भोपाल में रहवासी क्षेत्र में कमर्शियल एक्टिविटी पर निगम की सीलिंग कार्यवाही पर उठे सवाल, टॉर्च जला कर सड़क पर किया प्रदर्शन

भोपाल में रहवासी क्षेत्र में कमर्शियल एक्टिविटी पर निगम की सीलिंग कार्यवाही पर उठे सवाल, टॉर्च जला कर सड़क पर किया प्रदर्शन

राजधानी भोपाल में रहवासी क्षेत्रों में कर्मिशयल एक्टिविटी के विरोध में सर्वोच्च न्यायलय के निर्देश के बाद भी कोई कार्यवाही नही होने के विरोध में रहवासियों टॉर्च लाइट मार्च निकाल कर अपना विरोध दर्ज कराया। भरत नगर त्रिलंगा क्षेत्र में संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के आव्हान पर भोपाल की अनेको आवासीय कॉलोनी के निवासियों ने एकत्रित हो कर नगर निगम की पक्षपातपूर्ण सीलिंग कार्यवाही के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए टौर्च लाइट मार्च निकला।

रहवासियों ने आरोप लगाया की जब सर्वोच्च न्यायलय द्वारा आदेश दिया है की आवासीय भूउपयोग पर हो अवैध संस्थानों पर सीलिंग की कार्यवाही सुनिश्चित की जाये तो नगर निगम आब तक सिर्फ सर्वे और नोटिस का ढोंग क्यों रच रही है।

 

रहवासियों ने सवाल उठाया की जब नगर निगम एक बार सर्वे करवा चूका है जिसमे हजारो की संख्या में अवैध निर्माण पाया गया है जिसकी जानकारी न्यायलय को दी जा चुकी है तो उस पर कार्यवाही करने की बजाये दूसरी बार सर्वे करवा कर समय क्यों ख़राब किया जा रहा है क्या निगम इन रसूखदार भूमाफियाओ को बचाना चाहता है|

 

संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से जल्द मास्टर प्लान लागु करने की मांग की, जिसमे रहवासी क्षेत्रो में व्यवसाई गतिविधियों पर पुर्णतः प्रतिबंध हो। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने कहा कि टॉर्च लाइट मार्च केवल विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि भोपाल के नागरिकों की जागरूकता और अपने शहर भोपाल को भूमाफियाओ से बचाने का संकल्प है। आवासीय क्षेत्रों को अनियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध निर्माणों से बचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है परन्तु जिला प्रशासन मूक दर्शक बना बेठा है जिसके चलते भूमाफिया भोपाल की खूबसूरती पर प्रहार कर रहा है।

समिति ने आरोप लगाया कि पहले ही बड़ा तालाब छोटा तालाब और कलियासौत डेम ,केरवा ,चंदनपुरा,गोरा बिसनखेड़ा क्षेत्र अतिक्रमण से ग्रसित है। अब रहवासी क्षेत्रो को ख़त्म करने की प्लानिग है जिसको रहवासी सफल नहीं होने देंगे जिन्होंने एक जुट हो कर प्रशासन से अवैध गतिविधिया हटाने की मांग की और चेतवानी दी की अगर सर्वोच्च न्यायलय के आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो हम न्यायलय में अवमानना याचिका दायर करने के लिए बाध्य होंगे| 

 

समिति ने प्रशासन और नगर निगम से मांग की कि आवासीय क्षेत्रों में अवैध निर्माण, अतिक्रमण और अवैध भू-उपयोग के खिलाफ बिना भेदभाव प्रभावी कार्रवाई की जाए तथा आवासीय कॉलोनियों के मूल स्वरूप को संरक्षित किया जाए।

 

 

कौन हैं माया ट्यूडर, CM रेवंत रेड्डी से मुलाकात पर क्‍यों भड़की BJP, क्या भारत विरोधी हैं ट्यूडर?

कौन हैं माया ट्यूडर, CM रेवंत रेड्डी से मुलाकात पर क्‍यों भड़की BJP, क्या भारत विरोधी हैं ट्यूडर?

Maya Tudor

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का यूरोप दौरा विवादों में है। वो भी एक मुलाकात की वजह से। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब सरकार ने उन्‍हें अमेरिका जाने की अनुमति नहीं दी थी। अब यूरोप के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम को लेकर भी भाजपा उन पर भड़क उठी है। इस मुलाकात को लेकर कंट्रोवर्सी शुरू हो गई है।

एंटी इंडिया है माया ट्यूडर : यूनिवर्सिटी में कार्यक्रम के दौरान रेड्डी ने ‘ब्लावत्निक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट’ के फैकल्टी सदस्यों के साथ मुलाकात की। खास बात है कि इसमें राजनीति और पब्लिक पॉलिस पढ़ाने वाली प्रोफेसर माया ट्यूडर भी शामिल थीं। इनकी तस्वीरें सामने आने पर भारत में हंगामा हो गया है। भाजपा ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को घेरना शुरू कर दिया और माया ट्यूडर को ‘एंटी-इंडिया’ बताया है।

क्‍या कहा भाजपा सांसद ने : इस मुलाकात पर विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री की यूरोप यात्रा के दौरान की तस्वीरें सामने आने के बाद भाजपा सांसद अरविंद धर्मपुरी ने उन्हें निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि ट्यूडर अपने भारत विरोधी रवैये के लिए जानी जाती है। ऐसे में रेवंत रेड्डी की उनसे मिलना गलत है। उन्‍होंने पूछा कि आखिर इस मुलाकात का क्‍या मतलब है।


भाजपा सांसद ने शेयर की तस्वीर : सोशल मीडिया साइट एक्स पर धर्मपुरी ने लिखा, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ब्लावत्निक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट की प्रोफेसर माया ट्यूडर से मिलिए, जिन्होंने कई भारत-विरोधी लेख लिखे हैं, जिनमें 'भारत का लोकतंत्र क्यों मर रहा है' (Why India’s Democracy Is Dying) भी शामिल है। रेवंत रेड्डी, जो इत्तेफाक से मुख्यमंत्री बने हैं, आज उनसे मिल रहे हैं। इससे पता चलता है कि उनमें जरा भी शर्म नहीं बची है और वे भारत-विरोधी ताकतों के साथ मिल गए हैं।

