस्था बिगड़ने से रोकना था। ALSO READ: CJP फंडिंग विवाद: अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन के आरोपों पर भड़के अभिजीत दिपके, कहा- ‘भारत के आंतरिक मामलों में दखल का हक किसने दिया?’

 

गृह सचिव ने कहा कि रायसीना हिल्स के 4 किलोमीटर के दायरे में 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक, यानी एक दिन के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करना जरूरी था, ताकि कानून-व्यवस्था बिगड़ने से रोका जा सके और शांति बनाए रखी जा सके। उन्होंने कहा कि कोर्ट के किसी भी निर्देश का जानबूझकर या सोच-समझकर उल्लंघन नहीं किया गया।

 

गृह सचिव ने हलफनामा में क्या कहा?

अवमानना ​​याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के 11 अक्टूबर के नोटिस के जवाब में, मोहन ने अपने चार पन्नों के हलफनामे में कहा कि यह निलंबन केवल सेल्युलर इंटरनेट सेवाओं तक ही सीमित था, और इसमें वाई-फाई और ब्रॉडबैंड जैसी गैर-सेल्युलर इंटरनेट सेवाएं या दूरसंचार सेवाएं शामिल नहीं थीं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि इंटरनेट सुविधाएं बिना किसी रुकावट के काम करनी चाहिए।

 

बुधवार देर रात दाखिल किए गए हलफनामे में, गृह सचिव ने कहा कि दिल्ली पुलिस द्वारा सेल्युलर इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने का अनुरोध स्थिति की गंभीरता और राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने से रोकने की आवश्यकता को देखते हुए, एक उचित कदम पाया गया। 11 अक्टूबर को, दिल्ली पुलिस द्वारा विरोध प्रदर्शनों को विफल किए जाने के एक दिन बाद, सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के आदेश के कथित उल्लंघन के लिए गृह सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त और DMRC अध्यक्ष को अवमानना ​​नोटिस जारी किया था।

 

केंद्र सरकार ने 20 जुलाई 2026 को दिल्ली पुलिस के अनुभव का हवाला दिया। हलफनामे के मुताबिक, इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाए गए। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले का भी हवाला दिया। ALSO READ: CJP फंडिंग विवाद: अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन के आरोपों पर भड़के अभिजीत दिपके, कहा- ‘भारत के आंतरिक मामलों में दखल का हक किसने दिया?’

 

केंद्र सरकार ने और क्या क्या बताया

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से 11 अक्टूबर 2026 के आदेश में संशोधन करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जरूरत की परिस्थितियों में इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने की अनुमति दी जाए, लेकिन यह कार्रवाई कानून और संबंधित वैधानिक सुरक्षा उपायों के सख्त अनुपालन के साथ हो। इंटरनेट बंद करने को लेकर केंद्र ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया कि रोक केवल मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर थी। गैर-मोबाइल इंटरनेट सेवाओं, वाई-फाई और ब्रॉडबैंड पर कोई रोक नहीं लगाई गई थी।

 

हलफनामे में कहा गया है कि सीमित अवधि और निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं का निलंबन सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने का मान्य उपाय हो सकता है। हालांकि, यह लागू कानून और वैधानिक सुरक्षा उपायों के अधीन होना चाहिए। गृह सचिव ने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट के प्रति सम्मान भी जताया। उन्होंने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट और देश की सभी अदालतों का सर्वोच्च सम्मान करते हैं।

गुजरात के छोटे उद्योगों को अब एक क्लिक पर मिलेगी सरकारी सहायता

गुजरात के छोटे उद्योगों को अब एक क्लिक पर मिलेगी सरकारी सहायता

harsh sanghvi

गुजरात के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया को अधिक सरल बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब तक सरकारी सहायता प्राप्त करने के लिए उद्यमियों को कई जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था, लेकिन अब ‘सिंगल क्लिक पेमेंट’ सिस्टम शुरू करके इसे बेहद आसान बना दिया गया है।

 

