पोषण की नई ताकत बना यूपी का टेक होम राशन, बच्चों की सेहत से महिलाओं की आत्मनिर्भरता तक दिखा असर

पोषण की नई ताकत बना यूपी का टेक होम राशन, बच्चों की सेहत से महिलाओं की आत्मनिर्भरता तक दिखा असर

उत्तर प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान केवल पोषण सामग्री के वितरण तक सीमित नहीं है। टेक होम राशन (टीएचआर) योजना के जरिए बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं की अलग-अलग पोषण जरूरतों के अनुसार उत्पाद तैयार कर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। योजना के तहत शिशु अमृत, शिशु आहार, बाल पुष्टिकर, संपूर्ण मातृ आहार, आरोग्य पोषण, बाल संजीवनी और सक्षम पोषण जैसे सात उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनमें ऊर्जा, प्रोटीन, आयरन समेत जरूरी पोषक तत्व शामिल किए गए हैं। इससे लाभार्थियों को उनकी उम्र और जरूरत के अनुरूप पोषण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

 

बच्चों में नाटेपन की दर में लगातार गिरावट आई है। वर्ष 2015-16 में यह दर 46.3 प्रतिशत थी, जो 2019-21 में घटकर 39.7 प्रतिशत हो गई। वहीं अब में यह आंकड़ा 31.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसके अलावा अल्पवजन और दुबलापन जैसी समस्याओं में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। 
 

आंगनबाड़ी केंद्रों से पोषण के साथ निगरानी और जागरूकता

 

टीएचआर योजना की व्यवस्था को आंगनबाड़ी सेवाओं से जोड़ा गया है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां लाभार्थियों को पोषण सामग्री उपलब्ध कराने के साथ बच्चों का वजन मापने, उनके विकास की निगरानी करने और गर्भवती व धात्री महिलाओं को पोषण संबंधी परामर्श देने का काम करती हैं। परिवारों को संतुलित आहार और पोषण के महत्व के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी भी निभाई जा रही है। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल पोषण सामग्री पहुंचाना नहीं, बल्कि लाभार्थियों की जरूरत को समझकर उन्हें लगातार पोषण संबंधी सहयोग उपलब्ध कराना है।

 

4 हजार से अधिक महिलाओं को रोजगार, गांवों में मजबूत हुई आर्थिक भागीदारी

 

टेक होम राशन योजना को महिला सशक्तीकरण से जोड़ना इसकी अहम विशेषता है। उत्पादन और आपूर्ति की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों को दी गई है। वर्तमान में 4,000 से अधिक महिलाएं इन उत्पादन इकाइयों से जुड़कर रोजगार प्राप्त कर रही हैं। इससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर आय का अवसर मिला है और स्वयं सहायता समूहों की आर्थिक गतिविधियों को भी विस्तार मिला है। पोषण उत्पाद तैयार करने से लेकर उनकी आपूर्ति व्यवस्था तक महिलाओं की भागीदारी ने योजना को आजीविका और पोषण, दोनों से जोड़ दिया है।

 

गुणवत्ता व साफ-सफाई को लेकर सख्त निर्देश

 

बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन की निदेशक हर्षिता माथुर ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को दिए जाने वाले पोषाहार की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर शासन ने सम्बंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। भोजन की गुणवत्ता उच्च स्तर की होना अनिवार्य है। खाना बनाने से पहले खाद्य सामग्री की अच्छी तरह सफाई और हरी सब्जियों को दो से तीन बार पानी से धोना सुनिश्चित किया जाए। बच्चों को परोसने से पहले हर दिन कम से कम दो वयस्कों द्वारा भोजन की गुणवत्ता की जांच कराई जाए।  स्वच्छता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

 

9 साल में बदला पोषण अभियान का स्वरूप

 

पिछले 9 वर्षों में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के द्वारा उत्तर प्रदेश में पोषण सेवाओं को अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने पर जोर दिया गया है। डिजिटल निगरानी, पारदर्शी वितरण व्यवस्था और महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी के साथ पोषण अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कोशिश हुई है। टीएचआर मॉडल में एक ओर बच्चों और माताओं को गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध कराने पर जोर है, तो दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भरता का रास्ता तैयार किया गया है। योगी सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाते हुए प्रत्येक पात्र परिवार तक बेहतर पोषण और स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं पहुंचाना है।

प्रदेश के विभिन्न जिलों के रसोइयों ने जताया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार

प्रदेश के विभिन्न जिलों के रसोइयों ने जताया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार

परिषदीय विद्यालयों में पीएम पोषण योजना (मिड-डे मील) के तहत वर्षों से बच्चों के लिए भोजन बनाने वाली रसोइया बहनों के लिए यह सप्ताह किसी त्योहार से कम नहीं रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मानदेय में प्रतिमाह एक हजार रुपये की बढ़ोतरी और परिवार सहित पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की घोषणा से प्रदेशभर की रसोइयों में खुशी की लहर दौड़ गई। सोमवार को लखनऊ के गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में सीएम योगी ने इस योजना का औपचारिक शुभारंभ किया और उत्कृष्ट कार्य करने वाली रसोइयों को सम्मानित भी किया। जिलों में इसका सजीव प्रसारण किया गया।

 

मेहनत को मिला सम्मान, बढ़ा हौसला
 

सहारनपुर के पीएम श्री उच्च प्राथमिक विद्यालय जाटोवाला की रसोइया रीता देवी ने कहा कि यह वृद्धि उनके श्रम और समर्पण के प्रति योगी सरकार द्वारा दिए जा रहे सम्मान को दर्शाती है। इस निर्णय से सभी रसोइया बहनों का उत्साह और मनोबल बढ़ा है। जिले की अन्य रसोइयों ने भी इसे सरकार की समाज के हर वर्ग को आत्मनिर्भर बनाने की नीति का हिस्सा बताया।
 

सजीव प्रसारण देख झूम उठीं रसोइयां
 

आदमगढ़ में लखनऊ के मुख्य समारोह का सीधा प्रसारण आजमगढ़ के नेहरू हॉल में देखा गया, जहां सैकड़ों रसोइयां जुटीं। जैसे ही पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की घोषणा हुई, पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार पटेल ने कहा कि नौनिहालों का पोषण संभालने वाली रसोइयों के स्वास्थ्य की चिंता करना सरकार का दायित्व था, जबकि बीएसए राजीव पाठक ने बताया कि अब रसोइयों को इलाज के लिए कर्ज नहीं लेना पड़ेगा।
 

घर के बजट को मिली राहत
 

मेरठ के खानपुर जूनियर हाईस्कूल की रसोइया विमलेश ने कहा कि मानदेय बढ़ने से घर के खर्च में राहत मिलेगी। परिवार के लिए पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलना उनके लिए बड़ी राहत है, क्योंकि अब बीमारी के समय पैसों की चिंता कम होगी।
 

मुख्यमंत्री ने हमारी मेहनत को समझा
 

आगरा के प्राथमिक विद्यालय नगला डिठवार की रसोइया आशा देवी ने खुशी जताते हुए कहा कि बढ़े हुए मानदेय और पांच लाख के कैशलेस इलाज से उन्हें बड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी जी ने उनकी मेहनत और जरूरतों को समझा है, जिसके लिए वे हृदय से आभार व्यक्त करती हैं।
 