लेख लिखा था, 'भारत का लोकतंत्र क्यों मर रहा है : बता दें, माया ट्यूडर ने वर्ष 2023 में जर्नल ऑफ डेमोक्रेसी में एक लेख लिखा था। इसका शीर्षक 'भारत का लोकतंत्र क्यों मर रहा है। (Why India’s Democracy Is Dying)' इस लेख की काफी आलोचना की गई थी। इसमें माया ने प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के कार्यकाल के दौरान भारत में लोकतांत्रिक ढांचे का विश्लेषण किया था।

कौन हैं माया ट्यूडर : ऑक्सफोर्ड के ब्लावत्निक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में पॉलिटिक्स और पब्लिक पॉलिसी की प्रोफेसर माया ट्यूडर अपने क्षेत्र का एक जाना माना नाम हैं। उनकी रिसर्च लोकतांत्रिक और असरदार सरकारों के बनने की प्रक्रिया पर केंद्रित है, जिसमें दक्षिण एशिया पर खास ध्यान दिया गया है। वह लगातार दक्षिण एशिया के देशों के ऊपर रिसर्च करती रहती हैं। उन्होंने इसी मुद्दे पर 2013 में एक किताब 'द प्रॉमिस ऑफ पावर: द ओरिजिन्स ऑफ डेमोक्रेसी इन इंडिया एंड ऑटोक्रसी इन पाकिस्तान' लिखी थी। इसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच में आजादी के बाद लोकतंत्र की स्थापना का विश्लेषण किया था। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के ब्लावटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में राजनीति और लोक नीति की प्रोफेसर हैं। वह सेंट हिल्डा कॉलेज में फेलो भी हैं और राष्ट्रवाद तथा लोकतंत्र के राजनीतिक विश्लेषण से जुड़े अपने शोध व लेखन कार्यों के लिए जानी जाती हैं। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'वैराइटीज ऑफ नेशनलिज्म' (2023) है, जिसे उन्होंने हैरिस मायलोनास के साथ मिलकर लिखा है।

क्या भारत विरोधी हैं ट्यूडर : माया ट्यूडर लगातार दक्षिण एशियाई देशों के लोकतांत्रिक व्यवस्था पर रिसर्च करती रही हैं। वह अलग-अलग देशों में राष्ट्रवाद और राजनीतिक व्यवस्थाओं पर अध्ययन करती हैं। उन्होंने पाकिस्तान के आर्मी रूल और भारत में सत्ता परिवर्तन को विस्तार से वर्णित किया है। उनके काम में दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में तानाशाही, लोकतंत्र और राष्ट्रवाद पर किए गए अध्ययन भी शामिल हैं। उनके ऑक्सफोर्ड प्रोफाइल में राष्ट्रवाद, तानाशाही और लोकतंत्र और हर देश को (एक मजबूत और समावेशी) राष्ट्रवाद की जरूरत क्यों है जैसे विषयों पर रिसर्च का जिक्र है। हालांकि, वह इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी की सरकार की आलोचना करती हुई नजर आती हैं। इसलिए वह इस समय भारतीय जनता पार्टी के सांसद के निशाने पर हैं।

अन्नदाता के लिए छेड़ा नया अभियान, सीएम डॉ. मोहन बोले- किसान अपनी फार्मर आईडी जरूर बनवाएं

अन्नदाता के लिए छेड़ा नया अभियान, सीएम डॉ. मोहन बोले- किसान अपनी फार्मर आईडी जरूर बनवाएं

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 22 अगस्त को नई दिल्ली से बरलाम कृषि महोत्सव में वर्चुअली शामिल हुए। महोत्सव का आयोजन शिवपुरी जिले की कृषि उपज मंडी पिपरसमा में किया गया था। इस मौके पर सीएम डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में फार्मर आईडी बनवाने का अभियान शुरू किया गया है। किसानों को अब न कहीं भटकना होगा और न ही लंबी लाइनों में लगना होगा। शासकीय दल खुद किसानों के पास जाकर उनकी फार्मर आईडी बनवाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपील की, कि सभी किसान फार्मर आईडी जरूर बनवाएं। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब खाद के लिए किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। पैसे की कमी हमारे किसी भी किसान भाई के आड़े न आए, इसके लिए हमारी सरकार ने शून्य प्रतिशत ब्याज पर अग्रिम खाद उपलब्ध कराने का संवदेनशील निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि हम किसान के माथे पर चिंता की एक भी लकीर नहीं आने देंगे। शिवपुरी जिले के किसानों की मेहनत से यहां की मूंगफली का डंका पूरे देश में बज रहा है। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे सिर्फ पारम्परिक फसलों तक ही सीमित न रहें, बागवानी, डेयरी फार्मिंग, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे आमदनी वाले क्षेत्रों को भी अपनाएं। सरकार हमेशा किसानों के साथ है। हम सब मिलकर शिवपुरी जिले को कृषि का सिरमौर बनाएंगे।

 

ऋण चुकाने की समय सीमा खत्म

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिव की नगरी शिवपुरी जिले में केन-बेतवा-पार्वती-सिंध-महुआ नदियों, एक तरह से जैसे पंचामृत आपके खेतों को मिल रहा है। उन्होंने शहीद तात्या टोपे के बलिदान को भी याद करते हुए कहा कि बलराम जयंती महोत्सव वास्तव में किसानों के स्वाभिमान का एक अद्भुत पर्व है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए सरकार द्वारा कई कल्याणकारी योजना चलाई जा रही हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में मुनाफा मिले। किसानों को जो 31 मार्च तक ऋण की राशि जमा करनी होती थी, अब उससे निजात मिलेगी। अब वह 1 वर्ष के भीतर कभी भी यह लोन चुका सकता है। इसके लिए अब 31 मार्च की समय-सीमा समाप्त कर दी गई है।

 