गांधीनगर में उपमुख्यमंत्री (DyCM) हर्ष संघवी की अध्यक्षता में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में इस नई भुगतान व्यवस्था का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान सूक्ष्म और लघु उद्योगों को वित्तीय सहायता के आसान भुगतान के साथ-साथ राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए 33 हेक्टेयर भूमि के औद्योगिक भूखंडों आवंटन (ई-अलॉटमेंट) भी किया गया।

 

गुजरात के औद्योगिक विकास में MSME का महत्वपूर्ण योगदान

गुजरात के समग्र आर्थिक और औद्योगिक ढांचे में MSME क्षेत्र रीढ़ की हड्डी के समान काम करता है। छोटे और लघु उद्योग राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने के अलावा उत्पादन और व्यापार क्षेत्र को भी मजबूत बनाते हैं। इसी वजह से उद्योगों को समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए सरकार के स्तर पर सिंगल क्लिक पेमेंट जैसी आधुनिक व्यवस्था लागू की गई है।

 

सिंगल क्लिक पेमेंट से पारदर्शी वित्तीय सहायता

इस पूरे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पात्र सूक्ष्म और लघु उद्यमियों को बिना किसी देरी के वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना है। सिंगल क्लिक पेमेंट से सहायता राशि सीधे और पारदर्शी तरीके से स्थानांतरित होगी। हालांकि, इस कार्यक्रम के दौरान कुल कितनी राशि की सहायता वितरित की गई और कितने उद्यमियों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिला, इसकी सटीक संख्यात्मक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

 

33 हेक्टेयर औद्योगिक भूखंडों का ई-आवंटन

वित्तीय सहायता के साथ-साथ नए उद्योगों की स्थापना और मौजूदा उद्योगों के विस्तार के लिए भूमि की उपलब्धता भी उतनी ही आवश्यक है। इस जरूरत को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम के दौरान 33 हेक्टेयर औद्योगिक भूखंडों का ई-आवंटन किया गया, जिससे उद्यमियों को उचित बुनियादी सुविधाओं के साथ अपना परिचालन शुरू करने का अवसर मिलेगा।

 

ई-आवंटन से उद्यमियों के लिए नए अवसरों का सृजन

ई-आवंटन की इस सुव्यवस्थित प्रक्रिया से उद्यमियों के लिए विकास के नए द्वार खुलेंगे। पारदर्शी डिजिटल माध्यम से भूखंडों के आवंटन से नए अवसरों का सृजन होगा। हालांकि, ये 33 हेक्टेयर भूखंड राज्य के किस विशिष्ट औद्योगिक क्षेत्र में स्थित हैं और कितने उद्योगपतियों को इनका आवंटन किया गया है, इसकी जानकारी सरकारी विवरण में स्पष्ट नहीं की गई है।

 

गुजरात औद्योगिक नीति-2026 के तहत मिलने वाले प्रोत्साहन

राज्य सरकार द्वारा नई ‘गुजरात औद्योगिक नीति-2026’ के तहत भी MSME क्षेत्र के लिए व्यापक प्रोत्साहनों के प्रावधान किए गए हैं। इनमें पूंजी निवेश सहायता, ऋण ब्याज में राहत, रोजगार प्रोत्साहन, प्रौद्योगिकी अपग्रेडेशन और गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त करने के लिए वित्तीय सहायता जैसे कई पहलू शामिल हैं।

 

छोटे उद्यमियों के सशक्तिकरण की दिशा में भविष्य की उम्मीद

समय पर वित्तीय सहायता और उपयुक्त औद्योगिक भूमि की उपलब्धता किसी भी छोटे उद्योग के विकास के लिए बुनियादी जरूरत है। डिप्टी सीएम हर्ष संघवी की अध्यक्षता में लिए गए इन फैसलों से छोटे उद्यमियों को बड़ा सहयोग मिलेगा। अब आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस योजना का लाभ अंतिम छोर के उद्यमियों तक कितनी जल्दी पहुंचता है।डिप्टी सीएम हर्ष संघवी की बड़ी पहल: गुजरात के छोटे उद्योगों को अब एक क्लिक पर मिलेगी सरकारी सहायता

