अमेरिका में हिंदू मंदिर में नरसंहार की बड़ी साजिश नाकाम, विदेश मंत्रालय ने जताई चिंता, जानिए क्या है पूरा मामला

अमेरिका में हिंदू मंदिर में नरसंहार की बड़ी साजिश नाकाम, विदेश मंत्रालय ने जताई चिंता, जानिए क्या है पूरा मामला

US Illinois Hindu Temple Attack: अमेरिका के इलिनोइस राज्य में एक प्रमुख हिंदू मंदिर को निशाना बनाकर की जाने वाली बड़े पैमाने पर गोलीबारी की भयावह साजिश को पुलिस ने समय रहते नाकाम कर दिया है। इस चौंकाने वाली घटना के सामने आने के बाद भारत सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने इस साजिश के हिंदू-विरोधी और नस्लवादी स्वभाव को बेहद चिंताजनक बताते हुए अमेरिकी सरकार से भारतीय मूल के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है।

 

अमेरिका के इलिनोइस राज्य स्थित ऑरोरा (Aurora) इलाके में बने एक बड़े हिंदू मंदिर के बड़े समूह को निशाना बनाकर गोलीबारी करने की एक बड़ी और खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है। हालांकि अमेरिकी जांच एजेंसियों और स्थानीय पुलिस की मुस्तैदी से यह जानलेवा हमला होने से टल गया। घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस तरह की नस्लीय और धर्म-विरोधी नफरत पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है।

भारत विरोधी नफरत पर चिंता 

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस कथित साजिश का हिंदू-विरोधी और नस्लवादी स्वभाव खास तौर पर चिंताजनक है, जिसमें भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ सीधे तौर पर हिंसा फैलाने की बात कही गई है। यह घटना अमेरिका में बढ़ती नस्लवादी दुश्मनी और भारत विरोधी नफरत की चिंताओं को और बढ़ाती है।

जायसवाल ने पुष्टि की कि अमेरिकी पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ प्रासंगिक धाराओं में आरोप तय किए गए हैं। विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी प्रशासन को ज्यादा सतर्कता बरतनी होगी और नफरत से प्रेरित ऐसी हिंसक घटनाओं के खिलाफ सख्त और ठोस कदम उठाने होंगे।

क्या है पूरा मामला?

यह खौफनाक साजिश इलिनोइस के पैलेटाइन शहर के रहने वाले 19 वर्षीय युवक अलेक्जेंड्रोस पापोराकिस (Alexandros Paporakis) से जुड़ी है। अलेक्जेंड्रोस स्थानीय ‘टैको बेल’ आउटलेट में काम करता था और अपने सहकर्मियों के सामने खुद को खुले तौर पर ‘श्वेत वर्चस्ववादी’ और ‘नव-नाजी’ घोषित करता था।

 

रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार (11 अक्टूबर) को अलेक्जेंड्रोस ऑरोरा स्थित सबसे बड़े हिंदू मंदिर परिसर में दाखिल हुआ। उसका इरादा वहां मौजूद लोगों पर अंधाधुंध गोलीबारी करने का था। हालांकि, जब उसने मंदिर के भीतर अपनी राइफल से गोली चलाने की कोशिश की, तो भाग्यवश उसकी राइफल जाम हो गई। हमला करने में नाकाम रहने के बाद वह घबराकर मौके से फरार हो गया।

सहकर्मी की सतर्कता से हुई गिरफ्तारी

घटना के बाद जब उसने अपने इस हिंसक प्रयास की बात अपने एक सहकर्मी से साझा की, तो उस सजग सहकर्मी ने बिना देर किए तुरंत स्थानीय पुलिस को इस खतरे से अलर्ट किया। पुलिस ने बिना समय गंवाए जाल बिछाया और संदिग्ध अलेक्जेंड्रोस को उस वक्त धर दबोचा जब वह अपने घर से बाहर निकल रहा था। जब पुलिस और जांच एजेंसियों ने अलेक्जेंड्रोस के ठिकाने की तलाशी ली, तो वहां से भारी मात्रा में घातक सामग्री बरामद हुई। इनमें एक AR-स्टाइल सेमी-ऑटोमैटिक राइफल, लगभग 300 राउंड जिंदा कारतूस और कई लोडेड मैगजीन शामिल हैं।

 

इसके साथ ही बॉडी आर्मर (बुलेटप्रूफ जैकेट), टैक्टिकल गियर और नाजी प्रतीकों वाले सामान भी बरामद हुआ। उसने 8 पन्नों के दस्तावेज में विशेष रूप से भारतीय, यहूदी और अफ्रीकी-अमेरिकी लोगों के प्रति घृणा जाहिर करते हुए उन्हें अपना निशाना बनाने की बात लिखी थी। अदालत और स्थानीय पुलिस के साथ-साथ अब एफबीआई (FBI) भी इस मामले की गहन जांच में जुट गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस खौफनाक आतंकी साजिश में उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति या कोई नफरती संगठन भी शामिल था।

