UP-Japan Investment Meet 2026: लखनऊ में दिखी स्वदेशी तकनीक की ताकत, तेजस्वान ड्रोन से दिव्यास्त्र तक छाए अत्याधुनिक उत्पाद

UP-Japan Investment Meet 2026: लखनऊ में दिखी स्वदेशी तकनीक की ताकत, तेजस्वान ड्रोन से दिव्यास्त्र तक छाए अत्याधुनिक उत्पाद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टॉल पर पहुंचकर प्रदर्शित उत्पादों और उनकी तकनीक की जानकारी ली। प्रदर्शनी में आधुनिक तकनीक के साथ स्वदेशी उत्पादों की क्षमता भी देखने को मिली। एयरोस्पेस, डिफेंस, कृषि और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र से जुड़े अत्याधुनिक उत्पादों ने खासा आकर्षण बटोरा। आईआईटी कानपुर से इनक्यूबेटेड स्टार्टअप मराल एयरोस्पेस का तेजस्वान ड्रोन प्रमुख आकर्षण रहा। इसके अलावा एस्कॉर्ट्स कुबोटा के कृषि उपकरण, होवेरिट का दिव्यास्त्र एमके-1 तथा एमकेयू के बैलेस्टिक हेलमेट और सुरक्षा उपकरणों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। मुख्यमंत्री ने इन उत्पादों की तकनीकी विशेषताओं और उपयोगिता के बारे में जानकारी ली।

 

12 घंटे तक आसमान में रह सकेगा तेजस्वान

 

प्रदर्शनी में सबसे ज्यादा चर्चा मराल एयरोस्पेस के स्वदेशी फिक्स्ड-विंग यूएवी तेजस्वान की रही। मराल एयरोस्पेस के फाउंडर विवेक कुमार पांडेय ने बताया कि कंपनी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी कानपुर) में इनक्यूबेट हुआ डीप-टेक एयरोस्पेस स्टार्टअप है। कंपनी रक्षा, सुरक्षा और वाणिज्यिक क्षेत्रों के लिए स्वदेशी डिजाइन वाले लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम मानवरहित हवाई प्रणालियां विकसित कर रही है। कंपनी के प्रमुख प्लेटफॉर्म तेजस्वान को लंबे समय तक आसमान में बने रहने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। यह करीब 12 घंटे तक लगातार उड़ान भरने में सक्षम है। साथ ही समुद्र तल से करीब 6000 मीटर की ऊंचाई तक संचालन के लिए डिजाइन किया जा रहा है। इसमें 5 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने और करीब 120 से 150 किलोमीटर की एकतरफा रेंज प्रस्तावित है। कंपनी के मुताबिक, रात में भी यह करीब चार घंटे तक उड़ान भरने में सक्षम होगा। तेजस्वान में उच्च दक्षता वाले सोलर सेल, हल्की कंपोजिट संरचना, अधिक ऊर्जा घनत्व वाली बैटरियां, स्वायत्त उड़ान प्रणाली और सुरक्षा के लिए रिडंडेंट सिस्टम जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इसकी उपयोगिता खुफिया, निगरानी एवं टोही (आईएसआ), सीमा निगरानी, आपदा प्रबंधन, संचार रिले और बुनियादी ढांचे के निरीक्षण जैसे क्षेत्रों में बताई गई है।

 

90 दिन तक आसमान में रहने वाले एचएपीएस पर भी काम

 

मराल एयरोस्पेस केवल तेजस्वान तक सीमित नहीं है। कंपनी हाई-एल्टीट्यूड स्यूडो-सैटेलाइट यानी एचएपीएस प्लेटफॉर्म पर भी काम कर रही है। इसे करीब 90 दिनों तक लगातार संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है। ऐसे प्लेटफॉर्म लंबे समय तक ऊंचाई पर रहकर निगरानी, संचार और अन्य रणनीतिक जरूरतों में उपयोगी हो सकते हैं।

 

प्रदर्शनी में 27 लाख का कंबाइन हार्वेस्टर से लेकर 6 लाख का कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर रहा आकर्षण का केंद्र

 

प्रदर्शनी में एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड कंपनी के कृषि और कंस्ट्रक्शन उपकरण भी आकर्षण का केंद्र रहे। कंपनी के एग्री सॉल्यूशन प्रोडक्ट मैनेजर आतसुया ओता ने बताया कि कंपनी ने उत्तर प्रदेश में करीब 154 एकड़ जमीन 90 साल की लीज पर ली है। यहां आने वाले सात वर्षों में ट्रैक्टर, कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट और पार्ट्स सेंटर विकसित करने की योजना है। कंपनी की ओर से इस परियोजना में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की तैयारी है।

 

प्रदर्शनी में कंपनी की ओर से कंबाइन हार्वेस्टर, राइस ट्रांसप्लांटर, कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर और डीजल जेनसेट लगाए गए थे। कंबाइन हार्वेस्टर की बिक्री के मामले में वह देश में दूसरे स्थान पर है, जबकि राइस ट्रांसप्लांटर की बिक्री में नंबर वन है। कंपनी के प्रदर्शित उत्पादों में कंबाइन हार्वेस्टर की कीमत करीब 27 लाख रुपये, राइस ट्रांसप्लांटर की करीब 14 लाख रुपये, कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर की करीब 6 लाख रुपये और डीजल जेनसेट की कीमत करीब 7 लाख रुपये है। कंपनी भारत में कंस्ट्रक्शन क्षेत्र के लिए क्रेन, बैकहो लोडर और ट्रैक्टर जैसे उपकरणों का निर्माण कर रही है, जबकि कंबाइन हार्वेस्टर और राइस ट्रांसप्लांटर का आयात किया जाता है। कंपनी कृषि और निर्माण क्षेत्र के लिए मशीनरी और उपकरण तैयार करती है।

 

400-500 किलोमीटर रेंज वाला दिव्यास्त्र एमके वन भी प्रदर्शनी में

 

डिफेंस टेक्नोलॉजी की झलक होवेरिट प्राइवेट लिमिटेड के दिव्यास्त्र एमके वन में भी देखने को मिली। कंपनी के फ्लाइट टेस्टिंग इंजीनियर लारिब ने बताया कि दिव्यास्त्र एमके वन एक लोइटरिंग म्यूनिशन/आत्मघाती ड्रोन प्लेटफॉर्म है, जिसे लक्षित स्थान तक पहुंचकर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है। लारिब ने बताया कि इसकी प्रस्तावित रेंज 400 से 500 किलोमीटर तक है और यह करीब 800 से 1,000 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है। इसकी लगातार उड़ान क्षमता करीब 5 घंटे है। इसमें थर्मल इमेजिंग कैमरा लगाया गया है और यह आईसी इंजन से संचालित होता है। इसका मई 2026 में भारतीय सेना द्वारा सफल परीक्षण किया गया था। दिव्यास्त्र एमके वन करीब 20 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने में सक्षम है और लोड के साथ इसका कुल वजन करीब 40 किलोग्राम है। इसकी गति करीब 250 से 350 किलोमीटर प्रति घंटा है। कंपनी इसे मेड इन इंडिया प्लेटफॉर्म के तौर पर विकसित कर रही है। होवेरिट कंपनी यूपी डिफेंस कॉरिडोर के तहत काम कर रही है। दिव्यास्त्र का नया एमके-3 वेरिएंट जेट इंजन से संचालित होगा और इसका कानपुर में परीक्षण किया जा चुका है।