अधिक प्रभावी है ई-किसान प्रणाली

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ई-विकास प्रणाली को और अधिक प्रभावी, सहज, सरल एवं किसान हितैषी बनाया गया है। ई-विकास 2.0 से किसानों को अपनी आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक प्राप्त करने में सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि ई-विकास 2.0 में किसान अपनी इच्छानुसार कोई भी एक उर्वरक बिना किसी अनिवार्य संयोजन के खरीद सकेगा। अब किसान खेती-किसानी के अलावा अन्य माध्यमों से भी मुनाफा कमा रहे हैं। होमस्टे की अवधारणा भी धीरे-धीरे  बढ़ रही है। इससे किसानों को लाभ मिलेगा। यहां माधव टाइगर रिजर्व भी है, जहां टाइगर छोड़े थे। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है। हम हमारे सभी किसानों की समृद्धि के लिए लगातार काम कर रहे हैं। 

 

राखी का शगुन मिलने से खुश हैं बहनें

सीएम डॉ. यादव ने कहा कि इसी क्रम में अगले साल जो किसान चना या गन्ने की फसल लगाएंगे, उन्हें इन फसलों के लिए पूरे समय दिन में बिजली दी जाएगी। रात की बिजली का संकट खत्म होगा। इससे सिंचाई के लिए किसानों को रातभर जागने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि किसानों को रात में कई बार करंट लग जाता था, सांप काट लेता था, कई परेशानियां होती थीं, वह सारी कठिनाइयां अब खत्म हो जाएंगी। उन्होंने जिले के सभी किसानों विशेषकर लाड़ली बहनों को आगामी रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लाड़ली बहना योजना की राशि रक्षाबंधन त्यौहार से पूर्व सभी के खातों में भेजी गई है, जिससे हमारी बहनें खुशी-खुशी त्यौहार मना सकें। उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को प्रतिवर्ष 12000 रुपए दिए जा रहे हैं, जिससे वह खाद-बीज जैसी जरूरतों को समय से पूरा कर सकें।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने की केन-बेतवा लिंक परियोजना की समीक्षा, 44 लाख से ज्यादा लोगों को मिलेगा पीने का पानी

सीएम डॉ. मोहन यादव ने की केन-बेतवा लिंक परियोजना की समीक्षा, 44 लाख से ज्यादा लोगों को मिलेगा पीने का पानी

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खजुराहो में केन-बेतवा लिंक परियोजना की समीक्षा की। उन्होंने जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट को परियोजना की उच्च प्राथमिकता के साथ नियमित मॉनिटरिंग करने तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महत्व की केन-बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। परियोजना से क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल और ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि विकास के साथ प्रभावित और विस्थापित परिवारों के हितों का पूरा ध्यान रखना सरकार की प्राथमिकता है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पन्ना-छतरपुर जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि प्रभावित गांवों में अधिकारी घर-घर पहुंचकर परिवारों की वास्तविक स्थिति और समस्याओं को समझें। जनजातीय परिवारों की कठिनाइयों को संवेदनशीलता के साथ सुनकर उनका प्राथमिकता से निराकरण करें। उन्होंने कहा कि विस्थापित परिवारों को शासन की पात्र योजनाओं का लाभ उनके घर तक पहुंचाया जाए। जहां परिवारों ने नए स्थान पर निवास बना लिया है, वहां स्कूल, आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक भवन सहित जरूरी मूलभूत सुविधाओं के लिए ठोस कार्य योजना तैयार की जाए।

 

रूंझ-मझगांव परियोजना के प्रभावितों को अतिरिक्त राशि का शीघ्र भुगतान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पन्ना की रूंझ-मझगांव परियोजना में स्वीकृत अतिरिक्त राशि का प्रभावितों को शीघ्र भुगतान कराने के निर्देश दिए। जिन प्रभावितों के पास उम्र संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, उनकी आयु का निर्धारण मेडिकल परीक्षण के आधार पर करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में जन चौपाल और जागरूकता यात्राओं के माध्यम से लोगों को परियोजना से मिलने वाले लाभों की जानकारी दी जाए। मैदानी स्तर पर सकारात्मक गतिविधियां आयोजित कर लोगों की आशंकाओं और समस्याओं का समाधान किया जाए।

 

लाखों परिवारों को होगा फायदा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि परियोजना पूर्ण होने पर मध्यप्रदेश में लगभग 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ेगी और 44 लाख से अधिक लोगों को पेयजल सुविधा का लाभ मिलेगा। परियोजना के तहत 103 मेगावाट जल विद्युत तथा 27 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन भी प्रस्तावित है। बुंदेलखंड एवं मध्य भारत के पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, सागर, विदिशा, रायसेन, शिवपुरी और दतिया जिलों के 1,382 गांवों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। छतरपुर और पन्ना जिले में कुल 5,039 परियोजना प्रभावित परिवार हैं। इनमें पन्ना जिले के 1,321 तथा छतरपुर जिले के 3,718 परिवार शामिल हैं। सभी प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन विशेष पैकेज का विकल्प चुना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना केवल जल संसाधन विकास की योजना नहीं, बल्कि बुंदेलखंड में आर्थिक और सामाजिक बदलाव का माध्यम है। सरकार का प्रयास है कि परियोजना से प्रभावित परिवारों का पुनर्वास सम्मानजनक ढंग से हो और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।

सीएम डॉ. मोहन यादव का मास्टर स्ट्रोक, फिर शुरू होगी कैलारस शुगर मिल, जानें कब खुलेंगे टेंडर?

सीएम डॉ. मोहन यादव का मास्टर स्ट्रोक, फिर शुरू होगी कैलारस शुगर मिल, जानें कब खुलेंगे टेंडर?