रेवंत ने कृषि के लिए 20 दिनों तक बिना रुकावट बिजली आपूर्ति के दिये निर्देश

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कम बारिश के मद्देनजर खड़ी फसलों को बचाने के लिए अगले 20 दिनों तक कृषि क्षेत्र को चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।

इसके साथ ही श्री रेड्डी ने इस मामले में लापरवाही बरतने पर ऊर्जा विभाग के विशेष मुख्य सचिव और टीजी-जेनको के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) सहित वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित करने की चेतावनी भी दी है।

उन्होंने बुधवार रात यहां कम बारिश, अल नीनो के प्रभाव तथा बिजली और पेयजल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा के लिए आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में बार-बार बिजली कटौती को लेकर कड़ी नाराजगी जतायी। उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि बार-बार निर्देश दिये जाने के बावजूद स्थिति में सुधार क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बिजली की कमी के कारण किसानों की फसलों को नुकसान नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को कृषि क्षेत्र में बिजली की अधिक मांग वाले क्षेत्रों की पहचान करने और फसल कटाई पूरी होने तक पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बिजली उत्पादन क्यों नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने पूछा कि नैनी और महानदी से कोयले की आपूर्ति की व्यवस्था होने के बावजूद यादाद्रि बिजली संयंत्र अपनी स्थापित क्षमता के अनुसार पूरा उत्पादन क्यों नहीं कर रहा है।

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उन्होंने कहा, “मैं जनता के प्रति जवाबदेह हूं। खड़ी फसलों को बचाने के लिए बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के बार-बार निर्देश देने के बावजूद स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।” उन्होंने कहा, ” मैं ऐसे किसी भी कदम को बर्दाश्त नहीं करूंगा, जिससे जनता को परेशानी हो। लापरवाही बरतने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शूंगा।”

मुख्यमंत्री ने अल नीनो के संभावित प्रभाव को कोविड-19 महामारी के समान एक आपदा बताते हुए कहा कि यदि विभागों ने समय रहते बचाव के उपाय नहीं किए, तो मौजूदा परिस्थितियां बड़े संकट का रूप ले सकती हैं। उन्होंने सभी विभागों को जून तक के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने, अल नीनो के संभावित प्रभावों का आकलन करने और सामान्य बारिश बहाल होने तक जनता की परेशानियां कम करने के लिए आपसी समन्वय से काम करने का निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्यभर में पेयजल की कमी को रोकने के लिए पहले से व्यवस्था करने और पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने ग्रेटर हैदराबाद क्षेत्र में निर्माण कार्यों और अन्य उपयुक्त जरूरतों के लिए मलजल शोधन संयंत्रों से शोधित पानी का इस्तेमाल करने को कहा। उन्होंने बताया कि स्थिति से निपटने की तैयारियों के तहत प्रत्येक मंडल में समूह-एक और समूह-दो के अधिकारियों की नियुक्ति की जायेगी। ये अधिकारी बारिश की कमी, बिजली और पेयजल आपूर्ति, फसलों की स्थिति तथा चारे की उपलब्धता पर नजर रखेंगे। उन्होंने कहा कि जमीनी स्थिति की नियमित रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपी जायेगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दशहरा और दिवाली के बीच ग्राम सभाएं आयोजित करने तथा सांस्कृतिक दलों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाने का भी निर्देश दिया। इन अभियानों के जरिए अल नीनो के संभावित प्रभावों की जानकारी देने के साथ-साथ पानी और बिजली की बचत को बढ़ावा दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि सामान्य बारिश बहाल होने तक सभी विभाग सतर्क रहें और लोगों की परेशानियां कम से कम रखने के लिए पहले से ही आवश्यक कदम उठायें।

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जियो IPO से पहले आकाश अंबानी ने खोला ग्रोथ प्लान, मोबिलिटी और होम ब्रॉडबैंड पर बड़ा दांव

जियो IPO से पहले आकाश अंबानी ने खोला ग्रोथ प्लान, मोबिलिटी और होम ब्रॉडबैंड पर बड़ा दांव

aksah ambani

भारत के अब तक के सबसे बड़े IPO से पहले जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने अगले दौर की ग्रोथ का रोडमैप सामने रखा है। मुंबई में पत्रकारों के साथ बातचीत में जियो प्लेटफॉर्म्स के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने मोबिलिटी, होम और एंटरप्राइज-इंटरनेशनल को कंपनी के तीन बड़े ग्रोथ इंजन बताया। कंपनी का मानना है कि टेक्नोलॉजी, डिजिटल गेटवे और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर वह FY31 तक भारत की करीब 1.4 ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल इकोनॉमी में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

 

आकाश अंबानी ने कहा, “हमारे बिजनेस की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हमारा ग्राहक है।” उन्होंने कहा कि जियो का फोकस हर भारतीय, हर घर और हर एंटरप्राइज को बेहतर और किफायती डिजिटल सेवाएं देने पर रहेगा। जियो के पास फिलहाल करीब 53.3 करोड़ कनेक्टिविटी ग्राहक हैं और कंपनी भारत के 60% से ज्यादा डेटा ट्रैफिक को संभालती है।

 