 

कारगिल से आधुनिक बैलेस्टिक सुरक्षा तक पहुंचा एमकेयू

 

प्रदर्शनी में सैनिकों की सुरक्षा से जुड़े उपकरणों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। दशकों पुरानी एमकेयू लिमिटेड ने बैलेस्टिक हेलमेट, बैलेस्टिक जैकेट, नाइट विजन बाइनोक्युलर और थर्मल वेपन साइट जैसे उत्पाद प्रदर्शित किए। कंपनी के सीनियर सेल्स मैनेजर सोहम सेठ ने बताया कि कंपनी ने कारगिल युद्ध के दौरान जूतों की आपूर्ति की थी। इसके बाद कंपनी ने बैलेस्टिक हेलमेट और बैलेस्टिक जैकेट के क्षेत्र में विस्तार किया। आज कंपनी भारत में सुरक्षा उपकरणों के निर्माण के क्षेत्र में काम कर रही है।

 

सीनियर सेल्स मैनेजर ने बताया कि उसके उत्पाद करीब 90 देशों तक पहुंच रहे हैं। प्रदर्शनी में सैनिकों और सुरक्षा बलों के लिए आधुनिक बैलेस्टिक सुरक्षा उपकरणों के साथ-साथ कम रोशनी और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निगरानी एवं लक्ष्य पहचान में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया है।

काशी पहुंचा 109 सदस्यीय जापानी प्रतिनिधिमंडल, निवेश से संस्कृति तक बढ़ेगा भारत-जापान सहयोग

काशी पहुंचा 109 सदस्यीय जापानी प्रतिनिधिमंडल, निवेश से संस्कृति तक बढ़ेगा भारत-जापान सहयोग

jappan

जापान की ‘उगते सूरज की धरती’ और काशी की आध्यात्मिक सुबह अब भारत-जापान के सदियों पुराने मैत्रीपूर्ण संबंधों को औद्योगिक सहयोग की नई ऊंचाई देने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। योगी सरकार  उत्तर प्रदेश में विदेशी निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारत की संस्कृति, धर्म और कला तथा काशी की समृद्ध विरासत को वैश्विक मंच पर पहुंचाने के प्रयास कर रही है।
 

आज (22 अगस्त) करीब 109 सदस्यीय उच्चस्तरीय जापानी प्रतिनिधिमंडल दो दिवसीय दौरे पर धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी पहुंचेगा। जापान के यामानाशी प्रिफेक्चर के माननीय गवर्नर के नेतृत्व में आ रहे इस प्रतिनिधिमंडल में जापान की प्रमुख कंपनियों के कई वरिष्ठ अधिकारी और सीईओ शामिल होंगे। प्रतिनिधिमंडल के वाराणसी दौरे से उत्तर प्रदेश में निवेश के नए अवसरों को बढ़ावा मिलने के साथ ही पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

 

जापानी प्रतिनिधिमंडल भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ का भ्रमण करेगा, विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती और काशी की कला-संस्कृति से रूबरू होगा। इस दौरान मेहमानों को काशी की सदियों पुरानी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और हस्तशिल्प परंपरा की झलक भी देखने को मिलेगी।

 

सारनाथ का भ्रमण और गंगा आरती देखेगा जापानी दल

22 अगस्त को दोपहर में वाराणसी पहुंचने के बाद जापानी प्रतिनिधिमंडल  हाल ही में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुई तथागत की तपोस्थली सारनाथ का भ्रमण करेगा । इसके बाद दल नमो घाट पर गंगा आरती का अद्भुत दृश्य देखेगा। शाम को ताज होटल में डिनर के दौरान प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भारतीय संस्कृति, कला और हस्तशिल्प से परिचित होंगे।23 अगस्त को  प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख सदस्यों में से कुछ लोग श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करेंगे, जबकि अन्य सदस्य एयरपोर्ट के लिए रवाना होंगे।

 

निवेश और औद्योगिक सहयोग पर रहेगा जोर

उत्तर प्रदेश मजबूत कानून-व्यवस्था, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, सरल औद्योगिक नीतियों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जापानी प्रतिनिधिमंडल के दौरे का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में निवेश एवं औद्योगिक सहयोग को प्रोत्साहित करना तथा हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, अवसंरचना, पर्यटन और मानव संसाधन विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को तलाशना है।

यह दौरा उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के साथ ही भारत-जापान, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और यामानाशी प्रिफेक्चर के बीच औद्योगिक सहयोग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, कौशल विकास और मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

 

जीआई और ओडीओपी उत्पादों के लगेंगे स्टॉल, दिखेगी काशी की सांस्कृतिक विरासत

जापानी मेहमानों को काशी की सदियों पुरानी हस्तशिल्प परंपरा से परिचित कराने के लिए वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) और जीआई उत्पादों के स्टॉल लगाए जाएंगे। इनमें काशी की प्रसिद्ध गुलाबी मीनाकारी, सॉफ्ट स्टोन कार्विंग , वुडन लैकरवेयर एंड टॉयज (लकड़ी के खिलौने ) और बनारसी सिल्क साड़ी समेत अन्य स्थानीय हस्तशिल्प उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे।

 

इसके साथ ही मेहमानों के लिए भारतीय संगीत और नृत्य की सांस्कृतिक प्रस्तुति भी होगी। कार्यक्रम में कथक, लोकनृत्य और वाद्य-वृंद के माध्यम से भारत और काशी की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की झलक प्रस्तुत की जाएगी। इस तरह जापानी प्रतिनिधिमंडल का काशी दौरा सिर्फ निवेश और औद्योगिक सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गंगा की आध्यात्मिक धारा, सारनाथ की बौद्ध विरासत और काशी की कला-संस्कृति के माध्यम से भारत-जापान के रिश्तों को एक नया सांस्कृतिक आयाम भी देगा।

मुख्यमंत्री धामी का बड़ा ऐलान, देहरादून के 13 गांवों में खुलेगा मार्केटिंग सेंटर; लखपति दीदियों को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री धामी का बड़ा ऐलान, देहरादून के 13 गांवों में खुलेगा मार्केटिंग सेंटर; लखपति दीदियों को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में “मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना” के अंतर्गत  चौपाल – 2026 का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश में  13 हजार से अधिक उद्यमियों को सहयोग दिया जा चुका है। साथ ही 8 हजार से अधिक महिला उद्यमियों एवं स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को उद्यमिता और आजीविका के अवसरों से जोड़ा गया है।