 

गुजरात के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया को अधिक सरल बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब तक सरकारी सहायता प्राप्त करने के लिए उद्यमियों को कई जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था, लेकिन अब ‘सिंगल क्लिक पेमेंट’ सिस्टम शुरू करके इसे बेहद आसान बना दिया गया है।

 

डिप्टी सीएम हर्ष संघवी की अध्यक्षता में नई प्रणाली का शुभारंभ

गांधीनगर में उपमुख्यमंत्री (DyCM) हर्ष संघवी की अध्यक्षता में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में इस नई भुगतान व्यवस्था का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान सूक्ष्म और लघु उद्योगों को वित्तीय सहायता के आसान भुगतान के साथ-साथ राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए 33 हेक्टेयर भूमि के औद्योगिक भूखंडों आवंटन (ई-अलॉटमेंट) भी किया गया।

 

गुजरात के औद्योगिक विकास में MSME का महत्वपूर्ण योगदान

गुजरात के समग्र आर्थिक और औद्योगिक ढांचे में MSME क्षेत्र रीढ़ की हड्डी के समान काम करता है। छोटे और लघु उद्योग राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने के अलावा उत्पादन और व्यापार क्षेत्र को भी मजबूत बनाते हैं। इसी वजह से उद्योगों को समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए सरकार के स्तर पर सिंगल क्लिक पेमेंट जैसी आधुनिक व्यवस्था लागू की गई है।

 

सिंगल क्लिक पेमेंट से पारदर्शी वित्तीय सहायता

इस पूरे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पात्र सूक्ष्म और लघु उद्यमियों को बिना किसी देरी के वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना है। सिंगल क्लिक पेमेंट से सहायता राशि सीधे और पारदर्शी तरीके से स्थानांतरित होगी। हालांकि, इस कार्यक्रम के दौरान कुल कितनी राशि की सहायता वितरित की गई और कितने उद्यमियों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिला, इसकी सटीक संख्यात्मक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

 

33 हेक्टेयर औद्योगिक भूखंडों का ई-आवंटन

वित्तीय सहायता के साथ-साथ नए उद्योगों की स्थापना और मौजूदा उद्योगों के विस्तार के लिए भूमि की उपलब्धता भी उतनी ही आवश्यक है। इस जरूरत को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम के दौरान 33 हेक्टेयर औद्योगिक भूखंडों का ई-आवंटन किया गया, जिससे उद्यमियों को उचित बुनियादी सुविधाओं के साथ अपना परिचालन शुरू करने का अवसर मिलेगा।

 

ई-आवंटन से उद्यमियों के लिए नए अवसरों का सृजन

ई-आवंटन की इस सुव्यवस्थित प्रक्रिया से उद्यमियों के लिए विकास के नए द्वार खुलेंगे। पारदर्शी डिजिटल माध्यम से भूखंडों के आवंटन से नए अवसरों का सृजन होगा। हालांकि, ये 33 हेक्टेयर भूखंड राज्य के किस विशिष्ट औद्योगिक क्षेत्र में स्थित हैं और कितने उद्योगपतियों को इनका आवंटन किया गया है, इसकी जानकारी सरकारी विवरण में स्पष्ट नहीं की गई है।

 

गुजरात औद्योगिक नीति-2026 के तहत मिलने वाले प्रोत्साहन

राज्य सरकार द्वारा नई ‘गुजरात औद्योगिक नीति-2026’ के तहत भी MSME क्षेत्र के लिए व्यापक प्रोत्साहनों के प्रावधान किए गए हैं। इनमें पूंजी निवेश सहायता, ऋण ब्याज में राहत, रोजगार प्रोत्साहन, प्रौद्योगिकी अपग्रेडेशन और गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त करने के लिए वित्तीय सहायता जैसे कई पहलू शामिल हैं।

 