मोबिलिटी में कंपनी अगले पांच वर्षों में करीब 34 करोड़ नए 4G और 5G ग्राहकों का बाजार देख रही है। आकाश के मुताबिक इसमें करीब 10 करोड़ ऐसे नए ग्राहक होंगे जो पहली बार मोबाइल कनेक्शन लेंगे, जबकि करीब 24 करोड़ ग्राहक 2G से 4G और 5G की ओर बढ़ सकते हैं। FY26 में जियो के नेट एक्टिव मोबाइल ग्राहक दूसरे नंबर के ऑपरेटर के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा बढ़े।

 

होम ब्रॉडबैंड को कंपनी आने वाले वर्षों का बड़ा ग्रोथ इंजन मान रही है। जियो के अभी करीब 2.86 करोड़ फिक्स्ड ब्रॉडबैंड ग्राहक हैं और कंपनी इस बेस को आगे 10 करोड़ घरों तक ले जाना चाहती है। FY26 में देश में जुड़े कुल नए फिक्स्ड ब्रॉडबैंड कनेक्शनों में करीब 67.5% हिस्सेदारी जियो की रही। आकाश ने बताया कि कंपनी फाइबर के साथ अपनी वायरलेस टेक्नोलॉजी के जरिए देश के 19,000 पिन कोड तक पहुंच बढ़ा रही है।

 

तीसरा ग्रोथ इंजन एंटरप्राइज और इंटरनेशनल कारोबार है। जियो भारत में करीब ₹5.1 लाख करोड़ यानी 56.8 अरब डॉलर का एंटरप्राइज डिजिटल सर्विसेज बाजार देख रहा है। आकाश के मुताबिक देश की लगभग 65% बैंक शाखाएं जियो नेटवर्क से जुड़ी हैं।

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जियो अपनी बनाई एंड-टू-एंड टेक्नोलॉजी स्टैक को चुनिंदा विदेशी बाजारों में भी मॉनेटाइज करना चाहता है। कंपनी की योजना सिर्फ सॉफ्टवेयर बेचने की नहीं, बल्कि ग्लोबल टेलीकॉम कंपनियों के साथ मैनेज्ड सर्विस पार्टनर के रूप में काम करने की है। आकाश ने कहा कि इससे भारत टेक्नोलॉजी आयातक से टेक्नोलॉजी निर्यातक बनने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

akash ambani

इससे पहले ईशा अंबानी ने जियो की शुरुआत और रिलायंस की कारोबारी सोच का जिक्र करते हुए कहा कि कंपनी लंबे समय की सोच, बड़े पैमाने, मजबूत एक्जीक्यूशन और वित्तीय अनुशासन पर भरोसा करती है। प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत उदय कोटक ने रिलायंस के संस्थापक धीरूभाई अंबानी और 1977 के रिलायंस IPO को याद करते हुए की।

Jio IPO से पहले आकाश अंबानी का बड़ा बयान, बोले- 2030-31 तक 1.4 लाख करोड़ डॉलर की होगी भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था

Jio IPO से पहले आकाश अंबानी का बड़ा बयान, बोले- 2030-31 तक 1.4 लाख करोड़ डॉलर की होगी भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था

Jio IPO News: रिलायंस जियो के प्रस्तावित आईपीओ से पहले जियो प्लेटफॉर्म्स के चेयरमैन आकाश अंबानी ने भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और कंपनी की भविष्य की रणनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वित्त वर्ष 2030-31 तक भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था 1.4 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगी और इसमें जियो की बड़ी बाजार हिस्सेदारी होगी। आकाश अंबानी के मुताबिक, जियो का लक्ष्य भारत को एक अग्रणी डिजिटल समाज बनाने में मदद करना है।

 

उन्होंने जियो की डेटा सेवाओं की कीमतों का जिक्र करते हुए कहा कि कंपनी प्रति जीबी डेटा के लिए दुनिया में सबसे कम कीमतों में से एक पर सेवाएं उपलब्ध कराती है। जियो आईपीओ के जरिए कंपनी अब निवेशकों के सामने खुद को केवल मोबाइल सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि एक प्रौद्योगिकी कंपनी के रूप में पेश करने की तैयारी में है।

 

जियो आईपीओ से पहले आकाश अंबानी ने क्या कहा?

 

आकाश अंबानी ने कहा कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ सकती है। कंपनी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2030-31 तक इसका आकार 1.4 लाख करोड़ डॉलर हो जाएगा। जियो इस विकास में बड़ी भूमिका निभाने और अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की संभावनाएं देख रही है।

 

उन्होंने कहा कि जियो प्लेटफॉर्म्स भारत को एक अग्रणी डिजिटल समाज बनाने में प्रभावी भागीदार बन सकती है। कंपनी की रणनीति डिजिटल कनेक्टिविटी, नेटवर्क और तकनीकी सेवाओं का विस्तार करने पर केंद्रित है।

 

मोबाइल कंपनी नहीं, टेक्नोलॉजी कंपनी के रूप में पहचान बनाना चाहती है जियो

 