उद्घाटन सत्र में उन्होंने देहरादून के आईटी पार्क स्थित 13 गांव में प्रदेश के समस्त जनपदों के स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद विपणण के लिए राज्य स्तरीय विपणन केंद्र खोलने की घोषणा की है।

 

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हमारे गांव प्रदेश के विकास में सहभागी ही नहीं बन रहे हैं, बल्कि अपने सामर्थ्य और परिश्रम के बल पर आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने  कहा कि प्रदेश के उत्साही युवाओं, साहसी मातृशक्ति में कुछ कर गुजरने की इच्छा और हुनर है, इसी तरह प्रदेश के स्थानीय उत्पादों में देश-दुनिया के बाजार तक पहुंचने की पूरी क्षमता है। जरूरत केवल इस बात कि है कि हुनर को सही दिशा मिले। इसी सोच के साथ प्रदेश सरकार ने “मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना” को आगे बढ़ाने का काम किया है। योजना के जरिए सरकार का प्रयास है कि उत्तराखण्ड का युवा रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बने। साथ ही किसानों और महिलाओं की आर्थिक स्थित मजबूत हो। “मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना” इसी सोच को धरातल पर उतारने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

 

उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से ग्रामीण उद्यमियों को अपना व्यवसाय शुरू करने और आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण, आर्थिक सहयोग, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जुड़ने में मदद दी जा रही है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जहां एक ओर प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से 5 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं को 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जा चुका है। वहीं, 3 लाख से अधिक बहने लखपति दीदी बनने में सफल रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की मातृशक्ति पहाड़ी मसालों से लेकर मंडुवा, झंगोरा, दालों, शहद, अचार, जैम, हस्तशिल्प, ऊनी उत्पादों और स्थानीय कला तक को व्यवसाय का रूप दे रही हैं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि कहा कि सरकार गांव के उत्पादों को देश के बड़े शहरों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है। इसी दिशा में काम करते हुए हाउस ऑफ हिमालयाज नामक अंब्रेला ब्रांड तैयार किया गया है।

 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने हमें वोकल फॉर लोकल, लोकल टू ग्लोबल और आत्मनिर्भर भारत जैसे मंत्र दिए हैं। प्रदेश सरकार इसे धरातल पर उतारने के लिए प्रयासरत है। सरकार चाहती है कि जब कोई व्यक्ति उत्तराखण्ड का उत्पाद खरीदे, तो उसे उस उत्पाद में पहाड़ की मेहनत, संस्कृति, परंपरा और मिट्टी की खुशबू भी महसूस हो।

 

इसीलिए आज प्रदेश में ग्रामीण हाट, विपणन केंद्र, कलेक्शन सेंटर और एग्री सर्विस सेंटर जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है, ताकि किसान और उद्यमी को अपने उत्पाद के लिए बेहतर बाजार और बेहतर मूल्य मिल सके।

 

उन्होंने कहा कि ग्रामीण उद्यमिता का एक बड़ा उद्देश्य पलायन को रोकना भी है। सरकार चाहती है कि युवा रोजगार की तलाश में अपने गांव को छोड़ने के लिए मजबूर न हों। क्योंकि गांव मजबूत होगा तो उत्तराखण्ड मजबूत होगा।

 

इस दिशा में कार्य करते हुए सरकार “ग्रामोत्थान परियोजना” (रीप) के माध्यम से भी गांव के अति-निर्धन परिवारों को आजीविका से जोड़कर गांवों में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने का कार्य कर रही है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी 13 जनपदों में “मुख्यमंत्री उद्यमशाला चौपाल” आयोजित की जा रही हैं। इन चौपालों का उद्देश्य है कि सरकारी योजनाओं के बारे में अधिक से अधिक लोग जान सकें और उनका फायदा उठा सकें। इसी उद्देश्य से प्रचार वैन को भी गांव-गांव तक भेजा जा रहा है, ताकि मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

 

आयोजन के दौरान मुख्यमंत्री ने लखपति दीदी और महिला उद्यमियों को भी सम्मानित किया। साथ ही उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत तैयार की गई पुस्तक, वार्षिक रिपोर्ट का भी विमोचन किया। साथ ही एकीकृत कृषि कलस्टर आधारभूत प्रशिक्षण एवं मॉड्यूल और शिशु एवं लघु बाल आहार मॉड्यूल के साथ ही महिलाओं एचं बच्चों में एनीमिया की रोकथाम एवं प्रबंधन मॉडयूल का भी लोकार्पण किया। 

 

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री भरत चौधरी, श्री गणेश जोशी, श्री खजान दास, राज्यसभा सांसद श्री नरेश बंसल, विधायक श्री उमेश शर्मा काऊ, श्रीमती सविता कपूर,  सचिव ग्राम्य विकास श्री धीराज गर्ब्याल एवं   संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

यूपी में कनिष्ठ सहायक भर्ती का रिजल्ट जारी, 50 अभ्यर्थियों का चयन; जानें किस वर्ग की कितनी रही कटऑफ

यूपी में कनिष्ठ सहायक भर्ती का रिजल्ट जारी, 50 अभ्यर्थियों का चयन; जानें किस वर्ग की कितनी रही कटऑफ

exam

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) ने औद्योगिक विकास विभाग में कनिष्ठ सहायक के पदों पर भर्ती का चयन परिणाम जारी कर दिया है। शुक्रवार को कनिष्ठ सहायक मुख्य परीक्षा के आधार पर घोषित परिणाम में 50 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित नियमों, मेरिट और आरक्षण प्रावधानों का पालन किया गया है। इससे प्रदेश में योगी सरकार की पारदर्शी और मेरिट आधारित भर्ती व्यवस्था को एक और मजबूती मिली है।

 

आयोग के अनुसार, प्रारंभ में कनिष्ठ सहायक के 62 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। विभाग से प्राप्त संशोधित अधियाचन के बाद पदों की संख्या घटाकर 54 कर दी गई। संशोधित पदों के आधार पर आयोग ने चयन प्रक्रिया पूरी करते हुए 50 अभ्यर्थियों का अंतिम चयन किया है।

 

आरक्षण नियमों के अनुरूप हुआ चयन

 

अंतिम चयनित 50 अभ्यर्थियों में 34 अनारक्षित, 3 अनुसूचित जाति, 1 अनुसूचित जनजाति, 7 अन्य पिछड़ा वर्ग और 5 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थी शामिल हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि क्षैतिज आरक्षण के तहत उपलब्ध अभ्यर्थियों को उनकी मूल श्रेणी में समायोजित किया गया है। महिला, दिव्यांगजन सहित अन्य क्षैतिज आरक्षण श्रेणियों में भी नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई गई। कुछ श्रेणियों में निर्धारित पदों के सापेक्ष पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने पर नियमों के अनुसार पदों को आगे बढ़ाते हुए अन्य पात्र अभ्यर्थियों का चयन किया गया।

 

कटऑफ जारी, चयन का आधार स्पष्ट

 