भोपाल। मध्यप्रदेश में उद्योगों को फलता-फूलता देखने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दिन-रात काम कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में प्रदेश को लाखों करोड़ों का निवेश भी मिला है। इसी कड़ी में उन्होंने एक और बड़ा फैसला किया है। दरअसल, मुरैना जिले की बंद पड़ी कैलारस शुगर मिल को फिर से चालू करने की कवायद शुरू कर दी गई है। इस संबंध में एमएसएमई विभाग ने रुचि की अभिव्यक्ति आमंत्रित की है। इस मिल के शुरू होने से क्षेत्र का तस्वीर ही बदल जाएगी। 

 

इस संबंध में एमएसएमई विभाग के आयुक्त दिलीप कुमार ने बताया कि मिल को शुरू करने के लिए 15 सितंबर तक ऑनलाइन प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। इन प्रस्तावों को अगले दिन 16 सितंबर को खोला जाएगा। गौरतलब है कि 19 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई थी। इस बैठक में हुए निर्णय के तहत कैलारस चीनी मिल की जमीन एमएसएमई विभाग को हस्तांतरित कर दी गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और राज्य सरकार का उद्देश्य इस मिल के पुनरुद्धार से क्षेत्र में रोजगार, औद्योगिक गतिविधि और स्थानीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। 

 

एमएसएमई विभाग के आयुक्त दिलीप कुमार ने बताया कि अब सरकार मिल को जैसी है, जहां है के आधार पर लीज पर देने जा रही है। जो लोग इस लीज को लेना चाहते हैं, वे 31 अगस्त और 1 सितंबर को सुबह 11 बजे से मिल की साइट विजिट कर सकते हैं। मिल को लीज पर देने के संबंध में 3 सितंबर मीटिंग होगी। यह मीटिंग दोपहर 3 बजे से विंध्याचल भवन की चौथी मंजिल पर स्थित मीटिंग हॉल में होगी। जो लोग इस संबंध में लिखित प्रश्न पूछना चाहते हैं, वे 7 सितंबर शाम 5 बजे तक प्रश्न पूछ सकते हैं। रुचि की अभिव्यक्ति जमा करने की अंतिम तिथि 15 सितम्बर शाम 5 बजे रखी गई है। अगले दिन 16 सितंबर को प्रस्ताव शाम 5 बजे खोले जाएंगे।

 

शुगर और संबंधित उप-उत्पादों के निर्माण में सक्षम कंपनियां www.mptenders.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। विस्तृत जानकारी http://mpmsme.gov.in पर उपलब्ध है। एमएसएमई आयुक्त सिंह ने बताया कि कैलारस शुगर मिल एनएच-552 पर, कैलारस रेलवे स्टेशन से 3 किमी से कम दूरी पर स्थित है। मिल की क्षमता प्रति दिन 1,250 गन्ना पेराई है। मिल की संपत्तियों में फैक्ट्री बिल्डिंग, प्लांट-मशीनरी, गोदाम, वर्कशॉप और 12.86 हेक्टेयर भूमि है। उन्होंने बताया कि लीज अवधि 30 वर्ष होगी। संतोषजनक कार्य के आधार पर यह अवधि बढ़ाई जा सकेगी।

अराजक या एंग्री यंग मैन? राहुल गांधी- भारतीय राजनीति का सबसे आक्रामक नेता प्रतिपक्ष

अराजक या एंग्री यंग मैन? राहुल गांधी- भारतीय राजनीति का सबसे आक्रामक नेता प्रतिपक्ष

Rahul Gandhi Anarchist or Angry Young Man?:

Rahul Gandhi Anarchist or Angry Young Man?: राहुल गांधी को समझना आसान नहीं है। पिछले 15 वर्षों में उनकी राजनीति ने कई चेहरे देखे हैं—‘पप्पूसे लेकर भारत जोड़ो यात्रा के यात्री तक, और अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में सत्ता को खुली चुनौती देने वाले नेता तक।

लेकिन राहुल गांधी की कहानी का एक पहलू ऐसा भी है जिसे राजनीति अक्सर ढक देती है—उनकी सहजता, परिवार के प्रति लगाव और आम आदमी के साथ बिना औपचारिकता घुलने-मिलने की कोशिश।
यही विरोधाभास राहुल को दिलचस्प बनाता है।

एक तरफ संसद और सड़क पर बेहद आक्रामक राहुल गांधी, दूसरी तरफ मां सोनिया का हाथ थामे, बहन प्रियंका को टॉफी देते या किसी साधारण मोची के घर बैठकर जूते सिलना सीखते राहुल गांधी।

तो आखिर राहुल गांधी कौन हैं?

अराजक? एंग्री यंग मैन? या भारतीय राजनीति का वह नेता जिसे विरोधी भले नापसंद करें, लेकिन आम आदमी अब भला इंसानमानने लगा है?

2011 का राहुल और 2026 का राहुल

करीब डेढ़ दशक पहले राहुल गांधी के पास विरासत बहुत थी, लेकिन अपनी राजनीतिक पहचान कम। 2014 में कांग्रेस 44 सीटों पर सिमट गई। 2019 में वे अमेठी हार गए। ‘पप्पू’ की छवि इतनी मजबूत थी कि उनके गंभीर राजनीतिक प्रयास भी अक्सर मजाक में बदल जाते थे।

लेकिन हार ने राहुल को बदला।

उनकी भाषा बदली। तेवर बदले। संसद से सड़क तक उनकी मौजूदगी बढ़ी।

फिर आई भारत जोड़ो यात्रा। यह राहुल गांधी का राजनीतिक पुनर्जन्म था।
कन्याकुमारी से कश्मीर तक पैदल चलने वाला नेता लोगों के बीच बैठा, बच्चों से मिला, किसानों से बात की, युवाओं के सवाल सुने। पहली बार राहुल गांधी को टीवी के मंच पर नहीं, सड़क पर देखा गया।
और यहीं ‘पप्पू’ वाली छवि में पहली बड़ी दरार पड़ी।

राहुल की राजनीति में गुस्सा है, लेकिन आदमी में सहजता

राहुल गांधी की राजनीति आज जितनी आक्रामक है, उनका सार्वजनिक व्यवहार अक्सर उतना ही सहज दिखाई देता है। यही शायद उनकी सबसे बड़ी मानवीय ताकत है।

2024 में उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के मोची रामचेत की दुकान पर रुकना और उनसे जूते सिलना सीखना केवल राजनीतिक फोटो-ऑप था या नहीं, इस पर बहस हो सकती है। लेकिन इसके महीनों बाद रामचेत और उनके परिवार को दिल्ली स्थित अपने घर बुलाना एक अलग तस्वीर पेश करता है। राहुल ने उन्हें गले लगाया; प्रियंका और सोनिया गांधी ने भी उनके परिवार से मुलाकात की।

