
पाकिस्तान की चीनी इंडस्ट्री अब अपने अतिरिक्त चीनी स्टॉक के लिए भारत को संभावित बाजार के तौर पर देख रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब भारत सरकार ने घरेलू कीमतों में तेजी के बीच 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी है। हालांकि, भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनावपूर्ण संबंधों के चलते दोनों देशों के बीच सीधा व्यापार अभी ठप है।
पाकिस्तान के अखबार द न्यूज इंटरनेशनल ने रिपोर्ट किया कि पाकिस्तान शुगर मिल्स एसोसिएशन (PSMA) के एक वरिष्ठ सदस्य ने सरकार से भारत को अतिरिक्त चीनी निर्यात करने की संभावनाएं तलाशने की अपील की है।
भारत के आयात फैसले से पाकिस्तान को दिखी उम्मीद
भारत सरकार ने गुरुवार (20 अगस्त) को टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) के मुताबिक, इस फैसले का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण करना है।
भारत का यह फैसला चीनी बाजार के लिए अहम बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि देश का चीनी बाजार लंबे समय से आयात को लेकर काफी हद तक संरक्षित रहा है। इसी बीच पाकिस्तान की चीनी मिलों को उम्मीद है कि भारत की बढ़ी हुई आयात मांग उसके अतिरिक्त स्टॉक को खपाने का रास्ता खोल सकती है।
पाकिस्तान के पास 12 लाख टन अतिरिक्त चीनी
PSMA के वरिष्ठ सदस्य और Hunza Sugar Mills Ltd के प्रतिनिधि चौधरी मुहम्मद वहीद ने पाकिस्तान सरकार से भारत को अतिरिक्त चीनी निर्यात की अनुमति देने की मांग की है। वहीद के मुताबिक, पाकिस्तान की चीनी इंडस्ट्री के पास 12 लाख टन से ज्यादा अतिरिक्त चीनी का स्टॉक मौजूद है। इससे मिलों पर दबाव बढ़ रहा है, खासकर अगले गन्ना पेराई सीजन से पहले।
इंडस्ट्री को आशंका है कि अगर अगली फसल भी बंपर रही तो चीनी का भंडार और बढ़ सकता है। इससे मिलों के लिए किसानों से अगली गन्ने की फसल खरीदना मुश्किल हो सकता है।
भारत को चीनी निर्यात से पाकिस्तान को क्या फायदा?
वहीद ने कहा कि पाकिस्तान की भारत से भौगोलिक नजदीकी उसे दूर के निर्यात बाजारों की तुलना में फ्रेट कॉस्ट का फायदा दे सकती है। भारत को चीनी निर्यात करने से पाकिस्तान को विदेशी मुद्रा हासिल करने, चीनी मिलों की नकदी स्थिति सुधारने और भंडारण लागत घटाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, इससे चीनी मिलों को गन्ना किसानों को समय पर भुगतान करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
पाकिस्तानी चीनी उद्योग का यह भी मानना है कि दोनों देशों के बीच चीनी व्यापार शुरू होने से आर्थिक संबंधों के लिए कम से कम एक नया रास्ता खुल सकता है।
भारत-पाकिस्तान व्यापार में बड़ी अड़चन
हालांकि, फिलहाल पाकिस्तान भारत को चीनी भेजने की कोई मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार व्यवस्था तैयार नहीं कर रहा है। पाकिस्तान की चीनी इंडस्ट्री सिर्फ सरकार से ऐसे निर्यात की अनुमति देने की मांग कर रही है। भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और सुरक्षा तनाव के कारण सीधा द्विपक्षीय व्यापार पहले से ही प्रभावित है। अटारी-वाघा बॉर्डर और हवाई मार्ग बंद हैं। ऐसे में पाकिस्तान से भारत को चीनी की वास्तविक खेप भेजने के लिए दोनों सरकारों की मंजूरी और व्यापार के लिए जरूरी व्यवस्था तैयार करना अनिवार्य होगा।