आयोग ने अंतिम परिणाम के साथ श्रेणीवार कटऑफ भी जारी की है। अनारक्षित वर्ग में चयनित अभ्यर्थी की कटऑफ 65 अंक रही। अनुसूचित जाति की कटऑफ 26.75, अनुसूचित जनजाति की 50, ओबीसी की 62.50 और ईडब्ल्यूएस की कटऑफ 63.75 अंक रही। क्षैतिज आरक्षण में दिव्यांगजन की एएसडी/एचएच/डीई/ओएच श्रेणी की कटऑफ 54.75 और दिव्यांगजन की अन्य श्रेणी की कटऑफ 44.25 अंक रही। महिला अभ्यर्थियों की कटऑफ 42 अंक दर्ज की गई।

‘हिंदू गौरव दिवस’ कार्यक्रम में शामिल हुए सीएम योगी, पूर्व सीएम कल्याण सिंह की 5वीं पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि

‘हिंदू गौरव दिवस’ कार्यक्रम में शामिल हुए सीएम योगी, पूर्व सीएम कल्याण सिंह की 5वीं पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि

Kalyan Singh death anniversary

Kalyan Singh death anniversary: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले पार्टी के लोग पीडीए को कैसे परिभाषित करते हैं, कभी इनका पी पिछड़ा था, फिर पंडित हो गया। देखना एक दिन ये लोग पी से पाकिस्तान कर देंगे। इनके बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। ये कब क्या बोलेंगे, कोई भरोसा नहीं। ये ऐसे गिद्ध हैं कि जिस पेड़ पर चढ़ेंगे, उसको ही सुखा डालेंगे। सबसे कष्टकारी बात यह थी कि सामान्य शिष्टाचार व संस्कार के तहत मायावती ने आकर बाबूजी को श्रद्धांजलि दी, लेकिन सपा मुखिया ने प्रत्यक्ष आकर श्रद्धांजलि देना तो दूर, शब्दों से भी कुछ व्यक्त नहीं किया। यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण, कितना शर्मनाक है। यह हर उस हिंदू का अपमान था, जिसे लगता है कि बाबूजी का जीवन सनातन मूल्यों और हिंदू गौरव के लिए समर्पित था।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में पूर्व मुख्यमंत्री पद्म विभूषण कल्याण सिंह की पांचवीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित ‘हिंदू गौरव दिवस’ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजस्थान-हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे पद्म विभूषण कल्याण सिंह ‘बाबूजी’ की पांचवीं पुण्यतिथि पर उनके चित्र पर पुष्पार्चन कर अपनी श्रद्धांजलि दी।

‘कल्याण सिंह टूट सकता है, लेकिन झुक नहीं सकता’

श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबूजी दबाव में आकर काम करने वाले व्यक्ति नहीं थे। वह कहा करते थे, कल्याण सिंह टूट सकता है लेकिन झुक नहीं सकता। बाबूजी ने जीवनभर अपने इस वचन को निभाया। जन्मभूमि आंदोलन के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा था कि संघर्ष स्वीकार्य है, सत्ता दूर हो जाए यह भी स्वीकार है, लेकिन अपने प्रभु श्रीराम का अपमान स्वीकार्य नहीं।

आज जब हम लोग अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण और रामलला का विराजमान होना देखते हैं तो बाबूजी की स्मृति सहसा अंतःकरण में उठती है। संतों के संघर्ष, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मार्गदर्शन और विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में चले राम जन्मभूमि आंदोलन का कल्याण सिंह जी ने खुलकर समर्थन किया। उन्होंने सत्ता गंवाई, लेकिन दो-टूक कहा कि रामभक्तों पर गोली नहीं चलेगी।

समाजवादी पार्टी पर महापुरुषों के नाम हटाने का आरोप

सीएम योगी ने कहा कि बाबूजी ने मूल्यों के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, यही उनकी पहचान थी। सपा नेतृत्व ने सिर्फ बाबूजी के निधन के समय अपमान नहीं किया, महापुरुषों का अपमान उसकी आदत है। कन्नौज से समाजवादी पार्टी का रिश्ता रहा है, लेकिन वहां डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर बने सरकारी मेडिकल कॉलेज से सपा मुखिया ने बाबा साहेब का नाम हटा दिया। हमारी सरकार में इसे फिर से बाबा साहेब के नाम पर किया गया। मैनपुरी में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर एक कॉलेज बना था, लेकिन सपा ने उनका नाम भी मिटा दिया। भाजपा सरकार ने औरैया में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर नए मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया।

भारत के सनातन मूल्य एवं आदर्श सर्वोपरि

सीएम योगी ने कहा कि श्रद्धेय कल्याण सिंह का जीवन हर उस भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है, जिसके लिए देश प्रथम है। भारत के सनातन मूल्य एवं आदर्श सर्वोपरि हैं। आज का दिन हम सभी के लिए हिंदू गौरव दिवस के रूप में श्रद्धेय बाबूजी की स्मृतियों को प्रेरणा के रूप में आत्मसात करने का दिन है। बड़ा आदमी पद से बड़ा नहीं होता है, वह अपनी सोच से, अपने कर्मों से बड़ा होता है और महान होता है। अतरौली के सामान्य किसान परिवार में जन्म लेने वाले कल्याण सिंह जी अपनी कर्मठता, मूल्यों और सिद्धांतों के प्रति अडिग रहने की भावना तथा देश के प्रति समर्पण के कारण आगे बढ़े।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पाठशाला में तपे स्वयंसेवक के रूप में कल्याण सिंह जी ने किसान, शिक्षक, विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और राज्यपाल के रूप में सभी महत्वपूर्ण संवैधानिक दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया। बाबूजी का जीवन सादगी, तप, साधना और संघर्ष से भरा हुआ था। वह अन्याय के खिलाफ लड़ने और अत्याचार का मुकाबला करने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने सनातन मूल्यों की रक्षा करते हुए गांव के गरीबों, अन्नदाता किसानों, युवाओं और समाज के प्रत्येक तबके के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया।

पीएम मोदी जी कार्यक्रम छोड़कर श्रद्धांजलि अर्पित करने आए

मुख्यमंत्री ने श्रद्धेय कल्याण सिंह के निधन के बाद समाजवादी पार्टी के रवैये को लेकर सपा नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बाबूजी भाजपा के नेता थे और सभी के लिए प्रेरणास्रोत थे। उनके निधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी सारे कार्यक्रम छोड़कर दिल्ली से सीधे लखनऊ आए और श्रद्धांजलि अर्पित की। एसजीपीजीआई से लेकर घर तक, घर से अलीगढ़ और अलीगढ़ से नरौरा तक अंतिम संस्कार में वह और उनके कैबिनेट के सभी सदस्य शामिल हुए। लेकिन, सपा मुखिया ने इसमें शामिल होना तो दूर, मुंह से श्रृद्धांजलि के दो शब्द नहीं बोले।