जियो प्लेटफॉर्म्स ने निवेशकों से कंपनी का मूल्यांकन केवल मोबाइल सेवा प्रदाता के तौर पर नहीं, बल्कि एक प्रौद्योगिकी कंपनी के रूप में करने की अपील की है। कंपनी का कहना है कि उसकी कारोबारी संभावनाएं दूरसंचार सेवाओं से आगे भी फैली हुई हैं।

 

जियो के अनुसार, वह विदेशों में दूरसंचार कंपनियों को नेटवर्क सॉफ्टवेयर और उपकरण उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर काम करेगी। इससे कंपनी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, उपलब्ध विवरणों के मुताबिक, जियो का कारोबार फिलहाल मुख्य रूप से भारतीय बाजार पर केंद्रित है।

 

कंपनी की यह रणनीति आईपीओ के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, क्योंकि निवेशक कंपनी की मौजूदा आय के साथ-साथ भविष्य में बढ़ने की संभावनाओं का भी आकलन करेंगे।

 

21 अक्टूबर को खुलेगा जियो का आईपीओ

 

रिलायंस इंडस्ट्रीज की दूरसंचार और डिजिटल सेवा इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) 21 अक्टूबर को खुलने और 23 अक्टूबर को बंद होने वाला है। कंपनी की ओर से सेबी के पास जमा विवरण पुस्तिका के अनुसार, यह भारत की ग्राहकों की संख्या के लिहाज से सबसे बड़ी मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी का आईपीओ होगा। 

कर्नाटक में एसआईआर के खिलाफ अभियान तेज करेगा इंडिया गठबंधन

इंडिया गठबंधन कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ अभियान तेज करेगा और इस सिलसिले में विपक्षी दल शुक्रवार को बेंगलुरु में बैठक कर पात्र मतदाताओं के नाम कथित तौर पर सूची से हटाए जाने, मतदान के अधिकारों की रक्षा और संयुक्त राजनीतिक एवं कानूनी कार्रवाई की रणनीति पर विचार करेंगे।

कर्नाटक कांग्रेस की ओर से बुलाई गई बैठक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद के नेतृत्व में होगी। इसमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), भाकपा (माले) लिबरेशन, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक और समाजवादी पार्टी सहित अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

कांग्रेस ने गुरुवार को जारी विज्ञप्ति में बताया कि बैठक में पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के आरोपों और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा की जाएगी। विपक्षी दल इन मुद्दों को राजनीतिक अभियान, कानूनी हस्तक्षेप और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से उठाने के उपायों पर विचार करेंगे।

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बैठक में राज्य, जिला और जमीनी स्तर पर विपक्षी दलों के बीच समन्वय मजबूत करने, शिकायतों का दस्तावेजीकरण करने तथा कथित अनियमितताओं के मामलों को संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाने की रणनीति भी बनाई जाएगी। इसके अलावा मतदाताओं को अपने पंजीकरण की स्थिति जांचने और मतदाता सूची में किसी विसंगति की सूचना निर्धारित प्रक्रिया के तहत देने के लिए जागरूक करने पर भी चर्चा होगी।

विपक्षी दलों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता जताई है। शुक्रवार की बैठक में इस संबंध में गठबंधन के आगे के अभियान की रूपरेखा तय की जाएगी। कर्नाटक कांग्रेस ने कहा है कि बैठक में मतदान के अधिकारों की रक्षा करने और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाएगा।

यह बैठक मतदाता सूची में संशोधन और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने में चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर चल रही व्यापक राजनीतिक बहस के बीच हो रही है। विपक्ष ने जहां पात्र मतदाताओं के सूची से बाहर रह जाने की आशंका जताई है, वहीं गलत तरीके से नाम हटाए जाने के विशिष्ट आरोपों की पुष्टि आधिकारिक चुनावी रिकॉर्ड से करनी होगी।

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CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हंगामा, अभिजीत दीपके बोले- 50-100 रुपए देकर बाहर कीजिए, लहरा दो तिरंगा को लेकर बताया प्लान

CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हंगामा, अभिजीत दीपके बोले- 50-100 रुपए देकर बाहर कीजिए, लहरा दो तिरंगा को लेकर बताया प्लान

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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की प्रमुख नेहा बोरा और अन्य नेताओं को गुरुवार, 15 अक्टूबर को दिल्ली के प्रेस क्लब में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विरोध का सामना करना पड़ा। पत्रकारों से खचाखच भरे परिसर में कुछ लोगों ने ‘बंद करो, दफा हो जाओ’ के नारे लगाए। इस पर अभिजीत दीपके ने तंज कसते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग पैसे लेकर हंगामा करने आए हैं।

यह प्रेस कॉन्फ्रेंस CJP के सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी तथा उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के विरोध में आयोजित की गई थी। इस दौरान दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा।

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प्रेस क्लब में अचानक शुरू हुआ विरोध, नेताओं ने जताई नाराजगी

 

दिल्ली के प्रेस क्लब में विभिन्न छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही थी। नेता बारी-बारी से अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान AISA की प्रमुख नेहा बोरा के संबोधन के बीच कुछ लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया।