यह वह राहुल है जिसे राजनीति की शब्दावली में आसानी से फिट नहीं किया जा सकता।

वह नेता जो संसद में प्रधानमंत्री पर सबसे तीखे हमले कर सकता है, वही किसी आम आदमी के घर बैठकर उसकी कहानी भी सुन सकता है।

यही भारतीय समाज की उस पुरानी परंपरा से जुड़ता है जिसमें राजनीति चाहे जितनी कठोर हो, परिवार और रिश्तों में आदमी की पहचान उसके व्यवहार से होती है।

भारत में नेता केवल भाषण से नहीं बनता। लोग यह भी देखते हैं कि वह अपनी मां के साथ कैसा है, बहन के साथ कैसा है, गरीब के साथ कैसा है और कमजोर आदमी के सामने उसका व्यवहार कैसा है।

सोनिया और प्रियंका : राहुल के राजनीतिक व्यक्तित्व का मानवीय पक्ष

राहुल गांधी को परिवार से अलग करके देखना संभव भी नहीं है और शायद सही भी नहीं। सोनिया गांधी उनकी मां ही नहीं, उनकी सबसे लंबी राजनीतिक छाया भी रही हैं।

हाल के दिनों में सोनिया गांधी की आने वाली आत्मकथा के संदर्भ में राहुल और प्रियंका दोनों का अपनी मां के प्रति भावनात्मक सार्वजनिक संदेश इस रिश्ते के निजी पक्ष को सामने लाता है। राहुल ने पिता राजीव गांधी का संदर्भ देते हुए मां के जीवन और संघर्ष के प्रति सम्मान व्यक्त किया।

और प्रियंका? यह रिश्ता शायद राहुल गांधी के व्यक्तित्व का सबसे सहज आईना है।

राजनीति में दोनों भाई-बहन एक-दूसरे के सहयोगी हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में कई बार उनका रिश्ता बिल्कुल आम भाई-बहन जैसा दिखाई देता है।

रक्षाबंधन पर दोनों का स्नेहपूर्ण संवाद हो या संसद परिसर में राहुल का प्रियंका को टॉफी देकर कहना—“Have a sweet”—इन छोटे क्षणों में नेता नहीं, भाई दिखाई देता है।

फरवरी 2026 में राहुल ने मजाकिया अंदाज में यह भी बताया कि एक समय प्रियंका उनसे नाराज थीं और वायनाड के एक प्रसंग ने दोनों के बीच का तनाव खत्म किया। यह किस्सा जितना सामान्य लगता है, उतना ही महत्वपूर्ण भी है—क्योंकि राजनीति में परिवार अक्सर केवल शक्ति-समीकरण बन जाता है, जबकि राहुल-प्रियंका के रिश्ते में भाई-बहन की सहजता अब भी दिखाई देती है।

यही राहुल गांधी का दूसरा चेहरा है।

जो नेता सत्ता से लड़ते समय तल्ख हो सकता है, वही परिवार में बेहद सहज और भावुक भी है।

और शायद यही Gen-Z को आकर्षित कर रहा है

आज का Gen-Z नेता में ‘महानता’ से ज्यादा ऑथेंटिसिटी खोजता है। उसे बहुत बनावटी भाषण पसंद नहीं। उसे ऐसा नेता चाहिए जो सवाल सुने, गलती स्वीकार करे, हंसे, मजाक करे और जरूरत पड़े तो उसके साथ जमीन पर बैठे।

राहुल गांधी ने पिछले कुछ समय में इसी भाषा को अपनाया है।

वे युवाओं से बेरोजगारी पर बात करते हैं, छात्रों से NEET और परीक्षा व्यवस्था पर संवाद करते हैं और रोजगार को राजनीतिक बहस के केंद्र में रखते हैं। 2022 की भारत जोड़ो यात्रा में बेरोजगारी पर युवाओं के साथ उनका संवाद इसी राजनीति का हिस्सा था।

2024 में NEET छात्रों से उनकी मुलाकात और लगातार युवा मुद्दों को उठाना भी इसी दिशा में देखा जा सकता है। और उनका छात्रों की गूंज कार्यक्रम भी इसी संवाद की निरंतरता है, जिसका उद्देश्य छात्रों के सवाल सुनना और उनसे सीधे चर्चा करना है।

लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि Gen-Z राहुल गांधी का नया वोट बैंक बन चुका है।

लेकिन इतना जरूर है— राहुल अब युवाओं के बीच केवल एक राजनीतिक चुटकुला नहीं हैं। वे बातचीत का विषय हैं। और राजनीति में perception का बदलना कभी छोटी बात नहीं होती।

एंग्री यंग मैनउम्र से नहीं, तेवर से

राहुल गांधी अब युवा नहीं हैं। लेकिन उनकी राजनीति में ‘एंग्री यंग मैन’ का तेवर जरूर है।

  • व्यवस्था से नाराजगी।
  • बेरोजगारी पर गुस्सा।
  • असमानता पर सवाल।
  • संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर बेचैनी।
  • और सत्ता से लगातार टकराने की इच्छा।

21 अगस्त 2026 को छात्र प्रदर्शन में घायल युवक के लिए दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर करीब घंटों धरने पर बैठना इसका ताजा उदाहरण है। उनके साथ प्रियंका गांधी भी थीं।

इसे कोई अराजकता कह सकता है। कोई राजनीतिक नौटंकी। लेकिन समर्थक इसे विपक्ष के सड़क पर उतरने की जिम्मेदारी कहेंगे। यही राहुल की राजनीति का नया चरित्र है—वे अब लड़ने से कतराते नहीं हैं।

लेकिन क्या वे अराजक हैं?

आक्रामक होना और अराजक होना एक बात नहीं। लोकतंत्र में विपक्ष का काम सत्ता से सवाल पूछना है। संसद में विरोध करना, सड़क पर उतरना और सरकार को चुनौती देना उसका अधिकार है।

समस्या तब शुरू होती है जब राजनीतिक विरोध और संस्थाओं पर अविश्वास के बीच की रेखा मिटने लगे। ‘वोट चोरी’ जैसे आरोप बेहद गंभीर हैं। इसलिए उनके साथ गंभीर प्रमाण भी जरूरी हैं।

राहुल की सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ा जोखिम एक ही है— वे अब पीछे हटने वाले नेता नहीं हैं।

जनता की नजर में राहुल : नेता नहीं, पहले भला आदमी?