कर्ज के डर से मिली मुक्ति
 

मुरादाबाद के प्राथमिक विद्यालय मिलक नगरिया जट में बीते 10-12 वर्षों से कार्यरत रसोइया सूरजमुखी, जो चार बच्चों के परिवार का भरण-पोषण करती हैं, ने कहा कि मानदेय में एक हजार रुपये की बढ़ोतरी से घर का बजट संभालने में मदद मिलेगी। सबसे बड़ी राहत पांच लाख रुपये के कैशलेस इलाज से मिली है, जिससे अब गंभीर बीमारी में कर्ज में डूबने का डर नहीं रहेगा।
 

रक्षाबंधन का बड़ा तोहफा
 

वाराणसी के ग्राम लेढ़ूपुर, विकासखंड चिरईगांव की रसोइया संतरा देवी ने कहा कि योगी सरकार ने रक्षाबंधन पर रसोइया बहनों को बड़ा तोहफा दिया है। उन्होंने बताया कि पहले बीमार होने पर इलाज के लिए कई बार सोचना पड़ता था, लेकिन अब परिवार के इलाज की चिंता कम होगी और महिलाओं को सम्मान के साथ आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिला है।
 

अब समय पर हो सकेगा इलाज
 

सोनभद्र के प्राथमिक विद्यालय दुरावलखुर्द, घोरावल की रसोइया अमरावती देवी ने कहा कि पैसों की तंगी के चलते पहले तबियत खराब होने पर भी दर्द दबाकर काम करना पड़ता था। अब बिना पैसे के इलाज मिलने से समय रहते डॉक्टर को दिखाया जा सकेगा और जान बचाई जा सकेगी।
 

सम्मान पाकर खिले चेहरे
 

कानपुर के प्राथमिक विद्यालय दूल, कल्याणपुर की रसोइया मंजू ने बताया कि पहले दो हजार रुपये मानदेय में घर का खर्च चलाना मुश्किल होता था। मानदेय बढ़ने से राहत तो मिलेगी ही, लेकिन सबसे ज्यादा खुशी पांच लाख रुपये के हेल्थ कार्ड की है, क्योंकि अब बीमारी में कर्ज नहीं लेना पड़ेगा। इस तरह प्रदेशभर की रसोइया बहनों ने एक स्वर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए इस निर्णय को अपने परिवार की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

Top News 24 August : 20 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, H1N1 पर ICMR का बड़ा अपडेट और मिस यूनिवर्स इंडिया बनीं केरल की केजिया लिज

Top News 24 August : 20 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, H1N1 पर ICMR का बड़ा अपडेट और मिस यूनिवर्स इंडिया बनीं केरल की केजिया लिज

top news 24 august

Top News 24 August : IMD का 20 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, H1N1 वायरस पर ICMR का बड़ा बयान, अमरावती में महिला अस्पताल के NICU में लगी आग में 3 मासूमों की मौत हो गई। बांग्लादेश के रंगपुर में हिंदू परिवार के 4 लोगों की हत्या। केरल की लिज बनीं मिस यूनिवर्स इंडिया। 24 अगस्त की बड़ी खबरें :

 

20 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

उत्तर भारत में भले ही मानसून कुछ कमजोर पड़ गया है, लेकिन जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड मूसलाधार बारिश कहर बरपा रही है। मध्य, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में ज्यादातर नदियां उफान पर हैं और बाढ़ से हाल बेहाल है। मौसम विभाग के अनुसार, देश के लगभग 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अगले 4-5 दिन बारिश हो सकती है।

 

H1N1 वायरस पर ICMR का बड़ा बयान

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कहा कि H1N1 वायरस को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। वर्तमान में फैल रहा स्वाइन फ्लू वायरस कोई नया वेरिएंट नहीं है। यह 2025 से ही देश में मौजूद है और लगातार निगरानी में है। ALSO READ: H1N1 Strain : क्या देश में आ गया कोई नया खतरनाक वायरस? ICMR के इस बड़े खुलासे ने दूर किया सबका डर!

 

अमरावती महिला अस्पताल के NICU में लगी आग

महाराष्‍ट्र के अमरावती में जिला महिला अस्पताल के अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित NICU में अचानक धमाका हुआ। इसके बाद वार्ड में आग और धुआं फैल गया। हादसे में तीन नवजातों की मौत हो गई। छह नवजातों को सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल भेजा गया।

 

बांग्लादेश में हिंदू परिवार की निर्मम हत्या

बांग्लादेश के रंगपुर में याबा नशे का विरोध करने पर हिंदू परिवार के एक रिटायर्ड शिक्षक समेत परिवार के 4 सदस्यों की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। परिवार के चारों लोगों के शव शनिवार रात बंद घर से मिले थे। इस मामले में पुलिस ने 2 संदिग्धों को गिरफ़्तार किया है, जो कि रिश्‍ते में चचेरे भाई हैं। ALSO READ: बांग्लादेश में हिंदू परिवार की निर्मम हत्या, बंद घर में मिले 4 शव, इस बात से नाराज थे आरोपी

 

केरल की लिज बनीं मिस यूनिवर्स इंडिया

केरल की कैजिया लिज मैजो ने मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 का खिताब जीत लिया। मिस यूनिवर्स इंडिया 2025 की विजेता मनिका विश्वकर्मा ने 19 वर्षीय लिज को क्राउन पहनाया। तमिलनाडु की वैष्णवी फर्स्ट रनर अप और गुजरात की अनुश्री सतवालेकर सेकंड रनर अप रहीं।

क्या सूखे की मार से जर्मनी में महंगा होगा भोजन?

क्या सूखे की मार से जर्मनी में महंगा होगा भोजन?

Germany drought

निक मार्टिन

जर्मनी के मुख्य किसान संघ ने चेतावनी दी है कि सूखे और भीषण गर्मी से फसलों को पहुंचे नुकसान के कारण इस बार पैदावार औसत से कम रहेगी। क्या कम पैदावार का महंगाई भड़काएगी।

 

जर्मनी के मुख्य किसान संघ ने चेतावनी के बाद डीडब्ल्यू यह समझने की कोशिश कर रहा है कि कम पैदावार से खाने-पीने की चीजों की कीमतों और राशन के बिल पर क्या असर पड़ सकता है। जानिए जलवायु परिवर्तन के दौर में खाद्यान्न संकट के अलग अलग आयाम। ALSO READ: शरीर के हर अंग को प्रभावित करता है जंगल की आग का धुआं

 

1. जर्मनी में 2026 में फसल की पैदावार पर कितना असर होगा?