छोटे उद्यमियों के सशक्तिकरण की दिशा में भविष्य की उम्मीद

समय पर वित्तीय सहायता और उपयुक्त औद्योगिक भूमि की उपलब्धता किसी भी छोटे उद्योग के विकास के लिए बुनियादी जरूरत है। डिप्टी सीएम हर्ष संघवी की अध्यक्षता में लिए गए इन फैसलों से छोटे उद्यमियों को बड़ा सहयोग मिलेगा। अब आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस योजना का लाभ अंतिम छोर के उद्यमियों तक कितनी जल्दी पहुंचता है।

CJP फंडिंग विवाद: अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन के आरोपों पर भड़के अभिजीत दिपके, कहा- ‘भारत के आंतरिक मामलों में दखल का हक किसने दिया?’

CJP फंडिंग विवाद: अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन के आरोपों पर भड़के अभिजीत दिपके, कहा- 'भारत के आंतरिक मामलों में दखल का हक किसने दिया?'

abhijeet dipke and marry millben on cjp funding

सीजेपी नेता अभिजीत दिपके ने अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन को सीजेपी फंडिंग संबंधी बयान पर जवाब देते हुए कहा कि भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का अधिकार विदेशी नागरिकों को किसने दिया? हम अपने मुद्दों को खुद संभालने में पूरी तरह सक्षम हैं। हमें अपने देश के मामलों में बाहरी लोगों के दखल की जरूरत नहीं है। ALSO READ: अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन का बड़ा दावा: CJP को मिल रही अमेरिका से फंडिंग, पीएम मोदी के खिलाफ साजिश का आरोप

 

मिलबेन ने लगाए थे गंभीर आरोप

मैरी मिलबेन ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भारत के सभी युवा देशभक्तों, यह चुप रहने का समय नहीं है। अभिजीत दीपके और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को अमेरिका के उन डोनर्स से फंडिंग मिल रही है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके नेतृत्व में आपके भविष्य के खिलाफ हैं।

 

उन्होंने कहा कि डरो मत, मेरे युवा देशभक्तों। आपके प्रधानमंत्री, जिन्होंने 25 साल तक भारत की सेवा की है – 12 साल प्रधानमंत्री के तौर पर और लगातार तीन बार चुने गए – वे मेरे देश की विघटनकारी ताकतों के सामने झुकने वाले नहीं हैं। ALSO READ: तिहाड़ जेल में कटी सौरव दास और आशुतोष रांका की पहली रात: जमीन पर कंबल बिछाकर रोए, दाल-रोटी का सहारा

 

क्या है अभिजीत दिपके का जवाब

इसके जवाब में दिपके ने पलटवार करते हुए सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ही देशवासियों को बदनाम करने के लिए अमेरिकियों का समर्थन क्यों मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का अधिकार विदेशी नागरिकों को किसने दिया? हम अपने मुद्दों को खुद संभालने में पूरी तरह सक्षम हैं। हमें अपने देश के मामलों में बाहरी लोगों के दखल की जरूरत नहीं है।

मिलबेन ने फिर किया पलटवार

इस पर  जवाब देते हुए मिलबेन ने कहा कि “डियर अभिजीत दिपके, सच सबको स्वतंत्र करता है। आपको भी। और यहाँ सच यह है कि जब आप सफल नहीं होंगे, तो ये अमेरिकी दानदाता आपको एक झटके में छोड़ देंगे। और आप सफल नहीं होंगे, क्योंकि अराजकता कभी नहीं जीतती। इसके बजाय, अपनी अमेरिकी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग भलाई के लिए करें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठें और भारत को आगे बढ़ाने के लिए एक सकारात्मक आवाज बनें। सही काम करने की आपकी हिम्मत का सच आपके अगले कदमों में निहित है।

 

 और प्रधानमंत्री को अमेरिकी समर्थन की आवश्यकता नहीं है। उनके पीछे 1.5 अरब खूबसूरत भारतीय नागरिक हैं जो उनका समर्थन करते हैं और 25 साल से ऐसा कर रहे हैं—12 साल प्रधानमंत्री के रूप में, तीन लगातार कार्यकाल। और 2029 में भी करेंगे। यही सच है।”