शायद राहुल गांधी की छवि में सबसे बड़ा बदलाव यही है। एक समय जनता उन्हें केवल ‘गांधी परिवार के बेटे’ के रूप में देखती थी।

आज एक वर्ग उन्हें पहले भला इंसान, फिर नेता के रूप में देखने लगा है। यह बदलाव चुनावी जीत की गारंटी नहीं है।

लेकिन राजनीति में किसी नेता के प्रति ‘भला आदमी’ वाली धारणा महत्वपूर्ण होती है। भारतीय मतदाता नेता की नीतियों से असहमत हो सकता है, लेकिन अगर उसे लगता है कि आदमी नीयत से ठीक है, तो राजनीतिक रिश्ते की एक जमीन तैयार हो जाती है।

राहुल गांधी शायद इसी जमीन पर खड़े हैं। उनके आलोचक उनकी राजनीति को नकारात्मक मान सकते हैं। उनके विरोधी उनकी शैली को आक्रामक कह सकते हैं। 

लेकिन उनके समर्थक और बढ़ता युवा वर्ग उनमें एक ऐसा नेता देखता है जो कम से कम सुनता है, लोगों के बीच जाता है और सत्ता से सवाल पूछने में डरता नहीं।

सबसे आक्रामक नेता प्रतिपक्ष?

आज राहुल गांधी निश्चित रूप से भारत के सबसे मुखर और आक्रामक विपक्षी नेताओं में हैं।

वे संसद में लड़ते हैं। सड़क पर लड़ते हैं। चुनाव में लड़ते हैं। सरकार से लड़ते हैं।

और अब युवाओं के सवालों और हक के लिए भी सड़क पर उतरते हैं। लेकिन आक्रामकता अपने आप में नेतृत्व नहीं है। नेतृत्व तब साबित होगा जब वही गुस्सा नीति में बदले, विरोध विकल्प में बदले और आंदोलन शासन की क्षमता में।

पप्पूसे पॉलिटिकल चैलेंजरतक

‘पप्पू’ से ‘पॉलिटिकल चैलेंजर’ बनने की यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि शायद यही है कि उन्होंने अपने विरोधियों को भी अपनी राजनीति पर बात करने के लिए मजबूर किया है। राहुल गांधी की 15 साल की कहानी शायद तीन शब्दों में लिखी जा सकती है—

पप्पू → भला आदमी → पॉलिटिकल चैलेंजर।

पहला नाम उनके विरोधियों ने दिया। दूसरी छवि जनता के एक हिस्से ने बनाई। तीसरी पहचान राहुल गांधी खुद बनाने की कोशिश कर रहे हैं। और शायद यहीं उनके नाम का अर्थ फिर लौटता है।

राहुल—दुःखों पर विजय पाने वाला। यह दावा नहीं कि राहुल गांधी ने राजनीति जीत ली है।

अभी नहीं। लेकिन उन्होंने एक बात जरूर साबित की है— उपहास किसी नेता का अंतिम परिचय नहीं होता।
महात्मा गांधी को पीटरमारित्जबर्ग की एक ठंडी रात ने बदल दिया था। शायद राहुल को वर्षों के राजनीतिक उपहास ने। गांधीजी ने अपमान के बाद संघर्ष चुना। राहुल ने उपहास के बाद पुनर्निर्माण। दोनों की यात्रा समान नहीं है, इतिहास दोनों को एक तराजू में नहीं तौल सकता।

लेकिन एक सबक समान जरूर है— जिसे आप सार्वजनिक रूप से छोटा समझते हैं, वही कभी-कभी सबसे लंबी लड़ाई लड़ने की जिद लेकर खड़ा हो जाता है।

राहुल ने उपहास से सम्मान तक की दूरी तय कर ली है। अब सम्मान से विश्वास तक जाना बाकी है।  2029 में सवाल यह नहीं होगा कि राहुल गांधी नरेंद्र मोदी की सत्ता पर कितनी जोरदार चोट करते हैं।

सवाल होगा— क्या वे उस युवा भारत के विश्वसनीय विकल्प बन पाएंगे, जो नौकरी चाहता है, अवसर चाहता है, अपनी आवाज चाहता हैऔर साथ ही ऐसा नेता भी चाहता है जो सत्ता में बैठकर भी इंसान बना रहे?
क्योंकि सरकार गिराने के लिए जनता का आक्रोश काफी है। लेकिन सरकार चलाने के लिए नीति, क्षमता और विश्वास—तीनों चाहिए। और राहुल गांधी की अगली राजनीतिक लड़ाई इन्हीं तीन शब्दों की है।

डिजिटल पीडीएस से पारदर्शी हुआ राशन वितरण, योगी सरकार की पहल को मिली मजबूती

डिजिटल पीडीएस से पारदर्शी हुआ राशन वितरण, योगी सरकार की पहल को मिली मजबूती

CM Yogi in Pilibhit

Digital PDS UP: उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में योगी सरकार की डिजिटल पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है। राशन वितरण व्यवस्था में लाभार्थियों की पहचान से लेकर दुकान के स्टॉक और वितरण तक की जानकारी ऑनलाइन दर्ज होने से पूरी प्रक्रिया की निगरानी आसान हुई है। इससे फर्जी लाभार्थियों और काल्पनिक वितरण जैसी अनियमितताओं पर अंकुश लगाने में मदद भी मिली है।

 

सरकारी व्यवस्था के तहत लाभार्थी की पहचान और उसके हिस्से के राशन का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज किया जाता है। राशन की दुकानों के स्टॉक तथा वितरण की जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध रहती है। इससे संबंधित विभागीय अधिकारियों को वितरण व्यवस्था की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करने में सुविधा मिलती है।