जर्मन किसान संघ (डीबीवी) ने मध्य अगस्त में चेतावनी दी कि लगातार सूखे के कारण फसल की पैदावार ‘औसत से कम' होगी, क्योंकि खेतों का बहुत बड़ा हिस्सा बुरी तरह से सूख चुका है और जमीन प्यासी पड़ी है।

 

एक बयान में, डीबीवी के अध्यक्ष योआखिम रुकवीड ने चेतावनी दी कि देश में अनाज की पैदावार पिछले साल की तुलना में 7 फीसदी कम रहेगी। उन्होंने इसका कारण “बहुत ज्यादा सूखी बसंत ऋतु और जून के दूसरे भाग में पड़ी भीषण गर्मी” को बताया, जिसने “कई फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया।”

 

डीबीवी ने कहा कि इस साल अनाज का कुल उत्पादन 41.9 मिलियन टन होने का अनुमान है, जो 2025 की तुलना में लगभग 3.3 मिलियन टन कम है।

 

रेपसीड (सरसों जैसी एक फसल का तिलहन) की पैदावार में सबसे बड़ी गिरावट आई। इसकी 3.3 मिलियन टन फसल हुई, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 17 फीसदी कम है। वहीं, कम पैदावार के बावजूद जौ का उत्पादन पिछले साल के स्तर पर ही रहा, क्योंकि इसे उगाने के लिए ज्यादा जमीन का इस्तेमाल किया गया था।

 

डीबीवी ने कहा कि आलू की फसल भी औसत से कम रहने की उम्मीद है और कुछ इलाकों में चुकंदर की फसल “काफी खराब” हो सकती है। रुकवीड का कहना है कि इस बार खेती में यह बात बहुत मायने रख रही है कि खेत किस इलाके में है। उन्होंने बताया कि खासकर दक्षिण और पश्चिम जर्मनी में फसलें बहुत कम हुई हैं और कई जगहों पर तो पूरी की पूरी फसल ही बर्बाद हो गई है।

 

इसके अलावा, जर्मनी के फेडरल स्टैटिस्टिकल ऑफिस ने चेतावनी दी है कि पिछले साल की तुलना में देश में सेब की फसल में 18 फीसदी की कमी आने का अनुमान है।

 

जर्मन मौसम विभाग के अनुसार, जर्मनी इस समय रिकॉर्ड तोड़ गर्मी वाले मौसम के बीच भीषण सूखे का सामना कर रहा है। मार्च से ही बारिश बहुत कम हो रही थी और अब इस भीषण गर्मी ने हालात को और भी बिगाड़ दिया है। ALSO READ: ट्रंप को झटका, 75 देशों पर वीजा प्रतिबंध के फैसले पर रोक

 

2. सूखे का असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों और उनकी उपलब्धता पर कैसे पड़ेगा?

कृषि मंत्री आलोइस रेनर ने मंगलवार को सरकारी ब्रॉडकास्टर ‘जेडडीएफ' को बताया कि मंत्रियों को “तुरंत दाम बढ़ने की उम्मीद नहीं है।” हालांकि, उन्होंने इस बात की गुंजाइश छोड़ दी कि ग्राहकों को किराना सामान के लिए ज्यादा पैसे देने में कुछ वक्त लग सकता है, यानी आगे चलकर दुकानों पर राशन थोड़ा महंगा हो सकता है।

 

हालांकि, 1,600 कृषि सहकारी समितियों का प्रतिनिधित्व करने वाले जर्मन राइफआइजन एसोसिएशन (डीआरवी) के प्रबंध निदेशक फिलिप श्पिने ने डीडब्ल्यू को बताया कि उनके सदस्यों को खेतों में ही 60 करोड़ यूरो का ‘सीधा नुकसान' हो चुका है।

 

श्पिने ने चेतावनी दी, “फिलहाल, खेती और सप्लाई चेन से जुड़े कई क्षेत्रों में लागत नहीं निकल पा रही है।” उन्होंने बताया कि खाद, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत किस तरह किसानों पर दबाव बढ़ा रही हैं।

 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जर्मनी के पास पिछले साल की फसल का 20 लाख टन अनाज का सरप्लस यानी अतिरिक्त भंडार है, जिससे ब्रेड की कीमतों को बढ़ने से रोका जा सकता है। फिर भी, रेपसीड और चुकंदर के उत्पादन में आई भारी गिरावट से घरेलू खाद्य तेल और चीनी की आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है। इस कमी को पूरा करने के लिए आयात की जरूरत पड़ेगी।

 

स्थानीय मीडिया ने पिछले हफ्ते खबर दी कि सूखे के कारण कई राज्यों में पशु चारे के स्टॉक में भारी गिरावट आई है, खासकर दक्षिणी जर्मनी में। जर्मन किसान संघ ने पहले भी चेतावनी दी थी कि अगर अनाज कम पैदा होगा और मवेशियों के चरने के लिए घास कम उगेगी, तो जाहिर है कि चिकन-मीट, दूध और अंडों के दाम भी ऊपर भागेंगे।

 

देश के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में, आपूर्ति कम होने से आलू और दूसरी सब्जियों के दाम बढ़ सकते हैं। हालांकि, ज्यादातर खरीदारों को सामान की किल्लत तो शायद ही झेलनी पड़े, लेकिन हां, धीरे-धीरे चीजों के दाम बढ़ने से जेब पर बोझ जरूर बढ़ेगा। ALSO READ: इसराइली मंत्री के “टारगेट किलिंग” वाले बयान पर उबाल

 

3. यह सूखा खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को कैसे बढ़ाता है?

कोरोना महामारी के बाद से जर्मनीा और दुनिया भर में खेती पर बार-बार दबाव पड़ा है। पिछले महीने जारी हुए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2020 से अब तक जर्मनी में खाने-पीने की चीजों के दाम 36 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ चुके हैं। सरकार के हिसाब से, पोल्ट्री मीट, दूध से बने कई उत्पादों, अंडे, खाने वाले तेल, बटर और चीनी की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

 

साल 2022 में रूस-यूक्रेन जंग की वजह से ब्लैक सी से होने वाली यूक्रेनी अनाज की सप्लाई ठप पड़ गई थी और ईंधन महंगा हो गया था। इसका सीधा असर खाद, ट्रांसपोर्ट और फूड प्रोसेसिंग से जुड़े खर्चों पर पड़ा।

 

इसके बाद, ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया। इससे खाड़ी के देशों से निकलने वाले तेल, गैस और खाद सप्लाई के रास्ते सुन्न पड़ गए। इस लड़ाई ने डीजल, उर्वरक और कीटनाशकों को इतना महंगा कर दिया है कि कई किसानों ने तो खेतों में खाद, पोषण डालना ही कम कर दिया है।

 

उद्योग जगत ने चेतावनी दी है कि पिछले छह सालों से एक के बाद एक आए संकटों ने जर्मन कृषि क्षेत्र के एक बड़े हिस्से की आर्थिक हालत बिगाड़ दी है। कई किसानों का कहना है कि वे बहुत ज्यादा बढ़ती लागतों और बढ़ते कर्ज का सामना कर रहे हैं। अब उनके पास आगे होने वाले नुकसान को झेलने की बहुत कम गुंजाइश बची है।

 

4. जर्मन किसान किस तरह की मदद चाहते हैं?