बाबूजी ने यूपी को दी पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबूजी ने उत्तर प्रदेश को एक पहचान दी। उन्होंने युवाओं के सामने पहचान का संकट पैदा करने वाली राजनीति के खिलाफ बेहतर माहौल देने का काम किया। युवाओं के लिए नई सोच और नया मंत्र दिया। आज उत्तर प्रदेश के पहले कैंसर संस्थान में बाबूजी की दिव्य प्रतिमा और उनके नामकरण को देखा जा सकता है। बुलंदशहर में डबल इंजन की भाजपा सरकार द्वारा बनाए गए राजकीय मेडिकल कॉलेज का नामकरण भी बाबूजी के नाम पर किया गया है।

श्रद्धेय कल्याण सिंह ने सनातन मूल्यों की रक्षा करते हुए अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर गुलामी के ढांचे को पूरी तरह समाप्त करके श्रीराम मंदिर का मार्ग प्रशस्त किया। ऐसे बाबूजी के प्रति श्रद्धावान होना सनातन धर्मावलंबियों का दायित्व है। बाबूजी की स्मृतियों को जीवित रखने और इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए सभी को काम करना होगा। उन्होंने राजवीर सिंह ‘राजू भैया’ और संदीप सिंह का भी धन्यवाद दिया कि वे इस परंपरा को लगातार जीवित रखने और आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

 

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, सांसद साक्षी महाराज, राज्यसभा सांसद बृजलाल, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, श्रद्धेय कल्याण सिंह के सुपौत्र व मंत्री संदीप सिंह, मंत्री राकेश सचान, मंत्री असीम अरुण, मंत्री जेपीएस राठौर, बाबूजी के पुत्र व पूर्व सांसद राजवीर सिंह 'राजू भैया', मंत्री रजनी तिवारी, मंत्री डॉ. संजय निषाद, मंत्री डॉ. अरुण सक्सेना, मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु, मंत्री धर्मवीर प्रजापति, भाजपा उपाध्यक्ष डॉ. नीरज सिंह, विधायक राजेश्वर सिंह, विधायक योगेश शुक्ला आदि मौजूद रहे।

4 साल से अधूरी सड़क के लिए कीचड़ में बैठे पार्षद और रहवासी, विरोध के बाद जागा इंदौर नगर निगम

4 साल से अधूरी सड़क के लिए कीचड़ में बैठे पार्षद और रहवासी, विरोध के बाद जागा इंदौर नगर निगम

road

देशभर में आजकल एक नया चलन चल रहा है, जब तक आंदोलन न किया जाए या विरोध नहीं किया जाए, सरकारें और प्रशासन काम ही नहीं कर रहा है। अब हर समस्‍या के लिए लोगों को सड़क पर उतरना पड़ रहा है। हाल ही में इंदौर में ऐसा ही कुछ नागरिकों को करना पड़ा।

इंदौर के वार्ड 75 स्थित भावना नगर-पालदा नाका क्षेत्र में सड़क की बदहाली से परेशान पार्षद और रहवासियों ने नगर निगम के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन किया। सड़क निर्माण नहीं होने से नाराज पार्षद कुणाल सोलंकी रहवासियों के साथ सड़क पर जमा कीचड़ में ही बैठ गए और धरना दिया। उन्होंने सड़क निर्माण की मांग की।

रहवासियों का कहना है कि यह सड़क लंबे समय से खराब है। बारिश होते ही पूरा रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है। इससे पैदल राहगीरों के साथ दोपहिया वाहन चालकों को भी परेशानी होती है। कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। हालांकि रहवासी और पार्षद द्वारा प्रदर्शन के बाद नगर निगम ने सड़क का काम शुरू कर दिया गया है जिसके बाद धरना-प्रदर्शन खत्म किया गया।

पार्षद कुणाल सोलंकी ने नगर निगम कमिश्नर और एडिशनल कमिश्नर से मुलाकात कर समस्या का समाधान करने की मांग की। उन्होंने बताया कि सड़क का काम करीब चार साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका है। यह सड़क वार्ड 75 और 77 के बीच आती है। अधूरे निर्माण के कारण आसपास के रहवासियों को लंबे समय से परेशानी उठानी पड़ रही है।

बता दें कि इंदौर में कई जगह खुदाई का काम चल रहा है। कहीं लोग खराब सड़कों से परेशान हैं तो कहीं गड्डों से परेशान हैं। बारिश का मौसम होने की वजह से दिक्‍कतें और ज्‍यादा बढ गई हैं, लेकिन किसी भी स्‍तर पर सुनवाई नहीं हो रही है।

प्यार का झांसा देकर चलती बाइक पर पिलाया जहर, डेढ़ घंटे तड़पते पति को देखती रही महिला, जयपुर मर्डर केस में बड़ा खुलासा

प्यार का झांसा देकर चलती बाइक पर पिलाया जहर, डेढ़ घंटे तड़पते पति को देखती रही महिला, जयपुर मर्डर केस में बड़ा खुलासा

Jaipur Crime News

Jaipur crime husband murder: जयपुर के विश्वकर्मा इलाके में पत्नी द्वारा पति को जहर देकर मार डालने की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। शादी के महज डेढ़ साल बाद प्रेमी के साथ रहने के लिए आरोपी पत्नी ने अपने ही पिता से मंगवाए कीटनाशक से पति की जान ले ली। चलती बाइक पर प्यार का वास्ता देकर जूस में जहर पिलाने के बाद आरोपी महिला डेढ़ घंटे तक पति को तड़पते देखती रही। पुलिस ने आरोपी पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है।

 

दरअसल, विश्वकर्मा थाना क्षेत्र में एक 23 वर्षीया महिला ने अपने 9 साल पुराने प्रेमी से शादी करने के लिए अपने पति को तड़पा-तड़पाकर मार डाला। आरोपी पत्नी कविता मीणा ने अपने प्रेमी गणेश मीणा (27) के साथ मिलकर पति महेश मीणा की हत्या की साजिश रची और बड़ी ही बेदर्दी से उसे मार दिया। हालांकि सीसीटीवी फुटेज और फेसबुक से मिले अहम सुरागों के आधार पर पुलिस ने दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

बॉयफ्रेंड ने दिया मर्डर का आइडिया

पुलिस के मुताबिक कविता का अपने पड़ोसी गणेश से पिछले 9 सालों से प्रेम प्रसंग चल रहा था। परिवार वालों ने जबरन उसकी शादी महेश मीणा से करवा दी। कविता शादी से खुश नहीं थी और लगातार महेश पर झूठे आरोप लगाकर पीहर भाग जाती थी, लेकिन पारिवारिक दबाव के चलते रिश्ता खत्म नहीं हो पा रहा था। पति से पीछा न छूटने पर प्रेमी गणेश ने कविता को महेश को रास्ते से हटाने की सलाह दी। गांव में हुई एक पुरानी घटना से प्रेरणा लेकर दोनों ने महेश को जहर देकर मारने की योजना बनाई।