ई-केवाईसी से लाभार्थियों का रिकॉर्ड हो रहा अपडेट 

पीडीएस व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए राशन कार्डों की ई-केवाईसी भी कराई जा रही है। आंकड़ों के अनुसार अब तक करीब 93.5 प्रतिशत राशन कार्डों की ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है। इससे लाभार्थियों के रिकॉर्ड को अपडेट करने और वास्तविक पात्र लोगों की पहचान सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है। ई-केवाईसी की प्रक्रिया के जरिए राशन कार्ड में दर्ज लाभार्थियों के विवरण को अधिक विश्वसनीय बनाया गया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी खाद्यान्न योजना का लाभ सही पात्र परिवारों तक पहुंचे और व्यवस्था में किसी तरह की अनियमितता की गुंजाइश कम हो।

99.99 प्रतिशत आधार फीडिंग, 99.98 प्रतिशत प्रमाणीकरण 

विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पीडीएस में 99.99 प्रतिशत आधार फीडिंग और 99.98 प्रतिशत आधार प्रमाणीकरण का लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। आधार आधारित पहचान व्यवस्था ने राशन वितरण में लाभार्थियों की पहचान को और मजबूत आधार दिया है। सरकार की ओर से लगातार डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। राशन वितरण में ऑनलाइन रिकॉर्ड, आधार आधारित प्रमाणीकरण और ई-केवाईसी जैसी व्यवस्थाएं इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। इन व्यवस्थाओं से न केवल पात्र लाभार्थियों तक खाद्यान्न पहुंचाने में मदद मिल रही है, बल्कि वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ी है।

पात्र लाभार्थियों तक पहुंच रहा पूरा हक 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाते हुए पात्र लाभार्थियों को उनके हिस्से का राशन उपलब्ध कराना है। डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन निगरानी से राशन दुकानों के संचालन पर भी नजर रखी जा सकती है।

योगी सरकार में अब छोटे उद्यमों को बड़ा बनाएगा ‘आईआईएम मॉडल’

योगी सरकार में अब छोटे उद्यमों को बड़ा बनाएगा 'आईआईएम मॉडल'

Yogi adityanath

UP Government IIM Lucknow: योगी सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण पर लगातार कार्य कर रही है। प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिला उद्यमियों को तकनीकी एवं व्यवसायिक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) के अंतर्गत इन्क्यूबेशन सेंटर के शुभारंभ के लिए हरी झंडी दे दी गई है। केंद्र सरकार की स्वीकृति के बाद यह सेंटर समूह की महिलाओं द्वारा संचालित एवं स्थापित उद्यमों को मजबूत करने, उनका विस्तार करने तथा बाजार से जोड़ने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगा।

बिजनेस प्लान, उत्पाद विकास, गुणवत्ता, ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग और मेंटरिंग उपलब्ध कराई जाएगी

इन्क्यूबेशन सेंटर को आईआईएम लखनऊ का तकनीकी सहयोग मिलेगा। इसके माध्यम से महिला उद्यमियों को बिजनेस प्लान, उत्पाद विकास, गुणवत्ता, ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग, वित्तीय प्रबंधन, डिजिटल तकनीक, बाजार संपर्क एवं उद्यम विस्तार जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ मार्गदर्शन और मेंटरिंग उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, संभावनाशील उद्यमों को विशेषज्ञों, वित्तीय संस्थानों एवं बाजार के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

व्यवसाय की जरूरतों के अनुरूप मिलेगा व्यवसायिक सहयोग

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि यह इन्क्यूबेशन सेंटर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को उद्यम की पहचान एवं स्थापना से लेकर उसके सुदृढ़ीकरण, विस्तार और बाजार तक पहुंच बनाने में सहयोग देगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिला उद्यमियों को केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रखते हुए उनके वास्तविक व्यवसाय की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी एवं व्यवसायिक सहयोग उपलब्ध कराना है।

इन्क्यूबेशन सेंटर निभाएगा तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका

मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अब केवल आजीविका गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बड़ी संख्या में अपने उद्यम स्थापित कर रही हैं। इन्क्यूबेशन सेंटर इन उद्यमों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन, विशेषज्ञ सहयोग और बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 

आईआईएम लखनऊ के सहयोग से ग्रामीण महिला उद्यमियों को अपने व्यवसाय को व्यवस्थित एवं विस्तार योग्य बनाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से गांव की समूह की महिलाओं के छोटे उद्यमों को मजबूत व्यवसाय में बदलने और उनकी आय एवं आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

 

भारत के पानी से पाकिस्‍तान में खौफ, कहा, पानी को हथियार बनाकर तबाही मचाएगा भारत, क्‍या है सिंधु जल संधि कनेक्‍शन?

भारत के पानी से पाकिस्‍तान में खौफ, कहा, पानी को हथियार बनाकर तबाही मचाएगा भारत, क्‍या है सिंधु जल संधि कनेक्‍शन?

Indus Waters Treaty

भारत के पानी से पाकिस्‍तान में खौफजदा है। चारों तरफ एक ही बात की चर्चा हो रही है कि भारत अपने पानी को पाकिस्‍तान के खिलाफ एक भयानक हथियार के तौर पर इस्‍तेमाल कर सकता है।

दरअसल, सिंधु जल संधि स्थगित होने के बाद पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने माना कि भारत जरूरत पड़ने पर पानी को 'हथियार' की तरह इस्तेमाल कर सकता है, जिससे पाकिस्तान की फसलों और जल सुरक्षा पर असर पड़ सकता है और वहां भारी नुकसान हो सकता है। कुल मिलाकर कई एक बार फिर से पाकिस्तान की बौखलाहट दुनिया के सामने आ गई है और वो भारत को लेकर इस तरह के बयान दे रहा है।

तबाही मचा सकता है भारत का पानी : बता दें कि हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अहसान इकबाल ने कहा, “सिंधु जल समझौता एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसे भारत ने एकतरफा तरीके से स्थगित कर दिया है। इससे हमारे सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है।

अब हमें इस बात का डर है कि भारत पानी को हथियार बनाकर हमारी फसलों के जरूरत के समय पानी रोक सकता है और जब हमें जरूरत न हो, तब पानी छोड़कर तबाही मचा सकता है” उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान अब जो नए बांध बना रहा है, वे भविष्य में इस खतरे के खिलाफ एक 'बफर' का काम करेंगे।