जर्मन किसान संघ ने कहा कि कुछ किसानों को अपना भविष्य सुरक्षित रखने के लिए अंतरिम वित्तपोषण (तुरंत आर्थिक मदद) की जरूरत हो सकती है। रुकवीड ने बर्लिन (जर्मन सरकार) से कृषि क्षेत्र की मदद के लिए एक ‘तत्काल पैकेज' शुरू करने की मांग की है। उनकी सिफारिशों में यूरोपीय संघ के उर्वरक सहायता पैकेज को 6 करोड़ यूरो से बढ़ाकर 18 करोड़ यूरो करना शामिल है, जिसका भुगतान तेजी से और बिना किसी कागजी अड़चन के किया जाए।

 

डीबीवी ने मंत्रियों से मांग की है कि कम से कम नवंबर के आखिर तक खेती में इस्तेमाल होने वाले डीजल पर टैक्स कम किया जाए। साल 2023 के अंत से कई महीनों तक, जर्मन किसानों ने खेती के लिए मिलने वाली ईंधन सब्सिडी खत्म करने की योजनाओं के विरोध में ट्रैक्टरों से राजमार्ग जाम कर दिए थे। बाद में, इस फैसले को आंशिक रूप से वापस ले लिया गया था।

 

कृषि मंत्री राइनर ने किसानों को खास मदद देने का वादा किया है, लेकिन यह मदद तभी मिलेगी जब अगस्त के आखिर में भरोसेमंद सरकारी आंकड़े मिल जाएंगे।

H1N1 Strain : क्या देश में आ गया कोई नया खतरनाक वायरस? ICMR के इस बड़े खुलासे ने दूर किया सबका डर!

H1N1 Strain : क्या देश में आ गया कोई नया खतरनाक वायरस? ICMR के इस बड़े खुलासे ने दूर किया सबका डर!

ICMR on H1N1 Strain

H1N1 Strain Update: देशभर के अस्पतालों में इन दिनों बदलते मौसम और मानसून के चलते फ्लू और सर्दी-खांसी के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा देखा जा रहा है। राजधानी दिल्ली से लेकर बेंगलुरु और मुंबई तक स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के मामलों के बढ़ने से लोगों के मन में डर बैठ गया था कि क्या कोई नया म्यूटेंट या खतरनाक वायरस देश में पैर पसार रहा है। लेकिन अब देश की सर्वोच्च चिकित्सा अनुसंधान संस्था ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) ने इस पर आधिकारिक बयान जारी कर सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया है। ALSO READ: H1N1 Cases: दिल्ली-NCR में 1,700 से ज्यादा मामले, मुंबई में भी तेजी, बच्चों में फ्लू जैसे लक्षण बढ़े, जानें बचाव और कब कराएं टेस्ट

 

क्या कहती है आईसीएमआर की रिपोर्ट

ICMR के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि भारत में इन दिनों जो Influenza A (H1N1) वायरस एक्टिव हैं, वह कोई नया स्ट्रेन नहीं है। यह वायरस असल में A/Missouri/11/2025 (H1N1) pdm09-like स्ट्रेन से मेल खाता है, जो कि क्लेड (Clade) 6B.1A.5a2a और सबकलेड D.3.1.1 के अंतर्गत आता है। इससे घबराने की जरूत नहीं है। यह स्ट्रेन साल 2025 से ही देश में सर्कुलेशन में है। राहत की बात यह है कि वर्तमान में फैल रहे इन फ्लू स्ट्रेन पर उत्तरी गोलार्ध के लिए अनुशंसित मौजूदा वैक्सीन पूरी तरह प्रभावी और मेल खाने वाली हैं।

 

क्यों बढ़ रहे हैं मामले?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने हाल ही में देश में मौसमी बीमारियों और अस्पताल की तैयारियों को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की है। विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान नमी, तापमान में उतार-चढ़ाव और भीड़-भाड़ वाले इनडोर स्थानों की वजह से मौसमी फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी आम बात है। दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्यों में स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सतर्क है और अस्पतालों में पर्याप्त बेड व दवाइयां उपलब्ध हैं। ALSO READ: सावधान! क्या आपको भी है तेज बुखार और खांसी? नजरंदाज न करें H1N1 का यह खतरा

 

फ्लू के मुख्य लक्षण और बचाव के उपाय

मौसमी फ्लू आमतौर पर स्वतः ठीक होने वाला (Self-limiting) होता है, फिर भी इसके लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:

मुख्य लक्षण: तेज बुखार, लगातार खांसी, सिरदर्द और बदन दर्द।  किन्हें है ज्यादा खतरा? छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी गंभीर बीमारी (जैसे डायबिटीज या दिल के रोग) से पीड़ित लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए।

क्या रखें सावधानी?

  • ज्यादा भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
  • जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनें।
  • अपने हाथों से बार-बार अपनी आंख, नाक या मुंह को न छूएं।

डॉक्टर से संपर्क कब करें: यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तबीयत ज्यादा बिगड़े या सांस लेने में परेशानी हो, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। उचित आराम और समय पर देखभाल से मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं।

रक्षाबंधन पर हर साल बहनों को योगी सरकार की बड़ी सौगात, अब तक बांटे 188 करोड़ रुपए से अधिक के नि:शुल्क टिकट

रक्षाबंधन पर हर साल बहनों को योगी सरकार की बड़ी सौगात, अब तक बांटे 188 करोड़ रुपए से अधिक के नि:शुल्क टिकट

– 2 करोड़ से ज्यादा नि:शुल्क टिकटों से बहनों और उनके सहयात्री की राह हुई सुगम

– 2017 में 11 लाख तो 2025 में 78 लाख से अधिक महिलाओं को मिला इसका लाभ

– 15 लाख से ज्यादा सहयात्रियों ने भी 2025 में उठाया इस सुविधा का लाभ

Chief Minister Yogi Adityanath : रक्षाबंधन पर बहनों को भाइयों तक पहुंचने में किराए की चिंता न हो, इसके लिए योगी सरकार वर्ष 2017 से लगातार नि:शुल्क बस यात्रा का उपहार देती आ रही है। वर्ष 2017 से 2025 तक लगातार नौ रक्षाबंधन पर महिलाओं को दी गई इस सुविधा के तहत 2.01 करोड़ नि:शुल्क टिकट जारी किए गए। इन टिकटों के किराए पर खर्च 188.41 करोड़ रुपए (समतुल्य धनराशि) आंकी गई है यानी योगी सरकार के कार्यकाल में रक्षाबंधन पर बहनों व महिलाओं को अब तक 188.41 करोड़ रुपए की नि:शुल्क यात्रा का उपहार मिल चुका है।

 

2017 से लगातार जारी है बहनों के लिए नि:शुल्क सफर 

योगी सरकार ने वर्ष 2017 में रक्षाबंधन पर महिलाओं के लिए नि:शुल्क बस यात्रा की पहल शुरू की। इसके बाद लगातार 2025 तक यह सुविधा दी गई। नौ वर्षों में इस सुविधा का लाभ लेने वाली महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ी और 2025 तक कुल 2.01 करोड़ से अधिक नि:शुल्क टिकट जारी किए गए।

 

188.41 करोड़ रुपए का नि:शुल्क यात्रा उपहार 

परिवहन निगम के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 से 2025 तक रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं को जारी नि:शुल्क टिकटों के किराये के समतुल्य धनराशि करीब 188.41 करोड़ रुपए है।

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2025 में महिला के साथ सहयात्री को भी नि:शुल्क सफर

वर्ष 2025 में योगी सरकार ने रक्षाबंधन की यात्रा को और सुविधाजनक बनाते हुए महिला के साथ एक सहयात्री को भी नि:शुल्क यात्रा का लाभ दिया। 8 अगस्त 2025 की सुबह छह बजे से 10 अगस्त की मध्यरात्रि तक कुल 66 घंटे की अवधि में करीब 63.14 लाख महिला यात्रियों और 15.11 लाख से अधिक महिला यात्रियों के सहयात्रियों को नि:शुल्क यात्रा की सुविधा मिली। इस दौरान 78.26 लाख से अधिक नि:शुल्क टिकट जारी हुए, जिनका कुल किराया मूल्य करीब 86.98 करोड़ रुपए रहा।