 

प्रत्यक्ष विवरण के मुताबिक, परिसर में ‘बंद करो, दफा हो जाओ’ जैसी आवाजें सुनाई देने लगीं। इससे वहां मौजूद पत्रकारों का ध्यान पीछे की ओर चला गया। नेहा बोरा ने लोगों को शांत कराने की कोशिश की और प्रेस क्लब प्रबंधन से हंगामा कर रहे लोगों को बाहर करने की अपील की।

 

इसके बाद अभिजीत दीपके ने माइक संभालते हुए विरोध करने वालों पर पैसे लेकर हंगामा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “इनको 50-100 का नोट दे दीजिए। इसलिए वे आए हैं। प्रेस क्लब वालों से कहता हूं कि इन्हें 50-100 का नोट देकर बाहर कर दीजिए।” नेहा बोरा ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विरोध करने वालों को एक कोने में ऐसा करने दिया जाए और पत्रकार अपना काम जारी रखें।

 

ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए कार्रवाई का आरोप

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना विरोध दोहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकारी तंत्र का इस्तेमाल ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए किया जा रहा है।

 

दीपके ने दावा किया कि पिछले कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे युवाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और विपक्षी नेताओं को भी हिरासत में लिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक व्यक्ति को बचाने के लिए इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों की जा रही है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि प्रदर्शनकारियों को सड़कों पर घसीटा गया और दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था इस तरह कड़ी कर दी गई, मानो देश की राजधानी किसी सीमा क्षेत्र में बदल गई हो।

 

सौरभ दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर विवाद

CJP के सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके साथ अजिंक्य शिंदे भी मौजूद थे। तीनों ने कथित तौर पर पुलिस बैरिकेड पार कर जंतर-मंतर में प्रवेश किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए।

 

दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। उन पर सरकारी अधिकारी के काम में बाधा डालने समेत कई आरोप लगाए गए। बाद में अदालत ने सौरभ दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

 

CJP इन गिरफ्तारियों को लेकर विरोध कर रही है और अपने नेताओं के समर्थन में प्रदर्शन का आह्वान किया है।

 

16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च का ऐलान

 

अभिजीत दीपके ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ नाम से प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। CJP ने दूसरे शहरों में भी इसी समय तिरंगा मार्च आयोजित करने की अपील की है। दीपके ने नागरिकों से प्रदर्शन में शामिल होने का आग्रह करते हुए कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना लोकतांत्रिक अधिकार है।

 

हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कनॉट प्लेस में प्रदर्शन के लिए कोई निर्धारित विरोध स्थल नहीं है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के तौर पर बाहर रखा गया है। प्रदर्शनकारी आवश्यक अनुमति प्राप्त करने के बाद रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान या CBD मैदान में प्रदर्शन कर सकते हैं।

 

दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने की तैयारी की

 

प्रस्तावित तिरंगा मार्च को देखते हुए कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा बढ़ाए जाने की तैयारी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रणनीतिक स्थानों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती, बैरिकेडिंग और लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

 

राजधानी में पहले से अर्धसैनिक बलों की कई कंपनियां तैनात होने की जानकारी भी दी गई है। पुलिस का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी अप्रिय घटना को रोकना है।

 

CJP के प्रदर्शन से जुड़ी 5 बड़ी बातें

 

प्रेस क्लब में हंगामा : 15 अक्टूबर को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कुछ लोगों ने विरोध में नारे लगाए।

 

अभिजीत दीपके का आरोप : उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग पैसे लेकर हंगामा करने आए थे।

 

गिरफ्तारी का मामला : सौरभ दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा किया गया।

 

तिरंगा मार्च का ऐलान : CJP ने 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन का आह्वान किया है।

 

सुरक्षा और अनुमति : पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने की तैयारी की है और कहा है कि निर्धारित स्थलों पर प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति लेनी होगी।

अंकिता के माता-पिता के साथ, युवा कांग्रेस कार्यकर्ता भी हिरासत में

अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर इंडिया गेट पर उनके माता-पिता के साथ धरने पर बैठे युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब समेत संगठन के कई अन्य कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने गुरुवार सुबह हिरासत में ले लिया और बाद में छोड़ दिया।

युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय चेयरमैन (मीडिया विभाग) वरुण पांडेय ने गुरुवार को बताया कि श्री चिब समेत संगठन के कार्यकर्ता बुधवार रात से ही अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ इंडिया गेट पर सत्याग्रह कर रहे थे। पुलिस ने सुबह करीब चार बजे अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिया और इसके बाद युवा कांग्रेस के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को भी जबरन बसों में बैठाकर हिरासत में ले लिया।

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श्री चिब ने कहा कि अंकिता के माता-पिता पिछले चार वर्षों से न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें ही हिरासत में लिया जा रहा है जबकि दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाया गया है। उन्होंने सवाल किया कि बेटियों को भाजपा नेताओं से बचाना है या राज्यपाल से।