पानी की हर बूंद हमारी रेड लाइन : बता दें कि पाकिस्तान के मंत्री का यह बयान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की गीदड़भभकी के कुछ दिनों बाद आया है। शहबाज शरीफ ने कहा था, “पानी की एक-एक बूंद हमारी रेड लाइन है”। उन्होंने भारत से कहा कि अगर पाकिस्तान के पानी के अधिकार को छीनने की कोशिश की गई या देश की संप्रभुता पर कोई आंच आई, तो इसका 'करारा और सीधा जवाब' दिया जाएगा।

क्‍या है सिंधु जल संधि : पहलगाम में बीते 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। भारत और पाकिस्तान में साल 1960 में सिंधु जल संधि हुई थी। इसके तहत भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के पानी का बंटवारा किया गया है। इस संधि के निलंबित होने से पाकिस्तान के सामने जल संकट का खतरा मंडरा रहा है। पाकिस्तानी सरकार सिंधु संधि के मुद्दे को कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन में लेकर गई है तो सुरक्षा परिषद में भी उठाया है। पाकिस्तान की कोशिश है कि इस मुद्दे पर दुनिया से भारत के ऊपर दबाव बनवाया जाए। भारत ने अब तक यही रुख रखा है कि संधि को बहाल नहीं किया जाएगा। ऐसे में पाकिस्तान की ओर से लगातार इस मुद्दे पर भारत के खिलाफ बयानबाजी हो रही है।

क्‍या है भारत का रुख : दूसरी तरफ भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन बंद नहीं करता तब तक संधि बहाल नहीं होगी। पाकिस्तान इसे एकतरफा और गैरकानूनी कदम बताता रहा है। इकबाल के बयान से साफ है कि इस्लामाबाद पानी की आपूर्ति को लेकर चिंतित है, क्योंकि कृषि और अर्थव्यवस्था काफी हद तक इन नदियों पर निर्भर है।

पीएम पोषण रसोइयों को सम्मानित करेंगे सीएम योगी, देंगे कैशलेस चिकित्सा कार्ड

पीएम पोषण रसोइयों को सम्मानित करेंगे सीएम योगी, देंगे कैशलेस चिकित्सा कार्ड

CM Yogi Adityanath

CM Yogi Adityanath: जो हाथ हर दिन विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार कर उनके पोषण और स्वास्थ्य को मजबूती देते हैं, योगी सरकार अब उन्हीं हाथों के श्रम को सम्मान के साथ सुविधा देने जा रही है। पीएम पोषण योजना से जुड़े रसोइयों के योगदान को केंद्र में रखते हुए 23 अगस्त को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ के जुपिटर सभागार में सम्मान समारोह एवं कैशलेस चिकित्सा कार्ड वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में प्रस्तावित इस कार्यक्रम में उनके हाथों मंच पर 11 रसोइयों को सम्मानित किया जाएगा, जबकि प्रदेशभर से 1500 रसोइयों की सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। खास बात यह है कि इसी दिन जनपद एवं तहसील स्तर पर भी जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में रसोइया सम्मान समारोह आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रदेशभर में रसोइयों के सम्मान का संदेश एक साथ पहुंचेगा। 

 

महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी के निर्देशों के अंतर्गत संबंधित अधिकारियों को कार्यक्रम की सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध ढंग से पूरी करने और आपसी समन्वय से आयोजन को सफल बनाने के निर्देश दिए गए हैं। यह पहल पीएम पोषण योजना को जमीन पर प्रभावी ढंग से पहुंचाने वाले रसोइयों के योगदान को सार्वजनिक पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सम्मान के केंद्र में होंगे पीएम पोषण के रसोइए

कार्यक्रम में प्रदेश के राजकीय, परिषदीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कम्पोजिट विद्यालयों में पीएम पोषण योजना के अंतर्गत कार्यरत रसोइयों की सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाले इन रसोइयों को सम्मान देने के लिए राज्य से लेकर स्थानीय स्तर तक व्यापक तैयारियां की गई हैं।

23 अगस्त को जनपद और तहसील स्तर पर भी आयोजन

राज्य स्तरीय कार्यक्रम के साथ 23 अगस्त को जनपद एवं तहसील स्तर पर भी रसोइया सम्मान समारोह आयोजित किए जाएंगे। इनमें सांसद, मंत्री, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष और अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन को उपलब्ध सभागारों का उपयोग करते हुए कार्यक्रम आयोजित करने तथा रसोइयों के सम्मान की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

मुख्यमंत्री के हाथों 11 रसोइयों का सम्मान

राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों मंच पर 11 रसोइयों को सम्मानित किया जाएगा। प्रदेश के विभिन्न जनपदों से 1500 रसोइयों को कार्यक्रम में सहभागी बनाया जाएगा। उनके आवागमन, आमंत्रण, स्वागत, जलपान एवं भोजन सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए संबंधित अधिकारियों को दायित्व सौंपे गए हैं।

सम्मान के साथ सुविधा और सुरक्षा पर जोर

रसोइयों को कैशलेस कार्ड उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ बैंक और यूपीआई क्यूआर कोड से संबंधित व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जाएंगी। भोजन तैयार करने के दौरान स्वच्छता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हेड कवर, ग्लव्स एवं एप्रन किट उपलब्ध कराने की तैयारी है।

पीएम पोषण की उपलब्धियां भी होंगी प्रदर्शित

राज्य स्तरीय कार्यक्रम में पीएम पोषण योजना की उपलब्धियों और रसोइयों के योगदान पर आधारित लघु फिल्म प्रदर्शित की जाएगी। योजना की उपलब्धियों पर आधारित बुकलेट, पोस्टर और फ्लेक्स के माध्यम से भी पीएम पोषण की उपलब्धियों को सामने लाया जाएगा। इससे बच्चों को मिलने वाले पोषण तथा योजना को जमीन पर लागू करने में रसोइयों की भूमिका को सार्वजनिक पहचान मिलेगी।

क्या कहते हैं बेसिक शिक्षा मंत्री? 

यूपी के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह का कहना है कि पीएम पोषण रसोइए बच्चों के पोषण और स्वस्थ भविष्य की आधारशिला हैं। माननीय मुख्यमंत्री जी के हाथों मंच पर 11 रसोइयों को सम्मानित किया जाएगा। योगी सरकार उनके सम्मान, सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।