 

हर साल बढ़ता गया बहनों का भरोसा

आंकड़ों पर नजर डालें तो 2017 में 11,16,332 महिला यात्रियों ने इस सुविधा का लाभ लिया था। 2018 में यह संख्या 11,69,226, 2019 में 12,04,085 और 2020 में 7,36,605 रही। 2021 में 9,63,466, 2022 में 22,32,322, 2023 में 29,29,755 और 2024 में 19,78,403 महिला यात्रियों ने नि:शुल्क यात्रा की। 2025 में महिलाओं के साथ सहयात्री को जोड़ने के बाद कुल नि:शुल्क टिकटों की संख्या 78,26,324 तक पहुंच गई। 

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यूपीएसआरटीसी प्रधान प्रबंधक (संचालन) अनिल कुमार ने कहा कि 2017 में शुरू हुई नि:शुल्क बस यात्रा की पहल अब रक्षाबंधन पर योगी सरकार की प्रमुख जनसुविधाओं में शामिल हो चुकी है। 9 वर्षों में 2.01 करोड़ से अधिक नि:शुल्क टिकट और 188.41 करोड़ रुपए के किराए के समतुल्य लाभ इस योजना के व्यापक असर को दर्शाते हैं। सरकार इस कदम में विभाग पूरी तरह आगे भी तत्पर्रता से जुटा रहेगा। प्रदेश के यात्रियों को सुविधाजनक यात्रा करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। 

 

त्योहार पर आर्थिक राहत के साथ आसान हुई यात्रा

रक्षाबंधन पर बड़ी संख्या में महिलाएं अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए दूसरे शहरों और गांवों की यात्रा करती हैं। ऐसे में मुफ्त बस यात्रा उन्हें सीधे आर्थिक राहत देती है। खासतौर पर सामान्य और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह सुविधा त्योहार के दौरान यात्रा का अतिरिक्त खर्च कम करने में मदद करती है। साथ ही सरकारी बसों में अतिरिक्त बसों और फेरों की व्यवस्था से त्योहार के समय आवागमन को सुगम बनाने का प्रयास किया जाता है।

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महिला सम्मान और आत्मनिर्भरता के विजन से जुड़ी पहल

योगी सरकार की सोच महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके सम्मान, सुरक्षा, सुविधा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने पर भी केंद्रित है। रक्षाबंधन पर नि:शुल्क बस यात्रा इसी विजन का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है। सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को जरूरी यात्राओं के दौरान आर्थिक और परिवहन संबंधी बाधाओं का सामना कम करना पड़े और वे अपने परिवार के साथ त्योहारों और महत्वपूर्ण अवसरों में सहजता से शामिल हो सकें।

रक्षाबंधन पर 3.54 लाख रसोइयों को CM योगी का बड़ा तोहफा, मानदेय बढ़कर 3000 रुपए हुआ, 5 लाख का इलाज और बीमा सुरक्षा कवच

रक्षाबंधन पर 3.54 लाख रसोइयों को CM योगी का बड़ा तोहफा, मानदेय बढ़कर 3000 रुपए हुआ, 5 लाख का इलाज और बीमा सुरक्षा कवच

– मानदेय में वृद्धि, परिधान की राशि अब दोगुनी, 5 लाख तक मुफ्त कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा और दो लाख का एक्सीडेंट्ल बीमा कवर घोषित

– शिक्षा क्षेत्र के हित में योगी सरकार के लगातार फैसले, पिछले दिनों बढ़ाया गया था शिक्षामित्रों व अनुदेशकों का मानदेय

– मुख्यमंत्री 

ने कहा कि हम 12 बजे सोकर नहीं उठते, बल्कि 18 घंटे काम करते हैं, तब आते हैं परिणाम

– मुख्यमंत्री का निर्देश: बच्चों का भविष्य अनमोल, इनके भोजन में कतई लापरवाही नहीं होनी चाहिए

– सपा ने नकल से ‘प्रदेश की अकल’ को किया था नीलाम, सपा को साफ करेगी जनता

– सोशल मीडिया पर स्कूलों के जर्जर भवन दिखाने वालों की खिंचाई

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाई का दायित्व निभाते हुए रक्षाबंधन से पहले 3.54 लाख रसोइयों जिनमें लगभग 93 प्रतिशत संख्या महिलाओं की है, को चार बड़े उपहार दिए। रविवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सीएम ने इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि रसोइयों को अब 2 के बजाय 3 हजार मानदेय मिलेगा, घटना-दुर्घटना की स्थिति में रसोइयों व उनके परिवार को भारतीय स्टेट बैंक के माध्यम से दो लाख रुपए की सहायता और प्रतिवर्ष पांच लाख रुपए तक मुफ्त कैशलेस सुविधा मिलेगी। इसके अलावा परिधान के लिए मिलने वाली राशि भी दोगुनी यानी, 500 रुपए से बढ़ाकर 1000 रुपए कर दी गई है।

 

सरकार सभी समस्याओं का करेगी समाधान 

सीएम ने कहा कि 9 साल पहले रसोइयों का मानदेय हजार रुपए था, वह भी कभी मिलता था तो कभी नहीं मिलता था। गरीबों के हक पर डकैती डालने वाले सपाइयों व कांग्रेसियों की लूट को रोकने के लिए पीएम मोदी जी ने 55 करोड़ लोगों के जनधन अकाउंट खुलवाए। अब डीबीटी के माध्यम से सीधे खाते में राशि जाती है। रसोइयों के लिए अभी तक सामाजिक सुरक्षा की गारंटी नहीं थी।

कोई घटना-दुर्घटना, आपदा, पूर्ण दिव्यांग या मृत्यु होने पर परिवार असहाय हो जाता था। बेसिक शिक्षा परिषद ने भारतीय स्टेट बैंक से बातचीत कर तय कराया कि अकाउंट एसबीआई में खुलेगा, जिसमें रसोइयों का पूरा मानदेय जाएगा। यदि कोई अप्रिय स्थिति हुई तो बैंक तत्काल दो लाख रुपए की उपलब्ध कराएगा। आप भाजपा के डबल इंजन पर विश्वास कीजिए, सरकार सभी समस्याओं का समाधान करेगी।

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‘बबुआ’ पर चुटकी, सीएम बोले- सपा को साफ करेगी जनता

सीएम ने कहा कि यह काम पहले इसलिए नहीं होता था, क्योंकि गरीब कभी सपा के एजेंडे में नहीं था। उन्होंने सपा मुखिया अखिलेश यादव के बयान पर चुटकी लेते हुए कहा कि बबुआ ने बयान दिया है कि परिवार के सभी लोग सांसद हैं, इसलिए सपा-सपा बनी हुई है। हम कह रहे हैं कि जनता सपा को अगले चुनाव में हमेशा के लिए साफ कर देगी, क्योंकि ये लोग परिवार की खातिर गरीबों का शोषण करते थे।