पिता से ही मंगवाया कीटनाशक

आरोपी महिला ने करीब 4 महीने पहले अपने पिता से बहाने बनाकर फसलों में डालने वाला कीटनाशक (जहर) मंगवाया था। घर में किसी को शक न हो, इसलिए उसने थोड़ा कीटनाशक सास को अनाज में डालने के लिए दिया और बाकी हिस्सा अपने पास छिपाकर रख लिया। 5 अगस्त को कविता ने मंदिर जाने के बहाने पति महेश को बाहर बुलाया। रास्ते में उसने जूस खरीदा और चलती बाइक पर उसमें छिपाकर लाया जहर मिला दिया। महेश ने जब जूस पीने से मना किया, तो कविता ने प्यार की कसमें देकर जबरन उसे जहर वाला जूस पिला दिया।

डेढ़ घंटे तक तड़पता रहा महेश

जहर का असर होते ही महेश को उल्टियां होने लगीं और वह तड़पने लगा। कविता करीब डेढ़ घंटे तक उसे तड़पता देखती रही। बाद में प्रेमी गणेश अपने दो दोस्तों के साथ पहुंचा और महेश को बेहोशी की हालत में बाइक पर लेकर 3 घंटे तक घूमता रहा। मौत की पुष्टि होने पर शव को सड़क किनारे छोड़कर फरार हो गए।

 

शुरुआत में पुलिस के पास हत्या की कोई स्पष्ट वजह नहीं थी, लेकिन घटना स्थल के आसपास लगे CCTV फुटेज खंगालने पर बाइक सवार संदिग्ध युवकों की पहचान हुई। जब पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (Facebook) की जांच की, तो कविता और गणेश की तस्वीरें साथ मिलीं। कड़ाई से पूछताछ करने पर कविता टूट गई और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

कभी चीन का ‘सुब्रत रॉय सहारा’, अब उम्रकैद, Evergrande के Hui Ka Yan की कहानी ने क्यों चौंकाया?

कभी चीन का 'सुब्रत रॉय सहारा', अब उम्रकैद, Evergrande के Hui Ka Yan की कहानी ने क्यों चौंकाया?

chines arabpati

चीन की एक अदालत ने गुरुवार को संकटग्रस्त रियल एस्टेट कंपनी Evergrande के संस्थापक और पूर्व चेयरमैन हुई का यान (Hui Ka Yan) को उम्रकैद की सजा सुनाई है। भारत में कभी सुब्रत रॉय के सहारा ग्रुप की तूती बोलती थी, वैसे ही चीन में रियल एस्टेट डेवलपर एवरग्रैंड ग्रुप के 'हुई का यान' का जलवा था।  शेनझेन की दो अदालतों ने हुई का यान के दो बेटों समेत 56 अन्य लोगों को भी सजा सुनाई। इन लोगों को 22 महीने से लेकर 18 साल तक की अलग-अलग अवधि की सजा दी गई।

ALSO READ: H1N1 Cases: दिल्ली-NCR में 1,700 से ज्यादा मामले, मुंबई में भी तेजी, बच्चों में फ्लू जैसे लक्षण बढ़े, जानें बचाव और कब कराएं टेस्ट

सोशल मीडिया पर उनकी बुलंदी की कहानी को सहारा ग्रुप के बिजनेस साम्राज्य और फिर भरभराकर ढहने की घटना से जोड़ा जा रहा है। दोनों ने एक साधारण परिवार में जन्म लिया और अरबों का साम्राज्य खड़ा किया।  अदालत ने उनकी निजी संपत्ति जब्त करने का भी आदेश दिया है। कभी दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल रहे हुई का यान का यह फैसला चीन के सबसे बड़े रियल एस्टेट संकट के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत माना जा रहा है।

 

शेनझेन इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट ने हुई का यान और Evergrande के खिलाफ बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी समेत कई गंभीर अपराधों में दोषी पाया। अदालत के मुताबिक, 2016 से 2021 के बीच कंपनी और उसके संस्थापक ने वित्तीय धोखाधड़ी, धन के दुरुपयोग, फंड जुटाने में धोखाधड़ी और अवैध रूप से सार्वजनिक जमा स्वीकार करने जैसे अपराध किए।

 

हुई का यान ने अप्रैल में अपने खिलाफ लगे आरोपों में दोष स्वीकार किया था। गुरुवार को अदालत में वह नेवी ब्लू शर्ट पहने दो पुलिस अधिकारियों के बीच खड़े नजर आए। 2023 में अचानक सार्वजनिक जीवन से गायब होने के बाद यह पहली बार था जब उन्हें सार्वजनिक रूप से देखा गया। कभी काले रहे उनके बाल अब सफेद हो चुके थे।

ALSO READ: भारत में चीनी के दाम बढ़ने से Pakistan को क्यों दिखा फायदा, दिल्ली के फैसले से क्यों हुआ बैचेन

राजनीतिक अधिकार भी जीवनभर के लिए छीने

 

अदालत ने हुई का यान के राजनीतिक अधिकार भी जीवनभर के लिए छीन लिए। इसके अलावा Evergrande Group और उसकी सहायक कंपनी Evergrande Real Estate Group पर संयुक्त रूप से करीब 2.35 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया गया है। अदालत ने कहा कि अपराध में शामिल रकम असाधारण रूप से बड़ी थी और इससे भारी आर्थिक नुकसान हुआ। अदालत के अनुसार, हुई का यान और कंपनी की गतिविधियों ने चीन की समाजवादी बाजार अर्थव्यवस्था की व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया।

कभी चीन की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों में थी Evergrande

 

हुई का यान ने 1996 में दक्षिणी चीन में Evergrande की स्थापना की थी। चीन में तेजी से शहरीकरण और गांवों से शहरों की ओर लोगों के पलायन के दौर में कंपनी ने तेजी से विस्तार किया। देखते ही देखते Evergrande चीन की सबसे तेजी से बढ़ने वाली रियल एस्टेट कंपनियों में शामिल हो गई कंपनी ने रियल एस्टेट के अलावा फुटबॉल टीम और इलेक्ट्रिक वाहन कारोबार समेत कई क्षेत्रों में अपना विस्तार किया। इसी दौर में हुई का यान चीन के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल हो गए और राजनीतिक सलाहकारों के एक प्रभावशाली समूह का हिस्सा भी रहे।

 

300 अरब डॉलर से ज्यादा के कर्ज ने बदली तस्वीर

Evergrande का कारोबार कर्ज के सहारे तेजी से बढ़ रहा था। लेकिन 2020 तक चीन की सरकार को चिंता होने लगी कि देश का विशाल रियल एस्टेट बाजार वित्तीय व्यवस्था के लिए जोखिम बन सकता है। इसके बाद सरकार ने डेवलपर्स के लिए कर्ज लेने की सीमा पर सख्ती शुरू कर दी। कर्ज पर निर्भर Evergrande के लिए यह बड़ा झटका था। कंपनी के पास निर्माण परियोजनाओं को जारी रखने के लिए जरूरी नकदी का प्रवाह प्रभावित हुआ। आखिरकार 2021 में Evergrande भारी कर्ज के बोझ तले ढह गई। उस समय कंपनी पर 300 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज था।