उन्होंने कहा कि युवा कांग्रेस अंकिता और उनके परिवार को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी। दुष्यंत गौतम को राज्यपाल के पद से बर्खास्त करने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो न्याय की मांग को लेकर देशभर में आंदोलन किया जाएगा।

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जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए विशेष कंपनी के गठन को कैबिनेट की मंजूरी, सोयाबीन किसानों को मिलेगा भावांतर योजना का लाभ

जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए विशेष कंपनी के गठन को कैबिनेट की मंजूरी, सोयाबीन किसानों को मिलेगा भावांतर योजना का लाभ

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरूवार को कैबिनेट की बैठक में जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी’ के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिलाने के लिए ‘पीएम-आशा’ योजना अन्तर्गत भावांतर भुगतान योजना लागू करने की स्वीकृति दी गई। मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास को गति देने के लिए लगभग 27,050 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

 

कैबिनेट ने बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली की सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता के लिए 3,076.37 करोड़ रुपये तथा 16वें वित्त आयोग की अवधि के लिए विधि एवं विधायी कार्य विभाग की 15,557 करोड़ रुपये से अधिक की राशि की योजनाओं की निरंतरता को मंजूर की गई। प्रदेश में आयुष चिकित्सा विस्तार व राष्ट्रीय आयुष मिशन के लिए 5,232 करोड़ रुपये एवं शासकीय विद्यालयों के अधोसंरचना निर्माण के लिए 2,875.20 करोड़ रुपये की निरंतरता की स्वीकृति दी गई। इसके अतिरिक्त नवगठित जिलों-निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा व मैहर में महिला एवं बाल विकास कार्यालयों के लिए 24 नवीन पदों तथा जनजातीय सांदीपनि विद्यालयों के छात्र परिवहन के लिए 241 करोड़ 88 लाख रुपये का प्रावधान किया गया।

 

जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए विशेष कंपनी के गठन की मंजूरी-प्रदेश के औद्योगिक विकास एवं निवेश को नई गति देने के लिए मंत्रि-परिषद ने जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के साथ चयनित औद्योगिक एवं आर्थिक हबों के समेकित विकास के लिए पूर्णतः शासकीय स्वामित्व वाली विशेष कंपनी (एसपीवी) ‘जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड’ गठित करने की स्वीकृति प्रदान की है। स्वीकृति अनुसार कंपनी पर मध्यप्रदेश शासन का पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रण रहेगा।

 

कंपनी के सुदृढ़ वित्तीय आधार के लिए राज्य शासन द्वारा 100 करोड़ रूपये की प्रारंभिक चुकता पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी के प्रभावी संचालन और नीतिगत निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय सामान्य निकाय गवर्निंग काउंसिल गठित की जाएगी। मुख्यमंत्री द्वारा नामित एवं नियुक्त उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक सशक्त कार्यकारी निकाय के माध्यम से कंपनी के कार्यों का संचालन किया जाएगा।

 

इकॉनॉमिक हब के तीव्र और सुव्यवस्थित विकास के उद्देश्य से विशेष कंपनी को भूमि की पहचान, भूमि प्रबंधन, भू-अर्जन, भूमि विकास, जोनिंग, मास्टर प्लानिंग, ले-आउट, भू-आवंटन, लीज/सब-लीज, मोनेटाइजेशन तथा बुनियादी व सामाजिक अधोसंरचना के विकास की शक्तियां प्रदान की जाएंगी। आवश्यकतानुसार राज्य शासन की भूमि सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से रियायती दर या निर्धारित शर्तों पर कंपनी को उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना में वन भूमि की आवश्यकता होने पर संबंधित केंद्रीय एवं राज्य कानूनों, पूर्वानुमोदन, क्षतिपूर्ति वनीकरण तथा एनपीवी सहित सभी वैधानिक शर्तों की पूर्ति के बाद ही भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
 

इसके साथ ही मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम के अंतर्गत विधि विभाग की सहमति से अधिसूचित इकॉनाँमिक हबो के लिए इसे नोडल एजेंसी के रूप में आवश्यक शक्तियां और दायित्व सौंपे जाएंगे। कंपनी के कार्य क्षेत्र के संबंध में यह स्पष्ट किया गया है कि मुख्य सड़क या कॉरिडोर का निर्माण इसके दायरे में नहीं होगा। कंपनी का संपूर्ण ध्यान आर्थिक हबों के भीतर आंतरिक एवं साझा अधोसंरचना और आर्थिक गतिविधियों के संवर्धन पर ही केंद्रित रहेगा।

 

विशेष कंपनी के माध्यम से औद्योगिक पार्क, सेक्टोरल पार्क जैसे फूड पार्क, एग्री-प्रोसेसिंग पार्क, लॉजिस्टिक्स पार्क, टेक्नोलॉजी/आईटी पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर आदि साझा सुविधाएं आवासीय और सामाजिक बुनियादी ढांचे से संबंधित परियोजनाएं विकसित की जाएंगी। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पीपीपी, ईपीसी, कन्सेशन, लीज, संयुक्त उपक्रम तथा डेवलपमेंट एग्रीमेंट जैसे विभिन्न वैधानिक मॉडलों का उपयोग किया जा सकेगा। इस निर्णय के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को परियोजना से जुड़े विभागों जैसे वित्त, राजस्व, नगरीय विकास एवं आवास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, ऊर्जा, लोक निर्माण, वन तथा विधि विभाग से आवश्यक समन्वय कर अधिसूचनाएं, शासनादेश एवं अन्य वैधानिक दस्तावेज जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।