इन्होंने यूपी को गुंडा प्रदेश बना दिया था। जमीन पर कब्जा,  बेटी की सुरक्षा में सेंध लगाते थे। रोज दंगा-फसाद होता था। त्योहारों के पहले खुशी छीन ली जाती थी। विकास ठप था, क्योंकि प्रदेश के पास कुछ नहीं था। अब कोई बेटी की सुरक्षा में सेंध लगाएगा तो यमराज के घर जाने का रास्ता तय है। सपाई तो बच्चों के मिड-डे मील पर भी डकैती डलवाते थे। अब यूपी दंगा व कर्फ्यू मुक्त हुआ तो विकास दिखाई दे रहा है। जो लोग कुछ नहीं कर पाए, वे सिर्फ आक्षेप लगाते हैं। 

 

आप बचपन स्वस्थ बनाएं, आपके स्वास्थ्य का जिम्मा हमारा

सीएम ने कहा कि रसोई केवल बच्चे का पेट भरने वाला भोजन नहीं, बल्कि बचपन को स्वस्थ व समर्थ बनाने का अभियान भी है। आप देश के बचपन को स्वस्थ बनाते हैं, लेकिन आपके स्वास्थ्य की चिंता नहीं होती थी। पीएम मोदी जी ने आपको धुएं से मुक्ति दिलाई। प्रदेश सरकार ने भी सुनिश्चित किया कि रसोइया या उसके परिवार का कोई व्यक्ति अस्वस्थ होता है तो वह सरकारी अस्पताल समेत किसी भी इन्पैनल्ड अस्पताल में इलाज करा सकता है। सरकार प्रतिवर्ष इसके लिए पांच लाख रुपए का बीमा उपलब्ध कराएगी। 

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2017 से पहले भीषण सर्दी में ठिठुरते जाते थे बच्चे

सीएम ने कहा कि आंगनबाड़ी बाल वाटिका में पढ़ने वाले बच्चों की प्रगति निपुण भारत अभियान की सफलता को प्रदर्शित करती है। अब पांचवी कक्षा तक यह अभियान बढ़ रहा है। 2017 के पहले गरीब के बच्चे भीषण ठंड में ठिठुरते हुए स्कूल जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब सरकार हर बच्चे को दो यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते-मोजे, स्वेटर उपलब्ध कराती है। 

 

हम 12 बजे सोकर नहीं उठते, बल्कि 18 घंटे काम करते हैं

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम लोग 18 घंटे काम करते हैं। एक-एक योजना और विभागों के कार्यों को आगे बढ़ाने में योगदान देते हैं, तब परिणाम आते हैं। कोई बबुआ की तरह 12 बजे सोकर उठता, 2 बजे तैयार होता, 5 बजे जिम जाता और 7 बजे से महफिल जमा लेता, तो काम कब करता।

रसोइया माताएं-बहनें, आंगनबाड़ी व आशा वर्कर, गांव के चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी जवान, ये सब प्रदेश को बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। सरकार इनके सम्मानजनक जीवन और इनके मानदेय में वृद्धि के लिए कार्यरत है। पिछले दिनों सरकार ने शिक्षामित्रों, अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाया। शिक्षकों के साथ ही उन्हें भी कैशलेस स्वास्थ्य सुरक्षा व दुर्घटना बीमा कवर उपलब्ध कराया गया है। 

 

सपा ने नकल से प्रदेश की अकल को नीलाम किया था 

सीएम ने कहा कि एक समय सपा ने नकल को जन्मसिद्ध अधिकार बना दिया था। कल्याण सिंह जी ने मुख्यमंत्री रहते हुए प्रदेश को पहचान दी थी, लेकिन सपा ने एक झटके में नकल से प्रदेश की अकल को नीलाम कर दिया था। सपा सरकार ने रसोइयों, आंगनबाड़ी व आशा वर्करों, चौकीदारों, महिलाओं या गरीबों, किसी की नहीं सुनी, क्योंकि सुनने के लिए समय, सामर्थ्य, संसाधन चाहिए। डबल इंजन सरकार ने ये सभी जुटाए तो आज सारी सुविधाएं मिल रही हैं। 

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रसोई रहे साफ-सुथरी, बच्चों को दें पौष्टिक आहार

सीएम ने कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद के 1.42 लाख विद्यालयों में डेढ़ करोड़ बच्चे अध्ययनरत हैं। बच्चों को अलग-अलग दिन अलग-अलग प्रकार का आहार देना है। विद्यालय में रसोई साफ-सुथरी रहे, बच्चों को समय पर स्वच्छता के साथ साप्ताहिक मेन्यू के अनुरूप पौष्टिक आहार उपलब्ध कराएं। इससे आपका सम्मान बढ़ेगा। मुख्यमंत्री ने रसोइयों को सचेत करते हुए कहा कि इसमें लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

फूड प्वॉइजनिंग भी नहीं होनी चाहिए। दुश्मन ऐसा काम न कर पाए, जिससे आप संदेह के घेरे में आएं। छिपकली व कीड़ा खाने में न गिरे, यह जीवन के साथ खिलवाड़ होगा। रसोई बनाते समय किचन में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश नहीं होना चाहिए। पीएम पोषण मिशन के अंतर्गत छह दिन के मेन्यू में मिलेट्स, स्थानीय व्यंजन, मौसमी फल भी शामिल हैं। 

 

बच्चे बढ़ेंगे तो भारत बढ़ेगा

सीएम ने कहा कि 2017 के पहले बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालय वीरान/उजाड़ दिखते थे। ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए 19 पैरामीटर्स तय किए थे। विद्यालय में फर्श, बालक-बालिकाओं के लिए अलग टॉयलेट, किचन, पेयजल, डिजिटल लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास, पुस्तकालय आदि बन गए हैं। बतौर सांसद मैंने देखा है कि पहले बच्चों को कुछ पता नहीं होता था, परंतु अब बच्चे को अक्षर ज्ञान, वाक्य विन्यास, गणित, अंग्रेजी, विज्ञान की जानकारी है। वे आगे बढ़ रहे हैं, बच्चे बढ़ेंगे तो देश बढ़ेगा और हर भारतवासी का सम्मान बढ़ेगा। 

 

वर्ष के अंत तक आएगा मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय मॉडल

सीएम ने कहा कि इस वर्ष के अंत तक मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय का मॉडल भी आने वाला है। डबल इंजन की भाजपा सरकार ने अंतिम पायदान पर बैठे श्रमिकों के बच्चों के बारे में भी सोचा। 18 मंडलों में 18 अटल आवासीय विद्यालय बनाए गए, जहां 18 हजार बच्चे अध्ययनरत हैं। 

 

कोरोना और महाकुंभ में रसोइयों के योगदान को भी सराहा

सीएम ने कोरोना और महाकुंभ में रसोइयों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि कोरोना काल में प्रदेश लौटने वाले एक करोड़ से अधिक लोगों के लिए रसोइयों ने भोजन की व्यवस्था की। प्रयागराज महाकुंभ में जब बहुत भीड़ हो गई तो जौनपुर, प्रतापगढ़, भदोही, मीरजापुर, फतेहपुर समेत अलग-बगल जनपदों में होल्डिंग एरिया बनाए गए थे। कई जगहों पर बेसिक शिक्षा परिषद के रसोइयों ने इन श्रद्धालुओं के लिए भोजन बनाया।  

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बच्चों के हित में लगातार काम किया सरकार ने