 

कंपनी के पतन ने चीन की अर्थव्यवस्था की उस कमजोरी को उजागर किया जिसमें आर्थिक विकास के लिए रियल एस्टेट क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता थी। Evergrande संकट के बाद चीन लंबे समय तक चले आवास और संपत्ति बाजार के संकट में फंस गया, जिसका असर आज भी अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता है।

कर्मचारियों से भी पैसे जुटाने का आरोप

Evergrande का नकदी संकट बढ़ने के दौरान कंपनी ने अपने कर्मचारियों से भी अल्पकालिक कर्ज के लिए पैसा लगाने का दबाव बनाया था। कंपनी के डिफॉल्ट करने के कुछ महीनों बाद उसने बताया था कि बैंकों ने करीब 2 अरब डॉलर की संपत्ति जब्त कर ली थी। बाद में हुई आंतरिक जांच में सामने आया कि 2020 के अंत में कंपनी के अधिकारियों ने कर्ज लेने की पाबंदियों से बचने के लिए कथित तौर पर ऐसी व्यवस्था बनाई थी, जिसमें Evergrande की सहायक कंपनियों को गारंटी के तौर पर इस्तेमाल करते हुए तीसरे पक्ष के जरिए कर्ज लिया गया।

 

2024 में Evergrande को लिक्विडेशन का आदेश

Evergrande के संकट का असर अदालतों तक भी पहुंचा। 2024 में हांगकांग की एक अदालत ने Evergrande को लिक्विडेशन में भेजने का आदेश दिया था।  शेनझेन की दो अदालतों ने हुई का यान के दो बेटों समेत 56 अन्य लोगों को भी सजा सुनाई। इन लोगों को 22 महीने से लेकर 18 साल तक की अलग-अलग अवधि की सजा दी गई।

 

Evergrande के पतन से चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ा असर

 

Evergrande का उभार चीन के विशाल रियल एस्टेट बूम का प्रतीक था। इस दौर में स्थानीय सरकारों को जमीन लीज पर देने से आय हुई, बैंकों ने डेवलपर्स को बड़े पैमाने पर कर्ज दिया और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय कंपनियों ने चीनी रियल एस्टेट कंपनियों की लिस्टिंग से फीस कमाई। लेकिन Evergrande के पतन ने इस पूरे मॉडल की कमजोरियों को उजागर कर दिया। इसके बाद कई रियल एस्टेट कंपनियां डिफॉल्ट हुईं और चीन का प्रॉपर्टी बाजार लंबे समय तक मंदी में रहा। चीन के लाखों परिवारों के लिए घर केवल रहने की जगह नहीं थे, बल्कि संपत्ति बनाने का सुरक्षित माध्यम भी माने जाते थे। लेकिन घरों की कीमतों में गिरावट और डेवलपर्स के संकट ने इस भरोसे को बड़ा झटका दिया।

राहुल गांधी की मांग के आगे झुकी दिल्ली पुलिस, धरने के बाद NEET पैलेट पीड़ित छात्र साहिल की FIR लिखी

राहुल गांधी की मांग के आगे झुकी दिल्ली पुलिस, धरने के बाद NEET पैलेट पीड़ित छात्र साहिल की FIR लिखी

Rahul Gandhi Delhi Police FIR

Rahul Gandhi Delhi Police FIR: NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों पर हुए पुलिस बल प्रयोग का मामला अब पूरी तरह राजनीतिक और कानूनी रूप ले चुका है। नीट (NEET) में गड़बड़ियों और कथित पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को सड़क पर उतर आए। राहुल गांधी पैलेट गन के हमले में गंभीर रूप से घायल छात्र साहिल लोचव को साथ लेकर खुद संसद मार्ग थाने पहुंचे।

 

जब दिल्ली पुलिस ने पीड़ित छात्र की शिकायत पर एफआईआर (FIR) दर्ज करने से इनकार किया, तो राहुल गांधी थाने के भीतर ही धरने पर बैठ गए। काफी देर तक चले इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे और कांग्रेस नेताओं के कड़े रुख के आगे अंततः पुलिस को झुकना पड़ा। दिल्ली पुलिस ने पीड़ित छात्र की शिकायत स्वीकार करते हुए अज्ञात के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। ALSO READ: UGC-NET रद्द होने पर राहुल गांधी का NTA पर हमला, बोले- गलती एजेंसी की, सजा छात्रों को क्यों?

क्या कहा था राहुल गांधी ने? 

इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा था कि जब तक इंसाफ नहीं मिलेगा, तब तक हम डटे रहेंगे। मामले की जानकारी मिलते ही प्रियंका गांधी, जयराम रमेश और कुमारी सैलजा समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता भी संसद मार्ग थाने पहुंच गए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस 'ऊपर से आदेश' होने का हवाला देकर पीड़ित छात्र की एफआईआर दर्ज नहीं कर रही थी।

 

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए सवाल उठाया कि इस 19 साल के बच्चे (साहिल लोचव) के शरीर में पैलेट गन के कई छर्रे लगे हैं और आंख की रोशनी जाने की नौबत है। पुलिस कह रही है कि उन्होंने पैलेट गन नहीं चलाई, तो फिर इन मासूम छात्रों पर गन किसने चलाई? जब तक एफआईआर दर्ज कर जांच अधिकारी (I/O) का नाम नहीं बताया जाता, हम यहीं बैठेंगे। पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने और मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने के आश्वासन के बाद ही धरना समाप्त हुआ। ALSO READ: संसद के बाहर अमित शाह के बयान के बाद क्यों भड़के राहुल गांधी? मीडिया पर दागे तीखे सवाल

क्या था Gen Z का प्रदर्शन का पूरा मामला?

यह पूरा विवाद 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए 'संसद मार्च' से जुड़ा है। NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रही धांधली और पेपर लीक की घटनाओं से आक्रोशित युवाओं (Gen-Z) ने संसद की तरफ मार्च का आह्वान किया था। छात्र तत्कालीन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में कड़े सुधारों की मांग कर रहे थे।

 

प्रदर्शन के दौरान छात्रों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी झड़प हुई। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। आरोप है कि इस दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन (एंटी-रॉयट गन) से मैटेलिक/प्लास्टिक छर्रे चलाए गए। इस कार्रवाई में हरियाणा के रहने वाले 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचव और इरशाद मंसूरी सहित कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। साहिल के शरीर और चेहरे पर दर्जनों छर्रे लगे, जिससे उनकी दाहिनी आंख की रोशनी जाने का खतरा बन गया है।

 

शुरुआत में दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन चलाने के दावों को खारिज किया था, लेकिन पीड़ितों के मेडिकल रिकॉर्ड और थाने के जनरल डायरी (GD) रिकॉर्ड्स सामने आने के बाद मामला और गहरा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में 5-सदस्यीय उच्च-स्तरीय जांच समिति (HPEC) का गठन किया है।