 

सोयाबीन किसानों के लिए भावांतर योजना- कैबिनेट ने किसानों को खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन का उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना लागू किए जाने की स्वीकृति दी है। यह योजना भारत सरकार के ‘प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान’ (पीएम-आशा) के तहत संचालित ‘प्राइस डिफिसिट पेमेंट स्कीम’ (पीडीपीएस) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के किसानों को उनकी औसत गुणवत्ता वाली सोयाबीन उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित कराना है।
 

योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए सोयाबीन उत्पादक किसानों को खाद्य विभाग के ई-उपार्जन पोर्टल पर 17 अक्टूबर 2026 तक पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। योजना के अंतर्गत अधिसूचित मंडियों में उपज की विक्रय अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक निर्धारित की गई है जिसे आवश्यकता पड़ने पर संशोधित  किया जा सकेगा। योजना के तहत किसानों को भुगतान उनके पंजीकृत रकबे और विगत वर्ष विभाग द्वारा निर्धारित राज्य स्तरीय औसत उत्पादकता के आधार पर किया जाएगा। किसी किसान ने यदि योजना अवधि से पूर्व यानी 1 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 के बीच मंडी में सोयाबीन बेची है तो उस मात्रा को उसकी कुल पात्रता सीमा में से घटाकर केवल शेष मात्रा पर ही भावांतर राशि का भुगतान मान्य किया जाएगा।

 

योजना में भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए मॉडल रेट की व्यवस्था लागू की गई है। सीजन के प्रथम 14 दिनों के लिए मॉडल रेट का निर्धारण प्रदेश की सभी मंडियों के भारित औसत के आधार पर किया जाएगा जो 22 अक्टूबर 2026 से आगामी 14 दिनों तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद प्रतिदिन विगत 14 दिनों के भारित औसत के आधार पर मॉडल रेट तय कर उसे ई-मंडी पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाएगा। । भावांतर राशि का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी मंडी बोर्ड द्वारा किया जाएगा। जिसकी प्रतिपूर्ति सबसे पहले राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड द्वारा संचालित मूल्य स्थिरीकरण कोष से होगी। कोष में राशि अपर्याप्त होने की स्थिति में राज्य शासन द्वारा मंडी बोर्ड को 1500 करोड़ रुपये की साख सीमा (क्रेडिट लिमिट) एक वर्ष के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

Stock Market Rally : शेयर बाजार में तूफानी तेजी, सेंसेक्स 1,533 अंक उछला, निफ्टी में भी 375 अंकों की छलांग

Stock Market Rally : शेयर बाजार में तूफानी तेजी, सेंसेक्स 1,533 अंक उछला, निफ्टी में भी 375 अंकों की छलांग

share market 19 march

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। कारोबार की शुरुआत लगभग सपाट रहने के बाद बाजार ने तेजी पकड़ी और एक घंटे के भीतर सेंसेक्स 1,000 अंकों से ज्यादा उछल गया। कारोबार बंद होने तक बीएसई सेंसेक्स 1,533 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी में 375 अंकों की तेजी दर्ज की गई। हालांकि, एशियाई बाजारों में दबाव बना रहा और दक्षिण कोरिया का प्रमुख शेयर सूचकांक KOSPI 7.57 फीसदी तक टूट गया।

 

सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल

गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सीमित उतार-चढ़ाव के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 330 अंक ऊपर था, जबकि निफ्टी में 41 अंकों की बढ़त दर्ज की गई। इसके बाद बाजार में खरीदारी बढ़ी और सेंसेक्स ने एक घंटे के भीतर 1,000 अंकों का स्तर पार कर लिया।

 

कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,533 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ। वहीं, निफ्टी ने 375 अंकों की छलांग लगाई। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों का ध्यान एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार की मजबूती पर गया।

 

एशियाई बाजारों में भारी गिरावट, KOSPI 7.57% टूटा

 

जहां भारतीय बाजार में तेजी देखने को मिली, वहीं एशियाई शेयर बाजारों में दबाव बना रहा। दक्षिण कोरिया का प्रमुख सूचकांक KOSPI 7.57 फीसदी गिरकर बंद हुआ। यह सूचकांक की लगातार सातवें कारोबारी सत्र में गिरावट थी।

 

VT Markets के प्रिंसिपल एनालिस्ट डैनियल मंडे के मुताबिक, अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक बाजारों पर दबाव बढ़ाया है। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों की फंडिंग और कर्ज को लेकर चिंताओं ने टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली को बढ़ावा दिया।

 

अमेरिका में महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता

 