सीएम ने कहा कि कोरोना में निराश्रित हुए बच्चों के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना प्रारंभ की। ऐसे बच्चों को हर माह पढ़ाई के लिए चार हजार रुपए की छात्रवृत्ति दी जाती है। गंभीर व बहुदिव्यांग 14 हजार बच्चों को छह हजार रुपए वार्षिक एस्कॉर्ट अलाउंस, 23 हजार से अधिक दिव्यांग बालिकाओं को दो हजार रुपए वार्षिक स्टाइपेंड, 23 हजार से अधिक दिव्यांग बच्चों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए हैं।

पहली से आठवीं कक्षा तक 2793 पूर्ण दृष्टिबाधित बच्चों को ब्रेल पाठ्य पुस्तकें, 4438 अल्प दृष्टि बच्चों को इनलार्ज प्रिंट की पुस्तकें बेसिक शिक्षा परिषद ने उपलब्ध कराई हैं। जो स्कूल विलय किए गए थे, वहां बाल वाटिका का संचालन करते हुए 10 हजार स्पेशल एजूकेटर्स तैनात किए गए हैं। बेसिक शिक्षा परिषद ने सभी 825 विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी विद्यालय बनाने का कार्यक्रम बढ़ाया। विद्यालय अब 12वीं तक चलेंगे। यहां आईसीटी लैब स्थापित किए जा रहे हैं। 

 

नई शिक्षा व्यवस्था नकलमुक्त, अकल से युक्त 

सीएम ने सोशल मीडिया पर स्कूलों के जर्जर भवन दिखाने वालों को भी आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि जिनके इशारे पर ये हो रहा है, ये उन्हीं के स्मारक हैं। प्रदेश सरकार ने माध्यमिक शिक्षा में प्रोजेक्ट अलंकार के तहत पुराने व जर्जर भवनों को नए भवनों को बदला है। नई शिक्षा व्यवस्था नकलमुक्त, अकल से युक्त है।

अब समय से परीक्षाएं हो रही हैं। 2017 के पहले तीन महीना परीक्षा, तीन महीना परिणाम, तीन महीना अवकाश व कर्फ्यू में जाता था। बच्चों को तीन महीने भी पढ़ने को नहीं मिलते थे। अब 14 दिन में परीक्षा, अगले 14-15 दिन में परिणाम आते हैं। छह महीने का कार्य एक महीने में पूरा किया गया। शिक्षा व्यवस्था नए यूपी में स्केल को स्किल में बदलने का कार्य कर रहा है। 

 

समारोह में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, विधायक नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य अवनीश कुमार सिंह, रामचंद्र प्रधान आदि मौजूद रहे।

क्‍या अब सस्‍ती होगी चीनी, सरकार ने उठाया बड़ा कदम, यहां से आ रही शकर की खेप

क्‍या अब सस्‍ती होगी चीनी, सरकार ने उठाया बड़ा कदम, यहां से आ रही शकर की खेप

Will sugar become cheaper now, Government takes major step

देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच ब्राजील से आने वाली खेप राहत दे सकती है। राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ (NFCSF) के प्रमुख प्रकाश नाइकनवारे ने आज कहा कि चीनी की कुछ खेप 15 अक्टूबर से पहले भारत पहुंच सकती हैं, लेकिन इस समय यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि कितनी मात्रा में चीनी आएगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल ब्राजील ही चीनी आयात का व्यावहारिक स्रोत है। नाईकनावारे ने कहा कि देश में हर महीने करीब 22 लाख टन चीनी की खपत होती है। नवंबर तक भी 15 से 20 लाख टन चीनी उपलब्ध रह सकती है।

देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच ब्राजील से आने वाली खेप राहत दे सकती है। राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ (NFCSF) के प्रमुख प्रकाश नाइकनवारे ने आज कहा कि चीनी की कुछ खेप 15 अक्टूबर से पहले भारत पहुंच सकती हैं, लेकिन इस समय यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि कितनी मात्रा में चीनी आएगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल ब्राजील ही चीनी आयात का व्यावहारिक स्रोत है।

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नाईकनावारे ने कहा कि देश में हर महीने करीब 22 लाख टन चीनी की खपत होती है। नवंबर तक भी 15 से 20 लाख टन चीनी उपलब्ध रह सकती है। इसी दौरान शुरुआती पेराई से नई चीनी भी बाजार में आने लगेगी। उपलब्धता की स्थिति को देखते हुए चीनी की कमी को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा कि मिल स्तर पर कीमतें माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को छोड़कर 65-67 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थीं, जो शनिवार को हुई निविदाओं में 5 रुपए प्रति किलोग्राम घट गईं। उनका अनुमान है कि राज्यों में निगरानी बढ़ने के साथ अगले सप्ताह भी कीमतों में नरमी जारी रहेगी।

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सरकार ने 20 अगस्त को घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए 10 लाख टन तक कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी थी। ब्राजील से भारतीय बंदरगाहों तक चीनी पहुंचने में आमतौर पर 40-45 दिन लगते हैं। इसके बाद बंदरगाह से चीनी मिल तक माल पहुंचने में भी समय लगता है।

महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे बंदरगाह वाले राज्यों को आयातित कच्ची चीनी उत्तरी राज्यों की तुलना में जल्दी मिलने की संभावना है। सरकार ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए 13 मई को 30 सितंबर तक चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी थी।

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विपक्षी दल पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उनका आरोप है कि इस नीति के कारण चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं और आम लोगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कीमतें बढ़ाने के लिए चीनी उद्योग को जिम्मेदार ठहराया है।

सरकार के मुताबिक, वर्तमान में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी कई कारकों के संयोजन के कारण हुई है। इनमें घरेलू उत्पादन का अनुमान से कम होना, त्योहारी मौसम से पहले मांग में बढ़ोतरी, मौसम संबंधी कारणों से गन्ने की फसल को नुकसान, ग्‍लोबल स्तर पर चीनी की आपूर्ति में कमी और उद्योग के कुछ वर्गों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं।

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इस बीच चीनी की जमाखोरी और कीमतों में तेजी को लेकर सरकार की सख्ती का असर भी दिखने लगा है। अब नजर इस बात पर है कि आयातित चीनी कितनी जल्दी बाजार तक पहुंचती है और क्या इससे आम लोगों को महंगी चीनी से बड़ी राहत मिलेगी?