H1N1 Cases: दिल्ली-NCR में 1,700 से ज्यादा मामले, मुंबई में भी तेजी, बच्चों में फ्लू जैसे लक्षण बढ़े, जानें बचाव और कब कराएं टेस्ट

H1N1 Cases: दिल्ली-NCR में  1,700 से ज्यादा मामले, मुंबई में भी तेजी,  बच्चों में फ्लू जैसे लक्षण बढ़े, जानें बचाव और कब कराएं टेस्ट

swine flu

देश के कई हिस्सों में H1N1 (स्वाइन फ्लू) और अन्य इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। दिल्ली-NCR, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई में खासतौर पर बच्चों में फ्लू जैसे लक्षण और सांस से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़े हैं। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल पूरे देश में घबराने जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन परिवारों को सावधानी बरतनी चाहिए। खासकर अस्थमा या किसी अन्य बीमारी से जूझ रहे बच्चों को लेकर अधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में इस साल स्वाइन फ्लू के 1,700 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं और मानसून के दौरान मौसमी इन्फ्लूएंजा के मामलों में वृद्धि देखी जाती है।

 

ALSO READ: भारत में चीनी के दाम बढ़ने से Pakistan को क्यों दिखा फायदा, दिल्ली के फैसले से क्यों हुआ बैचेन

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने की समीक्षा 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को देश में एच1एन1 इन्फ्लुएंजा की मौजूदा स्थिति और इससे निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह और स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि राजधानी में स्वाइन फ्लू की स्थिति की समीक्षा करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से शुक्रवार को मुलाकात करेंगे।

 

H1N1 क्या है और इसके लक्षण क्या हैं?

 

H1N1 इन्फ्लुएंजा A वायरस का एक प्रकार है, जिसे आमतौर पर स्वाइन फ्लू कहा जाता है। यह मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है।

 

इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

 

  • बुखार या ठंड लगना
  • खांसी
  • गले में खराश
  • नाक बहना या बंद होना
  • सिरदर्द
  • थकान
  • शरीर में दर्द
  • कुछ मामलों में उल्टी या दस्त

 

ध्यान रखें कि इन लक्षणों का मिलना सिर्फ H1N1 होने का संकेत नहीं है। कई अन्य वायरल संक्रमणों में भी इसी तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए केवल बुखार या खांसी होने पर खुद से H1N1 मान लेना सही नहीं है।

 

दिल्ली में H1N1 के मामले करीब 6 गुना बढ़े

 

दिल्ली में इस साल मानसून के दौरान H1N1 मामलों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अगस्त की शुरुआत तक दिल्ली में 1,344 H1N1 मामले सामने आए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 229 मामले दर्ज हुए थे। यानी मामलों में करीब छह गुना वृद्धि हुई है। इस बढ़ोतरी के बाद डॉक्टर बच्चों और उन लोगों पर विशेष नजर रख रहे हैं, जिन्हें संक्रमण से गंभीर जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है।

 

मुंबई में भी तेजी से बढ़े मामले

 

मुंबई में भी H1N1 संक्रमण के मामलों में तेज वृद्धि देखने को मिली है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 15 अगस्त 2026 के बीच मुंबई में 309 H1N1 मामले दर्ज हुए। पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 72 थी। मानसून के दौरान वायरल और सांस से जुड़ी बीमारियों के बढ़ने के बीच H1N1 के मामलों में भी इजाफा हुआ है।

 

बेंगलुरु में बच्चों में फ्लू जैसे संक्रमण बढ़े

 

बेंगलुरु में बच्चों के बीच इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारी, वायरल बुखार और सांस संबंधी संक्रमण के मामले बढ़े हैं। डॉक्टर हर बच्चे का H1N1 टेस्ट कराने के बजाय लगातार बने रहने वाले लक्षणों या गंभीर सांस संबंधी बीमारी वाले बच्चों की जांच कर रहे हैं। बेंगलुरु के Clarence High School में फ्लू जैसी बीमारी के 500 से अधिक मामले सामने आए, जिनमें दो मामलों में H1N1 की पुष्टि हुई। वहीं, Indira Gandhi Institute of Child Health में भी वायरल बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन बच्चों की जांच की जा रही है, उनमें रोजाना करीब 2 से 3 H1N1 मामले सामने आ रहे हैं। स्कूलों और अन्य भीड़भाड़ वाली बंद जगहों में सांस से जुड़ी बीमारियों के फैलने को लेकर डॉक्टर सतर्क हैं।

 

चेन्नई में बच्चों के H1N1 मामलों में बढ़ोतरी

चेन्नई के बाल रोग विशेषज्ञों ने पिछले दो सप्ताह में बच्चों में H1N1 के मामले सामने आने की जानकारी दी है। हाल के सप्ताह में इसमें थोड़ी और वृद्धि देखी गई। डॉक्टरों ने संदिग्ध मामलों में जल्दी जांच कराने पर जोर दिया है। एक बाल रोग विशेषज्ञ के अनुसार, फ्लू का संदेह होने पर बच्चों की जांच लक्षण शुरू होने के 24 से 48 घंटे के भीतर करानी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि एंटीवायरल दवाएं बुखार शुरू होने के शुरुआती दिनों में दिए जाने पर ज्यादा प्रभावी हो सकती हैं। हालांकि, H1N1 की नियमित जांच सीमित होने के कारण कई जगह संक्रमण के वास्तविक आंकड़े स्पष्ट नहीं हैं।

केरल में सबसे ज्यादा मामले और मौतें

 

केरल में इस साल इन्फ्लुएंजा के मामलों और मौतों की संख्या विशेष रूप से ज्यादा रही है।

 

रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार:

 

मई: 526 Influenza A मामले और 6 मौतें

जून: 2,050 मामले और 26 मौतें

जुलाई: 2,899 मामले और 31 मौतें

 

इन आंकड़ों से पता चलता है कि केरल में इन्फ्लुएंजा संक्रमण का असर अन्य राज्यों की तुलना में अधिक रहा है।

 

पूरे भारत में H1N1 के मामले एक जैसे नहीं बढ़े

 

देश के हर हिस्से में H1N1 संक्रमण बढ़ने की स्थिति एक जैसी नहीं है। तेलंगाना में स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, इस साल H1N1 के मामले पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कम हैं। Niloufer Hospital में वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है, लेकिन डॉक्टरों ने H1N1 या इन्फ्लुएंजा के मामलों में कोई बड़ी वृद्धि नहीं देखी है।

 

बच्चों को लेकर किन बातों का रखें ध्यान?

अगर बच्चे को बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या शरीर में दर्द जैसे लक्षण हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन लगातार बने रहने वाले या गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज भी न करें। विशेष रूप से अस्थमा या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या वाले बच्चों में सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना बेहतर है। H1N1 की आशंका होने पर जांच और इलाज का फैसला चिकित्सक की सलाह के अनुसार करें।