अमेरिका में उम्मीद से ज्यादा महंगाई के आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका को फिर से बढ़ा दिया। हालांकि, फेड अधिकारियों की सतर्क टिप्पणियों के बाद बाजार में इन आशंकाओं में कुछ कमी आई।

 

निवेशकों की चिंता केवल ब्याज दरों तक सीमित नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे निवेश को कर्ज के जरिए वित्तपोषित करने की क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसी कारण अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों CoreWeave और Oracle के शेयरों में दबाव देखने को मिला।

 

इसका असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। दक्षिण कोरिया, ताइवान और जापान जैसे बाजारों में सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी कंपनियों का बड़ा प्रभाव है। ऐसे में AI सेक्टर में बिकवाली का असर इन बाजारों पर अधिक पड़ सकता है।

 

अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में नरमी से मिली राहत

 

रातभर के कारोबार में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में कुछ नरमी देखने को मिली। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में संकेत दिया गया कि चीन के पास अमेरिकी सरकारी कर्ज की मात्रा आधिकारिक आंकड़ों में दिखाई गई मात्रा से अधिक हो सकती है। इसके साथ ही निवेशकों ने अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया।

 

तेजी से गिरावट के बाद बाजार में कुछ सुधार या तकनीकी उछाल आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार, AI कंपनियों की फंडिंग और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता दूर होने तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

 

निवेशकों के लिए आगे किन बातों पर नजर रखना जरूरी?

 

वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में आने वाले दिनों में कई अहम कारक महत्वपूर्ण रहेंगे।

 

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक: 28 अक्टूबर को होने वाली बैठक पर निवेशकों की नजर रहेगी।

 

महंगाई के आंकड़े : अमेरिका में महंगाई के नए आंकड़े ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं।

 

कच्चे तेल की कीमतें : तेल की कीमतों में तेजी वैश्विक महंगाई और बाजार की धारणा पर असर डाल सकती है।

 

मध्य पूर्व में तनाव : भू-राजनीतिक घटनाक्रम से बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है।

 

AI कंपनियों की फंडिंग: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बढ़ते खर्च को कंपनियां किस तरह वित्तपोषित करती हैं, यह टेक्नोलॉजी शेयरों के लिए अहम होगा।

एसआईआर के खिलाफ विपक्षी दलों की याचिका पर चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

उच्चतम न्यायालय ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरुद्ध लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य घटक दलों के नेताओं की ओर से दायर याचिका पर गुरुवार को चुनाव आयोग को नोटिस जारी किये।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने चुनाव आयोग के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी किये । मुख्य न्यायाधीश ने याचिका पर सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से टिप्पणी की, ” हम याचिकाकर्ताओं में से एक से उनके आचरण के बारे में भी पूछेंगे।” गौरतलब है कि 12 अक्टूबर को श्री गांधी, कांग्रेस और विपक्षी दलों के कुछ अन्य विपक्षी नेताओं ने उच्चतम न्यायालय तक एक मार्च निकाला था और उसके वे उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल करने गये थे। इससे न्यायालय परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई और हंगामा के स्थिति बन गयी थी।

याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, ममता तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी प्रसाद यादव, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के एम ए बेबी, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ईटी. मुहम्मद बशीर शामिल हैं। विदुथलाई चिरुथाइगल काची के अध्यक्ष थोल. थिरुमावलवन और नेशनल कॉन्फ्रेंस के सज्जाद अहमद किचलू भी याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं।

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कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल एसआईआर प्रक्रिया का शुरू से ही विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग ने भारतीय जनता पार्टी के दबाव में मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम काट दिये हैं। वे इसको लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे है। न्यायालय ने अल हिंद मुस्लिम इत्तेहाहुल मुसलमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने भी एसआईआर के विरुद्ध न्यायालय में अलग अलग याचिकाएं दायर की हैं।

याचिकाकर्ताओं ने एसआईआर कराने के संबंध में चुनाव आयोग के 24 जून, 2025 के फैसले के रिकॉर्ड को तलब किये जाने और यह तय करने का अनुरोध किया है कि इस प्रक्रिया में नियम कायदे का पालन हुआ है या नहीं । याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि इस मामले में यह न्यायिक समीक्षा भी की जाए कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 के तहत आयोग की निर्णय प्रक्रिया में सामूहिक दायित्व और दस्तावेजी निर्णय लेने की व्यवस्था का अनुपालन हुआ या नहीं।

याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची से नाम हटाने तथा मतदाता सूची डेटाबेस का ऑडिट करने के लिए उच्चतम न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति बनाने की भी मांग की है। याचिकाकर्ताओं ने एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों से हटाए गए नामों और उन्हें हटाने के कारणों की बूथ-वार जानकारी दिये जाने, नाम हटाने से पहले नोटिस और सुनवाई , नाम वापस जोड़ने की व्यवस्था किये जाने, चुनाव वाले राज्यों में पंजीकरण की समय-सीमा बढ़ाये जाने और जब तक यह मामला चल रहा है, तब तक पूरे देश में एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने की भी मांग की है।

Pic Credit : UNI