जापानी गवर्नर ने किए बाबा विश्वनाथ के दर्शन, यूपी के साथ ग्रीन हाइड्रोजन और विकास पर काम करने का किया दावा

जापानी गवर्नर ने किए बाबा विश्वनाथ के दर्शन, यूपी के साथ ग्रीन हाइड्रोजन और विकास पर काम करने का किया दावा

– ग्रीन हाइड्रोजन समेत कई क्षेत्रों में काम करेंगे यूपी-यामानाशी : कोटारो नागासाकी

– यामानाशी के गवर्नर ने जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ किए बाबा विश्वनाथ के दर्शन

– जापानी मेहमानों ने भव्य और दिव्य बाबा विश्वनाथ धाम की आध्यात्मिक आभा को भी निहारा

– मेहमानों का मंदिर पहुंचने पर रुद्राक्ष की माला और अंगवस्त्र पहनाकर किया स्वागत

– कांवड़ियों की भारी भीड़ देखकर जापानी दल ने योगी सरकार के क्राउड मैनेजमेंट को सराहा 

Uttar Pradesh News : यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर कोटारो नागासाकी ने कहा कि उत्तर प्रदेश, यामानाशी प्रांत और जापान के बीच संबंधों को लंबे समय तक और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। हम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण पहल ग्रीन हाइड्रोजन सिस्टम के माध्यम से उत्तर प्रदेश और यामानाशी प्रांत के विकास को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही हमारी इच्छा ऊर्जा सुरक्षा के माध्यम से विश्व शांति की स्थापना में भी योगदान देने की है।

यामानाशी गवर्नर रविवार को जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने के उपरांत मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यहां आकर आप सभी की ईश्वर के प्रति श्रद्धा और सम्मान की भावना स्पष्ट रूप से महसूस हुई। मैंने भी यहां ईश्वर से विश्व शांति के लिए प्रार्थना की है।

 

कोटारो नागासाकी के नेतृत्व में जापानी प्रतिनिधिमंडल के करीब 15 प्रमुख सदस्यों ने श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचकर बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन किए और उनका आशीर्वाद लिया। मंदिर न्यास के एसडीएम शंभू शरण ने बताया कि जापानी मेहमानों का मंदिर पहुंचने पर रुद्राक्ष की माला और अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया गया।

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मंदिर में जापानी मेहमानों को देखकर श्रद्धालुओं ने “हर-हर महादेव” के उद्घोष के साथ उनका स्वागत किया। जापानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने भी श्रद्धालुओं के साथ “हर-हर महादेव” का जयघोष किया। इस दौरान मंदिर परिसर में भारत-जापान के सांस्कृतिक संबंधों में आत्मीयता की सुंदर झलक देखने को मिली।

 

सावन के पवित्र मास में बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लेने पहुंचे जापानी दल के सदस्य काशी में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखकर अभिभूत नजर आए। उन्होंने योगी सरकार की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए की गई व्यवस्थाओं, विशेषकर क्राउड मैनेजमेंट की भरपूर सराहना की।

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जापानी मेहमानों ने भव्य और दिव्य बाबा विश्वनाथ धाम की आध्यात्मिक आभा को भी निहारा। प्रतिनिधिमंडल ने काशी में आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक विकास के समन्वय को करीब से देखा और श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा की।

 

जापानी प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को भगवान बुद्ध की उपदेशस्थली सारनाथ का भ्रमण किया। इसके बाद शाम को नमो घाट पर गंगा आरती में शामिल होकर जापानी मेहमानों ने काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की अनुभूति की। रविवार को काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के बाद जापानी दल वाराणसी से रवाना हो गया।

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गौरतलब है कि 200 से अधिक सदस्यीय जापानी प्रतिनिधिमंडल यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 के तहत भारत आया है। लखनऊ में उत्तर प्रदेश सरकार और जापानी प्रतिनिधिमंडल के बीच निवेश एवं द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर भी हुए हैं। जापानी प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा बताता है कि बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी और भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ अब भारत-जापान के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन संबंधों को नई ऊंचाई देने का माध्यम बन रहे हैं।

कंगना रनौत के बयान पर बाबा रामदेव का पलटवार, बोले- ओछे लोगों पर टिप्पणी नहीं करना चाहता, पूरा देश जानता है मेरा योगदान

कंगना रनौत के बयान पर बाबा रामदेव का पलटवार, बोले- ओछे लोगों पर टिप्पणी नहीं करना चाहता, पूरा देश जानता है मेरा योगदान

Baba Ramdev hits back at Kangana Ranaut's statement

Ramdev Comment on Kangana Ranaut : भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत के जेन-जी को लेकर दिए गए विवादित बयान पर शुरू हुआ सियासी और सार्वजनिक विवाद अब एक बार फिर चर्चा में है। योग गुरु बाबा रामदेव ने कंगना के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि मैं इस विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहता। स्वामी रामदेव क्या हैं और मेरा योगदान क्या है, यह पूरा देश जानता है। इसलिए मैं ओछे लोगों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। इससे पहले कंगना ने जेन-जी को 'गटर जनरेशन' कहा था, जिस पर रामदेव ने उन्हें लताड़ा था।

भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत के जेन-जी को लेकर दिए गए विवादित बयान पर शुरू हुआ सियासी और सार्वजनिक विवाद अब एक बार फिर चर्चा में है। योग गुरु बाबा रामदेव ने कंगना के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि मैं इस विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहता। स्वामी रामदेव क्या हैं और मेरा योगदान क्या है, यह पूरा देश जानता है। इसलिए मैं ओछे लोगों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।

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इससे पहले कंगना ने जेन-जी को 'गटर जनरेशन' कहा था, जिस पर रामदेव ने उन्हें लताड़ा था। बाबा रामदेव ने कुछ दिनों पहले सरकारी नौकरी के इंटरव्यू में गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाया था। इस पर उनकी आंदोलन वाली चेतावनी पर कंगना ने तंज कसा था, जिसके बाद से ही दोनों के बीच जुबानी जंग चल रही है। यह बहस तब और बढ़ गई जब रनौत ने सोशल मीडिया पर बाबा रामदेव को जवाब देते हुए उनके निजी जीवन और चरित्र पर की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई।

उन्होंने रामदेव पर अपनी युवावस्था और निजी जीवन पर टिप्पणी करके सीमा पार करने का आरोप लगाया। स्वामी रामदेव आज हरिद्वार में संत समागम में 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' पर संवाद कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने भाजपा नेता कंगना की ओर से उन पर दिए गए बयानों पर पलटवार किया। बाबा रामदेव ने पहले कंगना के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि युवाओं को इस तरह संबोधित करना गलत है।

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उन्होंने कहा कि आज का युवा देश की बड़ी ताकत है और उसकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही उन्होंने 'वन नेशन वन इलेक्शन' लागू होने से देश में शिक्षा और विकास के क्षेत्र में बदलाव आने की बात कही। उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव होने से शिक्षक बच्चों को ज्यादा समय दे सकेंगे और सरकारें विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाएंगी।

जेन-जी को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब सोशल मीडिया से आगे बढ़कर सार्वजनिक बहस का विषय बन चुका है। हालांकि, रामदेव की ताजा टिप्पणी से संकेत मिलता है कि वह इस मुद्दे को आगे राजनीतिक या व्यक्तिगत विवाद में बदलने के पक्ष में नहीं हैं।

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इसके अलावा बाबा रामदेव ने वंदे मातरम के बारे में भी बात की और भारत माता को अपनी आस्था और भक्ति का केंद्र बताया। उन्होंने कहा, हम भारत माता को दुर्गा, लक्ष्मी के रूप में देखते हैं; वह हमारी आस्था, हमारा ज्ञान, हमारा मंदिर और हमारी रक्षा करने वाली एवं हमें शक्ति प्रदान करने वाली हैं।

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उन्होंने कहा, वह हमारे लिए सर्वोच्च हैं और हमारी भक्ति और आकांक्षा का परम लक्ष्य हैं। जो लोग 'वंदे मातरम' में देवी-देवताओं, मठों या मंदिरों के संदर्भ देखते हैं, वे मेरी राय में हमारी संस्कृति से कटे हुए प्रतीत होते हैं। उन्हें संस्कृत का थोड़ा और अध्ययन करना चाहिए और इसके अर्थ को बेहतर ढंग से समझना चाहिए।